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‘गृहयुद्ध छेड़ना चाहते हैं राहुल गाँधी’: कॉन्ग्रेस नेता को 7 जनवरी को बरेली की कोर्ट में हाजिर होने का आदेश, सरकार बनने पर जाति गिनने और आर्थिक सर्वेक्षण का किया था वादा

कॉन्ग्रेस सांसद राहुल गाँधी को उत्तर प्रदेश की बरेली जिला कोर्ट ने लोकसभा चुनाव प्रचार के दौरान दिए गए बयान पर 7 जनवरी 2024 को पेश होने के लिए समन जारी किया है। यह बयान उन्होंने आर्थिक सर्वेक्षण और जातिगत जनगणना को लेकर दिया था।

बरेली की जिला जज कोर्ट ने पंकज पाठक की याचिका पर ये समन जारी किया है। उन्होंने राहुल गाँधी के बयान को ‘देश में गृहयुद्ध छेड़ने की कोशिश’ का आरोप लगाया। उन्होंने याचिका में कहा है, “हमने महसूस किया कि राहुल गाँधी ने चुनावों के दौरान जातिगत जनगणना पर जो बयान दिया था, वह देश में गृह युद्ध शुरू करने की कोशिश जैसा था।”

शुरुआत में यह याचिका एमपी-एमएलए कोर्ट में दायर की गई थी, लेकिन वहाँ इसे खारिज कर दिया गया। इसके बाद याचिकाकर्ता ने जिला जज कोर्ट में अपील की। पंकज पाठक ने बताया, “हमारी अपील वहाँ स्वीकार कर ली गई और राहुल गाँधी को नोटिस जारी किया गया।”

बता दें कि राहुल गाँधी ने अपनी पार्टी का प्रचार करते हुए कहा था कि यदि कॉन्ग्रेस केंद्र में सरकार बनाती है, तो वह वित्तीय और संस्थागत सर्वेक्षण करेगी। इस सर्वेक्षण का उद्देश्य समाज के आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों को लाभ पहुँचाने के लिए संसाधनों का पुनर्वितरण करना होगा। राहुल ने कहा था, “जितनी आबादी, उतना हक।”

हैदराबाद की एक रैली में राहुल ने कहा था कि कि कॉन्ग्रेस सरकार बनने पर सबसे पहले जातिगत जनगणना कराई जाएगी। इसके बाद आर्थिक और संस्थागत सर्वेक्षण शुरू होगा। राहुल ने कहा, “हम पहले पिछड़ी जातियों, अनुसूचित जातियों, अनुसूचित जनजातियों, अल्पसंख्यकों और अन्य वर्गों की सही जनसंख्या और उनकी स्थिति जानने के लिए जातिगत जनगणना करेंगे। फिर भारत की संपत्ति, नौकरियाँ और अन्य कल्याणकारी योजनाएँ इन वर्गों की जनसंख्या के अनुपात में बाँटी जाएँगी।”

राहुल गाँधी ने सरकारी और बड़े उद्योगों में पिछड़े वर्गों और अल्पसंख्यकों की कम भागीदारी को लेकर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा, “देश की 90 प्रतिशत जनसंख्या अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग और अल्पसंख्यकों की है, लेकिन इनका सरकारी नौकरियों और संसाधनों में हिस्सा नहीं है।”

राहुल गाँधी के इस बयान पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कॉन्ग्रेस पर अल्पसंख्यकों के अधिकार घटाने का आरोप लगाते हुए तंज भी कसा था। पीएम मोदी ने कहा था, “पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह कहते थे कि देश के संसाधनों पर पहला अधिकार अल्पसंख्यकों का है, खासतौर से मुस्लिमों का। लेकिन अब कॉन्ग्रेस कह रही है कि आबादी तय करेगी कि किसे पहले अधिकार मिलेंगे। क्या कॉन्ग्रेस अब अल्पसंख्यकों के अधिकार घटाना चाहती है?”

कानपुर में 120 मंदिर बंद मिले: जिन्होंने देवस्थल को बिरयानी की दुकान से लेकर बना दिया कूड़ाघर… वे अब कह रहे हमने कब्जा नहीं किया, हम हैं ‘रखवाले’

मुस्लिम बहुल इलाकों में मौजूद बंद पड़े हिन्दू मंदिरों को कब्ज़ा मुक्त करवाने की मुहिम अब कानपुर भी पहुँच गई है। यहाँ की मेयर कल पुलिस फ़ोर्स के साथ शहर के 5 अलग-अलग मंदिरों पर गईं। इन मंदिरों की दुर्दशा पर मेयर ने नाराजगी जताई जिसमें एक के पीछे तो बिरयानी बेची जा रही थी। अब यहाँ की साफ़-सफाई शुरू की जा चुकी है। यहाँ रोज पूजा-अर्चना का ऐलान हुआ है। ऐसे कुल कब्ज़ा प्रभावित मंदिरों की तादाद 100 से अधिक बताई जा रही है। हालाँकि प्रशासन की इस कार्रवाई के बाद मुस्लिम पक्ष खुद को कब्जेदार नहीं बल्कि मंदिरों का रखवाला बताने में जुट गया है।

दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के मुताबिक, बेकनगंज के राम जानकी मंदिर के पीछे रहने वाले नफीस कहते हैं- “मंदिर को जैसे खोलना है, वैसे खोलें। हमको क्या लेना-देना है। मंदिर अलग है, घर अलग है। ये क्षेत्र पहले पुराना सर्राफा था। सारे हिंदू भाई यही रहते थे। फिर वो हिंदू बहुल क्षेत्रों में चले गए। मंदिर चारों तरफ से पैक है। हम लोग मंदिरों की देखभाल करते हैं। 92 के दंगों में हर जगह मंदिरों में तोड़फोड़ हुई। इसको हम लोगों ने बचाया।”

