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आवारा कुत्तों से ज्यादा इंसानों को दें तरजीह… फिर भी उनके साथ नहीं करें बर्बरता: केरल हाई कोर्ट बोला- राज्य सरकार बनाए नियम

केरल हाई कोर्ट ने कहा कि आवारा कुत्ते खतरा पैदा कर रहे हैं और वास्तविक कुत्ता प्रेमियों को लाइसेंस लेना चाहिए। हाई कोर्ट ने कहा कि आवारा कुत्तों की तुलना में इंसानों को अधिक प्राथमिकता दी जानी चाहिए। हालाँकि, उच्च न्यायालय ने राज्य सरकार को आवारा कुत्तों को पालने में रुचि रखने वाले व्यक्तियों को लाइसेंस देने के लिए नियम बनाने का निर्देश दिया, ताकि इन जानवरों की रक्षा कर सकें।

न्यायमूर्ति पीवी कुन्हिकृष्णन ने कहा कि वास्तविक कुत्ता प्रेमियों को प्रिंट और विजुअल मीडिया में लिखने के बजाय जानवरों की सुरक्षा के लिए स्थानीय सरकारी संस्थानों की मदद के लिए आगे आना चाहिए। कोर्ट ने कहा कि कुत्ता प्रेमी लोग पशु जन्म नियंत्रण नियमों और केरल नगरपालिका अधिनियम के प्रावधानों के अनुरूप आवारा कुत्तों को रखने के लिए स्थानीय अधिकारियों से लाइसेंस ले सकते हैं।

कोर्ट ने माना कि आवारा कुत्तों से छोटे बच्चों, युवाओं और यहाँ तक कि बुजुर्ग लोगों को भी खतरा है, क्योंकि देश भर से आवारा कुत्तों द्वारा हमले की खबरें आती रहती हैं। स्कूली बच्चे अकेले स्कूल जाने से डरते हैं, क्योंकि उन्हें डर रहता है कि कहीं आवारा कुत्ते उन पर हमला न कर दें। कोर्ट ने कहा कि आवारा कुत्तों की रक्षा की जानी चाहिए, लेकिन इंसानों की जान की कीमत पर नहीं।

उच्च न्यायालय ने कहा, “आवारा कुत्ते हमारे समाज में खतरा पैदा कर रहे हैं। लेकिन, अगर आवारा कुत्तों के खिलाफ कोई कार्रवाई की गई तो कुत्ते प्रेमी आकर उनके लिए लड़ेंगे। मेरी राय है कि आवारा कुत्तों की तुलना में इंसानों को अधिक तरजीह दी जानी चाहिए। इसमें भी कोई शक नहीं है कि आवारा कुत्तों पर इंसानों द्वारा किए जाने वाले बर्बर हमले की भी अनुमति नहीं दी जानी चाहिए।”

दरअसल, कन्नूर जिले के मुज़हथदाम वार्ड के निवासियों ने राजीव कृष्णन नामक एक पशु प्रेमी के कार्यों से व्यथित होकर उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया है। इसमें कहा गया कि मुज़हथदाम वार्ड एक घनी आबादी वाला आवासीय क्षेत्र है। जब भी किसी आवारा कुत्ते पर हमला होता है और वह घायल या बीमार हो जाता है तो राजीव उसे अपने घर ले जाते हैं और उसे अपने घर में रखते हैं।

वहाँ के लोगों का आरोप था कि राजीव के घर में कई कुत्ते पाले गए थे और वह उनका ठीक से पालन-पोषण नहीं कर पा रहे थे। इसके कारण कुत्ते बहुत गंदे और बदबूदार हो गए। इससे इलाके के लोगों को परेशानी हो रही थी। उनका यह भी आरोप है कि कुत्ते दिन-रात तेज़ आवाज़ में भौंकते हैं। इससे ध्वनि प्रदूषण होता है। उनके घूमते रहने से बच्चों को कुत्तों से होने वाली बीमारियों का ख़तरों रहता है।

याचिकाकर्ताओं ने राजीव को अपने घर में आवारा कुत्तों को रखने से रोकने के लिए अदालत का दरवाजा खटखटाया है। वहीं, राजीव ने कहा कि उनका परिवार जानवरों से प्यार करता है और वे अपनी संपत्ति में से जानवरों को खाना खिलाते हैं और उनकी देखभाल करते हैं। उन्होंने कहा कि सोसायटी फॉर द प्रिवेंशन ऑफ क्रुएल्टी टू एनिमल्स (एसपीसीए) कन्नूर भी उनकी मदद लेती है।

वीर सावरकर फिल्म में अंबेडकर के रंग पर बवाल, एक्टर का चेहरा देख घुसाया जाति वाला एंगल: प्रकाश अंबेडकर से कहा- फिल्म मेकर्स को नोटिस भेजो

देशभक्ति को लेकर वीर सावरकर पर बनी फिल्म का ट्रेलर 4 मार्च 2024 को रिलीज होने के बाद सोशल मीडिया पर एक नए तरह का विवाद सामने आया है। कुछ लोगों ने इस बात से आपत्ति जताई है कि फिल्म में भीम राव अंबेडकर के कैरेक्टर के लिए कास्टिंग अच्छी नहीं हुई है। वो एक्टर का रंग रूप देखकर इस कास्टिंग को जातिगत एंगल दे रहे हैं।

हॉलीवुड में बनी फिल्म में अंबेडकर की छवि से तुलना करके दिखाया जा रहा है कि कैसे वीर सावरकर फिल्म में ऐसी कास्टिंग करके फिल्म निर्माताओं ने अपने ब्राह्मण माइंडसेट को दिखाया है।

नितिन चव्हाण ने फोटो शेयर करते हुए लिखा- “इस तरह इन्होंने अंबेडकर के रोल को सावरकर मूवी में कास्ट किया है। ये लोग चाहते हैं कि हर स्वतंत्रता सेनानी एक क्लाउन या विलन जैसा दिखे ताकि सावरकर को हीरो दिखाया जा सके।”

