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J&K में सुरक्षा बलों ने मार गिराए 4 आतंकी: भारतीय सेना की वर्दी पहन हमले की फिराक में थे

जम्मू-कश्मीर में शनिवार (सितंबर 28, 2019) की सुबह दो मुठभेड़ और एक ग्रेनेड हमला हुआ। पहली मुठभेड़ रामबन जिले के बोटोट में शुरू हुई जब 5 आतंकवादियों ने जम्मू-श्रीनगर राजमार्ग पर आम नागरिकों से भरी एक यात्री बस को रोकने की कोशिश की। ऑपरेशन अभी भी जारी है।

जानकारी के मुताबिक, आतंकवादी भारतीय सैनिकों की पोशाक में थे। आतंकवादियों ने ड्राइवर से बस रोकने के लिए कहा, मगर ड्राइवर पहले से सतर्क था। उसने बस नहीं रोकी और वहाँ से तेज़ी से निकल गया। ड्राइवर ने वहाँ से भाग निकलने के बाद इसकी सूचना निकटतम पुलिस चौकी को दी। इसके बाद सुरक्षा बलों ने इलाके को घेर लिया और तलाशी अभियान शुरू किया।

ताज़ा सूचना के अनुसार, सुरक्षा बलों ने 3 आतंकियों को मार गिराया है। वहीं, एक जवान वीरगति को प्राप्त हुआ है। आतंकियों द्वारा बंधक बनाए गए सभी लोगों को छुड़ा लिया गया है। पुलिस ने अपने बयान में बताया कि रामबन में ऑपरेशन ख़त्म हो चुका है। पूरे ऑपरेशन के दौरान सुरक्षा बलों को काफ़ी परेशानी का सामना करना पड़ा।

इलाके में हो रही भारी बारिश के कारण तलाशी अभियान को चलाने में काफी मुश्किलें आ रही थीं। बताया जा रहा है कि 5 आतंकी ग्रेनेड हमला करने के बाद एक घर में घुसकर लोगों को बंधक बना लिया था और कुछ-कुछ देर पर वो सुरक्षाकर्मियों पर फायरिंग कर रहे थे। सुरक्षाबलों ने उनलोगों का पीछा करते हुए पूरे इलाके को घेर लिया था, ताकि आतंकी सेना से बचकर न निकल पाएँ। सेना ने आतंकवादियों से आत्मसमर्पण करने के लिए कहा। अतिरिक्त क्षति से बचने के लिए सुरक्षा बलों द्वारा अत्यधिक सावधानी बरती जा रही थी।

दूसरी घटना, जम्मू-कश्मीर के गांदरबल के इलाके में हुई जो कि नियंत्रण रेखा (एलओसी) के निकट है। सेना के उत्तरी कमांड ने ट्वीट करते हुए बताया कि सुरक्षाबलों के साथ हुए इस मुठभेड़ में एक आतंकवादी को मार गिराया गया। ऐसा अंदेशा जताया जा रहा है कि जिस आतंकवादी को मार गिराया गया, वह एलओसी के रास्ते गुरेज़ की तरफ से भारत में घुसपैठ करने वाले एक बड़े समूह का हिस्सा हो सकता था।

वहीं, तीसरी घटना श्रीनगर की बताई जा रही है। यहाँ आतंकवादियों ने आबादी वाले इलाके में ग्रेनेड फेंका। हालाँकि, इस दौरान किसी के घायल होने की खबर नहीं है, क्योंकि क्षेत्र में वापस से प्रतिबंध लग जाने की वजह से उस समय कम ही लोग सड़कों पर थे। फिलहाल, पुलिस जाँच कर रही है।

भारत और RSS एक, दोनों को अलग-अलग न समझे दुनिया: इमरान के बयान पर संघ का पलटवार

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) ने पाक पीएम इमरान ख़ान के बयान पर पलटवार किया है। इमरान ने संयुक्त राष्ट्र जनरल असेंबली में संघ को भला-बुरा कहा था और पूर्व केंद्रीय गृह मंत्री शुशील कुमार शिंदे के हवाले से इसे आतंकवादी संगठन तक करार दिया था। ख़ान समय-समय पर हिटलर की तुलना मोदी से करते रहे हैं और कहते रहे हैं कि संघ की भी वही विचारधारा है, जो नाजियों की थी। इमरान ने यूएनजीए को सम्बोधित करते हुए कहा कि पीएम मोदी आरएसएस के आजीवन सदस्य हैं और संघ मुस्लिमों का ख़ात्मा करना चाहता है।

