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NDA 287, UPA 128: The Quint-C Voter Exit Poll

लोकसभा चुनाव ख़त्म होने के साथ ही एग्जिट पोल्स के नतीजे आने लगे हैं और विभिन्न एग्जिट पोल्स में भाजपा और कॉन्ग्रेस गठबंधनों को कितनी सीटें मिल रही हैं, इसकी पल-पल की जानकारी आपको यहाँ मिलेगी। जितने भी न्यूज़ चैनलों और सर्वे एजेंसियों द्वारा संयुक्त रूप से एग्जिट पोल्स, की जानकारियाँ जैसे-जैसे बाहर आती जाएँगी, हम आपको बताते जाएँगे। इसीलिए पल-पल के अपडेट के लिए यहाँ जुड़े रहें। यहाँ हम आपको द क्विंट C Voter द्वारा जारी किए गए एग्जिट पोल की अपडेट देंगे।

द क्विंट C Voter एग्जिट पोल के अनुसार, NDA को पूर्ण बहुमत मिलेगा। सीटों की बात करें तो NDA को 287 सीटें मिलेंगी और UPA को 128 सीटें मिलने की उम्मीद जताई है। वहीं अन्य को 127 सीटें मिल सकती हैं।

कितने सही और कितने ग़लत हुए थे पिछले एग्जिट पोल्स

2014 के लोकसभा चुनाव के एग्जिट पोल को समझने के लिए नीचे दी गई टेबल पर नज़र डालते हैं। इस टेबल को आप देख कर जान सकते हैं कि किस न्यूज़ चैनल द्वारा किस गठबंधन को कितनी सीटें दी गई थीं और किसके आँकड़े कितने सही या ग़लत साबित हुए थे?

2014न्यूज़ 24(टुडे चाणक्य) टाइम्स नाउ(ORG)CNN IBN(CSDS)हेडलाइंस टुडे(ITG सिसरो)इंडिया टीवी (सी वोटर)NDTVABP(नील्सन)कुल सीटें
NDA340 (+/-14)249270-282272 (+/-11)289279281336

UPA
070 (+/-9)14892-102115 (+/-5)101103097059

इस टेबल के अनुसार देखा और समझा जा सकता है कि टुडे चाणक्य के अलावा किसी भी एजेंसी का एग्जिट पोल सटीक नहीं था। इसलिए एग्जिट पोल को लेकर मीडिया के साथ-साथ जनता की उत्सुकता तो रहती है लेकिन यह उम्मीदों पर भी खरी उतरे, इसकी संभावना नहीं के बराबर मान के चलनी चाहिए।

न्यूज़ 24-चाणक्या Exit Poll: BJP+ 350 सीट, कॉन्ग्रेस+ 95 सीट, अन्य के खाते में 97

लोकसभा चुनाव ख़त्म होने के साथ ही एग्जिट पोल्स के नतीजे आने लगे हैं और विभिन्न एग्जिट पोल्स में भाजपा और कॉन्ग्रेस गठबंधनों को कितनी सीटें मिल रही हैं, इसकी पल-पल की जानकारी आपको यहाँ मिलेगी। जितने भी न्यूज़ चैनलों और सर्वे एजेंसियों द्वारा संयुक्त रूप से एग्जिट पॉल्स की जानकारियाँ जैसे-जैसे बाहर आती जाएँगी, हम आपको बताते जाएँगे। इसीलिए पल-पल के अपडेट के लिए यहाँ जुड़े रहें। यहाँ हम आपको न्यूज़ 24-टुडेज चाणक्या द्वारा जारी किए गए एग्जिट पोल की अपडेट देंगे। इसके अनुसार, किस राज्य में किस पार्टी व गठबंधन को कितनी सीटें आ रही हैं और कुल आँकड़े कैसे दिख रहे हैं, इसे नीचे देखें।

न्यूज़ 24-चाणक्या के पोल के अनुसार, भाजपा के नेतृत्व वाली राजग गठबंधन को 350 सीटें मिलेगी, वहीं कॉन्ग्रेस नीत यूपीए मात्र 95 सीटों पर सिमट जाएगा। अन्य के खाते में 97 सीटें आएँगी।

उत्तर प्रदेश में भाजपा का वोट शेयर 46% होगा, वहीं महागठबंधन का वोट शेयर 36% रहेगा। इसके हिसाब से भाजपा को 65 और सपा-बसपा-रालोद महागठबंधन को 13 सीटें आएगी। कॉन्ग्रेस को यहाँ 2 सीटों के साथ संतोष करना पड़ेगा। पश्चिम बंगाल में भाजपा को 18 और तृणमूल को 23 सीटें आएगी। वाम का बंगाल में खाता भी नहीं खुलेगा।

बिहार में राजग को 32 सीटें मिलती दिख रही हैं, वहीं कॉन्ग्रेस-राजद गठबंधन मात्र 8 सीटों पर सिमट जाएगा। महाराष्ट्र में भाजपा को 38 तो कॉन्ग्रेस को 10 सीटें मिलेंगी। कुल मिलाकर देखें तो इस बड़े राज्य में भाजपा-शिवसेना गठबंधन एक बड़े अंतर से कॉन्ग्रेस-एनसीपी गठबंधन पर भारी पड़ रही है।

असम में 10 सीटों के साथ भाजपा राज्य में बड़ी कामयाबी हासिल करती दिख रही है। तेलंगाना में केसीआर की टीआरएस 14 सीटों के साथ अपना कब्ज़ा बरकरार रखेगी।