द व्हाइट डार्क नाइट नाम के यूजर ने इस मामले में प्रकाश अंबेडकर और सूजत अंबेडकर को टैग करके लिखा कि जैसे चंद्र बोस ने अपना स्टैंड लिया। वैसे ही ही अंबेडकरवादियों की ओर से इस मुद्दे पर एक कड़ा स्टैंड प्रकाश अंबेडकर को भी लेना होगा।

ट्वीट में अपील की जा रही है कि प्रकाश अंबेडकर फिल्ममेकर को चेतावनी भेजें कि जैसा कि ट्रेलर में दिखाया गया है कि बाबासाहब का लिंक सावरकर से था, उस पार्ट को हटाया जाए।

बता दें कि इससे पहले चंद्र कुमार बोस ने इस फिल्म के ट्रेलर को देखने के बाद कहा था कि किसी शख्सियत को वैसा का वैसा प्रोजेक्ट करना बहुत जरूरी है। नेताजी सेकुलर नेता थे और राष्ट्रवादियों में राष्ट्रवादी थी। उनका लिंक सावरकर के साथ न दिखाया जाए।

उम्र के जिस पड़ाव पर मैदान छोड़ जाते हैं शूरमा, शबनिम इस्माइल ने बनाया दुनिया में सबसे तेज गेंद फेंकने का रिकॉर्ड, झूलन गोस्वामी से मिले टिप्स कमाल

दक्षिण अफ्रीका की रिटायर्ड इंटरनेशनल तेज गेंदबाज शबनिम इस्माइल ने 35 साल की उम्र में ऐसा रिकॉर्ड बना दिया है, जो आजतक कोई भी खिलाड़ी नहीं बना सकी थी। इंटरनेशनल क्रिकेट में सबसे तेज गेंद फेंकने का रिकॉर्ड रखने वाली शबनिम इस्माइल ने बीती रात (मंगलवार 05 मार्च 2024) को क्रिकेट के इतिहास की सबसे तेज गेंद फेंकी। उन्होंने किसी भी महिला खिलाड़ी के लिए 130 किमी के बैरियर को पहली बार करते हुए 132.1 किमी प्रति घंटा की रफ्तार से गेंद फेंकी, जो हैरान करने वाली है।

शबनिम इस्माइल महिला आईपीएल में मुंबई इंडियंस के लिए खेल रही हैं। वो पिछले कुछ मैचों में अनफिट रहने की वजह से मैदान पर नहीं उतर सकी। इस मैच में वो दिल्ली कैपिटल्स के खिलाफ मैदान पर उतरीं और सबसे तेज गेंद फेंकने का रिकॉर्ड बना डाला। उन्होंने ये गेंद मैच के तीसरे ओवर की दूसरी गेंद के तौर पर फेंकी। उस समय दिल्ली की कप्तान मेग लैनिंग को ये गेंद फेंकी। मेग लैनिंग दुनिया की सबसे विस्फोटक और बड़ी खिलाड़ियों में से हैं। गेंद की रफ्तार इतनी ज्यादा थी कि वो अपने पैर को नहीं बचा सकी और गेंद सीधे उनके पैड्स से लगी। दिल्ली कैपिटल्स के खिलाड़ियों ने जोरदार अपील की, लेकिन मैग को नॉट आउट करार दिया गया। इस गेंद की रफ्तार 132.1 किमी प्रति घंटे की दर्ज की गई।

अगले ओवर में शेफाली-इस्माइल का मुकाबला

इस्माइल ने लगातार तीसरा ओवर और पारी का पाँचवाँ ओवर भी फेंका। उनकी शुरू की दो गेंदों पर शेफाल वर्मा ने दो जोरदार छक्के लगाए, लेकिन तीसरी गेंद पर शेफाली ने विकेट के पीछे कैच थमा दिया। शबनिम की ये गेंद तेजी से अंदर की ओर आई और शेफाली पूरी तरह से बैकफुट पर आ गई। इसके बाद इस्माइल का आक्रामक रवैया देखते बनता था। देखिए शेफाली-इस्माइल की जंग

इंटरनेशनल क्रिकेट में भी सबसे तेज गेंद फेंकने का रिकॉर्ड

शबनिम इस्माइल दुनिया की सबसे तेज गेंदबाज के तौर पर जानी जाती हैं। उन्होंने इंटरनेशनल क्रिकेट भी सबसे तेज गेंद फेंकने का रिकॉर्ड अपने नाम पर ही दर्ज करा रखा है। उन्होंने 128 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से 2016 में वेस्टइंडीज के खिलाफ गेंद फेंकी थी, वहीं 2022 के वनडे विश्वकप में भी उन्होंने 2 बार 127 किमी की रफ्तार से गेंद फेंकी। हालाँकि शबनिम इस्माइल ने इसी आईपीएल के ओपनिंग मैच में इन रिकॉर्ड्स को ध्वस्त कर दिया था। उन्होंने पहले मैच में 128.3 किमी प्रति घंटे की रफ्तार वाली गेंद फेंकी थी। हालाँकि अब उन्होंने 130 किमी के बैरियर को पार करते हुए क्रिकेट के इतिहास की सबसे तेज गेंद 132.1 की रफ्तार से फेंक दी है। इस तरह से टॉप 5 तेज गेंदे इस्माइल के नाम ही दर्ज हैं।

झूलन गोस्वामी से मिली टिप्स, इस्माइल ने किया कमाल

शबनिम इस्माइल से पहले दुनिया में सबसे तेज गेंदबाज के तौर पर जाने जानी वाली झूलम गोस्वामी इस समय मुंबई इंडियंस की कोच हैं। इस समय झूलन और शबनिम एक साथ ही समय बिताती हैं। इस्माइल ने कहा भी था कि झूलन ने उन्हें थोड़ा सा पुश करने की सलाह दी है, ताकि मैं 130 किमी का बैरियर पार कर जाऊँ। ये बातचीत करीब 20 दिन पुरानी है।

