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मंदिरो में तोड़फोड़, दुकानों और घरों में लूटपाट: जिस हाजी नुरुल इस्लाम पर है हिन्दू विरोधी दंगों का आरोप उसे ममता बनर्जी ने दिया टिकट, संदेशखाली वाले इलाके से लड़ेगा

लोकसभा चुनाव 2024 के लिए रविवार (10 मार्च) को ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली तृणमूल कॉन्ग्रेस पार्टी ने 42 उम्मीदवारों की लिस्ट जारी की है। ये सभी कैंडिडेट पश्चिम बंगाल की अलग-अलग लोकसभा सीटों पर चुनावी ताल ठोंकेंगे। इसमें सबसे अधिक चर्चा बशीरहाट लोकसभा सीट की है। यहाँ से TMC ने मौजूदा सांसद नुसरत जहाँ को हटा कर पूर्व सांसद हाजी नुरुल इस्लाम को टिकट दिया है। वर्तमान समय में तृणमूल नेता शाहजहाँ शेख और उसके गुंडों द्वारा महिलाओं के बलात्कार और जमीन हड़पने जैसे आरोपों के चलते देश भर में चर्चित संदेशखाली इलाका बशीरहाट लोकसभा क्षेत्र में आता है।

हाजी नुरुल इस्लाम का जन्म 1964 में हुआ था। वो 2009 से 2014 तक टीएमसी के टिकट पर पश्चिम बंगाल में बशीरहाट लोकसभा सीट से सांसद रहे। उनकी गिनती TMC के बड़े मुस्लिम चेहरों में होती है।बशीरहाट से TMC प्रत्याशी हाजी नुरुल इस्लाम साल 2010 के देगंगा दंगों का मुख्य आरोपी है। आरोप है कि यह दंगे दुर्गापूजा में अड़ंगा डालने के लिए करवाए गए थे। कभी वामपंथ का गढ़ माने जाने वाले देगंगा में साल 2009 के चुनावों में हाजी नुरुल इस्लाम TMC के टिकट पर जीत कर आए थे।

तब उन्होंने सीपीआई नेता अजय चक्रवर्ती को हराया था। माना जाता है कि तब से कभी हिन्दू बहुल रहा देगंगा मज़हबी तौर पर विभाजन का शिकार होता जा रहा है। अब यहाँ की डेमोग्राफी काफी बदल गई है। फिलहाल यहाँ के हालत ठीक नहीं बताए जा रहे हैं।

TMC नेता हाजी नुरुल इस्लाम वही हैं जिन्होंने चुनाव के दौरान अपने समर्थकों से कलकत्ता हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ जाने का एलान किया था। तब उन्होंने देगंगा बाजार की एक मस्जिद के ऊपर माइक लगाने और क्षेत्र के एक कब्रिस्तान के विस्तार का वादा किया था। साल 2010 के हिन्दू विरोधी दंगो में विवाद की मुख्य वजह चट्टल पल्ली गाँव में बना एक शिव मंदिर था। यह गाँव स्वामी विवेकानन्द के गुरु रामकृष्ण परमहंस की संरक्षिका प्रसिद्ध रानी राशमोनी का था। यहाँ के शिव मंदिर के बगल कब्रिस्तान बना हुआ है। इस शिव मंदिर पर 39 वर्षों से हिंदू समाज हर साल हिंदू सामूहिक तौर पर दुर्गा पूजा मानते रहे हैं।

हिंसा 6 सितंबर 2010 को भड़की थी। तब हर साल की तरह हिंदू समुदाय शिव मंदिर के बगल दुर्गापूजा बनवा रहा था। इसी दिन मुस्लिमों ने कब्रिस्तान के चारों तरफ बॉउंड्री बनवानी शुरू कर दी थी। यह बॉउंड्री मंदिर की जमीन तक पहुँच गई तो हिन्दुओं ने विरोध शुरू किया। आरोप है कि इस दौरान हाजी नुरुल इस्लाम ने इस मौके पर वोटों के ध्रुवीकरण के लिए मुस्लिमों को हिन्दुओं के खिलाफ भड़काया था। तब हाजी नुरुल ने 500 मुस्लिओं की भीड़ के साथ सड़क जाम कर दी थी और थाने तक में हंगामा किया था।

बताया यह भी गया था कि तब नुरुल ने एक हिंसक भीड़ के साथ थाने से लौटते हुए राह में पड़ने वाले हिन्दुओं के घरों और दुकानों में तोड़फोड़ की थी। कई वाहनों साथ में आगजनी हुई थी जिसमें पुलिस की भी गाड़ियाँ शामिल थीं। इसके अलावा मंदिर को भी अपवित्र कर दिया गया था। डेली पायनियर के एक पत्रकार ने अपनी रिपोर्ट में बताया था कि हिंसक भीड़ ने सड़क के किनारे काली मंदिर में रखी मूर्ति को तोड़ कर सड़क पर फेंक दिया था। इस दौरान 3 दिनों चल चली हिंसा में 250 से अधिक दुकानें लूटी गईं थी और 50 से अधिक घर जले थे। 5 मंदिरों में तोड़फोड़ हुई थी। हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ देगंगा बाजार की मस्जिदों पर माइक भी लगा दिए गए थे।

