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कोविड काल में भी करोड़ों कूट रहे थे राजदीप सरदेसाई, बीवी सागरिका घोष के हलफनामे से खुलासा: घर से लेकर निवेश तक की पूरी डिटेल

पश्चिम बंगाल की सत्तारूढ़ पार्टी तृणमूल कॉन्ग्रेस (TMC) द्वारा पत्रकार सागरिका घोष को राज्यसभा का टिकट दिए जाने के बाद सागरिका ने एक हलफनामा जमा कराया था जिसमें उनकी संपत्ति की जानकारी थी। अब इस हलफनामे की डिटेल सामने आई है। इसमें सागरिका घोष ने जानकारी दी है कि वह कोविड से पहले 2019 में 40 लाख रुपए कमा रही थीं, वहीं 2021 के कोविड में उनकी कमाई 10 लाख रुपए हो गई और फिर 2023 में 17 लाख रुपए हुई।

तस्वीर साभार: सागरिका घोष का हलफनामा

वहीं उनके पति राजदीप की कमाई का खुलासा भी इस हलफनामे से हुआ। इसमें बताया गया कि राजदीप 2019 में 4.55 करोड़ रुपए कमा रहे थे जबकि कोविड के दौरान उनकी कमाई घटकर 2.83 करोड़ रुपए हो गई और 2023 में वह दोबारा 3.54 करोड़ रुपए पहुँच गई।

तस्वीर साभार: सागरिका घोष का हलफनामा

हलफनामे में खुलासा हुआ कि राजदीप सरदेसाई ने 25 करोड़ रुपए म्यूच्युल फंड, स्टॉक्स और बॉन्ड में लगा रखे हैं।

तस्वीर साभार: सागरिका घोष का हलफनामा

इसके बाद जानकारी दी गई है कि राजदीप सरदेसाई और सागरिका ने मिलकर 2008 में एक घर खरीदा था। तब वह करीब 25 करोड़ रुपए का था और अब उसकी कीमत 49 करोड़ रुपए हो गई है।

तस्वीर साभार: सागरिका घोष का हलफनामा

गौर देने वाली बात है कि कोविड के दौरान या उससे पहले भी मीडियाकर्मियों की नौकरी पर खतरा हमेशा से बना देखा गया है। ऐसा हमेशा से होता आया है कि मीडिया को सालोंसाल देने वाले टेक्निकल कर्मचारियों की छँटनी कर दी जाती है जबकि कुछ बड़े पत्रकार अपनी करोड़ों की कमाई का आनंद लेते हैं और आवाज तक नहीं उठाते।

2017 में एनडीटीवी ने जब अपने 70 कर्मचारियों को निकाला था उस समय शायद रवीश जैसे रवीश भी इतना कमा रहे थे। इसी तरह 2013 की रिपोर्टों को यदि देखें तो पता चलेगा कि टीवी18 ब्रॉडकास्ट लिमिटेड, नेटवर्क18 लिमिटेड की शाखा, जो सीएनबीसी-टीवी18, सीएनबीसी आवाज, सीएनएन-आईबीएन, आईबीएन7 और आईबीएन लोकमत चैनल चलाती है, उसने अपने विभिन्न विभागों के 300 कर्मचारियों – को बर्खास्त कर दिया था। खबर थी कि उस समय कर्मचारियों को बस अंदर बुलाया गया और उनके पत्र सौंप दिए गए थे, उन्हें दूसरी नौकरी ढूँढने तक का समय नहीं दिया गया था।

कोविड के सालों में ये काम कई मीडिया हाउसों ने किया। टाइम्स ऑफ इंडिया, इंडियन एक्सप्रेस, क्विंट जैसे संस्थान भी ऐसा करने के काऱण चर्चा में आए थे जबकि उनके बड़े पत्रकारों पर कोई असर नहीं देखने को मिला था।

बता दें कि सागरिका घोष ने तृणमूल कॉन्ग्रेस पार्टी का हाथ ऐसे समय पर थामा है जब संदेशखाली का मुद्दा गरमाया हुआ है। उन्होंने न इस मुद्दे पर महिला होने के नाते अपनी बात रखी है न ही पत्रकार होने के नाते। उलटा उन्होंने अपने टीएमसी ज्वाइन करने को यह कहकर बचाव किया कि ममता बनर्जी लोकतांत्रिक मूल्यों का चेहरा हैं।

हल्द्वानी में बम के लिए दंगाइयों को पेट्रोल देने वाला अरबाज गिरफ्तार, मास्टरमाइंड अब्दुल मलिक अब भी फरार: बनभूलपुरा में कर्फ्यू हटा, 68 गिरफ्तार

हल्द्वानी में अतिक्रमण हटाने गई नगर निगम और पुलिस टीम पर हमला करने वालों पर एक्शन जारी है। पुलिस लगातार दंगाइयों की धर-पकड़ कर रही है। हल्द्वानी हिंसा के दौरान दंगाइयों को बम ले लिए पेट्रोल देने वाला एक आरोपित पकड़ा गया है। उसके पास से पुलिस ने पेट्रोल भी बरामद किया है। पेट्रोल बम बनाने वाले भी पुलिस की गिरफ्त में आए हैं।

हल्द्वानी पुलिस ने बताया है कि उसने सोमवार (19 फरवरी 2024) को 10 और दंगाइयों को गिरफ्तार किया है। इसके साथ ही गिरफ्तार दंगाइयों की संख्या बढ़कर 68 हो गई है। पुलिस ने बताया है कि इन दंगाइयों में अरबाज भी शामिल है, जिसने बम के लिए पेट्रोल उपलब्ध करवाए थे। उसके पास से 9 लीटर पेट्रोल भी बरामद हुआ है।

