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CM धामी ने कहा, उत्तराखंड पुलिस ने 24 घंटे में कर दिखाया: हल्द्वानी में जहाँ हुआ दंगा वहीं बनी चौकी, घायल महिला पुलिसकर्मियों ने किया उद्घाटन

उत्तराखंड के हल्द्वानी जिले में जिस जगह हिंसा हुई और जिस अवैध मस्जिद को ढहाने के बाद दंगाईयों ने लोगों का खून बहाया, उस जगह पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने पुलिस थाना बनाने की घोषणा की थी। चूँकि पुलिस थाना बनाने में समय लगता, ऐसे में प्रशासन ने उनके ऐलान के 24 घंटों के भीतर की खाली कराई गई जगह पर पुलिस चौकी का निर्माण कर दिया है। दंगाइयों की हिंसा की शिकार हुई दो महिला पुलिसकर्मियों के हाथों इसका उद्घाटन कराया गया। अब उस जगह पर 24 घंटे पुलिस की तैनाती रहेगी।

नैनीताल के एसएसपी प्रह्लाद नारायण मीणा ने बताया कि सीएम पुष्कर सिंह धामी ने 8 फरवरी 2024 को हुई हिंसा के बाद कहा था कि खाली कराई गई जगह पर पुलिस थाना बनाया जाएगा, ऐसे में मुख्यमंत्री के आदेश का पालन करते हुए वहाँ चौकी बना दी गई है।

एसएसपी ने बताया कि दंगाइयों की हिंसा के दौरान घायल हो गई 2 महिला पुलिसकर्मियों ने ही चौकी का उद्घाटन किया है। अब बनभूलपुरा के हिंसा प्रभावित इलाके के बीचो-बीच हमेशा के लिए पुलिस तैनात कर दी गई है। इसकी कमान एक हेड कॉस्टेबल को सौंपी गई है, जिसका साथ देने के लिए चार कॉस्टेबल और पीएसी के जवानों को तैनात किया गया है।

बता दें कि उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने बनभूलपुरा में पुलिस थाना खोलने का ऐलान किया था। उन्होंने एक्स पर लिखा था, “बनभूलपुरा, हल्द्वानी में जिस जगह से अवैध अतिक्रमण हटाया गया, वहाँ पर अब पुलिस थाने का निर्माण किया जाएगा। उपद्रवियों और दंगाइयों के लिए हमारी सरकार का यह स्पष्ट संदेश है कि देवभूमि की शांति से खिलवाड़ करने वाले किसी भी व्यक्ति को छोड़ा नहीं जाएगा, ऐसे उपद्रियों के लिए उत्तराखण्ड में कोई स्थान नहीं है।”

गौरतलब है कि हल्द्वानी नगर निगम ने 8 फरवरी 2024 को अतिक्रमण हटाओ अभियान के तहत बनभूलपुरा इलाके में स्थित अवैध मस्जिद और मदरसे को बुलडोजर से ध्वस्त कर दिया था। इसके बाद वहाँ हिंसा फैल गई। दंगाइयों ने पुलिस वालों पर पत्थरबाजी की और थाने को घेर कर लूट लिया। इस दौरान दंगाइयों ने थाने में रखे हथियार और गोलियाँ भी लूट ली थी। इस हिंसा में अब तक 5 दंगाइयों समेत 6 लोगों की मौत हो गई, तो 300 से अधिक लोग घायल हो गए।

नवाज शरीफ ने भाई शहबाज को सौंपा पाकिस्तान, बेटी मरियम को पंजाब: अब्बा जरदारी को राष्ट्रपति बनाने की शर्त पर बिलावल ने दिया समर्थन

पाकिस्तान में चल रही राजनीतिक उथल-पुथल के बीच पाकिस्तान मुस्लिम लीग और पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी ने निर्णय लिया है कि वो मुल्क में मिलकर सरकार चलाएँगे। इस सरकार का नेतृत्व पूर्व प्रधानमंत्री नवाज शरीफ के भाई शहबाज शरीफ करेंगे। वहीं नवाज की बेटी मरियम नवाज को पंजाब प्रांत की नई मुख्यमंत्री बनाया जाएगा। नवाज शरीफ ने कहा है कि वो अपने भाई और बेटी को सत्ता में पीछे रहकर ही समर्थन देंगे। इसके अलावा मुल्क के राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी हो सकते हैं।

पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी के अध्यक्ष बिलावल भुट्टो जरदारी ने इस बीच जानकारी दी कि उनकी पार्टी सरकार का हिस्सा बने बिना प्रधानमंत्री पद के लिए पाकिस्तान मुस्लिम लीग-नवाज (पीएमएल-एन) के उम्मीदवार का समर्थन करेगी। उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी को पर्याप्त जनादेश नहीं मिला है, इसलिए वह प्रधानमंत्री पद के लिए दावेदारी नहीं करेंगे।

बिलावल ने इस दौरान अपने अब्बा को आसिफ अली जरदारी को अगला राष्ट्रपति बनाने की इच्छा जरूर व्यक्त की। वह बोले, “मैं यह इसलिए नहीं कह रहा हूँ क्योंकि वह मेरे अब्बा हैं, मैं यह इसलिए कह रहा हूँ क्योंकि देश इस समय भारी संकट में है और अगर कोई इस आग को बुझा सकता है तो वह आसिफ अली जरदारी हैं।”

बता दें कि पाकिस्तान में फरवरी में चुनाव हुए थे। लेकिन प्रमुख चेहरे होने के बावजूद किसी पार्टी को स्पष्ट बहुमत यानी 133 सीट नहीं मिली। चुनाव में सबसे ज्यादा (100+) सीट इमरान खान की पीटीआई समर्थित निर्दलीय उम्मीदवारों को मिलीं, लेकिन वो बहुमत तक नहीं पहुँच पाए। वहीं नवाज शरीफ की पार्टी पीएमएलएन को 72 सीटें मिली और बिलावल भुट्टो की पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी को 54 सीट मिली और सबसे कम यानी 17 सीट एमक्यूएम के हिस्से आई।

