हल्द्वानी में अतिक्रमण हटाने गई पुलिस-प्रशासन की टीम पर हुए हमले और मुस्लिमों द्वारा किए गए दंगों के बाद अब वामपंथी उनके बचाव में उतर आए हैं। इसी क्रम में ‘न्यूजलॉन्ड्री’ ने शनिवार (17 फरवरी, 2024) को इस्लामी कट्टरपंथी दंगाइयों द्वारा मचाए गए उत्पात को ढँकने और दंगाई मुस्लिमों को पीड़ित दिखाने का प्रयास किया। उनके साथ कुछ और वामपंथी पत्रकार इस मुहिम में जुट गए। यह सब उन्होंने न्यूजलॉन्ड्री पर होने एक पॉडकास्ट में किया।
इसी पॉडकास्ट में 14:55 पर सुमेधा मित्तल ने अपना प्रोपेगंडा आगे रखते हुए बताया, “प्रशांत और मैं वहाँ पर 5 दिनों के लिए गए हुए थे। हमें नहीं लगता है कि हम दंगे की असल तस्वीर बना पाए हैं। ऐसा इसलिए है क्योंकि वहाँ हमें जाने ही नहीं दिया जा रहा था।”
आगे सुमेधा ने अपना प्रोपेगंडा जारी रखा, “8 फरवरी को जिस रात हिंसा चालू हुई, पूरे शहर भर में कर्फ्यू लगा दिया गय था। जैसे जैसे समय आगे बढ़ा, बाकी शहर में कर्फ्यू में हट गया लेकिन जिस बनभूलपुरा में अवैध मदरसा और मस्जिद गिराए गए थे, वहाँ ऐसा नहीं किया गया।” सुमेधा पूरे समय यह दावा करती रही कि हल्द्वानी में लोगों को जानकारियाँ नहीं दी जा रही थी कि दंगा कैसे चालू हुआ और यह रोकने का काम प्रशासन ने किया। हालाँकि, सुमेधा ने एक बार भी इस बात का जिक्र नहीं किया कि बनभूलपुरा में इस्लामी कट्टरपंथी भीड़ के दंगे के कारण ही यहाँ कर्फ्यू लगाने की नौबत आई थी।
मनीषा पांडे ने दंगाइयों को बताया ‘भीड़’, पीड़ित दिखाने का प्रयास
इस प्रोपेगंडा में न्यूजलॉन्ड्री का कोई भी व्यक्ति पीछे नहीं रहना चाहता था। इसी क्रम में न्यूजलॉन्ड्री की मैनेजिंग एडिटर मनीषा पांडे ने एक नया शिगूफा छोड़ा। मनीषा पांडे ने यह तो स्वीकार किया कि हल्द्वानी में दंगा-फसाद हुआ, लेकिन यह नहीं बताया कि यह दंगा मुस्लिमों ने किया और भीड़ बता कर किनारे हो गई।
मनीषा ने बताया, “मुझे लगता है हल्द्वानी में भीड़ नियन्त्रण से बाहर हो गई और यह सब हुआ। लगता है कि वह गुस्सा कर हमलावर हो गए और पुलिस पर हमला कर दिया। लेकिन, आप उनको इस तरह से परेशान करोगे तो फिर…।”
मनीषा पांडे ने इसके बाद भी अपना एजेंडा जारी रखा। मनीषा ने आगे बताया, “आप उनके घर गिराने आ रहे हो, मस्जिद, स्कूल गिराने के लिए बिना किसी नोटिस के आ रहे हो, आपको पता है विवाद तो होगा ही।” मनीषा की इस बात में सच्चाई का 1% हिस्सा भी नहीं था। दरअसल, जो मस्जिद और मदरसा गिराया गया था वह अवैध था और उसके लिए पहले ही नोटिस दी जा चुकी थी। इसके लिए अनुमति भी ली जा चुकी थी। हालाँकि, मनीषा ने मुस्लिमों के दंगों को सही ठहराने के लिए हिंसा को भी जायज ठहरा दिया।
येन-केन प्रकारेण, हल्द्वानी के दंगाइयो को बचाता दिखा ‘न्यूजलॉन्ड्री’
जब न्यूजलॉन्ड्री के सभी प्रोपगैंडाबाज थक हार कर भी हल्द्वानी में मुस्लिमों के दंगे का बचाव नहीं कर पाए तो उनके मुखिया रमन कृपाल ने मोर्चा संभाला। रमन कृपाल न्यूजलॉन्ड्री के एडिटर इन चीफ हैं। इन्होने अपना निशाना नैनीताल की डीएम वन्दना सिंह को बनाया। कृपाल ने दंगाइयों पर गोली मारने के आदेश देने को लेकर वन्दना सिंह के खिलाफ प्रलाप किया।
कृपाल ने कहा, “पहले फायरिंग बड़ी बात हुआ करती थी लेकिन अब तो इसके विषय में कोई बात ही नहीं कर रहा।” हालाँकि, कृपाल यह भूल गए कि भीड़ कितनी अराजक थी जिसके कारण प्रशासन को फायरिंग करनी पड़ी। यदि वह ऐसा नहीं करते तो और भी नुकसान होता। ऑपइंडिया की ग्राउंड रिपोर्ट में भी यह बात सामने आई थी। ऑपइंडिया के पत्रकार राहुल पाण्डेय ने हल्द्वानी में ग्राउंड पर जाकर बताया था कि वहाँ कैसे हालात थे।
न्यूजलॉन्ड्री की ही जयाश्री अरुणाचलम ने दावा किया कि मुस्लिम भीड़ को सरकार ने भड़काया था। अरुणाचलम ने कहा, “ये एक पैटर्न है, आप मुस्लिमों पर खूब हमले करो और फिर जब वह जवाब दें तो बल प्रयोग को सही ठहराओ।”
हल्द्वानी दंगे
8 फरवरी को उत्तराखंड के हल्द्वानी के एक इलाके बनभूलपुरा में अतिक्रमण हटाने गई नगर निगम और प्रशासन की टीम पर मुस्लिम भीड़ ने हमला बोल दिया था। मुस्लिमों ने पुलिस को घेर कर पथराव किया जिसमें बड़ी सँख्या में पुलिसकर्मी घायल हुए। उन्होंने पुलिस को जलाने तक का प्रयास किया। इसके बाद जब पुलिस ने जवाबी कार्रवाई की तो पेट्रोल बम भी फेंके गए। इस पूरी कार्रवाई में 6 लोगों की मौत हो गई। इसके बाद हल्द्वानी में कर्फ्यू लगा दिया गया था।
अयोध्या में 22 जनवरी 2024 को भगवान राम के मंदिर में विधि-विधान से प्राण प्रतिष्ठा हुई। इस अवसर पर 500 वर्षों के संघर्ष में बलिदान हुए रामभक्तों को दुनिया भर के हिन्दुओं ने याद किया। कई कारसवकों के परिजनों ने मुलायम के करीबी सफेदपोश मुन्नन खाँ पर पुलिस की वर्दी में नरसंहार करने का आरोप लगाया है। हमारी ग्राउंड रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि गोंडा जिले में मुन्नन खाँ के नाम पर चौराहा, गाँव, पेट्रोल पम्प के साथ-साथ खेल प्रतियोगिता भी आयोजित होती है। अब गोंडा के स्थानीय निवासियों ने मुन्नन खाँ चौराहे का नाम बदलने की माँग उठाई है। यह माँग उठाने वालों में हिन्दू संगठन के पदाधिकारी, व्यापारी और कॉन्ग्रेस पार्टी तक के नेता शामिल हैं। हालाँकि कुछ मुन्नन खाँ समर्थक मुस्लिमों का एलान है कि चौराहे का नाम नहीं बदलने दिया जाएगा।
पहले था ब्राह्मण बाहुल्य इलाका
