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जो पुलिस मूक होकर देखती रही तमाशा, वो कैसे दिलाएगी न्याय: संदेशखाली में महिलाओं ने राज्यपाल से लगाई गुहार, स्मृति ईरानी ने CM ममता को लताड़ा

पश्चिम बंगाल के संदेशखाली में तृणमूल कॉन्ग्रेस के गुंडों से तंग आई महिलाओं का वहाँ की स्थानीय पुलिस से विश्वास उठ गया है। जाँच टीम गठित होने के बावजूद महिलाओं ने राज्यपाल से न्याय की गुहार लगाई है। उनका कहना है कि पुलिस उनपर होते अत्याचारों के बारे में जानती थी फिर भी कोई एक्शन नहीं लिया। उनकी इस गुहार के बीच यह मुद्दा केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी ने भी उठाया है। उन्होंने मीडिया में कॉन्फ्रेंस करते हुए मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को खरी-खरी सुनाई है।

उन्होंने मीडिया में बात करते हुए कहा कि जवान शादीशुदा महिलाओं को संदेशखाली में निशाना बनाया जा रहा है। केंद्रीय मंत्री ने ममता बनर्जी पर आरोप लगाया कि वो ऐसे लोगों को संरक्षण दे रही हैं जो हिंदू महिलाओं को टारगेट करके उनका रेप करते हैं। ईरानी ने संदेशखली की महिलाओं द्वारा लगाए आरोपों को अनुवाद कर बताया कि TMC के गुंडे घर-घर जाकर देखते थे कि किस घर की कौन सी औरत सुंदर है। कौन कम उम्र की है? इसके बाद TMC के गुंडे उन्हें रात में उठा कर लेकर चले जाते थे। जब तक TMC वाले नहीं चाहते थे, तब तक इन औरतों को नहीं छोड़ा जाता था।

स्मृति ईरानी ने संदेशखली की औरतों की व्यथा सुनाते हुए कहा- “ममता हिंदुओं के नरसंहार के लिए जानी जाती हैं। वह अपने गुट के पुरुषों को महिलाओं से अभद्रता करने की अनुमति दे रही हैं। देश के लोग इसे चुपचाप कैसे देख सकते हैं।”

बता दें कि एक ओर जहाँ संदेशखली में महिलाओं के यौन उत्पीड़न का मुद्दा सामने आने के बाद सब हैरान हैं। वहीं इस मामले में बंगाल पुलिस ने 10 सदस्यों की टीम गठित करके महिलाओं के आरोपों की जाँच करने की बात कही है। लेकिन महिलाओं की आपत्ति इस बात से है कि जो पुलिस अब तक उनके साथ होते अन्याय पर चुप थीं, वो अब उनको न्याय कैसे देंगी।

बताया जा रहा है कि टीम को जो महिला डीआईजी लीड करेंगी, उन पर भी स्थानीयों ने इल्जाम लगाया है कि वो टीएमसी गुंडों की गुंडागर्दी के बारे में जानती थीं और फिर भी अब तक चुप थीं। वहीं कुछ वीडियोज भी महिलाओं की सामने आई है जिनमें वह कहती सुनाई पड़ रही हैं कि संदेशखाली में पुलिस द्वारा पीड़िताओं को प्रताड़ित किया जाता है। कभी रात में पुलिस घर आ जाती है तो कभी घर के पुरुषों को गाली देती है।

एक महिला ने तो रिपब्लिक बंग्ला को यहाँ तक बताया कि टीएमसी गुंडों ने उनकी खिड़की तोड़ दी थी और उनसे बाहर आने को कहा था। महिला के अनुसार, “उन लोगों ने साफ कहा था कि वो मेरा गैंगरेप करेंगे। ये सब पुलिस के सामने हो रहा था। कई महिलाएँ ऐसी भी हैं जिनके बाल और साड़ी खींची जाती है। हम संदेशखली में सुरक्षित नहीं है। ऐसी प्रताड़ना से तो बेहतर है हमें मार दिया जाए।”

पुलिस का रवैया देख पीड़िताएँ उनपर विश्वास नहीं कर पा रहीं। 12 फरवरी को उन्होंने बंगाल गवर्नर सीवी आनंद बोस से इस मामले में न्याय माँगा। उन्होंने कहा, “जब तक आप यहाँ रहते हैं, हम बात कर सकते हैं, लेकिन एक बार जब आप चले जाते हैं, तो स्थिति वही हो जाती है जो पहले थी। वे हम पर अत्याचार करते रहेंगे। कुछ ऐसा करो कि वे गिरफ्तार हो जाएँ। हम कड़ी सजा की माँग करते हैं; हम न्याय चाहते हैं।” बंगाल राज्यपाल ने इस मामले में महिलाओं को आश्वासन दिया है कि आरोपितों के विरुद्ध कार्रवाई की जाएगी।

गौरतलब हो कि 8 फरवरी 2024 को संदेशखाली में सैंकड़ों महिलाएँ झाड़ू और डंडा लेकर सड़कों पर आ गईं थीं। उन्होंने टीएमसी नेता शेख शाहजहाँ की गिरफ्तारी की माँग की थी। उन्होंने कहा था कि इन लोगों ने उनका जीना मुश्किल कर दिया है। उनकी जमीनें कब्जा ली गई हैं। घटना के बाद भाजपा नेता अर्चना मजूमदार ने दावा किया था कि स्थानीय पुलिस ने प्रदर्शनकारी महिलाओं के घर रेड मारी थी और उन्हें प्रताड़ित भी किया गया। इसके बाद वहाँ हिंदू महिलाओं को टारगेट करने, उनके साथ यौन हिंसा क की बातें भी मीडिया में आईं और जब स्मृति ईरानी ने इस मुद्दे को उठाया तो इस पर हर जगह चर्चा शुरू हो गई। अब महिलाओं को न्याय दिलाने की माँग हो रही है।

क्रिश्चियन मिशनरी स्कूल में रामायण-महाभारत का अपमान, लड़कियों के चूड़ी पहनने और बिंदी लगाने पर भी रोक: हिंदू संगठनों के प्रदर्शन के बाद टीचर बर्खास्त

कर्नाटक के मेंगलुरु स्थित एक क्रिश्चियन मिशनरी संचालित स्कूल में हिंदू बच्चों पर तमाम तरह की रोक लगाई गई। इसके बाद उन बच्चों के मन में सनातन और हिंदुत्व के प्रति जहर भरने का काम किया गया। इससे भी बात नहीं बनी, तो एक टीचर ने प्रधानमंत्री मोदी के खिलाफ प्रोपेगेंडा वाली बातें सातवीं कक्षा के छात्रों को बताई। टीचर ने ‘गोधरा कांड’ और ‘बिल्किस बानो केस’ जैसे संवेदनशील मुद्दों को तोड़-मरोड़ कर बच्चों के सामने परोसा, ताकी बच्चों के मन में प्रधानमंत्री मोदी के खिलाफ नफरत भर जाए।

