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झाड़-फूँक की आड़ में नाबालिग बहनों का 5 साल तक रेप किया मौलवी मेहंदी कासिम शेख, 4 लड़कियों का कराया था गर्भपात: बॉम्बे हाई कोर्ट ने उम्रकैद की बरकरार रखी सजा

बॉम्बे हाईकोर्ट ने झाड़-फूँक की आड़ में लड़कियों से बलात्कार करने वाले मौलवी मेहंदी कासिम जैनुल आबिदीन शेख की उम्रकैद की सजा को बरकरार रखा है। मौलवी मेहंदी कासिम बंगाली बाबा नाम से प्रसिद्ध था, जो खुद को तांत्रिक बताया करता था। मेहंदी 5 साल से 6 नाबालिग सहित 7 लड़कियों के साथ दुष्कर्म कर रहा था। इस मामले दोषी पाते हुए निचली अदालत ने उसे उम्रकैद की सजा दी थी।

बॉम्बे हाई कोर्ट की पीठ ने याचिकाकर्ता शेख की अपील को खारिज करते हुए कहा, “यह हमारे समय की एक दुर्भाग्यपूर्ण वास्तविकता है कि लोग अपनी समस्याओं के समाधान के लिए कभी-कभी झाड़-फूँक करने वालों के दरवाजे खटखटाते हैं और ये तथाकथित झाड़-फूँक करने वाले लोगों की असुरक्षा और अंधविश्वास का फायदा उठाते हैं और उनका शोषण करते हैं।”

कोर्ट ने आगे कहा, “झाड़-फूँक करने वाले न केवल उनसे पैसे ऐंठकर उनकी कमजोरियों का फायदा उठाते हैं, बल्कि कई बार समाधान देने की आड़ में पीड़ितों का यौन उत्पीड़न भी करते हैं। अपीलकर्ता ने पीड़ितों की माँ की आशंका का पूरा फायदा उठाया और उनके डर को बरगलाकर लड़कियों को ठीक करने का आश्वासन दिया और इस प्रक्रिया में उनका आर्थिक शोषण भी किया।”

हाईकोर्ट ने अपनी टिप्पणी में मेहंदी की करतूत को ‘यातना’ बताया और उसे कड़ी सजा के योग्य माना है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, 37 वर्षीय मेहंदी शेख मुंबई के पायधुनी इलाके के मरियम टॉवर में रहता है। वह पीड़ित परिवार में कुरान और अन्य मज़हबी किताबें पढ़ाने जाया करता था। यहाँ 3 सगी बहनें मौलवी से दीनी तालीम हासिल करती थीं।

थोड़े समय के बाद ही मौलवी की नजदीकियाँ इन बच्चियों की अम्मी से भी बढ़ गईं। साल 2005 से 2010 के बीच मौलवी ने इन बच्चियों और कई महिलाओं से कई बार रेप किया। उस दौरान इन लड़कियों की उम्र 5 से 16 वर्ष के बीच थी। रेप के बाद मौलवी मेहंदी कासिम शेख इन बच्चियों को अपना मुँह बंद रखने की भी धमकी दिया करता था। इनमें से चार लड़कियों का गर्भपात भी कराया है।

आखिरकार लगातार यौन शोषण से त्रस्त बच्चियों ने एक दिन अपने पिता से इसकी शिकायत कर दी। बच्चियों के पिता ने इस मामले की शिकायत पुलिस में की। अंत में यह केस मुंबई के जेजे मार्ग थाने में दर्ज हुआ। आरोपित मौलवी मेहंदी पर IPC की धारा 465, 466, 471, 292, 323, 376, 312, 313, 314, 416, 506 और 420 के तहत कार्रवाई की गई।

जाँच के दौरान पुलिस ने मौलवी के ठिकानों से लगभग 1 करोड़ रुपए मूल्य के गहने एवं अन्य सामान बरामद किए थे। यह तमाम चीजें उसने पीड़ित परिवार के अलावा अन्य लोगों से ठगी करके जुटाई थीं। जाँच में मौलवी द्वारा शोषित की गईं कुछ अन्य पीड़िताओं के भी मामले सामने आए। इसके बाद उस पर IPC की धारा 354 को भी जोड़ दिया गया।

इस मामले में निचली अदालत ने 7 अप्रैल 2016 को मौलवी मेहंदी कासिम को उम्रकैद की कठोर सजा सुनाई थी। इसके साथ ही उस पर 50 हजार रुपए का जुर्माना भी लगाया था। सजा को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई करते हुए अलदात ने कहा कि 7 लड़कियों के रेपिस्ट को इससे कम सजा नहीं जा सकती है। इसकी सुनवाई न्यायमूर्ति मंजूषा देशपांडे और न्यायमूर्ति रेवती मोहिते डेरे ने की।

‘वन नेशन, वन इलेक्शन’: बार-बार चुनावों से अर्थव्यवस्था पर वित्तीय बोझ; जानिए क्यों जरूरी है चुनाव सुधार, लोगों को भी मिलेगी राहत

भारत का सार्वजनिक ऋण-से-जीडीपी अनुपात वित्त वर्ष 2005-06 में 81% से थोड़ा बढ़कर 2021-22 में 84% हो गया है। इसके बाद वित्त वर्ष 2022-23 में फिर वापस 81 प्रतिशत हो गया। मार्च 2023 के अंत में केंद्र सरकार का कर्ज 155.6 लाख करोड़ रुपए या सकल घरेलू उत्पाद का 57.1% था। राज्य सरकारों ने कुल ऋण बोझ में सकल घरेलू उत्पाद का लगभग 28% जोड़ा।