आरएसएस के सह सरकार्यवाह डॉक्टर कृष्ण गोपाल शर्मा ने इमरान ख़ान के बयान का जवाब देते हुए कहा कि पाक पीएम द्वारा संघ की आलोचना करने का मतलब है कि उन्होंने भारत की आलोचना की है। उन्होंने भारत और आरएसएस को पर्यायवाची करार देते हुए दुनिया को संदेश किया कि दोनों को अलग कर के न देखा जाए। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ सिर्फ़ भारत के लिए है और दुनिया में कहीं और इसकी कोई भी शाखा नहीं है। उन्होंने कहा कि आरएसएस का अस्तित्व सिर्फ़ भारत में है।

आरएसएस नेता ने पूछा कि आखिर पाकिस्तान संघ से क्यों नाराज़ है? उन्होंने कहा कि अगर पाकिस्तान संघ से नाराज़ है तो इसका सीधा अर्थ है कि वह भारत से नाराज़ है। डॉक्टर कृष्ण गोपाल ने कहा:

“आरएसएस और भारत अब पर्यायवाची हो गए हैं। हम भी यही चाहते थे कि दुनिया इन दोनों को अलग-अलग न समझे बल्कि एक ही समझे। इमरान साहब ने हमारा ये कार्य काफ़ी अच्छे तरीके से किया है। वह बिना कुछ करे-धरे हमारे नाम को दुनिया भर में पहुँचा रहे हैं। दुनिया भर में जो भी आतंकवाद से पीड़ित लोग हैं, उन्हें इस बात का एहसास हो रहा है कि आरएसएस कहीं न कहीं आतंकवाद के विरोध में है। “

आरएसएस नेता ने कहा कि बिना अतिरिक्त मेहनत किए अगर संगठन को इतनी प्रसिद्धि मिल रही है तो यह अच्छी बात है। पाक पीएम के बारे में बोलते हुए डॉक्टर शर्मा ने कहा कि वह भगवान से यही प्रार्थना करते हैं कि इमरान अपनी वाणी को विराम न दें और ऐसे ही लगातार बोलते रहें। संघ के सह सरकार्यवाह ने भारत और आरएसएस के एक होने की बात कही, तब लोगों ने तालियाँ बजा कर उनके बयान का स्वागत किया।

पाकिस्तान के कई नेता आजकल आरएसएस को लेकर कुछ ज्यादा ही मुखर हैं। इमरान ख़ान ने एक के बाद एक कई ट्वीट्स कर के ‘संघ और हिटलर की विचारधारा के बीच समानता’ की बातें की थीं। संघ को लेकर पाकिस्तान के कई मंत्री भी ज़हर उगलते रहे हैं।

PM मोदी को नरक में भेजने वाली महिला सिंगर को जाना पड़ेगा जेल, अरेस्ट वॉरंट जारी

जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद-370 को निष्क्रिय किए जाने के बाद सांप और मगरमच्छ को हाथों में लिए भारत और प्रधानमंत्री मोदी को धमकी देने वाली पाकिस्तानी गायिका रबी पीरज़ादा का नाम सामने आया था। ताज़ा समाचार यह है कि लाहौर की एक अदालत ने शुक्रवार (27 सितंबर) को उसके ख़िलाफ़ गिरफ़्तारी वॉरंट जारी कर दिया है।

द न्यूज़ इंटरनेशनल की ख़बर के अनुसार, रबी पीरज़ादा पर पार्लर में पालतू जानवरों के रूप में सांपों समेत अन्य जंगली जानवरों (चार अजगर, एक मगरमच्छ) को रखने का आरोप है। इस मामले की सुनवाई शुक्रवार को मॉडल टाउन अदालत में की गई। इस दौरान जज ने अदालत के समन की अनदेखी करने के लिए गायिका को कड़ी फ़टकार लगाई।

दरअसल, गायिका के ख़िलाफ़ पंजाब वन्य-जीव संरक्षण एवं उद्यान विभाग ने वन्य-जीव अधिनियम के उल्लंघन करने के तहत कार्रवाई की है। इसके अनुसार, मगरमच्छ, सांप, अजगर और सरीसृपों को अपने पास रखना प्रतिबंधित है।