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक शनिवार (21 दिसंबर 2024) को कानपुर की मेयर प्रमिला पांडेय 7 थानों की पुलिस फ़ोर्स के साथ मुस्लिम बहुल इलाके बेकनगंज पहुँची। बेकनगंज वही इलाका है जहाँ जून 2022 में मुस्लिम भीड़ ने भाजपा नेत्री नूपुर शर्मा के बयान के विरोध में पुलिस पर हमला कर दिया था। प्रमिला पांडेय को यहाँ कई मंदिरों पर अवैध कब्ज़े की सूचना मिली थी। इसी सूचना पर लगभग आधे घंटे तक वो बेकनगंज में रहीं।

प्रमिला पांडेय ने 30 मिनट के अंदर कुल 5 ऐसे मंदिरों को खोज निकाला जो अवैध कब्ज़े और बदहाली के शिकार हुए थे। इसमें पहले नंबर पर राम जानकी मंदिर है। इस मंदिर पर कानपुर 2022 हिंसा के मुख्य आरोपित मुख़्तार बाबा बिरयानी वाले का कब्ज़ा था। मंदिर के पीछे बिरयानी बनाई जाती थी। स्थानीय लोगों की माना जाए तो लगभग 100 साल पहले वर्ग गज में फैले इस मंदिर का अब बेहद छोटा सा ही हिस्सा शेष बचा है।

वहीं दूसरा मंदिर राधा कृष्ण का है। यह मंदिर बेहद जर्जर हालत में पाया गया। इसी इलाके में तीसरा मंदिर महादेव शिव का मिला। मंदिर में शिवलिंग के अवशेष भर मौजूद मिले। मंदिर के पीछे रिहायशी बस्तियाँ हैं। शिव मंदिर के बाद मेयर व साथ चल रही प्रशासनिक टीम को एक अन्य राधा-कृष्ण मंदिर मिला। इस मंदिर का शटर बंद मिला। शटर खोलने पर अंदर कूड़ा भरा मिला। मेयर प्रमिला ने सभी अवैध कब्जेदारों को फ़ौरन कब्ज़ा हटा लेने का आदेश दिया है। वो मंदिरों की ऐसी हालत देख कर काफी नाराज भी हुईं।

मेयर का ऐलान है कि खोजे जा रहे सभी मंदिरों के जीर्णोद्धार के बाद वहाँ पहले की तरह विधि-विधान से पूजा अर्चना शुरू करवाई जाएगी। मेयर प्रमिला पांडेय ने यह भी कहा कि मंदिर में स्थापित मूर्तियाँ कहाँ गई इसकी जाँच करवाई जाएगी। बताते चलें कि कानपुर नगर निगम के एक सर्वे के मुताबिक शहर के मुस्लिम क्षेत्रों में लगभग 120 मंदिर बंद पड़े हैं। वहीं प्रशासन की इस कार्रवाई के बाद मुस्लिम पक्ष खुद को कब्जेदार के बजाय मंदिरों का रखवाला बताने में जुट गया है।

नाम अब्दुल मोहसेन, लेकिन इस्लाम से ऐसी ‘घृणा’ कि जर्मनी के क्रिसमस मार्केट में भाड़े की BMW से लोगों को रौंद डाला: 200+ घायलों में 7 भारतीय, मृतकों में 9 साल का बच्चा भी

जर्मनी के मैगडेबर्ग शहर में शुक्रवार शाम हुए हमले में 5 लोगों की मौत हो गई और 200 से ज्यादा लोग घायल हो गए। इस हमले में 7 भारतीय नागरिक भी घायल हुए, जिनमें से 3 को अस्पताल से छुट्टी मिल चुकी है। भारत सरकार ने इस हमले की कड़ी निंदा करते हुए इसे ‘बेरहम’ बताया है।

विदेश मंत्रालय ने एक बयान में कहा, “हम मैगडेबर्ग में क्रिसमस मार्केट पर हुए इस क्रूर हमले की निंदा करते हैं। कई अनमोल जिंदगियाँ खत्म हो गईं और कई लोग घायल हो गए। हमारी संवेदनाएँ और प्रार्थनाएँ पीड़ितों के साथ हैं।” भारत सरकार ने यह भी बताया कि जर्मनी में भारतीय मिशन घायलों और उनके परिवारों से लगातार संपर्क में है और हर संभव मदद मुहैया करा रहा है।

शुक्रवार (20 दिसंबर 2024) को मैगडेबर्ग के क्रिसमस मार्केट में तेज रफ्तार कार से भीड़ को कुचल डाला गया। इस हमले में मरने वालों में एक बच्चा भी शामिल है। इस हमले में 200 से अधिक घायल हो गए हैं, जिसमें 7 भारतीय भी शामिल हैं।

जर्मन पुलिस ने घटना के तुरंत बाद कार चालक, 50 वर्षीय सऊदी डॉक्टर तालेब को गिरफ्तार कर लिया। पिछले 20 वर्षों से जर्मनी में रह रहे तालेब ने इस हमले में इस्तेमाल हुई बीएमडब्ल्यू कार किराए पर ली थी। शुरू में कार में विस्फोटक होने का शक था, लेकिन जाँच के बाद पुलिस ने इसे खारिज कर दिया।

