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संख्याबल में खेलता लोकतंत्र: जानिए किसको मिले वोटों की मार्जिन है सबसे कम और सबसे ज्यादा

लोकसभा चुनाव 2019 में बाजपा ने प्रचंड बहुमत के साथ वापसी की है। गुजरात में तो भाजपा का ऐसा जादू चला कि यहाँ के नवसारी लोकसभा क्षेत्र के प्रत्याशी सी आर पाटिल ने सबसे ज्यादा वोटों से जीतने का रिकॉर्ड बना दिया। सी आर पाटिल ने इस रेस में पीएम मोदी को भी पीछे छोड़ दिया है। प्रधानमंत्री को इस बार वाराणसी में 4 लाख 80 हजार वोटों से जीत मिली है, जबकि सीआर पाटिल ने कॉन्ग्रेस प्रत्याशी पटेल धर्मेंशभाई भीमभाई को 6,89,668 वोटों के अंतर से हराकर ऐतिहासिक जीत हासिल की। 2009 से लगातार जीतते आ रहे सी आर पाटिल को भाजपा ने तीसरी बार नवसारी सीट से उम्मीदवार बनाया था।

ख़ास बात यह भी है कि वोटों का ये अंतर 2019 में सबसे ज्यादा है, मगर भारत के चुनावी इतिहास में यह दूसरी सबसे बड़ी जीत है। पूर्व केंद्रीय मंत्री गोपीनाथ मुंडे की बेटी प्रीतम मुंडे ने अक्टूबर 2014 में उप चुनाव के दौरान महाराष्ट्र की बीड सीट पर 6.96 लाख वोटों से जीत हासिल की थी। पाटिल के जीत का आँकड़ा इससे थोड़ा सा ही कम है।

सबसे अधिक वोटों के अंतर से जीत हासिल करने वाले उम्मीदवारों में दूसरा नाम संजय भाटिया का है। संजय करनाल लोकसभा सीट से भाजपा के उम्मीदवार थे। इन्होंने 6,56,142 वोटों के अंतर से कॉन्ग्रेस उम्मीदवार कुलदीप शर्मा को हराया।

तीसरे नंबर पर रहे हरियाणा की फरीदाबाद लोकसभा सीट से भाजपा उम्मीदवार कृष्णपाल गुर्जर। इन्होंने 6,38,239 वोटों के अंतर से अपने प्रतिद्वंदी कॉन्ग्रेस उम्मीदवार अवतार सिंह को हराया। कृष्णपाल के बाद चौथे नंबर पर सबसे ज्यादा वोटों से जीतने का अंतर राजस्थान के भिलवाड़ा सीट से सुभाष चंद्र बहेरिया रहे। इन्होंने 6,12,000 वोटों के अंतर से कॉन्ग्रेस उम्मीदवार रामपाल शर्मा को मात दी। इस क्रम में पाँचवें नंबर पर भाजपा प्रत्याशी रंजनबेन भट्ट का नाम आता है। इन्होंने गुजरात के वडोदरा सीट से 5,89,177 वोटों के कॉन्ग्रेस के प्रशांत पटेल को हराया।

वहीं अगर बात करें, सबसे कम मार्जिन से हारने का, तो इसमें सबसे पहला नाम आता है भाजपा प्रत्याशी बी पी सरोज का। ये उत्तर प्रदेश के मछलीशहर से भाजपा उम्मीदवार थे। इन्होंने महज 181 वोट के अंतर से बसपा के त्रिभुवन राम को मात दी। सबसे कम वोटों के अंतर से जीत हासिल करने वाले उम्मीदवारों में दूसरा नाम लक्षद्वीप से नेशलिस्ट कॉन्ग्रेस पार्टी के उम्मीदवार पीपी मोहम्मद फैजल का है। इन्होंने मात्र 823 वोट के अंतर से कॉन्ग्रेस के हमीदुल्ला सईद को हरा दिया।