ग़ौरतलब है कि पाकिस्तानी गायिका रबी पीरज़ादा ने भारत पर साँपों से आक्रमण करने की धमकी दी थी। उसने ट्विटर पर वीडियो डाल कर भारत और ख़ासकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अजीबोगरीब धमकियाँ दी थी। इस वीडियो में वह साँपों और मगरमच्छों के साथ खेलती हुई दिखीं।

‘शोर शराबा’ नामक रोमांटिक कॉमेडी फ़िल्म में अभिनय कर चुकी रबी पीरज़ादा ने वीडियो के माध्यम से कहा था कि उनके दोस्त (साँप और मगरमच्छ) सीमा पार कर के भारत के लोगों को मारने के लिए तैयार हैं। इतना ही नहीं, वो ये भी कहती दिखी कि भारत के लोग नरक में जाकर मरेंगे। साँपों और मगरमच्छों की बात करते हुए पीरज़ादा ने कहा था कि उनके ये सभी दोस्त शांतिप्रिय हैं।

खुद को कश्मीरी लड़की बताते हुए पीरज़ादा ने कहा था कि वे इन सभी साँपों व मगरमच्छों को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को गिफ्ट के रूप में भेजना चाहती थी। इसके बाद उसने जम्मू-कश्मीर पर एक गीत भी गुनगुनाया। बता दें कि पीरज़ादा पहले भी अजीबोगरीब व्यवहार के कारण सुर्ख़ियों में रह चुकी है। इससे पहले जब पाक पीएम ने महिलाओं को मुर्गीपालन कर रुपए कमाने की सलाह दी थी, तब पीरज़ादा ने कई मुर्गियाँ ख़रीद कर अपने घर में रखा था और वीडियो भी पोस्ट किया था।

2017 में पीरज़ादा ने बॉलीवुड सुपरस्टार सलमान ख़ान की आलोचना की थी। उसने सलमान ख़ान पर युवाओं को अपराधी बनाने का आरोप लगाया था। उसने कहा था कि सलमान युवाओं के बीच अपराध को बढ़ावा दे रहे हैं।

पंचायत कार्यालय पर TMC की कब्जा करने की कोशिश, रोका तो पुलिस ने भाजपाइयों को दौड़ा-दौड़ा कर पीटा

पश्चिम बंगाल के कूच बिहार जिले के रामपुर क्षेत्र में पंचायत कार्यालय पर सत्ताधारी तृणमूल कॉन्ग्रेस (टीएमसी) के कार्यकर्ताओं ने कब्जा करने की कोशिश की। उन्हें भाजपा कार्यकर्ताओं ने रोका। इसके बाद दोनों पक्षों के बीच संघर्ष हो गया।

घटना शुक्रवार (सितंबर 27, 2019) की है। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार झड़प में कम से कम 2 पुलिसकर्मी और 10 भाजपा कार्यकर्ता घायल हो गए। पुलिस ने आँसू गैस के कई राउंड फायर किए और लाठी चार्ज किया।

भाजपा के जिला महासचिव संजय चक्रवर्ती ने समाचार एजेंसी एएनआई से बात करते हुए कहा, “लोकसभा चुनाव में मिली हार से बौखलाए टीएमसी कार्यकर्ता स्थानीय लोगों को धमकी दे रहे हैं। भाजपा समर्थकों ने इसका विरोध किया तो वे हिंसा पर उतारू हो गए। बाद में टीएमसी कार्यकर्ताओं ने पुलिस की मदद से हमारी पार्टी के समर्थकों पर हमला किया।”

टीएमसी जिला उपाध्यक्ष अब्दुल जलील अहमद ने आरोपों को ख़ारिज करते हुए ने कहा कि भाजपा कार्यकर्ताओं ने पुलिसकर्मियों के साथ-साथ उनकी पार्टी के कार्यकर्ताओं पर भी हमला किया।

जानकारी के मुताबिक, शुक्रवार को स्थानीय टीएमसी नेताओं ने पार्टी के कुछ कार्यकर्ताओं के साथ पंचायत ऑफिस में जबरदस्ती घुसने की कोशिश की। जब भाजपा समर्थकों ने इसका विरोध कर उन्हें ऐसा करने से रोका, तो झड़प शुरू हो गईं। मौके पर पहुँची पुलिस ने बल प्रयोग किया।

कॉन्ग्रेस IT सेल: गुजरात के रोहन गुप्ता को कमान, पूर्ववर्ती रम्या की तरह ही रहे हैं ‘कुख्यात’

