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दलित महिला को 2 बच्चों सहित कबूल करवाया इस्लाम: राजस्थान पुलिस ने फैक्ट्री मालिक इंतजार खान को दबोचा, मस्जिद का 2 मौलवी भी शामिल

राजस्थान के खैरतल जिले से धर्म परिवर्तन का मामला सामने आया है। यहाँ फैक्ट्री में काम करने वाली एक दलित महिला और उसके 2 बच्चों को पैसे और नौकरी के लालच में इस्लाम कबूल करवा दिया गया है। धर्मान्तरण का आरोप फैक्ट्री मालिक इंतजार खान पर लगा है। पीड़िता विधवा है, जिसे इस्लाम कबूल करवाने में 2 मौलवियों की भी संलिप्तता भी बताई जा रही है। महिला के ससुर ने इस मामले की शिकायत पुलिस में दर्ज करवाई है। पुलिस मामले की जाँच में जुट गई है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक यह मामला खैरतल जिले के तिजारा इलाके का है। यहाँ के वार्ड नंबर 18 में रहने वाले नंदलाल जाटव ने पुलिस में शिकायत दर्ज करवाई है। शिकायत में कृष्ण कुमार ने बताया है कि उनके बेटे की कुछ महीने पहले मौत हो चुकी है। बेटे की मौत के बाद उनकी बहू मंजू एक फैक्ट्री में मसाला पैकिंग का काम करने लगी। इस फैक्ट्री का मालिक इंतजार खान है। कुछ दिनों से मंजू फैक्ट्री मालिक इंतजार खान के साथ स्कूटी पर आने-जाने लगीं। मंजू 2 बच्चों की माँ हैं। ये दोनों मंजू के ही साथ रहते हैं।

मंजू के बड़े बेटे ने अपने दादा नंदलाल को बताया कि कुछ दिनों से इंतजार खान ही उनकी माँ का पूरा खर्च उठा रहे थे। मंजू अपने बेटों से इंतजार को पिता जैसा मानने के लिए कहने लगीं। हालाँकि मंजू के बच्चों ने इसका विरोध किया। आरोप है कि एक दिन मंजू अपने दोनों बच्चों के साथ इंतजार के घर गई। यहाँ पर 2 मौलवी पहले से मौजूद थे। मौलवी ने दोनों बच्चों से इस्लाम कबूलने के लिए कहा। मुस्लिम बनने पर बच्चों को सरकारी नौकरी, 5 लाख रुपए और वजीफा मिलने का लालच दिया गया।

नंदलाल के मुताबिक उनकी बहू ने मौलवियों की बात मान ली थी। वह तिजारा की एक मस्जिद में अपने दोनों बच्चों को ले गईं। यहाँ उन्हें इस्लामी तौर-तरीकों से रहने पर मजबूर किया जाने लगा। एक दिन मौका पाकर दोनों बच्चे मस्जिद से भाग निकले और अपने दादा के घर पहुँच गए। बच्चों से मिली जानकारी पर नन्दलाल ने अपनी बहू से जानकारी लेने का प्रयास किया। आरोप है कि इस दौरान मंजू ने अपने ससुर को मुँह बंद रखने की धमकी दी। तब मंजू ने बताया कि वो इस्लाम कबूल कर चुकी है।

आखिरकार नंदलाल जाटव ने मामले की शिकायत पुलिस में दी। पुलिस ने शिकायत पर आरोपित फैक्ट्री मालिक इंतजार खान को गिरफ्तार कर लिया है। इंतजार खान को SC/ST एक्ट सहित अन्य धाराओं में न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया है। हालाँकि एक रिपोर्ट के अनुसार पुलिस इस मामले को पैसे के लेन-देन के चलते उठा विवाद बता रही है।

पत्नी को भूत-पिशाच कहना क्रूरता नहीं: पटना हाई कोर्ट ने ‘दहेज मामले’ में दिया फैसला, पति-ससुर की 1 साल की सजा भी रद्द की

पटना हाई कोर्ट ने एक फैसले में कहा है कि पत्नी को भूत-पिशाच कहना क्रूरता के दायरे में नहीं आता है। अदालत ने कहा कि असफल विवाहों में गंदी या अभद्र भाषा का प्रयोग हमेशा भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 498A (पति या उसके रिश्तेदारों द्वारा पत्नी के प्रति क्रूरता) के तहत क्रूरता के दायरे में नहीं आता है। इसके आधार पर कोर्ट ने पति और उसके पिता की सजा को रद्द कर दिया।

जस्टिस बिबेक चौधरी ने कहा, “विपक्षी पक्ष संख्या 2 के विद्वान अधिवक्ता ने गंभीरता से आग्रह किया कि किसी व्यक्ति को ‘भूत’ और ‘पिशाच’ कहकर गाली देना अपने आप में क्रूरता है। न्यायालय इस तरह के तर्क स्वीकार करने की स्थिति में नहीं है। असफल वैवाहिक संबंधों में ऐसी घटनाएँ होती हैं, जहाँ पति-पत्नी एक-दूसरे को गालियाँ दीं। ऐसे सभी आरोप ‘क्रूरता’ के दायरे में नहीं आते हैं।”

याचिकाकर्ताओं ने तर्क दिया कि यातना के आरोपों के बावजूद शिकायतकर्ता ने अपनी बेटी का कभी चिकित्सकीय उपचार नहीं कराया। ट्रायल कोर्ट और अपीलीय अदालत ने भी इस पर विचार नहीं किया कि अभियोजन पक्ष के सभी गवाह या तो पारिवारिक सदस्य थे या उसी गाँव में रहते थे। वहीं, शिकायतकर्ता ने अदालत को बताया कि आरोपित पिता-पुत्र उसकी बेटी को ‘भूत’ और ‘पिशाच’ कहते थे।

