Home Blog Page 1186

प्रणव मुखर्जी को कॉन्ग्रेस समर्थक ने कहा ‘रंगीन चू#^%’… बेटी शर्मिष्ठा ने राहुल गाँधी को लिखा खुला खत, कहा- मैं उनसे न्याय माँग रही हूँ

पूर्व राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी की बेटी शर्मिष्ठा मुखर्जी ने कॉन्ग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गाँधी को खुला पत्र लिखा है। इस पत्र में उन्होंने बताया कि कैसे उन्हें और उनके पिता को उस कॉन्ग्रेस समर्थक द्वारा गाली दी जा रही है जिसे कई कॉन्ग्रेसी नेता भी फॉलो करते हैं।

अपने पत्र में उन्होंने राहुल गाँधी को बताया है कि उनकी किताब पब्लिश होने के बाद से उनके साथ ये ट्रोलिंग हो रही है। उनको निरंतर दुर्व्यवहार और यौन अपमान का सामना करना पड़ रहा है। कॉन्ग्रेस समर्थक उनकी किताब की निंदा कर रहे हैं। पूर्व राष्ट्रपति को ‘चू&^%#’ जैसे शब्द कहे जा रहे हैं।”

उन्होंने इस शिकायतपत्र को सोशल मीडिया पर भी डाला है। अपने एक ट्वीट में उन्होंने कहा कि नवीन शाही नाम पर कॉन्ग्रेस समर्थक उनके लिए ऐसा कह रहा है। अपनी खबर में उन्होंने ट्वीट भी जोड़े। इन ट्विट्स में देख सकते हैं नवीन शाही प्रणव मुखर्जी के लिए लिखता है- चु&^% को चु&^% बोलना कहाँ मना है? रंगीन था वो, कु&^% भी मंजूर थी उसे।

एक अगले ट्वीट में नवीन शाही लिखता है, “जिंदगी भर कॉन्ग्रेस के सहारे ऐश करने और छुप-छुप के रंगीनियाँ करने वाले की बेटी जब कॉन्ग्रेस पर बोलेगी तो सच बोलना ही पड़ेगा।”

इन ट्वीट्स के स्क्रीनशॉट शेयर करते हुए शर्मिष्ठा मुखर्जी ने लिखा, “राहुल गाँधी न्याय की बात कर रहे हैं। मैं उनसे न्याय माँगती हूँ। अगर ये शख्स कोई साधारण भी कॉन्ग्रेस समर्थक भी है तो इसके विरुद्ध पुलिस शिकायत होनी चाहिए आखिर वो मेरा और मेरे पिता का अपमान उन्हीं के नाम (राहुल गाँधी) पर कर रहा है।”

बता दें कि शर्मिष्ठा द्वारा ये ट्वीट किए जाने के बाद नवीन शाही, जिसके खिलाफ उन्होंने शिकायत करने की अपील की है, उसने ट्वीट के नीचे माफी माँगी है।

अपने ट्वीट में उस शख्स ने लिखा, “मैं उस ट्वीट के लिए माफी माँगता हूँ जिससे आपको दुख पहुँचा है…मैं प्रार्थना करता हूँ कि भावनाओं में बहकर मैंने जो कुछ भी लिखा, उसे क्षमा करें। कॉन्ग्रेस मेरी माँ की तरह है।”

शर्मिष्ठा मुखर्जी ने जो पत्र राहुल गाँधी को लिखा है उसमें उन्होंने राहुल को लिखा कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के प्रबल समर्थक होने के नाते, राहुल गाँधी को उन लोगों के खिलाफ कार्रवाई करनी चाहिए जो उन्हें और उनके पिता को गाली दे रहे हैं। पूर्व राष्ट्रपति की बेटी ने खुले पत्र में कहा, “आप अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के अग्रदूत प्रतीत होते हैं, आपको पता होना चाहिए कि FoE में सिर्फ किसी की प्रशंसा करना शामिल नहीं है, बल्कि आलोचना को शालीनता से सहन करने की क्षमता भी शामिल है। लेकिन ऐसा लगता है कि आप हमारे संविधान द्वारा प्रदत्त सबसे महत्वपूर्ण अधिकारों में से एक, जो कॉन्ग्रेस के मूल मूल्यों में से एक है, के बारे में अपने फॉलोवर्स को समझा नहीं पाएँ हैं। आपका पसंदीदा नारा ‘नफ़रत के बाज़ार में मोहब्बत की दुकान’ भी आपके अपने समर्थकों के कानों पर नहीं पड़ता है क्योंकि वे आपकी आलोचना करने करने की हिम्मत करने वाले किसी भी व्यक्ति पर अपनी सारी ‘नफ़रत’ लगा देते हैं।”

वहीं मीडिया से बात करते हुए उन्होंने कहा, “जब से मेरे पिता पर किताब आई है… कुछ कॉन्ग्रेस नेता इसके खिलाफ बोलने लगे। वह मुझे बुरी तरह ट्रोल कर रहे हैं। कुछ दिन पहले, जयपुर लिटफेस्ट के मौके पर, मैंने एक साक्षात्कार में एक बयान दिया था, जहाँ मुझसे कॉन्ग्रेस के बारे में मेरे विचार पूछे गए थे। मैंने कहा था- मैं कॉन्ग्रेसी हूँ। राष्ट्रीय राजनीति में कॉन्ग्रेस का अभी भी बहुत महत्व है। लेकिन कॉन्ग्रेस को गांधी-नेहरू परिवार के नेतृत्व से परे देखना चाहिए…तब से सब कुछ अस्त-व्यस्त हो गया। मुझ पर हर तरह की गालियाँ बरसाई गईं, मेरे पिता को घसीटा गया। मैंने इस संबंध में राहुल गाँधी से शिकायत की लेकिन उन्होंने कोई प्रतिक्रिया तक नहीं दी इसलिए मैंने खुला पत्र लिखा।”