शानदार रहा है इस्माइल का इंटरनेशनल करियर

बता दें कि 35 वर्षीय इस्माइल ने 16 साल के क्रिकेट करियर से मई 2023 में संन्यास लिया था। उन्होंने क्रिकेट के सभी फॉर्मेट में 317 विकेट के लिए 241 इंटरनेशनल मैच खेले, जिसमें 127 वनडे, 113 टी20ई और एक टेस्ट शामिल है। वो अब वह अब दुनिया भर की टी20 लीगों में खेल रही हैं। हालाँकि जिस मैच में उन्होंने दिल्ली कैपिटल्स के खिलाफ सबसे तेज गेंद फेंकी, उसमें उनकी टीम को हार का मुँह देखना पड़ा। खुद शबनिम इस्माइल के 4 ओवरों में 46 रन बन गए।

सुप्रीम कोर्ट के जजों को अब ‘भूमि पूजन’ से भी दिक्कत, बोले- न दीप जलाओ, न पूजा करो: संस्कृत के ‘आदर्श वाक्य’ पर भी दिया था ज्ञान

सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस अभय एस ओका ने सोमवार (4 मार्च 2024) को कहा कि अदालत परिसर में कोई भी “पूजा” या “अर्चना” नहीं की जानी चाहिए। उन्होंने पुणे में एक “भूमि पूजन” समारोह में भाग लेने के दौरान यह बयान दिया। पुणे जिला अदालत की नई इमारतों के उद्घाटन के लिए जिला अदालत में इस कार्यक्रम का आयोजन किया गया था। उनका बयान सुप्रीम कोर्ट के रिटायर्ड जस्टिस के जोसेफ के उस बयान के एक सप्ताह बाद ही आया है, जिसमें उन्होंने प्रोपेगेंडा वेबसाइट द वायर की ओर से आयोजित कार्यक्रम में कहा था कि उन्होंने सीजेआई से सुप्रीम कोर्ट के आदर्श वाक्य “यतो धर्मस्ततो जय” (जहाँ धर्म है, वहाँ जीत है) को हटाने के लिए कहा है।

सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस अभय एस ओका ने जोर देकर कहा कि कानूनी बिरादरी को डॉ बाबासाहेब अम्बेडकर की मानसिकता को अपनाना चाहिए और धार्मिक अनुष्ठानों के बजाय मूल संवैधानिक सिद्धांतों पर जोर दिया जाना चाहिए। रिपोर्ट्स के मुताबिक, उन्होंने कहा, ”हमें न्यायपालिका से जुड़े किसी भी कार्यक्रम के दौरान पूजा-अर्चना या दीपक जलाने जैसे अनुष्ठान बंद करने होंगे। इसके बजाय, हमें संविधान की प्रस्तावना रखनी चाहिए और किसी भी कार्यक्रम को शुरू करने के लिए उसके सामने झुकना चाहिए। हमें अपने संविधान और उसके मूल्य का सम्मान करने के लिए यह नई चीज शुरू करने की जरूरत है।”

इस कार्यक्रम में सुप्रीम कोर्ट के जज जस्टिस बीआर गवई और जस्टिस प्रसन्ना बी वराले के साथ ही बॉम्बे हाई कोर्ट के चीफ जज जस्टिस देवेन्द्र कुमार उपाध्याय और पुणे के संरक्षक जज सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस रेवती मोहिते डेरे भी उपस्थित थे।

इस कार्यक्रम में अपने भाषण के दौरान जस्टिस बीआर गवई ने मुखर होकर जस्टिस अभय एस ओका के रुख से सहमति जताई और कहा कि जस्टिस ओका ने बहुत अच्छा सुझाव दिया है। उन्होंने कहा, ”किसी खास धर्म की पूजा करने के बजाय हमें अपने हाथों से फावड़ा लेकर नींव के लिए निशान लगाना चाहिए। हमें हमारे सहयोगी अनिल किलोरे के सुझाव के अनुसार दीप प्रज्ज्वलन समारोह के बजाय पौधों को पानी देकर कार्यक्रम का उद्घाटन करना चाहिए। इससे पर्यावरण के मामले में समाज में एक अच्छा संदेश जाएगा।”

जस्टिस गवई ने कहा, “मुझे लगता है कि अगर जज के रूप में हमारे भीतर रामशास्त्री प्रभुणे जैसा साहसी और निष्पक्ष स्वभाव है, तो हमें जमानत देने से क्यों डरना चाहिए? आजकल स्थिति यह है कि जिला अदालत में जमानत नहीं मिलती है।”

एक सप्ताह के भीतर कथित धार्मिक संबद्धताओं के संबंध में न्यायपालिका की ओर से यह लगातार दूसरी टिप्पणी है। इससे पहले 28 फरवरी को रिटायर्ड जस्टिस जोसेफ ने सुझाव दिया था कि सुप्रीम कोर्ट के आदर्श वाक्य को बदलना चाहिए। उन्होंने कहा था कि “यतो धर्मस्ततो जय” (जहाँ धर्म है, वहाँ जीत है) को बदलना चाहिए। क्योंकि “सत्य ही संविधान है, जबकि धर्म हमेशा सत्य नहीं होता। समय की आवश्यकता के अनुसार अपने कर्तव्य का निर्वहन करना ही धर्म है।”

दिलचस्प बात यह है कि साल 2018 में एक सेमिनार में सुप्रीम कोर्ट के रिटायर्स जस्टिस जोसेफ ने कैथोलिक चर्च की तुलना भारत की प्रस्तावना से की थी। उन्होंने कहा था, “कैथोलिक चर्च ने हमेशा दुनिया भर की अन्य परंपराओं और विश्वासों को अपने आप में आत्मसात किया है। यहा हमारे संविधान की प्रस्तावना की तरह ही है, जो वी (हम) शब्द से शुरू होती है। उन्होंने पोप के महिमामंडन में कहा था कि “एक व्यक्ति जो इस चर्च को एक इकाई में रखता है, वह पोप है।”

