लोकसभा चुनाव 2024 से पहले मध्य प्रदेश में कॉन्ग्रेस को बड़ा झटका लगा है। यहाँ पूर्व केंद्रीय मंत्री, पूर्व सांसद और कई पूर्व विधायकों ने कॉन्ग्रेस को छोड़कर बीजेपी ज्वॉइन कर लिया है। इसकी अगुवाई पूर्व केंद्रीय मंत्री और चार बार राज्यसभा सांसद रहे सुरेश पचौरी ने की, जिनके साथ पूर्व सांसद गजेंद्र सिंह राजूखेड़ी और कई विधायक भी बीजेपी में शामिल हुए।
इन नेताओं ने मुख्यमंत्री डॉक्टर मोहन यादव, पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान, वरिष्ठ नेता कैलाश विजयवर्गीय, बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा की मौजूदगी में पार्टी का दामन थामा। सुरेश पचौरी मध्य प्रदेश में कॉन्ग्रेस के बड़े नेता माने जाते हैं और ब्राह्मणों में उनकी खूब पैठ है। भोपाल स्थित बीजेपी दफ्तर में पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने सुरेश पचौरी का स्वागत किया और कहा, ‘देर आए, दुरुस्त आए।’
सुरेश पचौरी का राजनैतिक सफर
सुरेश पचौरी ने 1972 में एक युवा कॉन्ग्रेस कार्यकर्ता के रूप में अपना राजनीतिक जीवन शुरू किया था। 1984 में राज्य युवा कॉन्ग्रेस अध्यक्ष बने। वो कॉन्ग्रेस सेवा दल के अध्यक्ष भी रहे। लगातार चार बार राज्यसभा सांसद रहे। पचौरी सबसे पहले 1984 में राज्यसभा के लिए चुने गए थे, इसके बाद वो साल 1990, 1996 और 2002 में फिर से राज्यसभा सांसद बने। पचौरी कॉन्ग्रेस की सरकार में कई मंत्रालयों के केंद्रीय राज्य मंत्री की जिम्मेदारियाँ संभाल चुके हैं।
बीजेपी से जुड़ने वाले कॉन्ग्रेस के वरिष्ठ नेता गजेंद्र सिंह राजूखेड़ी 1998 से 2004 तक सांसद रहे थे, इसके बाद वो फिर से 2009 से 2014 तक सांसद रहे। लेकिन कॉन्ग्रेस ने उनका टिकट काट दिया, जिसके बाद से वो नाराज चल रहे थे, यही नहीं, उन्होंने राहुल गाँधी की न्याय यात्रा से भी दूरी बनाए रखी थी।
बीजेपी ज्वॉइन करने वाले नेताओं में इंदौर-1 के पूर्व विधायक संजय शुक्ला भी हैं। उन्होंने विधानसभा चुनाव में कैलाश विजयवर्गीय के सामने कड़ी चुनौती पेश की थी। वो वरिष्ठ नेता विष्णु प्रसाद शुक्ला के बेटे हैं। उनके चचेरे भाई गोलू शुक्ला भी बीजेपी से विधायक हैं। संजय शुक्ला को कमलनाथ का करीबी माना जाता है। ऐसे में जब जीतू पटवारी प्रदेश अध्यक्ष बने, तो उन्हें किनारे लगा दिया गया। तभी से चर्चाएं चल रही थी कि वो बीजेपी का दामन थाम सकते हैं।
सुरेश पचौरी ने दो दिन पहले दिया था कॉन्ग्रेस से इस्तीफा
दो दिन पहले पूर्व केंद्रीय मंत्री सुरेश पचौरी ने इस्तीफा दिया था। उन्होंने अपने इस्तीफे में लिखा था कि मैंने पूरी ईमानदारी से सरकार और पार्टी की सेवा की, लेकिन आज जिस तरह से पार्टी द्वारा सार्वजनिक और धार्मिक महत्व के मामलों में फैसले लिए जा रहे हैं, उससे मुझे बहुत दुख पहुँचा है। मैं समझता हूँ कि आज कॉन्ग्रेस पार्टी उन सिद्धांतों से भटक गई है जिनके लिए वह चली थी। इसलिए मैं प्राथमिक सदस्यता के साथ-साथ सभी सदस्यता से इस्तीफा दे रहा हूँ।
इन नेताओं को बीजेपी ज्वॉइन कराने के बाद मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि आज का दिन ऐतिहासिक है। हम लोगों को पता था कि जहाँ-जहाँ राहुल गाँधी जाते हैं, वहाँ लोग पार्टी छोड़ देते हैं। हर पार्टी में अच्छे लोग होते है। कोई स्वाभिमानी व्यक्ति ऐसे माहौल में काम नहीं करना चाहता है। राहुल गाँधी अपने बड़े नेताओं का सम्मान नहीं करते हैं।
उत्तर प्रदेश के अम्बेडकरनगर स्थित दरगाह पर जियारत करने गई महाराष्ट्र के मुंबई की 24 वर्षीया महिला से रेप की खबर है। रेप का आरोप किछौछा के 50 साल के मौलाना पर लगा है, जिसका नाम सैयद मोहम्मद अशरफ है। आरोप है कि मोहम्मद अशरफ ने पीड़िता को रूहानी ताकतों का डर दिखाया और फिर रेप किया। इसके बाद पीड़िता को मुँह खोलने पर पूरे परिवार को खत्म करने की धमकी दी।
पुलिस ने केस दर्ज करके 50 वर्षीय आरोपित मौलाना सैयद मोहम्मद अशरफ को गिरफ्तार कर लिया है। घटना गुरुवार (7 मार्च 2024) की है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, मामला अम्बेडकरनगर के बसखारी थाना क्षेत्र का है। यहाँ किछौछा शरीफ नाम की एक दरगाह है, जहाँ देश-विदेश से जायरीन आते हैं। इन्हीं लोगों में एक पीड़िता भी है, जो महाराष्ट्र की है।
पीड़िता अपने परिवार के साथ अंबेडकरनगर में स्थित किछौछा शरीफ दरगाह पर जियारत करने के लिए आई थी। यहाँ महिला को दरगाह का मौलाना मोहम्मद अशरफ मिला। उसे दरगाह में शमशाद नाम से भी जाना जाता है। आरोप है कि अशरफ ने पीड़िता पर बुरी रूहों का डर दिखाया और रूहानी ताकत से उसके इलाज का दावा किया। महिला मौलाना की बातों में आ गई।
आज दिनांक 08.03.2024 को जनपद अम्बेडकरनगर थाना बसखारी पुलिस टीम द्वारा थाना स्थानीय पर पंजीकृत दुष्कर्म के अभियोग से सम्बन्धित अभियुक्त सैय्यद मोहम्मद अशरफ पुत्र इनाम अशरफ को किया गया गिरफ्तार। pic.twitter.com/1idarGWLPB