हमलावर एक्स मुस्लिम है। कहा जा रहा है कि इस्लाम से ‘घृणा’ करता था। जर्मनी के उन धुर दक्षिणपंथी समूहों का समर्थक है जो प्रवासियों को बसाने के विरुद्ध हैं। मेरा सवाल है कि मुस्लिमों से ये कैसी घृणा है कि आप ईसाइयों के त्योहार पर हमला करते हैं। हालाँकि इस मामले में जर्मनी की आंतरिक मंत्री नैन्सी फेजर ने संदिग्ध की ‘इस्लामोफोबिया’ की पुष्टि की, लेकिन हमले की मुख्य वजह क्या थी, इस पर कोई भी बयान देने से मना कर दिया। वहीं, जर्मनी के सैक्सनी-अन्हाल्ट राज्य के प्रीमियर रेनर हैसलॉफ ने जनता को भरोसा दिलाया कि आरोपित अकेला था और अब कोई खतरा नहीं है।

बहरहाल, भारत ने जर्मनी में घायल भारतीय नागरिकों और उनके परिवारों की मदद के लिए सक्रिय प्रयास किए हैं। विदेश मंत्रालय ने आश्वासन दिया कि इस घटना से जुड़े हर मामले में मदद जारी रहेगी। यह हमला सिर्फ जर्मनी ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया के लिए एक गंभीर चेतावनी है, जो सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत करने की जरूरत को उजागर करता है।

भारत में न्यूक्लियर टेस्ट हो या UN में दिया हिंदी वाला भाषण… जानें अटल बिहारी वाजपेयी का जीवन कैसे दूसरे नेताओं के लिए भी बना अमर प्रेरणा, 100 वीं जयंती मना रहा देश

25 दिसंबर 2024 को भारत माँ के एक ऐसे सपूत, जिन्होंने अपने कृतित्व, व्यक्तित्व और नेतृत्व से देश को गौरवान्वित किया, दुनिया याद करेगी, श्रद्धा सुमन अर्पित करेगी। वह महानायक कोई और नहीं, बल्कि भारत के यशस्वी पूर्व प्रधानमंत्री, भारत रत्न स्वर्गीय अटल बिहारी वाजपेयी हैं।

अटल बिहारी वाजपेयी न केवल एक सशक्त राजनेता थे, बल्कि वे एक संवेदनशील कवि, एक दूरदर्शी विचारक और एक फक्कड़ व्यक्तित्व के धनी थे। उनकी नेतृत्व क्षमता ने भारत को वैश्विक मंच पर सशक्त पहचान दिलाई, और उनके जीवन-मूल्य आज भी करोड़ों लोगों के लिए प्रेरणा स्रोत बने हुए हैं।

अटल बिहारी वाजपेयी का जीवन: कवि से प्रधानमंत्री तक का सफर

अटल बिहारी वाजपेयी का जन्म 25 दिसंबर 1924 को ग्वालियर में हुआ। उनके पिता कृष्ण बिहारी वाजपेयी खुद एक कवि और शिक्षक थे, जिससे उन्हें साहित्य और राष्ट्रवाद की शिक्षा बचपन से ही मिली। वे विद्यार्थी जीवन में ही राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) से जुड़ गए और जीवनभर देश के प्रति समर्पित रहे।

1957 में वे पहली बार बलरामपुर (उत्तर प्रदेश) से लोकसभा के सदस्य बने। संसद में उनके ओजस्वी और तार्किक वक्तव्यों ने जल्द ही उन्हें देश का एक प्रमुख नेता बना दिया। उनके व्यक्तित्व की विशालता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि वे विपक्ष के नेता हों या प्रधानमंत्री, उनका सम्मान सभी दलों के नेता करते थे।

दृढ़ नेतृत्व और दूरदर्शी निर्णय

अटल बिहारी वाजपेयी ने अपने प्रधानमंत्री काल (1998-2004) में भारत को कई ऐतिहासिक उपलिब्धयाँ दीं। उनके नेतृत्व में भारत ने 1998 में पोखरण परमाणु परीक्षण किए, जिसने भारत को विश्व पटल पर परमाणु शक्ति संपन्न देश के रूप में स्थापित किया। इस निर्णय के बाद कई देशों ने भारत पर प्रतिबंध लगाए, लेकिन अटल बिहारी वाजपेयी के कुशल नेतृत्व ने इन चुनौतियों का सफलतापूर्वक सामना किया।

कारगिल युद्ध (1999) के समय उनका नेतृत्व और सेना के प्रति उनका समर्थन अद्वितीय था। भारत ने इस युद्ध में पाकिस्तान को करारी हार दी और उनके शांतिपूर्ण प्रयासों ने यह भी सुनिश्चित किया कि भारत का रुख अंतरराष्ट्रीय मंच पर गरिमा और मजबूती से प्रस्तुत हो।

लाहौर बस यात्रा: शांति के लिए एक पहल

1999 में अटल बिहारी वाजपेयी ने ऐतिहासिक लाहौर बस यात्रा का नेतृत्व किया, जो भारत-पाकिस्तान के बीच शांति बहाल करने का एक प्रयास था। हालाँकि इस पहल को पाकिस्तान के कारगिल घुसपैठ ने बाधित किया, लेकिन यह दिखाता है कि वो शांति के कितने बड़े पक्षधर थे।

संयुक्त राष्ट्र में हिंदी का गौरव

1977 में विदेश मंत्री के रूप में अटल बिहारी वाजपेयी ने संयुक्त राष्ट्र महासभा में हिंदी में भाषण दिया, जो भारतीय संस्कृति और भाषा के प्रति उनके प्रेम को दर्शाता है। यह भाषण भारत की गरिमा और सांस्कृतिक पहचान को वैश्विक स्तर पर स्थापित करने वाला मील का पत्थर बना।

