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DJ बजाने पर मस्जिद के सामने सरस्वती पूजा यात्रा पर हमला, पत्थरबाजों में बच्चों-बुजुर्गों से लेकर महिलाएँ भी: 10 घायल, उलटे मुखिया विनोद यादव पर ही FIR

झारखंड में प्रतिमा विसर्जन के दौरान 2 अलग-अलग हिस्सों में हिंसा की खबर है। यह हिंसा देवघर जिलों में हुई है। हिंसा के दौरान पत्थरबाजी की गई और उन्मादी नारे लगाए गए। हिंसा के चलते लगभग 10 लोग जख्मी हुए हैं। प्रभावित इलाकों में पुलिस बल की तैनाती कर दी गई है। आरोपितों की पहचान करके उन पर कानूनी कार्रवाई की जा रही है। घटना शुक्रवार (16 फरवरी 2024) की है। ऑपइंडिया से बात करते हुए देवघर के पीड़ित हिन्दुओं ने बताया कि उन पर प्रशासन की मौजूदगी में पत्थरबाजी हुई है।

पहला मामला देवघर जिले के थानाक्षेत्र मधुपुर का है। यहाँ शुक्रवार (16 फरवरी) को गाँव चोंगाखर में हिन्दुओं ने मूर्ति विसर्जन का जुलूस निकाला था। जुलूस में शामिल जयदेव कुमार यादव ने ऑपइंडिया से बात करते हुए घटना की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि लगभग 25-30 श्रद्धालुओं के जुलूस में बच्चे और महिलाएँ भी चल रहीं थीं। जुलूस में DJ पर भजन आदि बज रहा था। जब यात्रा चोंगखर चौराहा मस्जिद के सामने पहुँची तो आसपास के रहने वाले मुस्लिम समुदाय के कुछ लोग आ गए और विरोध किया।

जयदेव यादव का आरोप है कि इन लोगों में शहाबुद्दीन अंसारी, हबीब, आज़ाद सहित कई लोग शामिल थे। इन्होंने मस्जिद के आगे DJ बंद करने को कहा। हालाँकि श्रद्धालुओं ने अपनी यात्रा जारी रखी। मौके पर मौजूद प्रशासन के लोगों ने मामले को बिगड़ता देखकर जुलूस को तेज गति से आगे बढ़ाने के लिए दबाव डाला। जयदेव और उनके साथियों ने प्रशासन की बात मान ली और तेजी से जुलूस आगे बढ़ाने लगे।

बकौल जयदेव यादव इसी बीच मस्जिद के आसपास मौजूद घरों से उन पर पथराव होने लगा। पत्थरबाजों में बच्चे, बूढ़े और महिलाएँ भी शामिल थीं। इनके हमले से विसर्जन यात्रा में चल रहे लोगों में अफरातरफरी मच गई। लगभग 8 श्रद्धालु घायल बताए जा रहे हैं। हमलावरों को रोकने के प्रयास में पुलिस के 2 जवान भी घायल बताए जा रहे हैं। आखिरकार DJ आदि बंद करवाकर बची-खुची यात्रा प्रशासन ने जैसे-तैसे पूरी करवाई। अतिरिक्त फ़ोर्स पहुँचने पर हालत को काबू किया जा सका। फ़िलहाल पीड़ित हिन्दुओं की तरफ से थाने में शिकायती प्रार्थना पत्र दिया गया है।

पीड़ित श्रद्धालुओं की तरफ से लगभग आधे दर्जन नामजद और 50 अज्ञात हमलावरों पर FIR दर्ज की गई है। यात्रा में शामिल जयदेव यादव के मुताबिक, आरोपित शहाबुद्दीन ईंट-भट्ठे के साथ जुआ आदि जैसे गैरकानूनी काम भी करता है। बकौल जयदेव वो नहीं समझ पा रहे हैं कि अचानक हमलावरों के पास इतने पत्थर कहाँ से आ गए। स्थानीय बजरंग दल पदाधिकारी धनञ्जय ने भी जयदेव के आरोपों को सही बताया और प्रशासन से आरोपितों पर कड़ी कार्रवाई की आशा जताई है। जयदेव यादव इस बात के लिए भी चिंतित दिखे कि जो प्रतिमाएँ विसर्जन के लिए अभी बचीं हैं उनका क्या होगा।

गाँव ने मुखिया ने JMM सरकार को कोसा

ऑपइंडिया ने इस मामले में चोंगाखार गाँव के मुखिया विनोद यादव से बात की। विनोद यादव ने JMM (झारखंड मुक्ति मोर्चा) सरकार को कोसते हुए कहा कि प्रशासन ने मामले को रफा-दफा करने के लिए हिन्दुओं पर भी FIR दर्ज कर दी है। इस FIR में मुखिया विनोद यादव भी नामजद हैं, जबकि उनका दावा है वो हिंसा में दूर-दूर तक नहीं शामिल थे।

मुखिया के मुताबिक, ऐसा प्रशासन ने दोनों पक्षों में समझौता कराने का दबाव बनाने के लिए करवाया है। स्थानीय निवासियों ने ऑपइंडिया को घटना से जुड़े कुछ वीडियो भी भेजे हैं। इनमें भीड़ का शोर और अफरा-तफरी दिख रही है। ऑपइंडिया ने मामले में आधिकारिक बयान के लिए थाना प्रभारी मधुपुर को सम्पर्क किया तो उनका फोन बंद मिला। पुलिस वर्जन आने के बाद उसे खबर में अपडेट किया जाएगा।

पत्थरबाजी, पुलिस पर हमला, डंडा-तलवारों से हिंसा और गाली… ‘किसानों’ की पोल खोलते कई वीडियो वायरल, प्रदर्शन में खालिस्तानी आतंकियों वाले टीशर्ट

देश में एक बार फिर से ‘किसान आंदोलन’ शुरू हो गया है। इस दौरान सोशल मीडिया पर कई ऐसे वीडियो सामने आई हैं, जिनमें इन तथाकथित किसानों को अराजकता फैलाते हुए और हिंसा करते हुए देखा जा सकता है। हरियाणा-पंजाब के शम्भू बॉर्डर पर इन किसानों ने सबसे ज्यादा उत्पात मचा रखा है। साथ ही ये खालिस्तान का समर्थन भी कर रहे हैं। कई पुलिस वाले घायल हुए हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या ये लोग सचमुच देश के किसानों का प्रतिनिधित्व करते हैं?