— AMBEDKARNAGAR POLICE (@ambedkarnagrpol) March 8, 2024
गुरुवार (7 मार्च 2024) को रूहानी इलाज के नाम पर मौलाना ने पीड़िता के परिजनों को दुआ-ताबीज (हाजिरी) प्रक्रिया की बात कहकर बाहर खड़ा रहने के लिए कहा। महिला को अपने कमरे में ले जाकर उसने रेप किया। जब पीड़िता ने विरोध किया तो मौलाना अशरफ ने उसे पूरे परिवार सहित खत्म करने की धमकी दी।
जब लगभग 1 घंटे बीत जाने पर भी दरवाजा नहीं खुला तो पीड़िता के परिजनों ने जबरन दरवाजा खुलवाया। दरवाजा खुलते ही पीड़िता ने रो-रो कर अपने घर वालों को अपने साथ हुए कुकृत्य की जानकारी दी। हालाँकि इसके बावजूद मोहम्मद अशरफ ने माफ़ी माँगने के बजाय कहीं भी शिकायत करने पर भी गंभीर परिणाम भुगतने की भी चेतावनी दे डाली।
आखिरकार महिला ने हिम्मत करके स्थानीय थाना बसखारी में मौलाना के खिलाफ शिकायत दर्ज करवाई। पुलिस ने FIR दर्ज करके मौलाना मोहम्मद अशरफ को गिरफ्तार कर लिया है। मौलाना पर भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 376, 342 और 506 के तहत कार्रवाई की गई है। पुलिस ने मौलाना अशरफ को शुक्रवार (8 मार्च 2024) की सुबह 9 बजे जलालपुर रोड से दबोच लिया।
वहीं, पीड़िता का मेडिकल परीक्षण करवाया गया है। पुलिस मामले की जाँच कर रही है। पुलिस ने जल्द से जल्द केस की जाँच पूरी कर के चार्जशीट लगाने और मामले की सुनवाई फास्ट ट्रैक कोर्ट में कराने का आश्वासन दिया है। पुलिस का दावा है कि ऐसे लोगों को चिन्हित करने की कार्रवाई की जा रही है। आरोपित और पीड़िता एक ही समुदाय से हैं।
पाकिस्तान में ईशनिंदा के आरोप में एक 22 साल के छात्र को फाँसी की सजा से दी गई, तो दूसरे 17 साल के नाबालिग छात्र को उम्रकैद की। आरोप है कि दोनों छात्रों ने इस्लाम के पैगंबर मोहम्मद और उनकी पत्नियों के बारे में आपत्तिजनक बातें कही और उनसे जुड़ा वीडियो भी बनाया। दोनों ने ईशनिंदा संबंधित सामग्री को वॉट्सऐप पर शेयर भी किया। ये मामला पाकिस्तान के कब्जे वाले पंजाब का है।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, साल 2022 में ये मामला गुजराँवाला में दर्ज हुआ था। जहाँ इन दोनों छात्रों को ईशनिंदा के मामले में गिरफ्तार किया गया था। ये कार्रवाई साल 2022 में लाहौर में पाकिस्तान की संघीय जाँच एजेंसी की साइबर अपराध इकाई द्वारा दर्ज की गई शिकायत के बाद की गई थी। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि उसे तीन अलग-अलग मोबाइल फोन नंबरों से वीडियो और तस्वीरें मिलीं।
एफआईए ने कहा कि उसने शिकायतकर्ता के फोन की जाँच की और पाया कि उसे “अश्लील सामग्री” भेजी गई थी। इस मामले में 22 साल के छात्र को फाँसी की सजा सुनाई गई, तो दूसरे को नाबालिग होने के चलते उम्रकैद की सजा दी गई। वहीं, बचाव पक्ष ने कहा कि दोनों छात्रों को साजिशन फंसाया गया है और इस फैसले के खिलाफ छात्रों के पिता लाहौर हाई कोर्ट में अपील दायर करेंगे। उन्हें उम्मीद है कि छात्र बेगुनाह साबित होंगे।
भारत में भी कानून, लेकिन सजा सख्त नहीं
पाकिस्तान में साल 1980 से पहले ईशनिंदा को लेकर कोई कड़ा कानून नहीं था, लेकिन साल 1980 में पाकिस्तान की सैन्य तानाशाही के दौरान इसे पूरे पाकिस्तान में लागू कर दिया गया। वहीं, भारत की बात करें तो भारत में ईशनिंदा पर कोई अलग कानून नहीं है, बल्कि आईपीसी की धारा 295 के तहत अगर कोई किसी धार्मिक स्थल को नुकसान पहुंचाने की कोशिश करता है तो उसे दो साल तक की जेल या जुर्माना भरना पड़ सकता है। भारत में संविधान के अनुच्छेद 19ए के तहत अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता है, जिसके तहत हम आलोचना करने के लिए स्वतंत्र हैं, जब तक कि इससे किसी की धार्मिक भावनाएं आहत न हों।
राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (NIA) ने 8 मार्च 2024 को प्रतिबंधित आतंकी संगठन पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (PFI) के वांछित आतंकियों के नाम जारी किए। NIA ने नाम, पता एवं अन्य विवरण के साथ इन आतंकियों की तस्वीर भी जारी की है और लोगों से इनके बारे में जानकारी माँगी गई है। जिन लोगों के नाम जारी किए हैं, वे दक्षिण भारत के विभिन्न राज्यों से ताल्लुक रखते हैं।
NIA ने इसकी जानकारी सोशल मीडिया पर साझा करते हुए कहा कि इन आतंकियों की गिरफ्तारी के लिए जो कोई भी जानकारी देगा, उन लोगों को उचित इनाम दिया जाएगा। इसके साथ ही सूचना देने वाले लोगों के नाम को गोपनीय रखने की बात भी कही गई है। इसमें दो अज्ञात पुरुषों के बारे में भी पूछा गया है। एजेंसी ने इसके के लिए एक व्हाट्सएप नंबर भी दिया है।
