Home Blog Page 1177

300 यूनिट बिजली एकदम FREE… वो भी हर महीने, यहाँ कीजिए अप्लाई: PM सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना लॉन्च

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने देश के 1 करोड़ घरों को सोलर ऊर्जा के जरिए मुफ्त बिजली दिलाने की योजना लॉन्च कर दी है। इस योजना का नाम ‘प्रधानमंत्री सूर्य घर: मुफ्त बिजली योजना’ रखा गया है। देश के एक करोड़ घरों पर रूफटॉप सोलर लगाने वाली इस योजना के लिए केंद्र सरकार ने आवेदन चालू कर दिए हैं और एक पोर्टल भी लॉन्च किया है।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने इस योजना के विषय में एक्स (पहले ट्विटर) पर जानकारी दी है। उन्होंने लिखा, “सतत विकास और आमजन के लाभ के लिए, हम पीएम सूर्य घर: मुफ्त बिजली योजना की शुरुआत कर रहे हैं। ₹75,000 करोड़ से अधिक के निवेश वाली इस योजना का लक्ष्य 1 करोड़ घरों को प्रतिमाह 300 यूनिट तक मुफ्त बिजली प्रदान करना है।”

आगे उन्होंने लिखा, “केंद्र सरकार इसका ध्यान रखेगी कि लोगों पर इसकी लागत का भार ना पड़े, इसके लिए सस्ते कर्ज और लोगों के खाते में सीधी सब्सिडी दी जाएगी। इस योजना के सभी पक्षों को एक ही पोर्टल पर एक साथ समायोजित किया जाएगा जिससे और भी सुविधा होगी। इस योजना को जमीन तक पहुँचाने के लिए, शहरी निकायों और ग्राम पंचायतों को रूफटॉप सोलर को बढ़ावा देने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा। साथ ही, इस योजना से लोगों की आय बढ़ेगी, बिजली बिल कम और रोजगार सृजन भी होगा।”

प्रधानमंत्री मोदी ने लोगों से योजना का लाभ लेने की अपील की है। उन्होंने लिखा, “आइए सोलर ऊर्जा और सतत विकास को बढ़ावा दें। मैं सभी घरेलू उपभोक्ताओं, विशेष रूप से युवाओं से आग्रह करता हूँ कि वह आवेदन करके पीएम- सूर्य घर: मुफ्त बिजली योजना को मजबूत बनाएँ।”

बजट में हुआ था योजना का ऐलान

गौरतलब है कि 1 फरवरी को पेश किए गए वित्त वर्ष 2024-25 के अंतरिम बजट में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने इस योजना का ऐलान किया था। अब इसकी आधिकारिक शुरुआत हो गई है। इसमें आवेदन के पंजीकरण के लिए पीएम सूर्य घर योजना की वेबसाईट पर जाना होगा।

इसके बाद योजना के तहत लाभार्थी के घर की छत पर एक सोलर पॉवर प्लांट लगाया जाएगा। यह पॉवर प्लांट लगाने के लिए केंद्र सरकार बड़ी आर्थिक सहायता देगी। इससे पैदा होने वाली 300 यूनिट बिजली गृहस्वामी बिना किसी भुगतान के उपयोग कर सकेगा।

केंद्र सरकार द्वारा इस योजना के अंतर्गत 3 किलोवाट तक की क्षमता वाले सोलर पॉवरप्लांट के लिए ₹18,000/किलोवाट की सब्सिडी दी जाएगी। जिन राज्यों को विशेष राज्य का दर्जा दिया गया है, वहाँ यह राशि ₹20,000/किलोवाट रहेगी। 3-10 किलोवाट वाले पॉवरप्लांट के लिए पहले 3 किलोवाट तक ₹18,000/किलोवाट और फिर ₹9,000/किलोवाट की सब्सिडी देगी। वेबसाइट पर बताया गया है कि लाभार्थी को इस योजना का लाभ सात अलग-अलग चरणों के पूर्ण होने के बाद मिलेगा।

हाउसिंग सोसायटी भी ले सकती है योजना का फायदा

बता दें कि इस योजना का लाभ बड़ी हाउसिंग सोसायटी भी ले सकती हैं, उनको भी सरकार इसके लाभ उपलब्ध करवाएगी। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा शुरू की गई इस योजना में ‘मेक इन इंडिया’ को बढ़ावा दिया गया है। इस योजना का लाभ लेने के लिए लाभार्थियों को अपनी छतों पर भारतीय कम्पनियों के ही सभी सोलर उत्पाद लगाने होंगे तभी उन्हें केंद्रीय सहायता मिल सकेगी।

एक रिपोर्ट बताती है कि देश में एक औसत घर महीने में लगभग 250 यूनिट बिजली खर्च करता है। भारत में एक यूनिट बिजली का औसत भाव 5 रुपए है। ऐसे में लगभग ₹15,000 की बचत एक परिवार एक वर्ष में कर सकेगा। यदि किसी परिवार का बिजली खर्च इससे ज्यादा भी होता है तो भी उसे बड़ा फायदा होगा।

गौरतलब है कि कई विपक्षी दल देश में चुनावों के समय मुफ्त बिजली का वादा करते आए हैं। पंजाब और दिल्ली जैसे राज्य मुफ्त बिजली दे भी रहे हैं। हालाँकि, यह वादा जमीन पर उतारने के बाद बड़े नुकसान होते हैं। भारत में अधिकांश बिजली कोयले से बनती है।

इस बिजली की उत्पादन लागत भी सोलर ऊर्जा के मुकाबले अधिक है। ऐसे में कोयले से पैदा की गई बिजली को मुफ्त देने पर सरकार को बड़ी सब्सिडी देनी पड़ती है। अकेले पंजाब में ही इस समय इस सब्सिडी का भार लगभग ₹20,000 करोड़ है।