एक वीडियो में इन किसानों को पुलिस पर ताबड़तोड़ पत्थरबाजी करते हुए देखा गया। उन्हें खूब पता था कि उनकी हरकतें कैमरे पर रिकॉर्ड की जा रही हैं, लेकिन इसके बावजूद वो नहीं रुके। वीडियो में देखा जा सकता है कि नील रंग के कपड़े पहने एक गुंडे ने तो पुलिस को धमकाने के लिए अपना तलवार तक निकाल लिया।

वहीं एक अन्य वीडियो में एक प्रदर्शनकारी को पुलिस को धमकाते हुए देखा गया। वो कह रहा है, “तुम टोपी वाले हमें नहीं रोक सकते। हम तुम्हारे गर्दन काट लेंगे। हम अपने हाथों से तुम्हें कुचल देंगे।” क्या ये किसी किसान की भाषा हो सकती है?

एक अन्य वीडियो में देखा जा सकता है कि प्रदर्शनकारी पुलिसकर्मियों से उनके साजोसामान छीन रहे हैं, उन्होंने खुद की सुरक्षा के लिए जो चीजें रखी हैं उन्हें छीना जा रहा है। ये पुलिसकर्मी सिंघु बॉर्डर पर कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए तैनात किए गए थे।

गालियाँ बकने में भी ये तथाकथित किसान पीछे नहीं हैं। एक वीडियो में इन्हें DSP स्तर के अधिकारी को गाली बकते हुए देखा जा सकता है। पुलिस अधिकारी ने उनसे सिर्फ इतना निवेदन किया था कि वो पीछे हटें और प्रदर्शन को रोकें।

वहीं एक तस्वीर ‘मिस्टर सिन्हा’ ने भी डाली, जो मालदीव के खिलाफ मोर्चा खोलने के बाद सुर्ख़ियों में आए थे। उन्होंने लिखा, “ये देखिए, तथाकथित किसानों ने इस निर्दोष पुलिस अधिकारी के साथ क्या किया। इनके परिवार का क्या? इनके मानवाधिकार का क्या? या फिर ये सब सिर्फ गद्दारों के लिए आरक्षित हैं?” इस तस्वीर में किसान प्रदर्शनकारियों के हमले में घायल पुलिसकर्मी को देखा जा सकता है।

पुलिस की गाड़ी तक को नहीं छोड़ा गया। एक वीडियो में देखा जा सकता है कि कैसे खुद को किसान बताने वाले ये गुंडे डंडों से पुलिस के वाहन पर हमला कर रहे हैं। कई पुलिसकर्मी इसमें घायल भी हुए।

वहीं नोएडा पुलिस ने जब किसानों के एक समूह को संसद की तरफ मार्च करने से रोका तो उन्होंने उपद्रव शुरू कर दिया। हरियाणा में तो किसानों ने टेनिस गेंदों का इस्तेमाल कर के सर्विलांस ड्रोन्स तक को नुकसान पहुँचाने की कोशिश की। इसके लिए उन्होंने पतंगों तक का इस्तेमाल किया। वहीं किसान आंदोलन में लगातार खालिस्तानी पोस्टर-बैनर भी देखे जा रहे हैं। एक शख्स को आतंकी अमृतपाल की तस्वीर वाला टीशर्ट पहने हुए देखा गया।

हरियाणा पुलिस के CCTV कैमरों में कई ऐसे वीडियो आए हैं। खालिस्तान समर्थक अमृतपाल, जो फ़िलहाल जेल में है, उसकी तस्वीर भी लगाए हुए लोग दिखे। अमृतपाल को असम पुलिस पकड़ कर ले गई, वो वहीं की जेल में बंद है।

जीवन का कुछ नहीं पता… ‘दंगल गर्ल’ ने 19 साल की उम्र में दुनिया छोड़ी, दवाइयों के साइड इफेक्ट ने ली जान

बॉलीवुड की सुपरहिट फिल्म दंगल में छोटी बबीता का किरदार निभाने वाली एक्स्ट्रेस सुहानी भटनागर का 19 साल की उम्र में निधन हो गया। वह कुछ समय से बीमार थीं और उनका इलाज एम्स में चल रहा था। बहुत कोशिशों के बाद भी डॉक्टर सुहानी को नहीं बचा सके।

बताया जा रहा है कि कुछ समय पहले सुहानी के पैर में फ्रैक्चर हुआ था। इसके बाद उन्होंने कुछ दवाइयाँ खाई जिनका उनके शरीर पर गंभीर साइड इफेक्ट देखने को मिले। उनके शरीर में धीरे-धीरे पानी भरता गया और इलाज के बाद भी वो रिकवर नहीं हो पाईं।

सुहानी का अंतिम संस्कार फरीदाबाद में होना है। उनके परिवार की ओर से अभी कोई बयान नहीं आया है। लेकिन फिल्म जगत में जो कोई भी उनके निधन की खबरें सुन रहा है वो सब हैरान हैं। सोशल मीडिया पर भी लोगों को विश्वास नहीं हो रहा कि अपने डॉयलॉगों से सब दिल जीतने वाली छोटी बबीता इतनी जल्दी दुनिया छोड़ गईं।

सुहानी ने 10-11 साल की छोटी सी उम्र में ही बॉलीवुड की दंगल फिल्म से अपना डेब्यू किया था। फिल्म में उनके काम को काफी पसंद भी किया गया था। एक्टिंग के अलावा उन्हें सिंगिंग और डांसिंग का काफी शौक था। लेकिन अपनी पढ़ाई अच्छे से पूरी करने के लिए उन्होंने एक्टिंग से ब्रेक ले लिया था। वो इंस्टाग्राम पर भी खासी एक्टिव नहीं थीं इसलिए उनके हेल्थ से जुड़ी खबर पहले नहीं आ पाई।

सोशल मीडिया पर उनकी मौत की खबर सुनकर कहा जा रहा है कि जीवन का सच में कुछ नहीं पता। सिर्फ 19 साल की उम्र में सुहानी चली गईं। भगवान उनकी आत्मा को शांति दे।

