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लोकसभा चुनाव: चिराग पासवान की LJP-रामविलास ने घोषित किए 5 प्रत्याशी, चाचा पशुपति पारस बोले – ‘मोदी जी हमारे नेता, NDA में ही रहेगी रालोजपा’

लोकसभा चुनाव 2024 में लोक जनशक्ति पार्टी के दोनों धड़े एनडीए में ही रहेंगे। लोजपा-रामविलास को एनडीए के टिकट बंटवारे में 5 सीटें मिली थी, जिसके बाद रालोजपा ने तेवर दिखाए थे। थे हालाँकि अब लोजपा-रामविलास ने अपने कोटे की सभी 5 सीटों पर उम्मीदवारों की घोषणा कर दी है, तो रालोजपा के अध्यक्ष पशुपति पारस ने कहा है कि वो एनडीए का ही हिस्सा रहेंगे। उन्होंने कहा कि पीएम मोदी ही उनके नेता हैं और वो एनडीए से अलग नहीं हो रहे हैं।

लोजपा-रामविलास ने घोषित किए 5 उम्मीदवारों के नाम

इस बीच, चिराग पासवान ने अपनी पार्टी के पाँच उम्मीदवारों की आधिकारिक तौर पर घोषणा कर दी है। एनडीए में सीट बंटवारे में चिराग पासवान को पाँच सीट मिली थी। इनमें हाजीपुर, समस्तीपुर, वैशाली, खगड़िया और जमुई शामिल है। लोजपा-रामविलास की सीटों पर परिवार के 2 सदस्य चुनाव लड़ रहे हैं। खुद चिराग पासवान हाजीपुर से चुनाव लड़ रहे हैं, तो उनके जीता अरुण भारती चिराग पासवान की सीट जमुई से मैदान में हैं।

इस लिस्ट में सांसद वीणा देवी का भी नाम है, उन्हें फिर से वैशाली में मौका मिला है। वैसे, चिराग पासवान वीणा देवी को लेकर खुले मंच से यह बात कहते रहे हैं कि गद्दारों को मौका नहीं देंगे, लेकिन उन्होंने वीणा को मैदान में उतारा है। इस लिस्ट में खगड़िया से राजेश वर्मा और समस्तीपुर से शांभवी चौधरी का नाम है। शांभवी चौधरी बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के करीबी मंत्री अशोक चौधरी की बेटी हैं।

पशुपति पारस के तेवर पड़े ढीले, एनडीए में ही रहेंगे

एक तरफ चिराग पासवान ने अपने उम्मीजवारों की घोषणा कर दी है, तो दूसरी तरफ पशुपति पारस के भी तेवर ढीले पड़ते दिख रहे हैं। पशुपति पारस ने चुप्पी तोड़ते हुए कहा कि हमारी पार्टी रालोजपा, एनडीए का अभिन्न अंग है। पीएम मोदी हमारे नेता है। उनके नेतृत्व में एनडीए पूरे देश में 400+ सीट जीतेगा और तीसरी बार रिकॉर्ड तोड़ बहुमत से एनडीए की सरकार बनेगी।

बता दें कि एनडीए में एक भी सीट न मिलने के बाद पशुपति पारस ने केंद्रीय मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया था। उन्होंने कहा था कि ‘मेरे और मेरी पार्टी के साथ नाइंसाफी हुई। हमें एक भी सीट नहीं दी गई।’ इस्तीफा देने के पहले तक पशुपति पारस मोदी सरकार में खाद्य और प्रसंस्करण मंत्री थे। हालाँकि अब उन्होंने साफ कर दिया है कि वो और उनकी पार्टी एनडीए में ही रहेगी।

जन्मदिन का केक खाने के बाद 10 साल की बच्ची की मौत, पूरे परिवार की तबीयत ख़राब: वीडियो में हँसते-खेलते और केक काटते दिखे, सुबह होते-होते मातम

पंजाब के पटियाला से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। यहाँ जन्मदिन का केक खाने के बाद एक 10 वर्षीय लड़की की मौत हो गई। इतना ही नहीं, पूरे परिवार की तबीयत ख़राब हो गई। रात में लड़की ने केक काटा था, सुबह होते-होते उसकी मौत हो गई। इस घटना के बाद परिवार में मातम छाया हुआ है, इलाके में भी लोग हैरान हैं। अनाज मंडी थाना क्षेत्र स्थित अमन नगर की काजल की शिकायत पर पुलिस ने FIR दर्ज कर के कार्रवाई शुरू कर दी है।

