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चीन और यूरोप के हिस्से भी भारत की जद में, अग्नि-5 के सफल परीक्षण पर PM मोदी ने वैज्ञानिकों को दी बधाई: स्वदेशी तकनीक से पूरा हुआ ‘मिशन दिव्यास्त्र’

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार (11 मार्च, 2024) को एक महत्वपूर्ण घोषणा की। उन्होंने DRDO (रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन) के हमारे उन वैज्ञानिकों पर गर्व जताया, जिन्होंने ‘मिशन दिव्यास्त्र’ को सफल कर के दिखाया है। पीएम मोदी ने अपने ट्वीट में लिखा कि स्वदेश में विकसित ‘अग्नि-5’ मिसाइल की पहली फ्लाइट टेस्टिंग सफलतापूर्वक पूरी कर ली गई है। इसके लिए ‘मल्टीपल इंडेपेंडेंटली टार्गेटेबल रीएंट्री व्हीकल’ (MIRV) तकनीक का इस्तेमाल किया गया है।

बता दें कि अग्नि-5 एक से अधिक वॉरहेड्स को तैनात करने में सक्षम है। भारत इसके साथ ही उन चुनिंदा देशों में शामिल हो गया है, जो MIRV तकनीक से लैस हैं। इसका अर्थ है कि एक मिसाइल के जरिए कई लोकेशनों पर वॉरहेड तैनात किए जा सकते हैं। न सिर्फ इस प्रोजेक्ट की डायरेक्टर एक महिला है, बल्कि कई महिला वैज्ञानिकों ने इसमें योगदान दिया है। इस मिसाइल में हाई-एक्यूरेसी सेंसर लगे हैं जिन्हें स्वदेश में ही विकसित किया गया है।

भारत के पास इस क्षमता का होना तकनीक के क्षेत्र में देश के बढ़ते कदम का भी द्योतक है। अग्नि-5 की रेंज 5000 किलोमीटर है। इसकी स्ट्राइकिंग रेंज में लगभग पूरा एशिया है। चीन का उत्तरी इलाका और यूरोप के कुछ हिस्से भी इसकी जद में हैं। वहीं अग्नि-1 से लेकर अग्नि-4 की बात करें तो ये मिसाइलें 700 से लेकर 3500 किलोमीटर की रेंज वाली हैं, जो पहले ही तैनात की जा चुकी हैं। भारत पृथ्वी की सीमा और इसकी सीमा से बाहर तक मार करने वाले बैलिस्टिक मिसाइलों को विकसित करने में लगातार आगे बढ़ रहा है।

ताज़ा तकनीक से भारत अपनी सुरक्षा को सुदृढ़ करने में भी सक्षम होगा। भारत के इस परीक्षण से पाकिस्तान और चीन जैसे पड़ोसी मुल्कों की नींद उड़नी तय है। तकनीक की बात करें तो अंतरिक्ष के क्षेत्र में भी भारत नए आयाम लिख रहा है। चन्द्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर उतरने वाला भारत पहला देश बना, जब चंद्रयान-3 का ‘प्रज्ञान’ रोवर और ‘रोवर और ‘विक्रम’ लैंडर वहाँ उतरा। साथ ही वहाँ से कई सूचनाएँ ISRO के पास आईं। मोदी सरकार के तीसरे कार्यकाल में ये प्रक्रियाएँ और तेज़ होने की उम्मीद है।

पूरे देश में लागू हुआ CAA, मोदी सरकार ने जारी की अधिसूचना: हंगामे की आशंका के बाद उठाए जा रहे पुख्ता कदम, सबसे ज्यादा आवेदन पाकिस्तान से

केंद्र सरकार ने CAA (नागरिकता संशोधन कानून) की अधिसूचना जारी कर दी है। इस कानून को बनाए जाने के 4 वर्षों बाद इसे नोटिफाई किया गया है। अब लोकसभा चुनाव 2024 से कुछ ही सप्ताह पहले इसे अधिसूचित कर दिया गया है, क्योंकि आचार संहिता लागू होने के बाद ये संभव नहीं हो पाता। इसके लिए ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन पोर्टल बनाया गया है, जिसका प्रशिक्षण पहले ही पूरा कर लिया गया है। जिलों के प्रशासन को लॉन्ग टर्म वीजा देने के लिए अधिकृत कर दिया गया है।

