लोकसभा चुनावों से पहले तमिलनाडु के कोयंबटूर से करोड़ों रुपए बरामद हुए हैं। मामला पोल्लाची हैचरी का है। वहाँ चुनाव से कुछ दिन पूर्व आयकर विभाग ने रेड मारकर 32 करोड़ रुपए जब्त किए हैं।
सूत्रों के आई खबर में बताया जा रहा है कि इनकम टैक्स विभाग ने एक पोल्ट्री फार्म में छापा मारकर ये रकम जब्त की है। पैसे ज्यादा होने के कारण उन्हें तीन बक्सों में भरकर इसे लाना पड़ा। अब इस मामले में आगे की जाँच जारी है।
Amid election fervor, a poultry farm in #Pollachi becomes the scene of a record-breaking cash haul, with Rs 32 crores seized sparking intrigue over its purpose.https://t.co/rRbcK3DdZX
— The New Indian Express (@NewIndianXpress) April 9, 2024
खबरों के अनुसार आईटी अधिकारी ने सोमवार सुबह (8 अप्रैल 2024) पोल्लाची में वेंकटेशा कॉलोनी में छापा मारा। रेड करीबन 15 घंटे चली और रकम 32 करोड़ जब्त हुई। छापेमारी के बाद बैंक स्टाफ को भी उस जगह पर बुलाया गया।
अनुमान है कि शायद ये पैसा इसलिए इकट्ठा किया गया हुआ था ताकि उसे वोटर्स में बाँटा जा सके। अब आईटी विभाग के साथ निर्वाचन आयोग के अधिकारी भी इसकी जाँच कर रहे हैं। अभी तक यही सामने आया है कि इस फर्म को अरुण मुरुगन और श्रवण मुरुगन द्वारा पोल्लाची में चलाया जा रहा है। इसकी कई अन्य ब्रांच राज्य भर में फैली हुई हैं।
बता दें कि इससे पहले तमिलनाडु में ही मतदाताओं को रिश्वत देने की शिकायत पर आयकर विभाग ने कार्रवाई करते हुए 4 करोड़ रुपए की नकदी को बरामद किया था। चुनाव आयोग को बताया गया था कि मतदाताओं को बाँटने के लिए कुछ जगहों पर बड़ी मात्रा में नकदी जुटाई गई है।
इस टिप पर कोंडीतोप और ओटेरी समेत पाँच जगहों पर 30 से अधिक आईटी अधिकारियों ने छापा मारा। इस दौरान चार करोड़ की नकदी मिली। इनमें 2.60 करोड़ चेन्नई से, सेनम से 70 लाख रुपए, तिरुचि से 55 लाख रुपए और वाहन जाँच से करीब 40 लाख रुपए पकड़े गए थे।
सुप्रीम कोर्ट ने मुख़्तार अंसारी के बेटे अब्बास अंसारी को अपने अब्बा के अंतिम संस्कार में शामिल होने की अनुमति दे दी है। कासगंज जेल में बंद अब्बास अंसारी को 9 से 12 अप्रैल तक मुख़्तार के अंतिम संस्कार में भाग लेने की अनुमति दी गई है। 13 अप्रैल को अब्बास अंसारी को फिर से कासगंज जेल में दाखिल होना होगा। इस दौरान अब्बास अंसारी को मीडिया से दूर रहने की नसीहत दी गई है। अब्बास की तरफ से सुप्रीम कोर्ट में कपिल सिब्बल ने मंगलवार (9 अप्रैल, 2024) को बहस की है।
हाईकोर्ट से याचिका ख़ारिज होने के बाद अब्बास ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की थी। ‘लाइव लॉ’ के मुताबिक, इस याचिका पर जस्टिस सूर्यकांत की बेंच ने सुनवाई की है। उत्तर प्रदेश सरकार की तरफ से असिस्टेंट एटॉर्नी जनरल गरिमा प्रसाद ने इस याचिका का विरोध किया। याचिकाकर्ता की तरफ से पेश हुए कपिल सिब्बल ने अब्बास अंसारी के लिए 4 दिनों की अंतरिम जमानत माँगी। इस समय में सिब्बल ने मऊ से कासगंज आने-जाने के समय को भी जोड़ा था। अपनी दलील में उन्होंने अब्बास के अब्बा की मौत संदिग्ध हालातों में भी होना बताया है।
उत्तर प्रदेश सरकार की तरफ से पेश असिस्टेंट एटॉर्नी जनरल गरिमा प्रसाद ने इस याचिका का विरोध किया। उन्होंने कहा कि अब्बास अंसारी एक गैंगस्टर है जो अपने खिलाफ लंबित 4 अलग-अगल FIR में अंतरिम जमानत माँग रहा है। AAG ने तो यहाँ तक भी कहा कि अंतरिम राहत की माँग का फातिहा से कोई लेना-देना नहीं है, असलियत में अब्बास का मकसद सिर्फ जमानत पाना है। गरिमा प्रसाद ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि अब्बास पर कुल 11 गंभीर आपराधिक केस दर्ज हैं ऐसे में उसको राहत देना उचित नहीं होगा।
फोटो साभार: X/LiveLaw
असिस्टेंट एटॉर्नी जनरल ने आगे कहा कि अब्बास अंसारी ने चित्रकूट जेल में भी रहते हुए अपनी गैंग तैयार कर ली थी। उन्होंने यह भी आशंका जताई है कि अब्बास आने वाले कुछ इस्लामी त्योहारों के लिए अंतरिम जमानत चाह रहा हो। उत्तर प्रदेश सरकार का पक्ष रखते हुए गरिमा प्रसाद ने यह भी बताया कि जेल से बाहर निकलने पर अब्बास अंसारी गवाहों को धमका कर केस को प्रभावित कर सकता है। दोनों पक्षों की दलीलें पूरी होने के बाद अदालत ने अपना फैसला सुनाया।
