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62 करोड़ नए इन्टरनेट यूजर, 42 लाख KM का ऑप्टिकल फाइबर नेटवर्क और 10000 करोड़ ट्रांजैक्शन… ये हैं डिजिटल इंडिया की 10 साल की उपलब्धियाँ: यह कोई सरकारी कार्यक्रम नहीं बल्कि जनआंदोलन

दस साल पहले, हमने बहुत दृढ़ विश्वास के साथ अज्ञात क्षेत्र में एक साहसिक यात्रा शुरू की।

जबकि दशकों तक भारतीयों की टेक्नोलॉजी का उपयोग करने की क्षमता पर संदेह किया जाता रहा, लेकिन हमने इस अप्रोच को बदल दिया और भारतीयों की टेक्नोलॉजी का उपयोग करने की क्षमता पर भरोसा किया।

जबकि दशकों तक यह सोचा जाता रहा कि टेक्नोलॉजी के उपयोग से संपन्न और वंचित के बीच की खाई और गहरी हो जाएगी। हमने इस मानसिकता को बदल दिया और संपन्न एवं वंचित के बीच की खाई को खत्म करने के लिए टेक्नोलॉजी का उपयोग किया।

जब इरादा सही हो, तो इनोवेशन, कम सशक्त लोगों को सशक्त बनाता है। जब अप्रोच, समावेशी होता है, तो टेक्नोलॉजी; हाशिए पर रहने वालों के जीवन में बदलाव लाती है।

इस विश्वास ने डिजिटल इंडिया की नींव रखी: पहुँच को लोकतांत्रिक बनाने, समावेशी डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर का निर्माण करने और सभी के लिए अवसर प्रदान करने का मिशन।

2014 में इंटरनेट की पहुँच सीमित थी, डिजिटल साक्षरता कम थी और सरकारी सेवाओं तक ऑनलाइन पहुँच दुर्लभ थी। कई लोगों को संदेह था कि क्या भारत जैसा विशाल और विविधतापूर्ण देश वास्तव में डिजिटल हो सकता है।

आज, उस सवाल का जवाब न केवल डेटा और डैशबोर्ड में है, बल्कि 140 करोड़ भारतीयों के जीवन में भी है। हम कैसे गवर्न करते हैं, कैसे सीखते हैं, लेन-देन करते हैं और कैसे निर्माण करते हैं, डिजिटल इंडिया हर जगह है।

डिजिटल खाई को पाटना

2014 में भारत में करीब 25 करोड़ इंटरनेट कनेक्शन थे। आज यह संख्या बढ़कर 97 करोड़ से ज्यादा हो गई है। 42 लाख किलोमीटर से ज्यादा ऑप्टिकल फाइबर केबल, जो पृथ्वी और चंद्रमा के बीच की दूरी से 11 गुना ज्यादा है, अब सबसे दूरदराज के गाँवों को भी जोड़ती है।

भारत में 5G की शुरुआत दुनिया में सबसे तेज गति से हुई है, जहाँ सिर्फ़ दो साल में 4.81 लाख बेस स्टेशन स्थापित किए गए हैं। हाई-स्पीड इंटरनेट अब शहरी केंद्रों और गलवान, सियाचिन और लद्दाख सहित अग्रिम सैन्य चौकियों तक पहुँच गया है।

इंडिया स्टैक, जो हमारी डिजिटल रीढ़ है, ने UPI जैसे प्लेटफॉर्म को सक्षम किया है, जो अब सालाना 100+ बिलियन लेनदेन को संभालता है। सभी वास्तविक समय के डिजिटल लेनदेन में से लगभग आधे भारत में होते हैं।

Direct Benefit Transfer (DBT) के माध्यम से ₹44 लाख करोड़ से अधिक सीधे नागरिकों को ट्रांसफर किए गए हैं, जिससे बिचौलियों को हटाया गया है और ₹3.48 लाख करोड़ की लीकेज की बचत हुई है।

SVAMITVA जैसी योजनाओं ने 2.4 करोड़ से अधिक संपत्ति कार्ड जारी किए हैं और 6.47 लाख गाँवों की मैपिंग की है, जिससे भूमि से संबंधित अनिश्चितता के वर्षों का अंत हुआ है।

सभी के लिए अवसर का लोकतंत्रीकरण

भारत की डिजिटल अर्थव्यवस्था MSMEs और छोटे उद्यमियों को पहले से कहीं ज्यादा सशक्त बना रही है।

ONDC (डिजिटल कॉमर्स के लिए ओपन नेटवर्क) एक क्रांतिकारी प्लेटफॉर्म है जो खरीदारों और विक्रेताओं के विशाल बाजार के साथ सहज कनेक्शन प्रदान करके अवसरों की एक नई खिड़की खोलता है।

GeM (गवर्नमेंट ई-मार्केटप्लेस) आम आदमी को सरकार के सभी अंगों को सामान और सेवाएँ बेचने में सक्षम बनाता है। यह न केवल आम आदमी को एक विशाल बाजार के साथ सशक्त बनाता है बल्कि सरकार के लिए पैसे भी बचाता है।

कल्पना कीजिए: आप मुद्रा लोन के लिए ऑनलाइन आवेदन करते हैं। अकाउंट एग्रीगेटर फ्रेमवर्क के जरिए आपकी क्रेडिट योग्यता का मूल्यांकन किया जाता है। आपको अपना लोन मिल जाता है और आप अपना उद्यम शुरू कर देते हैं। आप GeM पर रजिस्टर होते हैं, स्कूलों और अस्पतालों को सप्लाई करते हैं और फिर ONDC के जरिए आगे बढ़ते हैं।

ONDC ने हाल ही में 200 मिलियन ट्रांजेक्शन को पार कर लिया है, जिसमें से आखिरी 100 मिलियन ट्रांजेक्शन सिर्फ छह महीनों में हुए हैं। बनारसी बुनकरों से लेकर नागालैंड के बाँस कारीगरों तक, विक्रेता अब बिना किसी बिचौलिए या डिजिटल एकाधिकार के, पूरे देश में ग्राहकों तक पहुँच रहे हैं।

GeM ने 50 दिनों में ₹1 लाख करोड़ GMV को भी पार कर लिया है, जिसमें 1.8 लाख से अधिक महिलाओं के नेतृत्व वाले MSME सहित 22 लाख विक्रेताओं ने ₹46,000 करोड़ के ऑर्डर पूरे किए हैं।

डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर: भारत की ग्लोबल ऑफरिंग

आधार, कोविन, डिजीलॉकर और फास्टैग से लेकर पीएम-वाणी और वन नेशन वन सब्सक्रिप्शन तक भारत के डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (DPI) का अब वैश्विक स्तर पर अध्ययन और अपनाया जा रहा है।

कोविन ने दुनिया के सबसे बड़े टीकाकरण अभियान को सक्षम बनाया, 220 करोड़ QR-verifiable प्रमाणपत्र जारी किए। 54 करोड़ यूजर्स के साथ डिजीलॉकर 775 करोड़ से अधिक दस्तावेजों को सुरक्षित और निर्बाध रूप से होस्ट करता है।

हमारे G20 प्रेसीडेंसी के माध्यम से, भारत ने ग्लोबल DPI रिपॉजिटरी और $25 मिलियन का सोशल इम्पैक्ट फंड लॉन्च किया, जिससे अफ्रीका और दक्षिण एशिया के देशों को समावेशी डिजिटल इकोसिस्टम अपनाने में मदद मिली।

स्टार्टअप पावर और आत्मनिर्भर भारत का संगम

भारत अब दुनिया के शीर्ष 3 स्टार्टअप इकोसिस्टम में शुमार है, जहाँ 1.8 लाख से ज्यादा स्टार्टअप हैं। लेकिन यह सिर्फ स्टार्टअप मूवमेंट से कहीं ज्यादा है, यह एक तकनीकी पुनर्जागरण है।

जब बात युवाओं में एआई स्किल पैठ और एआई talent concentration की आती है तो भारत बहुत अच्छा प्रदर्शन कर रहा है।

1.2 बिलियन डॉलर के India AI Mission के माध्यम से भारत ने 34,000 जीपीयू तक वैश्विक स्तर पर बेजोड़ कीमतों पर 1 डॉलर/जीपीयू प्रति घंटे से भी कम कीमत पर पहुँच को सक्षम किया है, जिससे भारत न केवल सबसे किफायती इंटरनेट अर्थव्यवस्था बन गया है, बल्कि सबसे किफायती कंप्यूट डेस्टिनेशन भी बन गया है।

भारत ने humanity-first AI का समर्थन किया है। एआई पर New Delhi Declaration जिम्मेदारी के साथ इनोवेशन को बढ़ावा देती है। हम पूरे देश में AI Centres of Excellence स्थापित कर रहे हैं।

आगे की राह

अगला दशक और भी अधिक परिवर्तनकारी होगा। हम डिजिटल गवर्नेंस से ग्लोबल डिजिटल नेतृत्व की ओर, India-first से India-for-the-world की ओर बढ़ रहे हैं।

डिजिटल इंडिया, केवल एक सरकारी कार्यक्रम नहीं रह गया है, यह लोगों का आंदोलन बन गया है। यह एक आत्मनिर्भर भारत के निर्माण और भारत को दुनिया के लिए एक विश्वसनीय इनोवेशन भागीदार बनाने के लिए अहम है।

सभी इनोवेटर्स, उद्यमियों और सपने देखने वालों के लिए: दुनिया, अगली डिजिटल सफलता के लिए भारत की ओर देख रही है।

आइए, हम वह बनाएँ, जो सशक्त करे।

आइए, हम वह हल करें, जो वास्तव में मायने रखता है।

आइए, हम ऐसी तकनीक से नेतृत्व करें जो जोड़ती है, सबको साथ लाती है और सबका उत्थान करती है।

(यह लेख प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने निजी ब्लॉग पर लिखा है। इसको पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें)

नई नहीं है दिल्ली में पुरानी पेट्रोल-डीजल गाड़ियों पर रोक, 2014 में NGT ने दिया आदेश: सुप्रीम कोर्ट तक लगा चुका मुहर, जानिए अब क्यों चल रही स्पेशल ड्राइव; इन गाड़ियों का क्या होगा

दिल्ली में 10 साल पुरानी डीजल और 15 साल पुरानी पेट्रोल गाड़ियों को ईंधन देना बंद कर दिया गया है। दिल्ली के 400+ पेट्रोल पम्प पर इन गाड़ियों की पहचान के लिए विशेष कैमरे तैनात किए गए हैं। यहाँ टीमें भी लगाई गई हैं जो इन गाड़ियों को पहचान कर सीज भी कर रहीं हैं। यह पूरी कवायद दिल्ली में वायु प्रदूषण को कम करने की पहल के चलते है। इस अभियान के तहत कई लाख गाड़ियाँ प्रभावित होने वाली हैं।

दिल्ली-NCR में कितने साल पुरानी गाड़ियाँ नहीं चलेंगी?

