मुंबई में कुत्ते के साथ रेप का एक और मामला सामने आया है। इस बार इस तरह की वारदात सांताक्रुज के कलीना से सामने आई है। कुतिया के साथ रेप के आरोपित की पहचान 20-25 वर्ष के तौफीक अहमद के तौर पर हुई है। CCTV सर्विलांस कैमरे में ये घटना कैद हो गई। इस मामले में ‘अप्राकृतिक सेक्स’ के आरोप में FIR दर्ज की गई है। वकोला पुलिस थाने में FIR दर्ज की गई है।
पशु अधिकार संस्था ‘एनिमल रेस्क्यू एंड केयर ट्रस्ट (ARAC)’ के अध्यक्ष सविता महाजन ने ‘टाइम्स ऑफ इंडिया’ को बताया कि आरोपित तौफीक अहमद के खिलाफ उन्होंने वकोला थाने में FIR दर्ज कराई है। इस आपराधिक वारदात की CCTV फुटेज सहित संस्था ने सभी इलेक्ट्रॉनिक सबूत भी पुलिस को उपलब्ध कराए हैं। सविता ने अस्सिस्टेंट कमिश्नर ऑफ पुलिस (ACP) सुधीर कुकडलकर को भी धन्यवाद दिया।
उन्होंने कहा कि पुलिस इंस्पेक्टर मिथुन पाटिल ने भी इस मामले की FIR दर्ज कराने में पूरा सहयोग दिया। जहाँ ये घटना हुई, वहाँ प्राइवेट कार को पार्क किया जाता है। चूँकि वहाँ एक समय में कई कार होते हैं, इसीलिए गाड़ियों के पार्ट-पुर्जे की चोरी रोकने के लिए CCTV सर्विलांस कैमरे लगाए गए। उन्हीं कैमरों में तौफीक को चीनो नामक कुतिया का रेप करते हुए पाया गया। वह एक हॉकर है जो उस इलाके में ब्रेड बेचता है।
थाने में FIR दर्ज होने के बाद पुलिस उसके स्थानीय पते पर उसे पकड़ने के लिए गई, लेकिन वहाँ पता चला कि वो अपने पैतृक घर के लिए निकल चुका है जो उत्तर प्रदेश में स्थित है। IPC की धारा-377 (अप्राकृतिक सेक्स) के तहत FIR दर्ज हुई है। सविता महाजन ने पुलिस से निवेदन किया है कि आरोपित को जल्द से जल्द पकड़ा जाए। मुंबई पुलिस इसके लिए यूपी पुलिस से संपर्क कर रही है।
हाल ही में मुंबई से ही अहमद शाह नामक बुजुर्ग को मादा कुत्ते के साथ रेप के आरोप में धरा गया था। पूछताछ के दौरान 68 वर्षीय आरोपित ने खाने का लालच देकर रात के 3-4 बजे के बीच 30-40 कुत्तों के साथ रेप करने की बात कही थी। आरोपित ने कहा था कि वह जानवरों को खाना देता है और उनके साथ रेप करता है, इसमें यदि जानवरों को कोई आपत्ति नहीं है तो यह क्राइम नहीं है।
मध्य प्रदेश में एक सरपंच के पति की हत्या से सनसनी मच गई है। विदिशा के लटेरी स्थित मुरवास पंचायत की सरपंच आशा देवी के पति संतराम वाल्मीकि धौलपुरिया (पिता सुंदरलाल) की वन माफिया ने गुरुवार (मार्च 18, 2021) को दोपहर में ट्रैक्टर से कुचल कर हत्या कर दी। इस घटना के बाद सिरोंज के विधायक उमाकांत शर्मा ने पुलिस पर भी कोई मदद न करने का आरोप लगाया है। संतराम सड़क पर तड़प रहे थे, लेकिन किसी ने उनकी मदद नहीं की।
विधायक का आरोप है कि पुलिस मौके पर मृतक को बचाने की बजाए आरोपित को बचाने में लगी हुई थी। विधायक ने वहाँ पहुँच कर आक्रोशित लोगों के साथ मुरवास थाने का घेराव भी किया। उन्होंने आरोप लगाया कि सोची-समझी साजिश के तहत हत्या की गई है। उन्होंने बताया कि तलवारों और बंदूकों के साथ चश्मदीदों को धमकाया गया। गवाही देने पर लोगों को हत्या की धमकी दी गई।
लटेरी के SDM ने घटना की संवेदनशीलता को देखते हुए धारा-144 लागू कर दिया है। जब ये घटना हुई, तब संतराम पंचायत भवन से भैरो चौक की तरफ जा रहे थे। दोपहर के दो बजे ब्लेड लगे ट्रैक्टर को चलाते हुए फ़क़ीर मोहम्मद का पुत्र रिजवान उधर से आया। उसके साथ उसके 3 साथी भी थे। उनलोगों ने ट्रैक्टर से बाइक को टक्कर मार दी। वो तब तक ट्रैक्टर को चलाते रहे, जब तक उन्हें लगा कि संतराम ने दम तोड़ दिया है।
Madhya Pradesh: A man, husband of the sarpanch of Murwas village in Vidisha, was crushed to death under a tractor in broad daylight on Friday, days after he lodged a complaint against encroachment of forest land. “FIR has been registered against six people,” a policeman said.
