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‘वापस जाओ, तुम्हें वोट नहीं मिलेगा’: तिरुवनंतपुरम में शशि थरूर का कॉन्ग्रेस कार्यकर्ताओं ने किया विरोध, सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल

केरल के तिरुवनंतपुरम शहर के बलरामपुरम में रविवार (7 अप्रैल 2024) को चुनाव प्रचार के दौरान कॉन्ग्रेस के कार्यकर्ताओं ने पार्टी के सांसद शशि थरूर को रोक दिया। इसका एक वीडियो भी सामने आया है, जिसमें लोगों को उनके खिलाफ नारे लगाते हुए देखे जा सकते हैं। थरूर का विरोध करते हुए कार्यकर्ताओं ने कहा, ‘वापस जाओ’ और ‘तुम्हें कोई वोट नहीं’।

दरअसल, यह शर्मनाक घटना तब हुई जब शशि थरूर कॉन्ग्रेस के स्थानीय विधायक एम विंसेंट के साथ अपने प्रचार अभियान पर थे। इस घटना ने कॉन्ग्रेस नेतृत्व को परेशान कर दिया है। वहीं, कॉन्ग्रेस के विरोधी दल उसका मजाक उड़ाने के लिए इस वीडियो को सोशल मीडिया पर शेयर कर रहे हैं। जनम टीवी ने इस वीडियो को शेयर किया है।

दूसरी तरफ कॉन्ग्रेस इस शर्मिंदगी को छिपाने के लिए बहाने बना रही है। कॉन्ग्रेस पार्टी इस घटना को मामूली विवाद बता रही है। कॉन्ग्रेस का कहना है कि राज्य की सत्तारूढ़ वामपंथी दल सीपीआईएम के कार्यकर्ताओं ने इस घटना को अंजाम दिया है और अब वे कॉन्ग्रेस को बदनाम कर रहे हैं।

कॉन्ग्रसे के नेता वीडी सतीशन ने टाइम्स ऑफ इंडिया से कहा, “थरूर पार्टी के एक प्रमुख नेता हैं और पार्टी कार्यकर्ताओं के बीच उनका काफी सम्मान किया जाता है। ऐसे कई प्रयास उन लोगों द्वारा किए जा रहे हैं, जो थरूर की छवि को खराब करना चाहते हैं। इस घटना के पीछे सीपीएम कार्यकर्ता हैं।”

पार्टी विधायक एम विंसेंट, जो उस समय शशि थरूर के साथ थे, ने भी दावा किया कि यह एक छोटी घटना थी और प्रदर्शनकारियों की शिकायतों को सुलझा लिया गया था। बता दें कि शशि थरूर साल 2009 से केरल के तिरुवनंतपुरम लोकसभा क्षेत्र से कॉन्ग्रेस के सांसद हैं।

कॉन्ग्रेस ने लोकसभा चुनाव 2024 में भी उन्हें फिर से मैदान में उतारा है। शशि थरूर ने विभिन्न निवेशों और शैक्षणिक योग्यताओं सहित 55 करोड़ रुपए से अधिक की अपनी संपत्ति घोषित की है। वहीं, उन्हें कई राज्यों में अदालती मामलों के साथ कानूनी चुनौतियों का भी सामना करना पड़ रहा है।

जिस मॉडल का ढोल पीटती है AAP, दिल्ली हाई कोर्ट ने उसका बैंड बजाया: कहा- स्कूलों की हालत खराब, प्रचार की जगह काम करो

दिल्ली हाई कोर्ट ने केजरीवाल सरकार के शिक्षा मॉडल की बखिया उधेड़ दी है। हाई कोर्ट ने दिल्ली सरकार को स्कूलों की स्थिति को लेकर कड़ी फटकार लगाई है। कोर्ट ने दिल्ली सरकार से कहा है कि मात्र विज्ञापन देकर ये ना बताओ कि सब कुछ बढ़िया है बल्कि असल में जमीन पर उतर कर काम करो।

दिल्ली हाई कोर्ट सोमवार (8 अप्रैल, 2024) को राजधानी के स्कूलों की स्थिति में एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए केजरीवाल सरकार पर प्रश्न उठाए। दिल्ली हाई कोर्ट के कार्यकारी चीफ जस्टिस मनमोहन और जस्टिस प्रीतम सिंह अरोड़ा की बेंच ने केन्द्रशासित प्रदेश के शिक्षा सचिव को कड़ी फटकार लगाई। हाई कोर्ट ने शिक्षा सचिव से कहा, “आपका काम यह नहीं है कि आप बैठ कर अखबारों में विज्ञापन दें और बताएँ सरकारी स्कूलों में सब कुछ एकदम बढ़िया चल रहा है, एक कक्षा में 144 बच्चे बैठ रहे हैं, यह बड़ी खराब स्थिति है।”

हाई कोर्ट के समक्ष लगाई गई याचिका में बताया गया था कि राजधानी के कई स्कूलों में बच्चों के बैठने की सभी बेंच टूटी हुई हैं, उनके बैठने की व्यवस्था सही नहीं है। कहीं कहीं स्कूल टिन की बिल्डिंग में चल रहे हैं, कहीं पर एक स्कूल में 6000 बच्चे हैं। एक कमरे में दो अलग क्लास के बच्चे बैठाए जा रहे हैं। स्कूलों में बच्चों को समय से किताबें ना मिलने की बात भी सामने आई। जिन स्कूलों में यह समस्याएँ हैं, उनमें से अधिकांश उत्तरपूर्वी दिल्ली में स्थित हैं।

स्कूलों में कमियों की यह कहने वकील अशोक अग्रवाल ने बताई। इस पर शिक्षा सचिव ने कोर्ट के सामने माना कि यह सभी कमियाँ स्कूलों में मौजूद हैं। उन्होंने कहा कि वह पिछले महीने स्वयं इन स्कूलों के दौरे पर गए थे और उन्हें ये गड़बड़ियाँ दिखी थीं। इस पर कोर्ट ने उनकी जम कर क्लास ली।

