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अब्बा जॉनी और बेटा अनस सहित आरिस, फहीम, इसरार, सीवान की मौत: हल्द्वानी में इस्लामी भीड़ का हमला, 300+ पुलिसकर्मी घायल

उत्तराखंड के हल्द्वानी में हर तरफ तनाव फैला है। इंटरनेट बंद है। कर्फ्यू लागू है और देखते ही गोली मारने के आदेश डीएम की तरफ से दिए गए हैं। ऐसा इसलिए, क्योंकि हल्द्वानी का बनभूलपुरा थाना इलाके में अवैध अतिक्रमण हटाने पहुँची पुलिस-प्रशासन पर इस्लामिक कट्टरपंथियों की भीड़ ने हमला बोल दिया। इस हमले में पत्थरबाजी के साथ ही पेट्रोल-बम भी चलाए गए। दर्जनों गाड़ियों को आग लगा दिया गया। पुलिस थाने को घेर लिया गया और पुलिस वालों को निशाना बनाया गया। अभी तक मिल रही जानकारियों के मुताबिक, इस हिंसा में 6 लोगों की मौत हो चुकी है, तो करीब 300 लोग घायल हो चुके हैं, जिसमें अधिकाँश पुलिस कर्मी और अधिकारी हैं।

लाइव हिंदुस्तान की रिपोर्ट के मुताबिक, इस हिंसा में अब तक 6 लोगों की जान जा चुकी है। जिसमें गफूर बस्ती के रहने वाले पिता-पुत्र जॉनी और अनस की मौत हो गई है। इसमें आरिस पुत्र गौहर उम्र – 16 साल की भी जान गई है। गाँधी नगर के रहने वाले फहीम की मौत हुई है, तो बनभूलपुरा के रहने वाले इसरार और सीवान (32) की भी मौत हुई। वहीं, पत्थरबाजी की घटनाओं में 300 से अधिक लोग घायल हो गए हैं। इन घायलों में हल्द्वानी के एसडीएम पारितोष वर्मा, कालाढूँगी की एसडीएम रेखा कोहली, तहसीलदार सचिन कुमार, सीओ स्पेशल ऑपरेशन नितिन लोहनी समेत 200 से अधिक पुलिसकर्मी और अधिकारी शामिल हैं।

ये मामला गुरुवार (08 फरवरी 2024) का है। जहाँ हल्द्वानी के बनभूलपुरा थाना इलाके में कोर्ट के ऑर्डर के बाद अतिक्रमण हटाने पहुँचे 800 प्रशासनिक कर्मचारियों, अधिकारियों और पुलिस को घेर लिया गया। छतों से पत्थर चलाए गए। पुलिस को पूरी तरह से पीछे ढकेल दिया गया और बनफूलपुरा थाने को ही घेर लिया गया। गाड़ियों को आग लगा दिया गया। भीड़ को रोकने के लिए छोड़े गए आँसू गैस के गोलों का भी कोई असर नहीं दिखा। इस्लामिक भीड़ पूरी तरह से बेपरवाह दिखी, मानों वो सिर्फ आतंक का राज कायम करने पर ही उतारू थी।

इंटरनेट बंद, कर्फ्यू लागू, देखते ही गोली मारने के आदेश

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने हल्द्वानी के हालात पर चर्चा के लिए हाई लेवल मीटिंग बुलाई। बैठक में शासन और पुलिस के अधिकारी मौजूद रहे। बैठक में मुख्यमंत्री ने पुलिस अधिकारियों को जरूरी दिशा-निर्देश दिए। इसी के साथ नैनीताल जिला प्रशासन ने दंगा प्रभावित क्षेत्र में कर्फ्यू लगा दिया है। इसके साथ ही उपद्रवियों को देखते ही गोली मारने का आदेश जारी कर दिया गया है। वहीं, प्रशासन ने अफवाहों को फैलने से रोकने के लिए दंगाईयों को देखते ही गोली मारने के आदेश जारी किए हैं। इस बीचराज्य सरकार ने पूरे राज्य में हाई अलर्ट जारी कर दिया है।