एक रिपोर्ट के अनुसार, देश में 25 करोड़ घरों पर ऐसे रूफटॉप सोलर लगाए जा सकते हैं। इनके ऊपर 637 गीगावॉट तक की ऊर्जा पैदा कर सकती है। हालाँकि, यही रिपोर्ट दिखाती है कि देश में मात्र 11 गीगावॉट क्षमता के ही रूफटॉप सोलर लगाए गए हैं अभी।

भले ही भारत ने घरों पर सोलर क्षमता लगाने में अभी आशातीत सफलता नहीं पाई हो, लेकिन उसने बीते कुछ वर्षों में अक्षय ऊर्जा के क्षेत्र में काफी प्रगति हासिल की है। अब इस योजना से यह तस्वीर भी बदलेगी। एक रिपोर्ट बताती है देश में अभी लगभग 75 गीगावॉट की सोलर क्षमता है।

‘मेरा येशु-येशु’ वाला पादरी बजिंदर सिंह भरतपुर में हिंदुओं का करवा रहा था धर्मांतरण, दावा- राजस्थान में 20 हजार ईसाई बनेः 8 गिरफ्तार

राजस्थान के भरतपुर स्थित एक होटल में रविवार (11 फरवरी, 2024) को ईसाई मिशनरी धर्मांतरण का कार्यक्रम चला रहे थे। इस कार्यक्रम में चंडीगढ़ से पादरी बजिंदर सिंह को लाइव जुड़ा हुआ था, जो लोगों का धर्मांतरण करवा रहा था। कार्यक्रम में दावे किए गए कि वो मरे हुए बच्चे तक को ज़िंदा कर सकता है और कैंसर जैसी भयंकर बीमारी का भी इलाज कर सकता है। कार्यक्रम के आयोजकों कुँवर सिंह और शैलेन्द्र सिंह को राजस्थान पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। राजस्थान में 20,000 लोगों का ईसाई धर्मांतरण कराया जा चुका है।

बजिंदर सिंह खुद को प्रोफेट कहता है। उसके कई ऐसे वीडियो इंटरनेट पर मौजूद हैं, जहाँ वो चमत्कारी दावे करता है और अजीबोगरीब हरकतें करवाता है। गिरफ्तार दोनों आरोपित कह रहे हैं कि वो तो सिर्फ माध्यम हैं। बजिंदर सिंह चंडीगढ़ से ही लोगों का लाइव धर्मांतरण करा रहा था। माइक और स्पीकर समेत 5 LED की व्यवस्था कार्यक्रम स्थल पर की गई थी। दोनों आरोपित 2020 से ही बजिंदर सिंह से जुड़े हुए थे। अकेले भरतपुर में 20,000 से अधिक लोगों का वो धर्मांतरण करा चुका है।

आयोजनों के लिए वो पैसे भी ऑनलाइन भेजता है। जहाँ कुँवर सिंह भरतपुर का ही निवासी है, शैलेन्द्र सिंह उत्तर प्रदेश के फरीदाबाद का रहने वाला है। 8 अन्य की भी गिरफ़्तारी हुई है। इनके पास से आयोजन का सामान और भड़काऊ पुस्तकें भी मिली हैं। वकील संदीप सिंह ने इस आयोजन को लेकर खुलासा किया, जो दोस्त की शादी के लिए मैरिज हॉल बुक करने ‘सोनार हवेली’ पहुँचे थे। वहाँ करीब 400 लोग मौजूद थे। 15 लोग मंच पर थे। येशु की कसम दिला कर धर्म-परिवर्तन कराया जा रहा था।

वहाँ मौजूद लोगों को ईसाई मजहब के फायदे गिनाए जा रहे थे और बोतल में कुछ मिला कर पिलाया जा रहा था। इतना ही नहीं, कुँवर सिंह के साथ-साथ सिद्धार्थ गौतम नामक शख्स मंच से हिन्दू देवी-देवताओं को भी गाली दे रहा था। बच्चियों के हाथों में बाइबिल दिए जा रहे थे। संदीप गुप्ता ने जब टोका और रिकॉर्डिंग करने लगे तो उनके साथ धक्का-मुक्की की गई। इलाज के नाम पर पीड़ितों को वहाँ बुलाया गया था। 352 किताबें जब्त की गई हैं। गरीबों को रुपए का लालच भी दिया गया था, उनके खाने-पीने की व्यवस्था की गई थी।

पादरी बजिंदर सिंह “मेरा यशु यशु” वाले वीडियो से वायरल हुआ था। पादरी बजिंदर सिंह को जीरकपुर पुलिस ने उसी की फॉलोअर युवती से रेप करने के आरोप में दिल्ली एयरपोर्ट से गिरफ्तार किया था। 2017 में एक लड़की ने जालंधर के चर्च के पादरी बजिंदर पर आरोप लगाया था कि उसने विदेश भेजने के नाम पर उससे रेप किया और वीडियो भी बनाई। बजिंदर के यूट्यूब पर कई ऐसे वीडियो हैं, जिसमें वह सलमान खान से लेकर कई बड़े सितारों की भविष्यवाणी करने का दावा कर रहा है। सूट-बूट और सिक्योरिटी में रहने वाला बजिंदर सिंह अपने भाषणों के दौरान सुंदर लड़कियों पर नजर रखता था।

48 घंटे का लिया था समय, 24 घंटे में BJP में आ गए महाराष्ट्र के पूर्व CM अशोक चव्हाण: काॅन्ग्रेस के पूर्व MLC ने भी थामा कमल

महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री और कॉन्ग्रेस के वरिष्ठ नेता अशोक चव्हाण आज भारतीय जनता पार्टी में शामिल हो गए। उन्होंने भाजपा कार्यालय में डिप्टी सीएम देवेंद्र फडणवीस की मौजूदगी में भाजपा को ज्वाइन किया।