पश्चिम बंगाल की आरामबाग लोकसभा सीट से तृणमूल कॉन्ग्रेस की प्रत्याशी अपरुपा पोद्दार ने 1,142 वोट के अंतर से जीत हासिल की। वो इस चुनाव में सबसे कम वोटों के अंतर से जीतने वाली तीसरी उम्मीदवार हैं। इस सीट पर उन्हें भाजपा के तपन कुमार रॉय से कड़ी टक्कर मिली।

इस क्रम में चौथे नंबर पर आते हैं कुलदीप राय शर्मा। अंडमान निकोबार से कॉन्ग्रेस प्रत्याशी कुलदीप ने भाजपा के विशाल जोली को 1,407 वोट के अंतर से अपने प्रतिद्वंदी को मात देकर जीत हासिल की। इसके साथ ही झारखंड के खुंटी से भाजपा उम्मीदवार अर्जुन मुंडा ने 1,445 वोटों के अंतर से कॉन्ग्रेस प्रत्याशी कालीचरण मुंडा को हराकर जीत हासिल की।

अपनी जीत पर सीआर पाटिल कहते हैं, “पहली बार वोट डालने वाले वोटरों तक पहुँचने का प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का प्रयास रंग लाया है। जीत की मार्जिन में इतनी बड़ी बढ़त के पीछे वोट देने के लिए उमड़े पहली बार के वोटरों की भीड़ जिम्‍मेदार है। युवाओं ने बीजेपी को उसकी सशक्‍त और निर्णायक नेतृत्‍व क्षमता, चहुँमुखी विकास और राष्‍ट्रीय सुरक्षा के नाम पर वोट दिया।”

पश्चिम बंगाल में Nothing is Left of ‘Left’: एक को छोड़कर सबकी जमानत जब्त

एक बार अरुण जेटली ने संसद में कहा था कि ‘If Economy is Left to Left, then nothing is Left of Economy’. उनका अभिप्राय था कि यदि अर्थव्यवस्था को वामपंथियों के भरोसे छोड़ दिया जाए तो अर्थव्यवस्था का कुछ भी नहीं बचेगा। जेटली की यह उक्ति लोकतंत्र के महापर्व लोकसभा निर्वाचन 2019 में भी सटीक बैठ गई। चुनाव के नतीजे स्पष्ट होने के साथ ही पश्चिम बंगाल में वामदलों को बहुत बड़ा झटका लगा है। यहाँ सिर्फ़ माकपा के एक उम्मीदवार बिकास रंजन भट्टाचार्या ही अपनी जमानत बचाने लायक वोट हासिल कर पाए हैं जबकि भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के तो सभी उम्मीदवारों की जमानत जब्त हो गई।

गौरतलब है कि चुनावों में प्रत्येक उम्मीदवार को जमानत राशि बचाने के लिए कुल पड़े वोटों में से 16% मत प्राप्त करना अनिवार्य होता है। निर्वाचन आयोग के नियम के अनुसार सामान्य वर्ग के प्रत्याशी के लिए जमानत राशि 25,000 की तय है। वहीं अनुसूचित जाति के उम्मीदवार के लिए ये राशि 12,500 है और अनुसूचित जनजाति से आने वाले उम्मीदवार के लिए 5,000 रुपए तय हैं।

हैरान करने वाली बात ये है कि इन चुनावों में पश्चिम बंगाल में माकपा के वरिष्ठ नेता मोहम्मद सलीम भी अपनी जमानत बचाने में असफल हो गए। सलीम 34 साल सत्ता में रहे हैं और इस बार उन्हें सिर्फ़ 14.25% वोट मिले। जमानत गंवाने वालों में सलीम के अलावा मुर्शिदाबाद के मौजूदा सांसद बदरुद्दोजा खान, दमदम से नेपालदेब भट्टाचार्य और दक्षिणी कोलकाता से उम्मीदवार नंदिनी मुखर्जी शामिल हैं।