जब ऑपइंडिया की टीम मुन्नन खाँ चौराहे पर पहुँची तो वहाँ हिन्दुओं की आबादी न के बराबर थी। हमने अमरुद और मूंगफली आदि की रेहड़ी लगाने वालों से बात करने का प्रयास किया तो वो मुन्नन खाँ का नाम आते ही खामोश हो गए। हालाँकि फरवरी 2017 की FIR में खुद गोंडा पुलिस का कहना है कि मुन्नन के बेटे कासिम का इलाके में खौफ है और कोई उसके खिलाफ गवाही देने की हिम्मत नहीं जुटा पाता। एक व्यक्ति ने कैमरे के आगे न आने की शर्त पर हमें बताया कि जिस मुस्लिम बाहुल्य जगह आज मुन्नन खाँ चौराहा है, वहाँ कभी हिन्दुओं की ब्राह्मण बिरादरी के लोग बहुतायत में थे।
आज भी पोस्ट है बुधई का पुरवा
हमें बताया गया कि धीरे-धीरे मुस्लिम आबादी बढ़ती चली गई। इसी के चलते गोंडा के चौक से लेकर कई किलोमीटर दूर खोरहसा बाजार और दर्जी कुआँ तक का सड़क के किनारे वाला क्षेत्र मुस्लिम बाहुल्य हो गया। आज भी मुन्नन खाँ चौराहे के आसपास डाकघर का पोस्ट बुधई का पुरवा लगता है। बुधई का पुरवा आज भी हिन्दू बाहुल्य गाँव है, जहाँ ब्राह्मण वर्ग के लोग ज्यादा रहते हैं। जिस ख़ास जगह को अब मुन्नन खाँ चौराहा बोलते हैं, वो 1990 से पहले कमल टंकी नाम से जानी जाती थी। तब कमल नाम का पेट्रोल पम्प उसी जगह हुआ करता था।
नाम बदलने गए भाजपा विधायक के बैनर फाड़े
योगी सरकार के पहले कार्यकाल में भारतीय जनता पार्टी के विधायक प्रतीक भूषण सिंह ने मुन्नन खाँ चौराहे का नाम बदलने का प्रयास किया था। वो इस चौराहे का नाम ‘महर्षि पतंजलि चौक’ रखना चाहते थे। तब प्रतीक ने मुन्नन खाँ चौराहे पर महर्षि पतंजलि के नाम और तस्वीर वाले बैनर भी लगवाए थे।
गोंडा के विश्व हिन्दू परिषद पदाधिकारी राकेश वर्मा गुड्डू बताते हैं कि इस प्रयास से कट्टरपंथी मुस्लिम नाराज हो गए थे। तब उन्होंने मुन्नन खाँ चौराहे पर लगे बैनरों को फाड़ डाला था। हालाँकि तब उस जगह का नाम महर्षि पतंजलि चौराहा न होने की वजह से आरोपितों पर कोई कानूनी कार्रवाई नहीं हो पाई थी। महर्षि पतंजलि के नाम पर लगाए गए इस बोर्ड को अराजक तत्वों द्वारा गिराए जाने की पुष्टि गोंडा के समाजसेवी धीरेन्द्र पांडेय ने भी की है।
पुलिस चौकी का नाम सद्भावना रखने पर हुआ था विरोध
ऑपइंडिया ने साल 2017 में गोंडा जिले में बतौर DSP तैनात रहे रिटायर्ड पुलिस अधिकारी भरत यादव से बात की। उन्होंने बताया कि मुन्नन खाँ चौराहे पर उनके प्रयास से ही पुलिस चौकी स्थापित हुई थी। यह पुलिस चौकी क्षेत्र में होने वाले अपराधों के दमन के लिए जरूरी थी। इस पुलिस चौकी का 22 अक्टूबर 2017 को जनसहयोग से लोकार्पण हुआ था। VHP पदाधिकारी राकेश वर्मा बताते हैं कि तब आसपास के निवासी मुस्लिम समुदाय के कई लोगों ने इस पुलिस चौकी का विरोध किया था।
मुन्नन खाँ चौराहे पर बनी सद्भावना पुलिस चौकी
राकेश वर्मा ने मुस्लिम समुदाय द्वारा पुलिस चौकी के विरोध के खासतौर पर 2 कारण गिनाए। पहला कारण था कि असामाजिक तत्वों द्वारा आए दिन होने वाले अपराधों पर नियंत्रण लगना। राकेश ने विरोध की दूसरी वजह पुलिस चौकी मुन्नन खाँ के नाम पर न होना बताया।
DSP भरत यादव के साथ-साथ SP उमेश कुमार सिंह को भी विरोध झेलना पड़ा था। 2017 में हुए उस विरोध की बात खुद पूर्व DSP भरत यादव ने भी स्वीकारी। हालाँकि उन्होंने इस मामले पर कहा, “कुछ को अँधेरा पसंद होता है तो कुछ को उजाला।” गोंडा के स्थानीय व्यापारी चंदन गुप्ता ने भी बताया कि मुन्नन खाँ चौराहे पर पुलिस चौकी बनने का विरोध कुछ असमाजिक तत्वों द्वारा किया गया था।
ऑपइंडिया से बात करने वाले गोंडा के तत्कालीन DSP भरत यादव
कॉन्ग्रेस नेता सहित हर वर्ग ने उठाई नाम बदलने की माँग
ऑपइंडिया की ग्राउंड रिपोर्ट के दौरान हमें कई स्थानीय नागरिक मिले। गोंडा शहर में रहने वाला लगभग हर स्थाई और अस्थाई निवासी मुन्नन खाँ चौराहे के बारे में जानते हैं। इनमें से अधिकतर इस पक्ष में हैं कि चौराहे का नाम मुन्नन खाँ के बजाय कुछ और रखा जाए। इन्ही में से कॉन्ग्रेस पार्टी के जिला उपाध्यक्ष दिलीप शुक्ला भी शामिल हैं। दिलीप ने हमसे बात करते हुए कहा कि वो चाहते हैं कि मुन्नन खाँ चौराहे का नाम ऐसे व्यक्ति पर रखा जाए, जिसका देश की आज़ादी और तरक्की में योगदान रहा हो।
कॉन्ग्रेस नेता दिलीप शुक्ला
उदाहरण के तौर पर कॉन्ग्रेस नेता दिलीप शुक्ला ने गोंडा नरेश राजा देवीबख्श सिंह का नाम लिया। राजा देवीबख्श वही सम्राट थे, जिन्होंने 1850 के आसपास वाजिद अली शाह को हराकर रामजन्मभूमि परिसर पर अधिपत्य जमा लिया था। दिलीप शुक्ला ने मुन्नन खाँ के बारे में बताया कि उन्होंने अपने समय का उपयोग किया और चौराहों के नाम अपनी पहचान पर रखवा लिए। कॉन्ग्रेस नेता ने मुन्नन को तत्कालीन दबंग छवि वाला नेता माना।
गोंडा के व्यापारी चंदन गुप्ता ने भी ऑपइंडिया से बातचीत में मुन्नन खाँ चौराहे का नाम बदलने की माँग उठाई। चंदन गुप्ता ने इसे एक नया नाम बताया और दावा किया कि पूर्व सांसद मुन्नन खाँ को कोई सभ्य व्यक्ति पसंद नहीं करता क्योंकि उन्होंने दंगे करवाए थे।
बकौल चंदन अगर यही चौराहा किसी क्रांतिकारी या महापुरुष के नाम पर होता तो लोगों को एक अच्छा और सकारात्मक संदेश भी जाता। अंत में चंदन ने आशा जताई कि योगी सरकार इस चौराहे का नाम जल्द ही बदलेगी।
मुन्नन खाँ चौराहे पर लगा PWD का बोर्ड