अदालत ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद कहा कि किसी को भूत-पिशाच कहना अपने आप में क्रूरता का कार्य नहीं है। साथ ही पति-पत्नी के बीच लंबे समय तक विवाद और दहेज की माँग वाली क्रूरता को साबित करने के लिए कोई सबूत नहीं पेश किया गया। इसलिए यह मामला व्यक्तिगत द्वेष और पक्षों के बीच मतभेद का परिणाम था।

दरअसल, अदालत याचिकाकर्ता पति और ससुर को दहेज (निषेध) अधिनियम की धारा 498A और धारा 4 (दहेज माँगने के लिए जुर्माना) के तहत निचली अदालत द्वारा दी गई सजा के खिलाफ एक पुनरीक्षण याचिका पर सुनवाई के दौरान यह फैसला दिया। इसके साथ ही पित-पुत्र को दी गई एक साल की कठोर सजा को भी रद्द कर दिया।

दरअसल, पिता-पुत्र के खिलाफ लड़की के पिता ने शिकायत दर्ज कराई थी। इसमें आरोप लगाया था कि आरोपित पिता-पुत्र ने उसकी बेटी से दहेज के रूप में एक मारुति कार की माँग की थी। जब कार देने में उसने असमर्थता जताई तो उसकी बेटी के साथ मारपीट की गई। शिकायत के अनुसार, इन सभी घटनाओं की जानकारी महिला ने कई पत्रों के जरिए अपने पिता को दी थी।

दर्ज शिकायत एक आधार पर चले मुकदमे में एक ट्रायल कोर्ट ने आरोपित पिता-पुत्र को दोषी ठहराया और IPC की धारा 498A और दहेज निषेध अधिनियम की धारा 4 के तहत एक साल के कठोर कारावास और ₹1,000 के जुर्माने की सजा सुनाई। इस आदेश को अपीलीय अदालत ने बरकरार रखा था। इससे व्यथित होकर याचिकाकर्ताओं ने उच्च न्यायालय का रुख किया।

‘मेरी ब्रेस्ट पर लगाई क्रीम, मुझे नंगे होने को कहा’ : कौन है वो TV अभिनेत्री, जिसने 19 साल में झेला यह सब, कास्टिंग काउच फिर चर्चा में

तमाम अभिनेत्रियों के कास्टिंग काउच के बुरे अनुभव के बाद अब टेलीविजन की जानी-मानी एक्ट्रेस सोनल वांगुलकर का कास्टिंग काउच एक्सपीरियंस मीडिया में दोबारा चर्चा में है। उन्होंने कुछ साल पहले इसके खिलाफ आवाज उठाई थी। मीडिया में उन्होंने बताया था कि कैसे एक बुरे अनुभव का उनपर गलत असर पड़ा।

सोनल ने बताया था कि जिस समय उनके साथ ऐसा हुआ उस वक्त वह महज 19 साल की थीं और उनके साथ भद्दी हरकत करने वाले का नाम राजा बजाज है। राजा इंडस्ट्री के एक जाने-माने कास्टिंग डायरेक्टर और फोटोग्राफर हैं।

सोनल के अनुसार, “साल 2018 में मुझे राजा बजाज के ऑफिस में एक रोल के लिए ऑडिशन के लिए बुलाया गया। इस बात को लेकर मैं बेहद खुश थी। राजा एक फेमस डायरेक्टर और फोटोग्राफर हैं। उस वक्त मैंने ऑडिशन दिया लेकिन पूरी तरह से तैयार न होने की वजह से मैं ठीक से डॉयलॉग बोल नहीं पाई। इसके बाद उन्होंने मुझे शूट में सहायता की ताकि मैं कुछ सीख पाऊँ।”

सोनल बताती हैं कि उन्हें पहले उस शूट का हिस्सा बनाया गया जिसकी वो हिस्सा नहीं थीं। बाद में उनसे कुछ कपड़े ट्राई करने को कहे गए। इस दौरान जबरन उनकी ब्रेस्ट पर क्रीम लगाई गई। उन्हें ये अजीब लगा और मन में डर बैठ गया। लेकिन ये सिर्फ पहली घटना थी। इसके आगे भी कुछ होना बाकी था।

सोनल के अनुसार, राजा रात में उनके कमरे में जबरन घुस आए और तंत्र विद्या सिखाने जैसी बातें करने लगे, वो भी ये लालच देकर कि इससे सोनल रातोंरात सुपरस्टार बन जाएँगी। सोनल ने अपना भयानक अनुभव साझा करते हुए कहा:

“उसने मुझे कहा कि ये तंत्र विद्या मुझे उसके साथ बिना कपड़ों के करनी होगी। पूरी तरह से नग्न होकर मंत्र जाप करना होगा। जो वो बोले उसके साथ दोहराना होगा। यही नही उसने मेरे साथ जबरदस्ती भी की। मैं कुछ समझ पाती उससे पहले वो मेरी टीशर्ट उतारने लगा, लेकिन तब मैंने उसे धक्का देकर खुद को बचाया और वहाँ से भागने में कामयाब रही। मैं भागकर सीधे उस मॉडल के पास गई जिसके साथ उसकी माँ थीं।”

गौरतलब है कि सोनल वांगुलकर टीवी के मशहूर शो ‘ये वादा रहा’, ‘शास्त्री सिस्टर्स’, ‘साम दाम दंड भेद’ जैसे शो में एक्टिंग करके टीवी जगत में पहचान बना चुकी हैं। उनके साथ जब ये सब हुआ था तब सोनल ने इस मामले में राजा बजाज के खिलाफ शिकायत भी कराई थी। लेकिन राजा बजाज की बेटी और पत्नी उन्हें गलत ठहराने में लगे रहे। बेटी शीना बजाज ने अपने पिता का सपोर्ट करते हुए इसे ब्लैकमेलिंग का केस बताया था। वहीं सोनल ने कहा था कि जब उन्होंने शिकायत करवा दी थी जो सोनल से रोज फोन करके पूछा जाता था कि क्या वो पैसे लेकर ये केस वापस ले सकती हैं।

CM केजरीवाल से रोजाना 5 घंटे पूछताछ, नहीं बता रहे iPhone का पासवर्ड: ED ने Apple से संपर्क किया, मुख्यमंत्री बोले- फोन में चुनावी रणनीति