कॉन्ग्रेस से इस्तीफा उन्होंने सोमवार यानी कल (12 फरवरी 2024) को दिया था। इसके बाद 48 घंटे का समय माँगा था ताकि वह आगे का फैसला ले सकें। आज सुबह उन्होंने बताया कि वो बीजेपी में अपना राजनीतिक करियर शुरू कर रहे हैं। उनके साथ कॉन्ग्रेस के पूर्व एमएलसी अमर राजुरकर भी भाजपा में शामिल हो गए हैं।

अशोक चव्हाण जब भाजपा में शामिल हुए तो उस कार्यक्रम में उन्होंने सबको धन्यवाद दिया। इस दौरान उनके मुँह से निकला, “मैं कॉन्ग्रेस अध्यक्ष को धन्यवाद देता हूँ…” इसे सुन बगल में बैठे देवेंद्र फडणवीस ने उन्हें कहा- “भाजपा है ये-भाजपा।” इस घटना के बाद वहाँ बैठे सभी लोग हँस पड़े। उन्होंने कहा- “यह भाजपा कार्यालय में मेरी पहली पीसी है।”

वहीं महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम देवेंद्र फडणवीस ने कहा, “कद्दावर नेता का स्वागत करते हुए हमें बहुत ही खुशी हो रही है। इन्होंने लोकसभा और विधानसभा दोनों में काम किया है। इन्होंने महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री के तौर पर कई मंत्रालयों में काम किया है।”

इसके बाद डिप्टी सीएम ने उन्हें प्रदेश अध्यक्ष बावनकुले से कहकर पार्टी की सदस्यता प्राप्त करवाई। उन्होंने सदस्यता के लिए 500 रुपए का भुगतान किया। इस दौरान फडणवीस ने एमएलसी और अशोक चव्हाण के कट्टर समर्थक अमर राजुरकर का भी बीजेपी में आने पर स्वागत किया।

बता दें कि अशोक चव्हाण कॉन्ग्रेस के दिग्गज नेता थे जिन्होंने नांदेड़ में कॉन्ग्रेस को जीत दिलाई थी। वह दो बार महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री भी रह चुके हैं। 8 दिसंबर 2008 से 9 दिसंबर 2010 तक में वह डेढ़ साल मुख्यमंत्री रहे थे।

कोचिंग जा रही थी हिंदू छात्रा, फरदीन-रऊफ ने चाकुओं से गोदा: 4 साल से पड़ा था पीछे, छेड़छाड़ का केस वापस लेने के लिए डाल रहा था दबाव

उत्तराखंड में कोचिंग जा रही दो बहनों पर फरदीन और रऊफ नाम के युवकों ने धारदार हथियारों से हमला कर दिया। इसमें 17 साल की नाबालिग लड़की गंभीर रूप से घायल हो गई। फरदीन पहले भी पीड़ित के साथ छेड़छाड़ कर चुके है और जेल की हवा भी खा चुका है। वो जमानत पर छूटकर बाहर आया था। फरदीन और उसका परिवार पीड़ित और उसके परिवार पर अपने खिलाफ दर्ज कराई गई शिकायतों को वापस लेने का दबाव डाल रहा था, और न मानने पर उसने जानलेवा हमला कर दिया। इस मामले में पुलिस ने फरदीन और रऊफ को गिरफ्तार कर लिया है।

बाइक पर बैठने से मना करने पर चाकुओं से गोदा

ये वारदात, उधम सिंह नगर के काशीपुर कोतवाली क्षेत्र के खालसा मोहल्ले की है। जहाँ सोमवार (12 फरवरी 2024) की शाम को करीब सवा चार बजे की है। जहाँ बी.कॉम सेकंड ईयर में पढ़ने वाली 17 वर्षीय छात्रा अपनी बहन के साथ कोचिंग जा रही थी, तभी फरदीन नाम का युवक अपने दोस्त रऊफ के साथ पहुँचा। उसने छात्रा को खींचकर अपने बाइक पर बैठाने की कोशिश की, लेकिन छात्रा विरोध जताकर आगे बढ़ गई। तभी गुरुद्वारे के पास फरदीन ने बड़े चाकू से उसपर ताबड़तोड़ हमला बोल दिया। इस हमले में वो बुरी तरह से घायल हो गई। इस दौरान फरदीन के भाई बिलाल, आकिब, अनस और अफरीदी तमाशबीन बने खड़े रहे, साथ ही इन सभी का पिता रिजवान भी वहीं खड़ा था। छात्रा की चीख सुनकर आसपास के लोग मौके की तरफ भागे तो फरदीन छात्रा को धमकाते हुए फरार हो गया।

पहले भी जेल जा चुका है फरदीन

ऑपइंडिया के मौजूद एफआईआर की कॉपी के मुताबिक, फरदीन छात्रा पर बुरी नजर रखता है। वो साल 2019 से उसके पीछे पड़ा है। छात्रा उसके खिलाफ कई बार मामले दर्ज करा चुकी है, लेकिन वो पीछा नहीं छोड़ रहा। यही नहीं, फरदीन पीड़ित छात्रा से छेड़छाड़ के मामले में जेल भी जा चुका है। मौजूदा समय में वो जमानत पर छूटकर बाहर आया है और छात्रा के साथ ही उसके परिजनों को भी उसके खिलाफ की गई शिकायतों को वापस लेने का दबाव डाल रहा था।

इस हमले के बाद फरदीन के परिजन, जिसमें उसके मामा ताजू और फिरोज, फरदीन की माँ बेबी और तीन मौसियाँ, साथ ही फरदीन का रिश्तेदार साहिल सभी पीड़ित परिवार के घर पहुँचे। सभी लोगों ने पीड़ित के माता-पिता को धमकाया और फरदीन पर दर्ज मामलों को वापस लेने के लिए दबाव डाला।

इस हमले के बाद वो अपनी बेटी को लेकर अस्पताल पहुँचे। जहाँ छात्रा को शुरुआती इलाज के बाद हायर सेंटर रेफर कर दिया गया। छात्रा पर हमले की सूचना पाकर हिंदू संगठनों के लोग कोतवाली पहुँचे और आरोपित को गिरफ्तार करने की माँग की। इस बीच बीजेपी विधायक अरविंद पाण्डेय ने पीड़ित से मुलाकात की।

