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कानपुर मेडिकल कॉलेज की प्राचार्य आरती लालचंदानी का तबादला, जमातियों पर टिप्पणी को लेकर चर्चा में थीं

तबलीगी जमातियों पर टिप्पणी करने के कारण चर्चा में आईं कानपुर के गणेश शंकर विद्यार्थी मेडिकल कॉलेज की प्रिंसिपल प्रोफेसर आरती लालचंदानी का बुधवार देर रात तबादला कर दिया गया।

उनकी जगह डॉ.आरबी कमल को जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज का कार्यवाहक प्राचार्य बनाया गया। वहीं, प्रो. आरती को लखनऊ में महानिदेशक चिकित्सा शिक्षा, कार्यालय से सम्बद्ध किया गया। इससे पहले प्रो. आरती को झाँसी भेजे जाने की अटकलें लग रही थीं। लेकिन बुधवार को यह खबर आने के बाद इस चर्चा पर विराम लग गया।

जानकारी के अनुसार, बुधवार देर रात 1 बजे के बाद प्रोफ़ेसर आरती को चिकित्सा शिक्षा महानिदेशक लखनऊ से सम्बद्ध में तबादले का आदेश जारी हुआ। इसके बाद आदेश को लागू कराने के लिए देर रात जिला प्रशासन और पुलिस अधिकारी मेडिकल कॉलेज पहुँचे।

वहाँ, जिलाधिकारी डॉ. ब्रह्मदेव राम तिवारी ने एसीएम जयेंद्र और सीओ स्वरूप नगर को भेजकर चार्ज हैंड ओवर करवाया। गुरुवार सुबह 4 बजे तक लखनऊ में कार्यभार ग्रहण करने की प्रक्रिया चली।

गौरतलब है कि कुछ दिन पहले सोशल मीडिया पर प्रोफेसर आरती की एक वीडियो वायरल हुई थी। इस वीडियो में वह तबलीगी जमात के लोगों की हरकतों से नाराज होकर उनपर अपनी राय रखती दिखीं थी।

उनके बयान का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद मेडिकल कॉलेज से लेकर पूरे प्रशासन में हड़कंप मच गया था और इस दौरान उनपर कार्रवाई की माँग भी उठने लगी थी। इस बीच कुछ मुस्लिम संगठनों ने उनके ख़िलाफ़ मोर्चा भी खोला था।

एक तरफ अधिवक्ता नासिर खान द्वारा डीआईजी को पत्र लिख प्राचार्य के खिलाफ अभियोग पंजीकृत करने अनुरोध किया था। वहीं दूसरी और पूर्व सांसद व सीपीआईएम की नेता सुभाषिनी अली ने भी आरती लालचंदानी को नौकरी से निकालने और उनके विरुद्ध मुकदमा दर्ज करने की माँग की थी।

मामला आगे बढ़ने के बाद आरती लालचंदानी को जान से मरने की धमकी भी दी जाने लगी थी। इसकी वजह से उन्होंने डीआईजी अनंत देव तिवारी को प्रार्थना पत्र लिखा था। इस पत्र में उन्होंने ब्लैकमेल और जान से मारने की धमकी की शिकायत और अपनी सुरक्षा को मद्देनजर रखते हुए उनसे एक गनर की माँग भी की थी।

मुस्लिम असलम का अपराध हिन्दुओं के नाम: आजतक समेत मेन्स्ट्रीम मीडिया ने नाम छुपाया, गलत शब्द लिखे

मुस्लिमपरस्ती में मीडिया का एक धड़ा इस कदर मदमस्त है कि उसे गलती से कहीं कोई अपराधी मुस्लिम समुदाय का या कई बार ईसाई भी दिख गया तो ये पूरा गिरोह चटपट येन-केन प्रकारेण अर्थात कुछ भी करके पाठकों के सामने ऐसा स्पिन देने की कोशिश में लग जाएगा कि समुदाय विशेष का अपराध भी ढक जाए और कोई निरपराध समुदाय या व्यक्ति खास तौर हिन्दू धर्म प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष रूप से सवालों के घेरे में भी आ जाए।

अभी ताजा मामला आजतक द्वारा प्रकाशित एक लेख का है। जिसमें विजुअल और लेख के गड़बड़झाले से असल अपराधी असलम को पूरी तरह से गायब कर लेख में ‘बाबा’ और ‘भक्त’ जैसे शब्दों का जानबूझकर प्रयोग करते हुए पाठकों को बरगलाने और समुदाय विशेष के असलम को बचाने की शातिराना कोशिश की गई है।

क्या है असल में मामला

मध्य प्रदेश के रतलाम के नयापुरा क्षेत्र में झाड़ फूँक और पानी फूँककर इलाज करने वाले असलम की मौत हाल ही में कोरोना से होने के बाद प्रशासन में हड़कंप मच गया है। क्योंकि जब प्रशासन ने असलम के संपर्क में आए लोगों की लिस्ट निकाली तो वो काफी लंबी-चौड़ी निकली। इसके बाद उन लोगों का सैंपल लिया गया, जिसमें से 19 लोग कोरोना पॉजिटिव पाए गए हैं।