प्राइवेट पार्ट को चीर कर निकली गोली, फट गया पेशाब का थैला, आँत भी डैमेज… जिस दलित अजय को हल्द्वानी में मारी गोली उसका बच्चा 1 साल का

उत्तराखंड के हल्द्वानी में हिंसा भड़की हुई है। सरकारी जमीन पर बने एक अवैध मस्जिद-मदरसे को ध्वस्त करने के लिए प्रशासन बुलडोजर लेकर आया, जिसके बाद मुस्लिम भीड़ ने थाना और पेट्रोल पंप को फूँक दिया। पुलिस वालों को ज़िंदा जलाने की कोशिश की गई। कई महिला पुलिसकर्मी भी जख्मी हुई हैं। इसी क्रम में दंगाइयों ने कबाड़ का कारोबार करने वाले अजय नाम के शख्स को भी गोली मार दी। अस्पताल में उसका इलाज चल रहा है।

अजय की माँ बिलखती हुई पूछ रही है कि उनके बेटे का क्या दोष था? रिश्ते में अजय के चाचा लगने वाले संतोष कुमार ने बताया कि अजय गफूरबस्ती में रहते थे। उन्होंने बताया कि गफूरबस्ती से लेकर इंदिरानगर तक का इलाका मुस्लिम बहुल है। बकौल संतोष, अजय अपनी माँ के लिए आयुर्वेदिक दवा लेने के लिए जा रहा था। उसकी माँ की तबीयत ख़राब रहती है। उसके साथ उसका एक दोस्त भी था। वहाँ दोनों जिम करने लगे। वहाँ से बाहर निकले तब तक बाहर माहौल ख़राब हो चुका था।

उन्होंने बताया कि गोली अजय के प्राइवेट पार्ट में लगी है और पीछे से चीर कर पार हो गई है। उन्होंने ये भी बताया कि तब पुलिस ने गोली नहीं चलाई थी, दंगाइयों की गोली ही उसे लगी है। उन्होंने बताया कि अजय अभी होश में नहीं हैं। जिस वैद्य के पास वो दवा लेने गए थे वो मुस्लिम है और जिस जिम में उन्होंने व्यायाम किया वो भी मुस्लिम है। संतोष कुमार ने बताया कि गुरुवार (8 फरवरी, 2024) को देर रात तक सर्जरी चली। रीढ़ की हड्डी भी टूट गई है।

संतोष कुमार भाजपा के नेता भी हैं। उन्होंने बताया कि वो दलित समुदाय से आते हैं। उन्होंने जानकारी दी कि सरकारी खर्च से अजय का इलाज चल रहा है। अजय नगर निगम की गाड़ी में कूड़े का कारोबार करते थे। 22-23 वर्ष उनकी उम्र थी। उनकी शादी को 2 साल हुए हैं, उनका एक बच्चा भी है। संतोष ने बताया कि इलाके में छोटी-छोटी झोपड़ियाँ हैं, फ़िलहाल पुलिस ने मामले को नियंत्रित कर दिया है। उन्होंने बताया कि अब तक FIR दर्ज नहीं हुई है, थाना जला दिया गया है।

संतोष कुमार का कहना है कि गफूरबस्ती में हिन्दुओं की 200 झोपड़ियाँ हैं। उन्होंने जानकारी दी कि वाल्मीकि समाज का एक सोनकर नामक शख्स भी घायल हुआ था, इलाज के पास उसे घर भेज दिया गया है। इलाके के एक अन्य हिन्दू ने बताया कि फ़िलहाल वो लोग सुरक्षित हैं। अजय की माँ का वीडियो भी सामने आया है, जिसमें वो कह रही हैं, “मेरे बेटे को दंगाइयों ने गोली मार दी। मेरे बेटे की कोई गलती नहीं थी। वो जिंदगी और मौत की लड़ाई लड़ रहा है।”

अजय का इलाज साईं अस्पताल में चल रहा है। डॉ सिद्धार्थ पांडेय अजय का इलाज कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि अजय के शरीर में गोली लग कर डैमेज कर के बाहर निकल गई। उनके शरीर में पेशाब का थैला फट गया था और किडनी से जो पाइप आता है वो भी फट गया था। खोल कर उसे रिपेयर किया गया है। उन्होंने बताया कि अंदर ब्लीडिंग भी बहुत ज़्यादा थी, जिसे रोकी गई है। आँतों के पास सूजन था, वहाँ इकट्ठे खून को भी निकाला गया। अजय की मी तारा ने बताया कि रात के अँधेरे में हंगामा हुआ कि किसी का बच्चा पड़ा हुआ है, वो दौड़ती गईं तो अपने बेटे को उठा कर ले आईं।

काशी विश्वनाथ मंदिर के मुख्य पुजारी को मिलेंगे ₹90 हजार प्रतिमाह, अन्य को 65 से 80 हजार: 50 पुजारी की नियुक्ति के लिए निकलेगा विज्ञापन

