Home Blog Page 1061

मंच पर से हटाया गया अरविंद केजरीवाल का पोस्टर, तब I.N.D.I. गठबंधन की रैली में पहुँचे कॉन्ग्रेस नेता: विपक्षी एकता में साफ़ दिखी दरार

दिल्ली में इंडी गठबंधन की रैली हुई। इस रैली में पोडियम के पास अरविंद केजरीवाल का एक पोस्टर टंगा था, लेकिन ये पोस्टर कॉन्ग्रेस की आँखों में चुभ गया। कॉन्ग्रेसी नेताओं ने ऑब्जेक्शन किया, उस पोस्टर को हटाया गया, तब जाकर कॉन्ग्रेस के वरिष्ठ नेता मंच पर पहुँचे। कॉन्ग्रेस ने साफ कहा कि ये रैली किसी एक व्यक्ति के समर्थन या गिरफ्तारी के विरोध में नहीं, बल्कि इंडी गठबंधन के सभी दलों की तरफ से की गई है, ऐसे में हरेक जगह सिर्फ अरविंद केजरीवाल का चेहरा रखना ठीक नहीं। हालाँकि कार्यक्रम के दौरान बड़े बोर्ड पर पीछे की तरफ सभी दलों के नेताओं की तस्वीरें बारी-बारी से फ्लैश होती रही।

भगत सिंह से तुलना नहीं आई पसंद?

आपको बता दें कि अरविंद केजरीवाल और उनकी आम आदमी पार्टी केजरीवाल की तुलना भगत सिंह से करते रहते हैं। अभी दो दिन पहले भी अरविंद केजरीवाल को भगत सिंह का शिष्य बताते हुए एक ऑनलाइन कैंपेन चलाया गया था।

आजतक की रिपोर्ट के मुताबिक, मंच के पोडियम पर अरविंद केजरीवाल की जो तस्वीर लगी थी, उसमें अरविंद केजरीवाल सलाखों के पीछे दिख रहे थे। ऐसे में इस तस्वीर पर लगातार सबकी निगाहें होती। यही वजह है कि कॉन्ग्रेस ने पहले ये तय कर लिया कि जब अरविंद केजरीवाल की तस्वीर हटा दी गई हो, इसके बाद ही कॉन्ग्रेस के वरिष्ठ नेता मंच पर कदम रखेंगे। वहीं, दूसरे दलों के नेताओं ने कॉन्ग्रेस जैसा कोई कदम नहीं उठाया।

कांग्रेस पहले भी इस बात पर जोर दे चुकी थी कि यह एक व्यक्ति केंद्रित रैली नहीं है। शनिवार (30 मार्च 2024) को ही कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने कहा था, ‘यह किसी व्यक्ति विशेष पर केंद्रित रैली नहीं है। इसीलिए इसे ‘लोकतंत्र बचाओ’ रैली कहा जा रहा है। उनकी इस टिप्पणी को इसलिए भी अहम माना गया क्योंकि आम आदमी पार्टी (आप) के नेता इस रैली को प्रवर्तन निदेशालय द्वारा दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को गिरफ्तार किए जाने के विरोध में आयोजित रैली के रूप में पेश कर रही है। हालाँकि एक मीडिया रिपोर्ट में कहा गया है कि कॉन्ग्रेस पार्टी ने अरविंद केजरीवाल का पोस्टर हटाकर ये साफ कर दिया है कि वो ही इस गठबंधन में सबसे ताकतवर है।

पिछले साल अरविंद केजरीवाल ने काटा था बवाल

बता दें कि इंडी एलायंस की मुंबई रैली के समय अरविंद केजरीवाल का चेहरा पोस्टर पर न होने से बवाल बढ़ गया था, लेकिन बाद में राहुल गाँधी की जगह अरविंद केजरीवाल की तस्वीर लगाई गई थी। वहीं सोनिया गाँधी का चेहरा पोस्टर पर मौजूद था। ये मामला 31 अगस्त और 1 सितंबर को मुंबई में इंडी गठबंधन की बैठक के दौरान का है। तब नीतीश कुमार, ममता बनर्जी और जयंत चौधरी जैसे लोग इंडी गठबंधन के साथ थे।

इस दौरान एक पोस्टर 30 अगस्त को जारी किया गया था, जिसमें दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल का चेहरा नहीं था। इसको लेकर आम आदमी पार्टी ने आपत्ति जताई थी, तो उस पोस्ट को डिलीट करके दूसरा पोस्टर जारी किया गया था। इस नए पोस्टर में राहुल गाँधी की जगह अरविंद केजरीवाल के चेहरे को जगह दी गई थी। इस बार मौका मिला, तो कॉन्ग्रेस ने पोडियम से अरविंद केजरीवाल को हटाने में बिल्कुल भी देरी नहीं की।

