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‘TMC में नहीं मिला मुझे मेरा हक…’ : तृणमूल कॉन्ग्रेस को अलविदा कह दिग्गज नेता तापस रॉय ने थामा भाजपा का हाथ, लगाया- ‘BJP जिंदाबाद’ का नारा

साल 2024 में देश में होने जा रहे लोकसभा चुनावों से पहले पश्चिम बंगाल में तृणमूल कॉन्ग्रेस को झटका देकर पार्टी के वरिष्ठ नेता तामस रॉय ने भारतीय जनता पार्टी का हाथ थाम लिया है। उन्होंने कोलकाता में स्थित भाजपा कार्यालय में कार्यक्रम के दौरान बीजेपी ज्वाइन की। इस दौरान प्रदेश में भाजपा अध्यक्ष सुकांत मजूमदार ने उन्हें बीजेपी की सदस्यता दिलवाई। इस दौरान कार्यक्रम में लोकसभा सांसद व भाजपा नेता सुवेंदु अधिकारी भी कार्यालय में मौजूद थे। उन्होंने तापस को बीजेपी का झंडा पकड़ाया और पार्टी में उनका स्वागत किया।

उनके भाजपा ज्वाइन करने से टीएमसी नेता उनसे नाराज हैं। टीएमसी सांसद शांतनु सेन ने कहा- “टीएमसी ने उन्हें हर पद दिया। वह ईडी के डर से भाग गए या हो सकता है कि उन्हें और कुछ बड़ा ऑफर हुआ हो। उन्होंने भाजपा के आगे खुद को सरेंडर किया है। बंगाल के लोग उन्हें माफ नहीं करेंगे।”

गौरतलब है कि अभी दो दिन पहले ही टीएमसी के दिग्गज नेता तापस रॉय ने तृणमूल कॉन्ग्रेस के हर पद से इस्तीफा दिया था। टीएमसी छोड़ने के पीछे जो कारण दिया गया था वो था उनके और टीएमसी के बीच बढ़ी दूरियाँ। तापस रॉय ने कहा था, “मैं पिछले 25 वर्षों से पार्टी का एक ईमानदार नेता रहा हूँ, लेकिन मुझे मेरा हक कभी नहीं मिला।”

बता दें कि टीएमसी से तापस रॉय 4 बार विधायक रहे हैं। तापस रॉय बारानगर विधान सभा सीट साल 2011, 2016 और 2021 में टीएमसी से विधायक रहे। मौजूदा समय में वो विधायक भी थे, उन्होंने टीएमसी पार्टी के साथ ही विधायक पद भी छोड़ दिया है। इससे पहले वो बड़ा बाजार से 2001 में भी टीएमसी से विधायक चुने गए थे। वहीं, सबसे पहले साल 1996 में वो कॉन्ग्रेस के टिकट पर विद्यासागर विधानसभा सीट से विधायक बने थे।

‘मैं हिंदुओं के खून की नदियाँ बहा दूँगा’: मौलाना तौकीर रज़ा ने कहा था, 2010 का बरेली दंगा भी इसने ही भड़काया – बरेली कोर्ट में हाजिर होने का आदेश

उत्तर प्रदेश के बरेली जिले में सत्र न्यायाधीश की अदालत ने विवादित बयानों के लिए कुख्यात कट्टरपंथी मौलाना तौकीर रज़ा खान को साल 2010 में हुए हिंदू विरोधी दंगों का मास्टरमाइंड करार दिया है। इस मामले में विवादित मौलाना को 11 मार्च 2024 को कोर्ट में तलब किया गया है। साल 2010 में यह दंगा तब भड़क गया था, जब बारावफात के जुलूस में शामिल भीड़ तय रास्ते से हटकर जबरन उस मार्ग पर निकल पड़ी थी, जो हिन्दू बहुल इलाका था। इस घटना के बाद इस्लामी कट्टरपंथियों ने बरेली शहर के कई हिस्सों में हिंसा की थी, जिसकी वजह से 10 दिनों तक कर्फ्यू लगा रहा था।

अदालत ने इस तथ्य को उजागर किया है कि उस दंगे को मौलाना तौकीर रज़ा खान ही लीड कर रहे थे। ऑपइंडिया द्वारा जुटाए गए आँकड़ों से पता चलता है कि कैसे हथियारों से लैस मुस्लिम भीड़ ने तब मज़हबी नारेबाज़ी की थी। इसके बाद भीड़ को मौलाना तौकीर ने उकसाया, जिसके फलस्वरूप हिंदुओं और सिखों के घरों पर हमले हुए। भाजपा सांसद एसएस अहलूवालिया ने भी संसद में इन दंगों का मुद्दा उठाते हुए कहा था कि हिंसक भीड़ ने न सिर्फ हिन्दुओं, बल्कि सिखों की दुकानों और मकानों को निशाना बनाया था।

क्या हुआ था 2010 के दंगों में

रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह घटना 2 मार्च 2010 की है। तब प्रदेश में मायावती की सरकार थी। उस दौरान बरेलवी विचारधारा वाले मुस्लिमों की एक बड़ी मंडली ने बरेली में मिलाद-उद-नबी (पैगंबर के जन्मदिन) के मौके पर बारावफ़ात का जुलूस निकाला था। इससे पहले रैली 27 फरवरी को हुई थी। हालाँकि, 2 मार्च को भी जुलूस निकाला गया था। इस रैली में शामिल लोगों का एक ग्रुप प्रशासन द्वारा तय किए गए मार्ग से हट गया। वह कोहाड़ा पीर नामक इलाके की तरफ बढ़ गया, जो वहाँ के स्थाई निवासियों को पसंद नहीं आई।