अवैध मस्जिद-मदरसा तोड़ने पर कार्रवाई

बता दें कि जिस मदरसे और मस्जिद को लेकर कट्टर मुस्लिम भीड़ सड़क पर उतरी है, वो मलिका बगीचा में स्थित है। उत्तराखंड पुलिस प्रवक्ता और IG नीलेश भरने ने जानकारी दी है कि कई जिलों की पुलिस फ़ोर्स और पैरामिलिट्री को भी हल्द्वानी में लगाया गया है। साथ ही शुक्रवार (9 फरवरी, 2024) को सभी स्कूलों में छुट्टी घोषित कर दी गई है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने बताया कि अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई न्यायालय के आदेश के बाद हो रही थी।

सीएम धामी ने आश्वासन दिया है कि तोड़फोड़ व हिंसा करने वालों पर कठोरतम कार्रवाई की जाएगी। नगर आयुक्त पंकज उपाध्याय का कहना है कि पत्थरबाजों को चिह्नित किया जा रहा है, उन पर कार्रवाई की जाएगी। घायलों में SDM भी शामिल हैं। DCP अभिनव कुमार ने बताया कि अराजक तत्वों ने गोलीबारी भी की है। इलाके में 4000 से अधिक मकान अवैध अतिक्रमण कर के बनाए गए हैं।

335 सीटों पर NDA की जीत के साथ मोदी सरकार, राम मंदिर और विदेश में भारत के बढ़ते कद से उफान पर लोकप्रियता: देखिए सर्वे में और क्या-क्या

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संसद में विपक्ष को ललकार कर कहा कि तीसरी बार एनडीए सत्ता में आ रही है, वो भी पूर्ण बहुमत के साथ। अब तक के सबसे बड़े जनमत के साथ। इंडिया टुडे-सी वोटर का सर्वे भी यही कहता है। इंडिया टुडे-सी वोटर के सर्वे ‘मूड ऑफ द नेशन’ में एनडीए को 543 सीटों में से 335+ सीटें मिलती दिख रही हैं।

मूड ऑफ द नेशन सर्वे में करीब डेढ़ लाख लोग शामिल हुए, इनमें से 35 हजार लोगों से सीधी बात की गई। इस सर्वे रिपोर्ट के मुताबिक, इंडी गठबंधन का बेड़ा गर्क होता दिख रहा है। इंडी गठबंधन महज 166 सीटों पर सिमटता दिख रहा है, तो अन्य को 42 सीटें मिलती दिख रही हैं। वहीं, एनडीए लगातार तीसरी बार प्रचंड बहुमत के साथ सत्ता में वापसी करती दिख रही है। पीएम नरेंद्र मोदी की अगुवाई में एनडीए गठबंधन 543 में से 335 से भी अधिक सीटों पर जीत दर्ज करता दिख रहा है।

हर राज्य में पीएम मोदी का जादू, यूपी-बिहार-झारखंड का हाल

इस सर्वे के मुताबिक, राज्यवार जो आँकड़े सामने आए हैं, वो बताते हैं कि उत्तर भारत एक बार फिर से पूरी तरह से भगवामय हो रहा है। उत्तर प्रदेश, बिहार और झारखंड में फिर से नरेंद्र मोदी का डंका बज रहा है। उत्तर प्रदेश की 80 सीटों में से 73 सीटें एनडीए को मिलती दिख रही हैं, जिसमें 72 अकेले बीजेपी को, तो 1 सीट सहयोगी दल को मिलता दिख रहा है। वहीं, विपक्षी दल महज 7 सीटों तक सिमटते दिख रहे हैं। यूपी में बीजेपी को 52 प्रतिशत मत मिलने का अनुमान जताया जा रहा है, तो विपक्षी गठबंधन को 36 प्रतिशत वोट मिलते दिख रहे हैं। यूपी के साथ ही उत्तराखंड में बीजेपी को भारी बहुमत मिलता दिख रहा है। उत्तराखंड में बीजेपी को 58.6 प्रतिशत मत मिलते दिख रहे हैं और पाँचों सीटों पर बीजेपी को प्रचंड बहुमत मिलता दिख रहा है।

