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गैस सिलेंडर के दाम 100 रुपए कम करने से नाराज हो गया कॉन्ग्रेसी नेता, बोला – ‘PM मोदी को चप्पल से मारूँगा’

कर्नाटक में एक कॉन्ग्रेसी नेता नें मंच से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लिए आग उगली है। कॉन्ग्रेस नेता जीएस मंजूनाथ ने मंच से कहा कि मैं पीएम मोदी को चप्पल से मारूँगा। जीएस मंजूनाथ ने महिला दिवस के मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा गैस सिलेंडर के दामों को 100 रुपए कम करने से घोषणा पर नाराजगी जताई है। जीएस मंजूनाथ ने कहा कि चुनाव के समय ये कदम उठाने की क्या जरूरत थी? मंजूनाथ जब चित्रदुर्ग जिले में मंच जहर उगल रहा था, तो कॉन्ग्रेस के अन्य नेता मुस्करा रहे थे।

कांग्रेस के जिला स्तर के नेता जीएस मंजूनाथ ने चित्रदुर्ग में एक रैली को संबोधित करते हुए यह टिप्पणी की। कर्नाटक बीजेपी ने मंजूनाथ के बयान को एक्स पर शेयर किया, जिसमें वो बोल रहा है, “चुनाव आ गए हैं और सिलेंडर की कीमतें 100 रुपये कम हो गई हैं। अगर मैंने उसे देखा होता, तो अपने पैर में जो कुछ भी (चप्पल-जूता) होता, उसे निकाल लेता और उसे मार देता। अब आप ऐसा क्यों कर रहे हैं? इस देश के नागरिक के रूप में हमें यह पूछने की जरूरत है। आप सभी को पूछना चाहिए। हमें सीखना चाहिए। कॉन्ग्रेस नहीं सुनेगी, जद (एस) नहीं सुनेगी और बीजेपी भी पहली बार में नहीं सुनेगी।”

बीजेपी ने वीडियो शेयर करते हुए लिखा, “प्रधानमंत्री @narendramodi देश के 140 करोड़ लोगों के नेता हैं। पूरी दुनिया प्रधानमंत्री की नेतृत्व शैली की प्रशंसक है। लेकिन, जब @INCIndia के लोग हमारे प्रधानमंत्री को देखते हैं, तो पेट में मरोड़े उठने लगती हैं। कॉन्ग्रेस के अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने जो शुरू किया था, कॉन्ग्रेस के अनफिट लेबर वेलफेयर बोर्ड के उपाध्यक्ष जी. एस. मंजूनाथ भी वही कर रहे हैं और प्रधानमंत्री का अपमान कर रहे हैं। यही कर्नाटक कॉन्ग्रेस की संस्कृति है। कॉन्ग्रेस नेताओं में राज्य के मुख्यमंत्री से सवाल करने की हिम्मत नहीं है, भले ही राज्य सूखे के कारण संकट में है। कावेरी का पानी तमिलनाडु को भेजा जा रहा है, तो कीमतें बढ़ाकर कन्नड़ लोगों की जेब काटी जा रही है। कर्नाटक कॉन्ग्रेस के नेता अपनी पार्टी से सवाल पूछने की हिम्मत करें और अपमान करने वाली अपनी घटिया मानसिकता को छोड़ें।”

बता दें कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर सिलेंडर की कीमतों में 100 रुपए की कटौती की है। पीएम मोदी ने कहा कि मैं जब भी महिलाओं की सशक्तिकरण की बात करता हूँ, तो कॉन्ग्रेस मुझे निशाना बनाने लगती है।

कॉन्ग्रेस नेता जीएस मंजूनाथ का बयान पीएम मोदी की उस घोषणा के तीन दिन बाद आई है।

होटल से लेकर सड़क… कहीं नहीं मिल रहा अच्छा गोबी मंचूरियन: कर्नाटक में लगा बैन, मंत्री बोले- अगर रंग इस्तेमाल किया तो कार्रवाई होगी

कर्नाटक में रंगीन फूड आइटम पर राज्य सरकार ने सख्ती दिखाते हुए कॉटन कैंडी और गोबी मंचूरियन में इस्तेमाल होने वाले फूड कलरिंग एजेंट रोडामाइन-बी को बैन कर दिया है। सरकार ने कहा है कि अगर राज्य में कोई भी इस कलरिंग एजेंट ‘रोडामाइन-बी’ को इस्तेमाल करते हुए पाया गया तो उसके खिलाफ खाद्य सुरक्षा अधिनियम के तहत कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

इससे पहले गोवा और तमिलनाडु में भी ऐसा प्रतिबंध लगाया जा चुका है और अब कर्नाटक ने ऐसा फैसला लिया है। राज्य के स्वास्थ्य मंत्री दिनेश गुंडू ने प्रेस कॉन्फ्रेंस करते हुए इस संबंध में बताया कि आर्टिफिशियल रंग पड़े खानों के सैंपल की जाँच में खराब गुणवत्ता का पता चला जिससे लोगों की सेहत पर बुरा असर पड़ता है।

उन्होंने डेटा देते हुए कहा कि 171 गोबी मंचूरियन की जाँच हुई थी इनमें से केवल 64 सुरक्षित पाए गए जबकि 107 असुरक्षित। इसी तरह 25 कॉटन कैंडी के नमूने, जाँच के लिए लाए गए जिनमें से केवल 10 सुरक्षित पाए गए और बाकी 15 असुरक्षित।

उन्होंने जानकारी दी कि खाद्य पदार्थों की जाँच के लिए नमूने होटलों से लिए गए थे, सड़क किनारे दुकान से लिए गए थे। इन्हीं में से कई सैंपल असुरक्षित पाए गए। इनमें टार्ट्राजिन, कार्मोइसिन, सनसेट येलो और रोडामाइन-1बी जैसे कृत्रिम रंग मिले। इनका प्रयोग खाद्य पदार्थों को अधिक लाल दिखाने के लिए उपयोग होता है जिससे वो ज्यादा फ्राई और मसालेदार दिखाई दें।