इस मामले में पुलिस ने आईपीसी धारा 147, 307, 323, 354, 452, 504 और आईपीसी की धारा 506 के तहत मामला दर्ज कर लिया है। कोतवाली में तैनात वरिष्ठ उप निरीक्षक प्रदीप मिश्रा ने ऑपइंडिया से बात करते हुए बताया कि दोनों मुख्य आरोपितों को गिरफ्तार कर लिया गया है। इस मामले में अभी जाँच जारी है, जल्द ही अन्य गिरफ्तारियाँ भी की जाएँगी।

मी लॉर्ड! ये अच्छा है कि आप देख लेंगे, पर समय से देख लेने से आम आदमी को मिल सकती है राहत

चुनाव आते ही सरकार को अस्थिर करने वाले लोग सक्रिय हो जाते हैं। यह अस्थिरता कई वजहों से फैलाने की कोशिश की जाती है। अपनी ताकत दिखाकर राजनीतिक पर दबाव बनाने की कोशिश भी इनमें एक शामिल है। इस बार भी विधानसभा चुनाव से बस कुछ दिन पहले ही किसान आंदोलन के नाम पर यह प्रक्रिया शुरू कर दी गई। साल 2021 में भी ऐसा ही आंदोलन शुरू किया गया। तब उत्तर प्रदेश में चुनाव होने वाले थे। इन आंदोलनों के कारण दिल्ली-एनसीआर के लाखों लोगों को समस्याएँ झेलनी पड़ी थी और लोगों ने सुप्रीम कोर्ट का रूख किया था।

इस बार भी उन समस्याओं को याद करते हुए एक वकील ने सुप्रीम कोर्ट का रूख किया है। सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष आदिश अग्रवाल ने सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ को पत्र लिखा है। इस पत्र में अग्रवाल ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट को इस आंदोलन का स्वत: संज्ञान लेना चाहिए, क्योंकि इससे आम लोगों को भारी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि अगर वकील इस आंदोलन की वजह से पैदा हुए ट्रैफिक समस्या के कारण समय पर कोर्ट नहीं पहुँच पाते हैं तो कोई फैसला नहीं सुनाया जाए।

सुप्रीम कोर्ट के एक वकील जब जाम में फँस गए तो उन्हें चलती कार से ही ऑनलाइन बहस करनी पड़ी। बहस के दौरान जस्टिस ओका ने कहा कि उन्हें वकीलों के वर्चुअली पेश होने से कोई दिक्कत नहीं है, लेकिन इस तरह चलती कार में नहीं। इस पर एडवोकेट ने कहा कि वो किसान आंदोलन के कारण जाम में फँस गए हैं। इस पर कोर्ट ने कहा कि ‘फिर तो इस बात के लिए हम आपको माफ कर देंगे’।

इसके बाद सीजेआई चंद्रचूड़ ने कहा कि अगर वकीलों को आने-जाने में समस्या होती है तो उन्हें बताई जाए और वे मामले को देखेंगे। बार एसोसिएशन ने कथित किसानों के आंदोलन पर स्वत: संज्ञान लेने का भी आग्रह किया। हालाँकि, स्वत: संज्ञान वाले मामले पर सीजेआई ने क्या कहा, इसके बारे में कोई बात सामने नहीं आई है, लेकिन किसानों के पिछले आंदोलन और साल 2019 में शुरू हुए शाहीन बाग प्रदर्शन पर गौर करें तो ऐसा नहीं लगता कि सुप्रीम कोर्ट इस मामले संज्ञान लेगा।

दरअसल, नागरिकता संशोधन बिल (CAA) और नागरिक पंजीकरण रजिस्टर (NRC) के विरोध में दिल्ली के शाहीन बाग में लंबा प्रदर्शन किया गया था। उस समय भी इलाके को जाम कर दिया गया था, जिसके कारण महीनों तक लोगों की समस्याओं का सामना करना पड़ा था। तब फरवरी 2020 में सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि फिलहाल इस मामले में वह हस्तक्षेप नहीं करेगा। हालाँकि, कोर्ट ने दोहराया था कि सार्वजनिक जगहों पर प्रदर्शन करना वाजिब नहीं है और जगह खाली कराने के लिए अधिकारियों को आगे आने के लिए कहा था।

इसी मामले पर अक्टूबर 2020 में जब सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई की तो कहा था कि सार्वजनिक स्थानों पर अनिश्चितकाल के लिए कब्जा नहीं किया जा सकता है। अदालत ने कहा था कि धरना-प्रदर्शन का अधिकार अपनी जगह है, लेकिन अंग्रेजों के राज वाली हरकत अभी करना सही नहीं है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि सार्वजनिक जगहों पर प्रदर्शन लोगों के अधिकारों का हनन है। कानून में इसकी इजाजत नहीं है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि संविधान विरोध करने का अधिकार देता है, लेकिन इसे समान कर्तव्यों के साथ जोड़ा जाना चाहिए।

इस तरह की गोलमोल टिप्पणी साल 2021 के किसान आंदोलनों के दौरान भी सुप्रीम कोर्ट ने दिया था। उस दौरान केंद्र की मोदी सरकार ने किसानों की भलाई के लिए तीन कृषि कानून लागू किए थे। इन कृषि कानूनों को किसान विरोधी बताकर हरियाणा-पंजाब के कथित किसान सड़कों पर आ गए थे। उन्होंने इस दौरान कई हिंसा की वारदातों को भी अंजाम दिया था। प्रदर्शन स्थल पर एक व्यक्ति की मौत भी हो गई थी। तब भी सुप्रीम कोर्ट ने इसका स्वत: संज्ञान नहीं लिया था।