ऐसे में सत्ता कौन बनाएगा इसे लेकर लगातार बहस हो रही थे। लेकिन अब निर्णय आ गया है। शहबाज शरीफ दूसरी बार मुल्क के प्रधानमंत्री बनेंगे। साल 2022 के अप्रैल में इमरान खान की सरकार जाने के बाद भी उन्हीं को देश के पीएम होने की कमान मिली थी।

CM योगी ने ज्ञानवापी के व्यासजी तहखाने में किए झाँकी दर्शन, बाबा विश्ननाथ-नंदी का पूजन: PM मोदी की काशी यात्रा को लेकर बैठक भी की

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मंगलवार (13 फरवरी 2024) को वाराणसी का दौरा किया। इस दौरान उन्होंने काशी विश्वनाथ की पूरे विधि-विधान से पूजा-अर्चना की। सीएम योगी इसके बाद ज्ञानवापी ढाँचे के अंदर पहुँचे और व्यासजी के तहखाने में झाँकी दर्शन किए। इसके साथ ही उन्होंने बाहर आकर नंदी बाबा की पूजा की। दरअसल, सीएम योगी आदित्यनाथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आगामी वाराणसी दौरे की तैयारियों के साथ ही वहाँ जारी विकास कार्यों की समीक्षा के लिए पहुँचे थे।

विधिन-विधान के साथ काशी विश्वनाथ की पूजा

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, जब से कोर्ट ने व्यासजी तहखाने में पूजा-अर्चना के आदेश दिए हैं, उसके बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पहली बार वाराणसी पहुँचे थे। उन्होंने काशी विश्ननाथ मंदिर में विधि-विधान से पूजा अर्चना की। इसके बाद वो ज्ञानवापी के व्यासजी तहखाने में पहुँचे और वहाँ रखी मूर्तियों के झाँकी दर्शन किए। सीएम योगी ने नंदी की भी पूजा की, जो ज्ञानवापी में ही स्थित हैं।

सिगरा स्टेडियम और रोप-वे प्रोजेक्ट का कामकाज देखा

वाराणसी में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सिगरा में बन रहे अंतर्राष्ट्रीय स्टेडियम और काशी रोप-वे प्रोजेक्ट का कामकाज देखा। उन्होंने अधिकारियों से कामों का ब्यौरा लिया। बता दें कि पीएम नरेंद्र मोदी कुछ ही समय में वाराणसी पहुँचने वाले हैं। इसके लिए तैयारियाँ की जा रही हैं। सीएम योगी ने अधिकारियों ने उसकी भी जानकारी ली।

प्रधानमंत्री मोदी की रैली पिंडरा के करखियाओं गाँव में होनी है। वो यहाँ से आगामी लोकसभा चुनाव के लिए प्रचार का आगाज करेंगे। पीएम मोदी दो बार से वाराणसी के सांसद हैं।

काशी विश्वनाथ मंदिर के मुख्य कार्यपालक अधिकारी विश्व भूषण मिश्रा ने बताया कि प्रशासनिक कार्यों के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनात करीब 8 बजे रात को काशी विश्वनाथ मंदिर पहुँचे थे। यहाँ उन्होंने पूजा करने के बाद ज्ञानवापी परिसर का रुख किया। करीब आधे घंटे तक वो काशी विश्वनाथ और व्यासजी तहखाने में रहे।

बता दें कि कोर्ट ने 31 जनवरी को व्यासजी की पूजा अर्चना करने की अनुमति दी थी और कहा था कि जिला प्रशासन तहखाने के अंदर पूजा की व्यवस्था बनाए। इसके बाद से आम श्रद्धालु व्यासजी तहखाने में जाकर दर्शन कर रहे हैं।

‘हमें अलग हो जाने दो, खालिस्तान बनाएँगे’, किसानों के प्रदर्शन को खालिस्तानियों ने किया हाइजैक, वीडियो आए सामने

पंजाब, हरियाणा और अन्य राज्यों से आए कथित किसानों ने 13 फरवरी 2024 को दिल्ली में घुसने की कोशिश की। किसान सरकार से अपनी माँगें मनवाना चाहते हैं। कहा जा रहा है कि इस विरोध प्रदर्शन में लगभग 200 किसान संगठन शामिल हैं। किसान प्रदर्शनों की कुछ ऐसी तस्वीरें सामने आई हैं, जिनसे साबित होता है कि यह प्रदर्शन भी खालिस्तानियों और आन्दोलनजीवियों की भेंट चढ़ चुका है।

हरियाणा के एक यूट्यूब चैनल सत्य खबर ने 12 फरवरी को एक वीडियो साझा किया। इस वीडियो में कुछ सिख खालिस्तान की माँग करते दिख रहे हैं। उनमें से एक सिख ने कहा, “हम सिंघु बॉर्डर पर खड़े हैं, जहाँ तुम लोगों ने बैरिकेड लगा रखे हैं। एक काम करो: हरियाणा के बॉर्डर को हमेशा के लिए बंद कर दो। हम पाकिस्तान के साथ सीमा खोलेंगे। तुम लोगों ने हमें भारत से अलग किया तो अब अलग ही हो जाते हैं।”

इसके बाद इन लोगों ने केंद्र की मोदी सरकार पर भी निशाना साधा। उस कथित किसान ने आगे कहा, “मोदी सरकार पंजाब को अपना नहीं समझती है। अगर वो पंजाब को अपना नहीं समझते हैं तो हमें अलग हो जाने दो। हमें अपना देश खालिस्तान बनाने दो। हम पाकिस्तान के साथ जुड़ जाएँगे। हमने दीवारें नहीं बनाईं, तुमने बनाईं। तुमने हमें भारत से अलग कर दिया है। अब हम खालिस्तान बनाएँगे।”