देगंगा दंगों में कुल 24 लोग घायल हुए थे। एक युवक की गोली लगने से मौत भी हो गई थी। हालात काबू करने के लिए अर्धसैनिक बलों को तैनात करना पड़ा था। तब दर्ज हुई FIR में हाजी नुरुल इस्लाम को हिंसा का मुख्य आरोपित बनाया गया था। TMC नेता ने तब हिंसा में अपनी संलिप्तता से इंकार किया था। उलटे उन्होंने दावा किया था कि वो बवाल को रोकने की कोशिश कर रहे थे। हाजी नुरुल को प्रत्याशी बनाने पर सोशल मीडिया पर तृणमूल कॉन्ग्रेस की काफी आलोचना हो रही है।

शाहनवाज बने राहुल, बीवी अर्शी का नाम हुआ पूनम: दंपति ने की घर-वापसी, अयोध्या की मिट्टी का तिलक लगा लिया संकल्प – हमेशा सनातन पद्धति से जिएँगे

उत्तर प्रदेश के मुज़फ्फरनगर जिले में एक मुस्लिम दम्पति ने घर वापसी की है। हिन्दू धर्म स्वीकार करने के बाद शामली निवासी शाहनवाज अब राहुल बन चुके हैं जबकि उनकी बीवी अर्शी का नाम पूनम हो गया है। मूल रूप से उत्तराखंड की रहने वाली पूनम पहले हिन्दू हुआ करती थीं जिन्होंने 3 साल पहले शाहनवाज से निकाह कर के अर्शी नाम से इस्लाम कबूल कर लिया था। रविवार (10 मार्च, 2024) को हुए इस कार्यक्रम के बाद पति-पत्नी ने अयोध्या से आई मिट्टी को माथे पर लगा कर तिलक किया और भविष्य में हमेशा सनातन पद्धति से जीने का संकल्प लिया।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक घर वापसी का यह कार्यक्रम तितावी थानाक्षेत्र में मौजूद मुज़फ्फरनगर के बघरा स्थित योग साधना यशवीर आश्रम में हुआ। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, लगभग 3 साल पहले पूनम गुर्जर नाम की लड़की और शाहनवाज नाम से युवक में कथित तौर पर प्यार हुआ था। पूनम मूलतः उत्तराखंड के रुड़की की रहने वाली हैं जबकि शाहनवाज शामली जिले के कैराना का निवासी है। थोड़े समय मिलने-मिलाने के बाद दोनों ने इस्लामी तौर-तरीके से निकाह कर लिया था। पूनम ने भी हिन्दू धर्म त्याग कर अपना नाम अर्शी रख लिया था।

बताया जा रहा है कि निकाह के बाद पूनम को इस्लामी तौर-तरीके बिलकुल पसंद नहीं आए। वो बचपन से ही शाकाहारी थीं लेकिन उनको माँस-मछली खाने के लिए कहा जाता था। इस मतभेद की वजह से पूनम की शाहनवाज के घर में नहीं बनी। वो फिर से सनातन में लौटना चाहती थीं। इसके लिए पूनम ने अपने शौहर शाहनवाज को भी समझाना शुरू कर दिया। तब तक घेरलू कलह के चलते पूनम अपने शौहर शाहनवाज के साथ उसके परिवार से अलग रहना शुरू कर चुकी थीं।

कुछ दिनों बाद शाहनवाज को भी हिन्दू तौर-तरीके पसंद आने लगे। वह सनातनी पद्धति से जीना शुरू किया। घर वापसी के लिए इस दम्पति ने मुज़फ्फरनगर के स्वामी यशवीर आश्रम से सम्पर्क किया। आखिरकार उन्हें रविवार का समय मिला। घर वापसी के कार्यक्रम के दौरान शाहनवाज और अर्शी ने वैदिक विधि-विधान से हवन किया। दोनों ने देवी-देवताओं की जयकार की। इस दौरान इन दोनों ने अयोध्या से आई मिट्टी से तिलक किया। विधिवत पूजापाठ के बाद अर्शी ने पुनः अपना मूल नाम पूनम रख लिया जबकि शाहनवाज राहुल बन गए।

पूरे कार्यक्रम के दौरान शाहनवाज ने जय श्री राम प्रिंट लिखा गमछा ओढ़ रखा था। उन्होंने जय श्री राम का नारा लगाते हुए कहा कि उनको इस्लाम में अच्छा नहीं लगता था और पहले भी वो पूजापाठ किया करते थे। पूनम और राहुल ने भविष्य में सनातन पद्धति से ही जीने का संकल्प लिया। इस अवसर पर स्वामी यशवीर आश्रम में मौजूद संतों और हिन्दू संगठन के अन्य सदस्यों ने घर वापसी करने वाले दम्पति को आशीर्वाद दिया।

‘जिस IPS ने करवाया रामभक्तों का नरसंहार वो मजे में, सड़क पर नमाजियों के खिलाफ बल प्रयोग करने पर कार्रवाई’: दिल्ली पुलिस में शिकायत दर्ज, सांडपुर में बहा था खून