पिछले 6 दशकों में वाम दलों का ये चुनावी प्रदर्शन सबसे खराब रहा। माकपा और भाकपा ने मिलकर सिर्फ़ 5 सीटों पर जीत हासिल की। इनमें दोनों पार्टियों को तमिलनाडु में 2-2 सीटें मिली हैं, जबकि माकपा को केरल में भी 1 सीट मिली। बता दें 1952 के बाद यह पहला मौक़ा है जब लोकसभा चुनावों में वामदलों को इतनी कम संख्या पर सिमटना पड़ा। 2004 में वामदल का प्रदर्शन सबसे बेहतर था, उस दौरान उन्हें लोकसभा चुनाव में सर्वाधिक 59 सीट मिली थी और मौजूदा लोकसभा में उनके पास 12 सीट थी।

NOTA दबाने में बिहारी मतदाता सबसे आगे, गोपालगंज रहा टॉप पर

इस बार के लोकसभा चुनाव में नोटा (NOTA) दबाने के मामले में बिहार सबसे आगे रहा। बिहार के 40 संसदीय क्षेत्रों में से 13 सीटों पर जनता ने नोटा को तीसरे विकल्प के रुप में चुना। यानी देश में सबसे ज्यादा बिहार के मतदाताओं ने नोटा का बटन दबाकर अपने उम्मीदवारों को नकार दिया। ऐसा लगता है कि इन मतदाताओं को न भाजपा या जदयू पसंद है और न ही कॉन्ग्रेस, राजद या फिर कोई अन्य पार्टियाँ। तभी तो यहाँ के 8.17 लाख मतदाताओं ने नोटा का प्रयोग किया।

पूरे बिहार की बात करें, तो नोटा का बटन सर्वाधिक गोपालगंज लोकसभा क्षेत्र में 51,660 मतदाताओं ने दबाया, जो देश में सबसे ज्यादा है। इस सीट पर जदयू के आलोक कुमार सुमन को जीत मिली, जिन्होंने राजद उम्मीदवार सुरेंद्र राम को 2.86 लाख वोटों से शिकस्त दी। इसके अलावा बिहार के अररिया में 20,618 मतदाताओं ने तो वहीं, कटिहार में 20,584 मतदाताओं ने नोटा बटन दबाकर अपनी नाराजगी जाहिर की।

दूसरे नंबर पर पश्चिम चंपारण के मतदाताओं ने नोटा के बटन का इस्तेमाल किया। यहाँ के तकरीबन 45,669 मतदाताओं ने नोटा दबाया। भाजपा सांसद संजय जायसवाल ने रालोसपा के ब्रजेश कुशवाहा को 2.93 लाख वोटों से हराकर इस जीत पर अपनी जीत बरकरार रखी।

इसके बाद तीसरे नंबर पर आता है समस्तीपुर। यहाँ के 35,417 मतदाताओं ने अपने मताधिकार का प्रयोग करते हुए नोटा के विकल्प को चुना। लोजपा के रामचंद्र पासवान ने कॉन्ग्रेस के अशोक कुमार को 1.52 लाख मतों से मात देकर ये सीट अपने नाम कर ली। वहीं, सारण में 28267, पूर्वी चंपारण में 22706, जमुई में 39496, दरभंगा में 20468, भागलपुर में 31528, आरा में 21825, गया में 30030, नवादा में 35147 मतदाताओं ने किसी पार्टी को वोट देने की बजाय नोटा बटन दबाना पसंद किया।

हालाँकि, इस बार के चुनाव परिणाम को देखें तो ऐसा लगता है कि इस बार बिहार के लोगों ने जात-पात से ऊपर उठकर वोट किया है मगर इसके साथ ही नोटा का प्रयोग करने में भी प्रथम स्थान पर रहा। खैर, ये तो लोगों की अपनी-अपनी पसंद होती है। यही तो लोकसंत्र की खूबसूरती है। लेकिन मतदाताओं को ये समझना चाहिए कि नोटा दबाने से किसी समस्या का हल नहीं निकलने वाला है। इससे सिर्फ वोट ही बर्बाद होता है और कुछ नहीं।  