कुछ रिपोर्ट्स यह भी बताती हैं कि साल 2006 में भी ऐसे ही हालात तब बने थे, जब बारावफात के जुलूस में शामिल कुछ लोग कोहाड़ा पीर इलाके से गुजरने की कोशिश कर रहे थे। हालाँकि, तत्कालीन बरेली प्रशासन ने साजिश को नजरअंदाज कर दिया था और सुरक्षा के कोई पुख्ता बंदोबस्त नहीं किए थे। साल 2010 में तब कोहाड़ा पीर इलाके से बारावफात में शामिल भीड़ गुजरी तो वहाँ के स्थानीय निवासियों के साथ हिंसा की गई। वहाँ रहने वालों पर पत्थरबाजी हुई और लोगों को पीटा गया।

बताते हैं कि इस घटना के बाद स्थानीय निवासियों का गुस्सा फूट पड़ा। तब दुकानों और वाहनों के साथ पुलिस चौकियों तक में आगजनी की गई। हिंसा में गोलियाँ भी चली थीं। हिंसक घटनाओं में कबूतरखाना बाजार में लगभग 20 दुकानें और कोहाड़ा पीर पुलिस चौकी को आग लगा दी गई थी। थाने के अंदर बने मंदिर की मूर्ति को भी हिंसक भीड़ ने तोड़ डाला था। हिंसा रोकते हुए कई पुलिस वाले घायल हो गए थे। आरोप यहाँ तक है कि हिन्दुओं के घरों मे घुसकर उनके गैस सिलेंडरों तक को आग लगाकर ब्लास्ट करवाया गया था।

हालात संभालने के लिए प्रशासन को बरेली के कई हिस्सों में 2 हफ़्तों तक कर्फ्यू लगाना पड़ा था। कर्फ्यू के बावजूद कई हिस्सों में भीड़ ने हथियारों के साथ सड़कों पर उतरकर हिंसा की थी। इस दौरान उन्मादी नारे लगाकर कई मंदिरों को टारगेट किया गया था। अनुमान के मुताबिक हिंसा में हिन्दू के 60 से अधिक घर जलाए गए थे। कम-से-कम 10 लोग गंभीर रूप से घायल हुए थे। नुकसान का अनुमान करोड़ों रुपए में लगाया गया था। इस पूरी हिंसा के लीडर के तौर पर मौलाना तौकीर का नाम सामने आया था।

हिन्दुओ के जलते घरों में नहीं पहुँच पाई फायर ब्रिगेड

बरेली के भाजपा नेता राजेश अग्रवाल ने अदालत के फैसले का स्वागत किया है। 2010 की घटना को याद करते हुए उन्होंने कहा कि तब मुस्लिमों ने अपने घरों की पहचान के लिए उसके ऊपर हरे झंडे लगा दिए थे। यहाँ तक कि जल रहे हिन्दुओं के घरों और मकानों को बुझाने निकली फायर ब्रिगेड की गाड़ियों को भी रोका गया था। बताया जा रहा है कि तब मौलाना तौकीर ने कोहाड़ा पीर इलाके में एक मंच बनवाया था। इस मंच का प्रयोग उसने मुस्लिमों को भड़काने के लिए किया था। तब मौलाना ने प्रशासन को भी धमकाते हुए कहा था कि अगर जुलूस को चाहबाई क्षेत्र में जाने से रोका गया तो इसके अंजाम ठीक नहीं होंगे।

उस समय मौलाना तौकीर ने कहा था, “मैं हिंदुओं के खून की नदियाँ बहा दूँगा। मैं उनके (हिंदुओं के) घरों और दुकानों को आग लगा दूँगा।” इस हिंसा के बाद 8 मार्च 2010 को मौलाना तौकीर को गिरफ्तार कर लिया गया था। गिरफ्तारी से नाराज भीड़ एक बार फिर से तोड़फोड़ पर उतारू हो गई थी। तब कई कट्टरपंथियों ने मायावती को वोट न देने और उनकी रैलियों के बहिष्कार जैसी चेतावनियाँ भी दी थीं। इसी दबाव में आकर मौलाना तौकीर महज 3 दिनों बाद 11 मार्च को रिहा हो गया। उसकी रिहाई के बाद भी हिंसा हुई, जिसमें कई पुलिसकर्मी घायल हुए थे।

मौलाना तौकीर की इतनी जल्द रिहाई और उसके चलते हुई हिंसा पर प्रशासन की चुप्पी पर बरेली बार एसोसिएशन ने तब सवाल उठाए थे। वकीलों ने तब सामूहिक तौर पर कहा था कि स्थानीय प्रशासन ने न्यायिक प्रणाली का मजाक बना दिया। कई वकीलों ने तो तब तत्कालीन मुख्यमंत्री मायावती को पत्र भी लिखा था। अब अपनी टिप्पणी अदालत ने पुलिस की चार्जशीट में मौलाना तौकीर का नाम न होने पर हैरानी भी जताई है।

कर्नाटक में गर्भवती गाय का ‘बेबी शॉवर’, पूरे मोहल्ले और रिश्तेदारों को आमंत्रित कर महिला ने ग्रैंड स्टाइल में मनाया जश्न

भारत ही नहीं, पूरी दुनिया में लोग अपने पालतू जानवरों को बहुत प्यार करते हैं। चूँकि गाय को सनातन संस्कृति में पवित्र माना जाता है, ऐसे में बहुत सारे परिवार गायों को अपने परिवार के हिस्से की तरह ही पालते हैं। वो उनसे प्रेम करते हैं और उनकी देखरेख करते हैं। इस बीच एक खबर कर्नाटक से आई है, जहाँ एक महिला ने अपनी गर्भवती गाय के लिए धूम-धाम से गोद-भराई (Baby Shower) कार्यक्रम का आयोजित किया।

