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पार्टी की हार का JDU विधायक ने मनाया जश्न, हाथी पर चढ़ निर्दलीय को दी जीत की बधाई

चुनावी नतीजों के बाद हारने वाले पक्ष को निराश और जीतने वाले को जश्न मनाते आपने कई बार देखा होगा। लेकिन, बिहार के एक विधायक उप चुनावों में पार्टी की हार का जश्न मनाते नजर आए हैं। सीवान की दरौंदा विधानसभा सीट पर 21 अक्टूबर को हुए उपचुनाव में जदयू प्रत्याशी अजय सिंह को निर्दलीय विधायक कर्णजीत सिंह उर्फ व्यास सिंह ने 27,279 वोट से हराकर जीत दर्ज की।

जदयू प्रत्याशी को हार का सामना करना पड़ा। बावजूद इसके बड़हरिया से जदयू विधायक श्याम बहादुर ने हाथी पर चढ़ कर जश्न मनाया। 24 अक्टूबर को चुनाव परिणाम आने के बाद श्याम बहादुर ने नव निर्वाचित निर्दलीय विधायक कर्णजीत सिंह के साथ मिलकर जीत का जश्न मनाया। उन्होंने कर्णजीत सिंह को जीत की बधाई भी दी। इसका वीडियो भी वायरल हो रहा है।

इस दौरान जदयू विधायक श्याम बहादुर ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि कर्णजीत सिंह जीते हैं, तो वो उनको बधाई देने आए हैं। इतना ही नहीं, उन्होंने तो यहाँ तक कह दिया कि कर्णजीत जल्द ही पार्टी में शामिल होंगे और आगामी विधानसभा में वो जदयू की टिकट पर चुनाव लड़ेंगे। इस दौरान जदयू विधायक श्याम बहादुर के साथ ही भाजपा से सांसद रह चुके ओम प्रकाश यादव भी निर्दलीय उम्मीदवार की जीत का जश्न मनाते नज़र आए।

महाराष्ट्र: 30 को बीजेपी चुनेगी नेता, 15 निर्दलीय सहित कई छोटे दल साथ आने को तैयार

भारतीय जनता पार्टी की महाराष्ट्र यूनिट के मुखिया चंद्रकांत पाटिल ने मुख्यमंत्री पद को लेकर मची खींचतान के बीच बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा है कि महाराष्ट्र भाजपा ने नव निर्वाचित विधायकों की मीटिंग आगामी बुधवार (30 अक्टूबर, 2019) को बुलाई गई है। बैठक में भाजपा विधायक दल के नेता का चुनाव होगा।

इस बीच खबरें मीडिया में यह भी आ रहीं हैं कि सरकार के बहुमत के लिए केवल शिव सेना के भरोसे न बैठकर भाजपा ने खुद हाथ पैर मारना शुरू कर दिया है। 145 का आँकड़ा सरकार बनाने के लिए चाहिए और भाजपा के निवर्तमान मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस दोबारा शपथ लेने के लिए निर्दलीय और अन्य छोटे दलों के संपर्क में हैं। मीडिया रिपोर्टों में बताया जा रहा है कि 15 निर्दलीय और कई छोटी पार्टियॉं भाजपा के साथ आने को तैयार हैं। निर्दलीयों में ज्यादातर ऐसे हैं जिन्होंने टिकट नहीं मिलने पर बीजेपी से बगावत की थी। ऐसे नेताओं को दोबारा जोड़ने के प्रयास करने की बात फडणवीस पहले ही कह चुके हैं। भाजपा के खुद के 105 विधायक हैं, जो 2014 के 122 विधायकों से कम है। सभी भाजपा विधायकों को बैठक के नियत समय दोपहर 1 बजे उपस्थित रहने का निर्देश दिया गया है।

56 विधायकों वाली और गठबंधन सहयोगी होते हुए भी मुख्यमंत्री पद के लिए दौड़ में शामिल शिव सेना के बदलते तेवरों को देखते हुए भाजपा न उसके भरोसे बैठ सकती है, न ही वह 2.5 साल तक शिव सेना के मुख्यमंत्री (वह भी पहले 2.5 साल) की माँग के आगे झुकना नहीं चाहती है। उसके लिए राहत की बात यह है कि भाजपा के बिना सरकार बनाने के लिए शिव सेना को कॉन्ग्रेस और एनसीपी दोनों के समर्थन की जरूरत पड़ेगी।