हाई कोर्ट ने शिक्षा सचिव से कहा, “आप शिक्षा सचिव हैं और आपको यह सब जानकारी होनी चाहिए। जमीन पर जाना आपका काम है। इस रिपोर्ट के मुताबिक स्कूलों की हालत बहुत ही गड़बड़ है। असली दिक्कत यह है कि बड़े अधिकारियों के बच्चे इन स्कूलों में नहीं पढ़ रहे हैं। इसीलिए आपको यहाँ से कोई शिकायत नहीं मिलती।”

कोर्ट ने शिक्षा में गड़बड़ी की वजह से बढ़ें वाले अपराधों को लेकर कहा, “ताज्जुब की बात नहीं है कि दिल्ली की जेलें भरी हुई हैं। तिहाड़ जेल की क्षमता 10,000 है, लेकिन इसमें 23,000 कैदी हैं। ऐसा इसलिए है क्योंकि स्कूल ठीक से काम नहीं कर रहे हैं, क्या आप इसके बीच के संबंध को समझ रहे हैं।”

हाई कोर्ट ने दिल्ली के शिक्षा विभाग से कहा कि वह स्कूल में सामने लाई गई इन कमियों को जल्द सही करें। कोर्ट ने शिक्षा सचिव से प्रश्न पूछा कि अगर यह सभी गड़बड़ियाँ हैं तो वह शिक्षा विभाग के लोगों पर कार्रवाई क्यों नहीं कर रहे हैं। कोर्ट ने शिक्षा सचिव से स्कूल में किए गए काम और कार्रवाई को लेकर एक हलफनामा दाखिल करने को कहा है।

गौरलतब है कि दिल्ली की अरविन्द केजरीवाल की अगुवाई वाली आम आदमी पार्टी की सरकार शिक्षा को लेकर काफी जोर शोर से प्रचार करती रही है। केजरीवाल सरकार का दावा रहा है कि उनके सत्ता में आने के बाद से शिक्षा विभाग में बदलाव आए हैं। हालाँकि, हाई कोर्ट ने दिल्ली की शिक्षा व्यवस्था की पोल खोल दी है।

फिल्म देखो, समीक्षा लिखो और समझो कैसे प्रेम के नाम पर फँसाते हैं: बच्चियों को लव जिहाद से बचाने के लिए ‘द केरल स्टोरी’ दिखा रहे चर्च

लव जिहाद पर बनी ‘द केरल स्टोरी’ पिछले साल काफी विवादों में थी। इस्लामी-लिबरल लोग नहीं चाहते थे कि इसे पर्दे पर रिलीज किया जाए। कुछ नेताओं ने तो इसे प्रोपगेंडा तक कह दिया गया था। हालाँकि इस फिल्म का असर कितना व्यापक था इसे इस बात से समझ सकते हैं कि एक साल बाद भी ये प्रासंगिक है। हाल में केरल के ईसाई चर्चों द्वारा इस फिल्म की स्क्रीनिंग कराने का निर्णय लिया गया ताकि बच्चों को प्रेम के नाम पर होने वाले नुकसानों का पता चल सके।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक केरल के सिरो मालाबार चर्च के इडुक्की सूबा ने इस फिल्म को 10वीं और 12वीं तक के बच्चों को दिखवाया। इस दौरान उन्हें लव जिहाद पर पुस्तिकाएँ भी वितरित कीं। साथ ही उनसे कहा गया कि वह इस फिल्म की समीक्षा लिखें कि कैसे ये फिल्म बाकी फिल्मों से अलग है। इसके अलावा इस पुस्तिका में ये भी जानकारी थी कि किस तरह से लड़कियों को प्रलोभन देकर फँसाया जाता है।

इडुक्की सूबे के इस फैसले पर जहाँ सिरो मालाबार चर्च के पूर्व प्रवक्ता ने अपनी आपत्ति जताई और फिल्म को प्रोपगेंडा करार दिया। वहीं ईसाई सूबा के मीडिया प्रभारी फादर जिन्स केराक्कट ने कहा कि वे हर साल छुट्टियों में बच्चों के लिए एक गहन प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित करते हैं। इस कार्यक्रम के लिए बच्चों से जुड़े कुछ विशिष्ट विषयों का चयन किया जाता है और इसके लिए किताबें तैयार की जाती हैं।

फादर जिन्स केराक्कट ने आगे कहा, “इस बार बच्चों के लिए यह कार्यक्रम 2, 3 और 4 अप्रैल को आयोजित किया गया। इस दौरान 10, 11 और 12 कक्षा के बच्चों के लिए तैयार की गई पाठ्यपुस्तकों का विषय प्रेम संबंध था… इस विषय को चुनने का मकसद किशोर उम्र के बच्चों में प्यार में पड़ने और उसके परिणामों के बारे में जागरूकता फैलाना था।”

फिल्म की स्क्रीनिंग पर फादर जिन्स ने कहा कि ‘द केरल स्टोरी’ को देश में प्रतिबंधित नहीं किया गया है और इसलिए फिल्म का प्रदर्शन करना गलत नहीं है। उन्होंने कहा, “हमने ये फिल्म किसी मजहब से जोड़कर नहीं दिखाई। मुद्दा सिर्फ प्रेम था जिसपर हमने छात्रों से फिल्म देखने के बाद बात करने को कहा। वो इस पर चर्चा करेंगे।”

इडुक्की सूबे के बाद सिरो मालाबार चर्च के थामारास्सेरी सूबा ने बच्चों को इस फिल्म को दिखाने का निर्णय लिया। इस संबंध केरल थमारसेरी सूबा ने घोषणा की कि वे शनिवार से सभी केरल कैथोलिक यूथ मूवमेंट की यूनिट में फिल्म दिखाएँगे। उन्होंने कहा कि ये फिल्म राज्य में प्रतिबंधित नहीं है ऐसे में इसकी स्क्रीनिंग करवाना कुछ गलत नहीं है। सूबा ने यह भी तर्क दिया कि उन्होंने यह निर्णय इसलिए लिया क्योंकि मुख्यमंत्री ने भी राज्य में आतंकवादी समूहों के लिए संगठित भर्ती के बारे में खुलकर बात की थी।

