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‘राम मंदिर तोड़ दो, उस पर मस्जिद बना दो’: OP जिंदल यूनिवर्सिटी बना नया ‘JNU’, वामपंथी गैंग ने ब्राह्मणों-हिंदुत्व पर उगला जहर

हरियाणा के सोनीपत में एक विश्वविद्यालय है, नाम है- ओपी जिंदल ग्लोबल यूनिवर्सिटी (विश्वविद्यालय)। ये एक बार फिर से विवादों में आ गया है। यहाँ पर वामपंथी छात्रों ने एक गोष्ठी यानी सेमिनार का आयोजन किया, जो हिंदुओं के खिलाफ घृणा से भरा रहा। इस कार्यक्रम में राम मंदिर को गिराने और उसकी जगह पर वहाँ मस्जिद बनाने तक की बात कही गई, साथ ही हिंदुओं के विरुद्ध जमकर आग उगली गई।

ओपी जिंदल ग्लोबल यूनिवर्सिटी में भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) से कथित रूप से जुड़े छात्र संगठन रिवोल्यूशनरी स्टूडेंट्स लीग (आरएसएल) ने बुधवार ( 7 फरवरी 2024 ) को इस कार्यक्रम का आयोजन किया था। इसमें “राम मंदिर: ब्राह्मणवादी हिंदुत्व फासीवाद का एक हास्यास्पद प्रोजेक्ट” (Ram Mandir: A Farcical Project of Brahmanical Hindutva Fascism) नाम से परिचर्चा रखी गई। जिसमें आरएसएल से जुड़े वामपंथी छात्रों ने कथित तौर पर राम मंदिर तोड़ने और उसकी जगह पर एक मस्जिद को बनाने का प्रस्ताव रखा।

इस कार्यक्रम का आयोजन करने वालों ने तर्क दिया कि राम मंदिर का निर्माण पूरे भारत में मुसलमानों और दलितों के खिलाफ किए गए घृणा अपराधों से जुड़ी हुई है। यही नहीं, 22 जनवरी 2024 को अयोध्या के भव्य मंदिर में रामलला की प्राण प्रतिष्ठा को ‘ब्राह्मणवादी हिंदुत्व फासीवादी शासन’ की क्रूरता और जन-विरोधी भावना के सबके सामने आ जाने का दावा किया गया। यही नहीं, इस कार्यक्रम से जुड़े ब्रोशन में रिवोल्यूशनरी स्टूडेंट्स लीग ने लोगों से भीमा कोरेगाँव काँड के आरोपितों में से एक अर्बन नक्सल कवि वरवर राव की विवादास्पद पुस्तक “फाइट ब्राह्मणिकल हिंदुत्व फासीवाद” को भी पढ़ने के लिए कहा।

वरवर राव की किताब में हिंदुत्व विरोधी प्रोपेगेंडा जमकर भरा है। उसके एक अंश में “मोहम्मद अखलाक, प्रोफेसर एमएम कलबुर्गी और याकूब मेमन की हत्याएं कई मायनों में मोदी के नेतृत्व वाले भाजपा-शासन के तहत देश में मौजूदा स्थिति का प्रतीक बन गई हैं।” जैसी बातें लिखी गई हैं।

वरवर राव के किताब का एक अंश

कई विवादों में घिरा रहा है ओपी जिंदल ग्लोबल यूनिवर्सिटी

ओपी जिंदल ग्लोबल यूनिवर्सिटी के इतिहास में यह घटना अकेली नहीं है। इससे पहले भी विश्वविद्यालय शैक्षणिक उत्पीड़न के आरोपों से लेकर यहूदी विरोधी और हिंदू विरोधी विचारों को मंच देने जैसे विवादों के घेरे में आ चुका है। ऐसी ही एक घटना में प्रोफेसर समीना दलवाई एक क्लास के अंदर एक छात्र की डेटिंग एप प्रोफाइल स्क्रीन पर दिखाई थी। इसके बाद उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई थी।

इसी विश्वविद्यालय में 8 फरवरी, 2023 को बीबीसी की प्रतिबंधित डॉक्यूमेंट्री “इंडिया: द मोदी क्वेश्चन” की स्क्रीनिंग भी की गई थी। यही नहीं, साल 2022 में जिंदल ग्लोबल लॉ स्कूल में चल रहे कक्षा सत्र का एक वीडियो सामने आया था, जिसमें विश्वविद्यालय के सहायक प्रोफेसर अरिजीत घोष को कश्मीर के बारे में “भारत के कब्जे वाला” क्षेत्र बताते हुए देखा गया था।

ये समाचार मूल रूप से अंग्रेजी भाषा में प्रकाशित किया गया है, मूल लेख पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें

हिंदू बन मोहम्मद अनीश ने नाबालिग को फँसाया, गोरखपुर से सीतामढ़ी बुलाया; बेचने की कोशिश का दावा: पुलिस ने रेप-लव जिहाद नकारा

बिहार की सीतामढ़ी पुलिस ने मोहम्मद अनीश को गिरफ्तार किया है। उस पर एक हिंदू नाबालिग को इंस्टाग्राम के जरिए फँसाने और फिर गोरखपुर से सीतामढ़ी बुलाकर होटल में रखने का आरोप है। मीडिया रिपोर्टों में नाबालिग के साथ रेप और उसे बेचने की कोशिश का भी दावा किया गया है। लेकिन पुलिस ने इन दावों को नकार दिया है। ऑपइंडिया को बताया है कि न ही यह लव जिहाद का मामला है और न ही लड़की को बेचने की कोशिश की बात सामने आई है।

जानकारी के अनुसार, सीतामढ़ी के मोहम्मद अनीश का कुछ महीनों पहले गोरखपुर की हिंदू नाबालिग से सम्पर्क हुआ था। कथित तौर पर नजदीकियाँ बढ़ने के बाद अनीश ने नाबालिग को पहले पटना और फिर सीतामढ़ी बुलाया। अनीश ने उसका इलाज करवाने का वादा किया था। साथ ही खुद को पैसे वाले परिवार से बताया था।

इसके बाद नाबालिग और अनीश तीन दिन तक सीतामढ़ी के एक होटल में रुके। वे खाने के लिए ही बाहर आते थे। जागरण की एक रिपोर्ट में बताया गया है कि इस दौरान अनीश ने नाबालिग के साथ दुष्कर्म भी किया। रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया है कि आरोपित ने अपनी मजहबी पहचान छिपाकर हिंदू नाबालिग को प्रेमजाल में फँसाया था। वहीं अमर उजाला की रिपोर्ट में बताया गया है कि नाबालिग को अनीश रेड लाइट एरिया में बेचने की कोशिश कर रहा था। वह बचने के लिए होटल से भागी, जिसके बाद राहगीरों ने उसको बचाया।

हालाँकि, सीतामढ़ी के एसडीपीओ राम कृष्णा ने इन दावों को नकार दिया है। ऑपइंडिया से बातचीत में उन्होंने बताया है कि इस मामले में लव जिहाद और रेड लाइट एरिया में बेचने का एंगल नहीं है। उन्होंने कहा है कि नाबालिग और अनीश के बीच एक-दूसरे के धर्म को लेकर ज्यादा बातचीत नहीं हुई है।

उन्होंने बताया है कि नाबालिग ने पुलिस काउंसलिंग के दौरान दोनों के बीच चुम्बन की बात स्वीकारी है। हालाँकि, लड़की के नाबालिग होने के चलते POCSO के तहत मामला दर्ज किया गया है। नाबालिग को बचपन बचाओ NGO को सौंप दिया गया है। वह महिला पुलिस की देखरेख में हैं। अभी उसका कोर्ट में बयान कराया जाएगा। पुलिस नाबालिग के परिवार वालों के संपर्क में है। उसे घर वापस भेजने की तैयारी हो रही है।