दिल्ली-NCR में 10 साल पुरानी डीजल और 15 साल पुरानी पेट्रोल गाड़ियाँ नहीं चलेंगी। इनको सड़क पर चलने पर सीज किया जाएगा और जुर्माना भी लगाया जाएगा। इसके साथ ही इन्हें स्क्रैप करने के लिए भी भेज दिया जाएगा। यह नियम छोटी गाड़ियों, ट्रकों, बसों और यहाँ तक कि बाइक पर भी लागू होगा।

क्यों दिल्ली-NCR में लगा पुरानी गाड़ियों पर प्रतिबन्ध?

दिल्ली-NCR में पुरानी गाड़ियों पर प्रतिबन्ध लगाने का यह निर्णय घटती वायु की गुणवत्ता में सुधार करने के लिए लिया गया था। दिल्ली की हवा की गुणवत्ता बीते कुछ वर्षों में काफी खराब स्तर पर पहुँच चुकी है। 2014-15 तक इस गुणवता में ठण्ड के दिनों में भारी गिरावट आई थी।

हवा की गुणवत्ता में यह कमी प्रदूषण के चलते थी। रिपोर्ट्स बताती हैं कि गाड़ियों से निकलने वाला धुआँ इस प्रदूषण में 50% से अधिक का हिस्सा रखता है। सबसे ज्यादा प्रदूषण वह वाहन करते हैं जो पुराने हो चुके होते हैं और उनका रखरखाव ढंग से नहीं होता।

इसके अलावा डीजल गाड़ियाँ अधिक प्रदूषण करती हैं क्योंकि उनमें पेट्रोल से अलग तकनीक उपयोग होती है। ऐसे में NGT इन गाड़ियों पर प्रतिबंध लगाने का निर्णय लिया था। इसके अलावा पहले ही रजिस्टर की जा चुकी गाड़ियों के रजिस्ट्रेशन कैंसिल करने का निर्णय भी लिया गया था।

NGT ने कब लगाया पुरानी गाड़ियों पर बैन?

दिल्ली-NCR में 10 साल पुरानी डीजल और 15 साल पुरानी पेट्रोल गाड़ियों पर चल रहा यह अभियान कोई नया फैसला नहीं है। असल में यह 2014 और 2015 में राष्ट्रीय हरित प्राधिकारण (NGT) द्वारा दिए गए एक फैसले के लागू किए जाने का असर ही है।

असल में नवम्बर, 2014 में NGT ने एक फैसले में कहा था कि दिल्ली-NCR के भीतर 10 वर्ष से पुरानी डीजल गाड़ियाँ और 15 वर्ष से पुरानी पेट्रोल गाड़ियाँ नहीं चलेंगी। NGT ने यह भी आगे आदेश दिया था कि इन गाड़ियों को दिल्ली और NCR के आसपास जिलों में पंजीकृत नहीं किया जाएगा।

सुप्रीम कोर्ट ने पुरानी गाड़ियों को लेकर क्या क्या था?

NGT के इस आदेश को सुप्रीम कोर्ट में भी चुनौती दी गई थी। 2018 में सुप्रीम कोर्ट ने भी NGT के इस फैसले पर यह मुहर लगा दी थी कि दिल्ली-NCR के भीतर 10 वर्ष पुरानी डीजल और 15 वर्ष पुरानी पेट्रोल गाड़ियों को चलने की अनुमति नहीं दी जाएगी। तब से दिल्ली में लगातार इन पुरानी गाड़ियों पर एक्शन चल रहा है।

NGT के इस आदेश के बाद वर्ष 2022 में दिल्ली सरकार ने निर्णय लिया था कि वह अब 10 साल पुरानी सभी डीजल गाड़ियों और 15 साल को डी रजिस्टर करने का निर्णय लिया था। दिल्ली सरकार ने कहा था कि अगर यह गाड़ियाँ सड़कों पर पाई जाएँगी तो इन्हें जब्त कर लिया जाएगा।

दिल्ली-NCR में अब पुरानी गाड़ियों पर क्या एक्शन हो रहा?

दिल्ली में अब 400 से अधिक पेट्रोल पम्पों पर ऐसी गाड़ियों को ईंधन नहीं दिया जाएगा। यह कार्रवाई 459 पेट्रोल पम्प पर की जा रही है। इनमें से 350 पर ट्रैफिक पुलिसकर्मी की तैनाती की गई है। इसके अलावा 100 पेट्रोल पम्प पर पुलिस कर्मी तैनात हैं। इसके अलावा 59 पर दिल्ली परिवहन विभाग की टीमें तैनात की गई हैं।

इन पेट्रोल पम्प पर पुरानी गाड़ियों की पहचान के लिए विशेष कैमरे लगाए गए हैं। यह कैमरे गाड़ी का नम्बर देख कर उसका वाहन पोर्टल के डाटा से मिलान करेगा। इस डाटा के अनुसार, यदि कोई 15 वर्ष पुरानी पेट्रोल या 10 वर्ष पुरानी डीजल गाड़ी होगी तो यह पेट्रोल पम्प के कर्मचारी को अलर्ट कर देगा।

ऐसी गाड़ियों को इसके बाद ईंधन नहीं दिया जाएगा। इसके इन पर ₹10 हजार तक का जुर्माना और जब्ती की कार्रवाई भी हो सकती है। दिल्ली के पट्रोल पम्प पर यह एक्शन चालू भी हो गया है। कई पेट्रोल पम्प पर गाड़ियाँ और बाइक भी सीज की गई हैं।

पुरानी गाड़ियों का अब क्या होगा?

सवाल उठता है कि दिल्ली-NCR में रहने वाले जिन लोगों के पास पुरानी गाड़ियाँ हैं वह अब क्या करेंगे और उनकी गाड़ियों का क्या होगा। दरअसल, इन गाड़ियों के मालिकों के लिए दो विकल्प मौजूद हैं। या तो वह अपनी गाड़ी स्क्रैप कर दें यानी कबाड़ी को बेच दें या फिर उन्हें ऐसे राज्यों में बेचें जहाँ पर इन्हें चलने की अनुमति अभी दी गई है।

स्क्रैप में पुरानी गाड़ियों को लेकर क्या नीति?

दिल्ली सरकार ने 2024 में पुरानी गाड़ियों को स्क्रैप करने को लेकर एक नीति भी बनाई थी। इसके तहत पुरानी गाड़ियों को स्क्रैप करने पर उनके मालिकों को नई गाड़ी के पंजीकरण पर छूट का ऐलान किया गया था। इसके तहत उन्हें प्रमाण पत्र दिखाने पर 10%-20% तक की छूट देने का प्रावधान है।

दूसरे राज्यों में बेचने को लेकर क्या नियम?

दिल्ली-NCR में अब जिन गाड़ियों को चलने देने की अनुमति नहीं है, उन्हें दूसरे राज्यों में बेचा सकता है। हालाँकि, इस मामले में भी उस राज्य के नियमों का पालन करना होगा। दिल्ली- NCR की सड़कों से हटाई जाने वाली गाड़ियाँ दूसरे राज्यों के उन जिलों में बेचीं जा सकती है जहाँ इन्हें रजिस्टर करने की अनुमति है। उत्तर प्रदेश के NCR एवं कुछ जिलों को छोड़ कर यह किया जा सकता है। इसके अलावा बिहार, राजस्थान, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र जैसे राज्यों में इनकी बिक्री हो सकती है।

दिल्ली CM रेखा गुप्ता ने पुरानी गाड़ियों पर एक्शन को लेकर क्या कहा?

दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने इस मामले में बयान दिया है। उन्होंने कहा है कि दिल्ली में कोर्ट और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड लगातार इस बात के लिए कह रहे हैं कि कि पुरानी गाड़ियों को सड़क से हटाया जाए।

उन्होंने कहा कि सरकार इस फैसले को प्रभावी ढंग से लागू करने पर प्रयास कर रही है। उन्होंने यह भी कहा है कि पेट्रोल पम्प पर कैमरा लगाने की योजना को लेकर भी काम चल रहा है।

काले हिजाब में खुद को नहीं छिपाएँगे, अपनी संस्कृति को देंगे बढ़ावा: 70% मुस्लिम आबादी वाले देश में चेहरा ढकने पर रोक, जानिए कौन-कौन से इस्लामी मुल्क लगा चुके हैं बैन

मुस्लिम बहुल कजाखस्तान में चेहरा ढकने पर सरकार ने रोक लगा दी है। इस्लामी मुल्कों में औरतें अक्सर हिजाब/बुर्का से चेहरा ढकने का चलन रहा है। वैसे इस तरह की पाबंदी लगाने वाला कजाखस्तान पहला मुल्क नहीं है।

कजाखस्तान की आबादी करीब 2 करोड़ है, इनमें से 70 प्रतिशत लोग इस्लाम को मानने वाले हैं। चेहरा ढकने पर पाबंदी से जुड़े कानून पर राष्ट्रपति कासिम जोमार्ट टोकायेव ने 20 जून 2025 को हस्ताक्षर किए।

कानून के अनुसार, सार्वजनिक स्थान पर चेहरा ढकने पर पांबदी लगाई गई है। अब ऐसी किसी भी तरह के कपड़े नहीं पहने जाएँगे, जिससे चेहरे की पहचान नहीं की जा सके। हालाँकि, इसमें रियायत भी दी गई है। जहाँ मेडिकल कारणों और खराब मौसम में चेहरा ढकने पर रोक नहीं है। वहीं स्पोर्ट्स और सांस्कृतिक कार्यक्रम में पहने जाने वाले कपड़ों में चेहरा ढका जा सकता है।

कजाखस्तान ने चेहरा ढकने पर क्यों लगाई रोक ?