मध्य प्रदेश में कॉन्ग्रेस का सूपड़ा साफ़ होता नज़र आ रहा है। भाजपा को 27 सीटें मिलेंगी, वहीं कॉन्ग्रेस को सिर्फ़ 2 सीटों से संतोष करना पड़ेगा। गुजरात में भाजपा क्लीन स्वीप करेगी। हरियाणा में भी भाजपा क्लीन स्वीप करेगी। उत्तराखंड में भी भाजपा सारी सीटें जीतती दिख रही है। राजस्थान में भी सभी सीटों पर भाजपा का झंडा लहराएगा।

छत्तीसगढ़ में भाजपा को 9 और कॉन्ग्रेस को 2 सीटें आएँगी। भाजपा ने राज्य में अपने सारे सांसदों का टिकट काट दिया था, जिसका फायदा मिलता उसे दिख रहा है। हरियाणा में 10 की 10 सीटें भाजपा को जाती दिख रही हैं। गुजरात और दिल्ली में भाजपा का क्लीन स्वीप होगा, यानी पार्टी दोनों राज्यों की सभी सीटें जीतती दिख रही हैं।

आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू की टीडीपी को 17 सीटें आएँगी वहीं जगमोहन रेड्डी की वाईएसआर पार्टी को 8 सीटें मिलती दिख रही हैं। रेड्डी राज्य में बड़े खिलाड़ी बन कर उभरने वाले हैं।

कितने सही और कितने ग़लत हुए थे पिछले एग्जिट पॉल्स

2014 के लोकसभा चुनाव के एग्जिट पोल को समझने के लिए नीचे दी गई टेबल पर नज़र डालते हैं। इस टेबल को आप देख कर जान सकते हैं कि किस न्यूज़ चैनल द्वारा किस गठबंधन को कितनी सीटें दी गई थीं और किसके आँकड़े कितने सही या ग़लत साबित हुए थे?

2014न्यूज़ 24(टुडे चाणक्य)टाइम्स नाउ(ORG)CNN IBN(CSDS)हेडलाइंस टुडे(ITG सिसरो)इंडिया टीवी (सी वोटर)NDTVABP(नील्सन)कुल सीटें
NDA340 (+/-14)249270-282272 (+/-11)289279281336

UPA
070 (+/-9)14892-102115 (+/-5)101103097059

Republic Exit Poll: NDA 305, BJP 264, कॉन्ग्रेस 72, UPA 124

लोकसभा चुनाव संपन्‍न होने के साथ ही सबकी निगाहें एक्जिट पोल 2019 पर आकर टिक गई हैं। पूरा देश दम साधे एग्जिट पोल के माध्‍यम से उभरने वाले संभावित चुनावी ट्रेंड या नतीजों की प्रतीक्षा कर रहा है। सबकी दिलचस्‍पी इस बात में है कि 2014 में पिछले तीन दशकों में पहली बार स्‍पष्‍ट बहुमत से सरकार बनाने वाली बीजेपी क्‍या दोबारा सत्‍ता में वापसी कर पाएगी?

रिपब्लिक-जन की बात के अनुसार आँकड़े कुछ ऐसे हैं:
NDA- 305, BJP- 264, कॉन्ग्रेस- 72, UPA- 124, अन्य 113

ये इस मायने में खास है क्‍योंकि इस बार बीजेपी को हराने के लिए विपक्षी दलों ने राज्‍यों में गठबंधन भी किया है। इसलिए बड़ा सवाल उठता है कि क्‍या बीजेपी के हारने की स्थिति में क्षेत्रीय दलों का गठबंधन केंद्र की सत्‍ता में आएगा? क्‍या कॉन्ग्रेस इस गठबंधन की धुरी बनेगी? रुझान किसके होंगे पक्ष में, कौन रुझानों में खाएगा मात, यहाँ आप रिपब्लिक भारत और रिपब्लिक वर्ल्ड के आँकड़े देख सकते हैं।

लोकसभा चुनाव ख़त्म होने के साथ ही एग्जिट पोल्स के नतीजे आने लगे हैं और विभिन्न एग्जिट पोल्स में भाजपा और कॉन्ग्रेस गठबंधनों को कितनी सीटें मिल रही हैं, इसकी पल-पल की जानकारी आपको यहाँ मिलेगी। जितने भी न्यूज़ चैनलों और सर्वे एजेंसियों द्वारा संयुक्त रूप से एग्जिट पॉल्स की जानकारियाँ जैसे-जैसे बाहर आती जाएँगी, हम आपको बताते जाएँगे। इसीलिए पल-पल के अपडेट के लिए यहाँ जुड़े रहें। यहाँ Republic Bharat-Jan Ki Baat, Republic-CVoter के आँकड़े आप देख सकते हैं। इसके अनुसार, किस राज्य में किस पार्टी व गठबंधन को कितनी सीटें आ रही हैं और कुल आँकड़े कैसे दिख रहे हैं, इसे नीचे देखें।

देखें अभी तक के राज्यवार आँकड़े–

BJP -254 to 274( 264)
NDA-295 to 315 (305)
Others-.125 to102 (113)
UPA-. 122to 125 (124)
INC-71 to 74(72)

VOTE SHARE 2019

NDA: 41.5%
BJP: 34.5%
OTHERS: 34%
UPA: 24.5%
INC-20.81%

1)

MAHARASHTRA (48)
NDA: 34-39 (38)
UPA: 12 TO 8 (9)
Others -1
(BJP 21, SHIV SENA 17, 3 INC, 6 NCP,others 1)

=====

2)

UTTAR PRADESH (80)
BJP: 46-57 (51)
SP-BSP: 32-21 (26)
INC: 4-2 (3)

=====

3)

MADHYA PRADESH (29)
BJP: 21-24 (22)
INC: 8-5 (7)