प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया है, “यदि आपके पास इनके वर्तमान ठिकाने या अन्य कोई जानकारी है, जो उनकी गिरफ्तारी का कारण बन सकती है तो कृपया व्हाट्सएप नंबर +91-9497715294 पर माध्यम से साझा करें। भगोड़ों की गिरफ्तारी के लिए विश्वसनीय जानकारी साझा करने वाले व्यक्तियों को उचित पुरस्कार दिया जाएगा। सूचना देने वाले की पहचान गुप्त रखी जाएगी।”
वांछित अपराधियों में आंध्र प्रदेश के नेल्लोर जिले के शेख इलियास अहमद, तेलंगाना के जगतियाल के अब्दुल सलीम और निज़ामाबाद के एमडी अब्दुल अहद का नाम शामिल है। अब्दुल अहद को एमए अहद के नाम से भी जाना जाता है। अगली सूची में केरल के एर्नाकुलम जिले के अब्दुल वहाब वीए, पलक्कड़ जिले से अब्दुल रशीद के और एर्नाकुलम जिले से अय्यूब टीए और एक अज्ञात व्यक्ति की तस्वीर भी है।
केरल के और जिन आतंकियों की NIA को तलाश है, उसमें पलक्कड़ जिले के मुहम्मद मंज़ूर, शाहुल हमीद और मुहम्मदअली केपी शामिल हैं। इसके अलावा, केरल के एर्नाकुलम जिले के मुहम्मद याज़र अराफात उर्फ यासिर, रफीक एमएस और मलप्पुरम जिले के शफीक पी को राष्ट्रीय आतंकवाद निरोधी एजेंसी को तलाश है।
कर्नाटक के जिन आतंकियों की NIA को तलाश है, उनमें दक्षिण कन्नड़ जिले के मोहम्मद मुस्तफा, मसूद के नाम से पहचाना जाने वाला मसूद अगनाडी, मोहम्मद शेरिफ कोडाजे, उमर आर उर्फ उमर फारूक और अबुबकर सिद्दीकी सिद्दीकी शामिल हैं।
तमिलनाडु के जिन आतंकियों की तलाश है, उनमें थिरुबुवनम से एमडी अली जिन्ना, कुंभकोणम से अब्दुल मजीथ, वडक्कुमनगुडी से भुरकानुदीन के साथ-साथ थिरुविदाईमारुथुर के 0शाहुल हमीद और नफील हसन की तलाश है। इसके अलावा, भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेता की हत्या में शामिल एक व्यक्ति की तीन तस्वीरें भी एक अपील के साथ जारी की गई हैं।
अपील में लिखा है, “नीचे दी गई तस्वीरों में दिखाया गया अज्ञात व्यक्ति केरल के पलक्कड़ के निवासी रंजीत श्रीनिवासन की 6.4.2022 को हुई हत्या में शामिल था। वह एनआईए आरसी-02/2022/एनआईए/केओसी (पीएफआई केरल मामला) में वांछित है। ययदि आपके पास उनके बारे में कोई जानकारी है, तो कृपया इसे व्हाट्सएप @9497 715 294 के माध्यम से साझा करें या [email protected] पर ईमेल के माध्यम से भेजें।”
दरअसल, 19 दिसंबर 2021 को सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी ऑफ इंडिया (SDPI) के कार्यकर्ताओं ने रंजीत श्रीनिवास की केरल के अलाप्पुझा जिले में स्थित उनके आवास पर हत्या कर दी थी। SDPI इस्लामी संगठन PFI की राजनीतिक शाखा है। वह भाजपा केरल समिति के सदस्य और ओबीसी मोर्चा (राज्य) के सचिव थे। उन्होंने 2016 में अलाप्पुझा निर्वाचन क्षेत्र से भाजपा से चुनाव लड़ा था।
बिगबॉस ओटीटी-2 विनर यूट्यूबर एल्विश यादव के खिलाफ एफआरआर दर्ज हो गई है। उसके खिलाफ यूट्यूबर सागर ठाकुर उर्फ मैक्सटर्न ने गुरुग्राम के सेक्टर 53 थाने में एफआईआर दर्ज कराई है। इस मामले से जुड़ा एक वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है, जिसमें एल्विश यादव अपने साथियों के साथ सागर ठाकुर उर्फ मैक्सटर्न को पीटते और भद्दी गालियाँ देते दिख रहा है।
यूट्यूबर सागर ठाकुर उर्फ मैक्सटर्न ने दावा किया कि एल्विश यादव ने उसकी रीढ़ की हड्डी तोड़ने की कोशिश की और उसे जान से मारने की धमकी दी। ठाकुर एक कंटेंट क्रिएटर हैं, जिनकी सोशल मीडिया पर अच्छी फैन-फॉलोविंग है। सागर ठाकुर ने अपनी शिकायत में कहा कि वह और यादव एक-दूसरे को 2021 से जानते हैं। एल्विश यादव के फैन्स लगातार उसके खिलाफ नफरत फैला रहे थे। इस मारपीट का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल भी हो रहा है, जिसमें एल्विश और उसके साथी सागर ठाकुर को पीटते और भद्दी गालियाँ देते नजर आ रहे हैं।
मारपीट का ये वीडियो करीब 5 मिनट का है, जिसमें वो ‘जान से मारने’ की धमकी भी देते दिख रहे हैं। इस वीडियो में एल्विश और उसके साथी सागर ठाकुर को पीटते हुए साफ दिख रहे हैं। वहीं, हरे रंग के कपड़ों में पीड़ित सागर ठाकुर है। इसी मारपीट के मामले में एल्विश यादव औऱ उसके साथियों के खिलाफ आईपीसी के सेक्शन 147, 149, 323 और 506 के तहत केस दर्ज किया गया है।
— Ashwini Shrivastava (@AshwiniSahaya) March 8, 2024
इस पूरे घटनाक्रम के बाद सागर ठाकुर ने एक वीडियो जारी किया और पूरी बात बताई। सागर ने दावा किया, “जब एल्विश स्टोर पर आया, तो उसने सीधे मुझे मारा और उसके साथियों ने भी गालियाँ देते हुए पीटना शुरू कर दी। एल्विश यादव ने मेरी रीढ़ की हड्डी तोड़ने की कोशिश की ताकि मैं शारीरिक रूप से बेकार हो जाऊँ। एल्विश ने जाने से पहले मुझे जान से मारने की धमकी भी दी।”