वाराणसी के श्री काशी विश्वनाथ मंदिर के मुख्य पुजारी को 90 हजार रुपए हर महीने मिलेंगे। अन्य पुजारियों को 65 से 80 हजार रुपए प्रतिमाह मिलेंगे। 50 पुजारियों की नियुक्ति के लिए विज्ञापन निकाला जाएगा। ये फैसले श्री काशी विश्वनाथ मंदिर न्यास की बैठक में लिए गए हैं।

न्यास की 105वीं बैठक में निर्णय पुजारियों को अच्छे तरीके से जीवनयापन करने के लिए सम्मानजनक मानदेय देने का निर्णय किया गया। इसके अलावा मंदिर में 50 पुजारियों की नियुक्ति करने का निर्णय लिया गया है। इसके लिए न्यास की ओर से भर्ती विज्ञापन निकला जाएगा।

मंदिर में तीन स्तर के पुजारियों की नियुक्ति की जाएगी। मुख्य पुजारी को ₹90 हजार प्रतिमाह, कनिष्ठ पुजारी को ₹80,000 प्रतिमाह और सहायक पुजारियों को ₹65,000 प्रतिमाह दिए जाएँगे। उन्हें इसके अलावा भी कुछ भत्ते उपलब्ध करवाए जाएँगे। मंदिर में पुजारियों की भर्ती और उनके वेतन भत्ते को लेकर यह निर्णय एक नियमावली के जरिए लागू किए जाएँगे। यह नियमावली मंदिर न्यास के गठन के 40 वर्षों के बाद लाई गई है। काशी विश्वनाथ मंदिर को प्रशासन ने अक्टूबर 1983 में न्यास के अंतर्गत लिया था।

मंदिर न्यास की बैठक में अन्य कई महत्वपूर्ण निर्णय भी लिए गए हैं। न्यास ने निर्णय लिया है कि प्रतिदिन शहर के बस अड्डों, रैन बसेरों और स्टेशन पर रहने वाले लोगों को भोजन उपलब्ध करवाया जाएगा। इन लोगों के बीच प्रतिदिन काशी विश्वनाथ का प्रसाद बाँटा जाएगा। इसे मंदिर के अन्न क्षेत्र में ही तैयार किया जाएगा और फिर गाड़ियों से वितरित किया जाएगा।

मंदिर न्यास के अंतर्गत चलने वाले संस्कृत स्कूल में पढ़ने वाले कक्षा 6-12 के छात्रों को नि:शुल्क पुस्तकें और ड्रेस देने का निर्णय भी लिया गया है। इसको लेकर एक-दो माह के भीतर व्यवस्था कर ली जाएगी। इसके अलावा संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय को भी ₹1 करोड़ का बजट दिया जाएगा, इससे उसके भवन की मरम्मत हो सकेगी।

गौरतलब है बीते वर्षों में काशी में आने वाले श्रृद्धालुओं की संख्या में काफी वृद्धि हुई है। ऐसे में उनके लिए सुविधाओं को भी विकसित करने का फैसला हुआ है। मंदिर न्यास ने कहा है कि वह इसके लिए जमीन खरीद कर पार्किंग जैसी सुविधाएँ बनाने और आसपास की सड़कें भी चौड़ी करने पर विचार करेगा।

इतिहास लिखना है तो किसी को इतिहास बनाना पड़ेगा… ‘राम’ ने निभाया PM मोदी का किरदार, ‘Article 370’ में अरुण गोविल को देख खुश हुए लोग

‘आर्टिकल 370’ पर फिल्म आने वाली है। इस फिल्म में दिखाया जाएगा कि जम्मू-कश्मीर के हालात सुधारने के लिए क्या-क्या कदम उठाए गए। इस फिल्म में जहाँ एक्ट्रेस के तौर पर यामी गौतम दिख रही हैं। वहीं सबसे अहम रोल में यहाँ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का भी किरदार होगा, जिसे निभाया है अरुण गोविल ने।

अरुण गोविल ने ट्वीट करते हुए जानकारी दी कि इस फिल्म में नरेंद्र मोदी का किरदार वो अदा करेंगे। उन्होंने पहले डॉयलॉग लिखा, “पूरा का पूरा कश्मीर, भारत देश का हिस्सा था, है और रहेगा। इसके बाद उन्होंने लिखा, “आर्टिकल 370 फिल्म जिसमें मैंने आदरणीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की भूमिका निभाई है। फिल्म 23 फरवरी को रिलीज हो रही है जरूर देखिएगा। जय श्रीराम।”

बता दें कि आर्टिकल 370 का ट्रेलर रिलीज हो गया है। इस ट्रेलर में अरुण गोविल पीएम मोदी के किरदार में कुछ डॉयलॉग बोलते हैं। इसमें वो पुलवामा के बलिदानियों को नमन करने के दौरान कहते हैं- “इस कश्मीर ने बहुत पीड़ा झेली है। हम इसे इस हाल में नहीं छोड़ेंगे।” अगले डॉयलॉग में वो कहते हैं- “हम आर्टिकल 370 को खत्म करेंगे।” तीसरा डॉयलॉग है- “अगर हमें इतिहास लिखना है तो किसी न किसी को तो इतिहास बनाना पड़ेगा।”

इस ट्वीट पर लोगों ने प्रतिक्रिया दी है। लोग उनका यह अवतार देख खुश हैं। सबका कहना है कि रामानंद सागर की रामायण में भगवान राम के किरदार में अरुण गोविल को देखने के बाद लगा था कि अब वो किसी और कैरेक्टर में अच्छे नहीं लगेंगे लेकिन धीरे-धीरे यह सोच बदल गई। लोगों का कहना है कि अब तक सबसे सटीक अगर कोई नरेंद्र मोदी के कैरेक्टर में फिट बैठता दिख रहा है तो वो अरुण गोविल हैं।

