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लव जिहाद: 3 बच्चों का बाप इमरान बना कबीर शर्मा, ब्राह्मण लड़की से शादी कर दहेज़ में लिया ₹11 लाख

ब्राह्मण लड़की से शादी करने के लिए खुद को ब्राह्मण बताने वाले मुस्लिम युवक को कल ( जून 5, 2019) सीकर पुलिस ने लड़की के साथ मुम्बई से गिरफ्तार कर लिया है। युवक की पहचान इमरान भाटी के रूप में हुई है और लड़की का नाम विजय लक्ष्मी है।

खबरों के मुताबिक युवक ने लड़की का हाथ माँगते वक्त अपनी पहचान कबीर शर्मा बताई थी। 25 मई को अचानक दोनों के गायब हो जाने पर लड़की के पिता ने इस मामले को पुलिस में दर्ज करवाया। इस मामले को IPC धारा 277/19 के तहत दर्ज किया गया। मामला दर्ज होते ही एक टीम बनाई गई, जो लड़के-लड़की को ढूँढने में जुट गई। मंगलवार को नालासोपारा से इस दंपत्ति को गिरफ्तार किया गया।

खबरों के अनुसार, पिछले महीने इमरान भाटी ने न केवल ब्राह्मण लड़की से शादी करने के लिए उसके पिता को अपनी गलत पहचान बताई थी बल्कि उनसे काफी दहेज भी लिया था। लड़की के पिता ने बताया है कि उन्होंने इमरान को 11 लाख कैश और 5 लाख के जेवर दिए थे।

इमरान ने विजय लक्ष्मी से शादी के लिए खुद का नाम जहाँ कबीर बताया था वहीं शादी की रस्मों में आने के लिए उसने नकली रिश्तेदार भी खड़े कर दिए थे। दोनों की शादी 13 मई को सम्पन्न हुई थी। इसके बाद विजय लक्ष्मी को दहेज के लिए दोबारा उसके घर भेजा। रुपए मिलने के बाद दोनों फरार हो गए। जब लड़कीं के पिता दोनों को ढूँढने जयपुर निकले तो उन्हें इमरान के बारे में पता चला। बता दें इमरान पहले से शादीशुदा व्यक्ति है और उसके 3 बच्चे भी हैं।

‘फ्री मेट्रो राइड’ योजना पर मोदी के मंत्री ने लगाई केजरीवाल की क्लास

आवास एवं शहरी मामलों के राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) हरदीप सिंह पुरी ने केजरीवाल द्वारा दिल्ली मेट्रो में महिलाओं को मुफ्त यात्रा की सुविधा देने की घोषणा के बारे में कहा है कि उनके मंत्रालय के संबद्ध अधिकारियों को अभी ऐसा कोई प्रस्ताव प्राप्त नहीं हुआ है। पुरी ने यह भी कहा कि केजरीवाल का आश्वासन महज एक जुमला है और कुछ नहीं, दिल्ली सरकार पहले से कर्ज में है ऐसे में वह महिलाओं को मेट्रो में मुफ्त यात्रा कैसे करवाएँगे पता नहीं।

पुरी का आरोप है कि दिल्ली के मुख्यमंत्री केजरीवाल किसी भी योजना का मूल मसौदा बनाने से पहले ही उसकी घोषणा करने में यकीन करते हैं। पुरी ने गुरुवार को एक संवाददाता सम्मेलन में केजरीवाल की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए कहा, “कोई योजना ऐसे लागू नहीं होती है कि पहले घोषणा कर दो और फिर उसका प्रस्ताव तैयार किया जाए।”

पुरी ने कहा कि केजरीवाल पहले भी प्रक्रिया का पालन किए बिना ही लोकलुभावनी योजनाओं की घोषणा करते रहे हैं। गौरतलब है कि केजरीवाल की कई बार दिल्ली के लेफ्टिनेंट गवर्नर से ठन चुकी है जिसके बाद वे आरोप लगाते रहे हैं कि केंद्र सरकार उन्हें काम नहीं करने दे रही है।  

पुरी ने कहा कि अनधिकृत कालोनियों को नियमित करने के बारे में भी केजरीवाल के गलत दावों का खुलासा पहले भी हो चुका है। पुरी के अनुसार मेट्रो में महिलाओं को मुफ्त यात्रा की सुविधा देने की घोषणा के पीछे की सच्चाई का भी अगले दो तीन दिन में वह खुलासा करेंगे। पुरी ने कहा कि बस में किसी को भी मुफ्त यात्रा की सुविधा देने से पहले पर्याप्त संख्या में बसों का होना जरूरी है। उन्होंने कहा कि केजरीवाल को बताना चाहिए कि दिल्ली में डीटीसी को 11 हजार बसों को खरीदने की मंजूरी के बावजूद अब तक कितनी बसें खरीदी गई।