‘भ्रष्टाचारी चाहे कितना भी बड़ा हो, कार्रवाई ज़रूर होगी’: मेरठ में गरजे PM, कहा – कान खोल कर सुन लें देश को लूटने वाले, मोदी रुकने वाला नहीं है

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार (31 मार्च 2024) को उत्तर प्रदेश के मेरठ चुनावी शंखनाद कर दिया। मेरठ लोकसभा सीट भाजपा ने प्रत्याशी के रूप में भगवान राम का अविस्मरणीय किरदार निभाने वाले अरुण गोविल को मैदान में उतारा है। यहाँ पीएम मोदी और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने एक विशाल जनसभा को संबोधित किया। पीएम मोदी ने मेेरठ से अपना खास रिश्ता बताया।

लोगों को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने राम मंदिर, धारा 370 और तीन तलाक के खात्मे का जिक्र किया। इसके साथ ही भ्रष्टाचार पर नकेल, महिला सशक्तिकरण और भारत के विकास की बात जनता के सामने रखा। उन्होंने कहा कि अब भारत का समय आ गया है, भारत अब चल पड़ा है। 2024 का जनादेश भारत को दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी आर्थिक महाशक्ति बनाएगा।

पीएम मोदी ने कहा, “हमारी सरकार तीसरे कार्यकाल की तैयारी में अभी से जुट गई है। हम आने वाले पाँच साल का रोडमैप बना रहे हैं। पहले 100 दिनों में हमें कौन-कौन से बड़े फैसले लेने हैं, इस पर तेजी से काम चल रहा है। बीते 10 वर्षों में तो आपने विकास का ट्रेलर ही देखा है, अभी तो हमें देश को बहुत आगे लेकर जाना है।”

प्रधानमंत्री ने कहा कि आज भारत में तेजी से आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर बन रहा है। आज भारत इंफ्रास्ट्रक्चर के निर्माण पर अभूतपूर्व निवेश कर रहा है। आज हर सेक्टर में नौजवानों के लिए नए अवसर बन रहे हैं। आज देश की नारीशक्ति, नए संकल्पों के साथ आगे आ रही है। आज भारत की साख नई ऊंचाई पर है, पूरी दुनिया भारत को भरोसे से देख रही है।

गरीबी को खत्म करने में सरकार द्वारा किए गए प्रयासों को लेकर पीएम मोदी ने कहा, “ये मोदी गरीबी से तप कर आज यहाँ पहुँचा है। इसलिए हर गरीब का दुख, हर गरीब की पीड़ा, हर गरीब की तकलीफ मोदी भली-भाँति समझता है। इसलिए मैंने गरीब की हर चिंता को दूर करने के लिए योजनाएँ बनाईं। हमने गरीब को सिर्फ सशक्त ही नहीं किया है, बल्कि हमने गरीब को उसका स्वाभिमान लौटाया है।”

भ्रष्टाचार के विरुद्ध सरकार की लड़ाई को रेखांकित करते हुए पीएम मोदी ने कहा, “मैं अपने देश को भ्रष्टाचारियों से बचाने के लिए एक बहुत बड़ी लड़ाई लड़ रहा हूँ। इसलिए बड़े-बड़े भ्रष्टाचारी आज सलाखों के पीछे हैं। सुप्रीम कोर्ट से भी जमानत नहीं मिल रही है।” INDI गठबंधन पर हमला बोलते हुए उन्होंने कहा, “वे सोच सकते हैं कि वे मोदी को डरा देंगे, लेकिन मेरे लिए, ‘मेरा भारत ही मेरा परिवार है’!”

‘मोदी की गारंटी’ का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा, “भ्रष्टाचारी कान खोलकर सुन लें, मोदी पर चाहे जितने भी हमले करो, ये मोदी है, रुकने वाला नहीं है। भ्रष्टाचारी चाहे कितना भी बड़ा क्यों न हो, एक्शन होगा और जरूर होगा। जिसने देश को लूटा है, उसे लौटाना ही पड़ेगा। ये मोदी की गारंटी है।” 

तीन तलाक और धारा 370 को खत्म करने को लेकर पीएम मोदी ने कहा, “तीन तलाक का कानून लोगों को असंभव सा लगता था। अब न सिर्फ यह कानून बन चुका है, बल्कि यह हजारों मुस्लिम बहनों की जिंदगी बचा रहा है। जम्मू-कश्मीर में धारा 370 कभी हटेगा यह भी असंभव लगता था, लेकिन आर्टिकल 370 भी जाता रहा। अब वहाँ तेजी से विकास हो रहा है। आज लोग बीजेपी के 370 सीटों का आशीर्वाद भी दे रहे हैं।”

प्रधानमंत्री ने कहा कि अयोध्या में राम मंदिर बनेगा ये लोगों को मुश्किल लगता था, लेकिन राम मंदिर बना और इस बार अवध में रामलला ने भी खूब होली खेली। चौधरी चरणसिंह को याद करते हुए पीएम मोदी ने कहा, “मेरठ से मेरा खास रिश्ता है। पिछली बार भी औघड़नाथ की इसी धरती से रैली का आगाज करने का सौभाग्य मिला।”