लेकिन, जब मीडिया में इस न्यूज़ की रिपोर्टिंग हुई तो पूरा गिरोह असलम को बाबा, भक्त, भगवा को आगे कर बचाने की हड़बड़ी में लग गया। इन्हीं 19 कोरोना पॉजिटिव लोगों को आजतक ने ‘भक्त’ और झाड़फूँक कर इलाज का ढोंग करने वाले असलम को ‘बाबा’ लिखा है।

मीडिया गिरोह का हिन्दूफ़ोबिक प्रपंच

इस तरह से स्पिन देने के मामले में वैसे ‘आजतक’ अकेला नहीं है, ‘नई दुनिया’ से लेकर ज़्यादातर वामपंथी धड़े के मीडिया समूह सालों से खुला-खेल फर्रुखाबादी की तरह अक्सर मुस्लिम आलिम, मौलवी, मुल्ला या किसी झाड़फूँक करने वाले फकीर या ढोंगी को ये बाबा, तांत्रिक, साधु आदि नामों और भगवा, त्रिशूल, त्रिपुण्ड के विजुअल में छिपाते आए हैं।

बहुत ही बारीकी से कभी प्रतीकात्मक तस्वीर के नाम पर तो कभी सीधे खुल्ले में खेलते हैं कि कौन सी जनता जा रही है तहकीकात करने? अगर बाद में पता भी चला तो क्या हो जाएगा? क्योंकि आजतक कभी इन्हें अपनी इन हरकतों पर कोई बड़ा आउटरेज नहीं झेलना पड़ा।

इस तरह से फेक न्यूज़ के माध्यम से ही सही लेकिन समुदाय विशेष के शातिर मुस्लिम अपराधी को बचाने और बेहद सहिष्णु समुदाय अर्थात हिन्दुओं और उनके धार्मिक प्रतीकों को बदनाम करने का उनका मकसद लम्बे समय से पूरा होता आया है।

यहाँ एक बात विचारणीय है कि सोशल मीडिया के दौर में जब पब्लिक ही इन मीडिया गिरोहों के झूठ को पकड़ के इन्हें लताड़ती है तो भी ये पूरा वामपंथी इकोसिस्टम और मीडिया गिरोह उस सच्चाई उजागर करने वाले को ही हेट फ़ैलाने वाला कहकर अपने अपराधों और झूठ से पल्ला झाड़ती नजर आती है। बेनकाब होकर भी अपने किए की न कभी माँगते है और न ही इन्हें कोई अफ़सोस होता है।

गौरतलब है कि नई दुनिया समेत कई अन्य मीडिया पोर्टल ने भी इसी तरह से एक बार फिर से असलम के आगे ‘बाबा’ लगाकर इसे हिंदू स्पिन देने की कोशिश की। वैसे ये पहला मामला नहीं है, जब किसी अखबार ने ऐसा करने की कोशिश की हो।

इससे पहले भी आरोपित ‘मुस्लिमों’ की न केवल पहचान छिपाई गई, बल्कि इस चक्कर में हिंदुओं को बदनाम करने के लिए कई अन्य युक्तियाँ भी प्रयोग में लाई गई। जैसे हाल ही में रेप आरोपित एक और मुस्लिम आलिम असलम फैजी को ‘तांत्रिक’ बताया गया था और साथ ही जादू-टोना करने वाले मौलवी की जगह एक पुजारी का स्केच लगा दिया गया था।

मीडिया गिरोह के लोग शायद अभी भी चेत नहीं रहे हैं। नहीं तो ऐसी गलती जानबूझकर बार-बार नहीं दोहराते। वो भी तब जब इन्हें पता है कि कोई भी दो चार कीवर्ड टाइप कर तुरंत ही उनकी पोल खोल देगा।

संभवतः मेरी समझ समझ से ऐसा करने का सबसे बड़ा कारण यही है कि इन मीडिया गिरोहों को पता है कि उनका एक फिक्स पाठक या दर्शक वर्ग है। जो ऐसी स्पिन दी हुई चीजों को हाथों-हाथ लपककर उन्हें वायरल कराता है जिससे इनके अतिप्रिय समुदाय विशेष के तमगे में उसके शांतिप्रिय होने का भाव तो जो बेकसूर है हिन्दू समुदाय उसके प्रतीकों और नामों के प्रति लोगों के अंदर घृणा और दुर्भावना फैलती है। और ऐसा करना ही इनका असल मकसद है।

असलम के असल कारनामें

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक असलम खुद कोरोना पॉजिटिव पाया गया था वह लोगों का हाथचूमकर, झाड़फूँक कर, या पानी फूँककर देकर इलाज करता था। इस वजह से तबलीगी जमात की ही तरह उसके संपर्क में आने वाले लोगों के कोरोना पॉजिटिव आने का मामला लगातार बढ़ता जा रहा है।

