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क़तर पर सुब्रमण्यन स्वामी के झूठ की पोल शाहरुख खान ने खोली, कहा – सारा श्रेय भारत सरकार का, मेरी इसमें भूमिका नहीं

हाल ही में भारत ने अपने 8 पूर्व नौसेना अधिकारियों की क़तर की जेल से रिहाई सुनिश्चित की। इन सभी को क़तर में सज़ा-ए-मौत सुनाई गई थी, लेकिन भारत के हस्तक्षेप के बाद इसे आजीवन कारावास में परिवर्तित कर दिया गया था। पूर्व नौसैनिकों ने रिहाई के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का धन्यवाद दिया। वहीं भाजपा के पूर्व राज्यसभा सांसद सुब्रमण्यन स्वामी ने कह डाला कि बॉलीवुड अभिनेता शाहरुख़ खान के हस्तक्षेप पर ये संभव हो पाया।

हालाँकि, अब खुद शाहरुख़ खान ने इस पर बयान जारी कर के सब कुछ स्पष्ट कर दिया है। शाहरुख़ खान की मैनेजर पूजा डडलानी ने अभिनेता के कार्यालय द्वारा जारी किया गया बयान सोशल मीडिया पर शेयर किया है। इसमें कहा गया है कि क़तर से पूर्व नौसेना अधिकारियों की रिहाई के संबंध में शाहरुख़ खान की कथित भूमिका वाली ख़बरों के संबंध में अभिनेता का कार्यालय द्वारा स्पष्ट किया जाता है कि इसमें उनकी भागीदारी का कोई भी दावा एकदम गलत है।

SRK के दफ्तर ने कहा है कि ऐसी खबरें निराधार हैं। साथ ही ये भी बताया गया है कि इस अभियान को सफल बनाने का सारा श्रेय भारत सरकार के अधिकारियों को जाता है और शाहरुख़ खान की इसमें कोई भूमिका नहीं है। साथ ही बयान में जोड़ा गया कि कूटनीति और शासन-कार्य से जुड़े सभी मामले हमारे सक्षम नेताओं द्वारा देखे जाते हैं। बयान में कहा गया है कि सभी भारतीयों की तरह शाहरुख़ खान भी पूर्व नौसेना अधिकारियों की वापसी से खुश हैं।

बता दें सुब्रमण्यन स्वामी के ट्वीट के बाद ये चर्चाएँ शुरू हुई थीं। उन्होंने लिखा था, “मोदी को अपने साथ सिनेमा स्टार शाहरुख़ खान को लेकर क़तर जाना चाहिए। जब केंद्रीय विदेश मंत्रालय (MEA) और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) क़तर के शेखों को मनाने में विफल हो गए, तब मोदी ने शाहरुख़ खान से विनती की कि वो हस्तक्षेप करें। इसके बाद हमारे पूर्व नौसेना अधिकारियों की रिहाई के लिए क़तर के शेखों के साथ एक बहुत ही खर्चीली डील हुई।”

‘विरोध-प्रदर्शन से रोक नहीं सकते, बल प्रयोग हो अंतिम विकल्प’: किसानों के ‘दिल्ली मार्च’ पर हाई कोर्ट, कहा- मिलकर निकालें हल

पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय ने मंगलवार (13 फरवरी 2024) को दिल्ली-एनसीआर में चल रहे किसानों के विरोध से संबंधित याचिकाओं पर केंद्र, दिल्ली, पंजाब और हरियाणा सरकार को नोटिस भेजा है। कोर्ट ने केंद्र और राज्य सरकारों सहित सभी पक्षों से मामले में स्थिति रिपोर्ट दाखिल करने को कहा है। इसके साथ ही प्रदर्शनकारियों पर बल प्रयोग नहीं करने का निर्देश दिया है।

पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश गुरमीत सिंह संधवालिया और न्यायमूर्ति लपीता बनर्जी की खंडपीठ ने विवादों के सौहार्द्रपूर्ण समाधान की सलाह दी और किसानों द्वारा विरोध प्रदर्शन के लिए क्षेत्रों की पहचान करने का सुझाव दिया। इसकी अगली सुनवाई गुरुवार (15 फरवरी 2024) को होगी।

दरअसल, हाई कोर्ट में दायर एक याचिका में प्रदर्शनकारी किसानों के खिलाफ कार्रवाई की माँग की गई है। वहीं, दूसरी याचिका में हरियाणा की सीमाओं को सील करने और कुछ जिलों में इंटरनेट निलंबित करने की राज्य सरकार की कार्रवाई को चुनौती दी गई थी। याचिका में कहा गया है कि ये उपाय नागरिकों को सूचना और संचार के अधिकार से वंचित करके स्थिति को और खराब कर देते हैं।

इसके विपरीत, वकील अरविंद सेठ ने एक अलग जनहित याचिका (पीआईएल) में विरोध प्रदर्शन के मद्देनजर पूरे पंजाब और हरियाणा में कानून और व्यवस्था बनाए रखने के लिए निवारक उपाय करने के लिए केंद्र और राज्य सरकारों को निर्देश देने की माँग की है। इसमें कहा गया है कि लोगों को विरोध करने का अधिकार है और उन्हें इससे रोका नहीं जा सकता।

उधार, हाईकोर्ट ने पंजाब और हरियाणा राज्यों से ये भी देखने को कहा है कि प्रदर्शन एक तय जगह पर हो और सभी पक्ष मिलकर विवाद का हल निकालें। याचिकाकर्ता ने कहा, “भारत एक लोकतांत्रिक गणराज्य है। यह धर्मनिरपेक्षता, लोकतंत्र, गणतंत्र के स्तंभों पर आधारित है। अनुच्छेद 13 से 40 इन सिद्धांतों की पृष्ठभूमि है। मौलिक अधिकार सेंसरशिप के बिना स्वतंत्रता के प्रयोग की अनुमति देते हैं। हरियाणा सरकार ने किसानों को रोका है। अखबार की रिपोर्ट के मुताबिक सड़कों पर कीलें और बिजली के तार लगे हैं।”

