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जिस फुरकान की मौत के लिए यूपी पुलिस को जिम्मेदार बता रहा ओवैसी एन्ड गिरोह, वो बीमारी के कारण करा रहा था झाड़-फूँक

सोशल मीडिया पर सोमवार (19 फरवरी, 2024) को एक खबर तेज़ी से वायरल हो रही है। यह खबर शामली में फुरकान उर्फ़ भूरा नाम के युवक की मौत से जुड़ी है। AIMIM पार्टी के मुखिया असदुद्दीन ओवैसी सहित तमाम इस्लामी हैंडल इस मामले में उत्तर प्रदेश पुलिस को निशाना बना रहे हैं। झूठी खबरों के लिए कुख्यात ‘बोलता हिंदुस्तान’ जैसे हैंडलों ने तो इसे पुलिस कस्टडी में हुई मौत करार दे दिया है। ऑपइंडिया ने इस मामले की ग्राउंड लेवल से पड़ताल की।

लगातार भ्रामक खबरों के लिए कुख्यात ‘बोलता हिंदुस्तान’ ने इस खबर को अपने पारम्परिक अंदाज़ में परोसा है। कैप्शन के तौर पर लिखा, “शामली में ‘फरमान’ को थाने ले गई पुलिस। परिजनों का आरोप – 1 घंटे बाद लाश घर फेंकी, पूरे शरीर में निशान।” इसी ट्वीट के नीचे कॉन्ग्रेस नेता राहुल काजल ने तंज कसते हुए लिखा कि ये ‘अमृत काल’ चल रहा है।

AIMIM के मुखिया असदुद्दीन ओवैसी ने अपनी पार्टी के नेता शौकत अली के ट्वीट को शेयर करते हुए फुरकान के लिए मुआवजा माँगा है। ओवैसी ने UP के DGP से पुलिस वालों की गिरफ्तारी तक की माँग उठाई है और पुलिस पर अपराध करने का आरोप लगाया है। जबकि शौकत अली ने आरोप लगाया है कि चौकी इंचार्ज विनय सिंह अपने साथी सिपाहियों के साथ फुरकान को अपने साथ ले गए और बाद में उसकी लाश घर वापस कर देते हैं।

हल्द्वानी हिंसा पर भी कई आधारहीन ट्वीट करने वाली सदफ आफरीन ने इस मामले में भी इंट्री की है। सदफ ने कस्टडी मौतों में UP पुलिस को पहले नंबर पर बताते हुए फुरकान को बेरहमी से पीटने का आरोप लगाया है।

थाने तक गया ही नहीं था फुरकान

सोशल मीडिया पर चल रहे इस हंगामे के बीच शामली पुलिस का बयान आया है। तमाम भ्रामक दावों का खंडन करते हुए शामली पुलिस ने साफ कहा है कि मृतक फुरकान थाने पर गया ही नहीं था। पुलिस के बयानों के मुताबिक, बिड़ौली चौकी के स्टाफ अदालत का वारंट तामील करवाने 18-19 फरवरी की रात फुरकान के गाँव में गए थे। पुलिस को फारुख नाम के वॉरंटी की तलाश थी। पुलिस फारुख की तलाश में जुटी थी कि इसी दौरान उसके ही परिवार के 34 साल के फुरकान की तबीयत खराब होने लगी। थोड़ी देर बाद फुरकान की मौत हो गई।

पहले से बीमार रहता था फुरकान

अपने आधिकारिक बयान में शामली पुलिस ने यह भी दावा किया है कि फुरकान पहले से बीमार रहता था। हालाँकि, फुरकान के घर वालों द्वारा पुलिस पर लगाए गए प्रताड़ना के आरोपों के बाद मृतक का शव पोस्टमॉर्टम के लिए भेजा गया है। मेडिकल रिपोर्ट आने के बाद फुरकान के घर वालों द्वारा लगाए गए आरोपों की असलियत बाहर आ पाएगी। फ़िलहाल पूरे मामले की विस्तृत जाँच के लिए एडिशनल एसपी को निर्देशित किया जा चुका है।

झाड़-फूँक से चल रहा था इलाज

ऑपइंडिया ने स्थानीय स्तर पर इस मामले की जानकारी जुटाई। नाम न छापने की शर्त पर एक स्थानीय निवासी ने बताया कि वॉरंटी फारुख की तलाश में गाँव में गई पुलिस को देख कर एक युवक भागने लगा। पुलिस को उस युवक के भागने पर शक हुआ तो उसका पीछा किया गया। पीछा करने पर वहाँ फुरकान मिला। पूछताछ करने पर फुरकान हड़बड़ाने लगा। फारुख के न मिलने पर पुलिस वहाँ से लौट गई। दावा है कि फुरकान अपने ही घर में रुका रहा।

बाद में लगभग 1 से डेढ़ घंटे बाद उसकी मौत हो गई। बताया यह भी गया कि फुरकान के परिजन उसका लम्बे समय से झाड़-फूँक के सहारे से इलाज करवा रहे थे। हालाँकि, मामले की जाँच शामली के एडिशनल एसपी कर रहे हैं। जल्द ही पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट भी आने वाली है। इसके बाद फ़ुरक़ान की मौत के असल कारणों से पर्दा हट जाएगा।

झिंझाना में पुलिस पर हुए हैं हमले

जिस झिंझाना थाना क्षेत्र का यह मामला बताया जा रहा है वहाँ पहले पुलिस पर कई बार हमले हो चुके हैं। अक्टूबर 2018 में यहाँ पुलिस पर हमला कर के एक होमगार्ड की हत्या कर दी गई थी। इस दौरान सरकारी राइफल भी छीन ली गईं थी। लगभग 11 माह पहले यहाँ के गाँव केरटू में अपराधी जबरूद्दीन की तलाश में दबिश देने आई हरियाणा पुलिस पर भी हमला हुआ था। तब भी पुलिस के हथियार छीन लिए गए थे। तब झिंझाना थाने पर 21 नामजदों सहित कुल 40 आरोपितों पर FIR दर्ज हुई थी।

लाइव कैमरे पर ही पत्रकार को पकड़ के ले गई बंगाल पुलिस, संदेशखाली की पीड़िताओं की आवाज़ उठाने की सज़ा: BJP बोली – निरंकुशता का दूसरा नाम ममता बनर्जी

पश्चिम बंगाल में ‘रिपब्लिक बांग्ला’ टीवी न्यूज़ चैनल के पत्रकार सन्तु पान को गिरफ्तार कर लिया गया है। वो नॉर्थ 24 परगना के संदेशखाली में महिलाओं के बलात्कार के आरोपों को लेकर मुखर थे और लगातार रिपोर्टिंग कर रहे थे। संदेशखाली का गुनहगार शाहजहाँ शेख अब तक फरार है। राशन घोटाले में फँसे TMC नेता को पकड़ने गई ED (प्रवर्तन निदेशालय) की टीम पर हमला हुआ था, उसके बाद उसके गुंडों पर यौन शोषण के आरोप लगे। महिलाओं का कहना है कि गुंडे सुंदर स्त्रियों को उठा कर ले जाते थे, फिर ‘संतुष्ट’ होने के बाद छोड़ देते थे।