लोगों के लगातार संक्रमित पाए जाने के बाद प्रशासन ने कड़ा रुख अपनाया और प्रशासनिक अमले के निर्देश पर शहर एसडीएम लक्ष्मी गामड़ की मौजूदगी में शहर में अलग-अलग बैठकर झाड़ फूँक और पानी से उपचार करने का दावा करने वाले 29 लोगों को एहतियात के तौर पर क्वारंटाइन सेंटर भेजा गया है। जिसमें बीमारी के लक्षण नजर आएँगे उनका कोरोना टेस्ट कराया जाएगा।

गौरतलब है कि रतलाम के नयापुरा में असलम के पास लोग कोरोना का इलाज कराने आते थे और वह लोगों का हाथ चूमकर कोरोना को भगा रहा था। रतलाम में मंगलवार (जून 9, 2020) को मिले 24 कोरोना पॉजिटिव में से 13 लोग नयापुरा के झाड़-फूँक करने वाले असलम के संपर्क में आने वाले हैं।

असलम की 4 जून को कोराेना से मौत हो गई थी। उसके संपर्क में आने वालों के सैंपल लिए थे। इससे पहले 7 जून को नयापुर से 6 कोरोना पॉजिटिव मिले थे। ये भी असलम के संपर्क में आए थे। यानी कि अब तक जिले के कुल 85 मरीजों में से 19 तो असलम के कारण ही संक्रमित पाए गए। 

मंगलवार को 200 लोगोंं की रिपोर्ट सामने आई, जिसमें से 24 पॉजिटिव व 176 निगेटिव निकले। नोडल अधिकारी डॉ प्रमोद प्रजापति ने बताया कि संक्रमण का पता चल सका, ये बड़ी बात है। सभी संक्रमितों की कॉन्टैक्ट ट्रेसिंग की जाएगी। एक भी संक्रमित हुआ तो कई को खतरा हो सकता है। प्रमोद प्रजापति का कहना है कि ऐसे लोगों से इसलिए खतरा है, क्योंकि ये झाड़-फूँक करते हैं और फूँका हुआ पानी आदि लोगों को देते हैं।

जन्मदिन विशेष: प्रिय लालू यादव जी, आप 120 साल जीएँ, ऐसे ही फोटो में हमेशा दिखें

आज बिहार के सबसे ‘बड़े’ नेता लालू प्रसाद यादव का जन्मदिन है। बड़े लोगों का जन्मदिन मनाना भी चाहिए। मैं बिहार के उस दौर को याद करके सोचता हूँ कि गोलियों से बींधी हुई दीवार को देख कर भी एक बच्चे के रूप में मुझे सामान्य क्यों लगता था? मैं सोचता हूँ कि आखिर मुझे घर छोड़कर भागना क्यों पड़ा? मैं वो दिन याद करता हूँ जब पिताजी घर से बाहर न जाने की सलाह देते थे।

अपना आधा नाम छुपाना, बदल लेना, खुद को कहीं और का बताना… ये सब शर्म की वो परतें हैं जो हर बिहारी कभी न कभी झेलता है। जो पहचान राष्ट्र के सबसे अच्छे विद्वानों, शासकों, कूटनीतिज्ञों, महापुरुषों की जन्म और कर्मस्थली रहा है, वो आखिर पंद्रह साल में ऐसी गर्त में कैसे गई कि वो अब एक गाली है?

कभी कोई टोक देता है, तो आप उसे कुछ कह नहीं सकते कि वापस क्यों नहीं जा रहे… कुछ कर क्यों नहीं पा रहे अपने राज्य के लिए, वहाँ के लोगों के लिए! एक विवशता है कि आप कुछ करना भी चाहें तो तंत्र आपको वैसा करने ही नहीं देगा। आपका मनोबल टूट जाता है और आप हार मान लेते हैं।

लालू प्रसाद यादव ने स्वयं की ‘मसीहाई’ से वो आतंक के दिन बिहार को दिखाए हैं कि आत्मा सिहर जाती है। इसे जो मसीहा कहते हैं, वो शायद राजनैतिक मजबूरियों के कारण कहते होंगे, क्योंकि कोई भी सामान्य बुद्धि-विवेक से चलने वाला व्यक्ति इस आदमी के लिए घृणा के अलावा और कोई भाव ला ही नहीं सकता।

बिहार की बर्बादी के जनक लालू प्रसाद यादव का लम्बे समय तक जीवित रहना अत्यावश्यक है ताकि वो अपनी आँखों से देखे और शरीर के हर अंग से महसूस करे कि जो बर्बादी उसने लिखी थी उसका कर्मफल कैसा मिल रहा है।

आदरणीय लालू प्रसाद जी के जन्मदिन पर मेरा स्नेह सन्देश:

एक बिहारी का लालू प्रसाद यादव के जन्मदिन पर सन्देश

कोरोना संक्रमित माँ 6 घंटे बेड का इंतजार कर मर गई, 8 दिन से गायब दादी का शव अस्पताल के टॉयलेट में मिला