इस पर हाई कोर्ट ने कहा कि लोगों की सुरक्षा के लिए राज्य को भी कदम उठाना होगा। उनके भी अधिकार हैं। हाईकोर्ट ने के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि किसी भी स्थिति में बल प्रयोग अंतिम विकल्प होना चाहिए। कोर्ट ने कहा कि अभिव्यक्ति के मौलिक अधिकार में संतुलन होना चाहिए। कोई भी अधिकार अलग नहीं है। सावधानी और एहतियात को ध्यान में रखा जाना चाहिए।

कोयंबटूर सीरियल ब्लास्ट लाल कृष्ण आडवाणी को निशाना बनाकर किए 19 धमाकों में 58 की हुई थी मौत, मास्टरमाइंड आतंकी SA बाशा को डीएमके सरकार ने छोड़ा; अल-उम्मा का संस्थापक की रिहाई पर SC ने लगाई थी रोक

तमिलनाडु की डीएमके सरकार ने कोयंबटूर सीरियल ब्लास्ट 1998 के मुख्य आरोपित एसए बाशा समेत तीन आरोपितों को जेल से रिहा कर दिया है। इन्हें उम्रकैद की सजा मिली थी। सुप्रीम कोर्ट ने इनकी रिहाई पर रोक लगाई थी। कोयंबरटूर में उस समय बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष लालकृष्ण आडवाणी को निशाना बनाकर किए गए 19 सीरियल ब्लास्ट्स में 58 लोगों की जान चली गई थी, जबकि 200 से ज्यादा लोग घायल हुए थे।

हैरानी की बात ये है कि खुद को धर्मविरोधी बताने वाली डीएमके की सरकार ने उस एसए बाशा को रिहा किया है, जो तमिलनाडु में मुस्लिम कट्टरपंथ और आतंकवाद का चेहरा रहा था। इसी केस में बाशा का भाई नवाब खान भी उम्रकैद की सजा पाया और उसका बेटा मोहम्मद तलहा 23 अक्टूबर 2023 को हुए सिलेंडर ब्लास्ट में गिरफ्तार हुआ है, लेकिन डीएमके सरकार इन आतंकी गतिविधियों के प्रति आँख मूँदकर राष्ट्र विरोधी कार्य कर रही है।

सीएनएन-न्यूज18 के पत्रकार राहुल शिवशंकर के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट द्वारा उनके अपराधों को ‘जघन्य’ करार दिए जाने और उन्हें जमानत देने से इनकार करने के बावजूद सरकार ने मास्टरमाइंड एसए बाशा और दो अन्य को रिहा कर दिया।

तमिलनाडु सरकार के इस फैसले पर राज्य बीजेपी अध्यक्ष के. अन्नादुराई ने डीएमके सरकार और मुख्यमंत्री एमके स्टालिन पर जोरदार हमला बोला है। उन्होंने एक वीडियो जारी किया और कहा, “यह बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है कि डीएमके सरकार कोयंबटूर धमाके के सभी 16 दोषियों को रिहा करने की पूरी कोशिश कर रही है। वो इस काम को पूरा करने के लिए अपनी पूरी ताकत लगा रही है, सिर्फ लोकसभा चुनाव में जीत हासिल करने के लिए। हम सभी जानते हैं कि 14 फरवरी 1998 का दिन तमिलनाडु और कोयंबटूर के लोग कभी भूल नहीं पाएँगे, क्योंकि तमिलनाडु में कभी उस तरह का सीरियल ब्लास्ट नहीं हुआ। उन धमाकों में 58 लोग मारे गए, तो 200 से ज्यादा लोग घायल हो गए। इन धमाके के अलावा 24 जगहों पर बम भी पाए गए थे।”

अन्नामलाई ने अपने वीडियो में आगे कहा, “साल 2009 में 7 नवंबर को 9 दोषियों को रिहा कर दिया गया था।” अन्नामलाई ने तमिलनाडु के सभी राजनीतिक दलों पर 1998 के कोयंबटूर विस्फोट मामले में सभी दोषियों की रिहाई सुनिश्चित करने में डीएमके की मदद करने का आरोप लगाया।

बीजेपी नेता अन्नामलाई ने आगे कहा, “अक्टूबर 2023 में सुप्रीम कोर्ट ने सभी 16 दोषियों की जमानत याचिका को यह कहकर खारिज कर दिया था कि आतंकवाद बहुत गंभीर अपराध है। डीएमके सरकार ने जस्टिस आदिनाथ आयोग की आड़ लेकर इन्हें रिहा कराने की कोशिश की है। इस रिपोर्ट में आतंकियों की रिहाई की सलाह दी गई थी।”

उन्होंने आगे कहा, “ये हैरानी की बात है कि साल 2022 में दीपावली से ठीक पहले एक आत्मघाती हमलावर ने कोयंबटूर शहर को निशाना बनाया। किस्मत से उस धमाके में सिर्फ आत्मघाती हमलावर ही मारा गया, आम लोगों को कोई नुकसान नहीं पहुँचा। इस मामले में एनआईए जाँच कर रही है। ये मॉड्यूल आईएसआईएस से प्रेरित है, जिसमें कई आतंकवादियों को गिरफ्तार किया गया। अब डीएमके सरकार उन सभी को रिहा करना चाहती है, मुझे समझ नहीं आता कि डीएमके की मानसिकता क्या है।”

अन्नामलाई ने आशा जताई कि डीएमके सरकार साल 2009 में जो कर चुकी है, वो आगे से ऐसा न करे। उन्होंने कहा, “भारत में धार्मिक तुष्टिकरण वाला सबसे पहला नाम कोई होगा, तो ये डीएमके है।” उन्होंने कहा, “हम अन्य कैदियों की रिहाई के खिलाफ नहीं है, लेकिन आतंकवाद से जुड़े अपराध सबसे गंभीर हैं। इन्हें रिहा नहीं किया जाना चाहिए।”

सन न्यूज ने 7 फरवरी 2024 को एक वीडियो पोस्ट किया था, जिसमें कोयंबटूर धमाके में शामिल तीन आतंकवादी तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन और डीएमके सरकार की तारीफ कर रहे थे। इन तीनों ही आतंकियों के चेहरे पर अपने कारनामों को लेकर कोई पछतावा नहीं दिखा, जिसके बाद ये वीडियो अब सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है।