=====

4)
RAJASTHAN (25)
BJP: 19-23 (21)
INC: 6-3 (4)

=====

5)
CHHATTISGARH (11)
BJP: 5-6 (5)
INC: 6-5 (6)

=====

6)
JHARKHAND (14)
BJP: 9-8 (9)
JMM: 3-4 (2)
INC: 1 (1)
JBM 1 (1)

=====

7)
TAMIL NADU (39)
NDA: 9-13 (10)
UPA: 29-15 (28)
(BJP 2 SEATS (3), INC 3 SEATS)

=====

8)
BIHAR (40)
NDA: 28-31 (30)
UPA: 11-8 (9)
Others -1
(BJP 15, jdu 11, ljp 4, rld 6, 1 INC, 2 RLSP )

=====

9)
BENGAL (42)
BJP: 18- 26(18)
INC: 3(3)(3)
TMC: 21- 13(21)
CPM:0

=====

10)
GUJARAT (26)
BJP: 22-23 (22)
INC: 4-3 (4)

=====

11)
DELHI (7)
BJP 6-7(7)
INC-0(0)
AAP – 1-0(0)

=====

12)
KARNATAKA (28)
BJP: 18-20 (19)
INC-JDS: 10-7 (8)
INDEPENDENT: 0-1 (1)
(INC 7, JDS 2)

=====

13)
HARYANA
8 TO 9 BJP (8)
2 TO 0 ( INC)(2)
0 to 1 others ( 0)

=====

14)
ANDHRA PRADESH (25)
YSRCP: 13-16 (15)
TDP: 12-8 (10)
BJP: 0-1 (0)

=====

15)
TELANGANA (17)
TRS: 14 – 15(15)
AIMIM: 1(1)
BJP : 1(1)
INC: 1-0(0)

=====

16)
PUNJAB (13)
INC: 9
BJP: 1
AKALI DAL: 3
AAP: 0
(INC 9, NDA 4, AAP 0)

=====

17)
HIMACHAL PRADESH (4)
BJP – 4
INC – 0

=====

18
GOA (2)
BJP: 1-2(2)
INC: 1-0 (0)

=====

19)
UTTARAKHAND (5)
BJP: 5
INC: 0

=====

20
JAMMU KASHMIR (6)
BJP: 1- 2 (2) (UDHAMPUR, JAMMU)
INC: 2 – 1 ((LEH)
NC: 2 (BARAMULLA, SRINAGAR )
PDP: 1 (ANANTNAG)
UPA: 4-3

=====

21)
ASSAM (14)
BJP 7 – 8 (8)
BDF 1 – 0 (1)
INC 4 – 3 (4)
OTHERS 1

=====

22)
TRIPURA(2)
BJP 2

=====

23)
MANIPUR (2)
BJP 0-1(1)
INC 0-1(1)

=====

24)
MIZORAM (1)
MNF 0-1

=====

25)
MEGHALAYA (2)
INC 2
NPP 0

=====

26)
ARUNACHAL(2)
2 BJP

=====

27)
SIKKIM(1)
sSKP 1 (NEDA)

=====

28)
NAGALAND(1)
NDPP 1( NEDA)

North East (25)
( NDA -14 to 15, UPA- 11 to 10
BJP 11 to 13(12), INC-(7)

29)
ODISHA (21)
BJP 11 – 13(12)
BJD 9- 7( 8)
INC 1 to 0(1)

=====

30)
KERALA (20)
UDF 14 -16(14)
LDF 5 – 4(4)
BJP 2 (2)

=====

31)
ANDAMAN NICOBAR (1)
BJP

=====

32)
LAKSHWADEEP (1)
INC

=====

33)
PUDUCHERRY (1)
UPA

=====

34)
DAMAN DIU
BJP 1to 0(1)
InC- 0 to 1(0)

35)
CHANDIGARH
BJP 0 to 1
INC 1 to 0

=====

36)
DADRA & NAGAR HAVELI
BJP: 1
INC: 0
IND: 0

इंडिया टुडे-एक्सिस Exit Poll: NDA: 339-368, UPA: 77-108, अन्य: 69-95

लोकसभा चुनाव ख़त्म होने के साथ ही एग्जिट पोल्स के नतीजे आने लगे हैं और विभिन्न एग्जिट पोल्स में भाजपा और कॉन्ग्रेस गठबंधनों को कितनी सीटें मिल रही हैं, इसकी पल-पल की जानकारी आपको यहाँ मिलेगी। जितने भी न्यूज़ चैनलों और सर्वे एजेंसियों द्वारा संयुक्त रूप से एग्जिट पॉल्स की जानकारियाँ जैसे-जैसे बाहर आती जाएँगी, हम आपको बताते जाएँगे। इसीलिए पल-पल के अपडेट के लिए यहाँ जुड़े रहें। यहाँ हम आपको इंडिया टुडे-एक्सिस द्वारा जारी किए गए एग्जिट पोल की अपडेट देंगे। इसके अनुसार, किस राज्य में किस पार्टी व गठबंधन को कितनी सीटें आ रही हैं और कुल आँकड़े कैसे दिख रहे हैं, इसे नीचे देखें।

कुल आँकड़े कुछ इस प्रकार होंगे:

NDA: 339-368
UPA: 77-108
अन्य: 69-95

बिहार में राजग गठबंधन क्लीन स्वीप कर सकता है। यहाँ भाजपा को 38 से 40 सीटें मिलती दिख रही हैं। सबसे बड़ी बात तो यह कि राजद, कॉन्ग्रेस, रालोसपा और हम का गठबंधन मिलकर 2 सीटें भी ठीक से नहीं जीत पाएगा। बिहार मे जातीय अंकगणित को देखते हुए यह चौंकाने वाला नतीजा है।