दूरदर्शन पर दिखाई गई ‘द केरल स्टोरी’

बता दें कि पिछले दिनों सीपीएम और कॉन्ग्रेस के भारी विरोध के बावजूद दूरदर्शन पर सुदीप्तो सेन ‘द केरल स्टोरी’ का प्रसारण हुआ। इसके विरोध में डेमोक्रेटिक यूथ फेडरेशन ऑफ इंडिया द्वारा ध्रुव राठी की वीडियो चलाई गई जिसमें बताया जा रहा था कि केरल स्टोरी सच्ची है या झूठी। यूथ कॉन्ग्रेस ने भी इसका विरोध किया। इसके खिलाफ शिकायतें हुई, लेकिन दूरदर्शन ने अपना निर्णय नहीं बदला। इस पर केरल सीएम ने उन्हें भाजपा की प्रोपगेंडा मशीन तक कह डाला, लेकिन फिल्म का प्रसारण होकर रहा।

चेहरा सूजा, चोट के निशान… दावा- चरस पीकर पीटता है सचिन: बोली सीमा हैदर- रमजान में भी फैला रहे झूठ, मैं महाराज जी के सरंक्षण में सुखी हूँ

पाकिस्तान से भारत आकर सचिन मीणा से शादी करने वाली सीमा हैदर ने अपने साथ मारपीट की खबरों का खंडन किया है। सीमा हैदर ने कहा है कि वह महाराज जी के संरक्षण में है जहाँ कोई महिला दुखी नहीं हो सकती। इससे पहले सीमा का एक कथित वीडियो वायरल हुआ था जिसमें वह चोटों को दिखा रही थी। इसके बाद सीमा के पाकिस्तानी पूर्व पति गुलाम हैदर ने भी एक वीडियो जारी करके सचिन मीना पर आरोप लगाया था कि वह सीमा को चरस पीकर मारता है।

सीमा हैदर का सचिन मीणा के साथ एक वीडियो सामने आया है। इसमें सीमा कहती हैं, “मैं सीमा मीणा नोएडा में रह रही हूँ, मेरी मीणा फैमिली बहुत अच्छी चल रही है। मीणा जी के साथ मैं बहुत अच्छे से रह रही हूँ। कुछ पाकिस्तानी चैनल रमजान के पवित्र महीने में भी झूठ बोलने से बाज नहीं आ रहे है। वह यह नहीं समझ रहे कि मैं उत्तर प्रदेश भारत में हूँ, यहाँ के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी हैं। उनके संरक्षण में कोई भी महिला दुखी रह ही नहीं सकती।”

सीमा ने बताया कि वह अपने वकील डॉक्टर एपी सिंह के साथ लगातार सम्पर्क में रहती हैं। उन्होंने अपनी मारपीट की खबरों को झूठा बताया और लोगों से उन पर ध्यान ना देने की अपील की। सीमा ने कहा कि वह यहाँ बहुत खुश हैं, उनके जीवन में ऐसी कोई चीज नहीं हो सकती। उन्होंने बताया कि यह सब खबरें लोगों को गुमराह करने के लिए चलाई जा रही हैं। सीमा हैदर ने यह भी बताया कि उसके पति सचिन उसका और बच्चों का बहुत ध्यान रखते हैं।

सचिन मीणा के वकील और सीमा के मुंहबोले भाई एपी सिंह ने भी इस मामले में स्पष्टीकरण जारी किया है। एपी सिंह ने इस मारपीट का खंडन किया है। एपी सिंह ने कहा कि सीमा का जो भी वीडियो चलाया जा रहा है, वह एकदम भ्रामक है, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के जरिए बनाया गया है। एपी सिंह ने बताया है कि लोग अपने यूट्यूब चलाने के लिए यह फर्जी वीडियो बना रहे हैं। उन्होंने पाकिस्तान के कुछ कथित यूट्युबर्स पर आरोप लगाया है। वकील सिंह ने बदनाम करने की साजिश बताया।

गौरतलब है कि इससे पहले सीमा हैदर का एक कथित वीडियो वायरल हुआ था जिसमे वह अपने शरीर पर लगी चोट दिखाती हैं। इस वीडियो में सीमा अपने होंठ और आँख पर लगी चोटों के निशान दिखा रही थीं। इसको लेकर सीमा के पूर्व पति गुलाम हैदर का भी एक वीडियो सामने आया था।

गुलाम का कहना था कि सीमा के साथ भारत में मारपीट हो रही है। गुलाम ने आरोप लगाया था कि सचिन, सीमा को चरस पीकर पीट रहा है। गुलाम हैदर ने बच्चों की पिटाई का आरोप भी सचिन पर लगाया था। गुलाम हैदर ने दावा किया था कि उसके पास मार पीट के वीडियो और फोटो भी हैं। उसने भारत आकर हिसाब बराबर करने की बात कही थी। गुलाम हैदर ने सचिन के वकील और सीमा के मुंहबोले भाई वकील एपी सिंह पर भी आरोप लगाया था कि वह इस मारपीट को लेकर शांत बैठे हैं।

बता दें कि सीमा हैदर और नोएडा के रहने वाले सचिन मीणा की प्रेम कहानी साल 2020 में मोबाइल पर पबजी गेम खेलने से शुरू हुई थी। दोनों में दूर से ही इतनी नजदीकियाँ बढ़ीं कि सीमा पाकिस्तान में अपना घर-बार छोड़कर अपने बच्चों संग अवैध तरीके से नेपाल होते हुए यूपी के सचिन के पास चली आईं। उन्होंने हिंदू धर्म के सभी रीति-रिवाजों को भी अपना लिया है और अपने चारों बच्चों के नाम भी हिंदू रख दिए हैं।

सीमा के भारत आने के बाद से ही यह प्रेमी युगल पाकिस्तानियों के निशाने पर है। पाकिस्तानी इनको लेकर अक्सर उल्टा-सीधा बोलते रहते हैं। हालाँकि, सीमा हैदर उनको करारा जवाब भी देती रहती हैं। ऐसे ही एक पाकिस्तानी को जवाब देते हुए सीमा ने पिछले दिनों कहा था, “इज्जत करो यार, तुम्हारे जीजा लगते हैं हमारे पति। दामाद हैं तुम लोगों के।”