मेट्रो में मुफ्त सुविधा के बारे में उन्होंने कहा, “मैंने संसद में पहले ही कहा था कि हम छात्रों और वरिष्ठ नागरिकों को मेट्रो किराए में रियायत देना चाहते हैं और इसके लिये मेट्रो प्रबंधन को तकनीकी तैयारियाँ करने को कहा गया था। जिसपर मेट्रो प्रबंधन काम कर रहा है और यदि जरूरतमंद महिलाओं को कोई सुविधा मिलती है तो मुझे ख़ुशी होगी लेकिन दिल्ली सरकार के 50 हज़ार करोड़ रुपए के कुल बजट में केजरीवाल स्वच्छ्ता अभियान और आयुष्मान भारत योजनाओं को दिल्ली में लागू नहीं कर पा रहे हैं और मेट्रो में मुफ्त यात्रा की स्कीम लाकर दो हजार करोड़ की सब्सिडी देना चाहते हैं। यह विचारणीय प्रश्न है।”

कॉन्ग्रेस में सबसे बड़ी ‘टूट’: 18 में से 12 विधायक TRS में होंगे शामिल, विधानसभा अध्यक्ष को अर्जी

लोकसभा चुनाव में भारी हार के बाद कॉन्ग्रेस की मुश्किलें थमने का नाम नहीं ले रहीं। पंजाब के मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह और नवजोत सिंह सिद्धू के बीच तकरार लगातार बढ़ती जा रही है। इस दौरान कॉन्ग्रेस को एक और झटका लगने की ख़बर सामने आ रही है। 12 विधायकों ने सत्तारूढ तेलंगाना राष्ट्र समिति (TRS) में शामिल होने की तैयारी कर रखी है। पिछले कुछ महीनों में कॉन्ग्रेस के कई विधायक और सासंद दूसरी पार्टियों में चले गए हैं लेकिन एक साथ 12 की संख्या इन महीनों में अब तक की सबसे बड़ी टूट है।

ख़बर के अनुसार, कॉन्ग्रेस के 12 विधायक गुरूवार को विधानसभा अध्यक्ष पी श्रीनिवास रेड्डी से मिले और TRS के साथ कॉन्ग्रेस विधायक दल के विलय को लेकर उन्हें प्रतिवेदन दिया। अधिकारियों के अनुसार, 12 विधायक कॉन्ग्रेस विधायक दल की संख्या का दो तिहाई है यानी कि उन पर दल-बदल विरोधी क़ानून प्रावधान लागू नहीं होगा।

राज्य की 119 सदस्यीय विधानसभा में कॉन्ग्रेस विधायकों की संख्या उस समय 18 रह गई थी जब पार्टी की तेलंगाना इकाई के प्रमुख उत्तम कुमार रेड्डी ने नलगोंडा से लोकसभा में चुने जाने के बाद विधानसभा की सदस्यता से बुधवार को इस्तीफ़ा दे दिया था।

तंदूर क्षेत्र से कॉन्ग्रेस विधायक रोहित रेड्डी ने नाटकीय घटनाक्रम के तहत मुख्यमंत्री के चंद्रशेखर राव के बेटे और TRS के कार्यवाहक अध्यक्ष केटी रामा राव से मुलाक़ात की और सत्तारूढ़ गठबंधन के प्रति अपनी वफ़ादारी का संकल्प लिया। कॉन्ग्रेस के क़रीब 11 विधायकों ने मार्च में घोषणा की थी कि वो TRS में शामिल हो जाएँगे। इसके अलावा कॉन्ग्रेस के वरिष्ठ विधायक जी वेंकट रमन रेड्डी ने बताया कि 12 विधायकों ने राज्य के विकास के लिए मुख्यमंत्री के साथ मिलकर काम करने का फ़ैसला किया है। रेड्डी ने बताया कि उन्होंने विधानसभा अध्यक्ष को एक प्रतिवेदन देकर TRS में विलय करने का अनुरोध किया है।

विधायक जी वेंकट रमन रेड्डी ने कहा, “कांग्रेस विधायक दल की हमारी एक विशेष बैठक हुई। इसके 12 सदस्यों ने मुख्यमंत्री केसीआर के नेतृत्व को समर्थन दिया और वे उनके साथ काम करना चाहते हैं। हमने अध्यक्ष को प्रतिवेदन दिया और उनसे TRS के साथ हमारे विलय का अनुरोध किया।” अगर अध्यक्ष महोदय इन 12 विधायकों के अनुरोध को स्वीकार कर लें तो कॉन्ग्रेस विपक्षी दल का दर्जा खो सकती है क्योंकि उसकी संख्या केवल 6 रह जाएगी।  