इस वीडियो में खालिस्तान की बात करने वाले किसानों ने बताया कि वे एयरपोर्ट जाना चाहते था। हालाँकि, इस दौरान वे ये भूल गए कि जहाँ से वो आए हैं, उस पंजाब में 9 घरेलू और 3 अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट हैं। वे इस दौरान विरोधाभासी दावे भी करते रहे। वे एक तरफ दिल्ली के एयरपोर्ट जाने की बात करते हैं तो दूसरे ही पल कहते हैं कि वे बैरिकेड देखने आए थे।

इसके बाद वह कथित किसान कहता है, “हम अपनी फसलें अपने आप बेच लेंगे। हमें अलग हो जाने दो।” इसके बाद इस सिख व्यक्ति ने हिन्दुओं पर उलटी सीधी टिप्पणियाँ कीं। उसने कहा, “अमृतसर से लाखों ट्रॉलियाँ आ रही हैं। सबमें लंगर लगे हुए हैं। ये हिन्दू लंगर लगा पाएँगे? ये भूख से मरते हुए हमारे लंगर में आते हैं। ये लोग चावल, कढ़ी और पूड़ी का भी इंतजाम नहीं कर सकते लेकिन यहाँ जलेबी, पूड़ी और लड्डू भी बाँटेंगे।”

इसके बाद उस सिख व्यक्ति ने एक फर्जी तर्क गढ़ा। उसने दावा किया कि देश में सबसे ज्यादा अन्न पंजाब पैदा करता है। हालाँकि, सच्चाई यह है कि पंजाब देश में अन्न का सबसे बड़ा उत्पादक नहीं है, खासकर चावल और गेहूँ। पश्चिम बंगाल सबसे ज्यादा चावल पैदा करता है। वहीं, उत्तर प्रदेश गेहूँ सबसे ज्यादा पैदा करता है। यहाँ पंजाब दूसरा सबसे बड़ा उत्पादक तक नहीं है।

एक अन्य वीडियो में ट्रैक्टर पर चढ़ा एक निहंग सिख प्रदर्शन के बारे में बताता है, “किसानों की फौज आ रही है। हम तो किसी भी हालत में दिल्ली में घुसेंगे।” जब उससे पूछा गया कि सरकार उनकी माँगें मानेगी, तो उसने कहा, “हमें तो कोई उम्मीद नहीं है। उन्होंने हमें धोखा दिया है। 700 किसान मरे हैं। दीप सिद्धू मर गया। हमें कोई आशा नहीं है। हम आजाद पंजाब चाहते हैं, खालिस्तान वाला पंजाब।”

किसान आन्दोलन के बारे में आई थी खुफिया जानकारी

गौरतलब है कि हरियाणा और पंजाब से प्रदर्शनकारी किसान दिल्ली में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन शुरू करने के लिए दिल्ली की ओर मार्च कर रहे हैं। संयुक्त किसान मोर्चा (एसकेएम) और किसान मजदूर मोर्चा सहित 200 से अधिक किसान संघों ने एमएसपी और अन्य माँगों के लिए कानूनी गारंटी की माँग को लेकर 13 फरवरी (मंगलवार) को ‘दिल्ली चलो’ मार्च की घोषणा की थी।

एमएसपी पर एक कानून तैयार करने के अलावा, प्रदर्शनकारी किसान माँग कर रहे हैं कि भारत को विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ) तक को छोड़ देना चाहिए, अन्य देशों के साथ व्यापार समझौतों को रोक देना चाहिए और 60 साल से ऊपर के किसानों को ₹10,000 रुपये की महीने की पेंशन देनी चाहिए। खुफिया रिपोर्ट के अनुसार, प्रदर्शनकारी किसान के प्रधान मंत्री आवास और गृह मंत्री आवास पर भी आ सकते हैं।

‘आप जिस जमीन पर लकीर खींच देंगे, मंदिर के लिए दे दूँगा: ‘अहलान मोदी’ में PM ने याद किया UAE के राष्ट्रपति का ऑफर, बोले – 140 करोड़ भारतीयों का संदेश लाया हूँ

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी UAE (संयुक्त अरब अमीरात) के दौरे पर हैं। वहाँ उन्होंने RuPay कार्ड भी लॉन्च किया, यानी अब यूएई में भी भारत का RuPay कार्ड चलेगा। इसके बाद राजधानी अबुधाबी में प्रधानमंत्री ने ‘अहलान मोदी’ कार्यक्रम को संबोधित किया, जहाँ भारतीय समुदाय के लोग बड़ी संख्या में पहुँचे। इस दौरान उन्होंने कहा कि भारत के विभिन्न राज्यों और धर्मों के लोग यहाँ आए हुए हैं, लेकिन सबके दिल जुड़े हुए हैं। पीएम मोदी ने कहा कि इस ऐतिहासिक स्टेडियम में हर धड़कन एक ही प्रतिध्वनि देती है – भारत-UAE की दोस्ती लंबी बनी रहे।

