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हिंदू-विरोधी गॉडमैन सीरीज पर लगी लगाम, विरोध के बाद खुद Zee TV ने जारी किया बयान

विवादित तमिल सीरीज गॉडमैन को लेकर जी टीवी के मालिक सुभाष चंद्रा ने स्वयं भाजपा नेता सुब्रमण्यम स्वामी को आश्वस्त किया है कि वह अपने चैनल जी5 पर इस सीरीज को टेलीकास्ट नहीं होने देंगे। इस सीरीज के ख़िलाफ़ इससे पहले स्वामी के संगठन ‘विराट हिंदुस्तान’ ने विरोध प्रदर्शन किया था। ‘विराट हिंदुस्तान’ का संयोजन पूर्व आईएएस अधिकारी व स्वामी की विश्वासपात्रा चंद्रलेखा करती हैं।

द हंस इंडिया के अनुसार, चंद्रलेखा ने बताया कि जब उन्होंने गॉडमैन सीरीज से संबंधी ऐसे प्रोमो आदि देखे, जिनमें हिंदू धर्म का अपमान था, तो वह फौरन उस पर एक्शन लेकर उसे रोकना चाहती थीं। मगर, इसके बाद सुब्रम्ण्यम स्वामी ने खुद इस मामले पर संज्ञान लिया और त्वरित कार्यवाई करते हुए इस विषय पर जी चैनल के मालिक सुभाष चंद्रा से फोन पर संपर्क किया।

इस बातचीत में भाजपा नेता ने सुभाष चंद्रा से गॉडमैन को जी5 पर ऑन एयर न करने की अपील की, जिसके बाद सुभाष चंद्रा ने उन्हें आश्वस्त किया कि ये सीरीज उनके चैनल पर टेलीकास्ट नहीं होगी।

बाद में जी5 ने भी अपनी ओर से आधिकारिक बयान जारी कर दिया। जिसमें लिखा कि प्रतिक्रियाओं के आधार पर उन्होंने अपनी नई तमिल फिक्शन गॉडमैन को सस्पेंड कर दिया है। जारी बयान में कहा गया कि निर्माताओं, शो का और जी5 का ऐसा कोई उद्देश्य नहीं है कि वो किसी की धार्मिक, सामुदायिक या निजी भावनाओं को आहत करें।

गौरतलब है कि इससे पहले कोयम्बटूर जिले के अंधनार मुरपोकु कषगम ने पुलिस अधीक्षक सुजीत कुमार से शिकायत की थी। साथ ही कहा था कि वह गॉडमैन के निर्देशक और मीडिया चैनल के ख़िलाफ़ ट्रेलर प्रसारित करने के आरोप में कार्रवाई करें। एसपी को लिखे पत्र में कहा गया था कि हाल ही में ऑनलाइन सीरीज गॉडमैन का ट्रेलर जारी हुआ, उसमें ब्राह्मणों और हिंदू धर्म का खराब चित्रण किया गया है।

उन्होंने आरोप लगाया था कि ट्रेलर स्पष्ट रूप से समाज के एक वर्ग की भावनाओं को आहत करने और लोगों को धर्म के आधार पर भेदभाव करने के इरादे से बनाया गया है, ताकि समाज में शांति को बाधित किया जा सके।

यहाँ बता दें कि इस सीरीज का ट्रेलर रिलीज होने के बाद सोशल मीडिया पर इसकी खूब आलोचना हुई थी। सोशल मीडिया पर अच्छी पकड़ रखने वाले कई यूजर्स ने इस फिल्म को एंटी हिंदू फिल्म करार दिया था। साथ ही कहा था कि ये केवल हिंदुत्व और हिंदुओं को बदनाम करने के लिहाज से बनाई गई है। इसमें डेनियल बालाजी अभिनेता है और इसे मिशनरी समूहों द्वारा प्रमोट किया जा रहा है।

इसके अलावा इस फिल्म की पूरी स्टार कास्ट जयाप्रकाश, सोनिया अग्रवाल, डेनियल बालाजी पर भी स्पष्ट रूप से हिंदुओं को बदनाम करने की मंशा रखने का आरोप लगा था।

रमजान में गांजा-शराब पीने पर युवक का गला रेता, साजिद, सैयद और अज़ार की तलाश कर रही पुलिस

हैदराबाद के बहादुरपुरा में रमजान के दौरान गांजा और शराब का सेवन करने के कारण एक युवक की उसके तीन दोस्तों ने हत्या कर दी। शेख मोहम्मद नाम के शख्स की लाश शनिवार (मई 30, 2020) रात मीर आलम टैंक के पास झाड़ियों से बरामद हुई थी। बताया जा रहा है कि 20 साल के शेख मोहम्मद की गला रेतकर हत्या की गई थी।

जानकारी के मुताबिक, शनिवार की शाम शेख मोहम्मद अपने कुछ पुराने विवादों को सुलझाने के लिए मोहम्मद साजिद खान, सैयद सिद्दीक और मोहम्मद अज़ार के साथ बाहर गया था। बहादुरपुरा के इंस्पेक्टर दुर्गा प्रसाद ने बताया, “तकरीबन 8 बजे वे उसे ले गए थे और 10.30 बजे शेख की दादी मुमताज़ बेगम को अपने पोते की मौत के बारे में पता चला। आरोपितों ने उसका गला काट दिया था।”

पुलिस ने कहा कि मामले की जाँच की जा रही है। तीनों की तलाश की जा रही है। आरोपितों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 302 के तहत मामला दर्ज किया गया है। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, मृत शेख जब काफी छोटा था, तभी उसके पिता का निधन हो गया था। पिता के निधन के बाद से वह अपनी दादी के साथ रह रहा था।

मृतक के बारे में स्थानीय लोगों से सूचना मिलने के बाद शव की पहचान की गई। लाश की पहचान उसकी दादी ने की, जो कालापत्थर की रहने वाली है। शेख की दादी के अनुसार, उसे गांजा और शराब की लत थी। रमजान के दौरान गांजा पीने और शराब पीने को लेकर पहले भी उसका दोस्तों के साथ झगड़ा हुआ था।

‘लापता’ पोस्टर पर स्मृति ईरानी ने महिला कॉन्ग्रेस को दिखाया आईना, खुद के दौरे गिनाए, सोनिया के पूछ लिए

केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी की मोदी सरकार की मेहनतकश मंत्रियों में गिनी जाती हैं। मंत्रालय के साथ-साथ अपने संसदीय क्षेत्र की जनता से भी लगातार संपर्क में रहती हैं। बावजूद इसके महिला कॉन्ग्रेस ने एक झूठा दावा कर लोगों को गुमराह करने का प्रयास किया।

महिला कॉन्ग्रेस ने एक पोस्टर शेयर करते हुए दावा किया कि अमेठी की जनता अपने सांसद को खोज रही है। उनके झूठ की पोल खोलते हुए स्मृति ईरानी ने अपने दौरे गिनाते हुए कॉन्ग्रेसियों से उनकी अध्यक्ष सोनिया गॉंधी के रायबरेली दौरे को लेकर सवाल पूछा है।

स्मृति ईरानी ने ट्वीट कर कहा, “8 महीने 10 बार 14 दिन का हिसाब मेरे पास है। लेकिन ये बताएँ कि सोनिया गाँधी कितनी बार अपने क्षेत्र रायबरेली में गई हैं।” इससे पहले महिला कांग्रेस ने पोस्टर शेयर करते हुए ट्वीट क्या था, “अमेठी ढूंढ रही है अपनी लापता सांसद स्मृति ईरानी को।”

इस ट्वीट के जवाब में स्मृति ईरानी ने लिखा, “आपको मुझसे इतनी मोहब्बत थी ये पता नहीं था… चलें अब कुछ आपको भी हिसाब दिया जाए। 8 महीने 10 बार 14 दिन का हिसाब है मेरे पास है, लेकिन ये बताएँ सोनिया गाँधी इस दौरान कितनी बार अपने क्षेत्र (रायबरेली) में गईं।”

दरअसल अमेठी जिले में चिपकाए गए पर्चे में लिखा है कि सांसद बनने के बाद स्मृति ईरानी ने साल भर में दो दिन कुछ घंटों के लिए ही अपनी उपस्थिति दर्ज कराई है। हमने कोरोना संकट के बीच ट्विटर के माध्यम से उनको अन्ताक्षरी खलते और एकाध व्यक्ति के साथ लंच करते हुए देखा है, लेकिन इस विपरीत परिस्थिति में उनको मासूम जनता ढूंढ रही है। अमेठी की जनता को यूँ ही छोड़ देना यह दर्शाता है कि अमेठी आपके लिए महज टूर है और पर्चे के आखिर में सवाल किया गया कि क्या आप अमेठी में सिर्फ कन्धा ही देने आएँगी?