भारत विश्व का सबसे बड़ा लोकतंत्र है, जहाँ चुनाव लोकतांत्रिक शासन व्यवस्था से नियंत्रित राजनीति का सबसे खास हिस्सा है। कोई भी लोकतंत्र इस आस्था पर काम करता है कि चुनाव स्वतंत्र एवं निष्पक्ष होंगे। इसमें हेरफेर और धाँधली नहीं होगी। वहीं, निरंतर चुनावों का आयोजन और लागत देश की अर्थव्यवस्था के स्वास्थ्य को बिगाड़ रहे हैं।

दरअसल, चुनावों का आयोजन करने के लिए बहुत बड़ी राशि निवेश की जाती है। इसमें विभिन्न धार्मिक दलों, राजनीतिक दलों और उम्मीदवारों को धन एवं संसाधनों का इस्तेमाल करने की जरूरत होती है। निरंतर चुनाव की वजह से देश की आर्थिक स्थिति पर भी बोझ बनता है। चुनावों की तैयारी के लिए अधिक समय और उम्मीदवारों का ध्यान केंद्रित करने के लिए जनता का भी ध्यान विचलित होता है।

निरंतर चुनाव का चक्र राजनीतिक और आर्थिक प्रक्रिया को प्रभावित करता है और सरकार के कामकाज को भी बाधित करता है। चुनावों के चलते रहने से शासकीय स्थिरता की कमी होती है, जो लंबे समय तक निरंतर नीतियों को लागू करने की क्षमता को प्रभावित करती है। इससे देश में अस्थिरता की स्थिति बनी रहती है, जिससे निवेशकों का भरोसा कम होता है और आर्थिक विकास पर भी असर पड़ता है।

इन समस्याओं के बावजूद, चुनाव एक लोकतांत्रिक प्रक्रिया है और उसका महत्व भी है। हालाँकि, समय-समय पर इसे सुधारने की आवश्यकता होती है, ताकि देश की अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुँचाने से बचाया जा सके। डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर का उपयोग करके चुनावी प्रक्रिया को सुगम बनाने और लागत को कम करने में मदद मिल सकती है।

वर्तमान में निरंतर चुनावों की सीमा को स्थापित करने की आवश्यकता है, ताकि स्थिरता एवं समर्थन को बढ़ावा मिल सके। चुनावों के लगातार चक्र को कम करने के लिए लंबे समय में और विभिन्न चुनावों को एक साथ चुनाव करने की प्रणाली स्थापित की जा सकती है। चुनावी लागत को सँभालने के लिए सार्वजनिक उद्यमों को भी सहायता प्रदान की जा सकती है। प्रत्येक चुनाव में भारी मात्रा में धन जुटाना पड़ता है।

एक साथ चुनाव कराने पर राजनीतिक दलों का चुनावी खर्च बहुत कम हो सकता है। इससे धन उगाही का दोहराव नहीं होगा। इससे जनता और व्यापारिक समुदाय को चुनावी चंदे के बारंबार दबाव से भी मुक्ति मिलेगी। एक रिपोर्ट के मुताबिक, वर्ष 2019 के लोकसभा चुनाव में 60,000 करोड़ रुपए खर्च हुए थे। यदि एक साथ चुनाव कराए जाते हैं तो निर्वाचन आयोग के खर्च को भी कम किया जा सकता है।

‘एक देश, एक चुनाव’ अवधारणा पर चुनाव आयोजित कराने हेतु आवश्यक बुनियादी ढाँचा स्थापित करने के लिए चुनाव आयोग को आरंभ में व्यापक धनराशि का निवेश करना होगा। इसके साथ ही सभी चुनावों के लिए एक ही मतदाता सूची का उपयोग किया जा सकता है। इससे मतदाता सूची को अपडेट करने में लगने वाले समय और धन की भारी बचत होगी।

इससे नागरिकों के लिए भी आसानी होगी, क्योंकि उन्हें एक बार सूचीबद्ध हो जाने के बाद मतदाता सूची से अपना नाम गायब होने की चिंता से मुक्ति मिलेगी। इन कदमों का अभिवादन करते हुए संवेदनशीलता और प्रायोजनशीलता के साथ चुनाव प्रक्रिया को सुधारा जा सकता है, ताकि यह देश की अर्थव्यवस्था पर अधिक असर न डाले। राजनीतिक भ्रष्टाचार का एक मुख्य कारण बार-बार होने वाला चुनाव भी है।

(लेखिका सुप्रीम कोर्ट में अधिवक्ता हैं।)

मंदिर में सोई थी महिला पुजारी, सुबह मिली लाश: मुँह बंद और बाँधे हुए मिले दोनों हाथ, बांग्लादेश में एक और हिन्दू की हत्या

बांग्लादेश के गोपालगंज जिले में रविवार (3 मार्च 2024) को एक हिन्दू महिला का शव मिला। मृतका की पहचान 70 साल की हशिलता बिस्वास के तौर पर हुई है। हशिलता मंदिर में पुजारी का काम करती थीं। घटना के दिन आश्रम अस्त-व्यस्त मिला। दानपेटी टूटी पाई गई। शुरुआती जाँच में हशिलता की हत्या चोरी का विरोध करने की वजह से होना पाया गया है। पुलिस ने केस दर्ज करके जाँच शुरू कर दी है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, घटना गोपालगंज के सदर थाना क्षेत्र की है। यहाँ 70 वर्षीया हशिलता बिस्वास पिछले 1 साल से मालीबाता विश्वबंधु सेवाश्रम मंदिर में पुजारी का काम करती थीं। इससे पहले उनके पति दीपिन बिस्वास 10 वर्षों तक यहाँ का काम देखते थे। लगभग 1 साल पहले दीपिन बिश्वास का देहांत हो गया। पति के देहांत के बाद हशिलता ने सेवाश्रम में पूजा-पाठ का काम संभाला था।