वीडियो में देखा जा सकता है कि सन्तु पान को लाइव कवरेज के दौरान ही पश्चिम बंगाल पुलिस ने पकड़ लिया। उन्हें दोनों तरफ से 2 पुलिस वालों ने पकड़ा और फिर टोटो (ई-रिक्शा) में बिठा कर ले गए। इस दौरान भी वो लगातार रिपोर्टिंग करते रहे। लोग इस निडर रिपोर्टिंग के लिए उनकी तारीफ़ कर रहे हैं। लोग कह रहे हैं कि गिरफ्तार कर के ई-रिक्शा में बिठाए जाने के बावजूद उन्होंने रिपोर्टिंग नहीं रोकी और कैमरे की तरफ देख कर बोलते रहे।

भाजपा ने भी बंगाल पुलिस की इस करतूत पर कड़ी आवाज़ उठाई है। पार्टी के महासचिव और अंडमान-निकोबार में प्रभारी सत्या कुमार ने कहा कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी निरंकुशता की पर्यायवाची बन गई हैं। उन्होंने बताया कि सन्तु पान परिश्रम पूर्वक संदेशखाली की पीड़ित महिलाओं के लिए आवाज़ उठा रहे थे। उन्होंने पूछा कि आखिर सीएम सच के बाहर आने से इतनी भयभीत क्यों हैं? पश्चिम बंगाल भाजपा ने भी इस कदम की कड़ी निंदा की है।

पश्चिम बंगाल भाजपा ने कहा, “संदेशखाली में महिलाओं के खिलाफ जघन्य अत्याचारों का खुलासा करने वाले बहादुर पत्रकार सन्तु पान को पुलिस के भेष में ममता के गुंडों ने गिरफ्तार कर लिया। यह कायरतापूर्ण कृत्य ममता बनर्जी के शासन क्या है इसके बारे में उजागर करता है। ये एक तानाशाही है जो असहमति को कुचलती है और अपराधियों की रक्षा करती है।” संदेशखाली पहुँचीं NCW अध्यक्ष रेखा शर्मा को पकड़ के कई महिलाएँ रोने लगीं, उन्हें लेकर थाने पहुँच कर शिकायत दर्ज कराई गई।

सरस्वती पूजा पर हमला, भगवान राम का ध्वज नोच कर गटर में फेंका: नेपाल में मस्जिद के सामने से गुजरी यात्रा तो बेकाबू हुई मुस्लिम भीड़, मंदिर में तोड़फोड़

नेपाल के रौतहट जिले में गुरुवार (15 फरवरी, 2024) को हिन्दुओं की प्रतिमा विसर्जन यात्रा पर हमला हुआ था। विवाद की शुरुआत तब हुई जब माता सरस्वती प्रतिमा को नदी में विसर्जित करने जा रही हिन्दुओं की यात्रा ईशनाथ के पास मस्जिद के आगे पहुँची। इस दौरान श्रद्धालुओं के साथ चल रही प्रशासन पर भी पत्थरबाजी हुई। इस घटना के विरोध में हिन्दू संगठनों द्वारा सोमवार (19 फरवरी, 2024) को वीरगंज बंद का ऐलान हुआ था।

इस बंदी में भी मुस्लिम भीड़ नारेबाजी करते हुए सड़कों पर उतर गई। इस दौरान भगवान राम के चित्र वाले भगवा ध्वज को नोच कर गटर में फेंक दिया गया और मंदिर में तोड़फोड़ हुई। प्रभावित इलाकों में प्रशासन ने फ़िलहाल कर्फ्यू लगा दिया है।

नेपाल के संगठन ‘हिन्दू सम्राट सेना’ संगठन के पदाधिकारी कृष्ण कुमार शाह ने ऑपइंडिया से बात की। उन्होंने बताया कि गुरुवार (15 फरवरी, 2024) को रौतहट जिले में हिन्दू समाज माता सरस्वती की प्रतिमा नदी में विसर्जन करने के लिए शांतिपूर्ण ढंग से जा रहे थे। इस यात्रा से पहले एक पीस कमेटी का गठन हुआ था। कमेटी में हिन्दू और मुस्लिम समुदाय के 5-5 सदस्यों को शामिल किया गया था। दोनों पक्षों ने प्रशासन को भरोसा दिया था कि वो अपने-अपने समुदाय के लोगों को समझाएँगे और शाँति बहाल रखेंगे।

जब यह यात्रा वीरगंज नगरपालिका के मुस्लिम बहुल इलाके के पास से गुजरी तभी वहाँ सड़क के किनारे बनी एक मस्जिद पर इसे रोक दिया गया। आरोप है कि मुस्लिम समुदाय के लोगों को मस्जिद के सामने से यात्रा ले जाने पर ऐतराज था। इसी बार पर दोनों पक्षों में तकरार होने लगी। बकौल कृष्ण कुमार, कुछ ही देर में मस्जिद के आसपास बने मुस्लिमों के मकानों से पत्थर चलने लगे। पत्थरबाजी में महिलाएँ और बच्चे भी शामिल थे। इस पथराव की वजह से विसर्जन यात्रा में शामिल नरेश कुमार पासवान और 2 नाबालिग हिन्दू बच्चे घायल हो गए। जुलूस के साथ चल रहे पुलिस के कुछ जवान भी इस हमले की चपेट में आ गए।

‘हिन्दू सम्राट सेना’ पदाधिकारी ने हमें आगे बताया कि पत्थरबाजी की वजह से माता सरस्वती की मूर्ति भी खंडित हो गई। नाराज श्रद्धालुओं ने खंडित मूर्ति के साथ धरना शुरू कर दिया। थोड़े समय बाद प्रशासन दल-बल के साथ मौके पर पहुँचा और हिन्दू समाज के लोगों से मूर्ति को विसर्जित करने की गुजारिश की। इस दौरान अधिकारियों ने हमलावरों पर कड़ी कार्रवाई का भरोसा दिया। कृष्ण कुमार साह हमें आगे बताते हैं कि जब प्रशासन की बात मान कर श्रद्धालु फिर से मूर्ति विसर्जन करने चले तभी फिर से मुस्लिमों के मकानों ने पत्थरबाजी होने लगी।

दोबारा हुई पत्थरबाजी से एक बार फिर से न सिर्फ श्रद्धालुओं बल्कि प्रशासनिक अधिकारियों में भी अफरातफरी मच गई। आखिरकार प्रशासन ने बिना श्रद्धालुओं की मौजूदगी के ही अपनी तरफ से मूर्ति का विसर्जन किया। अपनी विसर्जन यात्रा पर इस हमले से नाराज हिन्दू समुदाय ने प्रशासन से जल्द से जल्द आरोपितों पर कड़ी कार्रवाई की माँग की। इस बीच लगभग 4 दिन बीत जाने पर भी जब किसी की गिरफ्तारी नहीं हुई तो हिन्दू संगठनों ने 19 फरवरी (सोमवार) को वीरगंज बंद का एलान किया।