कजाखस्तान में अधिकतर मुस्लिम आबादी है, जो हिजाब पहनती है। खासकर महिलाएँ यहा चेहरा ढककर रहती हैं। लेकिन बावजूद इसके कजाखस्तान ने हिजाब और चेहरे ढकने वाले हर परिधान पर प्रतिबंध लगा दिया है। ऐसा इसीलिए क्योंकि कजाखस्तान अब अपनी राष्ट्रीय पहचान बनाने में लगा है। देश अपनी संस्कृति को बढ़ावा देना चाहता है।

राष्ट्रपति टोकायेव ने भी कहा कि चेहरा ढकने पर प्रतिबंध लगाने से कजाखस्तान की असली सांस्कृतिक पहचान सामने आएगी। उन्होंने कहा, “चेहरा छुपाने वाले काले हिजाब पहनने के बजाय, देश के अपने परिधानों को महत्व दिया जाए। इससे देश अपनी खुद की संस्कृति को बढ़ावा देगा।”

स्कूल-कॉलेज में ‘हिजाब’ पर पहले ही बैन लगा चुका है कजाखस्तान

बता दें कि इससे पहले भी कजाखस्तान में हिजाब पर रोक लगाई जा चुकी है। लेकिन वह केवल स्कूल-कॉलेज में पढ़ रही छात्राओं के लिए प्रतिबंध लगाया गया था। साल 2023 में टोकायेव सरकार ने स्कूल-कॉलेज में हिजाब पहनने पर पाबंदी लगाई थी। इस पाबंदी का खूब विरोध किया गया था। यहाँ तक की इसके बाद 150 छात्राओं ने स्कूल आना बंद कर दिया था।

कजाखस्तान की 70 प्रतिशत आबादी मुस्लिम

कजाखस्तान में चेहरे ढकने पर प्रतिबंध खासकर मुस्लिम समुदाय को प्रभावित करेगा। मुस्लिम महिलाएँ हिजाब पहनती हैं, जिससे चेहरा ढका जाता है। ऐसे में प्रतिबंध का असर मुस्लिम आबादी पर अधिक पढ़ेगा। वैसे भी कजाखस्तान में कुल आबादी 2.03 करोड़ में से 70 प्रतिशत आबादी मुस्लिमों की है। बाकी दूसरे नंबर पर लोग ईसाई धर्म को मानते हैं।

कभी सोवियत संघ का हिस्सा था कजाखस्तान

कजाखस्तान एक समय पर सोवियत समाजवादी गणराज्यों का संघ (USSR) का हिस्सा रह चुका है। 1991 में कजाखस्तान इस संघ से अलग हुआ। संघ में रूस, यूक्रेन, बेलारूस, उज्बेकिस्तान समेत 16 देश शामिल थे। इन देशों में भी कुछ देशों ने हिजाब पर बैन लगाया है। ये सभी देश अपनी राष्ट्रीय परंपरा को बढ़ावा देने में लगे हुए हैं।

इन मुस्लिम देशों में भी हिजाब पर है प्रतिबंध

बता दें कि कजाखस्तान से पहले भी कई मुस्लिम देशों में हिजाब पर प्रतिबंध लगाया गया है। कई देशों में महिलाओं को आजादी से जीने के अधिकार के तौर पर, तो कहीं राष्ट्रीय पहचान का हवाला देते हुए हिजाब पर बैन लगाया है। इनमें अधिकतर सोवियत संघ से जुड़े देश शामिल हैं, जो अपनी संस्कृति को अपनाने में लगे हैं।

ताजिकिस्तान में 95 प्रतिशत से अधिक मुस्लिम आबादी है। इसके बावजूद ताजिकिस्तान में साल 2024 में हिजाब को प्रतिबंधित करने के लिए कानून पास किया गया। इस कानून के तहत हिजाब पर बिक्री, उसे पहनना या उसे बढ़ावा देना भी अपराध होगा। कानून में हिजाब को ‘विदेशी संस्कृति’ भी बताया गया है। देश में हिजाब पहनने या बेचने पर 750 डॉलर (₹62,000) से लेकर 3724 डॉलर (₹3.10 लाख) तक का जुर्माना लगाया गया है।

वहीं, कजाखस्तान के ही पड़ोसी मुल्क किर्गिस्तान में भी जनवरी 2025 में हिजाब या बुर्का पहनने पर पूरी तरह बैन लगा दिया है। देश ने निकाब को ‘समाज में एलियन’ का दर्जा दिया है। किर्गिस्तान में मुस्लिमों का कहना है कि इस नकाब से दुश्मनों को पहचान छिपाने में आसानी होती है।

इससे पहले सितंबर 2023 में इजिप्ट में स्कूल-कॉलेज में छात्राओं के निकाब पहनने पर रोक लगा दी थी। उज्बेकिस्तान में भी साल 2021 में स्कूल-कॉलेज में पढ़ने वाली छात्राओं को हिजाब पहनने से प्रतिबंधित कर दिया था।

मुस्लिम बहुल देशों के अलावा स्विट्जरलैंड, बेल्जियम, डेनमार्क, ऑस्ट्रिया, बुल्गेरिया, इटली, फ्रांस, रूस जैसे देशों में भी हिजाब पहनने और चेहरा ढकने पर पाबंदी है।

गिरोह का दावा- हिंदूवादियों ने नजीब अहमद को गायब किया, कोर्ट ने कहा- हर एंगल से हुई जाँच पर ABVP के लड़कों की कोई भूमिका नहीं मिली: जानिए क्या है JNU से छात्र के गायब होने का मामला

दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने सोमवार (30 जून 2025) को JNU के स्टूडेंट रहे नजीब अहमद की गुमशुदगी के मामले में सीबीआई की क्लोजर रिपोर्ट को मान लिया है। कोर्ट ने साफ-साफ कहा है कि मामले की पूरी जाँच हुई, कोई भी ऐसा सबूत नहीं मिला जिससे यह साबित हो कि नजीब के साथ किसी ने मारपीट की, उसे अगवा किया या उसे जानबूझकर गायब किया गया।

कोर्ट ने साफ कहा कि सीबीआई ने हर पहलू से जाँच की, लेकिन नजीब का कोई सुराग नहीं मिला। फिर भी इस्लामिक कट्टरपंथी, वामपंथी छात्र संगठन और उनका राजनीतिक इकोसिस्टम कोर्ट के फैसले पर सवाल उठा रहा है। सोशल मीडिया पर हंगामा मचा है और कोर्ट को गलत ठहराने की कोशिश की जा रही है।

कोर्ट ने यह स्वीकार किया कि नजीब अहमद 15 अक्टूबर 2016 से गायब है और आज तक उसके बारे में कोई जानकारी सामने नहीं आई है। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि CBI ने 173(2) CrPC के तहत जो क्लोज़र रिपोर्ट दाखिल की है, उसमें यह बताया गया है कि सभी संभावित कोणों से गहन जाँच की गई, लेकिन नजीब की लोकेशन या उससे जुड़ी कोई भी निर्णायक जानकारी सामने नहीं आ सकी।

क्या हुआ था 2016 में?

नजीब अहमद जेएनयू का छात्र था और एमएससी बायोटेक्नोलॉजी का पहला साल पढ़ रहा था। 15 अक्टूबर 2016 को वह अपने माही-मांडवी हॉस्टल के रूम नंबर 106 से अचानक गायब हो गया।

घटनाक्रम के मुताबिक, नजीब अहमद 14 अक्टूबर 2016 की रात JNU के माही-मांडवी हॉस्टल के रूम नंबर 106 में थे, जब ABVP से जुड़े छात्रों ने -जो छात्र संघ चुनाव के लिए प्रचार कर रहे थे, उसके कमरे का दरवाजा खटखटाया। इनमें विक्रांत कुमार, सुनील प्रताप सिंह और अंकित कुमार रॉय शामिल थे।

जब नजीब ने दरवाजा खोला तो उन्होंने नजीब से मतदान की अपील की। इसी दौरान कथित रूप से नजीब ने विक्रांत को थप्पड़ मार दिया और उसकी कलाई में बंधे कलावे (हिंदू धार्मिक धागे) पर आपत्ति जताई। इसके बाद विक्रांत और नजीब के बीच झगड़ा हुआ और ABVP कार्यकर्ताओं ने नारेबाजी शुरू कर दी।

सुरक्षा गार्डों की मौजूदगी में नजीब को वॉर्डन ऑफिस ले जाया गया, जहाँ उसने मारपीट की बात स्वीकार की और माफी भी माँगी। उसे हॉस्टल से निकाले जाने का फैसला लिया गया, जिसे अगले दिन वापस ले लिया गया। हालाँकि अगली सुबह 15 अक्टूबर 2016 को नजीब लापता हो गया। आखिरी बार हॉस्टल वॉर्डन अरुण श्रीवास्तव (LW-4) ने उसे सुबह 11:30 बजे देखा, जब वह एक ऑटो में बैठता दिखा। CBI की रिपोर्ट के अनुसार नजीब बिना किसी समान के गया और यह ‘स्वेच्छा से गायब होने’ का मामला हो सकता है। उसके मोबाइल और लैपटॉप कमरे में ही मिले।

वामपंथी संगठनों ने बिना जाँच के आरोप लगा दिया कि एबीवीपी ने नजीब को गायब करवाया। जेएनयू, जामिया, एएमयू और देशभर के कैंपस में नारे लगे कि “हिंदूवादी संगठनों ने मुस्लिम छात्र को गायब किया।”