मूल रूप से ये खबर अंग्रेजी भाषा में लिखी गई है। मूल खबर को पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें

‘SRK ने जैसे बोला इडली-वड़ा… मैं शो से बाहर आ गई’: राम चरण की मेकअप आर्टिस्ट से नहीं बर्दाश्त हुआ अपमान, छोड़ी अंबानी की पार्टी

जामनगर में अनंत अंबानी और राधिका मर्चेंट के प्री-वेडिंग फंक्शन में शाहरुख खान ने जिस तरह से साउथ के सुपरस्टार हीरो राम चरण को इडली-वड़ा कहकर बुलाया, उससे सोशल मीडिया पर काफी विवाद हो गया। नेटिजन्स ने शाहरुख की क्लास लगाई। वहीं राम चरण की मेकअप आर्टिस्ट ने कहा कि उन्हें इस कमेंट का इतना बुरा लगा था कि वो कार्यक्रम से बाहर आ गईं।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, इस मामले में राम चरण की मेकअप आर्टिस्ट जेबा हसन ने भी कहा कि वो शाहरुख खान की बहुत बड़ी फैन हैं लेकिन जैसे उन्होंने राम चरण को बुलाया, उन्हें बिलकुल वो ढंग पसंद नहीं आया। जेबा ने सोशल मीडिया पर लिखा- “भेंड इडली वड़ा राम चरण कहाँ है तू?” मैं इसके बाद अपने घर आ गई। ये राम चरण जैसे स्टार के लिए कहना बेहद अपमानजनक था।”

गौरतलब है कि एक ओर शाहरुख के कमेंट से नेटीजन्स नाराज हैं। इसे साउथ का अपमान बता रहे हैं। वहीं इन खबरों के बीच सूत्रों के हवाले से बताया जा रहा है कि राम चरण ने पूरे विवाद पर अपने फैंस को शांत रहने के लिए कहा है। टाइम्स नाऊ में सूत्रों से दी गई खबर में राम चरण के करीबी ने बताया, “राम चरण जानते हैं कि शाहरुख ने अपमान करने के लिए ऐसा नहीं कहा। वह सिर्फ मजाक कर रहे थे। लेकिन फिर भी उन्होंने सीमा लांघी और उन्हें माफी माँगनी चाहिए। राम चरण जल्द इस मामले में बयान देंगे कि मामले को जाने दिया जाए। ऐसा होता है। हम दक्षिण भारतीयों का बॉलीवुड में हमेशा मजाक बनाया गया है। लेकिन खान से थोड़ी समझदारी की अपेक्षा की जा सकती है।”

बता दें कि गुजरात के जामनगर में हुए अनंत अंबानी-राधिका मर्चेंट के प्री-वेडिंग कार्यक्रम की कई वीडियोज सोशल मीडिया पर वायरल हुईं थीं। इन्हीं में से एक वीडियो में शाहरुख खान और राम चरण की भी वीडियो सामने आई।

इस वीडियो में नाटू-नाटू गाना बजने पर शाहरुख खान साउथ के सुपरस्टार राम चरण को बुलाते दिखाई दिए। उनके हिसाब से शायद वो मजाकिया लहजे में राम चरण को बुलाते हैं लेकिन ये तरीका नेटिजन्स को पसंद नहीं आया। शाहरुख खान साउथ हीरो राम चरण को स्टेज पर बुलाने के लिए कहा था- “इडली वड़ा राम चरण कहाँ है तू।” इसी वीडियो के वायरल होने पर पूरा विवाद उपजा।

मुस्लिम लड़कियाँ गैर-मुस्लिमों से बात मत करो, वरना रेप-मर्डर: झारखंड के रामगढ़ में ‘आदम सेना’ का शरिया कानून – पीड़िता की FIR में सारी डिटेल, पुलिस कह रही जमीन विवाद

झारखंड में रामगढ़ एक जिला है। यहाँ आदम सेना ने गाँवों में शरिया कानून लागू कर रखा है। मुस्लिम लड़कियों को गैर-मुस्लिमों से बात करने की मनाही है। उन्हें बुर्का पहनना ही पड़ता है। न मानने पर आदम सेना के लोग ‘रेप कर फेंक देने’ और ‘जान से मारने’ जैसी धमकियाँ देते हैं। यही नहीं, अगर किसी ने ‘शरिया कानून’ का उल्लंघन करने के बारे में सोच तक लिया, तो उसे गाँव से बाहर कर दिया जाएगा। हालाँकि पुलिस ने मामले को जमीन विवाद बताया है और जाँच की बात कह रही है।

रेप की कोशिश, जमीन पर कब्जा, शरिया…

जानकारी के मुताबिक, ये मामला रजरप्पा थाना इलाके का है, जहाँ युवती ने थाने में गुहार लगाई है कि ‘आदम सेना’ के कथित सदर सलमान और अहमद से उसकी जान बचाई जाए। लड़की का आरोप है कि दिसंबर 2023 में उसके साथ गाँव के ही साबिर अली ने दुष्कर्म की कोशिश की, लेकिन वो किसी तरह से बच निकली। उसने शोर मचाकर लोगों को बुलाया, तो साबिर अली और उसके परिजनों उसके साथ मारपीट की। जिसकी शिकायत पुलिस में दर्ज कराई गई है। पीड़िता का आरोप है कि ये सब इसलिए किया जा रहा है, ताकि वो और उसका परिवार गाँव छोड़कर चला जाए और उनकी जमीन हड़प ली जाए।

शिकायत वापस लेने का दबाव बना रही आदम सेना

इसी मामले को लेकर पीड़ित महिला 17 फरवरी 2024 को फिर से थाने पहुँची। पीड़िता ने पुलिस को शिकायत दी कि जमानत पाकर जेल से निकले साबिर अली और उसके गुर्गे उसे केस वापस लेने की धमकी दे रहे हैं। इनमें सलमान और अहमद के नाम हैं। ये लोगों लोग केस को वापस लेने के लिए धमका रहे हैं। युवती ने कहा कि इन दोनों ने मुझसे कहा, “हम प्रशासनिक कार्रवाई नहीं मानते, यहाँ शरिया कानून चलता है।” इन लोगों ने मेरे साथ और पूरे परिवार के साथ मारपीट की और हमारा सामान भी घर से बाहर फेंककर घर पर ताला लगा दिया।