घटनास्थल पर ही संतराम की मौत हो गई। विदिशा के उसी गाँव का रहने वाले फ़क़ीर मोहम्मद वन माफिया है, जिस पर सरपंच के पति संतराम की हत्या करवाने का आरोप लगा है। सरपंच ने उसके और उसके पुत्र इरफ़ान के अलावा रिजवान, उमर, फारूक के अलावा हीरो इरफान पुत्र जहूर खान और सईद खान के बेटे शकील के खिलाफ शिकायत की थी। आरोप है कि फ़कीर मोहम्मद ने परिजनों के साथ मिल कर वन विभाग की सैकड़ों बीघा जमीन का अतिक्रमण कर लिया है।
इस बात की शिकायत सितंबर 10, 2020 को डीएम पंकज जैन से की गई थी। इसके बाद DM ने SDM को पत्र लिख जाँच के लिए कहा था। तभी से फ़क़ीर मोहम्मद ने संतराम के साथ रंजिश पाल रखी थी। फ़क़ीर का बेटा उमर वन विकास निगम में चौकीदार है और उसकी वन विभाग में अच्छी-खासी पैठ है। संतराम ने आरोप लगाया कि रेंजर संतोष दुबे और नाकेदार पंकज सहित कुछ लोग फ़क़ीर मोहम्मद को सभी चीजों की जानकारी दे देते थे।
वन माफिया की शिकायत करना दलित सरपंच को महंगा पड़ा, सरपंच की हत्या की
वन माफिया से सरकारी जमीन को बचाने का प्रयास दलित सरपंच को भारी पड़ गया. विदिशा की लटेरी तह. के अंतर्गत मुरवास गांव में वन माफिया ने दलित समाज से ताल्लुक रखने वाले संतराम बाल्मीकि की…https://t.co/pMs1CVkZRQpic.twitter.com/rmmnW4dYAw
DM ने वन विकास निगम के डिवीजनल मैनेजर आदर्श श्रीवास्तव को जनवरी 28, 2021 को इस मामले में कार्रवाई करने को कहा था। 9 मार्च को डिविजनल मैनेजर ने कार्रवाई हेतु अधिकारियों को पत्र जारी किया। इसके बाद मार्च 16 को जाँच के लिए टीम गठित की गई थी। थाना प्रभारी अनिरुद्ध पांडेय ने आरोपितों को बचाने की बात पर कहा कि थाने से घटनास्थल की दूरी 400 मीटर है, वो सिर्फ उसे पकड़ कर ले गए।
विदिशा के एसपी विनायक शर्मा ने कहा कि इस मामले में एक आरोपित को गिरफ्तार किया गया है। 6 लोगों के खिलाफ FIR दर्ज की गई है। स्थानीय लोगों ने इस मामले में न्याय की माँग करते हुए धरना दिया हुआ है। उनका पूछना है कि जिसने वन विभाग की भूमि पर कब्ज़ा किया, उसे ही चौकीदारी क्यों सौंपी गई? सरपंच संघ के अध्यक्ष सुरेंद्र सिंह रघुवंशी ने परिवार को आर्थिक मदद दिलाने और वाल्मीकि महापंचायत के युवा विंग प्रदेश महामंत्री रोहित घेंघट ने परिवार को न्याय दिलाने की माँग की।
राजनीति और चुनाव की चर्चा शुरू होते ही धनबल और बाहुबल की बात होने लगती है। एक धारणा यह भी है कि राजनीतिक दल सामान्य लोगों को टिकट नहीं देते हैं। लेकिन, जब आपकी नजर पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में किस्मत आजमा रहीं बीजेपी की उम्मीदवार कलिता माझी और चंदना बाउरी पर पड़ती है तो तमाम धारणाएँ टूट जाती हैं। इससे पता चलता है कि भारत का लोकतंत्र कितना मजबूत है।
कलिता माझी पूर्वी बर्दवान के आशाग्राम (आरक्षित सीट) से तो चंदना बांकुरा की सल्तोरा सीट से मैदान में हैं। महिला होने के साथ-साछ इनका चुनावों में उतरना इसलिए भी खास है, क्योंकि दोनों की पृष्ठभूमि बेहद सामान्य है।
कलिता माझी एक साधारण सी महिला हैं जो घर-घर में काम कर अपने परिवार का पेट पालती हैं। आम भाषा में कहें तो वह एक मेड हैं। भाजपा की ओर से टिकट मिलने के बाद वह चर्चा में आई हैं। वह अपने प्रचार में कोई कसर नहीं छोड़ना चाहती, पर चूँकि रोज-रोज काम निपटाने के बाद प्रचार करने निकलना उनके लिए थोड़ा कठिन था, इसलिए उन्होंने चुनाव तक अपने काम से 1 माह की छुट्टी ली है।
भाजपा उम्मीदवार कलिता माझी (साभार: न्यूजरूमपोस्ट)
कलिता बेहद गरीब परिवार से हैं। उन्होंने प्राइमरी स्कूल की शिक्षा पास करने से पहले ही पढ़ाई छोड़ दी थी। शादी के बाद भी उनकी स्थिति में सुधार नहीं हुआ। उनके पति प्लंबर का काम करते रहे। सिर्फ़ पति की कमाई से घर नहीं चलता था, इसलिए उन्होंने घर का खर्चा उठाने के लिए घर-घर काम करना शुरू किया।
साधारण सा जीवन जीने वाली कलिता की अब हर जगह चर्चा है (साभार: एबीपी न्यूज)
उनका बेटा पार्थ माझी आँठवी कक्षा में पढ़ता है। उनके मायके की भी स्थिति बहुत दुरुस्त नहीं है। वह 7 बहनों में से एक हैं। उनका एक भाई है। पिता भी मजदूर थे, जो अब इस दुनिया में नहीं हैं। वह भाजपा की ओर से टिकट मिलने के बाद दम लगाकर सफल होने की कोशिश कर रही है। चुनावों में उनका मुख्य मुद्दा गरीब बच्चों की पढ़ाई का है। उनका मकसद गरीब बच्चों को शिक्षा दिलवाना है। वह कहती हैं, “मुझे मालूम हैं गरीब की दशा। मैं गरीब छात्रों को शिक्षा के अवसर देने का भरपूर प्रयास करूँगी।:
दिहाड़ी मजदूर की पत्नी चंदना
माझी की तरह एक दूसरा नाम जो बंगाल चुनावों में चर्चा में है- वह चंदना बाउरी का है। 30 साल की चंदना, सल्तोरा विधानसभा क्षेत्र से भाजपा की उम्मीदवार हैं। संपत्ति के नाम पर चंदना के पास सिर्फ तीन बकरियाँ, तीन गाय और एक मिट्टी का घर है। घर में न पानी आता है, न शौचालय है। बैंक में कुल जमा 31 हजार 985 रुपए है।
चंदना के पति दिहाड़ी मजदूर हैं। बहुत मेहनत के बाद भी दिन खत्म होते उनके पास सिर्फ 400 रुपए आते हैं। जब मॉनसून के समय अन्य मजदूर काम पर नहीं आते तो चंदना खुद अपने पति की मदद करती हैं। दोनों के पास मनरेगा कार्ड है।