यही नहीं, टीचर ने रामायण – महाभारत को काल्पनिक बताते हुए भगवान राम और अयोध्या नगरी तक को खारिज कर दिया। ये बातें तब हो रही हैं, जब सारी दुनिया अयोध्या में भगवान राम के जन्मस्थान पर भव्य मंदिर बनता देख रही है और रामलला स्वयं गर्भगृह में विराजमान हो गए हैं।

ये मामला मेंगलुरु स्थित सेंट गेरोसा इंग्लिश एचआर प्राइमरी स्कूल का है। आरोप है कि बीते गुरुवार (8 फरवरी) को सातवीं कक्षा के बच्चों को पढ़ाते हुए टीचर ने ऐसी टिप्पणियाँ की। इसका खुलासा तब हुआ, जब किसी बच्चे के अभिभावक और विश्व हिंदू परिषद के स्थानीय नेता शरण पंपवेल की बातचीत हुई और इस बातचीत का ऑडियो वायरल हो गया। इस बातचीत के दौरान ही बच्चे के माता-पिता ने शिक्षक पर गंभीर आरोप लगाए और बताया कि बच्चों का किस तरह से ब्रेनवॉश किया जा रहा है। ऐसा पिछले कई सालों से चल रहा है। पिछले साल भी बच्चों को यही सब बातें बताई गई थी।

इस पूरे घटनाक्रम के बाद मेंगलुरु उत्तर विधानसभा सीट से बीजेपी के विधायक भरत शेट्टी की अगुवाई में स्कूल के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया गया। भरत शेट्टी ने हिंदू परिजनों से “ईसाई मिशनरियों द्वारा संचालित स्कूलों में अपने बच्चों को दाखिला देने पर पुनर्विचार करने” की भी अपील की। ये प्रदर्शन 11 फरवरी को किया गया। प्रदर्शन में विश्व हिंदू परिषद और बजरंग दल के कार्यकर्या भी शामिल रहे।

भरते शेट्टी ने कहा, “जिन स्कूलों ने लड़कियों के चूड़ी पहनने और माथे पर बिंदी लगाने पर बैन लगाया था, वे अब राम मंदिर के खिलाफ नफरत फैला रहे हैं।” उन्होंने कहा, “अगर स्कूल प्रबंधन शिक्षक के खिलाफ सख्त कार्रवाई शुरू करने में विफल रहता है, तो विरोध प्रदर्शन किया जाएगा।”

इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने उप निदेशक (सार्वजनिक निर्देश) के कार्यालय में भी घुसने की कोशिश की। प्रदर्शनकारियों के गुस्से को देखते हुए 100 से अधिक पुलिस कर्मियों को मौके पर तैनात कर दिया गया। विरोध प्रदर्शन के दौरान लोगों ने आरोपित टीचर के खिलाफ कार्रवाई की माँग करते हुए नारे लगाए। उन्होंने स्कूल मैनेजमेंट से टीचर को नौकरी से निकालने और उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की माँग की। सेंट गेरोसा इंग्लिश एचआर प्राइमरी स्कूल के प्रशासन ने कहा है कि वे मामले की जाँच कर रहे हैं। उन्होंने कहा है कि अगर शिक्षक पर आरोप सही साबित होते हैं तो उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। हालाँकि जाँच के बाद शिक्षक को बर्खास्त कर दिया गया।

मुस्लिम औरतों के लिए 3 महीने का ‘इद्दत’, सागरिका जी ने 3 साल का रखा, इसलिए TMC से जायज माना जाए राजदीप सरदेसाई की बीवी का ‘निकाह’

पत्रकारों का राजनीति में जाना नई बात नहीं है। लेकिन तृणमूल काॅन्ग्रेस (TMC) की राज्यसभा सांसदी कबूल करने के बाद सागरिका घोष की सोशल मीडिया में थू-थू हो रही है। इसकी वजह कभी सार्वजनिक तौर पर सागरिका का खुद को ‘नैतिक’ दिखाने के फेर में यह लिख देना है कि किसी सरकार में शामिल होने या किसी पार्टी की तरफ से राज्यसभा में जाने से बड़ी बात एक पत्रकार होना है। यह दूसरी बात है कि इस ‘नैतिक मूल्य’ के दर्शन न तो कभी उनकी पत्रकारिता और न कभी उनके पति राजदीप सरदेसाई की पत्रकारिता में हुए।

दरअसल सागरिका घोष ने मार्च 2018 के एक ट्वीट में कहा था, “हाहा! मैं कभी कोई मैं कभी कोई RS टिकट, PS टिकट या CS टिकट किसी भी राजनीतिक पार्टी से स्वीकार नहीं करूँगी सर।” उन्होंने अपने इस ट्वीट को सेव कर रखने की चुनौती देते हुए यह भी कहा था कि ऐसा वे लिखकर देने को भी तैयार हैं। ऐसे में जब टीएमसी ने उन्हें राज्यसभा के लिए उम्मीदवार बनाने की घोषणा की तो लोगों ने उन्हें उनके ही थूके (लिखे) की याद दिलाते हुए पूछा कि क्या अब उनकी राय बदल गई है?

अब सागरिका घोष ने सोशल मीडिया के जरिए ही इसका जवाब दिया है। उन्होंने लिखा है, “6 साल पहले 2018 का मेरा ट्वीट वायरल किया जा रहा है। उस समय मैं सक्रिय पत्रकार थी। उस समय रातों-रात दलगत राजनीति में चले जाना मेरे लिए अनुचित होता। 2020 से मैं पूर्णकालिक पत्रकार नहीं हूँ। बीते 3 साल से मैं विभिन्न समाचार-पत्रों के लिए बतौर स्वतंत्र स्तंभकार लिखती हूँ।”

आगे उन्होंने कहा है कि सार्वजनिक जीवन में आने से पहले सक्रिय पत्रकारिता से उन्होंने तीन साल तक दूरी बनाकर रखी थी। अधिनायकवाद के इस दौर में जब मोदी सरकार ने मीडिया पर पूरी तरह से कब्जा कर लिया है, संवैधानिक लोकतंत्र के प्रति प्रतिबद्धता ने उन्हें तृणूमल काॅन्ग्रेस के जुड़कर संघर्ष के लिए प्रेरित किया है ताकि लोकतांत्रिक मूल्यों को बचाया जा सके।

जैसा कि मैंने ऊपर कहा है कि पत्रकारों के लिए राजनीति में आना नई बात नहीं है। वैसे ही पत्रकारों का ढीठ और निर्लज्ज होना भी सामान्य है। सागरिका इस मामले में आशुतोष से सीख सकती थीं। आशुतोष ने भी आम आदमी पार्टी (AAP) ज्वाइन करने के बाद डंके की चोट पर पत्रकारिता में नहीं लौटने का ऐलान किया था। लेकिन वे लौटे और आज भी टीवी चैनलों पर बैठ दूसरों के लिए ‘नैतिकता’ बाँच रहे हैं।

सागरिका चाहतीं तो अपने पति राजदीप सरदेसाई से भी सीख सकती थीं, जिनकी पहचान ही कुछ भी थूकने (बोलने/लिखने) और उससे पलट जाने की रही है। वैसे उनके पति कह भी चुके हैं कि राज्यसभा की सीट बिकती है, मोदी सरकार के जमाने में संसद की अहमियत नहीं रह गई है ब्ला ब्ला ब्ला