शराब घोटाले में गिरफ्तार दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल प्रवर्तन निदेशालय (ED) के अधिकारियों के साथ जाँच में सहयोग नहीं कर रहे हैं। यही कारण है कि लगभग इतने दिन तक कस्टडी में रहने के बावजूद अधिकारियों को उनके एप्पल मोबाइल तक पहुँच नहीं मिल पाई है। रिपोर्ट के मुताबिक, सीएम केजरीवाल के मोबाइल का लॉक खुलवाने के लिए अधिकारियों ने एप्पल कंपनी से संपर्क किया है।

ईडी को इलेक्ट्रॉनिक सबूत के रूप में मुख्यमंत्री केजरीवाल का कोई निजी कंप्यूटर या डेस्कटॉप नहीं मिला। हालाँकि, उनका मोबाइल सहित चार सेलफोन जब्त किए गए हैं। इनमें उनकी पत्नी सुनीता केजरीवाल का मोबाइल भी शामिल है। 21 मार्च 2024 की रात को उनकी गिरफ्तारी के समय उनके आवास से लगभग 70,000 रुपए पाए गए थे। हालाँकि, इस रकम को जब्त नहीं किया गया था।

सूत्रों के हवाले से इंडियन एक्सप्रेस ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने गिरफ्तारी के बाद अपना आईफोन बंद कर दिया है और उसका पासवर्ड प्रवर्तन निदेशालय के अधिकारियों के साथ साझा नहीं किया है। पूछताछ के दौरान केजरीवाल ने कहा कि उनके मोबाइल के डेटा और चैट से ईडी को AAP की ‘चुनावी रणनीति’ और चुनाव पूर्व गठबंधनों के बारे में जानकारी मिल जाएगी।

रिपोर्ट के मुताबिक, माना जाता है कि ईडी ने सीएम अरविंद केजरीवाल के आईफोन से डेटा निकालने के लिए फोन के निर्माता ऐप्पल से आधिकारिक तौर पर संपर्क किया था। हालाँकि, कंपनी की तरफ से अधिकारियों को बताया गया है कि आईफोन के किसी भी डेटा को फिर से प्राप्त करने के लिए उसका पासवर्ड आवश्यक है।

पूछताछ के दौरान अरविंद केजरीवाल ने ED को बताया कि यह आईफोन लगभग एक साल से उनके पास है। उन्होंने यह भी बताया कि साल 2020-2021 में शराब नीति का मसौदा तैयार करने के दौरान वे जिस मोबाइल फोन का इस्तेमाल करते थे, वह फोन अब उनके पास नहीं है। वहीं, सुनीता केजरीवाल के मोबाइल का एक्सेस अधिकारियों को मिल गया है और उसका डेटा भी निकाल लिया गया है।

ED के अधिकारी अरविंद केजरीवाल से रोजाना पाँच घंटे तक पूछताछ कर रही है। एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक, इस मामले में केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) ने भी मामला दर्ज है। ऐसे में सीबीआई भी अरविंद केजरीवाल की रिमांड की माँग कर सकती है, चाहे वो न्यायिक हिरासत में तिहाड़ जेल में ही क्यों ना हों।

दरअसल, ED ने मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल पर नई शराब नीति के माध्यम से धन शोधन करने और अवैध रूप से 100 करोड़ रुपए की धनराशि प्राप्त करने का आरोप लगाया गया है। इसमें से 45 करोड़ रुपए का इस्तेमाल गोवा में आम आदमी पार्टी (AAP) के 2021-22 के चुनाव अभियान के लिए किया गया था।

हिरासत के दौरान अरविंद केजरीवाल का सामना जेल में बंद पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया के पूर्व पीएस सी अरविंद से भी कराया गया। रिमांड अर्जी में आरोप लगाया गया है कि सी अरविंद को सीएम केजरीवाल के आवास पर शराब नीति पर मंत्री समूह की रिपोर्ट का मसौदा सौंपा गया था। केजरीवाल के सामने सी अरविंद के अपने बयान को दोहराया।

इसके अलावा, अरविंद केजरीवाल को इस मामले से जुड़े एक-दो व्यक्तियों से और सामना कराया गया है। हालाँकि, अधिकारियों ने इन लोगों के नामों का खुलासा नहीं किया है। में केजरीवाल को इस मामले का मुख्य आरोपित बताया गया है। इस मामले में अरविंद केजरीवाल के साथ-साथ मनीष सिसोदिया और AAP सांसद संजय सिंह भी जेल में बंद हैं।

रोजा के बाद चाय पीते मस्जिद के इमाम को हिंदुओं ने दम भर मारा… मुस्लिम महिलाओं को टॉर्चर कर रही UP पुलिस: इस्लामी मीडिया वायरल कर रही खबर, जानिए सच्चाई

उत्तर प्रदेश के कुशीनगर जिले का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। इस वीडियो में एक मस्जिद का इमाम हिन्दू समुदाय के कुछ लोगों पर अपनी पिटाई का आरोप लगा रहा है। कई इस्लामी हैंडलों द्वारा शेयर किए जा रहे इस वीडियो में इमाम यह भी बताता सुनाई दे रहा रहा है कि पुलिस एकतरफा कार्रवाई कर रही है। एक बुर्कानशीं महिला के बयान में भी हिन्दुओं द्वारा ही एकतरफा हमले की बात कही जा रही है। ऑपइंडिया ने इस मामले की जमीनी पड़ताल की।

हिन्दुओं पर ही हमले और पुलिस पर एकतरफा कार्रवाई का आरोप

आए दिन हिन्दू विरोधी खबरें शेयर करने वाले ‘द मुस्लिम’ नाम के हैंडल ने इन वीडियो को शेयर किया है। इस वीडियो में गोरखपुर का निवासी मोहम्मद कामरान खुद को मस्जिद का इमाम बता रहा है। कामरान ने बुधवार (27 मार्च 2024) को शाम 7 बजे की घटना बताते हुए दुर्गेश, प्रमोद, राजेश और धीरज पर बेवजह अपनी पिटाई का आरोप लगाया है।