वहीं, तेलंगाना कॉन्ग्रेस चीफ़ एन उत्तम कुमार रेड्डी ने कहा कि वे इस स्थिति से लोकतांत्रिक तरीके से लड़ेंगे। उन्होंने ANI से कहा, “कॉन्ग्रेस इससे लोकतांत्रिक तरीके से लड़ेगी। हम स्पीकर से मिलने की कोशिश सुबह से कर रहे हैं, लेकिन वो गुमशुदा हैं। आप लोग उन्हें ढूँढने में हमारी मदद कीजिए।”

विधानसभा में हैदराबाद लोकसभा सीट से सांसद असदुद्दीन ओवैसी के नेतृत्व वाली AIMIM के 7 सदस्य हैं जबकि भाजपा के केवल एक। विधानसभा के लिए पिछले साल दिसंबर में हुए चुनाव में TRS ने 88 सीटें जीती थीं।


उज्ज्वला योजना के कारण श्वाँस रोगों में 20% की कमी, LPG से आ रहा बड़ा बदलाव: Research

जैसा कि सर्वविदित है, उज्ज्वला गैस योजना के आने के बाद से महिलाओं को मिट्टी के चूल्हे पर खाना बनाने से मुक्ति मिली और घर-घर में रसोई गैस पहुँचा। इससे महिलाओं का कामकाज आसान होने के सिवा और भी कई बड़े फायदे हुए हैं, जिन पर लोगों का ध्यान नहीं गया। कई विशेषज्ञों ने विधानसभा व लोकसभा चुनावों में उत्तर प्रदेश में भाजपा की बड़ी जीत का श्रेय भी उज्ज्वला योजना को ही दिया। अब उज्ज्वला के एक ऐसे फायदे के बारे में पता चला है, जो एक रिसर्च के बाद सामने आया है। इसनें स्वास्थ्य में भी योगदान दिया है। जहाँ-जहाँ एलपीजी का प्रयोग होता है, वहाँ श्वाँस रोगियों की संख्या में 20% कमी पाई गई।

एलपीजी गैस का प्रयोग बढ़ने के कारण 2.05 लाख मरीजों की रोग विवरण रिपोर्ट पर ‘इंडियन चेस्ट सोसाइटी (ICS)’ और ‘चेस्ट रिसर्च फाउंडेशन (CRF)’ ने 2 साल की पड़ताल के बाद यह पाया है कि जिस रसोई में एलपीजी पहुँची है, वहाँ श्वाँस रोग और अन्य बीमारियाँ 20% तक घटी हैं। वर्ष 2016 में 880 शहर व कस्बों में 13,500 डॉक्टरों ने ओपीडी में आए 2.05 लाख रोगियों के मर्ज के आधार पर वर्गीकरण किया था। उसी वर्ष मई में एलपीजी योजना का भी शुभारम्भ हुआ। इसके बाद जहाँ-जहाँ एलपीजी पहुँची, वहाँ बड़ा बदलाव देखने को मिला।

इसके बाद सभी रोगियों का उनके विवरणों के आधार पर क्षेत्रवार विश्लेषण किया गया। क्षेत्रों को इस प्रकार बाँटा गया- एक जहाँ एलपीजी पहुँची थी, और दूसरी जहाँ एलपीजी नहीं पहुँची थी। इसके अलावा एलपीजी के प्रयोग के आधार पर भी विश्लेषण किया गया। इससे पता चला कि जहाँ एलपीजी का प्रयोग कम है, वहाँ श्वाँस रोग से पीड़ित मरीजों की संख्या ढाई गुना ज्यादा निकली। जहाँ एलपीजी नहीं है, वहाँ जलावन के लिए लकड़ी वगैरह का इस्तेमाल किया जाता है, जिससे 18 वर्ष से कम उम्र के बच्चे, ख़ासकर 5 वर्ष से कम उम्र के, हानिकारक गैसों की चपेट में पाए गए।

हानिकारण गैसों की चपेट में आने के कारण इन बच्चों की फेंफड़े व श्वाँस की नली कमज़ोर पाई गई। कुल रोगियों में से 36,476 ऐसे थे, जिनकी उम्र 18 वर्ष से कम थी। अर्थात, ये सभी किशोर एवं बच्चे थे। जहाँ कुकिंग गैस का प्रयोग होता है, वहाँ नए श्वाँस रोगी नहीं मिले। ऐसी जगहों पर पुराने रोगियों में भी सुधार पाया गया। रिसर्च में एक और भयावह बात मिली। डॉक्टरों ने बताया कि जहाँ एलपीजी गैस का प्रयोग नहीं होता है, वहाँ बच्चों के फेंफड़े काले होते हुए पाए गए। इसका कारण यह भी है कि महिलाएँ जब खाना बनती हैं तो बच्चे भी आसपास ही रहते हैं।