कॉन्ग्रेस कह रही – कोर्ट के बजाय मौलवी-मौलानाओं से आदेश लेते: हल्द्वानी में कट्टरपंथियों के साथ खड़ी पार्टी, सुप्रीम कोर्ट पहुँच पहले भी इन्होंने ही भड़काए थे दंगे

कोर्ट के आदेश के बाद उत्तराखंड के हल्द्वानी में प्रशासन ने अवैध अतिक्रमण के खिलाफ अभियान चलाया, जिसके बाद कट्टरपंथियों ने इतना उपद्रव मचाया कि इसमें कम-से-कम 6 लोगों की मौत हो गई है। ये अभियान कई दिनों से चल रहा था, जिसके तहत सरकारी जमीनों पर अवैध रूप से कब्जा करके बनाए बनाए गए इमारतों को ध्वस्त किया जा रहा था। इन इमारतों में मकानों और धार्मिक स्थल भी थे।

प्रशासन गुरुवार (8 फरवरी 2024) को हल्द्वानी के बनफूलपुरा थाना इलाके के ‘मालिक के बगीचे’ में पहुँचा और अवैध रूप से बनी मस्जिद और मदरसे पर बुलडोजर चला दिया। इसके बाद इस्लामी कट्टरपंथियों की भीड़ ने पुलिस पर हमला कर दिया। इस भीड़ में पुरुषों के साथ महिलाएँ भी शामिल थीं। हमले में कई पुलिस वाले घायल भी हो गए हैं।

हमले में पत्थरबाजी के साथ ही पेट्रोल-बम भी चलाए गए। दर्जनों गाड़ियों को आग लगा दिया गया। उन्मादी भीड़ ने पुलिस थाने को घेर लिया गया और पुलिस वालों को निशाना बनाना शुरू कर दिया। इस हिंसा में 6 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 300 से अधिक लोग घायल हैं। घायलों में अधिकांश पुलिसकर्मी और अधिकारी हैं। हालात को देखकर हल्द्वानी में अगले आदेश तक कर्फ्यू लगा दिया गया है।

दरअसल, कोर्ट के आदेश पर की गई प्रशासन द्वारा अवैध मस्जिदों और मदरसों पर की गई कार्रवाई के खिलाफ के बाद कट्टरपंथियों की कार्रवाई का कॉन्ग्रेस नेताओं ने एक तरह से समर्थन कर दिया। कॉन्ग्रेस नेताओं ने जिस लहजे में इस पूरे घटनाक्रम पर अपनी प्रतिक्रिया दी, उससे यही लगता है कि कोर्ट के आदेश बजाय प्रशासन को मौलवी एवं मौलानाओं से आदेश लेना चाहिए था और उनकी सहमति होती, तभी प्रशासन को कार्रवाई करनी चाहिए थी।

अधिकारियों को उतावला बताते हुए कॉन्ग्रेस के स्थानीय विधायक सुमित हृदयेश ने कहा, “ये प्रशासन और अधिकारियों की बहुत बड़ी चूक है। स्थानीय लोगों, मौलानाओं को कॉन्फिडेंस में लेकर बात की जानी चाहिए थी। आप (प्रशासन) एकदम से वहाँ पहुँच जाते हैं और बिना इन्फॉरमेशन के वहाँ ऐसी कार्रवाई को अंजाम दिया। जो भी हुआ, अनुचित हुआ। आजादी के बाद से ऐसा हमने हल्द्वानी शहर में ऐसा कभी नहीं देखा। ये बड़ा काला दिन है।”

ये वही सुमित हृदयेश हैं, जो रेलवे की जमीन पर कब्जा करके बसे हजारों लोगों की बस्तियाँ को हटाने के खिलाफ खड़े हो गए थे। मीडिया रिपोर्ट में कहा गया था कि यहाँ 20 इबादतगाह भी बनाए गए हैं। मामला जब सुप्रीम कोर्ट में गया तो अवैध कब्जाधारियों को बचाने के लिए कॉन्ग्रेस के सलमान खुर्शीद खड़े हो गए। वहीं, कॉन्ग्रेस के स्थानीय विधायक सुमित हृदयेश भी खड़े हो गए।

लोगों का तो ये भी कहना है कि इन अवैध बस्तियों को बसाने में सुमित हृदयेश की माँ इंदिरा हृदयेश का भी बड़ा हाथ था। कहा जाता है कि वहाँ जब गफूर बस्ती के सीमांकन का काम होता था, तब भी यहाँ के लोग इसका विरोध करते थे और इंदिरा हृदयेश भी इसमें साथ रहती थीं। इंदिरा हृदयेश भी उत्तराखंड कॉन्ग्रेस की बड़ी नेता रही हैं। इस पूरे मामले में एकमुश्त वोट पाने की नीति की बहुत बड़ी भूमिका है।

दरअसल, उत्तराखंड विधानसभा में हाल में समान नागरिक संहिता (UCC) पारित किया गया है, जिसको लेकर भी विपक्षी दलों द्वारा माहौल खराब करने की कोशिश की गई। कॉन्ग्रेस के बड़े नेता एवं उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने भी कहा था कि UCC से राज्य में अशांति हो सकती है। राज्य के हालत मणिपुर में तब्दील हो सकते हैं। उन्होंने UCC के बाद होने वाली हिंसा का उदाहरण कूकी-मैतेई समुदाय से जोड़कर दिया था।

इतना ही नहीं, मुस्लिम मौलानाओं ने भी सड़कों पर उतरने की धमकी दी थी। इसके बाद मुस्लिम सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर और खुद को पीस पार्टी का राष्ट्रीय प्रवक्ता बताने वाला शादाब चौहान मुस्लिमों की ताकत को कम ना आँकने की धमकी दी थी। शादाब चौहान ने हल्द्वानी दंगे (8 फरवरी, 2024) से दो दिन पहले उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को धमकी देते हुए एक सोशल मीडिया पोस्ट लिखा था।

अपने पोस्ट में शादाब ने लिखा था, “किसी की औकात नहीं है जो भारत के मुसलमानों को अल्लाह के हुकुम और हमारे नबी के तरीके पर चलने से रोक सके। अगर तुम हमको कमजोर समझ रहे हो तो गलती कर रहे हो, हमारी ताकत का अंदाज़ा तुम नहीं लगा सकते। हम हर संवैधानिक संघर्ष के लिए तैयार हैं। हमारी ताकत संविधान का अनुच्छेद 25 है, जिसके सामने तुम्हारी कोई हैसियत नहीं है। उत्तराखंड के मुख्यमंत्री और कॉन्ग्रेस, तुम्हारी भी जिम्मेदारी है कि इसके लिए संवैधानिक संघर्ष करो।”

ऑपइंडिया पत्रकार राहुल पांडे ने पिछले साल जनवरी 2023 में वहाँ जाकर स्थानीय लोगों से बात करके हालात को जानने का प्रयास किया था। हमें स्थानीय लोगों से पता चला था कि कैसे हल्द्वानी में बाहरी मुस्लिमों की संख्या तेजी से बढ़ी है। रामपुर, नजीमाबाद, बिजनौर, बुलंदशहर जैसी जगहों से मजदूरी के लिए वे आए और फिर जमीनों पर कब्जा करके बस गए। इनमें अवैध रोहिंग्या और बांग्लादेशी मुस्लिमों की भी बड़ी संख्या है।