इमाम कामरान के अनुसार, वो रोजा इफ्तारी के बाद चाय पी रहा था, तभी उस पर हमला कर दिया गया। कामरान का यह भी कहना है कि पुलिस ने एकतरफा कार्रवाई की है और उसकी सुनवाई नहीं हो रही है। बकौल कामरान आरोपितों ने उसके एक सहयोगी को भी पीटा है और गाँव के मुस्लिमों में दहशत का माहौल है।

इसी ट्वीट में आगे एक बुर्कानशीं महिला को भी कैमरे पर बोलते सुना जा सकता है। वह महिला कुछ अन्य लड़कियों के साथ पुलिस पर आरोप लगा रही है कि पुरुष पुलिसकर्मी महिलाओं को टॉर्चर कर रहे हैं। कुछ महिलाओं को यह भी कहते सुना जा सकता है कि पुलिस ने मुस्लिम लोगों को भी बेवजह गिरफ्तार कर लिया है। यह रिपोर्ट न्यूज़ MX के एडिटर इन चीफ शकील अहमद ने बनाई है। विक्टिम कार्ड खेल कर कमोबेश इसी प्रकार की रिपोर्ट मिल्लत टाइम्स ने भी तैयार की है, जिसमें मुस्लिम पक्ष को पीड़ित और हिन्दू पक्ष को हमलावर बताया गया है।

यहाँ ये बताना जरूरी है कि ये तमाम हैंडल आए दिन इसी प्रकार की ही खबरों को शेयर करते रहते हैं। इनके द्वारा लगभग सभी खबरों में मुस्लिम पक्ष को ही पीड़ित दिखाया जाता है। इस मामले में भी इन हैंडलों ने कथित आरोपों को वायरल करने का काम किया बिना किसी जाँच-पड़ताल के। जबकि कुशीनगर पुलिस ने अपने बयान में बताया है कि मामले की जाँच करके आवश्यक कार्रवाई की जा रही है।

मदरसे के बच्चों से करवाया हिन्दुओं के घर हमला

ऑपइंडिया ने इस मामले की जब जमीनी पड़ताल की तो सच्चाई कुछ और ही निकली। यहाँ गुरुवार (28 मार्च 2024) को छपरा गाँव की गायत्री देवी ने कुशीनगर के थाना जटहाँ में अपने परिवार पर हमले की FIR दर्ज करवाई है। पीड़िता के अनुसार उनके और मुबारक के परिवार के बीच पुरानी रंजिश चली आ रही थी। इसी रंजिश के कारण 27 मार्च को शाम 7 बजे मुबारक ने लगभग 35 हमलावरों के साथ उनके घर पर हमला कर दिया। इन हमलावरों में महिलाएँ और मदरसे के बच्चे भी शामिल बताए जा रहे।

हमले में लाठी-डंडे, हॉकी, रॉड और अन्य धारदार हथियारों का प्रयोग किया गया था। घर में घुस कर किए गए इस हमले में हमलावरों के आगे जो भी पड़ा, उसे ही पीटा गया। पीड़ितों को पिटाई के साथ माँ-बहन की भद्दी-भद्दी गालियाँ दी गईं।

गायत्री देवी ने अपनी FIR में मुबारक, कामरान, साजिद, वाज़िद, मुन्ना, अफ़रोज़, साहेब, रहमतुल्लाह का बेटा मोनू, मैनुद्दीन, माजिद का बेटा मुन्ना, ताहिर, अरशद, गोलू, फ़िरोज़ और नजरू को नामजद आरोपित बनाया है। इन सभी के अलावा लगभग 20 अज्ञात हमलावरों का भी जिक्र किया गया है।

गायत्री देवी की शिकायत पर पुलिस ने इन नामजद व अज्ञात आरोपितों पर IPC की धारा 147, 148, 323, 352, 452 और 504 के तहत FIR दर्ज की है। शिकायतकर्ता ने आरोपितों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की माँग की है। ऑपइंडिया के पास FIR कॉपी मौजूद है। यह FIR 28 मार्च को रात 10:04 पर दर्ज हुई है।

दर्ज थी FIR, फिर भी बोला झूठ

जहाँ द मुस्लिम, मिल्लत टाइम्स और न्यूज़ MX जैसे संस्थानों ने मुस्लिम भीड़ द्वारा हिन्दुओं पर हमले वाली बात अपनी रिपोर्ट में छिपा ली तो वहीं ऐसी ही एक हरकत इमाम कामरान ने भी की। 31 मार्च 2024 (रविवार) को मिल्लत टाइम्स द्वारा प्रकाशित इंटरव्यू में मस्जिद के इमाम कामरान ने पुलिस पर एकतरफा कार्रवाई किए जाने का आरोप लगाते हुए कहा है कि उनकी शिकायत पर FIR नहीं दर्ज की जा रही है। इमाम कामरान का यह आरोप सरासर झूठा है क्योंकि शुक्रवार (29 मार्च 2024) को उनकी शिकायत पर पुलिस दोपहर 12:05 पर FIR दर्ज कर चुकी थी।

पीड़िता गायत्री देवी द्वारा दर्ज कराई गई FIR के लगभग 14 घंटे बाद मस्जिद के इमाम कामरान जटहाँ थाने पहुँचे। यहाँ उन्होंने राजेश यादव, धीरज यादव, दुर्गेश यादव और प्रमोद यादव के अलावा 8-10 अन्य अज्ञात लोगों के खिलाफ शिकायत दी थी। इस शिकायत पर पुलिस ने उसी दिन चारों नामजदों सहित 8-10 अज्ञात के खिलाफ IPC की धारा 147, 323 और 504 के तहत FIR दर्ज कर लिया था। बावजूद इसके 2 दिन बाद अपने प्रकाशित इंटरव्यू में उन्होंने पुलिस पर अपनी FIR दर्ज न करने का झूठा आरोप लगाया है। ऑपइंडिया के पास यह FIR संख्या- 0073/2024 भी मौजूद है।