गौरतलब है कि गुरुवार को आर्टिकल 370 फिल्म का ट्रेलर रिलीज हुआ था। 23 फरवरी को फिल्म भी आएगी। फिल्म में यामी गौतम ने एक NIA अधिकारी का किरदार निभाया है। ये फिल्म जम्मू कश्मीर में आतंकवाद के बढ़ने और फिर मोदी सरकार द्वारा अनुच्छेद-370 को निरस्त किए जाने के ऐतिहासिक फैसले पर केंद्रित है। यामी गौतम के पति आदित्य धर ने मोहन ठाकर के साथ मिल कर ‘आर्टिकल 370’ की कहानी लिखी है। फिल्म के ट्रेलर को अच्छी प्रतिक्रिया मिल रही है। 

‘अब बुलडोजर बर्दाश्त नहीं करेंगे, जान से मार देंगे’: हल्द्वानी दंगों पर मौलाना तौकीर रज़ा ने धमकाया, बरेली की सड़कों पर उतरी इस्लामी भीड़, अलर्ट पर पुलिस-प्रशासन

एक तरफ उत्तराखंड के हल्द्वानी में इस्लामी कट्टरपंथी भीड़ हिंसा कर रही है, वहीं दूसरी तरफ उत्तर प्रदेश के बरेली से धमकी दी जा रही है। मौलाना तौकीर रज़ा ने कहा है कि जो हम पर हमला करेगा, उसे मार देंगे। मौलाना तौकीर रज़ा का कहना है कि बुलडोजर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। इतना ही नहीं, उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के लिए आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल भी कर दिया। मौलाना तौकीर रज़ा पहले भी अपने भड़काऊ बयानों के कारण जाने जाते रहे हैं।

मौलाना तौकीर रज़ा ने कहा, “अब किसी बुलडोजर को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। अगर कोर्ट संज्ञान नहीं ले रहा है तो हम अपनी हिफाजत खुद करेंगे। हमें कानूनी अधिकार है अगर हमारे ऊपर हमला होता है तो हम उसको जान से मार दें। ये हमारा कानूनी अधिकार है।” मौलाना के इस भड़काऊ बयान के बाद बरेली में अलर्ट जारी कर दिया गया है। यूपी के प्रमुख मस्जिदों में नमाज के समय चौकसी रखने के लिए पुलिस को कहा गया है। यूपी पुलिस मुख्यालय से अलर्ट आया है। यूपी में जगह-जगह फ्लैग मार्च किया जा रहा है।

साथ ही तौकीर रज़ा खान ने सामूहिक गिरफ़्तारी और ‘जेल भरो आंदोलन’ का भी आह्वान किया है। इसके कारण हजारों लोग सड़क पर उतर आए हैं। पूरे इलाके को छावनी में तब्दील कर दिया गया है। ड्रोन से निगरानी की जा रही है। तौकीर रज़ा के समर्थकों को रोकने का प्रयास किया जा रहा है। समर्थक बैरिकेड्स गिरा कर आगे बढ़ गए। तौकीर रज़ा ने धमकाते हुए कहा है कि क्या तुम हमारे घर पर बुलडोजर चलाओगे तो हम चुप बैठेंगे?

तौकीर रज़ा का पूछना है कि अगर कोई अपराधी है तो उसके मकान, मदरसा या मस्जिद पर बुलडोजर क्यों चलाया जा रहा है? उन्होंने देश भर में नफरत का माहौल बनाए जाने का आरोप लगाते हुए कहा कि बरेली से शुरू हुए अभियान को पूरे भारत में चलाया जाएगा। सुरक्षा को लेकर 1000 से अधिक सुरक्षाकर्मी लगाए गए हैं। PAC और RAF को भी तैनात किया गया है। यूपी भाजपा के नेता मोहसिन ने इसे माहौल बिगाड़ने की साजिश करार दिया है।

हल्द्वानी में कूड़ा बीनता है अजय, दंगाइयों ने मार दी गोली: बिलखती माँ पूछ रही, क्या गलती थी उसकी?

हल्द्वानी में दंगाइयों के निशाने पर हर वो इंसान था, जो मुस्लिम नहीं था। इसी क्रम में दंगाइयों ने मासूम अजय को भी गोली मार दी, जो कूड़ा बीनता था और उससे मिले पैसों से अपने घर को चलाने में माँ की मदद करता था। उसकी माँ रोते हुए सभी से सवाल पूछ रही है कि उसके बेटे को क्यों मारा? उसकी गलती क्या थी?