बताया जा रहा है कि शनिवार (2 मार्च 2024) की रात हशिलता मंदिर में सोई थीं। रविवार की सुबह जब स्थानीय लोग मंदिर में गए तो दरवाजे खुले मिले। जब लोगों ने अंदर जाकर देखा तो वहाँ हशिलता बिस्वास की लाश पड़ी थी। हत्या से पहले हशिलता का मुँह बंद कर दिया गया था। साथ ही उनके हाथों को रस्सियों से बाँध दिया गया था।

लोगों ने यह भी पाया कि विश्वबंधु सेवाश्रम मंदिर की अलमारी और दानपेटी टूटी हुई थीं। दानपेटी और आलमारी से पैसे और अन्य कीमती सामान भी लूट लिए गए थे। इस घटना से जुड़ीं तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल हो रही हैं। स्थानीय थाने सदर के प्रभारी मोहम्मद अनिचुर रहमान ने इस घटना को लेकर बताया कि घटना की सूचना मिलते ही पुलिस तत्काल मौके पर पहुँची थी।

उन्होंने बताया कि पुलिस ने शव को बरामद कर लिया है और पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। अनिचुर रहमान के मुताबिक, घटना की जाँच शुरू कर दी गई है और जल्द ही आरोपितों को गिरफ्तार कर लिया जाएगा। वहीं, मालीबाता विश्वबंधु सेवाश्रम के महासचिव ने इस हत्याकांड की निंदा की है। उन्होंने कहा कि कि इससे पहले भी आश्रम में चोरी की कई घटनाएँ हो चुकी हैं।

मालीबाता विश्वबंधु सेवाश्रम के महासचिव ने आशंका जताई है कि हशिलता की हत्या चोरी का विरोध करने के दौरान हुई होगी। इसके अलावा गोपालगंज जिले के हिंदू-बौद्ध-ईसाई ओइक्या परिषद के अध्यक्ष पलटू बिस्वास ने भी चोरी के दौरान हशिलता की हत्या होने की आशंका जताई है। उन्होंने दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की माँग की है। बता दें कि बांग्लादेश में हिन्दुओं पर हमले की घटनाएँ आम हो चुकी हैं।

बड़ी बहन के साथ दुकान से लौट रही थी 5 साल की दलित बच्ची, 18 वर्षीय अब्दुल ने छीन कर किया रेप: हालात देख कर बेहोश हुई माँ… बहराइच पुलिस ने दबोचा

उत्तर प्रदेश के बहराइच जिले में दलित समुदाय की एक 5 वर्षीया बच्ची से रेप का मामला सामने आया है। रेप का आरोप मुस्लिम समुदाय के एक 18 वर्षीय युवक पर लगा है, जिसे पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस ने इस गिरफ्तारी की पुष्टि रविवार (3 मार्च 2024) को की। बेहतर इलाज के लिए बच्ची को लखनऊ भेजा गया है। मामले की जाँच की जा रही है।

यह घटना बहराइच शहर के थाना क्षेत्र दरगाह शरीफ की है। पीड़िता की माँ ने बताया है कि रविवार को उसकी 5 साल की बेटी अपनी चचेरी बहन के साथ एक दुकान पर कुछ सामान खरीदने गई थी। इसी बीच आरोपित अब्दुल (पुलिस प्रेसनोट में बाल अपचारी लिखने की वजह से बदला हुआ नाम) ने दोनों बहनों को रास्ते में रोक लिया।

इस दौरान अब्दुल ने बड़ी बहन से छोटी बहन को जबरन छीन लिया और पास के ही एक स्कूल के पीछे ले जाकर बलात्कार किया। बच्ची की चीख-पुकार सुनकर आसपास के लोग जमा हो गए तो आरोपित वहाँ से भाग निकला। पीड़िता की चचेरी बहन रोते हुए घर पहुँची और सारी बात बताई। जब लड़की के परिजन घटनास्थल पर पहुँचे तो वहाँ बच्ची नहीं थी।

इस बीच मामले की सूचना मिलते ही पुलिस फ़ौरन मौके पर पहुँची। बच्ची की खोजबीन तत्काल शुरू हुई। कुछ ही देर में पीड़िता की माँ ने देखा कि पुलिस वाले आरोपित अब्दुल को पकड़कर ला रहे हैं। पुलिस के साथ पीड़ित बच्ची भी थी, जिसकी हालात ठीक नहीं लग रही थी। बच्ची की माँ ने बताया कि वो अपनी बेटी की हालत देखकर बेहोश हो गई।

जब बच्ची की माँ को होश आया तो बताया गया कि बच्ची को बेहतर इलाज के लिए राजधानी लखनऊ भेजा गया है। ऑपइंडिया के पास पीड़िता की माँ का बयान और पुलिस का प्रेसनोट मौजूद है। इस बीच पुलिस ने आरोपित पर IPC की धारा 363, 376 AB के साथ पॉक्सो एक्ट की धारा 5M/6 व SC/ST एक्ट की धारा 3(2)5 के तहत केस दर्ज कर लिया।