दिल्ली के इंद्रलोक इलाके में शुक्रवार (8 मार्च, 2024) को एक भीड़ सड़क घेर कर नमाज़ पढ़ रही थी। बार-बार समझाने के बावजूद नमाज़ियों पर जब कोई फर्क नहीं पड़ा तब दिल्ली पुलिस के सब-इंस्पेक्टर मनोज तोमर ने बल प्रयोग किया जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। वीडियो वायरल होने के बाद सीनियर अधिकारियों ने मनोज तोमर को सस्पेंड कर दिया था। मनोज तोमर पर हुई इस कार्रवाई के खिलाफ सोशल मीडिया से ले कर जमीनी लेवल पर विरोध शुरू हो गया है।

दिल्ली के एक हिन्दू संगठन ने मनोज तोमर को सस्पेंड करने वाले DCP नार्थ के ऑफिस में शिकायत दर्ज करवा कर उनसे अयोध्या में रामभक्तों पर गोली चलाने वाले पुलिस अधिकारी के खिलाफ भी एक्शन लेने की माँग की है।

दिल्ली से रजिस्टर्ड ‘हिन्दू मोर्चा’ नाम के संगठन ने सोमवार (11 मार्च 2024) को DCP नार्थ के नाम से थाना सिविल लाइंस में एक शिकायत दर्ज करवाई है। यह शिकायत संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष दीपक मलिक ने दी है। शिकायत में दीपक ने बताया है कि 22 अक्टूबर, 1990 को अयोध्या के पास बस्ती जिले में स्थित गाँव सांडपुर में कारसेवकों की सूचना पर पहुँची पुलिस ने रामभक्तों का नरसंहार किया था। तब बस्ती जिले के तत्कालीन पुलिस अधीक्षक IPS सुभाष चंद्र गुप्ता को बताते हुए दीपक मलिक ने उनको 3 रामभक्तों के नरसंहार का दोषी बताया है।

शिकायत में दीपक मलिक ने आगे बताया है कि बस्ती के तत्कालीन IPS सुभाष चंद्र गुप्ता फिलहाल गजियाबाद में मजे से अपनी रिटायरमेंट की जिंदगी बिता रहे हैं। उनको ही कारसेवकों के नरसंहार का दोषी भी प्रार्थना पत्र में बताया गया है। साथ ही उनके खिलाफ FIR दर्ज कर के कार्रवाई की माँग की गई है। दीपक मलिक ने इसी एप्लिकेशन में आगे लिखा, “मान्यवर, आपने जिस प्रकार कार्रवाई की है इस से पता चलता है कि आप कितने न्यायप्रिय हैं।” दीपक ने अंत में सब इंस्पेक्टर मनोज तोमर पर हमला करने वालों के खिलाफ भी FIR दर्ज करने की माँग की है। ऑपइंडिया के पास शिकायत कॉपी मौजूद है।

दिल्ली पुलिस द्वारा इस प्रार्थना पत्र पर बाकायदा मुहर लगा कर दीपक मलिक को सौंप दी गई है। थाने से निकल कर मनोज तोमर ने अपना एक वीडियो जारी किया है। वीडियो में उन्होने कहा कि वो देखना चाहते हैं कि जिस प्रकार से न्याय DCP उत्तरी दिल्ली ने मनोज तोमर के लिए किया क्या उसी तरह का न्याय वो रिटायर्ड IPS सुभाष चंद्र गुप्ता के खिलाफ भी करेंगे। ऑपइंडिया से बात करते हुए दीपक मलिक ने कहा कि अगर सड़क जाम कर रहे नमाज़ियों को लात मारना गुनाह है तो क्या अयोध्या में राम का भजन गा रहे रामभक्तों पर गोलियाँ चलवाना अपराध नहीं है ? उन्होने आशा जताई है कि उनकी माँग पर अमल किया जाएगा।

दीपक ने हमसे बातचीत में आगे बताया कि अगर उनकी शिकायत पर कार्रवाई नहीं हुई और सुभाष चंद्र गुप्ता के खिलाफ एक्शन नहीं लिया गया तो वो संवैधानिक ढंग से धरना-प्रदर्शन करेंगे। दीपक ने यह भी कहा कि देश को यह जानने का अधिकार है कि सड़क कब्ज़ाने वाले नमाज़ियों को लात मारना बड़ा अपराध है या अयोध्या में रामभक्तों को गोलियों से भून देना। फिलहाल इस शिकायत पर दिल्ली पुलिस की तरफ से कोई प्रतिक्रिया आने पर उसके खबर में अपडेट किया जाएगा।

सांडपुर नरसंहार पर पढ़िए अयोध्या ग्राउंड रिपोर्ट के दौरान विशेष कवरेज।

‘रमजान की पूर्व संध्या पर क्यों आया CAA?’: अय्यूब-ममता गिरोह पूछ रहा सवाल, लोग बोले – Burnol की बढ़ रही डिमांड