महाराष्ट्र कोरोना संक्रमण से देश का सर्वाधिक प्रभावित राज्य है। यहॉं के एक सरकारी अस्पताल की लापरवाही के कारण एक परिवार के दो लोगों की मौत 9 दिन के भीतर हो गई। मामला जलगाँव सिविल अस्पताल का है।

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, हर्षल नेहेते (Nehete) ने बताया कि उनकी माँ टीना (60) और दादी मालती (82), दोनों कोरोना संक्रमित थीं। उनकी माँ ने अस्पताल में 6 घंटे तक आईसीयू बेड का इंतजार किया। बाद में उनकी मौत गई।

इसी प्रकार बुधवार को 8 दिनों से गायब उनकी दादी का शव अस्पताल के एक शौचालय से बरामद हुआ। हॉस्पिटल प्रशासन की ओर से बताया गया है कि शव वार्ड नंबर 7 के टॉयलेट से मिला।

रिपोर्ट के मुताबिक बुजुर्ग महिला 2 जून से लापता थी। लेकिन अस्पताल ने उनके परिजनों से कहा कि वह वहाँ से जा चुकी हैं। इसके बाद पूरे 8 दिन दिन तक अस्पताल का कोई सफाई कर्मचारी शौचालय को साफ करने नहीं गया।

प्रशासन ने शव मिलने पर बताया, शौचालय का दरवाजा अंदर से बंद था और बदबू आने के बाद इसे तोड़ा गया। महिला का शव मिलने के बाद बुधवार रात अस्पताल के डीन डॉ. बीएस खैर समेत अस्पताल के पाँच अधिकारियों को निलंबित कर दिया गया। मामले में जाँच के आदेश भी दिए गए हैं।

कुछ अन्य मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, मूल रूप से भुसावल की रहने वाली वृद्ध महिला को 1 जून की शाम सात बजे जलगाँव सिविल अस्पताल में भर्ती कराया गया था। इसके बाद 2 जून की रात महिला अचानक गायब हो गईं। हॉस्पिटल ने उनकी तलाश शुरू की। परिवार के लोगों से पूछताछ हुई, लेकिन अगले दिन वह अपने आप हॉस्पिटल में लौट आई। वह सारी रात कहाँ थीं इस बारे में कुछ पता नहीं चला। 

फिर, 5 जून को मालती दोबारा लापता हो गईं। जब परिजनों से संबंध में पूछा गया तो उन्हें भी इस बारे में कुछ नहीं मालूम था। महिला के काफी टाइम न मिलने पर उनकी गुमशुदगी की रिपोर्ट पुलिस में दी गई। लेकिन अस्पताल को चेक नहीं किया गया।

बुधवार सुबह जब हॉस्पिटल की इंचार्ज डॉ. किरण पाटिल नियमित दौरे के लिए वार्ड नंबर 7 में गईं। तब, उन्होंने नर्सों और सफाई कर्मचारियों से शौचालय के पास से आती बदबू के बारे में पूछा। शौचालय की कुंडी अंदर से बंद होने के कारण गेट को तोड़ा गया, तो वृद्धा का शव शौचालय में पड़ा मिला।

शव की सूचना पाते ही पुलिस मौके पर पहुँची और उसे अपने कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। पोस्टमार्टम में यह बात सामने आई कि महिला की मौत 5 दिन पहले हुई थी। 

न्यूज एजेंसी एएनआई के मुताबिक, स्थानीय पुलिस ने इस मामले में बताया कि उन्हें महिला के गुमशुदगी की रिपोर्ट 6 जून को मिली थी। अब वह इस मामले में आगे की जाँच कर रहे हैं।

जिलाधिकारी अविनाश डांगे ने भी कहा कि यह अस्पताल प्रशासन की बड़ी लापरवाही है। अस्पताल के बाथरूम को हर दिन साफ किया जाता है। ऐसे में किसी की भी नजर पिछले 8 दिनों से बुजुर्ग पर नहीं पड़ी। जिलाधिकारी ने इस मामले में कड़ी कार्रवाई की बात कही।

73 के हुए लालू तो जदयू ने गिनाई 73 प्रॉपर्टी, जो उनके कुनबे ने राजनीतिक धौंस से हथियाया

लालू प्रसाद यादव को उनके 73वें जन्मदिन पर बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की पार्टी जदयू (JDU) ने अलग अंदाज में बधाई दी है। जदयू ने एक पोस्टर लगवाया है, जिसमें 73 संपत्तियों का जिक्र कर दावा किया गया है कि लालू और उनके परिवार के सदस्यों ने राजनीतिक धौंस के दम पर ये हथियाए हैं।

पोस्टर में यह भी कहा गया है कि राजनीतिक धौंस से बटोरी गई संपत्तियों की श्रृंखला और भी शेष है। जदयू ने यह पोस्टर लालू को जन्मदिन की बधाई देने वाले राजद के पोस्टर के ठीक बगल में लगवाए हैं।