रवीश कुमार ने ‘लव जिहाद’ को बताया काल्पनिक, नेशनल शूटर ने लताड़ा, कहा – ‘जिस जिहादी ने मुझे दी प्रताड़ना, उसे आप जैसों से मिलती है हिम्मत’

राइफल शूटर तारा शाहदेव ने रवीश कुमार के प्रोपेगंडा का तगड़ा जवाब दिया है। बता दें कि तारा शाहदेव जबरन धर्म-परिवर्तन, यौन उत्पीड़न और दहेज़ प्रताड़ना की शिकार रही हैं। रकीबुल ने उन्हें फँसा कर उनके साथ लव जिहाद’ की घटना को अंजाम दिया था। इस मामले में रकीबुल को राँची स्थित CBI की स्पेशल कोर्ट ने आजीवन कारावास की सज़ा भी सुनाई थी। झारखंड उच्च न्यायालय का तत्कालीन रजिस्ट्रार मुश्ताक अहमद को भी 15 वर्ष की सज़ा सुनाई गई थी।

पहले NDTV में रहे यूट्यूबर रवीश कुमार ने शुक्रवार (16 फरवरी, 2024) को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ (पूर्व में ट्विटर) पर एक तस्वीर शेयर की, जिसमें उन्होंने अपने हाथ में ‘लव जिहाद एन्ड अदर फिक्शंस’ नामक एक पुस्तक ले रखी है। उन्होंने इस किताब का प्रचार करते हुए लिखा कि प्रगति मैदान में आयोजित पुस्तक मेले में इसके तीनों लेखक मौजूद रहेंगे और इस पर चर्चा होगी। रवीश कुमार ने ‘लव जिहाद’ को मनगढंत बताने वाली किताब का प्रमोशन किया।

इस पर उन्हें जवाब देते हुए तारा शाहदेव ने लिखा, “रकीबुल जैसे जिहादी, जिसने मुझे धर्म परिवर्तन और ‘लव जिहाद’ के लिए जो शारीरिक और मानसिक प्रताड़नाएँ दी, मैं उस समय समझ नही पाई थी कि वो हैवानियत करने की हिम्मत उसमे कहाँ से आई। लेकिन, आज समझ आया की वो हिम्मत उन जैसे लोगों को आप जैसे लोग ही देते हो।” तारा शाहदेव खुद ‘लव जिहाद’ की पीड़िता रही हैं, ऐसे में इसे काल्पनिक बताया जाना उन्हें बर्दाश्त नहीं हुआ और उन्होंने रवीश कुमार को करारा जवाब दे दिया।

बता दें कि तारा शाहदेव को रकीबुल हसन ने ‘रंजीत कोहली’ बन कर फाँसा था और इस साजिश में उसकी अम्मी कौशर रानी भी शामिल थीं। उसे भी 10 वर्ष की सज़ा सीबीआई की विशेष अदालत ने सुनाई थी। 2014 में ही ये मामला प्रकाश में आया था और 2015 में हाईकोर्ट के आदेश पर सीबीआई ने जाँच शुरू की। असल में रकीबुल हसन पहले रंजीत कोहली हुआ करता था और उसने इस्लामी धर्मांतरण करा लिया था, लेकिन ये बात तारा को शादी के बाद पता चली।

शादी के बाद न सिर्फ तारा शाहदेव, बल्कि उनकी माँ को भी प्रताड़ित किया जाता था। तारा को कई-कई दिनों तक खाना नहीं दिया जाता था। धमकी दी गई थी कि अगर उन्होंने सिंदूर लगाया तो उनके हाथ-पाँव तोड़ डाले जाएँगे। साथ ही उन पर इस्लाम कबूल करने का दबाव भी बनाया जाता था। डेढ़ महीने की प्रताड़ना के बाद तारा ने किसी तरह अपने भाई को फोन किया, जिसके बाद उन्हें कैद से मुक्त कराया जा सका। उन्हें दहेज़ के लिए भी प्रताड़ित किया गया था।

जहाँ तक ‘लव जिहाद’ की बात है, लगभग रोज इससे जुड़ी कुछ न कुछ घटना सामने आती रहती है। हाल ही में मोहम्मद अनीश ने इंस्टाग्राम के जरिए सीतामढ़ी की हिन्दू नाबालिग को फँसाया और फिर गोरखपुर से सीतामढ़ी बुलाकर होटल में रखा। सितंबर 2023 में लव जिहाद, बलात्कार, अप्राकृतिक यौन संबंध से पीड़ित महिला ने सोशल मीडिया के जरिए बेंगलुरु पुलिस से न्याय की गुहार लगाई थी। हिन्दू ही नहीं, बल्कि अन्य धर्मों की लड़कियाँ भी इसकी शिकार हुई हैं। लद्दाख में बौद्ध संगठनों ने वहाँ हुई ऐसी ही एक घटना के बाद तगड़ा विरोध प्रदर्शन किया था।

यौन सुख पाने के लिए लिंग में घुसा ली 3 बैटरी, न निकलने पर हुई हालात खराब: डॉक्टरों ने काट कर निकाला, 3 स्टेज में होगा प्राइवेट पार्ट रिपेयर

ऑस्ट्रेलिया से हैरान करने वाली घटना सामने आई है। खबर है कि वहाँ एक 73 साल के बुजुर्ग ने यौन सुख पाने के लिए अपने लिंग में बटन के साइज वाली बैटरियाँ घुसा लीं। लेकिन बाद में वह उसे निकाल नहीं पाया और हालत बद्तर हो गई। बाद में डॉक्टरों ने उसका ऑपरेशन किया।

ये घटना चूँकि ऑस्ट्रेलिया की पहली घटना है इसलिए इस पर मेडिकल स्टडी यूरोलॉजी केस रिपोर्ट में प्रकाशित हुई है। स्टडी में मरीज का नाम नहीं डाला गया है। लेकिन बताया गया है कि आखिर उसने यौन सुख पाने के लिए क्या किया।

मीडिया रिपोर्ट्स में आई जानाकरी के अनुसार, 73 वर्षीय बुजुर्ग अपने प्राइवेट पार्ट में यौन संतुष्टि के लिए अलग-अलग चीजें डालता था। एक दिन उसने कुछ अलग प्रयोग करने के क्रम में अपने पेनिस में बटन साइज वाली बैटरियाँ डाल लीं। लेकिन बाद में वह उन्हें निकाल नहीं पाया और दर्द से तड़पता रहा।