रेप और जान से मारने की धमकी, दे दूँगी जान

पीड़ित युवती का आरोप है कि आदम सेना से जुड़े कुछ लोग केस में समझौते के लिए धमकाते हैं। अहमद अंसारी ने फोन पर गलत बाते कहते हुए धमकाया। पीड़ित का कहना है कि पिता की मौत के बाद वो तीन भाई बहन अपने पुश्तैनी गाँव आ गए, लेकिन गाँव में जमीन को लेकर विवाद होने लगा। अब आदम सेना शरिया कानून का हवाला देकर उन्हें पर्दे में रहने और दूसरे कौम के लोगों से बातचीत न करने के लिए कहती है। पीड़ित ने कहा कि मेरे परिवार को परेशान किया जा रहा है और अगर प्रशासन ने आदम सेना के खिलाफ कार्रवाई नहीं की, तो वो एसपी के आवास के सामने आत्महत्या कर लेगी।

पुलिस ने आदम सेना को नकारा, जमीन विवाद बताया

इस पूरे मामले में रजरप्पा थाना प्रभारी नवीन प्रकाश पाण्डेय ने ऑपइंडिया से बातचीत में कहा कि ये पूरा विवाद जमीन को लेकर है। हम मामले की जाँच कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि मुखिया व अन्य लोगों से भी बातचीत की है। जिस आदम सेना का नाम लिया जा रहा है, वो इस इलाके में कहीं सक्रिय नहीं है। न ही उसके खिलाफ ऐसी कोई शिकायत मिली है। उन्होंने कहा कि पीड़ित का परिवार पहले सिंगरौली में रहता था, पिता की मौत के बाद लड़की अपने पुश्तैनी गाँव आई है, वहीं चाचा के संग जमीन विवाद में अब तक दो एफआईआर दर्ज हो चुकी हैं, जो कोर्ट में हैं।

‘पाकिस्तान जिंदाबाद’ के लिए फॉरेंसिक रिपोर्ट-पुलिस-सरकार सबको झूठा साबित करने पर तुला मो जुबैर: फैक्ट चेक का ‘आसमानी किताब’ है AltNews

मोहम्मद जुबैर अपने AltNews के फैक्टचेक के आगे फॉरेंसिक रिपोर्ट को भी कुछ नहीं समझता है। उसके लिए पुलिस प्रशासन की जाँच तभी मायने रखती हैं जब वो उसके फैक्टचेक के पक्ष में हों। अगर ऐसा नहीं होता तो वो पुलिस-प्रशासन सबका विरोध करके खुद को सही साबित करने पर अड़ जाता है। जैसा वो इस बार कर रहा है।

कर्नाटक विधानसभा में हुई नारेबाजी मामले में जाँच रिपोर्ट आने के बाद भी जुबैर ने अपने एक पोस्ट में फिर से ये बताया है कर्नाटक विधानसभा में ‘पाकिस्तान जिंदाबाद’ नारे नहीं लगे थे बल्कि ‘नासिर साहब जिंदाबाद’ के नारे लगे थे। अपने पोस्ट में उसने दक्षिणपंथियों को निशाना बनाया है और खुद को सही साबित करने का पूरा प्रयास किया है।

पोस्ट में उसने लिखा, “कर्नाटक पुलिस ने विधान सौध में कथित तौर पर ‘पाकिस्तान जिंदाबाद’ के नारे लगाने के आरोप में 3 लोगों को गिरफ्तार किया है। गृह मंत्री ने भी बयान देकर इस बात की पुष्टि की है कि पाकिस्तान समर्थक नारे लगाए गए थे। बहुत से लोग चाहते हैं बेंगलुरु पुलिस मेरे ट्वीट के लिए मुझे गिरफ्तार करे। लेकिन, मैं अपने ट्वीट पर अपनी तटस्थ हूँ। मैं 100 फीसद श्योर हूँ कि वहाँ पाकिस्तान जिंदाबाद नहीं बल्कि नासिर साब जिंदाबाद कहा गया।”

आगे उसने दक्षिणपंथी सोशल मीडिया यूजर्स को निशाना बनाते हुए कहा कि एक्स पर राइट विंग के लोग और मीडिया, विपक्षियों पर और उनके समर्थकों पर पाकिस्तान समर्थन में नारे लगाने की बात कहते दिखे थे। उसने कहा, “ये सारा झूठा मामाला कन्नड़ न्यूज चैनल ने शुरू किया था जिसे वहाँ मौजूद कई पत्रकारों ने नकारा। लेकिन राइट विंग के ट्रोल्स चाहते हैं सच्चाई बताने के लिए पुलिस मुझे गिरफ्तार करे।”

अपने आप को पाक साफ दिखाने के लिए जुबैर ने कॉन्ग्रेस सरकार को उकसाने का काम किया। उसने 3 मामलों का जिक्र करके बताना चाहा कि कैसे कर्नाटक में कॉन्ग्रेस के खिलाफ प्रोपेगेंडा चलाया जाता रहा लेकिन उन्हें उसका काउंटर करना तक नहीं आता।

हनुमान पताका से लेकर हिंदू मंदिर का मुद्दा उठाया

अपने ट्वीट में उसने ये दिखाना चाहा कि आज सब उसकी गिरफ्तारी की बात कर रहे हैं लेकिन जब मीडिया ने और भाजपा वालों ने फर्जी खबर फैलाई थी तब उनके ऊपर क्यों कार्रवाई नहीं हुई। अपनी ओर से ध्यान भटकाने के लिए जुबैर ने अपनी पोस्ट में बीते दिनों मीडिया में उठे तीन मामलों का जिक्र किया। इसमें एक वो मामला है जब मांड्या जिले से हनुमान पताका उतारने की घटना सामने आई थी।