भगवा साड़ी और कमल के फूल के साथ वोट माँगने निकलीं चंदना (साभार: सोशल मीडिया)
चंदना के सपने ज्यादा बड़े नहीं हैं। लेकिन वह अपने घर में एक शौचालय चाहती हैं। अभी पिछले माह ही उन्होंने प्रधानमंत्री आवास योजना की पहली इंस्टालमेंट से 60,000 रुपए में दो कमरे बनवाए हैं। जिले की भाजपा सदस्य होने के बावजूद उनके लिए टिकट पाना बहुत बड़ी बात है। वह भगवा साड़ी में हर सुबह 8 बजे घर से निकलती हैं। साड़ी पर कमल का फूल होता है और साथ में उनका बेटा। वह लोगों को बताती हैं कि कैसे टीएमसी ने लोगों को लूटा।
अपने पति और परिवार के साथ चंदना बाउरी (साभार: न्यूजरूम पोस्ट)
चंदना को टिकट मिलने की जानकारी स्थानीय लोगों से मिली। लोगों ने टीवी पर देख उन्हें जानकारी दी थी। वह कहती हैं, “मैं गरीब परिवार से आती हूँ। भाजपा ने ये दर्शाया है कि आर्थिक स्थिति का मजबूत होना नेता बनने के लिए जरूरी नहीं है।”
वह बताती हैं कि 2011 में सत्ता में आने के बाद उनके पति को तृणमूल कार्यकर्ताओं ने बहुत सताया था तभी वह भाजपा से जुड़े। इसके बाद 2016 में चंदना, उत्तर गंगाजल घाटी मंडल की महिला मोर्चा में सचिव बनीं। उसके बाद बांकुरा जिले में मुख्य सचिव बनीं। चंदना ने दसवीं तक पढ़ाई की हैं।
महाराष्ट्र में नवबंर 2019 में शिवसेना, कॉन्ग्रेस और एनसीपी ने मिलकर उद्धव ठाकरे के नेतृत्व में महाविकास अघाड़ी की सरकार बनाई थी। उस समय से ही तीनों दलों के मतभेद और उद्धव ठाकरे में प्रशासनिक अनुभव की कमी के कारण राज्य में चीजें सरकार के नियंत्रण से बाहर होने का अंदेशा जताया जाता रहा है। ये सभी आशंकाएँ धीरे-धीरे सही साबित होती दिख रही हैं। एक तरफ राज्य में कोरोना का संक्रमण दिन प्रतिदिन फिर से बेकाबू होता जा रहा, दूसरी तरफ कानून-व्यवस्था की स्थिति भी लगातार बिगड़ रही है।
उद्योगपति मुकेश अंबानी के मुंबई स्थित घर एंटीलिया के बाहर 25 फरवरी 2021 को विस्फोटक लदी कार मिली थी। कार से जिलेटिन की 20 छड़े बरामद हुई थीं। इस मामले में रोजाना हो रहे चौंकाने वाले खुलासों के बीच अमरावती में विस्फोटक की बड़ी खेप मिली है।
मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक अमरावती जिले के तिवसा पुलिस थाना क्षेत्र से जिलेटिन की 200 छड़ें और 200 डेटोनेटर बरामद किए गए हैं। बताया जा रहा है कि एक बाइक पर सवार दो युवकों को जब पूछताछ के लिए रोका गया तो वे विस्फोटकों से भरा थैला फेंक भाग गए। पुलिस ने जब थैले को खोला तो इतनी बड़ी मात्रा में विस्फोटक देख हड़कंप मच गया। इस मामले में एक गिरफ्तारी हुई है और आगे की जाँच चल रही है।
वहीं पुणे म्यूनिसिपल कॉर्पोरेशन के तहत आने वाले एक स्कूल में बच्चों के मिड डे मील में पशु आहार चारा भेजे जाने की घटना सामने आई है। इसकी जानकारी मिलने के बाद फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (FDA) के अधिकारियों ने मौके पर पहुँच सारा सामान जब्त कर लिया। इस संबंध में पुणे के मेयर का कहना है कि मिड डे मील योजना राज्य सरकार द्वारा संचालित है। निगम की जिम्मेदारी केवल बच्चों के बीच खाना बाँटना है। उन्होंने इस घटना को दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए जाँच की माँग की है।
Maharashtra: A Govt school in Pune received cattle fodder, instead of mid-day meal for students.
Pune Mayor says, “Mid-day meal scheme is run by state govt. Municipal corporation is responsible for only distribution among students. It’s very unfortunate. An inquiry is demanded.” pic.twitter.com/9cO1wcfefQ
इधर राज्य में कोरोना से हालात फिर बेकाबू हो गए हैं। शुक्रवार (19 मार्च 2021) को संक्रमण के कुल मामले 24 लाख 22 हजार हो गए। पिछले 24 घंटे में राज्य में 25 हजार से ज्यादा मामले सामने आए हैं। 14, 400 ठीक हुए हैं, लेकिन 70 लोगों की मौत भी कोरोना के कारण दर्ज की गई है। राज्य में वर्तमान में सक्रिय मामलों की संख्या 1 लाख 77 हजार 560 है। केवल महाराष्ट्र में ही 53, 208 लोगों की मौत हुई है।
Maharashtra reports 25,681 new #COVID19 cases, 14,400 recoveries and 70 deaths in the last 24 hours.
Total cases 24,22,021 Total recoveries 21,89,965 Death toll 53,208
राज्य की स्थिति देख भाजपा लगातार महाराष्ट्र सरकार पर सवाल उठा रही है। भाजपा सांसद और पूर्व मुख्यमंत्री नारायण राणे ने महाराष्ट्र सरकार पर सही से काम नहीं करने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा, “महाराष्ट्र सरकार सही तरीके से काम नहीं कर रही है। सब कुछ अधिकारियों की इच्छा पर किया जा रहा है। मुंबई में मुकेश अंबानी जैसे व्यक्ति असुरक्षित हैं। कानून-व्यवस्था की खराब हालत और भ्रष्टाचार के कारण, मैंने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को पत्र लिखकर सीएम के इस्तीफे और राज्य में राष्ट्रपति शासन लगाने की माँग की है।”