अपने आदेश में अदालत ने बताया कि अब्बास अंसारी बुधवार (10 अप्रैल, 2024) को अपने घर जा कर फातिहा पढ़ सकते हैं। इसी के साथ अब्बास को 11 और 12 तारीख़ को भी घर पर अपने परिजनों के साथ समय बिताने की छूट दे दी गई है। 13 तारीख को नियमानुसार अब्बास अंसारी को एक बार फिर से कासगंज जेल में दाखिल होना है। जस्टिस सूर्यकांत ने यह भी कहा कि अब्बास को आज ही यानी मंगलवार (9 अप्रैल) को ही जेल से निकाल कर उनके घर ले जाने की अनुमति दी जाती है। बताते चलें कि अब्बास के अब्बा मुख़्तार अंसारी की 28 मार्च 2024 को बाँदा जिले में हार्ट अटैक से मौत हो गई थी।
भारत विश्व की सबसे बड़ी आबादी वाला देश है। सबसे बड़ी आबादी वाले देश की सुरक्षा का दायित्व भी बड़ा है। इस सुरक्षा के लिए सैनिकों के साथ ही हथियारों की बड़ी जरूरत होती है। भारत आजादी के बाद से ही अपने हथियारों के लिए रूस, फ़्रांस, इजरायल और अमेरिका जैसे देशों पर निर्भर रहा है।
भारतीय सुरक्षाबलों की सामान्य सी बंदूक से लेकर लड़ाकू विमान तक बाहर से आते रहे हैं। विदेशों पर ऐसी निर्भरता रही है कि हम विश्व के सबसे हथियारों के खरीददार रहे हैं। 2014 से पहले देश के रक्षा मंत्री ने खुद माना था कि हमारे पास हथियार खरीदने का पैसा नहीं है। CAG की रिपोर्ट ने बताया था कि मार्च 2013 में देश के पास 10 दिन युद्ध लड़ने का भी गोला बारूद नहीं था।
बीते कुछ सालों से यह तस्वीर बदलने लगी है। अब भारत की सेनाएँ जहाँ भारत में बने तमाम हथियार उपयोग में ला रही हैं तो यह विदेशों में भी जा रहे हैं। देश का रक्षा निर्यात कई गुना बढ़ गया है। विदेशों से कम्पनियाँ आकर भारत में निर्माण कर रही हैं। देश के अंदर भी कई नई कम्पनियाँ खुल रही हैं जो कि रक्षा उत्पाद बना रही हैं। वर्षों से लटके रक्षा प्रोजेक्ट भी रफ़्तार पकड़ने लगे हैं। सेनाएँ भी अब भारत में बने उत्पादों पर भरोसा दिखा रही हैं। मोदी सरकार ने साफ़ कर दिया है कि देश में बने रक्षा उत्पाद ही अब सेनाओं के हाथ में दिए जाएँगे।
UPA सरकार के मुकाबले 22 गुना बढ़ा निर्यात
बीते 10 वर्षों में भारत के रक्षा उत्पादों के निर्यात में 22 गुना से अधिक की बढ़ोतरी हुई है। यह बढ़ोतरी इसलिए हुई हैं क्योंकि देश में अब अच्छी गुणवत्ता के रक्षा उत्पाद बन रहे हैं। आर्मेनिया, बांग्लादेश और फिलिपिन्स जैसे देश भारत से बड़ी मात्रा में रक्षा उत्पाद खरीद रहे हैं। आँकड़ों पर अगर नजर डाली जाए तो पता चलता है कि UPA सरकार के सत्ता में रहते समय 10 वर्षों में (2004-14) तक कुल ₹4312 करोड़ का रक्षा निर्यात देश ने किया।
मोदी सरकार में यह स्थिति पूरी तरह बदल गई। मोदी सरकार के दस सालों के आँकड़ों पर नजर डाली जाए तो 2014-24 के बीच ₹88,319 करोड़ के रक्षा निर्यात हुए हैं। 2023-24 में ही देश का रक्षा निर्यात ₹21,083 करोड़ रहा। यह 2022-23 में ₹15,920 करोड़ था। यानी एक वर्ष में ही इसमें 32.5% की वृद्धि हुई। इसमें भी बड़ी बात यह है कि इन रक्षा निर्यातों में 60% सरकारी रक्षा निर्माण संस्थानों का था। यानी ₹12,000 करोड़ से अधिक का निर्यात सरकारी रक्षा संस्थानों ने किए।
(चित्र BG साभार: @AdithyaKM_/X)
SIPRI की एक रिपोर्ट बताती है कि भारत का विश्व के रक्षा निर्यातों में अब 10% से अधिक हिस्सा है। 10 वर्षों पहले यह नगण्य था। भारत ने आर्मेनिया को एयर डिफेन्स सिस्टम, ATAGS (तोपें), पिनाका राकेट सिस्टम और स्वाति राडार समेत तमाम रक्षा उत्पाद बेंचे हैं। भारत, फिलिपीन्स को ब्रह्मोस मिसाइल भी बेंची हैं। इसके अलावा भी कई देशों को भारत ने महत्वपूर्ण रक्षा उत्पाद बेचे हैं। बांग्लादेश भारत से लगातार रक्षा उत्पाद खरीदता रहा है। यानी मोदी सरकार के भारत सिर्फ हथियार आयात नहीं बल्कि निर्यात भी कर रहा है।
अब देश में ही बन रहे विदेशी हथियार भी, आत्मनिर्भर पर जोर