पीएम मोदी से पहले जनसभा को संबोधित करते हुए सीएम योगी आदित्यनाथ ने कहा, “पीएम मोदी ने हमें एक नए भारत का दर्शन कराया है। ये हमारा सौभाग्य है कि उन्होंने चुनाव प्रचार के लिए मेरठ की भूमि को चुना है। मेरठ को इतनी सारी सौगातें दी हैं। रैपिड रेल हो या रोड की कनेक्टिविटी हो। चाहे वह स्पोर्ट्स यूनिवर्सिर्टी हो या फिर ओडीओपी हो। हर दिशा में अभूतपूर्व कार्य हुआ है।”

सुनीता ने अरविंद केजरीवाल को कर दिया ‘शहीद, खड़गे ने राहुल गाँधी के कर डाले ‘टुकड़े-टुकड़े’: फनी वीडियोज का सोर्स बनी I.N.D.I. गठबंधन की रैली

विपक्षी दलों का INDI गठबंधन आज दिल्ली में अपनी रैली कर रहा है। इस दौरान कई नेताओं के बयान सोशल मीडिया पर वायरल हैं। इन्हीं वायरल क्लिप में दो क्लिप सबसे ज्यादा शेयर हो रही है। एक है मल्लिकार्जुन खड़गे की और दूसरी है सुनीता केजरीवाल की।

सुनीता केजरीवाल इस रैली में अरविंद केजरीवाल की जगह शामिल हुईं। उन्होंने भाषण में केजरीवाल के वादे और इरादे बताते हुए कहा- जिस बहादुर और साहस के लिए वो लड़ रहे हैं, उसे देख मुझे कई बार लगता है कि आजादी की लड़ाई में वो स्वतंत्रता सेनानी थे, जो देश के लिए लड़ते-लड़ते शहीद हो गए। इस जन्म में भी शायद केजरीवाल जी को भारत माँ के संघर्ष के लिए भेजा है।

सुनीता केजरीवाल द्वारा कही गई इस लाइन को सुनने के बाद नेटिजन्स कह रहे हैं कि ऐसी स्क्रिप्ट तो बॉलीवुड वाले भी नहीं लिख सकते हैं। पहले मुगलों से लड़ाई की होगी केजरीवाल ने और फिर आजादी के समय अवतार ले लिया। फिर शहीद हुए तो अब आखिर में दारू घोटाला करने लगे।

इसी तरह मल्लिकार्जुन खड़गे ने भी अपने भाषण को वजनदार बनाने के लिए गाँधी परिवार का बखान शुरू किया। लेकिन बातों बातों में वो यही भूल गए उन्हें कहना क्या है। उन्होंने भाषण में ये कह दिया कि राहुल गाँधी देश के लिए शहीद हुए थे। उनके टुकड़े-टुकड़े हो गए थे।

जाहिर है वो यहाँ राजीव गाँधी की ही बात कर रहे थे लेकिन उनके मुँह से राहुल गाँधी का नाम निकला और उन्होंने इस गलती को सुधारा भी नहीं। अब उनकी यही वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है।

खड़गे कहते हैं- “हमने तो देश को आजादी दिलाने के लिए लड़ाई लड़ी, खून बहाया। देश में एकता रखने के लिए इंदिरा गाँधी ने अपनी जान ली, राहुल गाँधी ने अपनी जान दी, उनके शरीर के टुकड़े-टुकड़े हो गए। उसी तरह इंदिरा गाँधी देश को एक रखने के लिए 32 गोलियाँ खाईं।”

खड़गे की इस क्लिप को सोशल मीडिया पर खूब शेयर किया जा रहा है। लोग कह रहे हैं कि समझ नहीं आता कॉन्ग्रेस नेता ऐसी उलटी सीधी बातें जान बूझकर बोलते हैं या गलती से। एक यूजर कहता है- भौजी ने घुंघरू सेठ को शहीद बता दिया और इन्होंने पप्पू को। गजब बकैती कर रहे हैं।

अल्लारखा बने ‘विजय चौहान’, अजीजुल जाने जाएँगे ‘अनय ठाकुर’ के नाम से: हनुमान मंदिर में 2 मुस्लिम युवकों की घर-वापसी, वेदमंत्रों के साथ गूँजे ‘जय श्री राम’ के नारे

