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भोपाल से प्रज्ञा की जीत, बेगूसराय से कन्हैया की हार और अमेठी में स्थिति संदिग्ध: एग्जिट पोल्स

बीते कुछ घंटों में एक के बाद एग्जिट पोल के मुताबिक़ भाजपा समर्थित राजग को पूर्ण बहुमत मिलने के आसार हैं। लोकसभा चुनाव 2019 कई मायनों में ऐतिहासिक है, लगभग 50 सालों में यह ऐसा पहला चुनाव होगा जहाँ किसी प्रधानमंत्री को लगातार दूसरी बार पूर्ण बहुमत मिला हो।

साथ ही, ‘हिन्दू टेरर’ के कलंक से कलंकित और कॉन्ग्रेस की तुष्टीकरण एवम् साम्प्रदायिक नीतियों का शिकार बनी साध्वी प्रज्ञा के भोपाल से प्रत्याशी होने को भाजपा द्वारा लगातार प्रखर समर्थन देने के कारण भी यह चुनाव चर्चा में रहा। अगर एग्जिट पोल्स पर नजर दौराएँ तो लगभग सारे ही एग्जिट पोलों में साध्वी प्रज्ञा भाजपा के लिए भोपाल की सीट जीतती दिखती हैं।

इसके अलावा, ‘टुकड़े-टुकड़े गैंग’ के सरगना और नक्सली आतंकियों को शहीद बताने वाले, लिंग लहरा कर लड़कियों को धमकाने वाले वामपंथी कामरेड कन्हैया के कारण भी यह चुनाव गहमागहमी से भरा रहा। राष्ट्रकवि दिनकर की पावन धरती बेगूसराय पर बुर्क़ा डिफ़ेंडर जावेद अख़्तर से लेकर, भाड़े की प्रोटेस्टर शेहला रशीद और स्वघोषित फ्रीलान्स कलाकार-विचारक स्वरा भाष्कर तक के पैर पड़े। लेकिन, एग्जिट पोल्स की मानें तो कन्हैया तीसरे स्थान पर ही आ जाएँ, वही इनके लिए एक सांत्वना वाली बात होगी।

अमेठी की सीट भी इस बार चर्चित रही क्योंकि स्मृति ईरानी ने अपने लगातार किए गए प्रयासों के कारण राहुल गाँधी को ‘सेफ़ सीट’ वायनाड का रुख़ करा दिया। एग्जिट पोल्स में इस सीट पर कोई साफ आकलन नहीं है। कुछ जगहों पर भाजपा को जीतता बताया गया है, और कहीं-कहीं भाजपा-कॉन्ग्रेस में कड़ी टक्कर है। कुल मिला कर यहाँ की स्थिति संदिग्ध बनी हुई है।

10 में से 7 ने दिए भाजपा समर्थित राजग को 300+ सीटें

अगर सभी एग्जिट पोल्स पर नज़र डालें तो पता चलता है कि भाजपा के नेतृत्व वाली राजग गठबंधन को आसान बहुमत मिलती दिख रही है। नीचे हमने सभी एग्जिट पोल्स की जो सूची तैयार की है, उनमें से अगर एक को छोड़ दिया जाए तो बाकी सभी में एनडीए स्पष्ट बहुमत की ओर जाता दिख रहा है। अर्थात, जनता ने जोड़-तोड़ वाली सरकार को नकार कर सभी संभावनाओं पर विराम लगा दिया है।

इन एग्जिट पोल्स की मानें तो, न तो कॉन्ग्रेस के समर्थन से कोई सरकार बन सकती है और न ही विपक्षी एकता से कोई खिचड़ी सरकार खड़ी हो सकती है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने दूसरे कार्यकाल के लिए तैयार हैं।

नीचे सूचीबद्ध की गई 10 मीडिया एजेंसियों में से 7 ने राजग को 300 से अधिक सीटें दी है, जो 272 के जादुई आँकड़े से ज्यादा है।

मोदी, शाह और भाजपा के 300+: कहाँ रहे सही और कहाँ हुई चूक

2014 में प्रचंड बहुमत के साथ सत्ता में आने वाली मोदी सरकार ने 2019 में भी पूरा दम-खम झोंक दिया है। ताज़ा आए एग्जिट पोल्स (10 में से 9) के रुझानों से प्रतीत होता है कि भाजपा पूर्ण बहुमत से एक बार फिर NDA की सरकार बनाने में सक्षम होगी।

पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह के मुताबिक 2019 में उनके पास 11 करोड़ कार्यकर्ता हैं जो पार्टी के लिए जमीनी स्तर पर काम कर रहे हैं। हर ओर प्रधानमंत्री मोदी का प्रभाव देखने को मिल रहा है। शहर के एलिट क्लास से लेकर गाँव का पिछड़ा वर्ग भी मौक़ा मिलने पर मोदी सरकार के गुणगान करने से नहीं चूक रहा है। लेकिन, बावजूद इन सबके विपक्ष इन कोशिशों में जुटा हुआ है कि जनता के बीच भाजपा की कमियों और चूक को गिनवा कर उन्हें सत्ता से हटाया जाए ताकि देश में दोबारा से भ्रष्टाचार, घोटालों की राजनीति कायम हो सके।