झारखण्ड में राज्य सरकार की लोकप्रियता अच्छी रही है और भाजपा को यहाँ 12 से 14 सीटें मिलती दिख रही हैं। यानी भाजपा यहाँ भी क्लीन स्वीप कर सकती है। कॉन्ग्रेस गठबंधन को 0 से 2 सीटें मिल सकती है।

ओडिशा में मुख्यमंत्री नवीन पटनायक और सत्ताधारी बीजद का किला ढहता नज़र आ रहा है। पार्टी बस 2 से 6 सीटों पर सिमट जाएगी। वहीं भाजपा 15 से 19 सीटें जीत कर यहाँ भी बंगाल की तरह दमदार एंट्री मारेगी। कॉन्ग्रेस के यहाँ भी अधिकतम खाता खोलने के ही आसार हैं।

उत्तर प्रदेश में भाजपा एवं महागठबंधन के बीच काँटे की टक्कर है। भाजपा को जहाँ 48% वोट मिलेंगे, वहीं सपा-बसपा महागठबंधन को 39% वोट मिलेंगे। कॉन्ग्रेस 8% वोट शेयर के साथ तीसरे स्थान पर रहेगी। इस हिसाब से भाजपा को 62-68 सीटें मिलती दिख रही हैं, अर्थात 2014 के मुक़ाबले पार्टी को ज्यादा नुकसान नहीं हुआ है। वहीं सपा-बसपा एक दुसरे को अपना वोट ट्रांसफर करने में नाकाम रहे और उन्हें मात्र 10 से 16 सीटों से संतोष करना पड़ेगा। कॉन्ग्रेस का ‘प्रियंका दाँव’ बुरी तरह फेल होता दिख रहा है और उसे अधिकतम 2 सीटें मिलेंगी।

पश्चिम बंगाल में तृणमूल कॉन्ग्रेस को भाजपा पीछे छोड़ देगी। पार्टी को तृणमूल से ज्यादा सीटें आने का अनुमान है। भाजपा को जहाँ 19 से 22 सीटें आएँगी, वहीं ममता बनर्जी की तृणमूल कॉन्ग्रेस को 19 से 22 सीटें आ सकती हैं। इसका सीधा अर्थ है कि राज्य में वाम को चारों खाने चित कर भाजपा सत्ताधारी तृणमूल को न सिर्फ़ टक्कर दे रही है, बल्कि उससे आगे निकलती भी दिख रही है। कॉन्ग्रेस राज्य में खाता खोल ले, यही बहुत है। यहाँ दोनों ही पार्टियों का वोट शेयर 41% रहने की उम्मीद है।

हिमाचल प्रदेश में भाजपा पाँचों सीटें जीत कर क्लीन स्वीप करेगी। उत्तराखंड में भाजपा पाँचों सीटें जीतेगी जबकि कॉन्ग्रेस का खाता भी नहीं खुलेगा। दिल्ली में भाजपा को 6 से 7 सीटें मिलती दिख रही है, यानी पार्टी यहाँ भी क्लीन स्वीप कर रही है। जम्मू कश्मीर में भाजपा को 2-3 सीटें मिलेंगी, वहीं नेशनल कॉन्फ्रेंस को भी इतनी ही सीटें मिलने का अनुमान है। कॉन्ग्रेस का यहाँ भी खाता खोलना मुश्किल है और पार्टी को अधिकतम 1 सीट मिलती दिख रही है। महबूबा मुफ़्ती की पार्टी पीडीपी को एक भी सीट नहीं मिलेगी।

गोवा में भाजपा को 2 सीटें मिलेंगी वहीं कॉन्ग्रेस का खाता भी नहीं खुलेगा। मध्य प्रदेश में भाजपा को 26 से 28 सीटें मिलेंगी। पंजाब में आम आदमी पार्टी को इस बार घाटा होगा और पार्टी खाता खोल ले, यही बहुत है। कॉन्ग्रेस को 8 से 11 सीटें आएँगी, वहीं NDA को मात्र 3 से 5 सीटों के साथ संतोष करना पड़ेगा। हरियाणा में कॉन्ग्रेस को शून्य से 2 सीटें मिलती दिख रही है। भाजपा को 8 से 11 सीटें मिलेंगी। चंडीगढ़ की एकमात्र सीट पर भाजपा का कब्ज़ा होगा, यानी किरण खेर जीतेंगी।

कर्नाटक में भाजपा को 28 में से 25 सीटें मिलती दिख रही हैं, वहीं राज्य की सत्ताधारी गठबंधन में शामिल कॉन्ग्रेस 3 से 6 सीटों पर सिमट जाएगी। कर्नाटक में कॉन्ग्रेस को तगड़ा झटका लगता दिख रहा है। पार्टी ने मुख्यमंत्री पद का ‘त्याग’ कर अपने से कम सीटों वाली जेडीएस को समर्थन दिया था, जिसके बाद कुमारस्वामी मुख्यमंत्री बने थे।

महाराष्ट्र में भाजपा और शिवसेना गठबंधन 38 से 42 सीटों पर कब्ज़ा करती दिख रही है वहीं 4 से 6 सीटें पाकर कॉन्ग्रेस-एनसीपी का गठबंधन फुस्स हो जाएगा।

तमिलनाडु में यूपीए गठबंधन में शामिल डीएमके को भारी फायदा होता दिख रहा है। डीएमके को 34 से 38 सीटें मिलती दिख रही हैं। वहीं अभी 30 से भी अधिक सांसदों वाली एआईडीएमके को जयललिता के निधन का ख़ासा नुकसान होता दिख रहा है। पार्टी शून्य से 4 सीटों पर सिमट जाएगी।