मध्य प्रदेश के जबलपुर में 2 मुस्लिमों युवकों ने सनातन धर्म में ‘घर-वापसी’ की है। घर-वापसी के बाद अब अजीजुल हसन अब ‘अनय ठाकुर’ के नाम से जाने जाएँगे। वहीं अल्लारखा खाँ अब ‘विजय चौहान’ बन चुके हैं। शनिवार (30 मार्च, 2024) को आयोजित इस घर वापसी के कार्यक्रम में इन दोनों युवकों ने अपने पूर्वजों को हिन्दू बताया। इन दोनों ने विधि-विधान से एक हिन्दू मंदिर में पूजा अर्चना की और भविष्य में सदा सनातनी ही बने रहने का संकल्प लिया।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुतबिक, घर-वापसी का यह कार्यक्रम जबलपुर शहर के सदर थाना क्षेत्र में सम्पन्न हुआ। यहाँ के दक्षिणमुखी हनुमान मंदिर में 30 मार्च को हिन्दू संगठन से जुड़े सदस्यों का जमावड़ा रहा। यहाँ चंदेरी जिला निवासी अजीजुल हसन और जबलपुर के ही अल्लारखा घर वापसी करने पहुँचे थे। मंदिर के पुजारी अनिल शर्मा ने इन दोनों की विधि-विधान से घर वापसी करवाई। दोनों ने वैदिक मंत्रों के बीच हवन और पूजन किया। बाद में वहाँ मौजूद धर्मसेना संगठन के सदस्यों में जय श्रीराम के नारे लगाए।

घर-वापसी करने वाले अजीजुल ने खुद को सनातन धर्म में वापस आ कर बेहद खुश बताया। सनातनी बनने प्रेरणा की वजह के पीछे अजीजुल ने अपने पूर्वजों का हिन्दू होना कहा। अजीजुल ने शुरुआत से ही खुद को हिन्दू धर्म की तरफ आकर्षित बताया। उन्होंने कहा, “मैं कभी कुरान नहीं पढ़ा। मैंने कभी नमाज नहीं पढ़ी। मैं हिंदी माध्यम से सरस्वती विद्या मंदिर का छात्र रहा हूँ।” वहीं जबलपुर के अल्लारखा ने भी अपने पूर्वजों को सनातनी बताया। उन्होंने कहा कि वो अपने पूर्वजों के धर्म में पुनः आ गए हैं।

अल्लारखा बचपन से ही अनाथ हो गए थे। अल्लारखा के बारे में भी बताया जा रहा है कि उसने कभी किसी मौलवी आदि से सम्पर्क नहीं रखा था। अल्लारखा का भी शुरुआत से ही हिन्दू धर्म की तरफ झुकाव था। घर वापसी कार्यक्रम सम्पन्न करवाने वाले योगेश अग्रवाल ने इस मौके पर मीडिया से बात की। उन्होंने बताया कि भारत के हर मुस्लिम और ईसाई के पूर्वज कहीं न कहीं हिन्दू ही थे। धर्मसेना ने आह्वान किया कि वो हर ईसाई और मुस्लिम की घर वापसी का स्वागत करेंगे।

ज्ञानवापी के लिए पैसे देता था मुख्तार अंसारी! रिपोर्ट में दावा -माफिया की मौत के बाद मुकदमों पर पड़ेगा असर, महंगे वकीलों की फीस कैसे दी जाएगी?

ज्ञानवापी से जुड़े मामलों की सुनवाई एक ही दिन में जिला कोर्ट से लेकर हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट तक में होती रहती थी। अब लगता है, वो रुक जाएगी। भास्कर ने अपनी रिपोर्ट में बीजेपी नेता के हवाले से दावा किया है कि मुख्तार अंसारी ज्ञानवापी को चंदे देता था और उन पैसों से मुकदमे बाजी की जाती थी। बीजेपी नेता ने कहा कि साल 2012 से मुख्तार अंसारी की ओर से पैसे दिए जाते हैं। उनका दावा है कि अब ज्ञानवापी के मुकदमे को लड़ने पर फर्क पड़ सकता है, क्योंकि फंड की कमी आ सकती है।

इस रिपोर्ट में दावा किया गया है कि साल 2022 में भी ज्ञानवापी पक्ष के लिए हो रहे फंडिंग की जाँच का मुद्दा उठा था, लेकिन बाद में ये माँग ढीली पड़ गई। माफिया विरोधी मंच के अध्यक्ष और बीजेपी नेता सुधीर सिंह का दावा है कि साल 2012 में पहली बार मुख्तार अंसारी ने ज्ञानवापी के लिए 10 लाख रुपए दिए थे। मुख्तार अंसारी अपने इलाजे के लिए बीएचयू पहुँचे थे। यहाँ उनकी मुलाकात मुफ्ती अब्दुल बातिन से हुई थी। मुफ्ती की तरफ से ही ज्ञानवापी के जर्जर होने की दुहाई दी गई, जिसके बाद मुख्तार ने अपने पीए को बुलाकर 10 लाख रुपए मंगवाए और उन्हें दे दिए। सुधीर सिंह का दावा है कि ये लेनदेन उनकी मौजूदगी में हुई थी, क्योंकि वो भी उस समय समाजवादी पार्टी के नेता थे।