इस वीडियो में सागर ने गुरुग्राम पुलिस पर एल्विश को बचाने के भी आरोप लगाए और कहा, “एल्विश के ऊपर एक भी वो सेक्शन नहीं लगा, जो मैंने एफआईआर में लिखवाई थी। हरियाणा में इस तरह गुंडागर्दी चल रही है कि एक बंदा आता है मारता है और उसके खिलाफ कोई एक्शन नहीं होता। इसे क्या समझा जाए, जिसके पास पैसा है वो कुछ भी कर सकता है। अगर मुझे कुछ भी होता है, तो इसके जिम्मेदार एल्विश यादव होंगे।” सागर ने सीएम खट्टर से भी मदद की गुहार लगाई।
I was brutally attacked and assaulted by @ElvishYadav, who openly issued death threats to me. All the evidence is available on the internet. But, When I went to the police station to file an FIR, the SHO lodged it under IPC 147, 149, 323, and 506. Unfortunately, these are… pic.twitter.com/UC2U4n1Gee
ये पूरा मामला उन तस्वीरों के सामने आने के बाद शुरू हुआ था, जिसमें एल्विश यादव मुनव्वर फारूकी के गले मिलते नजर आए थे। इसके बाद सोशल मीडिया पर एल्विश यादव को निशाना बनाया। सागर भी उनमें से एक थे, जिन्होंने एल्विश को निशाना बनाया। इसी दौरान दोनों पक्षों की ओर से तीखी बहस भी हुई थी और फिर मारपीट की ये घटना सामने आई। पूरे मामले को जानने के लिए ये खबर पढ़ें।
अयोध्या में महाशिवरात्रि के मौके पर कुबेर टीला स्थित महादेव के मंदिर में 20 साल बाद पूजा-अर्चना हुई। खुद रामलला इस पूजा में मौजूद रहे। माना जाता है कि इस मंदिर का निर्माण सबसे पहले भगवान राम के पूर्वज रघु ने कराया था। पीएम मोदी ने 20 साल बाद कुबेर टीला मंदिर में पहली बार पूजा की थी।
जानकारी के मुताबिक, श्री राम जन्मभूमि परिसर में कुबेर टीले पर स्थित शिव मंदिर में इस शिवरात्रि को धूमधाम से महाभिषेक हुआ। इस पूजन के समय खुद रामलला भी मौजूद रहे। साल 2005 तक यहाँ पूजा भी होती थी और मेले का भी आयोजन होता था। लेकिन राम मंदिर पर आतंकवादी हमले के बाद से इस जगह पर पूजा अर्चना बंद हो गई थी और मेला लगना भी बंद हो गया था। लेकिन रामलला के भव्य मंदिर के साथ ही इस जगह को भी फिर से विकसित किया।
बता दें कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जब रामलला की प्राण प्रतिष्ठा के लिए अयोध्या में थे, तो प्राण प्रतिष्ठा से पहले उन्होंने कुबेर टीला के इसी शिव मंदिर पहुँचे थे और महादेव की पूजा की थी। यह वही स्थान है, जहाँ के लिए मान्यता है कि कुबेर ने इस स्थान पर भगवान शिव की पूजा करके उन्हें प्रसन्न किया था। ये मंदिर पूरी तरह से उजड़ गया था, लेकिन राम मंदिर के निर्माण के साथ ही कुबेर टीला स्थित इस शिव मंदिर का भी जीर्णोद्धार किया गया है।
महाशिवरात्रि के पावन पर्व पर पुष्प मालिकाओं से सुसज्जित कुबेर टीला स्थित महादेव मंदिर
Floral Decoration at Mahadev Mandir at Kuber Tila, on the auspicious festival of Mahashivratri. pic.twitter.com/SLHNqdD492
— Shri Ram Janmbhoomi Teerth Kshetra (@ShriRamTeerth) March 8, 2024
अयोध्या में निकली भोले की बारात
अयोध्या में महाशिवरात्रि के अवसर पर शिव जी की बारात धूमधाम से निकली। इस बारात में पूरी अयोध्या नगरी के लोग धूम-धाम से शामिल हुए।
#WATCH | 'Shiv Baraat' procession taken out in Uttar Pradesh's Ayodhya, on the occasion of Mahashivratri pic.twitter.com/NB5Vlo4g58
राम जन्मभूमि परिसर स्थित कुबेर टीला भारतीय पुरातात्विक सर्वेक्षण में भी दर्ज किया गया था। अब इसकी जिम्मेदारी राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को दे दी गई है। साल 1992 में अधिग्रहण के दौरान टीले को भी परिसर की हद में शामिल कर लिया गया था। इस स्थान पर महाशिवरात्रि एक विशाल मेले का भी आयोजन किया जाता था। यह परंपरा 19 साल पहले वर्ष 2005 तक निरंतर चलती रही। आतंकवादी हमले के बाद पूरी तरह से इस पर रोक लगा दी गई।
केंद्रीय जाँच ब्यूरो (CBI) ने शुक्रवार (8 मार्च 2024) को संदेशखाली में महिलाओं का यौन उत्पीड़न करने के आरोपित शाहजहाँ शेख के घर पर छापेमारी की। यह छापेमारी प्रवर्तन निदेशालय (ED) के अधिकारियों पर किए गए हमले के मामले में की गई है। वहीं, सत्ताधारी तृणमूल कॉन्ग्रेस (TMC) से बर्खास्त शाहजहाँ शेख पूछताछ में सीबीआई अधिकारियों को सहयोग नहीं कर रहा है।
ED के अधिकारियों पर हमले के संबंध में सबूत जुटाने के लिए अधिकारी संदेशखाली स्थित सरबेरिया के अकुंचीपारा इलाके में गए। इसके बाद अधिकारी उसके कार्यालय गए। छापेमारी करने वाली 14-सदस्यीय टीम में सीबीआई के छह अधिकारी और केंद्रीय फोरेंसिक के 6 अधिकारियों के अलावा प्रवर्तन निदेशालय के अधिकारी भी शामिल थे। ईडी के यही दो अधिकारी हमले में घायल हुए थे।
न्यूज 18 की रिपोर्ट के मुताबिक, इस मामले में सीबीआई की टीम शाहजहाँ शेख से लगातार पूछताछ कर रही है। हालाँकि, वह सीबीआई के सवालों का सीधा-सीधा उत्तर देने की जगह अधिकारियों को उलझाने में लगा हुआ है। कभी बस कंडक्टर का काम करने वाले शाहजहाँ शेख की जन्म कुंडली बनाने में सीबीआई के आधा दर्जन अधिकारी लगे हुए हैं।