उस समय मीडिया खासकर अंग्रेजी चैनल्स ने इसे ‘हिंदुत्व की हिंसा का मामला बना दिया। लेकिन हकीकत यह थी कि झगड़े की शुरुआत नजीब ने की थी। नजीब ने तीन छात्रों पर हमला किया था, जिनमें दो दलित थे, फिर भी उसे यानी नजीब को ‘मासूम’ दिखाया गया।

ये वही गैंग है, जो 2016 में अचानक नजीब की गुमशुदगी के बाद सड़कों पर उतर आया था। जेएनयू से लेकर जामिया, एएमयू और देशभर के यूनिवर्सिटी कैंपस में नारे लगे कि ‘हिंदूवादी संगठनों ने एक मुस्लिम छात्र को गायब कर दिया’। जबकि अब कोर्ट ने स्पष्ट कर दिया कि यह पूरी तरह झूठा और मनगढ़ंत प्रोपेगेंडा था। सीबीआई की जाँच में न सिर्फ सबूतों की गहराई से जाँच हुई, बल्कि जिन 9 छात्रों पर आरोप लगाए गए थे, उनके खिलाफ एक भी ऐसा सबूत नहीं मिला जिससे कोई कानूनी कार्रवाई की जा सके।

सीबीआई की जाँच और कोर्ट का रुख

दिल्ली पुलिस ने पहले जाँच की, लेकिन कुछ पता नहीं चला। बाद में दिल्ली हाई कोर्ट के आदेश से यह केस सीबीआई को सौंपा गया। सीबीआई ने 2018 में जाँच बंद करने की बात कही क्योंकि नजीब का कोई ठोस सुराग नहीं मिला। दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट के अतिरिक्त मुख्य मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट ज्योति महेश्वरी ने 30 जून 2025 को नजीब अहमद गुमशुदगी मामले में सीबीआई की क्लोजर रिपोर्ट और फातिमा नफीस की प्रोटेस्ट पिटीशन पर विस्तार से सुनवाई के बाद सीबीआई की क्लोजर रिपोर्ट को मंजूरी दे दी।

कोर्ट ने विस्तार से कहा –

  • सीबीआई ने 560 गवाहों से पूछताछ की।
  • मोबाइल डेटा, सीसीटीवी फुटेज, बैंक रिकॉर्ड, कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) और इंटरपोल की मदद से जाँच हुई।
  • 9 छात्रों (जिन पर आरोप था) की गहन जाँच हुई, लेकिन कोई सबूत नहीं मिला कि उन्होंने नजीब को नुकसान पहुँचाया।
  • नजीब खुद हॉस्टल से गया था, कोई मारपीट, अगवा होने या जानलेवा हमले का सबूत नहीं मिला।
  • नजीब की मानसिक हालत ठीक नहीं थी, जिसकी बात डॉक्टरों और उसकी माँ फातिमा नफीस ने भी मानी। रिपोर्ट में डिप्रेशन का जिक्र है।
  • कोर्ट ने माना कि नजीब की गुमशुदगी रहस्यमई है, लेकिन एबीवीपी या किसी अन्य की इसमें कोई भूमिका साबित नहीं हुई।
कोर्ट के फैसले की कॉपी

कोर्ट ने अपने फैसले में साफ साफ कहा है कि ABVP के कार्यकर्ताओं का नजीब की गुमशुदगी से कोई लेना-देना नहीं। कोर्ट ने यह भी कहा कि अगर भविष्य में कोई नया सबूत मिलता है, तो जाँच फिर शुरू हो सकती है। कोर्ट ने अपने आदेश में लिखा, “सच हमसे छिपा हो सकता है, लेकिन उसकी खोज अडिग और अडचनों से परे जारी रहनी चाहिए।”

दरअसल, 2018 में ही सीबीआई ने क्लोजर रिपोर्ट दाखिल कर दी थी, लेकिन उसका विरोध किया गया था। फातिमा नफीस की ओर से दाखिल प्रोटेस्ट पिटीशन में CBI की जाँच को ‘भ्रामक’, ‘आधे अधूरे तथ्यों पर आधारित’ और ‘पूर्वाग्रह से ग्रसित’ बताया गया था। उनका कहना था कि CBI ने जानबूझकर यह थ्योरी बनाई कि नजीब JNU से खुद चला गया था, जबकि इससे जुड़े कई अहम सबूतों और संभावित संदिग्धों की भूमिका की उचित जाँच नहीं की गई।

फातिमा नफीस शुरू से कहती रही हैं कि उनके बेटे को एबीवीपी ने गायब करवाया और यह राजनीतिक साजिश है। उन्होंने मीडिया और वामपंथी संगठनों के जरिए इस मुद्दे को हवा दी। लेकिन कोर्ट ने उनकी आपत्तियों को खारिज कर दिया और कहा कि सीबीआई ने हर पहलू से जाँच की है।

प्रोपेगेंडा गैंग का हंगामा जारी

कोर्ट के साफ फैसले के बावजूद अब इस्लामी कट्टरपंथी, वामपंथी गैंग और कॉन्ग्रेसी इकोसिस्टम सोशल मीडिया पर हंगामा मचा रहा है। SDPI ( बैन किए गए आतंकी संगठन PFI के राजनीतिक मुखौटे) ने इस केस को जारी रखने की माँग करते हुए ऑफिसियल एक्स हैंडल से ट्वीट भी किया है।

एसडीपीआई का कहना है कि यह सच्चाई से मुँह मोड़ने और न्याय को बाधित करने वाला कदम है। उसके पोस्ट में लिखा है कि मुकदमा बंद नहीं होना चाहिए।

जेएनयू स्टूडेंट यूनियन के अध्यक्ष नीतीश कुमार की तरफ से बाकायदा पोस्टर तक जारी किया गया है। इसके साथ ही एक्स पर लिखा है, “दिल्ली पुलिस और सीबीआई ने जिस तरीके से इस पूरे केस को डील किया है वो साफ़ दिखाता है कि अब तक नहीं पता है की नजीब कहाँ गया। जिन परिषद के लोगों ने उसके साथ मारपीट की उसे कभी गिरफ़्तार नहीं किया गया। हम लोग रिपोर्ट पढ़ रहे हैं, और अम्मी के साथ मिलकर जिस तरीक़े से वो इस लड़ाई को लड़ना चाहती ह, जेएनयू का स्टूडेंट्स और जेएनयूएसयू उनके साथ खड़ा रहेगा।”

जेएनयू छात्र संघ के अध्यक्ष रहे पूर्व वामपंथी और बाद में कॉन्ग्रेसी नेता कन्हैया कुमार भी मामले को हवा देने में जुट गया। कन्हैया ने नजीब की माँ के हवाले से इमोशनल पोस्ट लिखकर आम लोगों की भावनाओं को भड़काने की कोशिश की। वो ये लिखकर मामले पर राजनीतिक रोटियाँ सेंक रहा है कि वो नजीब की माँ के साथ खड़ा है।

सुहैल आजाद नाम के व्यक्ति ने लिखा, “हम दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन गए, लेकिन अफसोस कि एक माँ को उसका बेटा नहीं लौटा सके।” ऐसी ही कोशिश गुरप्रीत वालिया जैसे एक्स हैंडल कर रहे हैं, जो खुलेआम विचारधारा के स्तर पर राष्ट्रवादियों के विरोध में हमेशा रहते हैं।

मोहम्मद शादाब खान नाम का व्यक्ति लिखता है, “आज जब अदालत कहती है कि CBI ने अपनी ‘पूरी कोशिश’ की, तो यह सवाल लाज़िमी है: क्या राज्य की कोशिशें भी नागरिक की धार्मिक और वैचारिक पहचान देखकर तय होती हैं? क्या एक ‘अस्वीकार्य विचारधारा’ रखने वाला छात्र इस देश में ‘लापता’ हो जाना डिजर्व करता है?” वहीं गोविंद प्रताप सिंह नाम के कथित वामपंथी पत्रकार ने लिखा, “सॉरी नजीब”

अंग्रेजी और वामपंथी मीडिया बनाना चाहते थे दूसरा ‘रोहित वेमुला’ केस

2016 में अंग्रेजी और वामपंथी मीडिया ने इस मामले को हिंदुत्व की हिंसा बता दिया था। नजीब को ‘मासूम मुस्लिम छात्र’ और एबीवीपी को खलनायक दिखाया गया। ये कोशिशें अब भी जारी हैं। लेकिन अब जब कोर्ट ने कहा कि कोई दोष नहीं है, तो वही मीडिया चुप है। ऑपइंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, नजीब ने खुद तीन छात्रों पर हमला किया था, जिनमें दो दलित थे। फिर भी उसे पीड़ित और उन छात्रों को गलत दिखाया गया। यह मीडिया का दोहरा चेहरा है।

इनका मकसद सच जानना नहीं, बल्कि राजनीतिक फायदा उठाना और हिंदू संगठनों को बदनाम करना है। वे नजीब के नाम पर एक नया ‘रोहित वेमुला‘ बनाना चाहते हैं।

राजनीतिक बयानबाजी में फँस गई फातिमा नफीस

नसीब अहमद की अम्मी फातिमा नफीस का दुख समझ में आता है। कोई माँ अपने बेटे को खोने का गम कैसे भूले? वह लगातार कहती रही हैं कि उन्हें उनका बेटा चाहिए और जाँच एजेंसियाँ नाकाम रहीं। उन्होंने कहा, “मैं आखिरी साँस तक लड़ूंगी।” लेकिन उनका गुस्सा एबीवीपी और हिंदू संगठनों पर गलत है। कोर्ट ने साफ कहा कि कोई सबूत नहीं मिला। उन्हें अब कोर्ट के फैसले को मान लेना चाहिए और सच को स्वीकार करना चाहिए। उनके दुख का इस्तेमाल प्रोपेगेंडा के लिए नहीं होना चाहिए।

नजीब अहमद का केस अब कानूनी तौर पर बंद हो गया है। कोर्ट ने क्लोजर रिपोर्ट स्वीकार कर ली है। सीबीआई ने 9 छात्रों को क्लीन चिट दे दी है। लेकिन वामपंथी-इस्लामिक कट्टरपंथी गैंग अब इस पर भी राजनीति कर रहा है। इनका मकसद नजीब को इंसाफ दिलाना नहीं, बल्कि हिंदू संगठनों को बदनाम करना और राजनीति चमकाना है। इस गैंग को न सच्चाई से मतलब है, न न्याय से। इन्हें बस एक नया ‘रोहित वेमुला’ चाहिए, ताकि वे अपने झूठे एजेंडे को आगे बढ़ा सकें।

कोर्ट ने उनके मंसूबों पर पानी फेर दिया है। अब लोगों को सच समझना चाहिए और प्रोपेगेंडा से बचना चाहिए। अब जरूरत है कि लोग सच्चाई को समझें और सवाल पूछें – कि नजीब का इस्तेमाल क्यों किया गया? उसके नाम पर हिंदू संगठनों को क्यों बदनाम किया गया? और क्यों एक माँ के दुख को राजनीतिक औजार बना दिया गया?