Maharashtra govt is not working properly, everything is done at the will of officers, person like Mukesh Ambani is unsafe in Mumbai. Due to poor law&order situation & corruption, I’ve written to HM Amit Shah for CM’s resignation & President’s Rule in state: BJP MP Narayan Rane pic.twitter.com/TMkDaPyjhW
केंद्रीय मंत्री रामदास अठावले ने भी राज्य के बिगड़ते हालात देखते हुए कहा, “महाराष्ट्र में कानून और व्यवस्था बर्बाद होती जा रही है। सचिन वाजे जैसे एक क्रिमिनल ऑफिसर को राज्य सरकार प्रोटेक्शन दे रही है। मैं महाराष्ट्र में राष्ट्रपति शासन लगाने की माँग करता हूँ। मैं भी केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह को इस संबंध में पत्र लिखूँगा।”
Law & order situation is worsening in Maharashtra. A criminal officer like Sachin Waze was given protection by the state govt. I demand that President’s rule be implemented in Maharashtra. I will also write to Home Minister Amit Shah regarding this: Union Minister Ramdas Athawale pic.twitter.com/7Qca3jbDtU
शिया वक़्फ़ बोर्ड के पूर्व चेयरमैन वसीम रिज़वी के ख़िलाफ़ आज यानी शुक्रवार को (19 मार्च 2021) दिल्ली के जामा मस्जिद के बाहर सैंकड़ों की तादाद में प्रदर्शनकारियों ने इकट्ठा होकर नारेबाजी की। रिजवी को इस्लाम का दुश्मन करार देते हुए उनकी गिरफ्तारी की माँग की गई।
पिछले दिनों रिज़वी ने सुप्रीम कोर्ट में कुरान की 26 आयत को हटाने के संबंध में याचिका दाखिल की थी। उनका मत है कि इन 26 आयत में से कुछ आतंकवाद को बढ़ावा देने वाली हैं और उन्हें बाद में शामिल किया गया।
उनके इसी कदम के बाद से मुस्लिम समुदाय गुस्से में है। शिया धर्मगुरु मौलाना कल्बे जवाद का कहना है कि रिजवी ने जानबूझकर कुरान का अपमान किया। हम नहीं चाहते कि कुरान कोई हिस्सा हटाया जाए। हम रिजवी के विरुद्ध कड़ी से कड़ी कार्रवाई चाहते हैं।
वहीं, प्रदर्शनकारियों ने कहा कि वसीम रिजवी ये सब करके शिया और सुन्नी समुदाय में दरार पैदा करना चाहते हैं। लेकिन आज दोनों समुदाय मिलकर उनके खिलाफ़ विरोध कर रहे हैं।
एक अन्य प्रदर्शनकारी ने रिजवी को लेकर कहा कि ऐसे लोगों का समाज के हर कोने से बहिष्कार हो जाना चाहिए। वह पाक किताब के लिए अपमानजनक बातें करके सिर्फ़ शांति भंग करना चाहते हैं।
बता दें कि जामा मस्जिद के बाहर एक ओर जहाँ सैंकड़ों की भीड़ इकट्ठा है और रिजवी के विरुद्ध कार्रवाई की माँग कर रही है। वहीं वसीम रिजवी ने कहा है कि वह इस मामले में आखिरी साँस तक लड़ाई लड़ेंगे।
सोशल मीडिया पर जामा मस्जिद के बाहर हुए प्रोटेस्ट की वीडियो भी सामने आई हैं। इन वीडियोज में सुन सकते हैं कि ‘अल्लाह हू अकबर’ और ‘नारा ए तकबीर’ के साथ रिजवी के विरुद्ध कार्रवाई की माँग की जा रही है। उनके पोस्टर पर चप्पलें मारी जा रही हैं। कुछ लोग प्लेकार्ड हाथ में लिए हुए हैं जिसमें रिजवी की तस्वीर है और उसमें उनके मुँह पर क्रॉस लगाकर उन्हें इस्लाम का दुश्मन बताया जा रहा है। हिंदुस्तान की रिपोर्ट के मुताबिक मुरादाबाद में भी जुमे की नमाज के बाद मुस्लिमों ने प्रदर्शन किया।
शिवसेना सांसद संजय राउत ने गुरुवार (मार्च 18, 2021) को ट्विटर पर एक तस्वीर अपलोड की। इससे सोशल मीडिया में एक नई बहस छिड़ गई। तस्वीर राउत के दिल्ली के सफदरजंग लेन स्थित आवास की है।
इसमें उनके साथ नेशनल कॉन्ग्रेस पार्टी (NCP) के सुप्रीमो शरद पवार, एनसीपी नेता सुनील तटकरे, भाजपा नेता युवराज संभाजी राजे और मीडिया गिरोह के सबसे चहेते राजदीप सरदेसाई दिखाई दे रहे हैं।
Today at My Delhi residence..15 safdarjung lane. Hon. Sharad Pawar Hon Chhatrapati Sambhaji Raje Hon shri Sunil Tatkare. and Shri Rajdeep Sardesai.. pic.twitter.com/2lSltF5EVU
संजय राउत ने तस्वीर शेयर करते हुए ट्वीट में लिखा, “आज मेरे दिल्ली स्थित निवास 15 सफदरजंग लेन पर… माननीय शरद पवार, माननीय छत्रपति संभाजीराजे, माननीय श्री सुनील तटकरे और श्री राजदीप सरदेसाई।”
पहले तो इस तस्वीर को लेकर कुछ लोगों के मन में सवाल उठे कि आखिर राजदीप सभी नेताओं के बीच में क्या कर रहे हैं। लेकिन फिर पता चला कि सरदेसाई एंटीलिया बम केस में राउत का इंटरव्यू लेने गए थे, तभी अन्य नेताओं के साथ यह तस्वीर ली गई।
वैसे तस्वीर को लेकर बहस इसलिए शुरू नहीं हुई कि सरदेसाई उसमें क्यों नजर आ रहे हैं, बल्कि लोगों का सवाल तो ये है कि क्या संजय राउत, सरदेसाई को ‘माननीय’ नहीं मानते।
दरअसल, राउत के ट्वीट को देखा जाए तो उन्होंने सभी के लिए Honourable शब्द का प्रयोग किया, लेकिन राजदीप सरदेसाई के नाम के आगे उन्होंने सिर्फ़ SHRI लगाया है। ऐसे में यूजर्स इस बात पर चुटकी लेने से पीछे नहीं रहे। यूजर्स ने कहा कि हर कोई माननीय है सिर्फ़ राजदीप को छोड़कर।
Naughty did not put Honorable in front of Rajdeep’s name. Preparing toolkit for best CM ? https://t.co/eQDgKMcmQD
यो यो फनी सिंह नाम के अकाउंट से कहा गया कि राजदीप तो अपने ही लोगों में honourable नहीं है।
Everyone is honorable except Rajdeep Sardesai as per Naughty Sanjay Raut.