इसके लिए अप्लीकेशन भी बड़ी संख्या में आए हैं, जिसमें सबसे ज्यादा पाकिस्तान से हैं। इसके तहत पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बांग्लादेश के अल्पसंख्यकों (हिन्दू, सिख, ईसाई, बौद्ध, जैन और पारसी) को भारत की नागरिकता दी जा सकेगी, जिन पर वहाँ इस्लामी अत्याचार होता रहा है। दिसंबर 2014 तक इनमें से जो पीड़ित भारत में शरणार्थी बन कर रह रहे हैं, उन्हें अब यहाँ की स्थायी नागरिकता मिलेगी। मोदी सरकार के इस कदम के बाद देश में कई जगह विरोध प्रदर्शनों की आशंका है, जिसके लिए पुख्ता कदम उठाए जा रहे हैं।

दिल्ली, असम और पश्चिम बंगाल में सबसे अधिक हंगामे के आसार हैं। जब 2019 में CAA लाया गया था, तब दिल्ली के शाहीन बाग़ में खातूनों ने महीनों धरना दिया था, जिसके कारण राष्ट्रीय राजधानी एक तरह से बंधक बन गई थी और लोगों को आवाजाही में खासी परेशानी हुई थी। इसकी अधिसूचना नहीं जारी की जाती तो इस कानून को फिर से पारित कराना पड़ता। इससे बचने के लिए ये कदम उठाया गया है। ये पहले ही साफ़ किया जा चुका है कि CAA किसी की नागरिकता लेने के लिए नहीं, देने के लिए है।

पश्चिम बंगाल की TMC सरकार और केरल की CPM सरकार पहले ही धमकी दे चुकी है तो वो अपने-अपने राज्यों में CAA को लागू नहीं होने देंगे। ऐसे में ये एक बड़ा मुद्दा आगामी चुनाव के दौरान भी बन सकता है। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कहा है कि इसमें भेदभाव हुआ तो वो इसका विरोध करेंगी। CAA के कार्यान्वयन के लिए इसके नियमों की अधिसूचना को जारी करना आवश्यक था। भारत के पड़ोसी देशों में अल्पसंख्यकों की दयनीय स्थिति है।

‘संदेशखाली की महिलाएँ असली में पीड़ित हैं, हम कैसे मान लें’: TMC से टिकट पाने वाली हिरोइन ने गैंगरेप पीड़ितों पर ही उठाए सवाल

पश्चिम बंगाल की हुगली लोकसभा सीट से टीएमसी की उम्मीदवार बनाई गई रचना बनर्जी ने संदेशखाली की पीड़ित महिलाओं पर ही सवाल उठा दिए हैं। उन्होंने कहा कि हमें कैसे पता चलेगा कि जो महिलाएँ खुद को पीड़ित बता रही हैं, वो वास्तव में पीड़ित ही हैं। रचना बनर्जी ने कहा सोमवार (11 मार्च 2024) को संदेशखाली की पीड़ित महिलाओं पर सवाल उठाते हुए कहा कि जो लोग कैमरों पर इस घटना के बारे में बोल रहे हैं, वो वास्तव में पीड़ित हैं ही नहीं।

रचना बनर्जी ने आगे कहा, “जो नेता लोग संदेशखाली को लेकर बड़ी-बड़ी बातें कर रहे हैं, उन्हें वहाँ की महिलाओं से बात करनी चाहिए। उनकी बात पहले सुनो, फिर बोलो।” इस दौरान जब पत्रकारों ने कहा कि संदेशखाली की पीड़ित महिलाओं ने ही ये आरोप लगाए हैं, तो उन्होंने कहा, “हर कोई ऐसा (यौन उत्पीड़न) नहीं कह रहा है। हमें कैसे पता चलेगा कि जो लोग पीड़ित होने का दावा कर रहे हैं, वही असली पीड़ित हैं।”

संदेशखाली में हिंसा, जमीन पर कब्जों और महिलाओं के उत्पीड़न के मामले में टीएमसी नेताओं की संलिप्तता को भी रचना ने खारिज कर दिया। उन्होंने कहा, “पहले गवाहों के बयानों को वेरिफाई करना होगा और पता चलाना होगा कि क्या ऐसी घटनाएँ (टीएमसी नेताओं द्वारा महिलाओं का यौन उत्पीड़न) वास्तव में हुई भी हैं?” खुद ही अपने मुताबिक उन्होंने फैसला भी सुना दिया, “अगर ऐसी घटनाएँ हुई ही हैं, तो उन्हें ठीक करने के लिए हमारे पास दीदी (ममता बनर्जी) हैं।” वैसे, रचना उन्हीं ममता का संदर्भ दे रही हैं, जिन्होंने उन्हें हुगली लोकसभा सीट से टिकट दिया है और जो खुद इन घटनाओं को छोटी-मोटी घटनाएँ कहकर खारिज कर चुकी हैं।