भ्रामक और झूठे हैं इमाम के आरोप

ऑपइंडिया ने इस मामले की जानकारी के लिए SHO जटहाँ से सम्पर्क किया। उन्होंने हमें बताया कि कुछ सोशल मीडिया के लोग 2 परिवारों के बीच बच्चे के झगड़े को साम्प्रदायिक रंग देने का प्रयास कर रहे हैं जो कि गलत है। SHO ने हमें यह भी बताया कि जिस इमाम कामरान का जिक्र घटना में आ रहा है, वह बेवजह दोनों परिवारों के विवाद के बीच गया था।

महिलाओं पर पुरुष पुलिसकर्मियों द्वारा अत्याचार या गाँव में किसी भी प्रकार के डर आदि का माहौल के दावों को थाना प्रभारी जटहाँ ने पूरी तरह से निराधार और भ्रामक बताया है। साथ ही उन्होंने कहा कि दोनों तरफ से निरोधात्मक कार्रवाई की गई है, इसलिए एकतरफा कार्रवाई की बातें भी असलियत से परे है। पुलिस ने हालात को पूरी तरह से सामान्य बताया है।

जिस द्वीप पर था भारत का दावा मजबूत, उसे भी इंदिरा गाँधी ने श्रीलंका को दिया: RTI से खुलासा, नेहरू ने कहा था- इसे छोड़ने के लिए कोई विचार नहीं करूँगा

तमिलनाडु में कच्चातिवु द्वीप का मुद्दा एक बार फिर गरमाया है। इस द्वीप को साल 1974 में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गाँधी ने एक समझौते के चलते श्रीलंका को दे दिया था। अब इस द्वीप से संबंधित जानकारी और दस्तावेज तमिलनाडु के भारतीय जनता पार्टी के अध्यक्ष अन्नामलाई ने आरटीआई के जरिए इकट्ठा किए हैं। इस आरटीआई से पता चलता है कि ये द्वीप भारत के अधीन आता था और इसके हम पर सबूत भी थे लेकिन फिर भी इंदिरा गाँधी ने इसे श्रीलंका को दे दिया।

टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, तमिलनाडु में भाजपा अध्यक्ष के अन्नामलाई ने आरटीआई के जरिए इस द्वीप को सौंपे जाने वाले दस्तावेज हासिल किए हैं। दस्तावेजों के हिसाब से यह द्वीप भारत से 20 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है और इसका आकार 1.9 वर्ग किलोमीटर का है। ज्वालामुखी होने के कारण इसपर कोई रहता नहीं रहता, लेकिन यहाँ एक चर्च है और इसके अलावा इसका इस्तेमाल मछुआरे किया करते थे। भारत की आजादी के बाद से ही श्रीलंका यानी तब का सीलोन इसपर अपने दावे करता था। 1955 में उनकी नौसेना ने इस द्वीप पर युद्धाभ्यास किया। वहीं भारतीय नौसेना को युद्धाभ्यास करने से रोक दिया गया।

बताया जाता है कि श्रीलंका को ये द्वीप दिए जाने से पहले ही पूर्व पीएम नेहरू संसद में कह चुके थे कि उन्हें इस द्वीप का विवाद संसद में नहीं सुनना है इसलिए अगर कभी भी ऐसा कोई विवाद होगा तो वो इसे छोड़ने में कोई विचार नहीं करेंगे। उनके इस कथन को उस समय के कॉमनवेल्थ सेक्रेट्री गुनदेविया ने नोट किया और बाद में उसे संसद की इनफॉरमल कंसल्टेटिव कमेटी के पास बैकग्राउंडर की तरह शेयर किया गया।

इस द्वीप को लेकर मौजूदा जानकारी भी बताती है कि 17वीं शताब्दी तक यह द्वीप मदुरई के राजा रामनद की जमींदारी के अधीन था। बाद में ब्रिटिश हुकूमत के दौरान यह मद्रास प्रेसिडेंसी के अधीन आ गया। शुरू में इस द्वीप का इस्तेमाल मछुआरे किया करते थे, लेकिन उस समय भी सीलोन के साथ इस द्वीप को लेकर तनाव रहता था। बाद में दोनों देशों के बीच बैठकें हुईं।

जानकारी के मुताबिक, एक बैठक कोलंबो में की गई और फिर दूसरी नई दिल्ली में। इसके बाद 1974 में इंदिरा गाँधी ने सहमति से ये द्वीप श्रीलंका को दे दिया बावजूद इसके कि भारत के पास इस द्वीप को लेकर कई सबूत थे। इसमें राजा रामनद का भी जिक्र था। वहीं श्रीलंका के पास कोई दावा नहीं था, फिर भी ये द्वीप उन्हें मिला।

अजीब बात तो ये है श्रीलंका को ये द्वीप देने के लिए विदेश सचिव द्वारा ये तक कहा गया कि इस द्वीप पर श्रीलंका का दावा मजबूत है। आरटीआई के मुताबिक ऐसा दिखाया गया कि ये द्वीप जफनापट्टनम का हिस्सा था। वहीं भारत की सर्वे टीम स्वीकार करती है कि उन्होंने यह नहीं बताया था कि रामनद के राजा के पास इसका ओरिजनल टाइटल था।

जब बाद में ये द्वीप श्रीलंका को सौंप दिया गया तो इसके साथ कुछ समझौते हुए। इन समझौतों में शुरू में कहा गया कि मछुआरे अपने काम के लिए इस द्वीप का इस्तेमाल कर पाएँगे। इसके अलावा इस द्वीप पर ने चर्च में भारतीय बिना वीजा के आ जा सकेंगे। लेकिन बाद में 1976 में हुए एक और समझौते में कहा गया कि भारतीय मछुआरे मछली पकड़ने वाले जहाज को लेकर श्रीलंका के एक्सक्लूसिल इकनॉमिक जोन में नहीं जा सकते।