दरअसल, हल्द्वानी में जिस बनफूलपुरा में ये सारा बवाल हुआ, वो पूरा इलाका सरकारी जमीन पर बसा है। प्रशासन लगातार अतिक्रमण विरोधी कार्रवाई कर रहा था। हाई कोर्ट से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक के आदेश के बाद ये कार्रवाई की जा रही थी। पिछले साल भी यहाँ बड़ा तनाव फैल गया था। इस बार अतिक्रमण विरोधी अभियान के तहत अवैध रूप से बने मस्जिद और मदरसा को हटाया जा रहा था।

प्रशासन की कार्रवाई लगभग पूरी भी हो गई थी, तभी वहाँ कट्टरपंथियों की भारी भीड़ पहुँची। इनमें महिलाएँ और किशोर उम्र के बालक भी थे। उन्होंने प्रशासनिक कर्मचारियों से बहस की और फिर देखते ही देखते आसपास की छतों से पत्थरबाजी शुरू हो गई। यहाँ करीब 800 की संख्या में मौजूद पुलिस वालों, मीडिया व अन्य प्रशासनिक कर्मचारियों-अधिकारियों को घेर लिया गया और हमला बोल दिया गया।

डीएम वंदना सिंह ने बताया, “ये हमला छतों पर इकट्ठे किए गए पत्थरों के जरिए किया गया। 30 जनवरी तक उन छतों पर कोई भी पत्थर नहीं था। न्यायालय में जब सुनवाई चल रही थी, तब भी वहाँ पत्थर नहीं थे। जिस दौरान सुनवाई चल रही थी, उस दौरान छतों पर पत्थर इकट्ठे किए गए। इसका मतलब है कि ये पूरी तरह से प्लानिंग की गई थी कि जिस दिन अतिक्रमण विरोधी अभियान चलाया जाएगा, उस समय हमला किया जाएगा। ताकि प्रशासन बैकफुट पर चला जाए।”

डीएम वंदना सिंह ने कहा, “पत्थरों से हमला हुआ, तो हमारी टीम पीछे नहीं हटी। हमारी टीम काम करती रही, इसके बाद दूसरी टीम आई। उनके हाथों में पेट्रोल बम थे। उन्होंने हाथों में प्लास्टिक की बोतलें पकड़ी हुई थी, उन्होंने उसमें आग लगाकर फेंकना शुरू किया। हमारी टीम तब भी अवैध ढाँचे को तोड़ने में लगी रही।”

नरसिम्हा राव, चौधरी चरण सिंह, एमएस स्वामीनाथन को भी ‘भारत रत्न’, मोदी सरकार में किसान से लेकर विज्ञान तक के दिग्गजों को देश का सर्वोच्च मान

नरेंद्र मोदी सरकार ने ऐलान किया है कि भारत के पूर्व प्रधानमंत्री पीवी नरसिम्हा राव को भारत रत्न से सम्मानित किया जाएगा। पीवी नरसिम्हा राव के अलावा पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह, वैज्ञानिक एमएस स्वामीनाथन को भी भारत रत्न देने का ऐलान किया है। इसकी जानकारी प्रधानमंत्री मोदी ने भी अपने एक्स पर शेयर की।

उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री पीवी नरसिम्हा राव के लिए कहा कि उन्हें यह साझा करते खुशी हो रही है- “हमारे पूर्व प्रधानमंत्री पीवी नरसिम्हा राव को भारत रत्न से सम्मानित किया जाएगा।”

उन्होंने कहा, “एक प्रतिष्ठित विद्वान और राजनेता के रूप में, नरसिम्हा राव गारू ने विभिन्न क्षमताओं में भारत की बड़े पैमाने पर सेवा की। उन्हें आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री, केंद्रीय मंत्री और कई वर्षों तक संसद और विधानसभा सदस्य के रूप में किए गए कार्यों के लिए समान रूप से याद किया जाता है। उनका दूरदर्शी नेतृत्व भारत को आर्थिक रूप से उन्नत बनाने, देश की समृद्धि और विकास के लिए एक ठोस नींव रखने में सहायक है।”

पीएम मोदी ने लिखा, “प्रधानमंत्री के रूप में नरसिम्हा राव गारू का कार्यकाल महत्वपूर्ण चीजों के लिए चिह्नित किया गया था जैसे जब भारत को वैश्विक बाजारों के लिए खोल दिया, जिससे आर्थिक विकास के एक नए युग को बढ़ावा मिला। इसके अलावा, भारत की विदेश नीति, भाषा और शिक्षा क्षेत्रों में उनका योगदान एक ऐसे नेता के रूप में उनकी बहुमुखी विरासत को रेखांकित करता है, जिन्होंने न केवल महत्वपूर्ण परिवर्तनों के माध्यम से भारत को आगे बढ़ाया बल्कि इसकी सांस्कृतिक और बौद्धिक विरासत को भी समृद्ध किया।”

पीएम ने चौधरी चरण सिंह के लिए लिखा, “हमारी सरकार का यह सौभाग्य है कि देश के पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह को भारत रत्न से सम्मानित किया जा रहा है। यह सम्मान देश के लिए उनके अतुलनीय योगदान को समर्पित है। उन्होंने किसानों के अधिकार और उनके कल्याण के लिए अपना पूरा जीवन समर्पित कर दिया था। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री रहे हों या देश के गृहमंत्री और यहाँ तक कि एक विधायक के रूप में भी, उन्होंने हमेशा राष्ट्र निर्माण को गति प्रदान की। वे आपातकाल के विरोध में भी डटकर खड़े रहे। हमारे किसान भाई-बहनों के लिए उनका समर्पण भाव और इमरजेंसी के दौरान लोकतंत्र के लिए उनकी प्रतिबद्धता पूरे देश को प्रेरित करने वाली है।”

वैज्ञानिक डॉ एमएस स्वामीनाथन के लिए उन्होंने कहा, “यह बेहद खुशी की बात है कि भारत सरकार कृषि और किसानों के कल्याण में हमारे देश में उल्लेखनीय योगदान के लिए डॉ. एमएस स्वामीनाथन को भारत रत्न से सम्मानित कर रही है। उन्होंने चुनौतीपूर्ण समय के दौरान भारत को कृषि में आत्मनिर्भरता हासिल करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और भारतीय कृषि को आधुनिक बनाने की दिशा में उत्कृष्ट प्रयास किए। हम एक अन्वेषक और संरक्षक के रूप में और कई छात्रों के बीच सीखने और अनुसंधान को प्रोत्साहित करने वाले उनके अमूल्य काम को भी पहचानते हैं। डॉ. स्वामीनाथन के दूरदर्शी नेतृत्व ने न केवल भारतीय कृषि को बदल दिया है बल्कि देश की खाद्य सुरक्षा और समृद्धि भी सुनिश्चित की है। वह ऐसे व्यक्ति थे जिन्हें मैं करीब से जानता था और मैं हमेशा उनकी अंतर्दृष्टि और इनपुट को महत्व देता था।”

बता दें कि इससे पहले बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री कर्पूरी ठाकुर और देश के पूर्व उपप्रधनमंत्री लालकृष्ण आणवाणी को भी यह सम्मान देने की घोषणा हो चुकी है। मालूम हो कि आडवाणी को छोड़कर बाकी चारों हस्तियों को मरणोपरांत यह सम्मान दिया जाएगा।

6 जिलों की पुलिस-पैरामिलिट्री के बाद हल्द्वानी में अब सेना सँभालेगी मोर्चा, भीड़ ने थाना ही नहीं पेट्रोल पंप भी फूँका: CM धामी बोले – एक-एक दंगाई की हो रही पहचान