इस संबंध में राज्य खाद्य सुरक्षा ने पूरे राज्य के लिए एक आदेश जारी किया है। इस आदेश में सख्ती के साथ कहा गया है कि गोभी मंचूरियन और कॉटन कैंडी में कोई भी आर्टिफिशियल रंग न डाला जाए। अगर कोई ऐसा करता पकड़ा गया तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी।

‘भोजशाला परिसर का हो सर्वे, 6 हफ्ते में दो रिपोर्ट’: जिस मंदिर को ‘कमाल मौला मस्जिद’ बताते हैं मुस्लिम, उसे लेकर हाईकोर्ट का आदेश – आधुनिक तकनीक से पता लगाओ क्या है ये

इंदौर स्थित मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय की खंडपीठ ने धार स्थित भोजशाला के ASI (भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण) सर्वे की अनुमति दे दी है। अधिवक्ता विष्णु शंकर जैन ने इसकी जानकारी दी, जो ज्ञानवापी और मथुरा की लड़ाई भी लड़ रहे हैं। भोजशाला एक हिन्दू मंदिर है, जिसे मुस्लिम पक्ष ‘कमाल मौला मस्जिद’ बताता है। अब ASI इसका पूर्ण वैज्ञानिक सर्वे और खुदाई करेगी। इसके लिए आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल किया जाएगा। भोजशाला परिसर और इसके चारों तरफ 50 मीटर के क्षेत्र में ये सर्वे होगा।

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा है कि कार्बन डेटिंग मेथड का इस्तेमाल कर के सर्वे में इस संरचना की उम्र का पता लगाया जाए। जमीन के भीतर और बाहर जो कई संरचनाएँ हैं, उन सबका सर्वे होगा। दीवारों, स्तम्भों, फर्श, छतों और इसके गर्भगृह को भी सर्वे में शामिल किया जाएगा। ASI के वरिष्ठ अधिकारी इस सर्वे में शामिल होंगे और एक विस्तृत रिपोर्ट तैयार करेंगे। हाईकोर्ट ने एक्सपर्ट कमिटी द्वारा तैयार होने के बाद रिपोर्ट को पेश किए जाने का आदेश दिया है।

मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय ने कहा है कि ASI के डायरेक्टर जनरल/एडिशनल DG खुद मौजूद रह कर रिपोर्ट सौंपें। इसके लिए 6 हफ्ते का समय दिया गया है। एक्सपर्ट कमिटी में दोनों समुदायों के अधिकारियों को रखे जाने की कोशिश करने के लिए भी आदेश में कहा गया है। जो दरवाजे बंद हैं, उन्हें खोला जाएगा। अंदर जो मूर्तियाँ या अन्य वस्तुएँ मिलेंगी, उन सबके फोटोग्राफ्स लिए जाएँगे। कार्बन डेटिंग के जरिए उन सबकी उम्र का पता लगाया जाएगा।

साथ ही हाईकोर्ट ने ये भी आदेश दिया है कि ये सर्वे किसी भी संरचना, वस्तुओं या मूर्तियों को नुकसान नुकसान पहुँचाए बिना अंजाम दिया जाए। इसके जरिए इस पूरे परिसर की वास्तविक प्रकृति और स्वभाव का पता लगाया जाए। हिंदू संगठन की माँग है कि भोजशाला परिसर में देवी सरस्वती (वाग्देवी) की मूर्ति स्थापित की जाए। ‘भोजशाला’ ज्ञान और बुद्धि की देवी माता सरस्वती को समर्पित एक अनूठा और ऐतिहासिक मंदिर है। इसकी स्थापना राजा भोज ने की थी। राजा भोज (1000-1055 ई.) परमार राजवंश के सबसे बड़े शासक थे। वे शिक्षा एवं साहित्य के अनन्य उपासक भी थे। उन्होंने ही धार में इस महाविद्यालय की स्थापना की थी, जिसे बाद में भोजशाला के रूप में जाना जाने लगा। यहाँ दूर-दूर से छात्र पढ़ाई करने के लिए आते थे।

मुस्लिम जिसे ‘कमाल मौलाना मस्जिद’ कहते हैं, उसे मुस्लिम आक्रांताओं ने तोड़कर बनवाया है। अभी भी इसमें भोजशाला के अवशेष स्पष्ट दिखते हैं। मस्जिद में उपयोग किए गए नक्काशीदार खंभे वही हैं, जो भोजशाला में उपयोग किए गए थे। मस्जिद की दीवारों से चिपके उत्कीर्ण पत्थर के स्लैब में अभी भी मूल्यवान नक्काशी किए हुए हैं। इसमें प्राकृत भाषा में भगवान विष्णु के कूर्मावतार के बारे में दो श्लोक लिखे हुए हैं। एक अन्य अभिलेख में संस्कृति व्याकरण के बारे में जानकारी दी गई है।

5 दिन बाद मिली 16 साल की हिंदू लड़की की लाश, असम में गिरफ्तार सरफराज हुसैन के फाँसी की माँग: हत्या के साथ लव जिहाद और रेप का भी आरोप

असम के बोंगाइगाँव में शुक्रवार (8 मार्च 2024) को 16 वर्षीया एक नाबालिग लड़की का संदिग्ध परिस्थितियों में शव मिला है। रेल बाजार के पास मिले इस शव की पहचान एक हिन्दू लड़की के तौर पर हुई, जो अपने घर से 5 मार्च 2024 से लापता चल रही थी। मृतका के परिजन इसे लव जिहाद बताते हुए सरफराज नाम के युवक पर हत्या का आरोप लगा रहे हैं। घटना के विरोध में स्थानीय निवासियों ने सड़क और रेलवे ट्रैक पर उतर कर प्रदर्शन किया है। हालात को काबू रखने के लिए अतिरिक्त पुलिस बल तैनात कर दिया गया है। पुलिस ने केस दर्ज कर के सरफराज हुसैन को गिरफ्तार कर लिया है। मामले की जाँच की जा रही है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक यह घटना बोंगाईगांव के महाबीरस्तान क्षेत्र की है। यहाँ रहने वाली 16 वर्षीया एक हिन्दू लड़की 5 मार्च 2024 को बाथरूम जाने के लिए बता कर घर से निकली। बताया जा रहा है वह वापस लौट कर नहीं आई तो उसके परिजनों ने खोजबीन शुरू की। जब लड़की किसी भी जान-पहचान वाले के यहाँ नहीं मिली, तो थक-हार कर घर वालों ने 6 मार्च को पुलिस में पीड़िता की गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज करवाई। पुलिस ने केस दर्ज कर के लड़की की तलाश शुरू कर दी।