आपको बता दें कि यह कोई पहला मौका नहीं कि जब स्मृति ईरानी ने अपनी हाजिरजवाबी से विपक्ष को को निरुत्तर कर दिया है। हाल ही में कॉन्ग्रेस का राष्ट्रीय समन्वयक होने का दावा करने वाले पांधी ने ट्विटर पर स्मृति ईरानी का मजाक उड़ाने की कोशिश करते हुए उन्हें भारत के इतिहास का सबसे ‘मूर्ख’ और ‘बेवकूफ’ सांसद बताया था।

पांधी के अपमानजनक ट्वीट का एक दिन बाद केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी ने बेहद विनम्र अंदाज में जवाब देकर सोशल मीडिया यूजर्स का दिल जीत लिया था। स्मृति ईरानी ने अपने जवाब में पूर्व कॉन्ग्रेस अध्यक्ष राहुल गाँधी पर निशाना साधते हुए लिखा था कि वो इस बात सहमत हैं, लेकिन कल्पना कीजिए कि उनके जैसे मूर्ख ने सुपर इंटेलीजेंट राहुल गाँधी को हरा दिया।

14 फसलों का MSP 50-83% बढ़ा: आत्मनिर्भर भारत के लिए मोदी कैबिनेट ने लिए कई फैसले

मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल का पहला साल पूरे होने के बाद सोमवार (जून 1, 2020) को पहली बार केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक हुई। बैठक के बाद केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर, नितिन गडकरी और नरेंद्र सिंह तोमर ने प्रेस कॉन्फ्रेंस की।

इस दौरान उन्होंने लॉकडाउन के बाद देश को फिर से पटरी पर लाने के लिए उठाए गए कदमों की जानकारी दी। केंद्रीय मंत्री जावड़ेकर ने बताया कि आत्मनिर्भर भारत के लिए कई तरह फैसले लिए गए हैं। उन्होंने बताया कि MSME की परिभाषा को और संशोधित किया गया है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट की बैठक में खरीफ की 14 फसलों का न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) बढ़ाने की मँजूरी दी गई है। सरकार का कहना है कि नया एमएसपी किसानों की फसल के लागत मूल्य से 50-83% ज्यादा है। धान का एमएसपी 53 रुपए बढ़ाकर 1,868 रुपए प्रति क्विंटल कर दिया है। 14 फसलों पर किसानों को लागत से 50 से 83 फीसदी ज्यादा कीमत मिलेगी। इसके अलावा MSME (छोटे-मध्यम उद्योगों) से जुड़ी योजनाओं को भी मँजूरी दी गई।

पीएम मोदी ने इस दौरान कहा, “जब हमने आत्मनिर्भर भारत अभियान लॉन्च किया तो हमने केवल एमएसएमई सेक्टर की परिभाषा ही नहीं बदली, बल्कि ऐसे कई प्रस्तावों को भी लागू किया जिससे इसका प्रारूप बदला जा सके। यह लघु और मध्यम उद्योगों को मदद करने में कारगर साबित होगा। इससे रोजगार के कई अवसर पैदा होंगे।”

इसके अलावा खेती और उस जुड़े काम के लिए 3 लाख तक के अल्पकालिक कर्ज के भुगतान की तारीख 31 अगस्त 2020 तक बढ़ाई गई है। साथ ही ब्याज छूट योजना के तहत 31 अगस्त तक, जो किसान अपनी ऋण अदायगी करेगा उसको 4% ब्याज पर ही कर्जा मिलेगा।

नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा कि लॉकडाउन के दौरान भी सरकार की पहली नजर किसान और गरीब पर ही थी। उन्होंने कहा कि प्रतिकूल समय में भी इस साल बंपर उत्पादन हुआ है। मक्का में 52 फीसदी बढ़ोतरी हुई है। सरकार की तरफ से धान खरीद को लेकर उन्होंने कहा कि अब तक 93 लाख मिट्रिक टन धान खरीदा गया है।

उन्होंने बताया कि धान के लिए MSP की दर अब 1868 रुपए प्रति क्विंटल, ज्वार के लिए 2620 प्रति क्विंटल, बाजरा -2150 रुपए/क्विंटल की गई है। रागी, मूँग, मूँगफली, सोयाबीन, तिल और कपास की एमएसपी में 50 फीसदी की बढ़ोतरी की गई है। ये फैसला साल 2020-21 के लिए है।

प्रधानमंत्री मोदी ने एमएसएमई सेक्टर को मजबूती देने के लिए एक ऑनलाइन प्लेटफार्म लॉन्च किया है। इसका नाम चैम्पियन्स रखा गया है। इसका मकसद छोटे और मध्यम उद्योगों की मदद करना, उनकी शिकायतों का समाधान करना और व्यापार के नए मौके तलाशने में मदद करना है।

50 करोड़ रुपए तक के कारोबार वाली इकाई भी एमएसएमई के अंतर्गत आएगी। एमएसएमई के निर्यात का टर्नओवर इसमें नहीं जोड़ा जाएगा। इससे नए रोजगार के अवसर बढ़ेंगे। सरकार ने 4000 करोड़ रुपए के डिस्ट्रेस फंड को मँजूरी दी है। साथ ही बंद हुई एमएसएमई के लिए 20 हजार करोड़ रुपए का फंड बनाने का फैसला लिया गया है।

इस दौरान पीएम मोदी ने कहा, “आत्मनिर्भर भारत अभियान को गति देने के लिए हमने न केवल MSMEs सेक्टर की परिभाषा बदली है, बल्कि इसमें नई जान फूँकने के लिए कई प्रस्तावों को भी मँजूरी दी है। इससे संकटग्रस्त छोटे और मध्यम उद्योगों को लाभ मिलेगा, साथ ही रोजगार के अपार अवसर सृजित होंगे।”

उन्होंने कहा, “देश में पहली बार सरकार ने रेहड़ी-पटरी वालों और ठेले पर सामान बेचने वालों के रोजगार के लिए लोन की व्यवस्था की है। ‘पीएम स्वनिधि’ योजना से 50 लाख से अधिक लोगों को लाभ मिलेगा। इससे ये लोग कोरोना संकट के समय अपने कारोबार को नए सिरे से खड़ा कर आत्मनिर्भर भारत अभियान को गति देंगे।”

उन्होंने बताया कि रेहड़ी पटरी वालों के लिए केंद्र सरकार ने पीएम स्व नीति (प्रधानमंत्री स्ट्रीट वेंडर आत्मनिर्भर निधि) का गठन किया है। फुटपाथ विक्रेताओं समेत रेहड़ी पटरी वालों को 10 हजार रुपए तक कर्ज दिया जाएगा।

इसके साथ ही प्रधानंत्री नरेंद्र मोदी ने पहली बार वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए SPIC-MACAY के उद्घाटन के दौरान जनता को संबोधित किया। उन्होंने जनता को संबोधित करते कहा, “पूरी दुनिया में कोरोना के कारण जो तनाव है, लोगों में जो डर और दुविधा है, उसे संगीत और कला के माध्यम से कैसे दूर किया जाए, यही आपने इस साल के कार्यक्रम की थीम भी रखी है।”

उन्होंने कहा कि जिस तरह संगीत में एक सामंजस्य की जरूरत होती है, एक अनुशासन की जरूरत होती है, उसी तरह के सामंजस्य, संयम और अनुशासन से ही देश का प्रत्येक नागरिक आज इस महामारी से लड़ रहा है।

पाकिस्तान की आतंकी फैक्ट्री से पैदा हुआ TRF, कश्मीर में बसने पर मार डालने की धमकी दी

द रेसिस्टेंस फ्रंट यानी TRF पाकिस्तानी की आतंकी फैक्ट्री से निकला नया संगठन है। इसने उन सभी भारतीय नागरिकों को जान से मारने की धमकी दी है, जो कश्मीर से नहीं हैं और घाटी में बसने की योजना बना रहे हैं।

पत्रकार आरती टिक्कू सिंह ने ट्विटर पर आतंकी संगठन का एक पोस्टर शेयर किया है। इस पर कमांडर हमजा के हस्ताक्षर हैं। पोस्टर में आतंकी संगठन ने दावा किया है कि जानबूझकर किसी नागरिक, जाति और किसी भी धर्म या पंथ को नुकसान नहीं पहुँचाने की उनके संगठन की सख्त नीति है। लेकिन वे भाजपा के झाँसे में नहीं आने वाले हैं।

पोस्टर में कहा गया है कि भाजपा और आरएसएस घाटी के जनसांख्यिकीय में बदलाव की कोशिश कर रहे हैं। इसकी आड़ में आरएसएस अपने लोगों को कश्मीर में बसाना चाहता है। इसलिए आतंकी संगठन ने खुलेआम घोषणा की है कि जो भी गैर-कश्मीरी घाटी में बसने के इरादे से आएगा, उससे वह आरएसएस एजेंट की तरह निपटेगा।

इस महीने की शुरुआत में हिंदुस्तान टाइम्स की एक रिपोर्ट में कहा गया था कि खुफिया एजेंसियों ने एक नए पाकिस्तान बेस्ड आतंकी संगठन को चिह्नित किया है, जो पाकिस्तान में लश्कर-ए-तैयबा (एलईटी) के तीन टॉप कमांडरों द्वारा संचालित है। कथित तौर पर टीआरएफ को जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटने के बाद पिछले साल शुरू किया गया था।