बिहार की बात करें तो 40 में से 32 सीटों पर एनडीए को भारी बहुमत से जीत मिलती दिख रही है। इंडी गठबंधन 8 सीटों तक पहुँचता दिख रहा है। बिहार में एनडीए गठबंधन को 52 प्रतिशत वोट मिलते दिख रहे हैं, वहीं इंडी गठबंधन का मत प्रतिशत 7 प्रतिशत बढ़ते दिख रहे हैं। वहीं, झारखंड की बात करें तो 14 में से 12 सीटों पर बीजेपी की अगुवाई वाली एनडीए को जीत मिलती दिख रही है, तो 2 सीटों पर इंडी गठबंधन का मामला बनता दिख रहा है।

पश्चिम बंगाल में बीजेपी को बड़ी जीत

पश्चिम बंगाल में बीजेपी को अपने दम पर 19 सीटें मिलती दिख रही हैं। एक सीट पर इंडी गठबंधन तो 22 सीटें अन्य को मिलती दिख रही हैं। यहाँ मत प्रतिशत के मामले में बीजेपी करीब-करीब टीएमसी के पास पहुँचती दिख रही है। पश्चिम बंगाल में टीएमसी को करीब 43 प्रतिशत मत मिलते दिख रहे हैं, तो बीजेपी सिर्फ 3 प्रतिशत के फासले के साथ 40 प्रतिशत वोट पाती दिख रही है।

मध्य प्रदेश-छत्तीसगढ़-राजस्थान में फिर से कमाल

हाल ही में मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान में हुए विधानसभा चुनावों में भारी जीत दर्ज करने वाली बीजेपी लोकसभा चुनाव में भी भारी बहुमत हासिल करती दिख रही है। इन तीनों राज्यों की 65 लोकसभा सीटों में से 62 पर बीजेपी को जीत मिलती दिख रही है। मध्य प्रदेश की 29 में से 27 सीटों पर बीजेपी को जीत मिलती दिख रही है। यहाँ बीजेपी 58 प्रतिशत वोट मिलते दिख रहे हैं, जबकि कॉन्ग्रेस को 38.2 प्रतिशत वोट मिलते दिख रहे हैं। ये पिछली बार के मुकाबले कहीं अधिक है।

बात छत्तीसगढ़ की करें तो छत्तीसगढ़ में बीजेपी 11 में से 10 सीटों पर जीत दर्ज करती दिख रही है। ये पिछली बार के मुकाबले एक सीट ज्यादा है। साल 2019 में बीजेपी को 9 सीटों पर जीत मिली थी, लेकिन इस बार बीजेपी का वोट शेयर बढ़कर 53.9 प्रतिशत हो गया है। वहीं, कॉन्ग्रेस के हिस्से 38.2 प्रतिशत वोट ही मिल रहे हैं।

राजस्थान में बीजेपी क्लीन स्वीप करती दिख रही है। बीजेपी राजस्थान की सभी 25 लोकसभा सीटों पर जीत दर्ज करती दिख रही है। इस बार बीजेपी को 58.6 प्रतिशत मत मिलने के अनुमान सामने आ रहे हैं, तो कॉन्ग्रेस को 35 प्रतिशत वोट मिलते दिख रहे हैं। पिछली बार भी बीजेपी ने सभी सीटें जीती थी, लेकिन इस बार हनुमान बेनीवाल साथ छोड़ चुके हैं। इसके बावजूद एक बार फिर से बीजेपी राजस्थान की सभी 25 सीटों पर जीत दर्ज करती दिख रही है।

दक्षिण भारत में इंडी गठबंधन भारी

मूड ऑफ द नेशन के सर्वे के मुताबिक, दक्षिण भारत के पाँच राज्यों में कुल 129 लोकसभा सीटें हैं, जिसमें इंडी गठबंधन भारी पड़ता दिख रहा है। हालाँकि आँध्र प्रदेश से लेकर तेलंगाना में गठबंधनों में बदलाव हो सकता है। मौजूदा गठबंधन के हिसाब से बात करें तो तमिलनाडु में डीएमके-कॉन्ग्रेस क्लीन स्वीप करती दिख रही हैं। वहीं, कर्नाटक में एनडीए गठबंधन को 28 में से 24 सीटों पर जीत मिलती दिख रही है। यहाँ इंडी गठबंधन चार सीटों तक सिमटती दिख रही है।