इस समझौते के बाद इस द्वीप का विवाद काफी भड़का था। तत्कालीन मुख्यमंत्री करुणानिधि ने इसका खूब विरोध किया था। 1991 में तो तमिलनाडु की विधानसभा में इस द्वीप को भारत में मिलाने का प्रस्ताव भी पास किया गया। 2008 में जयललिता ने सर्वोच्च न्यायालय में सवाल उठाया था कि बिना संविधान संशोधन के भारत सरकार ने अपने द्वीप को किसी और देश को कैसे सौंप दिया गया। 2011 में उन्होंने इसे लेकर विधानसभा में एक प्रस्ताव भी पारित करवाया, मगर अटॉर्नी जनरल मुकुल रोहतगी ने 2014 में कहा कि यह द्वीप श्रीलंका को दे दिया गया है और इसे अगर लेना है तो युद्ध लड़ने के आलावा दूसरा कोई चारा नहीं है।

इसके अलावा पीएम मोदी ने भी इस द्वीप का मुद्दा संसद में 2023 में उठाया था। उन्होंने अविश्वास प्रस्ताव पर बोलते हुए कहा था, “ये जो लोग बाहर गए हैं, उनसे पूछिए ये कच्चातिवु द्वीप क्या है? और ये कच्चातिवु कहाँ है? जरा उनसे पूछिए… इतनी बड़ी बड़ी बातें कर के देश को गुमराह करने का प्रयास कर रहे हैं… और ये डीएमके वाले, उनकी सरकार, उनके मुख्यमंत्री मुझे आज भी चिट्ठी लिखते हैं कि मोदी जी कच्चातिवु द्वीप को वापिस लाइए। ये कच्चातिवु है क्या? किसने किया… तमिल नाडु से आगे श्रीलंका से पहले एक टापू, किसने किसी दूसरे देश को दिया था? कब दिया था? क्या ये भारत माता नहीं थी वहाँ। क्या वो माँ भारती का अंग नहीं था। इसको भी आपने तोड़ा और कौन था उस समय। श्रीमती इंदिरा गाँधी के नेतृत्व में हुआ था ये। कांग्रेस का इतिहास, माँ भारती को छिन्न-भिन्न करना का रहा है।”

केरल में रियास मौलवी की हत्या में फँसाए गए RSS के 3 कार्यकर्या बरी: 7 साल जेल में गुजारे, मंदिर से लौटते समय कर लिए गए थे गिरफ्तार

केरल में एक मदरसा शिक्षक की हत्या के मामले में फँसाए गए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के तीन स्वयंसेवकों को आखिर न्याय मिल गया। हालाँकि, उन्हें अपने जीवन के 7 कीमती साल जेल में गुजारने पड़े, लेकिन आखिर में कासरगोड के जिला एवं सत्र न्यायालय ने शनिवार (30 मार्च 2024) को मामले में फँसाए गए सभी लोगों को बाइज्जत बरी कर दिया।

आरोपितों की ओर से पेश हुए वकील बीनू कुलम्मकड ने कहा, “तीन व्यक्तियों को बिना जमानत दिए सात साल तक अन्यायपूर्ण तरीके से जेल में रखा गया। पुलिस ने शुरू से ही यह मानकर जाँच शुरू की कि हत्या आरएसएस ने की है और इन लोगों को पकड़कर उसने अपनी प्रतिष्ठा बचाने का प्रयास किया। आरोपितों का पीड़ित के साथ कोई पूर्व संबंध नहीं था और वे उस स्थान से अपरिचित थे, जहाँ घटना हुई थी।”

वहीं, सरकारी वकील टी शाजिथ ने इन लोगों के खिलाफ कई तर्क दिए। न्यायालय ने दोनों पक्षों को ध्यान से सुना और अभियोजन पक्ष हत्या का उद्देश्य साबित करने में असफल रहा है। इसके बाद जज केके बालाकृष्णन ने अजेश, नितिन कुमार और अखिलेश को बरी करने का फैसला सुनाया। ये सभी लोग पिछले सात सालों से जेल में थे। इन्हें कभी जमानत भी नहीं मिली थी।

दरअसल, जिस व्यक्ति की हत्या में इन लोगों को फँसाया गया था उसका नाम रियास मौलवी था। मूल रूप से कर्नाटक के कोडागू जिले का रहने वाला 34 साल का रियास मौलवी कासरगोड़ के चूरी इलाके में स्थित मुहायुद्दीन जुमा मस्जिद का मुइज्जिम और इससे जुड़े इस्सातुल इस्लाम मदरसा का मौलवी था।

साल 20217 में 20-21 मार्च की रात को कुछ बदमाश मस्जिद परिसर में घुसे और रियास मौलवी के दरवाजे को खटखटाया। जब मौलवी ने दरवाजा खोला तो बदमाशों ने उसे 14 बार चाकू मार दिया और वहाँ से निकल गए। ये पुलिस का कहना था। हालाँकि, पुलिस इसके पीछे का मोटिव नहीं बता पाई। इसके कारण कासरगोड़ में सांप्रदायिक तनाव की स्थिति उत्पन्न हो गई।

इस हत्या के विरोध में इंडियन मुस्लिम लीग ने 21 मार्च 2017 को हड़ताल का आह्वान करके प्रशासन पर दबाव बनाने की कोशिश की। आखिर उसी दिन DGP ने कन्नूर क्राइम ब्रांच के SP ए श्रीनिवास की अगुवाई में एक SIT का गठन कर दिया। 24 मार्च को पुलिस ने 19 साल के एस नितिन, 20 साल के एस अजेश और 25 साल के एन अखिलेश को गिरफ्तार कर लिया।

SIT के मुखिया रहे ए श्रीनिवास ने ऑनमनोरमा ऑनलाइन को बताया कि तीनों आरोपितों का मृतक से पूर्व में जान-पहचान नहीं थी और ना ही वे रियास मौलवी को जानते थे। यह हत्या सांप्रदायिक घृणा से प्रेरित थी। इसके अलावा, इसमें अन्य कोई कारण नहीं था।