Just look at the way legendary fake news reporter Rajdeep is posing. Sheepish smile & hands folded back just like a student (or maybe a slave) stands in front of his master. Man has no self respect. https://t.co/VUng1K3pMT
— Pradeep Parker // Peter Prabhakar (@HouseOfFakts) March 19, 2021
कुछ लोगों ने इस बात पर भी ध्यान दिलवाया कि राजदीप तस्वीर में ऐसे खड़े हैं जैसे कोई छात्र या नौकर अपने मास्टर के सामने खड़ा होता है। यूजर्स कहते हैं कि राजदीप के पास कोई आत्मसम्मान नहीं है।
I think Rajdeep isn’t honorable probably coz he went there uninvited. I’m not a pet person but hv heard they can smell their owner quite well and from pretty far. No offense pets. https://t.co/pCddyvXhCg
ऋषि ने कहा, “मुझे लगता है कि राउत ने राजदीप के नाम के साथ माननीय इसलिए नहीं लगाया क्योंकि वह वहाँ बिन बुलाए गए। मैं कोई इंसान पालने वाला नहीं हूँ, लेकिन मुझे पता है कि पालतू दूर से अपने मालिक को अच्छे से सूँघ लेते हैं।”
सरदेसाई को इंटरव्यू में राउत ने NIA पर उठाए सवाल
बता दें कि जिस इंटरव्यू को लेने राजदीप शिवसेना नेता संजय राउत के घर पहुँचे थे, उसमें राउत ने एनआईए पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि NIA केंद्र सरकार के इशारे पर काम कर रही है।
शिवसेना नेता ने इसमें कहा कि जाँच एजेंसियों को कुछ जिलेटिन की छड़ें के बजाय खतरनाक आतंकी गतिविधियों पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए। एंटीलिया बम केस में शिवसेना नेता ने महाविकास आघाड़ी सरकार और मुंबई पुलिस का पक्ष लिया। उन्होंने कहा कि वह सचिन वाजे को लेकर वह कोई जवाब नहीं दे सकते। इसका उत्तर सिर्फ़ जाँच एजेंसियाँ ही देंगी।
उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय जाँच एजेंसियाँ किसकी तरफ से काम कर रही हैं, ये बात सब जानते हैं । उन्होंने NIA पर सवाल उठाते हुए कहा कि पिछले कुछ सालों में NIA ने क्या उपलब्धि हासिल की है। एनआईए का काम आतंकवादियों के बीच साँठ-गाँठ को तोड़ना है। बताइए, उरी आतंकी हमले, पठानकोट आतंकी हमले और पुलवामा हमलों के बाद एनआईए ने क्या किया है? क्या उन्होंने कोई रिपोर्ट प्रस्तुत की है।
बेंगलुरु के चेन्नहल्ली स्थित जनसेवा विद्या केंद्र में आज (19 मार्च 2021) राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) की अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा की दो दिवसीय बैठक की शुरुआत हुई। बैठक के पहले दिन सरसंघचालक मोहन भागवत और सरकार्यवाह भय्याजी जोशी मौजूद रहे।
दो दिवसीय बैठक के पहले दिन जानकारी दी गई कि 89% शाखाएँ दोबारा से चालू हो गई हैं। इनमें 90% शाखा युवाओं की हैं, जिसमें से 60% कॉलेज के छात्र हैं। बैठक में राम मंदिर और कोरोना काल को लेकर भी बातें हुईं। इससे कुछ चौंकाने वाले आँकड़े सामने आए।
बैठक में राम मंदिर निधि समर्पण अभियान को लेकर बताया गया कि इस अभियान के तहत संघ के स्वयंसेवक 5,45,737 जगहों पर गए। 20 लाख कार्यकर्ता इस समर्पण अभियान में शामिल रहे।
संघ की दो दिवसीय अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा बेंगलूरु में प्रारम्भ। पूजनीय सरसंघचालक मोहनजी भागवत और माननीय सरकार्यवाह भय्याजी जोशी ने भारत माता के चित्र पर पुष्पार्चन कर बैठक का शुभारम्भ किया। बैठक में देशभर से लगभग 450 प्रतिनिधि भाग ले रहे हैं। pic.twitter.com/Y1DGwqctMV
इस पूरे अभियान के तहत कार्यकर्ताओं के जोश का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि मात्र सवा महीने तक चलने वाले इस निधि समर्पण के कार्य में कार्यकर्ताओं ने 12 करोड़ 47 लाख 21 हजार परिवारों से संपर्क किया। वे न केवल देश के बड़े राज्यों के छोटे कस्बों में पहुँचे, बल्कि नॉर्थ ईस्ट के गाँवों में जाकर भी स्थानीयों को इस अभियान से जोड़ा। बैठक में बताया गया कि स्वयंसेवक नागालैंड, मिजोरम, मेघायल, लद्दाख, अण्डमान के गाँव तक गए थे।
इसके अलावा बैठक में संघ द्वारा चालित सेवा भारती से जुड़े डेटा भी सामने रखे गए। इसमें बताया गया कि सेवा भारती की ओर से कोरोना संकट के दौरान 92,656 जगहों पर सेवा कार्य किए गए। 5 लाख 60 हजार स्वयंसेवकों ने संकट की घड़ी में सेवा भारती से जुड़कर सक्रियता से काम किया। 73,000 लोगों के घर में राशन पहुँचाए गए। 5 करोड़ लोगों को खाना बाँटा गया। 90 लाख मास्क वितरित किए गए। 20 लाख प्रवासी मजदूरों की मदद की गई और 2.5 लाख घुमंतू लोगों को सहायता दी गई।
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख अरुण कुमार ने इस आयोजन से जुड़ी एक प्रेस वार्ता में कहा कि समाज में कार्यरत सामाजिक, धार्मिक संगठनों को साथ लेकर समाजव्यापी, राष्ट्रव्यापी सामाजिक शक्ति खड़ी करना ही संघ का लक्ष्य है। संघ समाज की सामूहिक शक्ति के जागरण का कार्य कर रहा है। देश समाज के लिए कार्य करने वाले समान विचार के समस्त लोगों, संगठनों को साथ जोड़ना, इस दिशा में भी संघ प्रयास कर रहा है।
एक हिंदू महिला पर धर्मांतरण करने के लिए दबाव डालने की आरोपित कैथोलिक नन को मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने 16 मार्च 2021 को अग्रिम जमानत दे दी। शिकायतकर्ता का कहना था कि नन ने न केवल उस पर धर्म परिवर्तन का दबाव बनाया, बल्कि बात न मानने पर उसे नौकरी से भी निकाल दिया।
जानकारी के मुताबिक, आरोपित सिस्टर भाग्य छतरपुर जिले के खजुराहो के सेक्रेड हार्ट कॉन्वेंट हाई स्कूल की प्रिंसिपल हैं। स्कूल की पूर्व सहायक लाइब्रेरियन ने आरोप लगाया था कि प्रिंसिपल उनसे ईसाई धर्म अपनाने को कहती थीं।
शिकायत करने वाली हिंदू महिला के मुताबिक, उनके पति एक मानसिक विकार से पीड़ित हैं। उनसे कहा गया कि अगर उनका पूरा परिवार ईसाई बन जाता है तो उनके पति को ठीक कर दिया जाएगा। महिला ने कई प्रलोभनों के बाद भी स्कूल प्रिंसिपल की यह बात नहीं मानी। अंत में उन्हें खराब प्रदर्शन का हवाला देकर स्कूल से बाहर कर दिया गया।
रिपोर्ट के मुताबिक एफआईआर में कहा गया है कि शिकायतकर्ता से कहा गया कि ईसाई धर्म के भगवान हिंदू धर्म के भगवान से महान होते हैं। नन के वकील ने सभी आरोपों को फर्जी बताया है। उन्होंने कहा कि शिकायतकर्ता को नौकरी से निकाल दिया गया था और इसी नाराजगी में उन्होंने केस फाइल किया।