अरबाज ने शहजाद और फैजान को पेट्रोल दिया था। गिरफ्तार दंगाई मोहम्मद शुएब के पास से पुलिस ने लूटे हुए दो कारतूस बरामद किए हैं। नैनीताल पुलिस ने दंगाइयों तस्लीम, वसीम सिद्दीकी उर्फ़ हप्पा, नाजिम और उजैर को भी गिरफ्तार किया है। तस्लीम और वसीम की तलाश के लिए हल्द्वानी पुलिस ने शहर भर में पोस्टर भी लगाए थे।

इस मामले में 3 FIR दर्ज हुई थी। हालाँकि, अभी दंगे का मास्टरमाइंड मुख्य अब्दुल मलिक और उसका बेटा फरार है। पुलिस उनकी तलाश में लगी है। इनके ऊपर इनाम घोषित किए जाने की भी तैयारी है। जिन दंगाइयों को गिरफ्तार किया गया है, उनमें से अधिकांश बनभूलपुरा के ही निवासी हैं, जहाँ दंगा हुआ था। पुलिस ने फरार आरोपितों के घरों में कुर्की भी की है।

गौरतलब है कि 8 फरवरी 2024 को हल्द्वानी के बनभूलपुरा में अवैध अतिक्रमण कर बनाई गई मस्जिद और मदरसे को गिराने के लिए पुलिस और नगर निगम की टीम पहुँची थी। यहाँ दंगाई इस्लामी भीड़ ने उन्हें घेर कर हमला किया था। उन पर पेट्रोल बम से हमले किए गए थे। हमले में बड़ी संख्या में पुलिसकर्मी घायल हुए थे। ऑपइंडिया ग्राउंड पर जाकर इस हमले की सच्चाई बताई थी कि कैसे पुलिस और मीडिया पर उनकी पहचान देख कर हमले किए गए थे।

बीच-बिकिनी में आखिरी पोस्ट… एडल्ट फिल्मों की मशहूर हिरोइन ने की सुसाइड, लोग बोले- पोर्न इंडस्ट्री ऐसा ही हाल कर देती है

एडल्ट फिल्मों की मशहूर स्टार काग्नी लिन कार्टर की 36 साल की उम्र में मौत हो गई। बताया जा रहा है काग्नी ने सुसाइड की है। उनकी मौत की खबर सुनने के बाद लोगों को विश्वास नहीं हो रहा। सबको काग्नी का लास्ट इंस्टा पोस्ट याद आ रहा है। उन्होंने एक हफ्ते पहले अपना यह पोस्ट शेयर किया था जिसे देख किसी को भनक भी नहीं हो सकती कि काग्नी कोई ऐसा कदम उठाने वाली हैं। इस पोस्ट में उन्होंने अपनी फोटो डाली थी।

अभिनेत्री की मौत के बाद उनके दोस्त सदमे में है और उनकी अंतिम संस्कार के लिए गो फंड साइट से फंड जुटा रहे हैं। उनका कहना है कि इकट्ठा किए गए पैसों को वो काग्नी के अंतिम संस्कार में लगाएँगे और जो पैसा बचेगा उसे पशु बचाव में।

रिपोर्ट्स के मुताबिक एडल्स फिल्मों की हिरोइन काग्नी लंबे समय से मानसिक रूप से बीमार चल रही थीं। इसी के चलते वो इतनी परेशान भी थी कि आखिर में उन्होंने जान देना ही उचित समझा। उनके बारे में मौजूद जानकारी बताती है कि काग्नी लिन कार्टर सन् 2000 में एडल्ट फिल्मों में आई थीं। उन्होंने 2019 में लॉस एंजिल्स और पोल डांसिंग करना शुरू किया। उनके इंस्टा अकॉउंट पर भी उनकी पोल डांल करने वाली कई वीडियोज को देखा जा सकता है। इसके अलावा रिंग के साथ डांस की वीडियोज भी उनके अकॉउंट पर मौजूद हैं।

वहीं उनके पोस्ट में उन्होंने एक फोटो डाली है जिसमें वह पिंक बिकिनी में बीच के पास नजर आ रही हैं। उन्होंने अपने पोस्ट में फ्लॉरिडा में होने की जानकारी दी थी। उससे पहले उन्होंने रिंग के साथ और पोल के साथ डांस करने की वीडियोज को डाला था। उनके अकॉउट पर उनके गानों की भी बहुत सारी वीडियोज डली हुई है।

काग्नी की पोस्ट

उनकी मौत की खबर सुनने के बाद लोग इन्हीं पोस्टों पर आकर उन्हें श्रद्धांजलि दे रहे हैं और कह रहे हैं कि काग्नी एक उभरती कलाकार थीं उन्हें इस तरह हार नहीं माननी चाहिए थी। वहीं कुछ लोग ये भी कह रहे हैं कि पोर्न इंडस्ट्री लोगों को इस तरह अंधकार में डालती है कि उन्हें ऐसे कदम उठाने ही पड़ते हैं।

संदेशखाली में डर लग रहा तो राजभवन में आकर रहिए… राज्यपाल ने पीड़िताओं के लिए खोले दरवाजे, NCW चीफ बोलीं- बगैर राष्ट्रपति शासन के नहीं बदलेगा बंगाल

संदेशखाली की पीड़िताओं के लिए पश्चिम बंगाल के राजभवन ने अपने दरवाजे खोल दिया है। कहा है कि जो खुद को वहाँ सुरक्षित महसूस नहीं कर रहे यहाँ आकर रह सकते हैं। इनके रहने लिए राजभवन में ‘पीस होम’ बनाया गया है। इस बीच राष्ट्रीय महिला आयोग (NCW) की अध्यक्ष रेखा शर्मा ने कहा है कि राष्ट्रपति शासन लगाए बिना पश्चिम बंगाल में हालात नहीं बदलेंगे।

संदेशखाली की महिलाओं ने टीएमसी के गुंडों पर प्रताड़ित करने और यौन शोषण के आरोप लगाए हैं। इसके बाद से यह जगह राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में है। खुद राज्यपाल सीवी आनंद बोस ने भी प्रभावित इलाके का दौरा किया था। पीड़िताओं के लिए राजभवन की ओर से हेल्पलाइन नंबर जारी किया गया है।