गोंडा जिले के सामाजिक कार्यकर्ता सुरेश गुप्ता ने भी ऑपइंडिया से बात की। सुरेश गुप्ता ने हमें बताया कि जब वो मुन्नन खाँ चौराहे से गुजरते हैं, तब उन्हें बोर्ड पढ़ कर मन में बड़ी पीड़ा होती है। सुरेश ने बताया कि पहले मुन्नन खाँ और अब उनके परिवार के कुछ लोग आपराधिक कार्यों में लिप्त हैं। इसके अलावा उन्होंने दावा किया कि पहले उस चौराहे पर आसपास के भी आपराधिक तत्वों का जमावड़ा रहता था।
सुरेश गुप्ता ने कुछ इलाकों ने नाम भी गिनाए, जहाँ के गिने-चुने बदमाश वहाँ आकर डेरा डाले रहते थे। तब वहाँ गुंडई भी चरम सीमा पर होती थी। उन्होंने कहा कि अगर मुन्नन खाँ चौराहे का नाम योगी सरकार में नहीं बदला गया तो शायद ये बदलाव कभी नहीं हो पाएगा। विकल्प के तौर पर उन्होंने किसी क्रांतिकारी या महापुरुष का नाम रखने की सलाह दी।
गोंडा के स्थानीय निवासी व समाजसेवी धीरेन्द्र प्रताप पांडेय ने ऑपइंडिया से बात की। उन्होंने बताया कि मुन्नन खाँ के नाम पर चौराहे का कोई औचित्य नहीं है क्योंकि इसे उन्होंने अपनी सांसदी के प्रभुत्व के चलते खुद ही रखवा दिया था। धीरेन्द्र ने योगी सरकार से माँग की है कि मुन्नन खाँ चौराहे को किसी क्रांतिकारी के नाम से रखा जाए। इन सभी में उन्होंने 1857 क्रान्ति के नायक राजा देवीबख्श सिंह को बेहतर विकल्प माना। धीरेन्द्र के मुताबिक मंगल पांडेय चौराहा भी एक विकल्प हो सकता है क्योंकि मुन्नन राजनैतिक नहीं उद्दंड और अराजक विचारधारा के थे।
गोंडा का बिजली विभाग भी आधिकारिक तौर पर प्रयोग करता है मुन्नन खाँ चौराहा नाम
गोंडा जिला अदालत के वकील अरविन्द शुक्ला ने ऑपइंडिया से बात की। उन्होंने हमें बताया कि गोंडा जिले में तमाम क्रांतिकारी हुए हैं और बेहतर होगा कि मुन्नन खाँ चौराहे का नामकरण उन्ही में से किसी एक के नाम पर हो जाए। बताते चलें कि ब्रिटिश काल में हुए काकोरी कांड के महानायक राजेंद्र लहड़ी को गोंडा जेल में ही 17 दिसंबर 1927 को फाँसी दी गई थी। यह जेल कथित मुन्नन खाँ चौराहे से महज कुछ ही दूरी पर स्थित है।
विश्व हिन्दू परिषद पदाधिकारी राकेश वर्मा उर्फ़ गुड्डू ने भी हमसे बातचीत में आशा जताई है कि जल्द ही योगी सरकार सभी सरकारी कागजातों से मुन्नन खाँ के नाम पर मौजूद स्थानों को हटवाने का आदेश जारी करेगी। उन्होंने मुन्नन खाँ के नाम पर चौराहे या अन्य स्थलों के नाम को दुर्भाग्यपूर्ण करार दिया। बकौल राकेश वर्मा मुन्नन खाँ का जीवन सिर्फ और सिर्फ अपनी कौम के कट्टरपंथी तत्वों की साम्प्रदायिक राजनीति करने में बीता है, ऐसे में उनके नाम पर गाँव या चैराहा होना सभ्य समाज को सही संदेश नहीं देता।
मुन्नन खाँ चौराहा था और रहेगा भी
ऑपइंडिया ने मुन्नन खाँ चौराहे पर मौजूद गुटका-सिगरेट आदि बेचने की दुकान चला रहे एक व्यक्ति से बात की। दुकान पर चाँद-तारे वाली झालर लटक रही थी। हमने दुकानदार से पूछा कि क्या इस चौराहे का नाम बदल गया? तब दुकानदार का जवाब था, “यह मुन्नन खाँ चौराहे के नाम से मशहूर है और मुन्नन खाँ के ही नाम से रहेगा। कोई कुछ भी कहे, उससे क्या फर्क। कहने को कोई कुछ भी कहता रहेगा।”
मुन्नन खाँ के घर के ठीक सामने पंचर बनाने वाले एक अन्य दुकानदार ने हमें बताया कि मुन्नन खाँ चौराहे का नाम बदलने की बातें अफवाह हैं और ये जगह अभी भी मुन्नन खाँ चौराहा ही है।
गुटका सिगरेट बेचने वाले दुकानदार के मुताबिक नहीं बदल सकता मुन्नन खाँ चौराहे का नाम
मुस्लिम वर्ग के लोग भी मुन्नन को मानते हैं अपराधी
मुन्नन खाँ चौराहा पर ऑपइंडिया को मुस्लिम समाज के 2 लोग अलग-अलग समय पर मिले। इसमें से एक का नाम इकबाल है। उन दोनों ने बताया कि मुन्नन खाँ अच्छे आदमी नहीं थे। दोनों ने मुन्नन को आपराधिक छवि वाला बताया।
दोनों ने हालाँकि अपनी सुरक्षा की चिंता दिखाते हुए अपनी पहचान उजागर न करने की अपील की। इकबाल ने कहा, “हम रात में घर जाते हैं। क्या पता किस के मन में क्या चल रहा हो।” इक़बाल ने यह भी माना कि समाजवादी पार्टी की सत्ता में उस क्षेत्र में खूब गुंडागर्दी थी, जिसे योगी सरकार ने खत्म किया है।
बिहार के पूर्णिया जिले में एक मदरसा टीचर पर छात्राओं के साथ छेड़खानी और सहकर्मी महिला शिक्षिका से रेप का आरोप लगा है। आरोपित टीचर का नाम मोहम्मद तहसीन है। तहसीन पर कड़ी कार्रवाई की माँग को ले कर ग्रामीणों ने प्रदर्शन किया है। मोहम्मद तहसीन मदरसे में बने एक कमरे में छात्राओं को ले जा कर मालिश भी करवाता था। इन आरोपों के उलट मदरसे के हेड मौलवी मोहम्मद तहसीन की हिमायत कर रहे हैं। हालाँकि, तहसीन और हेड मौलवी रिश्तेदार बताए जा रहे हैं।
‘न्यूज़ 18’ के मुताबिक, मामला पूर्णिया के श्रीखंड प्रखंड का है। यहाँ के रहीकपुर में मदरसा मिफ्ताऊल ऊलूम है जहाँ मोहम्मद तहसीन सहायक शिक्षक के तौर पर काम करता है। अब इस मदरसे की महिला रसोइया और गाँव के दर्जनों निवासियों ने तहसीन के खिलाफ कार्रवाई की आवाज बुलंद की है। ग्रामीणों का आरोप है कि मोहम्मद तहसीन का मदरसे में ही पढ़ाने वाली एक महिला शिक्षिका के साथ गलत संबंध है। तहसीन के किसी आपत्तिजनक वीडियो के भी वायरल होने का दावा किया जा रहा है।
ग्रामीणों का यह भी आरोप है कि मदरसे में बड़ी उम्र की लड़कियाँ पढ़ने जाती हैं। पढ़ाई के दौरान ही सहायक टीचर मोहम्मद तहसीन उन लड़कियों को मदरसे के ऊपर बने कमरे में ले जाता है और वहाँ उनसे मालिश करवाता है। कई ग्रामीण इसकी शिकायत जिला शिक्षा पदाधिकारी, मदरसा बोर्ड और मदरसे के हेड मौलवी तक को कर चुके हैं। शिकायत में उन्होंने मोहम्मद तहसीन को फ़ौरन हटाने और कानूनी कार्रवाई की माँग उठाई है।