सीखने के लिए तो सागरिका के सामने रवीश कुमार का भी अप्रतिम उदाहरण था। दुनिया भर का ‘ज्ञान’ देने वाले रवीश कुमार ने आज तक अपने भाई को काॅन्ग्रेस टिकट मिलने की ‘काबिलियत’ का खुलासा नहीं किया है। बीजेपी के किसी सामान्य से कार्यकर्ता के दूर के रिश्तेदार की मामी के भांजे के पोते की करतूतों को सीधे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से सवाल पूछने का ‘साहस’ रखने वाले रवीश कुमार ने आज तक अपने भाई पर लगे यौन शोषण के आरोपों पर भी कुछ नहीं कहा है।

पर सागरिका घोष ने स्वघोषित अधिनायकवाद के इस दौर में निर्लज्जता से खुद के थूके (लिखे) को चाटने का विकल्प चुना है, क्यों ऐसा नहीं करने पर रवीश कुमार की भाषा में यह ‘साहस की मंदी’ कही जाती है। सागरिका जी बताना चाहती हैं कि जैसे शौहर की मौत अथवा तलाक के बाद इद्दत का समय पूरा कर मुस्लिम औरतें का दूसरा निकाह इस्लाम को कबूल है, वैसे ही उनका भी टीएमसी के साथ निकाह कबूल किया जाए। चूँकि वे सागरिका घोष हैं तो उन्होंने ‘इद्दत’ का मापदंड (3 साल) भी खुद के लिए ऊँचा रखा है।

अमूमन मुस्लिम औरतों के लिए इद्दत की अवधि तीन माह के करीब होती है, पर सागरिका बता रही हैं कि पत्रकारिता से तलाक लेकर सियासत से निकाह को उन्होंने तीन साल का ‘इद्दत’ पूरा किया है। वे चाहती हैं कि इन तीन साल के दौरान बतौर ‘स्वतंत्र पत्रकार’ उन्होंने विभिन्न समाचार-पत्रों में जो प्रोपेगेंडा परोसा, ‘पत्रकार’ होने के नाम पर मंचों से जो कुछ उगला है, उसे इद्दत की अवधि में प्रेमी के साथ छिप-छिप कर मिलना नहीं माना जाए। वे चाहती हैं कि भले इद्दत अवधि में इमरान खान और बुशरा बीवी का निकाह इस्लाम को कबूल न हो पर तीन साल के ‘इद्दत’ में भी चले उनके सियासी इश्क को कबूल किया जाए। कहा जाए वाह सागरिका जी आप पत्रकारिता और राजनीति में नैतिकता की मिसाल हैं!

पकड़ा, मारा, लूटा, फूँक दी गाड़ी… हल्द्वानी हिंसा में चुन-चुन कर हिंदू पत्रकारों पर हुआ हमला: ऑपइंडिया ग्राउंड रिपोर्ट में खुलासा

उत्तराखंड के हल्द्वानी हिंसा में दंगाइयों ने पुलिस प्रशासन के अलावा घटना की रिपोर्टिंग कर रहे हिंदू पत्रकारों को भी अपना निशाना बनाया था। उन्होंने चुन चुन कर पत्रकारों पर वार किया था। उस दौरान किसी के सिर पर पत्थर मारे गए थे तो किसी का हाथ ही तोड़ दिया गया था। इनमें कुछ वो पत्रकार भी थे जो कोर्ट के विरुद्ध जाकर भी उन लोगों के साथ समय-समय पर खड़े रहते थे। अब उनका कहना है कि उनकी आँखे इस घटना से खुल गई हैं।

ऑपइंडिया के पत्रकार राहुल पांडे जब ग्राउंड पर हालात जानने गए तो उनकी मुलाकात इन पत्रकारों से हुई। इनमें एक अमृत विचार अखबार के पत्रकार संजय भी थे। संजय से जब हम मिले तो वो अस्पताल में भर्ती थे। रिपोर्टिंग के दौरान उन्हें सबसे ज्यादा घाव लगे। उनका हाथ भी फ्रैक्चर हुआ और सिर पर भी धारदार हथियार से मारा गया। अब प्रशासन उनका इलाज करवा रहा है। लेकिन उनके सामने से वो मंजर नहीं हट रहा जो उन्होंने रिपोर्टिंग के दौरान देखा।

पत्रकार पर धारदार हथियार से हमला

बृजलाल अस्पताल में भर्ती संजय ने बताया कि जब अवैध मस्जिद गिराने की कार्रवाई शुरू हुई तो अचानक छतों से पत्थर आने लगे। उन्हें रोकने के लिए जब आँसू गैस के गोले छोड़े, लेकिन कोई फर्क नहीं पड़ा। एक डेढ़ घंटे बाद जब अंधेरा हुआ तो भीड़ आ गई। उन्होंने आग जलानी शुरू कर दी। जो बाहर निकलने के रास्ते थे उन्हें बंद कर दिए। उसके बाद चारों ओर से पत्थरबाजी होने लगी। फोर्स भी सोचने लगी कि ये तो हर जगह से पत्थर आ रहे हैं। इसके बाद आला अधिकारियों को कवर करके फोर्स ने बड़ी मुश्किल से वहाँ से निकाला। लेकिन तब तक पुलिस की गाड़ियों में भी आगजनी होना शुरू हो गई थी। पत्थरबाजी इतनी तेजी से हो रही थी कि वहाँ से निकलना मुश्किल था। पुलिस एक दूसरे के ऊपर से कुचल कुचल कर भाग रही थी।

संजय ने आपबीती सुनाते हुए कहा, “इसी दौरान हमें पकड़कर मारा गया। हमारा कैमरा छीना गया। मोबाइल निकाल लिया। घड़ी ले ली। गाड़ी फूँक दी। ये तो हमारा दूसरा जन्म मान लो। हम पर लाठी-डंडे, पत्थर से हमला हुआ था।”

संजय की वीडियो में देख सकते हैं कि पत्रकार के हाथ में फ्रैक्चर आया है। इसके अलावा सिर पर पीछे की ओर धारदार हथियार से वार भी किए गए हैं। उनकी हालत सुधरने में समय लगेगा। अस्पताल में उनके साथ उनकी पत्नी हैं जो रोते हुए बताती हैं कि वो वो अपने तीन बच्चे और सास को बिन बताए यहाँ (अस्पताल) में हैं। सास का हार्ट ऑपरेशन हुआ है इसलिए वो उन्हें कुछ नहीं बता सकती। वो बस चाहती हैं कि उनका पति जल्दी से जल्दी घर आ जाए।

जो पत्रकार खड़े थे साथ, उन्हें भी आईडी देख भीड़ ने बनाया निशाना

ग्राउंड पर रहने के दौरान राहुल पांडे उत्तराखंड के बनभूलपुरा में उत्तराखंड 24 के पत्रकार अतुल अग्रवाल से भी मिले। अतुल अग्रवाल वो स्थानीय पत्रकार हैं, जो पिछले साल कोर्ट की कार्रवाई के विरोध में मुस्लिम भीड़ के साथ खड़े थे। साथ ही कह रहे थे कि वो लोग मासूम हैं, उनको सजा न दी जाए। लेकिन इस बार की घटना के बाद उनकी सोच बदल गई।