इधर, पुलिस आरोपित को दबोचने के लिए लगातार दबिश दे रही थी। रविवार को पुलिस ने आरोपित की लोकेशन सुबह 11 बजे बहराइच के ही रेलवे क्रॉसिंग ब्रिज के पास पाया। इसके बाद पुलिस टीम ने दबिश देकर आरोपित को दबोच लिया। आरोपित को जेल भेज दिया गया है। पुलिस मामले की जाँच कर रही है।

सूअर की चर्बी, नसबंदी, नामर्दी… पोलियो के टीके से डरते हैं पाकिस्तानी मुस्लिम, फिर किया टीम पर हमला, 1 सुरक्षाकर्मी घायल

पाकिस्तान में पोलियो की दवाई को लेकर फैली अफवाहों के कारण एक बार फिर पोलियो का टीका लगाने वाली टीम के ऊपर जानलेवा हमला हुआ। इस हमले में उनकी सुरक्षा में तैनात पुलिसकर्मी घायल हो गया। घटना मरदान के पीरसादी की है। मंगलवार (5 मार्च 2024) को वहाँ एक अज्ञात बंदूकधारी ने पोलियो की टीम पर हमला किया।

सद्दार के पुलिस अधीक्षक खालिस खान ने बताया कि अज्ञात लोगों ने मोटरसाइकिल से आकर हमला किया था। इसके बाद वह लोग फरार हो गए। घायल पुलिकर्मी की पहचान जोहार कय्यूम के तौर पर हुई है।

डॉन में प्रकाशित जानकारी बताती है कि पोलियो का टीका लगाने वाली टीम 5 दिवसीय अभियान के तहत प्रांत में घूम रही थी। इसी दौरान वह पोलियो का टीका लगाने जब एक घर में घुसे तभी बाहर से उनके ऊपर हमला हुआ। पुलिस की टीम जानकारी पाते ही मौके पर पहुँची। घायल पुलिस वाले को तहसील हेडक्वार्टर के अस्पताल ले जाया गया और आगे का इलाज हुआ।

पोलियो टीम पर हमला पाकिस्तान में आम

इससे पहले जनवरी में एक पोलियो का टीका लगाने वाले कर्मचारी की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। वहीं उनकी सुरक्षा में तैनात पुलिसकर्मी भी घायल हुआ था। मामला खैबर पख्तूनख्वा बाजौर जिले का था। उससे पहले जनवरी में ही एक पुलिसकर्मी के वाहन को निशाना बनाया गया था क्योंकि वो मनमोंद तहसील में पोलियो में वैक्सीनेटर्स को सुरक्षा दे रहा था।

क्यों होता है पोलियो वर्कर्स पर हमला

गौरतलब है कि पाकिस्तान में पोलियो का टीका लगाने वाली टीम पर हमले नई बात नहीं है। वहाँ पोलियो वाली टीम के साथ सुरक्षाकर्मी देना इसलिए जरूरी होता है क्योंकि आतंकी संगठन उन्हें अपना निशाना बनाते हैं। कट्टर इस्लामवादियों में ऐसा भ्रम है कि पोलियो की वैक्सीन सूअर की चर्भी, शराब की सामग्री से बनती है और इसका टीका लगवाने से नसबंदी होती है, नामर्दी आती है।

इसके अलावा एक दूसरा कारण ये भी है कि पाकिस्तान में पोलियो वैक्सीनेटर्स को इसलिए निशाना बनाया जाता है क्योंकि अमेरिकी की सीआईए ने आतंकी ओसामा बिन लादेन का पता लगाने के लिए ऐसा ही फेक कैंपेन चलाया था। इसलिए यूएस से सतर्क रहने के नाम पर ये आतंकी अब पोलियो टीम पर हमला करते हैं।

पाकिस्तान में तामाम पोलियो वर्कर और सिक्योरिटी गार्ड मारे जा चुके हैं। एक ओर पूरा विश्व है जो ऐसी बीमारियों से लड़ने के लिए दिन रात एक कर रहा है। वहीं पाकिस्तान और अफगानिस्तान जैसे देश इससे निजात पाने की बजाय उन्हीं लोगों को मार रहे हैं जो इसकी दवाई उन्हें पिला रहे हैं।

राम मंदिर अपवित्र… जय श्रीराम बोलो, भूखे मरो… राम को भगवान मानना बेवकूफी: 4 नेता, चारों हिंदू-घृणा से सने, मोदी को हराने की राजनीति या तुष्टिकरण?

अयोध्या में भगवान राम का मंदिर बनने से पहले विपक्षी ये कहकर तंज कसते थे कि ‘मंदिर वहीं बनाएँगे, तारीख नहीं बताएँगे।’ रामलला अपने भव्य मंदिर में विराजमान हुए, तो विपक्षी दलों ने ये कहकर प्राण प्रतिष्ठा समारोह का बहिष्कार किया कि ये बीजेपी का मंदिर है। विपक्षी पार्टियों के नेताओं ने तमाम घृणा भरे बयान दिए, फिर भी बीजेपी के प्रति आम जन का समर्थन बढ़ता ही चला गया।

अब हताशा में आए विपक्षी नेता एक बार फिर से भगवान राम का ही नाम लेकर बीजेपी को निशाना बना रहे हैं। भले ही वो बीजेपी को निशाना बना रहे हों, लेकिन देश का आम जन अब उनके बयानों को अपने विरुद्ध समझने लगा है। इसके बावजूद उनकी आँखें खुलती नहीं दिख रही हैं। इसी कड़ी में विपक्ष की तीन सबसे बड़ी पार्टियों कॉन्ग्रेस, डीएमके और टीएमसी ने एक ही समय में अलग-अलग बयानों के माध्यम से फिर से भगवान राम और भारतीय के प्रति अपनी घृणा का प्रदर्शन किया है। चाहे वो कॉन्ग्रेस के युवराज राहुल गाँधी हों, या डीएमसे के ए राजा… या फिर टीएमसी विधायक रामेंदु सिन्हा रॉय।