इसमें जुबैर का कहना है कि पताका सरकारी जमीन पर फहराई गई थी जहाँ राष्ट्रीय ध्वज और कर्नाटक ध्वज फहराने की इजाजत थी। लेकिन मीडिया ने प्रोपगेंडा एक महीने से ज्यादा चला दिया। इसके बाद उसने दूसरे मामला ये उठाया कि फरवरी में मीडिया ने फैलाया था कि कॉन्ग्रेस हिंदू मंदिरों से पैसे लेकर दूसरे मजहब के संस्थानों को फंड करती हैं। जुबैर के अनुसार ये झूठा दावा था फिर भी कॉन्ग्रेस सरकार ने एक्शन नहीं लिया।

ऐसे ही तीसरा मामला उसने उस खबर का जिक्र किया जिसमें बताया गया था कि सिद्धारमैया सरकार ने हिंदू मंदिरों पर 10% टैक्स लगाने वाले बिल को पास कर दिया है। जुबैर का कहना है कि ये बिल तो 2011 में येदियुरप्पा सरकार में आया था। इसका मकसद था कि छोटे हिंदू मंदिरों की जरूरत बड़े हिंदू मंदिरों से मिलने वाले दान से पूरी की जाए, लेकिन मीडिया ने फिर भी कॉन्ग्रेस के खिलाफ हिंदू विरोधी प्रोपेगेंडा चलाया और पार्टी इनका काउंटर भी नहीं कर पाई। न एक्शन लिया।

जुबैर ने अपने पोस्ट में कॉन्ग्रेस को तो मीडिया के खिलाफ एक्शन लेने के लिए उकसाया ही। साथ ही इस बात पर नाराजगी दिखाई कि जब इन मामलों में कोई कार्रवाई नहीं की गई तो आखिर क्यों पाकिस्तान जिंदाबाद नारे लगाने पर उन्हें पकड़ा गया। वो 2022 में मांड्या में एक भाजपा समर्थक द्वारा लगाए गए नारों का उदाहरण देकर ये समझाने की कोशिश करता है कि जैसे उससे पाकिस्तान मुर्दाबाद की जगह पाकिस्तान जिंदाबाद निकल गया। वैसे ही हो सकता है इस मामले में भी हुआ हो।

पहली बार झूठी खबर देने के लिए नहीं बदनाम हुआ जुबैर, आदत पुरानी

बता दें कि यह पहली बार नहीं है जब ऑल्ट न्यूज के सह-संस्थापक द्वारा इस तरह का कृत्य किया गया हो। वो पहले भी ऐसी हरकतें कर चुका है। भीलवाड़ा मामले में रैली के दौरान पाकिस्तान जिंदाबाद कहा गया था। लेकिन जुबैर ने अपनी थ्योरी लगाकर कहा वो SDPI जिंदाबाद कहा गया था। इसके बाद ऑल्ट न्यूज के दूसरे सह-संस्थापक प्रतीक सिन्हा भी बोलने लगे कि खबर गलत है।

जुबैर, जो आज मीडिया पर प्रोपेगेंडा चलाने का इल्जाम लगा रहा है, उसकी खुद हमेशा भ्रामक खबरें फैलाने के कारण सोशल मीडिया पर थू-थू होती है। उसकी ही तुच्छ हरकत थी जब उसने नुपूर शर्मा की आधी-अधूरी वीडियो शेयर करके अपना एजेंडा चलाया था। नतीजा क्या हुआ था, सबने देखा था। सामान्य जिंदगी गुजार रहे लोगों की जान चली गई थी। सड़कों पर खड़े हिंदुओं पर हमला हुआ था। खुलेआम सिर तन से जुदा के नारे लगाए गए ते

लोकसभा चुनाव 2024 में BJP को प्रचंड बहुमत, 335 सीटों का अनुमान: कॉन्ग्रेस की हालत खराब, ओपिनियल पोल में पिछले चुनाव से कम सीटों का अंदेशा

लोकसभा चुनाव 2024 के लिए विभिन्न सर्वे संस्थाओं ने अपने-अपने ओपिनियन पोल जारी कर दिए हैं। इन पोल के मुताबिक इस चुनाव में भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व में NDA गठबंधन प्रचंड बहुमत हासिल कर सकता है। अकेले भाजपा ही बहुमत के आँकड़े को पार करती दिख रही है। विपक्ष का INDI गठबंधन 100 सीटों को भी पार करता नहीं दिख रहा है। तमाम आँकड़े INDI गठबंधन को 98 सीटों के आसपास सिमटता दिखा रहे हैं। सबसे खराब हालत कॉन्ग्रेस की है, जिसे आगामी लोकसभा चुनाव में महज 37 सीटें मिलने का अनुमान जताया जा रहा है। यह आँकड़ा पिछले चुनावों से भी कम है।

इंडिया टीवी CNX ने मंगलवार (5 अप्रैल 2024) को अपना ओपिनियन पोल जारी किया। इस पोल के मुताबिक भारतीय जनता पार्टी साल 2024 के लोकसभा चुनावों में अकेले अपने दम पर लगभग 335 सीटें जीत सकती है। बीजेपी के नेतृत्व में बने NDA गठबंधन को कुल 378 सीटें मिलने का अनुमान है। उत्तर भारत और पूर्वोत्तर के राज्यों में भारतीय जनता पार्टी पहले नंबर पर आती बताई गई है। पश्चिम बंगाल में भी भाजपा और तृणमूल कॉन्ग्रेस के बीच लगभग बराबरी का मुकाबला है। गोवा, गुजरात, मध्य प्रदेश, राजस्थान, हरियाणा, उत्तराखंड, दिल्ली और हिमाचल प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी द्वारा क्लीन स्वीप करने की संभावना जताई गई है।