न्यूज18 की रिपोर्ट के मुताबिक, इस कार्यक्रम के लिए महिला ने पूरे परिवार, रिश्तेदारों और पड़ोसियों को बाकायदा बुलाया और फिर मंत्रोच्चार के साथ ही गोद भराई की रस्म निभाई। महिला का नाम सकरनाडु है, जो कर्नाटक के मंड्या जिले के रमनाकोप्पलु गाँव की हैं। उन्होंने बातचीत में बताया कि उनकी गाय का नाम देवी है, जो परिवार के लोगों ने रखा है।

गाय को पहनाई हरे रंग की साड़ी, पूरे किए सारे रस्म

गोदभराई की रस्म के दौरान ‘देवी’ नाम की गाय को सजाकर तैयार किया गया। उसे हरे रंग की साड़ी भी पहनाई गई। महज 18 माह की उम्र की देवी अब गर्भवती है। सकरनाडु ने बताया कि जब देवी बहुत छोटी थी, तभी उसकी माँ की मौत हो गई थी। ऐसे में हमने नन्ही देवी को अपनी बेटी की तरह ही पाला है। और अब जब वो गर्भवती हुई है, तो हम उसकी गोद भराई की रस्म निभाकर खुश हैं।

स्थानीय लोगों का कहना है कि गोद भराई की ये रस्म काफी धूमधाम से पूरी की गई। इस दौरान पूरे घर को फूलों से सजाया गया और देवी के लिए तमाम तरह के फल लाए गए। उसे चंदन और कपूर मिले पानी से नहलाया गया। इस दौरान पूरे गाँव के लोग कार्यक्रम में पहुँचे और देवी को आशीर्वाद दिया।

जमाखंडी में महिला ने बाँटे कार्ड, गोदभराई में बंटे फल

कुछ समय पहले ही ऐसा मामला कर्नाटक के जमाखंडी के टीचर्स कॉलोनी से सामने आया था, जहाँ जकाती परिवार ने अपनी बछिया के पहली बार गर्भवती होने पर ग्रैंड तरीके से गोद भराई की रस्म की थी। इस रस्म को करने वाली शोभा जकाती ने बाकायदा कार्ड छपवाकर रिश्तेदारों, पड़ोसियों और पूरे मोहल्ले को बुलाया था।

सनातन संस्कृति में गाय को माँ का दर्जा दिया जाता है। गौदान से बड़ा कोई दान नहीं होता। एक तरफ जहाँ सनातन के खिलाफ आग उगलने वाले नेताओं की बाढ़ सी आई हुई है, तो दूसरी तरफ लोगों का अपनी जड़ों से जुड़ने की खबर सुकून देने वाली है। इन दोनों ही मामलों में गायों की गोदभराई की रस्म निश्चित तौर पर अच्छी पहल है, जो ये संदेश देती है कि अगर हम जानवरों को भी अपने बच्चों की तरह मानें, तो कितना बेहतर हो।

मजबूत अर्थव्यवस्था के साथ बढ़ रहा भारत, दुनिया में मिल रही पहचान: SC ने सुनवाई के बीच कहा- हमें देश पर गर्व होना चाहिए

केंद्र सरकार और केरल सरकार के बीच एक वित्तीय विवाद के मामले में सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने भारतीय अर्थव्यवस्था की जमकर तारीफ की। सर्वोच्च अदालत ने कहा कि अब भारत की अर्थव्यवस्था को पूरी दुनिया में पहचान मिल रही है। देश को इस पर गर्व करना चाहिए।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस सूर्यकांत की बेंच ने कहा, “पूरी दुनिया भारत को पहचान रही है। जब भी हम देश से बाहर जाते हैं तो हमें महसूस होता है कि भारत कितनी मजबूत अर्थव्यवस्था के साथ आगे बढ़ रहा है…और ये सब तथ्यों और आँकड़ों पर आधारित है। हम सभी को इस पर गर्व होना चाहिए।”

जानकारी के मुताबिक, केरल सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में इस बात की शिकायत की हैं कि केंद्र सरकार उन्हें धन नहीं दे रही और इसकी वजह से उन्हें काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने वित्त प्रबंधन के लिए 13000 करोड़ रुपए जारी करने और अतिरिक्त 15000 करोड़ रुपए की माँग की है। अब केंद्र इस मामले में उन्हें 13000 करोड़ देने से मना नहीं कर रहा है लेकिन 15000 करोड़ देने से मना कर रहा है। इसलिए इस मामले को केरल सरकार सुप्रीम कोर्ट ले गई है।

सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान केरल और केंद्र सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों को आज शाम तक ये मामला सुलझाने के लिए कहा है। साथ ही ये भी कहा है कि बैठक के बाद जो भी नतीजे होंगे उसके आधार पर वह दोबारा से कोर्ट में आ सकते हैं। कोर्ट ने उन्हें यह भी कहा है कि दोनों ही पक्षों को मामले के पेंडिंग रहने तक इस विषय में मीडिया से कोई बात नहीं करनी हैं।

समलैंगिक साथी को झाँसा देकर ब्रेस्ट सर्जरी करवाई, लड़की जैसा चेहरा सजवाया फिर शादी से कर दिया इनकार: प्रेमिका बने लड़के ने गुस्से में कार पर पेट्रोल डाल आग लगा दी

उत्तर प्रदेश के कानपुर में एक अजीब-ओ-गरीब मामला सामने आया है। यहाँ प्यार में धोखा खाए एक समलैंगिक साथी अपने प्रेमी की कार पर पेट्रोल डालकर जला डाला। प्रेमी की पहचान वैभव शुक्ला के रूप में हुई है। उसके कहने पर उसके समलैंगिक साथी दीप्तेश उर्फ दीप तनवानिया ने अपनी ब्रेस्ट सर्जरी करा ली और फिर दीपा बन गई। इसके बाद वैभव शुक्ला ने उससे शादी करने से इनकार कर दिया। उससे वह भड़क उठा।