बरहराल, अगर कोई नया सबूत मिलता है, तो जाँच फिर शुरू हो सकती है, लेकिन अभी के लिए यह मामला खत्म हो गया है। लेकिन वामपंथियों, कॉन्ग्रेसी इकोसिस्टम और इस्लामी कट्टरपंथियों के लिए ये एक नई शुरुआत है।

हिमाचल के कॉन्ग्रेसी मंत्री ने NHAI इंजीनियर को सरेआम दी गाली, फिर कमरे में ले जाकर पीटा… सिर पर घड़ा मारा: शिमला में दर्ज FIR की पूरी डिटेल, पीड़ित बोले- SDM ने भी नहीं बचाया

हिमाचल प्रदेश की कॉन्ग्रेस सरकार में कैबिनेट मंत्री अनिरुद्ध सिंह के खिलाफ एक NHAI इंजीनियर पर हमला करने के मामले FIR दर्ज की गई है। यह FIR शिमला में पीड़ित इंजीनियर ने दर्ज करवाई है। इंजीनियर का आरोप है कि एक जगह निरीक्षण पर पहुँचे मंत्री ने उसको निशाना बनाया और जम कर पीटा।

यह घटना सोमवार (30 जून, 2025) को शिमला के भट्टाकुफ्फर इलाके में हुई। भट्टाकुफ्फर इलाके में 30 जून, 2025 की रात को एक पाँच मंजिला बिल्डिंग भारी बारिश के चलते जमींदोज हो गई थी। यह बिल्डिंग शिमला में बन रही फोरलेन के निकट है। इंजीनियर अचल जिंदल इसी प्रोजेक्ट में मेनेजर के तौर पर तैनात हैं।

आरोप है कि इसी बिल्डिंग गिरने की जगह का निरीक्षण करने के दौरान मंत्री अनिरुद्ध सिंह ने इंजीनियर से मारपीट की। मामले में दर्ज FIR में इंजीनियर ने बताया है कि बिल्डिंग गिरने के बाद उन्हें शिमला के SDM ने एक बैठक के लिए बुलाया था। यह बैठक ऑफिस में होनी थी।

FIR में अचल जिंदल ने कहा है कि जब वह SDM के दफ्तर पहुँचे तो वहाँ वह मौजूद नहीं थे और उन्हें पता चला कि SDM घटनास्थल पर गए हुए हैं जहाँ मंत्री अनिरुद्ध सिंह भी मौजूद हैं। इसके बाद इंजीनियर जिंदल यहाँ चले गए।

इंजीनियर अचल जिंदल ने FIR में बताया है कि उन्होंने घटनास्थल पर बिल्डिंग के गिरने और इस मामले में फोरलेन निर्माण की भूमिका ना होने की बात मंत्री अनिरुद्ध सिंह को बता दी थी। इंजीनियर जिंदल का आरोप है कि यहाँ पर अनिरुद्ध सिंह ने उनके साथ गाली गलौज चालू कर दी।

अनिरुद्ध सिंह हमला NHAI
इंजीनियर अचल जिंदल द्वारा दर्ज करवाई गई FIR

FIR में इंजीनियर जिंदल आरोप है कि गाली गलौज के बाद उन्हें और उनके एक साथी को अनिरुद्ध सिंह ने वहीं पास के एक मकान में बुलाया और पीटना चालू कर दिया। जिंदल का आरोप है कि मंत्री अनिरुद्ध सिंह ने यहाँ उनके ऊपर घड़े से वार कर दिया, जिससे उनके खून निकल आया। किसी तरह इंजीनियर जिंदल अस्पताल पहुँचे और इलाज करवाया।

इसके बाद इस मामले में FIR करवाई गई है। ऑपइंडिया के पास FIR की कॉपी मौजूद है। अचल जिंदल ने आरोप लगाया है कि उनकी पिटाई के दौरान SDM ने मौजूद रहते हुए भी कोई बीच बचाव नहीं किया। अचल जिंदल का कहना है कि वह IES अधिकारी हैं और उनके साथ इस बर्ताव ने अन्दर तक झकझोरा है।

इस मामले में ऑपइंडिया ने अचल जिंदल से बात की है। उन्होंने न्याय की माँग की है और कहा है कि मंत्री अनिरुद्ध सिंह के ऊपर कार्रवाई की जाए। ऑपइंडिया ने आरोपित मंत्री अनिरुद्ध सिंह से सम्पर्क साधने का प्रयास किया लेकिन उन्होंने फोन का कोई जवाब नहीं दिया।

अनिरुद्ध सिंह हमला NHAI

इस मामले में NHAI इंजीनियर एसोसिएशन ने भी कार्रवाई की माँग की है। NHAI इंजीनियर एसोसिएशन ने एक्स (पहले ट्विटर) पर लिखा, “यह अपने आधिकारिक कर्तव्यों का निर्वहन कर रहे एक लोकसेवक पर एक भयावह और अस्वीकार्य हमला है। हम इस जघन्य कृत्य के लिए जिम्मेदार सभी लोगों के खिलाफ तत्काल और कड़ी कार्रवाई की माँग करते हैं।”

मामले में कॉन्ग्रेस सरकार के मंत्री अनिरुद्ध सिंह का अभी तक कोई आधिकारिक जवाब नहीं आया है। पुलिस ने भी इस मामले में कार्रवाई को लेकर कोई अपडेट नहीं दिया है।

जगनमोहन रेड्डी की कार के नीचे दबकर मर गए 55 साल के सिंगैया, हाई कोर्ट ने आंध्र प्रदेश के पूर्व CM को दी राहत: कहा- कुंभ में भी हादसे होते हैं

आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट ने पूर्व मुख्यमंत्री जगन मोहन रेड्डी को हिट एंड रन मामले में राहत दे दी है। 18 जून 2025 को गुंटूर जिले में एक रोड शो के दौरान वाईएसआरसीपी समर्थक चीली सिंगैया की उनकी गाड़ी के नीचे आने से मौत हो गयी थी। पुलिस जाँच में भी सामने आया कि जिस गाड़ी से ये हादसा हुआ वह जगन मोहन रेड्डी की थी। पुलिस ने उनकी गाड़ी को जब्त कर लिया था।

कोर्ट ने 27 जून के अपने आदेश में पुलिस को रेड्डी और दूसरे आरोपियों के खिलाफ 1 जुलाई तक कोई कार्रवाई नहीं करने को कहा। हालाँकि एफआईआर को रद्द करने की रेड्डी की याचिका पर भी सुनवाई रोक दी।

वाईएसआरसीपी के 55 वर्षीय समर्थक सिंगैया की 18 जून 2025 को एक रोड शो के दौरान आंध्र प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री वाई एस जगन मोहन रेड्डी के वाहन से कुचलकर मौत हो गई थी। यह घटना गुंटूर जिले के एतुकुरु गांव में राष्ट्रीय राजमार्ग पर भगवान अंजनेया मंदिर के पास हुई थी। उस वक्त रेड्डी आत्महत्या करने वाले एक पूर्व सरपंच के परिवार से मिलकर लौट रहे थे।

55 वर्षीय चीली सिंगैया रेड्डी पूर्व सीएम पर फूल बरसाने की कोशिश कर रहे थे। अचानक वह फिसलकर गिर गए। रेड्डी की कार का अगला दाहिना पहिया सिंगैया की गर्दन पर चढ़ गया, जिससे उनकी मौत हो गई। रेड्डी की कार से कुचले गए व्यक्ति का वीडियो इंटरनेट पर वायरल भी हुआ था।

शुरुआत में पुलिस ने दावा किया था कि पीड़ित को एक प्राइवेट कार ने कुचला है, लेकिन सोशल मीडिया पर जो वीडियो वायरल हुआ उसमें साफ दिखा था कि जो रेड्डी की कार के अगले पहिए के नीचे आ गये थे। कार उन्हें कुचल कर आगे बढ़ गई। हालाँकि जब लोगों ने उन्हें बाहर निकाला तो उनकी हालत गंभीर थी और उन्हें अस्पताल भेजा गया।

घटना के वक्त रेड्डी यात्री सीट की तरफ कार की खिड़की से बाहर खड़े होकर लोगों का अभिवादन स्वीकार कर रहे थे। इस मामले में जगन मोहन रेड्डी को भारतीय दंड संहिता की धारा 105 के तहत गैर इरादतन हत्या के लिए आरोपी नंबर 2 और उनके ड्राइवर को आरोपी नंबर 1 बनाया गया। इसके अलावा वाईएसआरसीपी सांसद वाई.वी. सुब्बा रेड्डी, पूर्व मंत्री पेरनी वेंकटरमैया और विदादला रजनी और रेड्डी के सहायक के. नागेश्वर रेड्डी को भी आरोपी बनाया गया है।

हाईकोर्ट ने हिट एंड रन केस से कुंभ में मची भगदड़ की तुलना की

मामले की सुनवाई करते हुए जस्टिस के श्रीनिवास रेड्डी ने सड़क दुर्घटना के लिए वाहन में सवार यात्रियों से जुर्माना वसूलने के पीछे के औचित्य पर सवाल उठाया। जस्टिस ने महाधिवक्ता दम्मलपति श्रीनिवास से पूछा कि दुर्घटना के लिए कार में बैठे लोगों को कैसे जिम्मेदार ठहराया जा सकता है?