सीबीआई उससे जानना चाह रही है कि घटना वाले दिन ईडी अधिकारियों के उसके यहाँ जाने की खबर उसे कैसे मिली थी। क्या किसी सरकारी अधिकारी ने उसे यह खबर दी थी? इसके अलावा, बंगाल पुलिस के कई अधिकारी भी सीबीआई की रडार पर हैं। दरअसल, ईडी अधिकारियों पर हमले के बाद जो बयान दर्ज हुए थे, उससे संबंधित धाराएँ एफआईआर में नहीं जोड़ी गई हैं।
यह एफआईआर बंगाल पुलिस के SI पिनाकी सरकार द्वारा दर्ज की गई थी। इतना ही, घटना वाले दिन ईडी अधिकारियों के कई महत्वपूर्ण दस्तावेज, लैपटॉप, मोहर प्रिंटर मोबाइल फोन आदि भी गायब हुए थे। इनके बारे में बंगाल पुलिस अभी तक कोई सुराग नहीं लगा पाई है। इसको लेकर जाँच एजेंसी को डर है कि उनका गलत इस्तेमाल ना कर लिया जाए।
दरअसल, प्रवर्तन निदेशालय के अधिकारी राज्य के राशन घोटाले की जाँच के सिलसिले में 5 जनवरी 2024 को उसके घर पर छापेमारी करने गए थे। इसी दौरान लगभग 3000 लोगों की भीड़ ने अधिकारियों पर हमला कर दिया था। इस हमले में कई अधिकारी और सीआरपीएफ के जवान घायल हो गए थे।
शाहजहाँ को प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के अधिकारियों पर हमले से संबंधित दो मामलों में गिरफ्तार किया गया है। ये अधिकारी राशन घोटाले के संबंध जाँच के लिए उसके आवास पर गए थे। इसी दौरान उन पर हमला हुआ था। अधिकारियों ने बताया, “उस पर 147 (दंगा) और 307 (हत्या का प्रयास) सहित भारतीय दंड संहिता (IPC) की विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज किया गया था।”
सामने आए रिमांड कॉपी के पहले पन्ने में कहा गया है कि शाहजहाँ ने जाँच अधिकारी के सामने अपना अपराध कबूल कर लिया है। उसने माना है कि ईडी अधिकारियों पर हमले में उसकी संलिप्तता थी। इसमें यह भी लिखा है कि शाहजहाँ एफआईआर में नामित आरोपित है। वह अपने क्षेत्र में प्रभावशाली है और जमानत पर रिहा होने के बाद उसके फरार होने और मामले के गवाहों को धमकी देने की पूरी आशंका है।
उसमें आगे कहा गया है कि इस हमले में बड़ी संख्या में उपद्रवी शामिल हैं, जिनकी सही ढंग से पहचान करना जरूरी है। शेख ही एकमात्र व्यक्ति है, जो फरार आरोपितों की जानकारी दे सकता है। इस मामले में अब तक लूटे गए सामानों की बरामदगी नहीं हो सकी है। आरोपित ने अपने गुर्गों द्वारा लूटे गए सामान को गुप्त स्थानों से बरामद करने में पुलिस की मदद करने का आश्वासन दिया है।
बता दें कि शाहजहाँ शेख को बंगाल पुलिस ने गुरुवार (29 फरवरी) की सुबह नॉर्थ 24 परगना के मीनाखान इलाके से उसे गिरफ्तार किया था। लगभग 55 दिन से फरार शेख को बशीरहाट कोर्ट में पेश किया गया, जहाँ से उसे 10 दिन की पुलिस रिमांड में भेज दिया गया है। वहीं, भाजपा ने आरोप लगाया है कि केंद्रीय एजेंसियों की गिरफ्तारी से बचाने के लिए बंगाल पुलिस ने हिरासत में लिया और उसे हर तरह की सुख-सुविधा उपलब्ध करा रही है।
वहीं, कलकत्ता हाईकोर्ट सोमवार (4 मार्च 2024) को संदेशखाली मामले की जाँच CBI को सौंपे जाने की याचिका पर सुनवाई करेगा। साउथ बंगाल के ADG सुप्रतिम सरकार ने बताया कि इस गिरफ्तारी में सेक्शुअल असॉल्ट का कोई मामला नहीं है। शाहजहाँ के खिलाफ कई मामले दर्ज किए गए हैं। हाल ही में दर्ज हुए मामले 2-3 साल पहले की घटनाओं के हैं और इनकी जाँच-पड़ताल में समय लगेगा।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उज्जैन के जंतर-मंतर में ‘विक्रमादित्य वैदिक घड़ी’ का उद्घाटन एक सप्ताह पहले किया था, जिसका ऐप आज (08 मार्च 2024) को जारी किया जाने वाला था, लेकिन उसी समय वैदिक घड़ी पर साइबर अटैक हो गया। साइबर अटैक के चलते वैदिक घड़ी का प्रोसेस स्लो हो गया है। उसके समय बताने में गलतियाँ हो रही हैं। अब इस मामले में पुलिस में शिकायत दर्ज कराई गई है।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, ‘विक्रमादित्य वैदिक घड़ी’ नाम से 8 मार्च 2024 को फ्री मोबाइल ऐप जारी किया जाना था। इससे पहले ही हैकर्स ने इस ऐप पर साइबर अटैक कर दिया। इस वैदिक घड़ी को महाराजा विक्रमादित्य शोधपीठ ने बनाया है।
इस वैदिक घड़ी को बनाने में महत्वपूर्ण योगदान देने वाले आरोह श्रीवास्तव ने कहा कि वैदिक घड़ी पर डीडीओएस अटैक हुआ है। इसकी वजह से सर्वर काफी धीमा हो गया है। यही वजह है कि अभी आम लोग इसका इस्तेमाल नहीं कर पा रहे हैं। इस मामले में पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है। हम अभी सर्वर को पूरी तरह से सुरक्षित बना रहे हैं। साइबर अटैक के बाद विक्रमादित्य शोधपीठ संस्थान के डायरेक्टर श्रीराम तिवारी के मुताबिक साइबर सेल में इस साइबर अटैक की शिकायत दर्ज करवा दी गई है।
क्यों खास है ये वैदिक घड़ी?