रिपोर्ट के मुताबिक, दरअसल, इंदौर निवासी दीप्तेश तलवानिया की 2021 में श्यामनगर निवासी वैभव शुक्ला से इंस्टाग्राम पर दोस्ती हुई थी। दोनों की दोस्ती धीमे-धीमे प्यार में बदल गई। कुछ रिपोर्ट में कहा जा रहा है कि दीप थर्ड जेंडर था। खैर जो भी हो, कभी दीप कानपुर आकर होटल में वैभव शुक्ला से मिलता तो कभी वैभव इंदौर जाता और दीप के साथ बिताता। लगभग दो वर्षों तक यह रिश्ता चला।

बात शादी तक पहुँची तो वैभव शुक्ला ने यह कहकर मना कर दिया कि वह लड़की होती तो उससे शादी कर लेता। इसके बाद दीप ने अपनी प्लास्टिक सर्जरी और ब्रेस्ट सर्जरी करवा ली। इसे करवाने में उसे लगभग 70 लाख रुपए खर्च करने पड़े। हालाँकि, वह लिंग नहीं बदलवा पाया, क्योंकि उसके पास पैसे कम पड़ गए थे। इस बीच वैभव शुक्ला ने दीप से शादी करने से मना कर दिया। 

इसके बाद दीप ने वैभव को सबक सिखाने का निर्णय लिया। इसके बाद दीप अपने दोस्त के साथ कानपुर पहुँचा और वैभव के घर के नीचे खड़ी कार पर पेट्रोल डालकर आग लगा दी। वारदात करने के बाद दोनों आरोपित बस से इंदौर के लिए निकल चुके थे। पुलिस ने बारा टोल प्लाजा पर ओवरटेक कर बस रुकवाई और दोनों को गिरफ्तार कर लिया।

दीप्तेश तलवानिया इंदौर का रहने वाला है। वहीं, उसका दोस्त रोहन यादव भोपाल का रहने वाला है। वैभव शुक्ला कानपुर का रहने वाला है। उसका पिता का निरवाना नाम से एक रेस्टोरेंट चलाता है। परिवार में पिता, माँ और भाई हैं। दीप का कहना है कि वैभव शुक्ला के परिवार वालों को उसके संबंधों के बारे में जानकारी थी।

डीसीपी पूर्वी श्रवण कुमार सिंह ने बताया कि सीसीटीवी फुटेज के अलावा त्रिनेत्र योजना के तहत घटनास्थल के आसपास लगाए गए कैमरों में खोजबीन की गई तो स्कूटी का नंबर मिला। स्कूटी के नंबर के जरिए रेपिडो नाम की फर्म के ऑफिस पहुँचे। वहाँ से दीप का आईडी और मोबाइल नंबर मिला। उसे सर्विलांस पर लिया तो बस की लोकेशन मिली। पुलिस ने बाराजोड़ टोल प्लाजा के पास घेराबंदी कर दोनों आरोपियों को गिरफ्तार किया।

3 साल की बच्ची से रेप, अप्राकृतिक कुकृत्य भी… फिर हत्या: जिस अपराधी ने किया ऐसा, उसकी फाँसी की सजा को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उम्रकैद में बदली

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 3 साल की एक बच्ची के साथ रेप और अप्राकृतिक कृत्य के बाद हत्या करने वाले आरोपित को निचली अदालत से मिली मौत की सजा को उम्रकैद में तब्दील कर दिया है। सजा पाए अपराधी का नाम दिनेश पासवान है। अपने फैसले का आधार अदालत ने मुल्जिम का आपराधिक इतिहास न होना बताया है। उच्च न्यायालय ने यह भी माना है कि अभी दिनेश पासवान में सुधार की गुंजाइश है। यह निर्णय 21 फरवरी 2024 को सुनाया गया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक यह घटना उत्तर प्रदेश में फतेहपुर जिले के थानाक्षेत्र खागा की है। यहाँ 15 अक्टूबर 2021 को बच्ची के पिता ने पुलिस में शिकायत दर्ज करवाई थी। तब शिकायतकर्ता पिता ने बताया था कि 25 वर्षीय आरोपित दिनेश पासवान उनका पड़ोसी था। उसने उनकी 3 वर्षीया बेटी को सेब का लालच देकर अपने कमरे में बुलाने की कोशिश की थी। हालाँकि पहली कोशिश में नाकाम रहने के बाद आरोपित 12 बजे बच्ची को अकेला पाकर उसे अपने कमरे में ले आया। यहाँ उसने बच्ची के साथ रेप और अप्राकृतिक कुकृत्य किया था।

बाद में अपना नाम खुलने के डर से दिनेश पासवान से बच्ची की हत्या कर दी और लाश को छिपा दिया। आरोपित को 15 अक्टूबर की रात को ही गिरफ्तार कर लिया गया था। अदालत में यह केस IPC की धारा 364, 376 AB,377, 302 और 201 के अलावा पॉक्सो एक्ट के तहत चलाया गया। 18 जनवरी 2022 को इस केस की सुनवाई के बाद फतेहपुर के पॉक्सो मामलों के अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश ने अभियुक्त दिनेश पासवान को दोषी पाया और मृत्युदंड की सजा सुनाई।

दिनेश पासवान ने अपनी इस सजा के खिलाफ हाईकोर्ट इलाहाबाद में अपील की थी। दिनेश की तरफ से वकील तनीषा जहाँगीर मुनीर और प्रदीप कुमार ने बहस की। यह सुनवाई न्यायमूर्ति अश्वनी कुमार मिश्रा और न्यायमूर्ति सैयद आफ़ताब हुसैन रिज़वी की बेंच में हुई। बचाव पक्ष ने दिनेश पासवान को बेगुनाह बताते हुए पुलिस की जाँच में तमाम कमियाँ गिनाईं। हालाँकि अभियोजन पक्ष ने दिनेश को मिली मौत की सजा को उचित ठहराया। अंत में दोनों पक्षों को सुनंने के बाद अदालत ने दिनेश पासवान के गुनाह को गंभीर माना।