गाँव के मरकूब आलम के मुताबिक, तहसीन की छात्राओं से गलत हरकत की 4-5 बार शिकायतें मिल चुकी हैं। उनका कहना है कि मोहम्मद तहसीन की हरकतों से पढ़ाई का माहौल बिगड़ रहा है और अगर हालत न सुधरे तो लड़कियाँ पढ़ने ही आना बंद कर देंगी।
पूर्णियाँ: मदरसे के शिक्षक पर लड़कियों से छेड़खानी और महिला से दुष्कर्म का आरोप, मदरसा शिक्षक के खिलाफ ग्रामीणों ने जमकर किया हंगामा। #PURNEApic.twitter.com/XIcmQ9jzrO
वहीं अपने ऊपर लगे आरोपों को मोहम्मद तहसीन ने झूठा करार दिया है। वो ग्रामीणों के विरोध को खुद को हटाने की साजिश बता रहे हैं। मदरसे के हेड मौलवी मोहम्मद एजाजुल भी लगाए गए आरोपों को सही नहीं मानते। हालाँकि, उन्होंने मिले शिकायती पत्र पर जाँच कर के कार्रवाई की बात कही है। वहीं कुछ ग्रामीणों का कहना है कि हेड मौलवी द्वारा तहसीन का पक्ष लेने की वजह दोनों की आपस में रिश्तेदारी होना है।
बंगाल की संदेशखाली घटना पर संसदीय विशेषाधिकार समिति की कार्रवाई को रोकने के लिए ममता सरकार ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजाा खटखटाया था। आज (19 फरवरी 2023) उस पर सुनवाई हुई और सुनवाई के बाद कोर्ट ने कमेटी की कार्रवाई पर अस्थायी रोक लगा दी। साथ ही लोकसभा सचिवालय को इस संबंध में नोटिस भी जारी किया गया। अब मामले की सुनवाई 4 हफ्ते बाद होगी।
इस मामले की सुनवाई भारत के चीफ जस्टिस डी वाई चंद्रचूड़ और न्यायमूर्ति जेबी पारदीवाला व न्यायमूर्ति मनोज मिश्रा की पीठ ने की। वहीं बंगाल सरकार की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल और अभिषेक सिंघवी पेश हुए। सिब्बल ने कहा कि राजनीति गतिविधियाँ कभी भी विशेषाधिकार का हिस्सा नहीं हो सकतीं। दलीलों पर गौर देते हुए पीठ ने संसदीय एथिक्स कमेटी के नोटिस पर ही रोक लगा दी।
Senior Advocate Kapil Sibal mentions before the Supreme Court the WB Govt's plea against Parliament Ethics Committee notices relating to the Sandeshkhali incident in West Bengal.
Parliament Ethics Committee has issued notices to West Bengal senior officials including the Chief…
बता दें कि लोकसभा सांसद सुकांत मजूमदार की शिकायत पर विशेषाधिकार हनन का नोटिस जारी हुआ था। मजूमदार ने शिकायत की थी कि उन्हें संदेशखाली जाने से रोका गया। इसके बाद संसद की आचार समिति ने पश्चिम बंगाल के मुख्य सचिव, राज्य पुलिस के डीजीपी समेत कुछ अन्य वरिष्ठ अधिकारियों को नोटिस जारी किया था। बंगाल सरकार ने इसी एक्शन के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था और कार्रवाई रोने की माँग की थी।
SC issues notice to Lok Sabha Secretariat and others on WB govt plea against Parliament Ethics Committee summons to WB senior officials in the matter relating to Sandeshkhali incident in West Bengal
SC also stays the further proceedings in the matter.
कोर्ट ने जब संसदीय एथिक्स कमेटी के नोटिस पर अस्थायी रोक लगाई तो लोकसभा सचिवालय की ओर से पेश अधिवक्ता ने इसका विरोध किया। उन्होंने कहा, “इन लोगों पर कोई आरोप नहीं लगाया जा रहा। यह एक नियमित प्रक्रिया है। एक बार जब कोई सांसद नोटिस भेजता है और अध्यक्ष को लगता है कि मामले पर गौर करने लायक कुछ है तो नोटिस जारी किया जाता है।”
उन्होंने बताया कि पश्चिम बंगाल के मुख्य सचिव भगवती प्रसाद गोपालिका और पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) राजीव कुमार को लोकसभा सचिवालय ने सोमवार को पेश होने के लिए नोटिस जारी किया था।
राजस्थान के अलवर में बीफ मंडी का खुलासा होने के बाद पूरे थाने को लाइन हाजिर कर दिया गया है। भजनलाल शर्मा के नेतृत्व वाली बीजेपी की प्रदेश सरकार ने 4 पुलिसकर्मियों को सस्पेंड भी किया है। जयपुर रेंज के आईजी उमेश चंद्र दत्त ने खुद मौके पर जाकर पड़ताल की है। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार इस मंडी में हर महीने करीब 600 गाय काटी जाती थी। एक व्हाट्सएप ग्रुप के जरिए करीब 50 गाँवों में गोमांस की होम डिलिवरी हो रही थी। करीब 300 दुकानों में भी गोमांस की सप्लाई होती थी।
बीफ मंडी का खुलासा दैनिक भास्कर के पत्रकार राजकुमार जैन और राधेश्याम तिवारी ने अपनी ग्राउंड रिपोर्ट के जरिए किया था। बताया था कि रोजाना 20 गाय काटकर होम डिलीवरी की जा रही है। इसमें पुलिस की मिलीभगत की बात भी कही गई थी। इस खुलासे के बाद जब पुलिस ने दबिश दी तो गोतस्कर फरार हो गए। उनके वाहनों को जब्त कर लिया गया है। घटनास्थल से कई गायों की खाल और हड्डियाँ बरामद हुई हैं।
दैनिक भास्कर ने रविवार (18 फरवरी 2024) को अलवर के बास थाना क्षेत्र में चल रही इस बीफ मंडी का खुलासा किया था। खुलासे में ऐसे वीडियो सामने आए थे जिसमें बिरसंगपुर के पास रुंध गिदवडा के बीहड़ों में गायों को बेरहमी से मार कर उनकी खाल उतारी जा रही थी। व्हाट्सएप पर मांस के ऑर्डर लेकर घर तक सप्लाई की जाती थी। इस मंडी में सैकड़ों की तादाद में खरीदार भी आते थे। गोकशी की यह मंडी करीब 10 किलोमीटर क्षेत्र में फैली हुई है।
यह खबर हिंदू सनातनी भाइयों के लिए पीड़ादायक है। विधायक कह रहे है कि पुलिस पैसे लेती है। विधायक कांग्रेस से जुड़े होने के कारण इस मुद्दे को विधानसभा में नहीं उठाया गया क्योंकि उन्हें अपने वोट बैंक की चिंता थी। इन गोवंश को काटकर बेचने वालों के खिलाफ कार्रवाई सुनिश्चित हो।#alwarpic.twitter.com/mdEl94PPXl
रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया था कि बीफ मंडी की जानकारी होने के बाद भी पुलिस कोई कार्रवाई नहीं करती। खुलासे के बाद भजनलाल सरकार ने संज्ञान लिया। जयपुर रेंज के IG उमेश चंद्र दत्त के नेतृत्व में बास इलाके के उन बीहड़ों में छापेमारी की गई, जहाँ गोकशी होने का दावा किया गया था। सूचना सही पाई गई। पुलिस को देख कर गोतस्कर अपने वाहन छोड़ फरार हो गए।
IG ने ASI ज्ञानचंद, बीट सिपाही स्वयं प्रकाश और रविकांत के साथ हेड कॉन्स्टेबल रघुवीर को सस्पेंड कर दिया गया है। इसी के साथ थाना प्रभारी दिनेश मीणा सहित बास थाने के 38 स्टाफ को लाइन हाजिर कर दिया गया।है कुछ रिपोर्ट्स में यह भी दावा किया गया है कि अलवर के 60 किलोमीटर के इलाके में कई जगहों पर बीफ बिरयानी बेची जा रही थी। गोतस्कर गायों का माँस, हड्डी और खाल बेच कर हर माह लगभग 4 लाख रुपए तक की कमाई कर रहे थे।
अब बीफ मंडी चलाने वालों को चिन्हित कर कर कार्रवाई की जा रही है। अब तक 25 आरोपितों को गोकशी की FIR में नामजद किया गया है। बीफ मंडी में मिली लगभग 1 दर्जन बाइकों सहित 1 पिकअप जीप को बरामद कर सीज कर दिया गया है।
भारत की मीडिया की एक विशेषता है, जब भी किसी आतंकी के बारे में कुछ खबर आती है तो उसके ‘मानवीय पक्ष’ को ज़रूर खँगाला जाता है। बड़े से बड़े आतंकवादी को व्हाइटवॉश करने की कला भारत की मीडिया के पास है। ‘The Quint’ के लिए अलकायदा का संस्थापक ओसामा बिन लादेन ‘एक अच्छा पिता और पति’ बन जाता है, तो वहीं बरखा दत्त के लिए कश्मीर के आतंकी बुरहान वानी ‘प्रधानाध्यापक का बेटा’ हो जाता है। हर आतंकी के इस पक्ष को बेचने की कला भारत की मीडिया के पास है।
वैसे ये ट्रेंड नया नहीं है। हमने फिल्मों में देखा है कि कैसे कोई पुलिस अधिकारी किसी बड़े आतंकी के पीछे लगा रहता है, आतंकी एक के बाद एक वारदातों को अंजाम देता चला जाता है, फिर उसके इतिहास को सामने लाया जाता है कि आखिर वो आतंकी कैसे बना, इसके लिए सरकार या हिन्दू समाज को दोषी ठहरा दिया जाता है और उन्हें पश्चाताप से भरने की कोशिश की जाती है, फिर वो पुलिस अधिकारी भी ये कहानी सुन कर रोता है – इस तरह आतंकी के व्हाइटवॉश की प्रक्रिया पूरी होती है।
ताज़ा मामला उत्तर प्रदेश का है और इस बार किसी आतंकी के ‘दर्द’ को दिखाने का बीड़ा देश के सबसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में से एक ‘टाइम्स ऑफ इंडिया (TOI)’ ने उठाया है। हुआ यूँ कि मुजफ्फरनगर पुलिस ने इमराना बेगम नाम की एक 60 वर्षीय महिला को गिरफ्तार किया। गिरफ़्तारी का कारण – वो पूरे शहर को दहलाना चाहती थी और इसके लिए उसने जावेद नामक एक शख्स के पास कई टाइम बम भी रखे हुए थे। उसने बड़ी मात्रा में टाइम बम का ऑर्डर दिया था। आइए, बताते हैं कि मामला क्या है।
मुजफ्फरनगर: इमराना बेगम ने ऑर्डर किया टाइम बम
इमराना बेगम को रविवार (18 फरवरी, 2024) को गिरफ्तार किया गया था। इमराना बेगम शामली की रहने वाली है। उसने जावेद नामक शख्स को टाइम बम बनाने का टास्क दिया था। जावेद ने यूट्यूब पर वीडियो देख-देख कर टाइम बम बनाना सीखा और फिर उसने कई बम बना डाले। बम के साथ टाइमर भी उसने बनाया था। लेकिन, गुरुवार (15 फरवरी, 2024) को मजफ्फरनगर की काली नदी के पास से यूपी STF (स्पेशल टास्क फ़ोर्स) को उसे दबोचने में कामयाबी मिली।
जावेद इमराना के किसी परिचित का बेटा था और इमराना को पता था कि वो विस्फोटक बना सकता है। जावेद पहले भी ये काम कर चुका था। इमराना का कहना है वो भविष्य में अगर कोई दंगा हो तो अपनी सुरक्षा के लिए ये सब कर रही थी। IED बनाने के लिए उसने जावेद को 10,000 रुपए एडवांस में दिए थे। डिलीवरी के समय 40,000 रुपए और भुगतान करने का वादा किया गया था। हालाँकि, डिलीवरी के दौरान ही वो पकड़ा गया।
इमराना बेगम को IPC की धारा 286 और विस्फोटक अधिनियम की धारा 4/5 के तहत जेल भेज दिया गया है। आगे की पूछताछ के लिए उसे पुलिस की हिरासत में लिया जाएगा। क्योंकि, टाइम बम बनाने के पीछे क्या मकसद था इस संबंध में उसने जो कुछ भी बताया है उसकी पुष्टि करनी आवश्यक है। जावेद और उसका बेटा जरीफ पटाखा बनाने का काम करते थे। उसने 10 बम का ऑर्डर दिया था, लेकिन 5 ही बन सके थे। एक दशक पहले भी इमराना ने बम बनाने का ऑर्डर दिया था।
TOI को दिखा इमराना का ‘घाव’
अब इस घटना पर ‘टाइम्स ऑफ इंडिया (TOI)’ की खबर का शीर्षक देखिए, ‘2013 के दंगों से आहत 60 वर्षीय महिला ने टाइम बम का ऑर्डर दिया, गिरफ्तार’। TOI ने अपने शीर्षक में ये बताना ज़रूरी समझा कि उक्त महिला ‘घाव से पीड़ित’ है और वो ‘घाव’ है 2013 के दंगों का। महिला का कहना है कि उन दंगों में उसका घर जला दिया गया था और इसीलिए वो अपनी सुरक्षा के लिए ये बम बनवा रही थी। जबकि मीडिया रिपोर्ट्स में ये भी बताया गया है कि वो हिन्दुओं से बदला लेना चाहती थी।
जावेद के कुछ रिश्तेदार नेपाल में भी रहते हैं, ऐसे में आतंकनिरोधी दस्ता (ATS) भी इस मामले की जाँच कर रहा है। इसके तार कहाँ से जुड़ेंगे, अभी जाँच में सामने आएगा। लेकिन, मीडिया एक बार फिर से अपने धंधे की विशेषता दिखाने में लग गया है। कहने का तात्पर्य ये है – ‘हिन्दुओं ने महिला का घर जलाया, इसीलिए पीड़ित महिला अपनी सुरक्षा के लिए टाइम बम बनवा रही थी।’ क्या टाइम बम आत्मरक्षा का हथियार है? IED जैसे खतरनाक विस्फोटक का आत्मरक्षा के लिए इस्तेमाल किए जाने का कोई उदाहरण है अपने पास?