तस्वीर साभार: न्यू यॉर्क टाइम्स

24 घंटे पीड़ा सहने के बाद उसने इस संबंध में डॉक्टरों से मदद माँगी। तब तक उसका पेशाब बंद हो गया था। डॉक्टरों ने उसकी गंभीर हालत देखते हुए तुरंत सर्जरी करके बैटरी को बाहर किया, जो कि काले तार जैसे पदार्थ से लिपटी हुई थीं। डॉक्टरों ने कहा कि यदि उसका समय पर इलाज न होता तो उसके शरीर के टिशू बिलकुल नष्ट हो जाते। इससे उसकी मौत भी हो सकती थी।

सर्जरी के बाद बुजुर्ग खतरे से तो बाहर आ गया लेकिन उसकी परेशानियाँ नहीं कम हुईं। 10 दिन तक उसके पेनिस में सूजन रही और कुछ अजीब सा डिस्चार्ज उसके पेनिस से होता रहा। डॉक्टरों ने उसकी हालत देखी तो फिर उसका ऑपरेशन किया। इस दफा उसके लिंग की खाल पर चीरा मारा गया तब जाकर वो सारी पस निकलकर बाहर आई।

अध्य्यन के अनुसार डॉक्टरों को डर था कि कहीं व्यक्ति को नेक्रोसिस न हो जाए, जो कि सच हुआ। अंत में डॉक्टरों को इलाज के लिए व्यक्ति के यूरेथ्रा को हटाना पड़ा। अब पेनिस को दोबारा से रिकंस्ट्रक्ट करने पर 3 चरण में सर्जरी करनी पड़ेगी और यही सबसे अच्छा निर्णय होगा।

200 बम बनवाई थी इमराना, मुजफ्फनरगर दंगों और CAA-विरोध में बाँटे ‘अपने लोगों’ को: चाचा-दादा से बम बनाना सीख जावेद करता था मदद

उत्तर प्रदेश पुलिस की स्पेशल टास्क फ़ोर्स (UP STF) ने शुक्रवार (16 फरवरी 2024) को मुजफ्फरनगर से जावेद शेख नाम के एक युवक को चार ज़िंदा टाइम बम के साथ पकड़ा। वहीं, पुलिस बम खरीदने वाली महिला इमराना की जोर-शोर से तलाश कर रही है। इस मामले में अब चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। दरअसल, इससे पहले भी इमराना बम बनवा चुकी थी।

इंटेलीजेंस ब्यूरो (IB) और यूपी STF की पूछताछ में जानकारी मिली है कि इमराना ने साल 2013 में मुज्जफरनगर में हुए दंगों के दौरान भी तकरीबन 200 बम ऑर्डर देकर बनवाए थे। इन बमों को उसने दंगों के दौरान बँटवाए थे। उस दंगों के दौरान मुजफ्फरनगर और आसपास के इलाकों में बड़े पैमाने पर हिंसा हुई थी। हालाँकि, कुछ रिपोर्ट में बमों की संख्या 100 से अधिक बताई जा रही है।

एसटीएफ के एएसपी बृजेश सिंह ने बताया कि प्रारंभिक जाँच में पता चला है कि इमराना ने 2013 के मुजफ्फरनगर दंगे और 2020 में नागरिक संशोधन कानून (CAA) के दौरान हुए बवाल में उसने 100 से अधिक बम अपने लोगों को बाँटे थे। उन बमों को बनाने में जावेद की भूमिका तलाशी जा रही है। जावेद के पास बम बनाने के लिए और भी ऑर्डर मिले थे। वह हिंसा और दंगों के लिए भी बम तैयार करता था।

जावेद की गिरफ्तारी के बाद बम बनाने के लिए मिले ऑर्डर की सूची भी एसटीएफ ने हासिल की है। सूची में शामिल लोगों के साथ-साथ जावेद के संपर्क वालों के खिलाफ भी जाँच की जा रही है। जावेद ने पूछताछ में बताया कि इमराना तंत्र क्रिया भी करती है। इमराना शामली जिले की रहने वाली है, लेकिन मुजफ्फरनगर के मुस्लिम बहुल खालापार इलाके में रहती थी। एजेंसी ने उसके घर रेड डाली, लेकिन वह पहले ही फरार हो गई थी।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, जावेद दिन में फुटपाथ पर ठेली लगाकर टी-शर्ट और लोअर बेचता था और रात में बम बनाता था। पुलिस ने जब उसे गिरफ्तार किया, तब उसके पास से चार टाइम बम, बोतल में अंदर गन पाउडर 999, लोहे की छोटी गोलियाँ, कॉटन और पीओपी आदि भी मिले। इसमें धमाके का टाइम सेट करने के लिए घड़ियाँ भी लगाई गई थीं। बम निरोधक दस्ते को बुलाकर इन बमों को निष्क्रिय करा दिया।

जावेद ने पूछताछ में अधिकारियों को बताया कि इमराना ने उसे बोतल बम बनाने के लिए 50 हजार रुपए देने की बात कही थी। बम तैयार करने के लिए इमराना ने जावेद को 10 हजार रुपए एडवांस में दिए गए थे। बाकी के 40 हजार रुपए बम मिल जाने पर इमराना ने देने का वादा किया था। इन बमों का उपयोग कहाँ होना था, इसके बारे में जानकारी सिर्फ इमराना को ही पता है।

जावेद ने बताया कि उसने बम बनाना मुजफ्फरनगर में ही अपने चाचा और दादा से सीखा है। उसका चाचा मोहम्मद अर्शी मुजफ्फरनगर में पटाखे की दुकान चलाता है। उसने कुछ जानकारी यूट्यूब से इकट्ठा की है। बम बनाने के लिए जावेद ने ग्लुकोज की बोतलें डाक्टरों से हासिल की थी। लोहे की गोलियाँ साइकिल की एक दुकान से लाया था। वहीं, टाइम बम में लगाने के लिए घड़ियों की दुकान से घड़ी खरीदी थी।