भारतीय सुरक्षा अधिकारियों के अनुसार, लश्कर के नेताओं ने आतंकी संगठन टीआरएफ का गठन किया और पाकिस्तान से हाथ मिलाया। हिंदुस्तान टाइम्स के मुताबिक सुरक्षा रिपोर्ट्स में कहा गया है कि दक्षिण कश्मीर के लिए सज्जाद जट्ट, मध्य कश्मीर के लिए खालिद और उत्तरी कश्मीर के लिए हंजला अदनान को जिम्मेदारी दी गई है।

हिंदुस्तानी भाऊ ने एकता कपूर के खिलाफ दर्ज कराई FIR, कहा- वेब सीरिज XXX में जवान और उसकी वर्दी का मजाक बनाया

बिग बॉस-13 के प्रतिभागी रहे विकास पाठक उर्फ हिंदुस्तानी भाऊ ने प्रोड्यूसर एकता कपूर के खिलाफ मुंबई के खार पुलिस थाने में FIR दर्ज कराई है। एफआईआर में एकता कपूर पर एक वेब सीरीज के माध्यम से सेना का अपमान करने का आरोप लगाया है।

हिंदुस्तानी भाऊ का एक वीडियो सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रहा है। वीडियो में भाऊ एकता कपूर और उनकी माँ शोभा कपूर के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने की बात कह रहे हैं।

भाऊ ने आरोप लगाया कि एकता कपूर ने अपनी एक वेब सीरीज में देश के जवान और उसकी वर्दी का मजाक बनाया है। इसके खिलाफ उन्होंने ये शिकायत दर्ज करवाई है। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो को हिंदुस्तानी भाऊ ने खार थाने के सामने ही बनाया है। साथ ही वीडियो में उन्होंने एफआईआर की उस कॉपी भी दिखाई है।

इसके साथ ही भाऊ कहा है कि इस कृत्य के लिए एकता कपूर और उनकी माँ शोभा कपूर को इंडियन आर्मी से माफी माँगनी चाहिए। भाऊ का कहना है कि उनकी इस वेब सीरीज ने इंडियन आर्मी की गरिमा को ठेस पहुँचाई है।

दरअसल विकास पाठक उर्फ हिंदुस्तानी भाऊ ने बीते दिन अपने आधिकारिक सोशल मीडिया अकाउंट के जरिए एक पोस्ट साझा की थी। इस पोस्ट में उन्होंने लिखा था कि वो जल्द ही बॉलीवुड की जानी-मानी हस्ती को एक्सपोज करने वाले हैं। इतना ही नहीं, उन्होंने ये भी कहा था कि वो इस बॉलीवुड स्टार के खिलाफ एफआईआर भी करने वाले हैं।

गौरतलब है कि हिंदुस्तानी भाऊ वीडियो में जिस वेब सीरीज की बात कर रहे हैं उसका नाम ‘ट्रिपल एक्स’ है। इस वेब सीरीज में दिखाया गया है कि इंडियन आर्मी का जवान जब बॉर्डर पर जाता है तो उसकी पत्नी उसकी पीठ पीछे अफेयर चलाती है। इस अफेयर में जवान की वर्दी के साथ अश्लीलता करते हुए दिखाया गया है, जो कि वर्दी का अपमान है।

झारखंड: सबसे कम उम्र की MLA अंबा प्रसाद का ‘बड़ा’ कारनामा, लॉकडाउन में सैकड़ों की सभा, सोशल डिस्टेंसिंग को ठेंगा

पिछले साल झारखंड में विधानसभा चुनाव के बाद एक विधायक का ढोल मीडिया ने खूब पीटा था। ये थीं राज्य की सबसे कम उम्र की विधायक अंबा प्रसाद। बड़कागॉंव से कॉन्ग्रेस की इस विधायक ने एक ‘बड़ा’ कारनामा किया है।

लॉकडाउन में सैकड़ों लोगों की सभा को अंबा प्रसाद ने संबोधित किया है। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार इस दौरान पूलिस मूकदर्शक बनी रही। सोशल डिस्टेंसिंग का किसी को ख्याल नहीं था।

अंबा प्रसाद ने रविवार (31मई 2020) को केरेडारी प्रखंड के पांडू गाँव में सभा की। इसके लिए प्रशासन से इजाजत नहीं ली गई थी। उल्लेखनीय है कि कोरोना की वजह से लॉकडाउन के साथ इलाके में धारा 144 भी लागू है।

दरअसल विधायक ने एनटीपीसी कोयला खनन परियोजना क्षेत्र के कार्यों को लेकर विस्थपितों और प्रभावित भू-रैयतों के साथ बैठक की थी। बता दें केरेडारी के पांडू और तरहेसा गाँव में कनवेयर बेल्ट के लिए रास्ता बनाने का काम शुरू किया गया है। इस काम को रोकने के लिए अंबा प्रसाद ने ग्रामीणों के साथ बैठक की थी।

जानकारी के अनुसार इस सभा के आयोजन के दौरान केरेडारी के बेलतु पिकेट के पुलिसकर्मी बेंगवरी मोड़ के समीप गश्ती कर रहे थे। सिर्फ 300 कदम की दूरी पर मौजूद पुलिस वालों ने भी इतनी भारी संख्या में मौजूद लोगों की भीड़ ओर ध्यान नहीं दिया या फिर देख कर भी अनदेखा कर दिया।

कल हुई बैठक को लेकर झारखंड के भाजपा प्रवक्ता प्रतुल शाह ने ट्विटर के जरिए, सोशल डिस्टेंसिग को ताक पर रखते हुए की गई जनसभा को लेकर कई फ़ोटो शेयर किए। जहाँ उन्होंने विधायक की इस लापरवाही को लेकर उनपर कार्यवाही की माँग की है।

सैकड़ों लोगों की जान जोखिम में डाल सभा के आयोजन ने तूल तब पकड़ा जब लोगों ने इसकी फ़ोटो और वीडियो सोशल मीडिया पर डाल दिया।

इसके बाद कॉन्ग्रेस विधायक ने सफाई देते हुए कहा कि बैठक गाँव वालों ने अपनी समस्या के समाधान के लिए आयोजित की गई थी। विशेष आग्रह पर ही वो उनकी स्थिति को समझने वहाँ पहुँची थी। लेकिन लोगों की भीड़ देखते ही उन्होंने दूरी बना ली। उनकी बातों को सुनने के बाद वो वहाँ से तुरंत चली गई थीं। सोशल डिस्टेंसिग को मद्देनजर रखते हुए उन्होंने ग्रामीणों से उनके आवेदनों को जमा करा लिया और उन्हें समझ-बुझाकर वापस भेज दिया था।

जिला प्रशासन बताया कि किसी भी अधिकारी को इस बैठक की खबर नहीं थी। बैठक के लिए किसी भी प्रकार की अनुमति भी नहीं ली गई थी। सीओ अरुण कुमारी तिर्की ने बताया कि रैयतों के साथ बैठक के बारे प्रशासन को कोई सूचना नहीं दी गई थी।

दलितों का कब्रिस्तान बना मेवात: 103 गाँव हिंदू विहीन, 84 में बचे हैं केवल 4-5 परिवार

क्या हरियाणा का मेवात मिनी पाकिस्तान है? यह सवाल पूर्व जस्टिस पवन कुमार की अगुवाई वाली 4 सदस्यीय जॉंच समिति की रिपोर्ट से खड़ी हुई है। यह रिपोर्ट बताती है कि मुस्लिम बहुल मेवात कैसे हिंदुओं खासकर दलितों के लिए कब्रिस्तान बनता जा रहा है। महिलाओं को अगवा करना, दुष्कर्म और जबरन धर्म परिवर्तन की कई घटनाएँ वैसे ही सामने आए हैं, जैसी खबरें पाकिस्तान से आती रहती है।

हरियाणा श्री वाल्मीकि महासभा ने इस कमिटी का गठन किया था। इससे संबंधित एक प्रेस विज्ञप्ति विहिप के राष्ट्रीय प्रवक्ता विनोद बंसल ने भी ट्वीट की है।

जब ऑपइंडिया ने इस संबंध में पूर्व न्यायधीश पवन कुमार से संपर्क किया, तो कई बातें निकलकर सामने आई। पूर्व न्यायाधीश ने बताया कि मेवात में समुदाय विशेष (बहुसंख्यक आबादी) का अल्पसंख्यकों पर अत्याचार इतना भीषण है कि जिले के करीब 500 गाँवों में से 103 गाँव ऐसे हैं जो हिंदूविहीन हो चुके हैं। 84 गाँव ऐसे हैं जहाँ अब केवल 4 या 5 हिंदू परिवार ही शेष हैं।

प्रेस रिलीज

पूर्व न्यायाधीश पवन कुमार से ऑपइंडिया की बात

पूर्व न्यायाधीश पवन कुमार इस संबंध में बताते हैं कि वह दलितों पर अत्याचार के मामले में जाँच के लिए स्वयं मेवात गए थे। यहाँ उन्होंने 48 पीड़ितों को पूछताछ के लिए बुलाया। लेकिन, स्थानीय दलितों में समुदाय विशेष के लोगों की इतनी गहरी दहशत है कि इनमें से केवल 19 लोग ही उनके पास आए। इनमें से कुछ स्वयं पीड़ित थे और कुछ पीड़ितों के परिजन। यहाँ उन्होंने स्वंय उनसे बातचीत की, उनके बयान रिकॉर्ड किए।