अब राजभवन ने इन्हें शरण देने का फैसला किया है। राज्यपाल के OSD संदीप राजपूत ने बताया है, “माननीय राज्यपाल ने हाल ही में संदेशखाली जाकर पीड़िताओं से मुलाक़ात की थी। वहाँ उन्होंने एक हेल्पलाइन नम्बर जारी किया था। इस नम्बर पर कई फ़ोन आ रहे हैं। इससे राज्यपाल को पीड़िताओं के लिए रहने के लिए सुरक्षित जगह मुहैया कराने की आवश्यकता महसूस हुई है। इसलिए यहाँ ‘पीस होम’ और ‘सेफ होम’ नाम से उनके रहने का प्रबन्ध किया गया है। अगर कोई संदेशखाली से आता है तो हम यहाँ रहने की व्यवस्था करेंगे। उनके लिए खाना-पीने सहित सारे इंतजाम किए जाएँगे।”

राजपूत ने बताया, “पीड़िताओं की राज्यपाल से बात हुई है। हमारी तैयारी पूरी है। जिन लोगों को आने में दिक्कत है तो उन्हें यहाँ लाने की व्यवस्था भी हम करेंगे। हम यहाँ से ट्रांसपोर्ट भेज सकते हैं। यहाँ 100-200 लोगों के रहने की व्यवस्था हो सकती है।”

शनिवार (17 फरवरी, 2024) को राज्यपाल सीवी आनंद बोस ने कहा था कि संदेशखाली पीड़िताओं के लिए राजभवन के दरवाजे हमेशा खुले हैं। उन्होंने एक हेल्पलाइन नम्बर 033-22001641 भी जारी किया था। इससे पहले राजभवन ने पिछले वर्ष पंचायत चुनाव में हुई हिंसा के पीड़ितों को भी शरण दी थी। राज्यपाल ने कहा था कि संदेशखाली की महिलाएँ उनकी ‘राखी बहन’ हैं और वह उनके लिए सब कुछ अपनी शक्तियों के तहत करेंगे।

गौरतलब है कि बंगाल के उत्तर 24 परगना जिले के संदेशखाली में तृणमूल कॉन्ग्रेस नेता शेख शाहजहाँ और उसके समर्थकों के खिलाफ हाल ही में बड़ी संख्या में महिलाओं ने बलात्कार, अपहरण, लूटपाट और जमीन कब्जाने के आरोप लगाए थे। अधिकांश पीड़ित महिलाएँ दलित-आदिवासी हैं। पीड़िताओं से राष्ट्रीय महिला आयोग की सदस्यों ने भी मुलाक़ात की है। इनसे महिलाओं ने अपने साथ हुई भयावहता साझा की है।

राष्ट्रीय महिला आयोग की अध्यक्ष रेखा शर्मा ने संदेशखाली पीड़िताओं से मुलाक़ात कर उनकी समस्याएँ जानी। इसके बाद वह राज्यपाल सीवी आनंद बोस से मिलीं। उन्होंने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया, “संदेशखाली की कई महिलाओं का यौन शोषण हुआ है। मुझे बलात्कार की दो घटनाओं के बारे में जानकारी मिली है। एक में आज ही शिकायत दर्ज हुई है। यहाँ तब तक कुछ नहीं बदलेगा जब तक राष्ट्रपति शासन नहीं लग जाता।”

इससे पहले ऐसी खबरें भी सामने आई था कि संदेशखाली की महिलाओं को शाहजहाँ के लोगों ने शिकायतों के बाद काफी परेशान किया है। बंगाल पुलिस पर एक पीड़िता की पहचान सोशल मीडिया पर उजागर करने का भी आरोप है। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी इस वीभत्स कांड को भाजपा की साजिश बताने की कोशिश कर रही हैं। पत्रकारों को भी ममता सरकार परेशान कर रही है। 19 फरवरी, 2024 को रिपब्लिक बांग्ला के एक रिपोर्ट को लाइव कैमरे पर पुलिस उठा ले गई थी।

किसान संगठनों ने MSP पर मोदी सरकार का फॉर्मूला ठुकराया, PHDCCI ने बताया- हर रोज ₹500 करोड़ का हो रहा नुकसान

18 फरवरी 2024 को किसान संगठनों और केंद्र सरकार के बीच बातचीत हुई थी। इस दौरान केंद्र सरकार ने 4 फसलों पर एमएसपी की गारंटी का फॉर्मूला पेश किया था। लेकिन किसान संगठनों ने इस अस्वीकार करते हुए 21 फरवरी को दिल्ली कूच का ऐलान किया है। इस बीच PHD चैम्बर ऑफ़ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (PHDCCI) ने बताया है कि मौजूदा किसान आंदोलन के कारण प्रतिदिन करीब 500 करोड़ रुपए का उद्योग-धंधों को नुकसान हो रहा है।

हरियाणा-पंजाब की सीमा पर जारी आन्दोलन के कारण पंजाब के कारोबारी भी प्रभावित हो रहे हैं। इसका प्रभाव भारतीय अर्थव्यवस्था पर वित्त वर्ष 2023-24 की चौथी तिमाही में दिखेगा। यह जानकारी PHD चैम्बर ऑफ़ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री के अध्यक्ष संजय अग्रवाल ने दी है।

अग्रवाल ने मीडिया को बताया है कि किसानों के प्रदर्शन की वजह से उत्तर भारत के राज्यों में रोजाना ₹500 करोड़ का नुकसान हो रहा है। किसान आन्दोलन के कारण बॉर्डर सील हैं और मालवाहक वाहनों की आवाजाही नहीं हो पा रही है। इससे रोजगार पर भी फर्क पड़ रहा है। पंजाब की छोटी कम्पनियों पर भी असर पड़ रहा है।