पीएम मोदी ने कहा कि आइए, ऐसी यादें लेकर जाएँ जो जीवन भर बनी रहें, ऐसी यादें जिन्हें आप और मैं हमेशा सँजोकर रखेंगे। उन्होंने कहा कि वो वहाँ जनता से मिलने आए हैं। जनता को ‘मेरे प्यारे परिवारजनों’ कह कर संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि वो अपने साथ 140 करोड़ भारतीयों का एक संदेश लेकर आए हैं, और यह सरल लेकिन गहन है – भारत को आप पर गर्व है! उन्होंने कहा कि यूएई ने उन्हें अपने सर्वोच्च सम्मान ‘द ऑर्डर ऑफ जाएद’ से सम्मानित किया, ये उनके लिए सौभाग्य की बात है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि ये सम्मान भी सिर्फ उनका नहीं है, बल्कि करोड़ों भारतीयों का सम्मान है, आप सभी का सम्मान है। उन्होंने इस पर खुशी जताई कि अमीरात के साथियों ने भारतीयों को अपने दिल में जगह दी है, अपने सुख-दुख का साझीदार बनाया है। पीएम मोदी ने कहा कि समय के साथ ये रिश्ता दिनोंदिन और मजबूत होता जा रहा है। उन्होंने कहा कि जब साल 2015 में उनके सामने आप सब की ओर से यहाँ अबूधाबी में मंदिर का प्रस्ताव रखा तो उन्होंने तुरंत एक पल भी गंवाए बिना उन्होंने हाँ कर दिया।

पीएम मोदी ने कहा, “उन्होंने (UAE के राष्ट्रपति मोहम्मद बिन जायेद अल नाह्यान) यहाँ तक कह दिया कि जिस जमीन पर लकीर खींच लेंगे, मैं दे दूँगा। अब अबूधाबी में इस भव्य-दिव्य मंदिर के लोकार्पण का समय आ गया है। आज 21वीं सदी के इस तीसरे दशक में भारत और UAE का रिश्ता एक अभूतपूर्व ऊँचाई पर पहुँच रहा है। हम एक-दूसरे के विकास में साझीदार हैं। हमारा रिश्ता प्रतिभा का है, इनोवेशन का है, संस्कृति का है। आज यूएई भारत का तीसरा सबसे बड़ा ट्रेड पार्टनर है।”

पीएम मोदी ने कहा कि उन्हें हर भारतीय के सामर्थ्य पर इतना ज्यादा भरोसा है कि इसी भरोसे के दम पर मोदी ने एक गारंटी भी दी है। उन्होंने कहा कि मोदी ने अपने तीसरे टर्म में भारत को तीसरे नंबर की इकोनॉमी बनाने की गारंटी दी है, और मोदी की गारंटी यानी, गारंटी पूरा होने की गारंटी। पीएम मोदी ने कहा कि आज भारत को दुनिया एक विश्व बंधु के रूप में देख रही है, आज दुनिया के हर बड़े मंच पर भारत की आवाज सुनी जाती है। कहीं भी संकट आता है तो सबसे पहले पहुंचने वाले देशों में भारत का नाम होता है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि आज भारत को दुनिया एक विश्व बंधु के रूप में देख रही है। आज दुनिया के हर बड़े मंच पर भारत की आवाज सुनी जाती है। कहीं भी संकट आता है तो सबसे पहले पहुंचने वाले देशों में भारत का नाम होता है। उन्होंने जानकारी दी कि जल्द ही फ्रांस, श्रीलंका और मॉरीशस की तरह UAE में भी भारत का ऑनलाइन इंस्टेंट पेमेंट सिस्टम UPI लॉन्च हो जाएगा।

पाकिस्तान के फिर पीएम बन सकते हैं नवाज शरीफ, बिलावल की PPP ने समर्थन का किया ऐलान, जरदारी को राष्ट्रपति बनाने की रखी शर्त

पाकिस्तान में आम चुनाव के बाद अब सरकार बनाने की कोशिशें तेज हैं। चुनावों में तीसरे नम्बर पर सीटें लाने वाली पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (PPP) ने पाकिस्तान मुस्लिम लीग-नवाज (PML-N) को सहारा दिया है। PPP के चेयरमैन बिलावल भुट्टो ने कहा है कि वह PML-N के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार को बाहर से समर्थन देंगे।

बिलावल ने कहा है कि वह पाकिस्तान में स्थिरता चाहते हैं, इसलिए PML-N को सरकार चलाने में सहायता करेंगे। PPP सरकार में शामिल नहीं होगी और ना ही कोई मंत्रिपद लेगी। वह PML-N के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार का समर्थन करेंगे जो कि संभवतः नवाज शरीफ स्वयं या उनके परिवार का ही कोई व्यक्ति होगा। बिलावल का कहना है कि PTI ने उनकी पार्टी के साथ गठबंधन करने से मना कर दिया, इसके बाद वे PML-N का समर्थन करने का निर्णय लिया।

हाल ही में सम्पन्न हुए पाकिस्तान के चुनावों में किसी भी पार्टी को स्पष्ट बहुमत नहीं मिला है। 266 सीटों के लिए हुए चुनाव में सबसे अधिक 93 सीटें इमरान खान की पार्टी पाकिस्तान तहरीक-ए-इन्साफ (PTI) के समर्थित निर्दलीय उम्मीदवारों को मिली हैं। वहीं, पूर्व प्रधानमंत्री नवाज शरीफ की पार्टी PML-N को 75, जबकि PPP को 54 सीट मिली हैं। MQM को 17 सीटें और अन्य के खाते में 27 सीटें गई हैं। सरकार बनाने के लिए 133 सीटों की आवश्यकता है।

गौरतलब है कि पाकिस्तान की संसद में 336 सीट हैं, जिनमें से 266 सीटों के लिए चुनाव होता है। बाकी बचीं 70 सीटें इन चुनावों में जीतने वाली पार्टियों को उनकी संख्याबल के हिसाब से बाँट दी जाती हैं। इन 70 सीटों में 60 महिलाओं के लिए और 10 गैर-मुस्लिमों के लिए होती हैं। वर्तमान परिस्थिति में जहाँ PTI के पास पूरी संख्या नहीं है तो वहीं PML-N और PPP भी साथ मिलकर जादुई आँकड़े को नहीं छू पा रहे।