पवन कुमार कहते हैं कि इन लोगों से बातचीत करने के बाद उन्हें मालूम चला कि मेवात में दलितों की स्थिति बेहद बुरी है। वहाँ लड़कियों से रेप, वधुओं का अपहरण, धर्मांतरण, दलितों से मारपीट की घटनाएँ आम हो गई है।

हमसे बात करते हुए पूर्व न्यायाधीश कुछ घटनाओं का जिक्र करते हैं, जिनका उल्लेख विज्ञप्ति में भी है। वे बताते हैं कि कुछ समय पहले समुदाय विशेष के 4 लड़कों ने एक पुलिस वाले के घर में ही एक बच्ची का रेप किया। लेकिन जब बाद में इस मामले पर शिकायत दर्ज हुई, तो आगे कोई कार्रवाई नहीं की गई।

इसके अलावा एक और घटना का उल्लेख करते हुए पूर्व न्यायधीश बताते हैं कि कुछ समय पहले एक लड़की को नौकरी का झाँसा देकर अगवा किया गया। फिर उसे कई दिनों तक बंधक बनाया गया और इस बीच 9 लोगों ने उसका रेप किया। मगर, जब दरिंदों के चंगुल से छूटकर लड़की ने थाने में आपबीती सुनाकर शिकायत दर्ज कराई, तो मामले पर कोई उपयुक्त कार्रवाई नहीं हुई। नतीजतन एक दिन उसका गला काटकर उसे मारने की कोशिश हुई, लेकिन न जाने कैसे वो उस समय बच गई। किंतु अगली बार फिर उस पर हमला हुआ और उसकी अंतत: हत्या कर दी गई।

उल्लेखनीय है कि विज्ञप्ति में लिखा गया है कि न्यायाधीश पवन कुमार ने कहा कि जबरन धर्मांतरण के कई उदाहरण सामने आए। किंतु किसी भी मामले में कोई कार्रवाई न होने के कारण धर्मांतरित व्यक्तियों के परिवारों पर धर्मांतरण का दबाव बनाया जाता रहा। ऑपइंडिया से बातचीत में धर्मांतरण से जुड़े एक वाकये का भी जिक्र किया।

उन्होंने कहा कि कुछ समय पहले मेवात में दो बच्चों की माँ को पहले एक मुस्लिम लड़का भगाकर ले गया। बाद में उसने उसे अवैवाहिक बताकर जबरन उसका धर्म परिवर्तन करवा दिया। लेकिन, तब भी पुलिस ने इस मामले पर कार्रवाई करनी उचित नहीं समझी। जबकि महिला की बेटियाँ इस संबंध में बताती रहीं कि उस लड़के के व्हॉट्सअप पर मैसेज आते थे कि तुम धर्म परिवर्तन करो।

पुलिस की ढिलाई पर ध्यान आकर्षित करवाते हुए गठित जाँच समिति के अध्यक्ष पवन कुमार बताते हैं कि मेवात में हालात इतने बुरे हैं कि पैसे माँगने पर दलितों को इतना मारा जाता है कि वो मुश्किल से बच पाते हैं। लेकिन जब वही पीड़ित जाकर पुलिस से इस संबंध में शिकायत करता है तो पुलिस एक्शन लेने की बजाय पीड़ित पर ही समझौते का दबाव बनाती है।

प्रेस विज्ञप्ति में बिछोर गाँव की एक और घटना का जिक्र होता है। इस संबंध में रिटायर्ड जज हमें बताते हैं कि वहाँ रामजीलाल को पेट से काटा गया। बाद में उसे जिंदा जला दिया गया। किंतु जब बात आरोपितों के ख़िलाफ़ कार्रवाई की आई तो पुलिस ने ये कहकर फाइल बंद कर दी कि वो आसमानी बिजली के कारण मरा है। पवन कुमार कहते हैं कि खुद सोचिए बिजली से कोई व्यक्ति मरेगा तो पेट थोड़ी काटा जाएगा? इस घटना में मृतक के घरवाले इतना ज्यादा डर गए कि उन्होंने गाँव से ही पलायन कर लिया।

इस बातचीत में हमें यह भी ज्ञात हुआ कि मेवात की बहुसंख्यक आबादी धीरे-धीरे दलितों के श्मशान घाट पर कब्जा कर रही है। साथ ही सरकार द्वारा मुहैया कराए गए उनके प्लॉट भी समुदाय विशेष के लोगों द्वारा धीरे-धीरे हड़पे जा रहे हैं। वहीं, मारपीट, उधारी का पैसा माँगने पर हमले की घटनाएँ तो मानो बेहद सामान्य हो गई हैं।

साभार: राजनीति गुरु

पूर्व न्यायाधीश स्पष्ट शब्दों में ऑपइंडिया से बात करते हुए कहते हैं कि मेवात में प्रशासन ढीला है और पुलिस के शह में ये सारा काम होता है। नतीजतन 104 गाँव से हिंदू बिलकुल गायब हो चुके हैं, जबकि 84 गाँव में 4-5 की संख्या में हिंदू परिवार बचे हैं। पवन कुमार कहते हैं कि मेवात में 500 गाँव हैं। लेकिन इनमें एक तिहाई गाँवों में से हिंदू गायब हो चुके हैं।

मामले में आगे की कार्रवाई पर पवन कुमार बताते हैं कि उन्होंने इस विषय में सभी तथ्य जुटाने के बाद अपनी रिपोर्ट तैयार करके मुख्यमंत्री को भेज दी है। इसके अलावा ये रिपोर्ट गृह मंत्रालय को और अनुसूचित जाति आयोग के चेयरमैन को भी भी दी गई है। अब इन तथ्यों की जाँच से उनका उद्देश्य केवल दलित समाज को न्याय दिलाने का और मेवात में कानून स्थापित करने का है।

वह कहते हैं कि मेवात में इस समय दलितों की जो स्थिति है, वैसी तो शायद पाकिस्तान में जो हिंदू बचे हैं, उनकी भी स्थिति न हो। जाँच टीम अध्यक्ष अध्यक्ष पवन कुमार स्पष्ट बताते हैं कि पाकिस्तान में रह रहे हिंदुओं भी बदतर हालात मेवात में दलितों की है। 

आरोपों पर पुलिस ने क्या कहा?

यहाँ बता दें श्री वाल्मीकि महासभा द्वारा गठित इस 4 सदस्यीय जाँच टीम ने अपनी पड़ताल पूरी करके यह निष्कर्ष निकाला है कि दलितों पर अत्याचार प्रशासन और पुलिस की शह पर हो रहा है। विज्ञप्ति में कहा गया पहले तो दलितों की शिकायतें ही दर्ज नहीं होती थी दर्ज हो भी जाएँ, तो कार्यवाही नहीं होती।

इसके साथ ही इस रिलीज के जरिए पुलिस पर ये भी आरोप लगाया गया कि पुलिस वहाँ पीड़ितों को समझौता करने के लिए धमकाती है और पीड़ित पर ही झूठा केस दर्ज कराने की धमकी देते हैं। ऐसे में जब हमने इस संबंध में मेवात एसपी से बात की और पुलिस पर लग रहे आरोपों के बारे में पूछा तो उन्होंने मामलों में कार्रवाई के लिए चरणबद्ध प्रक्रिया का हवाला दिया।

उन्होंने कहा, “जब भी पुलिस के पास कोई दलित उत्पीड़न का कोई मामला आता है तो उस पर शिकायत दर्ज होती है और मामले में नियमानुसार कार्रवाई होती है। अगर कोई शिकायतकर्ता आता है तो उसके लिए एसएचओ का एवेन्यू खाली है, वह डीएसपी से मिल सकता है, एसपी से मिल सकता है।”

आगे, जब हमने इस दौरान उनसे विज्ञप्ति में पुलिस पर उठे प्रश्नों को लेकर सवाल करना चाहा तो संपर्क टूट गया। बाद में हमने कई बार दोबारा संपर्क करने की कोशिश की, लेकिन बात नहीं हो पाई।

संयुक्त हिंदू संघर्ष समिति के अध्यक्ष महावीर भारद्वाज से ऑपइंडिया की बात

बता दें, मेवात में दलितों पर अत्याचार मामले में ऑपइंडिया ने सबसे पहले प्रेस रिलीज को जारी करने वाले संयुक्त हिंदू संघर्ष समिति के अध्यक्ष महावीर भारद्वाज से भी बात की। उन्होंने भी हमसे इस दौरान मेवात में दलितों की स्थिति को उजागर किया और पुलिस प्रशासन व प्रशासन को न्याय दिलाने में नाकाम बताया। उन्होंने भी कहा कि यहाँ छोटी-छोटी बच्चियों व महिलाओं का रेप होता है। बाद में उनकी हत्या हो जाती है। लेकिन पुलिस उनपर कोई कार्रवाई नहीं करती है।