गुजरात से संबंध रखने वाले रोहन गुप्ता के हाथों अब कॉन्ग्रेस आईटी सेल की कमान होगी। पार्टी ने उन्हें सोशल मीडिया डिपार्टमेंट का नया चेयरमैन बनाया है। इससे पहले वे कॉन्ग्रेस के मीडिया कोऑर्डिनेटर थे।

रोहन से पहले कॉन्ग्रेस के सोशल मीडिया डिपार्टमेंट का काम दक्षिण फिल्मों की अभिनेत्री दिव्या स्पंदना उर्फ रम्या के हाथों में थी। दिव्या स्पंदना ग़लत जानकारियाँ ट्वीट करने और भ्रामक अभियान चलाने के लिए कुख्यात थीं। लोकसभा चुनाव में कॉन्ग्रेस की बुरी हार के बाद उन्होंने अपने पद से इस्तीफा दे दिया था। उनकी जगह आए रोहन की छवि भी भ्रामक प्रचार अभियान चलाने वाले की ही रही है।

अहमदाबाद से शुरुआती पढ़ाई करने वाले रोहन गुप्ता 2016 से कॉन्ग्रेस के मीडिया पैनलिस्ट हैं। उन्होंने पुणे से एमबीए करने के बाद अपना कारोबार शुरू किया था। उन्हें 2008 में खाद्य प्रसंस्‍करण उद्योग मंत्रालय की एडवाजयरी कमेटी का हिस्सा बनाया गया था। उस समय केंद्र में मनमोहन सिंह के नेतृत्व में यूपीए की सरकार थी। वह गुजरात आईटी सेल की कमान भी सँभाल चुके हैं। 2010 में अहमदाबाद नगर निगम का चुनाव लड़ चुके रोहन गुप्ता को 2013 में कॉन्ग्रेस ने आईटी सेल का ट्रेनिंग एन्ड डेवलपमेंट इंचार्ज बनाया था।

2017 में विधानसभा चुनाव के दौरान उन पर चुनाव आयोग के दिशा-निर्देशों का उल्लंघन करने के आरोप लगे थे। आयोग के आदेश को दरकिनार करते हुए उन्होंने सोशल मीडिया पर पहले चरण के चुनाव के बाद एग्जिट पोल शेयर कर दिया था। इस मामले में सिटी क्राइम ब्रांच के साइबर सेल ने उनके ख़िलाफ़ मामला दर्ज किया था। उस समय वह गुजरात कॉन्ग्रेस आईटी सेल के संयोजक थे।

पवार फैमिली में पावर की लड़ाई: ₹25000 करोड़ के घोटाले में फॅंसे शरद भतीजे की लेंगे बलि!

विधानसभा चुनाव की देहरी पर खड़े महाराष्ट्र में राजनीति रोज नई करवट ले रही है। 25,000 करोड़ रुपए के बैंक घोटाले में नाम आने के बाद शरद पवार ने पहले बिना समन प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के दफ्तर जाने का राजनीति स्वांग रचा। अब खबर आ रही है कि खुद को पाक-साफ साबित करने के लिए वे अपने भतीजे और राज्य के पूर्व उप मुख्यमंत्री अजित पवार को राजनीति से रिटायर करने के फेर में हैं।

बारामती से पॉंच बार विधायक रहे अजित ने विधानसभा की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया है। विधानसभा स्पीकर हरिभाऊ बागड़े ने उनका इस्तीफा मिलने की पुष्टि की है। विधानसभा अध्यक्ष ने उनका इस्तीफा स्वीकार कर लिया है। टीओआई के मुताबिक एनसीपी सुप्रीमो शरद पवार ने दावा किया है कि अजित राजनीति से संन्यास लेकर पारिवारिक बिजनेस पर ध्यान देंगे। हालॉंकि पूरे मामले पर अजित ने खुद रहस्यमयी तरीके से चुप्पी साध रखी है।

इस घटना ने पवार परिवार में सत्ता को लेकर जारी संघर्ष को भी सामने ला दिया है। बताया जाता है कि शरद पवार अपनी बेटी सांसद सुप्रिया सुले को पार्टी का चेहरा बनाना चाहते हैं, जबकि अजित राजनीति में आने के बाद से ही उनका उत्तराधिकारी होने का दावा करते रहे हैं।