बता दें कि हिंदू महिला की शिकायत के बाद नन के ख़िलाफ़ मध्यप्रदेश धार्मिक स्वतंत्रता अधिनियम, 2020 की धारा 3 और धारा 5 के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है। इसी कारण से प्रिंसिपल ने गिरफ्तारी से बचने के लिए अग्रिम जमानत की माँग की थी, जिस पर जस्टिस श्रीधरन की पीठ ने सुनवाई करते हुए उसे स्वीकार कर लिया।
कोर्ट ने इस केस में अगली सुनवाई की तारीख 7 अप्रैल को तय की है। अदालत ने नन को अग्रिम जमानत देने के लिए 10,000 रुपए के एक निजी बांड और इतनी ही राशि का एक जमानदार पेश करने की शर्त रखी। साथ ही पुलिस की जाँच के दौरान पेश होने का निर्देश दिया गया।
उल्लेखनीय है कि मध्यप्रदेश धार्मिक स्वतंत्रता अधिनियम, 2020 की धारा 3 में यह प्रावधान है कि कोई भी व्यक्ति खरीद, धमकी या बल का उपयोग, अनुचित प्रभाव, ज़बरदस्ती विवाह या कोई धोखाधड़ी का उपयोग करके किसी भी अन्य व्यक्ति को सीधे या अन्य किसी भी व्यक्ति को धर्मांतरित करने या उसके धर्म को परिवर्तित करने का प्रयास नहीं करेगा। यह दंडनीय अपराध है।
वहीं, अधिनियम 5 में कहा गया है कि यदि कोई भी व्यक्ति धारा 3 के तहत प्रावधानों का उल्लंघन करता है तो उस व्यक्ति को एक अवधि के लिए कारावास की सजा दी जाएगी, जो 1 वर्ष से कम नहीं होगी और अधिकतम यह 5 साल तक बढ़ सकती है। इसके साथ ही जुर्माने के रूप में दोषी को कम से कम 25,000 रुपए भरने होंगे।
कृषि कानूनों के खिलाफ राज्य के बिल को राष्ट्रपति की संस्तुति नहीं मिलने पर पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने सुप्रीम कोर्ट जाने की चेतावनी दी है। उन्होंने केंद्र सरकार पर आरोप लगाया है कि वह किसानों और बिचौलियों के बीच के सदियों पुराने रिश्ते को तोड़ने की कोशिश कर रही है। अपने बयान में पंजाब के सीएम ने आढ़तियों और किसानों के बीच के संबंध को पुराना और आजमाया हुआ बताया।
उन्होंने कहा, “अगर भारत के राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद राज्य संशोधन विधेयकों को स्वीकृति नहीं देते हैं, तो हम सर्वोच्च न्यायालय में जाएँगे।” कैप्टन ने कहा कि राज्यपाल ने अभी भी राज्य संशोधित विधेयकों को राष्ट्रपति के पास नहीं भेजा है। विधानसभा ने इसे पारित किया है, लेकिन यह दुखद है कि शिरोमणि अकाली दल और आम आदमी पार्टी ने इस मुद्दे पर राजनीतिक खेल खेलना शुरू कर दिया है।
बता दें कि अमरिंदर सिंह का यह बयान साफ बताता है कि वह खुले तौर पर आढ़तियों के पक्ष से बात कर रहे हैं। उनकी पार्टी कॉन्ग्रेस जो कुछ समय पहले तक किसान हित का राग अलाप रही थी, उसके लिए भी किसान हित दूसरे नंबर की बात हो गई है। पूरी पार्टी आढ़तियों के पक्ष से बोलने लगी है। पंजाब के फूड एंड सप्लाई मिनिस्टर भरत भूषण आशु ने 13 मार्च को कहा था कि किसानों को ‘आढ़तियों के जरिए डायरेक्ट पेमेंट’ जाएगी।
As per rules of APMC Act, we are making payments to farmers through arthiyas. The CM has also made it clear that payments will directly reach the farmers through arhtiyas: Punjab Food & Supply Minister Bharat Bhushan Ashu pic.twitter.com/vsNYlesYGl
उल्लेखनीय है कि साल 2012 में भी केंद्र में बैठी यूपीए सरकार ने किसानों को प्रत्यक्ष भुगतान करने की बात का सुझाव दिया था। हालाँकि, स्थानीय कॉन्ग्रेस नेताओं ने तब भी इसका विरोध किया था। उस समय राज्य में SAD-BJP की गठबंधन सरकार थी। तब केंद्रीय मंत्री व पटियाला की सांसद परणीत कौर, संगरूर के सांसद विजयेंद्र सिंगला और अन्य कॉन्ग्रेस सांसदों ने राज्य आढ़ती संघ के प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व करते हुए उपभोक्ता मामलों के तत्कालीन केंद्रीय मंत्री केवी थॉमस से मुलाकात की थी। उस समय भी इन सबने मिलकर केंद्रीय सरकार के सामने आढ़तियों के पक्ष में आवाज उठाई थी। तब कहा गया था कि बिना आढ़तियों के पंजाब में खाद्यान्नों की खरीद के लिए कोई व्यवस्था नहीं है। वर्तमान व्यवस्था को समाप्त करने से केवल किसानों को परेशानी होगी।
आज 9 साल बाद ऐसा प्रतीत होता है कि कुछ भी नहीं बदला है। बस बदला है तो किसान संघ का मत। किसान यूनियन ने उस समय कॉन्ग्रेस नेताओं के विरुद्ध आवाज उठाई थी, क्योंकि वे आढ़तियों के समर्थन में थे।
भारतीय किसान यूनियन के राज्य अध्यक्ष बूटा सिंह ने कहा था, “कॉन्ग्रेस को स्पष्ट होना चाहिए। ये पलटा-पलटी क्यों? कई बार पार्टी ने सिस्टम को खत्म करने के लिए आवाज उठाई। अब ये उन्हीं आढ़तियों का समर्थन कर रहे जो कमीशन के नाम पर किसानों को लूटते हैं।”
किसान संघ के राज्य अध्यक्ष सतनाम सिंह ने कहा था, “जब कैप्टन अमरिंदर सिंह मुख्यमंत्री थे, तब उन्होंने हमें आश्वासन दिया था कि वे किसानों के साथ दु:ख-दर्द दूर करने की बात करेंगे। पिछले दिनों भी कॉन्ग्रेस ने समर्थन दिया था। अब ये यू-टर्न जरूर आढ़तियों की लॉबी के कारण लिया गया है, क्योंकि उनके पास पैसे की ताकत है।”
मालूम हो कि साल 2016 में चुनाव कैंपेन के समय अमरिंदर सिंह ने कहा था कि राज्य में कॉन्ग्रेस सरकार बनने पर आढ़ती सिस्टम को समाप्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा था कि कॉन्ग्रेस सरकार कोई ऐसा फैसला नहीं लेगी और न ही व्यापार के साथ अन्य समुदायों से जनादेश लिए बिना नई नीति बनाएगी।
2018 में पंजाब सरकार आढ़तियों को रेगुलेट करने के लिए एक विधेयक लाई थी, जिससे पार्टी में काफी बहस हुई। हालाँकि, अब अमरिंदर सिंह किसानों और आढ़तियों के बीच के संबंध को पुराना व आजमाया हुआ बता रहे हैं, जबकि उनके एक विधायक ने खुद कहा था कि एक समय में किसानों और कमीशन एजेंट्स में अच्छी तालमेल थी, लेकिन अब परिदृश्य बदल चुके हैं।
जब से नए कृषि कानूनों पर विरोध शुरू हुआ है, कॉन्ग्रेस पार्टी पूरी तरह से आढ़तियों के साथ है। पंजाब के मुख्यमंत्री तो केंद्र सरकार पर इल्जाम लगा चुके हैं कि वह आढ़तियों पर आईटी रेड जैसे नए-नए हथकंडे आजमाकर उन्हें डरा रही है।
बता दें कि आढ़तियों को लेकर किसानों में गुस्सा और नाराजगी बहुत पुरानी बातें हैं। नोटबंदी के समय इन्हीं आढ़तियों को लेकर एक किसान ने कहा था, “ जब हम अपने पैसे के लिए या ऋण या अग्रिम भुगतान के लिए इन आढ़तियों के पास जाते हैं, तो वे हमें पूरे दिन बैठाए रखते हैं चाहे बात 5,000 रुपए की ही हो। वे हमसे उम्मीद कैसे करते हैं कि हम उनके काले धन को रातोंरात सफेद में बदल दें?”