उत्तराखंड के कुमाऊँ मंडल के नैतीताल जनपद स्थित हल्द्वानी ने बनभूलपुरा में हिंसा भड़की हुई है। हल्द्वानी को उत्तराखंड की आर्थिक राजधानी भी कहा जाता है। वहाँ बड़ी संख्या में मुस्लिमों ने सरकार जमीन पर कब्ज़ा कर के बस्तियाँ बसा रखी हैं। पुलिस-प्रशासन का बुलडोजर जब गुरुवार (8 फरवरी, 2024) को कार्रवाई करने पहुँचा तो हजारों की भीड़ जमा हो गई और थाने को घेर कर आग लगा दी गई। पत्थरबाजी हुई, गोलीबारी हुई, कई महिला पुलिसकर्मी भी घायल हुईं और वाहनों को क्षतिग्रस्त कर दिया गया।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि दंगाइयों और उपद्रवियों के विरुद्ध कठोरतम कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने हल्द्वानी के बनभूलपुरा में हुई घटना के संबंध में शासकीय आवास पर अधिकारियों के साथ उच्चस्तरीय बैठक कर वर्तमान स्थिति की समीक्षा की। CM ने पुलिस को अराजक तत्वों से सख़्ती से निपटने के स्पष्ट निर्देश दिए हैं। उन्होंने बताया कि आगजनी-पथराव करने वाले एक-एक दंगाई की पहचान की जा रही है, साथ ही आश्वासन दिया कि सौहार्द और शांति बिगाड़ने वाले किसी भी उपद्रवी को बख्शा नहीं जाएगा।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अपील की, “हल्द्वानी की सम्मानित जनता से अनुरोध है कि शांति व्यवस्था बनाए रखने में पुलिस-प्रशासन का सहयोग करें।” भीड़ द्वारा की गई हिंसा में 300 से अधिक लोग जख्मी हुए हैं। DM वंदना सिंह ने बताया है कि पुलिसकर्मियों को ज़िंदा जलाने की कोशिश भी की गई। हिंसक भीड़ में महिलाएँ भी शामिल थीं। मुस्लिम कह रहे हैं कि पुलिस मदरसे और मस्जिद को तोड़ने आई थी, जबकि प्रशासन का कहना है कि वहाँ जो संरचनाएँ हैं वो धार्मिक संरचनाओं के रूप में रजिस्टर्ड नहीं हैं।

फ़िलहाल हल्द्वानी में इंटरनेट सेवाएँ बंद हैं, शैक्षणिक संस्थानों में छुट्टी घोषित कर दी गई है और पूरे राज्य में हाई अलर्ट है। पुलिस को 3 तरफ से घेर कर पथराव किया गया। भीड़ में शामिल लोग लगातार अपशब्दों का इस्तेमाल कर रहे थे और ‘मारो-मारो’ नारा लगा रहे थे। पत्रकारों पर भी हमला किया गया है। अब तक 6 जिलों से पैरामिलिट्री फ़ोर्स मँगाई गई है। भारतीय सेना भी शनिवार को पहुँच जाएगी। उपद्रवियों को चिह्नित किया जा रहा है।

थाना ही नहीं, बल्कि एक पेट्रोल पंप भी फूँक दिया गया। DM ने बताया कि हल्द्वानी में न्यायालय के आदेश के बाद कुछ और जगह भी अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई की गई है। राज्य सरकार ने इसके लिए टास्क फ़ोर्स भी गठित कर रखी है। बताया जा रहा है कि पुलिस-प्रशासन ने कार्रवाई से पहले हवाई सर्वे नहीं कराया और प्रकरण को हल्के में लिया। उधर सोशल मीडिया में इस्लामी कट्टरपंथियों का साथ देने वाले उलटे हिंसक भीड़ का ही बचाव कर रहे हैं।

पुलिस पत्थर खाए, जिंदा जल कर मर जाए… लेकिन दंगाइयों पर न करे कार्रवाई: हल्द्वानी के कट्टरपंथियों को ‘विक्टिम’ दिखाने का काम शुरू

उत्तराखंड के हल्द्वानी में क्या हो रहा है ये किसी से छिपा नहीं है। 8 फरवरी 2024 को एक बार फिर इस्लामी कट्टरपंथियों की भीड़ अपने पुराने पैटर्न के साथ सड़कों पर आई। भीड़ ने जगह-जगह तोड़फोड़ की। आगजनी की-पत्थर फेंके। 300 से ज्यादा पुलिसकर्मियों को घायल किया, उन्हें जिंदा जलाकर मारने की कोशिश की और जब इन सबके खिलाफ पुलिस ने अपनी कार्रवाई को शुरू की तो इन्होंने खुद को विक्टिम दिखाना शुरू कर दिया।

इनके बचाव में सोशल मीडिया पर बैठे इस्लामी कट्टरपंथी भी अपने काम में जुट गए और ऐसी-ऐसी वीडियो की क्लिप काटकर डालने लगे जिसमें उलटा पुलिस को ही दोषी दिखाया जा रहा है और ये समझाया जा रहा है कि अवैध मस्जिद का ढाँचा गिरने पर दंगे कट्टरपंथी मुस्लिम भीड़ ने नहीं किए।

जैसे एक वीडियो क्लिप में आगजनी साफ देखी जा रही है और कुछ लोग क#% जैसे शब्दों का इस्तेमाल कर रहे हैं। इस क्लिप को दिखाकर ये साबित करने की हो रही है कि इस अवैध मस्जिद हटाए जाने की कार्रवाई पर हिंसा को कट्टरपंथी भीड़ अंजाम नहीं दे रही। बल्कि वो लोग दे रहे हैं जो इन कट्टरपंथियों से घृणा करते हैं।

इसी तरह एक वीडियो है जिसमें ये दिखाने का प्रयास हो रहा है पुलिस ने निहत्थी बुर्काधारी महिलाओं पर लाठी चार्ज किया तब भीड़ भड़की, जबकि हल्द्वानी की जिलाधिकारी ने अपने बयान में साफ कहा है कि अवैध मस्जिद हटाने की कार्रवाई से पहले ही वहाँ अराजक तत्वों (इस्लामी कट्टरपंथियों) ने हमले की तैयारी की हुई थी। उन्होंने सोचा हुआ था अवैध अतिक्रमण हटाने जब टीम आएगी तो वो हमला करेंगे। उनकी छतों पर पत्थर थे, हाथों में पेट्रोल बम थे।

अब आप अगर इन इस्लामी कट्टरपंथियों द्वारा किए गए उत्पात या दंगों की कोई भी खबर को पढ़ेंगे तो यही निष्कर्ष पाएँगे कि दंगा उन्हें उकसाने से नहीं होता बल्कि वो तय करके रखते हैं कि कब कौन सी कार्रवाई के बाद उन्हें कैसे हमला करना है। इस पैटर्न में छतों पर खड़े होकर पत्थरबाजी करने का काम बुर्काधारी महिलाओं को दे दिया जाता है और कट्टरपंथी युवक खुद सड़कों पर आ जाते हैं। इसके बाद इनके पास से पेट्रोल बम फेंके जाते हैं। गाड़ियों में आग लगा दी जाती है। पुलिस का घेराव होता है और ठीक उसी तरह से पुलिस को निशाना बनाया जाता है जैसे इस बार हल्द्वानी पुलिस को बनाया गया।