TOI को दिखा इमराना का ‘घाव’
खासकर के इस खतरनाक विस्फोटक का इस्तेमाल कर के 10 टाइम बम बनाने का ऑर्डर देना, ये तो कहीं से भी आत्मरक्षा के लिए किया गया काम नहीं लगता। जाँच में चीजें सामने आएँगी, लेकिन अभी तो ऐसा ही लगता है कि इमराना बेगम हिन्दुओं से बदला लेना चाहती थी, खुन्नस पाले बैठी थी। हल्द्वानी में हमने देखा कि कैसे मुस्लिमों के छतों से पत्थर चले, पत्थरबाजों में बच्चों से लेकर महिलाएँ तक शामिल थीं। जाँच तो इसकी भी होनी चाहिए कि मुजफ्फरनगर दंगों में इमराना बेगम की क्या भूमिका थी, कहीं उसका घर लॉन्चपैड तो नहीं था?
मुजफ्फरनगर दंगों में क्या हुआ था
अगस्त-सितंबर 2013 में हुए मुजफ्फरनगर के दंगों से उत्तर प्रदेश में हालात ऐसे बिगड़े थे कि भारतीय सेना को तैनात करना पड़ा था। तब राज्य में अखिलेश यादव मुख्यमंत्री थे, समाजवादी पार्टी की सरकार थी। इस घटना में अधिकतर जाट हिन्दू समाज के लोग ही पीड़ित थे। कवाल गाँव में मुस्लिमों द्वारा जाट लड़कियों से छेड़खानी के बाद ही ये मामला शुरू हुआ था। ममेरे भाइयों सचिन और गौरव की हत्या के साथ दंगे भड़के थे, इसमें हिन्दू समाज का क्या दोष था?
क्या आपको पता है कि जहाँ सचिन के शरीर पर पोस्टमॉर्टम के दौरान 17 और गौरव के शरीर पर 15 गहरे घाव मिले थे? उनकी हत्या निर्मम तरीके से की गई थी। गोली या धारदार हथियारों का इस्तेमाल नहीं किया गया था, बल्कि लाठी-डंडों से पीटा गया था, सिर और मुँह को पत्थरों से कुचला गया था और सरिये से मार-मार कर मौत के घाट उतार दिया गया था। जाहिर है, फिर दो पक्ष दंगों में भिड़ते हैं तो क्षति हर तरफ से होती है। मुजफ्फरनगर हो, मेवात हो, या हल्द्वानी हो – हर जगह हमने इस्लामी भीड़ को समान पैटर्न पर काम करते देखा है।
90 के दशक में कश्मीरी पंडितों के साथ जो हुआ, उसके बाद उनमें से एक भी आतंकी क्यों नहीं बना? उनकी महिलाओं से बलात्कार हुआ, निर्मम हत्याएँ हुईं और पलायन के बाद वो अपने ही देश में शरणार्थी बन गए, लेकिन उनके पास से टाइम बम क्यों नहीं मिलते? मीडिया आखिर हर आतंकी, पत्थरबाज, बमबाज या अपराधी को व्हाइटवॉश करने के लिए कहानियाँ लेकर क्यों आता है? क्या इसका मकसद होता है कि लोगों में उसके प्रति सहानुभूति पैदा की जाए।
उत्तराखंड के हल्द्वानी की सोनी बिष्ट हिम्मत हार मान चुकी महिलाओं के लिए मिसाल बनकर उभरी हैं। हाल में हल्द्वानी की सोनी ने सर्विस सिलेक्शन बोर्ड का साक्षात्कार क्लियर किया और अब वह सेना में लेफ्टिनेंट पोस्ट पर भर्ती होने जा रही हैं। उनका सिलेक्शन ऑफिसर्स ट्रेनिंग अकैडमी में हुआ है।
सोनी बिष्ट की लेफ्टिनेंट बनने की कहानी इसलिए इतनी खास है क्योंकि छोटी उम्र में तमाम दुख देखने के बाद उन्होंने यह मुकाम हासिल किया। उनके पति नीरज सिंह भंडारी 18 कुमाऊँ रेजीमेंट में तैनात थे। दिसंबर 2022 में उनके पति सिपाही नीरज सिंह भंडारी की एक एक्सीडेंट में मौत हो गई। सोनी इस दुख से उभरतीं कि इसके बाद उनकी को माँ हार्ट अटैक आ गया। दो झटकों के बाद सोनी के दुख कम नहीं हुए और कुछ समय बाद उनके छोटे भाई को भी लकवा मार गया।
सोनी की पूरी कहानी इंडियन एक्सप्रेस पर प्रकाशित हुई है। इसमें बताया गया है कि कैसे तीन घटनाएँ एक के बाद एक होने से सोनी बिष्ट एकदम टूट गई थीं। लेकिन जब वो अपनी डॉक्यूमेंटेशन काम के लिए गईं तो कुछ लोग उन्हें ऐसे मिले जिन्होंने उनकी हिम्मत बढ़ाई और पोस्ट पर अप्लाई करने के लिए प्रोत्साहित किया।
उनके पिता सूबेदार कुंदन सिंह ने भी इस संघर्ष में सोनी का बहुत साथ दिया। पिता ने कुछ पूर्व अधिकारियों से बात की और सोनी को तैयारी कराने को कहा। सबसे मिलकर बात करके सोनी की हिम्मत बढी। फिर उनके पति के एक कमांडिंग ऑफिसर ने उन्हें सेना के जवानों की विधवा वाले स्पेशल कोटा से ओटीए चेन्नई में अप्लाई करने को कहा। वहीं रिटायर्ड सेना के अधिकारी मेजर जनरल यश मोर ने उनकी एसएसबी इंटरव्यू की पूरी तैयारी करवाई।
वहीं पिता ने अधिकारियों की टीम के साथ मिलकर उनकी ग्रुप टास्क, साइकोलॉजिकल असेसमेंट और फिजिकल ट्रेनिंग करवाई। सोनी कहती हैं कि ऐसी वैकेंसी के लिए तैयारी करना आसान नहीं था जिसमें हर कोई कोटा से अप्लाई करें। उन्होंने बताया- “इस पोस्ट के लिए इंटरव्यू भी आसान नहीं था। लेकिन मेरी किस्मत थी कि मुझे इतने अच्छे लोगों से गाइडेंस मिली और चयन ओटीए के लिए हो गया।”
बता दें कि अब जल्द ही सोनी की ट्रेनिंग शुरू होगी और वह लेफ्टिनेंट बनकर उन सभी लोगों का सिर गर्व से ऊँचा करेंगी जिन्होंने उनका यहाँ तक पहुँचने में साथ दिया। सोनी कहती हैं कि उनके घरवालों के साथ उनके ससुराल के लोग भी बहुत सपोर्टिव हैं। सिलेक्शन की खबर सुनकर सब लोग रोने लगे थे।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने उत्तर प्रदेश के संभल में वैदिक पूजन के साथ कल्किधाम की आधारशिला रखी। इस मौके पर यहाँ उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और कल्किधाम ट्रस्ट के अध्यक्ष आचार्य प्रमोद कृष्णम मौजूद रहे। यहाँ बड़ी संख्या में संत-महात्मा भी मौजूद रहे।
ट्रस्ट के अध्यक्ष आचार्य प्रमोद ने प्रधानमंत्री को कुछ दिन पहले इस धाम की आधारशिला रखने और भूमिपूजन करने के लिए आमंत्रित किया था, जिसे उन्होंने स्वीकार किया था। सोमवार (19 फरवरी, 2024) को यह पूजन सम्पन्न हो गया। अब विधिवत तरीके से धाम का निर्माण चालू होगा।
#WATCH | Uttar Pradesh: Prime Minister Narendra Modi lays the foundation stone of Hindu shrine Kalki Dham in Sambhal.