लालू यादव बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री हैं। वे करोड़ों रुपयों के घोटालों में आरोपित हैं। देवघर कोषागार से अवैध निकासी के मामले में उन्हें साढ़े तीन साल की सजा सुनाई जा चुकी हैं। इन दिनों वे रॉंची के बिरसा मुंडा जेल में बंद है।

देवघर मामले के अलावा, आरजेडी प्रमुख को भागलपुर कोषागार चारा मामले में पाँच साल, चाईबासा कोषागार चारा घोटाले में पाँच साल की जेल और दुमका कोषागार मामले में 14 साल जेल की सजा सुनाई गई है, जबकि कई अन्य चारा घोटाला के मामलों की सुनवाई अभी भी अदालतों में हो रही है।

भागलपुर मामले में उन्हें जमानत मिल चुकी है। चारा घोटाले के अलावा, वह भारतीय रेलवे के टेंडर केस, आय से अधिक संपत्ति के मामले, कर चोरी, बेनामी संपत्ति आदि मामलों में जाँच का सामना कर रहे हैं।

बिहार में इस साल के अंत तक विधानसभा चुनाव होने हैं। जदयू और राजद के बीच पोस्टर वार पिछले साल से ही देखा जा रहा है।

बंगाल: 13 अधजली लाशों के साथ दुर्व्यवहार के वीडियो को अस्पताल ने बताया फेक

सोशल मीडिया में अधजली लाशों का एक वीडियो वायरल हुआ था। दावा किया जा रहा था कि ये शव पश्चिम बंगाल में कोरोना संक्रमण से मारे गए लोगों के हैं। एनआरएस मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिंपल ने इस वीडियो को फेक बताया है। उन्होंने इस संबंध में कोलकाता के पुलिस कमिश्नर को पत्र लिखा है।

ABP न्यूज़ चैनल के जर्नलिस्ट विकास भदौरिया ने एक विडियो शेयर करते हुए ट्विटर पर लिखा है – “तस्वीरें विचलित कर सकती हैं। कोलकाता नगर निगम 13 बुरी तरह सड़े हुए शवों को जलाने के लिए न्यू गोरिया श्मशान घाट लाया। उनसे तेज़ दुर्गंध उठ रही थी। स्थानीय निवासियों के विरोध के चलते लाशों को वापस ले जाना पड़ा। शवों के साथ अमानवीय और शर्मनाक व्यवहार, सरकार के असभ्य रवैये का प्रतीक है।”

नीचे वीडियो है, जो हृदय विदारक है – एकदम विचलित कर सकने वाली!

इस वीडियो में देखा जा सकता है कि कुछ लोग तेज बदबू के कारण अपनी नाक बंद कर रहे हैं जबकि कुछ लोग बेहद बुरी तरह से आधी जली हुई लाशों को एम्बुलेंस में भरकर किसी और जगह ले जाने की तैयारियाँ कर रहे हैं।

गौरतलब है कि बंगाल में अभी तक कोरोना वायरस संक्रमण के कुल 9328 मामले सामने आ चुके हैं जबकि यहाँ का रिकवरी रेट 36.60% की दयनीय स्थिति में है। ममता बनर्जी के बंगाल में अब तक कोरोना वायरस के कारण कुल 432 मौतें हो चुकी हैं। जबकि पूरे भारत में अब तक इस वायरस के संक्रमण से कुल 8102 मौतें दर्ज की गई हैं। इसके साथ ही भारत में अब तक कुल 1,37,448 मामले कोरोना संक्रमण के सामने आ चुके हैं।

पालघर में साधुओं की लिंचिंग: SC में उठा गवाह की आत्महत्या का मामला, CBI/NIA जाँच को लेकर नोटिस जारी

महाराष्ट्र के पालघर में साधुओं की निर्मम हत्या मामले की जाँच CBI या NIA से कराए जाने की माँग वाली याचिकाओं पर आज (जून 11, 2020) सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। इस संबंध में महाराष्ट्र सरकार, महाराष्ट्र डीजीपी, केंद्र सरकार, NIA और सीबीआई को नोटिस जारी किया गया है।

मामले की अगली सुनवाई जुलाई में होगी। वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए सुनवाई करते हुए जस्टिस अशोक भूषण की अगुवाई वाली बेंच ने याचिकाओं पर जवाब माँगा है।

सर्वोच्च न्यायालय में इस मामले में एक याचिका साधुओं के परिजनों और जूना अखाड़ा द्वारा दायर की गई थी। इस याचिका में कहा गया था कि उन्हें महाराष्ट्र सरकार और पुलिस की जाँच पर उन्हें भरोसा नहीं है, इसलिए इस मामले की सीबीआई जाँच की जाए। इस दौरान गवाहों की आत्महत्या का मामला उठाते हुए जॉंच की निष्पक्षता को लेकर सवाल उठाए गए।