लाल कृष्ण आडवाणी और हिंदुओं को मारना था लक्ष्य

कोयंबटूर सीरियल ब्लास्ट 1998 का मुख्य आरोपित एसए बाशा था, जो अल-उम्मा नाम के कट्टरपंथी मुस्लिम संगठन का अध्यक्ष था। ये धमाके साल 1997 में कोयंबटूर में हुए हिंदू-मुस्लिम दंगों के विरोध में किए गए थे, जिसमें लाल कृष्ण आडवाणी की फ्लाइट लेट हो गई थी, जिसकी वजह से वो बाल-बाल बच गए थे। एक बम ब्लास्ट तो उनके लिए बनाए गए मंच की जगह से सिर्फ 800 मीटर की दूरी पर हुआ था, तो 70 किलो विस्फोटक वाली कार में रखे बम को डिफ्यूज कर दिया गया था।

ये ब्लास्ट 14 से 17 फरवरी 1998 को किए गए थे। उसी दिन शाम को 4 बजे लाल कृष्ण आडवाणी की रैली होनी थी। लाल कृष्ण आडवाणी की हत्या के लिए कई आतंकियों ने अपने शरीर पर विस्फोटक बाँधे थे, लेकिन उन्होंने पुलिस ने पहले धमाके के बाद पकड़ लिया था।

बाशा और अल-उम्मान ने इस आतंकी साजिश को ‘ऑपरेशन अल्लाहु अकबर’ नाम दिया गया था। बाशा की योजना कुछ ही घंटों में तीन दर्जन जगहों पर धमाके की थी, लेकिन इसमें से कई जगहों पर धमाके हो नहीं पाए। इस बड़े सीरियल ब्लास्ट में सभी धमाके 12 किलोमीटर की रेडियस में 11 जगहों पर किए गए थे, जिसमें हिंदुओं को निशाना बनाया गया। ये सभी धमाके हिंदुओं की प्रॉपर्टी या फिर भीड़भाड़ वाले इलाकों में किए गए थे। इन धमाकों की वजह से लोकसभा चुनाव को कुछ दिनों के लिए स्थगित कर दिया गया था।

कँटीले तार, रेलवे वाले पत्थर, मारो-भगाओ चिल्लाती भीड़… नगर निगम कर्मियों ने बताया हल्द्वानी में कैसे इस्लामी ने बरपाया कहर, बोले – हमें हनुमान जी ने बचाया

उत्तराखंड के नैनीताल जनपद के हल्द्वानी स्थित बनभूलपुरा में प्रशासन द्वारा अवैध मदरसा और मस्जिद ध्वस्त किए जाने को लेकर भड़की भीड़ ने थाने और पेट्रोल पंप को फूँक दिया, पुलिसकर्मियों को ज़िंदा जलाने की कोशिश की। पत्रकारों तक को नहीं बख्शा गया। महिला पुलिसकर्मियों को जान बचाने के लिए भागना पड़ा। उनके कपड़े फाड़े गए। स्थानीय पत्रकारों ने बताया कि इस्लामी कट्टरपंथी भीड़ नाम पूछ-पूछ कर मार रही थी, मुस्लिमों को छोड़ दिया जा रहा था और हिन्दुओं को निशाना बनाया जा रहा था।

हल्द्वानी के कॉन्ग्रेस नेता गब्बर वाल्मीकि ने बताया है कि जहाँ पर दंगे भड़के, अगले दिन वहीं पर सफाईकर्मियों पर भी पत्थरबाजी हुई। उन्होंने पुलिस पर हमला करने वालों पर NSA (राष्ट्रीय सुरक्षा कानून) लगाए जाने को एक सही फैसला करार देते हुए कहा कि रेलवे लाइनों के पत्थर जमा कर के हमले के लिए रखा गया था। उन्होंने ये भी कहा कि इनके भीतर के ख़ुफ़िया राज़ बाहर नहीं निकल पाते हैं। जवाहर नगर के वार्ड संख्या 13 में रहने वाले गब्बर वाल्मीकि ने बताया कि प्रशासन के खिलाफ जाना इनकी सोची-समझी साजिश थी।

उन्होंने बताया कि हमले के लिए सरे इंतजाम पहले से रखे गए थे। नगर निगम के लोगों पर सोमवार (12 फरवरी, 2024) को भी पत्थर चले हैं। गब्बर वाल्मीकि जिला कॉन्ग्रेस के युवा सचिव हैं। उन्होंने अब्दुल मलिक को हल्द्वानी का सबसे अमीर आदमी बताया। उन्होंने कहा कि हमलावरों पर रासुका लगना चाहिए, पुलिस न हो तो कत्लेआम हो जाता। गब्बर वाल्मीकि ने बताया कि ऊपर से कटे हुए पत्थर फेंके जा रहे थे, नीचे वाले व्यक्ति का पत्थर ऊपर पहुँच ही नहीं पाएगा।

ऑपइंडिया ने एक अन्य सफाईकर्मी मिथुन वाल्मीकि से भी बातचीत की। उन्होंने बताया कि 20-25 सफाईकर्मियों को लेकर वो नगर निगम की गाड़ी चलाते हुए गए थे, लेकिन महिलाओं की भीड़ सामने आई और पुलिस से झड़प करने लगी, फिर बच्चों को आगे किया गया। उन्होंने बताया कि अचानक से पथराव शुरू हो गया, गाड़ी घेर लिया गया तो उतर कर भागना पड़ा। इसी क्रम में मिथुन वाल्मीकि के पाँव भीड़ द्वारा बिछाई गई तार में फँस गया, फिर उन पर ईंटें बरसाए गए।

फिर वो किसी तरह जान बचा कर निकले। उन्होंने बताया कि उनकी पत्नी और 2 बेटे हैं, माँ-बाप भी नहीं हैं, न भागते तो वो नहीं भाग पाते। उन्होंने बताया कि भीड़ ने सरिया भी ले रखा था, पुलिस वाले भी गिरते-पड़ते भाग रहे थे जान बचा कर। सफाईकर्मी मिथुन वाल्मीकि ने बताया कि उनकी तरफ से सब मारो-भगाओ चिल्ला रहे थे, ज़िंदा जलाने की साजिश थी। उनका इलाज सरकार चला रही है, उनका पाँव टूट गया है। अब वो अपनी नौकरी भी एकाध महीने ज्वाइन नहीं कर पाएँगे।