रचना बनर्जी के बयान पर उनके खिलाफ हुगली में लोकसभा चुनाव लड़ रही बीजेपी की मौजूदा सांसद लॉकेट चटर्जी ने कड़ी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने एक्स पर लिखा, “हुगली से टीएमसी कैंडिडेट ही संदेशखाली में महिला उत्पीड़न के दावों को खारिज कर रही रही हैं, जिससे उनकी विश्वसनीयता पर संदेह पैदा होता है। माताओं, पत्नियों और बेटियों से दुर्व्यवहार की कई गवाही के बावजूद, तृणमूल नेता अज्ञानता का बहाना करते हुए आंखें मूँद रही हैं।”

उन्होंने आगे कहा, “चौंकाने वाली बात ये कि पीड़ितों ने खुद बताया है कि कैसे तृणमूल नेता रात की आड़ में बेखौफ होकर यौन उत्पीड़न जैसे जघन्य कृत्य करते हैं। फिर भी, पार्टी बेशर्मी से किसी भी गलत काम से इनकार करती है। अगर कुछ नहीं हुआ तो शेख शाहजहाँ को निलंबित क्यों किया गया।” उन्होंने टीएमसी को पाखंडी करार दिया और रचना बनर्जी को भी।

अपने ट्वीट में उन्होंने आगे कहा, “बंगाल की मुख्यमंत्री उत्पीड़न को तो स्वीकार करती हैं, लेकिन अपनी पार्टी की भूमिका पर चुप्पी साध लेती हैं। इसकी वजह से पीड़ितों को न्याय नहीं मिल पा रहा है। टीएमसी के शासनकाल में बंगाल की महिलाओं को लगातार उत्पीड़न सहना पड़ता है, जबकि तृणमूल नेता बेशर्मी से मुआवजे के रूप में मात्र 500 रुपये की पेशकश करते हैं। पूरे बंगाल के साथ-साथ हुगली की महिलाएँ भी महिला विरोधी तृणमूल के खिलाफ जवाबी कार्रवाई करने का संकल्प लेती हैं, जिससे उनकी सत्ता से शीघ्र विदाई सुनिश्चित हो सके।”

बता दें कि रचना बनर्जी मशहूर बंगाली टीवी शो ‘दीदी नंबर 1’ की होस्ट हैं। उन्हें टीएमसी ने हुगली लोकसभा सीट से उम्मीदवार बनाया है। खुद ममता बनर्जी 3 मार्च को उनके शो में बतौर मेहमान नजर आई थी।

ये समाचार मूल रूप से अंग्रेजी में लिखा गया है, मूल समाचार पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें।

एक महीने से कोमा में है ए़डल्ट फिल्मों की हिरोइन एमिली विलीस … हालत गंभीर: 2 महीने में जा चुकी है 3 पोर्न स्टार की जान

पिछले कुछ दिनों से एडल्ट फिल्मों की हिरोइनों को लेकर बहुत सी चौंकाने वाली खबरें आ रही हैं। हाल ही में एक स्टार सोफिया लियोनी का निधन हुआ था और अब पता चला कि एक और एडल्ट स्टार एमिली विलिस वेंटिलेटर पर जिंदगी और मौत के बीच पिछले एक महीने से लड़ रही हैं।

एमिली को पिछले महीने हार्ट अटैक आया था। उसके बाद से वो अब तक कोमा में है और एक भी बार उन्होंने अपनी आँख नहीं खोली है। उनकी हालत बेहद गंभीर है। बताया जा रहा है कि एमिली को हार्ट अटैक रिहैब सेंटर में रहने के दौरान आया।

पहले कहा गया कि ड्रग ओवरडोज के कारण उन्हें ये अटैक आया। लेकिन उनके पिता ने कहा कि ये बात गलत है और टॉक्सीलॉजी रिपोर्ट नेगेटिव आई है। एमिली के पिता ने उनके कोमा में होने की बात की पुष्टि की है।

गौरतलब है कि एमिली ने एडल्ट इंडस्ट्री को दो साल पहले अलविदा कह दिया था लेकिन वो अपने फैंस से लगातार सोशल मीडिया के जरिए जुड़ी हुईं थीं। उनके फैंस उनके जल्द ठीक होने की कामना कर रहे हैं। वहीं कुछ लोग उनकी हालत देखकर ये भी कह रहे हैं कि एमिली को कुछ भी हो सकता है।