MP में कानून व्यवस्था बदतर: 140 किलो पशु माँस की हो रही थी तस्करी

मध्य प्रदेश के डूंडा सिवनी में पशु माँस की तस्करी कर रहे चार लोगों पर पशु हत्या अधिनियम की धारा 4,5, 6 के तहत मामला दर्ज किया गया है। इनमें से 3 आरोपित गिरफ्तार हो चुके हैं जबकि एक आरोपित फरार है।

गौरतलब है 22 मई को हिंदू सेना के लोगों ने दिलीप मालवीय सहित अन्य तीन लोगों के पास से 140 किलो पशु माँस बरामद किया था। इसके बाद हिंदू सेना के लोगों ने इनसे मारपीट भी की, जिसकी वीडियो सोशल मीडिया पर खूब वायरल हुआ। मामले के तूल पकड़ने पर पुलिस मौक़े पर पहुँची और 140 किलो पशु माँस जब्त किया। साथ ही 4 लोगों के ख़िलाफ़ मामला भी दर्ज हुआ।

इसके अलावा मारपीट और गाली-गलौच करने के आरोप में हिंदू सेना के 8 लोगों पर भी आर्म्स एक्ट सहित विभिन्न प्रकरण में केस दर्ज हुआ है। इसमें 5 लोगों को गिरफ्तार कर लिया गया है जबकि 3 अन्य फरार हैं। पशु चिकित्सक से माँस का परीक्षण करवा लिया गया है। जाँच में पुख्ता हो गया है कि जिस माँस की तस्करी की जा रही थी वो पशु का ही है।

पुलिस फरार आरोपितों की तलाश में जुटी हुई है। जी न्यूज की खबर के मुताबिक पुलिस को इस घटना के बारे में तब पता चला जब पुलिस को मारपीट का एक वीडियो मिला। पुलिस ने मौक़े से पहुँचकर मामले को शांत कराया और आरोपितों को गिरफ्तार किया।

चुनाव जीतने के बाद काशी में PM मोदी करेंगे 501 कमल से महादेव की पूजा

अगले पाँच वर्षों के लिए देश की बागडोर एक बार फिर नरेंद्र मोदी के हाथों में आ गई है। प्रधानमंत्री मोदी ने 28 मई को धर्म नगरी काशी जाने की घोषणा कर दी है, जिससे वो अपनी जीत का श्रेय वहाँ की जनता को दे सकें। काशी के मतदाताओं का आभार व्यक्त करने के साथ ही वो वहाँ बाबा विश्वनाथ का ठीक उसी विधि से कमल पुष्प से अभिषेक करेंगे जैसे भगवान श्रीराम ने लंका विजय से पहले की थी। पूजा की विशेष तैयारियों के तहत पीएम मोदी षोडशोपचार पूजन के बाद 501 या 108 कमल के फूलों से बाबा विश्वनाथ का अभिषेक करेंगे। काशी के पंडितों के अनुसार, भगवान श्रीराम ने भी शिवजी की पूजा-अर्चना इसी पूजन-विधि से की थी।  

इससे पहले, साल 2014 में जब पीएम मोदी को बनारस से जीत मिलने के अगले ही दिन गंगा तट पर पहुँचे थे। लेकिन, इस बार उन्होंने पीएम पद की शपथ लेने से पहले वहाँ जाने का निर्णय लिया है। ख़बर के अनुसार, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दोपहर के बाद काशी नगरी पहुँचेंगे। जनता से संवाद करने के बाद वो काशी के कोतवाल बाबा कालभैरव व काशी विश्वनाथ मंदिर जाकर दर्शन और पूजन करेंगे। इसके बाद गंगा आरती में शामिल होंगे। प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) इसकी विस्तृत जानकारी शनिवार (25 मई) को ज़िला प्रशासन को देगा।