बड़ी पार्टियों में सबसे छोटी कॉन्ग्रेस (44 विधायक) भले उसके साथ आने के लिए आतुर है, लेकिन 54 विधायकों वाली शरद पवार की एनसीपी ने अभी तक सरकार बनाने में कोई रुचि नहीं दिखाई है। शरद पवार ने कल ही बयान जारी कर अपनी पार्टी के विपक्ष में बैठने की घोषणा कर दी थी।

370 केवल मुस्लिमों और सरकार का मसला नहीं, हमें भी सुना जाए: SC में कश्मीरी पंडित

कश्मीरी पंडितों ने भी अनुच्छेद 370 को लेकर आखिरकार सुप्रीम कोर्ट का दरवाज़ा खटखटा ही दिया है। दो कश्मीरी पंडितों तेज कुमार मोज़ा और करिश्मा तेज कुमार मोज़ा ने केंद्र सरकार के अनुच्छेद 370 पर सुप्रीम कोर्ट में खुद को मामले में एक पार्टी बनाए जाने की याचिका दायर की है। उनके अलावा ऐसी ही याचिका ऑल इंडिया कश्मीरी समाज नामक एक संगठन ने दायर की है। इन याचिकाओं में अनुच्छेद 370 हटाए जाने का समर्थन करते हुए इसे अस्थाई बताया गया है।

याचिका में कहा गया है कि राष्ट्रपति को अनुच्छेद 370 से ही एक पब्लिक नोटिफिकेशन के ज़रिए उसे निरस्त करने की शक्ति मिली हुई थी। ऑल इंडिया कश्मीरी समाज की याचिका में यह भी कहा गया है, “जम्मू-कश्मीर के भारत के गणराज्य में विलय की संधि बगैर शर्त थी और राज्य का इरादा हमेशा से भारत के गणराज्य के साथ पूर्ण विलय का रहा है। अनुच्छेद 370 एक अस्थाई प्रावधान था जिसे जोड़ने का मकसद राज्य में शांति, सुरक्षा और कानून व्यवस्था था।” याचिका में इसके अतिरिक्त जम्मू-कश्मीर में हमेशा ही चीन और पाकिस्तान की घुसपैठ का खतरा बने रहने की बात भी कही गई है। सुप्रीम कोर्ट ने 14 नवंबर 2019 की तारीख़ तय की है, नरेंद्र मोदी की भाजपा के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार के अनुच्छेद 370 के प्रावधानों को जम्मू-कश्मीर से हटाए जाने की संवैधानिकता को चुनौती देने वाली याचिकाओं की सुनवाई के लिए।

जस्टिस एनवी रमन की अध्यक्षता वाली 5-सदस्यीय संवैधानिक बेंच ने केंद्र सरकार और जम्मू-कश्मीर सरकार को 5 अगस्त, 2019 को उठाए गए इस कदम को लेकर काउंटर एफिडेविट दाखिल करने की इजाज़त दे दी है। सरकार के निर्णय को चुनौती देने वालों में कई सारी राजनीतिक पार्टियाँ हैं जैसे नेशनल कॉन्फ़्रेंस, पीडीपी, सज्जाद लोन की पीपुल्स कॉन्फ़्रेंस। इसके अलावा माकपा के नेता मोहम्मद यूसुफ़ तारिगामी और लोक सभा सांसद मोहम्मद अकबर लोन और रिटायर्ड जस्टिस हसनैन मसूदी ने भी इस निर्णय को चुनौती दी है।

रिटायर होने वाले हैं आर्मी चीफ, इसलिए PoK पर कर रहे बयानबाजी: कॉन्ग्रेस नेता राशिद अल्वी

सेना प्रमुख जनरल बिपिन रावत ने शुक्रवार (अक्टूबर 25, 2019) को पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (POK) को आतंकवादियों के नियंत्रण वाला क्षेत्र करार दिया। उन्होंने कहा था कि PoK को पाकिस्तानी सरकार नहीं नियंत्रित नहीं करती। आतंकी और उनके संगठन इस इलाके को चलाते हैं।