भारत की रक्षा निर्माण कम्पनियाँ जहाँ बीते 10 वर्षों में काफी आगे बढ़ी हैं तो वहीं विदेशी कम्पनियाँ भी आकर भारत में ही निर्माण कर रही हैं। अब देश के अंदर विश्व की कई बड़ी कम्पनियाँ अपने हथियार बना रही हैं। इजरायल की IWI जहाँ PLR कम्पनी के साथ मिलकर देश में बंदूकें बना रही है तो वहीं कोरिया की कम्पनी L&T के साथ मिलकर होवित्ज़र तोपें बना रही है। एयरबस भी गुजरात वड़ोदरा में वायु सेना के लिए C-295 विमान का निर्माण कर रही है। अडानी के साथ मिलकर इजरायली IAI भारत में ड्रोन बना रही है।
सेना को ज्यादा से ज्यादा भारत में निर्मित हथियार मिलें, इसके लिए मोदी सरकार ने भी कदम उठाए हैं। मोदी सरकार के अंतर्गत रक्षा मंत्रालय ने उन रक्षा सामानों की सूचियाँ जारी करना चालू किया है जिन्हें सिर्फ भारतीय निर्माताओं से ही खरीदा जाना है। रक्षा मंत्रालय अब तक पाँच ऐसी सूचियाँ जारी कर चुका है। इनमें 500 रक्षा सामान शामिल किए गए हैं। इसके अंतर्गत कई महत्वपूर्ण तकनीकी सामान भी शामिल किए हैं।
नए स्टार्टअप को भी मिल रहा मौक़ा, सेना के जवान डिजाइन कर रहे हथियार
भारत में रक्षा सामग्री के निर्माण के लिए मात्र बड़ी और सरकारी कम्पनियाँ ही नहीं बल्कि नए स्टार्टअप को भी मौक़ा दिया जा रहा है। केंद्र सरकार ने 2018 में IDEX स्कीम चालू की थी। इसके अंतर्गत नए डिफेन्स स्टार्टअप को सरकार एक प्रोजेक्ट के लिए ₹50 करोड़ का अनुदान दिया जाता है। इससे युवा भी रक्षा निर्माण के क्षेत्र में आ रहे हैं। हाल ही में IDEX के अंतर्गत रक्षा मंत्रालय ने ₹200 करोड़ का एक सौदा किया था। दो कम्पनियों को इसके अंतर्गत ड्रोन बनाने का आर्डर दिया गया था।
युवा शक्ति को बढ़ावा देने के कारण अब सेना के भीतर से भी काफी नई डिजाइन बन रही हैं। भारतीय थल सेना के अफसर प्रताप बनसोड ने एक मशीन पिस्टल (ASMI) बनाई है। भारतीय सेना इसे खरीदने भी जा रही है। भारतीय सेना ने 550 ASMI खरीदने का निर्णय लिया है। यह पूरी तरीके से भारत में ही निर्मित है और विदेशी मशीन पिस्टल से सस्ती भी है।
सालों से अटके थे जो प्रोजेक्ट, अब देश की रक्षा में
मोदी सरकार में दशकों से लंबित रक्षा प्रोजेक्ट को भी रफ़्तार मिली है। जो रक्षा प्रोजेक्ट 1980 के दशक में चालू किए गए थे, वह मोदी सरकार के आने के बाद धरातल पर उतर पाए। इसका सबसे बड़ा उदाहरण भारत का स्वदेशी लड़ाकू विमान LCA तेजस है। LCA तेजस को 1980 के दशक में सरकार की मंजूरी मिली थी, जबकि इसकी पहली सफल उड़ान 2001 में वाजपेयी सरकार के दौरान हुई। इसके बाद यह प्रोजेक्ट कछुए की चाल से चलता रहा।
मोदी सरकार के अंतर्गत इस प्रोजेक्ट ने रफ़्तार पकड़ी और 2015 में पहली बार तेजस को वायु सेना में शामिल किया गया। वर्तमान में भारतीय वायु सेना के पास लगभग 40 तेजस विमान हैं जबकि उसने लगभग 200 तेजस विमानों का आर्डर हिन्दुस्तान एरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) को दे रखा है। तेजस की तरह ही भारतीय वायु सेना में हाल ही में प्रचंड लड़ाकू हेलीकाप्टर भी शामिल किए गए हैं। यह भी लम्बे समय से लटके हुए हुए थे। इसके अलावा सेना ने 550 अर्जुन मार्क-1 बनाने का ऑर्डर दिया है।
देश के पास अब अब स्वनिर्मित एयरक्राफ्ट कैरियर आईएनएस विक्रांत है। इसको भी मुख्यतः मोदी सरकार के अंतर्गत ही बनाया गया है। इसको पीएम मोदी ने अगस्त 2022 में देश को समर्पित किया था। 45000 टन विस्थापन वाला यह कैरियर लम्बे समय से बन रहा था।
मोदी सरकार ने कई लम्बे समय से लटके रक्षा सौदों को भी अंतिम रूप देकर सेना के हाथ मजबूत किए हैं। इनमें सबसे बड़ा उदाहरण वायु सेना के लिए खरीदे 36 राफेल जेट्स का है। वायु सेना को लम्बे समय से नए पीढ़ी के लड़ाकू विमानों की जरूरत थी। मोदी सरकार ने फ्रांस से डील करके यह विमान खरीदे। इसके अलावा मोदी सरकार ने एयर फ़ोर्स की क्षमता बढ़ाने के लिए चिनूक और अपाचे जैसे हेलिकॉप्टर खरीदे हैं। मोदी सरकार ने देश की सीमा पर खड़े रहने वाले जवानों के लिए सिग सार कम्पनी की राइफल खरीदी हैं।
नए प्रोजेक्ट पर काम चालू