निष्पक्ष प्रतिदिन नाम के एक्स हैंडल पर अजय की माँ का वीडियो पोस्ट किया गया। इस वीडियो में वो पूछ रही हैं कि आखिर उनके बेटे की गलती क्या है? जो उसे गोली मार दी? इस वीडियो को शेयर करते हुए कैप्शन में लिखा है, “मेरे बेटे को दंगाइयों ने गोली मार दी। मेरे बेटे की कोई गलती नहीं थी। वो जिंदगी और मौत की लड़ाई लड़ रहा है।” हल्द्वानी हिंसा में घायल अजय की माँ।”

जतिंदर पाल खन्ना नाम के एक्स हैंडल पर बताया गया है कि अजय दवा लेने जा रहा था, जब उसे गोली मारी गई। अजय की तस्वीर पोस्ट करते हुए लिखा, “आखिर अजय की क्या गलती थी कि दंगाइयों ने इसपर गोली चला दी? मेडिकल से दवाई लेकर आते वक्त दंगाइयों ने मारी गोली। गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती।”

हल्द्वानी में इस्लामी कट्टरपंथियों का कहर

बता दें कि हल्द्वानी के बनभूलपुरा थाना इलाके के ‘मालिक का बगीचा’ में गुरुवार (08 फरवरी 2024) को अतिक्रमण विरोधी अभियान चला रही नगर निगम और पुलिसकर्मियों पर पथराव हुआ। इसके बाद टीम पर पेट्रोल बम से हमला किया गया, तो इस्लामिक कट्टरपंथियों की भीड़ ने थाने को घेरकर गाड़ियों को आग लगा दी और थाने को भी छतिग्रस्त कर दिया। इस दौरान हिंसा में 6 लोगों की मौत भी हो गई है, वहीं, तीन सौ से अधिक लोग घायल हो गए हैं। घायलों में प्रशासनिक अधिकारियों के अलावा 200 से अधिक पुलिसकर्मी भी शामिल हैं।

उत्तराखंड में नाई की दुकान में काम करता था इरफान, दोस्त के साथ मिल 2 हिंदू नाबालिग को ले भागा: बरेली से गिरफ्तार, लड़कियाँ बरामद

उत्तराखंड में लव जिहाद के मामले लगातार बढ़ते जा रहे हैं। मामला पिथौरागढ़ के धारचूला का है। यहाँ दो हिंदू नाबालिग बहनों को दो मुस्लिम शादी के नाम पर बहला-फुसलाकर अपने साथ लेकर भाग गए। इसको लेकर इलाके में तनाव फैल गया है। हालाँकि, मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने दोनों नाबालिग बहनों को उत्तर प्रदेश के बरेली से बरामद कर लिया है।

पिथौरागढ़ के पुलिस अधीक्षक लोकेश्वर सिंह ने गुरुवार (8 फरवरी 2024) को बताया कि दोनों लड़कियों को बरेली से बचाया गया और एक आरोपित को गिरफ्तार कर लिया गया है। आरोपित के खिलाफ IPC (आईपीसी) की धारा 363 और 376 तथा यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण अधिनियम (POCSO) के तहत भी मामला दर्ज किया गया है। दूसरे आरोपित की गिरफ्तारी के लिए पुलिस लगातार छापेमारी कर रही है।

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, इस घटना का मुख्य आरोपित मोहम्मद इरफान धारचूला शहर में एक नाई की दुकान में काम करता था। वह किसी तरह दोनों नाबालिग लड़कियों के संपर्क में आया और उन्हें अपनी जाल में फँसा लिया। इसके बाद उन लड़कियों को वह बहला-फुसलाकर उत्तर प्रदेश स्थित अपने गृह नगर बरेली लेकर चला गया।

पुलिस ने बताया कि पूछताछ के दौरान इरफान ने खुलासा किया कि उसका इरादा लड़कियों को कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु ले जाने का था। इस घटना के बाद स्थानीय लोगों और हिंदू संगठनों ने शहर में विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया। स्थानीय लोगों ने इस घटना को लव जिहाद का मामला बताया और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की माँग शुरू कर दी।

यह घटना 1 फरवरी 2024 की है। शहर में तनाव को देखते हुए पुलिस ने लड़कियों को बरामद कर लिया और 4 फरवरी को इरफान को भी गिरफ्तार कर लिया। एक अपराधी की गिरफ्तारी के बाद शहर में शांति और सामान्य स्थिति लौट आई है। इस घटना के बाद एसपी लोकेश्वर सिंह ने स्थानीय पुलिस को पिथौरागढ़ में रहने वाले सभी बाहरी लोगों का सत्यापन फिर से शुरू करने का फैसला किया है।

घटना के विरोध में धारचूला व्यापारी संघ का कहना है कि शहर में व्यापार करने वाले सभी बाहरी व्यापारियों का जब तक पुलिस सत्यापन नहीं हो जाता है, तब तक पंजीकरण नहीं होगा। धारचूला व्यापार संघ के अध्यक्ष भूपेंद्र सिंह थापा ने कहा, “हमने व्यापार संघ धारचूला में पंजीकृत सभी 630 व्यापारियों की सदस्यता रद्द कर दी है। व्यापारियों का नया पंजीकरण पुलिस द्वारा सत्यापन के बाद ही किया जाएगा।”

भूपेंद्र सिंह थापा ने कहा कि पुलिस सत्यापन की प्रक्रिया पूरी होने के बाद केवल उन्हीं व्यापारियों का पंजीकरण किया जाएगा, जो वर्ष 2000 से धारचूला में व्यापार कर रहे हैं। उन्होंने कहा, “यदि किसी परियोजना के लिए मजदूरों को शामिल करना आवश्यक हो जाता है तो संबंधित ठेकेदारों को अपनी जिम्मेदारी पर बाहर से मजदूरों को लेने की अस्थायी अनुमति दी जाएगी।”

बता दें कि उत्तराखंड लव जिहाद का नया टारगेट प्वॉइंट बना है। इसी शहर में साल 2019 में एक हिंदू युवती के साथ दुष्कर्म करके उसका वीडियो वायरल कर दिया गया था। उस दौरान स्थानीय लोगों ने इसके लिए एक मुस्लिम युवक को दोषी बताया था। हिंदू संगठनों ने इस मामले को लव जिहाद बताते हुए कड़ी कार्रवाई की माँग करते हुए प्रदर्शन भी किया था।

