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अजीत झा

संपादक, ऑपइंडिया (हिंदी)

विजय दिवस का दिन, भारत की मिट्टी और भारत की सेना का अपमान: चीन का यह ‘एजेंट’ राष्ट्रद्रोही नहीं तो और क्या है

'अरुणाचल में चीन भारत के जवानों को पीट रहा है', यह कहना राष्ट्रद्रोह है। ऐसा कहने वाले व्यक्ति के साथ राजनीतिक तरीके से नहीं, कानूनी तरीके से निपटा जाना चाहिए।

सुशासन बाबू! हम बिहारियों को मार डालिए, अपने बड़े भाई की तरह रौंद डालिए; पर हमारे बिहार को माफ कर दीजिए

सिद्धांत, शुचिता, मर्यादा, आत्म नियंत्रण... से चले नीतीश कुमार ने पहले अंतरात्मा, लोकलाज, आदर्श को मारा। अब बिहार को क्यों मारने पर तुले हैं?

गौतम गंभीर ने सही कहा है, बातों से नहीं होता न्याय, पर उस सिस्टम का क्या करें जिसमें एसिड अटैक के ‘दोषी’ ही नहीं...

एसिड अटैक के मामलों में दोषसिद्धि की दर बेहद कम है। इसके बिना तेजाब हमला करने वाले दरिंदों में वह खौफ पैदा नहीं होगा, जिसकी बात गौतम गंभीर कर रहे हैं।

AAP को जीत, दिल्ली को दुविधा मुबारक

AAP की केजरीवाल सरकार से भंग होता मोह। BJP शासित निगम के रहते घर के बाहर लगा कूड़े का ढेर। दुविधा में दिल्ली ने खुद का कूड़ा-कूड़ा कर लिया।

NDTV और रवीश कुमारः अब वो फिरते हैं तन्हा लिए दिल को, एक जमाने में मिजाज उनका सर-ए-अर्श-ए-बरीं था

एनडीटीवी मीडिया की अन्य दुकानों की तरह ही है। न पवित्र गाय, न सूअर। वे बस हुनरमंद रहे हैं विष्ठा को भस्म बता बेचने और खुद को बुद्धिजीवी बताने के।

सत्येंद्र जैन का ‘तबरेज भाई’ कौन, जेल में मालिश करवाने में 20 थे बिहार वाले ‘तबरेज आलम’: जिनसे सीख सकती है केजरीवाल एंड मंडली

दिल्ली के मंत्री सत्येंद्र जैन भले जेल में 'मसाज' लेते हों पर तबरेज भाई के गुर्गे जेल में 'मालिश' लेते थे। वैसे तबरेज भाई 'मुँहचोर' भी नहीं थे कि गुर्गों की मालिश को फिजियोथेरेपी बता दें।

जिस मस्जिद के लिए चंदा देना कुछ मुस्लिमों के लिए भी हराम, उसके लिए हिंदू कर रहे दान: अयोध्या में मस्जिद बनाने के लिए...

भले 500 साल के संघर्ष के बाद हिंदुओं को अयोध्या में मंदिर का अधिकार मिला, लेकिन मस्जिद बनाने के लिए भी उनका 'समर्पण' ऐसा है कि पैसा देने के मामले में मुस्लिमों को ही पीछे छोड़ दिया है।

अयोध्या और 9 नवंबर: जिस तारीख को चला महंत का फावड़ा-दलित ने रखी नींव की ईंट, उसी तारीख को सुप्रीम कोर्ट भी बोला- रामलला...

अयोध्या और हिंदुओं के संघर्ष में 9 नवंबर बेहद महत्वपूर्ण है। 1989 में इसी तारीख को राम मंदिर का शिलान्यास हुआ। 2019 में इसी तारीख को सुप्रीम कोर्ट का फैसला आया।