अग्रवाल ने बताया कि इसका असर वित्त वर्ष 2023-24 की अंतिम तिमाही (जनवरी-मार्च) वाली तिमाही के GDP बढ़त के आँकड़ों पर दिखेगा और यह इस इलाके में धीमी हो सकती है। उन्होंने कहा कि इस रुकावट के कारण फ़ूड प्रोसेसिंग, ऑटोमोबाइल, फ़ार्म मशीनरी, टूरिज्म और कच्चे माल जैसे क्षेत्र प्रभावित हो रहे हैं।

गौरतलब है कि किसान वर्तमान में हरियाणा-पंजाब के शम्भू बॉर्डर पर कब्जा किए हुए हैं। संजय अग्रवाल ने किसान संगठनों और सरकार से जल्द ही इस मामले को सुलझाने की अपील की है। इस दौरान उन्होंने मोदी सरकार द्वारा किसानों के लिए उठाए गए क़दमों जैसे कि किसान सम्मान निधि की प्रशंसा भी की।

गौरतलब है कि 13 फरवरी से शुरू हुए किसानों के हालिया प्रदर्शन के बाद उनकी सरकार के साथ अब तक कई बार बातचीत हो चुकी है। किसानों की माँग को लेकर हालिया बातचीत 18 फरवरी को चंडीगढ़ में हुई थी।

केंद्र सरकार द्वारा न्यूनतम समर्थन मूल्य पर प्रस्ताव लाने के बाद किसान प्रदर्शनकारी थोड़े शांत हुए हैं। उन्होंने सरकार से चौथे दौर की बातचीत के बाद अपना प्रदर्शन कुछ समय रोकने का ऐलान किया। ये प्रस्ताव सरकार रविवार को लेकर आई। इस दौरान सरकार की ओर से एमएसपी पर फसल खरीदने के लिए 5 साल का कॉन्ट्रैक्ट करने के प्रस्ताव दिया गया था। ये कॉन्ट्रैक्ट एनसीसीएफ, NAFED और CCI जैसी सहकारी समितियों के साथ करने की बात कही गई थी। खरीद की लिमिट नहीं रखने का भी भरोसा दिया गया था। जिन उपजों को लेकर यह प्रस्ताव दिया गया था उनमें उड़द दाल, मसूर दाल और मक्का-कपास शामिल हैं।

इस बैठक में किसानों के 14 प्रतिनिधि और केंद्र सरकार के किसान कल्याण मंत्री अर्जुन मुंडा, वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल और गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय शामिल हुए थे। इनके अलावा बैठक में पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान भी मौजूद थे।

गौरतलब है कि इससे पहले 2020 में हुए किसान आन्दोलन के कारण भी अर्थव्यस्था को गहरी चोट पहुँची थी। कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (CAIT) ने उस समय बताया था कि 12 महीनों में देश को इस आंदोलन के कारण करीब ₹60,000 करोड़ का नुकसान हुआ था। व्यापारियों के संगठन ने कहा था कि ये घाटा मुख्यतः इस आंदोलन के शुरुआती स्टेज यानी, नवंबर-दिसंबर 2020 और जनवरी 2021 में हुआ था। इस दौरान भी पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, जम्मू कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और दिल्ली में आवश्यक वस्तुओं की आवाजाही में काफी दिक्कतें आई थी।

नेपाल फिर से बनेगा हिंदू राष्ट्र? नेपाली कॉन्ग्रेस के सुर में सुर मिला रहे वामपंथी भी, रिपोर्ट में बताया- राष्ट्रपति से लेकर PM तक इसके पक्षधर

नेपाल को ‘हिंदू राष्ट्र’ बनाने की माँग एक बार फिर से जोरों पर है। इसके लिए वहाँ ललितपुर के गोदावरी में सोमवार (19 फरवरी 2024) को महासमिति की बैठक भी होना शुरू हो गई है। इस बैठक का नेतृत्व नेपाली कॉन्ग्रेस के सांसद व केंद्रीय समिति के सदस्य शंकर भंडारी द्वारा किया जा रहा है। बैठक में इस बात पर चर्चा हो रही है कि किस तरीके से नेपाल को दोबारा से ‘वैदिक सनातन हिंदू राष्ट्र’ का दर्जा दिलाया जा सकता है।

द काठमांडू की रिपोर्ट के अनुसार, इस संबंध में नेपाल की 22 केंद्रीय कार्य समितियों ने बीते शुक्रवार (16 फरवरी 2024) को हिंदू राष्ट्र बनाने की माँग को पार्टी के आगे उठाया था। इसके बाद 17 फरवरी को इस अभियान को 4 पृष्ठ डोजियर के साथ पब्लिक किया गया। भंडारी ने नेपाली कॉन्ग्रेस के नेताओं से इस मुद्दे को उठाने के लिए समर्थन माँगा।

उन्होंने कहा, “हम पार्टी के नेतृत्व पर इस मुद्दे को उठाने का दबाव बनाएँगे। पार्टी अध्यक्ष शेर बहादुर देबा ने इस मुद्दे को सकारात्मक ढंग से लिया है। उनके अलावा सीपीएम-यूएमएल और सीपीएन के नेता भी इस अभियान में साथ देने को तैयार हैं।” नेपाली कॉन्ग्रेस सांसद ने कहा कि ये सिर्फ एक अभियान नहीं है। ये राष्ट्र निर्माण के लिए अहम अभियान है।

बता दें कि एक तरफ जहाँ कहा जा रहा है कि नेपाल को हिंदू राष्ट्र बनाने के लिए कई राजनेता एक साथ खड़े हो रहे हैं। वहीं ये भी जानकारी है कि कुछ कॉन्ग्रेस नेता इस मुद्दे से सहमत नहीं है। शुक्रवार को पार्टी की कार्यकारी समिति की बैठक में इस मुद्दे को नकार दिया गया था।