जहाँ एलपीजी का प्रयोग नहीं होता है, वहाँ कौन सी बीमारियाँ कितनी संख्या में पाई गईं:

बीमारीपीड़ितों की संख्याप्रतिशत
श्वाँस सम्बन्धी10375250.6
बुखार7278535.5
पाचन तंत्र सम्बन्धी5132425
संक्रामक लक्षण2560912.5
त्वचा सम्बन्धी185069
एंडोक्राइन डिसआर्डर 13580
6.6

(ध्यान दें: बीमार लोगों का प्रतिशत जोड़ने पर 100 के पार जा रहा है क्योंकि एक व्यक्ति को एक से ज्यादा बीमारी भी हो सकती है।)

अखिलेश-मायावती के कार्यकाल में हुआ किसानों के नाम पर करोड़ों का घोटाला, फर्जी बिल से हुआ खुलासा

देश में किसानों की हालत किसी से छिपी नहीं है। एक समय था जब किसानों को अन्नदाता कहा जाता था, लेकिन अब स्थिति इतनी बद्तर हो गई है कि किसान को खेती करने के लिए कर्ज लेना पड़ता है और अगर वह कर्ज समय से नहीं चुका पाता तो आत्महत्या को अंतिम रास्ता मान लेता है। ऐसे में सरकार किसानों की स्थिति को सुधारने के लिए प्रयासरत है, लेकिन इसी बीच उत्तर प्रदेश में किसानों के साथ हुई धोखा-धड़ी और करोड़ों रुपए के हुए घोटाले का मामला सामने आया है।

मामला उत्तर प्रदेश के कानपुर का है जहाँ महज कागज पर हुई लिखा-पढ़ी के मुताबिक कई क्विंटल बीज खरीदकर किसानों को मुहैया कराया गया है, जबकि हकीकत में ऐसा कुछ हुआ ही नहीं है। इस घोटाले का खुलासा एक फर्जी बिल से हुआ है। जिसमें किसानों से हुई धोखा-धड़ी की बात सामने आई।

द वीकेंड लीडर की खबर में आईएएनएस की रिपोर्ट का हवाला देकर बताया गया कि यह घोटाला मायावती सरकार के कार्यकाल (2007 से 2012) के दौरान शुरू हुआ और अखिलेश के कार्यकाल (2012-2017) तक जारी रहा। खबरों के मुताबिक अब तक 16.56 करोड़ रुपए की फर्जी रसीदों का पता चला है, जिसे पूरे घोटाले का अंश मात्र माना जा रहा है।

योगी सरकार ने धन के दुरुपयोग करने पर आर्थिक अपराध शाखा को पता लगाने का निर्देश दिया है कि पता लगाया जाए कि ये बीज घोटाला सिर्फ़ कानपुर में हुआ है या फिर यूपी के अन्य जिलों में ऐसे घोटाले हुए।

न्यूज 18 की खबर के मुताबिक कृषि विभाग के वरिष्ठ अधिकारी उमाशंकर पाठक ने आईएएनएस से हुई बातचीत में कहा कि कानपुर पुलिस ने उत्तर बीज एवं विकास निगम की जाँच के आधार पर एफआईआर दर्ज की है। उन्होंने यह भी बताया कि इस घोटाले के बारे में उन्हें तब मालूम चला था जब बीज निगम ने भुगतान के लिए अपना बिल कृषि विभाग के पास भेजा था। इस दौरान 99 लाख का फर्जी बिल पाया गया, जिसके बाद ही घोटाले की विभागीय जाँच शुरू हुई।

राजस्थान कॉन्ग्रेस में गहराई दरार: विधायक की माँग, गहलोत हटाओ, पायलट लाओ

राजस्थान कॉन्ग्रेस में लोकसभा की करारी हार के बाद से शुरू हुआ सर-फुटौव्वल रुकने का नाम ही नहीं ले रहा है। पहले मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने अपने बेटे वैभव की जोधपुर सीट से हार के लिए उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट को जिम्मेदार ठहराते हुए जिम्मेदारी लेने को कहा। उसके बाद अब कॉन्ग्रेस के ही विधायक पृथ्वीराज मीणा ने अशोक गहलोत को हटा कर पायलट को प्रदेश का नेतृत्व सौंपे जाने की माँग की है। उन्होंने गहलोत को पार्टी की प्रदेश में बुरी हार की भी जिम्मेदारी लेने की सलाह दी है।

