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ऑपइंडिया स्टाफ़

कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

सार्वजनिक सड़क पर अपनी गाड़ी में होने पर भी वह सार्वजनिक स्थल ही माना जाएगा: सुप्रीम कोर्ट

"निजी वाहन में बिना अनुमति के कोई प्रवेश नहीं किया जा सकता। इसकी अनुमति वाहन का मालिक ही दे सकता है। लेकिन, यदि वाहन सार्वजनिक स्थल पर खड़ा है तो पब्लिक के पास प्राइवेट वाहन को अप्रोच करने का अवसर होता है।"

फिर से खुलेंगी 1984 सिख नरसंहार से जुड़ी फाइल्स, कई नेताओं की परेशानी बढ़ी: गृह मंत्रालय का अहम फैसला

दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधन कमिटी के प्रतिनिधियों की बातें सुनने के बाद केंद्रीय गृह मंत्रालय ने जाँच का दायरा बढ़ा दिया। गृह मंत्रालय ने कहा कि 1984 सिख विरोधी दंगे के वीभत्स रूप को देखते हुए इससे जुड़े सभी ऐसे गंभीर मामलों में जाँच फिर से शुरू की जाएगी, जिसे बंद कर दिया गया था या फिर जाँच पूरी कर ली गई थी।

‘पतली गर्लफ्रेंड’ के मिलते ही पत्नी के मोटापे से हुआ परेशान, बोला- तलाक, तलाक, तलाक!

शाहीन की 5 साल की एक बेटी है और वह जब भी अपनी बच्ची को लेकर ससुराल जाती है तो वहाँ उसके पति के घरवाले उसके साथ मारपीट करते हैं और तीन तलाक का हवाला देकर घर से निकाल देते हैं।

‘अगर अनुच्छेद 370 अस्थायी है तो भारत में जम्मू कश्मीर का विलय भी अस्थायी है’

इस अनुच्छेद की वजह से कश्मीर में आरटीआई भी लागू नहीं है। इसके अलावा शहरी भूमि क़ानून भी वहाँ लागू नहीं होता। जम्मू कश्मीर का अपना अलग ध्वज है और वहाँ के निवासियों के पास दोहरी नागरिकता होती है। यहाँ विधानसभा का कार्यकाल भी 6 वर्षों का होता है।

भगवा ध्वज लहराना और नारे लगाना कोई अपराध नहीं: दलित उत्पीड़न पर हाईकोर्ट का अहम निर्णय

भगवा ध्वज फहराना दलित उत्पीड़न के अंतर्गत अपराध नहीं है। अनुसूचित जाति एवं जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम के तहत दर्ज किए गए एक मामले पर बॉम्बे हाईकोर्ट ने अहम फैसला सुनाते हुए आरोपित को जमानत दी।

मस्जिद से निकली भीड़ ने किया बवाल व पत्थरबाज़ी, बंद कराई दुकानें: 600 लोगों पर मुक़दमा

जूता फैक्ट्री चलाने वाले ज़ाहिद ने आरोप लगाया कि उसके समाज के लोगों ने जबरन उसकी फैक्ट्री बंद कराने की कोशिश की और धमकियाँ दीं। इरफ़ान सलीम, शिराज कुरैशी, महमूद ख़ान, राहत अली, नदीम नूर, जुहैर ख़ान, हाजी बिलाल और तालिब शहजाद सहित कई लोगों पर मुक़दमे दर्ज किए गए।

नागालैंड में ‘मूल निवासी सर्टिफिकेट’ बँटेंगे, असम के NRC से मिलती-जुलती कवायद

एक बार पूरा होने के बाद और कोई मूल निवासी प्रमाण पत्र जारी नहीं होंगे। केवल मूल निवासियों के बच्चों को उनके जन्म प्रमाण पत्र के साथ मूल निवासी प्रमाण पत्र जारी कर दिए जाएँगे

फ्री चिकन देने से इनकार करने पर पड़ोसियों ने मुर्गियों को परोसा ज़हर

जाँच अधिकारी ने बताया कि क़ानून के अनुसार, अगर 50 रुपए से अधिक क़ीमत के किसी भी जानवर को मार दिया जाए या ज़हर दिया जाए, तो आरोपित को 5 साल की जेल होगी या उसे भारी जुर्माना भरना पड़ सकता है। हालाँकि, जानवर के मालिक के साथ समझौता करना भी एक विकल्प हो सकता है।