वे कहते हैं कि स्थिति ये आन पड़ी है कि अब लड़कियाँ स्कूल जाने में डरने लगी हैं। इसके अलावा अनुसूचित जाति के बच्चों पर वहाँ बहुसंख्यक आबादी के बच्चे फब्तियाँ कसते हैं। इससे स्कूल जाने वाले बच्चों की संख्या कम हो गई है और हालात इतने गंभीर हैं कि वे सब पलायन की योजना बना रहे हैं। महावीर भारद्वाज कहते हैं कि स्वतंत्र भारत में, हरियाणा की धरती पर ऐसे मिनी पाकिस्तान बनाकर पाक से ज्यादा अत्याचार किए जा रहे हैं।

वे कहते हैं कि मेवात में बहुसंख्यक आबादी मुस्लिमों की है। ऐसे में इन अत्याचारों से तंग आकर कई हिंदू पलायन कर गए हैं। लेकिन अनुसूचित जाति के लोग, वर्तमान में इतने समर्थ नहीं है कि वह गाँव छोड़कर शहर जाएँ, अपना मकान लें, बिजनेस शुरू करके नए तरीके से जीवन जिएँ। इसलिए बस दलित वर्ग रुका है और उनपर अत्याचार हो रहे हैं।

पूर्व न्यायाधीश की भाँति महावीर भारद्वाज भी पुलिस की मंशा पर सवाल उठाते हुए कहते हैं मामला संज्ञान में आने के बाद अब FIR दर्ज करती है। मगर, बाद में उनपर समझौते का दबाव बनाती है और कहती है कि जब यही रहना है तो मिलकर रहो। भारद्वाज इस बातचीत में ये जानकारी भी देते हैं कि मेवात में यह सब बहुत पहले से हो रहा था, लेकिन पिछले एक-दो महीने में ज्यादा मामले संज्ञान में आने के बाद इस कदम को उठाया गया।

मेवात में महंत रामदास पर हमला

गौरतलब करवा दें कि बीते दिनों हरियाणा के मेवात जिला स्थित पुन्हाना में मुक्तिधाम आश्रम के प्रमुख महंत रामदास महाराज के साथ मुस्लिम बहुल इलाके में कुछ लोगों द्वारा कथित तौर पर बदसलूकी, मारपीट और जान से मारने की नीयत से हमला करने का मामला सामने आया था। महंत के समर्थन में आए हिंदूवादी संगठनों ने ऑपइंडिया से बातचीत में बताया था कि बुधवार (अप्रैल 29, 2020) की सुबह महंत रामदास महाराज पर आरोपितों ने धार्मिक भावनाओं को निशाना बनाते हुए अभद्र धार्मिक टिप्पणियाँ की। साथ ही इलाके के सभी साधु-संतों को पुन्हाना से भगा देने की धमकी भी दी थी।

महंत रामदास महाराज जब इस हमले के बाद किसी तरह जान बचाकर पुलिस के पास पहुँचे तो उसने कथित तौर FIR दर्ज करने से इनकार कर दिया। ऑपइंडिया ने इस मामले में जब पुलिस का पक्ष जानने की कोशिश की तो पुन्हाना थाना SHO ने इस मामले में किसी भी जानकारी के लिए हेडक्वार्टर से बात करने कहा था। उन्होंने कहा था कि उन्हें इस प्रकार की किसी घटना की जानकारी नहीं है।

लुकआउट नोटिस के बावजूद बांग्लादेश भाग रहे जमाती, आँखें मूँदे बैठी है ममता सरकार: बंगाल के गवर्नर धनखड़

पश्चिम बंगाल के राज्यपाल जगदीप धनखड़ ने राज्य की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर तबलीगी जमात मामले में गैर जिम्मेदार होने का आरोप लगाया है। राज्यपाल ने ममता बनर्जी पर तबलीगी जमात के विदेशी सदस्यों की तरफ आँख मूँदने का आरोप लगाया है।

उनका कहना है कि केंद्र सरकार की तरफ से लुकआउट नोटिस जारी होने के बावजूद ममता सरकार तबलीगी जमात के बांंग्लादेशी सदस्यों की हरकतों को नजरअंदाज कर रही हैं। इसकी वजह से बांग्लादेशी जमाती भारत छोड़कर अपने देश भागने में सफल हो पा रहे हैं।

इकॉनोमिक टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक बांग्लादेशी जमात सदस्य जाँच की निर्धारित प्रक्रिया का पालन किए बिना, हरिदासपुर चेक-पोस्ट के माध्यम से भारत छोड़ने की कोशिश कर रहे हैं।

धनखड़ ने ईटी को बताया कि उन्हें हाल ही में रिपोर्ट मिली थी कि कुछ दिनों पहले सीमा पर इमिग्रेशन ब्यूरो में 19 तबलीगी जमातियों को बांग्लादेश जाने के दौरान सीमा पर रोक दिया गया और हिरासत में लिया गया था।

राज्यपाल धनखड़ ने उन जमातियों के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि ये बांग्लादेशी नागरिक कोलकाता के न्यू टाउन में मदीनात-उल-हुज्जाज के क्वारंटाइन सेंटर में थे, उन्हें बस द्वारा वापस बांग्लादेश भेजा जा रहा था। बांग्लादेश के लिए प्रस्थान करने के लिए हरिदासपुर पहुँचने पर पाया गया कि उनके खिलाफ लुकआउट नोटिस जारी था।

इन जमातियों को दिल्ली के क्राइम ब्रांच के डीसीपी ने ऑफिस में पेश होने का आदेश दिया था। इससे पहले ही वो चुपके से बांग्लादेश भागने की फिराक में थे। मगर इससे पहले कि वो बस लेकर बांग्लादेश के लिए रवाना हो पाते, उन्हें रोककर हिरासत में ले लिया गया। राज्यपाल धनखड़ ने इसे बहुत बड़ी चूक बताया।

बता दें कि विदेशी तबलीगी जमात के सदस्यों ने भारत के वीजा नियमों की धज्जियाँ उड़ा दी थीं। इसको लेकर उन पर कार्रवाई भी की जा रही है।

इसके अलावा धनखड़ ने ममता सरकार पर केंद्र सरकार द्वारा जारी किए गए दिशा-निर्देशों का पालन नहीं करने और लॉकडाउन को भी सही तरीके से लागू नहीं करने का आरोप लगाया।

एक तरफ ममता बनर्जी इन आरोपों को खारिज कर रही हैं, वहीं दूसरी तरफ वे कोरोना के बढ़ते मामलों पर खुद को लाचार भी बता रही हैं। द हिंदू की रिपोर्ट के अनुसार, उन्होंने राज्य में कोरोना के बढ़ते मामलों पर शुक्रवार को कहा, “यह मेरे हाथ में नहीं रह गया। अब मुझे कुछ नहीं करना है। आप अपने बगल में कोरोना के साथ सो सकते हो। इसे अपना तकिया बनाएँ। मुझे माफ करें।”

क्या हिन्दू गौमांस खाते थे? वामपंथी कारवाँ मैग्जीन ने संस्कृत के अज्ञान के कारण फिर दिखाई मूर्खता

ततश्चानुदिनं धर्मः सत्यं शौचं क्षमा दया। कालेन बलिना राजन् नङ्‌क्ष्यत्यायुर्बलं स्मृतिः॥

भगवान कृष्ण द्वारा द्वापर युग के अंतिम दिनों में कलियुग के विषय में बोला गया ये श्लोक आज भी अंतिम सत्य है। इस श्लोक में कहा गया है कि कलियुग में धर्म, सत्यवादिता, स्वच्छता और सहिष्णुता के घटने के साथ-साथ असत्य का अत्यंत बोलबाला बढ़ेगा। मनुष्य केवल स्वयं के गलत विचारों को भी सच सिद्ध करने के लिए झूठ का इतना और इस तरह प्रयोग करेगा कि बहुसंख्य लोग उस झूठ को सच मानने के लिए विवश हो जाएँगे।

ऐसे ही कुछ प्रयास कुछ समय से वामपंथी विचारधारा वाले इतिहासकार और प्रकाशक कर रहे हैं। मार्क्सवादी इतिहासकार रोमिला थापर ने यह अवधारणा सिद्ध करने की कोशिश की कि प्राचीन हिंदू ऋषि-मुनियों ने न केवल मांस खाया, बल्कि अतिथियों को मांस परोसना भी सम्मानजनक माना गया।

स्क्रॉल और कारवाँ जैसे प्रकाशकों ने और आगे बढ़ते हुए ये प्रतिपादित करने का प्रयत्न किया कि वैदिक काल में भारतवर्ष में ब्राह्मणों और ऋषियों द्वारा गौमांस खाना एक बहुत ही स्वीकार्य वस्तु थी और अपनी इस कुचेष्टा को साबित करने के लिए ऋग्वेद और सनातन धर्म के दूसरे ग्रंथों के श्लोक और ऋचाओं के अर्थ को तोड़-मरोड़कर कुछ इस तरह प्रस्तुत किया कि कोई भी सामान्य व्यक्ति उस पर भरोसा कर ले।

ये सब सोचे-समझे प्रयास उस एक बड़े इकोसिस्टम का भाग है, जो एक साधारण भारतीय को सदैव हीन भावना से ग्रसित ही रखना चाहती है। इन्हीं कुटिल प्रयासों ने वेदों के विषय में सबसे अधिक प्रचलित एक शंका उत्पन्न कर दी है कि क्या वेदों में पशुबलि, मांसासाहार और गौमांस के सेवन आदि का विधान और उल्लेख है?