ऑपइंडिया ने हिन्दू सम्राट सेना के अध्यक्ष राजेश यादव से बात की। उन्होंने हमें बताया कि 19 फरवरी को जब हिन्दू समाज शाँतिपूर्वक बंद का पालन करवा रहा था तब एक बार फिर से इस्लामी भीड़ सड़कों पर उतर आई। भीड़ के पास लाठी-डंडे और अन्य हथियार थे। इसमें सभी उम्र के लोग शामिल थे। इन्होने नारा ए तकबीर और अल्लाह हु अकबर बोल कर सड़कों पर हंगामा किया। इस दौरान इसी हिंसक भीड़ ने वीरगंज के खम्बों पर लगे भगवान् राम के चित्र वाले भगवा ध्वजों को भी नोच कर नालियों में फेंक दिया।

ऑपइंडिया ने इस हिंसक भीड़ की करतूतों के वीडियो शेयर किए हैं।इस दौरान बीरगंज के एक मंदिर में तोड़फोड़ की भी खबर है।

नेपाल की एक महिला पत्रकार किरन जोशी ने अपने X हैंडल पर एक वीडियो शेयर किया है। उनका दावा है कि यह वीडियो बीरगंज में आज हुई हिंसा का है। कैप्शन में उन्होंने 11 सुरक्षाकर्मियों के घायल होने की बात कही है। किरन जोशी द्वारा शेयर वीडियो में हिंसक भीड़ को काबू करने के लिए पुलिस को बल प्रयोग करते देखा जा सकता है। बीच में कुछ काले रंग के पठानी सूट पहने युवक पुलिस से भागते भी दिख रहे हैं।

उन्मादी भीड़ की इस हरकत के बाद जिला प्रशासन ने वीरगंज में कर्फ्यू लगा दिया है। आदेश की परिधि में बीरगंज नगरपालिका क्षेत्र को रखा गया है। अब अगले आदेश तक इस प्रभावित क्षेत्र में किसी को भी रैली, भाषण और बेवजह इधर-उधर आने-जाने की अनुमति नहीं हैं।

बीरगंज कर्फ्यू आदेश

नेपाली प्रधानमंत्री को ज्ञापन भेज कर हिन्दू सम्राट सेना ने इसे सोची-समझी साजिश करार दिया है और 81% हिन्दुओं के देश में बहुसंख्यक समाज की हालत पर चिंता जताई है।

हिन्दू सम्राट सेना द्वारा नेपाली प्रधानमंत्री को भेजा गया पत्र

फ़िलहाल बीरगंज के प्रभावित इलाकों में भारी फ़ोर्स तैनात कर दी गई है। नेपाली पुलिस के साथ वहाँ के अर्धसैनिक बल भी गश्त कर रहे हैं। हिन्दू संगठनों ने उम्मीद जताई है कि जल्द ही हिंसक गतिविधियों में शामिल लोगों को पकड़ा जाएगा। हिन्दू सम्राट सेना के पदाधिकारी कृष्ण कुमार ने हमें बताया कि ऐसी घटना पहली बार नहीं हुई है। चरमपंथियों पर दुर्गा पूजा सहित कुल 7 से अधिक धार्मिक कार्यक्रमों में उन्होंने इस तरफ के व्यवधान डालने का आरोप लगाया

जेल में बंद माफिया मुख़्तार अंसारी के भाई अफजाल को सपा का टिकट, गैंगस्टर एक्ट में सज़ा के बाद रद्द हो गई थी सांसदी: गाजीपुर से फिर लड़ेगा चुनाव

समाजवादी पार्टी ने लोकसभा चुनाव 2024 के लिए अपने प्रत्याशियों की दूसरी सूची जारी कर दी है। इसमें जेल में बंद माफिया मुख़्तार अंसारी के भाई अफजाल अंसारी का भी नाम है, जिसे गाजीपुर क्षेत्र से मैदान में उतारा गया है। मुख़्तार अंसारी को फ़िलहाल बांदा जेल में बंद रखा गया है। मुख़्तार अंसारी इससे पहले जेल में से चुनाव जीत चुका है। 2022 में मऊ विधानसभा क्षेत्र से उसने अपने बेटे अपने बेटे अब्बास को टिकट दिखाया था और वो जीत दर्ज करने में भी कामयाब रहा था।

खुद मुख़्तार अंसारी लगातार 5 बार यहाँ से चुनाव जीत चुका है और 26 वर्षों तक विधायक बन कर बैठा रहा। मुख़्तार अंसारी और अब्बास अंसारी का बड़ा भाई सिबगतुल्लाह अंसारी मोहम्मदाबाद से लगातार 2 बार विधायक रह चुके हैं। अब उनके बेटे सुहैब इस क्षेत्र से विधायक हैं। ताज़ा सूची में अखिलेश यादव ने कई ऐसी सीटों पर भी अपने उम्मीदवार उतारे हैं, जहाँ कॉन्ग्रेस भी खत्म ठोक रही है। ऐसे में अब उत्तर प्रदेश में I.N.D.I. गठबंधन का बुरा हाल होता हुआ दिख रहा है।

सपा ने अब तक यूपी की 80 लोकसभा सीटों में से 27 पर अपने उम्मीदवारों की घोषणा कर दी है। दूसरी सूची ऐसे समय में आई है जब कॉन्ग्रेस पार्टी के पूर्व अध्यक्ष राहुल गाँधी ‘भारत जोड़ो न्याय यात्रा’ लेकर यूपी में ही पहुँचे हुए हैं। इस यात्रा में अखिलेश यादव अब तक शामिल भी नहीं हुए हैं और इसका कारण सीट शेयरिंग में दोनों दलों में अनबन माना जा रहा है। जयंत चौधरी की RLD पहले ही सपा को झटका देकर भाजपा गठबंधन का हिस्सा बन चुकी है, जिसके बाद पश्चिमी यूपी में NDA मजबूत हुआ है।

बताते चलें कि अफजाल अंसारी ने लोकसभा चुनाव 2019 में गाजीपुर से ही भाजपा के मनोज सिन्हा को हराया था। मनोज सिन्हा फ़िलहाल जम्मू कश्मीर के उप-राज्यपाल हैं, तब वो केंद्र में मंत्री हुआ करते थे। अफजाल अंसारी को गैंगस्टर एक्ट के तहत 4 साल की सज़ा सुनाई गई थी। वहीं उसके भाई मुख़्तार को 10 साल की सज़ा सुनाई गई थी। मुख्तार और अफजाल अंसारी की सजा पर कोर्ट के फैसले के बाद कृष्णानंद राय के बेटे पीयूष राय ने कहा था कि उनकी माँ ने कई सालों तक संघर्ष किया है।

‘मणिपुर वाला मामला अलग है’: सुप्रीम कोर्ट ने नहीं मानी संदेशखाली यौन शोषण की जाँच CBI से कराने की माँग, NCW अध्यक्ष को पकड़ कर रोने लगीं