भारतीय सेनाओं को सबसे नई तकनीक मिले, इसके लिए भी काम चल रहा है। हाल ही में मोदी सरकार ने पाँचवी पीढ़ी के लड़ाकू विमान के लिए मंजूरी दी है। इसकी पहली उड़ान 2030 तक होने की आशा है। इसी के साथ ही नौसेना के लिए नई पनडुब्बियों को लेकर भी काम चल रहा है। थल सेना के लिए नया हल्का टैंक बनाया जा रहा है। इसका उपयोग चीन के खिलाफ मुख्यतः किया जाना है। कई अन्य मिसाइलों पर भी काम चल रहा है। इनमें से कई का सफलतापूर्वक परीक्षण हो चुका है।
राजस्थान के मेवाड़ स्थित शक्ति पीठ ईडाणा माता ने चैत्र नवरात्रि के पहले दिन अग्रि स्नान करके भक्तों को दर्शन दिया। बताया जा रहा है कि सुबह 10 बजकर 20 मिनट पर माता की प्रतिमा के चारों ओर आग की लपटें उठती दिखीं, फिर आधे घंटे तक माँ के दर्शन हुए।
ये आग की लपटें करीबन ढाई घंटे तक प्रतिमा के पास जलती रहीं। इस दौरान धीरे-धीरे माँ पर चढ़ाई जाने वाली चुनर और धागे सब भस्म हो गए लेकिन माँ की प्रतिमा वैसी की वैसी रही। करीबन 12:30 बजे जब आग शांत हुई तो माता का फिर से नया श्रृंगार किया गया।
माता ईडाणा ने अग्निस्नान किया। भक्तों को दिए अलौकिक स्वरूप के दर्शन। दर्शन के लिए भक्तों की भीड़ उमड़ी। नवरात्रि के पहले दिन आधे घंटे तक तेज लपटों के साथ हुए माता के दर्शन। मान्यता है कि ईडाणा मां अग्नि स्नान करती है, इस दौरान प्रतिमा के पास रखे चढ़ावा और अन्य चीजें जल जाती है और… pic.twitter.com/mo2Le1OrIY
दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के अनुसार, ईडाणा माता स्थित गायत्री धाम के आचार्य शैलेश त्रिवेदी ने माता के अग्नि स्नान के बारे में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि अग्निस्नान को लेकर कोई दिन और समय तय नहीं है। यह संयोग है कि इस बार हिंदू नव वर्ष के दिन अभिजीत मुहूर्ज में अग्नि स्नान शुरू हुआ। उन्होंने बताया कि जब आसपास के लोगों को आज के दिन माता के स्नान के बारे में पता चला तो मंदिर में भक्तों की भीड़ लग गई। पिछले साल भी माता ने अग्निस्नान करके अपने दर्शन चैत्र नवरात्रि में दिए थे। 2022 में माता ने 28 मार्च को अग्नि स्नान किया था। 2021 में माता ने 2 बार स्नान किया था। एक 9 मार्च 2021 को और फिर 14 मार्च 2021 को।
बता दें कि उदयपुर से करीब 60 किलो मीटर दूर कुराबड़- बम्बोरा मार्ग पर अरावली की पहाडिय़ों के बीच स्थित ईडाणा माता का यह मंदिर हजारों वर्ष प्राचीन है। मान्यता है कि महाभारत काल में इस मंदिर की स्थापना की गई थी। अग्निस्नान देखने के लिए लोग यहाँ विदेशों से भी आते हैं। लेकिन कोई तिथि तय नहीं होने के कारण ज्यादातर मौकों पर लोगों को निराश होकर ही लौटना पड़ता है। इस मंदिर की देवी ईडाणा माता को स्थानीय रजवाड़े अपनी कुलदेवी के रूप में पूजते आए हैं।
यहाँ माता का कोई भव्य मंदिर नहीं है। ईडाणा माता बरगद के वृक्ष के नीचे विराजमान हैं। माता के सिर के ऊपर कोई शिखर भी नहीं है। माता खुले आसमान के नीचे निवास करती हैं। माँ की मूर्ति के पीछे केवल मनोकामना पूरी होने पर भक्तों की ओर से चढ़ाई जाने वाली चुनरी और त्रिशूलों का सुरक्षा कवच मौजूद है।
यह घटना किसी आश्चर्य से कम नहीं है कि अग्नि स्नान के बाद भी माता की प्रतिमा वर्षों पहले जैसी थी आज भी वैसी ही है जबकि ईडाणा माता के अग्निस्नान के समय उठने वाली लपटों से कई बार उस बरगद के पेड़ तक को नुकसान पहुँचा हैं जिसके नीचे सदियों से माता रानी विराजमान हैं। इस शक्ति पीठ की विशेष बात यह है कि यहाँ माँ के द्वार और दर्शन चौबीस घंटे खुले रहते हैं और माना जाता है कि यहाँ आकर लकवाग्रस्त मरीज ठीक हो जाते हैं। ईडाणा माता परिसर में दर्शन के लिए माँ का दरबार, अखंड ज्योति दर्शन, धुनी दर्शन, रामदेव मंदिर व एक बड़ी भोजनशाला है।
पश्चिम बंगाल में बम ब्लास्ट के आरोपितों को गिरफ्तार करने गई NIA की टीम पर हमला के बाद राज्य की पुलिस ने NIA अधिकारियों पर ही महिलाओं के शोषण का मामला दर्ज कर लिया है। इतना नहीं, पुलिस ने NIA के दो अधिकारियों को समन भेजकर पूछताछ के लिए बुलाया है और क्षतिग्रस्त वाहन भी लाने को कहा है। इसके बाद NIA ने कलकत्ता हाई कोर्ट पहुँचकर FIR रद्द करने की माँग की है।