लगभग 3 दिनों की तलाश के बावजूद लड़की को खोजा नहीं जा सका। इस बीच शुक्रवार को पुलिस को बोंगाईगाँव रेल बाजार के पास एक लड़की के शव की सूचना मिली। पुलिस मौके पर पहुँची और रेल ट्रैक के किनारे पड़े शव को कब्ज़ा में लिया। लाश की पहचान करवाई गई तो वह 5 मार्च को महाबीरस्तान क्षेत्र से गायब हुई पीड़िता निकली। पीड़िता के परिजनों ने सरफराज नाम के युवक पर अपनी बेटी को प्यार के जाल में फँसाने और बाद में रेप कर के हत्या कर देने का आरोप लगाया।

पुलिस ने केस दर्ज कर के सरफराज को गिरफ्तार कर लिया। मौत के कारणों की पड़ताल के लिए मृतका का शव पोस्टमॉर्टम के लिए भेजा गया है। इस बीच इस घटना की जानकारी मिलते ही बोंगाईगाँव के लोग भड़क उठे। उन्होंने सड़क और रेलवे ट्रैक को जाम कर दिया। समझाने पहुँचे पुलिस बल से भी उनकी नोकझोंक हुई। स्थानीय निवासी सरफारज को फाँसी की सजा देने की माँग पर अड़े है। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद ने मृतका के लिए न्याय की माँग करते हुए कैंडल मार्च भी निकाला।

हालत तनावपूर्ण देखते हुए इलाके में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात कर दिया गया है। पुलिस ने लोगों से शांति व्यवस्था बनाए रखने की अपील की है। कुछ प्रदर्शनकारियों का कहना है कि इस घटना को अंजाम देने में सरफराज अकेले नहीं था बल्कि उसके साथ उसकी पूरी गैंग थी। स्थानीय थाना प्रभारी पर भी मामले में लापरवाही बरतने के आरोप लग रहे हैं। पुलिस इन सभी बिंदुओं पर जाँच पड़ताल कर रही है।

‘हिन्द को मानने वाला हर व्यक्ति हिन्दू’: रणदीप हुड्डा ने वीर सावरकर पर प्रोपेगंडा को किया ध्वस्त, बोले – भारत को सल्तनत बनाने की थी साजिश, कॉन्ग्रेस के लोगों ने लिखा गलत इतिहास

अभिनेता रणदीप हुड्डा ‘स्वतंत्र वीर सावरकर’ नामक फिल्म लेकर आ रहे हैं, जिसमें उन्होंने स्वतंत्रता सेनानी वीर विनायक दामोदर सावरकर का किरदार निभाया है। इस फिल्म का निर्देशन भी उन्होंने ही किया है। भारत का वामपंथी-लिबरल-सेक्युलर गिरोह अक्सर सावरकर की आलोचना करता रहा है और हिंदुत्व की विचारधारा को आगे बढ़ाने के लिए उन्हें निशाना बनाता रहा है। एक टीवी डिबेट में रणदीप हुड्डा ने सावरकर को लेकर चलाए जा रहे ऐसे ही प्रोपेगंडा को ध्वस्त किया।

एक पत्रकार ने उनके इस बयान पर आपत्ति जताई कि जो आज़ादी की कहानियाँ हमने पढ़ी उनमें कहा गया कि अहिंसा से हमें आज़ादी मिली, जबकि ऐसा नहीं है। ‘ABP न्यूज़’ पर उक्त पत्रकार ने पूछा कि क्या भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में आप अहिंसा की विचारधारा और भूमिका को नकारते हैं? इस पर रणदीप हुड्डा ने जवाब दिया कि देश को जोड़ने में अहिंसा का बहुत बड़ा योगदान था, लेकिन सिर्फ वही एक सोच नहीं थी जो देश के लिए लड़ रही थी, सशस्त्र क्रांति भी बड़ी चीज थी।

रणदीप हुड्डा ने याद दिलाया कि 1870 के दशक में वासुदेव फड़के जैसे क्रांतिकारियों ने फिर से बंदूक उठाई तो 1885 में AO ह्यूम ने कॉन्ग्रेस का गठन किया जिसमें सारे अंग्रेजी में शिक्षित भारतीय थे और अंग्रेजों-भारतियों के बीच एक सेतु बनाने के लिए इसका इस्तेमाल हुआ। उन्होंने बताया कि कैसे कड़ा रुख रखने वाले बाल गंगाधर तिलक भी इसके अध्यक्ष बने, वहीं इसमें गोपाल कृष्ण गोखले जैसे नरमपंथी भी थे। अभिनेता ने कहा कि भारत की आज़ादी में दोनों का योगदान था, सशस्त्र क्रांति वाले जब कुछ करते थे तो कॉन्ग्रेस के प्रस्ताव जल्दी स्वीकार कर लिए जाते थे।

उन्होंने कहा, “मुझे कष्ट इस बात से होता है कि सशस्त्र क्रांति को बिलकुल ही गायब कर दिया गया जैसे कि वो कुछ थे ही नहीं, सिर्फ कॉन्ग्रेस के चंद लोगों ने ही आज़ादी दिलाई। इतिहासकार भी उन्हीं के थे, इसीलिए उनका ही महिमामंडन किया गया।” अंदमान और रत्नागिरी के सावरकर में फर्क के बारे में पूछने पर रणदीप हुड्डा ने कहा कि जब 25-26 साल के किसी नौजवान को कालापानी की सज़ा हो जाए तो उसके अंदर काफी निराशा होगी ही।

