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राम मंदिर बनाकर पीएम मोदी ने इतिहास रचा है: अमित शाह, बोले-जो राम के बिना भारत की कल्पना करते हैं, वो भारत को नहीं जानते

राम मंदिर पर बोलते हुए अमित शाह ने कहा कि 22 जनवरी 2024 का दिन 1528 में शुरू हुए एक संघर्ष और एक आंदोलन के अंत का दिन है। देश की संस्कृति और रामायण अलग नहीं है। गृह मंत्री अमित शाह ने संसद में कहा, ‘मैं आज अपने मन की बात और देश की जनता की आवाज को इस सदन के सामने रखना चाहता हूँ। जो वर्षों से कोर्ट के कागजों में दबी हुई थी।’ उन्होंने कहा कि 22 जनवरी 2024 का दिन सहस्त्रों वर्षों के लिए ऐतिहासिक बन गया है। जो इतिहास और ऐतिहासिक पलों को नहीं पहचानते, वो अपने अस्तित्व को खो देते हैं।

बजट सत्र के आखिरी दिन लोकसभा में राम मंदिर पर चर्चा हुई। इस दौरान केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने कहा कि 22 जनवरी पूरे भारत के लिए आध्यात्मिक चेतना का दिन है। यह सदियों के लिए ऐतिहासिक और जीत का दिन है। यह न्याय की लड़ाई की जीत का दिन है। ये 1528 में शुरू हुए एक संघर्ष और एक आंदोलन के अंत का दिन है। देश की संस्कृति और रामायण अलग नहीं है।

गृहमंत्री अमित शाह ने कहा, “राम के बिना देश की कल्पना नहीं की जा सकती है। अमित शाह ने इस दौरान बिना नाम लिए विपक्ष पर भी निशाना साधा। राम मंदिर पर सवाल खड़े करने वाले नेताओं को लेकर उन्होंने कहा कि जो ऐतिहासिक पलों को नहीं पहचानते, वो अस्तित्व खो देते हैं।’ गृह मंत्री ने विपक्षी दलों से राम मंदिर को किसी धर्म से नहीं जोड़ने का आग्रह भी किया।

गृहमंत्री शाह ने कहा, “ये दिन मां भारती विश्व गुरु के मार्ग पर ले जाने को प्रशस्त करने वाला दिन है। इस देश की कल्पना राम और रामचरितमानस के बिना नहीं की जा सकती। राम का चरित्र और राम इस देश के जनमानस का प्राण है। जो राम के बिना भारत की कल्पना करते हैं, वो भारत को नहीं जानते। हमने राम मंदिर निर्माण का वादा किया था उसे पूरा किया। पीएम मोदी ने जन आकांक्षाओं को पूरा किया है। पीएम ने सही राजनेता होने का परिचय दिया। गृहमंत्री ने कहा कि 1528 के बाद से हर पीढ़ी ने किसी न किसी रूप में इस आंदोलन को देखा है। यह मामला लंबे समय तक अटका रहा, लेकिन मोदी सरकार के समय यह सपना पूरा किया गया।

सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर सवाल क्यों?

राम मंदिर पर चर्चा के दौरान अमित शाह ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के दखल के बाद राम मंदिर का निर्माण शुरू हुआ। आज सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर सवाल क्यों खड़े हो रहे हैं। राम मंदिर कानून के मुताबिक बना है। गृहमंत्री ने कहा, “2014 से 2019 तक लंबी कानूनी लड़ाई चली। निहंगों ने लड़ाई शुरू की थी। आडवाणी जी ने सोमनाथ से अयोध्या के लिए यात्रा निकाली, जनजागृति फैलाई। अशोक सिंघल जी इसे चरम सीमा पर ले गए और आखिर में सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद मोदी जी ने जनआकांक्षा की पूर्ति की। कोई एक देश अपने बहुसंख्यक समाज की धार्मिक विश्वास की पूर्ति के लिए धैर्य रखकर सुप्रीम कोर्ट में गुहार लगाता रहे, यह बात देश के लोकतांत्रिक इतिहास में लिखी जाएगी।”

इस दौरान अमित शाह ने कॉन्ग्रेस के नेताओं पर चुटकी ली। उन्होंने लोकसभा में बोलते हुए कहा, “हमारे गुजरात में एक कहावत है- हवन में हड्डी नहीं डालनी चाहिए। पूरा देश जब आनंद में डूबा है, भैया स्वागत कर लो। इसी में देश का भला है।”

Those who imagine India without Ram, do not know India, says Amit Shah

‘पानी की टंकी में भर रखे थे पत्थर, अल्लाहू अकबर का नारा लगा रही थी दंगाई भीड़’: हल्द्वानी में चश्मदीद ने जो देखा, सब कुछ ऑपइंडिया को बताया

उत्तराखंड के हल्द्वानी में कोर्ट के आदेश के बाद अवैध संरचनाओं को ध्वस्त करने के लिए प्रशासन बुलडोजर लेकर पहुँचा, लेकिन मुस्लिम भीड़ उग्र हो गई और उसने पत्थरबाजी शुरू कर दी। इसके बाद हिंसा, आगजनी और गोलीबारी का दौर चला। थाना और पेट्रोल पंप फूँक दिया गया। वाहनों को क्षतिग्रस्त कर दिया गया। घटना के बीच एक शख्स का वीडियो भी वायरल हुआ था, जो बाइक पर बैठा हुआ है। उसने पत्थरबाजी के बीच वीडियो बना कर बताया था कि क्या हो रहा है।