टीएमसी विधायक बोला- राम मंदिर अपवित्र, हिंदू न करें पूजा

पश्चिम बंगाल की सत्ताधारी पार्टी टीएमसी के विधायक रामेंदु सिन्हा राय ने रामलला के मंदिर को ही अपवित्र बता दिया। राय ने कहा कि हिंदुओं को ऐसे अपवित्र स्थल पर पूजा नहीं करनी चाहिए। रामेंदुर सिन्हा राय हुगली जिले के तारकेश्वर विधानसभा सीट से विधायक हैं। बीजेपी नेता और बंगाल विधानसभा में विपक्ष के नेता सुवेंदु अधिकारी ने राय के बयान पर एफआईआर दर्ज कराने की बात कही है। अधिकारी ने कहा कि हिंदुओं पर आक्रमण करते-करते उनकी हिम्मत इतनी बढ़ गई है कि वह अब भगवान श्री राम के भव्य मंदिर को ‘अपवित्र’ बताने की धृष्टता कर रहे हैं।

ए राजा ने तो खुद को बता डाला भगवान राम का दुश्मन

इस लिस्ट में डीएमके नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री ए राजा का भी नाम है। भगवान राम पर सवाल उठाते हुए ए राजा ने आगे कहा, “अगर आप कहें कि ये आपकी जय श्रीराम है, अगर ये आपकी भारत माता की जय है तो हम उस जय श्रीराम और भारत माता की जय को कभी स्वीकार नहीं करेंगे। तमिलनाडु स्वीकार नहीं करेगा। तुम जाकर बताओ, हम राम के शत्रु हैं।”

कम्ब रामायण का एक अंश सुनाने के बाद उन्होंने कहा, “मुझे रामायण और भगवान राम पर भरोसा नहीं है।” ए राजा ने आगे कहा, “अगर आप कहते हैं कि रामायण के नाम पर मानव सद्भाव है, जहाँ चार सगे भाई के रूप में पैदा होते हैं, एक कुरावर भाई के रूप में, एक शिकारी भाई के रूप में, दूसरा बंदर दूसरा भाई के रूप में, छठा बंदर एक भाई के रूप में पैदा होता है तो आपका जय श्री राम छी! बेवकूफ़!” ए राजा ने भगवान राम को ही नहीं, भारत को देश के रूप में मान्यता देने से इनकार कर दिया।

राहुल गाँधी ने फिर से की ढृष्टता

कॉन्ग्रेस के युवराज राहुल गाँधी ने फिर से भगवान राम के नाम पर ढृष्टता की है। मध्य प्रदेश के शाजापुर में उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी हमला बोलने के लिए भगवान राम का नाम लिया। राहुल गाँधी ने कहा कि मोदी चाहते हैं कि आप दिनभर जय श्रीराम बोलो और भूखे मर जाओ। वहीं, राहुल गांधी के लिए उस समय भी असहज स्थिति पैदा हो गई, जब बीजेपी कार्यकर्ताओं ने उनके सामने मोदी-मोदी और जय श्रीराम के नारे लगाए।

जिसका नाम शत्रुघ्न, अब वो भी खड़े कर रहा राम मंदिर पर सवाल

टीएमसी के सांसद शत्रुघ्न सिन्हा ने भी राम मंदिर पर बदजुबानी की है। जिसका खुद का नाम शत्रुघ्न हो और बेटों का नाम लव-कुश, उसने रामलला के मंदिर को बीजेपी का पब्लिसिटी स्टंट बता दिया है। सिन्हा ने कहा, “पहले दिन 5 लाख लोग अयोध्या पहुँचे थे। अब सिर्फ 1 हजार लोग पहुँच रहे हैं। ये तो बीजेपी के प्रचार की हवा ही निकल गई। वो कहते हैं- मंदिर का इतना प्रचार किया, दिनभर मंदिर-मंदिर किया, जब सैलानी गए तो पहले दिन 5 लाख लोग पहुँचे, दूसरे तीसरे दिन 3 लाख संख्या कम हो गई, उसके बाद 2 लाख पर आए। अब सिर्फ हजार, 2 हजार लोग जा रहे हैं वहाँ, क्योंकि लोग समझ गए कि जहाँ शंकराचार्य नहीं पहुंचे, वहाँ सिर्फ इन्होंने पब्लिसिटी की है।”

बता दें कि शत्रुघ्न सिन्हा लंबे समय तक बीजेपी में रहे थे। कई बार सांसद रहने के बाद जब टिकट कटा, तो कॉन्ग्रेस में शामिल हो गए। चुनाव में हार मिली, तो टीएमसी की गोद में जाकर बैठ गए। उप-चुनाव जीतकर वो लोकसभा पहुँच गए और इस बार फिर से माना जा रहा है कि वो आसनसोल से लोकसभा चुनाव लड़ेंगे। उनके परिवार लोगों के नाम अयोध्या पुरी के विख्यात रघु वंशियों के ही नाम पर हैं, इसके बावजूद उनका ये बयान बताता है कि वो राजनीति के लिए कुछ भी करने को तैयार हैं, भले ही उन्हें इसके लिए अपने अराध्य पर उंगली उठानी पड़े।