आँध्र प्रदेश की कुल 25 लोकसभा सीटों में से एनडीए और इंडी गठबंधन दोनों का ही पत्ता साफ होता दिख रहा है। यहाँ टीडीपी को 17 सीटों पर जीत मिलने का अनुमान है, तो वाईएसआरसीपी को 8 सीटें मिलती दिख रही हैं। हालाँकि दोनों ही दलों के शीर्ष नेता दिल्ली का चक्कर काट रहे हैं, ऐसे में किसका बीजेपी के साथ गठबंधन हो जाए अभी कहा नहीं जा सकता। ऐसे में आँध्र प्रदेश में एनडीए बड़ा पलटवार कर सकता है।

केरल में इंडी गठबंधन सभी 20 सीटों पर जीत दर्ज करता दिख रहाहै। यहाँ एनडीए का मत प्रतिशत को बढ़ रहा है, लेकिन ये सीट में बदलता नहीं दिख रहा। वहीं, तेलंगाना की बात करें तो यहाँ की कुल 17 लोकसभा सीटों में से 10 सीटें इंडी गठबंधन को तो बीजेपी को सिर्फ तीन सीटें मिलती दिख रही हैं। एक सीट एआईएमआईएम के हिस्से जाती दिख रही है।

रोती महिला पुलिसकर्मी, धधकती आग, जलता थाना, टूटी गाड़ियाँ… जुमे के 1 दिन पहले यही है हल्द्वानी की पहचान, अवैध अतिक्रमण हटाने पर उग्र हुई कट्टर इस्लामी भीड़

उत्तराखंड के हल्द्वानी में बवाल हो गया है, जहाँ कट्टर इस्लामी भीड़ ने पुलिस पर धावा बोल दिया। थाना घेर लिया गया, गाड़ियों को आग के हवाले कर दिया गया और जम कर पत्थरबाजी की गई। कारण – वहाँ स्थित एक अवैध मस्जिद व मदरसे पर प्रशासन ने बुलडोजर चलाया था। मामला बनभूलपुरा क्षेत्र का है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने पूरे मामले पर बड़ी बैठक की है, दंगाइयों को देखते ही गोली मारने का आदेश जारी कर दिया गया है। हल्द्वानी सरकारी जमीन, रेलवे की जमीन पर अतिक्रमण के कारण भी चर्चा में आया था।

जिस मदरसे और मस्जिद को लेकर कट्टर मुस्लिम भीड़ सड़क पर उतरी है, वो मलिका बगीचा में स्थित है। उत्तराखंड पुलिस प्रवक्ता और IG नीलेश भरने ने जानकारी दी है कि कई जिलों की पुलिस फ़ोर्स और पैरामिलिट्री को भी हल्द्वानी में लगाया गया है। साथ ही शुक्रवार (9 फरवरी, 2024) को सभी स्कूलों में छुट्टी घोषित कर दी गई है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने बताया कि अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई न्यायालय के आदेश के बाद हो रही थी।

पुलिस-प्रशासन के कई अधिकारी घायल हुए हैं। कर्फ्यू लगा दिया गया है। सीएम धामी ने आश्वासन दिया है कि तोड़फोड़ व हिंसा करने वालों पर कठोरतम कार्रवाई की जाएगी। महिला पुलिसकर्मियों तक को नहीं छोड़ा, उनमें से कई घायल होकर अस्पताल पहुँच गईं। मुख्य सचिव व पुलिस महानिदेशक के अलावा ख़ुफ़िया विभाग को भी मुख्यमंत्री ने तलब किया। अवैध मदरसा और नमाज स्थल को सील कर दिया गया था। 3 एकड़ जमीन प्रशासन ने अपने नियंत्रण में ली थी।

नगर आयुक्त पंकज उपाध्याय का कहना है कि पत्थरबाजों को चिह्नित किया जा रहा है, उन पर कार्रवाई की जाएगी। घायलों में SDM भी शामिल हैं। DCP अभिनव कुमार ने बताया कि अराजक तत्वों ने गोलीबारी भी की है। इलाके में 4000 से अधिक मकान अवैध अतिक्रमण कर के बनाए गए हैं। घायल पुलिसकर्मियों की संख्या 20 से अधिक बताई जा रही है। JCB का शीशा तोड़ डाला गया। ट्रैक्टर पलट दिया गया। टायर जला कर रास्ता बंद कर दिया गया। थाने में आग लगा दी गई।