वीडियो में वो कहता दिख रहा है कि जब पुलिस के जवानों पर पथराव हो सकता है तो आप और हम क्या हैं। वीडियो में वो कहता है, “ये है भाईचारा। आइए, भाईचारा दिखाता हूँ आपको।” उसने कैमरे में दिखाया कि कैसे पुलिस पर पत्थरबाजी हो रही है। ऑपइंडिया ने वायरल वीडियो में दिख रहे शख्स को ढूँढ निकाला है। उसका नाम दीपांशु है। दीपांशु ने ऑपइंडिया से बात करते हुए बताया कि ये वीडियो गुरुवार (8 फरवरी, 2024) को शाम 5 बजे के बाद का है।

उन्होंने बताया कि वो मौके पर ही मौजूद थे, वो कहीं से आ रहे थे और अफरा-तफरी का माहौल देख कर उन्हें पता चला कि अवैध मस्जिद-मदरसा पर बुलडोजर चलाने के कारण भीड़ ने हमला कर दिया गया। बकौल दीपांशु, उन्होंने देखा कि 100-150 की संख्या में महिला कर्मचारी खुद की जान बचाती हुई हेलमेट पहन कर भागती हुई आ रही थीं। उन्होंने बताया कि उनमें से कई घायल थीं, जिनमें से कुछ को उनलोगों ने अस्पताल छोड़ा। दीपांशु ने बताया कि उन्होंने खुद घायलों को पानी पिलाया और अस्पताल छोड़ा।

‘पुलिस वालों को मुस्लिम पानी पिला रहे थे’ – इस नैरेटिव पर दीपांशु ने कहा कि उन्होंने ऐसा कुछ नहीं देखा है, मुस्लिम तो पत्थर चला रहे थे। दीपांशु ने कहा कि सरकारी विभाग के अधिकतर अधिकारी चोटिल थे, किसी के सिर, किसी के पाँव तो किसी के हाथ से खून निकल रहा था। दीपांशु ने बताया कि उन्हें देख कर बड़ा दुःख हो रहा था कि जब वर्दी वाले ही पीड़ित हैं तो आम लोग क्या हैं, वो रो-तड़प रहे थे। उन्होंने कहा कि जो लोग हिन्दू-मुस्लिम भाईचारा की बात करते हैं, उनके लिए उन्होंने वीडियो बताया।

दीपांशु ने बताया कि महिला कॉन्स्टेबल रो रही थीं, बता रही थीं कि उन्हें चोट लगी है। उन्होंने कहा, “सोचिए, किसी व्यक्ति के ऊपर ईंट पड़ेगी तो वो कितना रोएगा। बहुत दर्दनाक मंजर था। हमलावर छत से पत्थर फेंक रहे थे, टंकी में पानी की जगह पत्थर भरे थे। वीडियो सर्वे में कोई पत्थर नहीं मिला था, वो छिपा कर रखे गए थे। VHP और ‘बजरंग दल’ के कार्यकर्ताओं ने ब्लड डोनेट किया। इसमें प्रशासन की कोई गलती नहीं है। सरकारी आदेश पर वो ड्यूटी करने आए थे।”

दीपांशु ने बताया कि ‘अल्लाहु अकबर’ के नारे लग रहे थे। उन्होंने बताया कि कॉन्ग्रेस विधायक सुमित हृदयेश अब भी दंगाइयों के साथ हैं। उन्होंने कहा कि पुलिस-प्रशासन ने किसी को टॉर्चर नहीं किया, उलटे उन्हें राक्षसों की तरह मारा गया। दीपांशु फोटोग्राफी की दुकान चलाते हैं। बता दें कि हल्द्वानी की डीएम वंदना सिंह ने बताया था कि पुलिस वालों को ज़िंदा लगाने की कोशिश की गई थी। घटना के बाद हल्द्वानी के बनभूलपुरा में कर्फ्यू लगा दिया गया और दंगाइयों को देखते ही गोली मारने के आदेश जारी किए गए।

‘अगर CM योगी बंगाल आए तो वापस नहीं जाने देंगे’: ज्ञानवापी में पूजा पर TMC मंत्री सिद्दीकुल्लाह ने दी धमकी, कहा- मस्जिद खाली करो

वाराणसी के जिला कोर्ट द्वारा हिंदुओं को व्यास तहखाने में पूजा का अधिकार मिला तो कई लोग नाराज हो गए। इस लिस्ट में ममता बनर्जी के मंत्री सिद्दीकुल्लाह चौधरी का भी नाम है। उन्होंने हाल में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को धमकी दी है।

सिद्दीकुल्लाह ने एक रैली में कहा कि अगर सीएम योगी बंगाल आए तो वो लोग उनका घेराव करेंगे और उनको वापस नहीं जाने देंगे। तृणमूल कॉन्ग्रेस के नेता ने यूपी सीएम को धमकी देने के साथ माँग की है कि ज्ञानवापी में हिंदुओं को पूजा न करने दिया जाए।

उन्होंने कहा, “कोर्ट की मदद से ये लोग जबरदस्ती मस्जिद में पूजा कर रहे है। उनको (योगी आदित्यनाथ) अकल है या नहीं? अगर वो बंगाल आए तो हमारा संगठन उन्हें घेरेगा और उन्हें बंगाल से जाने नहीं दिया जाएगा। हमें ज्ञानवापी खाली चाहिए। हम तो किसी मंदिर में नहीं जाते इबादत करने। तो हमारी मस्जिदों में क्यों आ रहे हैं। मस्जिद तो मस्जिद है। ज्ञानवापी मस्जिद को खाली करें तुरंत।”