इसी तरह, अभी कुछ दिन पहले ही हल्द्वानी के मुखानी थाना क्षेत्र में नावेद मलिक नाम के एक युवक ने अमन बनकर एक हिंदू युवती को फँसाया। इसके बाद उसे अपने घर बुलाया और उसे नशीला पदार्थ पिलाकर दुष्कर्म किया। इसके बाद युवती पर वह धर्म परिवर्तन का दबाव डाल रहा था। इस घटना में पहले से ही शादीशुदा नावेद की बीवी भी शामिल रही।

हिंसा के पीछे PFI और बांग्लादेशी घुसपैठिए, ऐसी धाराएँ लगे जो जमानत भी न मिले: हल्द्वानी दंगों पर बोले MP बृजलाल, UP के रह चुके हैं DGP

हल्द्वानी हिंसा के पीछे प्रतिबंधित इस्लामी संगठन पाॅपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (PFI) और बांग्लादेशी घुसपैठियों का हाथ हो सकता है। यह आशंका बीजेपी के राज्यसभा सांसद बृजलाल ने जताई है। वे उत्तर प्रदेश के पुलिस महानिदेशक (EX DGP) भी रह चुके हैं। अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई को जायज ठहराते हुए उन्होंने दंगाइयों पर ऐसी धाराएँ लगाने की वकालत की है जिससे उन्हें जमानत भी न मिल सके।

हल्द्वानी में गुरुवार (8 फरवरी, 2024) को मुस्लिम भीड़ ने अतिक्रमण हटाने पहुँची पुलिस-प्रशासन की टीम पर हमला कर दिया था और जम कर हिंसा की थी। सांसद बृजलाल का कहना है कि जिस तरीके से इस हिंसा को अंजाम दिया गया है उससे यह सुनियोजित लगता है। घटना की विस्तृत जाँच और दोषियों को कड़ी सजा दिलाने की उन्होंने माँग की है। इसके लिए उन्होंने कहा है कि आरोपितों पर ऐसी धाराएँ लगाईं जाएँ, जिनमें उन्हें जमानत तक ना मिले।

भाजपा सांसद ने कहा है कि इस हिंसा के पीछे प्रतिबंधित इस्लामी संगठन PFI और भारत में चोरी-छुपे आए बांग्लादेशी घुसपैठियों का हाथ भी हो सकता है। हल्द्वानी में थाने पर हमले को उन्होंने गंभीर अपराध बताते हुए इन दंगों के मास्टरमाइंड को जेल भेजने की माँग की है। जिस अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई के दौरान पुलिस और प्रशासन पर हमला हुआ, उसे सांसद बृजलाल ने पूरी तरह से कानूनी बताया है। उन्होंने कहा है कि यह मामला न्यायालय में नहीं था, ऐसे में कार्रवाई होनी थी और यह सही है।

बृजलाल वर्ष 2011-12 के बीच उत्तर प्रदेश के पुलिस के मुखिया रहे थे। वह 1977 बैच के आईपीएस अधिकारी हैं। गौरतलब है कि हल्द्वानी में पुलिस-प्रशासन की टीम मुस्लिम बहुल इलाके बनभूलपुरा में अतिक्रमण हटाने पहुँची थी। इस दौरान कट्टरपंथी मुस्लिम दंगाइयों ने इन पर हमला बोल दिया। हमले में सैकड़ों पुलिसकर्मी घायल हो गए हैं।

इस्लामी दंगाइयों ने इस दौरान खूब उत्पात मचाया और कई वाहन भी जलाए। हमले में कई महिला पुलिसकर्मी भी घायल हुई हैं। इस पूरे बवाल के बाद हल्द्वानी में कर्फ्यू लगा दिया गया है और सुरक्षा बलों की तैनाती कर दी गई है। प्रशासन ने दंगाइयों को देखते ही गोली मारने के आदेश दिए हैं। हिंसा में अब तक 6 व्यक्तियों की मौत हो चुकी है।

‘विराट कोहली-अनुष्का शर्मा का होने वाला है दूसरा बच्चा’ : एबी डी विलियर्स ने पहले किया दावा, फिर यू-टर्न लेकर कहा- मुझसे गलती हो गई

भारत और इंग्लैंड के बीच जारी 5 मैचों की टेस्ट सीरीज के शुरुआती दो मुकाबलों में भारतीय क्रिकेटर विराट कोहली के नजर न आने के बाद संस्पेंस था कि आखिर भारत के पूर्व कप्तान विराट कोहली ब्रेक लेकर कहाँ गायब हैं। लोग इस पर अपने-अपने कयास लगा ही रहे थे कि 3 फरवरी को खबर फैली कि विराट कोहली दूसरी बार पिता बनने वाले हैं। ये खबर उनके मित्र एबी डीविलियर्स ने फैलाई।

उन्होंने कहा कि कोहली दोबारा पिता बनने वाले हैं इसलिए वो ब्रेक पर हैं। हालाँकि अब एबी ने अपने बयान को वापसी लिया है। साउथ अफ्रीका के दिग्गज बल्लेबाज एबी डिलिवियर्स ने कुछ दिनों पहले विराट कोहली के ब्रेक को लेकर अपनी ओर से दी गई जानकारी को गलत बताया है। उन्होंने कहा,