केरल में तमाम प्रयासों व सबरीमाला मुद्दे को ज़ोर-शोर से उठाने के बावजूद कोई फायदा मिलता नहीं रहा है। राज्य में यूडीएफ को 15 से 16 सीटें मिल सकती हैं। एलडीएफ को 3 से 5 सीटें मिलेंगी। भाजपा को शून्य से 1 सीटें मिलेंगी। यानि, राज्य में भाजपा का खाता खोलना मुश्किल लग रहा है।

आंध्र प्रदेश में चंद्रबाबू नायडू की पार्टी टीडीपी को बड़ा झटका लगा है। पार्टी 4 से 6 सीटों पर सिमट जाएगी। वहीं वाईएसआर की पार्टी को 18 से 20 सीटें मिलेंगी। इससे अनुमान लगाया जा सकता है कि विधानसभा चुनाव में भी नायडू का किला ढहने को है।

कितने सही और कितने ग़लत हुए थे पिछले एग्जिट पॉल्स

2014 के लोकसभा चुनाव के एग्जिट पोल को समझने के लिए नीचे दी गई टेबल पर नज़र डालते हैं। इस टेबल को आप देख कर जान सकते हैं कि किस न्यूज़ चैनल द्वारा किस गठबंधन को कितनी सीटें दी गई थीं और किसके आँकड़े कितने सही या ग़लत साबित हुए थे?

2014न्यूज़ 24(टुडे चाणक्य)टाइम्स नाउ(ORG)CNN IBN(CSDS)हेडलाइंस टुडे(ITG सिसरो)इंडिया टीवी (सी वोटर)NDTVABP(नील्सन)कुल सीटें
NDA340 (+/-14)249270-282272 (+/-11)289279281336

UPA
070 (+/-9)14892-102115 (+/-5)101103097059

Exit Poll के रुझान देखकर मीडिया गिरोह ने जताई 5 साल के लिए गुफा में तपस्या करने की प्रबल इच्छा

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को केदारनाथ की गुफा में तपस्या करता देख कल से ही मीडिया में एक जबरदस्त शिफ्ट देखने को मिला। तैमूर की दिनचर्या से लेकर राहुल गाँधी के क्यूट डिम्पल्स के पल-पल की निष्पक्ष जानकारी दर्शकों को देने वाले निष्पक्ष और बिना गोदी वाले मीडिया गिरोहों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की केदारनाथ यात्रा पर जमकर बवंडर मचाया है। लेकिन, एग्जिट पोल के रुझान आते ही यही निष्पक्ष मीडिया गिरोह अचानक से ट्रेवल एजेंसीज़ द्वारा ‘केदारनाथ वाली गुफा’ की जानकारी लेते देखा गया है।

ट्रेवल एजेंसीज ने कहा पहले आओ, पहले पाओ के तर्ज पर ही होगी बुकिंग

नाम न बताने की शर्त पर ऑपइंडिया तीखीमिर्ची सेल को ख़ुफ़िया सूत्रों ने बताया कि वास्तव में एग्जिट पोल के रुझान देखने के बाद मीडिया गिरोह ने माँग तो किसी ऐसे भूमिगत स्थान की उठाई थी जहाँ सूर्य प्रकाश तक न पहुँचता हो, लेकिन ऐसे किसी ‘स्थान विशेष’ में मीडिया गिरोह को पहुँचा पाना ट्रेवल एजेंसी की सीमाओं के बाहर था, इसलिए उन्होंने उन्हें सबसे सुरक्षित जगह वही गुफा बताई, जिसके पीछे वो 2 दिन से अपनी सारी शक्ति झोंकते जा रहे थे यानी, केदारनाथ वाली गुफा।

कुछ नहीं रखा है दुनियादारी में

मीडिया गिरोहों ने स्वीकार करते हुए कहा है कि जिस बेसब्री से वो मोदी घृणा में महागठबंधन में से ही किसी टोंटीचोर तक में प्रधानमंत्री की तलाश करने तक को तैयार हो गए थे, ऐसे में अब उनके लिए और 5 साल नरेंद्र मोदी को हर दिन प्रधानमंत्री बने देखना असहनीय पीड़ादायक होने वाला है। इसी वजह से मीडिया गिरोह के प्रमुखों ने तत्परता से यह फैसला लेना बेहतर समझा है कि किसी सुदूर क्षेत्र में बैठकर ही अब वो जीवनयापन करेंगे।

व्हाट्सएप्प यूनिवर्सिटी के कुलपति ने भी किया है आवेदन

अगले 5 साल गुफा में बिताने की चॉइस रखने वालों की अर्जी में एक नाम बेहद चौंकाने वाला था। यह नाम एक मशहूर व्हाट्सएप्प यूनिवर्सिटी के कुलपति का था। अपने विवरण में इस कुलपति ने स्पष्ट किया है कि पिछले 5 साल वो दर्शकों से TV ना देखने की अपील करते करते थक चुके हैं और अब अगले 5 साल भी वही काम दोबारा नहीं कर पाएँगे। चौंकाने वाली बात ये थी कि कुलपति के साथ-साथ ही गुफा में जीवनयापन करने के लिए कुछ विभिन्न भाषाओं में फेसबुक पोस्ट का ट्रांसलेशन करने वाले अनुवादकों ने भी नाम दाखिल करवाया है।

राहुल गाँधी का विलाप और प्रलाप दोनों शुरू हो चुका है, चिदु ने भी कोरस में दिया साथ