मोदी सरकार ने सोमवार (11 मार्च, 2024) को CAA (नागरिकता संशोधन कानून) की अधिसूचना जारी कर दी। इस कानून के बनने के 4 साल बाद इसे नोटिफाई किया गया है। लोकसभा चुनाव को लेकर अचार संहिता लागू होने से ठीक पहले ये कदम उठाया गया है, जिसके बाद वामपंथी-इस्लामी गिरोह में बेचैनी का माहौल है। वो पूछ रहे हैं कि रमजान की पूर्व संध्या पर ही ये फैसला क्यों लिया गया है। वहीं सोशल मीडिया पर ‘बरनोल’ भी ट्रेंड में है।

खुद पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने इन दावों को हवा दी। उन्होंने कहा कि ये 6 महीने पहले किया जाना चाहिए था, लेकिन उन्हें पता है कि रमजान से पहले इसे क्यों लाया गया है। वहीं कुछ उत्साही लोगों ने तो यहाँ तक दावा कर डाला कि जिस तरह इस रमजान पर CAA आया है, वैसे ही अगले रमजान पर घुसपैठियों को निकाल बाहर करने के लिए NRC (नागरिकों का राष्ट्रीय रजिस्टर) भी आएगा। वहीं गिरोह विशेष कह रहा है कि ध्रुवीकरण के लिए ऐसा किया जा रहा है।

चंदाखोरी का आरोप झेल चुकीं कट्टर इस्लामी पत्रकार राना अय्यूब ने लिखा, “रमजान की पूर्व संध्या पर भारत में ऐसा किया जाना! क्या इससे पहले ऐसा कुछ हुआ है?”

तमिलनाडु कॉन्ग्रेस के उपाध्यक्ष अधिवक्ता आलिम अलबुहारी ने लिखा, “मोदी जी ने रमजान का गिफ्ट दिया है, रख लीजिए।” साथ ही उन्होंने CAA का हैशटैग भी लगाया।

वहीं कुछ लोगों ने लिखा कि राना अय्यूब को तो खुश होना चाहिए कि प्रताड़ित अल्पसंख्यकों को नागरिकता देने का एक पवित्र फैसला रमजान की पूर्व संध्या पर लिया गया है। कुछ लोगों ने इसे ‘एक और जख्म’ करार दिया। ‘The Wire’ वाली अरफ़ा खानम शेरवानी अक्सर मोदी सरकार के फैसलों को ‘जख्म’ बताती रही हैं।

वहीं जले पर लगाया जाने वाला मरहम Burnol भी सोशल मीडिया पर ट्रेंड होने लगा। लोग कहने लगे कि अब बरनोल की डिमांड बढ़ जाएगी। साथ ही कंपनी को सलाह दी गई कि बरनोल मैन्युफैक्चरिंग अब बढ़ा देनी चाहिए।

बता दें कि CAA के लिए अप्लीकेशन भी बड़ी संख्या में आए हैं, जिसमें सबसे ज्यादा पाकिस्तान से हैं। इसके तहत पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बांग्लादेश के अल्पसंख्यकों (हिन्दू, सिख, ईसाई, बौद्ध, जैन और पारसी) को भारत की नागरिकता दी जा सकेगी, जिन पर वहाँ इस्लामी अत्याचार होता रहा है। दिसंबर 2014 तक इनमें से जो पीड़ित भारत में शरणार्थी बन कर रह रहे हैं, उन्हें अब यहाँ की स्थायी नागरिकता मिलेगी। मोदी सरकार के इस कदम के बाद देश में कई जगह विरोध प्रदर्शनों की आशंका है, जिसके लिए पुख्ता कदम उठाए जा रहे हैं।

विनेश फोगाट 53kg कैटिगरी में ओलंपिक की रेस से लगभग बाहर, जूनियर खिलाड़ी से 0-10 से हारीं: धरना देकर बोला था – ‘नेशनल नहीं… सीधा ओलंपिक खेलेंगे’

कुछ माह पहले दिल्ली की सड़कों पर जमकर हंगामा करने वाले बजरंग पूनिया के बाहर विनेश फोगाट भी ओलंपिक ट्रायल हार गई हैं। उन्होंने ट्रायल के दौरान भी जमकर हंगामा किया। दरअसल, वो दो कैटेगिरी में हिस्सा लेना चाह रही थी और इसके लिए वो लिखित परमिशन माँग रही थी, हालाँकि इसके लिए उन्हें अनुमति मिल गई थी। इस पूरे हंगामे के दौरान मुकाबलों में करीब 3 घंटों की देरी हुई, इसके बावजूद जब उन्होंने 53 किलो ग्राम भार वर्ग में हिस्सा लिया, तो उन्हें बुरी तरह से मुँह की खानी पड़ी।