दूसरी याचिका राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (NIA) से जाँच कराने के लिए घनश्याम उपाध्याय ने दायर कर रखी है। इससे पहले भीड़ द्वारा दो साधुओं सहित तीन व्यक्तियों की पीट-पीटकर हत्या के मामले में पालघर जिले के कासा थाने में 18 अप्रैल को प्राथिमकी दर्ज की गई थी। अभी तक इस मामले में 150 ​गिरफ्तारियॉं हुई है। इनमें 10 किशोर भी शामिल हैं।

यहाँ बता दें, इससे पहले कोर्ट ने मामले पर सुनवाई करते हुए मुंबई पुलिस से भी जवाब माँगे थे। जस्टिस अशोक भूषण और संजीव खन्ना की पीठ ने वीडियो-कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से एक याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा था कि अदालत अपराधियों के खिलाफ पुलिस द्वारा अब तक की गई कार्रवाई की स्थिति के बारे में जानना चाहती है। अदालत ने यह भी पूछा था कि अधिकारियों ने लॉकडाउन के दौरान भीड़ को कैसे इकट्ठा होने दिया।

इस दौरान दलील में कहा गया,“जब पूरे देश में 25 मार्च से लॉकडाउन जारी था और किसी भी व्यक्ति को अपने घर से बाहर जाने की अनुमति नहीं थी। सभी लोगों से सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करने के लिए कहा गया था, इसके वावजूद इतनी बड़ी घटना घटित होना स्थानीय पुलिस को संदेह के घेरे में खड़ा करती है।”

गौरतलब है कि16 अप्रैल को महाराष्ट्र के पालघर के दहानु तालुका के एक आदिवासी बहुल गडचिंचले गाँव में सैकड़ों लोगों की भीड़ द्वारा जूना अखाड़ें के दो संतों और उनके ड्राइवर की पुलिस के सामने ही बड़ी बेरहमी से पीट-पीट कर हत्या कर दी गई थी।

इस घटना के प्रकाश में आने के बाद मामले में कई एंगल निकलकर सामने आए थे। घटना की वीडियो देखने के बाद इस मॉब लिंचिंग के स्टेट या पुलिस स्पॉन्सर्ड होने पर सवाल हुआ था। बाद में सीपीएम और एनसीपी नेता की मौजूदगी की बात सामने आई थी और कई मीडिया रिपोर्ट्स में इस बात का दावा भी था कि इस मॉब लिंचिंग के पीछे एक बड़ी साजिश थी।

जौनपुर में दलितों के घरों को जलाया: आलम, जावेद सहित सभी आरोपितों पर NSA लगाने का CM योगी का आदेश

उत्तर प्रदेश के जिला जौनपुर में सरायख्वाजा थाना क्षेत्र के भदेठी गाँव में मामूली से विवाद के बाद मुस्लिम समुदाय द्वारा दलित बस्ती को आग के हवाले करने के मामले में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सख्त रुख अपनाया है। मामले का संज्ञान लेते हुए सीएम योगी ने अधिकारियों को सभी आरोपितों के खिलाफ एनएसए के तहत कार्रवाई करने का आदेश दिया है।

गाँव में अभी तनावपूर्ण माहौल बना हुआ है, जिसके कारण बड़ी संख्या में पुलिस फोर्स के साथ पीएसी के जवान तैनात हैं। सीएम योगी ने मामले का संज्ञान लेते हुए दलितों के घर फूँकने के मुख्य आरोपी नूर आलम और जावेद सिद्दीकी समेत सभी आरोपितों पर तत्काल एनएसए के तहत कार्रवाई करने का आदेश दिया है।

साथ ही सीएम ने इलाके के थाना प्रभारी के खिलाफ भी कड़ी कार्रवाई का निर्देश दिया है। वहीं सीएम योगी सभी दलित पीड़ितों को तत्काल आवास योजना के तहत आवास और अन्य सरकारी मदद देने की बात कही है।

बुधवार (10 जून, 2020) को गाँव भदेठी पहुँचे मंडलायुक्त दीपक अग्रवाल, आईजी विजय सिंह मीना ने हालात का जायजा लिया और पीड़ित परिवारों से मिलकर उन्हें न्याय का भरोसा दिलाया। साथ ही उन्होंने बताया कि पुलिस से आरोपियों पर एनएसए के तहत कार्रवाई करने को कहा गया है।

आईजी ने बताया कि विवाद दिन में भी हुआ था। इसके बाद दोनों गुटों ने समझौता कर लिया। बाद में कुछ लोगों के बहकाने पर एक पक्ष ने रात में दूसरे पक्ष की बस्ती में घुसकर तोड़फोड़ और आगजनी की। पुलिस के द्वारा सभी को चिह्नित किया जा रहा है। फिलहाल हालात नियंत्रण में है और अब तक 35 लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है। अन्य की तलाश की जा रही है।

