Homeदेश-समाज'गैर हिंदू गरबा, डांडिया में महिलाओं से करते हैं दुर्व्यवहार, प्रवेश रोकने के लिए...

‘गैर हिंदू गरबा, डांडिया में महिलाओं से करते हैं दुर्व्यवहार, प्रवेश रोकने के लिए आधार कार्ड करें अनिवार्य’

"गरबा और डांडिया के हरेक आयोजन स्थल के पास बजरंग दल के कार्यकर्ता मौजूद रहेंगे। इसका मकसद गैर हिंदुओं द्वारा कार्यक्रम में किसी भी तरह का उत्पात मचाए जाने पर तत्काल कार्रवाई सुनिश्चित करना है।"

गरबा और डांडिया के आयोजकों से बजरंग दल ने गैर हिंदुओं का प्रवेश रोकने के लिए पहल करने को कहा है। इसके लिए आयोजकों से प्रवेश के लिए आधार कार्ड को अनिवार्य करने की अपील की है। महिलाओं के साथ दुर्व्यवहार रोकने के लिए इसे जरूरी बताया गया है।

बजरंग दल के मीडिया कन्वेनर एस कैलाश ने कहा है कि कार्यक्रम स्थल पर गैर हिंदुओं का प्रवेश रोकने और गैर हिंदू बाउंसरों की तैनाती से बचने के लिए आयोजकों से यह अपील की गई है। उन्होंने कहा कि ऐसा देखा गया है कि दूसरे समुदाय के लोग भी डांडिया और गरबा में आते हैं। लेकिन, इसका कारण दूसरे के धार्मिक कार्यक्रमों के प्रति सद्भावना नहीं होती। असल में, समारोहों में प्रवेश करके वे महिला प्रतिभागियों के साथ दुर्व्यवहार करते हैं।

उन्होंने दावा किया कि इस तरह के युवा उन लोगों के साथ मारपीट भी करते हैं, जो कथित पीड़ितों के बचाव के लिए आते हैं। उनके अनुसार गैर हिंदुओं को समारोह स्थल में प्रवेश देने में वहॉं तैनात किए गए दूसरे समुदाय के बाउंसर अहम भूमिका निभाते हैं। साथ ही समारोह स्थल में कौन प्रवेश कर रहा है इसकी निगरानी की भी समुचित व्यवस्था नहीं होती।

उन्होंने कहा कि इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए गरबा और डांडिया के हरेक आयोजन स्थल के पास बजरंग दल के कार्यकर्ता मौजूद रहेंगे। इसका मकसद गैर हिंदुओं द्वारा कार्यक्रम में किसी भी तरह का उत्पात मचाए जाने पर तत्काल कार्रवाई सुनिश्चित करना है।

Join OpIndia's official WhatsApp channel

  सहयोग करें  

'द वायर' जैसे राष्ट्रवादी विचारधारा के विरोधी वेबसाइट्स को कभी पैसों की कमी नहीं होती। देश-विदेश से क्रांति के नाम पर ख़ूब फ़ंडिग मिलती है इन्हें। इनसे लड़ने के लिए हमारे हाथ मज़बूत करें। जितना बन सके, सहयोग करें

ऑपइंडिया स्टाफ़
ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

संबंधित ख़बरें

ख़ास ख़बरें

पार्टी में बड़ी जिम्मेदारी, केजरीवाल-मान-सिसोदिया के साथ तस्वीरें: कौन है AAP नेता अशोक ओझा, जो अपनी ही पार्टी के नेताओं को IB के नाम...

अशोक ओझा केवल शहर स्तर का पदाधिकारी नहीं था, बल्कि पार्टी के बड़े नेताओं के साथ सीधा संपर्क रखने वाला और संगठन में पहचान रखने वाला चेहरा था।

जनगणना में मातृभाषा का एक जवाब तय करता है देश का बजट, शिक्षा नीति और राजनीतिक प्रतिनिधित्व: जानिए उर्दू-अरबी से लेकर 19000 भाषाई पहचान...

लोकतंत्र में संख्या बल ही किसी भी भाषाई समूह की माँगों को मजबूती देता है। बहुभाषी भारत में यह जनगणना तय करती है कि आने वाले समय में सरकारी संसाधन और प्रशासनिक विकास किस दिशा में आगे बढ़ेंगे।
- विज्ञापन -