उन्होंने बताया कि सावरकर क्रांतिकारी थे, बाद में उन्होंने साम-दाम-दंड-भेद कर के वहाँ से निकलने के लिए प्रयास किया। बकौल रणदीप हुड्डा, देश के स्वतंत्रता व सांस्कृतिक संग्राम के अलावा इसे जोड़ने के लिए वो बाहर आना चाहते थे। जब वो रत्नागिरी पहुँचे तब तक लोगों को बेवकूफ बनाने वाला खिलाफत आंदोलन हो चुका था और भारत के इस्लामीकरण की तैयारी थी। रणदीप ने बताया कि तुर्की में खलीफा को बिठाने के लिए और कहीं के नहीं, सिर्फ भारत के मुस्लिम ही लड़ रहे थे।

उन्होंने इस दौरान रायबरेली और शौकत अली और मोहम्मद अली का भी नाम लिया। इन लोगों ने अफगानिस्तान के अमीर को पत्र लिख कर भारत पर हमला करने और सल्तनत स्थापित करने का आमंत्रण दिया था। बकौल रणदीप हुड्डा, ये लोग चाहते थे कि अंग्रेजों के आने से पहले सल्तनत था और उनके जाने के बाद भी यही रहे। महात्मा गाँधी ने खिलाफत का समर्थन भी किया, मुस्लिमों को जनसंख्या से ज़्यादा सीटें दी गईं। रणदीप हुड्डा ने बताया कि कैसे रत्नागिरी में सावरकर ने हिंदुत्व के बारे में लिखा, जो भारत का भौगोलिक और सांस्कृतिक इतिहास है।

रणदीप हुड्डा ने समझाया, “जो हिन्द को अपना माने वो हिन्दू है, चाहे वो किसी भी धर्म या समाज का हो। परिस्थितियाँ बदल गई थीं और दूसरे विश्व युद्ध के बाद के भारत में कुछ लोगों का पक्ष लिया जा रहा था। सावरकर कहते थे कि वो हिन्दू इसीलिए हैं क्योंकि सामने वाला मुस्लिम है, अन्यथा वो विश्वमानव थे। सावरकर ‘माफीवीर’ नहीं थे।” ‘क्या सावरकर डर गए थे?’ – इस सवाल पर हुड्डा ने कहा कि सावरकर को फाँसी होती तो वो बहुत बड़े बलिदानी बन जाते और अंग्रेज ये नहीं चाहते थे। उन्होंने याद दिलाया कि कैसे वासुदेव फड़के को यमन ले जाकर चुपके से फाँसी दी गई।

पंजाब में सबको मिले ‘शुद्ध’ नशा… अफीम और पोस्त की खेती का लाइसेंस दे सरकार: AAP विधायक ने बताया ‘जीवन-रक्षक’

पंजाब के युवा सिंथेटिक नशे से मर रहे हैं। सस्ता केमिकल उनकी जान ले रहा है। इसलिए उन्हें ‘शुद्ध’ नशा दिया जाए, क्योंकि वो ‘नुकसान’ नहीं करेगा, यानी जानलेवा नहीं साबित होगा। इसीलिए सिंथेटिक नशे की जगह पंजाब के युवाओं को ‘अफीम’ और ‘पोस्त’ का नशा करने दिया जाए। अव्वल तो पंजाब में इतनी खपत होगी अफीम और पोस्त की, कि उसे बाहर से मंगाना सही नहीं होगा। ऐसे में पंजाब में ही अफीम और पोस्त की खेती करने लिए लाइसेंस जारी कर दिया जाए। अगर, खेती नहीं करवानी, तो फिर पंजाब में अफीम और पोस्त के ‘ठेके’ ही खोल दिए जाएँ।

दरअसल, हम ये सब नहीं कह रहे हैं, बल्कि कुछ ऐसा ही कहना है आम आदमी पार्टी के विधायकों का, जिन्होंने विधानसभा में ही ‘काले सोने’ यानी अफीम की खेती की माँग कर दी है। पंजाब विधानसभा के बजट सत्र में आम आदमी पार्टी के विधायक हरमीत सिंह मठान माजरा ने कृषि मंत्री गुरमीत सिंह खुदियाँ से पूछा कि क्या सरकार सिंथेटिक दवाओं पर रोक लगाने के लिए पंजाब में अफीम-पोस्त की खेती करने का इरादा रखती है? अगर हाँ, तो यह कब तक होने की संभावना है?

आप विधायक पठान माजरा ने कहा कि स्मैक और टैबलेट जैसे नशे ने पंजाब के युवाओं को बर्बाद कर दिया है। साल 2007 के बाद स्थिति और खराब हो गई है और अब स्थिति ऐसी है कि पंजाब में 136 नशा मुक्ति केंद्र खुल गए हैं। साल 2020 से 31 मार्च 2023 तक सिंथेटिक ड्रग्स की लत के कारण लगभग 266 लोगों की मौत हो चुकी है। मार्च 2023 से मार्च 2024 तक 159 और लोगों की मौत हो चुकी है। पहले के समय में लोग पारंपरिक औषधियों का सेवन भी करते थे और अपना काम भी करते थे। कोई यह नहीं कह सकता कि उनके किसी परिचित की मृत्यु अफीम या पोस्त भूसी के सेवन के कारण हुई। राजस्थान और मध्य प्रदेश में पोस्त की खेती पहले से ही हो रही है। अगर पंजाब में ऐसा किया गया तो इससे राज्य का राजस्व बढ़ेगा।”