बंगाल में सिद्दीकुल्लाह ने यह बयान जमीयत उलेमा-ए-हिंद की एक सभा में दिया और कहा कि ज्ञानवापी मस्जिद वहाँ पर 800 सालों से है वो कैसे उसे ध्वस्त कर सकते है।

ममता बनर्जी के मंत्री सिद्दीकुल्लाह के हिंदूविरोधी बयान

बता दें कि पहली बार ममता बनर्जी के मंत्री ने इस तरह हिंदूविरोधी बयान नहीं दिया। 2021 में इसी मंत्री ने कहा था बंगाल में गायों को कटने से कोई नहीं रोक सकता। टीएमसी मंत्री ने कहा था, “उत्तर प्रदेश सीएम योगी आदित्यनाथ यहाँ आए और कह गए कि अगर उनकी सरकार आई तो गौकशी नहीं होगी।”

इस पर उन्होंने कहा था, “गौकशी बंगाल में 1000-1200 सालों से होती आई है। हर कोई बीफ खाता है। मुस्लिम और अन्य भी। बीफ का वोट से क्या लेना देना। ये हिंदूवादी मानसिकता को बढ़ाने का प्रयास कर सकती है।” उन्होंने राम मंदिर फैसले पर भी कहा था कि इससे पीएम मोदी की छवि खराब होगी।

सिद्दीकुल्लाह वही व्यक्ति हैं जिन्होंने सितंबर 2018 में कुरान को संविधान से ऊपर बताते हुए तीन तलाक पर लगे प्रतिबंध के प्रति अपनी नाराजगी व्यक्त की थी। इसके अलावा वह ममता बनर्जी के उस कमेटी का भी हिस्सा थे जो टीएमसी ने सागरदिघि में करारी हार के बाद बनाई गई थी। इस कमेटी का उद्देश्य यही पता लगाना था कि जब ममता सरकार मुस्लिमों के लिए इतनी स्कीमें चला रही है तो फिर उन्हें वोट क्यों नहीं मिला।

सबसे ज़्यादा सीटें नवाज़ की पार्टी को, लेकिन उम्मीदवार सबसे ज़्यादा जीते इमरान के: पाकिस्तान में नतीजों के बाद जोड़तोड़ शुरू, दोनों पक्ष कर रहे जीत के दावे

पाकिस्तान में आम चुनावों के परिणाम घोषित होने के साथ ही सत्ता के लिए गठबंधन बनाने व जोड़-तोड़ की प्रक्रिया शुरू हो गई है। पाकिस्तान में आम चुनावों के साथ-साथ प्रांतीय चुनाव भी हुए हैं। शुक्रवार (9 फरवरी, 2024) को देर रात तक कई राजनीतिक दलों की बैठकें चलीं। PML-N के के नवाज़ शरीफ ने कहा है कि उन्होंने अपने भाई शाहबाज़ को गठबंधन के लिए बातचीत की जिम्मेदारी दी है। दोनों भाई पाकिस्तान के प्रधानमंत्री रह चुके हैं।

भुट्टो-जरदारी परिवार के PPP और सिंध में दखल रखने वाली MQM-P के साथ शरीफ भाइयों की बातचीत चल रही है। बिलावल भुट्टो और आसिफ अली ज़रदारी लाहौर पहुँचे हुए हैं। दोनों की शाहबाज़ शरीफ के भाई के साथ बैठक हुई। शाहबाज़ शरीफ ने MQM-P के संयोजक डॉ खालिद महमूद सिद्दीकी से भी बात की। उनकी पार्टी फ़िलहाल अज़ीज़ाबाद के जिन्ना ग्राउंड में जीत का जश्न मनाने में मशगूल है। उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी के पास ब्रीफकेस नहीं है, लेकिन सभी निर्दलीय विजेताओं का स्वागत है।

अब तक की बातचीत से साफ़ है कि पाकिस्तान में शरीफ ब्रदर्स की PML-N और भुट्टो-जरदारी परिवार की PPP मिल कर सरकार बनाने की कोशिश करेगी। पाकिस्तान के पंजाब प्रान्त में भी इन दोनों दलों की ही सरकार होगी। पाकिस्तान में किसी को भी स्पष्ट बहुमत नहीं मिला है, ऐसे में सरकार का स्वरूप कैसा होगा इस पर काफी संशय है। PTI के कई उम्मीदवार निर्दलीय लड़ कर जीते हैं, ऐसे में उन्हें भी अलग-अलग पार्टियाँ अपने पाले में लुभाने में जुटी हुई हैं।

पाकिस्तान में 266 में से जिन 246 सीटों के नतीजे आए हैं, जिसमें से 91 पर PTI और उसके निर्दलीय कैंडिडेट्स जीते हैं। PML-N 71 सीटें जीत कर सबसे बड़ी पार्टी बनी है, वहीं PPP ने 51 सीटें अपने नाम की हैं। नॉर्थ वजीरिस्तान में गोलीबारी भी हुई है, जिसमें नेशनल एसेम्ब्ली का एक पूर्व सदस्य घायल हो गया। उधर इमरान खान को 12 मामलों को जमानत मिल गई है। हालाँकि, वो अभी जेल में ही रहेंगे। उनकी बहन ने कहा है कि फ़ौज उनकी हत्या कराना चाहती है।

चौधरी चरण सिंह की सरकार की तरह काम करती है मोदी सरकार: जयंत चौधरी, बोले-डील नहीं, विश्वास की वजह से आया बीजेपी के साथ