हालाँकि, दोनों के साथ आने के ऐलान के बाद माना जा रहा है कि कुछ छोटी पार्टियाँ भी उन्हें समर्थन दे सकती हैं। इससे पहले PTI ने PPP के साथ मिलकर सरकार बनाने के ऑफर को ठुकरा दिया था। यदि वर्तमान आँकड़ों के हिसाब से देखा जाए तो PML-N और PPP के पास मिलकर बहुमत से मात्र 6 सांसदों की कमी है। वह कमी निर्दलीयों या छोटी पार्टियों के समर्थन से पूरी कर सकते हैं।

सरकार भले PPP में शामिल नहीं होगी, लेकिन बिलावल भुट्टो ने अपने पिता आसिफ अली जरदारी की राष्ट्रपति पद के लिए दावेदारी पुख्ता कर दी है। बिलावल भुट्टो ने खुद का नाम प्रधानमंत्री की रेस से हटा लिया है। अब माना जा रहा है कि नवाज शरीफ ही इस बार फिर से पाकिस्तान के प्रधानमंत्री बनेंगे।

वह इन चुनावों के कुछ दिनों पहले ही लंदन से वापस पाकिस्तान लौटे हैं। संसद में संख्या बल से ज्यादा पाकिस्तान में सत्ता पाने के लिए सेना का आशीर्वाद जरूरी होता है। वर्तमान में यह आशीर्वाद नवाज शरीफ के साथ है। वहीं, इमरान की पार्टी कैसे भी करके आँकड़े जुटा ले तो भी वह सरकार बनाएगी, यह संदेहास्पद है।

‘वे मस्जिद तोड़ रहे और तुम मंदिर बना रहे’: अबू धाबी में पहले हिंदू मंदिर से बौखलाए इस्लामी कट्टरपंथी, UAE के शासक को भी दे रहे गाली

संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के अबू धाबी में बने BAPS स्वामी नारायण मंदिर के उद्घाटन कार्यक्रम में शामिल होने के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी वहाँ पहुँचे हैं। वह अबू धाबी में बुधवार (14 फरवरी 2024) को इस मंदिर के उद्घाटन कार्यक्रम में शामिल होंगे। इस बीच इस्लामी कट्टरपंथियों ने इस मंदिर पर अपनी घृणा दिखानी शुरू कर दी है।

अबू धाबी में नवनिर्मित इस मंदिर को लेकर सोशल मीडिया पर इस्लामी कट्टरपंथी लगातार टिप्पणी कर रहे हैं। वे उल्टी सीधी टिप्पणी कर रहे हैं। इसके साथ ही कट्टरपंथी इस्लामी संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के शासकों से पूछ रहे हैं कि एक इस्लामी मुल्क में आखिर मंदिर का कार्यक्रम होने ही क्यों दिया जा रहा है।

अबू धाबी में स्थित इस BAPS स्वामी नारायण मंदिर को लेकर जब UAE के सबसे बड़े समाचार पत्र खलीज टाइम्स ने ट्विटर पर खबर शेयर की तो कट्टरपंथी भड़क गए। ऐसे ही एक कट्टरपंथी ने लिखा, “वो तुम्हारी मस्जिदें गिराएँ और तुम उनके मंदिर बनाते जाओ। उनको शर्मिन्दा होना चाहिए, जिन्होंने इसे बनाया और इसके लिए पैसे दिए।”

उवैद खान नाम के एक कट्टरपंथी ने पूछा, “UAE ने इस कार्यक्रम की अनुमति ही क्यों दी?”

वहीं, एक दूसरे कट्टरपंथी ने लिखा, “मेरी दुआ है कि अरब मुनाफिक (अरब के मौलाना) इस मंदिर को चलाएँ।”

एक और कट्टरपंथी ने UAE के शासकों पर मंदिर को लेकर प्रश्न उठाए। हमीद रजा ने लिखा, “क्या हुआ अगर वे (हिंदू) भारत में मस्जिद को गिरा रहे हैं और मुस्लिम को मार रहे हैं। आप यूएई के बेशर्म लोगों पर शर्म आनी चाहिए।”

एक कट्टरपंथी ने तो यहाँ तक कह दिया कि कैसा हो अगर शेख जायद मस्जिद को ढहा कर मंदिर बना दिया जाए, ताकि हिन्दू खुश हो जाएँ।

क्या है UAE के इस मंदिर की खासियत

इस नवनिर्मित मंदिर को 1 मार्च 2024 आम लोगों के लिए खोल दिया जाएगा। मंदिर परिसर में एक विजिटर केंद्र, प्रार्थना कक्ष, प्रदर्शनियाँ, लर्निंग सेंटर, बच्चों और युवाओं के लिए खेल क्षेत्र, उद्यान, पानी की सुविधाएँ, फूड कोर्ट, पुस्तक एवं उपहार की दुकानों के साथ अन्य सुविधाएँ भी होंगी।

जिस मंदिर का प्रधानमंत्री उद्घाटन करेंगे, वह अबू धाबी का पहला हिंदू मंदिर है। यह मंदिर संयुक्त अरब अमीरात के अमीर द्वारा उपहार में दी गई 27 एकड़ भूमि पर बना है। स्वामी नारायण मंदिर के निदेशक प्रणव देसाई ने इस मंदिर के लिए संयुक्त अरब अमीरात और भारतीय नेतृत्व को आभार जताया है।

बता दें स्वामीनारायण संप्रदाय की वेबसाइट के अनुसार, इस संप्रदाय का हिंदू मंदिर UAE के अबू धाबी, दुबई, शारजाह और रुवैस शहर में स्थित हैं। ये मंदिर या तो बन गए हैं या फिर बन रहे हैं। अगर मीडिल ईस्ट की बात करें तो स्वामीनारायण मंदिर ओमान के मस्कट और सोहर तथा कुवैत एवं बहरीन में भी स्थित हैं।