हालाँकि, इस बात में दो-राय नहीं है कि किसी भी राजनैतिक पार्टी का दामन पूर्ण रूप से साफ़ नहीं होता है क्योंकि पार्टी से जुड़े लोग और नेता ही उसकी साख बनाने या बिगाड़ने का काम करते हैं। अब जैसे कॉन्ग्रेस पार्टी में सैम पित्रौदा और मणिशंकर अय्यर जैसे नेताओं के बयान पार्टी की गति के लिए स्पीड ब्रेकर का काम कर रहे हैं, वैसे ही भाजपा में भी दिग्गज़ नेताओं और नामी चेहरों की ओर से ऐसे बयान आए हैं जिन्होंने विपक्ष को मोदी सरकार पर उंगली उठाने का मौक़ा दिया है। इस लेख में हम उन बिंदुओं पर बात करेंगें जिसके कारण चुनाव प्रचार में भाजपा सरकार को फायदा पहुँचा लेकिन छोटी-छोटी गलतियों के कारण विपक्ष ने उन्हें आड़े हाथों लिया।

शुरुआत उन कार्यों को गिनाने से करते हैं जिनका जिक्र प्रचार में भी हुआ है और जिनके कारण पूरा देश और साथ में मोदी सरकार भी इस बात को लेकर निश्चिंत है कि 2019 में दोबारा से भाजपा ही सत्ता में आएगी।

अखबार में छपने वाली योजनाओं को मोदी सरकार ने कार्यन्वित किया

2014 में शुरू हुआ मोदीकाल ऐतिहासिक है इस बात में कोई संशय नहीं है। 2016 में हुई नोटबंदी की आलोचनाएँ भले ही मोदी सरकार ने एक निश्चित तबके और गिरोह के लोगों के कारण झेलीं लेकिन हकीकत यही है कि नोटबंदी के कारण देश ने कैशलेश स्थिति में खुद को डिजीटल रूप दिया। ये मोदी सरकार की डिजिटल इंडिया योजना का ही परिणाम है कि 2014-15 में जहाँ मात्र ₹316 करोड़ के ट्रान्जेक्शन हुए थे, वहीं 2017-2018 में यह आँकड़ा ₹2,071 करोड़ तक पहुँच गया।

आँकड़ों में आए इन उछालों को हम तकनीक का प्रभाव कहकर मोदी की कोशिशों को दरकिनार करने की कोशिश कर सकते हैं लेकिन हम हकीकत को नहीं बदल सकते हैं। जो लोग सक्रिय होकर डिजिटल प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल कर रहे हैं, वो शायद आज नहीं लेकिन कल इस बात को जरूर स्वीकारेंगे कि बिना मोदी सरकार द्वारा लिए इन बड़े फैसलों के मुरमुरे बेचने वाले व्यक्ति को कैशलेश पेमेंट की जरूरत समझाना असंभव था।

जिस बदलते भारत की तस्वीर हम कल्पना में सोचते थे उसे मोदी सरकार ने 5 सालों में हकीकत का चेहरा देने की कोशिश की है। उन योजनाओं को जमीनी स्तर पर कार्यान्वित किया गया जो सिर्फ़ अखबार में प्रचार का हिस्सा बनकर रह जाती थी। उज्जवला योजना ने जहाँ हर घर, हर रसोई में गैस सिलेंडर भेजा वहीं मेक इन इंडिया के कारण भारत ने अनेकों उपलब्धियाँ हासिल की।

सैमसंग जैसी प्रतिष्ठित मोबाइल कंपनी जो अभी तक केवल विदेशों में अपने मोबाइल सेट का निर्माण करती थी, उसने पहली बार इसी बीच भारत में अपने मोबाइल बनाने शुरू किए। नौकरी से ज्यादा इस दौरान लोगों ने व्यवसाय पर फोकस करना शुरू किया। युवाओं में छिपी प्रतिभाओं को कौशल योजना के तहत पहचाना गया। उन्हें अपना स्टार्ट अप शुरू करने के लिए प्रेरित किया गया। जन-धन योजना के जरिए हर तबके के लोगों के बैंक में खाते खुलवाए गए। आवास योजना की मदद से गरीब लोगों को छत मुहैया कराई गई।

राष्ट्रहित में मोदी सरकार की उपलब्धियाँ

सामाजिक उत्थान के अलावा मोदी सरकार ने राष्ट्रहित में अनेकों ऐसे फैसले लिए हैं जिनके कारण 2019 के लोकसभा चुनाव में भी 2014 वाली मोदी लहर बरकरार है। बालाकोट में एयरस्ट्राइक, उरी में सर्जिकल स्ट्राइक, अभिनंदन की वापसी, मसूद अजहर के वैश्विक आतंकी होने की घोषणा वो हालिया मुद्दे हैं जो शायद ही किसी के भीतर से मोदी के बतौर भावी प्रधानमंत्री होने पर सवाल उठाएँ।