इसके बावजूद अपने निर्णय में अदालत ने कहा कि मुल्जिम दिनेश पासवान शादीशुदा और 1 बच्चे का पिता है। इसी के साथ दिनेश का कोई पुराना आपराधिक इतिहास भी नहीं पाया गया। अदालत ने माना कि अभियुक्त दिनेश में भविष्य में सुधार की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता। अंत में हाईकोर्ट ने दिनेश को मिली मृत्युदंड की सजा को 30 वर्ष के कारावास में तब्दील कर दिया।

झारखंड में शरिया कानून लागू करवा रही आदम सेना क्या है? किस तरह इस्लामी कट्टरपंथियों की बन रहा आवाज, जानें सब कुछ

झारखंड के कुछ इलाकों में आदम सेना नाम की एक नई सेना सामने आ रही है, जो मुस्लिमों की रहनुमाई की बात करती है। इस संगठन के लोग शरिया लॉ की तर्ज पर अपने नियम कानून थोपते हैं। मुस्लिम लड़कियाँ अगर किसी हिंदू से बात करते भी दिख जाए, तो ये उसे सबक सिखाते हैं। इन सब बातों का खुलासा हुआ रामपुर से, जहाँ आदम सेना के लोगों ने एक मुस्लिम लड़की को धमकाया। हालाँकि अब ये मामला बढ़ चुका है, तो आदम सेना के बारे में कई बड़ी जानकारियाँ भी निकल कर सामने आ रही हैं। क्या है ये आदम सेना, क्योंकि ये तेजी से चर्चा में आ रही है और क्या काम करती है ये सेना, इसकी जानकारी हम आपको दे रहे हैं।

क्या है आदम सेना?

आदम सेना मुस्लिमों का एक संगठन है, जिसमें कट्टरपंथी युवाओं की भरमार है। दावा है कि आदम सेना शरिया कानून लागू करना चाहती है। खासकर मुस्लिम महिलाओं पर। कहने के लिए ये मुस्लिमों के खिलाफ हिंसा का विरोध करती है, लेकिन इससे जुड़े लोगों के वायरल वीडियो में सीधे-सीधे मुस्लिम महिलाओं और लड़कियों को धमकाया जाता है कि अगर उन्होंने हिंदुओं से कोई मेलजोल रखा, तो फिर शरिया के हिसाब से उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

रामगढ़ में पुलिस से शिकायत, पीड़ित ने सुनाई आपबीती

इस समय आदम सेना की वजह से झारखंड का रामगढ़ जिला चर्चा में है। यहाँ आदम सेना ने स्थानीय गाँवों में शरिया कानून लागू किया है। इसके तहत मुस्लिम लड़कियों को गैर-मुस्लिमों के साथ बातचीत करने पर प्रतिबंध है और उन्हें बुर्का पहनना अनिवार्य है। असहमति जताने वालों को आदम सेना के सदस्यों द्वारा बलात्कार, हत्या या समुदाय से निष्कासन की धमकियों का सामना करना पड़ता है। ये मामला रजरप्पा थाना क्षेत्र का है, जहाँ शिकायतकर्ता लड़की ने थाने में गुहार लगाई है कि उसे आदम सेना के कथित नेता सलमान और अहमद से जान का खतरा है। 

पीड़ित लड़की ने कहा कि, “उन दोनों ने मुझसे कहा, ‘हम प्रशासनिक कार्रवाई को स्वीकार नहीं करते हैं, यहाँ शरिया कानून चलता है। इन लोगों ने मुझे और पूरे परिवार को पीटा और हमारा सामान भी घर से बाहर फेंक दिया और घर पर ताला लगा दिया।” पीड़िता ने अपनी शिकायत में कहा कि उसके परिवार को परेशान किया जा रहा है और अगर प्रशासन ने आदम सेना के खिलाफ कार्रवाई नहीं की तो वह एसपी आवास के सामने आत्महत्या कर लेगी। हालाँकि रजरप्पा थाना प्रभारी नवीन प्रकाश पांडे का कहना है। जिस आदम सेना का नाम लिया जा रहा है, वह इस इलाके में कहीं भी सक्रिय नहीं है। न ही इसके खिलाफ ऐसी कोई शिकायत मिली है।

आदम सेना झारखंड में सक्रिय, ये रहे सबूत

जितेंद्र प्रताप सिंह ने एक्स पर इस संगठन से जुड़े डिटेल्स शेयर किए हैं। इसमें एक रील में आदम सेना से जुड़ा जहाँगीर नाम का युवक बोल रहा है, ‘मोहब्बत का बुखार चढ़ा है तो आके हमसे माफी माँग ले, नहीं तो बुखार उतारने में आदम सेना कभी पीछे नहीं हटती।’

इस संगठन से जुड़ी एक फेसबुक आईडी पर डाली गई रील्स पर अगर मस्जिद की हिफाजत करने वाला तालीबानी होता है, तो हाँ मैं हूँ तालीबानी। अगर अपने हक की आवाज उठाने वाला आतंकवादी होता है, तो हाँ मैं हूँ आतंकवादी। मैं फिलिस्तीन की नहीं, बल्कि फिलिस्तीन के हर उस शख्स के साथ खड़ा हूँ, जो मस्जिद-ए-अक्सा के लिए अपनी जान कुर्बान कर रहा है। …ये आखिरी जंग है अक्सा की, अब मिट के रहेंगे….।”