मिथुन वाल्मीकि ने बताया कि भाग कर घर पहुँचने के बाद उन्हें दर्द का एहसास हुआ। उन्होंने कहा कि बच्चे तक मार रहे थे, गाड़ी वगैरह जलाई गई, सरकारी संपत्ति जलाई गई। उन्होंने कहा कि वो मर गए तो कोई उनके घर को नहीं देखने वाला, ऐसे में वो वहाँ दोबारा काम करने नहीं जाएँगे। दलित समाज के ही एक अन्य सफाईकर्मी मनोज वाल्मीकि ने बताया कि वो निगम की तरफ से वहाँ गए थे, वहाँ महिलाओं को अधिकारी समझाने की कोशिश कर रहे थे लेकिन वापस आते समय भीड़ ने चारों तरफ से पत्थरबाजी की।

उनके हाथ में पत्थरों के कारण जख्म हुआ है। मनोज वाल्मीकि ने बताया कि दूसरे पक्ष से कोई भी व्यक्ति मारपीट करने वालों को मना नहीं कर रहा था। उनका भी इलाज सरकारी खर्च से चल रहा था। उन्होंने बताया कि पुलिस और नगर निगम का एक भी कर्मचारी नहीं है जिसे चोट न लगी हो। उनका एक 15 साल का लड़का और एक बेटी है, उनके खुद के घर तक नहीं हैं जबकि अतिक्रमणकारी अवैध मकान बना कर रहे हैं, कार्रवाई होने पर वो दंगे करते हैं।

मनोज वाल्मीकि कहते हैं कि उन्हें हनुमान जी ने बचाया है। उन्होंने बताया कि कई छोटे-बड़े पत्थर पड़े, गमले जैसी चीज चला कर भी मारी गई। मनोज का कहना है कि उन्होंने हनुमान जी से गुहार लगाई कि वो उन्हें बचा लें, फिर उनके भीतर किसी तरह ताकत आई और वो सीधे भाग कर अपने वाल्मीकि मोहल्ले में पहुँचे। उनकी पत्नी का रो-रो कर बुरा हाल था। सफाईकर्मियों के आगे JCB रास्ता बनाती हुई चल रही थी, वरना कँटीले तारों में उलझ कर कई लोग मारे जा सकते थे।

नगर निगम के एक अन्य दलित कर्मचारी सागर सोनकर भी घायल हैं। उन्होंने बताया कि वो दंगे के वक्त मौके पर मौजूद थे और उन्हें लगा कि उनकी मौत हो जाएगी। वो बेहोश हो गए थे। उन्होंने बताया कि ऐसा प्रतीत हो रहा था कि 6 महीने से इसकी साजिश चल रही थी। बकौल सागर सोनकर, लगातार उनका खून बह रहा था। उन्हें घर भाग कर आते-आते 7-8 घंटे लग गए, क्योंकि जिस तरफ से वो जा रहे थे उधर ही पत्थर चल रहे थे। उन्होंने बताया कि पत्थरबाजों को उनके समाज के लोग रोक भी नहीं रहे थे। उन्होंने बताया कि अगर वो न भागते तो उनकी हत्या कर दी जाती।

स्टेडियम में चल रहा था फुटबॉल का मैच, बिजली गिरी और खिलाड़ी की हो गई मौत : पैर-सीना झुलसा, Video देख लोगों को नहीं हो रहा विश्वास

इंडोनेशिया से एक हैरान करने वाला वीडियो सामने आया है। यहाँ एक फुटबॉल खिलाड़ी पर बीच मैदान बिजली गिर गई। बिजली गिरने के कारण उसकी मौत हो गई। यह सब इतनी तेजी से हुआ कि कोई कुछ समझ ही नहीं पाया। इस घटना का वीडियो भी अब सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है।

जानकारी के अनुसार, यह घटना शनिवार (10 फरवरी, 2024) की है। मैच इंडोनेशिया के बड़े शहर बांडुंग में एक स्टेडियम में हो रहा था, यह एक मैत्री मैच था जो कि FBI सुबांग और 2 FLO फुटबॉल क्लब के बीच खेला जा रहा था। इस खेल में जिस खिलाड़ी की बिजली गिरने से मौत हुई, उसकी पहचान 35 वर्षीय सेप्तियन रेहरजा के रूप में हुई है।

इस घटना के वायरल वीडियो में दिखता है कि रेहरजा फील्ड में बाकी साथी खिलाड़ियों से दूर खड़े होते हैं और थोड़ा आगे बढ़ते हैं। इसी बीच यहाँ तेज रोशनी होती है और उन पर बिजली गिर जाती है। बिजली गिरने से खिलाड़ी रेहरजा की मौके पर ही जमीन पर गिर जाते हैं और अचेतन अवस्था में चले जाते हैं।

उन्हें देख मैदान में एकाएक बिजली गिरने से हलचल मच जाती है। एक दूसरा खिलाड़ी रेहरजा के पास दौड़ कर जाता है। इसके बाद बाकी खिलाड़ी भी यहाँ पहुँचते हैं। बताया गया है कि बिजली गिरने के कुछ मिनट बाद तक रेहरजा की साँसे चल रही थी लेकिन बाद में उनकी मौत हो गई।

बिजली गिरने के कारण उनके पैर और सीना जल गए थे। उनकी इस अप्रत्याशित मौत से उनके फैन्स में शोक की लहर है। उनकी टीम के समर्थक सोशल मीडिया पर दुख प्रकट कर रहे हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, यह एक वर्ष के भीतर ऐसी ही दूसरी घटना है। इससे पहले के अंडर 13 खिलाड़ी की भी बिजली गिरने से मौत हो गई थी। आकाशीय बिजली गिरने से होने वाली मौतों का अभी तक कोई आधिकारिक आँकड़ा तो नहीं एकत्र किया जा सका लेकिन अलग-अलग रिपोर्ट बताती हैं कि प्रतिवर्ष इससे 6000-24000 तक मौत होती हैं।

बैरिकेड तोड़े, पुलिस पर पथराव… शंभू बाॅर्डर पर बवाल: किसानों के विरोध में कारोबारी भी जुटे, बोले- हमारे रोजगार पर लात न मारें