दरअसल, NIA की टीम ने शनिवार (06 अप्रैल 2024) को पश्चिम बंगाल के पूर्व मेदिनीपुर जिले के भूपतिनगर में साल 2022 में हुए विस्फोट के मामले में आरोपितों को गिरफ्तार करने पहुँची थी। इस दौरान अधिकारियों पर ही हमला कर दिया और उसकी वाहन को क्षतिग्रस्त कर दिया गया। हालाँकि, टीम साजिशकर्ता मनोब्रत जना और बलाई चरण मेइती को गिरफ्तार कर लिया। इस विस्फोट में तीन लोगों की मौत हो गई थी।
टीएमसी नेता मनोब्रत जना की पत्नी ने एनआईए अधिकारियों के खिलाफ ही एफआईआर दर्ज करा दी है। ये एफआईआर छेड़छाड़ और महिला की गरिमा को ठेस पहुँचाने के आरोपों में दर्ज कराई गई है। हालाँकि, NIA ने इन आरोपों का खंडन किया है। एनआईए ने कहा कि उसकी टीम ने कोई भी गैर-कानूनी काम नहीं किया। एनआईए की टीम बम धमाके की जाँच के लिए पहुँची थी।
इस FIR के आधार पर पश्चिम बंगाल पुलिस ने मंगलवार (9 अप्रैल 2024) को छापेमारी के दौरान हमले में घायल होने वाले दो अधिकारियों को समन भेजा है। पुलिस ने 11 अप्रैल को भूपतिनगर थाने में पेश होने के लिए कहा है। इतना ही नहीं, भूपतिनगर पुलिस थाने के जाँच अधिकारी ने एनआईए से शनिवार को हुए कथित हमले के दौरान क्षतिग्रस्त वाहन को भी साथ लाने के लिए कहा है।
भूपतिनगर पुलिस स्टेशन के जाँच अधिकारियों ने एनआईए टीम पर हमले के मामले में तीन ग्रामीणों को भी समन भेजकर पूछताछ के लिए बुलाया है। ग्रामीणों को अगले दो से तीन दिनों के भीतर पुलिस के सामने पेश होने को कहा गया है।
राज्य सरकार की कार्रवाई को देखते हुए NIA कलकत्ता हाई कोर्ट पहुँच गई है। एजेंसी ने हाई कोर्ट के सिंगल बेंच जज जय सेनगुप्ता के समक्ष बताया कि राज्य पुलिस ने एजेंसी के उन अधिकारियों के खिलाफ ‘छेड़छाड़’ के लिए एफआईआर दर्ज की थी, जिन पर आरोपित के परिवार के सदस्यों के आदेश पर हमला किया गया था।
गौरतलब है कि बंगाल में केंद्रीय एजेंसी पर पहली बार हमला नहीं हुआ है। इसके पहले 5 जनवरी 2024 को संदेशखाली में TMC नेता शाहजहाँ शेख को गिरफ्तार करने गई ED की टीम पर भी हमला किया गया था। उसी हमले के बाद जनजातीय समाज की कई महिलाओं ने आगे आकर शाहजहाँ शेख व उसके गुर्गों पर यौन शोषण का आरोप लगाया था।
दिल्ली उच्च न्यायालय ने AAP के संयोजक व प्रदेश के CM अरविंद केजरीवाल को जमानत देने से इनकार कर दिया है। अपनी याचिका में केजरीवाल ने कहा था कि उनकी गिरफ़्तारी PMLA (मनी लॉन्ड्रिंग कानून) की धारा-19 का उल्लंघन है। जस्टिस स्वर्ण कान्त शर्मा ने कहा, “ED द्वारा जुटाए गए तथ्यों से पता चलता है कि अरविंद केजरीवाल ने दिल्ली की शराब नीति बनाने की साजिश रची, वो इसका हिस्सा बने और फिर इस अपराध से हुई आय का इस्तेमाल किया।”
दिल्ली हाईकोर्ट ने ये भी कहा कि वो कठोर रूप से दिल्ली में शराब नीति बनाने और घूस माँगने में व्यक्तिगत रूप से शामिल हैं, साथ ही AAP के संयोजक के रूप में भी वो इस अपराध में शामिल हैं। इस मामले में सरकारी गवाह बने आरोपितों के संबंध में कोर्ट ने कहा कि इससे जुड़ा कानून 100 वर्ष पुराना है और ये कोई 1 साल पुराना कानून नहीं है कि याचिकाकर्ता को झूठ का फँसा दिया गया। हाईकोर्ट ने कहा कि अरविंद केजरीवाल को गवाहों को क्रॉस-एग्जामिन करने का अधिकार है।
दिल्ली हाईकोर्ट ने ये भी कहा कि कौन चुनाव लड़ने के लिए टिकट देता है और कौन इलेक्टोरल बॉन्ड्स खरीदता है ये हमारी चिंता का मसला नहीं है। जज ने कहा कि जाँच एजेंसी को ये निर्देश नहीं दिया जा सकता कि वो एक व्यक्ति की सहूलियत के हिसाब से जाँच को दिशा दे, वो अपने हिसाब से काम करेगी। दिल्ली हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि एक आम आदमी और एक मुख्यमंत्री के लिए अलग-अलग कानून नहीं हो सकता। गिरफ़्तारी की टाइमिंग को लेकर हाईकोर्ट ने कहा कि गिरफ़्तारी और रिमांड को कानून के हिसाब से देखना है, चुनावों को बिना मद्देनजर रखते हुए।
Court records the submissions of Singhvi.