बता दें कि इससे पहले पॉर्न स्टार सोफिया लियोनी के निधन की खबरों ने एडल्ट इंडस्ट्री को हिलाकर रख दिया था। अमेरिका की 26 साल की एडल्ट स्टार 1 मार्च को मृत पाई गई थीं। उससे पहले काग्ने लिन कार्टर के सुसाइड की खबरों ने सबको झकझोर दिया था। काग्ने की उम्र भी मात्र 25 ही रही होगी जब उन्होंने आत्महत्या की। इसी तरह जनवरी में जैसे जेन भी ओकलाहोमा में मृत मिलीं थीं।

संदेशखाली पर ममता बनर्जी सरकार को सुप्रीम कोर्ट से झटका, CBI जाँच के खिलाफ डाली थी याचिका: हाईकोर्ट ने कहा था – बंगाल पुलिस ने शाहजहाँ शेख को बचाया

सुप्रीम कोर्ट से पश्चिम बंगाल सरकार को झटका लगा है। मामला संदेशखाली में महिलाओं के यौन शोषण से जुड़ा है। इस मामले में सत्ताधारी TMC (तृणमूल कॉन्ग्रेस) के नेता शाहजहाँ शेख को गिरफ्तार किया जा चुका है, जिसे बचाने के लिए राज्य की व्यवस्था ने दिन-रात एक कर दिया था। कलकत्ता उच्च न्यायालय ने इस मामले को CBI को सौंपने का आदेश दिया था। TMC सरकार इस आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट पहुँच गई, लेकिन वहाँ भी उसे निराशा हाथ लगी है।

सुप्रीम कोर्ट ने कलकत्ता हाईकोर्ट के आदेश को बरकरार रखा है, इसके खिलाफ फैसले देने से मना कर दिया है। हालाँकि, सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल सरकार और पुलिस की कार्यप्रणाली पर उच्च न्यायालय द्वारा टिप्पणी को हटाने के निवेदन पर सहमति जताई। जस्टिस BR गवई और संदीप मेहता ने इस स्पेशल लीव पेटिशन पर सुनवाई की। कलकत्ता हाईकोर्ट ने मुख्य अभियुक्त शाहजहाँ शेख को भी CBI की कस्टडी में भेजने का आदेश दिया है। हाईकोर्ट ने शाहजहाँ शेख के राजनीतिक प्रभाव को लेकर टिप्पणी की थी।

हाईकोर्ट ने न सिर्फ पश्चिम बंगाल पुलिस को पक्षपाती बताया था बल्कि ये भी कहा था कि जाँच में देरी के लिए पूरा प्रयास किया जा रहा है ताकि मुख्य अभियुक्त को बचाया जा सके। उस समय शाहजहाँ शेख 50 दिनों से फरार था। सुप्रीम कोर्ट में हुई ताज़ा सुनवाई में TMC सरकार की तरफ से अभिषेक मनु सिंघवी और जयदीप दत्ता ने जिरह की। वहीं के वकील ने बताया कि बंगाल पुलिस ने शाहजहाँ शेख को गिरफ़्तारी से बचने और भगाने में मदद की।

सॉलिसिटर जनरल ने कहा कि हाईकोर्ट की टिप्पणी में तथ्य हैं, लेकिन विवाद को खत्म करने के लिए उसे डिलीट किया जा सकता है। इस पर हाईकोर्ट ने कहा कि टिप्पणी हटाने पर कोई आपत्ति नहीं है, लेकिन आदेश से कोई छेड़छाड़ नहीं की जाएगी। शाहजहाँ शेख नॉर्थ 24 परगना में जिला परिषद का कर्माध्यक्ष भी है। उसके खिलाफ संदेशखाली में 42 से भी अधिक मामले दर्ज हैं। पूरे देश में संदेशखाली के महिलाओं की पीड़ा पर चर्चा हुई।

आदेश कोर्ट का… लखनऊ में हमला पुलिस वालों पर: हबिदुल, अरशद, नौशाद, फज़ल, सैफ, आदिल, रेहान पर FIR, UP पुलिस के टारगेट पर अज्ञात लोग भी