नेपाली कॉन्ग्रेस नेता भंडारी ने कहा कि वो अन्य पार्टियों और समुदायों के साथ मिलकर भी इस मुद्दे पर चर्चा करेंगे। वहीं पूर्व मंत्री व नेपाली कॉन्ग्रेस नेता देवेंद्र राज कादेल ने कहा कि हिंदू राष्ट्र की बहाली के लिए नेपाली कॉन्ग्रेस को अभियान चलाना चाहिए। उनकी सहमति के बिना ये नहीं हो पाएगा।

कादेल ने कहा कि अगर नेपाली कॉन्ग्रेस माँग मानने को तैयार होती है तो अन्य पार्टियों से भी बात की जाएगी। अगर ज्यादातर सभी इस पर राजी होंगे तो फिर संविधान में संशोधन का मार्ग प्रशस्त होगा। एक बार जब हम आधारशिला रख दी गई तो अच्छे राष्ट्र का निर्माण तो होगा ही।

जानकारी के लिए बता दें कि इससे पूर्व एक महासमिति की बैठक दिसंबर 2018 में हुई थी। उस समय 700 महासमिति के सदस्यों ने हिंदू राष्ट्र के लिए सहमति दी थी। लेकिन फिर भी कुछ नहीं हुआ। इस बार नेपाली कॉन्ग्रेस के नियुक्त प्रतिनिधि महासमिति बैठक में भाग ले रहे हैं और देश की राजनीति, नीति, पार्टी संगठन समेत कई समसामायिक मुद्दों पर चर्चा होगी और हिंदू राष्ट्र का मुद्दा उठेगा।

भंडारी का कहना है कि आज के समय में जनता वर्तमान स्थिति से त्रस्त है, इसलिए हिंदू राष्ट्र का जो मुद्दा उठा है उस पर विचार होना जरूरी है। उनके मुताबिक वामपंथी नेता तो धर्म आदि पर बात ही नहीं करते लेकिन बात राष्ट्र की है तो वो भी साथ देने को तैयार हैं।

बता दें कि 28 मई, 2008 को नेपाल आधिकारिक तौर पर एक गणतंत्र बनाया गया था। उस दिन नेपाल की संविधान सभा की पहली बैठक हुई थी। उसके बाद बाद राजाओं को शासन खत्म हो गया। हालाँकि अब एक बार फिर से हिंदू राष्ट्र बनाने की कोशिश की जा रही है और इसे राष्ट्र निर्माण के लिए जरूरी कदम भी बताया जा रहा है।

द न्यू इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट में तो सूत्रों के हवाले से कहा गया कि भले ही नेपाल एक धर्मनिरपेक्ष राज्य है, फिर भी उसे अपने हिंदू वंश पर गर्व है। वास्तव में, नेपाल में वर्तमान नेतृत्व – प्रधान मंत्रीपुष्पा कमला दहल और राष्ट्रपति राम चंद्र पौडेल भी चाहते हैं कि हिंदू राज्य की इस बहाली पर बहस हो।

जिस फुरकान की मौत के लिए यूपी पुलिस को जिम्मेदार बता रहा ओवैसी एन्ड गिरोह, वो बीमारी के कारण करा रहा था झाड़-फूँक

सोशल मीडिया पर सोमवार (19 फरवरी, 2024) को एक खबर तेज़ी से वायरल हो रही है। यह खबर शामली में फुरकान उर्फ़ भूरा नाम के युवक की मौत से जुड़ी है। AIMIM पार्टी के मुखिया असदुद्दीन ओवैसी सहित तमाम इस्लामी हैंडल इस मामले में उत्तर प्रदेश पुलिस को निशाना बना रहे हैं। झूठी खबरों के लिए कुख्यात ‘बोलता हिंदुस्तान’ जैसे हैंडलों ने तो इसे पुलिस कस्टडी में हुई मौत करार दे दिया है। ऑपइंडिया ने इस मामले की ग्राउंड लेवल से पड़ताल की।

लगातार भ्रामक खबरों के लिए कुख्यात ‘बोलता हिंदुस्तान’ ने इस खबर को अपने पारम्परिक अंदाज़ में परोसा है। कैप्शन के तौर पर लिखा, “शामली में ‘फरमान’ को थाने ले गई पुलिस। परिजनों का आरोप – 1 घंटे बाद लाश घर फेंकी, पूरे शरीर में निशान।” इसी ट्वीट के नीचे कॉन्ग्रेस नेता राहुल काजल ने तंज कसते हुए लिखा कि ये ‘अमृत काल’ चल रहा है।

AIMIM के मुखिया असदुद्दीन ओवैसी ने अपनी पार्टी के नेता शौकत अली के ट्वीट को शेयर करते हुए फुरकान के लिए मुआवजा माँगा है। ओवैसी ने UP के DGP से पुलिस वालों की गिरफ्तारी तक की माँग उठाई है और पुलिस पर अपराध करने का आरोप लगाया है। जबकि शौकत अली ने आरोप लगाया है कि चौकी इंचार्ज विनय सिंह अपने साथी सिपाहियों के साथ फुरकान को अपने साथ ले गए और बाद में उसकी लाश घर वापस कर देते हैं।

हल्द्वानी हिंसा पर भी कई आधारहीन ट्वीट करने वाली सदफ आफरीन ने इस मामले में भी इंट्री की है। सदफ ने कस्टडी मौतों में UP पुलिस को पहले नंबर पर बताते हुए फुरकान को बेरहमी से पीटने का आरोप लगाया है।

थाने तक गया ही नहीं था फुरकान

सोशल मीडिया पर चल रहे इस हंगामे के बीच शामली पुलिस का बयान आया है। तमाम भ्रामक दावों का खंडन करते हुए शामली पुलिस ने साफ कहा है कि मृतक फुरकान थाने पर गया ही नहीं था। पुलिस के बयानों के मुताबिक, बिड़ौली चौकी के स्टाफ अदालत का वारंट तामील करवाने 18-19 फरवरी की रात फुरकान के गाँव में गए थे। पुलिस को फारुख नाम के वॉरंटी की तलाश थी। पुलिस फारुख की तलाश में जुटी थी कि इसी दौरान उसके ही परिवार के 34 साल के फुरकान की तबीयत खराब होने लगी। थोड़ी देर बाद फुरकान की मौत हो गई।