‘बेटे को लेकर आसक्त गहलोत’, पायलट हार की समीक्षा में जुटे

पृथ्वीराज मीणा का आरोप है कि मुख्यमंत्री अशोक गहलोत अपने बेटे को लेकर आसक्त है। गहलोत के सचिन पायलट के वैभव की हार की जिम्मेदारी लेने को लेकर उन्होंने कहा, “जब पार्टी सत्ता में होती है तो हार की जिम्मेदारी मुख्यमंत्री की होती है। अध्यक्ष की जिम्मेदारी तब बनती है जब पार्टी विपक्ष में हो।” उन्होंने यह भी जोड़ा, “मुख्यमंत्री का बयान पूरी तरह गलत और पार्टी के हितों के खिलाफ है। जोधपुर की हार की जिम्मेदारी उन्हें खुद लेनी चाहिए।”

इस बीच सचिन पायलट ने घोषणा की है कि पार्टी की लोकसभा में हार की समीक्षा के लिए उन्होंने बूथवार रिपोर्टें माँगी हैं। उसी आधार पर इस हार के कारणों और कारकों का निर्धारण होगा। मीडिया से बात करते हुए उन्होंने कहा कि हालाँकि, राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गाँधी ने हार की पूरी जिम्मेदारी अपने सिर ले ली है, लेकिन पार्टी इतने भर से नहीं रुकेगी। जमीनी हकीकत का जायजा लेने के बाद आगामी विधानसभाओं के मतदान की तैयारी शुरू कर दी जाएगी। गौरतलब है कि राजस्थान में कॉन्ग्रेस के 25 उम्मीदवारों में से एक भी नहीं जीता

ED को मिले नए सुराग, रॉबर्ट वाड्रा की मनी लॉन्ड्रिंग जाँच में आया साइप्रस एंगल

कॉन्ग्रेस अध्यक्ष राहुल गाँधी के बहनोई और विवादास्पद जमीन कारोबारी रॉबर्ट वाड्रा की मनी लॉन्ड्रिंग मामले में जाँच कर रहे प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) को अब साइप्रस के रास्ते हुए उनके कुछ और गोपनीय लेन-देन के सबूत मिले हैं। इससे पहले निदेशालय ने दावा किया था कि दुबई में पंजीकृत शेल कंपनियों में पड़े नकदी के जखीरे की जानकारी उसके पास है। यह धन रक्षा दलाल संजय भंडारी को हस्तांतरित किया गया था, जिससे उसने ब्रिटेन में सम्पत्ति खरीदी। यह वही संजय भंडारी हैं, जिनके बारे में मार्च में ऑपइंडिया ने खुलासा किया था कि राहुल गाँधी राफेल घोटाले का विरोध इसलिए कर रहे हैं ताकि राफेल सौदा रद्द होकर कॉन्ट्रैक्ट यूरोफाइटर को मिल जाए, जिसमें भंडारी का आर्थिक हित जुड़ा है। वाड्रा से मनी लॉन्ड्रिंग रोधी कानून के अंतर्गत पहले ही दिल्ली और जोधपुर में 13 बार पूछताछ हो चुकी है, और उन पर मामले भी दर्ज हैं।

थम्पी को ईडी का फिर से बुलावा

इन सबूतों की रोशनी में ईडी ने वाड्रा के दुबई निवासी एनआरआई सहयोगी सीसी थम्पी को एक बार फिर अपने दिल्ली कार्यालय में जाँच के लिए बुलावा भेजा है। थम्पी स्काइलाइट हॉस्पिटैलिटी एफज़ेडई नामक कम्पनी दुबई में चलाते हैं जिसका नाम वाड्रा की कंपनी स्काइलाइट हॉस्पिटैलिटी प्राइवेट लिमिटेड से संदेहास्पद रूप से मिलता-जुलता है। वाड्रा की स्काइलाइट हॉस्पिटैलिटी पर बीकानेर और गुरुग्राम (तत्कालीन गुड़गाँव) में जमीनों पर अवैध कब्जा करने के मामले में जाँच चल रही है।

थम्पी ने बीमारी का हवाला दे समय माँगा, वाड्रा से बेनामी सम्पत्तियों को लेकर हुई पूछताछ

थम्पी ने बीमारी का हवाला देकर ईडी से पेश होने के लिए और समय की माँग की है। इससे पहले अपनी पिछली पेशी में थम्पी ने बताया था कि उनको वाड्रा से मिलवाने वाले और कोई नहीं, सोनिया गाँधी के निजी सहायक पीपी माधवन थे। ईडी का आरोप है कि थम्पी की स्काइलाइट हॉस्पिटैलिटी एफज़ेडई के असली मालिक वाड्रा हैं, जिन्होंने दुबई में एक ₹14 करोड़ का विला और लंदन में ₹26 करोड़ का एक फ़्लैट इस कम्पनी के ज़रिए खरीदा।