उन्होंने कहा, “वो नजारा सोचकर भी रूह काँप जा रही है। हम वहाँ से जिंदा लौटकर आ पाए शायद हमने कोई अच्छे कर्म किए होंगे या फिर ऊपर वाले की मेहरबानी है। मामला शासन-प्रशासन का था। इसमें हमें क्यों टारगेट बनाया गया?” उन्होंने पत्थरबाजी से पिचका हेलमेट दिखाया और कहा- “अगर आज हेलमेट नहीं होता तो मेरा सिर खुला हुआ होता। वहाँ हैवानियत थी। पत्थबाजी लगातार हो रही थी।उन्हें बस हमें मारना था। पत्रकार पूछते हैं हमने ऐसा कौन सा गुनाह कर दिया। हम तो न्यूज बनाने गए थे।”

वह बताते हैं कि पिछले साल जब कोर्ट ने अतिक्रमण हटाने को कहा था तब वो इनके साथ खड़े थे कि ये लोग बेघर हो जाएँगे तो कहाँ जाएँगे। वह पूछते हैं- “जब हम उनके साथ खड़े थे तो ये हमारे साथ खड़े होने को क्यों नहीं निकले। वहाँ पत्थर ऐसे आ रहे थे जैसे आँधी के बाद बारिश आती है… बस जिंदा बचे हम इसके लिए भगवान को शुक्रिया करते हैं।”

उन्होंने कहा- “जैसा व्यवहार हमारे साथ हुआ है उसके बाद टीस हमारे मन भी है। घटना के बाद किसी ने सॉरी नहीं बोला। हमारे साथ दूसरे समुदाय के पत्रकार भी थे। लेकिन किसी को खरोंच भी नहीं आई। आप सब अस्पताल घूम लीजिए वहाँ जितने पत्रकार भर्ती हैं उनसे पूछ लीजिए उनका नाम पता कर लीजिए, हमें कुछ कहने की जरूरत ही नहीं पड़ेगी।”

पत्रकार अतुल अग्रवाल ने यह भी दावा किया कि दंगाई भीड़ नाम पूछकर हमला कर रही थी। आईकार्ड देख रहे थे। उसके बाद टारगेट किया जा रहा था। ये बहुत अमान्य घटना है। बहुत क्रूर घटना है। चौथे स्तंभ के संग अगर ऐसा होगा तो उनसे क्या उम्मीद रखेंगे। उन्होंने कहा कि घटना के बाद उनका नजरिया बदल गया। अतुल कहते हैं- “हमने बस सुना था कि इस तरह हमला होता है। आज देखा। अगर चौथे स्तंभ पर ऐसा हमला होगा तो आप उससे क्या उम्मीद रखेंगे। उनकी लड़ाई शासन-प्रशासन से थी। हमें क्यों मारा।”

अतुल अग्रवाल ने द वायर जैसे संस्थानों को भी लताड़ा जो कार्यालय में बैठ दंगाई भीड़ को क्लीन चिट देने में लगे हैं। उन्होंने कहा- “अगर ये (द वायर जैसे संस्थान) लोग ग्राउंड पर होते तो देखते कि इनकी मासूमियत क्या होती है। हमसे पूछो क्या था मंजर। वो तो दिल्ली में बैठकर बस न्यूज चला रहे हैं। यहाँ आकर ग्राउंड पर देखो न। क्या ऐसे होते हैं मासूम लोग? क्या वो ऐसे करते हैं? मेरे तीन बच्चे हैं। अगर कुछ हो जाता तो मेरा परिवार कौन पालता। हमने कल्पना भी नहीं की थी कि ये मंजर देखने को मिलेगा। हम लोग भाईचारा निभाते हैं, उन्हें आगे रखते हैं लेकिन अब इन चीजों पर विचार करना पड़ेगा।”

भीड़ के निशाने पर थे पुलिस और मीडिया

बता दें कि इससे पहले भी खबर आई थी कि 8 फरवरी को हल्द्वानी हिंसा में दंगाइयों के निशाने पर पुलिस के साथ मीडियाकर्मी भी थे। हिंसा पीड़ित पत्रकार मुकेश सिंह ने भी कहा पुलिस और मीडिया को निशाना बनाने की योजना पहले ही बना ली गई थी। मुकेश ने जानकारी दी थी कि कैसे अवैध अतिक्रमण ध्वस्त करने की कार्रवाई के बाद भीड़ ने पुलिस और मीडिया को निशाना बनाया। उनको घेरकर पत्थरबाजी की गई और पेट्रोल बम फेंके गए।

हलाल के नाम पर ‘हराम’ की कमाई कर रहे थे मौलाना हबीब यूसुफ और मौलाना मुइदशीर, ताहिर और अनवर के साथ यूपी एसटीएफ ने किया गिरफ्तार

उत्तर प्रदेश में हलाल सर्टिफिकेट वाला न कोई सामान बनाया जाएगा और न ही बेचा जाएगा, सिवाय बाहरी देशों में एक्सपोर्ट के लिए तैयार हो रहे माल के। खुद उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इसका ऐलान किया था। इसके बावजूद कुछ मौलाना एक गिरोह बनाकर उत्तर प्रदेश में हलाल सर्टिफिकेट देने के नाम पर ‘हराम’ की कमाई कर रहे थे। उनके पास न कोई लैब थी, न वो किसी सामान की टेस्टिंग करते थे, बस 10 हजार लिया और दे दिया सर्टिफिकेट। मुंबई में बैठकर पैसे बना रहे ऐसे ही मौलानाओं की चौकड़ी को यूपी एसटीएफ ने पहले तो पूछताछ के लिए बुलाया, और जब पूछताछ में उन्हें पूरी तरह से बेनकाब कर दिया, तो फिर उन्हें सलाखों के पीछे भेज दिया।

जानकारी के मुताबिक, उत्तर प्रदेश स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) ने सोमवार (12 फरवरी 2024) को हलाल काउंसिल ऑफ इंडिया के अध्यक्ष मौलाना हबीब युसूफ पटेल, उपाध्यक्ष मौलाना मुईदशीर सपडीहा, जनरल सेक्रेटरी मुफ़्ती ताहिर जाकिर और कोषाध्यक्ष मोहम्मद अनवर खान को गिरफ्तार किया है। इन पर आरोप है कि वे कंपनियों से हलाल सर्टिफिकेट के नाम पर वसूली करते थे। एसटीएफ को सूचना मिली थी कि हलाल काउंसिल ऑफ इंडिया के कुछ सदस्य कंपनियों से हलाल सर्टिफिकेट के लिए मोटी रकम वसूल रहे हैं। एसटीएफ ने इस मामले की जाँच शुरू की और पाया कि आरोपित कंपनियों को धमकाते थे कि अगर वे पैसे नहीं देंगे तो उन्हें हलाल सर्टिफिकेट नहीं दिया जाएगा।

पुलिस उपाधीक्षक दीपक कुमार सिंह की अगुवाई में एसटीएफ की टीम ने चारों को गिरफ्तार किया। एसटीएफ को उनके पास से 4 आधार कार्ड, 4 पैन कार्ड, 3 मोबाइल फोन, 4 एटीएम कार्ड, 21 हजार 820 रुपये की नकदी, तीन ड्राइविंग लाइसेंस, एक आरसी और 2 वोटर कार्ड भी मिले हैं। जानकारी मिली है कि सिर्फ 10 हजार रुपए लेकर ये किसी भी चीज को ‘हराम’ से ‘हलाल’ बना देते थे। जबकि इन लोगों को ये सर्टिफिकेट जारी करने का अधिकार ही नहीं है। यूपी एसटीएफ इस बात की भी जाँच कर रही है कि इस ‘हराम’ की कमाई को किस ‘हलाल’ काम के लिए इस्तेमाल किया जाता था।

हलाल सर्टिफिकेट क्या है?