कुमाऊँ मंडल के नैनीताल जनपद में स्थित हल्द्वानी में अगले आदेश तक कर्फ्यू लगा रहेगा।

भारी पत्थरबाजी, गाड़ियाँ फूँकी, कई पुलिस वाले घायल: हल्द्वानी में अवैध मदरसा-मस्जिद पर चला बुलडोजर तो हिंसक हुई कट्टरपंथी भीड़, सीएम ने की बैठक, देखते ही गोली मारने के आदेश

उत्तराखंड के हल्द्वानी में प्रशासन ने अवैध अतिक्रमण के खिलाफ अभियान चलाया। ये अभियान कई दिनों से सरकारी जमीनों पर हो चुके अवैध कब्जों के खिलाफ चल रहा था, जिसमें अवैध मकानों और अवैध धार्मिक स्थलों के ध्वस्तीकरण की कार्रवाई चल रही है। इसी क्रम में गुरुवार (8 फरवरी 2024) को बनफूलपुरा थाना इलाके के ‘मालिक के बगीचे’ में पहुँची और अवैध रूप से बनी मस्जिद और मदरसे पर बुलडोजर चलाया। इसके बाद पूरे इलाके में तनाव फैल गया। इस्लामिक कट्टरपंथियों की भीड़ ने पुलिस पर पथराव किया और पुलिस वालों पर हमला बोल दिया। इस हमले में कई पुलिसवाले घायल भी हो गए। इस बीच, उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने हाई लेवल मीटिंग बुलाई है।

सीएम की मीटिंग के बाद लगा कर्फ्यू, देखते ही गोली मारने के आदेश

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने हल्द्वानी के हालात पर चर्चा के लिए हाई लेवर मीटिंग बुलाई। बैठक में शासन और पुलिस के अधिकारी मौजूद रहे। बैठक में मुख्यमंत्री ने पुलिस अधिकारियों को जरूरी दिशा-निर्देश दिए। इसी के साथ नैनीताल जिला प्रशासन ने दंगा प्रभावित क्षेत्र में कर्फ्यू लगा दिया है। इसके साथ ही उपद्रवियों को देखते ही गोली मारने का आदेश जारी कर दिया गया है।

बताया जा रहा है कि हल्द्वानी में बवाल के बीच ही नैनीताल के एसएसपी प्रहलाद मीणा भी मौके पर पहुँच गए और उन्होंने भी मोर्चा संभाल लिया है। बताया जा रहा है कि मौके पर भारी पुलिस बल तैनात किया गया है।

मुख्यमंत्री धामी ने की शांति बनाए रखने की अपील

इस बैठक के बाद मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने लोगों से शांति बनाने की अपील की। सीएम धामी ने कहा, “हल्द्वानी के बनभूलपुरा इलाके में प्रशासन की एक टीम कोर्ट के आदेश के बाद अतिक्रमण विरोधी अभियान के लिए गई थी। वहाँ असामाजिक तत्वों ने पुलिस के साथ विवाद किया, जिसमें कई पुलिस कर्मियों और प्रशासनिक अधिकारियों को चोटें आईं। पुलिस और केंद्रीय बलों की अतिरिक्त कंपनियाँ वहाँ भेजी जा रही हैं। हमने सभी से शांति बनाए रखने की अपील की है। कर्फ्यू लगा हुआ है। आगजनी करने वाले दंगाइयों और अतिक्रमणकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।”