तीन कृषि कानूनों के खिलाफ दायर की गई याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए तत्कालीन CJI एसए बोबडे की अध्यक्षता वाली पीठ ने केंद्र से कहा था कि न कृषि कानूनों पर रोक क्यों नहीं लगा रहे? उन्होंने कहा कि अगर केंद्र सरकार जिम्मेदारी दिखाते हुए इसे रोकने का आश्वासन देती है तो सुप्रीम कोर्ट एक समिति बना कर इसे देखने को कहेगा। तब तक इसे रोक कर रखा जाए। उन्होंने पूछा कि आखिर इसे क्यों जारी रखा जा रहा है? इस दौरान CJI ने बार-बार दोहराया कि वो इन कानूनों के कार्यान्वयन को रोक देंगे। हालाँकि, बाद में नंवबर 2021 में केंद्र सरकार ने इन कानूनों को रद्द कर दिया था।

सुप्रीम कोर्ट ने किसानों के हिंसक आंदोलन को लेकर कोई संज्ञान तो नहीं लिया, लेकिन 12 जनवरी 2021 को किसान आंदोलन को लेकर एक कमिटी का गठन किया था। इस कमिटी में कृषि विशेषज्ञ अशोक गुलाटी, डॉ. प्रमोद कुमार जोशी और अनिल घनवटे शामिल थे। सुप्रीम कोर्ट ने 4 सदस्यीय टीम बनाई थी, लेकिन किसान नेता भूपिंदर सिंह मान ने इससे खुद को अलग कर लिया था। इस कमिटी ने अपनी रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट में दे दी, लेकिन रिपोर्ट केंद्र सरकार द्वारा कृषि कानूनों को वापस लेने की घोषणा के पाँच महीने बाद आई।

इस रिपोर्ट में दावा किया गया था कि देश भर के 86 फीसदी किसान संगठन सरकार के तीनों कृषि कानूनों से खुश थे। ये किसान संगठन करीब 3 करोड़ किसानों का प्रतिनिधित्व कर रहे थे। इन सबके बावजूद केंद्र सरकार को इन कानूनों को वापस लेना पड़ा। घनवटे के मुताबिक, सीलबंद रिपोर्ट में भी कृषि कानूनों को रद्द न करने की सलाह दी थी। घनवट ने कहा था कि इन कृषि कानूनों को रद्द करना या लंबे समय तक लागू न करना उन लोगों की भावनाओं के खिलाफ है, जो इसका मौन समर्थन करते हैं। 

आपको याद होगा जब कथित किसान संगठनों ने दिल्ली को घेर रखा था, हिंसा-हुड़दंग की खबरें लगातार आ रही थी तब कई लोगों ने इस मामले में दो टूक फैसले नहीं लेने पर सुप्रीम कोर्ट की आलोचना की थी। शाहीन बाग में भी सुप्रीम कोर्ट का यही रवैया सामने आया था। अब जबकि किसान फिर से दिल्ली के बॉर्डर पर पहुँच रहे हैं और हर तरफ आफरा-तफरी का माहौल है, ऐसे में एक बार फिर सुप्रीम कोर्ट फिर संभावित हिंसा को देखते हुए किसी तरह का निर्देश देने से बचता दिख रहा है।

हालाँकि, किसान चुनाव को देखते हुए सरकार पर दबाव बनाने की कोशिश में लगे हैं और इस तरह की माँगे रख रहे हैं, जिस पर गहन अध्ययन करके ही निर्णय लिया जा सकता है। किसानों ने जिन माँगों को रखा है उनमें MSP की गारंटी के साथ ही बिजली की दरों में छूट और किसानों के कर्ज की माफी की भी माँग है। यहाँ तक बात तो ठीक है। हालाँकि, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार (13 फरवरी 2024) को पीएम सूर्य घर योजना की घोषणा की है, जिसमें देश भर के एक करोड़ घरों को हर महीने 300 यूनिट मुफ्त बिजली दी जाएगी।

इसके अलावा, किसानों ने पिछले आंदोलन के समय दर्ज हुए मुकदमों को भी तुरंत खारिज करने की माँग की है और लखीमपुर में मारे गए चार किसानों के परिवारों के लिए सरकारी नौकरी और आर्थिक मदद की माँग कर रहे हैं। किसान स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशों को लागू करने की माँग भी कर रहे हैं, जिसमें लागत की तुलना में एमएसपी को डेढ़ गुना करने की माँग है। बताते चलें कि पिछले किसान आंदोलन के दौरान उपद्रवियों ने दिल्ली और आसपास के क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर हिंसा की थी। इतना ही नहीं, दिल्ली के लालकिले पर तिरंगा को नोंचने की कोशिश की थी।

‘पूर्व नौसैनिकों पर क़तर से शाहरुख़ खान ने कराई भारत की डील, उन्हें साथ लेकर जाएँ PM मोदी’: अजीबोगरीब दावा कर हँसी का पात्र बने सुब्रमण्यन स्वामी

हाल ही में भारत सरकार ने क़तर में मौत की सज़ा पाए 8 पूर्व भारतीय नौसेना अधिकारियों की सकुशल घर-वापसी सुनिश्चित कराई है। पहले इन पूर्व नौसैनिकों की सज़ा घटाई गई, उसके बाद उन्हें रिहा कर दिया गया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय विदेश मंत्री S जयशंकर और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजीत डोभाल की इसके लिए जम कर तारीफ़ हो रही है। हालाँकि, सुब्रमण्यन स्वामी ने इसमें शाहरुख़ खान वाला एंगल खोज लिया है, जो न सिर्फ अजीब है बल्कि हास्यास्पद भी है।

असल में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक ट्वीट किया, जिसमें उन्होंने बताया कि अगले 2 दिनों में वो UAE और क़तर के दौरे पर रहेंगे। इस दौरान वो कई कार्यक्रमों का हिस्सा बनेंगे और इन दोनों देशों के साथ भारत के द्विपक्षीय रिश्तों में भी मजबूती आएगी। पीएम मोदी ने बताया कि PM बनने के बाद ये उनका UAE का 7वाँ दौरा होगा, जो भारत-यूएई की दोस्ती की महत्ता की तरफ इशारा करता है। उन्होंने कहा कि वो अपने भाई राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायेद से मिलने के लिए भी उत्साहित हैं।