लड़की का केक काटते हुए वीडियो भी सामने आया है। इसमें बच्ची और उसका पूरा परिवार खुश नजर आ रहा है। परिवार 246 पीली सड़क रोड स्थित अदालत बाजार के ‘कान्हा केक’ दुकान से केक खरीदी थी। रविवार (24 मार्च, 2024) को मानवी का जन्मदिन था। केक मँगा कर शाम के 7 बजे काटा गया। इसके बाद मानवी को उल्टियाँ होने लगीं। पूरे परिवार की तबीयत बिगड़ गई। मानवी रात को उल्टी कर के सो गई। तड़के सुबह के 4 बजे उसका शरीर ठंडा पड़ गया था।

इसके बाद आनन-फानन में परिवार वाले उसे अस्पताल लेकर भागे। डॉक्टरों ने वहाँ उसे मृत घोषित कर दिया। शिकायत मिलने के बाद पुलिस इस पूरे मामले की जाँच कर रही है। परिवार ने केक ऑनलाइन माध्यम से ऑर्डर किया था। इसके लिए फ़ूड एग्रीगेटर एप Zomato का इस्तेमाल किया गया था। परिवार का कहना है कि बेकरी शॉप वाले ने गड़बड़ी की है और उसके प्रोडक्ट्स की जाँच कर के कार्रवाई करने की माँग की है। Zomato की रिसिप्ट और FIR कॉपी भी सामने आई है।

पुलिस ने FIR में ‘भारतीय दंड संहिता (IPC)’ की धारा-273 (एक्सपायर्ड या ख़राब वस्तु को जानबूझकर खाने-पीने के लिए बेचना) और धारा-304A (गैर-इरादतन हत्या) लगाई है। एक तस्वीर में मानवी अपनी बहन के साथ दिख रही है। एक अन्य तस्वीर में वो एक अन्य पुरुष परिजन को केक खिलाती हुई नज़र आ रही है। केक खरीदने के लिए परिवार ने 352.80 रुपए खर्च किए थे। मानवी अपने क्लास में मॉनिटर थी। उसकी छोटी बहन की जान जैसे-तैसे कर के बचाई गई है। दोनों बहनें नाना के यहाँ रह रही थीं, क्योंकि उनके परिवार में दिक्कत चल रही है।

PM मोदी और CM योगी पर अभद्र टिप्पणी करने वाले पत्रकार को जमानत देने से हाई कोर्ट का इनकार

इलाहाबाद हाई कोर्ट ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणी करने वाले और गलत रिपोर्ट प्रसारित करने वाले कथित पत्रकार को जमानत देने से इनकार कर दिया है। हाई कोर्ट ने आरोपित अमित मौर्य को जमानत देने से इनकार करते हुए कहा कि सोशल मीडिया प्लेटफार्म का इस्तेमाल औजार की तरह नहीं किया जा सकता है। बता दें कि आरोपित अमित मौर्य के खिलाफ वाराणसी के थाने में मुकदमा दर्ज है। उस पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और सीएम योगी आदित्यनाथ के खिलाफ भ्रामक बातों के प्रसार का आरोप लगा है।

पत्रकारों और प्रकाशकों को हाई कोर्ट की नसीहत

बार एंड बेंच की रिपोर्ट के मुताबिक, इलाहाबाद हाई कोर्ट ने अमित मौर्य की याचिका पर सुनवाई करते हुए पत्रकारों और प्रकाशकों को नसीहत भी दी। हाई कोर्ट की जस्टिस मंजू रानी चौहान ने कहा कि पारदर्शिता और जवाबदेही के साथ भ्रष्टाचारियों के खिलाफ सही रिपोर्ट पब्लिश करनी चाहिए, ये सर्वथा उचित भी है। लेकिन अपने व्यक्तिगत लाभ और धन उगाही के लिए मीडिया मंच के इस्तेमाल की इजाजत नहीं दी जा सकती। हाई कोर्ट ने कहा इससे पत्रकारिता की विश्वसनीयता और जनविश्वास खत्म होता है। सटीक और तथ्यात्मक जानकारी सार्वजनिक करना चाहिए। कोर्ट ने कहा सरकार के कार्यों से असहमति और आलोचना की आजादी गरिमा पूर्ण तरीके से सभी को है।