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में रविवार (10 मार्च 2024) को अतिक्रमण हटाने गए प्रशासनिक अधिकारियों पर हमला किया गया। प्रशासन द्वारा यह कार्रवाई हाईकोर्ट के आदेश पर की जा रही थी। पत्थरबाजी में नाबालिग और महिलाओं के भी शामिल होने की आशंका जताई गई है। इस मामले में पुलिस ने 7 नामजदों के खिलाफ FIR दर्ज कर ली है। इनके नाम हबिदुल, अरशद वारसी, मो. नौशाद, फज़ल अहमद, मो. सैफ खान, आदिल इस्तियाक और रेहान अली हैं। इसके अलावा कई अन्य अज्ञात हमलावरों का भी FIR में जिक्र है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक यह मामला लखनऊ के थानाक्षेत्र महानगर का है। यहाँ LDA (लखनऊ विकास प्राधिकरण) के स्टाफ संजीव कुमार ने 10 मार्च (रविवार) को थाने में शिकायत दी। घटना के बारे में पुलिस ने बताया कि न्यायालय के आदेश पर अकबरनगर में अतिक्रमण विरोधी कार्रवाई अमल में लाई जा रही थी। इसमें खासतौर से 3 बड़े मकानों को चिन्हित किया गया था। पहले 2 मकान गिराने के बाद बुलडोजर तीसरे अवैध मकान को गिराने में जुटा हुआ था। इसी दौरान एक 4 मंजिला बिल्डिंग का स्लैब नीचे गिरा।

तभी कुछ लोगों ने अफवाह फैलानी शुरू कर दी। यह अफवाह मलबे में कई लोगों के दब जाने को लेकर उड़ाई गई। इसके बाद अचानक घरों से कई लोग निकल आए। आरोप है कि इन सभी ने न सिर्फ लखनऊ विकास प्राधिकरण के स्टाफ बल्कि उनके साथ खड़े पुलिसकर्मियों पर पत्थरबाजी की।

हमलावरों के हाथों में डंडे भी थे। आशंका जताई जा रही है कि कुछ महिलाएँ और नाबालिग बच्चे भी उपद्रव में शामिल थे। इन दंगाइयों में कुछ ने रुमाल से अपने चेहरे ढँक रखे थे। हालाँकि प्रशासन की सतर्कता से हमले में कोई घायल नहीं हुआ। पुलिस ने अफवाह उड़ाने वालों को कड़ी चेतावनी दी है।

घटना की सूचना मिलते ही अतिरिक्त फ़ोर्स मौके पर पहुँची और हालात को काबू किया। थोड़े समय के व्यवधान के बाद फिर से अतिक्रमण को हटाने का काम शुरू कर दिया गया। हमले में पुलिस के 2 वाहनों और LDA की पोकलैंड मशीन को नुकसान पहुँचा है। इन सभी आरोपितों पर IPC की धारा 147, 186, 336, 332, 353 और 427 के साथ सार्वजानिक संपत्ति अधिनियन की धारा 2 व 3 व दंड विधि अधिनियम की धारा 7 के तहत कार्रवाई की गई है।

घटना के वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हुए हैं। इन वीडियो में पत्थरबाजी करती उन्मादी भीड़ पुलिसकर्मियों को गालियाँ दे रही है।

LDA के स्टाफ संजीव कुमार की शिकायत पर हबिदुल,अरशद वारसी, मो. नौशाद, फज़ल अहमद, मो. सैफ खान, आदिल इस्तियाक और रेहान अली को नामजद करने के साथ सैकड़ों अन्य अज्ञात लोग आरोपित किए गए है। आरोपितों की तलाश में पुलिस दबिश दे रही है। CCTV फुटेज के अलावा अन्य इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों के आधार पर अज्ञात हमलावरों को भी चिन्हित करने के प्रयास किए जा रहे हैं।

बढ़ रहे हैं पुलिस पर उन्मादी हमले

गौरतलब है कि पिछले कुछ समय से एक खास मकसद वाली भीड़ द्वारा पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों पर हमलों की संख्या में तेजी आई है। ताजा मामला दिल्ली के इंद्रलोक का है। यहाँ जबरन सड़क जाम कर के नमाज़ पढ़ रहे लोगों को बल प्रयोग कर के उठाने के बाद एक उन्मादी भीड़ ने पुलिस पर हमले का प्रयास किया था।

लखनऊ की ही तरह घटना हल्द्वानी में हुई थी। तब फरवरी 2024 में अब्दुल मलिक द्वारा किए गए अतिक्रमण को हटाने गए नगर निगम और पुलिस स्टाफ पर भीषण पत्थरबाजी की गई थी। इस हमले में कई पुलिसकर्मियों को चोटें आईं थीं।

CAA पर आज गृह मंत्रालय कर देगा नोटिफिकेशन जारी: मीडिया रिपोर्ट्स में सूत्रों से दावा, अमित शाह ने कहा था- ये कानून लागू होकर रहेगा

सरकारी सूत्रों के हवाले से मीडिया में एक बड़ी जानकारी सामने आ रही है। कई पत्रकारों और मीडिया संस्थानों ने सूत्रों से कहा है कि आज रात में नागरिकता संशोधन कानून को लेकर अधिसूचना जारी हो सकती है। इंडिया टुडे के पत्रकार शिव अरूर ने इस संबंध में ट्वीट किया है।