यह ओपिनियन पोल कॉन्ग्रेस पार्टी के लिए एक बड़े झटके के समान है। कॉन्ग्रेस को पिछली बार हुए लोकसभा चुनावों में 44 सीटें मिली थीं, लेकिन इस बार उसे महज 37 सीटों पर सिमटता दिखाया गया है। उत्तर भारत के कई राज्य तो ऐसे बताए गए हैं जिनमें कॉन्ग्रेस का खाता भी नहीं खुल रहा है। पोल में कॉन्ग्रेस से बेहतर प्रदर्शन अन्य दलों को करते बताया गया है। इन अन्य दलों में शिवसेना उद्धव ठाकरे ग्रुप, RJD और आम आदमी पार्टी जैसे दल शामिल हैं। हालाँकि, INDI गठबंधन के सभी घटक दलों को मिलाकर भी विपक्ष इस बार भी 100 सीटों को पार करता नहीं दिख रहा है। उसका आँकड़ा महज 98 पर अटक रहा है।

ओपिनियन पोल में पूर्वोत्तर के राज्यों मणिपुर, नागालैंड और सिक्किम में भारतीय जनता पार्टी का मुकाबला कॉन्ग्रेस के बजाय अन्य दलों से होना बताया गया है। पूर्वोत्तर की 11 सीटों पर हुए सर्वे में 5 सीटें भाजपा और इतनी ही अन्य दलों के खाते में जाने का अनुमान जताया गया है। वहीं कॉन्ग्रेस को महज 1 सीट मिलने की संभावना जताई गई है। असम की 14 सीटों में भाजपा की 10 पर जीत की संभावना जताई गई है। यहाँ भी कॉन्ग्रेस के खाते में महज 1 सीट आना बताया गया है। केंद्र शासित प्रदेशों की 5 सीटों में भाजपा की 4 और कॉन्ग्रेस की महज 1 सीट पर जीत बताई गई है।

पश्चिम बंगाल की कुल 42 लोकसभा सीटों में TMC और भाजपा की लगभग बराबरी की टक्कर बताई गई है। यहाँ TMC को 21 और भाजपा को 20 सीटें मिलने का अनुमान जताया गया है। वामदलों का पश्चिम बंगाल में खाता भी न खुलने की बात कही गई है जबकि कॉन्ग्रेस के हिस्से में यहाँ से महज 1 सीट आने का अनुमान जताया गया है। बिहार की कुल 40 लोकसभा सीटों में भाजपा के हिस्से में 17 आने की संभावना जताई गई है। यहाँ RJD को महज 4 सीटें मिल सकती हैं। पोल के मुताबिक किशनगंज की एकमात्र सीट कॉन्ग्रेस के खाते में जा सकती है।

महाराष्ट्र की कुल 48 लोकसभा सीटों में भाजपा की झोली में 25 सीटें आने का अनुमान है। जबकि यहाँ कॉन्ग्रेस को मात्र 2 सीटें मिलने की संभावना जताई गई है। शिवसेना उद्धव गुट को 8 और शिंदे गुट को 6 सीटें मिल सकती हैं। शरद पवार की एनसीपी को मात्र 2 सीटों पर संतोष करना पड़ सकता है जबकि अजित पवार खेमे में 4 सीटें आ सकती हैं। इसी पोल में पंजाब में आम आदमी पार्टी और कश्मीर में नेशनल कांफ्रेस की बढ़त बताई गई है।

लोकसभा चुनाव से पहले यूपी सरकार का कैबिनेट विस्तार, 4 नए मंत्रियों ने ली शपथ: पीएम मोदी और सीएम योगी को दिया धन्यवाद

उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ सरकार के मंत्रिमंडल का मंगलवार (5 मार्च 2024) को विस्तार हुआ। मंत्रिमंडल में कुल 4 नए मंत्रियों को शामिल किया गया है। इनके नाम सुनील शर्मा, ओम प्रकाश राजभर, दारा सिंह चौहान और अनिल कुमार हैं। राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने राजभवन में शाम 5 बजे इन सभी को पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई। योगी सरकार के दूसरे कार्यकाल का यह पहला मंत्रिमंडल विस्तार है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शपथ लेने वाले सभी मंत्रियों को बधाई दी है। उन्होंने विकसित उत्तर प्रदेश के संकल्प को पूरा करने में सभी मंत्रियों से सहयोग की अपेक्षा भी जताई है।

शपथ लेने वालों में अनिल कुमार अनुसूचित जाति से आते हैं। वह राष्ट्रीय लोकदल (RLD) से मुजफ्फरनगर की पुरकाजी विधानसभा से जीत कर आए हैं। अनिल कुमार जयंत चौधरी के बेहद करीबी माने जाते हैं। शपथ ग्रहण के बाद अनिल कुमार ने राज्यपाल आनंदीबेन पटेल और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के पैर छूकर आशीर्वाद लिया। अनिल कुमार ने शपथ लेने के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और जयंत चौधरी को धन्यवाद दिया है। आगामी लोकसभा चुनावों के लिए अनिल कुमार ने मिलकर मजबूती से लड़ने और जीत हासिल करने का भरोसा जताया।

शपथ लेने वाले दूसरे मंत्री ओम प्रकाश राजभर हैं। ओम प्रकाश राजभर सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष है। ओम प्रकाश राजभर को कैबिनेट मंत्री बनाया गया है। सुभासपा के मुख्य प्रवक्ता अरुण राजभर ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, अमित शाह और योगी आदित्यनाथ का धन्यवाद किया है। एक अन्य इंटरव्यू में अरुण राजभर ने कहा कि विपक्ष वाले पूरी रात पेट पकड़ कर रोएँगे। अरुण राजभर ने अखिलेश यादव को फ्रस्टेशन का शिकार बताया है।

ओम प्रकाश राजभर योगी सरकार के पहले मंत्रिमंडल में भी मंत्री बनाए गए थे। बीच में वो कुछ समय के लिए समाजवादी पार्टी के साथ गठबंधन के सदस्य बनकर खड़े हो गए थे। फ़िलहाल वह जहूराबाद विधानसभा से निर्वाचित हुए हैं। योगी सरकार के मंत्रिमंडल में शामिल हुए तीसरे विधायक दारा सिंह चौहान हैं।

