Wednesday, July 17, 2024
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सत्येंद्र जैन का ‘तबरेज भाई’ कौन, जेल में मालिश करवाने में 20 थे बिहार वाले ‘तबरेज आलम’: जिनसे सीख सकती है केजरीवाल एंड मंडली

मम्मी कसम कभी तबरेज भाई को कहना न पड़ा- गया सिंह के लिए भाभी जी बहुत चिंतित हैं। तबरेज भाई ने कभी न कहा- भाभी जी, हम समझ सकते हैं... जब गया का काम हो गया तब भी नहीं। बस भाभी जी को गुजर-बसर के लिए 'मनी लॉन्ड्रिंग' का सांत्वना दे आए।

वे सबके तबरेज भाई थे। नाम था- तबरेज आलम। बिहार में विधायक थे। सचीमुची के नहीं। उस बिहार के जो प्रकाश झा ने ‘अपहरण’ नाम की सनिमा में दिखाया है। तबरेज भाई बने नाना पाटेकर का जेल में गजब जोगार था। अपने गुर्गों के लिए विशेष इंतजाम कराने में उनका जोर न था। दिल्ली के मंत्री सत्येंद्र जैन भले जेल में ‘मसाज’ लेते हों पर तबरेज भाई के गुर्गे जेल में ‘मालिश’ लेते थे।

फिल्म अपहरण में जेल के भीतर मालिश का दृश्य

लेते क्या थे। अधनंगे लेट बैरक में करवाते थे। पूरा तेल चपोर के। उनको वीडियो लीक होने का टेंशन भी न था। वैसे तबरेज भाई ‘मुँहचोर’ भी नहीं थे कि गुर्गों की मालिश को फिजियोथेरेपी बता दें। तबरेज भाई के गुर्गे की सेवा के लिए जेल में पट्ठों की भी कमी न थी। थोबड़े से ही हार्डकोर लगते थे। उन्हें ‘बलात्कारी’ को ‘फिजियोथेरेपिस्ट’ बताकर छिपाना भी न पड़ता था।

तिहाड़ में मसाज लेते सत्येंद्र जैन

बाबू रमाधीर सिंह का कहना है कि हिंदुस्तान में जब तक सनिमा है लोग चुतिया बनते रहेंगे। ऐसे ही तबरेज भाई से सीख आप चुतिया बना सकती है। कहते हैं कि ‘अपहरण’ उस इंडस्ट्री पर बनी है जो ‘सामाजिक न्याय के मसीहा’ वाले बिहार में एकमात्र फलता-फूलता उद्योग था। इस इंडस्ट्री की ‘मनी लॉन्ड्रिंग’ अपने तबरेज भाई ही करते थे। ये तब की बात है जब मनी लॉन्ड्रिंग में सत्येंद्र जैन जेल न पहुँचे थे।

तबरेज भाई का जलवा ही कुछ ऐसा था। उनके गुर्गे जेल में थूक चटवाते थे। बैरक में बैठे-बैठे ‘प्रोटेक्शन मनी’ वसूलते थे। मजाल कोई सुकेश चंद्रशेखर कभी शिकायत कर दे। उनके गुर्गे को जब मन होता धोती-कुर्ता पहन जेल से बाहर निकल जाते। मम्मी कसम कभी तबरेज भाई को कहना न पड़ा- गया सिंह के लिए भाभी जी बहुत चिंतित हैं। तबरेज भाई ने कभी न कहा- भाभी जी, हम समझ सकते हैं… जब गया का काम हो गया तब भी नहीं। बस भाभी जी को गुजर-बसर के लिए ‘मनी लॉन्ड्रिंग’ का सांत्वना दे आए।

वक्त बदला तो नए गुर्गे के लिए तबरेज भाई ने जेल में जिम तक जोगार दी। मजाल कोई बग्गा लिख दे कि जिम का सामान बाहर से आया है। तबरेज भाई के गुर्गे कभी ड्राई फ्रूट्स और सलाद के लिए भी न रोए। भई जो ‘प्रोटेक्शन मनी’ लेता हो वो काहे का रोए। जितने देर में रोएगा उतने देर में धोती-कुर्ता पहनकर मौर्या से खाकर लौट आएगा। इसलिए वो नौबत ही न आई कि तबरेज भाई के गुर्गों को यह कहना पड़े कि वजन कम हो गया है। आयरन और प्रोटीन की कमी हो रही है।

बताते हैं कि दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल सनिमा प्रेमी हैं। उनके नंबर दो मनीष सिसोदिया भी। AAP के संस्थापक मालिक ​सनिमा का रिव्यू भी देते रहे हैं। सो, लगता नहीं उन्होंने ‘अपहरण’ मिस की होगी। शायद वर्ल्ड क्लास स्कूल और शराब पॉलिसी बनाने में पटकथा भेजे से फ्री बिजली-पानी की तरह निकल गई होगी।

तबरेज भाई मिसाल हैं। बिना सत्ता में रहते हुए भी जेल जोगार से चलाए जाने का। कोई शोर नहीं। यहाँ तिहाड़ अपनी ही सरकार की। फिर भी बिना तेल चपोरे मसाज पर इतनी थू-थू! वो भी तबरेज भाई वाली संभावनाओं से ओत-प्रोत ‘अमानतुल्लाह’ के रहते। लाहौल विला कूवत…

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अजीत झा
अजीत झा
देसिल बयना सब जन मिट्ठा

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