Court: This court is of the opinion, amongst several statements, the statements of Mr. Reddy and Raghav (approvers) have been termed as unreliable.#ArvindKejriwal#ED
दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने ED द्वारा खुद को गिरफ्तार किए जाने को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। उच्च न्यायलय ने इस संबंध में फैसला सुरक्षित रख लिया था। AAP नेता सौरभ भारद्वाज ने पहले ही कहा था कि उन्हें कोर्ट पर भरोसा नहीं है। बुधवार (3 अप्रैल, 2024) को दिल्ली हाईकोर्ट में जस्टिस स्वर्णकांत शर्मा की अदालत में इस मामले पर सुनवाई हुई थी। कॉन्ग्रेस नेता अभिषेक मनु सिंघवी और एडवोकेट विक्रम चौधरी ने दिल्ली CM की तरफ से पैरवी की थी।
दिल्ली की राउज एवेन्यू अदालत ने तेलंगाना के पूर्व मुख्यमंत्री KCR की बेटी K कविता की कस्टडी 23 अप्रैल तक के लिए बढ़ा दी है। BRS की के कविता भी शराब घोटाले में फँसी हुई हैं। हालाँकि, उन्होंने अदालत को लिखे पत्र में खुद को पीड़िता बताते हुए कहा है कि ED और CBI पिछले ढाई वषों से मीडिया ट्रायल चला रही है। उन्होंने दावा किया कि शराब घोटाले से उन्हें कोई आर्थिक लाभ नहीं मिला है, उन्होंने आरोप लगाया कि उनके व्यक्तिगत एवं राजनीतिक प्रतिष्ठा को ठेस पहुँचाई गई है।
K कविता ने आरोप लगाया कि टीवी चैनलों पर उनके मोबाइल फोन को दिखाया जाता है, जो उनकी प्राइवेसी का उल्लंघन है। BRS की नेता ने जाँच में पूर्ण सहयोग का दावा करते हुए बताया कि उन्होंने अपने बैंक खाते की जानकारियाँ भी जाँच एजेंसियों से साझा कर दी है। उन्होंने जाँच एजेंसियों पर धमकी देने का आरोप लगाते हुए कहा कि छापेमारियों से उन्हें शारीरिक एवं मानसिक प्रताड़ना हुई है। K कविता ने कहा कि जिन मोबाइल फोन्स के बारे में कहा जा रहा है कि उन्होंने नष्ट कर दिया, वो सब वो सौंप देंगी।
भारतीय जनता पार्टी (BJP) के राष्ट्रीय अध्यक्ष JP नड्डा की पत्नी मल्लिका की फॉर्च्यूनर कार 19 मार्च, 2024 को दिल्ली के गिरी नगर इलाके से चोरी हो गई थी। इस गाड़ी को दिल्ली, हरियाणा और उत्तर प्रदेश पुलिस ने सामूहिक अभियान चला कर 15 दिनों बाद गुरुवार (4 मार्च, 2024) को वाराणसी से खोज निकाला। अलग-अलग प्रदेशों में दी गई दबिश के दौरान इस फॉर्च्यूनर को चुराने वाली गैंग के कई सदस्य गिरफ्तार किए गए। 15 दिनों में यह वाहन 3 अलग-अलग मौकों पर बेचा गया था।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, 19 मार्च को यह फॉर्च्यूनर तब चोरी हुई जब इसे दिल्ली के गिरी नगर इलाके में सर्विसिंग के लिए भेजा गया था। जेपी नड्डा के ड्राइवर जोगिंदर सिंह ने इसकी FIR थाना गोविंदपुरी में दर्ज करवाई थी। दिल्ली पुलिस ने फ़ौरन ही फॉर्च्यूनर की तलाश शुरू कर दी। जाँच के दौरान मिले पहले CCTV फुटेज में फॉर्च्यूनर दिल्ली से गुरुग्राम की तरफ जाती दिखी। इसके आगे के फुटेज का मिलान करते हुए दिल्ली पुलिस फरीदाबाद के बुडकल इलाके में पहुँची।
यहाँ फॉर्च्यूनर की तलाश में दिल्ली और हरियाणा पुलिस मिल कर काम करने लगीं। कुछ ही देर में यह पता लगा लिया गया कि चोरी शिवांश और शाहिद नाम के 2 चोरों द्वारा की गई है। इन दोनों को गाड़ी चोरों के एक बड़े गैंग का मेंबर बताया गया। पुलिस ने फ़ौरन शाहिद और शिवांश की तलाश शुरू कर दी। आखिरकार 22 मार्च को पटियाला हाउस के पास शिवांश दिल्ली पुलिस के हत्थे चढ़ ही गया। पूछताछ में उसने चोरी में अपने साथ शाहिद, फारुख और शाहकुल के भी शामिल होने की जानकारी दी।
मिली जानकारी के मुताबिक, ये चारों आरोपित फॉर्च्यूनर चुराने हुंडई की क्रेटा कार से गए थे। यह क्रेटा कार भी इन आरोपितों ने कुछ दिनों पहले नोएडा से चुराई थी। नड्डा परिवार की फॉर्च्यूनर चुरा कर इन्होंने उसे फरीदाबाद में रहने वाले फारुख नाम के व्यक्ति के फॉर्म हाउस में छिपा दिया था। यहीं पर उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी से सलीम नाम का ग्राहक आया। उसने फॉर्च्यूनर पसंद कर के खरीद ली। सलीम का काम ही चोरी की गाड़ियाँ कम दामों पर खरीद कर ऊँचे रेट पर बेचना बताया जा रहा है। उसका कारोबार UP के मुरादाबाद, मैनपुरी, हाथरस और सीतापुर जैसे शहरों में फैला हुआ है।