ये मोदी सरकार की उपलब्धि ही है कि इन पाँच साल के कार्यकाल में सीमा के भीतर कोई बड़ी आतंकी घटना नहीं हुई हैं, और जो घटनाएँ हुई हैं उनका सेना ने मुँहतोड़ जवाब दिया है। पिछली सरकार के कार्यकाल में जहाँ सेना को आदेशों का इंतजार करना पड़ता था वहीं मोदी के कार्यकाल में सेना को हर रूप से मजबूती मिली। अमेरिका की असहमति के बावजूद भी मोदी काल में भारत एस-400 मिसाइल रूस से खरीदने वाला विश्व का तीसरा देश बना है।

नीरव मोदी, विजय माल्या जैसे भगौड़ों को देश वापस लाकर सजा दिलाने के लिए हर मुमकिन कोशिशे की गईं। इसी काल में अगस्ता वेस्टलैंड घोटाले के बिचौलिया मिशेल एंडरसन को पकड़कर देश लाया गया। रोहिंग्याओं को वापस भेजने के लिए मोदी सरकार ने कड़े कदम उठाए। पाकिस्तान से आए शरणार्थियों को मोदी काल में पहचान मिली और कई शरणार्थियों ने मोदी सरकार के कारण पहली बार भारत में मतदान किया। असम में AFSPA हटाने का फैसला 29 साल बाद लिया गया। अब तक शहंशाह की जिंदगी गुजारने वाले रॉबर्ट वाड्रा पर ईडी ने शिकंजा कसा। डोकलाम जैसा विवाद मोदी काल में ही सुलझा है।

इसके अलावा देश में अन्य करों को खत्म करके जीएसटी लागू हुआ जिसका देश भर में निश्चित गिरोह द्वारा विरोध हुआ लेकिन विरोध में उठे सुरों पर खुद सवाल निशान लगे जब मनमोहन सिंह ने जीएसटी काउंसिल के लिए खुद अरूण जेटली को सम्मानित किया। मोदी काल में बड़े-बड़े राजनेताओं पर लगे आरोपों पर गंभीरता से कार्रवाई हुई।

मोदी से पहले भारत के नेता इजराइल और फिलीस्तीन की यात्रा पर जाने से बचते रहे थे लेकिन मोदी ने इस हिचक को तोड़ा। वह इजराइल भी गए और उन्होंने फिलिस्तीन की यात्रा भी की। मोदी ने इन दोनों देशों की अलग-अलग यात्रा कर कूटनीतिक स्तर पर दोनों देशों से रिश्तों को नई गर्मजोशी दी।

मोदी सरकार ने वंचित सवर्णों को 10 प्रतिशत आरक्षण दिया, जिसकी किसी और सरकार से उम्मीद भी असंभव थी। पीएम ने किसान योजना के जरिए किसानों को साल में 6000 देने का वादा किया, जिसकी पहली किस्त किसान तक पहुँच भी चुकी है।

इन सबके अलावा मोदी के खिलाफ़ विपक्ष द्वारा की गई ओछी बयानबाजी मे भी चुनाव प्रचार में मोदी को काफ़ी फायदा पहुँचा है। जनता ने मोदी के खिलाफ होती बयानबाजियों में विपक्ष का असली चेहरा देखा है। जनता ये जानती और समझती है कि 2019 में प्रधानमंत्री पद के लिए नरेंद्र मोदी के अलावा देश के पास कोई और विकल्प नहीं हैं।

प्रधानमंत्री पर हुई ओछी बयानबाजियों को पढ़ने के लिए आप इस आर्टिकल को पढ़ सकते हैं- ‘मर्यादा’ का भार सिर्फ मोदी पर ही क्यों… विपक्ष ‘शब्दों की गरिमा’ का अर्थ भूल गया है क्या?

चुनाव प्रचार में हुई गलतियाँ

बेवजह अली और बजरंगबली में उलझे योगी आदित्यनाथ– मुख्यमंत्री योगी द्वारा चुनाव प्रचार में ‘अली और बजरंगबली’ वाला बयान काफ़ी विवादस्पद रहा जिसके कारण इसका खामियाजा भाजपा को उठाना पड़ा। योगी पार्टी का एक मुख्य चेहरा हैं, लेकिन उनकी ऐसी ही बयानबाजी के कारण उन पर 72 घंटे का बैन लगा। जिस समय का इस्तमाल वो पार्टी के समर्थन में कर सकते थे, उसमें उन्हें मौन धारण करना पड़ा।

मेनका गाँधी का मुस्लिम वोटर्स पर बयान– मेनका गाँधी को अपने बयान पर काफ़ी आलोचनाओं का सामना करना पड़ा था, इस दौरान उन्होंने अपनी जीत का दावा करते हुए कहा था कि जीत के बाद अगर अल्पसंख्यक उनके पास काम करवाने आता है तो उन्हें इस बारे में सोचना पड़ेगा।

उदितराज का पार्टी छोड़ना- भले ही उदितराज को पार्टी ने इन चुनावो में एक बेहतर विकल्प के रूप में न देखा हो लेकिन ये बात सच हैं कि दिल्ली में उदितराज एक निश्चित तबके का चेहरा थे। अगर पार्टी चाहती तो उन्हें पहले निष्कासित किया जा सकता था, लेकिन उदितराज का इस तरह कॉन्ग्रेस में शामिल हो जाना। भाजापा की चुनाव प्रचार में हुई गलती की तरह है।