दिल्ली और उसके आसपास के कथित किसान अपनी माँगों को लेकर ट्रैक्टर एवं अन्य वाहनों के साथ राजधानी दिल्ली पहुँच रहे हैं। इसको देखते हुए दिल्ली बॉर्डर पर सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए है। पूरे बॉर्डर को सील कर दिया गया है। वहीं, दिल्ली के लाल किला को पर्यटकों के लिए बंद कर दिया गया है। वहीं, दिल्ली के कई मेट्रो स्टेशनों के गेट को भी बंद कर दिया गया है।

दिल्ली के गाजीपुर, सिंघु और टीकरी बॉर्डर पर लोहे और कंक्रीट के बॉर्डर लगाए गए हैं। इसके अलावा कंटीले तार, लोहे की कीलें, कंटेनर और डंपर लगाकर भी रास्ते बंद कर दिए गए हैं। सिंघु बॉर्डर पर हरियाणा से दिल्ली आने वाला ट्रैफिक पूरी तरह से रोका गया है। वहीं दिल्ली-नोएडा सड़क और NH24 पर लंबा जाम लग गया है। दिल्ली-नोएडा को जोड़ने वाले कालिंदी कुंज के रास्ते पर भी लंबा जाम लगा हुआ है।

महामाया फ्लाईओवर से ही वाहनों की कतारें लगी हुई है। दिल्ली के केंद्रीय सचिवालय मेट्रो स्टेशन का गेट 2 शाम तक बंद रहेगा। किसान आंदोलन को लेकर दिल्ली में धारा 144 लगा दी गई है। वहीं, हरियाणा में धारा 144 लागू है। चंडीगढ़ में स्कूलों को बंद कर दिया गया है। इंदिरा गाँधी अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे ने एक एडवाइजरी जारी कर यात्रियों से ट्रैफिक जाम को ध्यान में रखते हुए अपनी यात्रा की योजना बनाने का आग्रह किया है।

खबर है कि शंभू बॉर्डर पर कथित किसानों ने पुलिस बैरिकेडिंग को तोड़ दिया। यहाँ किसानों और पुलिस के बीच भिड़ंत हो गई है। उन्होंने फ्लाईओवर की रेलिंग को तोड़ दिया। इसके साथ पुलिस पर पथराव भी किया। इसके बाद पुलिस ने एक्शन लिया और आँसू गैस के गोले छोड़े। वहाँ के हालात को देखकर अन्य जगहों पर भी पुलिस ने कमर कस लिया है। खनौरी-जींद बॉर्डर पर पुलिस सतर्क है।

इस बीच किसान नेता राकेश टिकैत ने कहा, “देश में बड़ी पूँजीवादी कंपनियाँ हैं। उन्होंने एक राजनीतिक पार्टी बना ली है और इस देश पर कब्जा कर लिया है। ऐसे में दिक्कतें आएँगी ही। अगर दिल्ली मार्च कर रहे किसानों के साथ कोई अन्याय हुआ या सरकार ने उनके लिए कोई दिक्कत पैदा की तो ना वो किसान हमसे ज्यादा दूर हैं और ना दिल्ली हमसे ज्यादा दूर है।”

इन किसानों के उत्पाद के कारण दिल्ली-एनसीआर के अपने काम-धंधों पर जाने वाले लाखों लोग प्रभावित हो रहे हैं। वहीं, व्यवसायी वर्ग भी खासा प्रभावित है। कन्फेडरेशन ऑफ बहादुरगढ़ इंडस्ट्रीज की झज्जर जिला ईकाई के सदस्यों ने किसानों से आग्रह किया कि वे अपने व्यवसाय पर न्यूनतम प्रभाव सुनिश्चित करने के लिए औद्योगिक केंद्र बहादुरगढ़ में अपना विरोध प्रदर्शन न करें।

कन्फेडरेशन ऑफ बहादुरगढ़ इंडस्ट्रीज, हरियाणा के अध्यक्ष प्रवीण गर्ग ने कहा, “हम किसानों के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन उन्हें हमारे व्यापार उद्योगों के लिए समस्या नहीं पैदा करनी चाहिए। पिछले दो दिनों से इंटरनेट बंद है, जिसके कारण अनिवार्य ई-चालान/ईवे बिलिंग संभव नहीं हो पा रही है। दूसरे राज्यों में सामग्रियों का परिवहन नहीं हो पा रहा है। यहाँ के लोगों में दहशत है। केवल हमारे जिले में सालाना लगभग 50,000 करोड़ रुपए के राजस्व वाले विनिर्माण होता है। इससे उद्योगों को सीधा नुकसान है।”

बता दें कि करीब दो साल बार एक बार फिर कथित किसान दिल्ली की ओर कूच कर रहे हैं। साल 2020-21 में संयुक्त किसान मोर्चा यानी SKM के तहत 32 किसान संगठन एक बैनर के तले आई आए थे। अब ये टूटकर एसकेएम (पंजाब), एसकेएम (गैर राजनीतिक) और किसान मजदूर मोर्चा (KMM) बन गई हैं। इस बार के आंदोलन को पिछली बार की तरह सभी किसान संगठनों का समर्थन प्राप्त नहीं है।

इस बार जगजीत सिंह दल्लेवाल का संयुक्त किसान मोर्चा (अराजनैतिक) और किसान मजदूर मोर्चा इस आंदोलन की अगुवाई कर रहे हैं। ये दोनों संगठन पूर्व में SKM का हिस्‍सा रहे हैं। किसान मजदूर मोर्चा 18 किसानों का समूह है, जिसके संयोजक सरवन सिंह पंढेर हैं। दोनों ही समूहों में राजस्थान, पंजाब, हरियाणा, मध्य प्रदेश और यूपी के किसान शामिल हैं।

वहीं, साल 2020 के किसान आंदोलन का प्रमुख चेहरा रहे किसान नेता गुरनाम सिंह चढूनी ने इस बार आंदोलन से दूर हैं। चढूनी ने इस बार के किसान को लेकर सवाल खड़े किए हैं और कहा है कि इस आंदोलन से उन नेताओं को अलग रखा गया है, जो पिछले आंदोलन में शामिल थे।