विधायक पठान माजरा ने यहाँ तक ​​कहा कि अगर अफीम-पोस्त की खेती की इजाजत नहीं दी जा सकती तो कम से कम राज्य में दुकानें खोली जानी चाहिए ताकि पंजाब के युवाओं को बचाया जा सके। हालाँकि जब पठान माजरा ने कृषि मंत्री से अफीम की खेती को लेकर सवाल पूछा तो उन्होंने बताया कि पंजाब में अफीम की खेती को लेकर कोई प्रस्ताव नहीं है। वहीं, विधानसभा के स्पीकर ने इस सवाल को गंभीरता से लेते हुए कहा कि पहले सरकार इस बात की जानकारी करे कि अफीम और पोस्त की खेती बंद क्यों की गई थी और ठेकों को बंद करने की क्या वजह थी।

तस्वीर बेली डांसर की, चेहरा स्मृति ईरानी का: कॉन्ग्रेस नेता ने शेयर की केंद्रीय मंत्री की एडिटेड फोटो, शिकायत होने पर डिलीट किया पोस्ट

कॉन्ग्रेस नेता अरुणेश कुमार यादव ने 9 मार्च 2024 को केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी की एक एडिटेड फोटो सोशल मीडिया पर शेयर करके उसपर घिनौनी टिप्पणी की। फोटो में अरुणेश कुमार ने स्मृति ईरानी को बेली डांसर दिखाने का प्रयास किया। साथ ही लोगों से कहा कि जो इस अपसरा को पहचानेगा उसकी आईडी प्रमोट की जाएगी।

रियल फोटो और एडिटिड फोटो

अरुणेश कुमार की आईडी से ये फोटो शेयर करते हुए लिखा गया- “फोटो पुरानी है, लेकिन इस अपसरा को पहचानो, जो पहचानकर सही जवाब देगा उसकी आईडी को प्रमोट किया जाएगा।” इस फोटो में एक बेली डांसर के तौर पर स्मृति ईरानी को दिखाने का प्रयास हुआ है। फोटो में कॉन्ग्रेस नेता ने एक तुर्की की बेली डांसर की फोटो की जगह स्मृति ईरानी का चेहरा लगाया है।

इस घटिया हरकत के बाद कॉन्ग्रेस नेता अरुणेश यादव के खिलाफ शिकायत दायर हुई जिसके बाद कॉन्ग्रेस नेता ने अपना पोस्ट भी डिलीट कर दिया। लेकिन पोस्ट डिलीट करने से उनकी थू-थू होना बंद नहीं हो रही है। इस पर कॉन्ग्रेस नेता ने कहा कि उनसे यह पोस्ट गलती से हो गया था।

अपने ताजा पोस्ट में उन्होंने कहा, “मेरी ट्विटर आईडी से 2 दिन पहले त्रुटि वश एक Morphed फोटो पोस्ट की गई थी, जो कि इंटरनेट पे पड़ी थी, जिसकी जानकारी मुझे मिलते ही मैंने उस ट्वीट को डिलीट कर दिया था। यदि मेरे उस ट्वीट से किसी की भावनाएँ आहत हुई है तो उसके लिए मुझे खेद है।”

बता दें कि स्मृति ईरानी की छवि को इस प्रकार धूमिल करने का प्रयास कोई नया नहीं है। अमेठी में जब से उन्होंने राहुल गाँधी को हराया है उसके बाद से उनपर पर्सनल अटैक होते रहे हैं। 2023 में कॉन्ग्रेस नेता राहुल गाँधी ने स्मृति ईरानी को फ्लाइंग किस पास की थी। 2022 में कॉन्ग्रेस नेता अजय राय ने कहा था कि स्मृति ईरानी सिर्फ अपने लटके झटके दिखाने आती हैं। 2021 में यूपी कॉन्ग्रेस ने 20 सेकेंड की वीडियो शेयर करते हुए ईरानी के लिए अपशब्द कहे थे।

2020 में विदिशा से कॉन्ग्रेस विधायक शशांक भारगव के खिलाफ एफआईआर हुई थी। शशांक भारगव ने स्मृति ईरानी के लिए कहा था- “हमारी एक केन्द्र सरकार में मंत्री हैं, पहले भी जब मूल्य वृद्धि होती थी तो वह चूड़ियाँ लेकर घूमा करती थीं। वह प्रधानमंत्री मोदी जी की बेहद करीबी हैं और उनकी प्रिय हैं। चूड़ी तो क्या वे सब कुछ दे सकती हैं। उन्हें वे चूड़ियों के साथ कुछ भी भेंट कर जनता के हित में मोदी जी से निवेदन करें कि तुरंत मूल्य वृद्धि वापस लें।”

‘जहाँ शाम के बाद आने से डरते थे लोग, वहाँ आज कंपनियाँ लगा रहीं प्रोजेक्ट’: PM मोदी ने 8 लेन के द्वारका एक्सप्रेसवे का किया उद्घाटन, रोडशो में गूँजा ‘जय श्री राम’

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार (11 मार्च, 2024) को राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में द्वारका एक्सप्रेसवे का उद्घाटन किया। केंद्रीय सड़क एवं परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने कहा है कि द्वारका एक्सप्रेसवे नए भारत की तस्वीर है। उन्होंने ‘मोदी की गारंटी’ की बात करते हुए इसे ‘प्रगति का हाइवे’ करार दिया। इस एक्सप्रेसवे से न सिर्फ दिल्ली, बल्कि हरियाणा को भी फायदा होगा, जाम से भी मुक्ति मिलेगी। पीएम मोदी ने उद्घाटन के बाद एक विशाल जनसभा को भी संबोधित किया।

8 लेन का द्वारका एक्सप्रेसवे 29.5 किलोमीटर का है, जिसका 19 किलोमीटर का हिस्सा गुरुग्राम होकर गुजरता है। दिल्ली में 9 किलोमीटर का काम जून 2024 तक पूरा हो जाएगा। इसका पहला हिस्सा महिपालपुर के पास शिव मूर्ति से द्वारका तक जाता है। दूसरा हिस्सा ‘अर्बन एक्सटेंशन रोड’ (UER) से बजघेड़ा तक जाता है। तीसरा हिस्सा वहाँ से बसई रेल ओवरब्रिज को जोड़ता है जो दिल्ली-हरियाणा का बॉर्डर है। अंतिम व चौथा हिस्सा खेड़की दौला तक जाता है

