‘युवा’ राहुल गाँधी कॉन्ग्रेस को मजबूत करने के लिए इन दिनों युवक-युवतियों से मिल रहे हैं। केरल में दो दिवसीय चुनावी दौरे के दौरान वायनाड से सांसद राहुल गाँधी ने कोच्चि के महिला सेंट टेरेसा कॉलेज में सोमवार को छात्राओं से मुलाकात की।
हालाँकि, इन सबके बावजूद कॉन्ग्रेस नेता अपनी पार्टी को एकजुट करने में नाकाम साबित हो रहे हैं। बताया जा रहा है कि कॉन्ग्रेस में लोग राहुल गाँधी के नेतृत्व से असंतुष्ट हैं, जिसके चलते वे पार्टी से इस्तीफा दे रहे हैं। इससे कॉन्ग्रेस मजबूत होने की बजाय और बिखर रही है।
केरल में कॉन्ग्रेस पार्टी से नेताओं का इस्तीफा देने का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। सोमवार को केरल प्रदेश कॉन्ग्रेस समिति में उपाध्यक्ष और वरिष्ठ पार्टी नेता केसी रोसाकुट्टी ने विधानसभा चुनाव से पहले ही पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे दिया।
इसके साथ ही उन्होंने आरोप लगाया कि कॉन्ग्रेस पार्टी में लगातार महिलाओं की अनदेखी की जा रही है। इतना ही नहीं, पार्टी आलाकमान भी गुटबाजी में लगा हुआ है। केरल महिला आयोग की पूर्व चेयरपर्सन रोसाकुट्टी 1991-96 में वायनाड की सुल्तान बाथेरी विधानसभा सीट से विधायक रह चुकी हैं।
इससे पहले विधानसभा चुनाव में महिलाओं को पर्याप्त उम्मीदवारी नहीं मिलने से नाराज केरल महिला कॉन्ग्रेस की अध्यक्ष लतिका सुभाष ने कॉन्ग्रेस से अपना इस्तीफा दे दिया था। उन्होंने विरोध जताते हुए तिरुवनंतपुरम में पार्टी दफ्तर के बाहर ही सिर भी मुँड़वा लिया था।
बता दें कि केरल में हाल में कई बड़े नेताओं ने कॉन्ग्रेस छोड़ी है। इनमें प्रदेश सचिव एमएस विश्वनाथन, महिला कॉन्ग्रेस सचिव सुजया वेणुगोपाल, इंटक महासचिव पीके अनिल कुमार, प्रदेश कार्यसमिति सदस्य केके विश्वनाथन जैसे नेता शामिल हैं।
हाल ही में डासना के शिव-शक्ति मंदिर में आसिफ नाम के 15 साल के लड़के की पिटाई के बाद लिबरल गिरोह ने नैरेटिव बनाया था कि वो पानी पीने गया था, लेकिन उसे पीट दिया गया। हालाँकि, उसे पीटने के आरोपित श्रृंगी यादव ने बताया कि वो और उसका साथी महिलाओं के साथ अभद्र व्यवहार और शिवलिंग पर पेशाब कर रहा था। इस प्रकरण में वहाँ के महंत यति नरसिंहानंद सरस्वती (कभी उनका नाम दीपक त्यागी था) खासे चर्चा में रहे।
उन्होंने वामपंथी ब्रिगेड की जिस तरह से धज्जियाँ उड़ाई, उससे लोग खूब प्रभावित हुए। खासकर ‘The Quint’ के पत्रकारों के हर सवाल पर तगड़ा जवाब देकर उनके नैरेटिव को उन्होंने ध्वस्त किया। वो वीडियो इंटरनेट पर वायरल हुआ और एक सेंसेशन बन गया। लेकिन, क्या आपको पता है कि मॉस्को से इंजीनियरिंग और लंदन में नौकरी करने वाला एक व्यक्ति हिन्दू महंत कैसे बन गया? आइए, आपको बताते हैं यति नरसिंहानंद की कहानी।
इंजीनियर दीपक त्यागी कैसे बन गए डासना के महंत
पिछले साल महंत यति नरसिंहानंद सरस्वस्ती ने खुद ही एक लेख के माध्यम से अपने जीवन के कई अध्यायों के बारे में खुलासा किया था। ये लेख ‘समाचार 24×7’ में प्रकाशित हुआ था। इसमें उन्होंने एक मासूम के साथ हुई ‘लव जिहाद’ की घटना का ब्यौरा दिया है, जिसके कारण उनका जीवन बदल गया। इस लेख में उन्होंने एक लड़की की ‘दर्दनाक और सच्ची कहानी’ के बारे में बताया है। ये घटना 1997 की है, जब वो ‘दीपक त्यागी’ हुआ करते थे।
इस लेख में उन्होंने जानकारी दी है कि वो उस वक़्त मॉस्को से ‘इंस्टीट्यूट ऑफ केमिकल इंजीनियरिंग’ से Mtech की शिक्षा पूरी कर वापस देश लौटे थे। वे कुछ बड़ा करना चाहते थे और इसके लिए उन्हें लगा कि राजनीति में जाना चाहिए। उनका जन्म एक उच्च-मध्यम वर्गीय किसान परिवार में हुआ था और उनके दादाजी स्वतंत्रता से पहले बुलंदशहर जिले के कॉन्ग्रेस के पदाधिकारी थे। महंत यति को इस पर गर्व है कि वे उन बहुत कम लोगों में से थे, जिन्होंने आजादी के बाद स्वतंत्रता सेनानी के रूप में पेंशन नहीं ली।