वहीं टाइम्स ऑफ इंडिया की भारती जैन ने भी ब्रेकिंग न्यूज के नाम पर अपने ट्वीट में कहा है कि गृह मंत्रालय आज नागरिकता संशोधन अधिनियम (सीएए) नियमों को अधिसूचित कर सकता है।

भारती जैन का ट्वीट का स्क्रीनशॉट

समाचार एजेंसी एएनआई ने भी इस संबंध में ट्वीट किया है। उन्होंने भी सूत्रों के हवाले से कहा है कि केंद्रीय गृह मंत्रालय आज नागरिकता संशोधन अधिनियम (सीएए) नियमों को अधिसूचित कर सकता है।

जानकारी ये भी सामने आ रही है कि गृह सचिव द्वारा सभी मुख्य सचिवों (सीएस) और डीजीपी को एक पत्र भेजा गया है। उत्तर प्रदेश के डीजीपी ने कथित तौर पर शाम 6 बजे एक बैठक बुलाई है और हरियाणा के डीजीपी और सीएस ने शाम 5:30 बजे एक बैठक बुलाई है। इसी तरह रिपब्लिक टीवी के मुताबिक, बिहार के डीजीपी और सीएस ने शाम 6:45 बजे और महाराष्ट्र सरकार ने शाम 6 बजे बैठक बुलाई है।

बता दें कि पिछले दिनों गृह मंत्री ने भी रिपब्लिक भारत द्वारा आयोजित कार्यक्रम में कहा था कि सीएए देश का कानून है। पत्थर की लकीर है। ये लागू होकर रहेगा। ये इस चुनाव से पहले लागू होगा। इसे कोई नहीं रोक सकता है।

उन्होंने कहा था, “सीएए कानून कोई नई बात नहीं है। कॉन्ग्रेस पार्टी कई चीजों को भूल गई। वोटबैंक की लालच में कई चीजें भूल गई। सीएए संविधान सभा का वादा था। देश का जब विभाजन हुआ, तब पाकिस्तान और अब के बांग्लादेश से लाखों-करोड़ो लोग भारत आ रहे थे, तब कॉन्ग्रेस के लोगों ने ही देश से वादा किया था कि आप धैर्य रखिए, देश आपका स्वागत करेगा। लेकिन कॉन्ग्रेस के लोग वोट बैंक के चक्कर में सबकुछ भूल गए। अगर भारत अपने 15 अगस्त 1947 के वादे को याद नहीं रखता है, उन्हें नागरिकता नहीं देता है, तो ये विश्वासघात होगा। हमारी सरकार उनको नागरिकता भी देगी, अधिकार भी देगी।”

गैस सिलेंडर के दाम 100 रुपए कम करने से नाराज हो गया कॉन्ग्रेसी नेता, बोला – ‘PM मोदी को चप्पल से मारूँगा’

कर्नाटक में एक कॉन्ग्रेसी नेता नें मंच से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लिए आग उगली है। कॉन्ग्रेस नेता जीएस मंजूनाथ ने मंच से कहा कि मैं पीएम मोदी को चप्पल से मारूँगा। जीएस मंजूनाथ ने महिला दिवस के मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा गैस सिलेंडर के दामों को 100 रुपए कम करने से घोषणा पर नाराजगी जताई है। जीएस मंजूनाथ ने कहा कि चुनाव के समय ये कदम उठाने की क्या जरूरत थी? मंजूनाथ जब चित्रदुर्ग जिले में मंच जहर उगल रहा था, तो कॉन्ग्रेस के अन्य नेता मुस्करा रहे थे।

कांग्रेस के जिला स्तर के नेता जीएस मंजूनाथ ने चित्रदुर्ग में एक रैली को संबोधित करते हुए यह टिप्पणी की। कर्नाटक बीजेपी ने मंजूनाथ के बयान को एक्स पर शेयर किया, जिसमें वो बोल रहा है, “चुनाव आ गए हैं और सिलेंडर की कीमतें 100 रुपये कम हो गई हैं। अगर मैंने उसे देखा होता, तो अपने पैर में जो कुछ भी (चप्पल-जूता) होता, उसे निकाल लेता और उसे मार देता। अब आप ऐसा क्यों कर रहे हैं? इस देश के नागरिक के रूप में हमें यह पूछने की जरूरत है। आप सभी को पूछना चाहिए। हमें सीखना चाहिए। कॉन्ग्रेस नहीं सुनेगी, जद (एस) नहीं सुनेगी और बीजेपी भी पहली बार में नहीं सुनेगी।”