दरअसल, स्वामीनारायण संप्रदाय के बोचासनवासी अक्षर पुरूषोत्तम स्वामीनारायण संस्था (BAPS) के तत्कालीन अध्यक्ष स्वामी महाराज 5 अप्रैल 1997 को UAE के शारजाह के एक रेगिस्तानी इलाके में गए। वहाँ पर स्वामी जी विश्व शांति और सभी धर्मों में एक-दूसरे के प्रति प्रेम के लिए प्रार्थना की। उन्होंने सभी देशों की प्रगति की भी कामना की। इसके साथ ही उन्होंने अपनी इच्छा से अबू धाबी में एक मंदिर बनाने के लिए भी प्रार्थना भी की।

अगले दो दशकों में स्वामीनारायण संप्रदाय के संतों एवं भक्तों ने स्वामी जी की कल्पना के अनुसार मंदिर बनाने के लिए UAE के लोगों एवं वहाँ के नेताओं से मुलाकात की और उनसे इसके लिए इजाजत माँगी। इसके साथ ही उन्होंने मंदिर बनाने के लिए जमीन की भी माँग की।

साल 2014 में केंद्र में भाजपा की सरकार आई और नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री बने। इसके बाद भारत और UAE के बीच आपसी विश्वास का माहौल बना और दोनों देशों के रिश्ते और मजबूत हुए। इसके बाद साल 2015 में UAE की सरकार ने हिंदू मंदिर के लिए जमीन आवंटित की थी।

इसके बाद पीएम मोदी ने UAE सरकार की दिल खोलकर सराहना की थी। TOI की रिपोर्ट के मुताबिक, प्रधानमंत्री मोदी ने अपने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में कहा था, “मैं अबू धाबी में मंदिर बनाने के लिए भूमि आवंटित करने के फैसले के लिए संयुक्त अरब अमीरात सरकार का बहुत आभारी हूँ। यह एक महान कदम है।” मंदिर परियोजना के निर्माण, विकास और प्रशासन के लिए दोनों सरकारों ने स्वामीनारायण संस्था और मंदिर लिमिटेड को चुना।

इसके बाद अबू धाबी-दुबई राजमार्ग के नजदीक अबू धाबी-स्वीहान-अल ऐन रोड पर अल रहबा क्षेत्र के अबू मुरीखा में इस मंदिर का निर्माण कार्य शुरू हुआ। इस मंदिर में सात टावर हैं, जो संयुक्त अरब अमीरात में स्थित सात अमीरात का प्रतिनिधित्व करते हैं। इस मंदिर को बनाने की आधिकारिक घोषणा फरवरी 2018 में शाही दरबार में की गई थी और अप्रैल 2019 में शिलान्यास समारोह आयोजित किया गया था। मई 2023 में 30 से अधिक देशों के राजनयिकों ने निर्माणाधीन मंदिर का दौरा किया था।

मंदिर के प्रवक्ता के अनुसार, प्राचीन प्रथाओं का पालन करते हुए इस मंदिर के निर्माण में लोहे या स्टील का उपयोग नहीं किया गया है। यह विशाल मंदिर पूरी तरह से पत्थर से बनाया गया है। इसे बनाने के लिए 700 से अधिक कंटेनरों में 20,000 टन से अधिक पत्थर और संगमरमर अबू धाबी भेजा गया। नींव को भरने के लिए फ्लाई ऐश का उपयोग किया गया है, जिससे कंक्रीट मिश्रण में 55 प्रतिशत सीमेंट की जगह ली गई है।

इस मंदिर को पर्यावरण के अनुकूल बन गया है। इसके कार्बन फुटप्रिंट में भी कमी आई है। मंदिर की संरचना की निगरानी के लिए, दबाव, तापमान और भूकंपीय घटनाओं का लाइव डेटा हासिल करने के लिए विभिन्न स्तरों पर 300 से अधिक सेंसर लगाए गए हैं। गुजरात और राजस्थान के कारीगरों को बुलाकर मंदिर के खंभों एवं दीवारों पर मोर, घाथी, घोड़े, ऊँट, चंद्रमा आदि को उकेरा गया है।

Islamists cry foul as pm modi reaches abu dhabi to inaugurate baps swaminarayan mandir

जो जमीन दिल्ली हाई कोर्ट की, उस पर AAP ने बना लिया कार्यालय: सुप्रीम कोर्ट ने कहा- वापस करो

सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार (13 फरवरी 2024) को कहा कि दिल्ली के राउज़ एवेन्यू स्थित आम आदमी पार्टी (AAP) का राजनीतिक कार्यालय कब्जा की हुई जमीन पर बनी है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि जिस जमीन पर यह राजनैतिक कार्यालय बनाया गाय है, वह जमीन दिल्ली हाई कोर्ट को आवंटित की गई थी।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हैरानी की बात है कि दिल्ली हाईकोर्ट की जमीन पर एक राजनीतिक दल का दफ्तर चल रहा है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि यह जमीन दिल्ली हाईकोर्ट को लौटाई जाए। कोर्ट दिल्ली सरकार के मुख्य सचिव, पीडब्ल्यूडी सचिव और वित्त सचिव अगली तारीख से पहले हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल के साथ एक बैठक करें और मामले का समाधान निकालें। 

सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ ने कहा कि कोई भी कानून को अपने हाथ में नहीं ले सकता। उन्होंने सवाल किया, “कोई राजनीतिक दल उस पर कैसे बैठ सकता है? हाईकोर्ट को कब्जा दिया जाना चाहिए। हाई कोर्ट इसका उपयोग किस लिए करेगा? केवल जनता और नागरिकों के लिए करेगा।”