गरिमापूर्ण होनी चाहिए अभिव्यक्ति

इलाहाबाद हाई कोर्ट ने कहा कि सोशल मीडिया पर गलत टिप्पणियाँ कहीं से भी सही नहीं है। कोर्ट ने कहा कि सरकार के कार्यो पर आलोचना या असमहति की सभी को स्वतंत्रता है, मगर अभिव्यक्ति गरिमा के अनुरूप होनी चाहिए। अपमानजनक भाषा कभी भी रचनात्मक उद्देश्य की पूर्ति नहीं कर सकती है।

हाई कोर्ट ने कहा, ‘आलोचना करना सभी का अधिकार है मगर उसमें पारदर्शिता और सार्वजनिक सहभागिता की संस्कृति होनी चाहिए। किसी का चरित्र हनन करना मूल मुद्दे से भटाकाना है। इससे दुश्मनी और नफरत बढ़ती है। लोकतंत्र में सरकारी नीति व कार्यो की उचित अलोचना होनी चाहिए, लेकिन इसके लिए सही भाषा का इस्तेमाल जरूरी है, क्योंकि नफरती भाषा की वजह से पैदा होने वाली कलह से लोकतंत्र की नींव कमजोर होती है।

आरोपी अमित मौर्य पर पूर्वांचल ट्रक ऑनर्स एसोसिएशन के उपाध्यक्ष से हर महीने की उगाही की डिमांड और उनके खिलाफ आर्टिकल पब्लिश करने का आरोप है। अमित मौर्य पर आरोप है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सहित सार्वजनिक हस्तियों के खिलाफ नफरत फैलाने के लिए सोशल मीडिया का इस्तेमाल किया।

बंगाल के मुल्ला ने लिव-इन पार्टनर का गला घोंट कर मार डाला, मिला क्षत-विक्षत शव: ‘रवींद्र रेड्डी’ बनकर पालघर में लिया था कमरा

महाराष्ट्र के पालघर जिले में 22 वर्ष की एक लड़की की हत्या उसके लिव-इन पार्टनर मिनाज़ुद्दीन अब्दुल अजीज मुल्ला ने कर दी। पुलिस ने उसे पश्चिम बंगाल से गिरफ्तार कर लिया है। दरअसल, जो लड़की मुल्ला के साथ लिव इन में रह रही थी, वह उस पर शादी का दबाव बनाने लगी थी। इससे मुल्ला परेशान हो गया और गला दबाकर उसकी हत्या करने के बाद शव को फेंक दिया था।

पुलिस ने शुक्रवार (29 मार्च 2024) को बताया, 15 मार्च 2024 को पालघर जिले के दहानू शहर में किराए के एक कमरे में लड़की का क्षत-विक्षत शव मिला था। पालघर के पुलिस अधीक्षक बालासाहेब पाटिल ने कहा, “अनीशा बरस्ता खातून नाम की लड़की का शव 15 मार्च को दहानू के एक चॉल में स्थित एक कमरे में मिला था। इसमें वह अपने लिव-इन पार्टनर के साथ रहती थी।”

शव को कब्जे में लेकर पुलिस ने उसे पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया था। पुलिस ने शुरुआत में दुर्घटनावश मौत का मामला दर्ज किया था। हालाँकि, शव के परीक्षण रिपोर्ट में यह बात सामने आई कि लड़की की मौत गला घोंटने से हुई है। इसके बाद इसे हत्या के मामले में बदल दिया गया और हत्या के एंगल से जाँच शुरू कर दी गई।

SP पाटिल ने बताया, “दहानू डिवीजन के पुलिस उपाधीक्षक अंकिता कंसे की अगुवाई में एक पुलिस टीम का गठन किया गया, जो जाँच का नेतृत्व कर रही थी।” जाँच के दौरान पता चला कि लड़की के साथ 26 वर्षीय मिनाजुद्दीन अब्दुल अजीज मुल्ला रहता था। उसने रवींद्र रेड्डी के नाम से किराए पर कमरा ले रखा था और मृतक को अपनी पत्नी बताया था।