पीएम मोदी ने ये भी बताया कि उन्हें UAE के पहले हिन्दू मंदिर के उद्घाटन का सौभाग्य भी प्राप्त हो रहा है। अबुधाबी में एक कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भारतीय समुदाय से भी मुलाकात करेंगे। दुबई में ”वर्ल्ड गवर्नमेंट्स समिट (WGS)’ में भी उन्हें हिस्सा लेना है और साथ ही दुबई के शासक HH शेख मुहम्मद से भी मुलाकात करनी है। साथ ही उन्होंने क़तर के अमीर तमीम बिन हमाद अल थानी से मुलाकात को लेकर भी बात की और कहा कि उनके तहत क़तर अत्यधिक विकास कर रहा है।

इस ट्वीट की रिप्लाई में सुब्रमण्यन स्वामी टपक पड़े और लिखा, “मोदी को अपने साथ सिनेमा स्टार शाहरुख़ खान को लेकर क़तर जाना चाहिए। जब केंद्रीय विदेश मंत्रालय (MEA) और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) क़तर के शेखों को मनाने में विफल हो गए, तब मोदी ने शाहरुख़ खान से विनती की कि वो हस्तक्षेप करें। इसके बाद हमारे पूर्व नौसेना अधिकारियों की रिहाई के लिए क़तर के शेखों के साथ एक बहुत ही खर्चीली डील हुई।”

सुब्रमण्यन स्वामी का ये दावा हैरान करने वाला है, क्योंकि शाहरुख़ खान का इस मामले से कोई लेना-देना नहीं है। क़तर ने इन कैदियों को काउंसलर एक्सेस मुहैया कराया था और भारतीय दूतावास ने उनकी मदद की, भारतीय नौसेना और विदेश मंत्रालय ने मामले के कानूनी पहलुओं को समझा, क़तर के सर्वोच्च न्यायालय में अपील की तैयारी की गई। कूटनीतिक रास्ते से ये जीत मिली। सुब्रमण्यन स्वामी अक्सर अजीबोगरीब दावे कर के हास्य का पात्र बनते रहते हैं।

गुजरातियों से माफी माँगने को तैयार हूँ… तेजस्वी यादव के गिड़गिड़ाने के बाद SC ने रद्द की FIR

सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार (13 फरवरी, 2024) को राष्ट्रीय जनता दल के नेता और बिहार के पूर्व उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव के खिलाफ दर्ज एक FIR को रद्द कर दिया। यह FIR उनके खिलाफ अहमदाबाद में करवाई गई थी वो भी तब जब उन्होंने ‘गुजरातियों’ पर अपमानजनक बयान दिया था। विवाद बढ़ने पर उन्होंने कोर्ट में कहा था कि वो लिखित में माफी माँगने को तैयार हैं। इसके बाद उनकी इस याचिका पर सुनवाई हुई। उनसे माफी मँगवाई गई। फिर, ये एफआईआर को रद्द कर दिया गया।

सुप्रीम कोर्ट ने इससे पहले तेजस्वी यादव को आदेश दिया था कि वह एक सप्ताह के भीतर अपना बयान वापस लें। सुप्रीम कोर्ट ने 29 जनवरी, 2024 को कहा था कि तेजस्वी यादव को एक सप्ताह के भीतर स्पष्ट शब्दों में यह लिखना होगा कि गुजरातियों पर दिए गए बयान पर उन्हें खेद है। वह अपने इस बयान को वापस लेते हैं।

तेजस्वी ने कोर्ट का यह आदेश मान लिया है और अपना शपथपत्र दाखिल करके गुजरातियों पर दिया बयान वापस ले लिया है। उनके इस मामले की सुनवाई कर रही सुप्रीम कोर्ट की जस्टिस अभय एस ओका और जस्टिस उज्जल भुइयां की बेंच ने FIR रद्द कर दी है। बेंच ने इस मामले में सभी पक्षों के दावों की जाँच के बाद आज कहा, “हम मामले को रद्द करते हैं।”

गौरतलब है कि तेजस्वी यादव ने 22 मार्च 2023 को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में गुजरातियों के खिलाफ बयान दिया था। उन्होंने कहा था, “सिर्फ गुजराती ही ठग हो सकते हैं और उनका अपराध माफ भी कर दिया जाएगा। अगर वह देश से फरार भी हो जाएँ तो उसके लिए कौन जिम्मेदार होगा?”

इसको लेकर हरेश मेहता ने उनके खिलाफ गुजरात में आपराधिक मानहानि का मामला दर्ज करवाया था। इसमें कहा गया था कि तेजस्वी यादव ने पूरे गुजराती समाज का अपमान किया है। अहमदाबाद में इस मामले में उन्हें समन भी जारी किया गया था लेकिन वह यहाँ पेश होने नहीं पहुँचे थे और सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।

याद दिला दें कि इससे पहले एक ऐसा ही मामला कॉन्ग्रेस सांसद राहुल गाँधी के विरुद्ध दर्ज करवाया गया था। राहुल गाँधी ने 2019 में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की जाति मोदी को लेकर कहा था कि ‘सारे मोदी चोर’ होते हैं। इस पर उनके खिलाफ आपराधिक मानहानि का मामला चला था। इस मामले में उन्हें 2 वर्ष की सजा अहमदबाद की अदालत ने सुनाई थी।

अब्दुल मलिक पर सपा के मुस्लिम नेता की हत्या का आरोप, पुलिस पर हमले के लिए दुश्मनी भूले दोनों परिवार: हल्द्वानी के वरिष्ठ पत्रकार ने बताया – 1998 में भी भड़के थे दंगे