वहीं उनके पिता केंद्रीय सरकार के कर्मचारियों की यूनियन के एक राष्ट्रीय स्तर के नेता थे। महंत यति का कहना है कि उनका जन्म एक त्यागी परिवार में हुआ तो उन्हें बाहुबल की राजनीति पसंद थी और कुछ जानने वालो ने उन्हें समाजवादी पार्टी की यूथ ब्रिगेड का जिलाध्यक्ष भी बनवा दिया था। उन्होंने बताया कि जैसा की राजनीति में सभी करते हैं, उन्होंने भी अपने बिरादरी के लोगों का एक गुट बनाया और कुछ त्यागी सम्मेलन आयोजित किए।
महंत यति नरसिंहानंद सरस्वती बताते हैं कि तब बहुत से त्यागी उनके साथ हो गए और उन्हें एक युवा नेता के तौर पर पहचाना जाने लगा। चूँकि उनके दादा जी कॉन्ग्रेसी, पिता यूनियन लीडर और खुद समाजवादी पार्टी के नेता थे, उनका मानना है कि तब उनका हिंदुत्व के किसी भी विचार से कुछ भी लेना-देना नहीं था और विदेश में पढाई-नौकरी के कारण धार्मिक बातों को केवल अंधविश्वास और ढोंग समझते थे।
वे लिखते हैं कि मेरठ में रहने और विदेश में पढ़ने और अपनी सामाजिक व राजनीतिक पृष्ठभूमि के कारण उनके बहुत सारे मुस्लिम दोस्त हुआ करते थे। एक दिन अचानक वे भाजपा के संस्थापक सदस्यों में से एक पूर्व सांसद बैकुंठ लाल शर्मा ‘प्रेम’ से मिले, जिन्होंने तभी संसद की सदस्यता से इस्तीफा देकर हिंदुत्व जागरण का काम शुरू किया था। उन्होंने दीपक त्यागी को मुस्लिमों के अत्याचार की ऐसी-ऐसी कहानियाँ बताई कि उनके ही शब्दों में कहें तो उनका दिमाग घूम गया, लेकिन विश्वास नहीं हुआ।
फिर उन्होंने उस घटना का जिक्र करते हुए बताया है कि उनका कार्यालय गाज़ियाबाद के शम्भू दयाल डिग्री कॉलेज के सामने था। उसी कॉलेज में पढ़ने वाली त्यागी परिवार की ही एक लड़की उनके पास आई और उसने कहा कि उसे उनसे कुछ काम है। जब महंत यति ने उससे काम पूछा तो उसने अकेले में बताने की बात कही। तब उन्होंने अपने साथ बैठे लोगों को बाहर जाने को कहा। जब सब चले गए तो अचानक वह लड़की रोने लगी और लगभग आधा घण्टा रोती ही रही।
महंत यति नरसिंहानंद सरस्वती ने इस घटना का विवरण देते हुए आगे बताया है कि उन्होंने उसे पानी पिलाने की कोशिश की तो उसने पानी भी नहीं पिया और उठ कर वहाँ से चली गई। उन्हें बहुत आश्चर्य हुआ। उनका कहना है कि उन्होंने इस तरह किसी अनजान महिला को रोते हुए नहीं देखा था। वो लिखते हैं कि उस ‘बच्ची’ का चेहरा बहुत मासूम सा था और उन्हें वो बहुत अपनी सी लगी। उन्हें ऐसा लगा की उनका और उसका कुछ रिश्ता है। उन्होंने आगे बताया:
“कुछ दिन बाद मैं उसे लगभग भूल गया कि अचानक वो फिर आई और उसने मुझसे कहा कि वो मुझसे बात करना चाहती है। मैंने फिर अपने साथियों को बाहर भेजा और उसको बात बताने को कहा। उसने बात बताने की कोशिश की परन्तु वो फिर रोने लगी और उसका रोना इतना दारुण था कि मुझ जैसे जल्लाद की भी आँखे भर आईं। मैंने उसके लिए पानी व चाय मँगवाई। धीरे-धीरे वो सामान्य हुई और उसने मुझे बताया कि एक साल पहले उसकी दोस्ती उसके क्लास की एक मुस्लिम लड़की से हो गई थी, जिसने उसकी दोस्ती एक मुस्लिम लड़के से करा दी।”
“उन दोनों ने मिल कर उसके कुछ फोटो ले लिए थे और पूरे कॉलेज के जितने भी मुस्लिम लड़के थे, उन सबके साथ उसको सम्बन्ध बनाने पड़े। अब हालत ये हो गई थी कि वो लोग उसका प्रयोग कॉलेज के प्रोफेसर्स को, अधिकारियो को, नेताओं को और शहर के गुंडों को खुश करने के लिए करते थे और इस तरह की वो अकेली लड़की नही थी, बल्कि उसके जैसी पचासों लड़कियाँ उन लोगों के चंगुल में फँसी हुई थी। इसमें सबसे खास बात ये थी जो उसने मुझसे बताई की सारे मुस्लिम लड़के-लड़कियाँ एकदम मिले हुए थे और बहुत से हिन्दू लड़के भी अपने अपने लालच में उनके साथ थे और सबका शिकार हिन्दू लड़कियाँ ही थी।”
डासना के महंत यति नरसिंहानंद सरस्वती ने उस लेख में बताया है कि उनके दिमाग में ये घूम रहा था कि वो लड़की उन्हें ये सब क्यों बता रही है और उन्होंने ये सवाल पूछा भी। उस लड़की ने उनसे कहा कि वो सारे मुस्लिम हमेशा उनके साथ दिखाई पड़ते हैं। लड़की ने कहा कि एक तरफ तो वो त्यागियों के उत्थान की बात करते हैं और दूसरी तरफ ऐसे लोगों के साथ रहते हैं जो इस तरह से बहन-बेटियों को बर्बाद कर रहे हैं।