Uttar Pradesh CM Yogi Adityanath and Shri Kalki Dham Nirman Trust Chairman Acharya Pramod Krishnam also present. pic.twitter.com/sTJk2FPEYc
प्रधानमंत्री के भूमिपूजन करने के बाद उन्हें आचर्य प्रमोद कृष्णम और राम मंदिर जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष स्वामी अवधेशानंद गिरी ने अंगवस्त्र पहना कर सम्मानित किया। पीएम मोदी को इस दौरान कल्किधाम का एक मिनिएचर मॉडल भी दिया गया। इस आयोजन में 11,000 साधु संत शामिल हुए हैं।
संभल में बनाया जा रहा यह कल्किधाम भगवान विष्णु को समर्पित है। यहाँ उनके दशावतारों की प्राण-प्रतिष्ठा की जाएगी। यहाँ इन दसों अवतारों के लिए दस गर्भगृह का निर्माण होगा। इसका निर्माण उसी गुलाबी पत्थर से हो रहा है, जिसका उपयोग अयोध्या के राम मंदिर और गुजरात के सोमनाथ मंदिर के निर्माण में किया गया है। बताया गया है कि इस मंदिर में कहीं भी लोहे और स्टील का इस्तेमाल नहीं होगा। मंदिर का शिखर 108 फीट ऊँचा होगा। आचार्य प्रमोद कृष्णम ने इसके निर्माण को लेकर आई समस्याओं के विषय में भी पहले बात की थी।
इस पूरे कल्किधाम का क्षेत्रफल लगभग 5 एकड़ है। यहाँ पहले से एक कल्कि मंदिर बना हुआ है जहाँ भगवान कल्कि की एक मूर्ति स्थापित है। कहा जाता है कि यहाँ मूर्ति के नीचे जो वाहन के रूप में घोड़ा है, उसका एक पैर हवा में है। बताया जाता है कि समय के हिसाब से यह पैर नीचे झुक रहा है।
कल्किधाम के भूमिपूजन के मौके पर सीएम योगी और पीएम मोदी ने जनसभा को संबोधित भी किया। सीएम योगी ने इस दौरान पीएम के राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा, UAE में मंदिर के उद्घाटन और अब संभल के इस धाम को लेकर कहा कि यह नया भारत है। उन्होंने कहा कि नए भारत में युवा की आजीविका और आस्था, दोनों की गारंटी है, यही मोदी की गांरटी है।
#WATCH | At the foundation stone laying ceremony of Hindu shrine Kalki Dham in Sambhal, Uttar Pradesh CM Yogi Adityanath says, "In the last 10 years, we have seen a new Bharat… The country is moving ahead on the path of development in the new Bharat…" pic.twitter.com/fjSfnwyLpa
सीएम योगी ने आरोप लगाया कि इससे पहले ना ही लोग आस्था का सम्मान कर पाए और ना ही आजीविका दे पाए। उन्होंने संभल में किए गए विकास कार्यों की भी चर्चा यहाँ पर की। सीएम योगी ने कहा कि भगवान कल्कि ज़रूर अवतार लेंगे और इस धरती पर सनातन की फिर से स्थापना होगी।
प्रधानमंत्री मोदी ने इस दौरान कहा कि यह मौक़ा 18 वर्षों के बाद आया है, ऐसे में मुझे लगता है कि सारे अच्छे काम मेरे लिए ही छोड़े गए हैं। उन्होंने छत्रपति शिवाजी महाराज की जयंती का जिक्र करते हुए वर्तमान समय को सांस्कृतिक उदय का समय बताया।
प्रधानमंत्री मोदी इस दौरान बोले, “अभी जब वह स्वागत प्रवचन के दौरान बोल रहे थे तब उन्होंने कहा कि मेरे पास भावना के अलावा देने के लिए कुछ नहीं है, अच्छा हुआ आचार्य जी आपने कुछ दिया नहीं, अगर आज के समय में भगवान कृष्ण सुदामा को एक पोटली में चावल देते तो फोटो निकल आती की भगवान कृष्ण ने भृष्टाचार किया, सुप्रीम कोर्ट में PIL हो जाती।”
#WATCH | UP: At the foundation stone laying ceremony of the Hindu shrine Kalki Dham in Sambhal, PM Modi says "…He (Acharya Pramod Krishnam) said that everyone has something to give but I have nothing, I can only express my feelings. Pramod ji, it is good that you did not give… pic.twitter.com/j5tYbQv2Q0
प्रधानमंत्री मोदी ने राम मंदिर और अबूधाबी में स्वामीनारायण मंदिर को लेकर कहा कि यह सांस्कृतिक गौरव का पल है। प्रधानमंत्री मोदी ने इस दौरान केदारनाथ मंदिर, सोमनाथ, काशी विश्वनाथ में किए गए विकास कार्यों का जिक्र किया। उन्होंने इसे विकास और विरासत को साथ लेकर चलना बताया और कहा कि समय का चक्र घूम गया है।
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि आचार्य प्रमोद ने पिछली सरकारों से कल्किधाम के लिए लड़ाई लड़ी है। उन्होंने बताया कि भाजपा सरकार के अंतर्गत वह मंदिर का निर्माण कर रहे हैं। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि वह राष्ट्ररूपी मंदिर का निर्माण कर रहे हैं। उन्होंने चंद्रयान, नमो भारत, वन्दे भारत और अर्थव्यवस्था को लेकर भी बात की।
बंगाल के उत्तर 24 परगना के संदेशखाली गाँव में महिलाओं के उत्पीड़न मामले पर सुप्रीम कोर्ट में आज (19 फरवरी 2024) सुनवाई होगी। याचिका में माँग की गई है कि मामले की जाँच बंगाल के बाहर हो और पीड़ितों को मुआवजा मिले। इसके साथ ही राज्य पुलिस पर भी कार्रवाई की माँग इस याचिका में है।
इस बीच खबर आई है कि पुलिस ने जहाँ पूरा विवाद बढ़ने पर मामले के आरोपित शिबू हाजरा को गिरफ्तार किया है, वहीं संदेशखाली की जिस पीड़िता ने उसके खिलाफ बयान दिया था उसके घर भी हमला हुआ। हैरानी की बात ये है कि जिन लोगों ने हमला किया उन्हें लेकर कहा जा रहा है कि उन्होंने पुलिस यूनिफॉर्म पहनी हुई थी।