पश्चिम बंगाल के संदेशखाली में TMC नेता शाहजहाँ शेख के आतंक का हाल ही में पर्दाफाश हुआ, जब एक के बाद एक कई महिलाओं ने सार्वजनिक रूप से सामने आकर ये आरोप लगाया कि उसके गुर्गे लड़कियों को उठा कर ले जाते हैं और उनका बलात्कार करते हैं। इसके बाद ‘राष्ट्रीय महिला आयोग’ (NCW) की टीम भी वहाँ जाँच करने पहुँची। वहीं सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले की जाँच CBI/SIT से कराने वाली याचिका पर सुनवाई से इनकार कर दिया है।

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार (19 फरवरी, 2024) को इस याचिका को लौटा दिया। हालाँकि, जस्टिस नागरत्ना और जस्टिस जॉर्ज मसीह की पीठ ने याचिकाकर्ता को स्वतंत्रता दी है कि वो इसके लिए कलकत्ता उच्च न्यायालय का रुख करें। कलकत्ता हाईकोर्ट पहले ही संदेशखाली मामले पर स्वतः संज्ञान ले चुका है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हाईकोर्ट के पास भी अधिकार है कि वो SIT का गठन कर सके, एक ही मामले पर 2 मंचों पर सुनवाई करना ठीक नहीं होगा।

13 फरवरी को ही हाईकोर्ट ने अख़बारों की खबरों के आधार पर स्वतः संज्ञान लेकर सुनवाई शुरू की थी। वहीं मौजूदा याचिका अधिवक्ता अलख आलोक श्रीवास्तव ने दायर की थी, जिसमें उन्होंने कहा कि पुलिस भी पश्चिम बंगाल सरकार से मिली हुई है और TMC नेता शाहजहाँ शेख से मिलीभगत के कारण अपने कर्तव्यों में लापरवाही बरत रही है। उन्होंने बताया कि अधिकतर पीड़िताएँ SC/ST समाज से हैं। मणिपुर मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले की याद दिलाए जाने पर जजों ने कहा कि वो एक अलग मुद्दा है, वो अब भी चल रहा है।

उधर NCW अध्यक्ष रेखा शर्मा ने इलाके में पहुँच कर पीड़ित महिलाओं को ढाँढस बँधाया। उन्होंने कहा कि बहुतों के साथ यौन शोषण हुआ है, 2 रेप केस के बारे में उन्होंने खुद अपने सामने सुना है। उन्होंने बताया कि महिलाएँ पुलिस और समाज के कारण डरी हुई हैं। उन्होंने बताया कि उन्हें पकड़ कर महिलाएँ रो रही थीं, उन्हें छोड़ नहीं रही थीं। कई जवान लड़कियों को वहाँ से बाहर भेज दिया गया है, इस डर से कि कहीं कुछ हो न जाए। कई पीड़िताओं को लेके रेखा शर्मा थाने में पहुँचीं और लिखित में शिकायत दर्ज करवाई।

दारू पीकर म्यांमार से भारतीय द्वीप लूटने आए 10 शिकारी, भूख-प्यास से 6 की मौत, 2 लापता: पुलिस के सामने सरेंडर कर 2 जिंदा बचे

म्यांमार से भारतीय द्वीप नार्कोंडम पर शिकार करने आए 10 म्यांमारी शिकारियों को लेने के देने पड़ गए। बताया जा रहा है कि भारतीय द्वीप पर पहुँचकर इनकी नाव खराब हो गई और फिर वहाँ बीमार पड़ने की वजह से इनमें से 6 की मौत हो गई जबकि 2 लापता हैं और 2 ने पुलिस के आगे हाथ-पाँव जोड़कर अपनी जान बचाई है। पूछताछ में खुलासा हुआ है कि यह लोग द्वीप पर दुर्लभ समुद्री जीव पकड़ने आए थे जिनकी अंतरराष्ट्रीय बाजार में काफी डिमांड होती है। इसके अलावा म्यांमार से भारतीय द्वीप तक आने के बीच क्या-क्या हुआ, इस बारे में भी इन लोगों ने बताया है।

जानकारी के अनुसार, 2 फरवरी 2024 को म्यांमार के अयेयारवदी से शाम को 200 किलो चावल, 1000 लीटर डीजल के साथ 10 शिकारी एक छोटी नाव में निकले थे। इस नाव की कमान मयो ल्विन ओ के हाथ में थी। यह नाव लकड़ी की बनी थी। यह अपनी यात्रा 2 फरवरी से चालू करके 5 फरवरी को खुले समुद्र में आ गए थे। इसके बाद 7 फरवरी को यह म्यांमार के कब्जे वाले कोको द्वीप पहुँचे। यह सभी शिकारी कोको द्वीप में 11 फरवरी तक रुके रहे और इसके बाद वह नार्कोंडम द्वीप के लिए निकले जहाँ यह सभी 12 तारीख को पहुँचे।

पुलिस पूछताछ में पकड़े गए शिकारी ऑंग क्या मिन्ट ने खुलासा किया कि जब वह कोको द्वीप पर थे तब इन्हें कुछ शराब की बोतलें मिली जिन्हें इनमें से कुछ रास्ते भर पीते आए। शराब पीने वालों में इनका मुखिया म्यो ल्विन ओ भी था। इसके बाद यह सभी उलटी सीधी हरकतें करने लगे।

मिन्ट ने बताया शराब के नशे में होने के कारण इन्हें समुद्र का अंदाजा नहीं लगा और जब यह नार्कोंडम पहुँचे तो इनकी नाव एक पत्थर से टकरा गई जिससे इनका राशन खराब हो गया। फिर यहाँ से यह सभी उतर कर अंदर जंगल में जाने लगे। इसके बाद यह सभी अंदर शिकार के लिए तैयार हो गए लेकिन मिन्ट की तबियत बिगड़ने के कारण वह और उसका एक साथी रुक गए और पुलिस के सामने आत्मसमर्पण करने का निर्णय लिया। हालाँकि, इनके बाकी साथी फिर भी आगे शिकार के लिए चले गए।

इसके बाद समर्पण करने वालों को पुलिस अंडमान निकोबार की राजधानी पोर्ट ब्लेयर के अस्पताल में लेकर गई और इलाज करवाया, इनसे जब पूछताछ की गई तो यह कहानी सामने आई। इन्होंने पुलिस के सामने खुलासा किया कि अंदर इनके और भी साथी अभी जंगल में हैं। इसके लिए जब पुलिस और कोस्ट गार्ड की एक टीम भेजी गई तो यहाँ 6 शिकारियों की लाशें मिली। 2 शिकारी अभी भी लापता हैं और उनकी तलाश जारी है। इन 6 शिकारियों की मौत का कारण भूख-प्यास माना जा रहा है। इनका राशन पहले ही खराब हो गया था।

गौरतलब है कि जिस नार्कोंडम द्वीप पर यह शिकारी मृत पाए गए हैं वह म्यांमार के कोको द्वीप से मात्र 126 किलोमीटर दूर है। यह भारत के अंडमान निकोबार द्वीपसमूह का हिस्सा है। कोको द्वीप भी पहले भारत के कब्जे में हुआ करता था जिसे नेहरु ने म्यांमार को दे दिया था। नार्कोंडम द्वीप निर्जन है और यहाँ कोई नहीं रहता। हालाँकि, यह समुद्री संपदा से लदा हुआ है जिसकी अंतरराष्ट्रीय बाजारों में खाने और अन्य कामों के लिए तस्करी होती है। इस कारण से यहाँ म्यांमार से शिकारी आते रहते हैं, कभी वह सुरक्षाबलों की नजर में आ जाते हैं तो कभी बच जाते हैं।