कवि हृदय और प्रेरणा स्रोत

अटल बिहारी वाजपेयी न केवल राजनीति के धुरंधर खिलाड़ी थे, बल्कि वे एक सशक्त कवि भी थे। उनकी कविताएँ जीवन के संघर्ष, उम्मीद और दृढ़ता की झलक दिखाती हैं। उनकी कविता की पंक्तियाँ, “हार नहीं मानूँगा, रार नहीं ठानूँगा, काल के कपाल पर लिखता-मिटाता हूँ, गीत नया गाता हूँ”, हर व्यक्ति को निरंतर आगे बढ़ने की प्रेरणा देती है।

संवेदनशीलता और मानवीय पक्ष

अटल बिहारी वाजपेयी की संवेदनशीलता उनके राजनीतिक जीवन का अनूठा पहलू थी। चाहे किसानों की समस्याएँ हों, महिलाओं के अधिकार हों, या युवाओं के लिए रोजगार के अवसर – उन्होंने हर मुद्दे पर गंभीरता से काम किया। उनके नेतृत्व में स्वर्णिम चतुर्भुज योजना (Golden Quadrilateral) जैसी परियोजनाएँ शुरू हुईं, जिसने भारत में आधुनिक सड़क नेटवर्क की नींव रखी। उन्होंने कहा था:

अटल बिहारी वाजपेयी का यह संदेश भारत के प्रत्येक नागरिक का ध्येय पथ बनना चाहिए। यही उनके जन्मदिन पर सच्चे मायने में उनके प्रति श्रद्धांजलि होगी।

अटल बिहारी वाजपेयी की प्रेरणा: फिर सबेरा होगा

वर्ष 2004 के लोकसभा चुनाव में भाजपा सरकार बनाने की स्थिति में नहीं पहुँची। भाजपा राष्ट्रीय अध्यक्ष के रूप में माननीय लालकृष्ण आडवाणी ने पार्टी की कमान सँभाली। राष्ट्रीय परिषद की बैठक को संबोधित करते हुए अटल बिहारी वाजपेयी ने कार्यकर्ताओं को प्रेरित करने के लिए कहा था, “मैं और आडवाणी जी सिनेमा देखने गए थे और पिक्चर का नाम था फिर सबेरा होगा।” इस कथन से उन्होंने देशभर के कार्यकर्ताओं को एक बड़ा संदेश दिया। उनकी 51 रचनाएँ अपने आप में अध्यात्म, राष्ट्रभाव और गहन जीवन दर्शन का गूढ़ संदेश देती हैं।

100वीं जयंती: संकल्प का अवसर

इस वर्ष, जब देश अटल बिहारी वाजपेयी की 100वीं जयंती मना रहा है, यह उनके जीवन-मूल्यों को आत्मसात करने और अपने कार्यक्षेत्र में उत्कृष्टता लाने का संकल्प लेने का समय है। उनके जीवन का हर पहलू – उनकी कविताएँ, उनके विचार, और उनका नेतृत्व – हमें सिखाता है कि देश और समाज के प्रति समर्पण कैसे जीवन को अर्थपूर्ण बना सकता है।

अटल बिहारी वाजपेयी की विरासत: एक अमर प्रेरणा

अटल बिहारी वाजपेयी भौतिक रूप से हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनके विचार और योगदान सदैव हमें प्रेरणा देते रहेंगे। उनके नेतृत्व का दौर न केवल भारत की राजनीतिक, बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक पुनरुत्थान का भी युग था। उनके द्वारा स्थापित आदर्श आज भी हर नागरिक के लिए प्रेरणादायक हैं। उनके शब्दों में:

“हमने अंधकार को चीरकर सवेरा देखा है, हमने तूफानों में जलकर दीपक जलाया है।”

उनकी यह सोच हर भारतीय को आशा और विश्वास का दीप जलाने के लिए प्रेरित करती है।

25 दिसंबर को, उनकी जन्मशती पर, आइए हम सभी उनके विचारों और आदर्शों को आत्मसात कर राष्ट्र निर्माण की दिशा में अपना योगदान दें। अटल बिहारी वाजपेयी की विरासत सदैव हमारे साथ रहेगी और हमें आगे बढ़ने का मार्ग दिखाती रहेगी।

अकील ने बउआ बन कर तलाकशुदा हिंदू महिला को फँसाया, रेप के बाद बनाई अश्लील वीडियो: सच खुलने पर धर्मांतरण का दबाव, 5 लाख रूपयों की भी माँग

उत्तर प्रदेश के कानपुर से लव जिहाद का मामला सामने आया है। यहाँ अकील ने बउआ बन कर एक तलाकशुदा हिन्दू महिला को प्यार के जाल में फँसा लिया। अकील पहले से शादीशुदा था जिसने खुद को कुँवारा बता कर मेलजोल बढ़ाई थी। पीड़िता के साथ रेप किया गया और उसे इस्लाम कबूल करने का भी दबाव मिला। आपत्तिजनक वीडियो दिखा कर पीड़िता से पैसे भी ठगे गए। पुलिस पर भी कार्रवाई में ढिलाई बरतने का आरोप लगाया गया है। मामले की जाँच शुरू कर दी गई है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक मामला कानपुर के दादानगर इलाके का है। यहाँ की एक फैक्ट्री में बर्रा इलाके की रहने वाली तलाकशुदा पीड़िता काम करती थी। इसी फैक्ट्री में ठेकेदार अकील भी काम करता था। अकील पहले से शादीशुदा था लेकिन उसने खुद को कुँआरा बताया। आरोपित ने खुद को बउआ बता कर पीड़िता से जान-पहचान बढ़ा ली। बउआ बने अकील ने पीड़िता से शादी का वादा किया और कई बार विरोध के बावजूद शारीरिक संबंध बनाए।