जाँच में यह भी पता चला कि मुल्ला पश्चिम बंगाल के दक्षिण 24 परगना जिले का रहने वाला है। मृतक लड़की भी वहीं की रहने वाली थी। लड़की की हत्या करने के बाद मुल्ला फरार हो गया। इस दौरान लड़की की लाश सड़ने लगी तो पड़ोसियों ने कमरे से दुर्गंध आने की शिकायत करते हुए कमरे के मालिक को सूचना दी।

मालिक ने जब कमरे को खुलवाने की कोशिश की तो अंदर से कोई जवाब नहीं मिला। इसके बाद दरवाजा खोला गया तो अंदर एक लड़की का शव पड़ा हुआ सड़ रहा था। इसके बाद लोगों ने इसकी सूचना पुलिस को दी। इसके बाद आरोपितों का पता लगाने और उन्हें पकड़ने के लिए दहानू पुलिस स्टेशन की एक टीम को पश्चिम बंगाल भेजा गया था।

SP पाटिल ने बताया कि सात दिनों के लगातार प्रयासों के बाद टीम ने 22 मार्च 2024 की सुबह मुल्ला को पकड़ लिया। उसे पालघर की अदालत में भेज दिया गया, जहाँ उसे 2 अप्रैल तक हिरासत में भेज दिया गया। ASP पंकज शिरसाट ने बताया कि आरोपित ने पीड़िता की हत्या कर दी, क्योंकि वह उससे शादी करने की जिद कर रही थी। वहीं, मुल्ला उससे शादी करना नहीं चाहता था।

‘अभी दूसरा निकाह करना है कर लो, चुनाव बाद कानून आएगा’: असम CM सरमा की बदरुद्दीन अजमल को सलाह, AIUDF चीफ ने कहा था – अब भी ताकत है

असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने ऑल इंडिया यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट ( एआईयूडीएफ) और सांसद बदरुद्दीन अजमल को सलाह दी है कि अभी समय है अगर उन्हें दूसरा निकाह करना है तो वो कर लें वरना बाद में ऐसा करने पर उन्हें पकड़कर जेल में डाल दिया जाएगा। सीएम ने बताया कि बहुविवाह पर प्रतिबंध लगाने वाला कानून तैयार है जो चुनाव के बाद लागू होगा।

बता दें कि असम सरकार द्वारा बहुविवाह पर प्रतिबंध लगाए जाने के लिए कानून बनाने की बात उठ रही है। ऐसे में एआईयूडीएफ प्रमुख और सांसद बदरुद्दीन अजमल ने कहा था कि वह इस कानून का विरोध करते हैं क्योंकि यह गैर इस्लामिक होगा। अजमल ने इस दौरान यह भी कहा था कि वह अभी भी दूसरा निकाह कर सकते हैं क्योंकि उनमें ताकत है। उन्होंने हिमंत बिस्वा सरमा को चुनौती देकर कहा था कि अगर असम सरकार ऐसा कानून बना देगी तो भी उनके पास दूसरे निकाह को करने की हिम्मत है।

उनकी इसी बात पर अब असम के मुख्यमंत्री ने चुटकी ली। उदालगुड़ी में मीडिया ने जब हिमंत बिस्वा सरमा से अजमल के बयान पर प्रतिक्रिया माँगी तो उन्होंने कहा,“मैं अभी अजमल को दूसरी शादी के लिए ग्रीन सिग्नल दे रहा हूँ, मगर उन्हें इसे चुनाव से पहले ही निपटा लेना चाहिए। अगर वह मुझे अपनी शादी में बुलाएँगे तो मैं भी जाऊँगा क्योंकि अभी इसके लिए कानून नहीं है। लोकसभा चुनाव के बाद बहुविवाह बंद हो जाएगा। इस कानून के लिए ड्राफ्ट तैयार है। चुनाव के बाद UCC लागू होगा। तब जो क़ानून का उल्लंघन करेगा उसके ऊपर कार्रवाही होगी।”

गौरतलब है कि अजमल असम के धुबरी क्षेत्र से लंबे समय से सांसद हैं। इसके अलावा उनका इत्र का कारोबार भी है। उन्होंने फिलहाल एक ही निकाह हुआ है, और उनके 7 बच्चे हैं। अब यही अजमल यूसीसी के विरोध में दूसरा निकाह करने के लिए भी तैयार हैं इसलिए उनके तर्क सुनकर सोशल मीडिया पर लोग उनका काफी मजाक उड़ा रहे हैं।