बकौल महंत यति नरसिंहानंद सरस्वती, जब उस लड़की ने कहा कि उसकी बर्बादी के जिम्मेदार उनके जैसे लोग हैं, तब उन्हें ये बात बहुत बुरी लगी। मुस्लिमों के साथ घूमने के कारण उस लड़की ने यहाँ तक अंदाज़ा लगा लिया कि उन्हें भी कुछ न कुछ मिलता है, तभी वो चुप हैं। उसी लड़की से उन्होंने जिहाद शब्द पहली बार सुना और उन्होंने उस लड़की के साथ हुई दरिंदगी का पता लगाया, इस्लामी साहित्य पढ़े और पूर्व सांसद प्रेम की बातों को याद किया। तब दीपक त्यागी यति नरसिंहानंद सरस्वती बनने लगे।
लाखों लोग महंत यति नरसिंहानंद सरस्वती के तर्कों के फैन हो गए हैं
उन्होंने आशंका जताई कि उस लड़की ने आत्महत्या कर ली और वो उसे बचा नहीं सके। वो लिखते हैं, “आज मैं देखता हूँ कि ऐसी घटनाएँ तो हमारे देश में रोज होती है और किसी को कोई फर्क नहीं पड़ता। यहाँ तक की जिनकी बेटियों और बहनों के साथ ऐसा होता है उन्हें भी कोई फर्क नहीं पड़ता। लेकिन, मुझे फर्क पड़ा और मैं जानता हूँ कि मैंने जो कुछ किया वो बहुत अच्छा किया। मुझे किसी बात का कोई अफ़सोस नहीं है। मैं जो भी कर सकता था, मैंने किया और जो भी कर सकता हूँ, तब तक करूँगा जब तक ज़िंदा हूँ।”
बता दें कि डासना व आसपास के इलाकों में यादवों और गुर्जरों के बीच खासा संघर्ष हुआ करता था। उस तनाव के कारण जब स्थिति नियंत्रण से बाहर होती जा रही थी, तब महंत सरस्वती ने आगे आकर शांति स्थापित करने के लिए पहल किया। उन्होंने दोनों समुदायों को समझाया था कि वे एक ही माँ के दो हाथ हैं, इसीलिए लड़ना बंद करें। उन्होंने दोनों समुदायों के लोगों को बताया कि कैसे हिन्दुओं की आपसी लड़ाई का फायदा हिंदुत्व-विरोधी ताक़तों को मिलता रहा है।
महाराष्ट्र के अमरावती से निर्दलीय सांसद नवनीत राणा ने कहा है कि वह शिवसेना सांसद अरविंद सावंत के खिलाफ पुलिस में शिकायत दर्ज कराएँगी। इससे पहले उन्होंने सावंत पर धमकी देने का आरोप लगाते हुए लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को पत्र लिखा था।
बकौल राणा सचिन वाजे का मसला सदन में उठाने को लेकर सावंत ने उन्हें धमकी दी। नवनीत राणा के अनुसार सावंत ने उनसे कहा, “तू महाराष्ट्र में कैसे घूमती है, मैं देखता हूँ। तेरे को भी जेल में डालेंगे।” उन्होंने आरोप लगाया था कि इससे पूर्व भी शिवसेना के लेटर हेड और फोन कॉल के माध्यम से उनके चेहरे पर तेजाब फेंकने की धमकी दी जा चुकी है। उन्होंने सावंत के बयान को न सिर्फ अपना, बल्कि पूरे देश की महिलाओं का अपमान करार दिया था।
I will lodge a Police complaint (against Arvind Sawant): Maharashtra MP Navneet Rana
She had yesterday written to Lok Sabha Speaker alleging that Shiv Sena MP Arvind Sawant threatened her in Parliament premises after she raised Sachin Waze case in the House. pic.twitter.com/ImYpwxqnXa
एंटीलिया के बाहर बम रखे जाने और परमबीर सिंह के पत्र का मामला उठाते हुए राणा ने लोकसभा में कहा था कि 16 साल के लिए एक आदमी को किस आधार पर निलंबित किया गया और जेल में बंद कर दिया गया? जब बीजेपी की सरकार थी तब उद्धव ठाकरे ने खुद देवेंद्र फडणवीस को सचिन वाजे को वापस बुलाने के लिए कहा था। इस पर फडणवीस ने मना कर दिया था। जब ठाकरे सरकार में आए तो उन्होंने उन्हें बहाल कर दिया।
उन्होंने कहा, “मुख्यमंत्री बनते सचिन वाजे को उद्धव ने क्राइम यूनिट में भेजा। इस पर मैंने सदन में जनता और संविधान द्वारा दिए गए अधिकार के तहत बात की तो अरविंद सावंत को मिर्ची लग गई। मुझे कोई पुरुष बताएगा कि मेरी बॉडी लैंग्वेज कैसी होगी? मेरे तरफ से गुजरते हुए उन्होंने मुझे जेल भेजने की धमकी दी। मैंने बगल में बैठे एक साथी सांसद ने भी उनकी धमकी को सुना। मुझे पहले भी कहा जाता रहा है कि चेहरे पर इतना घमंड है, इस पर तेजाब फेंक देंगे। कहीं घूमने के लायक नहीं रहोगी।”
वहीं सावंत ने राणा के आरोप को झूठ करार देते हुए कहा था कि एक तो वो महिला हैं और उन्हें भैया कह कर पुकारती हैं, ऐसे में कोई शिवसैनिक महिलाओं को धमकाने का काम नहीं कर सकता। उन्होंने नवनीत राणा के बात करने के तरीके पर सवाल उठाते हुए कहा कि उनके हर बयान की वीडियो क्लिपिंग में उनकी बॉडी लैंग्वेज और सीएम ठाकरे के लिए उनके शब्दों को सुना जा सकता है। सावंत ने कहा कि मैं उन्हें क्यों धमकाऊँगा?