बीजेपी ने वीडियो शेयर करते हुए लिखा, “प्रधानमंत्री @narendramodi देश के 140 करोड़ लोगों के नेता हैं। पूरी दुनिया प्रधानमंत्री की नेतृत्व शैली की प्रशंसक है। लेकिन, जब @INCIndia के लोग हमारे प्रधानमंत्री को देखते हैं, तो पेट में मरोड़े उठने लगती हैं। कॉन्ग्रेस के अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने जो शुरू किया था, कॉन्ग्रेस के अनफिट लेबर वेलफेयर बोर्ड के उपाध्यक्ष जी. एस. मंजूनाथ भी वही कर रहे हैं और प्रधानमंत्री का अपमान कर रहे हैं। यही कर्नाटक कॉन्ग्रेस की संस्कृति है। कॉन्ग्रेस नेताओं में राज्य के मुख्यमंत्री से सवाल करने की हिम्मत नहीं है, भले ही राज्य सूखे के कारण संकट में है। कावेरी का पानी तमिलनाडु को भेजा जा रहा है, तो कीमतें बढ़ाकर कन्नड़ लोगों की जेब काटी जा रही है। कर्नाटक कॉन्ग्रेस के नेता अपनी पार्टी से सवाल पूछने की हिम्मत करें और अपमान करने वाली अपनी घटिया मानसिकता को छोड़ें।”

बता दें कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर सिलेंडर की कीमतों में 100 रुपए की कटौती की है। पीएम मोदी ने कहा कि मैं जब भी महिलाओं की सशक्तिकरण की बात करता हूँ, तो कॉन्ग्रेस मुझे निशाना बनाने लगती है।

कॉन्ग्रेस नेता जीएस मंजूनाथ का बयान पीएम मोदी की उस घोषणा के तीन दिन बाद आई है।

होटल से लेकर सड़क… कहीं नहीं मिल रहा अच्छा गोबी मंचूरियन: कर्नाटक में लगा बैन, मंत्री बोले- अगर रंग इस्तेमाल किया तो कार्रवाई होगी

कर्नाटक में रंगीन फूड आइटम पर राज्य सरकार ने सख्ती दिखाते हुए कॉटन कैंडी और गोबी मंचूरियन में इस्तेमाल होने वाले फूड कलरिंग एजेंट रोडामाइन-बी को बैन कर दिया है। सरकार ने कहा है कि अगर राज्य में कोई भी इस कलरिंग एजेंट ‘रोडामाइन-बी’ को इस्तेमाल करते हुए पाया गया तो उसके खिलाफ खाद्य सुरक्षा अधिनियम के तहत कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

इससे पहले गोवा और तमिलनाडु में भी ऐसा प्रतिबंध लगाया जा चुका है और अब कर्नाटक ने ऐसा फैसला लिया है। राज्य के स्वास्थ्य मंत्री दिनेश गुंडू ने प्रेस कॉन्फ्रेंस करते हुए इस संबंध में बताया कि आर्टिफिशियल रंग पड़े खानों के सैंपल की जाँच में खराब गुणवत्ता का पता चला जिससे लोगों की सेहत पर बुरा असर पड़ता है।

उन्होंने डेटा देते हुए कहा कि 171 गोबी मंचूरियन की जाँच हुई थी इनमें से केवल 64 सुरक्षित पाए गए जबकि 107 असुरक्षित। इसी तरह 25 कॉटन कैंडी के नमूने, जाँच के लिए लाए गए जिनमें से केवल 10 सुरक्षित पाए गए और बाकी 15 असुरक्षित।

उन्होंने जानकारी दी कि खाद्य पदार्थों की जाँच के लिए नमूने होटलों से लिए गए थे, सड़क किनारे दुकान से लिए गए थे। इन्हीं में से कई सैंपल असुरक्षित पाए गए। इनमें टार्ट्राजिन, कार्मोइसिन, सनसेट येलो और रोडामाइन-1बी जैसे कृत्रिम रंग मिले। इनका प्रयोग खाद्य पदार्थों को अधिक लाल दिखाने के लिए उपयोग होता है जिससे वो ज्यादा फ्राई और मसालेदार दिखाई दें।

इस संबंध में राज्य खाद्य सुरक्षा ने पूरे राज्य के लिए एक आदेश जारी किया है। इस आदेश में सख्ती के साथ कहा गया है कि गोभी मंचूरियन और कॉटन कैंडी में कोई भी आर्टिफिशियल रंग न डाला जाए। अगर कोई ऐसा करता पकड़ा गया तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी।