पुलिस ने बताया है कि यह सभी शिकारी अवैध रूप से भारत आए थे, इनके पास कोई भी जरुरी दस्तावेज नहीं थे। इनका मालिक म्यांमार में है जिसने इनकी नाव और बाकी सारा इंतजाम करके दिया था। यहाँ यह समुद्री जीव सी कुकुम्बर और टर्बो स्नेल जैसे जीवों को पकड़ने आए हुए थे, इनकी दक्षिण पूर्वी एशिया में बड़ी माँग है। हालाँकि, यह प्रजातियाँ अभी खतरे में हैं। इस मामले में विदेश मंत्रालय को सूचित कर दिया गया है और इन लाशों का पोस्टमार्टम करवाया जा रहा है।

1 साल की दलित बच्ची को ‘खेलाने’ के लिए ले गया 50 साल का पड़ोसी रहमान, रेप कर किया लहूलुहान: UP पुलिस ने दबोचा

उत्तर प्रदेश के बहराइच में 1 साल की हिन्दू बच्ची से बलात्कार का मामला सामने आया है। पीड़िता को गंभीर हालात में इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती करवाया गया है। भोंदू रहमान नाम के आरोपित की उम्र 50 वर्ष है। पुलिस ने रहमान को गिरफ्तार कर लिया है। प्रशासन द्वारा मामले को फास्ट ट्रैक में चलवाने का भी ऐलान किया गया है। घटना शनिवार (17 फरवरी, 2024) की है। रेप के बाद उसने पीड़िता की माँ को गालियाँ भी बकीं, उन्हें मारने लगा।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह मामला बहराइच के थाना क्षेत्र नानपारा का है। यहाँ शनिवार को पीड़ित परिवार ने पुलिस में अपनी 1 साल की मासूम से रेप किए जाने की शिकायत दर्ज करवाई। शिकायत में बच्ची की माँ ने बताया कि वो दूधमुँही बेटी के साथ सरसों के खेत गई थीं। पीड़िता खेत के बाहर खेल रही थी। इसी दौरान पड़ोस में रहने वाला 50 साल का भोंदू रहमान वहाँ आया। भोंदू ने बदनीयती से बच्ची का मुँह दबा कर उस से जबरन रेप किया। बाद में बच्ची के चीखने की आवाज पर पीड़िता की माँ वहाँ पहुँची।

पीड़िता की माँ को देख कर भोंदू रहमान मौके से भाग निकला। बच्ची लहूलुहान हालात में थी। मामले की सूचना पुलिस को दी गई। पुलिस ने मौके पर पहुँच पर बच्ची को अस्पताल में भर्ती करवाया। पुलिस अधीक्षिका बहराइच वृंदा शुक्ला के निर्देश पर बच्ची को बेहतर इलाज के लिए लखनऊ भेजा गया है। इधर पुलिस ने पॉक्सो एक्ट व अन्य धाराओं में FIR दर्ज कर के फरार चल रहे भोंदू रहमान की तलाश शुरू कर दी। रविवार (18 फरवरी) को भोंदू रहमान को गिरफ्तार कर लिया गया। जिले के तमाम सीनियर अधिकारी पीड़िता के घर पहुँचे।

पुलिस अधीक्षक वृंदा शुक्ला ने ऐलान किया है कि आरोपित का केस फ़ास्ट ट्रैक कोर्ट में चलवाने का प्रयास किया जाएगा। उन्होंने बताया कि बच्ची की हालत खतरे से बाहर है। घटनास्थल से सबूत जुटाए जा रहे हैं। गिरफ्तार आरोपित से पुलिस की पूछताछ जारी है।

ऑपइंडिया ने बच्ची के बाबा से बात की। उन्होंने बताया कि गाँव में सैकड़ों मुस्लिमों के परिवार में महज कुछ घर दलित और OBC समुदाय के हिन्दुओं के बचे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि पहले भी उन सबको परेशान किया जाता रहा है। मूर्तियाँ ले जाने पर ईंटों से मारा जाता है और कुछ मौकों पर तो दरवाजे तक से निकलने पर आपत्ति जताई जाती है। पीड़िता के बाबा ने हमें यह भी बताया कि योगी आदित्यनाथ की सरकार बनने के बाद गाँव के मुस्लिम उनसे कहते हैं, “जब तक बाबा की सरकार है तब तक चाहे हो कर लो।”

जहाँ भगवान कृष्ण ने की थी शिव प्रतिमा की स्थापना, वहाँ बन रहा है भव्य मंदिर: PM मोदी करेंगे प्राण-प्रतिष्ठा, जानें मेहसाणा के वालीनाथ महादेव मंदिर का इतिहास

गुजरात के मेहसाणा में वालीनाथ महादेव के भव्य मंदिर की प्राण-प्रतिष्ठा 22 फरवरी 2024 के शुभ दिन गुरुपुष्य अमृत सिद्धि योग में प्रधानमंत्री मोदी के हाथों होगी। इस दौरान देश के कई साधू-संत वहाँ मौजूद रहेंगे। वालीनाथ महादेव मंदिर का इतिहास हमेशा से बहुत ही रोचक और भव्य माना जाता है। स्थानीय लोगों का कहना है कि महाभारत काल से लेकर अब तक यहाँ भगवान वालीनाथ की पूजा हो रही है। इस धाम से श्रद्धालुओं की काफी आस्था जुड़ी हुई है।

ऑपइंडिया ने मेहसाणा के वालीनाथ मंदिर का गौरवशाली इतिहास जानने के लिए स्थानीय लोगों से संपर्क किया। रबारी समुदाय की वालीनाथ महादेव के प्रति विशेष आस्था है। साथ ही वहाँ के स्थानीय हिंदू भी वालीनाथ महादेव की पूजा करते हैं। ऑपइंडिया ने स्थानीय राजदीपभाई रबारी से संपर्क किया। राजदीप भाई रबारी के साथ-साथ उनका पूरा परिवार वालीनाथ महादेव को अपना आदर्श मानता है। साथ ही रबारी समुदाय ही इस मंदिर की विशेष देखभाल करता है। राजदीप भाई रबारी ने ऑपइंडिया को बताया वालीनाथ महादेव मंदिर का गौरवशाली इतिहास है।

शिव प्रतिमा की स्थापना भगवान कृष्ण ने की थी

राजदीप भाई के अनुसार भगवान श्रीकृष्ण जब द्वारका में आकर बसे थे, उस समय वे गुजरात में कई स्थानों और जंगलों का भ्रमण किए थे। एक बार वह उत्तरी गुजरात में दरभा (हाल में वालीनाथ मंदिर का क्षेत्र) के जंगलों में भटक गए। भगवान श्रीकृष्ण ससंघ सहित वहीं ठहरे। तब उन्होंने वहाँ गोपियों के साथ भव्य रासलीला रचाई। इस रासलीला में किसी बाहरी व्यक्ति का आना निषेध था। उस समय महादेव को भगवान श्री कृष्ण की रासलीला के दिव्य दर्शन की इच्छा हुई। परंतु पुरुष वर्जित होने के कारण उन्होंने गोपी के रूप में ऐसी रासलीला में भाग लिया।