एग्जिट पोल्स आने शुरू ही हुए हैं, और जैसा कि लोगों को अपेक्षा थी, कॉन्ग्रेस के चिराग और लिबरल गिरोह के चहेते ‘कॉनज़ूमेट पॉलिटिशियन’ (पूर्ण राजनेता) श्री राहुल गाँधी ने अपने ट्विटर से प्रतिक्रिया देनी शुरू कर दी है।

राहुल गाँधी ने ट्वीट करते हुए कहा है, “इलेक्टोरल बॉन्ड्स से लेकर, EVM और चुनाव की तारीखों से छेड़छाड़, NaMo टीवी, ‘मोदी की सेना’, केदारनाथ में हुई नौटंकी, चुनाव आयोग का मोदी और उनके गैंग के सामने घुटने टेकने की बात सबके सामने है। एक समय में चुनाव आयोग एक सम्मानित संस्था हुआ करती थी, अब नहीं!”

श्री चिदंबरम ने भी मालिक की बातों का मान रखते हुए, कोरस में पार्श्व गायन किया है। उन्होंने भी ट्वीट करते हुए लिखा है, “हमारा आरोप यही रहा है कि चुनाव आयोग नींद में था। अब हम आगे बढ़ कर कह सकते हैं कि चुनाव आयोग नेअपनी स्वतंत्रता और अधिकारों को सरेंडर कर दिया है। ये शर्म की बात है।”

श्री गाँधी की इस प्रतिक्रिया से आम लोग यही मान रहे हैं कि कॉन्ग्रेस अपनी हार के कारण बनाने में व्यस्त है। ये इनका पैटर्न है कि इनको ज्योंहि भीतर से खबर आनी शुरू होती है कि कॉन्ग्रेस की हालत ख़राब है, ये तमाम अजीबोगरीब कारण, बिना पूछे ही बताने लगते हैं।

योगेंद्र यादव का दावा: अबकी बार 272 पार, आएगा तो मोदी ही

लोकसभा चुनाव 2019 के परिणाम को लेकर एक कौतूहल का माहौल होना लाज़मी है। उसके पीछे वजह यही है कि हर कोई यह जानना चाहता है कि देश में आख़िर सरकार किसकी बनेगी। कई लोगों ने तो अभी से यह दावा करना शुरू कर दिया है कि 2019 में पीएम मोदी ही वापसी करेंगे और जनता-जनार्दन उन्हीं के हाथों देश की बागडोर सौंपेगी।

इधर, आम आदमी पार्टी छोड़कर स्वराज इंडिया पार्टी की नींव रखने वाले योगेन्द्र यादव ने एक वेबसाइट को बताया कि प्रधानमंत्री मोदी के सत्ता में वापसी के तीन रास्ते हैं। उन्होंने स्वीकार किया कि 6 महीने पहले उन्होंने संकेत दिया था कि बीजेपी को 100 सीटों का घाटा हो सकता है। लेकिन, बालाकोट एयरस्ट्राइक का बाद स्थिति बदल गई है। आज की स्थिति में अब बीजेपी बढ़त की ओर आगे बढ़ गई है। योगेंद्र यादव ने NDA को 272 सीटों का आंकड़ा पार करने का संकेत दिया।

इससे पहले योगेंद्र यादव ने दिल्ली विधानसभा चुनाव के समय भी नतीजों को लेकर कहा था कि आम आदमी पार्टी दिल्ली विधानसभा चुनाव में लगभग 40 सीटें जीतेगी और हो सकता है कि यह 50 का आँकड़ा भी पार कर जाए। इसके बाद जो परिणाम सामने आया वो वास्तव में चौंकाने वाला था। आम आदमी पार्टी ने 70 में से 67 सीटें जीत कर सरकार बनाई थी।

Exit Poll: लोकसभा चुनाव 2014 में सिर्फ एक का ही तुक्का लगा था, बाकी हुए थे फिसड्डी

देश में किसकी सरकार बनेगी और किसकी नहीं, ये सवाल तब तक उत्सुकता बनाए रखता है जब तक इसकी तस्वीर पूरी तरह से साफ़ नहीं हो जाती। सभी चरणों में मतदान की प्रक्रिया सम्पन्न होने के बाद एग्जिट पोल के आँकड़े सामने आने शुरू हो जाते हैं। हालाँकि, एग्जिट पोल के आँकड़ों पर बहुत अधिक भरोसा तो नहीं किया जा सकता क्योंकि यह अधिकांश बार ग़लत साबित हो जाते हैं। इस लेख में हम लोकसभा चुनाव 2014 और 2009 के एग्जिट पोल के बारे में बात करेंगे और यह जानने का प्रयास करेंगे कि उस समय जिन एजेंसियों ने एग्जिट पोल के जो आँकड़े पेश किए थे, वो कितने सटीक और कितने ग़लत सिद्ध हुए थे।

क्या होता है एग्जिट पोल

एग्जिट पोल की प्रक्रिया चुनावी सर्वे से होकर गुजरती है। चुनावी सर्वे के तहत चुनाव के दौरान राजनीतिक दलों और उनके उम्मीदवारों को लेकर मतदाताओं से बातचीत की जाती है और अनुमान लगाया जाता है कि आख़िर चुनाव परिणाम किस दल के पक्ष में जा सकता है। इसकी सैंपलिंग के लिए चुनावी सर्वे करने वाली एजेंसी के लोग मतदाताओं से उनकी राय लेते हैं और उनसे विकास से जुड़ी बातचीत करते हैं। कई बार बातचीत का यह डाटा एक प्रकार के फॉर्म को भरवाकर भी इकट्ठा किया जाता है। इसमें उम्र, आयु वर्ग, जाति, क्षेत्र आदि का उल्लेख होता है। इस सर्वे के लिए क्षेत्र के आधार पर लोगों की संख्या तय की जाती है और उनसे राय ली जाती है। एग्जिट पोल के आँकड़ें हमेशा आखिरी चरण के मतदान के बाद दिखाए जाते हैं – यह चुनाव आयोग के द्वारा दिया गया स्पष्ट दिशा-निर्देश है।