‘भोजशाला परिसर का हो सर्वे, 6 हफ्ते में दो रिपोर्ट’: जिस मंदिर को ‘कमाल मौला मस्जिद’ बताते हैं मुस्लिम, उसे लेकर हाईकोर्ट का आदेश – आधुनिक तकनीक से पता लगाओ क्या है ये

इंदौर स्थित मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय की खंडपीठ ने धार स्थित भोजशाला के ASI (भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण) सर्वे की अनुमति दे दी है। अधिवक्ता विष्णु शंकर जैन ने इसकी जानकारी दी, जो ज्ञानवापी और मथुरा की लड़ाई भी लड़ रहे हैं। भोजशाला एक हिन्दू मंदिर है, जिसे मुस्लिम पक्ष ‘कमाल मौला मस्जिद’ बताता है। अब ASI इसका पूर्ण वैज्ञानिक सर्वे और खुदाई करेगी। इसके लिए आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल किया जाएगा। भोजशाला परिसर और इसके चारों तरफ 50 मीटर के क्षेत्र में ये सर्वे होगा।

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा है कि कार्बन डेटिंग मेथड का इस्तेमाल कर के सर्वे में इस संरचना की उम्र का पता लगाया जाए। जमीन के भीतर और बाहर जो कई संरचनाएँ हैं, उन सबका सर्वे होगा। दीवारों, स्तम्भों, फर्श, छतों और इसके गर्भगृह को भी सर्वे में शामिल किया जाएगा। ASI के वरिष्ठ अधिकारी इस सर्वे में शामिल होंगे और एक विस्तृत रिपोर्ट तैयार करेंगे। हाईकोर्ट ने एक्सपर्ट कमिटी द्वारा तैयार होने के बाद रिपोर्ट को पेश किए जाने का आदेश दिया है।

मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय ने कहा है कि ASI के डायरेक्टर जनरल/एडिशनल DG खुद मौजूद रह कर रिपोर्ट सौंपें। इसके लिए 6 हफ्ते का समय दिया गया है। एक्सपर्ट कमिटी में दोनों समुदायों के अधिकारियों को रखे जाने की कोशिश करने के लिए भी आदेश में कहा गया है। जो दरवाजे बंद हैं, उन्हें खोला जाएगा। अंदर जो मूर्तियाँ या अन्य वस्तुएँ मिलेंगी, उन सबके फोटोग्राफ्स लिए जाएँगे। कार्बन डेटिंग के जरिए उन सबकी उम्र का पता लगाया जाएगा।

साथ ही हाईकोर्ट ने ये भी आदेश दिया है कि ये सर्वे किसी भी संरचना, वस्तुओं या मूर्तियों को नुकसान नुकसान पहुँचाए बिना अंजाम दिया जाए। इसके जरिए इस पूरे परिसर की वास्तविक प्रकृति और स्वभाव का पता लगाया जाए। हिंदू संगठन की माँग है कि भोजशाला परिसर में देवी सरस्वती (वाग्देवी) की मूर्ति स्थापित की जाए। ‘भोजशाला’ ज्ञान और बुद्धि की देवी माता सरस्वती को समर्पित एक अनूठा और ऐतिहासिक मंदिर है। इसकी स्थापना राजा भोज ने की थी। राजा भोज (1000-1055 ई.) परमार राजवंश के सबसे बड़े शासक थे। वे शिक्षा एवं साहित्य के अनन्य उपासक भी थे। उन्होंने ही धार में इस महाविद्यालय की स्थापना की थी, जिसे बाद में भोजशाला के रूप में जाना जाने लगा। यहाँ दूर-दूर से छात्र पढ़ाई करने के लिए आते थे।

मुस्लिम जिसे ‘कमाल मौलाना मस्जिद’ कहते हैं, उसे मुस्लिम आक्रांताओं ने तोड़कर बनवाया है। अभी भी इसमें भोजशाला के अवशेष स्पष्ट दिखते हैं। मस्जिद में उपयोग किए गए नक्काशीदार खंभे वही हैं, जो भोजशाला में उपयोग किए गए थे। मस्जिद की दीवारों से चिपके उत्कीर्ण पत्थर के स्लैब में अभी भी मूल्यवान नक्काशी किए हुए हैं। इसमें प्राकृत भाषा में भगवान विष्णु के कूर्मावतार के बारे में दो श्लोक लिखे हुए हैं। एक अन्य अभिलेख में संस्कृति व्याकरण के बारे में जानकारी दी गई है।