रावत का यह बयान कॉन्ग्रेस के गले नहीं उतर रहा। पार्टी ने सेना प्रमुख के बयान को राजनीति से प्रेरित करार दे दिया। कॉन्ग्रेस नेता राशिद अल्वी का कहना है कि सेना प्रमुख जल्द रिटायर होने वाले हैं, इसीलिए ऐसे बयान दे रहे हैं।

अल्वी ने कहा कि जनरल रावत सेनाध्यक्ष हैं। उन्हें इस तरह की बयानबाजी नहीं करनी चाहिए। उन्होंने कहा, “चीफ ऑफ द आर्मी स्टाफ को राजनीतिक बयान नहीं देना चाहिए। ये जिम्मेदारी सरकार की है, प्रधानमंत्री की है, रक्षा मंत्री की है। मुझे नहीं मालूम कि इस तरीके का बयान वे क्यों दे रहे हैं। इसमें कोई दो राय नहीं कि आतंकवादी पीओके में सक्रिय हैं। लेकिन वे सेनाध्यक्ष हैं। सरकार से इजाजत ले वे पीओके पर हमला करें और उसे वापस कश्मीर में शामिल करें। सिर्फ बयान देने का कोई मतलब नहीं। मुझे लगता है कि उनका रिटायरमेंट शायद नजदीक है।”

अल्वी के बयान पर भाजपा ने कहा है कि गैरवाजिब सवाल उठाने की कॉन्ग्रेस की पुरानी आदत है। भाजपा प्रवक्ता माधव भंडारी ने आर्मी चीफ के बयान को जायज बताते हुए कहा “पाक अधिकृत कश्मीर हो या बाल्टिस्तान, ये सारा भारत का हिस्सा है जिस पर 1948 में पाकिस्तान ने सैन्य कार्रवाई कर कब्जा किया और आज तक अवैध कब्जा बनाए रखा है। ”

NDTV ने मॉंगी माफी: असम के अविवाहित CM को बताया था 6 बच्चों का बाप

ऑपइंडिया ने अपने फ़ैक्ट चेक में शुक्रवार (25 अक्टूबर) को NDTV की ग़लत रिपोर्टिंग का ख़ुलासा किया था। NDTV की एंकर सोनल मेहरोत्रा कपूर ने असम में सरकारी नौकरियों के लिए दो-बच्चे से संबंधित ख़बर को पढ़ते हुए दावा किया था कि दो से अधिक बच्चे वाले लोग असम में सरकारी नौकरी पाने के पात्र नहीं होंगे, जबकि असम के मुख्यमंत्री सर्बानंद सोनोवाल के ख़ुद 6 बच्चे हैं।

वास्तव में, NDTV की एंकर सोनल मेहरोत्रा ख़ुद सच्चाई से कोसों दूर थीं, क्योंकि उन्हें नहीं मालूम था कि असम के मुख्यमंत्री सर्बानंद सोनोवाल के 6 बच्चे नहीं हैं। असम के मुख्यमंत्री अविवाहित हैं और एकल जीवन जीते हैं। अब इस ख़बर पर अपनी ग़लती को स्वीकारते हुए NDTV ने माफ़ी माँगी है। NDTV ने अपने ट्विटर हैंडल से लिखा, “हमें बेहद अफ़सोस है कि NDTV के एक एंकर ने अनजाने में कहा कि असम के मुख्यमंत्री
सर्बानंद सोनोवाल के 6 बच्चे थे, जबकि यह सर्वविदित है कि वो अविवाहित हैं।”

बता दें कि बड़े ही नाटकीय अंदाज़ में, सोनल मेहरोत्रा ​​कपूर ने दर्शकों को बताया था कि दिलचस्प बात यह है कि मुख्यमंत्री के ख़ुद के 6 बच्चे हैं, लेकिन उन्होंने इस दो-बाल नीति को लागू करने का फ़ैसला किया है।

इस वीडियो को NDTV ने माइक्रो-ब्लॉगिंग वेबसाइट ट्विटर पर भी शेयर किया था जिसे बाद में डिलीट कर दिया। लेकिन तकनीक के इस दौर में अगर वीडियो शेयर करने और डिलीट करने का ऑप्शन है तो समय रहते डाउनलोड करने का अवसर भी इसी तकनीक ने दिया है। ऊपर आप उसी डाउनलोड किए वीडियो को देख सकते हैं।