यह दुनिया की पहली ऐसी डिजिटल वैदिक घड़ी है जो इंडियन स्टैंडर्ड टाइम भारतीय पंचांग और मुहूर्त की जानकारी देती है। इसको मोबाइल और टीवी पर भी सेट किया जा सकता है। उन्होंने बताया कि विक्रमादित्य वैदिक घड़ी का ऐप हिंदी, अंग्रेजी अन्य भारतीय व विदेशी भाषाओं में तैयार किया जा रहा है। इंटरनेट और जीपीएस से जुड़ी होने के कारण दुनिया में कहीं भी इसका उपयोग किया जा सकता है।
बता दें कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक सप्ताह पहले ही इस वैदिक घड़ी को देश को समर्पित किया था। वह लोकार्पण समारोह में वर्जुअली जुड़े थे। इस घड़ी को उज्जैन में स्थापित किया गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लोकार्पण के मौके पर अतीत का जिक्र कर इसका इतिहास बताया था। लोग ऐप के जरिए कहीं से भी इसे देख सकते हैं।
लोकसभा चुनाव 2024 के लिए कॉन्ग्रेस ने अपने उम्मीदवारों की पहली लिस्ट जारी कर दी है। इस लिस्ट में 39 उम्मीदवारों के नाम हैं, जिसमें राहुल गाँधी और भूपेश बघेल जैसे नेताओं के नाम हैं। इस लिस्ट में 6 उम्मीदवार केरल से हैं। राहुल गाँधी केरल के वायनाड सीट से लोकसभा चुनाव लड़ेंगे, जहाँ वो त्रिकोणीय मुकाबले में बीजेपी और कम्युनिष्ट पार्टी का सामना करेंगे।
कॉन्ग्रेस की पहली सूची की घोषणा केसी वेणुगोपाल ने की। उन्होंने प्रेस कांफ्रेंस में उम्मीदवारों के नामों का ऐलान करते हुए उन्होंने बताया कि राहुल गाँधी वायनाड, भूपेश बघेल राजनांदगाँव से चुनाव लड़ेंगे। उन्होंने बताया कि कॉन्ग्रेस पार्टी की पहली लिस्ट में 15 जनरल, 24 एससी-एसटी, ओबीसी और अल्पसंख्यक कैटेगिरी के उम्मीदवार शामिल हैं। इनमें से 12 उम्मीदवारों की उम्र 50 साल से कम है।
In the first list of candidates for the 2024 Lok Sabha elections, Congress CEC has selected 39 names.
• 15 candidates are from the General category • 24 candidates are from SC, ST, OBC and minority groups • 12 candidates are below 50 years of age • 8 candidates are in the… pic.twitter.com/YbH1dVuaLb
कॉन्ग्रेस पार्टी ने एक्स पर इन उम्मीदवारों की लिस्ट साझा की। कॉन्ग्रेस ने लिखा, “कॉन्ग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की अध्यक्षता में ‘केंद्रीय चुनाव समिति’ की बैठक हुई, जिसमें लोकसभा चुनाव 2024 के लिए 39 लोकसभा सीटों पर उम्मीदवारों के नाम की घोषणा की गई।”
कांग्रेस अध्यक्ष श्री @kharge की अध्यक्षता में आयोजित 'केंद्रीय चुनाव समिति' की बैठक में लोकसभा चुनाव, 2024 के लिए 39 लोकसभा सीटों पर कांग्रेस उम्मीदवारों के नाम घोषित किए गए। pic.twitter.com/jOQk3rycwG
कॉन्ग्रेस पार्टी की पहली सूची में 6-6 सीटें छत्तीसगढ़ और कर्नाटक की हैं। इसके साथ ही केरल की 15 सीटों पर अपने उम्मीदवारों का ऐलान किया है। वहीं मेघालय के 2, नागालैंड, त्रिपुरा और सिक्किम से 1 और वहीं तेलंगाना की चार सीटों से उम्मीदवारों के नामों का ऐलान किया है। चुनाव समिति की बैठक में अभी उत्तर प्रदेश की किसी सीट पर बात फाइनल नहीं हो पाई।
माना जा रहा है कि प्रियंका गाँधी अपनी माँ सोनिया गाँधी की सीट रायबरेली से उतर सकती हैं, तो राहुल गाँधी बीजेपी को चुनौती देने के लिए अपनी सीट अमेठी पर फिर से चुनाव लड़ सकते हैं। हालाँकि अभी इन बातों पर कोई आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है।
इस बीच खबर ये भी आ रही है कि अगले सात दिनों के अंदर 2024 की लोकसभा चुनाव की तारीखों का ऐलान हो सकता है। लोकसभा चुनाव 2024 के लिए सात चरणों में मतदान कराया जा सकता है। इसके लिए सभी पार्टियों ने कमर कस ली है। बीजेपी समेत कई पार्टियों ने अपने उम्मीदवारों की घोषणा कर दी है, जिसमें बीजेपी की पहली लिस्ट में 195 नाम थे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी वाराणसी से चुनावी समर में उतर रहे हैं, तो राजनाथ सिंह लखनऊ से।
नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) में साल 2012 को एक मुकदमा दायर किया जाता है। इस मुकदमे में दिल्ली के ‘मजनू का टीला’ नाम की जगह से अतिक्रमण हटाने की माँग की जाती है। लगभग 3 साल चले मुकदमे के बाद NGT ने 13 जनवरी 2015 को इस केस में अपना फैसला सुना दिया। फैसले में दिल्ली विकास प्राधिकरण (DDA) को आदेश दिया गया कि वो यमुना बाढ़ क्षेत्र से सभी अवैध अतिक्रमण हटाए।
इसी फरमान को कबूल करते हुए DDA ने 7 और 8 मार्च 2024 को मजनू का टीला क्षेत्र के पश्चिमी बैंक से सिर्फ झुग्गियों को हटाने का एलान कर दिया। NGT के फरमान की जद में आईं ये झुग्गियाँ उन हिन्दुओं की हैं, जो पाकिस्तान में मज़हबी अत्याचारों से परेशान होकर, सब कुछ लुटाकर केवल अपना धर्म बचाकर भारत आए हैं।
गुरुवार (7 मार्च 2024) को ऑपइंडिया की टीम जमीनी जानकारियाँ जुटाने मजनू का टीला पहुँची। हमने देखा कि महज ‘झुग्गियाँ’ हटाने के फरमान की चपेट में कम से कम हिन्दुओं के 250 ऐसे परिवार हैं, जिनके घरों में सुबह खाना खाने के बाद शाम के भोजन का इंतजाम नहीं है। इनकी कमाई का जरिया सब्ज़ी, फल, मोबाइल एसेसरीज आदि बेचना है।
हालाँकि, हमें बताया गया कि इन कामों में भी अक्सर प्रशासनिक रुकावटें आती रहती हैं। इन घरों में माँ की छाती से चिपके दुधमुँहे बच्चों से लेकर चारपाई की मृत्यु शैय्या पर पड़े बुजुर्ग भी शामिल हैं। कई युवा लड़कियाँ और युवक भी इन्हीं में से हैं, जिनका अगले मुहूर्त में विवाह तय हुआ है। अधिकतर शरणार्थी परिवार पाकिस्तान के सिंध इलाके से आकर बसे हुए हैं।
2 दिनों तक चिपकी रही नोटिस
मजनू का टीला में रहने वाले शरणार्थियों ने हमें बताया कि उनको बताने के बजाय DDA वाले एक जगह नोटिस चिपकाकर चले गए थे। यह नोटिस 2 दिनों तक चिपकी रही। खुद को अनपढ़ बताने वाले कई शरणार्थियों ने कहा कि उन्होंने कुछ पढ़े-लिखे लोगों से नोटिस पढ़वाया, तब उनको पता चला कि उनको बेघर किए जाने की तैयारी चल रही है।
नोटिस में पाकिस्तान से आए इन सभी हिंदू शरणार्थियों को गीता कॉलोनी और द्वारका के 3 अलग-अलग रैन बसेरों में शिफ्ट होने का आदेश मिला है। हालाँकि, ये असहाय शरणार्थी अपनी गृहस्थी को देखते हुए इन रैन बसेरे को नाकाफी मानते हैं। प्रशासन के इस निर्णय से इन हिंदू शरणार्थियों में अपने अनिश्चित भविष्य को लेकर एक बार फिर डर बैठ गया है।
नोटिस की ‘इत्यादि’ शब्द में हुआ बड़ा खेला
NGT के आदेश में साफ-साफ यमुना के बाढ़ क्षेत्र से ‘सभी अतिक्रमण’ हटाने के निर्देश हैं। इसका पालन करने निकले DDA ने नामजदगी के तौर पर सिर्फ ‘झुग्गियाँ’ ही लिखी हैं। हालाँकि, पीछे ‘इत्यादि’ लगाकर भविष्य में अपनी कागजी सुरक्षा का भी पूरा ध्यान रखा गया है। मजनू का टीला पहुँची ऑपइंडिया की टीम ने DDA के इसी ‘इत्यादि’ की तलाश की।
‘इत्यादि’ में हमें बड़ी-बड़ी बिल्डिंग, स्पा सेंटर, शॉपिंग कॉप्लेक्स, लक्जरी कारें, गुरुद्वारे का रिवर व्यू, पंचर की दुकानें जैसी अन्य तमाम चीजें नजर आईं। हमारा मानना है कि अगर अतिक्रमण विरोधी अभियान के दौरान प्राथमिकता में DDA अपने ‘इत्यादि’ को रखता तो उस पर एकतरफा कार्रवाई करने और गरीबों को सताने जैसे आरोप नहीं लग रहे होते।
DDA की नोटिस
तिब्बती मार्किट के बहुमंजिला मकान और दुकानें नजरअंदाज
शरणार्थी हिन्दुओं से बातचीत के दौरान पता चला कि उनकी झुग्गियों के पास ही तिब्बती मार्किट है। उन्होंने दावा किया कि तिब्बती मार्किट का बड़ा हिस्सा यमुना नदी के बाढ़ क्षेत्र में है। इन दावों की पड़ताल करने हम तिब्बती मार्किट पहुँचे। हमने देखा कि बेहद सटाकर बने पक्के मकानों की संकरी गलियों में कई प्रकार के कारोबार चल रहे हैं। इनमें स्पा सेंटर, रेस्टोरेंट और कपड़ों की दुकानें आदि प्रमुख हैं।
ये मकान नदी की ढलानों पर बने हुए हैं, जो सुरक्षा के मानकों के अनुरूप भी नहीं हैं। नीचे आकर हमने पाया कि एक चारदीवारी नदी और उसके बाढ़ क्षेत्र में बने तिब्बती मार्किट की इंसानी बस्ती को अलग करती है। इस चारदीवारी से सटकर थार जीप सहित तमाम अन्य लक्जरी कारें खड़ी थीं। रिवर व्यू के एंगल से बने रेस्टोरेंट्स से म्यूजिक की आवाज आ रही थी। प्रतिदिन यहाँ करोड़ों रुपए का कारोबार होता है।