जिस राम मंदिर का नक्सलियों ने किया ध्वंस, बंद करवा दी पूजा, 21 साल बाद वहाँ CRPF ने करवाई आरती: जवानों ने साफ-सफाई कर ग्रामीणों को सौंपा

छत्तीसगढ़ के सुकमा के केरलापेंदा गाँव में नक्सल आतंक के कारण 21 सालों से बंद पड़े हिंदू मंदिर को सीआरपीएफ के जवानों ने खोलकर, उसमें साफ सफाई करके उसे ग्रामीणों को सौंप दिया। इस दौरान मंदिर में पूजा आरती भी हुई।

सामने आई वीडियो में गाँव के बच्चों के साथ मिलकर सीआरपीएफ जवान मंदिर के पट को पानी से धो रहे हैं। इसके बाद वह अंदर रखी भगवान राम, माता सीता और लक्ष्मण जी की मूर्ति के आगे आरती भी करते हैं।

इस संबंध में सीआरपीएफ की 74वीं कोर के कमांडेंट हिमांशु पांडेय ने बताया कि सुकमा के लाखापाल में बीते 14 मार्च को सीआरपीएफ ने अपना कैंप लगाया था। लाखापाल में ही केरलापेंडा गाँव आता है।

सीआरपीएफ ने देखा कि गाँव में एक मंदिर टूटी-फूटी हालत में है। गाँव वालों से पूछा गया तो उन्होंने बताया कि ये मंदिर ऐतिहासिक है और यहाँ साल में एक बार मेला भी लगता था। इसके बाद नक्सलियों ने यहाँ पूजा-पाठ बंद करा दिया।

मंदिर के कपाट दोबारा खोले जाने पर ग्रामीणों ने अपनी खुशी जाहिर की है। बताया गया कि 2003 में नक्सलियों ने छत्तीसगढ़ के सुकमा स्थित इस मंदिर को तोड़-फोड़ दिया था। ग्रामीणों को धमकी दी गई थी कि इस मंदिर में कोई पूजा नहीं करेगा। हालाँकि अब सीआरपीएफ के जवानों के कारण इस मंदिर में दोबारा से पूजा पाठ शुरू होगी, यह देख गाँव के लोग बहुत खुश हैं।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, 1970 में राम मंदिर की स्थापना बिहारी महाराज द्वारा की गई थी। उस समय ग्रामीणों ने सिर पर सीमेंट, पत्थर, बजरी, सरिया लादा और सुकमा से लगभग 80 किलोमीटर दूर पैदल चलकर निर्माण सामग्री पहुँचाई थी। मंदिर का निर्माण हुआ तो रामभक्ति में पूरा क्षेत्र रम गया। धीरे-धीरे इलाके में मांसाहार, मदिरा का सेवन भी बंद हो गया।

बताया जाता है कि आज भी गाँव के 95 प्रतिशत लोग मांसाहार, मदिरापान का सेवन नहीं करते। ग्रामीणों ने बताया कि यहाँ कभी भव्य मेला भी लगता था। साधु-संन्यासी अयोध्या से आते थे, लेकिन नक्सल प्रकोप बढ़ने व नक्सलियों द्वारा पूजा-पाठ बंद करवा देने से मेला आयोजन बंद हो गया। नक्सलियों ने मंदिर को अपवित्र कर ताला लगा दिया।

मालूम हो कि मंदिर के कपाट दोबारा खुलने की खबर सोशल मीडिया पर देखने के बाद नेटिजन्स अपनी खुशी जाहिर कर रहे हैं। सीआरपीएफ के जवानों को आभार व्यक्त किया जा रहा है। लोग कह रहे हैं हमारी सेना और सीआरपीएफ देश और संस्कृति दोनों की रक्षा करती है।

हिंदू नववर्ष… सूर्य, चंद्र, पृथ्वी की गति पर आधारित गणना: वो विज्ञान, जिसके दम पर फली-फूली कृषि-सभ्यता

भारतीय संस्कृति के हिसाब से नववर्ष चैत्र शुक्ल प्रतिपदा को मनाते हैं और इस बार मंगलवार (9 अप्रैल, 2024) से नए हिन्दू नवसंवत्सर 2081 की शुरुआत भी हो रही है। भारतीय काल गणना में ‘विक्रम संवत’ का बड़ा महत्व है और शादी-विवाह से लेकर अन्य शुभ मुहूर्त व पर्व-त्यौहार इसी से तय होते हैं। हिन्दू नववर्ष के साथ ही सारे मांगलिक कार्य आरंभ हो जाएँगे। हिन्दू ग्रंथों में 60 संवत्सरों के हिसाब से हर संवत्सर का नाम तय किया जाता है।

भारतीय कालगणना का विवेचन अनेक ग्रंथों में किया गया है। मय के सूर्यसिद्धांत आदि प्रत्यक्ष ज्योतिष ग्रंथों से लेकर मनुस्मृति जैसे धर्मशास्त्रों तथा भागवत जैसे आख्यान माने जाने वाले पुराणों तक में कालगणना के विज्ञान की विवेचना और विश्लेषण प्राप्त होता है। भारतीय विज्ञान की यह विशेषता है कि वह हमेशा प्रत्यक्ष और प्रकृति से समन्वय बनाकर चलता है। इसलिए काल की गणनाएँ भी इससे ही जुड़ी हुई हैं।

हमारे शास्त्रों में स्पष्ट रूप से बताया गया है कि ब्रह्मांड में भिन्न-भिन्न लोकों में काल की गति भी भिन्न-भिन्न होती है। आप देखेंगे कि महान वैज्ञानिक अल्बर्ट आइंस्टाइन ने भी ‘टाइम एंड स्पेस’ की थ्योरी में यही पाया। यहाँ हम देखेंगे कि पृथ्वी पर हमने काल की कैसी और कितनी सूक्ष्म गणनाएँ की थीं। काल की सबसे छोटी ईकाई भारतीय शास्त्रों में परमाणु की मानी गई है। दो परमाणु के बराबर एक अणु होता है और तीन अणु काल के बराबर एक त्रसरेणु काल होता है।

