इन दंगों में अब तक कई घरों और मस्जिदों पर हमला किया जा चुका है। दंगाई हाथ में लाठी और हथियार लिए आते हैं और सीधा हमला कर देते हैं। इस समय श्री लंका में अल्पसंख्यक मुस्लिमों में और सिंहलियों में काफ़ी तनातनी का माहौल है।
शिकायत मिलने पर चुनाव आयोग ने जाँच के आदेश दिए। राँची के कार्यपालक दंडाधिकारी ने मामले की जाँच की और आरोप को सही पाया। इस के बाद हेमंत सोरेन और उनकी पत्नी के खिलाफ रिप्रेजेंटेशन ऑफ पीपुल्स एक्ट 1951 एवं 188 आईपीसी के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई।
पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती आतंकी मानसिकता वाले शरिया कानून को थोपने की बात कह गईं। चुनावी मौसम में और आने वाले विधानसभा चुनावों को देखते हुए मुस्लिम वोट बैंक को खुश करने का इससे बेहतर अवसर (या घिनौना?) शायद उन्हें दुबारा नहीं मिलता।
पढ़िए 1984 सिख दंगों को लेकर उत्तर प्रदेश के पूर्व डीजीपी सुलखान सिंह के विचार, उन्हीं के शब्दों में। सुलखान सिंह लिखते हैं कि दंगा वो होता है, जहाँ दोनों तरफ से मारकाट की गई हो लेकिन 1984 में राजीव गाँधी के इशारे पर एकतरफा नरसंहार किया गया था, कॉन्ग्रेस नेताओं द्वारा।
"मैं कमल हासन के बयान का समर्थन करता हूँ। मैं उनके बयान से 100 नहीं 1000 फीसदी सहमत हूँ। जैसे हिंदू धर्म में आरएसएस है, वैसे इस्लाम में इस्लामिक स्टेट है।" तमिलनाडु के कॉन्ग्रेस प्रमुख केएस अलागिरी के इस बयान से...
इंटेलिजेंस सेल से मिली ख़ुफ़िया इनपुट्स के बाद पुलिस ने 47 वर्षीय एक व्यक्ति को गिरफ़्तार किया है, जिसका नाम असकर है। असकर कुछ ही दिनों पहले अरब से लौटा है। वह स्थानीय लोगों से भी ज्यादा वास्ता नहीं रखता था और पड़ोसियों से बातचीत भी नहीं करता था।
बेटी से छेड़खानी का विरोध करने जब मृतक ध्रुव त्यागी आरोपितों के घर उसके अब्बा के पास गए तो उन सबने मिलकर त्यागी पर लाठी-डंडे और चाकुओं से हमला कर दिया। उन्होनें पत्थरों से भी मारा। 2 नाबालिग भी इस हत्याकांड में शामिल हैं। पीड़िता के भाई को भी चाकू मारा गया है।
आज का मीडिया 'जिहाद' शब्द का ग़लत प्रयोग कर रहा है। इसका अर्थ बुराई के ख़िलाफ़ संघर्ष करना होता है जबकि मीडिया में इसे 'पवित्र युद्ध' की तरह पेश किया जा रहा है। 'पवित्र युद्ध' का कॉन्सेप्ट कई सौ साल पहले आया था, जब ईसाईयों ने अपने धर्म को फैलाने के लिए ज़ोर-ज़बरदस्ती की और हज़ारों लोगों के ख़ून बहाए।