सुधीर सिंह ने कहा, “मुख्तार अंसारी ने आगे भी पैसे देने का वादा किया। वो सेशन कोर्ट से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक केस लड़ने के लिए पैसे भिजवाता था।” हालाँकि अंजुमन इंतजामिया मसाजिद कमेटी ने इस दावे को खारिज किया है। ज्वॉइंट सेक्रेटरी एसएम यासीन ने कहा कि मुख्तार से कभी पैसे नहीं लिए गए। मुख्तार ने खुद से चंदा दिया हो, ऐसा कोई वाकया उन्हें याद नहीं। वहीं, मुफ्ती अब्दुल बातिन नोमानी ने भी वही बाते दोहराई और कहा कि जो व्यक्ति साल 2005 से जेल में बंद हो, वो हमारी मदद क्या करेगा?

अपने दावे के बारे में बात करते हुए सुधीर सिंह ने बताया, “साल 2012 में मुख्तार अंसारी को यूरिक एसिड की समस्या थी, जिसके इलाज के लिए वो बीएचयू आए थे। वहीं मुफ्ती नोमानी से उनकी मुलाकात हुई। इस मुलाकात के दौरान मुफ्ती नोमानी ने कहा कि ज्ञानवापी की हालत जर्जर होती जा रही है, वो कभी भी गिर सकती है। मरम्मत के लिए रकम की जरूरत है। इस पर मुख्तार ने अपने पीए को कहकर 10 लाख रुपए गाड़ी से मँगवाए और उन्हें दे दिया। इसके बाद मुफ्ती ने रकम को नाकाफी बताया, तो मुख्तार ने और भी मदद करने की बात कही, साथ ही कहा कि हर माह उन्हें रकम पहुँचती रहेगी।”

आयकर विभाग ने कॉन्ग्रेस को दिया फिर झटका, इस बार थमाया ₹1745 करोड़ का नोटिस: टैक्स की रकम का आँकड़ा ₹3000 करोड़ के पार

कॉन्ग्रेस पार्टी को इनकम टैक्स विभाग से नया नोटिस मिला है। इसमें आकलन वर्ष 2014-15 से 2016-17 तक के लिए 1,745 करोड़ रुपए के टैक्स की माँग की गई है। साल के हिसाब से बताएँ तो 2014-15 के लिए 663 करोड़ रुपए, 2015-16 के लिए करीब 664 करोड़ रुपए और 2016-17 के लिए करीब 417 करोड़ रुपए आयकर विभाग ने कॉन्ग्रेस पार्टी से माँगे हैं।

इस नोटिस के बाद कहा जा रहा है कि आयकर विभाग द्वारा कॉन्ग्रेस से अब तक कुल 3,567 करोड़ रुपए के कर की माँग हो चुकी है। ये नोटिस अधिकारियों द्वारा राजनीतिक दलों को दी जाने वाली टैक्स छूट खत्म के बाद पार्टी को दिए गए हैं।

बता दें कि इससे पहले कॉन्ग्रेस ने बताया था कि उन्हें आयकर विभाग से नोटिस मिला था जिसमें करीब 1,823 करोड़ रुपए का भुगतान करने को कहा गया है। उन्होंने यह भी दावा किया था कि पिछले वर्ष से संबंधित टैक्स माँग के लिए पार्टी के खातों से पहले ही 135 करोड़ रुपए निकाल लिए गए हैं जिसके कारण उन्होंने अदालत का रुख किया है। अब इस मामले में 1 अप्रैल को इस मामले में सुनवाई होने की संभावना है।

कॉन्ग्रेस ने जानकारी साझा करते हुए आयकर विभाग के इन नोटिसों और रिकवरी की कार्रवाई पर आरोप लगाया था कि सरकार चुनाव से पहले उनके खाते सीज कर रही है। कॉन्ग्रेस का कहना था कि पार्टी के पास चुनाव लड़ने को भी फंड नहीं है, इसीलिए वह प्रचार आदि में भी पैसा नहीं खर्च पा रही। वहीं उनकी पार्टी के खाते से 135 करोड़ रुपए निकाल लिए गए हैं। हालाँकि, आयकर विभाग ने इन आरोपों पर कहा था कि वह मात्र अपनी रिकवरी कर रहे हैं और उसने कोई भी खाते फ्रीज नहीं किए हैं। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने इस मामले पर कहा था कि कॉन्ग्रेस इसे चुनावी मुद्दा बना रही है।

लाठी उठा कर ताबड़तोड़ किया वार, ‘मुंबई इंडियंस’ के फैंस ने पीट-पीट कर मार डाला: रोहित शर्मा के आउट होने का जश्न मना रहा था CSK फैन