इस संगठन के लोग जमीन पर काफी सक्रिय दिखते हैं। सर्दियों में मदरसों में कंबल बाँटने से लेकर तमाम कार्य आदम सेना कर रही है, ताकि लोगों को अपने साथ जोड़ा जा सके। इस संगठन से जुड़े तमाम पदाधिकारी झारखंड में हैं। इसका राष्ट्रीय अध्यक्ष मजरूल खान है, तो रेयाज खान नाम का आदमी झारखंड प्रदेश संयोजक है। मोहम्मद शाहनवाज इसका झारखंड प्रदेश अध्यक्ष है, जो सैफ खान लोहरदगा जिले का जिलाध्यक्ष।

इरशाद इब्र तहमीद रशादी नाम का युवक आदम सेना नाम लेकर लेकर मुस्लिम लड़कियों को धमका रहा है। उसकी प्रोफाइल पर लिखा है, “अल्लाह करे तुम डेट पर जाओ फलानी और हम आदम सेना अपनी पूरी टीम लेकर पहुँच जाए।”

सोशल मीडिया पर आदम सेना नाम का ये संगठन खूब सक्रिय है। इंस्टाग्राम पर इस संगठन के 19 हजार से ज्यादा फॉलोवर हैं तो जमीन पर भी इसकी सक्रियता दिखती है।

आदम सेना के इंस्टाग्राम अकाउंट का स्क्रीनशॉट

पूर्व मुख्यमंत्री ने उठाया मामला

ये मामला बीजेपी के वरिष्ठ नेता और पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी ने भी उठाया है। उन्होंने एक्स पर लिखा, “झारखंड में पुलिस प्रशासन की नाक के नीचे मुस्लिम महिलाओं पर जबरन शरिया कानून थोपने का काम चल रहा है। आदम सेना नामक गिरोह बनाकर कुछ असामाजिक तत्व मुस्लिम महिलाओं को हिन्दुओं से बातचीत नहीं करने का दबाव बनाते हुए घरों में घुसकर छेड़खानी भी कर रहे हैं। याद रहे… झारखंड देश के संविधान से चलेगा, किसी शरिया-शरीयत से नहीं! मुख्यमंत्री @ChampaiSoren जी, वोट बैंक के लालच में आदम सेना जैसे गिरोह को संरक्षण देने की बजाय इनके नापाक मंसूबे को कुचलने का काम करें।”

इन सब बातों को देखने के बाद भी रामगढ़ के रजरप्पा पुलिस थाना प्रभारी के इस दावे कि ‘आदम सेना जैसी कोई ताकत जमीन पर नहीं है और न ही इस तरह की कोई बात सामने आई है’, इस पर कई सवाल खड़े होते हैं। चूँकि पीड़ित खुद कह रही है कि उसे आदम सेना के नाम से धमकाया जा रहा है और शरिया लागू करने की बात की जा रही है, ऐसे में आदम सेना के खिलाफ कार्रवाई न करके सीधे-सीधे पलड़ा झाड़ लेना कहीं न कहीं झारखंड सरकार के साथ ही पुलिस और प्रशासन की मंशा पर भी सवाल खड़े करता है।

कर्नाटक में फिर हिंदू विरोधी पाठ पढ़ेंगे स्कूली बच्चे: राज्य सरकार ने पेरियार सहित वामपंथियों को किया शामिल, धर्म को बदलकर किया ‘रिलीजन’

कर्नाटक सरकार ने कक्षा एक से दस तक के पाठ्यपुस्तकों के संशोधन को अंतिम रूप दे दिया है, जिसमें महत्वपूर्ण बदलाव किए गए हैं। इसके तहत बच्चों को ‘सनातन धर्म’ आधारित पाठ में इसे विस्तार से बताया जाएगा। इसके अलावा, सरकार ने पी. लंकेश, सावित्रीबाई फुले, गिरीश कर्नाड, पेरियार, देवनूर महादेव, थिरुनाकुडु चिन्नास्वामी, नागेश हेगड़े जैसे लेखकों की रचनाओं को भी शामिल किया है।

प्रो. मंजूनाथ जी. हेगड़े की अध्यक्षता वाली पाठ्यपुस्तक संशोधन समिति ने कर्नाटक सरकार को अपनी रिपोर्ट सौंपी है। समिति ने सावित्रीबाई फुले और पेरियार जैसे कट्टरपंथी लेखकों से संबंधित विषयों पर पाठ को फिर से शुरू करने की सिफारिश की है। हालाँकि, समिति ने टीपू सुल्तान और हैदर अली से संबंधित पाठों को फिर से शुरू करने की सिफारिश नहीं की है। भाजपा सरकार ने इन्हें हटा दिया था।

इन पाठ्यपुस्तकों में जैन धर्म और बौद्ध धर्म के बारे में बताने वाले नए अध्याय शामिल किए गए हैं। वहीं, ‘धर्म’ जैसे कुछ शब्दों को ‘रिलिजन’ में बदल दिया गया है। जम्मू-कश्मीर और पूर्वोत्तर के राजवंश वाले भागों को काट दिया गया है। दसवीं कक्षा की इतिहास में ‘सामाजिक और धार्मिक सुधार आंदोलन’ शामिल किया गया है। भक्ति आंदोलन में कनक दास, पुरंदर दास और शिशुनाला शरीफ को जोड़ा गया है।

जून में कर्नाटक टेक्स्टबुक सोसाइटी ने एक पत्र के माध्यम से घोषित महत्वपूर्ण बदलावों में दसवीं कक्षा की कन्नड़ पाठ्यपुस्तक में आरएसएस संस्थापक के.बी. हेडगेवार के ‘निजवाड़ा आदर्श पुरुष यारागाबेकु’ को शिवकोट्याचार्य के ‘सुकुमार स्वामीया कथे’ से स्थान्नपन शामिल है। वहीं, दसवीं कक्षा की कन्नड़ पाठ्यपुस्तक में शतावधानी आर. गणेश की ‘श्रेष्ठ भारतीय चिंतानेगलु’ को सारा अबूबकर की ‘युद्ध’ से बदल दिया गया।