जस्टिस रेड्डी ने महाकुंभ में मची भगदड़ का जिक्र करते हुए कहा, “सभी सावधानियों के बावजूद, कुंभ मेले में भी दुर्घटनाएँ हुईं।”

जस्टिस रेड्डी ने करोड़ों भक्तों की आस्था का केन्द्र रहे कुंभ मेले में हुए हादसे से लापरवाही से हुए कार दुर्घटना की तुलना कर दी। कोर्ट के कहने का मतलब है कि अच्छी तरह से कार्यक्रम आयोजित करने के बावजूद त्रासदियाँ हो जाती हैं। चाहे वह कुंभ मेला हो या कोई राजनीतिक रोड शो। इसके लिए आरोपित व्यक्तियों को लापरवाह नहीं माना जा सकता।

हालाँकि यह तुलना बहुत ही चौकाने वाला है। कुंभ मेले में करोड़ों लोग हर दिन आते हैं और डुबकी लगाते हैं। यहाँ भीड़ प्रबंधन खुद में काफी चुनौतीपूर्ण कार्य माना जाता है। जैसा कि इस साल महाकुंभ में भगदड़ के दौरान देखा गया। कभी-कभी भारी भीड़ और अफवाह भी भगदड़ का कारण बनती हैं।

कुंभ मेले जैसी भीड़ की तुलना जगन मोहन रेड्डी के रोड शो से नहीं की जा सकती। हालाँकि भीड़ यहाँ भी थी, लेकिन वाहनों के काफिले के साथ एक नियंत्रित राजनीतिक कार्यक्रम था। हालाँकि ऐसे आयोजनों में भीड़ का जोश में आना भी सामान्य है। लेकिन नेता की कार के नीचे आने से हुई मौत की बारीकी से घटना की जाँच की माँग करता है। इसमें चालक का आचरण, काफिले ने प्रोटोकॉल का पालन किया या नहीं, कार द्वारा पीड़ित को कुचलने के समय और उसके बाद कार में बैठे लोगों का आचरण आदि शामिल हैं।

कुंभ मेले में हुई भगदड़ के साथ जगन मोहन रेड्डी के कार के नीचे आए व्यक्ति की दुर्घटना में हुई मौत की तुलना मामले को सरलीकृत करने और जाँच की कमजोरी को दर्शाता है।

यह भी याद रखना चाहिए कि पुलिस ने शुरू में दावा किया था कि पीड़ित को एक निजी वाहन ने कुचल दिया था, जो वाईएसआरसीपी के आधिकारिक काफिले का हिस्सा नहीं था। हालांकि, सोशल मीडिया पर सामने आए घटना के वीडियो में दिखाया गया है कि पीड़ित को एक काली कार के अगले पहिये के नीचे बेरहमी से कुचल दिया गया था, जबकि रेड्डी यात्री सीट की तरफ कार की खिड़की से बाहर निकल रहे थे। वीडियो में देखा जा सकता है कि रेड्डी की कार नहीं रुकी और पीड़ित के कुचले जाने के बाद भी चलती रही। पीड़ित के परिवार ने घटना की जाँच की माँग की है।

इसके अलावा, गुंटूर रेंज के आईजी सर्व श्रेष्ठ त्रिपाठी ने कहा कि रेड्डी के काफिले में अनुमति से ज्यादा वाहन मौजूद थे। आईजी त्रिपाठी ने कहा, “यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि पीड़ित की इस तरह से मौत हो गई। प्रारंभिक निष्कर्षों से संकेत मिलता है कि काफिले में लगभग 30 से 35 वाहन थे, जबकि आधिकारिक तौर पर केवल तीन की अनुमति थी।”

अमीर और शक्तिशाली अक्सर बच निकलते हैं

हिट-एंड-रन मामलों में अक्सर अमीर और शक्तिशाली आरोपित बच निकलते हैं। 2024 के पुणे पोर्श मामले में भी देखा गया कि कैसे एक अमीर बाप के बेटे ने नशे की हालत में अपनी पोर्श टेकन कार से बाइक को टक्कर मार दी और उसपर सवार दो लोगों की मौत हो गयी थी। हालाँकि आरोपित को कुछ ही घंटों के भीतर जमानत मिल गई। यहाँ तक कि किशोर न्याय बोर्ड ने आरोपित को सड़क दुर्घटनाओं पर 300 शब्दों का लेख लिखने, 15 दिनों तक यरवदा यातायात पुलिस के साथ काम करने और नशामुक्ति परामर्श लेने का आदेश दिया था।

इसी तरह जेसिका लाल मर्डर केस (1999), संजीव नंदा BMW हिट-एंड-रन केस (1999) जैसे कई मामले हैं, जिनमें पुलिस सुस्त दिखी और सजा अपेक्षाकृत बहुत कम थीं। अब संगैया हिट-एंड-रन केस इस बात की ओर इशारा कर रहा है कि हमारी न्याय प्रणाली दो तरह की दिखती है। एक हाई-प्रोफाइल आरोपियों का ‘सिस्टम’ है जहाँ आरोपितों के प्रति सिस्टम उदार है। वहीं दूसरे मामले हैं जहाँ लोगों को छोटी घटनाओं पर भी जमानत मिलने में वक्त लग जाता है।

संगैया हिट-एंड-रन मामले में जाँच अभी भी जारी है, लेकिन कोर्ट ने रेड्डी और अन्य को न केवल अंतरिम राहत दी है, बल्कि इस घटना को पहले ही ‘दुर्घटना’ घोषित कर दिया है और इसे कुंभ मेले में हुई भगदड़ में हुई मौतों से तुलना की है।

पाकिस्तान में 4 हिन्दू बच्चों को जबरन बना दिया मुस्लिम, ISI का पोपट ARY बता रहा- इस्लाम पर ईमान लाए: कोर्ट ने भी सुनाया था इस्लामी कट्टरपंथियों के मनमाफिक फैसला

पाकिस्तान के सिंध प्रांत में हिंदुओं का जबरन धर्मांतरण करवा दिया गया। इस मामले को पाकिस्तानी मीडिया ने हल्के में दिखाते हुए पीड़ित पर ही आरोप लगाए। कहा गया कि हिंदुओं ने अपनी मर्जी से धर्म परिवर्तन किया है। साथ ही इस मामले को इस्लाम के हित में करार दिया।

मामला शाहदादपुर में चार भाई-बहन के जबरन धर्म परिवर्तन से जुड़ा है। बच्चों के कंप्यूटर टीचर फरहान खासखेली ने अपहरण कर इस्लाम में धर्मांतरण करा दिया। बच्चों को कराची से रेस्क्यू किया गया। अब बच्चों के परिजन न्याय के लिए भटक रहे हैं।

उधर, इन बच्चों की माँ का रो-रोकर बुरा हाल है। बेचारी माँ न्याय की माँग के लिए दर-दर भटक रही है। माँ ने रोते हुए कहा, “मेरी तीन बेटियाँ हैं और फरहान तीनों को ले गया।” वह कहती हैं कि उनका बेटा तो इतना नादान है उसे इतनी भी समझ नहीं कि धर्म परिवर्तन क्या होता है। बच्चों की माँ ने पीपीपी नेता बिलावल भुट्टो जरदारी से न्याय की आस लगाई है।

वहीं, सोशल मीडिया पर एक वीडियो भी तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें कथित तौर पर बच्चों का धर्म परिवर्तन होते हुए दिखाया गया है। लोगों की नजर में ये वीडियो आने के बाद इसकी जमकर आलोचना की जा रही है। पाकिस्तान में हिंदू पंचायत के प्रमुख राजेश कुमार ने इस घटना को पारिवारिक त्रासदी और सामुदायिक आपदा बताया। साथ ही नाबालिगों की उम्र को देखते हुए उनकी मर्जी से धर्म परिवर्तन करने की क्षमता पर भी सवाल उठाया।

सिंध कोर्ट ने आरोपित फरहान और जुल्फिकार को किया बरी

परिवार के विरोध के बीच धर्म परिवर्तन कर चुके भाई-बहनों को शाहदादपुर कोर्ट में पेश किया गया। यहाँ कोर्ट ने दोनों बड़ी बहनों, जिया और दिया को कराची के एक शेल्टर में भेज दिया। वहीं, दो नाबालिग दिशा और हरजीत को परिजनों के पास वापस भेजने के आदेश दिए।

हालाँकि बच्चों की कस्टडी के लिए माँ-बाप से ही 10-10 मिलियन पाकिस्तानी रूपए यानी 1-1 करोड़ पाकिस्तानी रुपए का बॉन्ड भरवाया गया, ताकि दोनों बच्चों की घर वापसी न कराई जा सके और वो इस्लाम का पालन करते रहें। यानी हिंदू माँ-बाप अपने ही जबरन मुस्लिम बनाए गए बच्चों को इस्लामी तरीके से पालते रहें और इसकी गारंटी भी दें कि वो हिंदू नहीं बनेंगे।

इसके अलावा कोर्ट ने आरोपित फरहान और जुल्फिकार खासखेली को अपहरण के मामले से बरी कर क्लीन चिट दे दी।

पाकिस्तानी मीडिया ने धर्मांतरण पर फैलाया प्रोपेगेंडा

शाहदादपुर में हिंदू भाई-बहनों का जबरन इस्लाम में धर्म परिवर्तन करने की खबर को पाकिस्तानी मीडिया चैनल ARY Network ने अलग ढंग से पेश किया। चैनल ने इसे ‘अपनी इच्छा से किया गया धर्म परिवर्तन’ करार दिया। इसके अलावा कोर्ट में मामला जाने के बाद इसे ऐसे पेश किया जैसे बच्चों पर सच बोलने के लिए भी दबाव डाला गया है।

यहाँ तक मीडिया में कहा गया कि पीड़ित बहनों के बयान के आधार पर ही आरोपित जुल्फिकार खासखेली और फरहान को अपहरण के मामले से बरी किया गया है। जबकि असल में तो पुलिस ने ही उनपर झूठ बोलने के लिए दबाव डाला।