पहले से बीमार रहता था फुरकान

अपने आधिकारिक बयान में शामली पुलिस ने यह भी दावा किया है कि फुरकान पहले से बीमार रहता था। हालाँकि, फुरकान के घर वालों द्वारा पुलिस पर लगाए गए प्रताड़ना के आरोपों के बाद मृतक का शव पोस्टमॉर्टम के लिए भेजा गया है। मेडिकल रिपोर्ट आने के बाद फुरकान के घर वालों द्वारा लगाए गए आरोपों की असलियत बाहर आ पाएगी। फ़िलहाल पूरे मामले की विस्तृत जाँच के लिए एडिशनल एसपी को निर्देशित किया जा चुका है।

झाड़-फूँक से चल रहा था इलाज

ऑपइंडिया ने स्थानीय स्तर पर इस मामले की जानकारी जुटाई। नाम न छापने की शर्त पर एक स्थानीय निवासी ने बताया कि वॉरंटी फारुख की तलाश में गाँव में गई पुलिस को देख कर एक युवक भागने लगा। पुलिस को उस युवक के भागने पर शक हुआ तो उसका पीछा किया गया। पीछा करने पर वहाँ फुरकान मिला। पूछताछ करने पर फुरकान हड़बड़ाने लगा। फारुख के न मिलने पर पुलिस वहाँ से लौट गई। दावा है कि फुरकान अपने ही घर में रुका रहा।

बाद में लगभग 1 से डेढ़ घंटे बाद उसकी मौत हो गई। बताया यह भी गया कि फुरकान के परिजन उसका लम्बे समय से झाड़-फूँक के सहारे से इलाज करवा रहे थे। हालाँकि, मामले की जाँच शामली के एडिशनल एसपी कर रहे हैं। जल्द ही पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट भी आने वाली है। इसके बाद फ़ुरक़ान की मौत के असल कारणों से पर्दा हट जाएगा।

झिंझाना में पुलिस पर हुए हैं हमले

जिस झिंझाना थाना क्षेत्र का यह मामला बताया जा रहा है वहाँ पहले पुलिस पर कई बार हमले हो चुके हैं। अक्टूबर 2018 में यहाँ पुलिस पर हमला कर के एक होमगार्ड की हत्या कर दी गई थी। इस दौरान सरकारी राइफल भी छीन ली गईं थी। लगभग 11 माह पहले यहाँ के गाँव केरटू में अपराधी जबरूद्दीन की तलाश में दबिश देने आई हरियाणा पुलिस पर भी हमला हुआ था। तब भी पुलिस के हथियार छीन लिए गए थे। तब झिंझाना थाने पर 21 नामजदों सहित कुल 40 आरोपितों पर FIR दर्ज हुई थी।

लाइव कैमरे पर ही पत्रकार को पकड़ के ले गई बंगाल पुलिस, संदेशखाली की पीड़िताओं की आवाज़ उठाने की सज़ा: BJP बोली – निरंकुशता का दूसरा नाम ममता बनर्जी

पश्चिम बंगाल में ‘रिपब्लिक बांग्ला’ टीवी न्यूज़ चैनल के पत्रकार सन्तु पान को गिरफ्तार कर लिया गया है। वो नॉर्थ 24 परगना के संदेशखाली में महिलाओं के बलात्कार के आरोपों को लेकर मुखर थे और लगातार रिपोर्टिंग कर रहे थे। संदेशखाली का गुनहगार शाहजहाँ शेख अब तक फरार है। राशन घोटाले में फँसे TMC नेता को पकड़ने गई ED (प्रवर्तन निदेशालय) की टीम पर हमला हुआ था, उसके बाद उसके गुंडों पर यौन शोषण के आरोप लगे। महिलाओं का कहना है कि गुंडे सुंदर स्त्रियों को उठा कर ले जाते थे, फिर ‘संतुष्ट’ होने के बाद छोड़ देते थे।

वीडियो में देखा जा सकता है कि सन्तु पान को लाइव कवरेज के दौरान ही पश्चिम बंगाल पुलिस ने पकड़ लिया। उन्हें दोनों तरफ से 2 पुलिस वालों ने पकड़ा और फिर टोटो (ई-रिक्शा) में बिठा कर ले गए। इस दौरान भी वो लगातार रिपोर्टिंग करते रहे। लोग इस निडर रिपोर्टिंग के लिए उनकी तारीफ़ कर रहे हैं। लोग कह रहे हैं कि गिरफ्तार कर के ई-रिक्शा में बिठाए जाने के बावजूद उन्होंने रिपोर्टिंग नहीं रोकी और कैमरे की तरफ देख कर बोलते रहे।

भाजपा ने भी बंगाल पुलिस की इस करतूत पर कड़ी आवाज़ उठाई है। पार्टी के महासचिव और अंडमान-निकोबार में प्रभारी सत्या कुमार ने कहा कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी निरंकुशता की पर्यायवाची बन गई हैं। उन्होंने बताया कि सन्तु पान परिश्रम पूर्वक संदेशखाली की पीड़ित महिलाओं के लिए आवाज़ उठा रहे थे। उन्होंने पूछा कि आखिर सीएम सच के बाहर आने से इतनी भयभीत क्यों हैं? पश्चिम बंगाल भाजपा ने भी इस कदम की कड़ी निंदा की है।

पश्चिम बंगाल भाजपा ने कहा, “संदेशखाली में महिलाओं के खिलाफ जघन्य अत्याचारों का खुलासा करने वाले बहादुर पत्रकार सन्तु पान को पुलिस के भेष में ममता के गुंडों ने गिरफ्तार कर लिया। यह कायरतापूर्ण कृत्य ममता बनर्जी के शासन क्या है इसके बारे में उजागर करता है। ये एक तानाशाही है जो असहमति को कुचलती है और अपराधियों की रक्षा करती है।” संदेशखाली पहुँचीं NCW अध्यक्ष रेखा शर्मा को पकड़ के कई महिलाएँ रोने लगीं, उन्हें लेकर थाने पहुँच कर शिकायत दर्ज कराई गई।