हलाल सर्टिफिकेट एक ऐसा प्रमाणपत्र है जो यह दर्शाता है कि कोई उत्पाद या सेवा इस्लामिक कानूनों के अनुसार तैयार किया गया है। यह प्रमाणपत्र मुस्लिम समुदाय के लोगों के लिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि वे केवल हलाल उत्पादों का ही सेवन करते हैं। हलाल का मतलब है “जायज़” यानी इस्लाम में जिसकी अनुमति है। हराम का मतलब है जिसकी अनुमति नहीं है। इसलिए, यह सुनिश्चित करने के लिए कि प्रोडक्ट में इस तरह के किसी पदार्थ की मिलावट नहीं है जो हराम है और उसे बनाने की विधि भी जायज है, इस तरह के सर्टिफिकेट जारी किए जाते हैं। हालाँकि यूपी में ऐसा करना जुर्म है।

उत्तर प्रदेश में पिछले साल बैन किया गया था ये सर्टिफिकेट

बता दें कि पिछले साल योगी सरकार ने उत्तर प्रदेश में हलाल सर्टिफिकेट वाले सामान बेचने पर जेल भेजने का फैसला किया था। दरअसल, उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से जारी आदेश में कहा है कि हलाल सर्टिफिकेट किसी उत्पाद की गुणवत्ता से संबंधित नहीं है। ऐसे निशान गुणवत्ता को लेकर भ्रम की स्थिति ही पैदा करते हैं। जिन उत्पादों पर इस तरह के प्रतिबंध लगाए गए हैं, उनका उल्लेख राज्य सरकार द्वारा जारी पत्र में साफ तौर पर किया गया है। इस पत्र में बताया गया है कि डेरी उत्पाद, चीनी, बेकरी उत्पाद, पिपरमिंट ऑयल, रेडी टू ईट सेवरीज व खाद्य तेल आदि के लेबल पर हलाल प्रमाणन का उल्लेख किया जा रहा है, जो कि गलत है। उत्तर प्रदेश सरकार का कहना है कि इन उत्पादों के लिए एफएसएसएआई (Food Safety and Standards Authority of India) प्रमाण पत्र ही काफी है।

नाबालिग को ब्लैकमेल करके अरबाज और सोहेल ने साथियों सहित मिलकर किया रेप, बेल्ट से पीटा: पुलिस ने 3 आरोपितों के 4 घरों पर चलाया बुलडोजर

मध्य प्रदेश के मंदसौर में नाबालिग से दुष्कर्म करने के पाँच आरोपितों को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया हैं। इनमें से दो नाबालिग हैं। वहीं, प्रशासन ने सोमवार (12 फरवरी 2024) को अरबाज, सोहेल और एनोस उर्फ यस के चार मकानों पर बुलडोजर चला दिया। इस दौरान तीन थानों की पुलिस तैनात रही। हिंदू संगठनों ने आरोपियों के दूसरे अवैध ठिकानों को भी गिराने की माँग की।

पुलिस के मुताबिक, मंदसौर जिले के दलोदा में रविवार (11 फरवरी 2024) को आरोपितों ने किशोरी को ब्लैकमेल करके एकांत में मिलने बुलाया था। जब किशोरी वहाँ पहुँची तो आरोपितों ने पहले थप्पड़ मारे, फिर बेल्ट से पिटाई कर दी। लड़की को पिटते देखकर कुछ हिंदू संगठन के कार्यकर्ता मौके पर पहुँच गए। उन्होंने तीन आरोपितों को पकड़ लिया उसे थाने लाए। वहीं, दो आरोपित भागने में कामयाब रहे थे।

पुलिस ने देर रात मुख्य आरोपी समेत पाँचों आरोपितों के खिलाफ मामला दर्ज करके उन्हें हिरासत में ले लिया। इन आरोपितों में सोहेल की उम्र 20 साल, आरबाज की उम्र 19 साल और एनोस उर्फ यस की उम्र 19 साल है। वहीं, दो आरोपित 18 साल से कम उम्र के हैं। पुलिस ने बताया कि इनमें मुख्य नाबालिग अभियुक्त ने किशोरी के साथ साल 2022 में भी जबरदस्ती की थी।

पीड़िता का कहना है कि 11 फरवरी 2024 की शाम करीब 5 बजे वह स्टेशन रोड पर स्थित कोचिंग जा रही थी। उसी दौरान यस ने अपने दोस्त (नाबालिग) के साथ उसका रास्ता रोक लिया। उसने पीड़िता के पुराने फोटो दिखाए, जिसमें वह नाबालिग के साथ थी। दोनों ने पुराने फोटो दिखाकर उसे ब्लैकमेल किया और कहा कि यदि वह द्वारिका विहार काॅलोनी नहीं आई तो वे फोटो को वायरल कर देंगे।

पीड़िता ने आगे बताया कि वह घर भागने लगी तो यस और उसके साथी ने पकड़कर मुँह दबा दिया। उसके बाद उसे काले रंग की कार में बैठाया और द्वारिका विहार काॅलोनी लेकर गए। यहाँ कार से बाहर खींचा और अरबाज अपने नाबालिग लड़के से साथ उसे पीटना शुरू कर दिया। नाबालिग ने उसे 15 से 20 चाँटे मारे और गर्दन दबाई। उसने मारने के लिए बेल्ट भी निकाली। इसी दौरान सोहेल भी आ गया।

लड़की ने बताया कि इस दौरान द्वारिका विहार काॅलोनी में बनी एक झोपड़ी में ले जाकर उसके साथ जबरन संबंध बनाए। यहाँ पर तीन और लोग आ गए, जिन्हें वह पहले से नहीं जानती थी। वे लोग उन्हें पकड़ कर थाने ले गए। इसके बाद लड़की के माँ-पिता को थाने बुलाया गया। मीडिया संस्थान हिंदुस्तान के अनुसार, इस मामले में सभी आरोपित एक समुदाय विशेष के बताए जा रहे हैं।

इसके बाद हिंदू संगठन के कार्यकर्ताओं ने थाने का घेराव करके आरोपितों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की माँग की। हिंदू कार्यकर्ताओं का कहना है कि रविवार (11 फरवरी 2024) की शाम करीब 5 बजे नाबालिग लड़की से आरोपित मारपीट कर रहे थे। वर्ग विशेष ‎के युवक उसे बाइक से सुनसान जगह ले गए थे और वहाँ किशोरी के साथ ऐसी हरकत कर रहे थे।