पीएम मोदी ने उद्घाटन से पहले हरियाणा के गुरुग्राम में भव्य रोडशो भी किया। ये देश का पहला एलिवेटेड एक्सप्रेसवे है। इसके चालू होने के बाद अब मात्र 25 मिनट में दिल्ली से गुरुग्राम की दूरी सड़क मार्ग से तय की जा सकेगी। नेशनल हाईवे-48 पर जाम से भी मुक्ति मिलेगी। दिल्ली के अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे से गुरुग्राम बाईपास तक की दूरी भी अब कम समय में पूरी होगी। अभी द्वारका एक्सप्रेसवे के हरियाणा वाले हिस्से का उद्घाटन किया गया है।

पीएम मोदी ने इस दौरान नितिन गडकरी और हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर के साथ द्वारका एक्सप्रेसवे के मॉडल को भी देखा। एक्सप्रेसवे के किनारे खड़े लोगों ने रोडशो के दौरान ‘जय श्री राम’ और ‘मोदी-मोदी’ के नारे भी लगाए। प्रधानमंत्री ने एक्सप्रेसवे के निर्माण में लगे श्रमिकों से भी बातचीत की। उन्होंने कुल 144 परियोजनाओं का लोकार्पण एवं शिलान्यास किया। उन्होंने बताया कि द्वारका एक्सप्रेसवे के निर्माण में 9000 करोड़ रुपए की लागत आई है।

पीएम मोदी ने कहा कि पहले की सरकारें छोटी सी कोई योजना बनाकर और छोटा सा कोई कार्यक्रम करके उसकी डुगडुगी 5 साल तक पीटती रहती थी, वहीं भाजपा सरकार जिस रफ्तार से काम कर रही है, उसमें शिलान्यास व लोकार्पण के लिए समय और दिन कम पड़ रहे हैं। उन्होंने कहा कि 21वीं सदी का भारत बड़े विजन, बड़े लक्ष्यों का भारत है जो प्रगति की रफ़्तार से कोई समझौता नहीं कर सकता। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि वो न छोटा सोचते हैं, न छोटे संकल्प लेते हैं, बल्कि उन्हें जो भी करना है वो विराट चाहिए, विशाल चाहिए।

पीएम मोदी ने कहा, “2024 के अभी तीन महीने भी पूरे नहीं हुए हैं, और इतने कम समय में 10 लाख करोड़ रुपये की परियोजनाओं का शिलान्यास व लोकार्पण हो चुका है। ये सिर्फ वो प्रोजेक्ट्स हैं, जिसमें मैं खुद शामिल हुआ हूँ। इसके अलावा मेरे मुख्यमंत्रियों और मंत्रियों ने भी विकास परियोजनाओं का शिलान्यास व लोकार्पण किया है। आज जहाँ द्वारका एक्सप्रेस-वे का निर्माण हुआ है, एक समय था, जब शाम ढलने के बाद लोग इधर आने से बचते थे। टैक्सी ड्राइवर भी मना कर देते थे कि इधर नहीं आना है। इस पूरे इलाके को असुरक्षित समझा जाता था। लेकिन आज कई बड़ी कंपनियाँ यहाँ आकर अपने प्रोजेक्ट लगा रही हैं। ये इलाका NCR के सबसे तेजी से विकसित हो रहे इलाकों में शामिल हो रहा है।”

सेक्स सीन में गीता को दिखाने वाली फिल्म को 7 अवॉर्ड, खुले मंच पर नंगे जॉन सीना… यूँ ही नहीं एलन मस्क ने ऑस्कर को कह दिया Woke, साल दर साल गिर रही गरिमा

कहा गया है – ‘अति सर्वत्र वर्जयेत्’, अर्थात कुछ भी जब बहुत ज़्यादा हो जाता है तो हानिकारक ही होता है। उदाहरण के लिए, बारिश फसलों के लिए लाभदायक है लेकिन अतिवृष्टि नहीं। इसी तरह, आजकल कुछ लोग कुछ ज़्यादा ही ‘जागरूक’ हो गए हैं। इतने ‘जागरूक’ कि किसी फिल्म में अश्वेत व्यक्ति को अच्छा दिखा दिया गया तो अवॉर्ड देने के मामले में अच्छी कहानी, निर्देशन और अभिनय वाली फिल्मों के ऊपर उसे तरजीह दे दी जाती है। इतने ‘जागरूक’, कि विमान में घूमने और फाइव स्टार होटल में रुकने वाले पर्यावरण पर ज्ञान बाँचते हैं और पूरी जनसंख्या को गाली देते हैं।

ऐसे ही लोगों के कारण आज ‘Woke’ शब्द गाली बन गया है। इसका ताज़ा इस्तेमाल दुनिया के सबसे अमीर शख्स एलन मस्क ने किया है। पहले इसकी पृष्ठभूमि समझते हैं। असल में रविवार (10 मार्च, 2024) को 96वें एकेडमी अवॉर्ड्स का आयोजन हुआ, जिसमें परमाणु बम के जनक रॉबर्ट ओपेनहाइमर के जीवन पर आधारित फिल्म ‘Oppenheimer’ को 7 पुरस्कारों से नवाजा गया। इसे कुल 13 नॉमिनेशन प्राप्त हुए थे। क्रिस्टोफर नोलन की ये फिल्म खासी विवादित रही थी।

एलन मस्क ने ऑस्कर अवॉर्ड्स की आलोचना की है। उन्होंने अपने मालिकाना हक़ वाले सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ (पूर्व में ट्विटर) पर लिखा, “आजकल ऑस्कर जितने का मतलब है कि आपने वोक प्रतियोगिता जीत ली।” उनके कहने का अर्थ था कि जिस फिल्म में Wokism का जितना ज्यादा छौंक होगा, बाकी चीजों को नज़रअंदाज़ कर उसे अवॉर्ड मिलने की संभावना उतनी बढ़ जाएगी। वास्तविक मुद्दों से हट कर बनावटी मुद्दों को बढ़ा-चढ़ा कर प्रदर्शित करना ही तो Woke होने की निशानी है।