अकील पीड़िता को कई होटलों में ले गया। यहाँ उसने आपत्तिजनक फोटो और वीडियो बना डालीं। इस बीच पीड़िता गर्भवती हो गई। तब अकील ने पीड़िता का एबॉर्शन करवा दिया। इसी बीच पीड़िता को अकील के शादीशुदा और मुस्लिम होने की भनक लगी। जब पीड़िता ने अकील से इस बावत सवाल पूछा तो उसे भी इस्लाम कबूल करने का दबाव दिया जाने लगा। जब पीड़िता ने धर्मान्तरण से इंकार कर दिया तो आपत्तिजनक फोटो और वीडियो दिखा ब्लैकमेलिंग की जाने लगी।

पीड़िता का आरोप है कि अकील ने उस से 5 लाख रुपयों की डिमांड की थी। कोई रास्ता न देख कर दिसंबर 2023 में पीड़िता अकील की बीवी से मिली। यहाँ मदद के बजाय अकील की बीवी और उसके 3 सालों ने मिल कर पीड़िता को बेरहमी से पीटा। बकौल पीड़िता तब भी मामले की शिकायत पुलिस में दर्ज करने के बाद कोई ठोस एक्शन नहीं हुआ। इस मामले में 5 दिसंबर को पीड़िता और आरोपित पक्ष का थाने में समझौता करवा दिया गया।

समझौते के बावजूद अकील द्वारा पीड़िता पर 5 लाख रुपयों और इस्लाम कबूलने का दबाव बनाया जाता रहा। आखिरकार शुक्रवार (20 दिसंबर) को पीड़िता अपनी फरियाद ले कर ADCP से मिलीं। ADCP ने मामले का संज्ञान लिया और नौबस्ता थाना पुलिस को जाँच कर के जरूरी कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। वहीं हिन्दू संगठनों ने कानपुर में बढ़ रही लव जिहाद की घटनाओं पर चिंता जताते हुए अकील पर कठोर कार्रवाई की माँग की है।

‘शायद शिव जी का भी खतना…’ : महादेव का अपमान करने वाले DU प्रोफेसर को अदालत से झटका, कोर्ट ने FIR रद्द करने से किया साफ मना

ज्ञानवापी में मिले शिवलिंग को ले कर आपत्तिजनक पोस्ट करने वाले एक प्रोफेसर को दिल्ली हाईकोर्ट ने राहत देने से इनकार कर दिया है। हाई कोर्ट ने दिल्ली यूनिवर्सिटी (DU) के प्रोफेसर रतन लाल पर दर्ज मुकदमा रद्द करने से इंकार कर दिया है। यह मुकदमा हिन्दुओं की भावनाओं को ठुकराने के लिए दर्ज किया गया था। हाईकोर्ट ने माना कि रतन लाल की टिप्पणियों से सामाजिक सौहार्द पर बुरा असर पड़ा था। यह आदेश मंगलवार (17 दिसंबर, 2024) को दिया गया।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, दिल्ली हाई कोर्ट में इस मामले की सुनवाई जस्टिस चंद्रधारी सिंह की अदालत में हुई। रतन लाल की तरफ से पेश वकीलों ने अभिव्यक्ति की आज़ादी सहित तमाम दलीलें पेश कीं। उन्होंने इस आधार पर रतन लाल के खिलाफ FIR को रद्द करने की माँग की। हालाँकि कोर्ट पर इन दलीलों का कोई असर नहीं पड़ा।

अपने फैसले में अदालत ने कहा कि रतन लाल द्वारा पेश की गई दलीलों में वो तथ्य नहीं थे जिसके आधार पर आरोपित के खिलाफ FIR को रद्द किया जा सके। हाईकोर्ट ने कहा कि प्रथम दृष्टया ऐसा लगता है कि प्रोफेसर रतन लाल का इरादा एक वर्ग की भावनाओं को ठेस पहुँचाने का ही था। कोर्ट ने कहा कि प्रोफेसर जैसे पद वाले व्यक्ति की यह टिप्पणियाँ अशोभनीय हैं।

क्या था पूरा मामला

दिल्ली यूनिवर्सिटी में रतन लाल इतिहास विभाग में एसोसिएट प्रोफेसर हैं। मई 2022 में जब ज्ञानवापी के मुकदमे में हिन्दू पक्ष ने शिवलिंग मिलने की बात कही तो तब रतन लाल ने सोशल मीडिया के अपने X और फेसबुक हैंडल पर एक आपत्तिजनक पोस्ट डाली थी। 14 मई, 2022 को डाली गई इस पोस्ट में उन्होंने लिखा, “यदि यह शिवलिंग हैं तो लगता है कि शायद शिव जी का भी खतना कर दिया गया था।” इसी पोस्ट में रतन लाल ने हंसी वाली इमोजी भी डाली थी।

प्रोफेसर रतन लाल के इस पोस्ट का स्क्रीनशॉट कुछ ही देर में सोशल मीडिया पर वायरल हो गया था। उनके खिलाफ एक्शन की माँग जोर पकड़ने लगी थी। 18 मई, 2022 को दिल्ली के उत्तरी मौरिस नगर साइबर थाने में रतन लाल के खिलाफ शिकायत दर्ज करवाई गई थी। धार्मिक भावनाओं को आहत करने के आरोप में यह शिकायत शिवाल भल्ला नाम के व्यक्ति ने दर्ज करवाई थी। पुलिस ने इस शिकायत पर IPC (भारतीय दंड संहिता) की धारा 153- A और 295- A के तहत FIR दर्ज कर ली थी।