हैदराबाद के सांसद और AIMIM के मुखिया असदुद्दीन ओवैसी द्वारा कोविशील्ड वैक्सीन लेने के बाद सोशल मीडिया पर रिएक्शंस की बाढ़ आ गई। कुछ ने ओवैसी को सराहा तो कुछ ने उनके पुराने बयानों को लेकर उन्हें घेरा।
भाजपा नेता कपिल मिश्रा ने ओवैसी के टीका लगवाने के लिखा, कागज दाबे काँख में…टीका लिया लगाय…।”
कागज दाबे कांख में टीका लिया लगाय मियां जी अब सेफ है कौम बाढ़ में जाएं
अन्य यूजर्स ने ओवैसी को लेकर कहा, “देश का धान मुफ्त खाएँगे। देश का टीका लगवाएँगे। छात्रवृत्ति लेंगे, पेंशन लेंगे, सब फ्री की योजनाएँ लेंगे, अल्पसंख्यक आरक्षण लेंगे पर भारत माता की जय ओर वंदे मातरम इनके लिए हराम है। गजब के दो@ले हो।”
सत्यनारायण नाम के यूजर ने लिखा, “हिन्दुओं से इतनी नफरत करने वाले और हमेशा कौम के नाम पर मुस्लिमों को बरगलाने वाले ने कागज भी दिखा दिए और टीका भी लगवा लिया।”
हिन्दुओं से इतनी नफरत करने वाले और हमेशा कौम केनाम फर मुस्लिमों को बरगलाने वाले ने कागज भी दिखा दिये और टीका भी लगवा लिया। pic.twitter.com/b2HsITYXWg
— Satyanarayan Joshi,Secretary Market Association (@satnarayan1234) March 23, 2021
करीम खान ने वैक्सीन पर अविश्वास जताते हुए कहा, “मेरी मम्मी को भी बुलाया गया था। लेकिन मैंने मना कर दिया वैक्सीन लेने से। क्योंकि ऐसा सुनने में आया था कि इससे बहुत लोगों की डेथ भी हो गई है। मगर अब साहब को देख कर हिम्मत आई है इंशाल्लाह बहुत जल्द अपनी अम्मी को भी इसका टीका दिलाऊँगा।”
Meri Ammi Ko BhI Bulaya Gya Tha But Maine Mana Kardiya Vaccine Lene Se Kyu Ki Aisa Sunne Main Aaya Tha Ki Bhaut Logo Ki Deat BhI Hogyi Hai Isse But Abhi Sadar Sahab Ko Dekh Kar Himmat Aayi Hai Insha Allah Bhaut Jald Meri Ammi Ko Iska Tika Dilaunga
दूसरी ओर बिहार में कोरोना के कारण जान गॅंवाने वाले पहले व्यक्ति रहे मोहम्मद सैफ के दामाद का कहना है कि यदि सरकार ने जबरदस्ती दे दिया तो ले लेंगे, वरना नहीं ले लेंगे। दैनिक भास्कर से सैफ के दामाद मो. साहब ने कहा, “जबरदस्ती दे देगा तो क्या करेंगे! वैसे, नहीं लेंगे। भरोसा नहीं है भारत के टीका पर। ससुर (मो सैफ) को तो कोरोना था भी नहीं। हमलोग बॉडी बाँधे, हमको तो नहीं हुआ कोरोना! घर में किसी-किसी को कोरोना बता दिया। ऐसे ही टीका भी भरोसे का नहीं है। उनके माँ-बाप भी नहीं लिए हैं। हमारे आसपास, गाँव-मुहल्ले में भी कोई नहीं विश्वास नहीं कर रहा है। हम भी नहीं करते हैं। नहीं लेंगे यह टीका।”
साहब ने कहा, “भारत में टीका पर राजनीति कर रहे हैं सब। जब कोई लक्षण दिखेगा तो टीका लगवाया जाएगा। पूरे विश्व में सबसे खराब राजनीति भारत की है। इसलिए हम लोग टीका नहीं लगवाना चाहते हैं। कोई दूसरी कंट्री टीका लगाए तो हम आँख बंदकर लगवा सकते हैं, लेकिन भारत का टीका नहीं लगवाएँगे। जहाँ राजनीति ज्यादा होती है, वहीं गड़बडी होती है। आसपास भी कोई नहीं लगवा रहा है, बस डॉक्टर लोग ही लगवा रहे हैं।”
किसान आंदोलन के कारण तीन राज्यों में 16 मार्च तक 814.4 करोड़ रुपए के टोल राजस्व का नुकसान भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) को हुआ। केंद्रीय सड़क, परिवहन, राजमार्ग और एमएसएमई मंत्री नितिन गडकरी ने राज्यसभा में एक लिखित जवाब में यह जानकारी दी। ये तीन राज्य हैं, पंजाब, हरियाणा और राजस्थान।
इकोनॉमिक्स टाइम्स के अनुसार केन्द्रीय मंत्री ने सोमवार को संसद में कहा कि नुकसान मुख्यतः पंजाब और हरियाणा के राज्यों में हुआ है। इसके अतिरिक्त राजस्थान के कुछ टोल प्लाजा भी इस आंदोलन के कारण प्रभावित हुए हैं। पंजाब, हरियाणा एवं राजस्थान में क्रमशः 487 करोड़, 326 करोड़ एवं 1.40 करोड़ रुपए का नुकसान हुआ है।