मीडिया रिपोर्टों में पवार के हवाले से बताया गया है कि अजित 25,000 करोड़ रुपए के स्टेट कोऑपरेटिव बैंक घोटाले में नाम आने से आहत हैं। पवार के अनुसार अजित ने न तो इस्तीफे से पहले और न उसके बाद उनसे बात की है। उन्होंने बताया कि मैंने जब उसके बेटे पार्थ से बात की तो उसने बताया कि ‘अजित ने परिवार के सदस्यों से कहा है कि राजनीति से संन्यास लेने का यह उनके लिए सही वक्त है।’

एनसीपी प्रमुख ने कहा, “मैंने कारण जानने के लिए उनके पुत्र और दूसरे लोगों से संपर्क किया और पता चला कि उन्होंने अपने परिवार को बताया कि वह चाचा (शरद पवार) का नाम मामले में आने से बहुत दुखी हैं। इसमें उनका (अजित पवार) नाम भी है। वह इससे बहुत परेशान हैं।”

अजित के बेटे पार्थ ने ट्वीट कर इसे भावुक और मुश्किल वक्त बताया है। उन्होंने पवार के दावे का भी खंडन किया है। उनके मुताबिक राजनीति छोड़ने का उनके पिता का कोई इरादा नहीं है। उन्होंने राजनीति में जाने को लेकर मुझे सावधान किया है।

एक एनसीपी नेता के मुताबिक जिस तरीके से पार्टी चलाई जा रही उससे अजित दुखी हैं। यही कारण हो कि की ने ईडी कार्यालय जाने के पवार के फैसले के वक़्त भी वे नहीं दिखे थे। एनसीपी के अन्य नेताओं ने भी कहा कि उन्हें अजित के फैसले को लेकर कोई जानकारी नहीं है। एक वरिष्ठ नेता ने कहा, “उनसे संपर्क नहीं हो पा रहा है। हमें इस्तीफे बारे में जानकारी नहीं है।”

पिछले विधानसभा और लोकसभा चुनावों में हार चुकी एनसीपी इस वक़्त अपना गढ़ बचाने के लिए जूझ रही है। शरद पवार के अलावा पार्टी के सभी संस्थापक निकल गए हैं। ऐसे में, अजित के जाने से नया संकट खड़ा हो गया है। अजित पवार महाराष्ट्र सरकार में गृह मंत्री रह चुके हैं। एनसीपी में दशकों से वह निर्णायक भूमिका में रहे हैं। वे अपने विवादित बयानों के लिए सुर्ख़ियों में रहे हैं।

अप्रैल 2013 में सूखाग्रस्त इलाक़ों पर टिप्पणी करते हुए अजित पवार ने कहा था, ‘यदि बाँध में पानी नहीं है, क्या हमें उसमें पेशाब करना चाहिए?‘ जब उन्होंने यह बयान दिया था, तब उनके चाचा शरद पवार देश के कृषि मंत्री थे। उन्होंने बिजली को लेकर भी विवादित बयान देते हुए कहा था कि बिजली जाने से ज्यादा बच्चे पैदा होते हैं।

क्या है महाराष्ट्र कोऑपरेटिव घोटाला?

मामला 25,000 करोड़ रुपए के लोन फ्रॉड से जुड़ा है। ईडी के अनुसार, यह लोन धोखाधड़ी का बहुत बड़ा मामला है और यह कार्रवाई बॉम्बे हाईकोर्ट के दिशानिर्देशों के अनुरूप की जा रही है। कई शुगर फैक्ट्रीज को आने-पौने दाम में बेच डाला गया था। कई कोऑपरेटिव शुगर फैक्ट्रीज में काम ठप्प होने लगा था और उन्हें काफ़ी कम दाम पर बेच कर ख़रीदने वालों को फ़ायदा पहुँचाया गया। इस मामले में अजित पवार और बैंक के 70 पूर्व अधिकारियों पर पहले ही मामला दर्ज हो चुका है।

भारतीय सेना ने J&K में जला डाले 400 स्कूल? THE HINDU की संपादकीय (घटिया व धूर्त) तो यही कहती है

