राम मंदिर को राष्ट्र की सांस्कृतिक चेतना और संकल्प का हिस्सा बता फूँकी गई उस रथ यात्रा के बिगुल को याद करने के लिए 8 नवंबर से बेहतर दिन नहीं हो सकता। आज आडवाणी 95 साल के हो गए हैं।
जिनको लगता है कि सवाल बेवजह हैं, प्रोपेगेंडा से जुड़े हैं, उन बुद्धिजीवियों को समझना चाहिए कि आदिपुरुष पर सवाल हमारा दृष्टि दोष नहीं, आपकी बुद्धि भ्रष्ट होना है।