20 मई, 2022 को पुलिस ने रतन लाल को खोज निकाला और गिरफ्तार कर लिया। अगले ही दिन 21 मई को प्रोफेसर रतन लाल जमानत पा गए। अब रतन लाल इस केस को खत्म करवाने के लिए दिल्ली हाईकोर्ट पहुँचे थे। हालाँकि यहाँ उनकी याचिका ख़ारिज कर दी गई है।

भारत का ‘चिकन नेक’ काटने की फिराक में थे बांग्लादेशी आतंकी, गिरफ्तारी के बाद सच उगला: कबूला- हिंदू नेताओं की हत्या भी था मकसद

पश्चिम बंगाल पुलिस ने प्रतिबंधित आतंकी संगठन अंसार-उल-इस्लाम बांग्लादेश के आठ संदिग्ध सदस्यों को गिरफ्तार किया है। इन लोगों का लक्ष्य था पश्चिम बंगाल के सिलीगुड़ी और पूर्वोत्तर के सात राज्यों को जोड़ने वाले ‘चिकन नेक’ इलाके में बड़े पैमाने पर अस्थिरता फैलाना। पुलिस के मुताबिक, यह आतंकी संगठन इस संवेदनशील क्षेत्र में समन्वित हमलों की योजना बना रहा था ताकि भारत के पूर्वोत्तर राज्यों के संपर्क को बाधित किया जा सके।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, पुलिस ने मुर्शिदाबाद जिले में गिरफ्तार हुए दो संदिग्ध आतंकियों से 16 जीबी की पेन ड्राइव, जिहादी साहित्य, फर्जी पहचान पत्र और अन्य संदिग्ध दस्तावेज बरामद किए हैं। गिरफ्तार आतंकियों की पहचान अब्बास अली और मीनारुल शेख के रूप में हुई है। पुलिस के अनुसार, ये दोनों एक स्लीपर सेल का हिस्सा थे जो दक्षिण और उत्तर बंगाल के संवेदनशील इलाकों में अस्थिरता पैदा करने के साथ-साथ पूर्वोत्तर भारत में भी आतंक फैलाने की योजना बना रहे थे।

क्या है चिकन नेक?

चिकन नेक यानी सिलीगुड़ी कॉरिडोर भारत के लिए रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण है। यह पश्चिम बंगाल के सिलीगुड़ी क्षेत्र को भारत के सात पूर्वोत्तर राज्यों से जोड़ने वाला एकमात्र मार्ग है। इसकी चौड़ाई मात्र 22 किलोमीटर है और यह भूटान, नेपाल और बांग्लादेश से सटा हुआ है। अगर इस क्षेत्र में कोई व्यवधान उत्पन्न होता है, तो पूरे पूर्वोत्तर भारत का बाकी देश से संपर्क टूट सकता है। इस वजह से आतंकियों के लिए यह क्षेत्र हमेशा से एक संवेदनशील लक्ष्य रहा है।

पुलिस जाँच में यह भी सामने आया है कि इन आतंकियों ने मुर्शिदाबाद और अलीपुरद्वार जिलों में अपने ठिकाने बना लिए थे। उनकी योजना थी कि वे बंगाल और पूर्वोत्तर क्षेत्र में प्रमुख हिंदू नेताओं को निशाना बनाएँ। इसके अलावा ये आतंकी बांग्लादेश में 2015 में हुए ब्लॉगर हत्याकांड जैसे हमलों को दोहराना चाहते थे।

अधिकारियों का कहना है कि मुर्शिदाबाद बांग्लादेशी आतंकी संगठनों के लिए एक आसान रास्ता बन गया है। यह इलाका सीमावर्ती होने के कारण आतंकियों के लिए भारत में घुसपैठ और हथियारों की तस्करी के लिए उपयुक्त है।

बता दें कि अंसार-उल-इस्लाम बांग्लादेश एक प्रतिबंधित आतंकी संगठन है, जो बांग्लादेश से संचालित होता है और इस्लामी कट्टरपंथी विचारधारा का प्रचार करता है। हाल के वर्षों में यह संगठन भारत में भी अपनी जड़ें जमाने की कोशिश कर रहा है। मुर्शिदाबाद और उससे लगे इलाकों में यह संगठन न केवल अपने ठिकाने बना रहा है, बल्कि नए सदस्यों की भर्ती भी कर रहा है।

गिरफ्तार आतंकी न केवल क्षेत्रीय अस्थिरता पैदा करना चाहते थे, बल्कि धार्मिक नेताओं की हत्या कर सांप्रदायिक तनाव भी फैलाना चाहते थे। उनकी योजनाओं का एक और मकसद भारत और पूर्वोत्तर राज्यों के बीच संपर्क को काटकर देश की सुरक्षा को चुनौती देना था। फिलहाल, पश्चिम बंगाल पुलिस ने कहा है कि आतंकियों की अन्य स्लीपर सेल की पहचान करने और उनके नेटवर्क को ध्वस्त करने के लिए जाँच जारी है।

43 साल बाद भारत के प्रधानमंत्री ने कुवैत में रखा कदम: रामायण-महाभारत का अरबी अनुवाद करने वाले लेखक PM मोदी से मिले, 101 साल के पूर्व IFS अधिकारी से भी की मुलाकात