नितिन गडकरी ने यह भी बताया किसी अन्य राज्य में किसानों के प्रदर्शन के कारण टोल राजस्व का नुकसान नहीं हुआ है। किन्तु पंजाब सरकार से निवेदन किया गया है कि वह राज्य के भीतर टोल प्लाजा की निर्बाध कार्यप्रणाली पर ध्यान दें।
50,000 करोड़ रुपए का व्यापार नुकसान:
118 दिनों से चल रहे इस प्रदर्शन के कारण न केवल एनएचएआई को अपितु स्थानीय व्यापार का भी भारी मात्रा में नुकसान हुआ है। प्रदर्शन के लिए वैकल्पिक स्थान उपलब्ध कराने के लिए पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय में याचिका दायर की गई थी। कारण था, प्रदर्शनकारी किसानों द्वारा पटियाला के कई वेयर हाउस में कब्जा जमा लेना जिसके कारण भारी व्यापार नुकसान हुआ।
रिपोर्ट के अनुसार की कॉन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (CAIT) ने जानकारी दी कि किसानों के इस प्रदर्शन के कारण दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र में ही जनवरी तक लगभग 50,000 करोड़ रुपए का व्यापार नुकसान हुआ है। बावजूद इसके कथित किसान नेता आंदोलन को न केवल जीवित रखना चाहते हैं, बल्कि देश के अन्य हिस्सों में भी उसका विस्तार करना चाहते हैं।
हाल ही में राकेश टिकैत और दर्शन पाल कृषि कानूनों के विरोध में बैंगलोर में भी अपनी असहमति दर्ज करा चुके हैं। राकेश टिकैत की आगामी योजना शहीद दिवस पर हरियाणा, पंजाब और उत्तर प्रदेश से समर्थकों को एकत्र करने की है। इसके पश्चात उनका अगला चरण होगा 28 मार्च को होली के दिन तीनों कृषि कानूनों की प्रतियाँ जलाना। 5 अप्रैल को सुबह के 11 बजे से शाम 5 बजे तक पूरे देश में भारतीय खाद्य निगम (FCI) के कार्यालयों का घेराव करने का आह्वान भी किया गया है।
NOTE: इस खबर के साथ लगाई गई वीडियो और फोटो को हटा लिया गया है। कारण है शादीशुदा जोड़े की सुरक्षा। वीडियो के कारण जहाँ भी वो हैं, उनकी पहचान उजागर होने का खतरा है और मुस्लिम पक्ष के लोगों ने सरेआम उनको मार डालने की धमकी दी है। OpIndia की अपील है अपने पाठकों से – अगर आपके पास भी वो वीडियो है, तो कृपया उसे फॉर्वर्ड न करें, शादीशुदा जोड़े को अपना जीवन खौफ में न जीनें दें।
दिल्ली के सराय काले खाँ में एक दलित हिन्दू युवक ने एक मुस्लिम लड़की से शादी की, जिसके बाद लड़की के परिजनों ने दलित बस्ती में घुस कर हमला कर दिया। अब शादीशुदा जोड़े ने सुरक्षा की माँग की है।
22 वर्षीय युवक ने कहा कि उन्होंने मार्च 17 को अपनी मर्जी से शादी की है और लड़की भी बालिग़ है। युवक ने कहा कि लड़की के घर वालों ने उसकी बस्ती में हमला कर के ईंट-पत्थर चलाए व चाकू-तलवार से हमला किया।
युवक और युवती ने वीडियो जारी कर के सुरक्षा की गुहार लगाई है। उन्होंने कहा कि गली तहस-नहस कर दी गई है और धारदार हथियारों से किए गए वार में कई लोग घायल भी हुए हैं।
उक्त युवक ने बताया कि उसके पिता को जान से मारने की धमकी दी जा रही है और ऐसी ही धमकियाँ उसे भी लगातार मिल रही है। युवक ने परिवार और खुद के लिए सुरक्षा की गुहार लगाई।
युवक ने आरोप लगाया कि लड़की के परिवार वाले दंगे-फसाद कर रहे हैं। वहीं उसी वीडियो में युवती ने कहा कि वो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से सुरक्षा की माँग करती हैं। युवती ने बताया कि उसने अपनी मर्जी से बिना किसी दबाव के शादी की है।