जिन लेखकों की रचनाओं या उनकी जीवनी को कर्नाटक सरकार ने पाठ्य-पुस्तकों में शामिल किया है, वे हिंदू विरोधी और घनघोर वामपंथी विचारधारा के रहे हैं। उन्होंने भारत की संस्कृति को हमेशा नीचा दिखाने की कोशिश की। उनकी रचनाओं में भी इसका असर स्पष्ट रूप से दिखाई देता है। इसमें पी. लंकेश और गिरीश कर्नाड जैसे लेखक वामपंथी विचारधारा को पोषक रहे हैं।

दूसरी तरफ, पाठ्य-पुस्तकों में पेरियार को भी शामिल किया गया है। वे बेहद कट्टर विचारधारा के रहे हैं। पेरियार का असली नाम ई वी रामास्वामी था। वे एक धार्मिक हिंदू परिवार में पैदा हुए थे, लेकिन ब्राह्मणवाद के विरोधी रहे। उन्होंने न केवल ब्राह्मण ग्रंथों की होली जलाई, बल्कि रावण को अपना नायक भी माना था। वो बाल विवाह और देवदासी प्रथा के खिलाफ थे।

दरअसल, पिछले साल कॉन्ग्रेस के सत्ता में आते ही पाठ्य पुस्तकों में किए गए सभी सुधारों को समिति ने बरकरार रखा है। कर्नाटक टेक्स्ट बुक सोसायटी ने मंगलवार (5 मार्च 2024) को एक रिपोर्ट जारी की और कक्षा 1 से लेकर 10 तक के पाठ्य-पुस्तकों में किए गए बदलावों की जानकारी दी। ये बदलाव 2024-25 के लिए किए गए हैं।

भाजपा विधायक और पूर्व उच्च शिक्षा मंत्री अश्वथ नारायण ने कर्नाटक सरकार के इस कदम का विरोध किया है। उन्होंने कहा, “वे संविधान और कर्नाटक के लोगों की आस्था और विश्वास का सम्मान नहीं करते हैं। वे अराजकता, भ्रम और ध्रुवीकरण पैदा करना चाहते हैं। वे उस सनातन धर्म का सम्मान नहीं करते हैं। इसलिए वे ऐसे लोगों को लाने की कोशिश कर रहे हैं जो सनातन धर्म के खिलाफ हैं।”

उन्होंने कहा, “यह हमारी आस्था के खिलाफ है। ऐसा करके वे (कर्नाटक की कॉन्ग्रेस सरकार) भ्रम पैदा करने की कोशिश कर रही है। वे सनातन धर्म के खिलाफ काम कर रहे हैं, जिसकी हम निंदा करते हैं। हम कॉन्ग्रेस सरकार को बेनकाब करेंगे और जागरूकता पैदा करेंगे। हम पाठ्यक्रम का पुरजोर विरोध करेंगे और सुनिश्चित करेंगे कि इसमें समावेशन न हो।”

14 साल की लड़की से बार-बार रेप, प्रेग्नेंट होने पर गर्भपात… फिर निकाह और तीन तलाक: बच्ची के अब्बा की मौत के बाद हमदर्दी की आड़ में हैवानियत

देश की राजधानी दिल्ली में तीन तलाक का एक मामला सामने आया है। यहाँ मुस्लिम समुदाय के एक प्रॉपर्टी डीलर पर पहले 14 साल की नाबालिग से रेप करने और बाद में उससे निकाह करने के बाद तीन तलाक देने का आरोप है। बीच में पीड़िता गर्भवती हुई तो गर्भनिरोधक गोलियाँ देकर उसका गर्भपात करवा दिया गया। शनिवार (2 मार्च 2024) को पुलिस ने FIR दर्ज कर के आरोपित को गिरफ्तार कर लिया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक यह मामला उत्तर पूर्वी दिल्ली के थानाक्षेत्र दयालपुर का है। 14 साल की नाबालिग पीड़िता के अब्बा की मौत 2021 में हो चुकी थी। उनकी अम्मी की भी दिमागी हालात ठीक नहीं, जिसका इलाज अस्पताल में चल रहा है। घर में भाई और बहन हैं, जिनका जैसे-तैसे गुजारा चल रहा था।

इस बीच किराए का मकान दिलवाने के बहाने उसके घर आरोपित प्रॉपर्टी डीलर आया। कुछ दिनों में उसका पीड़िता के घर पर आना-जाना हो गया। 14 अगस्त 2023 को उसने लड़की को अकेला पाकर बलात्कार किया। इसके बाद उसने पीड़िता को डरा-धमका कर कई बार उससे रेप किया।

इस बीच पीड़िता गर्भवती हो गई तो आरोपित द्वारा गर्भनिरोधक गोलियाँ देकर उसका गर्भपात करवा दिया गया। पीड़िता के साथ हो रहे दुष्कर्म की जानकारी लड़की के घर वालों को हुई। अंत में सबने बातचीत करके 17 नवंबर 2023 को पीड़िता का निकाह आरोपित प्रॉपर्टी डीलर से करवा दिया।

यह निकाह कुछ ही दिन चला और 21 जनवरी 2024 को उसने पीड़िता को तीन तलाक देकर घर से बाहर कर दिया। आरोप है कि इसी के साथ प्रॉपर्टी डीलर ने धमकी भी दी कि अगर किसी से बताया तो लड़की और उसके पूरे परिवार को खत्म कर दिया जाएगा।