ARY ग्रुप यूँ ही इस तरह की खबरों का रहनुमा नहीं है। इस चैनल के मालिक के पाकिस्तानी खूफिया एजेंसी ISI के साथ ‘खास रिश्तों’ से हर कोई वाकिफ है। इसी मीडिया हाउस ने 2013 में एक प्रोपेगेंडा फिल्म ‘वार’ भी बनाई जिसमें हिंदुत्व का मजाक उड़ाने से लेकर पाकिस्तान में बमबारी के लिए भारत को जिम्मेदार ठहराने जैसी कई बेतुकी बातें शामिल की गईं थी। इस फिल्म को 2019 में नेटफ्लिक्स पर भी स्ट्रीम किया गया था। हालाँकि भारतीयों के कड़े विरोध के बाद इसे वहाँ से हटा दिया गया।

भारत में भी ARY के पाँव जमे हुए हैं। ये वही मीडिया हाउस है जिसने बॉलीवुड अभिनेता आमिर खान, फिल्म निर्माता राजकुमार हिरानी और विधु विनोद चोपड़ा के साथ मिलकर फिल्म PK का निर्माण किया। पाकिस्तान में इसे ‘हिंदू भगवानों पर एक व्यंग’ की टैगलाइन के साथ रिलीज किया गया।

पाकिस्तान में हिंदुओं का उत्पीड़न लगातार जारी

पाकिस्तान में हिंदूओं के धर्मांतरण का यह कोई पहला मामला नहीं है। कई वर्षों से पाकिस्तान में हिंदुओं का उत्पीड़न किया जा रहा है। हर साल 1000 से भी अधिक हिंदू लड़कियों को जबरन धर्म परिवर्तन और शादी के लिए अगवा किया जाता है। इन मामलों में अक्सर पुलिस की मिलीभगत भी होती है। एक रिपोर्ट कहती है कि पाकिस्तान में पिछले 12 सालों में 14,000 हिंदू लड़कियों का अपहरण, जबरन धर्मांतरण और गैंगरेप की घटनाएँ सामने आई हैं।

रोजाना होने वाले धर्म परिवर्तन, बलात्कार, भेदभाव, मंदिरों को अपवित्र करने और हिंसा झेलने के कारण पाकिस्तान में रहने वाले हिन्दू किसी भी तरह से भारत आना चाहते हैं। हिन्दुओं की एक बड़ी जनसंख्या 1947 में पाकिस्तान के बनने के बाद से अपनी जान बचा कर भारत आ भी चुकी है।

पाकिस्तान के अधिकांश इलाकों में हिन्दुओं की जनसँख्या नगण्य हो चुकी है। हालाँकि, पाकिस्तान के सिंध में अब भी कुछ लाख हिन्दू बचे हैं। लेकिन यहाँ भी बीते कुछ वर्षों से हालात ऐसे हैं कि हिन्दू अपनी जमीन-घर और व्यापार छोड़ कर भारत में आ रहे हैं।

पाकिस्तान से हिन्दुओं का पलायन कितना तेज है, इसको साबित करती हुई एक रिपोर्ट भी सामने आई। खास बात ये है कि इस रिपोर्ट को खुद पाकिस्तान मानवाधिकार आयोग (HRCP) ने 23 जनवरी 2025 को प्रकाशित की थी। इस रिपोर्ट में सिंध के हिन्दुओं के सामने आने वाली समस्याएँ बताई गईं, जिसके चलते वह अब भी भारत भागने को मजबूर हैं।

HRCP की रिपोर्ट में बताया गया था कि सिंध में हिंदू महिलाओं को उत्पीड़न, अपहरण और जबरन धर्म परिवर्तन की लगातार धमकियों का सामना करना पड़ता है, जिसके कारण हिंदू परिवार अपनी बेटियों की पढ़ाई छुड़वा कर उन्हें दूसरे शहर भेजते हैं। यहाँ तक कि उन्हें भारत भी भेज दिया जाता है।

तुर्की की पत्रिका ने बनाया ‘मोहम्मद’ वाला कार्टून, भड़क गए इस्लामी कट्टरपंथी: कहा- पैगम्बर का किया अपमान, 3 कार्टूनिस्ट गिरफ्तार

तुर्की की साप्ताहिक व्यंग्य पत्रिका लेमन इनदिनों सुर्खियों में है। वजह है इसमें छपा कार्टून। दरअसल कार्टून में ‘मुहम्मद’ और ‘मूसा’ नाम के दो व्यक्तियों को आसमान में हाथ मिलाते दिखाया गया है और नीचे जमीन जल रही है। मुस्लिम कट्टरपंथियों का आरोप है कि ये पैगंबर मुहम्मद और पैगंबर मूसा हैं।

इसके बाद मुस्लिम बहुल देश की भावनाएँ भड़क गई और देश के कई हिस्सों में विरोध प्रदर्शन होने लगे। इस मामले में पुलिस ने तीन कार्टूनिस्टों को गिरफ्तार कर लिया है। इनमें कार्टूनिस्ट डोगन पेहलवान और पत्रिका के प्रबंध संपादक और प्रमुख संपादक शामिल हैं।

तुर्की के कानून मंत्री यिलमाज तुनक ने सोमवार को कहा कि तुर्की के अधिकारियों ने पत्रिका लेमन के खिलाफ़ आपराधिक जाँच शुरू कर दी है। तुनक ने अपने बयान में कहा कि इस्तांबुल के पुलिस कार्यालय ने तुर्की दंड संहिता की धारा 216 के तहत जाँच शुरू की है, जो ‘सार्वजनिक रूप से मजहबी मूल्यों का अपमान करने’ से संबंधित है।

क्या है मामला?

पत्रिका के 26 जून के अंक में छपे कार्टून में इजरायल और ईरान के बीच जंग दिखाने की कोशिश की गई है। इसमें ‘मुहम्मद’ और ‘मूसा’ को बमबारी से तबाह हुए शहर के ऊपर हाथ मिलाते हुए दिखाया गया था। कार्टून में नीचे जमीन पर जलता शहर और मिसाइलें दिखाई गई हैं।

पत्रिका का कहना है कि इस कार्टून का मकसद इजरायली हमले के दौरान ईरान में मारे गए एक मुस्लिम व्यक्ति की पीड़ा उजागर करना है। उसका नाम कार्टून में ‘मुहम्मद’ रख दिया गया है।

पत्रिका के प्रमुख संपादक तुन्के अकगुन ने एएफपी से बात करते हुए कहा है, “इस कार्टून में दिये गए नाम मुहम्मद का पैगंबर मुहम्मद से कोई लेना देना नहीं है। मुहम्मद नाम से करोड़ों लोग दुनियाभर में रहते हैं। ” पत्रिका ने कहा कि कार्टून का उद्देश्य मजहबी मूल्यों का मजाक उड़ाना नहीं था।

इस्तांबुल में लेमन के कार्यालय के सामने विरोध प्रदर्शन

कार्टून को तुर्की में धार्मिक भावनाओं का अपमान माना गया और कट्टरपंथी संगठन सड़कों पर उतर आए। इस्तांबुल के इस्तिकलाल स्ट्रीट पर लेमन की इमारत के सामने कई प्रदर्शनकारी एकत्र हुए। कुछ लोग लेमन के कार्यालय में घुसने की कोशिश करते देखे गए।

प्रदर्शनकारियों का कहना है कि लेमन पत्रिका ने पैगंबर मुहम्मद का खुलेआम अपमान किया है। इस अपमान को कभी भी अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता नहीं माना जा सकता।

ऐसा ही एक मामला 2015 में फ्रांस में सामने आया था। उस वक्त भी मामला पैगंबर मुहम्मद के कार्टून का ही था। जब व्यंग्य पत्रिका ‘शार्ली हेब्दो‘ के कार्यालय में घुस कर मुस्लिम कट्टरपंथियों ने फायरिंग की थी। इसमें संपादक समेत 12 लोगों की मौत हो गयी थी।

प्रयाग, दिल्ली, त्रिशूर… हिन्दू बच्ची के धर्मांतरण में सब कहीं के लोग शामिल, निशाने पर दलित-गरीब: मोहम्मद ताज को पकड़ने केरल गई पुलिस, ACP ने बताया- लग्जरी लाइफ का देते हैं झाँसा

उत्तर प्रदेश के प्रयागराज से एक दलित बच्ची का अपहरण किया गया। उसको केरल ले जाकर धर्मांतरण करवाया गया। इसके बाद उसे आतंकी बनाने का प्रयास हुआ। यह सब काम दलित बच्ची की ‘सहेली’ दरकशा बानो ने किया। इसमें उसका साथ दिया मोहम्मद कैफ और ताज ने। अब पता चला कि यह गैंग प्रयागराज से लेकर दिल्ली और केरल तक फैला हुआ है। इसके मददगार सब कहीं हैं। यह भी आशंका जताई गई है कि यह तीनों कहीं किसी मॉड्यूल का हिस्सा हैं।

संगठित गिरोह कर रहा काम

प्रयागराज से 15 वर्ष की दलित बच्ची के अपहरण और उसके केरल में धर्मांतरण के मामले में पुलिस को कई तथ्य पता चले हैं। पुलिस ने बताया है कि बच्ची का ब्रेनवॉश करने वाली दरकशा बानो एक संगठित गिरोह का हिस्सा है। यह भी सामने आया है कि उसके निशाने पर दलित-गरीब बच्चियाँ होती हैं।

दरकशा उनका धर्मांतरण करवाती है। इसके लिए वह ब्रेनवॉश और लालच का इस्तेमाल करती है। दरकशा ने प्रयागराज में जिस बच्ची को निशाना बनाया, वह भी ऐसे ही एक परिवार का हिस्सा थी। पीड़िता के परिवार की आर्थिक स्थिति कमजोर है और उसके पिता का भी निधन हो चुका है।

पीड़िता की माँ चूड़ी बेचने और खाना बनाने का काम करती है। ऐसे में दरकशा ने उसे निशाने पर लिया। यह भी सामने आया है कि दरकशा पहले इस बच्ची की ‘सहेली’ बनी और फिर उसके मन में हिन्दू धर्म के प्रति जहर भरना चालू किया।

प्रयागराज के ACP अजयपाल शर्मा ने इस मामले में बताया है कि दरकशा के गैंग के लोग दिल्ली और केरल में भी हैं। इनकी गिरफ्तारी और जाँच के लिए प्रयास हो रहे हैं। तीन टीमें इस मामले में लगाई गई हैं। उन्होंने कहा है कि दरकशा समेत एक मुस्लिम युवक को गिरफ्तार किया जा चुका है लेकिन कई और नाम भी सामने आए हैं।

प्रयागराज में आतंकी मॉड्यूल?