संसद के बजट सत्र का शनिवार (10 फरवरी 2024) को राम मंदिर और चौधरी चरण सिंह को भारत रत्न दिए जाने पर चर्चा की गई। इस दौरान संसद में संसद में राष्ट्रीय लोक दल के अध्यक्ष जयंत चौधरी ने भी अपनी बात रखी। इस दौरान राज्यसभा में जयंत चौधरी ने कहा कि मोदी सरकार में चौधरी साहब की झलक दिखती है। जब जयंत चौधरी बोल रहे थे, तो उस समय कॉन्ग्रेस नेताओं ने व्यवधान भी डाला, जिसपर जयंत ने जोरदार जवाब दिया।

राज्यसभा में जयंत सिंह जब बोल रहे थे, उस समय काफी हंगामा भी देखने को मिला। जब वो बोल रहे थे, तो कॉन्ग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने उनपर आरोप लगाए। यही नहीं, इस दौरान कॉन्ग्रेस के नेता प्रमोद तिवारी और जयराम रमेश भी बोल रहे थे, जिसपर सभापति जगदीप धनखड़ ने नाराजगी भी जताई। दरअसल, आज (10 फरवरी 2024) को बजट सत्र के आखिरी दिन जयंत चौधरी सत्तापक्ष की तरफ बैठे नजर आए, जिसके बाद उन्हें कॉन्ग्रेस ने घेरने की कोशिश की और उनपर ‘डील’ करने का आरोप लगाया।

डील के आरोपों पर बोलते हुए जयंत चौधरी ने कहा, “कॉन्ग्रेस ने जो किया उससे उनको हानि ही पहुँचेगी। कोई व्यक्ति अगर चौधरी साहब पर कुछ बोलना चाहता है उसे रोका जाएगा तो गाँव के लोग और किसान आहत ही होगा। कॉन्ग्रेस के पास बहुत मौका था लेकिन उन्होंने पहले चौधरी साहब को सम्मान क्यों नहीं दे दिया। जहाँ तक बात रही बीजेपी के साथ डील की, तो वह डील नहीं विश्वास की बात है।”

आरएलडी सांसद जयंत चौधरी ने कहा, “मैं 10 साल तक विपक्ष में रहा हूँ, कुछ समय के लिए इस सदन के इस तरफ बैठा हूँ, मौजूदा सरकार की कार्यशैली में भी चौधरी चरण सिंह के विचारों की झलक मिलती है। पीएम मोदी गाँव में शौचालयों के मुद्दों को संबोधित करते हैं, जब भारत सरकार महिला सशक्तिकरण को अपना मंच बनाती है और गाँवों में जागरूकता पैदा करती है, तो मुझे इसमें चौधरी चरण सिंह जी का उद्धरण याद आता है।”

आरएलडी सांसद जयंत चौधरी ने कहा, “मेरा मानना ​​है कि पीएम मोदी और भारत सरकार ने चौधरी चरण सिंह को भारत रत्न दिया है, इससे दो बड़े काम हुए हैं, एक तो यह कि हम चौधरी चरण सिंह की विरासत को फिर से स्थापित कर रहे हैं…मेरा मानना ​​है कि यह सिर्फ एक पुरस्कार नहीं, सबसे बड़ा सम्मान है। एक जमीनी सरकार, जो जमीन की आवाज को समझती है और उसे ऊपर उठाना चाहती है, ऐसी सरकार ही धरती पुत्र चौधरी चरण सिंह को भारत रत्न दे सकती है।”

उन्होंने आगे कहा, “मोदी सरकार में चौधरी साहब की झलक दिखती है। चौधरी साहब सिर्फ जाटों या किसानों के नेता नहीं थे। वह एक विचारक थे। चौधरी साहब को सम्मान मिलने के बाद झोपड़ी में पैदा होने वाला बच्चा भी सोचता है कि जब चौधरी चरण सिंह को सम्मान मिल सकता है तो उसे भी मिल सकता है। मैं इसके लिए मोदी सरकार को बधाई देता हूँ।”

बता दें कि भारत सरकार ने चौधरी चरण सिंह को भारत रत्न सम्मान देने की घोषणा की। इसके बाद आरएलडी एनडीए के साथ आ गई। इसी के तहत वो 10 साल में पहली बार सत्ता पक्ष की तरफ बैठे। इत्तेफाक से ये संसद के बजट सत्र का आखिरी दिन था।

हल्द्वानी में अवैध हथियारों से लैस थे दंगाई, सपा नेता का भाई जावेद गिरफ्तार

हल्द्वानी हिंसा के बाद वहाँ पुलिस प्रशासन लगातार स्थिति को सामान्य करने की कोशिशों में जुटा है। ज्यादातर जगहों पर हालात नियंत्रित करके कर्फ्यू हटा लिया गया है। लेकिन बनभूलपुरा में अब भी कर्फ्यू लगा है। इस बीच पुलिस ने हिंसा भड़काने के मामले में समाजवादी पार्टी के नेता मतीन सिद्दीकी के भाई जावेद सिद्दीकी को गिरफ्तार किया है।

जाँच के दौरान हिंसा के मास्टरमाइंड अब्दुल मलिक के नाम का भी खुलासा हुआ है। उसी के कब्जे में वो जमीन थी जहाँ से अवैध मस्जिद हटाई गई है। इसके अलावा जाँच में 1 और समाजवादी पार्टी नेता का नाम भी सामने आया है। इनमें एक का नाम अरशद अयूब है। बनभूलपुरा का पार्षद जीशान परवेज भी पुलिस की निगाह में है।