लोकसभा चुनाव 2024 में BJP की घोषणापत्र समिति की कमान राजनाथ सिंह के हाथों में: 27 सदस्यीय कमिटी में AMU के पूर्व कुलपति से लेकर गुरुद्वारा कमिटी के पूर्व अध्यक्ष तक

देश की सत्ताधारी पार्टी भाजपा ने लोकसभा चुनाव 2024 के लिए घोषणापत्र समिति का गठन किया है, जिसकी कमान केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के हाथों में सौंपी गई है 27 सदस्यीय घोषणापत्र समिति का गठन भाजपा अध्यक्ष JP नड्डा ने किया है। ये समिति पार्टी का घोषणापत्र तैयार करेगी, यानी बताएगी कि भाजपा कौन से वादे लेकर जनता के बीच जाएगी। एक तरह से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के तीसरे कार्यकाल में होने वाले फैसलों का भी इससे अंदाज़ा लग जाएगा।

इस समिति में केंद्रीय वित्त एवं कॉर्पोरेट मामले मंत्री निर्मला सीतारमण, केंद्रीय कपड़ा, वाणिज्य एवं उद्योग और उपभोक्ता मामलों के मंत्री पीयूष गोयल, केंद्रीय कृषि मंत्री अर्जुन मुंडा, केंद्रीय श्रम एवं रोजगार और पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव, केंद्रीय कानून एवं न्याय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल, केंद्रीय पृथ्वी विज्ञान और खाद्य प्रसंस्करण मंत्री किरेन रिजिजू, केंद्रीय संचार, इलेक्ट्रॉनिक्स एवं IT मंत्री अश्विनी वैष्णव और केंद्रीय शिक्षा और कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्री धर्मेंद्र प्रधान शामिल हैं।

इन सबके अलावा गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल, असम के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव, वहाँ के पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान, राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे, केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री स्मृति ईरानी, पूर्व केंद्रीय जनजातीय मामले मंत्री जुएल ओराम, पटना साहिब से सांसद रविशंकर प्रसाद, बिहार के पूर्व उप-मुख्यमंत्री सुशील मोदी, यूपी के डिप्टी CM केशव प्रसाद मौर्य और केंद्रीय कौशल विकास एवं उद्यमशीलता के अलावा इलेक्ट्रॉनक्स एवं IT के राज्यमंत्री राजीव चंद्रशेखर भी शामिल हैं।

इन नामों के अलावा भाजपा की लोकसभा चुनाव 2024 घोषणापत्र समिति में जो नेता शामिल हैं, वो हैं – पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव विनोद तावड़े, गोरखपुर के रहने वाले राज्यसभा सांसद राधामोहन दास अग्रवाल, दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमिटी के पूर्व अध्यक्ष मनजिंदर सिंह सिरसा, हरियाणा में भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष OP धनखड़, केरल के अनिल एंटनी और AMU के पूर्व कुलपति तारिक मंसूर शामिल हैं। भाजपा राम मंदिर, अनुच्छेद-370 हटाने और तीन तलाक हटाने जैसे बड़े वादे पूरी कर चुकी है, ऐसे में देखना है इस बार उसके पिटारे में क्या-क्या है।

हथियार ट्रेनिंग देने का कर रहे थे काम… ED ने 3 PFI आतंकियों को किया गिरफ्तार, प्रतिबंधित संगठनों से भी लेते थे धन

प्रवर्तन निदेशालय ने प्रतिबंधित इस्लामी संगठन पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (PFI/पीएफआई) के तीन आतंकी को आज () फिर से गिरफ्तार किया है। आरोप है कि ये तीनों पीएफआई के लिए फिजिकल ट्रेनर के तौर पर काम कर रहे थे। जाँच एजेंसी ने इन्हें धन शोधन निवारण अधिनियम के प्रावधानों के तहत गिरफ्तार किया है।

सूत्रों से मीडिया में दी गई जानकारी के अनुसार, इनकी पहचान अब्दुल खादर पुत्तूर, अंशद बदरुद्दीन और फिरोज के तौर पर हुई है। इन्हें गिरफ्तार करने के बाद शनिवार को विशेष अदालत में पेश किया गया।

कोर्ट को बताया गया कि इन तीनों पर पीएफआई से जुड़े लोगों को हथियार प्रशिक्षण देने और इस काम के लिए प्रतिबंधित संगठनों से धन प्राप्त करने का आरोप लगा है।