एलन मस्क ने ऑस्कर समारोह पर साधा निशाना

एलन मस्क ने कहा कि जब किसी पुरस्कार को कमजोर कर दिया जाता है तो हर कोई, यहाँ तक कि इसे जीतने वाले भी जानते हैं कि अब ये सम्मान का पात्र नहीं रह गया है। ऑस्कर हॉलीवुड ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया के फ़िल्मी समाज के लिए सबसे प्रतिष्ठित अवॉर्ड माना जाता रहा है लेकिन हाल के कुछ वर्षों में इसकी गरिमा धूमिल हुई है। ‘Moonlight’ जैसी बोरिंग फिल्मों को अवॉर्ड मिलने के बाद इस पर तेज़ बहस शुरू हुई। सेक्सुअल ओरिएंटेशन, अश्वेत और क्लाइमेट चेंज जैसे मुद्दों का हौव्वा बना दिया गया।

विवादों में रही थी फिल्म ‘Oppenheimer’

फिल्म ‘Oppenheimer’ काफी विवादों में रही थी। द्वितीय विश्वयुद्ध के समय ‘मैनहटन प्रोजेक्ट’ के तहत विकसित किए गए ‘लॉस एलामोस लेबोरेटरी’ के डायरेक्टर अमेरिकी फिजिसिस्ट रॉबर्ट ओपेनहाइमर ने जो परमाणु बम बनाया था, उसका ही इस्तेमाल कर के अमेरिका ने जापान में तबाही मचाई थी। जब दुनिया का पहला परमाणु ब्लास्ट सफल रहा था तब रॉबर्ट ओपेनहाइमर के मन में हिन्दू धर्मग्रंथ भगवद्गीता के शब्द गूँजे थे – “अब मैं मृत्यु बन गया हूँ, संसारों का विध्वंस करने वाला।”

फिल्म में इस अंश को जिस तरह से प्रदर्शित किया गया, उस पर लोगों ने आपत्ति जताई। फिल्म में एक सेक्स वाले दृश्य में दिखाया गया है कि अभिनेता लड़की को भगवद्गीता पढ़ने के लिए देता है। युवती पूछती है कि ये क्या है? इस पर वो बताता है कि ये संस्कृत में है। इसके बाद वो इसे पढ़ने के लिए कहता है। इसके बाद वो ग्रन्थ का वो हिस्सा पढ़ती है, जिसमें भगवान श्रीकृष्ण अपने विष्णु के रूप में अर्जुन को अपना विकराल स्वरूप दिखाते हैं। इसके बाद अभिनेता युवती को आगे पढ़ने के लिए कहता है।

इस दृश्य में अभिनेता और अभिनेत्री, दोनों ही बिस्तर पर नंगे हैं। युवती को पूरी तरह न्यूड दिखाया गया है और उसके स्तन पर्दे पर दिख रहे होते हैं। आगे वो भगवद्गीता का वो श्लोक पढ़ती है, जिसे रॉबर्ट ओपेनहाइमर दोहराया करते थे। इतिहास में ऐसा कहीं नहीं लिखा कि सेक्स करते समय वो गीता पढ़ते थे। एक सेक्स सीन घुसा कर उसमें भगवद्गीता को दिखाना कहाँ तक उचित था? क्या इन्हीं चीजों के लिए ‘Oppenheimer’ को सम्मानित किया गया है?

भरे समारोह में मंच पर नंगे जॉन सीना: ऑस्कर में Wokism

2024 के ऑस्कर समारोह में एक और नज़ारा देखने को मिला। WWE के रेसलर जॉन सीना बेस्ट कॉस्ट्यूम का अवॉर्ड देने के लिए मंच पर पहुँचे। इस दौरान वो पूरी तरह नग्न थे। उन्होंने एक कार्डबोर्ड से अपने प्राइवेट पार्ट को ढँक रखा था। इस दौरान हँसी-मजाक भी चलता रहा। क्या कपड़े उतार देना ही जागरूक होने की निशानी है? खुले मंच पर नंगा हो जाना ही अगर जागरूकता है तो फिर कपड़ों की ज़रूरत ही नहीं है। अजीबोगरीब हरकतों को सामान्य साबित करने की प्रक्रिया ही तो Wokism है।

यही कारण है कि एलन मस्क ने इस पुरस्कार समारोह पर निशाना साधा है। लोग अब उन्हें सलाह दे रहे हैं कि वो एकेडमी अवॉर्ड्स को भी ट्विटर की तरह खरीद लें और उसमें सुधार करें। हिन्दू धर्मग्रंथ का अपमान करने वाली फिल्म को जिस तरह से अवॉर्ड दिया गया है, उसके बाद ये सवाल उठना लाजिमी है कि क्या इस्लाम या ईसाइयत का अपमान करने वालों को सम्मानित करने की इनकी हिम्मत होती? अगर यही हाल रहा तो आने वाले दिनों में ऑस्कर का और भी बुरा हाल होगा।

भारत में बॉलीवुड भी इन्हीं चीजों से प्रेरणा लेता है। अमेरिकी फिल्मों में जिन चीजों को बढ़ावा दिया जाता है, बॉलीवुड उसकी नक़ल करता है। फिल्मों में पार्टी-पब कल्चर को दिखाना हो, पारिवारिक मूल्यों के खिलाफ युवाओं को भड़काना हो, दारू-शराब-सिगरेट की लत को बढ़ावा देना हो, सेक्स-हिंसा के दृश्यों का महिमामंडन करना हो या फिर व्यभिचार को सामान्य बताना हो – बॉलीवुड हर मामले में इसी नक्शेकदम पर चलता दिखता है। यहाँ के अवॉर्ड समारोहों में भी वही फूहड़ता आ रही है।