जावेद का नेपाल कनेक्शन भी सामने आया है। उसका जन्म और परवरिश नेपाल में ही हुई है। इसके साथ ही उसकी 7वीं तक उसकी शुरुआती शिक्षा भी नेपाल में ही हुई है। वह दो भाई और एक बहन है। सबका जन्म और परवरिश नेपाल में हुई है। उसकी बहन की शादी नेपाल में ही हुई है और भाई अमेरिका के शॉपिंग मॉल में काम करता है।

जावेद शेख ने बताया कि उसके अब्बू उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर के ही रहने वाले हैं। उसके पिता और दादा मुजफ्फरनगर में ही रहते हैं। नेपाल को लेकर उसने बताया कि उसके पिता नेपाल घूमने गए थे। वहाँ पर उनकी मुलाकात नीतू नाम की एक महिला से हुई। बाद में दोनों ने शादी कर ली। उसके पिता की मौत हो चुकी है और वह अपनी अम्मी से मिलने के लिए अभी भी नेपाल जाते रहता है।

चेहरे पर नकाब, कार से उतरे… गोली मार 21 कुत्तों की हत्या: तेलंगाना पुलिस कर रही जाँच, 5 घायल भी

तेलंगाना में एक साथ कई कुत्तों को गोली मार दी गई है। इसके कारण 21 कुत्तों की मौत हो गई। 15 फरवरी 2024 को रात 1:30 से 2:30 के बीच हुए इस गोलीकांड में लगभग 5 कुत्ते घायल भी हैं। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार इस अमानवीय घटना को नकाबपोश लोगों ने अंजाम दिया है।

20 से ज्यादा कुत्तों को गोली मारे जाने का मामला तेलंगाना के महबूब नगर जिले के पोन्नकल (Ponnakal) गाँव से जुड़ा है। जिन लोगों ने इस घटना को होते देखा, उनके अनुसार एक कार में चार लोग आए थे। सभी ने नकाब से अपना चेहरा ढँक रखा था। इन लोगों ने ही कुत्तों पर गोलियाँ चलाईं।

गोली लगने के कारण कई कुत्तों ने वहीं पर दम तोड़ दिया। जबकि कुछ कुत्तों की मौत भागते-भागते हुई। लगभग 5 कुत्तों की किस्मत अच्छी थी, उन्हें गोली तो लगी पर वो जिंदा हैं। घायल कुत्तों का इलाज पशु चिकित्सालय में किया गया।

तेलंगाना पुलिस इस मामले की जाँच कर रही है। किसने एक साथ इतने सारे कुत्तों पर गोली चलाई, गोली चलाने का मकसद क्या था? अड्डकल पुलिस थाने में इससे संबंधित केस दर्ज किया गया है। जाँच में पशु चिकित्सकों की मदद ली जा रही है। संबंधित मामले में पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट से भी कुछ खुलासा हो सकता है, जो अभी तक नहीं आई है।

आपको बता दें कि तेलंगाना के विधायक अकबरुद्दीन ओवैसी ने 15 फरवरी 2024 को ही विधानसभा में सड़क पर आवारा घूमते कुत्तों की समस्या पर बोला था। उनका कहना था कि इन आवारा कुत्तों को काबू में करने के लिए उपाय खोजने होंगे।

‘हॉकी स्टिक, पाइल और डंडों से मारा, गला घोंट कर दी हत्या’: गुजरात में हिन्दू शख्स को घर से खींच कर ले गई 100-200 की भीड़, भाई ने बताया – शव लेने गए तो बरसाए पत्थर

गुजरात के साबरकाँठा में बुधवार (14 फरवरी, 2024) को एक मुस्लिम भीड़ ने एक हिन्दू परिवार पर हमला करके एक व्यक्ति की हत्या कर दी। मुस्लिम भीड़ ने हिन्दू इलाके में घुस कर खूब उत्पात मचाया। मुस्लिम भीड़ ने हिन्दू व्यक्ति को उनके घर से खींच लिया और मार दिया। इस मामले में पुलिस ने 17 लोगों के विरुद्ध FIR दर्ज की है। ऑपइंडिया ने पीड़ित के परिवार से बात करके पूरी घटना के बारे में जानकारी इकट्ठा की है। इससे चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं।

जिन राजूभाई भोई की मुस्लिम भीड़ ने हत्या की, ऑपइंडिया ने उनके भाई सुभाषभाई से बात की है। सुभाष ने बताया, “हमारे भाई का इस घटना से कोई लेना-देना नहीं था। एक व्यक्ति जो कि हमारे घर के पास ही रहता था और उसका कुछ मुस्लिम लोगों से पैसे को लेकर कुछ विवाद हुआ था। उनका यह विवाद एक सप्ताह पहले हुआ था और 14 फरवरी को इस मामले में मारपीट भी हुई थी। इसके बाद वह घर आकर भी हल्ला-गुल्ला मचाने लगे।”

‘मुस्लिम भीड़ ने मेरे भाई को अँधेरे में खींचा और हत्या कर दी’

मुस्लिम भीड़ द्वारा अपने भाई की हत्या के विषय में सुभाष ने ऑपइंडिया को बताया, “जब वो लोग उस व्यक्ति को पीट रहे थे तो मेरे भाई ने बस इतना कह दिया कि क्या उसे मार दोगे? इस पर भीड़ उस पर हमलावर हो गई और उस पर हॉकी स्टिक, पाइप और डंडों से हमला किया। वह 100-200 लोग थे, वे मेरे भाई को घर से 100 फीट दूर उठा ले गए और वहाँ उसकी बेरहमी से पिटाई की। उसका गला घोंट दिया गया और उसकी पाइप मार कर हत्या कर दी गई।

लाश तक नहीं उठाने दी, पत्थर बरसाए

रिपोर्ट्स में बताया गया है कि राजूभाई कि हत्या के बाद भी मुस्लिम भीड़ का मन नहीं भरा। सुभाष ने बताया कि उन्होंने लाश तक नहीं उठाने दी और लगातार पत्थर बरसाते रहे। सुभाष ने बताया, “मेरे भाई की मौके पर ही मौत हो गई थी। जब कुछ लोग उसकी लाश उठाने पहुँचे तो वो लोग पत्थर बरसा रहे थे। वहाँ पत्थरों की बरसात हो रही थी जिससे कोई भी लाश के पास ना पहुँच सके। इसके बाद एक भाई हिम्मत करके वहाँ पहुँचा और देखा कि राजूभाई की लाश वहाँ पड़ी है।”