हेमंत करकरे से लेकर गोडसे पर साध्वी प्रज्ञा के बयान– भाजपा ने भोपाल सीट पर दिग्विजय सिंह के ख़िलाफ़ साध्वी प्रज्ञा को उतारकर एक बड़ा दाव खेला था, लेकिन साध्वी प्रज्ञा के विवादित बयानों के कारण भाजपा सरकार को विपक्ष आड़ों हाथ लेता रहा।

जिन्ना के पक्ष में भाजपा नेता के बोल- मध्य प्रदेश में बीजेपी प्रत्याशी गुमान सिंह डामोर ने भी विवादास्पद बयान दिया था जिससे भाजपा पर सवाल उठे थे। गुमान ने इस दौरान कहा था कि अगर स्वतंत्रता के बाद पंडित जवाहर लाल नेहरू ने प्रधानमंत्री बनने की जिद्द न की होती तो इस देश का बँटवारा नहीं होता। मोहम्मद अली जिन्ना एक एडवोकेट और विद्वान व्यक्ति थे। गुमान के इस बयान पर सोशल मीडिया पर उनकी काफ़ी आलोचना हुई थी।

इसके अलावा 2018 में भाजपा की लगातार तीन राज्यों में हार भी इस बात को दर्शाती है कि कहीं न कहीं भाजपा के कार्यकर्ता मोदी की पनाह में अतिआत्मविश्वासी हो गए जिसका खामियाजा उन्हें तीन राज्यों को गवाकर चुकाना पड़ा। कई जगहों पर पार्टी ने उन उम्मीदवारों को टिकट दिया जिनसे स्थानीय लोगों को शिकायत थी। ऐसे उम्मीदवारों ने जनता के बीच अपने कार्यों को गिनाने की बजाए मोदी के नाम पर वोट माँगे। इस कारण से मोदी की छवि भी धूमिल हुई और पार्टी की साख पर भी सवाल उठे।

सरकार तो मोदी की ही बनेगी… कॉन्ग्रेस ने ऑफिशली मान ली अपनी हार

लोकसभा चुनाव के आखिरी चरण का मतदान आज समाप्त हुआ। शाम साढ़े छह बजे से तमाम मीडिया चैनलों ने एग्जिट पोल दिखाने शुरू कर दिए। लगभग सारे एग्जिट पोल भाजपा गठबंधन मतलब NDA की सरकार बनने को लेकर रुझान दिखा चुके हैं। मतलब कॉन्ग्रेस के पास नंबर्स नहीं आने वाले हैं।

मीडिया चैनलों के साथ-साथ सोशल मीडिया पर कुछ ‘जागरूक’ लोग ऐसे भी रहे जो एग्जिट पोल न सही, लेकिन पोल खूब चला रहे थे। ऐसी ही एक यूजर हैं सोनाक्षी पटेल। इन्होंने एक ट्वीट किया – सरकार किसकी बन रही है? मोदी के लिए लव वाला बटन दबाएँ, राहुल और सहयोगियों के लिए रिट्वीट करें। कॉन्ग्रेस के आधिकारिक हैंडल से इस ट्वीट को रिट्वीट किया गया।

मतलब कॉन्ग्रेस ने 23 तारीख को चुनाव नतीजे आने तक का भी इंतजार करना जरूरी नहीं समझा। समझे भी कैसे! देश की सबसे पुरानी राजनीतिक पार्टी कॉन्ग्रेस भी उमर अबदुल्ला के ट्वीट से सहमत हो गई है। उमर ने भी सभी एग्जिट पोल को गलत मानने से इनकार कर दिया और 23 मई को इंतजार करने की सिफारिश की थी।

10 Exit Polls में से 9 में NDA को बहुमत, 7 में 300 पार, राहुल बने रहेंगे ‘PM इन वेटिंग’

अगर सभी एग्जिट पोल्स पर नज़र डालें तो पता चलता है कि भाजपा के नेतृत्व वाली राजग गठबंधन को आसान बहुमत मिलती दिख रही है। नीचे हमने सभी एग्जिट पोल्स की जो सूची तैयार की है, उनमें से अगर एक को छोड़ दिया जाए तो बाकी सभी में एनडीए स्पष्ट बहुमत की ओर जाता दिख रहा है। अर्थात, जनता ने जोड़-तोड़ वाली सरकार को नकार कर सभी संभावनाओं पर विराम लगा दिया है। इन एग्जिट पोल्स की मानें तो, न तो कॉन्ग्रेस के समर्थन से कोई सरकार बन सकती है और न ही विपक्षी एकता से कोई खिचड़ी सरकार खड़ी हो सकती है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने दूसरे कार्यकाल के लिए तैयार हैं।

नीचे सूचीबद्ध की गई 10 मीडिया एजेंसियों में से 7 ने राजग को 300 से अधिक सीटें दी है, जो 272 के जादुई आँकड़े से ज्यादा है। इंडिया टुडे-एक्सिस के पोल ने जहाँ सबसे ज्यादा अधिकतम 365 सीटों का अनुमान लगाया है, न्यूज़ एक्स-नेता के एग्जिट पोल ने राजग को सबसे कम 242 सीटें दी है। अगर यूपीए की बात करें तो कॉन्ग्रेस के नेतृत्व वाला गठबंधन बहुमत तो दूर, 10 में से 9 एग्जिट पोल में 140 का आँकड़ा पार करने में भी विफल रहा है। कॉन्ग्रेस की सीटें ज़रूर बढ़ेंगी, लेकिन राहुल गाँधी ‘पीएम इन वेटिंग’ ही रहेंगे।