सरस्वती पूजा पर हमला, भगवान राम का ध्वज नोच कर गटर में फेंका: नेपाल में मस्जिद के सामने से गुजरी यात्रा तो बेकाबू हुई मुस्लिम भीड़, मंदिर में तोड़फोड़

नेपाल के रौतहट जिले में गुरुवार (15 फरवरी, 2024) को हिन्दुओं की प्रतिमा विसर्जन यात्रा पर हमला हुआ था। विवाद की शुरुआत तब हुई जब माता सरस्वती प्रतिमा को नदी में विसर्जित करने जा रही हिन्दुओं की यात्रा ईशनाथ के पास मस्जिद के आगे पहुँची। इस दौरान श्रद्धालुओं के साथ चल रही प्रशासन पर भी पत्थरबाजी हुई। इस घटना के विरोध में हिन्दू संगठनों द्वारा सोमवार (19 फरवरी, 2024) को वीरगंज बंद का ऐलान हुआ था।

इस बंदी में भी मुस्लिम भीड़ नारेबाजी करते हुए सड़कों पर उतर गई। इस दौरान भगवान राम के चित्र वाले भगवा ध्वज को नोच कर गटर में फेंक दिया गया और मंदिर में तोड़फोड़ हुई। प्रभावित इलाकों में प्रशासन ने फ़िलहाल कर्फ्यू लगा दिया है।

नेपाल के संगठन ‘हिन्दू सम्राट सेना’ संगठन के पदाधिकारी कृष्ण कुमार शाह ने ऑपइंडिया से बात की। उन्होंने बताया कि गुरुवार (15 फरवरी, 2024) को रौतहट जिले में हिन्दू समाज माता सरस्वती की प्रतिमा नदी में विसर्जन करने के लिए शांतिपूर्ण ढंग से जा रहे थे। इस यात्रा से पहले एक पीस कमेटी का गठन हुआ था। कमेटी में हिन्दू और मुस्लिम समुदाय के 5-5 सदस्यों को शामिल किया गया था। दोनों पक्षों ने प्रशासन को भरोसा दिया था कि वो अपने-अपने समुदाय के लोगों को समझाएँगे और शाँति बहाल रखेंगे।

जब यह यात्रा वीरगंज नगरपालिका के मुस्लिम बहुल इलाके के पास से गुजरी तभी वहाँ सड़क के किनारे बनी एक मस्जिद पर इसे रोक दिया गया। आरोप है कि मुस्लिम समुदाय के लोगों को मस्जिद के सामने से यात्रा ले जाने पर ऐतराज था। इसी बार पर दोनों पक्षों में तकरार होने लगी। बकौल कृष्ण कुमार, कुछ ही देर में मस्जिद के आसपास बने मुस्लिमों के मकानों से पत्थर चलने लगे। पत्थरबाजी में महिलाएँ और बच्चे भी शामिल थे। इस पथराव की वजह से विसर्जन यात्रा में शामिल नरेश कुमार पासवान और 2 नाबालिग हिन्दू बच्चे घायल हो गए। जुलूस के साथ चल रहे पुलिस के कुछ जवान भी इस हमले की चपेट में आ गए।

‘हिन्दू सम्राट सेना’ पदाधिकारी ने हमें आगे बताया कि पत्थरबाजी की वजह से माता सरस्वती की मूर्ति भी खंडित हो गई। नाराज श्रद्धालुओं ने खंडित मूर्ति के साथ धरना शुरू कर दिया। थोड़े समय बाद प्रशासन दल-बल के साथ मौके पर पहुँचा और हिन्दू समाज के लोगों से मूर्ति को विसर्जित करने की गुजारिश की। इस दौरान अधिकारियों ने हमलावरों पर कड़ी कार्रवाई का भरोसा दिया। कृष्ण कुमार साह हमें आगे बताते हैं कि जब प्रशासन की बात मान कर श्रद्धालु फिर से मूर्ति विसर्जन करने चले तभी फिर से मुस्लिमों के मकानों ने पत्थरबाजी होने लगी।

दोबारा हुई पत्थरबाजी से एक बार फिर से न सिर्फ श्रद्धालुओं बल्कि प्रशासनिक अधिकारियों में भी अफरातफरी मच गई। आखिरकार प्रशासन ने बिना श्रद्धालुओं की मौजूदगी के ही अपनी तरफ से मूर्ति का विसर्जन किया। अपनी विसर्जन यात्रा पर इस हमले से नाराज हिन्दू समुदाय ने प्रशासन से जल्द से जल्द आरोपितों पर कड़ी कार्रवाई की माँग की। इस बीच लगभग 4 दिन बीत जाने पर भी जब किसी की गिरफ्तारी नहीं हुई तो हिन्दू संगठनों ने 19 फरवरी (सोमवार) को वीरगंज बंद का एलान किया।

ऑपइंडिया ने हिन्दू सम्राट सेना के अध्यक्ष राजेश यादव से बात की। उन्होंने हमें बताया कि 19 फरवरी को जब हिन्दू समाज शाँतिपूर्वक बंद का पालन करवा रहा था तब एक बार फिर से इस्लामी भीड़ सड़कों पर उतर आई। भीड़ के पास लाठी-डंडे और अन्य हथियार थे। इसमें सभी उम्र के लोग शामिल थे। इन्होने नारा ए तकबीर और अल्लाह हु अकबर बोल कर सड़कों पर हंगामा किया। इस दौरान इसी हिंसक भीड़ ने वीरगंज के खम्बों पर लगे भगवान् राम के चित्र वाले भगवा ध्वजों को भी नोच कर नालियों में फेंक दिया।