CJI ने कहा कि सभी अतिक्रमण हटाए जाएँगे और आगे के निर्देशों के लिए इस मामले में सोमवार (19 फरवरी 2024) को होगी। दरअसल, सुप्रीम कोर्ट ने देश भर में न्यायिक बुनियादी ढाँचे से संबंधित एक मामले से निपटान के दौरान इस मुद्दे पर ध्यान दिया और ये बातें कहीं।

दरअसल, CJI चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली न्यायमूर्ति जेबी पारदीवाला और न्यायमूर्ति मनोज मिश्रा की पीठ को मंगलवार (13 फरवरी 2024) को एमिकस क्यूरी के परमेश्वर ने सूचित किया कि उच्च न्यायालय के अधिकारी आवंटित भूमि पर कब्जा करने गए थे, लेकिन वहाँ एक राजनीतिक दल का कार्यालय बनाया गया है। इसलिए वे जमीन पर कब्जा नहीं ले सके।

दिल्ली सरकार के कानून सचिव भरत पाराशर ने अदालत को यह भी बताया कि उक्त जमीन 2016 से आम आदमी पार्टी के पास है। इस पर मुख्य न्ययाधीश ने कहा कि यह जमीन दिल्ली हाई कोर्ट को लौटानी होगी। उन्होंने इसके लिए दिल्ली सरकार के मुख्य सचिव, पीडब्ल्यू सचिव और वित्त सचिव को बैठक कर समाधान निकालने के लिए कहा।

पिछली सुनवाई में शीर्ष अदालत ने दिल्ली जिला न्यायपालिका में बुनियादी ढाँचे के लिए धन उपलब्ध कराने के प्रति उदासीन रवैये के लिए दिल्ली सरकार की आलोचना की थी। उस समय सीजेआई ने कहा था कि मार्च 2021 तक चार में से तीन परियोजनाओं के लिए मंजूरी दी गई, लेकिन इन परियोजनाओं के लिए धन जारी नहीं किया गया।

सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा था कि 5 दिसंबर 2023 तक 887 न्यायिक अधिकारियों की स्वीकृत संख्या को समायोजित करने के लिए 118 अदालत कक्षों या 813 न्यायिक अधिकारियों की वर्तमान कार्यशील शक्ति को समायोजित करने के लिए 114 अदालत कक्षों की आवश्यकता थी। तब सरकार की ढुलमुल रवैये की आलोचना की थी।

बिहार में सरकार बदलते लालू यादव के साले के घर पर चला बुलडोजर, भागे-भागे कोर्ट पहुँच कर किया सरेंडर: CM नीतीश के ‘जनता दरबार’ में पहुँची थी जमीन कब्जाने की शिकायत

राजद सुप्रीमो लालू यादव के साले सुभाष यादव ने आत्म-समर्पण कर दिया है। हाल ही में बिहार में राजद सत्ता से विपक्ष में भी गई है, क्योंकि नीतीश कुमार ने राजद को छोड़ कर भाजपा का दामन थाम लिया। सुभाष यादव के खिलाफ रंगदारी के एक मामले में कुर्की के आदेश का इश्तिहार जारी किया गया था। मामला बिहटा थाने का है। मंगलवार (13 फरवरी, 2024) को बिहार पुलिस बुलडोजर लेकर सुभाष यादव के आवास पर पहुँची थी, जिसके बाद उन्होंने सरेंडर किया।

बिहार में सरकार बदलने के असर के रूप में भी इसे देखा जा रहा है। एक दिन पहले ही विश्वास-मत प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान बिहार के नए उप-मुख्यमंत्री और भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष सम्राट चौधरी ने कहा था कि वो एक-एक की फ़ाइल खुलवाएँगे। सुभाष यादव, लालू यादव के छोटे साले हैं। साधु यादव उनके बड़े भाई हैं। साधु यादव लोकसभा सांसद और विधायक रहे हैं, जबकि सुभाष यादव राज्यसभा सांसद और विधान पार्षद। जब राबड़ी देवी मुख्यमंत्री थीं, तब इन दोनों भाइयों की तूती बोलती थी।

दोनों को लालू-राबड़ी काल में बिहार के माफिया के रूप में देखा जाता रहा है। सुभाष यादव ने अब कुर्की के डर से आत्म-समर्पण किया है। कुर्की की कार्रवाई के लिए पहुँची महिला पुलिस अधिकारी ने कहा कि एक पुराने मामले को लेकर कोर्ट ने कुर्की-जब्ती के कार्रवाई का आदेश दिया था, लेकिन रंगदारी और जमीन की धोखाधड़ी के इस मामले में सुभाष यादव ने इससे पहले ही कोर्ट में सरेंडर कर दिया। इसके बाद कुर्की-जब्ती की कार्रवाई रोक दी गई।

लालू यादव के साले जिस तरह से भागे-भागे कोर्ट पहुँचे, उसे ‘सम्राट इम्पैक्ट’ के रूप में भी देखा जा रहा है। सुभाष यादव ने MP-MLA कोर्ट में आत्म-समर्पण किया है। मामला नेउरा के बेला गाँव निवासी भीम वर्मा से जुड़ा है और 7 कट्ठा जमीन का है। इस मामले में सुभाष यादव की पत्नी रेणु देवी, बेटे और बेला के पूर्व सरपंच भी आरोपित हैं। बिहटा सर्किल इंस्पेक्टर कमलेश्वर प्रसाद सिंह ने अपनी टीम और एयरपोर्ट थाने की पुलिस के साथ मिल कर नोटिस चस्पाया था। सुभाष यादव का ये घर कौटिल्य नगर स्थित विधायक कॉलोनी में स्थित है।