इस मामले में पूर्व‎ विधायक यशपाल सिंह सिसोदिया ने‎ बताया कि आरोपितों के खिलाफ‎ सख्त कार्रवाई को लेकर कलेक्टर और एसपी से चर्चा की है। पुराने ‎आपराधिक मामले जो दबे हुए ‎होंगे, उन पर भी जाँच की माँग की ‎है।‎ वहीं, तहसीलदार नीतेश पटेल ने कहा कि घटना के बाद ग्राम पंचायत से जानकारी निकाली गई थी और तीन आरोपितों के चार अवैध निर्माण को तोड़ा गया है। 

‘₹5 करोड़ अभी, ₹5 करोड़ नीतीश सरकार गिरने के बाद’: विश्वासमत के बाद तेजस्वी यादव के करीबी पर अपहरण का केस दर्ज, अखिलेश ने इंटरनेट से किया कॉल

बिहार में नीतीश कुमार की सरकार ने 129 विधायकों के समर्थन के साथ बहुमत साबित कर दिया, जबकि राजद ने 2 दिनों से अपने विधायकों को पूर्व डिप्टी CM तेजस्वी यादव के आवास में रखा हुआ था। इसके बावजूद चेतन आनंद, नीलम देवी और प्रह्लाद यादव ने पाला बदल कर सत्ताधारी गठबंधन का साथ दिया। अब जदयू विधायक सुधांशु शेखर ने एक केस दर्ज कराया है, जिसके बाद नया विवाद पैदा हो गया है। उन्होंने आरोप लगाया है कि जदयू विधायकों को तोड़ने के लिए 10-10 करोड़ रुपए के ऑफर दिए गए थे।

उनके द्वारा दर्ज कराई गई शिकायत में कहा गया है कि जदयू विधायकों को ऑफर दिया गया था कि उन्हें 5 करोड़ पहले और बाकी के 5 करोड़ काम हो जाने के बाद दिए जाएँगे। बताया गया है कि तेजस्वी यादव के करीबी इंजीनियर सुनील की तरफ से ये ऑफर दिए गए थे। पूर्व मंत्री नागमणि का नाम भी इसमें सामने आया है, जिनके द्वारा कहा गया था कि अखिलेश नाम का एक शख्स आपसे बात करेगा। फिर खुद को राहुल गाँधी का करीबी बताते हुए अखिलेश ने इंटरनेट से कॉल किया।

शिकायत में कहा गया है कि कई विधायकों को इस तरह के ऑफर दिए गए थे। जदयू विधायकों से संपर्क करने वालों में शक्ति सिंह यादव का नाम भी सामने आया है। उधर जदयू अपने उन विधायकों पर सख्त कार्रवाई करने जा रही है, जिन्होंने विश्वासमत में धोखा किया। सुधांशु शेखर ने राजधानी पटना के कोतवाली थाने में मामला दर्ज कराया था। जिस सुनील पर अपहरण का आरोप लगाया गया है, वो ठेकेदार है और तेजस्वी यादव का करीबी माना जाता है।

जदयू विधायक बीमा भारती और दिलीप राय के अपहरण का मामला दर्ज कराया गया है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी भी कह चुके हैं कि खेला करने वाले विधायकों पर कार्रवाई की जाएगी। पूर्व उप-मुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी ने भी कहा है कि विधायकों की खरीद-फरोख्त से खेला करने की सारी जोड़-तोड़ को विफल कर दिया गया है। नीतीश कुमार भी कह चुके हैं कि वो इसकी जाँच कराएँगे कि राजद विधायकों को एक साथ रखा गया था उसका पैसा कहाँ से आया।

बॉलीवुड अभिनेत्री जैकलीन फर्नाडिंस ने महाठग सुकेश के खिलाफ दिल्ली पुलिस कमिश्नर को दी शिकायत, कहा- जेल में बैठकर मुझे धमकी दे रहा और प्रताड़ित कर रहा है

बॉलीवुड ऐक्ट्रेस जैकलीन फर्नांडिस ने जेल में बंद महाठग सुकेश चंद्रशेखर के खिलाफ दिल्ली के पुलिस कमिश्नर संजय अरोड़ा से शिकायत की है। अपनी शिकायत में जैकलीन ने कहा है कि सुकेश जेल से ही उन्हें धमकी दे रहा है और प्रताड़ित कर रहा है। उन्होंने खुद को एक जिम्मेदार नागरिक बताया है, जो अनजाने में एक केस में फँस गई है।

कुछ दिन पहले पुलिस प्रमुख को भेजे गए पत्र में जैकलीन ने कहा, “मैं एक जिम्मेदार नागरिक हूँ, जिसने खुद को अनजाने में एक ऐसे मामले में उलझा हुआ पाया है जिसका कानून के शासन और हमारी न्यायिक प्रणाली की पवित्रता पर दूरगामी प्रभाव है। स्पेशल सेल द्वारा दर्ज एक मामले में अभियोजन पक्ष के गवाह के रूप में मैं आपको मनोवैज्ञानिक दबाव और लक्षित धमकी अभियानों की भीषण अग्निपरीक्षा के बीच लिख रही हूँ।”

पुलिस प्रमुख और क्राइम ब्रांच के स्पेशल कमिश्नर को भेजे गए ईमेल में जैकलीन ने मामले को तुरंत संज्ञान में लेने का आग्रह किया। उनका कहना है कि इससे न केवल उनकी सुरक्षा को खतरा है, बल्कि कानूनी प्रक्रियाओं की अखंडता भी खतरे में है। पत्र में कहा गया है, “खुद को सुकेश बताने वाला एक आरोपित मंडोली जेल में सलाखों के पीछे बैठा है और सार्वजनिक रूप से मुझे डराने-धमकाने की रणनीति के साथ धमकी दे रहा है।”

जैकलीन ने इसमें कहा है कि महाराष्ट्र संगठित अपराध नियंत्रण अधिनियम (मकोका) के तहत एक मामले में ‘अभियोजन गवाह’ उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सुकेश चंद्रशेखर के खिलाफ भारतीय दंड संहिता (IPC) की धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज की जानी चाहिए। अभिनेत्री ने कहा कि अदालत में सच्चाई बताने से रोकने के लिए वह उन्हें धमकाना चाहता है।

जैकलीन ने कहा, “ये कार्य केवल मेरे व्यक्तिगत अधिकारों पर आघात नहीं करते हैं, वे हमारी न्याय प्रणाली के हृदय पर प्रहार करते हैं। गवाह सुरक्षा के सिद्धांत, जो न्याय प्रशासन के लिए मौलिक है, से समझौता किया गया है, जिससे हमारे कानूनी संस्थानों की विश्वसनीयता और प्रभावकारिता कम हो गई है।”