थम्पी ने जाँच के दौरान यह भी कबूल किया था कि वाड्रा अपने लंदन प्रवास के दौरान 12 ब्रैंस्टन स्क्वायर स्थित इस फ्लैट में ठहरे भी थे, जिससे वाड्रा ने इंकार किया है। इसके अलावा भी कुछ अन्य सम्पत्तियाँ रॉबर्ट वाड्रा द्वारा खरीदे जाने का प्रवर्तन निदेशालय को शक है। इनमें से कुछ मामलों में गत मंगलवार (4 जून) को वाड्रा से पूछताछ भी की गई थी

‘गुंडे’ काँवड़िए को पकड़ने को खँगाले 100 CCTV, पत्थरबाज नमाज़ियों पर अभी तक FIR भी नहीं

ईद के मौके पर पूर्वी दिल्ली के खुरैझी इलाके में तेज रफ़्तार कार द्वारा 17 नमाजियों को टक्कर मारने की झूठी खबर अंग्रेजी मीडिया ने फैलाई थी। इस मामले में दिल्ली पुलिस की DCP मेघा यादव ने नमाजियों को टक्कर मारने जैसे किसी भी दावे से इनकार किया था। ऑपइंडिया ने मेघा यादव से इस सम्बन्ध में बात की थी तो उन्होंने किसी भी न्यूज़ एजेंसी को ऐसी कोई भी सूचना देने की बात से भी इनकार किया था।

डीसीपी यादव के अनुसार कार चुराकर तेज़ रफ्तार से चलाने वाले व्यक्ति का नाम नहीं पता चल पाया है। हालाँकि अन्य स्रोतों से प्राप्त रिपोर्ट के अनुसार कार चालक का नाम शाहरुख़ बताया जा रहा है। ऑपइंडिया ने मेघा यादव से आज सुबह 11:20 पर फिर बात की जिससे पता चला कि अभी तक कार चलाने वाले व्यक्ति के ऊपर एफआईआर तक दर्ज नहीं की गई है। हमें यह बताया गया था कि पुलिस मुख्य रूप से कार चालक की खोज कर रही थी।

लेकिन आश्चर्य इस बात का है कि जिस व्यक्ति के कारण इतना हंगामा हुआ और समुदाय विशेष के लोगों द्वारा सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुँचाया गया उसके खिलाफ प्राथमिकी भी दर्ज नहीं की गई है। गौरतलब है कि डीसीपी यादव ने ऑपइंडिया से हुई बातचीत में कहा था कि जहाँ पर यह घटना घटी अक्सर वहाँ पर भीड़ रहती है लेकिन जिस समय कार वहाँ से गुज़री, उस समय वहाँ कोई नमाज़ अदा नहीं हो रही थी।

बल्कि नमाज़ बहुत पहले ही ख़त्म हो चुकी थी और लोग वहाँ से जा चुके थे। फिर भी समुदाय विशेष के लोगों ने सार्वजनिक वाहन पर तोड़फोड़ की और हंगामा किया। कमाल की बात यह है कि जहाँ ज़्यादातर इंग्लिश मीडिया ने 17 नमाजियों के घायल होने की झूठी ख़बर चलाई वहीं ऑपइंडिया समेत कुछ हिंदी मीडिया ने ऐसा लिखा कि वहाँ कोई घायल नहीं हुआ और इस खबर की सच्चाई बताने की कोशिश की।

इस घटना से लगभग एक साल पीछे जाने पर एक और घटना याद आती है जब अगस्त 2018 में दिल्ली के ही मोतीनगर इलाके में एक कांवड़िये द्वारा किए गए उत्पात पर उसे तीन दिनों के भीतर ही गिरफ्तार कर लिया गया था। पश्चिमी दिल्ली के मोती नगर इलाके में कांवड़ियों की भीड़ द्वारा एक गाड़ी की तोड़फोड़ करने के मामले में दिल्ली पुलिस ने दो आरोपितों को पकड़ा था। मुख्य आरोपित कांवड़िए का नाम राहुल उर्फ़ बिल्ला था जिसे उत्तम नगर से गिरफ्तार किया था।