ख़बर है कि प्रधानमंत्री मोदी का बनारस में भव्य स्वागत किया जाएगा। उनका यह ऐतिहासिक स्वागत एक सांसद के रूप में नहीं बल्कि एक महानायक के रूप में किया जाएगा। पीएम मोदी 28 मई को विमान से बाबतपुर एयरपोर्ट आने के बाद जनता का आभार व्यक्त करने सड़कों पर निकलेंगे। शहर में प्रवेश के बाद गंगा तट तक जाने के लिए ‘विजय रथ’ क़रीब तीस किलोमीटर की दूरी तय करेगा। इस पूरे रास्ते की सजावट के लिए जिन संसाधनों का प्रयोग किया जाएगा, वैसा बनारस में पहले कभी नहीं किया गया होगा। माना जा रहा है कि 28 मई को मोदी आगमन पर उनके स्वागत में बड़ी संख्या में लोग शामिल होंगे।

प्रधानमंत्री मोदी के स्वागत में उमड़ने वाला जनसैलाब इस बात का स्पष्ट संकेत होगा कि बनारस की जनता में उन्हें लेकर विश्वास काफ़ी बढ़ा है। वहीं, पीएम मोदी का विश्वास भी बनारस की जनता जीतने में कामयाब रही, तभी तो उन्होंने चुनाव प्रचार की सारी ज़िम्मेदारियाँ काशीवासियों पर ही छोड़ दी थी। तभी उन्होंने पूरे आत्मविश्वास के साथ कहा था कि अब वो जीतने के बाद काशीवासियों का आभार व्यक्त करने वहाँ आएँगे।

300 तिब्बतियों ने भी लोकसभा चुनाव में किया अपने मताधिकार का प्रयोग

लोकसभा चुनाव 2019 में ऐतिहासिक जीत दर्ज कर भारतीय जनता पार्टी लगातार दूसरी बार केंद्र में सरकार बनाने जा रही है। इस जीत पर विश्वभर के नेताओं ने पीएम मोदी को बधाई और शुभकामनाएँ दीं। श्री लंका, इस्राएल, भूटान, पुर्तगाल, चीन, अफगानिस्तान समेत कई देशों से बधाईयाँ आने के बाद अब तिब्बत के बौद्ध धर्मगुरु दलाईलामा ने चुनाव में शानदार जीत के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और NDA को बधाई दी है।

उन्होंने एक पत्र में लिखा है कि वो प्रार्थना करते हैं कि पीएम मोदी भारत के लोगों की उम्मीदों और आकांक्षाओं को पूरा करने और आगे आने वाली चुनौतियों से निपटने में कामयाब हों। इसके साथ ही तिब्बतियों के लोकतांत्रिक रुप से निर्वाचित राष्ट्रपति लोबसांग सांग्ये ने भी पीएम मोदी और एनडीए को हार्दिक शुभकामनाएँ दी हैं।

दलाई लामा 1959 से भारत में रह रहे हैं। पिछले 60 वर्षों से भारत में रह रहे दलाई लामा खुद को भारत में सबसे अधिक लंबे समय तक रहने वाले अतिथि मानते हैं। टाइम्स ऑफ इंडिया के अनुसार, 2014 में वोट डालने का अधिकार मिलने के बाद इस बार तकरीबन 300 तिब्बतियों ने धर्मशाला में मतदान किया। इस दौरान कई भिक्षुओं और महिलाओं को भी लोकतंत्र के महापर्व में हिस्सा लेते देखा गया। भारतीय नागरिकता और अधिकार पाने के लिए संघर्ष कर रहे तिब्बती समुदाय के एक जाने-माने चेहरे लोबसांग वांग्याल ने यहाँ के भागसू पोलिंग बूथ पर अपना वोट डाला। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार की नीतियों ने तिब्बती शरणार्थियों के जीवन को प्रभावित किया है। उनका कहना है कि प्रत्येक पार्टी के बारे में तिब्बतियों के अपने विचार हैं और मतदाताओं ने अपने व्यक्तिगत अनुभवों के आधार पर वोट डाला है। हालाँकि, इस दौरान कई तिब्बती कार्यकर्ताओं ने वोट डालने के कदम का विरोध करते हुए विभिन्न जगहों पर हंगामा भी किया।