हमारे देश में वेद और वैदिक ज्ञान की दुर्दशा का कारण हमारे ही ऐसे अध्येता हैं, जो संस्कृत भाषा और व्याकरण को तो समझते थे, किंतु वेद और शास्त्रों के यथार्थ ज्ञान से कोसों दूर रहे। ऐसे लोगों ने जब वेद, पुराण और उपनिषदों का भाष्य किया तो केवल शाब्दिक अर्थ निकाले, किंतु उसमें छिपे गूढ़ भावार्थ को ये लोग समझ नहीं पाए, और जब ये खुद नहीं समझ पाए तो सही व्याख्या का तो प्रश्न ही नहीं उठता।

इन्हीं भारतीय अध्येताओं से इन ग्रंथों का सीमित अर्थ पश्चिमी भाष्यकारों के पास गया और इन्हीं पश्चिमी भाष्यकारों का अनुकरण कर थापर जैसे कितने ही तथाकथित इतिहासकार और कारवाँ जैसे प्रकाशन हमारी सभ्यता और हमारे ग्रंथों का उपहास उड़ाने में सक्षम बन गए हैं।

वेदों की व्याख्या करना एक अत्यधिक जटिल गतिविधि है और ये केवल संस्कृत भाषा के ज्ञान से बहुत परे है। इसके लिए न केवल ज्ञान, बल्कि शिखा (ध्वनि-विज्ञान), व्याकरण, निरुक्त (दर्शन), निघंटु (शब्दावली), छंद (अधिकार), ज्योतिष (खगोल विज्ञान), और कल्प (समय अवधि या युग) की गहरी समझ की आवश्यकता होती है। साथ ही और कई अन्य पहलुओं की, जो केवल सनातन संस्कृति के भीतर रहने और समझने से जाना जा सकता है।

कारवाँ के लेख में इच्छानुरूप दिए गए कुछ ऋचाओं और श्लोकों के अशुद्ध और अपकार प्रयोगों का खंडन करने से पहले आइए कुछ ऐसे शब्द देखते हैं, जिससे लोगो को भ्रमित किया जाता है कि वेदों में पशुबलि, मांसाहार आदि का विधान है।

‘मेध’ 

मेध शब्द का अर्थ केवल हिंसा नहीं है। मेध शब्द के तीन अर्थ हैं- 1. मेधा अथवा शुद्ध बुद्धि को बढ़ाना, 2. लोगो में एकता अथवा प्रेम को बढ़ाना 3. हिंसा।

इसलिए मेध से केवल हिंसा शब्द का अर्थ ग्रहण करना उचित नहीं है। अश्वमेध शब्द का अर्थ यज्ञ में अश्व की बलि देना नहीं है अपितु शतपथ 13.1.6.3 और 13.2.2.3 के अनुसार राष्ट्र के गौरव, कल्याण और विकास के लिए किए जाने वाले सभी कार्य “अश्वमेध” हैं। गौ मेध का अर्थ यज्ञ में गौ की बलि देना नहीं है अपितु अन्न को दूषित होने से बचाना, अपनी इन्द्रियों को वश में रखना, सूर्य की किरणों से उचित उपयोग लेना, पृथ्वी को पवित्र या साफ रखना -‘गोमेध‘ यज्ञ है।

‘गौ’ शब्द का एक और अर्थ है- पृथ्वी। पृथ्वी और उसके पर्यावरण को स्वच्छ रखना ‘गोमेध’ कहलाता है। नरमेध का अर्थ मनुष्य की बलि देना नहीं है अपितु मनुष्य की मृत्यु के बाद उसके शरीर का वैदिक रीति से दाह संस्कार करना नरमेध यज्ञ है।

मनुष्यों को उत्तम कार्यों के लिए प्रशिक्षित एवं संगठित करना नरमेध या पुरुषमेध या नृमेध यज्ञ कहलाता है। अजमेध का अर्थ बकरी आदि की यज्ञ में बलि देना नहीं है, अपितु अज कहते है बीज,अनाज या धान को। अजमेध का अर्थ कृषि की पैदावार बढ़ाना है। अजमेध का सीमित अर्थ अग्निहोत्र में धान आदि की आहुति देना है।

‘आलम्भ’ 

लभ्’ धातु से बनने वाला आलम्भ शब्द का अर्थ मारना नहीं अपितु अच्छी प्रकार से प्राप्त करना, स्पर्श करना या देना होता है। पारस्कर सूत्र 2 /2 /16 में कहा गया है कि आचार्य ब्रह्मचारी का आलम्भ अर्थात हृदय का स्पर्श करता है। यहाँ पर आलम्भ का अर्थ स्पर्श आया है। पारस्कर सूत्र 1 /8 /8 में भी कहा गया है कि वर-वधू के दाहिने कंधे के ऊपर हाथ ले जाकर उसके ह्रदय का स्पर्श करे। यहाँ पर भी आलम्भ का अर्थ स्पर्श आया है। अगर यहाँ पर आलम्भ शब्द का अर्थ मरना मानें तो यह कैसे युक्तिसंगत एवं तर्क संगत सिद्ध होगा? इससे सिद्ध होता है कि आलम्भ शब्द का अर्थ ग्रहण करना, प्राप्त करना अथवा स्पर्श करना है।

‘संज्ञपन’

संज्ञपन शब्द का अर्थ ज्ञान देना, दिलाना एवं मेल कराना है। अथर्ववेद 6/10/14-15 में लिखा है कि तुम्हारे मन का ज्ञानपूर्वक अच्छी प्रकार (संज्ञपन) मेल हो, तुम्हारे हृदयों का ज्ञान पूर्वक अच्छी प्रकार (संज्ञपन) मेल हो। इसी प्रकार शतपथ ब्राह्मण 1/4 में एक आख्यानिका है जिसका अर्थ है, “मैं वाणी तुझ मन से अधिक अच्छी हूँ, तू जो कुछ मन में चिंतन करता है मैं उसे प्रकट करती हूँ। मैं उसे अच्छी प्रकार से दूसरों को बतलाती हूँ (संज्ञपयामी) संज्ञपन शब्द का मेल के स्थान पर हिंसापरक अर्थ करना अज्ञानता का परिचायक है।”

‘गोघ्न’ 

गोघ्न शब्द में हन धातु का प्रयोग है, जिसके दो अर्थ बनते हैं- हिंसा और गति। गोघ्न में उसका गति अथवा ज्ञान, गमन, प्राप्ति विषयक अर्थ है। मुख्य भाव यहाँ प्राप्ति का है, अर्थात जिसे उत्तम गौ प्राप्त कराई जाए। हिंसा के प्रकरण में वेद का उपदेश गौ कि हत्या करने वाले से दूर रहने का है। ऋग्वेद 114 /10 में लिखा है, जो गोघ्न – गौ कि हत्या करनेवाला है – वह नीच पुरुष है, वह तुमसे दूर रहे।

वेदों के कई उदाहरणों से पता चलता है कि ‘हन्’ का प्रयोग किसी के निकट जाने या पास पहुँचने के लिए भी किया जाता है। उदहारण के लिए अथर्ववेद 6 /101 /1 में पति को पत्नी के पास जाने का उपदेश है। इस मंत्र का यह अर्थ है कि पति पत्नी के पास जाए उचित प्रतीत होता है ना कि पति द्वारा पत्नी को मारना उचित सिद्ध होता है। इसलिए हनन का केवल हिंसा अर्थ गलत परिपेक्ष में प्रयोग करना भ्रम फैलाने के समान है।

‘अतिथिनीर्गा’

कारवाँ मैग्जीन के लेख के अनुसार, ऋग्वेद के मंत्र 10 /68 /3 में अतिथिनीर्गा: का अर्थ अतिथियों के लिए गौओं का वध किया गया है। जिसका तात्पर्य यह प्रतीत होता है कि किसी प्रतिष्ठित व्यक्ति के आने पर गौ को मारकर उसके मांस से उसे तृप्त किया जाता था। यहाँ पर जो भ्रम हुआ है, उसका मुख्य कारण अतिथिनी शब्द को समझने की गलती के कारण हुआ है।

यहाँ पर उचित अर्थ बनता है ऐसी गायें जो अतिथियों के पास दानार्थ लाई जाएँ, उन्हें दान की जाए। Monier Williams ने भी अपनी संस्कृत इंग्लिश शब्दकोश में अतिथिग्व का अर्थ “To whom guests should go” अर्थात जिसके पास अतिथि प्रेमवश जाए। Bloomfield ने भी इसका अर्थ “Presenting cows to guests” अर्थात अतिथियों को गौ भेंट करने वाला ही बताया है। अतिथि को गौमांस परोसना कपोलकल्पित है।

‘माष’