अजीब बात ये है कि इंसानियत का नाम लेकर बुर्काधारी महिलाओं के बचाव में सोशल मीडिया पर बैठी टीम को वो फुटेज नहीं मिली जहाँ हमलों में महिला पुलिकर्मियों पर जानलेवा हमले हुए। उन्हें मारने की कोशिश हुई। उन्हें मिली तो ऐसी महिलाओं की वीडियो जो दंगों के वक्त पुलिस के सामने खड़ी थीं। क्या पुलिस ये सोचकर उन्हें तितर-बितर न करती कि वो अवैध ढाँचे की कार्रवाई देखने आई ‘दर्शक’ थीं।

दंगों के वक्त 300 से ज्यादा पुलिसकर्मी घायल हुए हैं। ये कोई सामान्य आँकड़ा नहीं है। सोचिए कितने कट्टरपंथियों की अनियंत्रित भीड़ उनपर टूटी होगी जो इतना पुलिस बल मौजूद होकर भी उनका कुछ नहीं कर पाया और जब बचाव में अपनी कार्रवाई की तो सोशल मीडिया पर सवाल खड़े हो गए कि आखिर क्यों बेचारी निहत्थों को लाठी मारी जा रही है। क्या ऐसे में पुलिस को दंगाइयों के सामने खड़े होकर मार खानी चाहिए, जलकर मर जाना चाहिए या फिर स्थिति कंट्रोल करने के लिए उपयुक्त कार्रवाई करनी चाहिए वो चाहे छतों से पत्थर फेंकती बुर्काधारी महिलाओं के खिलाफ हो या फिर पेट्रोल बम लेकर सड़क पर उतरी भीड़ पर।

छतों पर पत्थर, पुलिस पर पेट्रोल बम, पूरी कॉलोनी को घेर कर आतंक और खौफ… हल्द्वानी में कट्टरपंथी मुस्लिम भीड़ ने वही किया, जो दिल्ली दंगों की थी प्लानिंग

उत्तराखंड के हल्द्वानी में मुस्लिम कट्टरपंथियों की भीड़ ने वो सबकुछ किया, जो दिल्ली में हिंदुओं के खिलाफ हुए दंगों में किया गया था। एक तरफ प्रशासन शांतिपूर्वक अतिक्रमण विरोधी अभियान चला रहा था, तो दूसरी तरफ इस्लामिक कट्टरपंथियों की नीयत के हिसाब से बड़े हमलों की चाल चली जा रही थी। हल्द्वानी के बनभूलपुरा में इस्लामिक हमलावरों की भीड़ ने दो हिस्सों में हमला किया। पहली बार में उन्होंने पत्थरबाजी की, इसके बाद पत्थरबाजों की भीड़ पीछे हटी, तो दूसरा हमला शुरू हुआ पेट्रोल बमों का। उसके बाद हमलावर दूसरे इलाके में घुसे। ये सबकुछ उसी तर्ज पर हुआ, जैसे साल 2020 के दिल्ली दंगों में हुआ था। आइए, हम आपको पूरी क्रोनोलॉजी समझाते हैं।

अतिक्रमण कर बनाए हजारों घर, मस्जिद-मदरसा भी बनाया

हल्द्वानी में जिस बनभूलपुरा में ये सारा बवाल हुआ, वो पूरा इलाका सरकारी जमीन पर बसा है। प्रशासन लगातार अतिक्रमण विरोधी कार्रवाई कर रहा था। हाई कोर्ट से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक के आदेश के बाद ये कार्रवाई की जा रही थी। पिछले साल भी यहाँ बड़ा तनाव फैल गया था। इस बार अतिक्रमण विरोधी अभियान के तहत अवैध रूप से बने मस्जिद और मदरसा को हटाया जा रहा था। ये कार्रवाई लगभग पूरी भी हो गई थी। तभी वहाँ पहुँचती है एक मुस्लिम कट्टरपंथियों की बड़ी भारी भीड़। इस भीड़ में महिलाएँ और किशोर उम्र के बालक भी शामिल थे। उन्होंने प्रशासनिक कर्मचारियों से बहस की, और फिर देखते ही देखते आसपास की छतों से पत्थरबाजी शुरू हो गई। यहाँ करीब 800 की संख्या में मौजूद पुलिस वालों, मीडिया व अन्य प्रशासनिक कर्मचारियों-अधिकारियों को घेर लिया गया, उन पर हमला बोल दिया गया। ये एक तरह से एकतरफा जंग की तरह हो गया।

खुद नैनीताल की डीएम वंदना सिंह ने बताया कि अतिक्रमण विरोधी अभियान पर कोर्ट की कोई रोक नहीं थी। कोर्ट से फैसला आने के बाद ही ये अभियान चलाया जा रहा था। जिन संपत्तियों को हटाने की कार्रवाई की जा रही थी, उसका कोई मालिक नहीं था। उन्होंने आगे कहा, “अतिक्रमण विरोधी अभियान कानूनी तौर पर सही तरीके से चलाया जा रहा था। हमारी टीमें वहाँ पहुँची। सारे संसाधन (बुलडोजर व अन्य गाड़ियाँ) मौके पर पहुँची। किसी को उकसाने या नुकसान पहुँचाने की कोशिश प्रशासन की तरफ से नहीं की गई। ये अभियान शांतिपूर्वक चल रहा था, तभी आधे घंटे के भीतर एक बड़ी भीड़ ने नगर निगम टीम पर पहला हमला किया।”

डीएम वंदना सिंह ने बताया, “ये हमला छतों पर इकट्ठे किए गए पत्थरों के जरिए किया गया। 30 जनवरी तक उन छतों पर कोई भी पत्थर नहीं था। न्यायालय में जब सुनवाई चल रही थी, तब भी वहाँ पत्थर नहीं थे। जिस दौरान सुनवाई चल रही थी, उस दौरान छतों पर पत्थर इकट्ठे किए गए। इसका मतलब है कि ये पूरी तरह से प्लानिंग की गई थी कि जिस दिन अतिक्रमण विरोधी अभियान चलाया जाएगा, उस समय हमला किया जाएगा। ताकि प्रशासन बैकफुट पर चला जाए। पत्थरों से हमला हुआ, तो हमारी टीम पीछे नहीं हटी। हमारी टीम काम करती रही, इसके बाद दूसरी टीम आई। उनके हाथों में पेट्रोल बम थे। उन्होंने हाथों में प्लास्टिक की बोतलें पकड़ी हुई थी, उन्होंने उसमें आग लगाकर फेंकना शुरू किया। हमारी टीम तब भी अवैध ढांचे को तोड़ने में लगी रही।”

थाने को घेरकर पत्थरबाजी और पेट्रोल बम से आगजनी

अतिक्रमण विरोधी अभियान वाली जगह पर कट्टरपंथियों के हमले में पुलिस के कई जवान घायल हो गए। कट्टरपंथी मुस्लिमों की भीड़ लगातार बढ़ती ही जा रही थी। इसके बाद इस भीड़ ने बनफूलपुरा पुलिस थाने को घेर लिया। उन्होंने पहले थाने पर पत्थर बरसाए। फिर पत्थरबाज पीछे हो गए। यहाँ भी पूरी सोची समझी प्लानिंग के तहत पत्थरबाजों के बाद आई हमलावरों की नई टीम। इस टीम के हाथों में पेट्रोल बम थे। उन्होंने बनफूलपुरा पुलिस थाने, बाहर खड़ी गाड़ियों को आग के हवाले करना शुरू कर दिया। आसपास से पुलिस पहुँचती, कि थाने में मौजूद पुलिस टीम को खुद को बचाने के लिए आँसू गैस के गोले छोड़ने पड़ गए।