खास बात ये है कि किसान आंदोलन की कमान संभाल रहे नेता किसान नेता जगजीत सिंह डंडेवाल भी ये बात मान चुके हैं कि अयोध्या राम मंदिर बनने के बाद से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की लोकप्रियता बढ़ चुकी है। कई न्यूज चैनलों और एजेंसियों के सर्वे में भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की लोकप्रियता आसमान पर पहुँच चुकी है। यही वजह है कि लोकसभा चुनाव 2024 को देखते हुए बौखलाहट में विपक्षी नेता लगातार बीजेपी को निशाना बना रहे हैं।

हो सकता है कि ये नेता खास ‘वोटर वर्ग’ को ध्यान में रखकर ऐसे बयान दे रहे हों, लेकिन उन्हें ये नहीं भूलना चाहिए कि इस देश में अब वो दिन दूर गए, जब चुनाव के समय लोग जातियों में बंट जाते थे। अयोध्या में रामलला के मंदिर को लेकर जिस तरह का उल्लास पूरे देश में देखा गया, वो बताता है कि राष्ट्रीय मुद्दों पर अब लोग जातियों में बंटने की जगह राष्ट्र हित को वरीयता देने लगे हैं। ऐसे में खास वोटों के दम पर अब चुनाव जीतना इन पार्टियों के लिए संभव भी नहीं रह गया है।

राहुल गाँधी से लेकर ए राजा, शत्रुघ्न सिन्हा हो या रामेंदु सिन्हा राय, उनकी कोशिश यही है कि वो बीजेपी पर हमला बोलें और आम जनता के मन में बीजेपी को लेकर खटास पैदा करें। ये अलग बात है कि ये नेता राम मंदिर के बहाने बीजेपी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को जितना निशाना बनाते हैं, आम जनता उतना ही उनके करीब आती जाती है। चूँकि बीजेपी को निशाना बनाने के चक्कर में ये नेता आम जन के नायक यानी प्रभु राम पर ही निशाना साधने में लगे हैं, ऐसे में ये आम जनता से जुड़ने की जगह दूर ही होते जा रहे हैं। इस बात को ये जितनी जल्दी समझ जाएँ, उतना ही बेहतर।

MBA कर रहे केरल के अबीन शिबी ने एसिड से 3 छात्राओं को जलाया, 1 की हालत गंभीर: पीड़िता लड़की ने ठुकराया था ‘सनकी’ का प्रपोजल

कर्नाटक के दक्षिण कन्नड़ जिले में सोमवार (4 अप्रैल 2024) को कॉलेज जा रही 3 छात्राओं पर एसिड फेंके जाने का मामला सामने आया है। हमले में तीनों छात्रा झुलस गई हैं, जिनका अस्पताल में इलाज चल रहा है। एक छात्रा की हालात गंभीर बताई जा रही है। एसिड फेंकने वाले आरोपित की पहचान 24 वर्षीय अबिन शिबी के तौर पर हुई है। कॉलेज प्रशासन ने आरोपित को पकड़ कर पुलिस के हवाले कर दिया है। आरोपित के हमले की वजह प्यार में नाकाम होना बताया जा रहा है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह घटना दक्षिण कन्नड़ जिले के कड़ाबा थाना क्षेत्र की है। यहाँ के सरकारी प्री यूनिवर्सिटी में पढ़ने वाली एक छात्रा अपनी 2 सहेलियों के साथ कॉलेज के परीक्षा हॉल में प्रवेश कर रही थी, तभी केरल के मलप्पुरम के नीलांबुर इलाके का रहने वाला अबिन शिबी वहाँ पहुँचा। अबिन ने बोतल में लाए तेजाब को छात्रा के चेहरे पर फेंक दिया। यह तेज़ाब छात्रा के साथ मौजूद उसकी 2 सहेलियों पर भी पड़ा। तेजाब के हमले से तीनों छात्राएँ बुरी तरह से झुलस गईं। तीनों को अस्पताल भेजा गया है। इसमें से एक की हालत गंभीर बताई जा रही है।

घायल हुई तीनों लड़कियों की पहचान अमृता, अलीना और अर्चना के तौर पर हुई है। इस हमले से आसपास अफरा-तफरी का माहौल बन गया। इसी माहौल में मास्क लगाए, अबिन मौका देखकर भागने का प्रयास करने लगा। हालाँकि, कॉलेज प्रशासन ने दौड़ाकर अबिन को पकड़ लिया। घटना की सूचना मिलने पर पहुँची पुलिस ने अबिन को हिरासत में ले लिया। आरोपित से पूछताछ शुरू कर दी गई है। शुरुआती पूछताछ में यह घटना प्यार में नाकामी से जुड़ी नजर आ रही है।

अब तक मिली जानकारी के मुताबिक, अबिन ने कॉलेज में घुसने के लिए वहाँ की यूनिफॉर्म पहन रखी थी। वह MBA का छात्र है। कॉलेज प्रशासन इस मामले की भी जाँच करवा रहा है कि उसे यूनिफॉर्म किसने और किस मकसद से दी थी। पुलिस के मुताबिक, आरोपित और पीड़िता एक ही जिले और एक ही समुदाय से हैं। पहले अबिन और पीड़िता में जान-पहचान थी। बीच में किसी वजह से दोनों के बीच दूरी आ गई। इसी बीच पीड़िता कर्नाटक आ गई। यहाँ अबिन उसका पीछा करते हुए पहुँच गया।