माष शब्द का प्रयोग ‘माषौदनम्‘ के रूप में हुआ है। इसे बदल कर किसी मांसभक्षी ने मांसौदनम् अर्थ कर दिया है। यहाँ पर माष एक दाल के समान वर्णित है। इसलिए यहाँ मांस का तो प्रश्न ही नहीं उठता। आयुर्वेद (सुश्रुत संहिता शरीर अध्याय 2) गर्भवती स्त्रियों के लिए मांसाहार को सख्त मना करता है और उत्तम संतान पाने के लिए माष सेवन को हितकारी कहता है। इससे क्या स्पष्ट होता है। यही कि माष शब्द का अर्थ मांसाहार नहीं अपितु दाल आदि को खाने का आदेश है। फिर भी अगर कोई माष को मांस ही कहना चाहे, तब भी मांस को निरुक्त 4/1/3 के अनुसार मनन साधक, बुद्धि वर्धक और मन को अच्छी लगने वाली वस्तु जैसे फलका गूदा, खीर आदि कहा गया है।

प्राचीन ग्रंथों में मांस अर्थात गूदा खाने के अनेक प्रमाण मिलते हैं जैसे चरक संहिता में देखें आम्रमांसं (आम का गूदा), खजूरमांसं (खजूर का गूदा), तैत्तरीय संहिता 2.32.8 (दही, शहद और धान) को मांस कहा गया है। इससे यही सिद्ध होता है कि वेदादि शास्त्रों में जहाँ पर माष शब्द आता है अथवा मांस के रूप में भी जिसका प्रयोग हुआ है उसका अर्थ दाल अथवा फलों का मध्य भाग अर्थात गूदा है।

वाजिनम्

वाजिनम् का अश्व के साथ-साथ अन्य अर्थ है शूर, बलवान, गतिशील और तेज। यजुर्वेद के 25/34 मंत्र का अर्थ करते हुए सायण लिखते हैं कि अग्नि से पकाए, मरे हुए तेरे अवयवों से जो मांस- रस उठता है वह वह भूमि या तृण पर न गिरे, वह चाहते हुए देवों को प्राप्त हो। अश्व की हिंसा के विरुद्ध यजुर्वेद 13/47 मंत्र का शतपथकार ने पृष्ठ 668 पर अर्थ लिखा है कि अश्व कि हिंसा न करें।

उदाहरण:-

यजुर्वेद 25/44 के यज्ञ में घोड़े की बलि के समर्थन में अर्थ निकालते हुए लिखा गया है कि हे अश्व! तू अन्य अश्वों कि तरह मरता नहीं क्योंकि तुझे देवत्व प्राप्ति होगी और न हिंसित होता है कि व्यर्थ हिंसा का यहाँ अभाव है। प्रत्यक्ष रूप में अवयव नाश होते हुए ऐसा कैसे कहते हो? इसका उत्तर देते हैं कि सुंदर देवयान मार्गों से देवों को तू प्राप्त होता है, इसलिए यह हमारा कथन सत्य है। इस मंत्र का सही अर्थ है कि जैसे विद्या से अच्छे प्रकार प्रयुक्त अग्नि, जल, वायु इत्यादि से युक्त रथ में स्थित हो कि मार्गों से सुख से जाते हैं, वैसे ही आत्मज्ञान से अपने स्वरुप को नित्य जान के मरण और हिंसा के डर को छोड़कर दिव्य सुखों को प्राप्त हो।

अब चलते हैं उस श्लोक की ओर, जिसमें कारवाँ का लेख यह बताने का प्रयत्न कर रहा है कि इंद्र को प्रसन्न करने के लिए बैल का मांस पकाया जाता था।

“उक्ष्णो हि मे पञ्चदश साकं पचन्ति विंशतिम्। उताहमद्मि पीव इदुभा कुक्षी पृणन्ति मे विश्वस्मादिन्द्र उत्तरः।।” (ऋ.10.86.14)

इस लेख को लिखने वाले भद्रपुरुष ने इस ऋचा के केवल तीन शब्दों को उठाया – “उक्ष्णो” (जिसका अर्थ उसने उक्ष (बैल) निकाला, दूसरा शब्द था “पञ्चदश” (जिसका अर्थ था पंद्रह) और तीसरा शब्द था “विंशतिम्” (जिसका अर्थ है बीस) और शब्दकोश से शाब्दिक अर्थ निकाल कर अनर्थ लिखा “At one place Indra states, “they cook for me fifteen plus twenty oxen”. अब इन सज्जन को कौन समझाए कि यहाँ पर उक्षण का अर्थ बैल नहीं किंतु थोड़ा गूढ़ है। 

आर्य विद्वान आचार्य वैधनाथ शास्त्री का ये भाष्य देखिए- पदार्थ- (पंचदश) दश प्राण और पंचभूत ये पन्द्रह पदार्थ, (मे) मेरे द्वारा बनाए गए (उक्ष्णः) सुखों के वर्षक शरीरों के (विंशतिम्) 20 अंगों या इंद्रियों को (साकम् हि) साथ ही (पचन्ति) पका कर पुष्ट करते हैं (उत) और (मे) मेरे द्वारा प्रदत्त शरीर के (उभाकुक्षी) दोनों पाश्र्वों को (पृणन्ति) पूर्ण करते हैं। (अहम्) मैं (पीव इत्) सर्वदा परिपुष्ट इस सबको प्रलयकाल में (अद्मि) अपने अन्दर समा लेता हूँ, (इन्द्रः) परमैश्वर्यवान् प्रभु (विश्वस्मात्) सब पदार्थों से सूक्ष्म और उत्कृष्ट है।   

भावार्थ- दश प्राण और पंचभूत परमेश्वर द्वारा बनाए गए शरीरों के बीस अंगों को साथ ही परिपक्व करके पुष्ट करते हैं और मेरे द्वारा प्रदत्त दोनों पाश्र्वों को भी परिपूर्ण करते हैं। मैं सर्वदा परिपुष्ट इन्द्र = परमेश्वर इन सबको प्रलयकाल में अपने अन्दर समेट लेता हूँ। परमैश्ववर्यवान् प्रभू सब पदार्थों से सूक्ष्म और उत्कृष्ट है। अर्थात् इंद्र मनुष्य की सभी इंद्रियों, प्राण, पंचभूत और अंतः करण को पुष्ट करते हैं। इस ऋचा का बैल के वध से कोई लेना-देना नहीं है।

ऋग्वेद की एक दूसरी ऋचा है – 

“हे इन्द्र ! त्वं यथा प्रातर्धानावन्तं करम्भिणमपूपवन्तमुक्थिनं प्रातर्जुषस्व तथा नोऽस्मान् जुषस्व ॥१॥“

हे (इन्द्र) ऐश्वर्य के धारण करने वाले! इस भूंने हुए जौ और दधि के मिश्र को मंत्रों के साथ हम इसे आपको समर्पित करते हैं, इसे स्वीकार कीजिए।

तो अगर कोई अपने अज्ञान और अक्षमता के कारण इन वैदिक ऋचाओं का सही अर्थ नहीं कर सकता है, इस कारण केवल शब्दकोश से अर्थ उठाता है और वेदों में इंद्र के सोम का सेवन करने के बारे लिखा हुआ होने के बाद भी बैल के मांस को इंद्र द्वारा स्वीकारा हुआ बताता है तो यह अवश्य उस व्यक्ति विशेष के इसमें निहित स्वार्थ के कारण होगा।

लेख में इंगित दूसरी ऋचा “अग्निदेव” को समर्पित है।

“उक्षान्नाय वशान्नाय सोमपृष्ठाय वेधसे । स्तोमैर्विधेमाग्नये ॥”

लेख के अनुसार – Second in importance to Indra is Agni… his main food being ghee. Protector of all men, he is, nevertheless, described in the Rigveda as “one whose food is the ox and the barren cow”. 