विनेश फोगाट को 53 किलो भार वर्ग के मुकाबले में अपने से जूनियर अंजू के हाथों 0-10 से करारी मात मिली। वो एक भी प्वॉइंट नहीं जीत पाई। इस दौरान जमकर हंगामा भी होता रहा।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस समय पेरिस ओलंपिक 2024 को लेकर कुश्ती के सेलेक्शन ट्रायल किए जा रहे हैं। यहाँ अंजू के 0-10 से हार के बाद विनेश फोगाट की मुश्किले बढ़ गई है। अब उनका आखिरी मुकाबला अंतिम पंघाल के साथ करो या मरो का होने वाला है। रेसलर अंजू से 0-10 से हारने के बावजूद विनेश फोगाट की पेरिस ओलंपिक 2024 खेलने की उम्मीद अभी भी जीवित है, लेकिन उसके लिए उन्हें अंतिम पंघाल को पटखनी देनी होगी। जो भी यह मुकाबला जीतने में कामयाब होगा, वहीं रेसलर पेरिस ओलंपिक 2024 में भारत का प्रतिनिधित्व करता हुआ नजर आएगा। अगर विनेश फोगाट अंतिम पंघाल को हराने में विफल रहती है तो उनके पेरिस ओलंपिक 2024 खेलने का सपना भी चकनाचूर हो जाएगा।

जानकारी के मुताबिक, पटिलाया के साई सेंटर में आयोजित वुमेंस रेसलिंग ट्रायल में भारतीय पहलवान विनेश फोगाट ने 3 घंटे तक ट्रायल शुरू नहीं होने दिए थे। फोगाट ने अधिकारियों से लिखित आश्वासन माँगा था कि वह 50 ओर 53 KG वेट कैटेगरी में लड़ना चाहती हैं। जिसके बाद जब तक फोगाट को लिखित में यह आश्वासन नहीं दिया गया था। तब तक उन्होंने वुमेंस रेसलिंग के ट्रायल्स शुरू नहीं होने दिए थे।

बजरंग पूनिया ने भी हार के बाद काटा था हंगामा

बता दें कि एक दिन पहले पहलवान बजरंग पूनिया भी 2024 के ओलंपिक के लिए आयोजित ट्रायल्स में हार गए थे। उन्हें पहलवान रोहित कुमार ने पटखनी दी। इस हार के बाद उन्होंने आखिरी राउंड का न तो मुकाबला लड़ा और न ही डोप के लिए सैंप दिया। बताया गया कि जब वह ट्रायल में हार गए तो गुस्से से बाहर निकल गए। उन्हें SAI के अधिकारियों ने रोका भी लेकिन वह नहीं रुके।

बजरंग पूनिया का नाम हालिया सुर्खियों में कुश्ती की वजह से कम और धरने प्रदर्शन की वजह से अधिक आया है। पूनिया, साक्षी मलिक और विनेश फोगाट के साथ दिल्ली में हुए पहलवान प्रदर्शन का नेतृत्व भी कर रहे थे। वह लगातार तत्कालीन कुश्ती संघ अध्यक्ष बृजभूषण शरण सिंह के विरुद्ध प्रदर्शन कर रहे थे और उन्हें हटाने की माँग कर रहे थे। बजरंग पूनिया इसके बाद राहुल गाँधी के साथ भी दिखे थे। राहुल गाँधी उनके यहाँ एक दिन पहुँचे थे और खाना भी खाया था। राहुल ने पूनिया के साथ कुश्ती के दांव पेंच भी आजमाए थे।

चीन और यूरोप के हिस्से भी भारत की जद में, अग्नि-5 के सफल परीक्षण पर PM मोदी ने वैज्ञानिकों को दी बधाई: स्वदेशी तकनीक से पूरा हुआ ‘मिशन दिव्यास्त्र’

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार (11 मार्च, 2024) को एक महत्वपूर्ण घोषणा की। उन्होंने DRDO (रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन) के हमारे उन वैज्ञानिकों पर गर्व जताया, जिन्होंने ‘मिशन दिव्यास्त्र’ को सफल कर के दिखाया है। पीएम मोदी ने अपने ट्वीट में लिखा कि स्वदेश में विकसित ‘अग्नि-5’ मिसाइल की पहली फ्लाइट टेस्टिंग सफलतापूर्वक पूरी कर ली गई है। इसके लिए ‘मल्टीपल इंडेपेंडेंटली टार्गेटेबल रीएंट्री व्हीकल’ (MIRV) तकनीक का इस्तेमाल किया गया है।

बता दें कि अग्नि-5 एक से अधिक वॉरहेड्स को तैनात करने में सक्षम है। भारत इसके साथ ही उन चुनिंदा देशों में शामिल हो गया है, जो MIRV तकनीक से लैस हैं। इसका अर्थ है कि एक मिसाइल के जरिए कई लोकेशनों पर वॉरहेड तैनात किए जा सकते हैं। न सिर्फ इस प्रोजेक्ट की डायरेक्टर एक महिला है, बल्कि कई महिला वैज्ञानिकों ने इसमें योगदान दिया है। इस मिसाइल में हाई-एक्यूरेसी सेंसर लगे हैं जिन्हें स्वदेश में ही विकसित किया गया है।