‘द हिन्दू’ में 27 सितंबर 2019 के अंक में एक रिपोर्ट छपी है, जिसमें बताया गया है कि साल 1990 से 2005 के बीच जम्मू कश्मीर में 46 स्कूलों पर भारतीय सेना ने कब्जा कर लिया है और 400 स्कूलों को जला दिया गया। यहाँ पर द हिन्दू ने ये तो बताया कि 46 स्कूलों को भारतीय सेना ने अपने कब्जे (संरक्षण) में ले लिया, मगर ये नहीं बताया कि 400 स्कूलों को किसने जलाया? इसके जिम्मेदार कौन हैं? इस वामपंथी मीडिया हाउस ने बड़ी ही धूर्तता से 46 स्कूलों के कब्जे और 400 स्कूलों के जलने की बात को एक ही साथ इस तरह लिखा कि लोगों को लगे कि भारतीय सेना ने 46 स्कूलों को अपने संरक्षण में लेने के साथ ही 400 स्कूल भी जला दिए।

स्कूलों को जलाने वालों के बारे में बोलते हुए उनके शब्द कम पड़ जाते हैं या फिर कलम की स्याही सूख जाती है, ये तो वही बेहतर बता सकते हैं, मगर जिस तरह की धूर्तता से इसे छुपाया गया इससे साफ जाहिर हो रहा है कि वो उन प्रदर्शनकारियों या आतंकवादियों के खिलाफ बात नहीं कर सकते। भारतीय सेना के बारे में बड़े ही स्पष्ट और सीधे शब्दों में लिखा गया है, मगर प्रदर्शनकारियों के बारे में लिखते हुए शब्दविहीन हो गए या फिर यूँ कहें कि ये भी प्रोपेगेंडा फैलाने वाले गिरोह का हिस्सा बनकर अराजत तत्वों का तुष्टिकरण करना चाहते हैं।

यह पत्रकारिता नहीं, यह शब्दों का धंधा है The Hindu

अब बात करती हूँ प्रदेश में भारतीय सेना द्वारा संचालित किए जाने वाले 46 स्कूलों की स्थिति के बारे में। उस समय प्रदर्शनकारियों द्वारा 400 स्कूलों को जला दिए जाने से बच्चों और अभिभावकों के अंदर दहशत इस कदर हावी हो गई थी कि ना तो बच्चे स्कूल जाने को राजी थे और न ही अभिभावक उन्हें स्कूल भेजने के पक्ष में थे। उन्हें अपने बच्चों की जान की चिंता लगी रहती थी। मगर इस बीच भारतीय सेना ने घर-घर जाकर बच्चों और अभिभावकों को शिक्षा के प्रति प्रेरित किया और सुरक्षा का विश्वास दिलाया। सेना की ये कोशिश कामयाब हुई और आज हालात ये है कि इनके द्वारा संचालित किए जा रहे इन स्कूलों में 15000 के करीब छात्र हैं और तकरीबन 1000 टीचिंग और नन टीचिंग स्टाफ हैं। ये इन बच्चोंं के बेहतर और सुरक्षित भविष्य के लिए निरंतर मार्गदर्शन कर रहे हैं।

इनके सही मार्गदर्शन का ही नतीजा है कि सीबीएसई 2019 की 10वीं परीक्षा में 100 प्रतिशत बच्चों ने सफलता हासिल की। रजौरी के छात्र हिताम अयूब ने 94.2% अंकों के साथ सफलता प्राप्त की। इन स्कूलों ने लगातार आधुनिक शिक्षण सहायक उपकरण जैसे डिजिटल क्लासरूम, आधुनिक प्रयोगशाला, अच्छी तरह से स्टॉक की गई लाइब्रेरी और खेल संबंधी बुनियादी सुविधाओं के साथ-साथ जम्मू-कश्मीर के विकास में सकारात्मक योगदान देने का लगातार प्रयास किया है।

सेना के संरक्षण और मार्गदर्शन में राज्य की शिक्षा औऱ सुरक्षा व्यवस्था बेहतर होती जा रही है, लेकिन छद्म लिबरल मीडिया गिरोह इस सकारात्मक पहलू की रिपोर्टिंग करना पसंद नहीं करते। वो तो बस प्रोपेगेंडा को हवा देने के मौके ढूँढ़ते रहते हैं। कभी पक्षपातपूर्ण रिपोर्टिंग का चश्मा उतार कर देखें, तो शायद इन्हें भी सच नज़र आ जाए।


कार्टूनिस्ट के लिए मसाला जुटा खुद का मजाक उड़वा रहे इमरान खान: राजनाथ सिंह

अंतरराष्ट्रीय मंचों पर कश्मीर राग अलापने को लेकर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने पाकिस्तानी प्रधानमंत्री इमरान खान की तीखी आलोचना की है। उन्होंने कहा है कि इमरान खान दरवाजे-दरवाजे जाकर कार्टूनिस्टों को मसाला दे रहे हैं। उड़वाने का कोई भी मौका वे छोड़ नहीं रहे।