बता दें कि पीएफआई को आतंकवादी गतिविधियों के साथ कथित संबंधों को लेकर सितंबर 2022 में केंद्र द्वारा गैरकानूनी गतिविधियाँ अधिनियम (यूएपीए) के प्रावधानों के तहत प्रतिबंधित कर दिया गया था। इसके बाद से जाँच एजेंसी लगातार इनके विरुद्ध अपनी कार्रवाई करती हैं।

पिछले साल 2023 के दिसंबर में ED (प्रवर्तन निदेशालय) ने प्रतिबंधित इस्लामी संगठन PFI (पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया) के 5 आतंकियों को गिरफ्तार किया था। इन सभी को संगठन में अलग-अलग पदों पर रखा गया था। इन्हें विदेश से हवाला के जरिए आई करोड़ों रुपयों की फंडिंग को देशविरोधी गतिविधियों में इस्तेमाल करने की जिम्मेदारी सौंपी गई थी।

‘आपकी कृपा पर नहीं’: मुख़्तार अंसारी के कब्र पर मिट्टी को लेकर महिला DM से भिड़ गया भाई अफजाल, कहा – परमिशन की ज़रूरत नहीं

माफिया मुख्तार अंसारी को कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच गाजीपुर जिले के उनके पैतृक निवास युसूफपुर मोहम्मदाबाद के कालीबाग कब्रिस्तान में सुपुर्द-ए-खाक कर दिया है। मुख़्तार के जनाजे में भारी भीड़ उमड़ पड़ी, और कई लोगों ने नारेबाजी, इसके बाद प्रशासन ने कड़ा रुख अपनाया। गाजीपुर की डीएम ने कहा कि धारा 144 लागू होने के बावजूद जिस तरह की हरकतें की गई हैं, उसके लिए कार्रवाई की जाएगी। डीएम ने कहा कि वीडियोग्राफी में सबकुछ कैद हुआ है।

इस दौरान गाजीपुर डीएम और मुख्तार के भाई अफजाल अंसारी के बीच काफी जबरदस्त बहस हुई। दोनों के बीच काफी देर तक बहस होती रही, जिसमें अफजाल अंसारी ने कहा कि जनाजे के लिए किसी भी परमिशन की जरूरत नहीं है। डीएम ने कहा है कि इस मामले में विधिक कार्रवाई की जाएगी।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, ये बहस मुख्तार अंसारी की कब्र पर मिट्टी डालने को लेकर हुई है। दरअसल धारा-144 लागू है, ऐसे में गाजीपुर डीएम का कहना था कि कब्र पर मिट्टी हर कोई नहीं डाल सकता। इस बात पर अफजाल अंसारी ने कहा कि कब्र पर मिट्टी डालने से कोई नहीं रोक सकता। डीएम आर्यका अखौरी ने अफजाल अंसारी से कहा कि धारा-144 लागू है। ऐसे में ज्यादा भीड़ जमा नहीं कर सकते। इस बात पर अफजाल अंसारी ने कहा लोगों को कब्र पर मिट्टी डालने से नहीं रोका जा सकता। अफजाल अंसारी ने साफ कहा कि ये रीति रिवाज है, ये करने से लोगों को नहीं रोका जा सकता।

इस पर डीएम ने कहा कि आपने इसकी कोई इजाजत नहीं ली है, पूरा कस्बा मिट्टी नहीं देगा। परिवार और खास लोग ही कब्र पर मिट्टी दे सकते हैं। इस पर अफजाल अंसारी ने डीएम से कहा कि सिर्फ कस्बा ही नहीं, जहाँ का भी कोई शख्स मिट्टी देना चाहेगा, वह यहाँ आकर मिट्टी देगा। अफजाल अंसारी ने कहा कि धारा-144 लगने के बाद भी किसी को जनाजे और कब्र पर मिट्टी डालने से नहीं रोका जा सकता। इस घटना से जुड़ा वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है।