दैनिक जागरण की खबर के मुताबिक घटना में पुलिस ने 57 नामदज, जबकि 100 अज्ञात लोगों के खिलाफ विभिन्न धाराओं में मुकदमा दर्ज किया है। पुलिस ने मामले में तत्काल कार्रवाई करते हुए 35 लोगों को गिरफ्तार कर लिया है। साथ ही पुलिस शेष आरोपितों की तलाश में रात-दिन छापेमारी कर रही है। इतना ही नहीं, घटना के बाद पुलिस की कार्रवाई से डरे-सहमे कुछ लोगों ने गाँव से पलायन करना भी शुरू कर दिया है।

दरअसल जौनपुर जिले के सरायख्वाजा थाना क्षेत्र के गाँव भदेठी में मंगलवार (9 जून, 2020) को गाँव के ही शहबाज नामक लड़के का दलित बस्ती के बच्चों से बकरियाँ चराने को लेकर विवाद हो गया था। इसके बाद दोनों समुदाय के लोगों में दिन में कहासुनी हो गई, लेकिन रात में मुस्लिम पक्ष के सैकड़ों लोगों ने मिलकर लाठी-डंडों से लैस दलित बस्ती में हमला बोल दिया।

इस दौरान आरोपितों ने हवाई फायरिंग, वाहनों में तोड़फोड़ और कई घरों को आग के हवाले कर दिया था। घटना में एक भैंस और तीन बकरियाँ जल कर राख हो गईं। वहीं एक सिलेंडर में लगी आग के बाद हुए विस्फोट से भारी नुकसान हुआ।

हालात को काबू करने के लिए कई थानों की पुलिस फोर्स को रात में ही तैनात कर दिया गया था। घटना के बाद गाँव भदेठू पहुँचे जिलाधिकारी दिनेश कुमार सिंह व पुलिस अधीक्षक अशोक कुमार ने घटना स्थल मुआयना किया और स्थिति को नियंत्रण करने में लगे रहे, जिसके बाद जिलाधिकारी ने हिंसा फैलाने वालों पर सख्त कार्रवाई करने की बात कही।

श्रीकालाहस्ती मंदिर: पंचमहाभूतों में से एक ‘वायु तत्व’ का प्रतीक, योग में इनसे मुक्त होने की वैज्ञानिक प्रक्रिया

यौगिक विज्ञान के अनुसार हमारा शरीर और यह सारा अस्तित्व पाँच तत्वों से मिलकर बना है। भूमि, जल, अग्नि, वायु और आकाश- ये ही वो पाँच तत्व हैं जो इस शरीर, धरती और सम्पूर्ण सृष्टि के आधार हैं।

इन्हीं पाँच तत्वों से सृष्टि का सृजन होता है। यदि ये पाँच तत्व नकरात्मक स्वरुप में मिलते हैं, तो कीचड़ बन जाते हैं और यदि सकारात्मक प्रकार से मिलते हैं, तो भोजन बन जाते हैं।

यदा-कदा वह मानव रूप भी ले लेते हैं तो कभी चैतन्य बन जाते हैं। आप इस सृष्टि में जो कुछ भी देखते हैं, वह बस इन पाँच तत्वों का ही खेला है।

हमारे पूर्वजों ने, योग में, पाँच तत्वों से मुक्त होने की एक वैज्ञानिक प्रक्रिया बनाई थी, जिसे भूत-शुद्धि कहते हैं। यदि आप इन तत्वों का शुद्धीकरण करते हैं, तो आप ऐसी स्थिति को प्राप्त कर लेते हैं जिसे भूत-सिद्धि कहते हैं।

योग-प्रणाली में भूत-शुद्धि की इस बुनियादी परम्परा से ही कई दूसरी परम्पराएँ निकली हैं। दक्षिणी भारत में, लोगों ने इन पाँच तत्वों के लिए पाँच बड़े मंदिर भी बनाए थे। ये मंदिर अलग-अलग तरह की साधना के लिए बनाए गए थे।

पंचभूत स्थलम

जल तत्व से मुक्त होने के लिए, आप एक विशेष मंदिर में जाते हैं और एक विशेष प्रकार की साधना करते हैं। वायु तत्व से मुक्ति हेतु, आप दूसरे मंदिर में जाते हैं और भिन्न साधना करते हैं।

इसी तरह, सभी पाँच तत्वों के लिए बनाए गए पाँच अद्भुत मंदिरों में विशेष प्रकार की ऊर्जा स्थापित की गई जो उस विशेष प्रकार की साधना में सहायता करती है। पुरातन योगी एक मंदिर से दूसरे मंदिर प्रस्थान करते थे और अपनी साधना करते थे।

पञ्चभूत स्थल दक्षिण भारत में पाँच शानदार प्राचीन मंदिर हैं, जिनका निर्माण मानव चेतना को विकसित करने के एक माध्यम के रूप में किया गया था। हर एक मंदिर का निर्माण पाँच विशेष तत्वों में से एक विशेष तत्व के लिए किया गया था।