“ज्यादातर हिन्दू यहाँ से भाग गए, हमें भी भगाना चाहते हैं”

सुभाष ने बताया कि आसपास की अधिकांश जनसंख्या मुस्लिम है। पहले यहाँ मोदी और शाह जाति के कुछ लोग रहते थे लेकिन इन मुस्लिमों की प्रताड़ना की वजह से वह यहाँ से पलायन कर गए। यहाँ केवल भोई समाज के घर हैं जिन्हें अब तंग किया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि मुस्लिम लोग हिन्दुओं के लड़कों को सड़क पर पीटते हैं। उन्होंने बताया कि इस तरह की प्रताड़ना देकर मुस्लिम यहाँ से भगाना चाहते हैं। उन्होंने बताया कि यहाँ कि स्थिति बहुत खराब है।

सुभाष ने ऑपइंडिया को बताया कि हत्या के 3 दिनों के बाद भी मात्र 4 लोगों की गिरफ्तारी हुई है। बाकी फरार हैं। उन्होंने सरकार से न्याय की माँग की है। पुलिस ने ऑपइंडिया को बताया है कि इस मामले में पाँच लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है और बाकी की तलाश जारी है। सुभाष ने बताया है कि इस घटना के बाद बृहस्पतिवार को भी मुस्लिमों ने पत्थर बरसाए। अभी यहाँ पर माहौल को शांत करने के लिए बड़ी संख्या में पुलिसबल तैनात है।

हिन्दू संगठनों ने दिया 48 घंटे का अल्टीमेटम

यहाँ राजूभाई की हत्या के बाद एक तरफ जहाँ स्थानीय हिन्दू गुस्से में हैं, वहीं दूसरी तरफ हिन्दू संगठन भी पीड़ित परिवार के साथ खड़े हैं। ‘विश्व हिंदू परिषद’ (VHP) के नेता हितेंद्रसिंह राजपूत ने ऑपइंडिया से बात करते हुए कहा, “हमने पीड़ित परिवार से मिलकर उनका दुःख बाँटने का प्रयास किया है। उनके परिवार को न्याय दिलाने के लिए हम उनके साथ हैं। हमने पुलिस-प्रशासन को 48 घंटे का अल्टीमेटम दिया है। अगर आरोपितों को गिरफ्तार नहीं किया गया तो ‘विश्व हिंदू परिषद’ और ‘बजरंग दल’ सहित सड़कों पर उतरेंगे और न्याय के लिए संघर्ष करेंगे।” उन्होंने पुलिस प्रशासन के विरुद्ध अपनी नाराजगी भी जाहिर की है।

उन्होंने कहा है कि जिस इलाके में घटना हुई, वहाँ की जनसांख्यिकी भी चिंता का विषय है। उनका कहना है कि हिंदू यहाँ से पलायन कर रहे हैं, ऐसे में अशांत क्षेत्र धारा लागू करने की माँग जोर पकड़ रही है। उन्होंने यहाँ अशांत क्षेत्र धारा लागू करने की माँग की। उन्होंने इसके लिए भविष्य में आन्दोलन की चेतावनी भी दी है।

क्या था पूरा मामला?

बुधवार रात करीब 10 बजे साबरकाँठा जिले के अंतर्गत आने वाले प्रांतिज के खोडियार कुवा मोटामाध इलाके में लाठी, लोहे के रॉड और पत्थर से लैस 30 गुंडों की मुस्लिम भीड़ ने एक हिंदू परिवार पर हमला कर राजू भोई की हत्या कर दी। इसके पीछे आपसी लेनदेन का मामला बताया बताया गया था। पुलिस ने 30 लोगों के खिलाफ हत्या समेत अन्य कई मामलों में FIR दर्ज की है।

FIR में अयाज कुरैशी, मुनाफ कुरैशी, अयूब कुरैशी, राशिद मियाँ, इमरान मियाँ कुरैशी, मकबूल मियाँ कुरैशी, जानी कमरूद्दीन, रईस मियाँ, मेहबूब खान, मालेक, समीर, मनन हारुन, निसार भाई, रफीक भट्टे, निसार मियाँ, बाबू अकबर, यूनुस मियाँ और फिरोज मियाँ की पहचान हमलावरों के रूप में हुई है।

हिंदू विरोधी हिंसा में नाम, ISI से जिसका लिंक… उसे ममता बनर्जी ने बनाया राज्य सभा सांसद: संदेशखाली पर TMC जो कर रही, वही उसका DNA

संदेशखाली में हिंदू महिलाओं की आपबीती सुन देश सन्न है। लेकिन बंगाल मुख्यमंत्री और तृणमूल कॉन्ग्रेस की प्रमुख ममता बनर्जी अपने पार्टी नेताओं से सवाल तक नहीं कर रहीं। उलटा वह उन्हें क्लीनचिट दे रही हैं और इसके लिए भाजपा-आरएसएस को जिम्मेदार बता रही हैं। उन्होंने संदेशखाली को आरएसएस बंकर कहा है। साथ ही अपने नेता शाहजहाँ शेख का बचाव करते हुए ये कहा कि जमीन हड़पने और यौन उत्पीड़न के जो इल्जाम सामने आए हैं वो महिलाओं ने दबाव में दिए।

ऐसा पहली बार नहीं है कि तृणमूल कॉन्ग्रेस की सुप्रीमो किसी ऐसे शख्स का बचाव कर रही हों जिसपर हिंदू विरोधी घटनाओं में शामिल होने का इल्जाम हो। बीते समय में भी वह कई हिंदू विरोधी नेताओं का पक्ष ले चुकी हैं। इसके अलावा एक बार तो उन्होंने पाकिस्तान के जन्मे हिंदू विरोधी नेता को राज्यसभा तक पहुँचा दिया था। उस नेता का नाम अहमद हसन इमरान था।

आतंकी संगठनों से लिंक से लेकर हिंदू विरोधी हिंसा में था अहमद हसन का नाम

अहमद हसन इमरान का जन्म कथित तौर पर पूर्वी पाकिस्तान के सिलहट के श्रीहट्टा के एक गाँव में हुआ था और वह बांग्लादेश के बनने से पहले 1970-71 में पूर्वी पाकिस्तान से भारत में आया था। इमरान ने पश्चिम बंगाल में ‘कलाम’ नाम की एक बंगाली पत्रिका में कार्यकारी संपादक के रूप में काम किया।