डीएम वंदना सिंह ने बताया, “परिसंपत्तियों के नुकसान के तौर पर थाने को नुकसान पहुँचा। मुख्य बिल्डिंग को ज्यादा नुकसान नहीं हुआ, लेकिन उसे हथौड़े से तोड़ने की कोशिश की गई। थाने में और थाने के बाहर खड़ी गाड़ियों खासकर पुलिस की गाड़ियों, प्रशासनिक गाड़ियों, नगर निगम की गाड़ियों और मीडिया कर्मियों की गाड़ियों को आग लगा दी गई। इस दौरान किसी भी दूसरे समुदाय ने इस भीड़ का विरोध किया, ऐसे में इसे धार्मिक तनाव नहीं कर सकते। ये पूरी तरह से बनभूलपुरा की भीड़ द्वारा राज्य सरकार को चैलेंज किया जा रहा था, प्रशासन पर दबाव बनाया जा रहा था।” उनका इशारा इसी तरफ रहा कि ये भीड़ कुछ भी करके सरकार और प्रशासन पर दबाव बनाना चाहती थी, ताकि आगे अतिक्रमण विरोधी अभियान न चलाया जा सके।

फिर दूसरे मोहल्ले में इस्लामिक भीड़ ने दिखाई ‘ताकत’

बनभूलपुरा में सबसे ज्यादा नुकसान थाने के आसपास हुआ है। इस्लामिक कट्टरपंथियों की भीड़ ये कोशिश कर रही थी कि ये आग जल्द ही पूरे हल्द्वानी में फैल जाए। बनभूलपुरा थाने को नष्ट करने के बाद ये भीड़ गाँधी नगर इलाके की ओर बढ़ी। गाँधी नगर में मिश्रित आबादी है। किसी एक समुदाय का बहुमत नहीं है। ऐसे में प्रशासन और गाँधी नगर को आतंकित करने के लिए ये भीड़ उधर की तरफ बढ़ी। हालाँकि तब तक बाहर से सुरक्षा बल पहुँच गए। पीएसी के साथ ही अन्य केंद्रीय सुरक्षा बलों के जवान पहुँच गए। उन्होंने बड़ी मुश्किल से गाँधी नगर में हिंसा होने से रोका। हालाँकि गाँधी नगर को पूरी तरह से दहशत में डाल दिया गया था। इस दौरान बनभूलपुरा से लेकर गाँधी नगर तक भारी मात्रा में सुरक्षा बलों ने मोर्चा संभाल लिया और किसी तरह से इस हिंसा को हल्द्वानी के मुख्य शहर में पहुँचने से रोका।

नैनीताल की डीएम वंदना सिंह ने बताया, “प्रशासन की पूरी ताकत थाने को बचाने की थी। यहाँ से बलपूर्वक जब हमलावर भीड़ को हटाया गया, तब इस भीड़ ने पास के गाँधी नगर की ओर कूच किया। और पूरे गाँधी नगर को घेर लिया गया। इस क्षेत्र की आबादी मिली-जुली है। उस पूरे क्षेत्र को आतंकित करने की कोशिश की गई और प्रशासन को भी। चूँकि उस दौरान पीएसी, अर्धसैनिक बल और री-इन्फोर्समेंट फोर्स आ गई थी, तो वहाँ किसी तरह की जनहानि होने से रोक लिया गया। इस दौरान बनभूलपुरा के निकली हिंसक भीड़ को हल्द्वानी के मुख्य शहर में पहुँचने से रोका गया। इसके लिए प्रशासन ने पूरी ताकत झोंक दी कि हिंसा बनभूलपुरा के बाहर न फैलने पाए।”

ये पूरा घटनाक्रम उसी पैटर्न को दोहरा रहा है, जिसके तहत देश की राजधानी दिल्ली को काफी समय तक आतंकित करके रखा गया था। नैनीताल की डीएम वंदना सिंह के बयानों से स्पष्ट है कि इस बनफूलपुरा में पूरी प्लानिंग करके ही हमला किया गया। उनके बयानों को गंभीरता से सुनें, तो आखिर में वो बोलती हैं कि थाने पर हमले के बाद ये भीड़ गाँधी नगर को घेर चुकी थी। इसके बाद कट्टरपंथी हमलों की इस भीड़ ने हल्द्वानी में हाहाकार मचाने के लिए आगे बढ़ने की कोशिश की, लेकिन प्रशासनिक सक्रियता के चलते ऐसा न हो सका। जबकि दिल्ली में ये हिंसा उत्तर-पूर्वी दिल्ली में फैल गई थी।

दिल्ली का प्रयोग हल्द्वानी में दोबारा!

बता दें कि दिल्ली में खौफ और खून से सने हिंदू-विरोधी दंगों को अंजाम देने के लिए ये ईंट-पत्थर एक सप्ताह पहले से ही इकट्ठा करना शुरू कर दिया गया था। बताया जा रहा है कि इस हिंसा के लिए ट्रैक्टरों की मदद से एक हफ्ते पहले ही भट्ठों से ईंटे मँगवा ली गई थीं। सात ट्रक पत्थर तो करावल नगर के AAP पार्षद ताहिर हुसैन के घर के पास ही उठाए गए। बता दें कि इस दंगे के पीछे ताहिर हुसैन का बड़ा हाथ बताया जा रहा है। ताहिर पर आईबी ऑफिसर अंकित शर्मा की मौत का भी आरोप है।

ताहिर के घर के आगे लगे पत्थरों के ढेर को देखकर साफ लग रहा था कि इस दंगे के लिए जबरदस्त तैयारी की गई थी। उसके घर के आगे पत्थरों के इतने ढेर को देखकर निगमकर्मी भी सन्न रह गए, क्योंकि वहाँ पर इतना ज्यादा पत्थर था कि उससे एक मंजिला मकान बन सकता था। बता दें कि हिंसाग्रस्त इलाके मुस्तफाबाद, करावल नगर, चमन पार्क, शिव विहार सहित अन्य इलाकों में हिंसा के एक सप्ताह पहले से ही ट्रैक्टरों में भरकर ईंट मँगवाए गए और फिर इसके टुकड़े-टुकड़े किए गए ताकि इसे बोरियों में भरकर छतों पर रखा जा सके।

दिल्ली से लेकर हल्द्वानी तक की कड़ियों को जोड़ेंगे, तो साफ हो जाएगा कि हल्द्वानी में हुई हिंसा कोई अचानक हुई हिंसा नहीं, बल्कि पूरे देश को दहलाने की एक बड़ी साजिश थी। उनकी कोशिश थी कि पुलिस प्रशासन पर हुआ इस्लामिक हमला धीरे-धीरे पहले हल्द्वानी, फिर पूरे उत्तराखंड और फिर पूरे देश को अपनी चपेट में ले ले। हालाँकि अब प्रशासन ऐसे लोगों की पहचान करने में जुटा है, जो अतिक्रमण विरोधी अभियान के विरोध की आड़ में पूरे देश को जलाने की कोशिश में जुटे थे।