आज भले ही किसान के नाम पर किसान आंदोलन भड़काया जा रहा हो। लेकिन हकीकत यही है कि ये प्रदर्शन सिर्फ़ और सिर्फ़ बिचौलियों के लिए किया जा रहा है। हाल में आया पंजाब सीएम का बयान केवल इस प्रदर्शन का एक विस्तार है।
उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद में स्थित मुस्लिम बहुल क्षेत्र डासना के शिव-शक्ति मंदिर में आसिफ नाम के एक किशोर की पिटाई के बाद मंदिरों को बदनाम करने का एक बार फिर सिलसिला सा चल पड़ा था। यहाँ तक कि तमाम वामपंथी मीडिया बिना महंत यति नरसिंहानंद सरस्वती का पक्ष जाने पूरे हिन्दू समुदाय को एक बार फिर से असहिष्णु साबित करने में लग गए थे। लेकिन जल्द ही सबकी कलई खुल गई और कल तक डासना मंदिर में दावेदारी ठोककर जुमे की नमाज़ के बाद प्रवेश करने की धमकी देने वाले बसपा विधायक असलम चौधरी भी आज अपने बयान से पलटते नजर आ रहे हैं। कहा जा रहा है कि उन्होंने यूपी पुलिस की डर से तगड़ा यू-टर्न लिया है।
उस दिन कैमरे पर महंत जी को धमकाने वाले बसपा विधायक असलम चौधरी आज कहते पाए गए, “मेरा ऐसा कोई बयान नहीं है कि मैं जुमे की नमाज़ के बाद मंदिर जाऊँगा और न ही मेरा जाने का ऐसा कोई प्रोग्राम है। पुलिस प्रशासन अपनी व्यवस्था देख रहे हैं। कई संगठनों के फोन आए थे मैंने उनसे भी कहा शांति भंग करने का मेरा कोई बयान नहीं है।”
हर हर महादेव Watch this 45 second video … असलम मियां LOL???Alsam changed his stand मैं मंदिर में नहीं जाऊंगा pic.twitter.com/nrL0F5kXm4
यह सब हुआ एक तरफ योगी सरकार के डर, जो किसी भी प्रकार के अराजकता के सख्त खिलाफ हैं तो दूसरी तरफ महंत यति नरसिंहानंद सरस्वती को विश्व हिंदू परिषद (VHP) सहित तमाम हिन्दू संगठनों और श्रद्धालुओं के सहयोग और एकजुटता के कारण। हालाँकि, इससे पहले ही वामपंथी मीडिया और उसके गिरोह द्वारा बनाए गए माहौल कि डासना के देवी मंदिर में एक मुसलमान को पानी नहीं पीने दिया जा रहा है। उसके लिए उसे मारा गया की हवा खुद जमानत पर छूटे श्रृंगी यादव और महंत नरसिंहानंद के बयानों से पहले ही निकल गई थी।
यहाँ ध्यान देने वाली बात यह भी है कि आज जैसी आशंका जताई जा रही थी कि जुमे की नमाज के बाद भारी संख्या में विधायक असलम चौधरी और अन्य मुस्लिम संगठनों के नेतृत्व में मुस्लिम भीड़ डासना मंदिर की तरफ बढ़ सकती है। जिसे देखते हुए मंदिर और महंत के समर्थन में तमाम हिन्दू श्रद्धालु मंदिर परिसर में जुटने लगे थे। साथ ही यूपी की पुलिस प्रशासन भी सतर्क थी। तो वहीं हिन्दू संगठनों ने इस चुनौती को स्वीकार करते हुए मंदिर के गेट पर पहले से भी एक बड़ा बोर्ड लगा दिया था। जिस पर लिखा है, “यह मंदिर हिन्दुओं का पवित्र स्थल है। यहाँ मुसलमानों का प्रवेश वर्जित है।”
मंदिर के गेट पर लगा बड़ा बोर्ड
यह इस बात की कहीं न कहीं घोषणा भी थी कि हिन्दू समुदाय मुस्लिमों के ऐसे धमकियों से नहीं डरने वाला है। इससे पहले ही मंदिर प्रशासन का साफ कहना था कि वे किसी भी कीमत पर इस बोर्ड को नहीं हटाएँगे क्योंकि यह बोर्ड जब 10 साल पहले जब यहाँ के मुस्लिमों से तंग होकर लगाया गया था। उस समय प्रदेश में बसपा की सरकार थी, उसके बाद समाजवादी पार्टी की सरकार बनी और अब भाजपा की सरकार है। लेकिन अब आज के इस माहौल में यह बोर्ड नहीं हटाया जाएगा।
विश्व हिंदू परिषद के राष्ट्रीय प्रवक्ता विनोद बंसल ने ट्विटर पर एक प्रेस रिलीज जारी कर महंत जी के साथ एकजुटता प्रदर्शित की थी। साथ ही बजरंग दल के प्रांत संयोजक विजय त्यागी ने गाजियाबाद के डासना मंदिर में 19 मार्च को विधायक असलम चौधरी द्वारा प्रवेश किए जाने वाले भड़काऊ बयान पर कहा था कि यदि असलम चौधरी हिंदुओं के देवी-देवताओं के प्रति अपनी श्रद्धा व पूर्व में किए गए कृत्यों के पश्चाताप के लिए मंदिर आना चाहते हैं, तो उनका स्वागत है। किंतु यदि असलम जेहादी मानसिकता को लेकर मंदिर में प्रवेश करना चाहते हैं तो प्रांत संयोजक ने उन्हें चेतावनी देते हुए कहा कि बाबर की औलादों हिंदू समाज ने भी अपने हाथों में चूड़ियाँ नहीं पहन रखी है। हिंदू समाज भी ईंट का जवाब पत्थर से देना जानता है।