महाराष्ट्र के कोल्हापुर में क्रिकेट के विवाद में एक व्यक्ति की जान चली गई है। मृतक की पहचान 63 वर्षीय बंदोपंत बापसो टिबिले के रूप में हुई है। हत्या का आरोप 50 साल के महादेव झांझगे (50) और 35 वर्षीय सागर सदाशिव झांझगे पर लगा है। दोनों को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। मृतक ‘चेन्नई सुपरकिंग्स’ का फैन था जबकि आरोपित ‘मुंबई इंडियंस’ के समर्थक थे। घटना बुधवार (27 मार्च, 2024) की है। पुलिस मामले की जाँच कर रही है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह घटना कोल्हापुर के हनमंतवाड़ी की है। 27 मार्च 2024 को हैदराबाद के राजीव गाँधी इंटरनेशनल क्रिकेट स्टेडियम में ‘मुंबई इंडियंस’ और ‘सनराइजर्स हैदराबाद’ टीमों के बीच आईपीएल मैच खेला जा रहा था। बलवंत झांझगे और सागर झांझगे दोनों ही IPL (इंडियन प्रीमियर लीग) में ‘मुंबई इंडियंस’ को समर्थन दे रहे हैं। वहीं मृतक बंदोपंत टिबिले ‘चेन्नई सुपरकिंग्स’ के फैन हैं। बताया जा रहा है कि बुधवार को हुए इस मैच में हैदराबाद की टीम ने बड़ा स्कोर खड़ा किया था। इस स्कोर से दोनों आरोपित खुश नहीं थे।

कुछ देर मुंबई इंडियंस ने रनों का पीछा करना शुरू किया। इसी दौरान मुंबई इंडियंस के बल्लेबाज रोहित शर्मा आउट हो गए। इस विकेट के गिरने का टिबिले जश्न मनाना शुरू कर दिए। यह बात उसी टीवी पर मैच देख रहे बलवंत झांझगे और सागर झांझगे को नागवार गुजरी। दोनों ने गुस्से ने लाठी उठा ली और बंदोपंत टिबिले को पीटना शुरू कर दिया। लाठियों के वार टिबिले के सिर पर भी किए गए। इस हमले से पीड़ित मौके पर ही बेहोश हो गया जिसे अस्पताल में भर्ती करवाया गया।

लगभग 4 दिनों तक बंदोपन्त का अस्पताल में इलाज चला। आखिरकार रविवार (31 मार्च, 2024) को बंदोपन्त का निधन हो गया। पीड़ित परिवार की तहरीर पर पुलिस ने बलवंत और सागर के खिलाफ FIR दर्ज कर ली है। दोनों को गिरफ्तार कर के जेल भेज दिया गया है। मामले की जाँच की जा रही है। जिस मैच के विवाद में बंदोपन्त की हत्या हुई थी बाद में मुंबई इंडियन उसे 31 रनों से हार गई थी।

कुर्सी बदल कर सीताराम येचुरी से अलग बैठ गए डेरेक ओब्रायन, रैली में दिखी I.N.D.I. गठबंधन की एकता में खटास: राजदीप सरदेसाई की पत्नी बोलीं – देश में तानाशाही

राजधानी नई दिल्ली में हुई I.N.D.I. गठबंधन की रैली यूँ तो मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की गिरफ़्तारी का विरोध करने के लिए बुलाई गई थी, लेकिन इसमें विपक्षी दलों की एकता में खटास भी दिख गई। हुआ यूँ कि पश्चिम बंगाल की सत्ताधारी पार्टी TMC (तृणमूल कॉन्ग्रेस) के नेता डेरेक ओब्रायन और राज्य में विपक्षी दलों में शामिल CPI(M) के सीताराम येचुरी को रैली में मंच पर साथ-साथ बिठाया गया था। हालाँकि, डेरेक ओब्रायन ने अपनी कुर्सी बदल ली और अलग बैठ गए।

बता दें कि पश्चिम बंगाल में TMC और वामदल लंबे समय से एक-दूसरे के दुश्मन हैं और लोकसभा चुनाव 2024 में भी दोनों दल एक-दूसरे के खिलाफ लड़ रहे हैं। 2012 से पहले 33 वर्षों तक वहाँ लेफ्ट का शासन था, वहीं पिछले 12 वर्षों से ममता बनर्जी सत्ता में हैं। ममता बनर्जी ने कॉन्ग्रेस पार्टी को भी इन चुनावों में भाव नहीं दिया और सभी सीटों पर अपने प्रत्याशी उतार दिए। कॉन्ग्रेस से सोनिया गाँधी, राहुल गाँधी, प्रियंका गाँधी और अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे इस रैली का हिस्सा बने।