ऑल इंडिया किसान सभा के वाइस प्रेसिडेंट और संयुक्त किसान मोर्चा नेता हनन मोल्ला ने कहा है कि ऑल इंडिया किसान सभा संयुक्त किसान मोर्चा का सबसे बड़ा दल है और वे इस प्रदर्शन में शामिल नहीं है। उन्होंने कहा कि किसान आंदोलन के बाद संयुक्त किसान मोर्चा से कुछ दल अलग हो गए थे और यह प्रोटेस्ट उन्होंने ही बुलाया है।

300 यूनिट बिजली एकदम FREE… वो भी हर महीने, यहाँ कीजिए अप्लाई: PM सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना लॉन्च

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने देश के 1 करोड़ घरों को सोलर ऊर्जा के जरिए मुफ्त बिजली दिलाने की योजना लॉन्च कर दी है। इस योजना का नाम ‘प्रधानमंत्री सूर्य घर: मुफ्त बिजली योजना’ रखा गया है। देश के एक करोड़ घरों पर रूफटॉप सोलर लगाने वाली इस योजना के लिए केंद्र सरकार ने आवेदन चालू कर दिए हैं और एक पोर्टल भी लॉन्च किया है।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने इस योजना के विषय में एक्स (पहले ट्विटर) पर जानकारी दी है। उन्होंने लिखा, “सतत विकास और आमजन के लाभ के लिए, हम पीएम सूर्य घर: मुफ्त बिजली योजना की शुरुआत कर रहे हैं। ₹75,000 करोड़ से अधिक के निवेश वाली इस योजना का लक्ष्य 1 करोड़ घरों को प्रतिमाह 300 यूनिट तक मुफ्त बिजली प्रदान करना है।”

आगे उन्होंने लिखा, “केंद्र सरकार इसका ध्यान रखेगी कि लोगों पर इसकी लागत का भार ना पड़े, इसके लिए सस्ते कर्ज और लोगों के खाते में सीधी सब्सिडी दी जाएगी। इस योजना के सभी पक्षों को एक ही पोर्टल पर एक साथ समायोजित किया जाएगा जिससे और भी सुविधा होगी। इस योजना को जमीन तक पहुँचाने के लिए, शहरी निकायों और ग्राम पंचायतों को रूफटॉप सोलर को बढ़ावा देने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा। साथ ही, इस योजना से लोगों की आय बढ़ेगी, बिजली बिल कम और रोजगार सृजन भी होगा।”

प्रधानमंत्री मोदी ने लोगों से योजना का लाभ लेने की अपील की है। उन्होंने लिखा, “आइए सोलर ऊर्जा और सतत विकास को बढ़ावा दें। मैं सभी घरेलू उपभोक्ताओं, विशेष रूप से युवाओं से आग्रह करता हूँ कि वह आवेदन करके पीएम- सूर्य घर: मुफ्त बिजली योजना को मजबूत बनाएँ।”

बजट में हुआ था योजना का ऐलान

गौरतलब है कि 1 फरवरी को पेश किए गए वित्त वर्ष 2024-25 के अंतरिम बजट में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने इस योजना का ऐलान किया था। अब इसकी आधिकारिक शुरुआत हो गई है। इसमें आवेदन के पंजीकरण के लिए पीएम सूर्य घर योजना की वेबसाईट पर जाना होगा।

इसके बाद योजना के तहत लाभार्थी के घर की छत पर एक सोलर पॉवर प्लांट लगाया जाएगा। यह पॉवर प्लांट लगाने के लिए केंद्र सरकार बड़ी आर्थिक सहायता देगी। इससे पैदा होने वाली 300 यूनिट बिजली गृहस्वामी बिना किसी भुगतान के उपयोग कर सकेगा।

केंद्र सरकार द्वारा इस योजना के अंतर्गत 3 किलोवाट तक की क्षमता वाले सोलर पॉवरप्लांट के लिए ₹18,000/किलोवाट की सब्सिडी दी जाएगी। जिन राज्यों को विशेष राज्य का दर्जा दिया गया है, वहाँ यह राशि ₹20,000/किलोवाट रहेगी। 3-10 किलोवाट वाले पॉवरप्लांट के लिए पहले 3 किलोवाट तक ₹18,000/किलोवाट और फिर ₹9,000/किलोवाट की सब्सिडी देगी। वेबसाइट पर बताया गया है कि लाभार्थी को इस योजना का लाभ सात अलग-अलग चरणों के पूर्ण होने के बाद मिलेगा।

हाउसिंग सोसायटी भी ले सकती है योजना का फायदा

बता दें कि इस योजना का लाभ बड़ी हाउसिंग सोसायटी भी ले सकती हैं, उनको भी सरकार इसके लाभ उपलब्ध करवाएगी। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा शुरू की गई इस योजना में ‘मेक इन इंडिया’ को बढ़ावा दिया गया है। इस योजना का लाभ लेने के लिए लाभार्थियों को अपनी छतों पर भारतीय कम्पनियों के ही सभी सोलर उत्पाद लगाने होंगे तभी उन्हें केंद्रीय सहायता मिल सकेगी।

एक रिपोर्ट बताती है कि देश में एक औसत घर महीने में लगभग 250 यूनिट बिजली खर्च करता है। भारत में एक यूनिट बिजली का औसत भाव 5 रुपए है। ऐसे में लगभग ₹15,000 की बचत एक परिवार एक वर्ष में कर सकेगा। यदि किसी परिवार का बिजली खर्च इससे ज्यादा भी होता है तो भी उसे बड़ा फायदा होगा।

गौरतलब है कि कई विपक्षी दल देश में चुनावों के समय मुफ्त बिजली का वादा करते आए हैं। पंजाब और दिल्ली जैसे राज्य मुफ्त बिजली दे भी रहे हैं। हालाँकि, यह वादा जमीन पर उतारने के बाद बड़े नुकसान होते हैं। भारत में अधिकांश बिजली कोयले से बनती है।

इस बिजली की उत्पादन लागत भी सोलर ऊर्जा के मुकाबले अधिक है। ऐसे में कोयले से पैदा की गई बिजली को मुफ्त देने पर सरकार को बड़ी सब्सिडी देनी पड़ती है। अकेले पंजाब में ही इस समय इस सब्सिडी का भार लगभग ₹20,000 करोड़ है।