पुलिस की पूछताछ में अबिन ने यह भी बताया कि उसका इरादा केवल एक लड़की को निशाना बनाना था। बाकी 2 अन्य घायल लड़कियों के लिए उसका कहना है कि वो गलती से बीच में आ गईं। पीड़िता के चेहरे पर थर्ड डिग्री की जलन आई है। कड़ाबा पुलिस ने कॉलेज प्रशासन की तरफ से दी गई तहरीर के आधार पर IPC की धारा 326(ए) के तहत FIR दर्ज की है। पुलिस का कहना है कि यदि पीड़िता के माता-पिता मामले में शिकायत दर्ज करवाएँगे तो आरोपित के खिलाफ पॉक्सो एक्ट की धाराओं में भी केस दर्ज किया जाएगा।

वहीं, उडुपी से लोकसभा सांसद और भाजपा नेता शोभा करंदलाजे ने इस घटना का संज्ञान लिया है। उन्होंने कर्नाटक में बिगड़ती कानून व्यवस्था को लेकर सत्तारूढ़ कॉन्ग्रेस पर निशाना साधा है। उन्होंने अपने X हैंडल पर लिखा कि पीड़िता का भविष्य अधर में लटक गया है।

शाहजहाँ शेख को आज शाम तक CBI को सौंपो, संदेशखाली ED केस भी, कोलकता HC का आदेश: ममता सरकार पर VVIP ट्रीटमेंट देने का लगा था आरोप

पश्चिम बंगाल के संदेशखाली हिंसा मामले में कोलकाता हाईकोर्ट ने मंगलवार (5 मार्च 2024) को सख्‍त रुख अख्तियार करते हुए केस को सीबीआई को सौंप दिया। उन्होंने ईडी पर किए गए हमले की जाँच सीबीआई को सौंपते हुए पश्चिम बंगाल पुलिस की इस मामले में चल रही जाँच पर रोक लगा दी।

कोर्ट ने पुलिस से कहा कि वह 4:30 बजे तक शाहजहाँ को सीबीआई को सौंपे। जानकारी के मुताबिक कोर्ट ने कुल तीन जाँच के मामले सीबीआई को सौंपे हैं। इनमें संदेशखाली के साथ नजात और बनगाँव थाने में दर्ज प्राथमिकी की जाँच भी शामिल है।

इस संबंध में भाजपा नेता अमित मालवीय ने ट्वीट करके जानकारी दी। उन्होंने लिखा, “कोलकाता उच्च न्यायालय ने पश्चिम बंगाल सरकार को आदेश दिया कि वह ममता बनर्जी के करीबी सहयोगी और संदेशखाली की महिलाओं को प्रताड़ित करने वाले शाहजहाँ शेख की हिरासत आज शाम 4:30 बजे तक सीबीआई को सौंप दे। ममता बनर्जी सरकार उनके साथ वीवीआईपी की तरह व्यवहार कर रही थी।”

गौरतलब है कि 5 जनवरी को हुए हमले के मामले में ईडी ने सीबीआई जाँच की माँग करते हुए अपनी याचिका कोर्ट में डाली थी। इसके बाद सोमवार (4 मार्च 2024) को इस मामले में सुनवाई हुई लेकिन मुख्य न्यायाधीश टीएस शिवगणनम की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने ईडी, राज्य सरकार और केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो ने सबकी दलीलें सुन मामला सुरक्षित रख लिया।

सुनवाई के दौरान अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एसवी राजू ने राज्य पुलिस पर आरोप लगाया था कि वह इस मामले में पक्षपाती हो रहे हैं। उन्होंने कोर्ट को बताया था कि शाहजहाँ शेख के खिलाफ 40 से अधिक केस सालों से पेंडिंग हैं, लेकिन पुलिस ने संदेशखाली में शाहजहाँ शेख को गिरफ्तार नहीं किया। हाल में जो गिरफ्तारी हुई वो भी इसलिए ताकि उसे सीबीआई की हिरासत से बचाया जा सके।

गौरतलब है कि एक ओर जहाँ बंगाल पुलिस पर ऐसे आरोप लगा रहे हैं। उसी बीच सरकार की ओर से पेश महाधिवर्ता किशोर दत्ता ने जाँच हस्तांतरित करने की अर्जी का विरोध भी किया है। उन्होंने कहा कि राज्य पुलिस ने ही ईडी अधिकारियों को बचाया और उत्तर 24 परगना जिले के संदेशखाली से उनके लिए सुरक्षित मार्ग सुनिश्चित करने में सफलता हासिल की।

गौरतलब है कि पिछले महीने राशन घोटाला मामले में प्रवर्तन निदेशालय शाहजहाँ शेख के घर छापा मारने आई थी। हालाँकि उसके समर्थकों ने ईडी पर ही उलटा हमला कर दिया और शाहजहाँ शेख फरार हो गया। उसके बाद से टीएमसी नेता कहाँ था ये किसी को नहीं पता था। बाद में संदेशखाली में महिलाओं का मुद्दा उठा और गिरफ्तारी की माँग तेज हो गई। कई टीएमसी नेता पकड़े गए और आखिर में 27 फरवरी शाहजहाँ शेख भी गिरफ्तार हुआ।

पति ने नहीं दिया गिफ्ट, पत्नी ने सोते समय चाकू घोंपा: दादाजी की मौत से दुखी था इंसान, इसलिए सालगिरह पर नहीं खरीदा था गिफ्ट

कर्नाटक की राजधानी बेंगलुुरु में एक महिला ने अपने पति को चाकू मार दिया। मामला सिर्फ इतना था कि पति ने शादी की सालगिरह पर अपनी पत्नी को कोई उपहार नहीं दिया था। पति जब घर में सो रहा था, उसी समय पत्नी ने उसे घोंप दिया। इस घटना के बाद महिला के ऊपर हत्या के प्रयास के मामला दर्ज किया गया है।