हालाँकि, बाद में उसने पत्रिका को शारदा समूह के प्रमुख सुदीप्त सेन को बेच दिया। इसके अलावा इमरान ने बांग्लादेशी दैनिक नया दिगंता के लिए भारत संवाददाता के रूप में भी काम किया था। आज नया दिगंता जमात-ए-इस्लामी बांग्लादेश का मुखपत्र है।

अहमद हसन इमरान के बारे में खुफिया एजेंसियों की जाँच कहती हैं कि उसके पाकिस्तान की ISI से संबंध थे। वह अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय में (अब) प्रतिबंधित इस्लामी आतंकवादी संगठन स्टूडेंट्स इस्लामिक मूवमेंट ऑफ इंडिया (सिमी) का संस्थापक सदस्य भी था। इसके अलावा उसने जमात-ए-इस्लामी (पहले जमात-ए-इस्लामी बांग्लादेश, जेएमबी के नाम से जाना जाता था), जमात-उल-मुजाहिदीन और अन्य इस्लामी आतंकवादी संगठनों के लिए भी काम किया।

खुफिया रिपोर्ट में ये भी बताया गया कि अहमद हसन इमरान 1977 के बाद नियमित रूप से बांग्लादेश जाता था और जेएमबी आतंकवादियों से मिलता था। 2001 में, अहमद हसन इमरान ने हावड़ा में इस्लामिक डेवलपमेंट बैंक (आईडीबी) द्वारा आयोजित इस्लामिक दर्शन पर एक सेमिनार में भाग लिया था। यहाँ जेएमबी आतंकी गुलाम आजम के बेटे ने कहा था कि इस्लाम एक राष्ट्र से बड़ा है। इस सेमिनार से एक साल पहले इमरान की पत्रिका ‘कलाम’ की ओर से भी एक सेमिनार आयोजित किया था जिसमें जमात के आतंकवादी अबुल कासेम अली और अबू जाफर ने भाग लिया था।

नलियाखाली गाँव में हिंदू विरोधी हिंसा कराने वाला था अहमद हसन इमरान

13 फरवरी 2013 को मौलवी रोहुल कुद्दुस की कथित हत्या को लेकर कट्टरपंथी इस्लामी भीड़ ने नलियाखाली गाँव के हिंदुओं पर कहर बरपाया था। उस हिंदू विरोधी हिंसा का मुख्य साजिशकर्ता भी अहमद हसन इमरान को बताया जाता है। इस हिंसा में नलियाखाली गाँव, जो दक्षिण 24 परगना जिले के कैनिंग पुलिस स्टेशन परिसर के अंतर्गत आता है, वहाँ लगभग 10,000 लोगों की भीड़ ने नलियाखली और पड़ोसी हेरोभंगा, गोपालपुर और गोलाडोगरा गाँवों में 200 घरों को जला दिया था। रिपोर्ट बताती है कि तब ये भीड़ बड़ी संख्या में कोलकाता से ट्रक में भरकर नलियाखली लाई गई थी। भीड़ के हमले में कई पुलिस अधिकारी गंभीर रूप से घायल हो गए थे।

हिंसा के बाद हिंदुओं के जले घर (तस्वीर साभार: NDTV)

उसी दौरान जयनगर पुलिस स्टेशन के बारुईपुर क्षेत्र में एक दर्जन हिंदू स्वामित्व वाली दुकानों को लूट लिया गया। इसके बाद, कैनिंग, जयनगर, कुलतली और बसंती पुलिस थाना क्षेत्रों के आसपास के क्षेत्रों में भी हिंसा की सूचना मिली थी। बाद में तत्कालीन जिला खुफिया ब्यूरो (डीआईबी) ने जिला पुलिस अधीक्षक को दो पेज की रिपोर्ट भेजी थी। (मामला संख्या: 84, दिनांक 19.02.2013, आईपीसी की धारा 394/302/307/153 ए और शस्त्र अधिनियम की धारा 25/27)।

डीआईबी की रिपोर्ट में कहा गया था कि अहमद हसन इमरान के उकसावे के कारण, विभिन्न स्थानों से बड़ी संख्या में मुस्लिम युवा राजाबाजार, मेटियाब्रुज़, मोगराहाट, बसंती और अन्य स्थान पर इकट्ठा हुए थे। रिपोर्ट में ये भी लिखा था- “…अहमद हसन इमरान और रहमान के बीच विवाद है। यदि हम रहमान से मिलें, तो उसकी (अहमद हसन) और अन्य लोगों की गुप्त गतिविधियों के संबंध में अधिक जानकारी और सबूत इकट्ठा करने की पूरी संभावना है, जिनके कारण पूरा माहौल खराब हो रहा है और सांप्रदायिकता फैल रही है।” रिपोर्ट में यह भी कहा गया था कि अहमद हसन विदेशी धन इकट्ठा करता है और चोरी-छिपकर ऐसी हिंसाओं को अंजाम दिलवाता है।

डीआईबी रिपोर्ट (साभार: इंडिया टुडे)

टीएमसी ने अहमद को भेजा राज्यसभा

2013 की हिंसा की घटना पर डीआईबी रिपोर्ट में स्पष्ट रूप से कहा गया था कि अहमद हसन इमरान मुस्लिम युवाओं को भड़काने और उन्हें बम और अन्य हथियारों के साथ प्रभावित क्षेत्र में भेजने के लिए जिम्मेदार था। लेकिन, बावजूद इस रिपोर्ट के 2014 में मुस्लिम समुदाय का समर्थन हासिल करने के लिए इमरान को तृणमूल कॉन्ग्रेस ने राज्यसभा की सदस्यता से पुरस्कृत किया था।

ऐसे में सोचिए जब तृणमूल कॉन्ग्रेस आतंकवादी समूहों से संबंध रखने के आरोपित और हिंदुओं के खिलाफ हिंसा भड़काने वाले एक पाकिस्तानी नागरिक को राज्यसभा भेज सकती है, तो टीएमसी प्रमुख द्वारा एक अन्य हिंदू विरोधी शाहजहाँ शेख को समर्थन देता देखना कहाँ आश्चर्य की बात है।