बता दें कि दलित युवक सुमित के मुस्लिम समुदाय की लड़की से शादी करने से नाराज युवती के परिजनों और उनके साथियों ने शनिवार (मार्च 20, 2021) रात सराय काले खाँ गाँव की दलित बस्ती में बेखौफ जमकर उत्पात मचाया था। 50 से अधिक की संख्या में बस्ती में घुसी मुस्लिम भीड़ ने हिन्दुओं की कुल तीन गलियों को निशाना बनाया और तलवार लाठी डंडे और पत्थरों के साथ जमकर हमला कर दिया।
उत्तर प्रदेश के फर्रुखाबाद मेंं सिटी मजिस्ट्रेट अशोक कुमार मौर्य ने पीस कमेटी की बैठक को संबोधित करते हुए होली को नशे का त्योहार बताया। बैठक होली और शब-ए-बारात के मद्देनजर नगर में होने वाले इंतजामों की चर्चा को लेकर हो रही थी। हालाँकि, मजिस्ट्रेट ने इंतजामों पर बात करते हुए हिंदुओं के त्योहार होली के लिए विवादित बयान दे दिया। उन्होंने कहा कि होली नशे का त्योहार है, इसलिए सभी लोग अपने अपने बच्चों का स्वयं ध्यान रखें।
जानकारी के अनुसार, मजिस्ट्रेट अशोक मौर्या ने बैठक में कहा कि होली एक ऐसा त्योहार है जिसमें लोग शराब पीतें हैं और नशा करते हैं। वह बोले, “होली ड्रग्स का त्योहार है, इसलिए उत्सव के दौरान शहर में होने वाली किसी भी संदिग्ध गतिविधियों पर प्रशासन को कड़ी निगरानी रखनी होगी।” मौर्य ने आगे कहा, “अगर आपको कहीं भीं शराब या ड्रग की बिक्री को लेकर को कोई भी जानकारी मिले तो आप फौरन पुलिस को सूचित करें।”
सिटी मजिस्ट्रेट के इस बयान को सुनने के बाद वहाँ बैठे एक वकील डॉ. दीपक द्विवेदी भड़क गए। डॉ. दीपक ने आपत्ति जाहिर करते हुए मौर्य से माफी माँगने को कहा। जवाब में मौर्य ने कहा कि उनके कहने का यह मतलब नहीं था। इसके बाद हिंदू जागरण मंच के सदस्यों ने भी सिटी मजिस्ट्रेट के खिलाफ़ प्रदर्शन किया। चौक बाजार इलाके में मजिस्ट्रेट के पुतले जलाए गए।
पहले भी होली पर लिबरल प्रोपेगेंडा
ये पहली बार नहीं जब हिंदू त्योहारों को बदनाम करने का प्रयास हुआ है। इससे पूर्व भी वामपंथी-कट्टरपंथी प्रोपेगेंडा के तहत हिंदू त्योहारों को बुरा भला कहा जाता रहा है। पिछले साल सोशल मीडिया पर होली को रेप और शोषण का त्योहार बता दिया गया था।
द क्विंट ने होली पर हिंदूफोबिया कंटेंट को बढ़ावा देते हुए इस त्योहार को एक ऐसा अवसर कहा था जहाँ बच्चे सड़कों पर आतंक मचाते हैं। फिर स्क्रॉल ने भी इस त्योहार पर ऐसी रिपोर्ट छापी थी जिससे पता चले कि आखिर किस तरह देश में पानी के लिए हाहाकार है और त्योहार को मनाने के लिए हिंदू उसे ही बर्बाद कर देते हैं।
मुंबई के पूर्व पुलिस कमिश्नर परमबीर सिंह के पत्र से पिंड छुड़ाने की कोशिश में एनसीपी (NCP) और उलझती ही जा रही है। सिंह ने महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे को लिखे पत्र में राज्य के गृहमंत्री अनिल देशमुख पर आरोप लगाया था कि उन्होंने सजिन वाजे को 100 करोड़ रुपए की वसूली का टारगेट दिया था। देशमुख का बचाव करते हुए एनसीपी सुप्रीम शरद पवार ने कहा था कि पत्र में जिस समय की बात की गई है उस वक्त गृह मंत्री अस्पताल और क्वारंटाइन में थे।
सोमवार को पवार ने दावा किया कि देशमुख 15 से 27 फरवरी तक नागपुर में थे। पवार ने इसके जरिए यह साबित करने की कोशिश की थी कि फिर इस दौरान मुंबई में वाजे और देशमुख की मुलाकात कैसे संभव है। लेकिन, इस दावे को देशमुख ने ही गलत साबित कर दिया है। उन्होंने बताया है कि वे एक प्राइवेट प्लेन से नागपुर से मुंबई गए थे।
This has been brought to my notice that Maharashtra HM Shri @AnilDeshmukhNCP who was detected #covid positive in February got discharged from hospital on 15th February and advised to be home quarantine between 15th to 27th February. During this period, he was house quarantined.