दंगाइयों को पकड़ने की कार्रवाई शुरू हो गई है। सीसीटीवी की मदद से दंगाइयों की पहचान की जा रही है। ड्रोन से इलाकों में निगरानी रखी जा रही। स्थिति संभालने के लिए भारी पुलिस बल तैनात है। इस बीच मीडिया में मृतकों के साथ हुई वीभत्सता को लेकर कई खुलासे हुए हैं।

पता चला है कि दंगाई भीड़ सड़कों पर अवैध असलहों के साथ उतरी थी, जिनसे उसने कई निर्दोषों को मौत के घाट उतार दिया। अब उन मृतकों के परिजनों की रोती-बिलखती तस्वीरें आ रही है। एक वीडियो में महिला रोते हुए बता रही हैं कि उनका बेटा अजय दवाई लेने गया था लेकिन उसे गोली मार दी गई।

इसके अलावा बनभूलपुरा में जिन 5 लोगों की मौत हुई, सबकी वजह गोली लगने के कारण ही बताई जा रही है। इनमें कुछ मुस्लिम भी हैं। इसके कारण एक गिरोह इस खबर को ऐसे फैला रहा है जैसे पुलिस की गोलियों से ये घटना हुई, जबकि हकीकत ये है कि दंगे के दौरान अधिकांश पुलिस के पास लाठी-डंडे थे। वहीं दूसरी ओर दंगा करने वालों के पास ईंट-पत्थर, पेट्रोल, अवैध असलहे आदि थे।

पुलिस अब इन दंगाइयों पर सख्त है। 5 लोगों की मौत, 3 लोगों के गंभीर रूप से घायल होने और कई पुलिकर्मियों के चोटिल होने के मामले में पुलिस ने 3 एफआईआर दर्ज करके पत्थरबाजों की तलाश की जा रही है। खबर ये भी है कि कई लोग पुलिस का सख्त रवैया देख गायब हो रहे हैं। ऐसा देख वन विभाग को आशंका है कि कहीं ये गायब होते लोग आरक्षित वन क्षेत्र या फिर अतिक्रमण वाले इलाकों में छिपने न पहुँच जाएँ।

इसे लेकर गौला रेंज यानी बनभूलपुरा के नजदीकी जंगलों में वन विभाग ने गश्त भी की। हालाँकि कोई संदिग्ध नहीं पकड़ा गया। लेकिन फिर भी वनकर्मियों की टीम ने आंवला चौकी, इंदिरानगर, लालकुआं, बागजाला, गौलापुल, बागजाला से लेकर दानीबंगर तक के जंगलों में गश्त की। रेंजर गौला चंदन अधिकारी ने बताया कि वन क्षेत्र की सुरक्षा और संदिग्धों की घुसपैठ रोकने के लिए हर संभव प्रयास किए जाएँगे।

दैनिक जागरण की रिपोर्ट के अनुसार, इस हिंसा के बाद वन विभाग भी अपनी एक बार फिर अतिक्रमण के खिलाफ अपनी रिपोर्ट बना रहे हैं। उन्होंने पूर्व में भी ऐसा प्रयास किया था लेकिन बीच में कार्रवाई रुक गई। मगर सूत्रों के हवाले से बताया जा रहा है कि इस हिंसा के बाद फिर से अतिक्रमण के विरुद्ध अभियान चलाने के लिए रिपोर्ट तैयार होने लगी है।

(प्रकाश कुमार की हत्या से जुड़े तथ्य सामने आने के बाद यह खबर संशोधित की गई है।)

लोकसभा चुनाव 2024 से पहले लागू होगा सीएए, गृहमंत्री अमित शाह बोले- ‘विकसित भारत’ के लक्ष्य पर काम कर रही मोदी सरकार

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने ऐलान किया है कि लोकसभा चुनाव 2024 से पहले ही नागरिकता संसोधन विधेयक (सीएए) को लागू किया जाएगा। अमित शाह ने ईटी नाउ ग्लोबल बिजनेस समिट कार्यक्रम में शुक्रवार (10 फरवरी 2024) को भारत के भविष्य के लिए भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के विजन को लेकर अपनी बात रखी। उन्होंने “विकसित भारत” एजेंडा पर ध्यान केंद्रित करते हुए हितधारकों की भागीदारी और सामाजिक प्रगति पर जोर दिया।

गृहमंत्री ने कहा कि बीजेपी का लक्ष्य 2047 तक भारत को एक विकसित राष्ट्र बनाना है। उन्होंने कहा कि यह लक्ष्य केवल आर्थिक विकास से ही नहीं, बल्कि सामाजिक न्याय, राष्ट्रीय सुरक्षा और सांस्कृतिक गौरव के माध्यम से भी प्राप्त किया जाएगा।

अमित शाह ने आगामी चुनावों के लिए भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के दूरदर्शी एजेंडे को रेखांकित करते हुए अपनी बात रखी। उन्होंने कहा, ”आजाद भारत में पहली बार यह पहला चुनाव होगा, जो मजबूत भविष्य को ध्यान में रखते हुए विकसित भारत@2047 के एजेंडे पर लड़ा जाएगा। मेरा मानना ​​है कि अपने तीसरे कार्यकाल में हम एजेंडे के तहत और भी बहुत कुछ करने में सक्षम होंगे।”