10 एग्जिट पोल्स में से 9 में राजग को बहुमत

टाइम्स नाउ के Exit Poll के अनुसार 542 लोकसभा सीटों में एनडीए को 306 सीटें यूपीए को 132 और अन्य पार्टियों को 104 सीटें मिल रही हैं। द क्विंट C Voter एग्जिट पोल के अनुसार, NDA को पूर्ण बहुमत मिलेगा। सीटों की बात करें तो NDA को 287 सीटें मिलेंगी और UPA को 128 सीटें मिलने की उम्मीद जताई है। वहीं अन्य को 127 सीटें मिल सकती हैं।

वहीं अगर न्यूज़ 24-चाणक्या के एग्जिट पोल की बात करें तो भाजपा के नेतृत्व वाली राजग गठबंधन को 350 सीटें मिलेगी, वहीं कॉन्ग्रेस नीत यूपीए मात्र 95 सीटों पर सिमट जाएगा। अन्य के खाते में 97 सीटें आएँगी। दूसरी तरफ़ इंडिया टुडे-एक्सिस द्वारा जारी किए गए एग्जिट पोल के अनुसार राजग को 339 से 365 सीटें आएँगी तो यूपीए 77 से १०८ पर सिमट जाएगी।

ध्रुव राठी के धैर्य का बाँध टूटा, बोले राहुल गाँधी ने 1 ही झूठ किया रिपीट, हमारा प्रोपेगैंडा पड़ा हल्का

इंटरनेट ट्रोल और NDTV पत्रकार ध्रुव राठी के धैर्य का बाँध भी एग्जिट पोल्स को देखकर आखिरकार टूट गया। ध्रुव राठी ने ट्विटर पर मीडिया और राजनीतिक समूहों के प्रति अपना रोष व्यक्त करते हुए 2 ट्वीट के माध्यम से अपनी कड़ी नाराजगी व्यक्त की है।

पहले ट्वीट में ध्रुव राठी ने लिखा है, “मुझे आश्चर्य नहीं होगा अगर एग्जिट पोल्स सही निकले। लोगों ने प्रोपेगैंडा के असर को हलके में लिया।” कॉन्ग्रेस की ओर इशारा करते हुए ध्रुव राठी ने कहा, “90% मीडिया, बॉलीवुड फिल्म, TV सीरियल्स, सोशल मीडिया एडवर्टीस्मेंट आपके कण्ट्रोल में होने के बावजूद, सभी आपको एक मसीहा के रूप में स्थापित और भी आपको ‘गंदा धंधा’ करने के लिए खुली छूट दे रखी है। इस सबका बड़ा असर हुआ है।”

ध्रुव राठी ने दूसरे ट्वीट में लिखा है, “सच्चाई चाहे जो भी हो, अगर एक आदमी किसी झूठ को दिन में 10 बार सुने, तो वो उसे सच मान लेता है। यहाँ तक कि हिटलर को भी आखिरी इलेक्शन में 33% जर्मन्स का समर्थन मिला था।”

इन दोनों ट्वीट्स को देखकर अंदाजा लगाया जा सकता है कि सोशल मीडिया पर प्रोपेगैंडा फैलाने के लिए मशहूर ध्रुव राठी का निशाना कोई और नहीं बल्कि, कॉन्ग्रेस पार्टी अध्यक्ष राहुल गाँधी हैं। जिस प्रकार से राहुल गाँधी लगातार मोदी सरकार को घोटालों में घिरा हुआ साबित करने के लिए झूठे डाक्यूमेंट्स और बयानों का सहारा लेते रहे, शायद ध्रुव राठी उन्हीं से अपनी निराशा व्यक्त कर रहे थे। यहाँ तक कि राहुल गाँधी को ‘चौकीदार चोर है’ जैसे नारों के लिए सुप्रीम कोर्ट ने फटकार भी लगाई थी और उन्हें इसके लिए माफ़ी भी माँगनी पड़ी थी।

ट्रोल राठी स्वयं भी निम्न कोटि के प्रोपेगंडाबाज़ हैं जो अक्सर झूठ और प्रपंच के सहारा लेकर लोगों में भ्रांतियाँ फैलाते पाए जाते हैं। यही कारण है कि वो इस बात को बेहतर तरीके से समझते हैं कि लोगों ने उनके प्रोपेगंडा को हलके में लिया जिस कारण एग्जिट पोल में उनके फेवरेट आम आदमी पार्टी का डब्बा गोल हो गया। साथ ही, राहुल गाँधी को मसीहा बनाने की भी सारी कवायद काम नहीं आई। तमाम फ़र्ज़ी आँकड़ों की मदद से, रोजगार से लेकर दर्शन शास्त्र तक में अपनी रुचि दिखाने वाले राठी इस बात से बेहद निराश दिखे जो उनके ट्वीट में पढ़ने को मिलता है।

हमें ध्रुव राठी की स्थिति से सहानुभूति है और सलाह यह है कि ऐसे समय में उन्हें अपने दोस्तों और झुंड के साथ रहना चाहिए।