एक त्रसरेणु काल की माप बताते हुए भारतीय मनीषियों ने लिखा है कि किसी द्वार के सूक्ष्म छेद में से आ रहे सूर्य के प्रकाश में जो कण उड़ते हुए दिखते हैं, उसे ही त्रसरेणु कहते हैं। प्रकाश को इसे पार करने में जितना समय लगता है, उसे ही एक त्रसरेणु काल कहते हैं। तीन त्रसरेणु काल को एक त्रुटि कहा गया है। त्रुटि से काल की गणना को बढ़ाते हुए परार्ध तक ले जाया गया है। इसकी गणनाएँ कुछ इस प्रकार हैं:

1 लघु अक्षर उच्चारण1 निमेष
2 निमेष1 त्रुटि
10 त्रुटि1 प्राण
6 प्राण1 विनाडिका
60 विनाडिका1 नाडिका
60 नाडिका1 मुहूर्त
30 मुहूर्त1 अहोरात्र

श्रीमद्भागवतपुराण में लिखा है कि जिसका और विभाजन नहीं हो सकता तथा जो कार्यरुप में प्राप्त नहीं हुआ है और जिसका अन्य परमाणुओं के साथ संयोग नहीं हुआ है, उसे परमाणु कहते हैं। वर्ष की गणना को आगे बढ़ाते हुए भारतीय मनीषियों ने पूरे ब्रह्मांड की आयु की भी गणना की। उन्होंने सौर वर्ष के बाद दिव्य वर्ष से लेकर परार्ध तक की गणना की है। कलियुग चारों में सबसे छोटा युग है। ये कुछ इस तरह से किया गया:.

कलि युग4,32,000 वर्ष
द्वापर युग8,64,000 वर्ष (2 कलि)
त्रेता युग12,96,000 वर्ष (3 कलि)
कृत युग17,28,000 वर्ष (4 कलि)

1 चतुर्युग = 43,20,000 वर्ष (10 कलि। इसे ही धर्म भी कहा है।) दशलक्षणयुक्त होने के कारण धर्म दश संख्या का भी द्योतक है। इसीलिए सूर्यसिद्धान्त में कहा गया है कि कृत् या सत् युग में धर्म के चार चरण होते हैं, त्रेता में तीन, द्वापर में दो और कलि में केवल एक। उल्लेख मिलता है कि भगवान श्रीकृष्ण ने पृथ्वी छोड़ते समय माँ गंगा से कहा था कि पहले 10,000 वर्षों के बाद कलियुग में स्थिति एकदम खराब होने लगेगी।

71.42857143 चतुर्युग (x 43,20,000)= 1 मन्वन्तर (30,85,71,428.5776 वर्ष)  
14 मन्वन्तर (x 30.85.71,428.5776)  = 1 कल्प अर्थात ब्रह्मा का एक दिवस (4,32,00,00,000 वर्ष  
ब्रह्मा के सौ वर्ष= दो परार्ध (31,10,40,00,00,00,000 वर्ष )  

अर्थात, 31 नील 10 खरब 40 अरब वर्ष की एक संपूर्ण प्रक्रिया होती है। ब्रह्मा के इस सौ वर्ष की आयु को दो परार्धों में बाँटा गया है। इसमें से वर्तमान ब्रह्मांड का पहला परार्ध बीत चुका है। भारतीय पंचांग में मासों, सप्ताहों और दिनों का निर्धारण एक वैज्ञानिक प्रक्रिया के तहत किया गया है, ग्रिगोरियन कैलेंडर की तरह किसी मनमाने तरीके से नहीं। सर्वप्रथम वेदों में ही बारह मासों के नाम आते हैं। यानी, भारतीय परंपरा के अनुसार संवत्सर का बारह मासों में विभाजन मानवी कार्य नहीं है।

यह एक प्रकार से पूर्वनिर्धारित नियम है कि पृथ्वी के सूर्य की ओर लगाए गए एक चक्र को कुल बारह भागों में ही बाँटा जाएगा। इसके लिए वेदों में दो स्थानों पर निर्देश प्राप्त होते हैं। भारतीय ज्योतिषियों ने इन मंत्रों के आधार पर ही गणनाएँ कीं। ऋग्वेद में वर्णित है:

दादशारं नहि तज्जराय वर्वर्ति चक्रं परि द्यामृतस्य।
आ पुत्रा अग्ने मिथुनासो अत्र सप्त शतानी विंशतिश्च तस्थुः॥ (ऋग्वेद 1/164/11)
द्वादश प्रधयश्चक्रमेकं त्रीणि नभ्यानि क उ तच्चिकेत।
तस्मिन्त्साकं त्रिंशता न शङ्कवोऽर्पिताः षष्टिर्न चलाचलास: ॥ (ऋग्वेद 1/164/48)

इन दो मंत्रों में यह स्पष्ट किया गया है कि संवत्सर में बारह प्रविधियाँ हैं। 360 शंकु यानी दिन अथवा 729 जोड़े रात-दिन हैं। यहाँ इसे एक चक्र के रूप में निरूपित किया गया है, जो कि पृथ्वी की सूर्य के चारों ओर की चक्राकार गति तथा काल की चक्रीय होने दोनों का ही प्रतीक है। इससे स्पष्ट है कि संवत्सर यानी एक वर्ष में 360 दिन और बारह मास होने की संकल्पना भारत में एकदम प्रारंभ से ही है। परंतु इस सामान्य आधार को आगे बढ़ाते हुए भारतीय ज्योतिषाचार्यों ने पृथ्वी की गति को जाना और इसके बाद उन्होंने वर्ष की वास्तविक गणना की।

मासों की गणना या निर्माण पृथ्वी की अपनी कक्षा से नहीं की गई, इसका निर्धारण चंद्रमा के पृथ्वी के चारों ओर की कक्षा से किया गया। इसलिए इसे चांद्रमास भी कहते हैं। चंद्रमा का एक मास 30 चंद्र तिथियों का होता है, परंतु वह सौर मास से लगभग आधा दिन छोटा होता है। दोनों मासों में सामंजस्य बैठाने के लिए भारतीय ज्योतिषाचार्यों ने मलमास या अधिमास का विधान किया। अब प्रश्न उठता है, जो आज के ग्रिगोरियन कैलेंडर के सभी समर्थक अधिक जोर-शोर से उठाते भी हैं कि सौर मास की उपस्थिति और उसकी गणना की सरलता के बाद भी चांद्र मासों की गणना क्यों की जाए?