बता दें कि ऐसा पहली बार नहीं हुआ जब NDTV के एंकर्स ने झूठ फैलाने में दिलचस्पी ली हो। इससे पहले 2018 में NDTV ने अपने सोशल चैनल्स पर ‘असम बीजेपी सांसद के भतीजे, नागरिक सूची में नहीं हैं, ऐसा भी होता है’ हेडिंग के साथ एक न्यूज़ अपलोड और शेयर की थी। इस फ़र्ज़ी ख़बर में बीजेपी सांसद बिजोया चक्रवर्ती और जयदीप फुकन की फ़ोटो थी। तब जयदीप ने ट्विटर पर दावा किया था कि उनका नाम NRC सूची में है और वे भाजपा सांसद के भतीजे नहीं हैं। जयदीप ने NDTV को एक मेल भेज इस अप्रासंगिक न्यूज़ से अपनी फ़ोटो को तुरंत हटाने को कहा था।

22 साल पहले 11 महीने पीएम रहे देवगौड़ा नहीं रख पाएँगे 2 बंगला, वीपी हाउस खाली करना होगा

पूर्व प्रधानमंत्री एचडी देवगौड़ा लुटियन दिल्ली में अब एक ही सरकारी आवास रख पाएँगे। केंद्र सरकार ने दूसरा आवास उन्हें खाली करने को कहा है। आवास एवं शहरी मामलों के मंत्रालय ने नियमों का हवाला देते हुए कहा है कि देवगौड़ा केवल एक सरकारी आवास रखने के ही हक़दार बताया हैं।

16वीं लोकसभा के दौरान वरिष्ठ सांसद के तौर पर देवगौड़ा को सरकारी आवास आवंटित किया गया था। 17वीं लोकसभा का चुनाव हारने के बाद पूर्व सांसदों से सरकारी आवास खाली करने के लिए कहा गया था, इस प्रक्रिया के तहत देवगौड़ा को भी संपदा निदेशालय ने गत सितंबर में बंगला खाली करने का नोटिस जारी किया था।

हिन्दुस्तान ने सूत्रों के हवाले से लिखा है कि देवगौड़ा ने अपने जवाब में पूर्व प्रधानमंत्री के रूप में ख़ुद को लुटियन दिल्ली में सरकारी आवास का हक़दार बताते हुए अनुरोध किया था कि उन्हें सफ़दरजंग लेन स्थित बंगले का आवंटन बरक़रार रखा जाए। निदेशालय ने देवगौड़ा के अनुरोध को तो मान लिया, लेकिन प्रधानमंत्री के कार्यकाल के दौरान उन्हें कार्यालयी उपयोग के लिए आवंटित वीपी हाउस खाली करने को कहा है।

निदेशालय के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, नियम कहते हैं कि पूर्व प्रधानमंत्री केवल एक ही सरकारी आवास (टाइप 7) के हक़दार हैं, इसलिए उन्हें दूसरा सरकारी आवास खाली करने के लिए कहा गया है। संयुक्त मोर्चा सरकार के दौरान देवगौड़ा जून 1996 से 21 अप्रैल 1997 तक पीएम पद पर रहे थे।

ख़बर के अनुसार, 24 अक्टूबर तक सरकारी आवास खाली करने वाले पूर्व सांसदों की संख्या 25 थी। नोटिस के बावजूद बंगला नहीं छोड़ने वालों में पूर्व सांसद तारिक अनवर, जय प्रकाश नारायण यादव, गायकवाड़ रवींद्र विश्वनाथ और धर्मेंद्र यादव समेत क़रीब दो दर्जन पूर्व सांसद शामिल हैं।

निदेशालय ने कठोरता से इनसे बंगला खाली कराने की कार्रवाई शुरू कर दी है। एक अधिकारी ने बताया कि दिवाली के कारण पर्याप्त पुलिस बल न मिल पाने की वजह से दिवाली के बाद बल पूर्वक बंगले खाली कराने की कार्रवाई तेज़ की जाएगी।

ग़ौरतलब है कि 17वीं लोकसभा में चुनकर नहीं आ सके 230 सांसदों को जुलाई में सरकारी आवास खाली करने का नोटिस दिया गया था। लेकिन, आधे से ज्यादा पूर्व सांसदों ने पानी और बिजली कनेक्शन काट दिए जाने की चेतावनी के बाद सरकारी आवास खाली किया था।