इस घटना में घायल पति 37 साल के किरण (बदला हुआ नाम) ने पुलिस को बताया कि वह एक प्राइवेट कंपनी में काम करता है। उसकी 35 साल की संध्या (बदला हुआ) की पत्नी है, जो गृहिणी है। उसकी 29 फरवरी को शादी की वर्षगाँठ थी। किरण ने बताया कि उसने सालगिरह नहीं मनाया और ना ही अपनी को कोई गिफ्ट दी। इससे उसकी पत्नी नाराज हो गई।

किरण ने पुलिस को बताया कि 27 फरवरी की रात वह सोर रहा था, तभी रात 1.30 बजे उसकी पत्नी रसोई से चाकू लेकर आई और उससे उस पर वार कर दिया। किरण ने बताया कि इस दौरान उसने खुद का बचाव किया और पत्नी को धक्का देकर दूर धकेल दिया। हालाँकि इस हमले में वह घायल भी हो गए। घर में शोर सुनकर पड़ोसी आए और उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया।

कहा जा रहा है कि शुरुआती इलाज के बाद अस्पताल प्रशासन ने इसकी जानकारी पुलिस को दी। इसके बाद पुलिस अस्पताल पहुँची और किरण से पूछताछ की। पूछताछ के बाद पुलिस ने किरण की पत्नी संध्या के खिलाफ 1 मार्च 2024 को बेलांदुर थाने में हत्या के प्रयास का मामला दर्ज कर लिया गया है।

वहीं, पुलिस का कहना है कि यह एक पारिवारिक मुद्दा है। इसलिए सभी पक्षों से बात करने और इसे सुलझाने के लिए समय दिया गया है। पुलिस का कहना है कि अपने दादा की मौत की वजह से किरण अपनी पत्नी के उपहार नहीं खरीद पाया था। इससे उसकी पत्नी परेशान हो गई, क्योंकि यह पहली बार था जब उसे सालगिरह पर गिफ्ट नहीं मिला था।

पुलिस ने यह भी कहा कि किरण ने बताया कि कुछ घरेलू कारणों की वजह से उसकी पत्नी परेशान है और वह संध्या को मानसिक स्वास्थ्य परामर्श प्रदान करने की योजना बना रहे है। हालाँकि, इस मामले में पत्नी की प्रतिक्रिया अभी सामने नहीं आई है।

TMC का चैलेंज एक्सेप्ट कर कलकत्ता HC के जज अभिजीत गंगोपाध्याय ने दिया इस्तीफा, 7 मार्च को BJP में होंगे शामिल, अब लड़ेंगे लोकसभा चुनाव

कलकत्ता हाई कोर्ट के जस्टिस अभिजीत गंगोपाध्याय ने मंगलवार (05 मार्च 2024) को अपने पद से इस्तीफा दे दिया। उन्होंने दो दिन पहले ही ये बता दिया था कि वो 5 मार्च को अपना इस्तीफा दे देंगे और राजनीति के मैदान में उतरेंगे। उन्होंने टीएमसी के नेताओं को धन्यवाद देते हुए कहा था कि उन्हीं की वजह से वो इस फैसले पर पहुँचे हैं। उन्होंने अपने इस्तीफे के कुछ ही समय बाद इस बात का ऐलान कर दिया है कि वो भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) में शामिल होंगे। उन्होंने बताया है कि दो दिन बाद वो एक कार्यक्रम में बीजेपी में शामिल होंगे।

कलकत्ता हाई कोर्ट के जज अभिजीत गंगोपाध्याय ने अपना इस्तीफा राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को भेज दिया। इसके अलावा इस्तीफे की कॉपियाँ मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ और कलकत्ता हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश टीएस शिवज्ञानम को भी भेज दी। इसके बाद अब उन्होंने ऐलान किया है कि वो गुरुवार (7 मार्च 2024) को बीजेपी में शामिल होंगे।

जस्टिस गंगोपाध्याय हमेशा सत्तारूढ़ टीएमसी के निशाने पर रहते थे। जस्टिस अभिजीत गंगोपाध्याय ने रविवार (3 मार्च, 2024) को इस्तीफे के बारे में एबीपी आनंदा से बातचीत के दौरान खुलासा किया था। उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल में सत्ताधारी पार्टी तृणमूल कॉन्ग्रेस के नेता उन्हें बार बार चैलेंज कर रहे थे कि मैं राजनीतिक मैदान में आऊँ। ऐसे में मैंने सोचा कि क्यों न यही काम कर लिया जाए। अत: मैंने इस्तीफे का फैसला ले लिया।

जब जस्टिस गंगोपाध्याय से इस्तीफे का कारण पूछने पर उन्होंने कहा कि सत्ताधारी पार्टी के कई लोगों ने मुझे चुनौती देकर मुझे यह निर्णय लेने के लिए मजबूर किया। मैं इसके लिए सत्तारूढ़ दल (टीएमसी) को बधाई देना चाहता हूँ कि उनकी वजह से मुझे ये फैसला लेना पड़ा। बता दें कि जस्टिस अभिजीत गंगोपाध्याय 2018 में कलकत्ता हाई कोर्ट के जस्टिस बने थे और वो अगस्त 2024 में रिटायर होने वाले थे। अपने रिटायरमेंट से 5 महीने पहले ही उन्होंने इस्तीफा देकर राजनीति के मैदान में उतरने का ऐलान कर दिया।