एक रिपोर्ट के अनुसार, देश में 25 करोड़ घरों पर ऐसे रूफटॉप सोलर लगाए जा सकते हैं। इनके ऊपर 637 गीगावॉट तक की ऊर्जा पैदा कर सकती है। हालाँकि, यही रिपोर्ट दिखाती है कि देश में मात्र 11 गीगावॉट क्षमता के ही रूफटॉप सोलर लगाए गए हैं अभी।

भले ही भारत ने घरों पर सोलर क्षमता लगाने में अभी आशातीत सफलता नहीं पाई हो, लेकिन उसने बीते कुछ वर्षों में अक्षय ऊर्जा के क्षेत्र में काफी प्रगति हासिल की है। अब इस योजना से यह तस्वीर भी बदलेगी। एक रिपोर्ट बताती है देश में अभी लगभग 75 गीगावॉट की सोलर क्षमता है।

‘मेरा येशु-येशु’ वाला पादरी बजिंदर सिंह भरतपुर में हिंदुओं का करवा रहा था धर्मांतरण, दावा- राजस्थान में 20 हजार ईसाई बनेः 8 गिरफ्तार

राजस्थान के भरतपुर स्थित एक होटल में रविवार (11 फरवरी, 2024) को ईसाई मिशनरी धर्मांतरण का कार्यक्रम चला रहे थे। इस कार्यक्रम में चंडीगढ़ से पादरी बजिंदर सिंह को लाइव जुड़ा हुआ था, जो लोगों का धर्मांतरण करवा रहा था। कार्यक्रम में दावे किए गए कि वो मरे हुए बच्चे तक को ज़िंदा कर सकता है और कैंसर जैसी भयंकर बीमारी का भी इलाज कर सकता है। कार्यक्रम के आयोजकों कुँवर सिंह और शैलेन्द्र सिंह को राजस्थान पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। राजस्थान में 20,000 लोगों का ईसाई धर्मांतरण कराया जा चुका है।

बजिंदर सिंह खुद को प्रोफेट कहता है। उसके कई ऐसे वीडियो इंटरनेट पर मौजूद हैं, जहाँ वो चमत्कारी दावे करता है और अजीबोगरीब हरकतें करवाता है। गिरफ्तार दोनों आरोपित कह रहे हैं कि वो तो सिर्फ माध्यम हैं। बजिंदर सिंह चंडीगढ़ से ही लोगों का लाइव धर्मांतरण करा रहा था। माइक और स्पीकर समेत 5 LED की व्यवस्था कार्यक्रम स्थल पर की गई थी। दोनों आरोपित 2020 से ही बजिंदर सिंह से जुड़े हुए थे। अकेले भरतपुर में 20,000 से अधिक लोगों का वो धर्मांतरण करा चुका है।

आयोजनों के लिए वो पैसे भी ऑनलाइन भेजता है। जहाँ कुँवर सिंह भरतपुर का ही निवासी है, शैलेन्द्र सिंह उत्तर प्रदेश के फरीदाबाद का रहने वाला है। 8 अन्य की भी गिरफ़्तारी हुई है। इनके पास से आयोजन का सामान और भड़काऊ पुस्तकें भी मिली हैं। वकील संदीप सिंह ने इस आयोजन को लेकर खुलासा किया, जो दोस्त की शादी के लिए मैरिज हॉल बुक करने ‘सोनार हवेली’ पहुँचे थे। वहाँ करीब 400 लोग मौजूद थे। 15 लोग मंच पर थे। येशु की कसम दिला कर धर्म-परिवर्तन कराया जा रहा था।

वहाँ मौजूद लोगों को ईसाई मजहब के फायदे गिनाए जा रहे थे और बोतल में कुछ मिला कर पिलाया जा रहा था। इतना ही नहीं, कुँवर सिंह के साथ-साथ सिद्धार्थ गौतम नामक शख्स मंच से हिन्दू देवी-देवताओं को भी गाली दे रहा था। बच्चियों के हाथों में बाइबिल दिए जा रहे थे। संदीप गुप्ता ने जब टोका और रिकॉर्डिंग करने लगे तो उनके साथ धक्का-मुक्की की गई। इलाज के नाम पर पीड़ितों को वहाँ बुलाया गया था। 352 किताबें जब्त की गई हैं। गरीबों को रुपए का लालच भी दिया गया था, उनके खाने-पीने की व्यवस्था की गई थी।

पादरी बजिंदर सिंह “मेरा यशु यशु” वाले वीडियो से वायरल हुआ था। पादरी बजिंदर सिंह को जीरकपुर पुलिस ने उसी की फॉलोअर युवती से रेप करने के आरोप में दिल्ली एयरपोर्ट से गिरफ्तार किया था। 2017 में एक लड़की ने जालंधर के चर्च के पादरी बजिंदर पर आरोप लगाया था कि उसने विदेश भेजने के नाम पर उससे रेप किया और वीडियो भी बनाई। बजिंदर के यूट्यूब पर कई ऐसे वीडियो हैं, जिसमें वह सलमान खान से लेकर कई बड़े सितारों की भविष्यवाणी करने का दावा कर रहा है। सूट-बूट और सिक्योरिटी में रहने वाला बजिंदर सिंह अपने भाषणों के दौरान सुंदर लड़कियों पर नजर रखता था।

48 घंटे का लिया था समय, 24 घंटे में BJP में आ गए महाराष्ट्र के पूर्व CM अशोक चव्हाण: काॅन्ग्रेस के पूर्व MLC ने भी थामा कमल

महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री और कॉन्ग्रेस के वरिष्ठ नेता अशोक चव्हाण आज भारतीय जनता पार्टी में शामिल हो गए। उन्होंने भाजपा कार्यालय में डिप्टी सीएम देवेंद्र फडणवीस की मौजूदगी में भाजपा को ज्वाइन किया।

कॉन्ग्रेस से इस्तीफा उन्होंने सोमवार यानी कल (12 फरवरी 2024) को दिया था। इसके बाद 48 घंटे का समय माँगा था ताकि वह आगे का फैसला ले सकें। आज सुबह उन्होंने बताया कि वो बीजेपी में अपना राजनीतिक करियर शुरू कर रहे हैं। उनके साथ कॉन्ग्रेस के पूर्व एमएलसी अमर राजुरकर भी भाजपा में शामिल हो गए हैं।