“क्रिकेट बाद में आता है, सबसे पहले परिवार आता है। मुझसे बहुत बड़ी गलती हो गई, मैंने जो जानकारी दी, वह गलत थी। विराट कोहली को देश के लिए खेलते हुए बीच में ब्रेक लेने का पूरा अधिकार है। परिवार सबसे पहले और उसके बाद क्रिकेट आता है। विराट कोहली फैमिली इमरजेंसी के चलते बाहर हैं। वह इस समय कहाँ हैं किसी को भी नहीं पता है। विराट कोहली के दुनियाभर में जितने भी फैन्स हैं, वह बस उनके लिए बेस्ट विश करें। विराट कोहली के ब्रेक लेने का जो भी कारण हो, उम्मीद करता हूँ और मजबूत होकर मैदान पर वापसी करेंगे।”

बता दें कि एबी डीविलियर्स ने विराट कोहली के गायब होने पर कहा था, “मैं बस इतना जानता हूँ कि वह ठीक हैं।” वह अपने परिवार के साथ थोड़ा समय बिता रहे हैं, यही कारण है कि वह पहले दो टेस्ट मैच मिस कर रहे हैं। मैं किसी और चीज की पुष्टि नहीं करने जा रहा हूँ। मैं उसे वापस देखने के लिए इंतजार नहीं कर सकता। वह ठीक हैं, अच्छा कर रहे हैं।”

इसी दौरान उन्होंने यह भी कहा था, “हाँ, उनका दूसरा बच्चा आने वाला है। हाँ, यह परिवार का समय है और चीजें उनके लिए महत्वपूर्ण हैं। यदि आप खुद के प्रति सच्चे और सच्चे नहीं हैं, तो आप इस बात का ध्यान नहीं रखते कि आप यहा किस लिए हैं। मुझे लगता है कि ज्यादातर लोगों की प्राथमिकता परिवार है। आप इसके लिए विराट को जज नहीं कर सकते।”

हल्द्वानी जल गया, पर रवीश कुमार की नहीं बुझी है प्यास: चाहते हैं अब मौके पर पहुँचकर आग भड़काए विपक्ष, दंगाइयों की बने ढाल

उत्तराखंड के हल्द्वानी में गुरुवार (8 फरवरी, 2024) को हिंसा भड़क गई। थाना फूँक दिया गया, पेट्रोल पंप जला दिया गया, महिला पुलिसकर्मियों को घायल अवस्था में इलाज कराते हुए देखा गया, पत्थरबाजी-गोलीबारी हुई और 6 जिलों की पैरामिलिट्री के अलावा भारतीय सेना को भी बुलाया गया है। हल्द्वानी का बनभूलपुरा अवैध अतिक्रमण के लिए कुख्यात है, जहाँ 4000 से भी अधिक घर सरकारी जमीन पर अवैध कब्ज़ा कर के बनाए गए हैं।

इतनी हिंसा हो गई लेकिन इसके बावजूद NDTV के पत्रकार रहे रवीश कुमार जो अब यूट्यूबर हैं, वो दंगाइयों के बचाव में उतर आए। रवीश कुमार को दुःख है कि हल्द्वानी में 6 लोगों की मौत हुई है और 300 घायल हैं। उनका कहना है कि विपक्ष के बड़े नेताओं को बनभूलपुरा जाना चाहिए और वहाँ ठहर कर चीजों का पता लगाना चाहिए। रवीश कुमार को वहाँ जो भी हुआ है उसमें कब्ज़ा हटाने के नाम पर कुछ और होता हुआ नज़र आ रहा है। पता नहीं उन्होंने किस रंग का चश्मा लगा रखा है।

DM वंदना सिंह ने स्पष्ट कहा है कि भीड़ ने न सिर्फ थाने को जलाने की कोशिश की, बल्कि पुलिसकर्मियों को ज़िंदा जलाने का भी प्रयास किया। रवीश कुमार जैसे तथाकथित पत्रकारों को यही तरीका आता है – भाजपा शासित राज्य में कुछ गलत हो तो सरकार की आलोचना करो, अपराधियों पर कार्रवाई हो तो उन अपराधियों को ही पाक-साफ़ साबित करने का प्रयास करो। रवीश कुमार यही कर रहे हैं। दंगाइयों का बचाव कर रहे हैं, आग और भड़के इसकी जुगत लगा रहे हैं।

दंगों के बीच विपक्षी नेताओं को कहीं डेरा डालने के लिए कहने का क्या अर्थ है? विपक्षी नेता जाएँगे तो उनके लिए अतिरिक्त सुरक्षा की व्यवस्था करनी पड़ेगी, उनके समर्थक वहाँ पर जुटेंगे, नारेबाजी-विरोध प्रदर्शनों का माहौल बनेगा, प्रशासन पर अतिरिक्त दबाव पड़ेगा – ये सब करवा के रवीश कुमार क्या हासिल करना चाहते हैं? जो इलाका पहले से ही हिंसा का अड्डा बन चुका है, उसे अब राजनीति का अड्डा क्यों बनाना चाहते हैं? क्या वो अपने साथी राजदीप सरदेसाई की तर्ज पर ‘गिद्ध पत्रकारिता’ को बढ़ावा दे रहे हैं?