वहीं बात-बात पर भाजपा को कोसने वाले पत्रकार राजदीप सरदेसाई की पत्नी सागरिका घोष ने भी इस रैली में बड़ी-बड़ी बातें की। उन्होंने कहा कि उनकी नेता ममता बनर्जी का पूरा समर्थन अरविंद केजरीवाल के साथ है, चुनाव प्रचार शुरू करने में व्यस्त होने के कारण वो नहीं आ सकीं। सागरिका घोष ने कहा कि AAP के सामने चुनाव के समय एक बहुत बड़ी चुनौती है, उनके लोकप्रिय नेता को जेल भेजा गया है। उन्होंने कहा कि ये जनतंत्र नहीं बल्कि तानाशाही है।

उन्होंने ED को मोदी सरकार का यंत्र बताते हुए कहा कि भाजपा के भीतर जो चला जाता है उस पर दूध सी सफेदी छा जाती है। उन्होंने कहा कि एक नेता, एक दल वाली नीति लोकतंत्र को खत्म कर रही है। उन्होंने कहा कि पैसा सरकार गिराने के लिए लगाया जा रहा है, गरीब कल्याण के लिए नहीं। उन्होंने कहा कि इस राजनीति से हमारे देश का विनाश हो रहा है। उन्होंने देश की 70% आमदनी 10% लोगों के पास होने की बात करते हुए कहा कि दूध-टमाटर-दाल का दाम बढ़ गया है और मोदी की गारंटी जीरो वॉरंटी है।

मथुरा में पुलिस और गौरक्षकों ने तस्करों से बचाए 24 गोवंश, एक दिन पहले ही मुठभेड़ में पुलिस ने हनीफ-इरशाद और जाहिद को पकड़ा था

हिंदुओं का प्रसिद्ध धार्मिक केंद्र मथुरा में भी गौ तस्कर अपनी करतूतों से बाज नहीं आ रहे हैं। वे लगातार पुलिस को चुनौती दे रहे हैं। शुक्रवार (29 मार्च 2024) की देर रात करीब गौ रक्षकों ने पुलिस के सहयोग से 24 गोवंशों को बचाया है। इसके ठीक एक दिन पहले मथुरा पुलिस ने एनकाउंटर करके तीन गो तस्करों को गिरफ्तार किया था। उनके पैरों में गोली लगी थी।

दरअसल, शुक्रवार की रात कुछ गौ रक्षकों को सूचना मिली की एक बंद बॉडी कैंटर में गौ वंश को भरकर तस्कर आगरा से मेवात की तरफ ले जा रहे हैं। यह भी कहा गया था कि इस छोटे से कैंटर में 24 गौ वंशों को रखा गया है। इसके बाद गौ रक्षकों की टीम ने पुलिस को सूचित किया और एक गाँव के समीप नाका लगाया। इस दौरान आ रहे कैंटर को रोकने का प्रयास किया, लेकिन तस्कर कैंटर लेकर भागने लगे।

तस्करों द्वारा कैंटर लेकर भागने पर गौ रक्षकों ने अपनी गाड़ियों से उसका पीछा किया और उसे रोकने की कोशिश की। लगभग 10 किलोमीटर तक पीछा करने के बाद गौ तस्कर खुद घिरता देखकर हड़बड़ा गए और अंधेरे में सड़क किनारे कैंटर छोड़कर भाग गए। इस दौरान पीछा कर रही गौरक्षकों की टीम वहाँ पहुँची और कैंटर में भरे 24 गौ वंश को बरामद कर लिया।

पुलिस ने गौ तस्करों की तलाश की, लेकिन अंधेरे का फायदा उठाकर वे भागने में सफल रहे। आखिरकार गौ वंशों को श्रीपाद बाबा की गौशाला लाया गया। वहीं कैंटर को पुलिस ने जब्त कर लिया। गौ तस्करी के इस मामले में धनगर थाना में अज्ञात गौ तस्करों के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई कराई है।

बता दें कि गुरुवार (28 मार्च 2024) की रात को गश्ती के दौरान बरसाना पुलिस की चरण पहाड़ी के पास गौ तस्करों से मुठभेड़ हो गई थी। जब पुलिस ने तस्करों को रोकने की कोशिश की तो वे पुलिस पर फायरिंग करने लगे। इसके बाद पुलिस ने जवाबी फायरिंग की, जिसमें तीन तस्करों के पैरों में गोली लगी।

मुठभेड़ में घायल हुए तस्करों की पहचान हरियाणा के नूहँ निवासी हनीफ, इरशाद और जाहिद के रूप में हुई। इन तीनों को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। घायल तस्करों को इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया था। इनके पास से दो तमंचा, एक सैंट्रो कार और दो गौवंश बरामद किए गए थे।

अब्दुल को ईसाई बनने पर UK में मिली थी शरण, महिला और बच्चे पर केमिकल अटैक करने वाले का ‘सच’: ‘मुस्लिम भाइयों’ ने उसके लिए ‘फर्जीवाड़ा’ कर जमा किया चंदा