सलीम की गिरफ्तारी के लिए दिल्ली पुलिस ने लखीमपुर खीरी में दबिश दी। इस दबिश में उत्तर प्रदेश पुलिस भी शामिल रही। सलीम को पकड़ लिया गया। पूछताछ में सलीम ने बताया कि वो फॉर्च्यूनर कार सीतापुर जिले के मोहम्मद रईस को बेच चुका है। दिल्ली पुलिस ने फ़ौरन ही सलीम की निशानदेही पर सीतापुर में रेड की। सीतापुर में मोहम्मद रईस को भी दबोच लिया गया लेकिन फॉर्च्यूनर यहाँ भी नहीं मिली। रईस ने बताया कि उसने फॉर्च्यूनर को खरीद कर फ़ौरन ही अमरोहा जिले के फुरकान को बेच दिया है।
फुरकान की तलाश में पुलिस ने तत्काल अमरोहा में दबिश दी। यहाँ फुरकान तो मिला लेकिन चोरी हुआ वाहन नहीं। फुरकान ने पुलिस को बताया कि वो फॉर्च्यूनर को वाराणसी के बेनिया बाग़ की पार्किंग में खड़ा कर के आया है। फुरकान की बताई गई जगह पर पुलिस टीम 4 मार्च, 2024 को पहुँच गई। सूचना सही पाई गई और बेनिया बाग़ की पार्किंग से जे पी नड्डा की पत्नी की फॉर्च्यूनर को बरामद कर लिया गया। अब तक शिवांश, शाहिद, सलीम, मोहम्मद रईस और फुरकान को गिरफ्तार किया जा चुका है। घटना में शामिल अन्य संदिग्धों की तलाश में दबिश दी जा रही है।
भारत के खिलाफ बयानबाजी करने पर पाकिस्तान को सऊदी अरब से लेकर अमेरिका तक से मुँह की खानी पड़ रही है। सऊदी अरब में तो पाकिस्तान ने अपना पुराना रोना रोते हुए कश्मीर पर मुद्दा उठाया तो वहाँ से जवाब मिला कि वो जाकर इस बारे में भारत से बात करें। वहीं अमेरिका ने भी पाकिस्तान के उन दावों पर बनी ‘द गार्जियन’ की उस रिपोर्ट कुछ बोलने से मना किया है जिसमें उन्होंने कहा था कि भारत पाकिस्तान में घुसकर लोगों को मार रहा है।
सऊदी अरब ने साथ देने से किया मना
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ सऊदी अरब के दौरे पर गए हैं। शरीफ ने सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान से मुलाकात की है। इस दौरान उन्होंने पहले तो अपने मुल्क की आर्थिक सहायता के लिए मोहम्मद बिन सुलेमान से गुहार लगाई। इसके बाद जब ये माँग सुन ली गई तो कश्मीर पर यूएन में उनकी ओर से बोलने को कहा।
इस सऊदी के प्रिंस ने कहा, “कश्मीर का मुद्दा पाकिस्तान और भारत के बीच का है और दोनों देशों को बातचीत से इसे सुलझाना चाहिए।” उनके इस बयान के बाद इसे पाकिस्तानी नागरिक खुद अपनी फजीहत मान रहे हैं। एक यूट्यूबर से बात करते हुए एक पाकिस्तानी ने कहा कि ये मामला पाकिस्तानी, भारतीय या किसी अन्य के हाथ में नहीं होना चाहिए, कश्मीर के लोग क्या चाहते हैं इस पर होना चाहिए।
अमेरिका ने की फजीहत
बता दें कि जैसे भारत की बात आने पर सऊदी ने पाकिस्तान का साथ नहीं दिया है वैसे ही द गार्जियन की रिपोर्ट में पाकिस्तानियों के पक्ष को अमेरिका के राज्य विभाग ने कोई तवज्जों नहीं दी। भारत पर लगाए गए टारगेट किलिंग के इल्जाम पर विभाग के प्रवक्ता मैथ्यू मिलर ने कहा, “इस मसले में हम मीडिया रिपोर्टों को देख कर रहे हैं। आंतकियों की मौत में भारत की संलिप्तता पर हमारी कोई टिप्पणी नहीं है। लेकिन हम दोनों पक्षों को तनाव से बचने और बातचीत के माध्यम से समाधान खोजने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।”
गौरतलब है कि पिछले दिनों द गार्जियन ने एक रिपोर्ट प्रकाशित की थी जिसमें पाकिस्तानियों के हवाले से दावा किया गया था कि भारत, पाकिस्तान में आतंकियों को मरवा रहा है। उसकी संलिप्ता 20 से ज्यादा हत्याओं में हैं। द गार्जियन और पाकिस्तान का मकसद था कि शायद ऐसी रिपोर्ट से भारत की बदनामी होगी लेकिन इस रिपोर्ट को पढ़कर भारतीय अपने देश की सरकार की और तारीफें करने लगे।
छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले में एक ऐसा मामला सामने आया है कि सुन लोग दाँतों तले अंगुली दबा ले रहे हैं। दरअसल, एक पति ने अपनी पत्नी को घर भेजने की बात कहकर उसे गलत ट्रेन पर चढ़ा दिया। इस दौरान उसने अपनी पत्नी को ना ही टिकट कटाकर दिया और ना ही खर्च के लिए पैसे दिए। पत्नी लगातार तीन दिनों तक भूखी-प्यासी घूमती रही और इधर पति ने गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज करा दी।
जानकारी के मुताबिक, छत्तीसगढ़ के भिलाई स्थित मॉडल टाउन में रहने 27 साल के थान चौधरी का अपनी 37 वर्षीया पत्नी लक्ष्मी ध्रुव से किसी बात पर झगड़ा हो गया था। इसके बाद उसने अपनी पत्नी को उसके घर आगरा भेजने के लिए दुर्ग स्टेशन लेकर आया। उस वक्त स्टेशन पर छत्तीसगढ़ एक्सप्रेस खड़ी थी। उसने पत्नी को ट्रेन के AC कोच में बिना टिकट के चढ़ा दिया।