गोपाल कांडा को बचा रही रही केजरीवाल सरकार को अदालत से फटकार, कहा- ‘अजीब स्थिति है’

हरियाणा की कॉन्ग्रेसी सरकार में मंत्री रहे गोपाल कांडा अभी काफी चर्चा में हैं। कारण है कि बिन मॉंगे उनका भाजपा को समर्थन का ऐलान करना। कांडा हरियाणा के सिरसा से विधायक चुने गए हैं। हालॉंकि भाजपा ने न तो उनसे समर्थन मॉंगा था और न ही लिया, लेकिन उनके दागदार अतीत का हवाला देकर भाजपा को घेरने की भरपूर कोशिश हुई। अब जो जानकारी निकलकर सामने आ रही है उससे सवाल उठने लगा है कि क्या कांडा को दिल्ली की अरविन्द केजरीवाल सरकार बचा रही है? क्या दिल्ली की अरविन्द केजरीवाल सरकार सिरसा के नव-निर्वाचित विधायक गोपाल कांडा को बचा रही है?

असल में, दिल्ली की एक अदालत में गोपाल कांडा के ख़िलाफ़ एक एयर होस्टेस की आत्महत्या से जुड़ा मामला चल रहा है। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार इस मामले में अदालत पब्लिक प्रोसिक्यूटर की अनुपस्थिति से बेहद नाराज है। अदालत ने आपत्ति जताते कहा है कि ये अजीब स्थिति है, जहाँ सरकार अभियोजन में कोई दिलचस्पी ही नहीं दिखा रही है। जुलाई 25, 2013 को दिल्ली हाईकोर्ट के आदेश के बाद कांडा के ख़िलाफ़ बलात्कार और अप्राकृतिक यौनाचार के आरोप हटा दिए गए थे। दिसंबर 6, 2013 को ट्रायल कोर्ट ने कांडा के ख़िलाफ़ आत्महत्या के लिए उकसाने सम्बंधित मामला चलाने का फ़ैसला लिया।

इस घटना को 6 वर्ष हो गए हैं। मामला एक विशेष अदालत में चल रहा है, जहाँ केवल जनप्रतिनिधियों के ख़िलाफ़ ही आपराधिक मामले चलाए जाते हैं। इस मामले में कोर्ट में आधे-अधूरे सबूत पेश किए जा रहे हैं। गवाहों को बार-बार समन भेजे जाने के बावजूद वो पेश नहीं हो रहे। अव्वल तो ये कि पब्लिक प्रोसिक्यूटर ही सुनवाई से गायब रहते हैं। 3 अक्टूबर को जस्टिस अजय कुमार ने प्रॉसिक्यूशन डायरेक्टर को समन कर के पूछा कि स्पेशल प्रोसिक्यूटर अदालत में सुनवाई के समय क्यों नहीं पेश हो रहे? उन्हें दिल्ली पुलिस के लिए पेश होना है।

अदालत ने फटकारते हुए कहा कि दिल्ली सरकार द्वारा नियुक्त किए गए पब्लिक प्रोसिक्यूटर 23 सितम्बर के बाद से ही पेश नहीं हुए हैं। अदालत ने अपना सन्देश दिल्ली सरकार तक पहुँचाने को कहा। अदालत ने कहा कि अजीब स्थिति है जब दिल्ली सरकार इस केस में गंभीरता दिखा ही नहीं रही है। कोर्ट ने कहा, “हमें लगता है कि प्रॉसिक्यूशन डायरेक्टर ने राज्य सरकार की तरफ़ से केस लड़ने के मामले में सारी जिम्मेदारियों से हाथ धो लिया है।” अदालत का इशारा अरविन्द केजरीवाल सरकार की तरफ था, क्योंकि पब्लिक प्रोसिक्यूटर राज्य सरकार ने असाइन किया है और उसे दिल्ली पुलिस की तरफ से पेश होना होता है।