योगी के मंत्री ने मुख्तार अंसारी को बताया गरीबों का मसीहा

यूपी की योगी आदित्यनाथ सरकार में कैबिनेट मंत्री और सुभासपा प्रमुख ओम प्रकाश राजभर ने मुख्तार को गरीबों का मसीहा बताया और कहा कि वो क्रांतिकारी थे। ओम प्रकाश राजभर ने कहा कि जब भी किसी गरीब पर ज्यादती होगी तो गरीब के साथ जो खड़ा दिखाई देगा तो गरीबों का मसीहा ही कहा जाएगा। मुख्तार अंसारी को लेकर कई लोगों के बयान आएं है कि हमारी जान बचाई..हमारी मदद की.. जब उन्होंने गरीबों की मदद की है तो वो गरीबों के मसीहा होंगे ही। राजभर ने माना कि उन्होंने मुख्तार अंसारी को क्रांतिकारी कहा था और वो आज भी इस बयान पर कायम हैं।

बता दें कि मुख्तार अंसारी का बेटा अब्बास अंसारी उनकी सुभासपा से विधायक है। एबीपी न्यूज द्वारा पूछे गए इस पर ओम प्रकाश राजभर ने कहा कि चुनाव आयोग के पास जो आंकड़ा है उसके हिसाब से वो हमारी पार्टी में हैं लेकिन, उन्होंने अब्बास अंसारी को अखिलेश यादव के कहने पर अपनी पार्टी का सिंबल दिया था।

मुख्तार अंसारी को पैतृक गाँव मोहम्मदबाद के कालीबाग कब्रिस्तान में सुपुर्द-ए-खाक कर दिया गया। मुख्तार अंसारी के जनाजे में हजारों लोग शामिल हुए। मुख्तार की बांदा की जेल में बंद रहने के दौरान तबियत खराब हो गई थी, जिसके बाद अस्पताल में उनकी मौत हो गई थी। मुख्तार का शव शुक्रवार को गाजीपुर पहुँचा था और शनिवार को उसे कब्रिस्तान में आखिरी विदाई दी गई।

उत्सव में डूबी लाखों हिन्दुओं की भीड़, लेकिन क्षण भर में एम्बुलेंस के लिए बना दिया रास्ता: इंदौर की ‘गेर’ में हिस्सा लेने वाले पहले CM बने मोहन यादव, रंगों का गुब्बार-पानी की बौछार

मध्य प्रदेश के इंदौर में शनिवार (30 मार्च, 2024) को रंगपंचमी की धूम रही। लाखों की संख्या में हिन्दुओं की भीड़ जुटी और उत्सव मनाया गया। राजवाड़ा, जिसे इंदौर के हृदयस्थल भी कहा जाता है, वहाँ कुम्भ मेले जैसा माहौल रहा। रंगपंचमी पर वहाँ फाग यात्रा व गेर निकाली जाती है। रंगों के गुब्बार और पानी की बौछारों के बीच भी उत्सव में डूबी लाखों हिन्दुओं की भीड़ ने एम्बुलेंस को रास्ता दिया और अपनी सहृदयता का परिचय दिया। इसका वीडियो भी सोशल मीडिया पर सामने आया है।

लोग इसके बाद हिन्दुओं, खासकर इंदौर के हिन्दुओं की जम कर तारीफ कर रहे हैं। उत्सव के समय ही एम्बुलेंस एक मरीज को लेकर जा रही थी। एम्बुलेंस का सायरन सुनते ही श्रद्धालुओं ने सुरक्षाकर्मियों के साथ मिल कर उसके लिए रास्ता बनाया और उसे पार कराया। कुछ ही मिनटों में एम्बुलेंस इतनी भीड़ के बावजूद वहाँ से निकल गई। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव भी फाग यात्रा व गेर में हिस्सा लेने के लिए राजवाड़ा पहुँचे हुए थे, जहाँ उन्होंने लोगों को संबोधित भी किया।

मुख्यमंत्री मोहन यादव गुलाल से तर होकर राजधानी भोपाल को लौटे। ‘हिन्दू रक्षक संगठन’ यात्रा का नेतृत्व कर रहा था, जिसमें युवकगण सबसे आगे पताकाएँ लेकर चल रहे थे। भजन मंडलियाँ भक्ति-संगीत से लोगों को सरोबार करती हुई चल रही थीं। वहीं साथ में एक झाँकी भी थी, जिसमें हनुमान जी संजीवनी बूटी वाला पर्वत हाथ पर उठाए दिख रहे थे। डॉ मोहन यादव ने कहा कि वो 75 वर्ष पुरानी इस परंपरा में शामिल होकर गौरवान्वित हैं, ये MP के साथ-साथ मालवा का विशेष आयोजन है।