आरोप है कि अपने साथ हुए इस अत्याचार की शिकायत जब पीड़िता पुलिस में करने गई तब उसे भगा दिया गया। अंत में पीड़िता ने महिला हेल्पलाइन में इसकी शिकायत दर्ज करवाई। महिला हेल्पलाइन के हस्तक्षेप के बाद पीड़िता 30 जनवरी 2024 को उत्तर पूर्वी दिल्ली के DCP से मिलीं और उन्हें सारे मामले में अवगत करवाया।

DCP के आदेश के बाद आरोपित प्रॉपर्टी डीलर के खिलाफ शनिवार (2 मार्च 2024) को FIR दर्ज हुई। यह केस रेप, धमकी, पिटाई आदि धाराओं के अलावा पॉक्सो एक्ट के तहत दर्ज हुआ है। पुलिस ने आरोपित को गिरफ्तार कर लिया है। मामले की जाँच की जा रही है। पीड़िता फिलहाल अपने माँ और भाई-बहन के साथ अपने मायके में रह रही है।

‘बलात्कारी, आतंकी, भगोड़े, हत्यारे… ये है मोदी का असली परिवार’ : कॉन्ग्रेस की अपमानजनक हरकत, जाहिर की PM से अपनी कुंठा, FIR दर्ज

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के परिवार पर उठाए गए सवालों का जब से भारतीय जनता पार्टी के नेताओं ने जवाब देना शुरू किया है, उसके बाद से विपक्ष भड़का हुआ है। इसी तिलमिलाहट में वो अपनी कुंठा जाहिर करने से भी पीछे नहीं हट रहे। सबसे ताजा उदाहरण इंडियन यूथ कॉन्ग्रेस का है जिन्होंने इस कुंठा में ऐसा विवादित ट्वीट कर डाला, जिस पर दिल्ली पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर ली है। मामला तुकलकाबाद पुलिस थाने में दर्ज हुआ है।

5 मार्च 2024 को किए गए अपने ट्वीट में इंडियन यूथ कॉन्ग्रेस ने लिखा- “बलात्कारी, आतंकी, घृणा फैलाने वाले, भगोड़े और हत्यारे। सबका साथ-सबका विकास। ये है मोदी का असली परिवार।”

इस ट्वीट के साथ IYC ने अपने ट्वीट के साथ एक बोर्ड लगाया है। इसमें मोदी का असली परिवार बताकर उन विवादित नामों को जोड़ा गया है जिनपर कोई न कोई केस हुए हों, या फिर कोई आरोप लगे हों।

ट्वीट का स्क्रीनशॉट (तस्वीर साभार:इंडियन यूथ कॉन्ग्रेस)

इसमें गौतम अडानी को लुटेरा कहा गया। मेहुल चौकसी, ललित मोदी, विजय माल्या, नीरव मोदी को भगोड़ा बताते हुए मोदी का असली परिवार बताया गया है। इसके अलावा इसमें उपेंद्र रावत को अश्लीलता फैलाने, बृज भूषण सिंह को यौन शोषण के आरोपित, अनुराग ठाकुर को दंगे भड़काने वाला, अजय सिंह टेनी को लोगों को गाड़ी से कुचलने वाला कहा गया।

बोर्ड की फोटो (तस्वीर साभार:इंडियन यूथ कॉन्ग्रेस)

यहाँ साध्वी प्रज्ञा को आतंकवादी कहा गया है। साथ ही कुलदीप सेंगर पर गैंगरेप, चिन्मयानंद पर रेप और संदीप सोनी पर शारीरिक शोषण का इल्जाम दिखाकर उन्हें भी मोदी का परिवार बताया गया है।

ये ट्वीट 5 मार्च 2024 को किया गया था। इंडियन यूथ कॉन्ग्रेस के आधिकारिक अकॉउंट पर ये खबर लिखने तक मौजूद था। कॉन्ग्रेस की यूथ यूनिट द्वारा की गई ये हरकत उस पूरे विवाद के क्रम में आई है जो विपक्षी गठबंधन की बैठक में लालू यादव के बयान के बाद शुरू हुआ।

दरअसल बिहार की राजधानी पटना के ऐतिहासिक गाँधी मैदान में रविवार (03 मार्च 2024) को आयोजित ‘जनविश्वास महारैली’ के दौरान राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव ने पीएम मोदी को लेकर टिप्पणी की थी। उन्होंने कहा था, “अगर नरेंद्र मोदी के पास अपना परिवार नहीं है तो हम क्या कर सकते हैं। वह राम मंदिर के बारे में डींगें हाँकते रहते हैं। वह एक सच्चे हिंदू भी नहीं हैं। हिंदू परंपरा में एक बेटे को अपने माता-पिता के निधन पर अपना सिर और दाढ़ी मुँडवानी चाहिए। मोदी ने तब ऐसा नहीं किया जब उनकी माँ की मृत्यु हो गई।”

इसके बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 04 मार्च 2024 को तेलंगाना के अदिलाबाद में एक जनसभा को संबोधित करते हुए आरजेडी सुप्रीमो पर पलटवार किया। पीएम मोदी ने कहा, “मेरे परिवार को लेकर मुझ पर निशाना साधा गया। लेकिन, अब पूरा देश बोल रहा है कि मैं हूँ मोदी का परिवार।”

पीएम मोदी के इस ऐलान के बाद केंद्रीय मंत्रियों से लेकर राज्यों के मुख्यमंत्रियों तक ने एक्स पर अपनी प्रोफाइल में ‘मोदी का परिवार’ जोड़कर लालू के सवाल का जवाब दिया। लेकिन ये सब कॉन्ग्रेस से नहीं देखा गया और उन्होंने दो कदम आगे बढ़कर विवादित ट्वीट कर डाला। अब इस ट्वीट पर दिल्ली पुलिस अपनी कार्रवाई करेगी।