लोकसभा चुनाव 2014: एग्जिट पोल

2014 के लोकसभा चुनाव के एग्जिट पोल को समझने के लिए नीचे दी गई टेबल पर नज़र डालते हैं।

2014न्यूज़ 24(टुडे चाणक्य) टाइम्स नाउ(ORG)CNN IBN(CSDS)हेडलाइंस टुडे(ITG सिसरो)इंडिया टीवी (सी वोटर)NDTVABP(नील्सन)कुल सीटें
NDA340 (+/-14)249270-282272 (+/-11)289279281336

UPA
070 (+/-9)14892-102115 (+/-5)101103097059

इस टेबल के अनुसार देखा और समझा जा सकता है कि टुडे चाणक्य के अलावा किसी भी एजेंसी का एग्जिट पोल सटीक नहीं था। इसलिए एग्जिट पोल को लेकर मीडिया के साथ-साथ जनता की उत्सुकता तो रहती है लेकिन यह उम्मीदों पर भी खरी उतरे, इसकी संभावना नहीं के बराबर मान के चलनी चाहिए।

लोकसभा चुनाव 2009: एग्जिट पोल

अब लोकसभा चुनाव 2009 के एग्जिट पोल पर भी नज़र डालते हैं और समझते हैं कि क्या उस समय भी यही स्थिति थी जो साल 2014 में थी।

2009ABPटाइम्स नाउNDTVहेडलाइंस टुडेकुल सीटें
NDA197183177180160
UPA199198216191262

देश में दो बार सम्पन्न हुए लोकसभा चुनाव के एग्जिट पोल पर नज़र डालने के बाद यह पता चलता है कि विभिन्न एजेंसियों द्वारा जुटाए गए आँकड़ें एकदम सटीक नहीं होते। इनमें से कुछ आँकड़ें तो बिल्कुल ही ग़लत साबित हो जाते हैं। चुनाव प्रक्रिया सम्पन्न होने के बाद जहाँ एक तरफ़ जनता की नज़र टीवी पर दिखाए जा रहे एग्जिट पोल के गुणा-गणित पर रहती है, वहीं दूसरी तरफ़ राजनीतिक दलों के बीच भी इन आँकड़ों को लेकर काफ़ी हलचल बनी रहती है।

कॉन्ग्रेस विधायक की गाड़ी ने बाइक को मारी टक्कड़, 3 वर्षीय बच्ची की मौत, माता-पिता अस्पताल में भर्ती

तेलंगाना से एक बहुत ही दुःखद ख़बर आई है। राज्य के कॉन्ग्रेस विधायक की गाड़ी द्वारा बाइक को टक्कर मारने के कारण न सिर्फ़ एक तीन वर्षीय बच्ची की मृत्यु हो गई बल्कि उसके माता-पिता भी गंभीर रूप में घायल हो गए। ये घटना मुलुगु ज़िले के जीडीवागु इलाक़े की है। कॉन्ग्रेस विधायक दनसरी अनुसूया उर्फ़ सीताक्का की गाड़ी ने एक बाइक को टक्कर मार दी। दोनों ही गाड़ियाँ अपोजिट दिशा से आ रही थी, जिसके बाद उनमें टक्कर हुई। बाइक को के. अरुण नामक व्यक्ति चला रहे थे। उनके साथ उनकी पत्नी विजया और 3 साल की बेटी श्रवंती उनके साथ बाइक पर उपस्थित थे।

बच्ची श्रवंती की सिर में गंभीर चोट लगने के कारण मृत्य हो गई, वहीं उसके माता-पिता गंभीर रूप से घायल होकर नज़दीकी सरकारी अस्पताल में भर्ती हैं। बच्ची को उसके माता-पिता नज़दीकी आँगनबाड़ी केंद्र में दाखिल कराने जा रहे थे। विधायक ने बाद में डैमेज कण्ट्रोल करने के लिए बच्ची के माता-पिता से मिलकर अफ़सोस ज़ाहिर किया और वित्तीय मदद देने का आश्वासन भी दिया। विधायक ने कहा, “यह एक बहुत ही दुःखद दुर्घटना है, जहाँ एक बच्ची को इसका शिकार बनना पड़ा। दुःख की इस घड़ी में मैं उसके माता-पिता के साथ खड़ी हूँ।

इधर मुलुगु पुलिस ने धारा 304A के तहत मामला दर्ज कर लिया है। इसके अलावा धारा 337 के तहत भी मामला दर्ज किया गया है। पुलिस के अनुसार, विधायक की गाड़ी को ज़ब्त कर लिया गया है और आगे की कार्रवाई के लिए जाँच की जा रही है।

अगस्त 2018 में भी इसी तरह की घटना हुई थी, जब कन्दुकुर के विधायक पोथुला रामाराव की गाड़ी से टकरा कर 2 लोगों की मौत हो गई थी। ये दुर्घटना विजयवाड़ा एयरपोर्ट के नज़दीक स्थित केसरपल्ली जंक्शन पर हुई थी। विधायक की गाड़ियों द्वारा आंध्र और तेलंगाना में इस तरह की दुर्घटनाओं में तेज़ी आना अच्छा संकेत नहीं है। कुछ महीनों पहले तेलुगु सुपरस्टार जूनियर एनटीआर के पिता और पूर्व मंत्री नंदामुरी हरिकृष्णा की भी एक कार दुर्घटना के दौरान मृत्यु हो गई थी। दुर्घटना के समय उनकी कार काफ़ी तेज़ गति से जा रही थी।