पिछड़े वर्ग से आने वाले दारा भी योगी सरकार के पहले कार्यकाल में भाजपा के साथ रहे, लेकिन बाद में चुनाव के समय समाजवादी पार्टी के साथ जा मिले थे। योगी सरकार के दूसरे कार्यकाल में दारा सिंह चौहान फिर से भाजपा में शामिल हुए। उन्हें घोसी विधानसभा से उपचुनाव भी लड़ाया गया, लेकिन उन्हें हार का सामना करना पड़ा था।

योगी मंत्रिमंडल में जगह बनाने वाले तीसरे मंत्री सुनील शर्मा हैं। वह गाजियाबाद के साहिबाबाद विधानसभा से तीसरी बार विधायक चुनकर आए हैं। सबसे अधिक वोट से चुनाव जीतने के कारण उनका नाम “लिम्का बुक ऑफ इंडिया” की रिकॉर्ड लिस्ट में भी दर्ज है। साल 2022 में सुनील शर्मा को 2 लाख 14 हजार 845 वोटों से जीत मिली। यह देश में किसी विधायक की अब तक की सबसे बड़ी जीत थी।

NIA की 7 राज्यों में 17 ठिकानों पर छापेमारी, लश्कर के बेंगलुरु मॉड्यूल के आतंकियों की तलाश: बेंगलुरु कैफे ब्लास्ट से जुड़ रहे हैं तार

राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (NIA) ने मंगलवार (5 मार्च 2024) को 7 राज्यों में 17 जगहों पर छापेमारी की। यह छापेमारी लश्कर-ए-तैयबा मॉड्यूल से जुड़े आतंकियों की धर-पकड़ के लिए की गई। इस मॉड्यूल के आतंकी बेंगलुरु जेल में बनाए गए आतंकी नेटवर्क और युवाओं को कट्टरपंथी बनाने से जुड़े हैं। साथ ही इनके बेंगलुरु के रामेश्वरम कैफे विस्फोट में शामिल होने की आशंका है। छापेमारी में कैश, डिजिटल डिवाइस और अन्य दस्तावेज बरामद हुए है।

आतंकियों की तलाश में NIA ने यह छापेमारी गुजरात, केरल, पंजाब, तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल, तेलंगाना और कर्नाटक की। आशंका जताई जा रही है कि बेंगलुरु कैफे ब्लास्ट में भी लश्कर के इसी नेटवर्क का हाथ है। NIA के मुताबिक, इस छापेमारी के दौरान 25 मोबाइल फोन, 6 लैपटॉप, 4 स्टोरेज डिवाइस और कैश बरामद हुए हैं। यह कैश कई देशों की मुद्राओं के रूप में है।

दबिश के दौरान कर्नाटक के मंगलुरु में रहने वाले नवीद, बेंगलुरु के रहने वाले सैयद खैल, दक्षिण कन्नड़ जिले के निवासी बिज्जू, पश्चिम बंगाल 24 परगना निवासी मयूर चक्रबर्ती, पंजाब गुरदासपुर निवासी नवजोत सिंह, मेहसाणा गुजरात निवासी हार्दिक कुमार, अहमदाबाद निवासी करन कुमार, केरल में कासरगोड निवासी जॉनसन, तमिलनाडु रामनाथपुरम निवासी मुश्ताक अहमद व मुबीथ और चेन्नई निवासी हसन के ठिकानों की तलाश हुई।

NIA के मुताबिक, उनके द्वारा की गई छापेमारी की यह कार्रवाई उनके द्वारा 25 अक्टूबर 2023 को दिल्ली में दर्ज की गई FIR के सिलसिले में हुई है। इसी केस में 24 जनवरी 2024 को चार्जशीट दाखिल की गई थी। चार्जशीट में कुल 8 लोगों पर आरोप तय किए गए थे। इन 8 आरोपितों में जुनैद अहमद और सलमान खान अभी भी फरार चल रहे हैं। NIA को उसकी सरगर्मी से तलाश है।

NIA की प्रेसनोट

इन सभी पर UAPA व आर्मी एक्ट के अलावा विस्फोटक अधिनियम के तहत कार्रवाई की गई है। चार्जशीट में NIA ने बताया है कि बेंगलुरु जेल में सिखाए गए कट्टरपंथ से पनपा यह गिरोह पूरे देश में लश्कर ए तैयबा का नेटवर्क खड़ा करना चाहता है। NIA ने यह भी बताया कि इस गिरोह को आतंकी नेटवर्क खड़ा करने के लिए कई माध्यमों से पैसे भी मिल रहे हैं।

जिस मामले में NIA ने यह कार्रवाई की है उसका केस मूल रूप से बेंगलुरु पुलिस ने दर्ज कर रखा है। तब पारापन्ना अग्रहरा सेंट्रल से में बंद कैदियों को कट्टरपंथ की शिक्षा दे कर आतंकी समूह लश्कर-ए-तैयबा में भर्ती करवाने की साजिश का खुलासा हुआ था। पुलिस ने तब इस नेटवर्क के खिलाफ छापेमारी करते हुए 4 हैंड ग्रेनेड, 4 वाकी टॉकी, 7 पिस्टल, 1 मैगजीन और 45 जिन्दा कारतूस बरामद किए थे।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, जाँच एजेंसियों को आशंका है कि फरार चल रहे आतंकी सलमान और जुनैद अहमद का बेंगलुरु कैफे ब्लास्ट में हाथ हो सकता है। आज तक का दावा है कि फिलहाल दोनों आतंकी विदेश भाग चुके हैं। फ़िलहाल ये अजरबैजान में मौजूद हो सकते हैं। कुछ समय पहले दोनों की लोकेशन दुबई में मिली थी, लेकिन बाद में ये वहाँ से भी निकल लिए थे।