गृहमंत्री ने कहा कि मोदी सरकार ने पिछले कुछ वर्षों में कई महत्वपूर्ण नीतिगत पहल की हैं जो भारत को विकसित राष्ट्र बनाने की दिशा में ले जाएंगी। उन्होंने इन पहलों में प्रधानमंत्री आवास योजना, आयुष्मान भारत योजना, और उज्ज्वला योजना शामिल हैं। शाह ने कहा कि मोदी सरकार ने देश में बुनियादी ढांचे के विकास पर भी विशेष ध्यान दिया है। उन्होंने कहा कि सरकार ने सड़कों, रेलवे, हवाई अड्डों और जलमार्गों के विकास में भारी निवेश किया है।

लोकसभा चुनाव से पहले लागू होगा सीएए

गृहमंत्री अमित शाह ने यह भी घोषणा की कि नागरिकता (संशोधन) अधिनियम को अगले चुनाव से पहले लागू किया जाएगा। उन्होंने कहा कि सीएम भारत में रहने वाले सभी हिंदुओं, बौद्धों, सिखों, जैनियों, पारसियों और ईसाइयों को नागरिकता प्रदान करेगा जो पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान से आए हैं। उन्होंने कहा कि सीएए अल्पसंख्यक समुदायों के प्रताड़ित सदस्यों को नागरिकता प्रदान करने के लिए एक आवश्यक कानून है।

अमित शाह ने कहा, “सीएए किसी भी भारतीय नागरिक के अधिकारों का हनन नहीं करता है। यह केवल उन लोगों को नागरिकता प्रदान करता है जो धार्मिक उत्पीड़न के कारण अपने देशों से भागने को मजबूर हुए हैं। यह उन लोगों को नागरिकता देगी, जो वर्षों से भारत में वैध तरीके से रहते आए हैं।”

गृहमंत्री ने सीएए का विरोध करने के लिए विपक्षी दलों को भी निशाने पर लिया। उन्होंने कहा कि विपक्षी दल देश को गुमराह कर रहे हैं और सीएए के बारे में गलत जानकारी फैला रहे हैं। उन्होंने कहा, “विपक्षी दल सीएए का विरोध कर रहे हैं क्योंकि वे अल्पसंख्यक समुदायों के वोट बैंक को खुश करना चाहते हैं। वे देश के हितों की परवाह नहीं करते हैं।”

राजनीति में बीजेपी बढ़ना खुशहाली की बात

अमित शाह ने इस कार्यक्रम में आगे कहा, “बीजेपी की अपनी विचारधारा और एजेंडा सही जगह पर है। लोग जुड़ते हैं और लोग निकलते हैं, और यह स्वाभाविक है। मैं परिवार नियोजन में विश्वास करता हूँ, लेकिन राजनीति में यह हमेशा अधिक खुशहाली की बात होती है।” अमित शाह ने कहा कि बीजेपी का बढ़ना देशहित में है, तो हमें भी खुशहाली मिलती है।

मोदी सरकार का विकसित भारत एजेंडा

आर्थिक विकास: मोदी सरकार का लक्ष्य भारत को दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनाना है। इसके लिए सरकार बुनियादी ढांचे के विकास, विनिर्माण क्षेत्र को बढ़ावा देने और नौकरियों के सृजन पर ध्यान केंद्रित करेगी।
सामाजिक न्याय: मोदी सरकार सभी वर्गों के लोगों के लिए समान अवसर सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है। इसके लिए सरकार शिक्षा, स्वास्थ्य और सामाजिक सुरक्षा कार्यक्रमों में निवेश करेगी।
राष्ट्रीय सुरक्षा: मोदी सरकार भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा को मजबूत करने के लिए प्रतिबद्ध है। इसके लिए सरकार रक्षा बलों को आधुनिक बनाने और आतंकवाद से लड़ने पर ध्यान केंद्रित करेगी।
सांस्कृतिक गौरव: मोदी सरकार भारत की समृद्ध संस्कृति और विरासत को संरक्षित करने के लिए प्रतिबद्ध है। इसके लिए सरकार कला, संस्कृति और शिक्षा को बढ़ावा देने पर ध्यान केंद्रित करेगी।

ये जो नया जेनरेशन है… बेटे ने की PM मोदी की तारीफ, राजदीप सरदेसाई को नहीं हुआ ‘हजम’: तीसरी बार मोदी सरकार पर हो रही थी चर्चा

पत्रकार राजदीप सरदेसाई अक्सर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा के खिलाफ माहौल बनाने के लिए जाने जाते हैं। लेकिन, अब पता चला है कि खुद उनका बेटा ही मोदी फैन है। राजदीप सरदेसाई ने खुद ये बात एक चर्चा के दौरान बताई है। उन्होंने बताया कि उनका बेटा जयपुर गया था, वहाँ से लौटने के बाद उसने फोरलेन हाइवे की तारीफ की। बकौल राजदीप सरदेसाई, उनके बेटे ने कहा, “मोदी जी को देखिए, उन्होंने सड़कों को बदल कर रख दिया है।” राजदीप सरदेसाई ने ‘आज तक’ के सर्वे पर चर्चा के दौरान ये बातें कही, जिसमें भाजपा को 304 सीटें मिलने का अनुमान लगाया गया है।

राजदीप सरदेसाई के अनुसार, उन्होंने अपने बेटे को जवाब दिया कि मोदी जी तो हैं, लेकिन नितिन गडकरी केंद्रीय सड़क एवं परिवहन मंत्री हैं, उन्होंने भी किया है। इस पर राजदीप सरदेसाई के बेटे ने कहा कि उसे ये पता है, लेकिन मोदीजी हैं। सोशल मीडिया पर लोग इसे ‘राजदीप सरदेसाई का बेटा निकला मोदी भक्त’ लिख कर शेयर कर रहे हैं। राजदीप सरदेसाई की पत्नी सागरिका घोष भी भाजपा और पीएम मोदी के खिलाफ अक्सर ट्वीट करती रहती हैं। राजदीप सरदेसाई इस दौरान ‘नए जनरेशन’ को लेकर परेशान दिखे।