दूसरे आरोपित का नाम योगेश बताया गया था जिसे जेजे कॉलोनी से पुलिस ने पकड़ा था। गौरतलब है कि इस मामले में पुलिस ने इतनी तेज़ी से काम किया था कि एक-दो नहीं बल्कि 100 सीसीटीवी फुटेज खंगालकर देखे गए थे। लेकिन पूर्वी दिल्ली के खुरैझी इलाके में ईद के दिन सार्वजनिक संपत्ति की हुई क्षति के मामले में पुलिस अभी तक न तो सीसीटीवी फुटेज खोज पाई है, न तेज़ी से कार चलाने वाले व्यक्ति पर एफआईआर ही दर्ज कर सकी है और न उन लोगों के खिलाफ कोई एक्शन लिया गया है जिन्होंने डीटीसी बस समेत चार वाहनों को क्षतिग्रस्त किया। दिल्ली पुलिस का यह शर्मनाक कारनामा है कि जिसे पकड़ लिया गया है उसके खिलाफ भी एफआईआर तक दर्ज नहीं हुई है।

‘यदि ख़ून बहता है, तो हम भी इसका जवाब देंगे’ बदला लेने पर उतारू ममता के मंत्री

पश्चिम बंगाल में लोकसभा चुनाव के बाद से ही कार्यकर्ताओं की हत्याओं का दौर जारी है। कूचबिहार और उत्तरी दमदम में दो TMC कार्यकर्ताओं की हत्या की ख़बर सामने आई है। इसके चलते पूरे इलाक़े में तनाव का माहौल बना हुआ है। बीजेपी और TMC के बीच आपसी झड़पे होने की भी ख़बर है। दरअसल, मंगलवार (4 जून) की रात को उत्तरी दमदम नगरपालिका के वार्ड-6 के अध्यक्ष और तृणमूल कॉन्ग्रेस के नेता निर्मल कुंडू की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। घटना के बाद फौरी तौर पर कुंडू को निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहाँ डाक्टर्स ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। इस बीच बंगाल के खाद्य मंत्री ज्योतिप्रिया मल्लिक ने TMC नेता की हत्या पर बीजेपी के ख़िलाफ़ मोर्चा खोला है।

ख़बर के अनुसार, ज्योतिप्रिया मल्लिक ने कहा, “मेरे पास कहने के लिए कुछ भी नहीं है। सुपारी किलर के साथ आरोपी देखा गया है। आरोपी ने बीजेपी के साथ मिलकर चुनाव प्रचार किया है। उसने सुपारी किलर को मदद की है। तब सुपारी किलर ने TMC कार्यकर्ता की हत्या कर दी। हम जानना चाहते हैं कि मास्टरमाइंड कौन है? बैरक या बीजापुर से है? जिसने हमारे नेता को मारने का आदेश दिया। हम मास्टरमाइंड को भी नहीं छोड़ेंगे। पुलिस ने जाँच शुरू कर दी है।”

इसके अलावा मल्लिक ने कहा कि निर्मल कुंडू लोकप्रिय नेता थे, उन्होंने चुनाव में शानदार प्रदर्शन किया था जिसकी बदौलत उनके बूथ से TMC को 600 वोटों की बढ़त मिली थी। मल्लिक ने कहा कि उन्होंने राजनीतिक लड़ाई शुरू कर दी है, अगर लड़ाई होगी तो वो इसे स्वीकार करने के लिए तैयार हैं। यदि ख़ून बहता है, तो वो भी इसका जवाब देंगे। बीजेपी को खुली चुनौती देते हुए उन्होंने यह भी कहा कि बीजेपी ने जिस गंदे खेल की शुरूआत की है उसका अंत अगले 10 दिनों में सभी देखेंगे।

हत्या की घटना के बाद पुलिस ने सुमन कुंडू और सुजय दास को कथित तौर पर गोली मारने के आरोप में गिरफ्तार कर लिया है। दोनों को बैरकपुर उप-मंडल अदालत में बुधवार (5 जून) को पेश किया गया। दोनों के पास से कुछ हथियार और कारतूस भी बरामद किए गए। पुलिस ने इस बात का खुलासा भी किया कि दोनों बीजेपी कार्यकर्ता हैं। बुधवार को कूचबिहार के दिनहाटा में तृणमूल कार्यकर्ता अजीजुर रहमान की लोगों ने पीट-पीटकर हत्या कर दी थी। हत्या का आरोप बीजेपी पर लगा था।

एयर ट्रैफिक कंट्रोल पर थीं संध्या और उनके पायलट पति उड़ा रहे थे AN-32: गायब विमान की मार्मिक कहानी