फिलहाल एग्जिट पोल के नतीजों को देखकर लिबरल गैंग और मीडिया गिरोहों में विशेष निराशा देखने को मिली है। रिपोर्ट्स लिखे जाने तक NDTV के ही वयस्क पत्रकार रवीश कुमार भी अपने प्राइम टाइम में अपने समर्थकों से धैर्य बनाए रखने की अपील करते देखे गए और उन्होंने कहा कि एग्जिट पोल की बातों में आकर हौसला ना खोएँ और 23 मई तक कम से कम प्रतीक्षा करें।

बौखलाई ममता का नया ज्ञान: गप्पबाज़ी से EVM हैक करेगी BJP! ये मजाक नहीं है

हालिया इतिहास के सबसे ‘खूनी’ चुनावों में से एक कराने के बाद अब ममता बनर्जी ने Exit Polls आते ही बहानेबाजी शुरू कर दी है। Exit Polls में भाजपा को लोकसभा चुनाव जीतता देखकर उन्होंने ट्वीट किया, “मुझे एग्जिट पोल पर विश्वास नहीं होता। हज़ारों EVM को मैनिपुलेट करने या उनको बदलने की साज़िश की जा रही है इस एग्जिट पोल की गप्पबाज़ी से। मैं सारी विपक्षी पार्टियों से एकजुट होने, मज़बूत बनने और बुलंद रहने की अपील करती हूँ।”

राग पुराना, ‘दिलजलों’ का पसंदीदा फ़साना

ममता बनर्जी और विपक्ष के अन्य नेताओं का EVM खटराग नया नहीं है। विपक्षी नेता इसे लेकर निर्वाचन आयोग से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक गए थे, लेकिन हर जगह उन्हें मुँह की ही खानी पड़ी। उसी समय यह स्पष्ट हो गया था कि नतीजे अगर उनके मन-मुताबिक नहीं हुए तो अपनी नकारात्मक, हिन्दूफोबिक, और भ्रष्ट राजनीति की हार मानने की बजाय EVM को बलि का बकरा बनाया जाएगा। और वही हो रहा है।

‘स्ट्रॉन्ग’ से मतलब क्या है? इरादा क्या?

आख़िर ममता बनर्जी ‘गॉसिप’ से ईवीएम को बदलने की बात किस विज्ञान के आधार पर कर रही हैं? एक ट्वीट से खुन्नस, निराशा और अज्ञान सब झलकता है। निर्वाचन आयोग ने जब चुनौती दी थी EVM हैक करके दिखाने की, तो कोई राजनीतिक दल नहीं पहुँचा। सभी बँगले झाँक रहे थे।

दूसरी बात यह है कि सारी विरोधी पार्टियाँ एकजुट हो कर करेंगी क्या? क्या ममता बनर्जी यहाँ किसी तरह की धमकी दे रही हैं? अपोज़िशन यूनाइट होकर, स्ट्रॉन्ग और बोल्ड होकर करेगा क्या? क्या किसी लोकतांत्रिक संस्था पर हमले की योजना बन रही है या फिर यह एक हार स्वीकारती, गुस्से से भरी हुई नेत्री का क्रोध मात्र है?

NDA को 306, UPA को मिल रही हैं 104 सीटें, जानिए राज्यवार सीटें: TIMES NOW Exit Poll

लोकसभा चुनाव ख़त्म होने के साथ ही एग्जिट पोल्स के नतीजे आने लगे हैं और विभिन्न एग्जिट पोल्स में भाजपा और कॉन्ग्रेस गठबंधनों को कितनी सीटें मिल रही हैं, इसकी पल-पल की जानकारी आपको यहाँ मिलेगी। जितने भी न्यूज़ चैनलों और सर्वे एजेंसियों द्वारा संयुक्त रूप से एग्जिट पॉल्स की जानकारियाँ जैसे-जैसे बाहर आती जाएँगी, हम आपको बताते जाएँगे। इसीलिए पल-पल के अपडेट के लिए यहाँ जुड़े रहें। यहाँ हम आपको टाइम्स नाऊ द्वारा जारी किए गए एग्जिट पोल की अपडेट देंगे। इसके अनुसार, किस राज्य में किस पार्टी व गठबंधन को कितनी सीटें आ रही हैं और कुल आँकड़े कैसे दिख रहे हैं, इसे नीचे देखें।

टाइम्स नाउ के Exit Poll के अनुसार 542 लोकसभा सीटों में एनडीए को 306 सीटें यूपीए को 132 और अन्य पार्टियों को 104 सीटें मिल रही हैं।