अदालत ने अपनी आपत्ति प्रॉसिक्यूशन डायरेक्टर के जरिए अरविन्द केजरीवाल सरकार तक पहुँचा दी। एक गवाह तो हैदराबाद से सुनवाई में शामिल होने आया था लेकिन, पब्लिक प्रोसिक्यूटर के न आने से उसे निराश होना पड़ा। कोर्ट ने इसे लेकर नाराज़गी जताई। इस मामले में दिल्ली सरकार के साथ-साथ कोर्ट ने दिल्ली पुलिस की भी खिंचाई की है। कोर्ट की फटकार के बाद ख़बरें आई थीं कि दिल्ली सरकार ने नया पब्लिक प्रोसिक्यूटर नियुक्त किया है।

उधर आम आदमी पार्टी ने गोपाल कांडा का नाम लेकर भाजपा पर निशाना साधने में कोई कसर नहीं छोड़ी। राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने कहा कि ‘बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ’ वाले राज्य में भाजपा एक बलात्कार आरोपित का समर्थन ले रही है। आप ने तो यहाँ तक कहा कि दिल्ली में घर-घर जाकर बताया जाएगा कि उनकी बहू-बेटियाँ भाजपा से असुरक्षित हैं। गौरतलब है कि हरियाणा लोकहित पार्टी के एकमात्र विधायक गोपाल कांडा को सरकार में शामिल करने से भाजपा ने साफ़ इनकार कर दिया है। हरियाणा के खेल मंत्री और हालिया चुनाव में छठी बार विधायक चुने गए अनिल विज ने कहा है कि कांडा को सरकार में शामिल करने का कोई सवाल ही नहीं उठता और न ही भारतीय जनता पार्टी उनका समर्थन ले रही है।

शिव सेना को कॉन्ग्रेस बार-बार डाल रही दाना, चुगने आ ही नहीं रहे उद्धव ठाकरे

कॉन्ग्रेस ने महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव के बड़े दलों में सबसे छोटी 44 विधायकों वाली पार्टी बन कर उभरने के बाद भी सरकार बनाने की उम्मीद नहीं छोड़ी है। जहाँ उससे ज़्यादा सीटें (54 विधायक) जीतने वाली राष्ट्रवादी कॉन्ग्रेस पार्टी ने सत्ता लोलुपता छोड़ कर अगले 5 साल के लिए विपक्ष में ही रहने की घोषणा कर दी है, वहीं कॉन्ग्रेस अभी भी बीजेपी की सहयोगी शिव सेना के साथ मिल कर सरकार बनाने के सपने देख रही है।

कॉन्ग्रेस नेता बार-बार शिव सेना को लुभाने की कोशिश कर रहे हैं। इसी क्रम में अब पूर्व मंत्री विजय वडेट्टीवार ने इशारों-इशारों में कहा है कि कॉन्ग्रेस शिव सेना को 5 साल के लिए मुख्यमंत्री का कुर्सी सौंपने को तैयार है। बीजेपी से शिव सेना 2.5 साल के लिए मुख्यमंत्री की कुर्सी माँग रही है। इस संबंध में वडेट्टीवार ने कहा, “गेंद बीजेपी के पाले में है। अब यह शिव सेना पर है कि वह 5 साल के लिए सीएम की कुर्सी चाहती है या 2.5 साल की मॉंग पर बीजेपी की प्रतिक्रिया का इंतजार करना चाहती है। यदि शिव सेना का प्रस्ताव हमारे पास आया तो हम हाईकमान से उस पर चर्चा करेंगे।”

शिव सेना को लुभाने की कोशिश करने वाले वडेट्टीवार पहले कॉन्ग्रेसी नहीं हैं। विधानसभा चुनाव के नतीजे आने के बाद महाराष्ट्र कॉन्ग्रेस के अध्यक्ष बाला साहेब थोराट ने भी कहा था, हमें अभी तक शिव सेना की ओर से कोई प्रस्ताव नहीं मिला है। यदि उसका प्रस्ताव आता है तो हम पार्टी हाईकमान से इस मसले पर चर्चा करेंगे।