CM मोहन यादव ने कहा कि ‘गेर’ तो एक शब्द है, ये अपना बनाने वालों की टोली है। उन्होंने बताया कि इस अवसर पर अलग-अलग मोहल्लों और वर्ग के लोग अपना-अपना निशान लेकर निकलते हैं। उन्होंने कहा कि लोकसभा चुनाव को लेकर अचार संहिता लागू है, कुछ सीमाएँ हैं इसके बावजूद वो यहाँ पहुँचे हैं। बता दें कि इस कार्यक्रम में हिस्सा लेने वाले वो MP के पहले मुख्यमंत्री हैं। राज्य के शहरी विकास एवं आवास और संसदीय मामलों के मंत्री व इंदौर से विधायक कैलाश विजयवर्गीय ने उनका स्वागत किया।

‘भगवंत मान ने हमारी की पीठ में छुरा घोंपा’: पंजाब में सड़कों पर उतरे किसानों ने जलाया CM का पुतला, कहा – AAP नेताओं को गाँवों में घुसने नहीं देंगे

पंजाब के किसानों ने भगवंत मान के नेतृत्व वाली आम आदमी पार्टी की सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। मार्केट कमिटी को लेकर राज्य सरकार के निर्णय के खिलाफ किसानों ने अमृतसर में शनिवार (30 मार्च 2024) को प्रदर्शन किया और मुख्यमंत्री भगवंत मान का पुतला फूँका। इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने सीएम मान को किसान विरोधी बताया और उनके खिलाफ नारे लगाए।

अमृतसर के गोल्डन गेट के पास प्रदर्शन कर रहे किसानों का कहना है कि वे भगवंत मान की तानाशाही के खिलाफ लड़ेंगे। उनका कहना है कि भगवंत मान सरकार ने 26 मार्केट कमिटी को भंग करने का निर्णय लिया है, जो किसानों और मजदूरों के हितों के खिलाफ है। उन्होंने भगवंत मान को किसानों के पीठ में छुरा घोंपने का आरोप लगाया।

एक किसान ने कहा, “किसान-मजदूर भगवंत मान सरकार की अर्थी जला रहे हैं। भगवंत मान की सरकार ने पंजाब के किसानों के पीठ में छुरा घोंपा है। हमारा नुकसान किया है। उन्होंने हमारे पंजाब की 26 मार्केट कमिटियाँ तोड़ दी हैं। उन्होंने सारा काम 9 कॉरपोरेट को सौंप दिया है। इसके विरोध में हम भगवंत मान सरकार की अर्थी जला रहे हैं।”

उस किसान ने आगे कहा, अपनी सरकार बचाने के लिए इन्होंने (भगवंत मान ने) पंजाबियों का गला घोंट दिया। मैं आढ़तियों से आह्वान करता हूँ कि अगर जिंदा रहना है मंडी में तो इनके खिलाफ बोलिए। मार्केट कमिटी के मुलाजिमों से बोलूँगा कि इनके खिलाफ आइए। आने समय में निर्णय करेंगे कि भगवंत मान सरकार के खिलाफ क्या फैसला करना है।”

सामने आए वीडियो में यह किसान कहता है, “हम ये भी निर्णय करेंगे कि आम आदमी पार्टी को गाँव में घुसने देना है कि नहीं देना है, अगर ये नोटिफिकेशन रद्द नहीं किया गया। इसके साथ-साथ हम भगवंत मान सरकार को कहना चाहेंगे कि अगर ये फैसला वापस नहीं लेते हो तो हमारा सामना आपको भी करना पड़ेगा।ठ

पंजाब के इस किसान ने कहा आम आदमी पार्टी की सरकार ने मंडियों को कारपोरेट का यार्ड बना दिया है। साल 2023-24 की गेहूँ खरीदने, बेचने और उसे स्टोर करने का फैसला कारपोरेट को दिया है। चेतावनी देते हुए उसने कहा कि इसका विरोध अब पंजाब में चरम सीमा पर पहुँचेगा।

बता दें कि पंजाब सरकार ने मंडी बोर्ड ऐक्ट 1961 में संशोधन किया है और मार्केट कमिटियों को भंग करके इसे दूसरे विभागों के साथ मर्ज कर दिया है। इससे पंजाब के किसान भड़क गए हैं और भगवंत मान सरकार पर तानाशाही करने और किसानों-मजदूरों के खिलाफ काम करने का आरोप लगा रहे हैं।