शनिवार (सितंबर 28, 2019) को मुंबई में माझगांव डॉक्स में भारत की दूसरी ‘स्कॉर्पीन-क्लास अटैक’ पनडुब्बी के शामिल होने के अवसर पर राजनाथ सिंह ने यह टिप्पणी की। उन्होंने संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) में पाक पीएम की ओर से दिए गए भाषण का जिक्र करते हुए उनकी खूब चुटकी ली। रक्षा मंत्री ने कहा कि इमरान अपना और अपने देश का मजाक उड़वाने का कोई भी मौका नहीं छोड़ रहे।

राजनाथ सिंह ने कहा, “जम्मू-कश्मीर में हमारे प्रगतिशील कदमों को वैश्विक समर्थन मिल रहा है, वहीं पाकिस्तानी प्रधानमंत्री दर-दर पर जाकर कार्टूनिस्टों के लिए कंटेट क्रिएट करने का काम कर रहे हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी की हालिया अमेरिकी यात्रा ने एक महाशक्ति के रूप में भारत के उद्भव को प्रदर्शित किया। हमने देखा कि कैसे अमेरिका के शीर्ष नेताओं ने लोगों से खचाखच भरे स्टेडियम में हमारे प्रधानमंत्री मोदी जी का स्वागत किया।”

आगे उन्होंने कहा, “पाकिस्तान को यह समझना चाहिए कि आज हमारी सरकार के मजबूत संकल्प और नौसेना के बेड़े में पनडुब्बी आईएनएस खंडेरी के शामिल होने के साथ हम उसे और भी बड़ा झटका देने में सक्षम हैं।”

रक्षा मंत्री ने कहा कि ये बेहद गर्व की बात है कि भारत उन चुनिंदा देशों में है जो अपनी पनडुब्बियों का निर्माण खुद कर सकता है। उन्होंने पाक पर निशाना साधते हुए कहा कि कुछ ऐसी ताकतें हैं, जिनकी हरकतें नापाक हैं। वे साजिश रच रहे हैं कि समंदर के रास्ते मुंबई के 26/11 जैसा एक और हमला भारत के तटीय क्षेत्र में कर सकें। लेकिन उनके मंसूबे किसी भी सूरत में पूरे नहीं होंगे।

J&K के सभी 22 जिले प्रतिबंध मुक्त, घाटी के 105 थाना क्षेत्रों में अब दिन के समय पाबंदी नहीं

कश्मीर के सभी 105 थाना क्षेत्रों में दिन के समय प्रतिबन्ध हटा दिया गया है। इसके साथ ही राज्य के सभी 22 जिले पाबन्दी मुक्त हो गए हैं और हालात सामान्य हैं। बता दें कि सुरक्षा-व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए जम्मू-कश्मीर में चौकसी बढ़ाई गई थी और एहतियातन कुछ प्रतिबन्ध लगाए गए थे। ताज़ा सूचना के अनुसार, जम्मू-कश्मीर के किसी भी थाना क्षेत्र में या किसी भी जिले में दिन के समय किसी भी प्रकार का प्रतिबन्ध नहीं रहेगा। इससे जनजीवन सामान्य होने में और मदद मिलेगी।

पकिस्तान दावा करता रहा है कि अनुच्छेद 370 के प्रावधानों को निरस्त किए जाने के बाद से ही जम्मू-कश्मीर में कर्फ्यू लगा हुआ है। ख़ुद पाक पीएम इमरान ख़ान अंतरराष्ट्रीय मंचों पर कह चुके हैं कि जम्मू कश्मीर में ‘कर्फ्यू हटते ही’ काफ़ी ख़ून-ख़राबा होगा। हालाँकि, जम्मू-कश्मीर में माहौल सामान्य बनाने के लिए सरकार हर संभव कोशिश कर रही है और कश्मीरी पुलिस अधिकारियों ने लोगों को अफवाह फैलाने वालों से सावधान रहने की सलाह दी है।