भारतीय वायु सेना के लापता विमान AN-32 में सवार जवानों की कोई जानकारी न मिल पाने की वजह से उनके परिजनों के बीच तनाव का माहौल था। इन्हीं में एक नाम फ़्लाइट लेफ़्टिनेंट आशीष तंवर का था, जिनकी पत्नी संध्या तंवर उस वक़्त असम के जोरहाट में IAF एयर ट्रैफिक कंट्रोल में ड्यूटी पर तैनात थीं। बता दें कि चीन से लगी सीमा के पास मेंचुका एडवांस्ड लैंडिंग ग्राउंड के लिए इस विमान ने सोमवार (3 जून) को 12.25 बजे उड़ान भरी थी और 33 मिनट बाद ही विमान से सम्पर्क टूट गया था। यह सब पायलट की पत्नी संध्या की आँखों के सामने था, जो चाहकर भी कुछ करने की स्थिति में नहीं थीं। एक पत्नी के लिए यह मंज़र कितना पीड़ादायक रहा होगा, इसका तो केवल अंदाज़ा भर ही लगाया जा सकता है।

उत्तर प्रदेश के मथुरा की रहने वाली संध्या ने पिछले साल ही जोरहाट में ड्यूटी ज्वॉइन की थी जहाँ आशीष भी अपनी ट्रेनिंग पूरी करने बाद पहुँचे थे। पारिवारिक सहमति से दोनों की शादी फरवरी 2018 में हुई, 2 साल भी नहीं हुए थे और संध्या को अपने जीवन में उस अँधकार का सामना करना पड़ा, जिसकी उन्होंने कभी कल्पना भी नहीं की थी। ऐसे हालात से गुज़रना और फिर उससे उबरना कितना साहसिक काम होगा उसका जीता-जागता प्रमाण हैं फ्लाइट लेफ्टिनेंट आशीष की पत्नी। आँखों के सामने पति को खो देने के एहसास ने दिल और दिमाग पर जो गहरा असर छोड़ा होगा वो संध्या के लिए किसी सदमे के कम तो बिल्कुल नहीं होगा।

फ्लाइट लेफ्टिनेंट आशीष के चाचा उदयवीर सिंह ने द इंडियन एक्सप्रेस को बताया कि उनकी पत्नी संध्या ने परिवार को इस बात की जानकारी दोपहर 1 बजे दी कि AN-32 विमान से सम्पर्क नहीं हो पा रहा है।

आशीष के चाचा ने बताया कि पहले तो उन्हें यह लग रहा था कि विमान चीनी सीमा पार चला गया हो और आपातकालीन लेंडिंग करने में क़ामयाब रहा हो, लेकिन जैसे-जैसे सर्च अभियान में कुछ हाथ नहीं लगा, उससे उनकी चिंता और बढ़ती गई। वहीं, आशीष के पिता का रो-रोकर बुरा हाल था, बावजूद इसके वो अपने बेटे का हाल जानने के लिए वो असम भी गए, जहाँ उन्होंने अधिकारियों से बात करके इस संबंध में अधिक जानकारी जुटाने की कोशिश की। आशीष की माँ की निगाहें बेटे की घर वापसी की आस लगाए बैठी थीं, जो अब कुछ बोलने की स्थिति में नहीं। एक माँ का इस क़दर चुप हो जाना उनके अपार दु:ख को प्रकट करने के लिए काफ़ी है।

आशीष के परिवार के अधिकांश सदस्य सेना में कार्यरत रहते हुए देश सेवा कर रहे हैं। आशीष हमेशा से देश सेवा में जाने का सपना देखते थे। उनकी पत्नी संध्या वायुसेना में रडार ऑपरेटर के पद पर कार्यरत हैं। आशीष की बहन अंजुला तंवर भी वायुसेना में स्क्वाड्रन लीडर हैं। उनके पिता राधेलाल तथा ताऊ उदयवीर सेना से सूबेदार मेजर के पद से सेवानिवृत हैं। चाचा जयनारायण व कृपाल सिंह भी भारतीय सेना में सेवा दे रहे हैं। उनके ताऊ ने बताया कि आशीष के लापता होने के बाद से पूरा परिवार चिंता में है।

आशीष के परिजनों को हमेशा उन पर गर्व रहा, आज वो उनकी बातों को याद करते नहीं थकते। होश संभालते ही आशीष के मन में ‘राष्ट्र की सेवा का भाव’ जागृत हो गया था, इसके लिए उन्होंने भारतीय वायु सेना का रुख़ किया।

आशीष को याद करते हुए उनके चाचा शिव नारायण ने बताया कि एक बार आशीष से पूछा गया कि वो बड़ा होकर क्या बनेगा तो उसने जवाब दिया था कि, ‘फ़ौजी का बेटा फ़ौजी बनता है’। आशीष के इस जवाब में उनका वो सपना साफ़ नज़र आता था जिसे उन्होंने अपनी युवा अवस्था में पूरा कर दिखाया।