आरोपित पक्ष के एक और वकील टी सुनील कुमार ने कहा कि अभियोजन पक्ष न केवल आरोपों को साबित करने में विफल रहा, बल्कि उनके मुवक्किलों के खिलाफ घटिया सबूत भी पेश किए। उन्होंने कहा कि रियास मौलवी की कमर के ऊपर चाकू से 14 वार किए गए थे। घाव उसके सिर और कंधों पर भी थे। अभियोजन पक्ष ने मौलवी की लुंगी को सबूत के तौर पर पेश किया था।

उन्होंने कहा, “लुंगी पर चाकू के 14 वार के निशान थे। अगर हम अभियोजन पर विश्वास करें तो हमें यह मानना होगा कि जब हमला हुआ था, तब मौलवी अपने ऊपर लुंगी ओढ़कर सो रहा था। लेकिन, अकेले रहने वाले रियास मौलवी को बदमाशों के लिए दरवाज़ा खोलना पड़ा, क्योंकि घर में कोई जबरन प्रवेश नहीं किया गया था।”

इस केस का पहला गवाह हाशिम था। हाशिम ही एकमात्र व्यक्ति था, जो हत्या की घटना और अपराधियों को देख सकता था। वकील कुमार ने कहा, “हाशिम मस्जिद परिसर में रुका था। वह अपराध स्थल पर पहुँचने वाला पहला व्यक्ति था। उसने रियास मौलवी को खून से लथपथ और दर्द से कराहते हुए देखा, लेकिन उसने भी अपराध करते हुए या अपराधियों को नहीं देखा।”

उन्होंने कहा कि पुलिस ने तीन युवकों को इसलिए उठाया, क्योंकि उनके मोबाइल का लोकेशन चूरी का मिला था। उन्होंने कहा, “दुर्भाग्य से वे सभी मल्लिकार्जुन शिव मंदिर में उत्सव में भाग लेने के बाद या तो एक साथ या अलग-अलग घर लौट रहे थे।” अभियोजन पक्ष ने मोबाइल टावर के लोकेशन को भी कोर्ट में एक महत्वपूर्ण सबूत बताया था।

दिल्ली के सांसद हंस राज हंस को पंजाब से लोकसभा का टिकट, सनी देओल का पत्ता कटा: BJP ने जारी की आठवीं लिस्ट, ओडिशा के साथ पश्चिम बंगाल से भी नाम

भारतीय जनता पार्टी ने लोकसभा चुनाव 2024 के लिए उम्मीदवारों की आठवीं लिस्ट जारी कर दी है। इस लिस्ट में 11 नाम हैं। भारतीय जनता पार्टी की आठवीं लिस्ट में पश्चिम बंगाल, पंजाब और ओडिशा के उम्मीदवार हैं। बीजेपी की ओर से दिल्ली की उत्तरी-पश्चिमी लोकसभा सीट से मौजूदा सांसद हंस राज हंस को पंजाब के फरीदकोट से टिकट दिया है। सबसे चौंकाने वाला मामला गुरदासपुर लोकसभा सीट का है, जहाँ सनी देओल का टिकट काट दिया गया है, उनकी जगह पर बीजेपी ने दिनेश सिंह ‘बब्बू’ को मैदान में उतारा है।

बीजेपी ने इस लिस्ट में ओडिशा की तीन लोकसभा सीटों पर उम्मीदवारों की घोषणा की है। इसके अलावा पंजाब से 6 लोकसभा सीटों और पश्चिम बंगाल से दो लोकसभा सीटों पर उम्मीदवारों की घोषणा की है। इसमें बीरभूम लोकसभा सीट से पूर्व आईपीएस देवाशीष धर को टिकट दिया गया है।

बीजेपी के टिकट वितरण की बात करें तो पंजाब की गुरदासपुर लोकसभा सीट से बीजेपी ने सनी देओल का पत्ता काट दिया है। उनकी जगह दिनेश सिंह ‘बब्बू’ को टिकट दिया गया है। बीजेपी ने मृतसर सीट से तरणजीत सिंह संधू पर भरोसा जताया है। वहीं बीजेपी ने पटियाला लोकसभा सीट से परनीत कौर को चुनावी मैदान में उतारा है। परनीत कौर कैप्टन अमरिंदर सिंह की पत्नी हैं।

बीजेपी ने लुधियाना से रवनीत सिंह बिट्टू, जालंधर से सुशील कुमार रिंकू पर दाँव लगाया है। इसमें आम आदमी पार्टी से बागी हुए सुशील कुमार रिंकू का भी नाम है। बता दें कि पंजाब के पूर्व सीएम बेअंत सिंह के पोते रवनीत बिट्टू ने हाल ही में कांग्रेस को झटका देते हुए बीजेपी का दामन थामा था। रवनीत बिट्टू लुधियाना से वर्तमान में सांसद हैं। बिट्टू ने 4 दिन पहले ही यानी 26 मार्च को बीजेपी जॉइन की थी।

बीजेपी ने ओडिशा की तीन सीटों पर उम्मीदवारों के नाम का ऐलान किया है। इसमें जाजपुर सीट पर रबिंद्र नारायण बेहरा, कंधमाल से सुकांत कुमार पाणिग्रही और कटक सीट से भर्तृहरि महताब को चुनावी मैदान में उतारा गया है। महताब पहले बीजेडी में थे।

पश्चिम बंगाल में बीजेपी ने झारग्राम की अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित सीट से डॉ. प्रणत टुडू को उम्मीदवार बनाया है, तो बीरभूम लोकसभा सीट से देबाशीष धर को उम्मीदवार बनाया है। वो पूर्व आईपीएस हैं।

बिलासपुर जेल में गैंगवार: चम्मच घिसकर बनाए हथियार लेकर भिड़े मौसीन, आसिफ, अल्ताफ, फिरोज जैसे 11 दुर्दांत कैदी, कई घायल

छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले की सेंट्रल जेल में कैदियों के दो गुटों में जमकर खूनी संघर्ष हुआ। कैदियों ने बर्तनों को घिसकर हथियार बनाए और फिर एक-दूसरे पर हमला बोल दिया। इस दौरान चम्मच और छड़ को हथियारों के रूप में इस्तेमाल किया गया, जिसमें कई कैदी घायल हो गए। बताया जा रहा है कि इन कैदियों का जेल के अस्पताल में ही इलाज चल रहा है और जाँच के बाद केस भी दर्ज किया गया है।

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, बिलासपुर सेंट्रल जेल में छत्तीसगढ़ के अलग-अलग इलाकों के दुर्दांत बदमाश कैद हैं। उनमें आपस में गुटबाजी भी है। इस जेल में रायपुर, कवर्धा और कोरबा के बदमाशों के गुट हैं। जो बाहर से अलग दिखते हैं, लेकिन किसी मुद्दे पर एकजुट हो जाते हैं, तो स्थानीय गुट बिलासपुर का ही है। जेल में खूनी संघर्ष इन्हीं गुटों के बीच हुआ है, जिसमें एक गुट की अगुवाई मौसीन खान उर्फ चूहा खान कर रहा था, तो दूसरे गुट का नेतृत्व अल्ताफ और फिरोज खान कर रहे थे। ये पूरी वारदात होली से पहले 22 मार्च 2024 की है, जिसके पीछे की वजह वर्चस्व कायम करना था।

बिलासपुर सेंट्रल जेल में गैंगवार की इस घटना में मौसीन खान उर्फ चूहा, आसिफ खान, रफीक खान, इंदीत खान, अब्दुल अयाज खान, अब्दुल मेहताब खान ने मिलकर अल्ताफ खान, फिरोज खान, जलील खान, कमर अली खान पर चम्मच को घिसकर बनाए हथियार से हमला कर दिया। दोनों पक्षों में जमकर मारपीट हो गई। इस घटना में आधा दर्जन बंदी घायल हो गए।

घटना की जानकारी लगते ही एसपी रजनेश सिंह के निर्देश पर सिविल लाइन पुलिस की टीम मामले की जाँच करने जेल पहुँची। इस दौरान जेल अधीक्षक खोमेश मंडावी से प्रतिवेदन लेकर कैदियों से पूछताछ कर उनका बयान दर्ज किया गया। पुलिस ने जाँच के बाद 11 बंदियों के खिलाफ केस दर्ज किया है, जिसमें दोनों पक्षों पर बलवा और जानलेवा हमला करने का अपराध दर्ज किया गया है। वहीं, मारपीट की घटना में घायल 6 बंदियों में से अधिकतर को इलाज के बाद जेल की बैरकों में शिफ्ट कर दिया गया।

पाकिस्तानियों ने लगाया ‘भारत ज़िंदाबाद’ का नारा: भारत ने समुद्री लुटेरों से 23 पाकिस्तानी नागरिकों को बचाया, अरब सागर में ‘सुमेधा’ और ‘त्रिशूल’ ने दिखाया दबदबा

भारतीय नौसेना ने एक पाकिस्तानी जहाज को समुद्री लुटेरों से बचाया है। इसके बाद पाकिस्तानियों ने ‘भारत ज़िंदाबाद’ के नारे भी लगाए। इस पाकिस्तानी जहाज को हाईजैक कर लिया गया था और उसमें 23 पाकिस्तानी नागरिक सवार थे। शुक्रवार (29 मार्च, 2024) को अरब सागर में ये कार्रवाई की गई। उक्त जहाज का नाम ‘FV AI खाम्बर’ है। बचाव गए पाकिस्तानियों ने भारत को धन्यवाद दिया है और भारत के समर्थन में नारेबाजी भी की है।

इतना ही नहीं, भारतीय नौसेना ने 9 हथियारबंद समुद्री लुटेरों को भी गिरफ्तार किया है। उन्होंने ही इस जहाज को हाईजैक किया था। उन्हें अब भारत लाया गया है, जहाँ उनके खिलाफ कार्रवाई की तैयारी की जाएगी। ‘मैरीटाइम एंटी-पायरेसी एक्ट 2022’ के तहत उन पर कार्रवाई की जाएगी। भारतीय नौसेना ने अपने बयान में जानकारी दी है कि उसे ईरानी जहाज के अपहृत होने की सूचना मिली थी। यमन के सोकोत्रा से 90 नॉटिकल मिले की दूरी पर ये घटना हुई थी।

इसके बाद भारतीय नौसेना के 2 जहाजों को मिशन पर भेजा गया। इन जहाजों को अरब सागर में ‘समुद्री सुरक्षा अभियानों’ के लिए तैनात किया गया था। इन्होंने हाईजैक हुए जहाज का पता लगाया। उस पर 9 हथियारबंद समुद्री लुटेरे सवार थे। INS सुमेधा ने शुक्रवार को तड़के सुबह जहाज का पता लगा लिया। इसके बाद INS त्रिशूल भी पहुँचा और दोनों ने मिल कर इस ऑपरेशन को अंजाम दिया। इसके लिए 12 घंटे ऑपरेशन चलाया गया, वो भी अंतरराष्ट्रीय समुद्री कानूनों का पालन करते हुए।

12 घंटे के रणनीतिक ऑपरेशन के दौरान उन समुद्री लुटेरों को कहा गया कि वो आत्म-समर्पण कर दें। इसके बाद 23 अपहृत पाकिस्तानी नागरिकों को सुरक्षित बचाया गया। उनका मेडिकल चेकअप किया गया। इसके बाद जहाज की साफ़-सफाई की गई, ताकि फिर से मछली मारने की गतिविधियाँ शुरू की जा सकें। भारतीय नौसेना ने कहा कि वो हर हाल में समुद्री सुरक्षा के प्रति प्रतिबद्ध है। भारत इससे पहले भी कई देशों के जहाजों को समुद्री लुटेरों से बचा चुका है।