वालीनाथ महादेव की मूर्ति

गोपियाँ और महादेव स्वयं भगवान श्रीकृष्ण के साथ रासलीला कर रहे थे। लेकिन इसी बीच भगवान श्रीकृष्ण ने महादेव को पहचान लिया और शिवजी से कहा, “आप देवों के देव महादेव हैं, हम सभी के आराध्य हैं। आपकी उपस्थिति हमारे लिए सौभाग्य की बात है। आपको इस रासलीला में आने से कैसे रोका जा सकता है? आप अपने मूल रूप में दर्शन दीजिए।” भगवान श्रीकृष्ण के वचन सुनकर महादेव अपने शाश्वत स्वरूप में प्रकट हो जाते हैं। लेकिन गोपी के रूप में पहनी गई वाली (कान का आभूषण) वह कानों में पहने रखते हैं, तब भगवान कृष्ण उन्हें वालीनाथ कहकर संबोधित करते है।

भगवान श्रीकृष्ण को महादेव का स्वरूप अलौकिक एवं दिव्य प्रतीत होता है, जिसके बाद भगवान श्रीकृष्ण स्वयं महादेव की वेशभूषा धारण कर वहाँ एक मूर्ति स्थापित करते हैं। तब से लेकर आज तक भगवान शिव की उस मूर्ति को वालीनाथ महादेव के नाम से जाना जाता है। यह शायद भारत का पहला मंदिर है जहाँ शिवलिंग के स्थान पर शिव मूर्ति की पूजा की जाती है।

रबारी समाज से क्या है रिश्ता?

उत्तर गुजरात के रबारी समुदाय की वालीनाथ महादेव में गहरी आस्था है। जिसके पीछे भी वालीनाथ महादेव मंदिर का भव्य इतिहास छिपा हुआ है। श्रीकृष्ण द्वारा मूर्ति स्थापित करने के बाद कई शताब्दियाँ बीत गईं। कालचक्र की दुर्गम अवस्था में वालीनाथ महादेव का मंदिर धीरे-धीरे जीर्ण-शीर्ण हो गया और एक समय ऐसा आया जब इस मंदिर को पृथ्वी ने अपने में समाहित कर लिया। लेकिन जहाँ सत्य शक्ति और दिव्यता है, वह कैसे जागृत नहीं होता।

9 शताब्दी पहले तारभोवन मोयदाव नाम के एक रबारी दरभा के जंगलों के पास रूपेन नदी के तट पर गायों को चरा रहे थे। इसी बीच उन्हें अचानक नींद आ जाती है और वह प्रकृति के बीच एक नदी के किनारे एक पेड़ के तने के पास आराम करने लगते हैं।

तारभोवन रबारी सो रहे थे। इसी बीच उनके स्वप्न में किसी दैवीय शक्ति ने उनकी चेतना को भर दिया और उन्हें पूरे मंदिर और उसके स्थान के बारे में जानकारी दी। स्वप्न में यह भी कहा कि वह उस स्थान पर एक वृक्ष के नीचे बैठे साधु को इसकी सूचना दें।

तारभोवन रबारी ने उन संत को सपने के बारे में बताया। बाद में वह संत वालीनाथ गादी के प्रथम गादीपति महंत वीरमगिरि बापू के नाम से जाने गए। तारभोवन रबारी ने वीरमगिरि को सपने के बारे में बताया, जिसके बाद वहाँ खुदाई की गई तो प्राचीन मंदिर के खंडहर और वालीनाथ महादेव की मूर्ति मिली।

तारभोवन रबारी ने वालीनाथ महादेव की उस मूर्ति को वहीं स्थापित कर दिया। उसी समय रबारी ने वहाँ एक मंदिर बनवाया और इसे संतों के आश्रय स्थल के रूप में स्थापित किया। रबारी ने वीरमगिरी बापू को वालीनाथ गादी के पहले महंत और गुरु के रूप में स्थापित किया। तारभोवन रबारी ने वलीनाथ क्षेत्र में गुरुगादी सेवा शुरू की और वहीं एक गाँव बसाकर रहने लगे। वह गाँव है मेहसाणा का तरब, जिसे 900 साल पहले तरभोवन रबारी ने बसाया था। यही कारण है कि रबारी समाज के लोगों में वालीनाथ महादेव के प्रति विशेष आस्था है।

प्राचीन ग्रंथों में भी मिलता है मंदिर का उल्लेख

रबारियों के गुरुगादी के रूप में स्थापित पवित्र वालीनाथ गादी के गादीपति महंतो अक्सर गिरनार आते थे। इस बीच वे सौराष्ट्र के काठी में आतिथ्य सत्कार का आनंद लेते थे और वहाँ उपदेश देते थे। इसलिए वर्षों पहले सौराष्ट्र के काठी समाज की भी वलीनाथ महादेव में उतनी ही आस्था थी जितनी रबारी समाज की। एक काठी ने गादीपति महंत को ‘रेमी घोड़ी’ उपहार में दी थी, जिसकी वंशावली आज भी जीवित है। श्री कृष्ण द्वारा स्थापित वालीनाथ मंदिर में समय के साथ बदलाव आया है। खुदाई के बाद भी हर गादीपति महंत ने अपने समय में इस मंदिर का जीर्णोद्धार कर इसे नया आकार दिया है।

आज भी पूर्व शासक बालादेवबापू ने करोड़ों की लागत से भव्य और दिव्य वालीनाथ मंदिर का निर्माण शुरू कराया था। जिसे अब वर्तमान गादीपति जयरामगिरि बापू ने पूरा किया है। भले ही वालीनाथ रबारी समुदाय के गुरुगादी के रूप में स्थापित हैं, लेकिन प्राचीन काल से ही यह मंदिर हर समुदाय के लिए आस्था का केंद्र और सामाजिक सद्भाव का एक बड़ा उदाहरण रहा है। हर गादीपति अपने अच्छे कर्मों की खुशबू हर समाज में फैलाता रहा है। इस परिसर में कई साधु-सतियों ने जीवित समाधि ली है। प्राचीन काल में न केवल सनातन धर्म बल्कि अनेक मुसलमानों की भी वलीनाथ महादेव में अगाध आस्था थी। 12 साल की मुस्लिम लड़की नाथीबाई को मंदिर में जिंदा दफनाया गया था। सबूत आज भी मौजूद हैं।