दंगों के बाद पूरे राज्य में अलर्ट

गौरतलब है कि हल्द्वानी में अतिक्रमण पर कार्रवाई हटाना अभी प्रशासन के लिए चुनौती बना हुआ है। एक कार्रवाई के बाद दंगाई भीड़ का सड़कों पर उतरना, उत्पात मचाने ने तनाव बढ़ा दिया है। हालातों को देखते हुए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने हाई लेवल मीटिंग की। इस दौरान पुलिस के आला अधिकारी बैठकक में रहे। बाद में नैनीताल जिला प्रशासन ने दंगा प्रभावित क्षेत्र में कर्फ्यू लगा दिया है। इसके साथ ही उपद्रवियों को देखते ही गोली मारने का आदेश जारी कर दिया गया है। वहीं, प्रशासन ने अफवाहों को फैलने से रोकने के लिए दंगाईयों को देखते ही गोली मारने के आदेश जारी किए हैं। इस बीचराज्य सरकार ने पूरे राज्य में हाई अलर्ट जारी कर दिया है। इस हिंसा में अभी तक 6 लोगों की मौत हो चुकी है, तो 300 से अधिक लोग घायल हैं। घायलों में 200 से अधिक लोग अकेले पुलिस के जवान ही हैं।

‘हमको कमजोर समझ गलती कर रहे, हमारी ताकत का अंदाजा तुम नहीं लगा सकते’ – नेता से लेकर वकील और मुल्ले सबने भड़काई हल्द्वानी में हिंसा

उत्तराखंड के हल्द्वानी में कट्टरपंथी मुस्लिमों ने जम कर हिंसा की है। इस हिंसा में 300 से ज्यादा पुलिसकर्मी घायल हुए हैं। यह हिंसा कट्टरपंथी मुस्लिमों ने इसलिए की क्योंकि यहाँ प्रशासन अतिक्रमण हटाना चाहता था। हालाँकि, उत्तराखंड में दंगा भड़काने की धमकियाँ पहले से दी जा रही थीं, इससे संबंधित ट्वीट और बयान अब वायरल हो रहे हैं।

गौरतलब है कि हाल ही में उत्तराखंड विधानसभा में UCC विधेयक पारित हुआ है। इसी को लेकर मुस्लिमों के सड़कों पर उतरने की धमकी बड़े मौलानाओं से लेकर मुस्लिम सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर तक दे रहे थे। इसमें कॉन्ग्रेस के बड़े नेता भी शामिल थे। ऐसी ही कई धमकियाँ अब वायरल हो रही हैं। एक पोस्ट में एक कट्टरपंथी मुस्लिम इन्फ्लुएन्सर शादाब चौहान, जो कि खुद को पीस पार्टी का राष्ट्रीय प्रवक्ता बताता है, उत्तराखंड के मुख्यमंत्री को धमकी देता दिखा था। उसने मुस्लिमों की ताकत को कम ना आँकने की धमकी दी थी।

शादाब चौहान ने हल्द्वानी दंगे (8 फरवरी, 2024) से दो दिन पहले सीधी धमकी देते हुए लिखा था, “कान खोल करके सुन लो पुष्कर सिंह धामी, किसी की औकात नहीं है जो भारत के मुसलमानों को अल्लाह के हुकुम और हमारे नबी के तरीके पर चलने से रोक सके। अगर तुम हमको कमजोर समझ रहे हो तो गलती कर रहे हो, हमारी ताकत का अंदाज़ा तुम नहीं लगा सकते। हम हर संवैधानिक संघर्ष के लिए तैयार हैं। हमारी ताकत संविधान का अनुच्छेद 25 है, जिसके सामने तुम्हारी कोई हैसियत नहीं है। उत्तराखंड के मुख्यमंत्री और कॉन्ग्रेस, तुम्हारी भी जिम्मेदारी है कि इसके लिए संवैधानिक संघर्ष करो।”

उत्तराखंड के मुख्यमंत्री रहे कॉन्ग्रेस नेता हरीश रावत ने भी ऐसे हालातों की चेतावनी दी थी। उन्होंने UCC पर कहा था कि इससे राज्य में अशांति हो सकती है। राज्य के हालत मणिपुर में तब्दील हो सकते हैं। उन्होंने UCC के बाद होने वाली हिंसा का उदाहरण कूकी-मैतेई समुदाय से जोड़कर दिया था। उनका यह बयान भी अब वायरल हो रहा है।

उत्तराखंड में UCC के आते ही मुस्लिम मौलानाओं ने धमकियाँ देना चालू कर दी थीं। देहरादून के शहर काजी हम्मद अहमद कासमी ने सड़क पर उतरने का ऐलान किया था। उन्होंने कहा था कि देश के बुद्धिमान लोग यूनिफॉर्म सिविल कोड की जरूरत नहीं मानते हैं। वहीं मुस्लिम युवाओं ने भी इस कानून को ना मानने की बात कही थी।

गौरतलब है कि उत्तराखंड में मुस्लिम आबादी का एक हिस्सा UCC लाने के विरोध में था। कई कट्टरपंथी इसके खिलाफ बड़े प्रदर्शन और सड़कों को जाम करने की धमकी दे रहे थे। इसके दो दिनों के भीतर ही हल्द्वानी से हिंसा की खबर आ गई।

जिस हल्द्वानी में इस्लामी कट्टरपंथियों ने किया दंगा, वहाँ मंदिर तोड़ कर चुके हैं कब्जा, हिंदू डर में जीने को मजबूर: ऑपइंडिया ग्राउंड रिपोर्ट के खुलासे

उत्तराखंड के हल्द्वानी में इस्लामी कट्टरपंथी भीड़ ने खुलेआम हिंसा की। कल (8 फरवरी 2024) वहाँ बनभूलपुरा थाना इलाके में नगर निगम द्वारा मस्जिद हटाने की कार्रवाई के बाद से दंगे वाले हालात हो गए। दंगे में 6 लोगों की जान चली गई। 300 से ज्यादा पुलिस वाले घायल हो गए। पत्थरबाजी-आगजनी जैसी घटनाओं को अंजाम दिया गया। दर्जनों गाड़ियों को आग लगा दी गई।

उत्तराखंड के हल्द्वानी का यह इलाका पहली बार इस्लामी कट्टरपंथियों की वजह से चर्चा में नहीं आया है। पिछले साल भी जब कोर्ट ने रेलवे की जमीन, जिसपर कब्जा किया गया था, उससे अतिक्रमण हटाने के आदेश दिए थे (जिस पर बाद में स्टे लगा दिया गया), उस समय भी इन लोगों ने माहौल बिगाड़ने का प्रयास किया था। उस दौरान ऑपइंडिया के पत्रकार राहुल पांडे भी ग्राउंड रिपोर्ट के लिए वहाँ पर पहुँचे थे, जिसमें बहुत से खुलासे हुए थे।

ऑपइंडिया ग्राउंड रिपोर्ट में हल्द्वानी को लेकर खुलासे

ऑपइंडिया पत्रकार राहुल पांडे ने पिछले साल जनवरी 2023 में वहाँ जाकर स्थानीयों से बात कर हालातों को हर सिरे से जानने का प्रयास किया था। इसी क्रम में हमें स्थानीयों से पता चला था कि कैसे हल्द्वानी में बाहरी मुस्लिमों की संख्या बढ़ी। कैसे वो रामपुर, नजीमाबाद, बिजनौर जैसी जगहों से मजदूरी के लिए आए और फिर जमीनों पर कब्जा करके बस गए। एक हिंदू व्यक्ति ने जानकारी दी थी कि पूरे इलाके में (कट्टरपंथियों के पास) इतने हथियार इकट्ठा हो चुके हैं जिसकी हद्द नहीं।

हल्द्वानी में कट्टरपंथियों का खौफ, हिंदू डर में जीने को मजबूर

इसी तरह इंदिरा नगर बस्ती में राहुल पांडे ने जाकर देखा तो हिंदू डरे हुए थे। उन्होंने बताया था कि कैसे वहाँ की मुस्लिम आबादी उनके घरों पर चरस और शराब के नशे में लात मारती है। विरोध करने पर मामले को शांत करवा दिया जाता है। हिंदुओं के सवाल थे कि पिछले एक दशक में मुस्लिमों की संख्या इतनी कैसे बढ़ी कुछ समझ नहीं आता।