भारत के पास इस क्षमता का होना तकनीक के क्षेत्र में देश के बढ़ते कदम का भी द्योतक है। अग्नि-5 की रेंज 5000 किलोमीटर है। इसकी स्ट्राइकिंग रेंज में लगभग पूरा एशिया है। चीन का उत्तरी इलाका और यूरोप के कुछ हिस्से भी इसकी जद में हैं। वहीं अग्नि-1 से लेकर अग्नि-4 की बात करें तो ये मिसाइलें 700 से लेकर 3500 किलोमीटर की रेंज वाली हैं, जो पहले ही तैनात की जा चुकी हैं। भारत पृथ्वी की सीमा और इसकी सीमा से बाहर तक मार करने वाले बैलिस्टिक मिसाइलों को विकसित करने में लगातार आगे बढ़ रहा है।

ताज़ा तकनीक से भारत अपनी सुरक्षा को सुदृढ़ करने में भी सक्षम होगा। भारत के इस परीक्षण से पाकिस्तान और चीन जैसे पड़ोसी मुल्कों की नींद उड़नी तय है। तकनीक की बात करें तो अंतरिक्ष के क्षेत्र में भी भारत नए आयाम लिख रहा है। चन्द्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर उतरने वाला भारत पहला देश बना, जब चंद्रयान-3 का ‘प्रज्ञान’ रोवर और ‘रोवर और ‘विक्रम’ लैंडर वहाँ उतरा। साथ ही वहाँ से कई सूचनाएँ ISRO के पास आईं। मोदी सरकार के तीसरे कार्यकाल में ये प्रक्रियाएँ और तेज़ होने की उम्मीद है।

पूरे देश में लागू हुआ CAA, मोदी सरकार ने जारी की अधिसूचना: हंगामे की आशंका के बाद उठाए जा रहे पुख्ता कदम, सबसे ज्यादा आवेदन पाकिस्तान से

केंद्र सरकार ने CAA (नागरिकता संशोधन कानून) की अधिसूचना जारी कर दी है। इस कानून को बनाए जाने के 4 वर्षों बाद इसे नोटिफाई किया गया है। अब लोकसभा चुनाव 2024 से कुछ ही सप्ताह पहले इसे अधिसूचित कर दिया गया है, क्योंकि आचार संहिता लागू होने के बाद ये संभव नहीं हो पाता। इसके लिए ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन पोर्टल बनाया गया है, जिसका प्रशिक्षण पहले ही पूरा कर लिया गया है। जिलों के प्रशासन को लॉन्ग टर्म वीजा देने के लिए अधिकृत कर दिया गया है।

इसके लिए अप्लीकेशन भी बड़ी संख्या में आए हैं, जिसमें सबसे ज्यादा पाकिस्तान से हैं। इसके तहत पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बांग्लादेश के अल्पसंख्यकों (हिन्दू, सिख, ईसाई, बौद्ध, जैन और पारसी) को भारत की नागरिकता दी जा सकेगी, जिन पर वहाँ इस्लामी अत्याचार होता रहा है। दिसंबर 2014 तक इनमें से जो पीड़ित भारत में शरणार्थी बन कर रह रहे हैं, उन्हें अब यहाँ की स्थायी नागरिकता मिलेगी। मोदी सरकार के इस कदम के बाद देश में कई जगह विरोध प्रदर्शनों की आशंका है, जिसके लिए पुख्ता कदम उठाए जा रहे हैं।

दिल्ली, असम और पश्चिम बंगाल में सबसे अधिक हंगामे के आसार हैं। जब 2019 में CAA लाया गया था, तब दिल्ली के शाहीन बाग़ में खातूनों ने महीनों धरना दिया था, जिसके कारण राष्ट्रीय राजधानी एक तरह से बंधक बन गई थी और लोगों को आवाजाही में खासी परेशानी हुई थी। इसकी अधिसूचना नहीं जारी की जाती तो इस कानून को फिर से पारित कराना पड़ता। इससे बचने के लिए ये कदम उठाया गया है। ये पहले ही साफ़ किया जा चुका है कि CAA किसी की नागरिकता लेने के लिए नहीं, देने के लिए है।

पश्चिम बंगाल की TMC सरकार और केरल की CPM सरकार पहले ही धमकी दे चुकी है तो वो अपने-अपने राज्यों में CAA को लागू नहीं होने देंगे। ऐसे में ये एक बड़ा मुद्दा आगामी चुनाव के दौरान भी बन सकता है। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कहा है कि इसमें भेदभाव हुआ तो वो इसका विरोध करेंगी। CAA के कार्यान्वयन के लिए इसके नियमों की अधिसूचना को जारी करना आवश्यक था। भारत के पड़ोसी देशों में अल्पसंख्यकों की दयनीय स्थिति है।

‘संदेशखाली की महिलाएँ असली में पीड़ित हैं, हम कैसे मान लें’: TMC से टिकट पाने वाली हिरोइन ने गैंगरेप पीड़ितों पर ही उठाए सवाल

पश्चिम बंगाल की हुगली लोकसभा सीट से टीएमसी की उम्मीदवार बनाई गई रचना बनर्जी ने संदेशखाली की पीड़ित महिलाओं पर ही सवाल उठा दिए हैं। उन्होंने कहा कि हमें कैसे पता चलेगा कि जो महिलाएँ खुद को पीड़ित बता रही हैं, वो वास्तव में पीड़ित ही हैं। रचना बनर्जी ने कहा सोमवार (11 मार्च 2024) को संदेशखाली की पीड़ित महिलाओं पर सवाल उठाते हुए कहा कि जो लोग कैमरों पर इस घटना के बारे में बोल रहे हैं, वो वास्तव में पीड़ित हैं ही नहीं।