रवीश कुमार लिखते हैं कि कब्ज़ा हटाने के नाम पर कुछ और हो रहा है। ऐसा कर के वो उस न्यायालय का भी अपमान कर रहे हैं, जिसके आदेश पर प्रशासन अवैध अतिक्रमण हटाने पहुँचा था। मुस्लिम कह रहे हैं कि मस्जिद और मदरसे को तोड़ा गया, जबकि डीएम वंदना सिंह का कहना है कि वो संरचनाएँ धार्मिक के रूप में पंजीकृत ही नहीं थीं। क्या रवीश कुमार अवैध अतिक्रमण का समर्थन कर रहे हैं? भारत का विपक्ष जब अभी के संवेदनशील मुद्दों पर भी राजनीति करने से बाज नहीं आता, उसे आग भड़काने की सलाह देना सचमुच घातक है।

रवीश कुमार का आरोप है कि चुनावी ध्रुवीकरण हो रहा है। उनका कहना है कि बहुसंख्यक आबादी ‘गोदी मीडिया’ और Whatsapp के सहारे है। यानी, अवैध अतिक्रमण करने वाले मुस्लिम, हिंसा करने वाले मुस्लिम – लेकिन दोष बहुसंख्यक हिन्दुओं का। जब राष्ट्रपति भवन में इफ्तार पार्टी होती थी और NDTV के कार्यक्रम होते थे, तब इस ‘ध्रुवीकरण’ की याद नहीं आई? क्या हिन्दू मूर्ख हैं? रवीश की मानें तो मुस्लिम समाज संविधान का कोई अनुच्छेद पढ़ कर उसके हिसाब से अतिक्रमण और हिंसा कर रहा है, जबकि इसका विरोध करने वाले हिन्दू भ्रमित हैं।

क्या अवैध अतिक्रमण का विरोध का मतलब है ‘गोदी मीडिया’ से प्रभावित होना या फिर Whatsapp संदेशों के हिसाब से राय बनाना? या फिर हिंसा का विरोध करने वाले मूर्ख हैं और हिंसा करने वाले पाक-साफ़? रवीश कुमार युवाओं को भड़का रहे हैं कि उन्होंने गलत रास्ता चुन लिया है। भारतीय सेना की ‘अग्निवीर’ योजना के खिलाफ भी ऐसे ही माहौल बनाया गया था, लेकिन इस गिरोह को अफ़सोस है कि देश में आग क्यों नहीं लगी। अब ये युवाओं से नाराज़ हैं, हिंसा क्यों नहीं तेज़ हो रही।

रवीश कुमार को हिंदी समाचारपत्रों से भी शिकायतें हैं। उनमें मस्जिदों के नीचे मंदिर होने की खबर होती है, जिससे रवीश को समस्या है। क्या रवीश कुमार को संतुष्ट करने के लिए इतिहास बदल दिया जाए? अगर बाबरी ढाँचे के नीचे राम मंदिर था तो क्या एक व्यक्ति की संतुष्टि के लिए इसे बदल दिया जाए? आर्कियोलॉजिस्ट KK मुहम्मद के शोध में भी यही मिला। केके मुहम्मद भी झूठे हैं? काशी, मथुरा या भोजशाला जैसे ऐसे कई मंदिर हैं, जिन पर कब्ज़ा किया गया। इस पर बात क्यों न हो, जब इतिहास के तथ्य मौजूद हैं, सबूत मौजूद हैं?

रवीश कुमार को इन सब में वोट बैंक दिख रहा है। रवीश कुमार ने तो इस पोस्ट में अदालतों तक को सांप्रदायिक बता दिया है। उन्होंने इसे ‘अदालती सांप्रदायिकता’ करार दिया है। फ़िलहाल सुप्रीम कोर्ट उनकी नज़र में क्लीन है, इसीलिए वो सुप्रीम कोर्ट से इस पर ध्यान देने के लिए कह रहे हैं। कल को सुप्रीम कोर्ट को भी वो इसी तरह गाली देंगे। मतलब निचली अदालतों को खत्म कर दिया जाए? रवीश को हर उस व्यवस्था और व्यक्ति से दिक्कत है, जो मुस्लिम तुष्टिकरण के हिसाब से काम नहीं करता।

रवीश कुमार को घायल पुलिसकर्मियों के चेहरे नज़र नहीं आते। उन्हें थाना और पेट्रोल पंप फूँकने वाली भीड़ नहीं दिखती, उस भीड़ के मजहबी इरादे नहीं दिखते। दिखते भी होंगे तो उन्हें इसका बचाव करना है। रवीश कुमार को सरकारी जमीन पर कब्ज़ा ठीक लगता है। रवीश कुमार को ये भी ठीक लगता है कि हिंसक भीड़ महिलाओं-बच्चों को आगे कर के ढाल बनाए। रवीश कुमार को ये नहीं दिख रहा कि उत्तराखंड को ‘देवभूमि’ कहा जाता है, यहाँ हिन्दू धर्म से संबंधित कई तीर्थ स्थल हैं और वहाँ अमानुषिक गतिविधियों की अनुमति नहीं दी जा सकती।

असल में रवीश कुमार इतिहास को नकार देना चाहते हैं। वर्तमान को नकार देना चाहते हैं। उनका कहना है कि दिल्ली में मस्जिद ध्वस्त कर दिया गया। नहीं, दिल्ली और यूपी में कई मंदिरों को भी हटाया गया जो अतिक्रमण विरोधी कार्रवाई का ही हिस्सा था। कहीं किसी प्रकार की हिंसा नहीं हुई। झंडेवालान मंदिर ने तो खुद अपना गेट तोड़ा। प्रशासन के साथ सहयोग किया। लेकिन, मस्जिदों-मजारों के नाम पर अवैध अतिक्रमण की इजाजत क्यों दी जाए?