ऑपइंडिया ने इस हिंसक भीड़ की करतूतों के वीडियो शेयर किए हैं।इस दौरान बीरगंज के एक मंदिर में तोड़फोड़ की भी खबर है।

नेपाल की एक महिला पत्रकार किरन जोशी ने अपने X हैंडल पर एक वीडियो शेयर किया है। उनका दावा है कि यह वीडियो बीरगंज में आज हुई हिंसा का है। कैप्शन में उन्होंने 11 सुरक्षाकर्मियों के घायल होने की बात कही है। किरन जोशी द्वारा शेयर वीडियो में हिंसक भीड़ को काबू करने के लिए पुलिस को बल प्रयोग करते देखा जा सकता है। बीच में कुछ काले रंग के पठानी सूट पहने युवक पुलिस से भागते भी दिख रहे हैं।

उन्मादी भीड़ की इस हरकत के बाद जिला प्रशासन ने वीरगंज में कर्फ्यू लगा दिया है। आदेश की परिधि में बीरगंज नगरपालिका क्षेत्र को रखा गया है। अब अगले आदेश तक इस प्रभावित क्षेत्र में किसी को भी रैली, भाषण और बेवजह इधर-उधर आने-जाने की अनुमति नहीं हैं।

बीरगंज कर्फ्यू आदेश

नेपाली प्रधानमंत्री को ज्ञापन भेज कर हिन्दू सम्राट सेना ने इसे सोची-समझी साजिश करार दिया है और 81% हिन्दुओं के देश में बहुसंख्यक समाज की हालत पर चिंता जताई है।

हिन्दू सम्राट सेना द्वारा नेपाली प्रधानमंत्री को भेजा गया पत्र

फ़िलहाल बीरगंज के प्रभावित इलाकों में भारी फ़ोर्स तैनात कर दी गई है। नेपाली पुलिस के साथ वहाँ के अर्धसैनिक बल भी गश्त कर रहे हैं। हिन्दू संगठनों ने उम्मीद जताई है कि जल्द ही हिंसक गतिविधियों में शामिल लोगों को पकड़ा जाएगा। हिन्दू सम्राट सेना के पदाधिकारी कृष्ण कुमार ने हमें बताया कि ऐसी घटना पहली बार नहीं हुई है। चरमपंथियों पर दुर्गा पूजा सहित कुल 7 से अधिक धार्मिक कार्यक्रमों में उन्होंने इस तरफ के व्यवधान डालने का आरोप लगाया

जेल में बंद माफिया मुख़्तार अंसारी के भाई अफजाल को सपा का टिकट, गैंगस्टर एक्ट में सज़ा के बाद रद्द हो गई थी सांसदी: गाजीपुर से फिर लड़ेगा चुनाव

समाजवादी पार्टी ने लोकसभा चुनाव 2024 के लिए अपने प्रत्याशियों की दूसरी सूची जारी कर दी है। इसमें जेल में बंद माफिया मुख़्तार अंसारी के भाई अफजाल अंसारी का भी नाम है, जिसे गाजीपुर क्षेत्र से मैदान में उतारा गया है। मुख़्तार अंसारी को फ़िलहाल बांदा जेल में बंद रखा गया है। मुख़्तार अंसारी इससे पहले जेल में से चुनाव जीत चुका है। 2022 में मऊ विधानसभा क्षेत्र से उसने अपने बेटे अपने बेटे अब्बास को टिकट दिखाया था और वो जीत दर्ज करने में भी कामयाब रहा था।

खुद मुख़्तार अंसारी लगातार 5 बार यहाँ से चुनाव जीत चुका है और 26 वर्षों तक विधायक बन कर बैठा रहा। मुख़्तार अंसारी और अब्बास अंसारी का बड़ा भाई सिबगतुल्लाह अंसारी मोहम्मदाबाद से लगातार 2 बार विधायक रह चुके हैं। अब उनके बेटे सुहैब इस क्षेत्र से विधायक हैं। ताज़ा सूची में अखिलेश यादव ने कई ऐसी सीटों पर भी अपने उम्मीदवार उतारे हैं, जहाँ कॉन्ग्रेस भी खत्म ठोक रही है। ऐसे में अब उत्तर प्रदेश में I.N.D.I. गठबंधन का बुरा हाल होता हुआ दिख रहा है।

सपा ने अब तक यूपी की 80 लोकसभा सीटों में से 27 पर अपने उम्मीदवारों की घोषणा कर दी है। दूसरी सूची ऐसे समय में आई है जब कॉन्ग्रेस पार्टी के पूर्व अध्यक्ष राहुल गाँधी ‘भारत जोड़ो न्याय यात्रा’ लेकर यूपी में ही पहुँचे हुए हैं। इस यात्रा में अखिलेश यादव अब तक शामिल भी नहीं हुए हैं और इसका कारण सीट शेयरिंग में दोनों दलों में अनबन माना जा रहा है। जयंत चौधरी की RLD पहले ही सपा को झटका देकर भाजपा गठबंधन का हिस्सा बन चुकी है, जिसके बाद पश्चिमी यूपी में NDA मजबूत हुआ है।

बताते चलें कि अफजाल अंसारी ने लोकसभा चुनाव 2019 में गाजीपुर से ही भाजपा के मनोज सिन्हा को हराया था। मनोज सिन्हा फ़िलहाल जम्मू कश्मीर के उप-राज्यपाल हैं, तब वो केंद्र में मंत्री हुआ करते थे। अफजाल अंसारी को गैंगस्टर एक्ट के तहत 4 साल की सज़ा सुनाई गई थी। वहीं उसके भाई मुख़्तार को 10 साल की सज़ा सुनाई गई थी। मुख्तार और अफजाल अंसारी की सजा पर कोर्ट के फैसले के बाद कृष्णानंद राय के बेटे पीयूष राय ने कहा था कि उनकी माँ ने कई सालों तक संघर्ष किया है।