यूनाइटेड किंगडम (यूके) जो दशकों से मुस्लिमों को शरण देता रहा। वहाँ ऐसा आपराधिक कुकृत्व सामने आया है, जिसने पूरे यूके की आँखें खोल दी हैं। यहाँ अफगानिस्तान से भागे जिहादी अब्दुल इजेदी ने 31 मार्च को एक महिला और उसके 1 साल के बच्चे पर केमिकल अटैक किया। इस हमले में कई लोग महिला और बच्चे को बचाने के चक्कर में झुलस गए, जिसमें 5 पुलिसकर्मी भी शामिल हैं। अब पता चला है कि जिहादी अब्दुल इजेदी की पूरी जिंदगी ही झूठ पर आधारित थी और उसकी पूरी कौम का भी यही हाल दिखता है।

दरअसल, अब्दुल इजेदी का शव टेम्स नदी से बरामद हुआ, तब तक वो क्रिश्चियन था, क्योंकि उसने नागरिकता पाने के लिए क्रिश्चियानिटी का सहारा लिया था। लेकिन डेलीमेल ने खुलासा किया है कि अब्दुल इजेदी के ‘करीबियों’ ने उसे क्रिश्चियन कब्रिस्तान नहीं, बल्कि मुस्लिम कब्रिस्तान में दफनाया। यही नहीं, उसे दफनाने के लिए तथाकथित मुस्लिम धर्म के लोगों ने ऑनलाइंन फंडिंग अभियान भी चलाया। लेकिन यहाँ भी जिहादियों ने धोखाधड़ी करते हुए किसी अन्य नाम और पहचान के साथ न सिर्फ चंदा इकट्ठा किया, बल्कि उसे इस्लामिक रीति-रिवाजों के साथ दफनाया भी।

इस पूरे मामले में खुलासा हुआ है कि अब्दुल इजेदी साल 2016 में लॉरी में सवार होकर ब्रिटेन पहुँचा था। वो अफगानिस्तान से किसी तरह ब्रिटेन पहुँचने में सफल रहा। यहाँ उसने दो बार शरणार्थी के तौर पर देश में रहने देने की अनुमति माँगी, लेकिन उसकी अपील खारिज कर दी गई। लेकिन कुछ समय गायब रहने के बाद उसने दावा किया कि वो अब क्रिश्चियन हो गया है और अब अगर वो अफगानिस्तान जाएगा, तो उसको मार दिया जाएगा।

अब्दुल इजेदी की इस दलील और बापतिस्ट चर्च से मिले धर्मांतरण के बाद उसे इंग्लैंड में रहने की छूट दे गई। वैसे, वो साल 2018 में भी एक महिला के साथ उसने यौन हमले में दोषी ठहराया जा चुका था। अब अब 31 मार्च को उसने अपनी पूर्व परिचित महिला और उसके 1 साल के बच्चे के ऊपर केमिकल फेंका। उसकी तलाश की जा रही थी कि उसका शव टेम्स नदी में मिला। लेकिन जब दफनाने की बारी आई, तो उसके मुस्लिम ‘जिहादी भाईयों’ ने अलग रास्ता खोज निकाला।

अब्दुल इजेदी की जगह अब्दुल वाहेद के नाम से चंदा इकट्ठा

मुस्लिम बुरिअल फंड (MBF) ने इसाई बन चुके अब्दुल इजेदी को अब्दुल वाहेद के नाम से दफनाया। उन्होंने इसके लिए 3800 पाउंड का लक्ष्य रखा था, जिसे चंदे के जरिए पूरा करना था। उसमें पूरे यूके के मुस्लिमों की ओर से 6596 पाउंड दान की रकम मिली। मुस्लिम बुरिअल फंड से जब पूछा गया कि अब्दुल इजेदी को इस्लामी रीति से क्यों दफनाया गया, तो संस्था ने जवाब दिया कि ये मरने वाले के परिजनों की इच्छा के मुताबिक किया गया। हालाँकि सवाल उठ रहे हैं कि उसके किस परिजन की मर्जी से ऐसा हुआ? वो परिजन कहाँ से आए? क्योंकि उन्हें छोड़कर अब्दुल 2016 में भी यूके आ गया था और क्रिश्चियन बन गया था? या उसकी ‘पुरानी कौम’ के लोग?

समस्या दान के पैसों की नहीं है, अब सवाल उठ रहे हैं कि किसी गलत नाम से चंदा क्यों इकट्ठा किया गया और सबसे बड़ा सवाल तो ये उठ रहा है, कि क्या कोई भी व्यक्ति नागरिकता या शरण पाने के लिए क्रिश्चियन बन जाता है, तो उसे ब्रिटेन में रहने की अनुमति मिल जाती है? क्योंकि अब्दुल इजेदी के मामले में ऐसा ही हुआ। ऐसे में बापटिस्ट चर्च को भी लोग चेतावनी दे रहे हैं कि वो ऐसे किसी ‘खेल’ के चक्कर में न पड़े।