वालीनाथ मंदिर में रुद्राक्ष का शिवलिंग

सदियों पहले लिखे गए पद्मनाथ के कान्हड़दे प्रबंध नामक प्राचीन ग्रंथ में रूपेण कंठ के दरभा वन में वालीनाथ महादेव के एक मंदिर का भी उल्लेख है। स्थानीय लोगों के अनुसार सभी जातियों के लिए आस्था का केंद्र वालीनाथ महादेव के मंदिर की प्राचीनता और धार्मिक एवं ऐतिहासिक महत्व को आजादी के बाद भी हर शासक और हर मुख्यमंत्री ने बरकरार रखा है। वालीनाथ उत्तरी गुजरात का एकमात्र बड़ा खाद्य क्षेत्र है जो वर्षों से चला आ रहा है। इसके अलावा वालीनाथ को भारत के 13 सबसे पवित्र दशनामी अखाड़ों में स्थान दिया गया है। ये 13 अखाड़े कुंभ मेले में शाही स्नान करते हैं और उन्हें शाही सम्मान भी दिया जाता है।

मंदिर के पुजारी के रूप में रबारी समुदाय के महंत कर्तव्य निभाते हैं

गौरतलब है कि गुजरात के कई मंदिरों और देवस्थानों में अलग-अलग जातियों के पुजारी पाए जाते हैं। गुजरात के मंदिर सदियों से इस मिथक को तोड़ रहे हैं कि केवल ब्राह्मण पुजारी ही पुजारी हो सकते हैं। वालीनाथ मंदिर के हाल के गादीपति जयरामगिरि बापू का जन्म भी रबारी समुदाय में हुआ था। हालाँकि, उसके बाद उन्होंने दशनामी अखाड़े के महंत के रूप में संन्यास ले लिया, लेकिन वह जन्म से ब्राह्मण नहीं हैं बल्कि वालीनाथ महादेव मंदिर के पुजारी और महंत के रूप में काम करते हैं। जो सामाजिक समरसता को और बढ़ावा देता है।

केवल वालीनाथ महादेव मंदिर ही नहीं बल्कि गुजरात में ऐसे सैकड़ों मंदिर हैं जहाँ पुजारी पूरे हिंदू समुदाय से चुने जाते हैं। यहाँ तक ​​कि गुजरात के प्रसिद्ध तीर्थ स्थल गुरु आश्रम बगदाना में भी कोई ब्राह्मण पुजारी नहीं है। वहाँ रामानंदी परंपरा के व्यक्ति को पुजारी का दर्जा दिया गया है।

मेहसाणा के तारभा में स्थित वलीनाथ महादेव मंदिर का गौरवशाली इतिहास बहुत ही रोचक और लोकप्रिय है। इस इतिहास का उल्लेख कई प्राचीन पुस्तकों में भी मिलता है। स्थानीय लोगों के अनुसार भगवान वालीनाथ हर समाज के आराध्य हैं। ऐसा नहीं है कि सिर्फ रबारी समुदाय के पास ही मंदिर है। हर जाति के भक्त भगवान को प्रणाम करते हैं। साथ ही, वलिनाथ महादेव के मंदिर से कई लोककथाएँ और लोक संस्कृतियाँ भी जुड़ी हुई हैं।

नोट: वालीनाथ महादेव मंदिर के इतिहास पर यह लेख मूल रूप से गुजराती में भारगव राज्यगुरू ने लिखा है। आप इसे लिंक पर क्लिक करके पढ़ सकते हैं।

‘पहले होते थे दंगे, अब लाखों करोड़ के निवेश’: यूपी ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट का PM मोदी ने किया उद्घाटन, बोले – चौधरी चरण सिंह को संसद में बोलने भी नहीं देती थी कॉन्ग्रेस

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार (19 फरवरी, 2024) को उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में यूपी ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट को संबोधित किया, जिसमें मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी मौजूद रहे। समारोह का उद्घाटन करने के बाद अपने संबोधन में पीएम मोदी ने कहा कि आज हम यहाँ विकसित भारत के लिए, विकसित उत्तर प्रदेश के निर्माण के संकल्प के साथ एकजुट हुए हैं, जिसमें तकनीक के माध्यम से यूपी की 400 से ज्यादा विधानसभा सीटों पर लाखों लोग इस कार्यक्रम से जुड़े हैं।

पीएम मोदी ने कहा कि यूपी में डबल इंजन की सरकार बने 7 वर्ष हो रहे हैं, बीते 7 वर्षों में प्रदेश में रेड टेप कल्चर, रेड कार्पेट कल्चर बन गया है। उन्होंने कहा कि बीते 7 वर्षों में यूपी में क्राइम कम हुआ तो बिजनेस कल्चर का विस्तार हुआ है। साथ ही बताया कि बीते 7 वर्षों में यूपी में व्यापार, विकास और विश्वास का माहौल बना है। प्रधानमंत्री ने कहा कि 7-8 वर्ष पहले हम सोच भी नहीं सकते थे कि उत्तर प्रदेश में भी निवेश और नौकरियों को लेकर ऐसा माहौल बनेगा।

उन्होंने उस दौर को याद करते हुए बताया कि कैसे तब यूपी में चारों तरफ अपराध, दंगे, छीना-झपटी जैसी खबरें आती रहती थीं और उस दौरान अगर कोई कहता कि यूपी को विकसित बनाएँगे तो कोई सुनने को भी तैयार नहीं होता, लेकिन आज देखिए लाखों-करोड़ का निवेश उत्तर प्रदेश की धरती पर उतर रहा है। पीएम मोदी ने कहा कि आज यूपी वो राज्य है, जहाँ देश के सबसे ज्यादा एक्सप्रेस-वे हैं। आज यूपी वो राज्य है, जहां देश में सबसे ज्यादा इंटरनेशनल एयरपोर्ट्स हैं। आज यूपी वो राज्य है, जहां देश की पहली रैपिड रेल चल रही है।

पीएम मोदी ने कहा, “आज आप दुनिया में कहीं भी जाएँ, भारत को लेकर अभूतपूर्व सकारात्मकता दिख रही है। हर देश, भारत की ग्रोथ स्टोरी को लेकर आश्वस्त है, भरोसे से भरा हुआ है। आज देश में मोदी की गारंटी की बहुत चर्चा है, लेकिन आज पूरी दुनिया, भारत को बेहतर रिटर्न की गारंटी मान रही है। अक्सर हमने देखा है कि चुनाव के नजदीक नए निवेश से लोग बचते हैं, लेकिन आज भारत ने ये धारणा भी तोड़ दी है। आज दुनियाभर के इन्वेस्टर्स को भारत में सरकार की पॉलिसी की स्टेबिलिटी पर पूरा भरोसा है।”