विकास त्यागी ने अपने उसी पत्र में यह भी कहा कि हमारे मठ, मंदिरों, साधु संतों व हमारी हिंदू संस्कृति के ऊपर यदि किसी ने हमला करने का तथा ऊँगली उठाने का प्रयास किया तो परिणाम बहुत गंभीर होंगे। विकास त्यागी ने योगी सरकार से माँग करते हुए कहा कि एमएलए असलम चौधरी को तुरंत गिरफ्तार किया जाना चाहिए और ऐसी मानसिकता रखने वाले सभी जिहादियों पर कड़ी कार्रवाई की जानी चाहिए।
उन्होंने चेतवानी देते हुए बसपा विधायक से कहा, “भले ही आप लोग 90% से ऊपर होंगे किन्तु विधायक असलम चौधरी जी डासना के महंत यति नरसिंहानंद सरस्वती जी के पवित्र स्थल पर कोई दुस्साहस मत कर बैठना। जनता ने आपको विकास व सुरक्षा के लिए चुना है, धौंस, धमकी या दंगे के लिए नहीं।”
गौरतलब है कि यह सब बवाल तब और बढ़ गया जब आसिफ से मिलने के लिए विधायक असलम चौधरी से लेकर दिल्ली की पूर्व विधायक अलका लांबा, कॉन्ग्रेस के जिला अध्यक्ष विजेंद्र यादव समेत अनेक विपक्षी नेता उसके घर पहुँचने लगे। सोमवार (मार्च 15, 2021) को ही धौलाना के बसपा विधायक असलम चौधरी जब आसिफ के घर पहुँचकर उसका हाल चाल लिया। तभी धमकी भरे अंदाज में असलम ने ज्ञान देते हुए बहुत कुछ कह दिया था कि कोई भी धार्मिक स्थल हो, उन पर सभी का अधिकार होता है। देवी मंदिर भी उनके वंशजों की विरासत है। माफिया व अपराधिक प्रवृत्ति के लोग अमन बिगाड़ना चाहते हैं।
असलम ने यहाँ तक कहा था, “डासना मंदिर हमारे पूर्वजों का मंदिर है। यह मंदिर हमारे पूर्वजों ने बनाया है। यहाँ पर कुछ गुंडे प्रवृत्ति के लोग आ गए। कुछ लोगों ने बाहर से आकर मंदिर पर कब्जा करना चाहा और तरह-तरह की एक्टीविटी करके यहाँ के माहौल को बिगाड़ने की कोशिश की। मगर यहाँ के हिंदू-मुसलमान के बीच इतनी एकता है कि उन्होंने इसे बिगड़ने नहीं दिया। हम इन गुर्गों को बताना चाहेंगे कि मंदिर हमारी विरासत है। हम पानी पीने भी जाएँगे, अपनी मंदिर की देख-रेख करने भी जाएँगे। मैं मंदिर में जाऊँगा। मैं देखता हूँ कि कौन रोकता है।”
विधायक असलम चौधरी का वह बयान जिससे वे साफ मुकर गए
उन्होंने तो यह भी कहा, “यह जो बाबा है, वह बहुत बड़ा गुंडा है, माफिया है, इसने माहौल बिगाड़ने का काम किया है। वो जो बिहार का गुंडा आसिफ पर लात मार रहा था। अगर हम जैसे लोगों को उस टाइम पर पता चल जाता तो बवाल बड़ा हो जाता। अब वह जेल में है। इस बच्चे की पैरोकारी करेंगे। उसकी जमानत भी नहीं होने देंगे।”
विधायक असलम के ऐसे धमकियों के बाद भी जहाँ श्रृंगी यादव को आसानी से जमानत मिल गई तो वहीं आज विधायक खुद अपने धमकी भरे बयान से पलटते नजर आए जबकि शायद वह यह भूल गए कि उनका पिछला बयान भी टीवी सहित सोशल मीडिया पर न सिर्फ चल चुका है बल्कि वायरल भी है।
वहीं ‘सुदर्शन न्यूज़’ से बात करते हुए श्रृंगी यादव ने बताया था कि वो लड़का झूठ बोल रहा है कि वो पानी पीने के लिए मंदिर के भीतर घुसा था। उन्होंने कहा था कि मंदिर में कई शिवलिंग मौजूद हैं। आसिफ को पीटने के मामले में गिरफ़्तारी के बाद जमानत पर बाहर आए श्रृंगी यादव ने बताया था कि उसने उस लड़के को शिवलिंग पर चढ़ाए गए जल में पेशाब करते हुए देखा था। साथ ही इस तथ्य को दोहराया कि अगर उसे पानी पीना होता तो वो मंदिर के बाहर कई चापाकल और नल हैं, उनमें से पी लेता।
बता दें कि धौलाना से बसपा विधायक असलम चौधरी की दबंगई पहले भी देखने को मिली है। पिछले दिनों उनके दबंगों को टोल पर हफ्ता वसूली करते हुए देखा गया था और मना करने पर उनके साथ मारपीट भी की गई थी। विधायक और उनके गुंडों ने टोल कर्मियों को इस कदर पीटा कि उन्हें घायल कर दिया था।
गौरतलब है कि डासना देवी मंदिर पौराणिक समय से महाभारत के इतिहास से जुड़ा हुआ है। यहाँ पर अज्ञातवास के दौरान पांडवों ने कुछ समय बिताया था। इस मंदिर पर जब हमला हुआ था तो यहाँ पर देवी देवाताओं की मूर्तियों को मंदिर परिसर में बने एक तालाब में छुपा दिया गया था। नवरात्र पर्व के मौके पर अष्टमी और नवमी के दिन हजारों की संख्या में लोग ऐतिहासिक महत्व वाले डासना स्थित प्राचीन देवी में दर्शन के लिए आते हैं। परिवार के लोगों की सुख शांति के लिए प्रचंड चंडी देवी की पूजा करते हैं। कहा जाता है कि करीब पाँच हजार साल पुराने इस मंदिर में भगवान शिव, नौ दुर्गा, सरस्वती, हनुमान की मूर्ति स्थापित हैं।