यहाँ पर भी लेखक का मत पक्षपात वाला है। यह ऋचा यज्ञ से सम्बंधित है और यज्ञ में जलती हुई अग्नि में घी की आहुति दी जाती है इसलिए अग्नि का मुख्य खाद्य घी होना सही है। लेखक ने “ उक्षान्नाय वशान्नाय” को अग्नि द्वारा गौ और बैल को खाया जाना बताया है, जो सरासर अनुचित है। ऊपर दी गई ऋचा का भावार्थ है – “हम उपासक (अग्नये) उस सर्वव्यापी जगदीश्वर की (स्तोमैः) विविध स्तोत्रों और मन से (विधेम) उपासना करें, जो ईश्वर (उक्षान्नाय) धनवर्षक सूर्य्यादिकों के भी अन्नवत् पोषक है, पुनः (वशान्नाय) स्ववशीभूत समस्त जगतों का भी अन्नवत् धारक और पोषक है, पुनः (वेधसे) सबके रचयिता भी हैं। ऐसे जगदीश्वर की उपासना करें ॥११॥”

अब आते हैं “गौ” शब्द पर। कारवाँ के लेख का लेखक लिखता है -The Taittiriya Brahmana unambiguously refers to the sacrificial killing of the cow which “is verily food” (atho annam vai gauh)”

यहाँ पर पुनः लेखक ने अपनी सीमित क्षमता का उपयोग कर गौ को गाय समझा और गाय को खाने की वस्तु बता दिया। वास्तव में वेदों में “गौ” शब्द का सम्बोधन पोषण प्रदायक दिव्य शक्तियों के लिए हुआ है। पशुरूप में भी “गौ” पर ये परिभाषा भली भाँति लागू होती है किंतु वेद के “गौ” सम्बोधन को व्यापक अर्थ में लेना ही सही होगा।

जैसे – “इमे लौका गौ” – ये लोक गौ कहे जाते हैं, “अंतरिक्षम गौ”- अंतरिक्ष को गौ कहा गया है, “गावो वा आदित्या”- गौ ही आदित्य है, “अन्नम वै गौ: – अन्न ही गौ है, “आग्नेयो वै गौ: – अग्नि ही गौ है”। तो उपरोक्त उदाहरण में क्योंकि अन्न हमें पोषण प्रदायक ऊर्जा देता है इसलिए उसे “गौ” कहा गया है ना कि “गौ” को खाने की वस्तु बताया गया।

आइए अब देखें कुछ उदाहरण वेदों से जिसमें “गौ वध” को जघन्य अपराध कहा गया है-

आचार्य सोमेश परसाई बताते हैं कि ऋग्वेद में गौ-वध को जघन्य अपराध घोषित करते हुए इसे मानव-वध के तुल्य माना गया है। ऐसा महापाप करने वाले के लिए ऋग्वेद दण्ड का विधान भी करता है।

सूयवसाद  भगवती  हि  भूया  अथो  वयं  भगवन्त:  स्याम अद्धि  तर्णमघ्न्ये  विश्वदानीं  पिब  शुद्धमुदकमाचरन्ती – ऋग्वेद 1/164/40
इसी तरह यजुर्वेद में गाय को जीवनदायी पोषण दाता मानते हुए गौ हत्या को वर्जित किया गया है।

घृतं दुहानामदितिं जनायाग्ने  मा हिंसी: यजुर्वेद 13/49
सदा ही रक्षा के पात्र गाय और बैल को मत मारो।

आरे  गोहा नृहा  वधो  वो  अस्तु ऋग्वेद  7 /56/17
आचार्य परसाई के मुताबिक वेदों मेंं गाय को अघ्न्या कहा गया है। अघ्न्या अर्थात् जो किसी भी अवस्था में नहीं मारने योग्य हैं।

ऋग्वेद 10/87/16 में वर्णित है – 

य:  पौरुषेयेण  क्रविषा  समङ्क्ते  यो  अश्व्येन  पशुना  यातुधान:
यो  अघ्न्याया  भरति  क्षीरमग्ने  तेषां  शीषाज़्णि  हरसापि  वृश्च
मनुष्य, अश्व या अन्य पशुओं के मांस से पेट भरने वाले तथा दूध देने वाली अघ्न्या गायों का विनाश करने वालों को कठोरतम दण्ड देना चाहिए। 

सूयवसाद  भगवती  हि  भूया  अथो  वयं  भगवन्त:  स्याम अद्धि  तर्णमघ्न्ये  विश्वदानीं  पिब  शुद्धमुदकमाचरन्ती – ऋग्वेद 1/164/40
इसी तरह यजुर्वेद में गाय को जीवनदायी पोषण दाता मानते हुए गौ हत्या को वर्जित किया गया है-

घृतं दुहानामदितिं जनायाग्ने मा हिंसी: यजुर्वेद 13/49
सदा ही रक्षा के पात्र गाय और बैल को मत मार-

आरे  गोहा नृहा  वधो  वो  अस्तु ऋग्वेद  7 /56/17
आचार्य परसाई के मुताबिक वेदों मेंं गाय को अघ्न्या कहा गया है। अघ्न्या अर्थात् जो किसी भी अवस्था में नहीं मारने योग्य हैं।

ऋग्वेद 10/87/16 में वर्णित है –
य:  पौरुषेयेण  क्रविषा  समङ्क्ते  यो  अश्व्येन  पशुना  यातुधान:
यो  अघ्न्याया  भरति  क्षीरमग्ने  तेषां  शीषाज़्णि  हरसापि  वृश्च

मनुष्य, अश्व या अन्य पशुओं के मांस से पेट भरने वाले तथा दूध देने वाली अघ्न्या गायों का विनाश करने वालों को कठोरतम दण्ड देना चाहिए।
अन्तकाय गोघातं – यजुवेज़्द 30/18 अर्थात गौ हत्यारे का संहार किया जाए। 

मनुस्मृति में भी बार-बार मांसाहार को निषेध बताया गया है-

नाकृत्वा प्राणिनां हिंसां मांसमुत्पद्यते क्व चित् ।
न च प्राणिवधः स्वर्ग्यस्तस्मान्मांसं विवर्जयेत् ॥ ५.४८ ॥

समुत्पत्तिं च मांसस्य वधबन्धौ च देहिनाम् ।
प्रसमीक्ष्य निवर्तेत सर्वमांसस्य भक्षणात् ॥ ५.४९ ॥

न भक्षयति यो मांसं विधिं हित्वा पिशाचवत् ।
न लोके प्रियतां याति व्याधिभिश्च न पीड्यते  ॥ ५.५० ॥

अनुमन्ता विशसिता निहन्ता क्रयविक्रयी ।
संस्कर्ता चोपहर्ता च खादकश्चेति घातकाः ॥ ५.५१ ॥

स्वमांसं परमांसेन यो वर्धयितुमिच्छति ।
अनभ्यर्च्य पितॄन् देवांस्ततोऽन्यो नास्त्यपुण्यकृत् ॥

सनातन धर्म के पाँचवे वेद महाभारत में भी मांसाहार के परित्याग और निषेध का बहुत बार उल्लेख मिलता है। महाभारत के अनुशासन पर्व के 115वें अध्याय में पितामह भीष्म बाणों की शैय्या पर सोए हुए युधिष्ठिर को कहते हैं-

“यो यजेताश्वमेधेन मासि मासि यतव्रत:।
वर्जयेनमधु मांसं च सममेतद युधिष्ठिर।।

“हे युधिष्ठिर, जो पुरुष नियमपूर्वक व्रत का पालन करते हुए प्रतिमास अश्वमेध यज्ञ का अनुष्ठान करता है तथा जो केवल मद्य और मांस का त्याग करता है, उन दोनो को एक जैसा ही फल मिलता है।”

भीष्म आगे कहते हैं-

 “न हि मांसं तृणात काष्ठादुपलाद वापि जायते।
हत्वा जन्तुं ततॊ मांसं तस्माद दॊषस्तु भक्षणे।।”

अर्थात् तृण से, काठ से या पत्थर से मांस उत्पन्न नहीं होता, वह केवल जीव की हत्या करने पर ही उपलब्ध होता है, अतः उसके खाने में महान दोष है।

“Repeat a lie often enough and it becomes the truth”, is a law of propaganda often attributed to the Nazi Joseph Goebbels.

ऊपर उल्लेखित एक विशेष वर्ग वर्तमान समय में इस नियम का अक्षरशः पालन कर प्रयत्नशील है कि वो एक साधारण भारतीय को भ्रमित कर उसे उसकी जड़ों से पूरी तरह काट दे। ये “स्वयंभू विद्वान” वैदिक साहित्य के बुरे पश्चिमी अनुवादों के संदर्भ उद्धरणों का उपयोग करते हैं और उन्हें अपने व्यवसाय के एजेंडे में फिट करते हैं।

दुःख इस बात का है कि बहुधा प्राचीन शास्त्रों का उनका भ्रामक विश्लेषण निर्विरोध स्वीकार लिया जाता है। दुर्भाग्य यह है कि कथित हिन्दू समाज इन भाष्यकारों को छोड़ने तथा महर्षि दयानन्द सरस्वती एवं आर्य विद्वानों के भाष्यों को स्वीकार करने को आज भी उद्यत नहीं है वरना यह स्थिति नहीं आती।

सनातन धर्म के मानने वालों के मन में पुनर्जन्म और विभिन्न योनियों में अटूट विश्वास रहा है और अभी भी है। इसका अर्थ है कि मनुष्य अलग-अलग पशुओं के रूप में जन्म लेता रहता है जब तक कि मोक्ष ना मिल जाए। इसलिए दुर्घटना से भी, क्या आप पशु वध करना चाहेंगे और अपने पूर्वजों में से सम्भवतः किसी एक को भक्षण के लिए मार देंगे? नहीं ना? इसीलिए जो लोग खाने के लिए पशुओं को मारते थे, उन्हें राक्षस और पिशाच कहा जाता था।

अब्रहामिक धर्मों के विपरीत, हिंदू सोचते और मानते हैं कि इस पृथ्वी पर रहने वाले प्रत्येक जीव की आत्मा होती है, इसलिए संस्कृति के रूप से सिर्फ खाने में उपभोग के लिए किसी पशु को मारना हमारे यहाँ पर वेदों द्वारा स्वीकार्य होने का प्रश्न ही नहीं उठता।

लेखक: कृष्णानंद गौर