जैकलिन ने कमिश्नर अरोड़ा से इस बात की भी व्यापक एवं पारदर्शी जाँच करने को कहा कि कैसे जेल में बंद एक आरोपित बाहर के लोगों से संचार बनाए रखने में कामयाब रहा। उन्होंने कहा, “यह जरूरी है कि आरोपियों के लिए उपलब्ध सभी संचार माध्यमों की जाँच की जाए और आगे के दुरुपयोग को रोकने के लिए कड़े कदम उठाए जाएँ।”

बता दें कि जैकलीन ने पिछले साल दिसंबर में दिल्ली की एक अदालत में याचिका दायर किया था। इस याचिका में जैकलीन ने कोर्ट से आग्रह किया था कि सुकेश द्वारा उन्हें संबोधित करते हुए पत्र लिखने या बयान जारी करने पर रोक लगाने के निर्देश दिए जाएँ। दरअसल, जैकलीन सुकेश से जुड़े 200 करोड़ रुपए के मनी लॉन्ड्रिंग मामले में दिल्ली पुलिस द्वारा की जा रही जाँच में गवाह हैं।

दरअसल, सुकेश अभिनेत्री जैकलीन को संबोधित करते हुए पत्र और बयान जारी करते रहता है। इन पत्र और बयानों में वह जैकलीन को ‘बेबी’ और ‘बोम्मा’ जैसे नामों से बुलाता रहा है। इस महाठग ने हाल ही में क्रिसमस और थैंक्सगिविंग के मौके पर एक पत्र जारी किया था। सुकेश ने इस पत्र में जैकलीन को हाल ही में एक पुरस्कार हासिल करने पर बधाई दी थी और उन्हें ‘माई लव’ और ‘बेबी’ कहकर संबोधित किया था।

सुकेश ने अपने पत्र में लिखा था, “बेबी, सबसे पहले आपके लिए मैं बहुत खुश हूँ। मनोरंजन उद्योग में आपके उत्कृष्ट योगदान के लिए 7वाँ DIAFA पुरस्कार प्राप्त करने पर बधाई। आपको अंदाजा नहीं है कि मैं आपके लिए कितना खुश हूँ माई लव। तुम सच में भारतीय फिल्म उद्योग की सबसे महान कलाकार हो। आप पुरस्कारों में ‘व्हाइट गाउन’ में सुपर सुपर स्टनिंग लग रही थीं। बेबी, मैं एक बार फिर आश्चर्यचकित हूँ।”

उसने आगे लिखा, “बेबी, आपकी दो अन्य लेटेस्ट तस्वीरें बहुत खूबसूरत थीं। एक आपकी ‘लाल अरबी पोशाक’ में रेगिस्तान में ली गई तस्वीर और बो पिंक साड़ी में आप बहुत खूबसूरत थीं। लेकिन जिसने मेरा दिल चुरा लिया, वह चमकदार लहंगे में तुम्हारा फोटोशूट है। बेबी तुम लहंगा में धरती की एकमात्र परी लग रही हो।”

गैंगस्टर बेटे को देने के लिए जेल में चरस लेकर पहुँची अमीर फातिमा, तलाशी के दौरान जूते से निकला ड्रग्स: FIR के बाद चालान, कोर्ट ने दी जमानत

उत्तर प्रदेश के बिजनौर जेल में बंद अपने गैंगस्टर बेटे से मिलने पहुँची उसकी अम्मी को लेकर हैरान करने वाला मामला सामने आया है। महिला शनिवार (10 फरवरी 2024) की दोपहर जिला जेल में अपने गैंगस्टर बेटे से मिलने पहुँची थी। कैदियों से मिलने आने वाली महिलाओं की महिला पुलिस तलाशी ले रही थी। तलाशी के दौरान जब महिला पुलिसकर्मियों ने उसके जूते उतरवाए तो उसमें से चरस का पैकेट मिला।

इसके बाद महिला पुलिसकर्मियों ने इसकी जानकारी अपने उच्चाधिकारियों को दी। उच्च अधिकारियों ने जूते से मिले चीज को देखा तो पाया कि पैकेट में करीब 10 ग्राम चरस है। चरस प्रतिबंधित मादक पदार्थ है। इसकी खरीद-बिक्री पर प्रतिबंध है। इसके बावजूद, यह महिला इसे लेकर अपने बेटे को देने के लिए जेल पहुँची थी।

इस महिला का नाम अमीर फातिमा है। यह तारिकमपुर निवासी जाहिद हुसैनी की बीवी है। पूछताछ में फातिमा ने बताया कि उसका बेटा सावेज पिछले एक साल से जेल में है और वह नशे का आदी है। इसीलिए उसके लिए वह चरस लेकर आई थी। हालाँकि, जेल के मुख्य गेट पर तलाशी के दौरान वह पकड़ी गई। जेलर रवींद्र नाथ ने फातिमा के खिलाफ संबंधित धाराओं में रिपोर्ट दर्ज कराई है।

जेलर रवींद्र नाथ ने बताया कि अमीर फातिमा का बेटा सावेज एक गैंगस्टर है। उस पर हत्या, लूट, जानलेवा हमला, चोरी समेत सात मुकदमे दर्ज हैं। अब उसकी अम्मी पर भी ड्रग्स आदि से संबंधित विभिन्न धाराओं में मुकदमा दर्ज करके उसका चालान कर दिया गया है। हालाँकि, बाद में उसे कोर्ट से जमानत मिल गई है।

बता दें कि दिसंबर 2023 में भी उत्तर प्रदेश के बिजनौर से ही एक ऐसा ही मामला सामने आया था। दरअसल, सर्वेश नाम की एक महिला का बेटा संजू सैनी हीमपुरदीप थाने का हिस्ट्रीशीटर है और पिछले एक साल से जेल में बंद है। उसे भी नशे की लत है। उसकी माँ एक अन्य महिला को अपने साथ लेकर जेल में उससे मिलने गई थी। तलाशी के दौरान उसके पर्स से भाँग की करीब 6 गोलियाँ बरामद हुई थीं।

इन दोनों महिलाओं के खिलाफ पुलिस ने कार्रवाई के लिए पत्र भेज दिया था। कहा जाता है कि वह पहले भी कई बार अपने बेटे को भाँग लाकर दे चुकी थी। संजू सैनी हिस्ट्रीशीटर बदमाश है। उस पर बिजनौर, अमरोहा और उत्तराखंड के हरिद्वार में भी कई मुकदमे दर्ज हैं। वह गिरोहबंदी अपराध करता है।

इसी तरह, कुछ दिन पहले इसी तरह की एक घटना सामने आई थी। राजस्थान के झालावाड़ जिले में गांजा की खेती का मामला सामने आया था। यहाँ मेहंदी के एक खेत में अवैध रूप से गांजा की खेती की जा रही थी। पुलिस ने मेहंदी के खेत में लगे 15 पौधों से 11 किलोग्राम से अधिक मादक पदार्थ बरामद किया था। इसके साथ ही इस धंधे में शामिल एक शख्स को भी गिरफ्तार किया था।

‘जिंदा आग में झोंक दिया, हिन्दुओं की पहचान कर-कर के हत्या की कोशिश’: जिन पत्रकारों ने कभी चलाई इनके दुख-दर्द की खबरें, हल्द्वानी में उन्हीं पर हमला