ट्विटर पर एक वीडियो जारी कर देशमुख ने कहा है कि नागपुर में 15 फरवरी को उन्हें अस्पताल से छुट्टी मिली थी। इसके तत्काल बाद आवश्यक अनुमति और सरकारी गाइडलाइन का पालन करते हुए होम क्वारंटाइन के लिए वे मुंबई निकल गए। उनका दावा है कि इसके बाद 27 फरवरी तक वह होम क्वारंटाइन में रहे।
एबीपी न्यूज के पत्रकार विकास भदौरिया ने ट्विटर पर यात्रा दस्तावेज साझा करते हुए कहा है कि देशमुख प्राइवेट प्लेन से नागपुर से मुंबई गए थे। 15 फरवरी को अनिल देशमुख के नाम से एक प्राइवेट प्लेन का यात्रा दस्तावेज उन्होंने साझा किया है।
इससे पहले जब पूछा गया था कि अनिल देशमुख कैसे क्वारंटाइन और आइसोलेशन में थे कि वो प्रेस कॉन्फ्रेंस भी कर रहे थे और खुलेआम घूम भी रहे थे, तो शरद पवार अस्पताल के कागजात दिखाने लगे थे। उन्हें इसका कोई जवाब नहीं सूझा। उन्होंने नागपुर के एलेक्सिस अस्पताल के डिस्चार्ज पेपर दिखाए थे। बाद में उसी अस्पताल के कागजात से पता चला कि उस अवधि में अनिल देशमुख को घूमने-फिरने की पूरी अनुमति थी और उन्हें किसी प्रकार के क्वारंटाइन की सलाह नहीं दी गई थी।
इस मामले में 5 बड़े सवाल उठते हैं, जिनका जवाब शरद पवार को देना चाहिए। सबसे पहला सवाल तो यही है कि जिस अवधि में अनिल देशमुख प्रेस कॉन्फ्रेंस कर रहे थे, कॉन्ग्रेस नेताओं के प्रतिनिधिमंडल से मिल रहे थे और अपने मृत सुरक्षा गार्ड के परिजनों को सांत्वना देने उसके घर गए थे – तब उनके क्वारंटाइन, आइसोलेशन या फिर में होने के दावों के लिए जो कागजात शेयर किए गए, क्या वो फर्जी थे? खुद शरद पवार और अनिल देशमुख के बयानों में विरोधाभास है। जहाँ पवार ने कहा है कि देशमुख फरवरी में नागपुर में क्वारंटाइन में थे, वहीं देशमुख ने अपने बयान में खुद के मुंबई में क्वारंटाइन होने की बात कही है।
शरद पवार ने पत्रकारों द्वारा सवाल पूछने के बाद यहाँ तक दावा कर दिया कि अनिल देशमुख ने फरवरी 15 को वर्चुअल प्रेस कॉन्फ्रेंस की थी। क्या वो ठीक उसी तरह झूठ बोल रहे हैं जैसे उन्होंने 1993 बम ब्लास्ट में मुस्लिमों को पीड़ित दिखाने के लिए मस्जिद में बन होने की झूठी अफवाह फैला दी थी? तीसरा सवाल ये है कि अगर देशमुख को सच में क्वारंटाइन में रहने की सलाह दी गई थी तो फिर वो घूम-घूम कर लोगों की जान संकट में डाल रहे थे?
चौथा सवाल ये है कि अगर कोरोना पॉजिटिव रहते अनिल देशमुख ने प्रेस कॉन्फ्रेंस की तो फिर क्या वो पत्रकारों के लिए खतरा नहीं पैदा कर रहे थे? पाँचवाँ सवाल है कि उन्होंने पूरी लाव-लश्कर के साथ अपने मृत सुरक्षा गार्ड के परिजनों से क्यों मुलाकात की थी? अनिल देशमुख का कहना है कि उन्होंने पहली बार फरवरी में 28 तारीख को घर के बाहर कदम रखा। इन विरोधाभासी चीजों पर NCP को स्पष्टीकरण जारी करना चाहिए।
मुकेश अंबानी के घर के बाहर विस्फोटक लदी कार रखने और उस कार के मालिक मनसुख हिरेन की हत्या के मामले में आरोपित सचिन वाजे की एक डायरी NIA के हाथ लगी है। इसमें उसने कथित तौर पर वित्तीय लेनदेन की एक सूची बनाई हुई है। ये डायरी निलंबित पुलिस अधिकारी के दफ्तर से मिली। अब NIA इसकी जाँच के लिए ED से संपर्क कर रही है। इस डायरी में कई बैंक खातों के विवरण भी हैं। परमबीर सिंह ने भी अपने पत्र में आरोप लगाया था कि महाराष्ट्र के गृह मंत्री अनिल देशमुख ने वाजे को 100 करोड़ की वसूली का टारगेट दे रखा था।
भाजपा ने पहले ही माँग की है कि इस मामले की जाँच किसी केंद्रीय एजेंसी से कराई जाए। जाँच एजेंसियों को शक है कि भेद खुलने के डर से सचिन वाजे ने मनसुख हिरेन की हत्या कर दी। अब ‘रिपब्लिक मीडिया नेटवर्क’ ने इस मामले की जाँच कर रही ATS के हाथ लगे एक फोन कॉल ट्रांसक्रिप्ट के हवाले से बड़ा दावा किया है। ये बातचीत मनसुख हिरेन और उनके भाई विनोद की है। ये बातचीत कुछ इस प्रकार है:
विनोद: आप सो गए क्या? क्या हुआ? मनसुख हिरेन: अब हमें किसी भी प्रकार का बयान दर्ज कराने के लिए नहीं जाना पड़ेगा। सब ठीक है। विनोद: आपने अपने बयान में क्या लिखवाया? बताया कि उस स्कॉर्पियो का प्रयोग वाजे कर रहा था? मनसुख हिरेन: नहीं। मैंने इस चीज का जिक्र नहीं किया। विनोद: आपने ऐसा क्यों नहीं किया? मनसुख हिरेन: क्योंकि सचिन वाजे ने ही मुझसे कहा है कि मैं किसी से इस बात का जिक्र न करूँ कि उस स्कॉर्पियो का प्रयोग वो कर रहा था।