उत्तराखंड के हल्द्वानी स्थित बनभूलपुरा में जम कर हिंसा हुई। पुलिस थाना फूँक दिया गया और पेट्रोल पंप को भी आग के हवाले कर दिया गया। पत्रकारों तक को नहीं छोड़ा गया। पीड़ितों का कहना है कि इस्लामी कट्टरपंथी भीड़ नाम पूछ-पूछ कर पीट रही थी, मुस्लिम होने पर छोड़ दिया जा रहा था। एक पत्रकार को आग में झोंक दिया गया। महिला पुलिसकर्मियों को बदहवास अवस्था में जान बचा कर भागते हुए देखा गया। अस्पताल में हिन्दू कार्यकर्ताओं ने घायल पुलिस वालों का इलाज कराया।

अब इस मामले में नया खुलासा हुआ है। 20 वर्षों से हल्द्वानी में पत्रकारिता कर रहे जर्नलिस्ट अरविंद मलिक से ऑपइंडिया ने बातचीत की। उन्होंने इस दौरान अब्दुल मलिक के बारे में भी बताया, जो इस हमले का मुख्य साजिशकर्ता है और जिसने मलिक का बगीचा में अवैध मदरसा और मस्जिद बना रखा था। उन्होंने बताया कि 26 वर्ष पहले भी इसी तरह की एक घटना हुई थी जब अब्दुल मलिक पर पकड़ने गई टीम पर मुस्लिम भीड़ ने हमला बोल दिया था।

उन्होंने बताया कि उस दौरान भी मुस्लिमों ने पुलिस की गाड़ियाँ तोड़ी थी, जलाई थी। कई जवानों के अलावा एक सिटी एसपी भी घायल हुए थे। अरविंद मलिक ने बताया कि अब्दुल मलिक समाजवादी पार्टी और बहुजन समाजवादी पार्टी, दोनों का ही करीबी है। उसने एक मुस्लिम नेता की ही हत्या करवाई थी, जो सपा में तेज़ी से उभर रहा था। अब्दुल मलिक को ये पसंद नहीं आया। 26 साल पहले यूपी से अलग होकर उत्तराखंड एक अलग राज्य नहीं बना था।

बड़ी बात ये है कि अब जब इस हत्याकांड के 26 वर्ष बाद पुलिस पर हमला किया गया है, तब अब्दुल मलिक के परिजन और जिस मुस्लिम शख्स की उसने हत्या करवाई थी उसके परिजन साथ हैं। दंगाइयों में दोनों ही शामिल थे। अब्दुल मलिक देवबंदी है, जबकि जिसकी उसने हत्या करवाई थी वो बरेलवी मुस्लिम था। इसके बावजूद आज हत्या की दुश्मनी भूल कर दोनों ने दंगे में हाथ बँटाया। देवबंदी और बरेलवी की मस्जिदें भी अलग-अलग होती हैं, लेकिन दंगे में दोनों साथ हैं।

अरविन्द मलिक ने बताया, “हल्द्वानी में 20% देवबंदी हैं, जबकि 80% बरेलवी। एक अब्दुल्ला थे, जो नगरपालिका के चेयरमैन रहे। अब्दुल मलिक फरीदाबाद से लोकसभा चुनाव लड़ चुका है, जहाँ उसे सफलता नहीं मिली। फिर वो कूड़ा के कारोबार में जुट गया। अब्दुलरउफ सिद्दीकी 26 साल पहले सपा में उभर रहे थे। तब अब्दुल मलिक के पास पार्टी में कोई बड़ा पद नहीं था। उसे सिद्दीकी का आगे बढ़ना कचोट रहा था। 19 मार्च, 1998 को वो लखनऊ जा रहे थे, उसी दौरान बरेली के भोजीपुरा थाना क्षेत्र में उनकी गाड़ी का एक्सीडेंट करा दिया गया।”

उन्होंने बताया कि बरेली में इसका मुकदमा दर्ज हुआ था, जिसमें अब्दुल मलिक भी नामजद था। उन्होंने बताया कि इस हत्याकांड के कारण हल्द्वानी के बाजार कई दिनों तक बंद रहे। बरेली और हल्द्वानी की पुलिस ने मिल कर जॉइंट ऑपरेशन शुरू किया, लेकिन अब्दुल मलिक अपने संबंधों के बूते बच निकला। पुलिस बैकफुट पर आ गई और मामला सीबी-सीआईडी के पास चला गया। बकौल अरविन्द मलिक, ईद के समय यहाँ के एसपी नासिर भी नमाज पढ़ने गए थे, वो युवा नेता की हत्या से दुखी थे।

वरिष्ठ पत्रकार ने बताया कि इस दौरान उनका आमना-सामना अब्दुल मलिक से हुआ और फिर उन्होंने हत्यारों को सबक सिखाने की ठानी। ईद के अगले दिन उन्होंने एक मामले में अब्दुल मलिक के खिलाफ वॉरंट ले लिया। उस समय कल्याण सिंह यूपी के मुख्यमंत्री थे और सूरजभान को राज्यपाल बनाया गया था। सूरजभान जब राज्यपाल बन कर लखनऊ पहुँचे तो उनके साथ विमान में अब्दुल मलिक भी आया था, मुख्यमंत्री कल्याण सिंह ने राज्यपाल की अगवानी की। तब हत्या आरोपित का सीएम-राज्यपाल के साथ होना अख़बारों की सुर्खियाँ बनी थीं।

अरविंद मलिक ने बताया, “उस समय सीबी-सीआईडी की संस्तुति निरस्त कर दी गई। अब्दुल मलिक को गिरफ्तार कर के बरेली भेज दिया गया। उसे उसके आज़ाद नगर स्थित घर से उठाया गया था। उसके बाद आगजनी-पत्थरबाजी शुरू हो गई। जिस युवा सपा नेता की हत्या हुई, वो बरेलवी थे। लेकिन, ये ईगो की लड़ाई थी। मुकदमा चलता रहा, ये लोग कोर्ट से बरी भी हो गए। जिनकी हत्या हुई, उनके भाई आज सपा के नेता हैं। दोनों परिवार दुश्मन थे, लेकिन ताज़ा मामले में दोनों फिरके एक साथ हैं। अब्दुलरउफ का भाई जावेद सिद्दीकी गिरफ्तार हुआ है।”

किसान आंदोलन में आतंकी भिंडरावाले का झंडा: ट्रैक्टर से दिल्ली आने वाले वालों का मकसद क्या?