अशोक चव्हाण जब भाजपा में शामिल हुए तो उस कार्यक्रम में उन्होंने सबको धन्यवाद दिया। इस दौरान उनके मुँह से निकला, “मैं कॉन्ग्रेस अध्यक्ष को धन्यवाद देता हूँ…” इसे सुन बगल में बैठे देवेंद्र फडणवीस ने उन्हें कहा- “भाजपा है ये-भाजपा।” इस घटना के बाद वहाँ बैठे सभी लोग हँस पड़े। उन्होंने कहा- “यह भाजपा कार्यालय में मेरी पहली पीसी है।”

वहीं महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम देवेंद्र फडणवीस ने कहा, “कद्दावर नेता का स्वागत करते हुए हमें बहुत ही खुशी हो रही है। इन्होंने लोकसभा और विधानसभा दोनों में काम किया है। इन्होंने महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री के तौर पर कई मंत्रालयों में काम किया है।”

इसके बाद डिप्टी सीएम ने उन्हें प्रदेश अध्यक्ष बावनकुले से कहकर पार्टी की सदस्यता प्राप्त करवाई। उन्होंने सदस्यता के लिए 500 रुपए का भुगतान किया। इस दौरान फडणवीस ने एमएलसी और अशोक चव्हाण के कट्टर समर्थक अमर राजुरकर का भी बीजेपी में आने पर स्वागत किया।

बता दें कि अशोक चव्हाण कॉन्ग्रेस के दिग्गज नेता थे जिन्होंने नांदेड़ में कॉन्ग्रेस को जीत दिलाई थी। वह दो बार महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री भी रह चुके हैं। 8 दिसंबर 2008 से 9 दिसंबर 2010 तक में वह डेढ़ साल मुख्यमंत्री रहे थे।

कोचिंग जा रही थी हिंदू छात्रा, फरदीन-रऊफ ने चाकुओं से गोदा: 4 साल से पड़ा था पीछे, छेड़छाड़ का केस वापस लेने के लिए डाल रहा था दबाव

उत्तराखंड में कोचिंग जा रही दो बहनों पर फरदीन और रऊफ नाम के युवकों ने धारदार हथियारों से हमला कर दिया। इसमें 17 साल की नाबालिग लड़की गंभीर रूप से घायल हो गई। फरदीन पहले भी पीड़ित के साथ छेड़छाड़ कर चुके है और जेल की हवा भी खा चुका है। वो जमानत पर छूटकर बाहर आया था। फरदीन और उसका परिवार पीड़ित और उसके परिवार पर अपने खिलाफ दर्ज कराई गई शिकायतों को वापस लेने का दबाव डाल रहा था, और न मानने पर उसने जानलेवा हमला कर दिया। इस मामले में पुलिस ने फरदीन और रऊफ को गिरफ्तार कर लिया है।

बाइक पर बैठने से मना करने पर चाकुओं से गोदा

ये वारदात, उधम सिंह नगर के काशीपुर कोतवाली क्षेत्र के खालसा मोहल्ले की है। जहाँ सोमवार (12 फरवरी 2024) की शाम को करीब सवा चार बजे की है। जहाँ बी.कॉम सेकंड ईयर में पढ़ने वाली 17 वर्षीय छात्रा अपनी बहन के साथ कोचिंग जा रही थी, तभी फरदीन नाम का युवक अपने दोस्त रऊफ के साथ पहुँचा। उसने छात्रा को खींचकर अपने बाइक पर बैठाने की कोशिश की, लेकिन छात्रा विरोध जताकर आगे बढ़ गई। तभी गुरुद्वारे के पास फरदीन ने बड़े चाकू से उसपर ताबड़तोड़ हमला बोल दिया। इस हमले में वो बुरी तरह से घायल हो गई। इस दौरान फरदीन के भाई बिलाल, आकिब, अनस और अफरीदी तमाशबीन बने खड़े रहे, साथ ही इन सभी का पिता रिजवान भी वहीं खड़ा था। छात्रा की चीख सुनकर आसपास के लोग मौके की तरफ भागे तो फरदीन छात्रा को धमकाते हुए फरार हो गया।

पहले भी जेल जा चुका है फरदीन

ऑपइंडिया के मौजूद एफआईआर की कॉपी के मुताबिक, फरदीन छात्रा पर बुरी नजर रखता है। वो साल 2019 से उसके पीछे पड़ा है। छात्रा उसके खिलाफ कई बार मामले दर्ज करा चुकी है, लेकिन वो पीछा नहीं छोड़ रहा। यही नहीं, फरदीन पीड़ित छात्रा से छेड़छाड़ के मामले में जेल भी जा चुका है। मौजूदा समय में वो जमानत पर छूटकर बाहर आया है और छात्रा के साथ ही उसके परिजनों को भी उसके खिलाफ की गई शिकायतों को वापस लेने का दबाव डाल रहा था।

इस हमले के बाद फरदीन के परिजन, जिसमें उसके मामा ताजू और फिरोज, फरदीन की माँ बेबी और तीन मौसियाँ, साथ ही फरदीन का रिश्तेदार साहिल सभी पीड़ित परिवार के घर पहुँचे। सभी लोगों ने पीड़ित के माता-पिता को धमकाया और फरदीन पर दर्ज मामलों को वापस लेने के लिए दबाव डाला।

इस हमले के बाद वो अपनी बेटी को लेकर अस्पताल पहुँचे। जहाँ छात्रा को शुरुआती इलाज के बाद हायर सेंटर रेफर कर दिया गया। छात्रा पर हमले की सूचना पाकर हिंदू संगठनों के लोग कोतवाली पहुँचे और आरोपित को गिरफ्तार करने की माँग की। इस बीच बीजेपी विधायक अरविंद पाण्डेय ने पीड़ित से मुलाकात की।

इस मामले में पुलिस ने आईपीसी धारा 147, 307, 323, 354, 452, 504 और आईपीसी की धारा 506 के तहत मामला दर्ज कर लिया है। कोतवाली में तैनात वरिष्ठ उप निरीक्षक प्रदीप मिश्रा ने ऑपइंडिया से बात करते हुए बताया कि दोनों मुख्य आरोपितों को गिरफ्तार कर लिया गया है। इस मामले में अभी जाँच जारी है, जल्द ही अन्य गिरफ्तारियाँ भी की जाएँगी।