प्रचार के लिए ब्लाउज़ सिलवाई, 20 साड़ियाँ खरीदी, ताकि बड़े मुद्दों पर बात कर सकूँ: स्वरा भास्कर

लोकसभा चुनाव के आखिरी चरण के मतदान जारी हैं। इस लोकसभा चुनाव में कुछ लोकसभा सीटें विशेष चर्चा का विषय बनी रहीं। इन्हीं में से एक थी बिहार से बेगूसराय लोकसभा सीट। बेगूसराय में इस बार कुछ ऐसे चेहरे देखने को मिले, जिनके दिलों में देश के टुकड़े-टुकड़े होता देखने के ख्वाब और जुबान पर ‘क्रांति’ है।

बेगूसराय में इस बार टुकड़े-टुकड़े गैंग के कामरेड कन्हैया कुमार भी राजनीति में अपना भाग्य आजमा रहे हैं। उनके इस सपने को साकार करने में उनका साथ देने स्वरा भास्कर भी पहुँची थी।

अप्रैल 29 को चौथे चरण के चुनाव में बेगूसराय से निपटने के बाद ‘वीरे दी वेडिंग’ फिल्म के एक ‘सीन विशेष’ के कारण चर्चा का विषय बनी कम्युनिस्ट प्रचारक और पार्ट टाइम बॉलीवुड एक्ट्रेस स्वरा भास्कर को आज टाइम्स ऑफ़ इंडिया को एक इंटरव्यू में खुलकर अपने मन की बात करते हुए देखा गया। स्वरा भास्कर ने इस इंटरव्यू में यह भी दावा किया कि उन्होंने चुनाव प्रचार के लिए 20 साड़ियाँ खरीदीं।

‘जूलरी खरीदी ताकि बड़े मुद्दों पर बात करने वाली नजर आऊँ’

इंटरव्यू के दौरान स्वरा भास्कर ने स्वीकार करते हुए बताया कि उन्हें प्रचार के लिए बुलाया गया क्योंकि वो हीरोइन हैं और इस वजह से ही उन्हें एक इमेज बनाना आवश्यक था। इसी छवि को बनाने के लिए उन्होंने 20 साड़ियाँ खरीदीं और और कुछ जूलरी खरीदी ताकि ‘बड़े मुद्दों पर’ बात की जा सके।

स्वरा भास्कर ने कहा, “मुझे मालूम था कि लोग मुझे इसलिए बुला रहे हैं क्योंकि मैं हीरोइन हूँ। जैसे ही मुझे पता चला कि मैं प्रचार करुँगी, मैंने जाकर तुरंत 20 साड़ियाँ खरीद ली और अपना वॉर्डरोब मेंटेन कर लिया। मैंने ब्लाउज़ सिलवा लिए, जूलरी ले ली, लुक ठीक किया। मैं सुबह उठकर अपने बालों  को सुखाया करती थी मेकअप करती थी, और एअररिंग्स पहनती थी। मुझे पता था कि मीडिया वाले मेरी फोटो और इंटरव्यू लेने आएँगे, जिससे कि मैं आवश्यक मुद्दों पर बात कर सकूँ।”

टाइम्स ऑफ़ इंडिया पर स्वरा जी के बयान का स्क्रीनशॉट

फिल्म इंडस्ट्री के राजनीतिकरण पर स्वरा भास्कर ने कहा, “फिल्म इंडस्ट्री का पहले से ही राजनीतिकरण किया जा चुका है। FTII, सेंसर बोर्ड में होने वाली नियुक्तियों को ही देख लीजिए और जिस प्रकार से राष्ट्रीय पुरस्कार दिए जाते हैं।  हर सरकार अपने लोगों को संसथान में बिठाती है।”

स्वरा भास्कर की मम्मी इरा भास्कर UPA के दौरान थी सेंसर बोर्ड की सदस्य

बता दें कि स्वरा भास्कर कि मम्मी इरा भास्कर, जो कि JNU में सिनेमा स्टडीज की प्रोफेसर हैं, UPA सरकार के दौरान सेंसर बोर्ड की सदस्य हुआ करती थी और जनवरी 2015 में CBFC प्रमुख लीना सैमसन के इस्तीफे के बाद उन्होंने यह सदस्यता त्याग दी थी। उन पर कॉन्ग्रेस चाटुकार होने के भी आरोप लगे थे।

‘मैं ‘विचारक कलाकार’ हूँ’

स्वरा भास्कर ने अपने इंटरव्यू में आगे बताया कि वो एक ‘विचारक कलाकार’ हैं और इस वजह से वो अपने कैंडिडेट का पक्ष मजबूत करने में समर्थ हैं। इसके बाद स्वरा भास्कर ने वीरे दी वेडिंग फिल्म के अपने उस मशहूर सीन पर चर्चा की, जिसके कारण उन्हें एक अलग पहचान मिली थी। स्वरा ने कहा कि उस सीन को चुनाव प्रचार में उतारा गया जो कि सेक्सिज़्म का उदाहरण है और वो इससे थोड़ा ‘हर्ट’ भी हुईं।

हास्यास्पद बात ये है कि सेक्सिज़्म की बात कहने वाली स्वरा भास्कर, अपनी सहकर्मी को ‘सौ टका टंच माल’ कहने वाले कॉन्ग्रेस नेता दिग्विजय सिंह को भी समर्थन दे चुकी  हैं।