किसान आंदोलन में खालिस्तानी आतंकी भिंडरावाले का पोस्टर अभी से दिखने लगा है। वीडियो सामने आई है जिसमें अंबाला के शंभू बॉर्डर के पास किसान अपने ट्रैक्टर लेकर फतेहगढ़ साहिब से आ रहे हैं। ये सारे ट्रैक्टर दिल्ली सीमाओं पर इकट्ठा होंगे। इन्हीं में देख सकते है कि खुलेआम बड़ा का झंडा लगाकर इसे दिल्ली लाने की तैयारी हो रही है।

वीडियो में दिख रहा है कि एक साथ कई ट्रैक्टर आगे बॉर्डर की ओर आगे बढ़ रहे हैं। इसमें दूसरे नंबर पर जो ट्रक आ रहा है उसमें बड़ा सा झंडा लगा है जिसमें खालिस्तानी आतंकी भिंडारावाले का झंडा लगा है। इसे देखने के बाद लोग याद कर रहे हैं दिल्ली में जब इससे पहले किसान आंदोलन हुआ था तो किस तरह की घटनाओं को अंजाम दिया गया।

याद दिला दें कि इससे पहले भी जब किसानों ने दिल्ली सीमाओं पर धरना देना शुरू किया था, उस समय भी प्रदर्शनकारियों के पास भिंडरावाले के पोस्टर देखे गए थे और फिर खुलेआम नारे सुनाई पड़े थे- “भिंडरावाले तेरी सोच पर राज करेगा…।” इसके अलावा ये बात भी गौर करनी वाली है कि जब-जब भिंडरावाले के पोस्टर या झंडे देखे जाते रहे हैं तब तब कट्टरपंथी खालिस्तानी भीड़ का उग्र चेहरा सामने आया है।

2020-2021 के किसान आंदोलन को ही यदि याद करें तो भीड़ ने नारेबाजी के साथ तिरंगा का अपमान किया था। इसके अलावा कुछ दिन पहले की ही बात है कि आतंकी भिंडरावाले का पोस्टर गुरुद्वारे में लगाने से जब रिटायर कर्नल ने मना किया था तो कैसे खालिस्तानी उन पर टूट पड़े थे और उनकी गाड़ी को तोड़ दिया गया था। इन सब घटनाओं को देखते हुए ये सोचना अहम है कि आखिर इन बड़े-बड़े ट्रैक्टरों में बैठकर कौन से किसान दिल्ली आ रहे हैं जिनके लिए ऐसे झंडे लगाने जरूरी हैं।

केजरीवाल सरकार ने कहा – ‘किसानों को गिरफ्तार करना गलत, नहीं बनाएँगे जेल’: दिल्ली को घरने 6 महीने का राशन लेकर चले ‘अन्नदाता’

अरविंद केजरीवाल की दिल्ली सरकार ने मंगलवार (13 फरवरी 2024) को राष्ट्रीय राजधानी में किसानों के मार्च के मद्देनजर बवाना स्टेडियम को अस्थायी जेल में बदलने के केंद्र के प्रस्ताव को खारिज कर दिया है। दिल्ली के गृह मंत्री कैलाश गहलोत ने मुख्य सचिव नरेश कुमार को पत्र लिखकर अनुमति देने से इनकार कर दिया और किसानों के मार्च के प्रति एकजुटता व्यक्त की।

कैलाश गहलोत के पत्र में लिखा गया, “किसानों की माँगें वास्तविक हैं। दूसरी बात, शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन करना प्रत्येक नागरिक का संवैधानिक अधिकार है। इसलिए, किसानों को गिरफ्तार करना गलत है।” दिल्ली सरकार ने कहा कि किसानों की माँग जायज है। किसान इस देश के अन्नदाता हैं। अन्नदाता को जेल में डालना गलत है। हम बवाना स्टेडियम को अस्थायी जेल बनाने की परमिशन नहीं दे सकते।

इससे पहले, आम आदमी पार्टी ने एक्स पर पोस्ट करते हुए लिखा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की देश के अन्नदाताओं से नफरत का सबसे बड़ा प्रमाण यह है कि दिल्ली की हरियाणा और उत्तर प्रदेश से लगती बॉर्डरों पर लोगों को राजधानी में एंट्री करने से रोकने के लिए कीलों वाली रिकेडिंग हाईवे पर कर दी है। जो अन्नदाता किसान देश का पेट भरने के लिए जमीन पर फसल उगाते हैं, पीएम मोदी ने उन्हीं किसानों को रोकने के लिए रास्ते में कीलों का जाल बिछाया है।

इस बीच, किसानों का दिल्ली मार्च जारी है। भारी संख्या में किसान दिल्ली बॉर्डर पहुँचने भी लगे हैं। किसानों ने कहा कि हम अपनी माँगों को पूरा करवाकर ही जाएँगे। हम 6 महीने का राशन लेकर आए हैं। किसान पहले दिल्ली के पास बॉर्डर पर जमा होंगे और दोपहर तीन बजे आगे की रणनीति के बारे में फैसला करेंगे। किसानों की ओर से कहा गया है कि हम अन्न उगाते हैं। सरकार ने हमारे लिए कीलों की फसल उगा रखी है। सरकार हमारे लोगों को अलग-अलग राज्यों में पकड़ रही है। हम फिर भी सरकार से बात करने को तैयार हैं।