राज्यवार अपडेट-

बिहार- में एनडीए को 30 सीटें, यूपीए को 10 और यहाँ अन्य 0 पर सिमटेंगे।
उत्तरप्रदेश – एनडीए- 58 सीटें ,यूपीए-2 और महागठबंधन- 20 सीटें मिलती दिख रही हैं।
महाराष्ट्र- एनडीए-38, यूपीए-10 और अन्य-0।
उड़ीशा – एनडीए-12, यूपीए-1, अन्य-8।
तमिलनाडु- एनडीए-9, यूपीए-29, अन्य-0।
बंगाल- एनडीए को 11, यूपीए को 2, तृणमूल को 28, लेफ्ट- 1।
असम- एनडीए-6, यूपीए-7, अन्य-1।
नॉर्थ ईस्ट– एनडीए को 5, यूपीए-2, अन्य-4।
कर्नाटक- NDA-21, यूपीए-7, अन्य-0।
मध्य प्रदेश- एनडीए-24, बसपा-0, यूपीए-5, अन्य-0।
राजस्थान– एनडीए-21, बसपा-4, यूपीए-4, अन्य-0।
पंजाब– एनडीए-3, आप-0, यूपीए-10, बसपा-0


कितने सही और कितने ग़लत हुए थे पिछले एग्जिट पॉल्स

2014 के लोकसभा चुनाव के एग्जिट पोल को समझने के लिए नीचे दी गई टेबल पर नज़र डालते हैं। इस टेबल को आप देख कर जान सकते हैं कि किस न्यूज़ चैनल द्वारा किस गठबंधन को कितनी सीटें दी गई थीं और किसके आँकड़े कितने सही या ग़लत साबित हुए थे?

2014न्यूज़ 24(टुडे चाणक्य)टाइम्स नाउ(ORG)CNN IBN(CSDS)हेडलाइंस टुडे(ITG सिसरो)इंडिया टीवी (सी वोटर)NDTVABP(नील्सन)कुल सीटें
NDA340 (+/-14)249270-282272 (+/-11)289279281336

UPA
070 (+/-9)14892-102115 (+/-5)101103097059

ABP Exit Poll: कर्नाटक-छत्तीसगढ़ में बीजेपी और कॉन्ग्रेस में काँटे की टक्कर

लोकसभा चुनाव ख़त्म होने के साथ ही एग्जिट पोल्स के नतीजे आने लगे हैं और विभिन्न एग्जिट पोल्स में भाजपा और कॉन्ग्रेस गठबंधनों को कितनी सीटें मिल रही हैं, इसकी पल-पल की जानकारी आपको यहाँ मिलेगी। जितने भी न्यूज़ चैनलों और सर्वे एजेंसियों द्वारा संयुक्त रूप से एग्जिट पोल्स, की जानकारियाँ जैसे-जैसे बाहर आती जाएँगी, हम आपको बताते जाएँगे। इसीलिए पल-पल के अपडेट के लिए यहाँ जुड़े रहें। यहाँ हम आपको ABP न्यूज़ चैनल द्वारा जारी किए गए एग्जिट पोल की अपडेट देंगे। इसके अनुसार, किस राज्य में किस पार्टी व गठबंधन को कितनी सीटें आ रही हैं और कुल आँकड़े कैसे दिख रहे हैं, इसे नीचे देखें।

ABP न्यूज़ चैनल के Exit Poll के अनुसार:

  • राजस्थान में बीजेपी को 25 में से 19+ सीट मिलने की संभावना है और 6 सीटें कॉन्ग्रेस को मिल रही है।
  • महाराष्ट्र में बीजेपी को कुल 48 सीट में से 34+ सीटें मिल सकती हैं और कॉन्ग्रेस को 14+ सीटें मिल सकती है। साथ ही कॉन्ग्रेस को मात खाते हुए बताया गया।
  • गुजरात में कुल 26 सीटों में से 24 सीटें बीजेपी को मिलने की संभावना है और 2 सीटें कॉन्ग्रेस को मिल सकती हैं।
  • छत्तीसगढ़ में 11 सीटों में से 6 सीटें बीजेपी को मिलेंगी और 5 सीटें कॉन्ग्रेस को मिलेंगी।
  • उत्तराखंड में 5 में से 4 सीटें बीजेपी के खाते में जाती दिख रही हैं, और 1 सीट कॉन्ग्रेस को मिल सकती है।
  • मध्य प्रदेश में कुल 29 सीटों में से 24 सीट बीजेपी को मिलने की बात कही है और 5 सीटें कॉन्ग्रेस के खाते में जा सकती है।
  • बिहार में 40 में से 34 सीट NDA को मिल रही हैं तो वहीं यूपीए गठबंधन 6 सीटों पर सिमट रहा है।
  • कर्नाटक में 28 में से बीजेपी को 15 और कॉन्ग्रेस 13 सीट मिलने की संभावना है।

कितने सही और कितने ग़लत हुए थे पिछले एग्जिट पोल्स

2014 के लोकसभा चुनाव के एग्जिट पोल को समझने के लिए नीचे दी गई टेबल पर नज़र डालते हैं। इस टेबल को आप देख कर जान सकते हैं कि किस न्यूज़ चैनल द्वारा किस गठबंधन को कितनी सीटें दी गई थीं और किसके आँकड़े कितने सही या ग़लत साबित हुए थे?