श्रीकालाहस्ती मंदिर

श्रीकालाहस्ति में मंदिर वायु तत्व हेतु, कांचीपुरम में पृथ्वी तत्व, तिरुवन्नामलाई में अग्नि तत्व हेतु, चिदंबरम में आकाश तत्व एवं तिरुवनाईकवल में जल तत्च के लिए इन मंदिरों का निर्माण किया गया था।

श्रीकालाहस्ती मंदिर, आंध्र प्रदेश के श्रीकालाहस्ती शहर में स्थित है। यह भगवान शिव के सबसे महत्वपूर्ण मंदिरों में से एक है। यह मंदिर तिरुपति से 36 किलोमीटर की दूरी पर है और यह प्रसिद्ध वायु लिंग का स्थल है, जो पाँच तत्वों में से एक का प्रतीक है, यह मंदिर पंचमहाभूत में से एक तत्व पवन या वायु से जुड़ा है।

पाँचों मंदिरों का निर्माण यौगिक विज्ञान के अनुसार इस तरह किया गया है कि ये सभी मंदिर एक विशेष किस्म के भौगोलिक संरेखण में हैं तथा उनके द्वारा पैदा की जाने वाली अपार संभावनाओं का असर पूरे क्षेत्र पर होता है।

आने वाले कुछ हफ़्तों में आपको श्रीकालाहस्ति, कांचीपुरम, तिरुवन्नामलाई, चिदंबरम एवं तिरुवनाईकवल के मंदिरों की यात्राओं पर ले चलूँगा।

यह लेख मनीष श्रीवास्तव ने लिखा है।

आजमगढ़: मोबाइल पर धमकी, फिर मुस्लिमों ने बोला हमला, महिलाओं और बच्चों को भी नहीं छोड़ा

उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ जिला में एक मामूली बात पर कहासुनी के बाद मुस्लिमों ने एक हिंदू के घर पर हमला कर दिया। धारदार हथियारों से किए गए हमले में 12 से अधिक लोग घायल हो गए। मामले में 10 अज्ञात सहित 19 लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर पुलिस ने पाँच आरोपितों को गिरफ्तार कर लिया है।

जानकारी के मुताबिक आजमगढ़ जिले के महाराजगंज थाना क्षेत्र के सिकंदरपुर आयमा गाँव में बुधवार (10 जून, 2020) की देर शाम जयभीम को मोबाइल पर मिली धमकी को लेकर दो समुदाय के बीच कहासुनी हो गई। इसके बाद मुस्लिम समुदाय के लोगों ने इकट्ठा होकर दूसरे पक्ष के घर पर हमला बोल दिया।

इस दौरान लाठी-डंडों के साथ धारदार हथियारों से लैस आरोपितों ने घर में मौजूद महिलाओं और बच्चों के साथ भी मारपीट की और फिर वहाँ से फरार हो गए। दो समुदाय के बीच हुए विवाद की सूचना मिलते ही महाराजगंज थाना सहित कई थानों की पुलिस फोर्स मौके पर पहुँची।

एसपी ग्रामीण एनपी सिंह ने बताया कि दो पक्षों में किसी बात को लेकर मारपीट हुई है। नौ लोगों को नामजद किया गया है। पाँच आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया है। चार अन्य को जल्द गिरफ्तार कर लिया जाएगा।

वहीं थानाध्यक्ष महाराजगंज के मुताबिक मामूली सी बात को लेकर दोनों पक्षों में विवाद हुआ था। विनोद कुमार की तहरीर पर 19 लोगों के खिलाफ में मुकदमा दर्ज किया गया है, जिनमें से पाँच को गिरफ्तार कर लिया है। साथ ही कुछ लोगों से मामले को लेकर पूछताछ की जा रही है। जल्द ही सभी आरोपितों को गिरफ्तार कर लिया जाएगा। गाँव में फिलहाल शांति है। फिर भी कोई अप्रिय घटना न हो इसके लिए गाँव में पुलिस फोर्स को तैनात किया गया है।

अमर उजाला की खबर के मुताबिक भारी पुलिस बल की तैनाती से गाँव में सन्नाटा पसरा हुआ है। वहीं घटना के पीछे बच्चों के बीच खेलकूद में हुए विवाद को बताया जा रहा है, जबकि कुछ लोगों में प्रेम-प्रसंग की भी चर्चा है।

इससे पहले जौनपुर जिले के सरायख्वाजा थाना क्षेत्र के गाँव भदेठी में मंगलवार (9 जून, 2020) को गाँव के ही शहबाज नामक लड़के का दलित बस्ती के बच्चों से बकरियाँ चराने को लेकर विवाद हो गया था। इसके बाद दोनों समुदाय के लोगों में दिन में कहासुनी हो गई। देर रात में मुस्लिम पक्ष के सैकड़ों लोगों ने मिलकर लाठी-डंडों से लैस दलित बस्ती में हमला बोल दिया था और कई घरों को आग के हवाले कर दिया था। इस मामले को संज्ञान में लेते हुए सीएम योगी ने आरोपितों के खिलाफ एनएसए के तहत कार्रवाई करने का आदेश दिए हैं।