दलाई लामा भारत के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहते हैं कि भारत की उदारता और दयाशीलता की वजह से ही वो लोग निर्वासन के बावजूद अपनी प्राचीन सांस्कृतिक विरासत को बचा कर रख पाए। इसके साथ ही राष्ट्रपति सांग्ये ने भारत को तिब्बतियों का दूसरा घर बताया और कहा कि जितना भारत और वहाँ के उदार लोगों ने तिब्बतियों के लिए किया है, उतना किसी भी देश ने नहीं किया। केंद्रीय तिब्बती प्रशासन ने साल 2018 में थैंक यू इंडिया कार्यक्रम का आयोजन कर भारत सरकार और यहाँ के लोगों के प्रति आभार व्यक्त किया था।

निर्वासन में जी रहे कश्मीरी पंडितों के 86% वोट भाजपा को मिले

सन 1996 में एक विशेष प्रावधान के तहत 1989-90 के बाद से राज्य के बाहर निर्वासन में जीवन जी रहे कश्मीरी पंडितों को अपने मूल लोकसभा क्षेत्रों के लिए मतदान करने का अधिकार दिया गया था। इस अधिकार का प्रयोग करते हुए 2019 के लोकसभा निर्वाचन में करीब 13,537 कश्मीरी पंडितों ने मतदान किया। टाइम्स ऑफ इंडिया की खबर के मुताबिक इन 13,537 लोगों में से 11,648 (86%) वोट भाजपा को मिले।

खास बात ये हैं कि घाटी की 2 सीटों (अनंतनाग और श्रीनगर) पर भाजपा प्रत्याशियों को ये वोट मिले हैं। आँकड़ों पर यदि गौर करें तो ज्ञात होगा कि अनंतनाग में भाजपा प्रत्याशी को मिले वोट में राज्य से बाहर रह रहे कश्मीरी पंडितों का बहुत बड़ा योगदान है। यहाँ भाजपा प्रत्याशी को मिले 10,225 वोटों में से 7,251 वोट कश्मीरी पंडितों ने दिए हैं। इसी प्रकार श्रीनगर में भाजपा प्रत्याशी को कुल 4,631 वोट मिले जिसमें से 2,584 वोट कश्मीरी पंडितों ने दिए। बारामूला इलाके में इसका अनुपात केवल 23 फीसद रहा।

गौरतलब है 1980 के दशक में आखिर में उग्रवाद के कारण घाटी के कई क्षेत्रों में कश्मीरी पंडितों को पलायन करना पड़ा था। इसके बाद मतदान तो दूर की बात उनका अपने घर को देखना भी मुश्किल हो गया था। ऐसे में 1996 में प्रावधान को लागू किया था ताकि राज्य से बाहर रह रहे नागरिकों के लिए मताधिकार का प्रयोग करना संभव हो पाए। निर्वाचन आयोग ने भी इस प्रावधान के तहत कश्मीरी पंडितों के वोट देने की प्रक्रिया को समय के साथ और भी अधिक सुविधाजनक बनाया है।

मंत्रिपरिषद का त्यागपत्र, सदन भंग और संसदीय दल के नेता का चयन: जानिए कैसे बनेगी सरकार

शुक्रवार (मई 24, 2019) को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समेत केंद्रीय मंत्रिपरिषद ने राष्ट्रपति कोविंद को इस्तीफा सौंप दिया। राष्ट्रपति ने सभी का त्यागपत्र स्वीकार करते हुए प्रधानमंत्री से नई सरकार बनने तक पद पर बने रहने का आग्रह किया है। इससे पहले प्रधानमंत्री मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक हुई, जिसमें 16वीं लोकसभा को भंग करने का प्रस्ताव पारित किया गया।