इस पर सौरभ द्विवेदी ने कहा कि राजदीप सरदेसाई के घर में ही मोदी समर्थक है। राजदीप सरदेसाई ने नितिन गडकरी पर चर्चा के दौरान ये बताया, जो ‘मूड ऑफ द नेशन सर्वे’ में पीएम मोदी के उत्तराधिकारी के रूप में 16% लोगों के समर्थन के साथ तीसरे नंबर पर हैं। पहले नंबर पर 29% समर्थन के साथ केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और 25% के साथ उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ हैं। वीडियो में 1:52 घंटे के बाद इसे देखा जा सकता है।

राजदीप सरदेसाई ने ‘द लल्लनटॉप’ के शो ‘नेता नगरी’ में हिस्सा लेते हुए ये बात कही। इसमें पत्रकार सौरभ द्विवेदी भी मौजूद थे। राजदीप सरदेसाई ने जुलाई 2020 में एक पुराने वाकये का जिक्र करते हुए बताया था कि कैसे उन्होंने नरेंद्र मोदी का प्रोग्राम रद्द कर दिया था। उन्होंने कहा था, “इंडो यूएस समिट में पीएम मोदी अंग्रेजी में बात कर रहे हैं। यह इस बात का सबूत है कि वह कई सालों पहले मुझसे किए गए एक वादे पर खरे उतरे हैं! मैंने एक बार प्रोग्राम में आखिरी समय में उनकी जगह प्रमोद महाजन को लिया था क्योंकि महाजन बेहतर अंग्रेजी बोलते थे।”

बकौल राजदीप सरदेसाई, फिर नरेंद्र मोदी ने उनसे कहा था – “एक दिन मैं अंग्रेजी में भाषण दूँगा।” दिल्ली में AAP की जीत पर राजदीप सरदेसाई ने स्टूडियो में डांस किया था। राजदीप सरदेसाई ने स्वीकार किया था कि वह व्यक्तिगत रूप से मानते थे कि गोधरा नरसंहार के बाद हुए 2002 के दंगों के लिए मोदी जिम्मेदार नहीं थे। इसके बावजूद वो गुजरात दंगों को लेकर प्रोपेगंडा चलाते रहे हैं। किसान आंदोलन के दौरान भी राजदीप सरदेसाई ने पीएम मोदी की आलोचना की थी।

22 साल बाद साधु के भेष में बेटा अरुण नहीं ठग नफीस आया, इमोशनल वीडियो वायरल होने के बाद लोकल मीडिया ने किया खुलासा

उत्तर प्रदेश के अमेठी में फ्रॉडगिरी का एक ऐसा मामला सामने आया है जिसे सुन आप भी हैरान रह जाएँगे। कुछ दिन पहले खबर आई थी कि वहाँ जायस के खरौली गाँव में एक परिवार को साधु भेष में उनका खोया बेटा अरुण वापस मिला है। लेकिन अब खबर आई है कि वो कोई अरुण नहीं, बल्कि नफीस है जो परिवार से लाखों रुपए लूटने आया था।

ये खुलासा दैनिक जागरण ने और लोकल मीडिया यूट्यूब चैनल ‘जैसी पत्रकारिता’ ने अपनी पड़ताल में किया है। जागरण ने बताया कि खरौली गाँव में अरुण का परिवार अपने बेटे की शक्ल वाले साधु भेष में घूम रहे शख्स को देख फफक पड़े थे। उन्होंने उसे अपना बेटा अरुण मान लिया था।

परिवारवाले कोशिश कर रहे थे कि बेटा किसी तरह साधु का भेष छोड़ गृहस्थ जीवन जीने लगे। पहले तो इसके लिए उस शख्स ने मना किया, लेकिन बाद में फोन कर कहने लगा कि अगर उसे वापस पाना है तो उसके मठ को 10 लाख रुपए देने होंगे।

परिवार को बेटा वापस चाहिए था तो वो अपनी 14 बिस्वा जमीन बेचकर बेटा वापस पाने की तैयारी में जुट गए। पूरा सौदा 3 लाख 60 हजार में जाकर तय हुआ। लेकिन इसी बीच पता चला कि जिस लड़के के लिए परिवार अपना सबकुछ बेचने के तैयार हो गया है वो उनका बेटा नहीं बल्कि ठग नफीस है जो असल में गोंडा के टिकरिया गाँव का है।

रिपोर्ट में बताया गया है कि नफीस जिस गाँव का रहने वाला है वहाँ के कुछ लोग ठगी के आरोप में जेल तक जा चुके हैं। नफीस का खुद का भाई राशिद 29 जुलाई 2021 को जोगी बनकर मिर्जापुर के सहसपुरा परसोधा गाँव पहुँचा था। वहाँ भी बुधिराम विश्वकर्मा का बेटा रवि 14 साल पहले गायब हुआ था। उस परिवार ने भी राशिद को अपना बेटा रवि समझ घर में जगह दे दी थी। बाद में वही राशिद लाखों लेकर फरार हो गया था।