उत्तराखंड के नैनीताल के हल्द्वानी स्थित बनभूलपुरा में एक अवैध मस्जिद और मदरसे को ध्वस्त करने पहुँची प्रशासन की टीम पर हमला कर दिया गया। न सिर्फ थाना और पेट्रोल पंप फूँक दिया गया, बल्कि पुलिसकर्मियों को ज़िंदा जलाने की भी कोशिश की गई। महिला पुलिसकर्मियों को बदहवास अवस्था में भागते हुए देखा गया, उनके कपड़े तक फाड़ डाले गए। पत्थरबाजी हुई, गोलीबारी हुई। आम लोगों या पुलिस तो छोड़ दीजिए, पत्रकारों तक पर जानलेवा हमले किए गए।

इन्हीं पीड़ित पत्रकारों में से एक हैं राष्ट्रीय मीडिया संस्थान के लिए काम करने वाले राज सिंह (बदला हुआ नाम, स्थानीय स्तर पर कट्टर इस्लामी लोगों से खौफ के कारण)। ऑपइंडिया ने घायल पत्रकार से मिल कर जाना कि गुरुवार (8 फरवरी, 2024) को क्या हुआ था। राज सिंह को आग में ज़िंदा झोंकने की कोशिश की गई। उन्होंने बताया कि उस दिन उनका ऑफ था, लेकिन साढ़े 3 बजे के करीब दफ्तर से कॉल आया कि वो जल्द मलिक के बगीचे में पहुँच जाएँ। वहाँ उन्होंने देखा कि अवैध मदरसा और मस्जिद को पुलिस ने सील कर रखा था और प्रशासन उसे तोड़ने वाला था।

उन्होंने बताया कि वहाँ नगर निगम की टीम पहुँची और विरोध शुरू हो गया, जिसे मीडिया वाले कवर कर रहे थे। राज सिंह ने बताया कि उसी समय चारों तरफ से आगजनी शुरू हो गई, पत्रकार लोग भीतर घिरे हुए थे। तभी पत्थरबाजी शुरू हो गए, आँसू गैस के गोले भी चले। उन्होंने बताया कि वापसी के समय उन्हें और उनके साथियों को लौटते समय घेर लिया गया। पत्थर से हमला किया गया और लाठी-डंडों से पीटा जाने लगा। राज सिंह ने बताया कि उन्हें नाली में फेंक दिया गया।

उन्होंने अपनी आपबीती सुनाते हुए कहा कि उसके बाद जलती हुई आग में उन्हें झोंक दिया गया। बकौल राज सिंह, उनके सिर से काफी खून बह रहा था और वो होश में नहीं थे, ऐसे में वो हमलावरों को पहचान नहीं पाए। वो उनका कैमरा भी छीन कर ले गए। उन्होंने बताया कि भयंकर धुआँधार गोलियों की आवाज़ें आ रही थीं। उन्होंने संपादक को फोन कर के इसकी सूचना दी, फिर उनके परिचितों के फोन आने लगे। एक भाजपा नेता की मदद से वो गलियों से किसी तरह बाहर निकले।

राज सिंह की एक उँगली फ्रैक्चर हो गई है। उन्होंने बताया कि ईंट-पत्थर फेंके जा रहे थे। उनके अनुसार सिर पर नजदीक से ईंट-पत्थर चलाए जा रहे थे, कई छोटे-छोटे बच्चे भी हमलावरों में शामिल थे। राज सिंह के परिवार में उनकी पत्नी और 2 बेटे हैं। उन्होंने बताया कि उन्होंने उम्मीद छोड़ दी थी कि वो इस स्थिति से बाहर निकल पाएँगे, वो भगवान का नाम लेने लगे थे। उन्होंने कहा कि पहले यहाँ ऐसा नहीं हुआ था, अब पत्रकारों को भी पीटा जा रहा है।

राज सिंह ने बताया, “कोई भी कार्यक्रम होता था तो हम अच्छे से कवर करते थे। पहले हम रात-रात तक रुक कर कवर करते थे। सबकी पीड़ा दिखाते थे, अख़बारों की फाइलें देख लीजिए। जो भी हुआ वो उम्मीद से परे था, इसकी कल्पना हमने नहीं की थी। जितने भी पत्रकार थे, लगभग सभी को पीटा गया।”

एक अन्य पत्रकार ने बताया कि पिछले साल जब कोर्ट ने अतिक्रमण हटाने का फैसला दिया था तब वो लोग बनभूलपुरा के मुस्लिम समाज के साथ खड़े थे। इस पत्रकार ने बताया कि पत्रकार, नगर निगम और पुलिस में से खोज-खोज कर हिन्दू छाँटे गए, फिर उनकी हत्या की तैयारी बनी। उन्होंने कहा कि अगर गाँधीनगर के हिंदुओं ने हमें न बचाया होता तो कोई भी जिंदा न बचता। ये सब कहना है ‘DNN न्यूज़’ के पत्रकार पंकज अग्रवाल का।

उन्होंने बताया कि JCB पहुँचते ही पथराव चालू हो गया और पेट्रोल बम फेंक कर गाड़ियाँ जलाई गईं। उनके पाँव में चोटें आईं, उन्हें इलाज कराना पड़ा। उन्होंने बताया कि अगर हेलमेट न पहना होता तो और भी स्थिति ख़राब होती।

उन्होंने बताया कि ये वही लोग हैं जिनके समर्थन में अच्छी-अच्छी खबरें उन्होंने चलाई थीं, ताकि सरकार इनका कोई नुकसान न करे। पंकज अग्रवाल ने कहा कि केवल हिन्दुओं को निशाना बनाए जाने की साजिश थी। उन्होंने बताया कि हिन्दू पत्रकारों और सफाई कर्मचारियों की पहचान कर के उन्हें मारा गया। पंकज का कहना है कि पुलिस वालों और पत्रकारों को गिन-गिन कर मारा जा रहा था। दोनों पत्रकारों का कहना था कि जिनके लिए उन्होंने सकारात्मक खबरें पिछले साल चलाई थीं, उन्होंने ही उन्हें पीटा।

इससे पहले अस्पताल में इलाज कराने आए ‘HNN न्यूज़’ के घायल पत्रकार पंकज सक्सेना से ऑपइंडिया ने बातचीत की, जिन्होंने बताया था कि भीड़ नाम पूछ-पूछ कर मार रही थी, मुस्लिम होने पर छोड़ दिया जा रहा था। उनके हाथ और पाँव में फ्रैक्चर हुआ है। उनके पाँव में जहाँ प्लास्टर लगा है, वहीं हाथ में भी उन्होंने बैंडेज पहन रखा गया। उन्होंने बताया कि वहाँ पहले से साजिश रच कर 8-10 हजार लोग खड़े थे, जिन्होंने पत्थरबाजी शुरू कर दी और पेट्रोल बम फेंकने लगे।

अपडेट: पहले प्रकाशित खबर में एक राष्ट्रीय मीडिया संस्थान से जुड़े पत्रकार का नाम और उनकी फोटो लगी थी। सुरक्षा कारणों से उनके संस्थान का नाम, पत्रकार का नाम और फोटो आदि छिपा कर खबर को अपडेट किया गया है।