वास्तव में चंद्रमा से मासों का निर्धारण केवल गणना का एक प्रकार मात्र नहीं है, बल्कि इसका वैज्ञानिक आधार भी है। यह आज हमें ठीक से ज्ञात हो चुका है कि चंद्रमा ही पृथ्वी पर वातावरण संबंधी अनेक बदलावों को लाने का कारण है। वेदों में इस सृष्टि को अग्निसोमात्मकं यानी अग्नि तथा सोम से निर्मित तथा संचालित कहा गया है। सूर्य अग्नि है और चंद्रमा सोम है। कृषि में हम इसका प्रत्यक्ष प्रमाण देख सकते हैं।

चंद्रमा के कारण पौधों की बालियों में रस भरता है, सूर्य के कारण वे पकती हैं। मानव की पूरी सभ्यता आदि काल से कृषि आधारित रही है और चांद्र मास की गणना कृषिकार्य में सहायक है। यही कारण है कि सौर मासों की गणना करने के बाद भी भारतीय आचार्यों ने चांद्रमासों की भी गणना की। ‘विक्रम संवत्’ विश्व का सर्वश्रेष्ठ सौर-चांद्र सामंजस्य वाला संवत् है। आज उस गणना को भुलाने के कारण ही कृषि में इतनी बाधाएँ आ रही हैं।

वैज्ञानिक शोध में पता चला है कि चन्द्रमा का प्रकाश पेड़-पौधों के लिए न सिर्फ सूर्य की किरणों की तरह महत्वपूर्ण है, बल्कि स्टार्च स्टोरेज और उनके प्रयोग पर भी असर डालता है। पेड़-पौधों को इससे जो न्यूट्रिशन मिलता है, वो बायो-इलेक्ट्रिक एक्टिविटी होती है। दिन में फोटोसिंथसिस होता है। प्राकृतिक उपग्रह के बिना पृथ्वी पर जीवन एकदम से बदल जाएगा। पेड़-पौधों में जल के संचार पर भी चन्द्रमा का असर पड़ता है।

भारतीयों ने मासों का नाम यूरोपीयों की तरह मनमाने ढंग से नहीं रखा। वेदों तथा उनके ब्राह्मणों में 12 मासों के नाम दिए गए थे। लेकिन, हमारे ज्योतिषाचार्यों ने सिर्फ उनसे संतोष नहीं किया। वैदिक नामों में भी एक सार्थक मिलती है। उदाहरण के लिए मधु नामक मास में ही वसंत ऋतु होती है। वसंत ऋतु का मादकता से कितना संबंध है, ये छिपा नहीं है। इसी प्रकार अन्या नाम भी सार्थक हैं। परंतु बाद में इन मासों का नाम उन नक्षत्रों के नाम पर रखा गया, जिनसे इनका प्रारंभ होता है।

चित्रा नक्षत्र में प्रारंभ होने वाले मास का नाम चैत्र, विशाखा नक्षत्र में प्रारंभ होने वाले मास का नाम वैशाख… और इसी क्रम में सभी मासों के नाम निर्धारित किए गए। किस मास में कितनी तिथियाँ होंगी, यह चंद्रमा और सूर्य की चाल से निर्धारित किया गया और आज भी किया जाता है, मनमाने ढंग से नहीं। इसी क्रम को आगे बढ़ाते हुए भारतीय ज्योतिषाचार्यों ने प्रत्येक अहोरात्र को 24 होराओं में बाँटा और हरेक का नामकरण भी किया।

यहाँ तक कि भारत में सप्ताह के 7 दिन की गणना और नामकरण भी प्राचीन काल से होता आ रहा था। आर्यभट्ट ने तभी सातों दिन के नाम और महत्ता पर प्रकाश डाला था। इसका विश्लेषण बड़े विद्वानों ने भी किया है। “सप्तैते होरेशा: शनैश्चराद्या यथाक्रमं शीघ्रा:| शीघ्रक्रमाच्च्तुर्था भवन्ति सूर्योदयाद् दिनपा:।।” नामक श्लोक इसका साक्ष्य है। इतना ही नहीं, ‘सूर्य सिद्धांत’ में भी इसका जिक्र आता है। संभव है कि बाद में इसे अन्य जगहों पर कॉपी किया गया हो।

ईद पर मुस्लिम औरतों के लिए बस में सफर फ्री, नेटिजन्स ने पूछा- हिंदुओं को क्यों नहीं देते ऐसी सेवा: हिमाचल की कॉन्ग्रेस सरकार ‘मुस्लिम तुष्टिकरण’ पर घिरी

हिमाचल प्रदेश में परिवहन निगम ने ईद के मौके पर ऐलान किया है कि ईद और बकरीद पर मुस्लिम महिलाओं के लिए बस सेवा फ्री रहेगी। यह आदेश हिमाचल प्रदेश पथ परिवहन निगम के मैनेजिंग डायरेक्टर रोहन चंद ठाकुर द्वारा जारी किया गया है।

आदेशानुसार हिमाचल पथ परिवहन निगम यह सुविधा इस साल 11 अप्रैल 2024 को मुस्लिम महिलाओं को देगा। आदेश को एचआरटीसी के डिविजनल मैनेजर को भेजा गया है। इस नोटिफिकेशन में कहा गया है कि ईद और बकरीद पर फ्री बस सेवा की सुविधा मुस्लिम महिलाओं को सुबह से शाम तक दी जाएगी। सिर्फ मुस्लिम महिलाओं को इस सेवा का लाभ उठाने के लिए अपना कोई पहचान पत्र दिखाना होगा।

संबंधित आदेश

गौरतलब है कि इस तरह आदेश में अलग से ‘मुस्लिम’ लिखे जाने पर अब नेटिजन्स सवाल खड़ा कर रहे हैं। लेखक डॉ महेंद्र ठाकुर ने नोटिफिकेशन की कॉपी को शेयर करते हुए कहा- “…ये ट्वीट आपसे ये पूछने के लिए किया है कि क्या अब हिंदू और मुस्लिम महिलाओं को अपना धर्म का प्रमाण पत्र भी साथ लेकर हिमाचल परिवहन की बसों में चलना होगा?”