ये मामला चर्चा में 27 फरवरी, 2021 को आया था। भीम वर्मा नेउरा थाना क्षेत्र के रहने वाले हैं। उन्होंने आरोप लगाया था कि सुभाष यादव के परिवार ने उनकी जमीन पर अवैध कब्ज़ा कर रखा है। उन्होंने बताया कि 96 लाख रुपए की जमीन रजिस्ट्री करवा ली गई। जमीन पर कब्ज़ा भी कर लिया गया। शुरू में 60.50 लाख रुपए दिए गए, लेकिन बाद में मारपीट कर वो भी छीन ली गई। 18 अप्रैल, 2022 को भीम वर्मा मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के ‘जनता दरबार’ में पहुँचे थे और अपना दर्द साझा किया था।

‘काॅन्ग्रेस को दिल्ली में इंसानियत के नाते 1 सीट देंगे’: AAP ने बताई ‘औकात’, गुजरात में माँगा हिस्सा- पंजाब में अकेले ही लड़ेगी

आम आदमी पार्टी (AAP) ने INDI गठबंधन की अगुवा कॉन्ग्रेस को उसकी राजनैतिक हैसियत सार्वजनिक रूप से याद दिलाई है। AAP ने पंजाब में लोकसभा चुनाव अलग लड़ने की घोषणा करने के बाद अब दिल्ली में कॉन्ग्रेस को मात्र एक सीट देने का ऑफर दिया है। इसके साथ ही AAP ने हरियाणा और चंडीगढ़ पर जल्दी बात करने को कहा है।

AAP के राज्यसभा सांसद संदीप पाठक ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में INDI गठबंधन की असली हालत की पोल खोल दी है। उन्होंने बताया है कि सीट बँटवारे को लेकर कॉन्ग्रेस के साथ AAP की दो बैठकें हो चुकी हैं, लेकिन कोई निष्कर्ष नहीं निकला है। ये बैठकें 8 और 12 जनवरी 2024 को हुई थीं। इसके बाद एक महीने तक बैठक नहीं हुई है।

पाठक ने बताया है कि दिल्ली में कॉन्ग्रेस के एक भी सांसद-विधायक नहीं हैं और मात्र 9 पार्षद हैं। ऐसे में डेटा के आधार पर कॉन्ग्रेस की एक सीट भी नहीं बनती है, फिर भी गठबंधन धर्म निभाते हुए AAP एक सीट देगी। AAP ने यह भी धमकी दी है कि अगर कॉन्ग्रेस एक सीट को लेकर नहीं मानती तो वह जल्द ही 6 सीट पर अपने उम्मीदवार घोषित कर देगी।

आम आदमी पार्टी के संगठन महासचिव संदीप पाठक ने दिल्ली में कॉन्ग्रेस को दिए गए एक सीट के प्रस्ताव का आधार मेरिट और डेटा बताया है। पंजाब को लेकर उन्होंने यह भी कहा है कि पंजाब में दोनों पार्टियों के स्थानीय नेताओं की माँग को ध्यान में रखते हुए अलग-अलग लड़ने का निर्णय लिया गया है।

गौरतलब है कि हाल ही में AAP ने पंजाब में अकेले ही लोकसभा लड़ने का ऐलान किया था। संदीप पाठक ने कॉन्फ्रेंस में यह भी कहा है कि पंजाब का निर्णय हो गया है तो अब चंडीगढ़ और हरियाणा में भी सीट समझौते पर बातचीत जल्द हो वरना यहाँ भी AAP अपने उम्मीदवार उतारेगी। AAP मात्र दिल्ली, हरियाणा, पंजाब और चंडीगढ़ ही नहीं बल्कि गुजरात में कॉन्ग्रेस से अपना हिस्सा माँग रही है।

संदीप पाठक ने 2022 गुजरात विधानसभा चुनावों का आँकड़ा सामने रख कर कहा है कि यहाँ AAP की 8 जबकि कॉन्ग्रेस की 18 लोकसभा सीट बनती हैं। ऐसे में इसमें भी बँटवारा किया जाए। गौरतलब है कि INDI गठबंधन में शामिल अधिकाँश दल अब एकला चलो की नीति अपना रहे हैं या फिर भाजपा के नेतृत्व वाले NDA में शामिल हो रहे हैं।

बीते एक माह के भीतर पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी से लेकर बिहार में नीतीश कुमार और उत्तर प्रदेश में रालोद INDI गठबंधन से किनारा कर चुकी है। उत्तर प्रदेश में सपा भी कॉन्ग्रेस को कोई ख़ास तवज्जो नहीं दे रही। अब AAP ने भी उसे आँखे दिखाना चालू कर दिया है और उसकी राजनीतिक जमीन की सच्चाई सामने रख कर अपना हिस्सा माँगा है।

मात्र उत्तर भारत में ही नहीं, बल्कि दक्षिण भारत में भी कॉन्ग्रेस का बेड़ा गर्क होता दिख रहा है। आंध्र प्रदेश में सत्तारूढ़ सीएम जगन मोहन रेड्डी की YSRCP और विपक्ष के नेता चन्द्रबाबू नायडू की पार्टी TDP, दोनों ही भाजपा से गठबंधन के लिए जोर लगा रही हैं। उधर तेलंगाना में पहले से ही BRS और कॉन्ग्रेस आमने सामने हैं।

कर्नाटक में JDS भाजपा के साथ जुड़ चुकी है। केरल में वामपंथी पार्टियाँ किसी भी समझौते के मूड में नहीं हैं जबकि तमिलनाडु में DMK कॉन्ग्रेस को विशेष भाव नहीं देना चाह रही। उत्तरपूर्व के राज्यों में भी कॉन्ग्रेस की जमीन खिसक चुकी है। ऐसे में AAP का इस गठबंधन से किनारे होना कॉन्ग्रेस के लिए अच्छा संकेत नहीं है।