नदी के सूखे क्षेत्र में खेती कर रहे एक व्यक्ति ने हमें बताया कि लगभग 35 साल पहले यह जगह वीरान थी, लेकिन अब वहाँ पूरी पक्की बस्ती बना दी गई है। हमें यह भी बताया गया कि अभी भी बाढ़ आने पर तिब्बती मार्किट के कई घरों में बाढ़ का पानी घुस जाता है। इन बस्तियों में तिब्बत के साथ नेपाल के भी तमाम लोग रहते हैं। तिब्बती मार्किट के बीचोंबीच एक बौद्ध मंदिर भी बना है। DDA की नोटिस में तिब्बती मार्किट का कोई जिक्र नहीं है।
गुरूद्वारे का बड़ा हिस्सा भी यमुना बाढ़ क्षेत्र में
मजनू का टीला के जिस स्थान पर पाकिस्तान के आकर हिंदू शरणार्थी झुग्गियों में रहते हैं, उससे ठीक सटकर गुरुद्वारा बना हुआ है। इस गुरुद्वारे की बाउंड्री झुग्गियों की समानांतर है। दोनों को एक नाला अलग करता है। हमने देखा कि गुरुद्वारे का एक बड़ा चबूतरा यमुना नदी से सटकर बना हुआ है। कुछ स्थानीय लोगों ने हमें बताया कि गुरुद्वारे का बीच में विस्तार भी किया गया है, जिसमें कुछ रिहायशी मकान आदि बने हैं। हमें अंदर अभी भी कंस्ट्रक्शन मशीनें दिखीं।
गुरुद्वारे और झुग्गी को अलग करता नाला
अभी तक ऐसी कोई जानकारी सामने नहीं आई है, जिसमें DDA को गुरुद्वारे के आसपास अतिक्रमण दिखा हो। गुरुद्वारे की बाउंड्री में बने घरों में हालत पूरी तरह से सामान्य थे। यहाँ तक कि हमारी ग्राउंड रिपोर्ट के दौरान नदी के मुहाने पर बने बड़े चबूतरे पर लोग चहलकदमी करते दिखे।
यमुना के मुहाने पर बना गुरुद्वारे का ढाँचा
शिक्षा केंद्र, मंदिर और गौशाला पर बुलडोजर चलाने की तैयारी
DDA की नोटिस में जिस जगह को महज झुग्गी बताया गया है, वह जगह ‘गागर में सागर’ की तरह है। शरणार्थी हिन्दू भले ही खुद कच्चे मकानों में रह रहे हैं, लेकिन उन्होंनें मेहनत-मजदूरी से बस्ती के बीचो बीच एक पक्का मंदिर बनवा दिया है। यहाँ महादेव और माँ दुर्गा की प्रतिमा की प्राण प्रतिष्ठा करवाई गई है। झुग्गी के अधिकतर लोग यहाँ पूजा-पाठ करते हैं।
इसके अलावा, वहाँ एक गोशाला भी बनाया गया है। इस गौशाला में देशी नस्ल की गायों के साथ कुछ बछड़े भी दिखाई दिए। अभी तक यह स्पष्ट है कि जिस रैन बसेरे में इन लोगों जाने के लिए कहा जा रहा है, वहाँ गोवंश को रखने का क्या इंतजाम है। शरणार्थियों ने हमें बताया कि वो अपने साथ पाले गए गोवंश के भविष्य को लेकर चिंतित हैं।
बस्ती के घरों पर लगे भगवा ध्वज
राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा के दिन पूरी बस्ती में दीवाली मनाई गई थी। उस दौरान सभी ने अपने घरों पर जय श्रीराम वाले झंडे लगाए थे, जो अभी तक लगे हुए हैं। इसी बस्ती में हमें एक शिक्षा केंद्र भी नजर आया। यहाँ कई बेंच और किताबें मिलीं। यह शिक्षा केंद्र HAI नाम के NGO द्वारा संचालित है।
यहाँ पर क्लास 1 से 12 तक के छात्रों को पढ़ाया जाता है। जब हम यहाँ पहुँचे तो यहाँ छात्र नदारद थे। पास ही खेल रहे एक बच्चे से हमने पढ़ने न जाने की वजह पूछी तो उसने बताया कि घर वाले टेंशन में हैं कि न जाने आज और कल क्या होगा। घर के आगे खड़ी बच्चे की माँ ने हमसे राम-राम कह कर अभिवादन किया।
जो पाकिस्तान में झेला वो अब यहाँ भी शुरू
तमाम अलग-अलग शरणार्थियों से ऑफ़ द कैमरा बात करते हुए हम शरणार्थी बस्ती के प्रधान सुखनंदन के पास पहुँचे। सुखनंदन ने हमें बताया कि उन्होंने राहत के लिए दिल्ली हाईकोर्ट में गुहार लगाई है, जिस पर इसी सप्ताह सुनवाई होने जा रही है। खुद को पहले भी DDA के अधिकारियों द्वारा प्रताड़ित बताते हुए सुखनंदन ने कहा कि बस्ती के लोग जो पाकिस्तान में झेलकर आए वही अब यहाँ शुरू हो चुका है।
सुखनंदन ने यह भी दावा किया कि तिब्बती मार्किट और गुरुद्वारे का एक हिस्सा बाढ़ क्षेत्र में आता है। इसके अलावा, म्यांमार से अवैध रूप से भारत में आए रोहिंग्या मुस्लिमों ने वहाँ की अच्छी-खासी जमीनों पर भी कब्ज़ा कर लिया है। इसके बावजूद उन पर कार्रवाई नहीं हो रही है। खुद को प्रताड़ित किए जाने का आरोप लगाते हुए सभी ने एक स्वर में सरकार से रहम करने की अपील की।