पीड़िता पर यह हमला मजिस्ट्रेट के सामने यौन हमले पर बयान दर्ज कराने के बाद हुआ। उसे अब डर है कि अगर अतिरिक्त पुलिस बल और प्रशासन के लोग क्षेत्र से जाएँगे तो उस पर फिर जानलेवा हमला होगा। उसके अनुसार, शनिवार को हमलावर उसकी हत्या के इरादे से आए थे। उन्होंने पीड़िता के ससुर को धमकाया भी था।
द न्यू इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार महिला ने कहा, “मैंने अपनी दोनों बेटियों को अपने रिश्तेदार के घर भेज दिया। शाहजहाँ के दो गुर्गों शिबू प्रसाद हाजरा और उत्तम सरदार के खिलाफ गवाही देने के बाद हमले के डर से मैं छिपी हुई थी। मेरी सबसे छोटी बेटी मेरे बुजुर्ग ससुर के साथ घर पर थी क्योंकि मेरे पति ने भी एक रिश्तेदार के घर में शरण ली है। पुलिस की वर्दी में आए हमलावरों ने दावा किया कि वो स्पेशल पुलिस फोर्स से हैं। इसके बाद उन्होंने छप्पर की दीवार पर लगातार मार-मार कर एक गड्ढा खोदा और फिर मेरी बेटी और उसके दादा को मारने के लिए उसमें छड़ी डाल दी।”
महिला ने बताया कि उसके साथ उत्पीड़न 5 माह पहले हुआ था। पीड़िता से कहा गया था कि वो रात में मीटिंग अटेंड करने जाए। वहीं उसके साथ ये सब हुआ था। अब शिकायत करने पर उसके घर पर हमला हुआ है। स्थानीय भी भयभीत हैं। उन्हें तसल्ली थी तो सिर्फ इतनी कि TMC गुंडों की गिरफ्तारी हो रही है। इस खबर को सुन वह लोग खुश थे। लेकिन फिर पीड़िता के घर पर यह अटैक हुआ और डर फिर पसर गया।
बता दें कि बशीरहाट सबडिविजन में पीड़िता का बयान दर्ज होने के बाद शिबू हाजरा को आठ दिन की पुलिस हिरासत में भेजने की खबर आई थी। उसकी गिरफ्तारी एक दिन पहले ही हुई थी। उस पर यौन उत्पीड़न करने और स्थानीयों की जमीन हड़पने के आरोप हैं। वहीं मामले में दूसरा आरोपित उत्तम सरदार पहले से हिरासत में है।
वहीं मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने इस मामले में कहा है कि तिल को ताड़ बनाया जा रहा है। वह बोलीं कि कुछ समय पहले संदेशखाली में एक घटना घटी। पहले ईडी की टीम को यहाँ भेजा गया। इसके बाद उनके मित्र भाजपा के लोग यहाँ घुसे। फिर तिल का ताड़ बनाया गया। ममता बनर्जी ने कहा, “मैं अफसरों को भेजूँगी, जिनकी जो शिकायत हो बताएँ। अगर किसी ने कुछ लिया है, तो सब कुछ वापस किया जाएगा।”
चंडीगढ़ के मेयर मनोज सोनकर ने 18 जनवरी 2024 को अपने पद से इस्तीफा दे दिया। अब फिर से चुनाव होंगे। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई से पहले इस्तीफा दिया है। नए सिरे से चुनाव से पहले आम आदमी पार्टी (AAP) को तगड़ा झटका लगा है। उसके तीन पार्षद बीजेपी में शामिल हो गए हैं।
AAP के पार्षद नेहा मुसावत, पूनम और गुरचरण काला को बीजेपी महासचिव विनोद तावड़े ने पार्टी की सदस्यता दिलाई। इसके साथ ही नगर निगम में अब बीजेपी का पलड़ा भारी हो गया। बीजेपी के पास अब नगर निगम में 18 पार्षद हो गए हैं। वहीं AAP के पास 10 पार्षद ही रह गए हैं। इसके अलावा कॉन्ग्रेस के पास 7 और शिरोमणि अकाली दल (SAD) के पास 1 पार्षद हैं।
प्रधानमंत्री @narendramodi जी के नेतृत्व में जनकल्याणकारी नीतियों से प्रभावित होकर चंडीगढ़ से आम आदमी पार्टी की पार्षद पूनम देवी, नेहा और गुरचरण काला जी आज दिल्ली में भाजपा में शामिल हुए।
AAP ने उनके साथ धोखा किया है, लेकिन भाजपा उन्हें बिना किसी झूठे वादे के उनकी क्षमता के… pic.twitter.com/5U5RazpN4S
भाजपा की सदस्यता लेने वाले पार्षद गुरचरण काला ने कहा कि AAP ने उनके ऊपर दबाव बनाया था। उन्होंने पीएम मोदी के कामों से प्रभावित होकर भाजपा की सदस्यता लेने की बात कहीं है। नेहा मुसावत ने भी AAP पर इसी तरह के आरोप लगाए हैं।
चंडीगढ़ नगर निगम में मेयर पद का चुनाव 36 पार्षद मिलकर करते हैं। सबसे ज्यादा वोट पाने वाला प्रत्याशी चुनाव जाता है। वर्तमान परिस्थितियों के हिसाब से भाजपा के पास 17 पार्षद, 1 सांसद (चंडीगढ़ मेयर चुनाव में सांसद भी वोटिंग करते हैं) और SAD के इकलौते पार्षद का समर्थन है। वहीं आप और कॉन्ग्रेस को मिलाकर भी मात्र 17 ही वोट होते हैं। ध्यान देने वाली बात यह भी कि नए राजनीतिक समीकरणों के आधार पर AAP को कॉन्ग्रेस का समर्थन मिलना मुश्किल लग रहा है, क्योंकि उसने हाल ही पंजाब-चंडीगढ़ का लोकसभा चुनाव अकेले लड़ने का ऐलान किया है।
इस मामले पर आज (19 फरवरी, 2024) सुप्रीम कोर्ट में भी सुनवाई होगी। पिछली बार यहाँ भाजपा के मनोज सोनकर को 30 जनवरी को हुए मतदान में मेयर चुना गया था। इस चुनाव में आम आदमी पार्टी और कॉन्ग्रेस के गठबंधन ने धांधली के आरोप लगाए थे। इसी को लेकर उन्होंने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में चुनाव अधिकारी अनिल मसीह को तलब किया था, जिन पर गड़बड़ी के आरोप लगाए गए थे।
मनोज सोनकर के इस्तीफे पर भाजपा का कहना है कि उनके चुने जाने के बाद से लगातार विपक्ष हो हल्ला कर रहा था और शहर को ठीक से चलने नहीं दे रहा था। मनोज सोनकर ने इसलिए इस्तीफ़ा दे दिया। AAP ने पिछले चुनाव में मनोज सोनकर के सामने कुलदीप ढलोर को उतारा था, जिनको हार का मुँह देखना पड़ा था।