बनभूलपुरा के एक दिव्यांग हिंदू ने राहुल पांडे से कहा था कि वो चाहते हैं कि भारत सरकार उन्हें परिवार सहित निकाल ले, क्योंकि वहाँ अब हिंदुओं के रहने के हालात नहीं बचे हैं। इसी तरह एक युवक ने जानकारी दी थी कि इन इलाकों में लव-जिहाद और धर्मांतरण की घटनाएँ भी घटित हो चुकी हैं। हिंदू लोग होली तक सही से नहीं खेल पाते हैं।

मंदिर तोड़ किया था कब्जा

स्थानीयों ने यह भी बताया कि एक स्थानीय बुजुर्ग सत्यनारायण तिवारी ने अपने घर के पास मंदिर बनवाया तो लेकिन जब वो इलाके से चले गए तो मुस्लिमों ने उनके घर के साथ उस मंदिर को तोड़कर भी वहाँ कब्जा कर लिया। ऐसे ही स्कूलों में बच्चों को पढ़ाई जाने वाली इस्लामी दुआ का भी पता चला। इसके अलावा ये भी बताया गया था हिंदू लड़कियों का ऐसे इलाकों में आना-जाना मुहाल किया जा चुका है।

रोहिंग्या-बांग्लादेशी भी बसे

ग्राउंड पर रहते हुए यह भी पता चला था कि जिस जमीन के लिए पिछले साल मुस्लिम भीड़ ने प्रदर्शन किया था, वहाँ रोहिंग्याओं और बांग्लादेशियों ने भी घर बना रखे हैं। इन इलाकों को बुलडोजर कार्रवाई से बचाने के लिए जो विरोध प्रदर्शन इन्होंने शुरू किया था उसमें लोकल नेता, धार्मिक नेता मिलकर बच्चों का इस्तेमाल कर रहे थे।

रेल की पटरियों पर खेलते बच्चों ने बताया था कि मोहम्मद समीर नाम के बच्चे ने स्वीकार किया कि बच्चों को मदरसे का ड्रेस पहनाकर धरने में शामिल करवाया गया था। बच्चों ने ऑन कैमरा इन बातों को स्वीकारा था कि सपा से जुड़े मतीन सिद्दकी उस प्रदर्शन के मुख्य आयोजक थे। बच्चों ने बताया मतीन ने ही इरफान हाफिज से बच्चों को तैयार कर प्रदर्शन में लाने की हिदायत दी थी।

प्रोपेगेंडा फैलाने में द वायर का साथ

यह भी ऑपइंडिया पत्रकार राहुल पांडे की ग्राउंड रिपोर्ट में खुलासा हुआ था कि प्रदर्शन वाली भीड़ को एक पत्रकार आरफा खानुम शेरवानी का नाम ले लेकर समझा रहा था कि उन्हें कैमरे पर कैसे अपनी बात रखनी है। उस पत्रकार का कहना था कि वो वीडियो द वायर पर चलवाएगा।

दंगों के बाद पूरे राज्य में अलर्ट

गौरतलब है कि हल्द्वानी में अतिक्रमण पर कार्रवाई हटाना अभी प्रशासन के लिए चुनौती बना हुआ है। एक कार्रवाई के बाद दंगाई भीड़ का सड़कों पर उतरना, उत्पात मचाने ने तनाव बढ़ा दिया है। हालातों को देखते हुए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने हाई लेवल मीटिंग की। इस दौरान पुलिस के आला अधिकारी बैठकक में रहे। बाद में नैनीताल जिला प्रशासन ने दंगा प्रभावित क्षेत्र में कर्फ्यू लगा दिया है। इसके साथ ही उपद्रवियों को देखते ही गोली मारने का आदेश जारी कर दिया गया है। वहीं, प्रशासन ने अफवाहों को फैलने से रोकने के लिए दंगाईयों को देखते ही गोली मारने के आदेश जारी किए हैं। इस बीचराज्य सरकार ने पूरे राज्य में हाई अलर्ट जारी कर दिया है।

पुलिस वालों को जिंदा जला रहे थे कट्टरपंथी मुस्लिम दंगाई, जिस घर में जान बचाने के लिए घुसे… उसे ही किया टारगेट: पुलिसवालों ने सुनाई आपबीती

हल्द्वानी में नगर निगम की जमीन पर अतिक्रमण हटाने गई पुलिस-प्रशासन की टीम पर कट्टरपंथी मुस्लिमों की भीड़ ने हमला कर दिया। दंगाई मुस्लिमों की भीड़ ने पुलिसकर्मियों को घेर कर जलाने का प्रयास किया। पुलिसकर्मियों ने दंगाइयों के हमले की करतूत कैमरे पर आकर बताई है। इसमें कई महिला पुलिसकर्मी भी घायल हुई हैं।

हल्द्वानी हिंसा में घायल एक महिला पुलिसकर्मी ने मीडिया को बताया, “वहाँ से हम बच कर आए। एक घर के अंदर घुस गए हम, जिसमें आग लगाने की उन्होंने कोशिश की। पथराव किया। हम मुश्किल से वहाँ से जान बचा कर आए। हमारी फ़ोर्स काफी देर बाद आई, तब हम निकल कर आए। हर गलियों से, हर जगह से भी पथराव हो रहा था। उन लोगों ने गलियाँ घेर ली थीं। हमलोग 15-20 लोग एक घर के भीतर दबे पड़े थे। जिन्होंने हमें शरण दी, उसको भी गालियाँ दी गईं। उसका घर तोड़ा गया, जब हम वापस आ रहे थे तब शीशे, बोतलें और ईंट फेंकी।”

बताया गया है कि इस हिंसा में अब तक 6 लोगों की मौत हो चुकी है। कट्टरपंथी मुस्लिमों के हमले में 300 से अधिक पुलिसकर्मी घायल हैं। राज्य के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने दंगाइयों को देखते ही गोली मारने के आदेश दिए हैं। हल्द्वानी में अभी कर्फ्यू लगाया गया है।

हल्द्वानी में हुए इस हमले से बच कर आए एक अन्य पुलिसकर्मी ने बताया है कि इन दंगाइयों ने गलियों से आकर पथराव किया। पुलिसकर्मी ने बताया है कि उनके वापस आते वक्त उन पर गोलियाँ बरसाई गईं। मुस्लिम दंगाइयों ने कट्टों से उन पर गोलियाँ चलाई। उन्होंने नगर निगम का ट्रैक्टर, एक गश्ती वाहन और कई मोटरसाइकिल जला दी।

एक अन्य वीडियो में एक पुलिसकर्मी अपने घाव को दिखाते हुए बताता है कि कैसे वह दंगाइयों से बच कर आया। एक सिख पुलिसकर्मी भी इन दंगों में घायल हुआ है।

हमले के बाद घायल हुए पुलिसकर्मियों का वीडियो भी आया है। इसमें बड़ी संख्या में पुलिसकर्मी घायल दिख रहे हैं। पुलिसवालों का इलाज चल रहा है। वीडियो में दिखता है कि किसी पुलिसकर्मी के सर पर चोट लगी तो किसी के हाथ पर चोट आई है।

हल्द्वानी में इन्टरनेट सुविधाओं को भी बंद कर दिया गया है। हल्द्वानी में स्कूल कॉलेज भी बंद हैं। राज्य के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने लोगों से शान्ति बनाए रखने की अपील की है।