दिलचस्प यह है कि कॉन्ग्रेस यह दॉंव ऐसे वक्त में चल रही है जब उसकी सहयोगी एनसीपी ने स्पष्ट तौर पर कह दिया है कि वे विपक्ष में बैठेंगे। शिवसेना के साथ सरकार नहीं बनाएँगे। एनसीपी नेता प्रफुल्ल पटेल ने शनिवार को कहा, “मैं स्पष्ट कर देना चाहता हूॅं कि हम विपक्ष में बैठेंगे। मजबूत विपक्ष की भूमिका का निवर्हन करेंगे। सरकार गठन में हम कोई भूमिका नहीं निभाना चाहते। सरकार बनाने का जनादेश बीजेपी शिवसेना को मिला है।” उनसे पहले एनसीपी सुप्रीमो शरद पवार भी सरकार में शामिल होने से मना कर चुके हैं।

ऐसे में यह सवाल उठना लाजिमी है कि यदि कॉन्ग्रेस की बात शिव सेना मान भी ले तो सरकार कैसे बनेगी। 288 सदस्यीय महाराष्ट्र विधानसभा में बहुमत का नंबर है 145। कॉन्ग्रेस के 44 और शिवसेना के 56 विधायकों को मिलाकर यह संख्या 100 तक ही पहुॅंचती है। एनसीपी को 54 और बीजेपी को 104 सीटें मिली है। 29 अन्य जीते हैं, जिनमें ज्यादातर भाजपा के बागी हैं। बताया जा रहा है कि ये बीजेपी के साथ आने को तैयार बैठे हैं। यूॅं ही नहीं कहते बेगानी शादी में अब्दुल्ला दीवाना!

‘बाप-बेटी दोनों को एक ही अस्पताल में कैद रखो’ – इमरान खान के आदेश के बाद नवाज शरीफ को हार्ट अटैक

पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री नवाज शरीफ को दिल का दौरा पड़ा है। नवाज शरीफ पहले से ही लाहौर के सर्विसेज अस्पताल में भर्ती हैं। अस्पताल में ही उन्हें दिल का दौरा पड़ा है। दुखद यह है कि पाकिस्तान के पूर्व पीएम को दिल का दौड़ा तब पड़ा, जब इमरान सरकार ने नवाज की बेटी मरियम नवाज को भी उसी अस्पताल में ‘कैद’ रखने का आदेश दिया, जिसमें नवाज शरीफ को रखा गया है। इमरान को ऐसा इसलिए करना पड़ा क्योंकि मरियम नवाज को जेल भेजने का उनकी सरकार के फैसले का जबरदस्त विरोध हुआ।

वरिष्ठ पत्रकार हामिद मीर ने इसकी जानकारी दी। बता दें कि दिल का दौरा पड़ने के बाद डॉक्टरों ने उन पर निगरानी और भी बढ़ा दी है। डॉक्टरों का कहना है कि ये दिल का दौरा माइनर है। मगर उनकी स्थिति काफी गंभीर बनी हुई है।

नवाज शरीफ की हालत बेहद गंभीर है। शरीफ इस समय गंभीर इम्‍यून डिसऑर्डर से ग्रसित हैं और उनका प्‍लेटलेट्स भी खतरनाक स्‍तर पर पहुँच गया है। नवाज को शुक्रवार (अक्टूबर 25, 2019) को लाहौर हाई कोर्ट से जमानत दे दी गई है।

नवाज को चौधरी शक्कर मिल मामले में भ्रष्टाचार का दोषी ठहराया गया है। इस मामले में उन्हें सात साल जेल की सजा सुनाई गई है। बीमारी के चलते पाकिस्तान की शीर्ष अदालत ने उन्हें चौधरी शक्कर मिल के मामले में जमानत दे दी है। उनका प्लेटलेट काउंट अचानक गिर गया था। जिसके कारण उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया है। नवाज के बेटे हुसैन नवाज ने बुधवार (अक्टूबर 23, 2019) को आरोप लगाया था कि उनके पिता को जेल में जहर दिया जा रहा है। नवाज भ्रष्टाचार के मामलों में लाहौर की कोट लखपत जेल में बंद थे।

हुसैन ने आरोप लगाया है कि उनके पिता नवाज के शरीर से प्लेटलेट्स में कमी होने का कारण जहर देना भी हो सकता है। लंदन में रह रहे हुसैन ने पिता के खिलाफ साजिश का आरोप लगाया। हुसैन ने ट्वीट करते हुए आरोप लगाया था कि उनके पिता की प्लेटलेट्स में कमी किसी तरह के “जहर” का परिणाम हो सकती है। उन्होंने लिखा कि अगर उनके पिता को कुछ होता है, तो आप जानते हो इसके लिए जिम्मेदार कौन है? 