दरकशा के धर्मांतरण करवाने और केरल ले जाने की इस प्लानिंग के चलते यह शक हो रहा है कि वह किसी आतंकी मॉड्यूल का भी हिस्सा हो सकती है। उसके स्लीपर सेल की तरह जाँच करने का शक भी गहरा रहा है। दरकशा ने इस बच्ची को कैसे टार्गेट किया, उसके किससे संबंध हैं, इसके लिए पुलिस टीमें फॉरेंसिक जाँच में भी जुटी हैं।

दैनिक जागरण की एक रिपोर्ट में बताया गया है कि दरकशा का मोबाइल जब्त किया गया है और उसके व्हाट्सएप की भी जाँच हो रही है। वह किससे बात करती थी, इस पर भी जानकारी निकाली जा रही है। मोबाइल डाटा सामने आने पर यह भी पता लग सकता है कि उसने और कितनी बच्चियों को निशाना बनाया है।

ताज को गिरफ्तार करने केरल गई पुलिस

प्रयागराज पुलिस अब तक इस मामले में मोहम्मद कैफ और दरकशा को पकड़ चुकी है लेकिन मोहम्मद ताज उसकी गिरफ्त से बाहर है। मोहम्मद ताज को दरकशा का देवर बताया गया है। वह प्रयागराज का रहने वाला है लेकिन वर्तमान में केरल में मौजूद है। उसकी गिरफ्तारी के लिए प्रयागराज पुलिस की एक टीम केरल गई है। मोहम्मद ताज का नाम इस मामले में दर्ज FIR में भी है। दरकशा ने केरल में जा कर भी ताज भी का ही नाम लिया था।

भंडाफोड़ पर धमका रहा गैंग

इस गैंग के 2 सदस्य पकड़े जाने के बाद पीड़िता की माँ को एक धमकी भरा कॉल भी आया है। इस शख्स की पहचान सामने नहीं आई है लेकिन उसने फोन पर पीड़िता की माँ को जातिसूचक गालियाँ भी दी। इसके चलते पीड़िता का परिवार डरा हुआ है। पुलिस ने अज्ञात के रूप में इस शख्स के खिलाफ FIR दर्ज की है। इसके अलावा FIR में SC/ST एक्ट के तहत धाराएँ भी जोड़ी हैं। इस शख्स की पहचान स्थापित करने का प्रयास किया जा रहा है।

क्या है पूरा मामला?

पूरा मामला प्रयागराज के फूलपुर थाने से जुड़ा हुआ है। यहाँ लिलहट गाँव में एक दलित विधवा महिला और उसकी बेटी रहती है। बेटी की आयु मात्र 15 वर्ष है। उसके पड़ोस में ही दरकशा नाम की मुस्लिम लड़की रहती है। दरकशा बानो कथित तौर पर इस हिन्दू बच्ची की सहेली है।

दरकशा हिन्दू बच्ची के साथ रहती है। मीडिया रिपोर्ट्स में बताया गया है कि दरकशा हिन्दू बच्ची को इस्लाम के बारे में ब्रेनवॉश किया करती थी। वह हिन्दू धर्म के प्रति जहर भी भरती थी। 8 मई, 2025 को दरकशा बानो रात 10 बजे हिन्दू बच्ची को एक शादी से लेकर फूलपुर की एक मस्जिद के पास गई।

दरकशा बानो का मददगार मोहम्मद कैफ यहाँ बाइक लेकर खड़ा था। दरकशा ने हिन्दू बच्ची को इस दौरान पाने जाल में फँसा लिया था। कैफ ने इन दोनों को प्रयागराज जंक्शन छोड़ा। रास्ते में कैफ ने हिन्दू बच्ची से छेड़छाड़ भी की। दरकशा प्रयागराज से बाद हिन्दू बच्ची को प्रयागराज से लेकर दिल्ली चली गई।

दरकशा की मंजिल लेकिन दिल्ली नहीं थी। यहाँ से वह हिन्दू बच्ची को लकर केरल के त्रिशूर चली गई। यहाँ हिन्दू बच्ची के साथ प्रताड़नाओं का दौर चालू हो गया। उसका धर्मांतरण करवाया गया। उसे आतंकी ट्रेनिंग की बात भी हुई। बच्ची किसी तरह बच के पुलिस के पास पहुँची, जहाँ से प्रयागराज सूचना परिवार के पास पहुँची। बच्ची वापस इसके बाद आ सकी।

हिन्दू पीड़िता बोली- दाढ़ी वाले जिहाद की बात करते थे

हिन्दू बच्ची ने बरामद होने के बाद बताया कि त्रिशूर में उसे एक ऐसे घर में ले जाया गया था जहाँ और भी कई नाबालिग लड़कियाँ मौजूद थीं। हिन्दू बच्ची ने यह भी बताया कि इसी घर में कई ‘बड़ी दाढ़ी वाले’ मौजूद थे। इन लोगों ने बच्ची पर इस्लाम में धर्मांतरण करने का दबाव बनाया।

बच्ची के अनुसार, ‘बड़ी दाढ़ी वालों’ ने उसको जिहादी ट्रेनिंग देने की बातें भी की। इस दौरान दरकशा वहाँ से गायब हो गई। डरी सहमी बच्ची किसी तरह यहाँ से भाग निकली। यहाँ वाल रेलवे स्टेशन पहुँची जहाँ पुलिस ने उससे जानकारी ली। इसके बाद बच्ची का प्रयागराज लौटना संभव हो पाया।

चीन-पाकिस्तान के बंकर में रखे हथियार भी उड़ाएगा भारत, जमीन के 100 मीटर नीचे भी मार करेगा अग्नि-5 मिसाइल का ‘बंकर बस्टर’ वेरिएंट: DRDO कर रहा डेवलप, 9800 KM/H की रफ़्तार से चलेगी

ईरान और इजरायल के युद्ध में बड़े-बड़े हथियार, बम और मिसाइलों का इस्तेमाल किया गया। युद्ध के बीच जब अमेरिका ने ईरान के परमाणु हथियार फोर्डो पर हमला किया, तो उस वक्त बंकर बस्टर GBU-57/A को तैनात किया गया था। इसने ईरान के परमाणु हथियार बनाने के अड्डे को सतह तक तबाह कर दिया था।

ऐसे में अब भारत भी अपने मिसाइल सिस्टम को मजबूत करने में लगा है। इसी कड़ी में रक्षा अनुसंधान विकास संगठन (डीआरडीओ) ने अब एग्नि-5 इंटरकॉन्टिनेंटल बलिस्टिक मिसाइल को अब नए रूप में विकसित करने जा रहा है। फिलहाल इस अग्नि-5 मिसाइल को 5000 किलोमीटर की रेंज तक फेंका जा सकता है। अब नए वैरिएंट में 7500 किलोग्राम बंकर बस्टर की क्षमता होगी।

इससे भारत अपने दुश्मन चीन और पाकिस्तान के ठिकानों को आसानी से निशाना बना लेगा। जमीन की कितने भी भीतर दुश्मन घुसा हो, यह मिसाइल तबाह करने में सफल होगी।

जमीन के 100 मीटर अंदर घुसकर मचाएगा तबाही

डीआरडीओ अब अग्नि-5 के नए वैरिएंट में बढ़ी क्षमता को विकसित कर रहा है। यह जमीन के 80 से 100 मीटर भीतर घुसकर तबाही मचाएगा। इस मिसाइल को विकसित करने से भारत अमेरिका की उपलब्धियों से भी आगे बढ़ जाएगा। अमेरिका ने भी ईरान के परमाणु ठिकानों पर हमला करने के लिए बंकर बस्टर बम GBU-57/A का इस्तेमाल किया था। यह बम की विश्व में सबसे बड़ा बंकर बस्टर बम कहलाता है।

भारत भी अब स्वदेशी की राह पर चल रहा है। जहाँ अमेरिका की तरह डिलीवरी के लिए बड़े और महंगे एयरक्राफ्ट पर निर्भर रहने के बजाय भारत अपने बंकर बस्टर को मिसाइल डिलीवरी के लिए डिजाइन कर रहा है।

मैक 8 से मैक 20 की स्पीड में बनाई जा रही मिसाइल

फिलहाल अग्नि-5 के दो वैरिएंट बनाए जा रहे हैं। एक में जमीन के ऊपर के ठिकानों को तबाह करने की क्षमता होगी। वहीं, दूसरी एक गहरी पैठ वाली मिसाइल होगी, जो जमीन की गहराई में बने ठिकानों में घुस सकेगा। इसका डिजाइन GBU-57 की तरह बनाया गया है, लेकिन इसकी कीमत कम होगी।

हर मिसाइल का वजन आठ टन तक हो सकता है। यह अब तक विश्व में सबसे अधिक वजन वाली मिसाइल मानी जाएगी। हालाँकि, अग्नि-5 के नए वैरिएंट में 2500 किलोमीटर की कम रेंज होगी, बावजूद इसके उसका सटीक निशाना पुराने वाले से ज्यादा विनाशकारी होगा।

इन मिसाइल की गति मैक 8 से मैक 20 के बीच होगी, जो इन्हें हाइपरसोनिक हथियारों की श्रेणी में रखता है। ये अमेरिकी बंकर-बस्टर वेपन की स्पीड के बराबर ही होंगे, लेकिन इनकी पेलोड कैरी करने की क्षमता काफी अधिक होगी।