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी शनिवार (21 दिसम्बर, 2024) को दो दिवसीय दौरे पर अरब देश कुवैत पहुँचे। यह किसी भारतीय प्रधानमंत्री की 43 वर्षों में पहली कुवैत यात्रा है। पीएम मोदी कुवैत के अमीर के बुलावे पर इस दौरे पर गए हैं। पीएम मोदी ने यहाँ 100 वर्ष की उम्र पार कर चुके एक पूर्व भारतीय राजनयिक से मुलाक़ात भी की।

पीएम मोदी के कुवैत पहुँचने पर यहाँ रहने वाले भारतीयों ने उनका जोरदार स्वागत किया। कुवैत सरकार के भी उच्चाधिकारी इस मौके पर मौजूद रहे। पीएम मोदी ने यहाँ उन दो साहित्यकारों से भी मुलाक़ात भी की, जिन्होंने रामायण और महाभारत का अनुवाद संस्कृत से अरबी में किया और उन्हें प्रकाशित किया।

पीएम मोदी ने कुवैत दौरे की शुरुआत में ही मंगल सेन हांडा से भी मुलाकात की। मंगल सेन हांडा 101 वर्ष के हैं और वह भारतीय विदेश सेवा के पूर्व अधिकारी हैं। मंगल सेन हांडा ने अपने दशकों के राजनयिक करियर के दौरान अरब समेत तमाम देशों में अपनी सेवाएँ दी हैं। वर्तमान में वह कुवैत में रहते हैं।

हांडा की नातिन श्रेया जुनेजा ने पीएम मोदी से आग्रह किया था कि कुवैत दौरे में वह उनसे जरूर मिलें। इस पर पीएम मोदी ने ट्विटर पर जवाब दिया था कि वह मिलेंगे। हांडा से पीएम मोदी ने हाथ मिलाया और कुछ देर बातचीत की। बाकी परिजनों से भी पीएम मोदी मिले।

पीएम मोदी की यात्रा की शुरुआत कुवैत में स्थित भारतीय श्रमिकों के कैम्प में दौरे से होगी। विदेश मंत्रालय ने कह़ा कि पीएम मोदी का यह दौरा यह भारत सरकार की विदेशों में काम करने वाले श्रमिकों के प्रति गंभीरता को प्रदर्शित करता है।

पीएम मोदी दो दिवसीय दौरे पर कुवैत के अमीर शेख मेशाल अल-अहमद अल-जबर अल-सबा और उनके बेटे सबा अल-खालिद अल-सबा से मुलाक़ात करेंगे और आधिकारिक बातचीत में शामिल होंगे। पीएम मोदी कुवैत के प्रधानमंत्री से भी बातचीत करेंगे।

पीएम मोदी यहाँ ‘हाला मोदी’ कायर्क्रम में भी हिस्सा ले रहे हैं जिसमें 5000 भारतीय शामिल हुए हैं। इसके अलावा वह गल्फ फुटबाल लीग के उद्घाटन समारोह में भी शामिल हो रहे हैं। कुवैत दौरे में पीएम मोदी दोनों देशों के बीच आर्थिक और ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने को लेकर जोर देंगे।

भारत और कुवैत काफी पुराने सहयोगी हैं और दोनों देशो के बीच लगभग 10 बिलियन डॉलर (₹85000 करोड़) का द्विपक्षीय व्यापार होता है। लगभग 10 लाख भारतीय भी कुवैत में रहते हैं। ऐसे में पीएम मोदी की इस यात्रा का महत्व और भी बढ़ जाता है।

कहीं मंदिर के पीछे बन रही बिरयानी, कहीं देवस्थान पर पड़ा मिला कूड़ा: कानपुर के मुस्लिम इलाकों में पहुँची मेयर प्रमिला पांडे, ताला खुलवाकर धार्मिक स्थलों का निरीक्षण किया

उत्तर प्रदेश के कानपुर में गुमशुदा और बंद पड़े मंदिरों को पुनः खोजने और उन्हें पुनर्जीवित करने का अभियान तेज हो गया है। इस पहल की अगुवाई कर रहीं कानपुर की मेयर और वरिष्ठ बीजेपी नेता प्रमिला पांडे ने मुस्लिम बहुल इलाकों में जाकर पुराने मंदिरों का निरीक्षण किया। यह कदम क्षेत्र में धार्मिक स्थलों के जीर्णोद्धार और पूजा-पाठ की बहाली के उद्देश्य से उठाया गया है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, मेयर प्रमिला पांडे शनिवार (21 दिसंबर 2024) को भारी पुलिस बल के साथ बेकनगंज क्षेत्र के दौरे पर निकलीं। उन्होंने एक-एक करके पाँच मंदिरों का निरीक्षण किया। इनमें से एक मंदिर, राम जानकी मंदिर, पर पहले से कब्जा था और वहाँ बिरयानी बनाने की शिकायतें मिली थीं। यह मंदिर अब शत्रु संपत्ति घोषित होने के बाद सील कर दिया गया है।

निशान मिला, लेकिन शिवलिंग था गायब

मेयर ने एक अन्य मंदिर, राधा कृष्ण मंदिर, का दौरा किया जहाँ शटर लगा हुआ था और अंदर कूड़ा भरा था। उन्होंने तुरंत अधिकारियों को इसे खाली करने और मंदिर की मरम्मत कराने का निर्देश दिया। शिव मंदिर का दौरा करने पर शिवलिंग के अवशेष मिले, लेकिन शिवलिंग गायब था।

मेयर ने यह सुनिश्चित करने का वादा किया कि इन मंदिरों को पुनः पूजा-अर्चना के लिए तैयार किया जाएगा। उन्होंने कहा कि मंदिरों की सुरक्षा और संरक्षण स्थानीय समुदाय की जिम्मेदारी है। साथ ही मंदिरों पर कब्जा करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