जम्मू-कश्मीर पर अफवाह फैलाने वालों में कई अन्तरराष्ट्रीय न्यूज़ पोर्टल्स भी शामिल हैं और कई बार उनके प्रोपगेंडा की पोल खुल चुकी है। अब दिन के समय प्रतिबंधों के हटते ही जम्मू-कश्मीर में आम जनजीवन पूरी तरह सामान्य हो जाएगा। अनुच्छेद 370 पर सरकार के निर्णय के बाद राज्य के कई नेताओं व अलगाववादियों को पुलिस ने या तो हिरासत में ले रखा है, या नज़रबंद रखा गया है।

कुरान पढ़ाने के नाम पर मदरसा में यौन शोषण, 300 छुड़ाए गए, जंजीर से बँधे थे

दीनी तालीम के नाम पर चलने वाले मदरसे कैसे यौन शोषण के अड्डे बन चुके हैं इसकी एक भयावह तस्वीर अफ्रीकी देश नाइजीरिया से आई है। यहॉं एक आवासीय इस्लामिक स्कूल से 300 बच्चों और पुरुषों को मुक्त कराया गया है। इनलोगों को जंजीरों से बॉंधकर रखा जाता था और हर तरीके से प्रताड़ना दी जाती थी।

प्रताड़ना का आलम यह था कि उन्हें कई दिनों तक भूखा रखा जाता था और उनका यौन शोषण किया जाता था। कडुना क्षेत्र के इस इस्लामिक स्कूल में छात्रों को कई सालों से बंधक बना कर रखा गया था। आरोपितों में मदरसे के मौलवी और अन्य कर्मचारी शामिल हैं। वे छात्रों का बलात्कार करते थे।

पुलिस ने गुरुवार (सितम्बर 26, 2019) को इस इस्लामिक स्कूल पर छापा मारा और पाया कि छात्रों को अमानवीय तरीके से जानवरों से भी बदतर स्थिति में रखा गया था। पुलिस ने बताया कि इन छात्रों को कुरान की शिक्षा देने के नाम पर यहाँ रखा गया था और इस्लामिक स्कूल उनके सुधार के लिए ऐसा करने का दावा करता था। इस कैम्पस को ‘हाउस ऑफ टॉर्चर’ भी कहा जा रहा है। यहाँ स्थित एक ‘टॉर्चर चैंबर’ में छात्रों को जंजीर से बाँध कर लटका दिया जाता था और फिर उनकी पिटाई की जाती थी।

यह इस्लामिक स्कूल पिछले एक दशक से चल रहा था। छात्रों के परिवार यहाँ अपने बच्चों को कुरान की शिक्षा देने और ड्रग्स वगैरह जैसी लत छुड़ाने के लिए लेकर आते थे। शिक्षक व स्कूल के अन्य कर्मचारी छात्रों से जबरन समलैंगिक सम्बन्ध स्थापित करते थे। नाइजीरिया की पुलिस ने इसे ‘ह्यूमन स्लेवरी’ का मामला करार दिया है। पीड़ितों में न सिर्फ़ बच्चे बल्कि कई व्यस्क छात्र भी शामिल हैं। कई छात्रों के शरीर पर पिटाई के निशान मिले। पुलिस ने इस मामले में इस्लामिक स्कूल के संचालक सहित 7 आरोपितों को गिरफ़्तार किया है।

पुलिस ने कहा कि 9 वर्ष या उससे कम उम्र के 100 छात्र जंजीर से बँधे मिले। मदरसे के अनुसार, वह उन्हें ‘जिम्मेदार नागरिक बनाने के लिए’ ऐसा कर रहा था। एक 42 वर्षीय व्यक्ति ने बताया कि वह यहाँ अप्लाइड मैथ्स पढ़ने के लिए आया था लेकिन उसे कई दिनों तक जंजीरों में बाँध कर रखा गया। पीड़ितों ने बताया कि उन्होंने कई छात्रों को प्रताड़ना के कारण दम तोड़ते हुए भी देखा है। नाइजीरिया के ग्रामीण इलाक़ों में इस्लामिक स्कूलों का ही वर्चस्व है, क्योंकि वहाँ सरकारी सुविधाओं का अभाव है।

सभी छात्रों को नाइजीरिया के प्रशासन ने एक कैम्प में रखा हुआ है और उनके माता-पिता को खोजने की कोशिश जारी है। यहाँ तक कि नाइजीरिया के कई इस्लामिक स्कूलों पर बच्चों से भीख मँगवाने के भी आरोप लगते रहे हैं। वहाँ की इस्लामिक स्कूलों पर बच्चों का यौन शोषण करने के आरोप पूर्व में भी लगते रहे हैं।