कहा जा रहा है कि थान चौधरी ने पत्नी को ट्रेन पर बैठाने के बाद अपने साढ़ू (पत्नी के बहनोई) को फोन करके बताया कि उसने ट्रेन में बैठा दिया है और आगरा ट्रेन से लेकर उसे अपने गाँव गुमानगढ़ी थाना सादाबाद जिला हाथरस पहुँचा आए। दूसरे दिन उसका जीजा लक्ष्मी को लेने गया, लेकिन वह नहीं आई। उसके बाद उसका जीजा ने थान को इसकी जानकारी दे दी।
इसके बाद थान चौधरी ने इसकी सूचना जीआरपी पुलिस को दी और गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराकर खोजबीन शुरू कर दी। हालाँकि, जीआरपी पुलिस को इसके बारे में कोई जानकारी नहीं मिली। इसी बीच रिपोर्ट लिखवाने के तीन दिन बाद महिला खुद दुर्ग स्टेशन के जीआरपी चौकी पहुँच गई और पुलिस को इसके बारे मे जो बताया, उसे सुनकर पुलिस भी चौंक गई।
महिला लक्ष्मी ध्रुव ने बताया कि उसका अपने पति थान सिंह से अक्सर विवाद होता रहता था। उसका पति उसे अक्सर घर पर छोड़ने की बात कहता था। महिला ने बताया कि 1 अप्रैल 2024 को भी ऐसा ही हुआ। उस दिन थान चौधरी उसे लेकर दुर्ग लेकर आया और छत्तीसगढ़ एक्सप्रेस के एसी कोच में बैठा दिया। उसके पास के ट्रेन का टिकट और पैसे भी नहीं थे। इससे वह हड़बड़ा गई।
महिला ने आगे बताया कि डोंगरगढ़ में उसका पर्स भी चोरी हो गया। इसमें उसके पति का मोबाइल नंबर भी था। पर्स चोरी होने के बाद उसके पास किसी का नंबर नहीं था और ना ही पैसे थे। यहाँ तक कि ट्रेन का टिकट भी नहीं था। इस तरह वह किसी से संपर्क भी नहीं कर पाई। ट्रेन जब डोंगरगढ़ पहुँची तो लक्ष्मी ट्रेन से उतर गई।
महिला ने बताया कि इस घटना से दुखी होकर वह डोंगरगढ़ में ही ठहरी रही। इस दौरान वह एक मंदिर ठहरी और वहाँ वह भूखे-प्यासे थी। इसके बाद वह किसी तरह दुर्ग लौटी है और जीआरपी से संपर्क किया। उसने अपने साथ किसी तरह का अपराध होना नहीं बताया है। यह महिला फिलहाल अपने घर दुर्ग वापस चली गई है।
खुफिया एजेंसी इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB) की रिपोर्ट के आधार केंद्रीय गृह मंत्रालय ने भारत के मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) राजीव कुमार को Z कैटेगरी की सुरक्षा प्रदान की है। राजीव कुमार को जेड’ श्रेणी की सुरक्षा मिलने के बाद अब वे देश में जहाँ भी जाएँगे, उनके साथ यह सुरक्षा घेरा साथ चलेगा।
दरअसल, देश में लोकसभा चुनाव की प्रतिक्रिया जारी है। तृणमूल कॉन्ग्रेस (TMC) के साथ-साथ कई राजनीतिक पार्टियाँ इस समय हंगामा कर रही है। इसको देखते हुए ही इंटेलिजेंस ब्यूरो ने ‘थ्रेट परसेप्शन रिपोर्ट’ आई है। इसी रिपोर्ट के आधार पर मुख्य चुनाव आयुक्त को सुरक्षा दी गई है।
Centre has provided 'Z' category CRPF security cover to Chief Election Commissioner Rajiv Kumar across the country: Sources
बता दें कि देश में मिलने वाली 6 सुरक्षा श्रेणियों में SPG सर्वोच्च सुरक्षा श्रेणी है। यह सुरक्षा सिर्फ देश के प्रधानमंत्री को दी जाती है। इसके बाद Z+ सुरक्षा और Z सुरक्षा आती है। जेड सुरक्षा भारत की तीसरी सबसे उच्च सुरक्षा श्रेणी है।
इस सुरक्षा कवच में 4-6 एनएसजी कमांडो और पुलिसकर्मियों सहित 22 कर्मी शामिल होते हैं। उद्योगपति गौतम अडानी, बाबा रामदेव और अभिनेता आमिर खान को Z श्रेणी की सुरक्षा दी गई है। Z श्रेणी के तहत एक निजी व्यक्ति को सुरक्षा कवर मिलता है तो वह इसका भुगतान करता है, जबकि अन्य व्यक्तियों का खर्च सरकार उठाती है।
ध्यान देने वाली बात ये है कि मुख्य निर्वाचन आयुक्त और दोनों निर्वाचन आयुक्तों का कार्यकाल 6 वर्ष के लिए होता है। सीईसी की सेवानिवृत्ति की आयु 65 वर्ष और चुनाव आयुक्तों की 62 वर्ष होती है। भारत के निर्वाचन आयोग के पास विधानसभा, लोकसभा, राज्यसभा, राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति का चुनाव संपन्न कराने की जिम्मेदारी होती है।
भारत के तीन सदस्यों से मिलकर बनने वाला निर्वाचन आयोग के प्रमुख के चुनाव आयुक्तों का पद और वेतनमान भारत के सर्वोच्च न्यायालय के न्यायधीश के सामान होता है। भारत के मुख्य चुनाव आयुक्त को संसद द्वारा महाभियोग के जरिए ही हटाया जा सकता है। इसके अलावा, मुख्य चुनाव आयुक्त अपने पद से स्वयं इस्तीफा देकर भी हट सकते हैं।