रचना बनर्जी ने आगे कहा, “जो नेता लोग संदेशखाली को लेकर बड़ी-बड़ी बातें कर रहे हैं, उन्हें वहाँ की महिलाओं से बात करनी चाहिए। उनकी बात पहले सुनो, फिर बोलो।” इस दौरान जब पत्रकारों ने कहा कि संदेशखाली की पीड़ित महिलाओं ने ही ये आरोप लगाए हैं, तो उन्होंने कहा, “हर कोई ऐसा (यौन उत्पीड़न) नहीं कह रहा है। हमें कैसे पता चलेगा कि जो लोग पीड़ित होने का दावा कर रहे हैं, वही असली पीड़ित हैं।”

संदेशखाली में हिंसा, जमीन पर कब्जों और महिलाओं के उत्पीड़न के मामले में टीएमसी नेताओं की संलिप्तता को भी रचना ने खारिज कर दिया। उन्होंने कहा, “पहले गवाहों के बयानों को वेरिफाई करना होगा और पता चलाना होगा कि क्या ऐसी घटनाएँ (टीएमसी नेताओं द्वारा महिलाओं का यौन उत्पीड़न) वास्तव में हुई भी हैं?” खुद ही अपने मुताबिक उन्होंने फैसला भी सुना दिया, “अगर ऐसी घटनाएँ हुई ही हैं, तो उन्हें ठीक करने के लिए हमारे पास दीदी (ममता बनर्जी) हैं।” वैसे, रचना उन्हीं ममता का संदर्भ दे रही हैं, जिन्होंने उन्हें हुगली लोकसभा सीट से टिकट दिया है और जो खुद इन घटनाओं को छोटी-मोटी घटनाएँ कहकर खारिज कर चुकी हैं।

रचना बनर्जी के बयान पर उनके खिलाफ हुगली में लोकसभा चुनाव लड़ रही बीजेपी की मौजूदा सांसद लॉकेट चटर्जी ने कड़ी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने एक्स पर लिखा, “हुगली से टीएमसी कैंडिडेट ही संदेशखाली में महिला उत्पीड़न के दावों को खारिज कर रही रही हैं, जिससे उनकी विश्वसनीयता पर संदेह पैदा होता है। माताओं, पत्नियों और बेटियों से दुर्व्यवहार की कई गवाही के बावजूद, तृणमूल नेता अज्ञानता का बहाना करते हुए आंखें मूँद रही हैं।”

उन्होंने आगे कहा, “चौंकाने वाली बात ये कि पीड़ितों ने खुद बताया है कि कैसे तृणमूल नेता रात की आड़ में बेखौफ होकर यौन उत्पीड़न जैसे जघन्य कृत्य करते हैं। फिर भी, पार्टी बेशर्मी से किसी भी गलत काम से इनकार करती है। अगर कुछ नहीं हुआ तो शेख शाहजहाँ को निलंबित क्यों किया गया।” उन्होंने टीएमसी को पाखंडी करार दिया और रचना बनर्जी को भी।

अपने ट्वीट में उन्होंने आगे कहा, “बंगाल की मुख्यमंत्री उत्पीड़न को तो स्वीकार करती हैं, लेकिन अपनी पार्टी की भूमिका पर चुप्पी साध लेती हैं। इसकी वजह से पीड़ितों को न्याय नहीं मिल पा रहा है। टीएमसी के शासनकाल में बंगाल की महिलाओं को लगातार उत्पीड़न सहना पड़ता है, जबकि तृणमूल नेता बेशर्मी से मुआवजे के रूप में मात्र 500 रुपये की पेशकश करते हैं। पूरे बंगाल के साथ-साथ हुगली की महिलाएँ भी महिला विरोधी तृणमूल के खिलाफ जवाबी कार्रवाई करने का संकल्प लेती हैं, जिससे उनकी सत्ता से शीघ्र विदाई सुनिश्चित हो सके।”

बता दें कि रचना बनर्जी मशहूर बंगाली टीवी शो ‘दीदी नंबर 1’ की होस्ट हैं। उन्हें टीएमसी ने हुगली लोकसभा सीट से उम्मीदवार बनाया है। खुद ममता बनर्जी 3 मार्च को उनके शो में बतौर मेहमान नजर आई थी।

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एक महीने से कोमा में है ए़डल्ट फिल्मों की हिरोइन एमिली विलीस … हालत गंभीर: 2 महीने में जा चुकी है 3 पोर्न स्टार की जान

पिछले कुछ दिनों से एडल्ट फिल्मों की हिरोइनों को लेकर बहुत सी चौंकाने वाली खबरें आ रही हैं। हाल ही में एक स्टार सोफिया लियोनी का निधन हुआ था और अब पता चला कि एक और एडल्ट स्टार एमिली विलिस वेंटिलेटर पर जिंदगी और मौत के बीच पिछले एक महीने से लड़ रही हैं।