16 वीं लोकसभा का कार्यकाल 3 जून को समाप्त हो रहा है और 17वीं लोकसभा का गठन 3 जून से पहले किया जाना है। ऐसे में नए सदन के गठन की प्रक्रिया तीनों चुनाव आयुक्तों के राष्ट्रपति से मिलने के बाद शुरू होगी जब वह नवनिर्वाचित सदस्यों की सूची राष्ट्रपति को सौंपेंगे।

बता दें लोकसभा चुनाव में भाजपा के नेतृत्व वाले एनडीए की ऐतिहासिक जीत के बाद नई सरकार के गठन की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। इसी सिलसिले में आज शनिवार को एनडीए की संसदीय दल की बैठक शाम 5 बजे बुलाई गई है जिसमें गठबंधन के सभी नवनिर्वाचित सांसद शामिल होंगे। इस बैठक में औपचारिक रूप से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को संसदीय दल का नेता चुना जाएगा। संसदीय दल के नेता को ही राष्ट्रपति द्वारा प्रधानमंत्री के रूप में सरकार बनाने के लिए आमंत्रित किया जाता है। 

नवभारत टाइम्स की खबर के मुताबिक इस बात को लेकर अटकलें तेज हैं कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की नई कैबिनेट में किसे कौन सा पद मिलेगा। ऐसे में केंद्रीय कैबिनेट की एक बैठक भी हुई जिसमें सुषमा स्वराज, नितिन गडकरी, निर्मला सीतारमन, मेनका गांधी, पीयूष गोयल, प्रकाश जावड़ेकर आदि शामिल हुए। स्वास्थ्य खराब होने के कारण अरुण जेटली इस बैठक में शामिल नहीं हुए थे। खबरों के अनुसार मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल में अरुण जेटली वित्त मंत्री का कार्यभार नहीं लेंगे। इसका कारण उनकी बिगड़ी सेहत बताया जा रहा है। ऐसे में हो सकता है केंद्रीय रेल मंत्री पीयूष गोयल को वित्त मंत्रालय या दोनों मंत्रालयों का प्रभार दिया जाए। इसके अलावा अमित शाह को रक्षा मंत्री का पद सौंपा जा सकता है।

दिग्गी को जिताने के लिए 5 क्विंटल मिर्ची से हवन करने वाले बाबा हुए अंडरग्राउंड, हारने पर हवनकुण्ड में समाधि लेने वाले थे

देश की सबसे हाई-प्रोफाइल सीट भोपाल से कॉन्ग्रेस उम्मीदवार दिग्विजय सिंह की जीत का दावा करने वाले और उनकी जीत के लिए 5 क्विंटल मिर्ची से यज्ञ करने वाले महामंडलेश्वर वैराग्यानंद गिरी महाराज उर्फ़ मिर्ची बाबा इन दिनों गायब चल रहे हैं। लोकसभा चुनाव के नतीजे आने के बाद से ही बाबा की तलाश की जा रही है, लेकिन अभी तक कोई भी उनसे संपर्क नहीं कर पाया है। उम्मीदें लगाईं जा रही हैं कि शायद मिर्ची बाबा अंडरग्राउंड हो गए हैं।

मध्य प्रदेश की भोपाल लोकसभा सीट पर भाजपा की साध्वी प्रज्ञा ठाकुर ने कॉन्ग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह को करीब तीन लाख वोट से करारी शिकस्त दी है। दिग्विजय सिंह ने जीतने के लिए पूजा-पाठ का सहारा लिया था। पर इसका भी कोई असर नहीं हुआ।