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लखनऊ के समारोह में उद्योगपतियों की मौजूदगी में कहा कि हमने यूपी में Ease Of Living और Ease Of Doing Business पर समान बल दिया है। डबल इंजन सरकार का मकसद है कि कोई भी लाभार्थी, किसी भी सरकारी योजना से वंचित न रहे। उन्होंने कहा कि पहले की सरकारों में लोगों को अपने ही लाभ पाने के लिए लंबी-लंबी लाइनें लगानी पड़ती थी और एक खिड़की से दूसरी खिड़की तक भागदौड़ करनी पड़ती थी, लेकिन अब हमारी सरकार खुद गरीब के दरवाजे पर आ रही है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि जब तक हर लाभार्थी को उसका हक नहीं मिल जाता, हमारी सरकार शांत नहीं बैठेगी। उन्होंने कहा कि मोदी, आज उनको भी पूछ रहा है, जिनको पहले किसी ने नहीं पूछा। बकौल पीएम मोदी, शहरों में जो हमारे रेहड़ी-पटरी वाले भाई बहन होते हैं, उनके बारे में पहले किसी ने नहीं सोचा। उन्होंने ध्यान दिलाया कि कैसे उनकी सरकार इन लोगों के लिए पीएम स्वनिधि योजना लेकर आई, अब तक देश भर के रेहड़ी-पटरी वालों को 10 हजार करोड़ रुपये की आर्थिक सहायता दी जा चुकी है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि यूपी में भारत का सबसे बड़ा टूरिज्म हब बनने का सामर्थ्य है, आज देश का हर व्यक्ति वाराणसी और अयोध्या आना चाहता है। उन्होंने बताया कि हर दिन लाखों लोग इन स्थानों पर दर्शन के लिए आ रहे हैं। इस कारण यूपी में छोटे उद्यमियों, एयरलाइन्स कंपनियों, होटल, रेस्टॉरेंट वालों के लिए अभूतपूर्व अवसर बन रहे हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पर्यटकों से आग्रह किया कि आप जब टूर पर जाने के लिए बजट बनाएँ, तो उसमें से 10% बजट जिस जगह पर जा रहे हैं, वहाँ से कुछ न कुछ खरीदने के लिए रखें।

प्रधानमंत्री ने कहा कि 2025 में कुंभ मेले का आयोजन भी होने वाला है, ये भी यूपी की अर्थव्यवस्था के लिए बहुत महत्वपूर्ण होने वाला है। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में टूरिज्म और हॉस्पिटैलिटी सेक्टर में यहाँ बहुत बड़ी संख्या में रोजगार बनने वाले हैं। उन्होंने याद किया कि अभी कुछ दिन पहले किसानों के मसीहा चौधरी चरण सिंह जी को ‘भारत रत्न’ देने का सौभाग्य मिला। प्रधानमंत्री ने कहा कि उत्तर प्रदेश की धरती के बेटे चौधरी साहब का सम्मान करना, देश के करोड़ों मजदूरों व करोड़ों किसानों का सम्मान है।

लेकिन दुर्भाग्य से ये बात कॉंग्रेस और उसके सहयोगियों को समझ नहीं आती। इन्होंने चौधरी चरण सिंह के बारे में संसद में बोलना तक मुश्किल कर दिया था। उन्होंने फूड प्रोसेसिंग से जुड़े उद्यमियों से भी विशेष आग्रह किया कि उन्हें जीरो इफेक्ट, जीरो डिफेक्ट के मंत्र पर ही काम करना चाहिए। उन्होंने कहा, “आपको एक ही ध्येय के साथ काम करना चाहिए कि दुनिया भर के देशों के डायनिंग टेबल पर कोई न कोई ‘मेड इन इंडिया’ फूड पैकेट ज़रूर हो।”

उन्होंने कॉन्ग्रेस पार्टी पर निशाना साधते हुए कहा कि पार्टी ‘भारत रत्न’ पर एक ही परिवार का हक समझती थी, इसलिए दशकों तक बाबा साहब अंबेडकर को भी ‘भारत रत्न’ नहीं दिया। उन्होंने कहा कि ये लोग अपने ही परिवार को ‘भारत रत्न’ देते रहे। प्रधानमंत्री ने कहा कि कॉन्ग्रेस किसान, मजदूर, गरीब, दलित, पिछड़े का सम्मान करना ही नहीं चाहती। बता दें कि यूपी दुनिया भर के निवेशकों के लिए एक नया अवसर लेकर आ रहा है, उद्योग का हब बन कर उभर रहा है।

TATA समूह से भी कम है पाकिस्तान की ‘औकात’, भारतीय कंपनी का मार्केट कैप पड़ोसी देश की अर्थव्यवस्था से भी अधिक

कंगाली की कगार पर खड़े पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था भारत के सामने कहीं नहीं ठहरती। पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था वर्तमान में भारत के दसवें हिस्से के बराबर भी नहीं है। पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था की हालत इतनी पतली है कि उससे ज्यादा मार्केट कैप भारतीय कारोबारी टाटा समूह की है।

भारतीय कारोबारी टाटा समूह का कुल बाजार पूँजीकरण (Market Capitalization) अब 360 बिलियन डॉलर (लगभग ₹30 लाख करोड़) हो चुका है। टाटा समूह की सबसे बड़ी कम्पनी टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेस (TCS) जिसका अकेले का बाजार पूँजीकरण 170 बिलियन डॉलर (लगभग ₹14 लाख करोड़) है। टाटा समूह की 29 कम्पनियाँ शेयर बाजार में अधिसूचित हैं।

वहीं अगर पाकिस्तान को देखा जाए तो इसकी पूरी अर्थव्यवस्था का आकार अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) के अनुसार, 340 बिलियन डॉलर (₹28 लाख करोड़) है। यानी पाकिस्तान की कुल अर्थव्यवस्था और टाटा समूह के बाजार पूँजीकरण में ₹2 लाख करोड़ का फर्क है।

भारत की पूरी अर्थव्यवस्था की तुलना में तो पाकिस्तान कहीं भी नहीं ठहरता। पाकिस्तान की जनसंख्या भारत के मुकाबले पाँच गुना कम है, लेकिन अगर अर्थव्यवस्था की तुलना की जाए तो वह भारत के मुकाबले 10 गुने से भी कम है। भारत की अर्थव्यवस्था IMF के अनुसार, 4.11 ट्रिलियन डॉलर (लगभग ₹34118137 करोड़) है। यह विश्व की पाँचवी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है। इसकी तुलना में पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था मात्र 340 बिलियन डॉलर है, जो भारत के मुकाबले दसवाँ हिस्सा भी नहीं है।

गौरतलब है कि पाकिस्तान लम्बे समय से आर्थिक संकट से जूझ रहा है। वर्तमान में उसकी हालत काफी खराब है। पाकिस्तान का काम IMF से उधार लेकर चल रहा है। इसके अलावा उसके पास विदेशी मुद्रा भण्डार भी काफी कम है। जहाँ भारत के पास 617 बिलियन डॉलर (लगभग ₹51 लाख करोड़) के विदेशी मुद्रा का भण्डार है, वहीं पाकिस्तान में यह आँकड़ा 9-10 बिलियन डॉलर है।

पकिस्तान की आम जनता भी इस खराब आर्थिक हालत से परेशान है। पाकिस्तान में महँगाई का स्तर इस समय 30% से ऊपर बना हुआ है, जिससे आम आदमी कमर टूट रही है। सरकार बिजली और तेल के दाम लगातार बढ़ा रही है जिससे और भी परेशानियाँ आ रही हैं।

पाकिस्तान की सरकारें आर्थिक सुधार ना करके पहले अमेरिका और फिर चीन से मदद लेकर अपना काम चलाती रही हैं। हालाँकि, बदले समय में अब इन देशों से भी मदद मिलनी बंद हो गई है तो समस्याएँ बढ़ रही हैं। अरब देश भी अब पाकिस्तान की आर्थिक सहायता पहले की तरह नहीं कर रहे हैं।