इस बार यही ठगी का तरीका नफीस ने अपनाया। वो अमेठी के खरौली गाँव साधु के भेष में पहुँचा और उस परिवार को निशाना बनाया जिन्होंने अपना बच्चा खोया था। उसने उनकी भावनाओं का इस्तेमाल कर उन्हें बेवकूफ बनाया। 27 जनवरी को खरौली पहुँच उसने कहा कि उसने झारखंड के पारसनाथ मठ में शिक्षा ली है और उसके गुरु ने कहा कि वह अयोध्या दर्शन के बाद अपने गाँव जाकर परिजनों से भिक्षा माँगे तभी उसकी दीक्षा पूरी होगी।

परिवार ने इतना सुन उसे 1 फरवरी को 13 क्विंटल अनाज दिया और संपर्क में रहने के लिए एक मोबाइल भी दिया। बाद में वो सामान पिक अप में लादकर अयोध्या ले जाया गया। जब 9 फरवरी को रतीपाल उनके बताए अयोध्या के अड्रेस पर पहुँचे तो वहाँ कुछ नहीं मिला।

रिपोर्ट बताती है कि जिस मठ का नाम लेकर नफीस ये ठगी को अंजाम दे रहा था वैसा कोई मठ झारखंड में है ही नहीं। इस घटना के बाद पुलिस ने लोगों को ऐसे ठगों से सतर्क रहने की हिदायत दी है। पुलिस ने आश्वासन दिया है कि परिवार के साथ किसी प्रकार की धोखाघड़ी नहीं होने दी जाएगी। मामले पर पुलिस लगातार नजर बनाए हुए है।

वहीं जैसी पत्रकारिता के चैनल पर एक ऑडियो भी डाली गई है जिसमें एक शख्स दावा कर रहा है कि जो युवक परिवार से मिला वो अरुण नहीं बल्कि टिकरिया गाँव का नफीस है। इस ऑडियो को वीडियो में ढाई मिनट के बाद सुना गया था। वीडियो को यूट्यूब पर देखा जा सकता है। एक वीडियो में ऑडियो रिकॉर्डिंग के माध्यम से खुलासा है और एक में ग्राउंड रिपोर्ट के जरिए।

JNU में जिस दिन आतंकी अफजल गुरु के नारे, उसी दिन भारत के समर्थन में नारे लगाने वाले छात्रों पर धारदार हथियार और ढपली से हमला: ABVP के दिव्यांग कार्यकर्ता सहित कई घायल

जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) में शुक्रवार (9 फरवरी 2024) को देर रात 2 छात्र संगठन (अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद और लेफ्ट ग्रु) के सदस्यों के बीच मारपीट हो गई। इस झगड़े में कुछ छात्रों के घायल होने की खबर है। घायलों का इलाज दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में हुआ।

बताया जा रहा है कि एबीवीपी और वामपंथी गुटों के बीच यह झड़प चुनाव से पहले होने वाली जनरल बॉडी मीटिंग के वक्त हुई जो कि साबरबती ढाबे के पास थी। एबीवीपी छात्रों का कहना है कि लेफ्ट संगठनों ने उनके कार्यकर्ताओं के साथ मारपीट की, तो लेफ्ट के छात्रों का कहना है कि एबीवीपी के छात्रों ने चुनाव प्रक्रिया को बाधित करने का प्रयास किया।

जेएनयू के एबीवीपी समूह ने कुछ तस्वीरें और वीडियो अपने सोशल मीडिया हैंडल पर शेयर की है। इसमें दावा है कि एक बीए-प्रथम वर्ष के छात्र को लेफ्ट-एनएसयूआई गुंडो ने पेट पर घूँसा मारा। एबीवीपी का कहना है कि जेएनयू के मासूम छात्रों पर वामपंथी गुटों ने धारदार हथियार और अपनी स्टील की बनी ढपलियों से हमला किया। इसमें कई छात्र (दिव्यांग और लड़कियाँ) समेत कई घायल हुए।

एबीवीपी का ट्वीट, जिसमें धारदार हथियार और स्टील की ढपलियों से मारने की बात है

वीडियो में देख सकते हैं कि एक छात्र कहता सुनाई पड़ रहा है कि 9 फरवरी 2016 के दिन साबरमती ढाबे पर आतंकी अफजल गुरू के लिए नारे लगाए गए थे और आज 9 फरवरी के दिन भारत के समर्थन में नारे लगाने के लिए राष्ट्रवादी छात्रों पर ढपली से हमला किया गया है।

वहीं, जेएनयू के AISA संगठन ने आरोप लगाया कि एबीवीपी ने यूजीबीएम (जनरल बॉडी मीटिंग) को बाधित किया। उन्होंने जेएनयूएसयू के अध्यक्ष और अन्य लोगों के साथ हाथापाई की और उन्होंने साउंड सिस्टम तोड़ दिया।

आइसा ने अपने ट्वीट में कहा कि जेएनएसयू के द्वारा UGBM आयोजित करवाई गई थी। यहाँ पर एक संगठन है ABVP- इसी संगठन द्वारा जेएनयू में बवाल किया जा रहा है। वीडियो में आइसा कार्यकर्ता नीतिश कहते हैं कि जेएनयूसू के संविधान में लिखा गया है कि अगर चुनाव नहीं होता है तो उस स्टूडेंट यूनियन को तब तक के लिए आगे बढ़ाया जाता है जब तक अगले चुनाव नहीं होते। तो इस यूनियन को 6 महीने या अगले वर्ष तक के लिए एक्सटेंड किया गया था। UGBM इसीलिए बुलाई गई थी कि नया चुनाव करवाया जा सके लेकिन एक संगठन हंगामा करके पूरे लोकतांत्रिक मूल्य को खत्म कर रहा है और डिबेट कल्चर जिसके लिए जेएनयू जाना जाता है उसे दबा दिया जा रहा है।