दिग्विजय सिंह को भोपाल सीट से विजयी बनाने के लिए महामंडलेश्वर स्वामी वैराग्यानंद ने कुल 5 क्विंटल मिर्च डालकर एक विशाल हवन किया था और वहीं प्रतिज्ञा ली थी कि अगर कॉन्ग्रेस ये सीट हारती है, तो वह इसी हवनकुण्ड में समाधि ले लेंगे। कॉन्ग्रेस के हारने के बाद स्वामी वैराग्यानंद उर्फ मिर्ची बाबा को लोग खोजना शुरू कर चुके हैं, पर वह कहाँ हैं इसके बारे में कोई पता ही नहीं चल रहा।

मिर्ची बाबा का फोन भी चुनाव परिणाम आने के बाद से बन्द ही बता रहा है। बता दें कि मध्य प्रदेश की 29 सीट पर भाजपा ने अपना परचम लहराया है। एक मात्र छिंदवाड़ा सीट ही कॉन्ग्रेस के हिस्से आई है। राज्य की सत्ता में होते हुए कॉन्ग्रेस की इतनी बड़ी हार पार्टी आलाकमान को सोचने पर मजबूर कर दिया है।

दिग्विजय सिंह के लिए सिर्फ मिर्ची बाबा ने ही नहीं, बल्कि भाजपा से राज्यमंत्री रह चुके कम्पयूटर बाबा ने भी करीब 7 हजार साधू-संतों के साथ हवन-यज्ञ किया था। जिसके बाद बाबा और दिग्विजय सिंह पर चुनाव आयोग का कहर भी फूटा था, क्योंकि बाबा ने यज्ञ और प्रचार में खर्च हुई धनराशि का हिसाब नहीं दिया था। ऐसे में आयोग ने यज्ञ और साधु-संतों द्वारा दिग्विजय सिंह के पक्ष में किए प्रचार-प्रसार का पूरा खर्च भी दिग्विजय सिंह के ही खाते में जोड़ दिया था।

निराशाजनक हार के बाद अखिलेश यादव की बड़ी कार्रवाई, सभी प्रवक्ताओं की हुई छुट्टी

लोकसभा चुनाव में उत्तर प्रदेश के एसपी-बीएसपी गठबंधन को मिली करारी हार से निराश समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने बड़ी कार्रवाई की है। इस कार्रवाई के तहत अध्यक्ष अखिलेश यादव ने सभी पार्टी प्रवक्ताओं को अपने पद से हटा दिया है। ये निकाले गए प्रवक्ता वही हैं, जो पार्टी का पक्ष रखने के लिए न्यूज चैनल्स पर बैठे नजर आते थे। मीडिया रिपोर्टस् के अनुसार पार्टी के मुख्य प्रवक्ता राजेंद्र चौधरी ने इस बारे में एक प्रेस रिलीज जारी कर सभी न्यूज चैनल्स से आग्रह किया है कि वह इन प्रवक्ताओं को अपने चैनल में डिबेट के लिए ना बुलाएँ।

जिन प्रवक्ताओं के खिलाफ अखिलेश यादव ने ये निर्णय लिया है, उनमें जूही सिंह, नावेद सिद्दीकी, जगदेव सिंह यादव, सुनील सिंह जैसे कई बड़े नाम भी शामिल हैं। न्यूज़ चैनल्स के साथ-साथ इस चिट्ठी को प्रवक्ताओं के पास भी भेज दिया गया है।

लोकसभा चुनाव में न केवल जातीय गणित फेल हुआ है, बल्कि वंशवादी राजनीति को भी भारी झटका लगा है। राजनीतिक परिवार से आने वाले अधिकांश उम्मीदवारों को इस बार हार का सामना करना पड़ा है। उत्तर प्रदेश की 80 सीटों पर हुए चुनाव में समाजवादी पार्टी, बहुजन समाज पार्टी व राष्ट्रीय लोकदल के महागठबंधन के बावजूद भारतीय जनता पार्टी अपने दम पर 62 सीटें जीतने में कामयाब रही, जबकि 2 सीटों पर उसकी सहयोगी पार्टी अपना दल ने जीत हासिल की।