मंदिरों से कब्जे खाली करने पड़ेंगे

मेयर प्रमिला पांडे ने कहा कि इस जगह को सुनार गली कहते हैं। यहाँ पर अग्रवाल समुदाय के लोग रहते थे। कहा जाता है कि यहाँ हर 10 घर के बाद एक मंदिर और कुआँ हुआ करता था। जो अब नहीं है। अगर हमारे मंदिर हैं तो मूर्तियाँ कहाँ गई? किसी भी धर्म-समुदाय के लोग हों अगर मंदिर वहाँ पर है तो उसकी सुरक्षा करना वहाँ के लोगों का कर्तव्य है। अब यहाँ पर मंदिर नहीं है। इन लोगों को खाली करना पड़ेगा। यहाँ पर अब फिर से पूजा पाठ होगा।

बता दें कि आरटीआई से खुलासा हुआ था कि कानपुर में 325 मंदिर स्थित हैं, जिसमें से मुस्लिम बहुल इलाकों में स्थित 125 मंदिरों पर कब्जे हैं। सनातन मठ मंदिर रक्षा समिति के अनुसार, कानपुर के मुस्लिम बहुल इलाकों में 325 मंदिरों की पहचान की गई है, जिनमें से 125 मंदिरों पर कब्जा किया जा चुका है। समिति ने अब तक 35 मंदिरों की खोज की है, जो पूरी तरह खंडित हो चुके हैं।

इससे पहले, मेयर के अभियान से पहले कानपुर नगर निगम ने अवैध कब्जों के खिलाफ कार्रवाई करते हुए बुलडोजर चलवाया था। बेकनगंज के पास 100-125 साल पुराने तीन मंदिरों को कब्जे से मुक्त कराया गया और उनकी सफाई की गई। इनमें एक शिवजी और दो हनुमानजी के मंदिर शामिल थे।

कानपुर कमिश्नरेट पुलिस ने बताया कि बेकनगंज थाना क्षेत्र में मंदिरों के विषय में शिकायतें प्राप्त हुई थीं। पुलिस ने स्थलीय निरीक्षण के बाद तीन मंदिरों को कब्जे से मुक्त कराया। पुलिस ने क्षेत्र में शांति व्यवस्था बनाए रखने का दावा किया है।

पत्नी बनी ईसाई, पति पर डालने लगी धर्मांतरण का दबाव: छत्तीसगढ़ के सूरज ने परेशान होकर लगाई फाँसी, दीवार पर लिखकर गया पूरा दर्द; पुलिस ने नकारा

छत्तीसगढ़ के बालोद में पत्नी से मिल रहे ईसाई धर्मान्तरण के दबाव में एक युवक द्वारा आत्महत्या किए जाने की खबर है। 35 वर्षीय मृतक का नाम सूरज देवांगन उर्फ़ गजेंद्र है। गजेंद्र ने अपने सुसाइड नोट में अपनी बीवी राजेश्वरी सहित अन्य ससुरालीजनों पर कार्रवाई की इच्छा जताई है। हिन्दू संगठनों ने इस मामले में कड़े एक्शन की माँग उठाई है। पुलिस ने धर्मान्तरण के आरोपों का खंडन किया है। घटना शुक्रवार (20 दिसंबर 2024) की है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक यह घटना बालोद जिले के थानाक्षेत्र अर्जुन्दा की है। शुक्रवार को यहाँ के वार्ड नंबर 11 में रहने वाले सूरज देवांगन नाम के एक युवक ने अपने घर में फाँसी लगा ली। मौत से पहले सूरज ने घर की दीवाल पर अपना सुसाइड नोट लिखा था। इस नोट में सूरज ने लिखा, “मेरी पत्नी राकेश्वरी देवांगन जो कि आए दिन मुझसे वाद विवाद करती है। बच्चों को छोड़कर बार बार मायके चली जाती है, और वह ईसाई धर्म को अपना चुकी है।”

अपने इसी नोट में सूरज ने किसी प्रकाश देवांगन द्वारा खुद से 50 हजार रुपए ले कर वापस न करने के साथ पत्नी के अलावा सास-ससुर और सालों द्वार मिल रही प्रताड़ना का भी जिक्र किया है। विश्व हिन्दू परिषद ने इस मामले में नामजद सभी आरोपितों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की माँग की है। विहिप पदाधिकारी बलराम गुप्ता के अनुसार कार्रवाई में ढिलाई होने पर बड़ा आंदोलन किया जाएगा। मृतक के शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है।

पुलिस ने केस दर्ज कर के जाँच शुरू कर दी है। हालाँकि प्रथम दृष्टया पुलिस इस मामले में धर्मान्तरण के दावों को नकार रही है। पुलिस का कहना है कि पूर्व में सूरज की पत्नी राजेश्वरी ने अपने पति के खिलाफ मारपीट की शिकायत दर्ज करवाई थी। प्रशासन आत्महत्या की वजह पैसे और घेरलू विवाद मान कर चल रहा है। फिलहाल सभी बिंदुओं पर जाँच जारी है। सूरज ने 2 माह पूर्व भी पुलिस में तहरीर दे कर अपनी पत्नी के खिलाफ बच्चों को छोड़ कर मायके जाने जैसे आरोप लगाए गए थे। पुलिस ने भी यह माना है कि सूरज की पत्न्नी ईसाई मत का पालन करती है जिसको लेकर दोनों के बीच अक्सर विवाद होता रहता था।