शारदा चिट फंड में नाम

दिलचस्प बात यह है कि अहमद हसन इमरान का नाम अन्य आतंकी संबंधों, हिंदुओं के खिलाफ हिंसा भड़काने में शामिल होने के अलावा शारदा चिट फंड घोटाले में भी आया था। 2014 में, टीएमसी सांसद अहमद हसन इमरान से प्रवर्तन निदेशालय ने शारदा समूह के मालिक सुदीप्त सेन के साथ उनके संबंधों पर पूछताछ की थी। ईडी अधिकारियों ने इमरान से सवाल किया था कि वह बंगाली दैनिक कलाम कैसे चला रहे थे।

तुष्टिकरण की राजनीति में जुटी टीएमसी

गौरतलब है कि टीएमसी वर्षों से मुस्लिम समुदाय के तुष्टीकरण की राजनीति में लगी हुई है। आज संदेशखाली मामले में पीड़िताओं का दावा है कि इलाके की विवाहित हिंदू महिलाओं को उनकी उम्र और सुंदरता के आधार पर उठाया जाता है और टीएमसी के लोग ‘संतुष्ट’ होने तक उनका रात-दिन उनका उत्पीड़न करते हैं, लेकिन ममता बनर्जी इन आरोपों को भाजपा-आरएसएस की साजिश कहकर खारिज कर रही हैं। जो कि बिलकुल हैरान करने वाला नहीं है।

आखिरकार जब टीएमसी अहमद हसन इमरान जैसे किसी व्यक्ति का समर्थन कर सकती है, तो यह आश्चर्य की बात नहीं होगी अगर पार्टी शाहजहाँ शेख को राज्यसभा के लिए नामांकित करती है और उनके कामों पर पर्दा डालती है।

केजरीवाल का बहाना नंबर #6: न अदालत पहुँचे, न ED को दिया अभी तक समय – विधानसभा में विश्वासमत का खेला खेल

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल एक बार फिर शराब घोटाले में पूछताछ के कन्नी काटते नजर आए। प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने बार-बार समन देने के बाद भी पूछताछ के लिए हाजिर नहीं होने पर सीएम केजरीवाल के खिलाफ दिल्ली के राऊज एवेन्यू कोर्ट में शिकायत दर्ज कराई है। वहीं, कोर्ट ने सीएम केजरीवाल को 17 फरवरी 2024 को कोर्ट में हाजिर होने के लिए कहा था।

अरविंद केजरीवाल 17 फरवरी 2024 को कोर्ट में भी नहीं पेश हुए। हालाँकि, सुनवाई के दौरान वे वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए कोर्ट से जुड़े रहे, लेकिन व्यक्तिगत रूप से वे कोर्ट की कार्यवाही में शामिल नहीं हुए। उनके वकील ने वकील ने कोर्ट को बताया कि दिल्ली सरकार के बजट सत्र और विश्वास प्रस्ताव की वजह से वे पेश नहीं हो पा रहे हैं।

केजरीवाल ने कोर्ट से कहा कि, “मैं कोर्ट आना चाहता था, लेकिन बजट और विश्वास प्रस्ताव की वजह से मैं नहीं आ सका। अगली तारीख पर कोर्ट आ जाऊँगा।” इस दौरान ईडी ने इसका विरोध नहीं किया। अब इस मामले में 16 मार्च 2024 को सुनवाई होगी। वहीं, आज दिल्ली विधानसभा में विश्वासमत पर भी चर्चा होने वाली है।

अरविंद केजरीवाल के वकील रमेश गुप्ता ने बताया कि केजरीवाल कोर्ट में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिये हाजिर हुए थे। अगली तारीख 16 मार्च 2024 की मिली है। इस तारीख पर अगर सब कुछ ठीक रहा तो अरविंद केजरीवाल अदालत में पेश होंगे। बता दें कि अरविंद केजरीवाल के वकील ने व्यक्तिगत पेशी से छूट के लिए अदालत में आवेदन दिया है।

दरअसल, प्रवर्तन निदेशालय (ED) द्वारा पूछताछ के लिए लगातार बुलाए जाने के बाद बी सीएम केजरीवाल सहयोग नहीं कर रहे थे। इसके बाद ED ने दिल्ली के राऊज एवेन्यू कोर्ट में इसकी शिकायत की थी। कोर्ट ने उन्हें 17 फरवरी को कोर्ट में पेश होने के लिए कहा था। हालाँकि, इस बार भी वे बचते नजर आए और बजट एवं विश्वासमत के नाम पर बच निकले।

ईडी ने शराब घोटाले में पूछताछ के लिए सीएम केजरीवाल को पाँच बार समन भेजा था। प्रवर्तन निदेशालय ने उन्हें पूछताछ के लिए 2 नवंबर 2023 और 21 दिसंबर 2023 के बाद इस साल 3 जनवरी, 18 जनवरी और 2 फरवरी 2024 को पूछताछ के लिए बुलाया था। हालाँकि, वे पूछताछ में शामिल नहीं हुए। इसके बाद भी एजेंसी ने उन्हें छठा समन भेजते हुए 19 फरवरी को पूछताछ के लिए बुलाया है।

दरअसल, ईडी ने नवम्बर 2023 में जब केजरीवाल को समन भेजा गया था तो उन्होंने कहा था कि वह मध्य प्रदेश चुनाव प्रचार के लिए जा रहे हैं। हालाँकि, उनकी पार्टी मध्य प्रदेश में 90% सीट पर अपनी जमानत नहीं बचा पाई थी। इसके बाद दिसम्बर में जब उन्हें जाँच एजेंसी ने बुलाया तो उन्होंने कहा कि वे विपश्यना के लिए पंजाब जा रहे हैं। इसलिए वे नहीं आ सकते।

मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ईडी द्वारा भेजे गए समन को राजनीतिक साजिश बताते आए हैं। वह यह भी सवाल करते रहे हैं कि एक मुख्यमंत्री को ईडी किस हैसियत से पूछताछ के लिए बुला रही है। अरविंद केजरीवाल कहते रहे हैं कि उन्हें गिरफ्तार करने की साजिश की जा रही है, ताकि वे लोकसभा चुनावों में अपनी पार्टी AAP के लिए चुनाव प्रचार ना कर सकें।