पीएमएल (एन) अध्यक्ष और नवाज के छोटे भाई शाहबाज शरीफ ने मंगलवार (अक्टूबर 22, 2019) को नवाज से मुलाकात करने के बाद ट्वीट किया था, “मैंने आज अपने भाई से मुलाकात की। मुझे उनकी तेजी से बिगड़ती हालत की बहुत चिंता हो रही है। सरकार को उदासीनता छोड़ उनके स्वास्थ्य को देखना चाहिए। मैं पूरे देश से मियाँ साहिब के लिए दुआ करने की अपील करता हूँ।”

सावरकर से कॉन्ग्रेस को भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव भी याद आए

कॉन्ग्रेस वह पार्टी है जिसके नेता खुद को भी देश के सर्वोच्च सम्मान भारत रत्न से नवाज चुके हैं। देश के अमर क्रांतिकारियों को सत्ता में रहते हुए उसने कभी इसका हकदार ही नहीं माना। यहॉं तक कि जब महाराष्ट्र के चुनाव में बीजेपी ने वीर सावरकर को भारत रत्न देने का वादा किया तो भी कॉन्ग्रेस इसकी आलोचना से पीछे नहीं रही। लेकिन, विधानसभा चुनावों की शिकस्त के बाद उसे भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव की याद आई है।

कॉन्ग्रेस नेता और लोकसभा सांसद मनीष तिवारी ने इस बाबत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखा है। इसमें उन्होंने भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव को भारत रत्न से सम्मानित करने की माँग की है। साथ ही मोहाली स्थित हवाई अड्डे का नाम शहीद-ए-आज़म सिंह के नाम करने की भी अपील की है। उन्होंने इस पत्र को सोशल मीडिया पर भी शेयर किया है।

तिवारी ने पत्र में कहा है कि आगामी गणतंत्र दिवस यानी 26 जनवरी 2020 के मौक़े पर इन तीनों शहीदों को भारत रत्न से सम्मानित किया जाए। साथ ही इन्हें आधिकारिक तौर पर ‘शहीद-ए-आज़म’ घोषित किए जाने का भी आग्रह किया है। 25 अक्टूबर के पत्र में तिवारी ने लिखा, “मैं इस तथ्य की ओर आपका ध्यान आकर्षित करना चाहता हूँ कि शहीद भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव ने ब्रिटिश साम्राज्यवाद का पुरज़ोर विरोध कर देशवासियों को आंदोलन के लिए प्रेरित किया। इसके बाद 23 मार्च, 1931 को तीनों ने अपना सर्वोच्च बलिदान दे दिया।”

ग़ौरतलब है कि महाराष्ट्र बीजेपी ने अपने घोषणा-पत्र में वादा किया था कि अगर राज्य में सरकार बनी तो केंद्र सरकार से वीर सावरकर को भारत रत्न देने की अपील करेंगे। कॉन्ग्रेस के विरोध के बावजूद उसके राष्ट्रीय प्रवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने सोशल मीडिया में खुलकर कहा था कि सावरकर ने न केवल आज़ादी की लड़ाई में अहम भूमिका निभाई थी, बल्कि वे देश के लिए जेल भी गए थे। उन्होंने अपने ट्वीट में लिखा,

“निजी तौर पर मैं सावरकर की विचारधारा से सहमत नहीं हूँ। लेकिन इस तथ्य को नकारा नहीं जा सकता कि वे एक काबिल व्यक्ति थे जिन्होंने आजादी की लड़ाई में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने दलितों के अधिकार की लड़ाई लड़ी और देश के लिए जेल गए।”

सिंघवी ने स्वच्छता अभियान के प्रसार के लिए प्रधानमंत्री मोदी द्वारा की गई कोशिशों की भी सराहना की। उन्होंने लिखा, “जहाँ हक़दार हों, वहाँ प्रशंसा की जानी चाहिए। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गाँधी जी के स्वच्छता के संदेशों को प्रसारित करने के लिए बॉलीवुड की मदद ली। इससे अधिकतर लोगों का ध्यान इस मुद्दे पर जाएगा।”