राहुल गुप्ता इस आदेश की कॉपी को साझा करते हुए पूछते हैं कि कॉन्ग्रेस की मुस्लिम तुष्टिकरण के लिए तोहफा ईद और बकरीद में मुस्लिम महिलाओं को फ्री बस सेवा उपलब्ध करवाएगी कॉन्ग्रेस।

मॉन्टी राणा लिखते हैं, “हिमाचल की कॉन्ग्रेस सरकार का हिंदू विरोधी चेहरा फिर उजागर,ईद और बक़रीद पर मुस्लिम महिलाओं के लिए सरकारी बस सेवा मुफ़्त देने के निर्देश दिए, हिंदू त्योहारों पर हिंदू महिलाओं के लिए तो कभी ऐसा नहीं किया गया।”

बता दें कि इससे पहले ऐसा ही आदेश रक्षा बंधन पर भी एचआरटीसी द्वारा जारी किया गया था। हालाँकि उस समय जो नोटिस आया था उसमें इस प्रकार से किसी एक समुदाय की महिलाओं के लिए फ्री बस सेवा का ऐलान नहीं हुआ था। उस नोटिस में सिर्फ लिखा था कि महिलाओं को सूर्योदय से लेकर सूर्यास्त तक फ्री बस की सेवा मिलेगी… लेकिन ईद पर जो नोटिफिकेशन आया है उसमें साफ है कि केवल मुस्लिम महिलाएँ इसका लाभ उठा पाएँगी।

बाइक पर सवार होकर गुरुद्वारे में आए और बाबा तरसेम सिंह को गोली मार चले गए… एक शूटर को उत्तराखंड STF ने हरिद्वार में किया ढेर, दूसरा फरार

उत्तराखंड के नानकमत्ता गुरुद्वारे के कारसेवा प्रमुख बाबा तरसेम सिंह की हत्या का आरोपित अमरजीत सिंह एक एनकाउंटर में मारा गया। बाबा तरसेम की सिंह की हत्या के आरोपित अमरजीत सिंह को उत्तराखंड पुलिस की स्पेशल टास्क फ़ोर्स ने हरिद्वार में मार गिराया। हत्या में शामिल दूसरा आरोपी अभी भी फरार है। इन दोनों ने मिलकर उधम सिंह नगर के नानकमत्ता में स्थित प्रसिद्ध गुरुद्वारे के अंदर घुस कर बाबा तरसेम की हत्या गोली मार कर हत्या कर दी थी।

बाबा तरसेम सिंह की हत्या करने वाले अमरजीत सिंह के साथ उत्तराखंड STF और हरिद्वार पुलिस का यह एनकाउंटर हरिद्वार के भगवानपुर इलाके में हुआ। पुलिस ने बताया कि वह आरोपितों की तलाशी के लिए इमली खेड़ा मार्ग पर चेकिंग अभियान चला रही थी। इसी दौरान बाइक पर दो लोग आए और पुलिस को देख कर कलियर की तरफ भागने लगे।

पुलिस ने जब उनका पीछा किया तो उन्होंने फायर झोंक दिया। पुलिस की जवाबी कार्रवाई में इनमें से एक घायल हो गया जबकि दूसरा भागने में सफल रहा। पुलिस घायल अपराधी को अस्पताल ले गई लेकिन उसे मृत घोषित कर दिया गया। मरने वाले की पहचान अमरजीत सिंह निवासी अमृतसर के रूप में हुई है। उस पर बाबा तरसेम सिंह की हत्या समेत 16 से अधिक मामले दर्ज थे। अमरजीत सिंह पर उत्तराखंड पुलिस ने ₹50,000 का इनाम घोषित किया हुआ था। यह बाबा तरसेम सिंह की हत्या का मुख्य आरोपित था।

गौरतलब है कि 28 मार्च, 2024 को नानकमत्ता गुरुद्वारे के भीतर घुस कर दो बाइकसवारों ने डेरा प्रमुख बाबा तरसेम सिंह को मार दिया था। यह हत्यारे बाइक पर आए और गुरुद्वारे के बाहर बैठे बाबा तरसेम सिंह को कई गोलियाँ मार कर भाग गए। इन दोनों हत्यारों की पहचान अमरजीत सिंह और सरबजीत सिंह के रूप में हुई थी। सरबजीत बाइक चला रहा था जबकि अमरजीत ने बन्दूक पकड़ी हुई थी और उसी ने इस हत्या को अंजाम दिया था। इस मामले में दर्ज किए गए मुकदमे में अमरजीत मुख्य आरोपित बनाया गया था।

जहाँ अमरजीत को उत्तराखंड पुलिस ने मार गिराया है तो वहीं सरबजीत अब भी फरार है। पुलिस उसकी तलाश में जुटी हुई है। बाबा तरसेम सिंह की हत्या के मामले में तीन और आरोपितों की गिरफ्तारी की गई थी। यह उत्तर प्रदेश के पीलीभीत और उधम सिंह नगर जिले के रहने वाले हैं। इन पर इस हत्या में मदद करने का आरोप है। बाबा तरसेम सिंह की हत्या के मामले ने काफी तूल पकड़ा था। उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने भी नानकमत्ता पहुँच कर इस मामले में शोक व्यक्त किया था बाबा तरसेम सिंह को श्रृद्धांजलि अर्पित की थी।

ध्वस्त हो चुकी अखूँदजी मस्जिद की जगह पर नहीं होगी ईद पर नमाज, दिल्ली हाई कोर्ट ने अनुमति देने से किया इनकार