एमिली को पिछले महीने हार्ट अटैक आया था। उसके बाद से वो अब तक कोमा में है और एक भी बार उन्होंने अपनी आँख नहीं खोली है। उनकी हालत बेहद गंभीर है। बताया जा रहा है कि एमिली को हार्ट अटैक रिहैब सेंटर में रहने के दौरान आया।

पहले कहा गया कि ड्रग ओवरडोज के कारण उन्हें ये अटैक आया। लेकिन उनके पिता ने कहा कि ये बात गलत है और टॉक्सीलॉजी रिपोर्ट नेगेटिव आई है। एमिली के पिता ने उनके कोमा में होने की बात की पुष्टि की है।

गौरतलब है कि एमिली ने एडल्ट इंडस्ट्री को दो साल पहले अलविदा कह दिया था लेकिन वो अपने फैंस से लगातार सोशल मीडिया के जरिए जुड़ी हुईं थीं। उनके फैंस उनके जल्द ठीक होने की कामना कर रहे हैं। वहीं कुछ लोग उनकी हालत देखकर ये भी कह रहे हैं कि एमिली को कुछ भी हो सकता है।

बता दें कि इससे पहले पॉर्न स्टार सोफिया लियोनी के निधन की खबरों ने एडल्ट इंडस्ट्री को हिलाकर रख दिया था। अमेरिका की 26 साल की एडल्ट स्टार 1 मार्च को मृत पाई गई थीं। उससे पहले काग्ने लिन कार्टर के सुसाइड की खबरों ने सबको झकझोर दिया था। काग्ने की उम्र भी मात्र 25 ही रही होगी जब उन्होंने आत्महत्या की। इसी तरह जनवरी में जैसे जेन भी ओकलाहोमा में मृत मिलीं थीं।

संदेशखाली पर ममता बनर्जी सरकार को सुप्रीम कोर्ट से झटका, CBI जाँच के खिलाफ डाली थी याचिका: हाईकोर्ट ने कहा था – बंगाल पुलिस ने शाहजहाँ शेख को बचाया

सुप्रीम कोर्ट से पश्चिम बंगाल सरकार को झटका लगा है। मामला संदेशखाली में महिलाओं के यौन शोषण से जुड़ा है। इस मामले में सत्ताधारी TMC (तृणमूल कॉन्ग्रेस) के नेता शाहजहाँ शेख को गिरफ्तार किया जा चुका है, जिसे बचाने के लिए राज्य की व्यवस्था ने दिन-रात एक कर दिया था। कलकत्ता उच्च न्यायालय ने इस मामले को CBI को सौंपने का आदेश दिया था। TMC सरकार इस आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट पहुँच गई, लेकिन वहाँ भी उसे निराशा हाथ लगी है।

सुप्रीम कोर्ट ने कलकत्ता हाईकोर्ट के आदेश को बरकरार रखा है, इसके खिलाफ फैसले देने से मना कर दिया है। हालाँकि, सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल सरकार और पुलिस की कार्यप्रणाली पर उच्च न्यायालय द्वारा टिप्पणी को हटाने के निवेदन पर सहमति जताई। जस्टिस BR गवई और संदीप मेहता ने इस स्पेशल लीव पेटिशन पर सुनवाई की। कलकत्ता हाईकोर्ट ने मुख्य अभियुक्त शाहजहाँ शेख को भी CBI की कस्टडी में भेजने का आदेश दिया है। हाईकोर्ट ने शाहजहाँ शेख के राजनीतिक प्रभाव को लेकर टिप्पणी की थी।

हाईकोर्ट ने न सिर्फ पश्चिम बंगाल पुलिस को पक्षपाती बताया था बल्कि ये भी कहा था कि जाँच में देरी के लिए पूरा प्रयास किया जा रहा है ताकि मुख्य अभियुक्त को बचाया जा सके। उस समय शाहजहाँ शेख 50 दिनों से फरार था। सुप्रीम कोर्ट में हुई ताज़ा सुनवाई में TMC सरकार की तरफ से अभिषेक मनु सिंघवी और जयदीप दत्ता ने जिरह की। वहीं के वकील ने बताया कि बंगाल पुलिस ने शाहजहाँ शेख को गिरफ़्तारी से बचने और भगाने में मदद की।

सॉलिसिटर जनरल ने कहा कि हाईकोर्ट की टिप्पणी में तथ्य हैं, लेकिन विवाद को खत्म करने के लिए उसे डिलीट किया जा सकता है। इस पर हाईकोर्ट ने कहा कि टिप्पणी हटाने पर कोई आपत्ति नहीं है, लेकिन आदेश से कोई छेड़छाड़ नहीं की जाएगी। शाहजहाँ शेख नॉर्थ 24 परगना में जिला परिषद का कर्माध्यक्ष भी है। उसके खिलाफ संदेशखाली में 42 से भी अधिक मामले दर्ज हैं। पूरे देश में संदेशखाली के महिलाओं की पीड़ा पर चर्चा हुई।