2014न्यूज़ 24(टुडे चाणक्य) टाइम्स नाउ(ORG)CNN IBN(CSDS)हेडलाइंस टुडे(ITG सिसरो)इंडिया टीवी (सी वोटर)NDTVABP(नील्सन)कुल सीटें
NDA340 (+/-14)249270-282272 (+/-11)289279281336

UPA
070 (+/-9)14892-102115 (+/-5)101103097059

इस टेबल के अनुसार देखा और समझा जा सकता है कि टुडे चाणक्य के अलावा किसी भी एजेंसी का एग्जिट पोल सटीक नहीं था। इसलिए एग्जिट पोल को लेकर मीडिया के साथ-साथ जनता की उत्सुकता तो रहती है लेकिन यह उम्मीदों पर भी खरी उतरे, इसकी संभावना नहीं के बराबर मान के चलनी चाहिए।

एग्जिट पोल देख लिबरल गिरोह छोड़ रहा विष-फुंकार, गर्मी में निकल रहा झाग

जैसे-जैसे Exit Polls के नतीजे जारी करने का समय (शाम 6.30 बजे) पास आ रहा है, पत्रकारिता के समुदाय विशेष और फ़ेक-लिबरलों-अर्बन-नक्सलियों के सर पर ‘गर्मी चढ़नी’ शुरू हो गई है। और यह उनके ट्वीट्स में भी दिख रही है। इस जगह हम उनकी इन्हीं बौखलाई हुई प्रतिक्रियाओं का संकलन कर रहे हैं… यह आर्टिकल लगातार अपडेट होगा, नज़र रखें- उम्मीद है लिबरल मित्र हमें निराश नहीं करेंगे!

राज्यसभा टीवी से बेआबरू हो रुखसत किए गए MK वेणु इकलौते ABP के एक्ज़िट पोल में NDA को 6 सीटें कम होने की ख़ुशी मना रहे हैं। क्योंकि “दिल के खुश रखने को ‘वेणु’ ये बहाना मस्त है”

दीदी ने की EVM को गिरफ्तार करने की तैयारी, “मुझे एग्जिट पोल पर विश्वास नहीं होता। हज़ारों EVM को मैनिपुलेट करने या उनको बदलने की साज़िश की जा रही है इस एग्जिट पोल की गप्पबाज़ी से। मैं सारी विपक्षी पार्टियों से एकजुट होने, मज़बूत बनने और बुलंद रहने की अपील करती हूँ।”

ऑपइंडिया की सलाह, बोलिए “जय श्रीराम”

रूपा सुब्रमण्या जी की कुल अंग्रेजी का सार यही है कि लोगों को शर्म आनी चाहिए मोदी को जिताने में… (मेरे लिए) कुछ भी तो नहीं किया है!

उमर अब्दुल्ला इस प्रतिक्रिया में कम-से-कम राहुल गाँधी से ज्यादा ‘मैच्योर’ नेता लग रहे हैं। उन्होंने मान लिया कि अगर हर एक्ज़िट पोल भाजपा को जीतता दिखा रहा है तो सब-के-सब तो गलत नहीं हो सकते। लेकिन उमर अब्दुल्ला जी, कश्मीर का प्रधानमंत्री आप अब भी नहीं बनेंगे!

राना अयूब के अनुसार महाराष्ट्र में लोगों ने किसानों के दुःख-दर्द को सीरियसली नहीं लिया, और गुजरात अपने दो नेताओं मोदी-शाह से चिपक कर बैठा है…

राजदीप सरदेसाई ने भूमिका बाँधी…

बरखा दत्त घर वापसी को लगभग तैयार, इतने अच्छे दिन तो मोदी ने भी नहीं सोचे होंगे…

अपशब्दों की उल्टियाँ शुरू… अशोक स्वैन आज अगर मोदी को गरिया रहे हैं तो 23 को जनता भी तैयार रहे…

राहुल बाबा के अलावा सब की गलतियाँ निकाली जा रहीं हैं… चिदम्बरम अब बस चुनाव में मंदिर बंद करवाने की बात न कर दें!

AAJTAK-AXIS के अनुसार MP, राजस्‍थान, छत्‍तीसगढ़ से कॉन्ग्रेस साफ, खिलेगा कमल

लोकसभा चुनाव ख़त्म होने के साथ ही एग्जिट पोल्स के नतीजे आने लगे हैं और विभिन्न एग्जिट पोल्स में भाजपा और कॉन्ग्रेस गठबंधनों को कितनी सीटें मिल रही हैं, इसकी पल-पल की जानकारी आपको यहाँ मिलेगी। जितने भी न्यूज़ चैनलों और सर्वे एजेंसियों द्वारा संयुक्त रूप से एग्जिट पॉल्स की जानकारियाँ जैसे-जैसे बाहर आती जाएँगी, हम आपको बताते जाएँगे। इसीलिए पल-पल के अपडेट के लिए यहाँ जुड़े रहें।

मध्‍य प्रदेश में बीजेपी को 26-28 सीटें और कॉन्ग्रेस को 1-3 सीटें मिलने का अनुमान व्‍यक्‍त किया गया है। छत्‍तीसगढ़ में बीजेपी 7-8, कॉन्ग्रेस 3-4 सीटें मिलने का अनुमान है। राजस्‍थान में बीजेपी को 23-25 सीटें जबकि कॉन्ग्रेस को 0-2 सीटें मिलने का अनुमान व्‍यक्‍त किया गया है।

इसके आलावा पूरे देश में बीजेपी के पक्ष में पूर्ण बहुमत के रुझान आ रहे हैं। अभी तक के लगभग सभी एग्जिट पोल में बीजेपी को पूर्ण बहुमत दी गई है।