दिल्ली हाई कोर्ट ने अखूँदजी मस्जिद पर ईद के मौके पर नमाज अदा करने की माँग वाली याचिका को खारिज कर दिया है। याचिका में उस स्थान पर प्रवेश की माँग की गई थी, जहाँ महरौली में अखूँदजी मस्जिद हुआ करती थी और रमजान के महीने के दौरान ‘तरावीह’ की नमाज अदा की जाती थी। इस साल 30 जनवरी को दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए) ने मस्जिद को ध्वस्त कर दिया था।

दिल्ली हाई कोर्ट के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश मनमोहन की अध्यक्षता वाली पीठ ने निर्देश दिया कि मुंतजामिया कमेटी मदरसा बहरुल उलूम और कब्रिस्तान की अपील को सात मई की सुनवाई के लिए सूचीबद्ध संबंधित मामले के साथ जोड़ दिया जाए। ये याचिका 7 मार्च को दायर की गई थी। जिसे अब 7 मई को सुना जाएगा। मस्जिद कमेटी ने एकल न्यायाधीश के 23 फरवरी के आदेश को चुनौती दी है, जिसमें रमजान और ईद की नमाज के लिए मस्जिद स्थल में दाखिल होने की इजाजत देने वाली याचिका को खारिज कर दिया गया था।

याचिकाकर्ता के वकील ने कोर्ट से अपील पर एक आदेश पारित करने की गुजारिश करते हुए कहा कि तब तक रमजान के साथ-साथ ईद की अवधि भी समाप्त हो जाएगी, लेकिन हाई कोर्ट ने कहा कि इस स्तर पर मामले में कोई अंतरिम आदेश पारित नहीं किया जा सकता है, खासकर जब एकल न्यायाधीश ने करीब एक महीने पहले राहत देने से इनकार कर दिया था।

इस दौरान हाई कोर्ट ने 23 फरवरी के आदेश पर भी ध्यान दिया, जिसने “साइट तक पहुँच की माँग करने वाली समान प्रार्थना” के साथ एक आवेदन खारिज कर दिया था। इससे पहले आवेदन में लोगों को ‘शब-ए-बारात’ के अवसर पर मस्जिद स्थल पर अपने परिवार के सदस्यों की कब्रों पर प्रार्थना करने की अनुमति माँगी गई थी।

गौरतलब है कि 600 साल से ज्यादा पुरानी मानी जाने वाली अखूँदजी मस्जिद और साथ ही वहाँ के बहरुल उलूम मदरसे को संजय वन में अवैध ढाँचा घोषित कर दिया गया था और इसे 30 जनवरी को दिल्ली विकास प्राधिकरण ने ध्वस्त कर दिया।

धर्मनगरी अयोध्या में नशे के कारोबार की साजिश, पौराणिक परिक्रमा मार्ग से स्मैक के साथ गिरफ्तार हुई बुर्का वाली परवीन बानो: NDPS एक्ट के तहत यूपी पुलिस ने भेजा जेल

उत्तर प्रदेश के अयोध्या में पुलिस ने नशे का कारोबार करने के आरोप में एक मुस्लिम महिला को गिरफ्तार किया है। आरोपित महिला का नाम परवीन बानों है जो बुर्का पहन कर स्मैक बेचती थी। पुलिस ने परवीन बानो के पास से 75 ग्राम स्मैक बरामद किया है। रविवार (7 अप्रैल, 2024) को परवीन बानो की गिरफ्तारी धर्मनगरी अयोध्या के क्षेत्र में आने वाले उस मार्ग से हुई है जहाँ लाखों श्रद्धालु एक साथ हर साल परिक्रमा करते हैं। यह स्थान रामजन्मभूमि मंदिर से महज 4 से 5 किलोमीटर की दूरी पर है।

यह मामला अयोध्या जिले के नगर कोतवाली क्षेत्र का है। यहाँ तैनात सब इंस्पेक्टर संतोष कुमार ने इस कार्रवाई की FIR दर्ज करवाई है। अपनी FIR में उन्होंने बताया है कि रविवार को वो पठान टोलिया नाम के मोहल्ले के पास 2 महिला कांस्टेबलों अनीता और निकेता के साथ गश्त कर रहे थे। इसी दौरान एक विश्वसनीय मुखबिर ने उन्हें पठानटोलिया मोड़ के पास एक महिला द्वारा स्मैक बेचने की सूचना दी। मुखबिर ने यह भी बताया कि महिला बुर्के (नकाब) में खड़ी है। मुखबिर की सूचना पर पुलिस टीम बताई गई जगह की तरफ बढ़ गई।

FIR में आगे बताया गया है कि सूचना सही पाई गई। बुर्का पहने एक महिला अयोध्या के परिक्रमा मार्ग पर खड़ी दिखी जो पुलिस को देख कर भागने लगी। महिला सिपाहियों ने दौड़ा कर उसे पकड़ लिया। पूछताछ करने पर बुर्के वाली महिला ने अपना परिचय खलीकुर्रहमान की बेटी परवीन बानो के तौर पर दिया। तलाशी के दौरान लगभग 30 वर्षीया परवीन के पास एक पर्स मिला। पर्स में 8900 रुपए कैश के अलावा 75 ग्राम स्मैक भी बरामद हुआ। स्मैक को कई पुड़िया बना कर रखा गया था।

पुलिस की पूछताछ में परवीन बानो ने अपना गुनाह कबूल कर लिया। उन्होंने बताया कि वो स्मैक बेच कर ही अपना घर चला रहीं थीं। अलग-अगल साइज की पुड़िया में भरे स्मैक के अलग-अलग दाम देने पड़ते थे। परवीन बानो के पास मिले पर्स, रुपए और स्मैक को सील कर दिया गया है। गिरफ्तारी की सूचना परवीन बानो की अम्मी जनितुन्निशा को भिजवा दी गई। अरोपिता पर NDPS एक्ट की धारा 8/21 के तहत कार्रवाई की गई है। ऑपइंडिया के पास FIR कॉपी मौजूद है।