NIA के पास मामला जाते ही मनसुख हिरेन की हत्या की जाँच कर रहे महाराष्ट्र ATS ने दावा कर डाला है कि बुकी नरेश धरे और निलंबित पुलिस अधिकारी विनायक शिंदे की गिरफ्तार के साथ ही उसने इस मामले को सुलझा लिया है। ATS ने कहा कि धरे ने वाजे को गुजराती सिम कार्ड उपलब्ध कराया और उसी से फोन कॉल कर के वाजे ने मनसुख हिरेन को बुलाया, जिसके बाद उनकी हत्या हुई। भाजपा ने सचिन वाजे के नाम पर कई कंपनियों के रजिस्टर होने के आरोप लगाए हैं।
उधर NIA ने एक पाँच सितारा होटल की तलाशी ली, जहाँ वाजे कुछ दिनों पहले रुका था। जाँच टीम ने नरीमन प्वाइंट के ट्राइडेंट होटल के एक कमरे में तलाशी ली। इसी कमरे में वाजे 16-20 फरवरी, 2021 को रुका था। बताया गया है कि उसने जाली आधार कार्ड से ये कमरा बुक किया था, जिसमें फर्जी नाम से उसकी तस्वीर थी। होटल के दस्तावेज और CCTV फुटेज लिए गए हैं। होटल के कमरे से भी कुछ दस्तावेज मिले हैं।
सबसे बड़ी बात तो ये है कि जब वाजे वहाँ रुका था, उसी दौरान लाइसेंस शर्तों का उल्लंघन के लिए मुंबई में कई जगहों पर उसके ही नेतृत्व में छापेमारी हुई थी। NIA अब मनसुख हिरेन की हत्या के मामले में ATS से सारी जानकारी ले रही है और पीड़ित परिजनों से भी एक टीम ने मुलाकात की। भाई विनोद ने बताया कि अब तक NIA ने मनसुख हिरेन की हत्या का अलग से आधिकारिक मामला दर्ज नहीं किया है, लेकिन कहा कि कुछ दिनों में वो फिर मिलेंगे।
साल 2004 से निलंबित चल रहे सचिन वाजे को कोरोना महामारी में पुलिस अधिकारियों की आवश्यकता का हवाला देते हुए पिछले साल महाराष्ट्र सरकार ने बहाल कर दिया था। इस दौरान वाजे को क्राइम इंटेलिजेंस यूनिट का प्रमुख नियुक्त किया गया था। वाजे की बहाली और हाई प्रोफाइल मामलों को असाइन करने की परिस्थितियाँ भी जाँच के दायरे में हैं। बता दें कि निलंबित होने के बाद वाजे शिवसेना में शामिल हो गया था।
अफ्रीकी देश नाइजर में माली सीमा के समीप बसे गाँवों में मोटरबाइक से आए बंदूकधारियों ने कम से कम 137 लोगों को मौत के घाट उतार दिया। सरकारी प्रवक्ता अब्दुर्रहमान जकारिया ने रविवार (मार्च 21, 2021) को सभी हत्याओं की पुष्टि की। इससे पहले टोचंबांगो (Tchombangou ) और ज़ारुमदारेई (Zaroumdareye) के पश्चिमी गाँवों में कम से कम 100 लोग मारे गए थे।
नाइजर में ऐसे हमले राष्ट्रपति चुनाव की घोषणा और मोहम्मद बजूम (Mohamed Bazoum) के राष्ट्रपति नियुक्त होने के बाद से तेज हुए हैं। जिस दिन सरकारी प्रवक्ता ने हालिया हत्याओं की पुष्टि की उस दिन बजूम को नाइजर की संवैधानिक अदालत में आधिकारिक तौर पर फरवरी के चुनावों का विजेता करार दिया गया था। इसी प्रकार जनवरी में भी जब दो गाँवों में कम से कम 100 लोग मारे गए थे उस दिन राष्ट्रपति चुनावों की तारीख की घोषणा हुई थी।
हालिया हमलों की जिम्मेदारी फिलहाल किसी समूह ने नहीं ली है। लेकिन माली और नाइजर की सीमा पर बसे गाँवों में अक्सर इस्लामी कट्टरपंथी अपना कहर बरपाते रहते हैं। इस बार भी संदेह उन पर ही है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि हथियारबंद लोग मोटरसाइकिल पर आए और हर उस चीज पर गोली चलाई, जो हिल रही थी। आतंकियों ने जिन गाँवों पर हमला किया, वह टाहौआ क्षेत्र में आते हैं। इस्लामी कट्टरपंथी नाइजर के गाँवों में हमले करते हैं जिसके कारण अब तक यहाँ हजारों लोग मारे जा चुके हैं। हिंसा से त्रस्त होकर 50 लाख से ज्यादा अपना घर छोड़ चुके हैं।
नाइजर के अलावा बुर्किना फासो और माली भी इसी संघर्ष से सालों से जूझ रहे हैं। यहाँ इस्लामी स्टेट और अलकायदा का कहर ज्यादा है। इन आतंकी समूहों ने हजारों की जान ली हैं।
उल्लेखनीय है कि बीते हफ्ते 15 मार्च को तिलाबेरी क्षेत्र में जेहादियों ने दुकानदारों को लेकर जा रही बस को किडनैप कर लिया था और 66 लोगों को मार डाला था। इसके बाद उन्होंने डारे-डे गाँव में हमला बोला। जहाँ लोगों को मारा गया और दुकानों को आग लगाई गई। 2 जनवरी को भी दो गाँवों पर हमला हुआ था। जहाँ 100 लोगों को मौत के घाट उतारा गया।