22217 इलेक्टोरल बॉन्ड, सबकी जानकारी अलग-अलग जगह: SBI ने इसलिए माँगा था अतिरिक्त समय, सुप्रीम कोर्ट ने दिया सिर्फ 1 दिन का वक्त

इलेक्टोरल बॉन्ड मामले में सुप्रीम कोर्ट ने एसबीआई को झटका देते हुए आदेश दिया है कि 12 मार्च उसके आदेश को पूरा किया जाए और इलेक्टोरल बॉन्ड की पूरी जानकारी उसे उपलब्ध कराई जाए। यही नहीं, 15 मार्च तक इस पूरी जानकारी को चुनाव आयोग की वेबसाइट पर भी डाला जाए। सुप्रीम कोर्ट ने अब तक आँकड़ों को सार्वजनिक न करने के लिए एसबीआई की खिंचाई भी की। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि पिछला आदेश 26 दिन पहले आया था, लेकिन अब तक आपने क्या काम किया है? हालाँकि एसबीआई ने कहा कि वो कुछ छिपा नहीं रहा, बस उसे इन जानकारियों को पूरी सुरक्षा के साथ और हरेक आँकड़े के मिलान के साथ जारी करने में समय में लगेगा।

सुप्रीम कोर्ट में एसबीआई ने याचिका दायर की थी, और कहा था कि उसे 30 जून 2024 तक का समय दिया जाए, ताकि वो इलेक्टोरल बॉन्ड से जुड़ी सारी जानकारियाँ कोर्ट में रख सके। इस मामले की सुनवाई सुप्रीम कोर्ट की संवैधानिक पीठ कर रही है, जिसमें चीफ जस्टिस डी वाई चंद्रचूड़, जस्टिस संजीव खन्ना ,जस्टिस बी आर गवई, जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस मनोज मिश्रा शामिल हैं। इस याचिका की सुनवाई के समय कोर्ट ने पूछा कि पिछले आदेश के 26 दिन बीत जाने के बावजूद अबतक उसपर अमल क्यों नहीं किया गया?

सुप्रीम कोर्ट ने एसबीआई द्वारा दायर की गई याचिका को खारिज कर चेतावनी दी है कि अगर 12 मार्च तक इलेक्टोरल बॉन्ड से जुड़ी जानकारी नहीं दी जाएगी, तो एसबीआई के खिलाफ अवमानना की कार्रवाई भी की जाएगी। यही नहीं, सुप्रीम कोर्ट ने ये भी कहा है कि ये सारी जानकारी 15 मार्च तक चुनाव आयोग की वेबसाइट पर भी पब्लिश की जाए।

क्यों एसबीआई माँग रही समय? आखिर दिक्कत क्या है?

सुप्रीम कोर्ट में समय माँगने पहुँची एसबीआी ने बताया कि आखिर उसे दिक्कत क्या हो रही है। इसे कुछ लाइनों में सीधे तरीके से समझिए।

1-स्टेट बैंक ने जो इलेक्टोरल बॉन्ड जारी किए, उसकी जानकारियाँ अलग-अलग जगह हैं।

2- इलेक्टोरल बॉन्ड से जुड़ी प्राइवेसी की शर्तों की वजह से सारी जानकारियाँ अलग रखी गई।

3- इलेक्टोरल बॉन्ड जारी करने के बाद उसे खरीदने वाले का डाटा अलग जगह रखा जाता है।

4- राजनीतिक पार्टियों द्वारा भुनाए गए बॉन्ड का डाटा एसबीआई की मुंबई शाखा में रखा जाता है, वो भी सीलबंद लिफाफे में।

5-एसबीआई को बॉन्ड खरीदने वाले, फिर उस बॉन्ड को भुनाने वाली पार्टी, बॉन्ड नंबर इत्यादि का मिलान करना होगा।

6-एसबीआई ने 12 अप्रैल 2019 से लेकर 15 फरवरी 2024 तक 22,217 बॉन्ड जारी किए हैं।

7- 22,217 बॉन्ड के लिए अलग-अलग फाइलें अलग-अलग जगहों पर हैं। ठीक इतनी ही फाइलें अलग-अलग दलों से आई हैं, जिन्होंने इन बॉन्ड्स को भुनाया है। ऐसे में 44,434 फाइलों के डाटा को एक जगह किया जाना है।

8- एसबीआई का कहना है कि सभी राजनीतिक दलों के लिए एसबीआई में ही खाते खोले गए हैं। उन खातों के माध्यम से ही इलेक्टोरल बॉन्ड को भुनाया जा सकता है। ऐसे में इन खातों की जानकारी भी इकट्ठा करनी होगी।

9- इलेक्टोरल बॉन्ड की जानकारियों को अलग-अलग जगह रखा ही इसलिए गया था, ताकि सुरक्षा में सेंध न लग सके। ऐसे में बहुत सारा डाटा ऑफ लाइन रखा गया है, खासकर बॉन्ड को खरीदने वालों की केवाईसी डिटेल्स।

10- सारी जानकारियों को एक जगह लाने में समय लगेगा, उसके लिए ज्यादा लोगों की जरूरत पड़ेगी। इसके लिए उसे 30 जून तक का समय दिया जाए।

हालाँकि सुप्रीम कोर्ट ने एसबीआई की एक भी दलील नहीं मानी और उसे 12 मार्च को सारी जानकारी सुप्रीम कोर्ट में जमा करने का आदेश दे दिया। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि ये सारी जानकारी कोर्ट को सौंपे जाने से जुड़ा नियम भी है, ऐसे में एसबीआई इन जानकारियों को देने में देरी न करे। सुप्रीम कोर्ट ने 15 फरवरी के अपने आदेश में इलेक्टोरल बॉन्ड को असंवैधानिक बता दिया था। जानकारी के मुताबिक, जनवरी 2018 और जनवरी 2024 के बीच 16,518 करोड़ रुपये के इलेक्टोरल बॉन्ड ख़रीदे गए थे, इसमें से अधिकतर बॉन्ड चुनावी फंडिंग के तौर पर दी गई थी।