अवैध मस्जिद और मदरसे पर चला बुलडोजर को घेर लिया थाना

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस्लामिक भीड़ ने हल्द्वानी के बनभूलपुरा थाने को चारों ओर से घेर लिया और जमकर पथराव किया। इस भीड़ में पुरुषों के साथ महिलाएँ भी शामिल रही। कट्टरपंथियों की भीड़ ने कई गाड़ियों को आग के हवाले कर दिया। यही नहीं, ट्रांसफॉर्मर को आग के हवाले करके उन्होंने बिजली आपूर्ति भी रोक दी है। इस बवाल में पुलिस प्रशासन के साथ ही पत्रकार भी फंस गए। भीड़ को रोकने के लिए पुलिस को हवाई फायरिंग भी करनी पड़ी, तो गैस के गोले भी दागने पड़े। हल्द्वानी के हिंसाग्रस्त इलाके में कई थानों की पुलिस फोर्स पहुँची है।

जानकारी के मुताबिक, प्रशासन के जेसीबी ने जैसे ही अवैध मदरसे और अवैध मस्जिद पर कार्रवाई शुरू की, वैसे ही इस्लामिक कट्टरपंथियों की भीड़, जिसमें महिलाएँ भी शामिल ती, उन्होंने भी बवाल करना शुरू कर दिया। भीड़ ने पथराव शुरू कर दिया। इस पथराव में पुलिसकर्मियों के साथ ही नगर निगम की टीम के कई लोग भी घायल हो गए। पथराव को रोकने और भीड़ को समझाने के लिए नगर आयुक्त पंकज उपाध्याय, सिटी मजिस्ट्रेट ऋचा सिंह, एसडीएम परितोष वर्मा समेत नगर निगम की टीम ने कोशिश भी की, लेकिन भीड़ का हमलावर रुख नहीं बदला। कट्टरपंथियों को रोकने के लिए पुलिस को आँसू गैस के गोले भी छोड़ने पड़े।

अमर उजाला की रिपोर्ट के मुताबिक, नगर आयुक्त पंकज उपाध्याय ने बताया अवैध मदरसे से एवं नमाज वाले जगह पूरी तरह अवैध है। जिसके पास एक तीन एकड़ जमीन पर नगर निगम ने कब्जा पूर्व में ले लिया था, लेकिन अवैध मदरसे एवं नमाज स्थल को सील कर दिया था और अब इसे ध्वस्त कर दिया गया। इस दौरान प्रदर्शनकारियों को तितर-बितर करने के लिए पुलिस को आंसू गैस के गोले दागने पड़े। इस हिंसा में कई पुलिसकर्मी और लोग घायल हैं। घायलों को उपचार के लिए अस्पताल ले जाया गया है।

‘कॉन्ग्रेस सरकार ने मोढ़-घांची को दिया OBC का दर्जा, मैं ही था डिप्टी CM’: गुजरात के नेता ने खोल दी राहुल गाँधी के झूठ की पोल, PM मोदी की जाति पर की थी टिप्पणी

कॉन्ग्रेस पार्टी के पूर्व अध्यक्ष राहुल गाँधी ने ‘भारत जोड़ो न्याय यात्रा’ के दौरान ओडिशा में कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी OBC के रूप में पैदा नहीं हुए थे, बल्कि सन् 2000 में भाजपा सरकार ने उनकी जाति को ओबीसी का दर्जा दिया। अब कॉन्ग्रेस की सरकार में ही उप-मुख्यमंत्री रहे नेता ने राहुल गाँधी के दावों की पोल खोल दी है। नरहरि अमीन ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ के माध्यम से ऐसा बयान जारी किया है, जो राहुल गाँधी को असहज कर सकता है।

नरहरि अमीन 1974 में गुजरात में हुए ‘नवनिर्माण आंदोलन’ के सबसे सक्रिय नेताओं में से एक थे। युवाओं और मध्यम वर्ग के उस आंदोलन ने तत्कालीन CM चिमनभाई पटेल की सरकार गिरा दी थी। वो फरवरी 1994 से मार्च 1995 तक राज्य के उप-मुख्यमंत्री रहे हैं। उन्होंने बताया है कि 25 जुलाई, 1994 को गुजरात सरकार ने मोढ़-घांची जाति को OBC के भीतर सूचीबद्ध करते हुए अधिसूचना जारी की थी। उस समय वो डिप्टी सीएम हुआ करते थे।

बता दें कि नरेंद्र मोदी इसी समुदाय से आते हैं। नरहरि अमीन ने कहा, “राहुल गाँधी इस मुद्दे पर बेवकूफाना झूठ फैला कर OBC समाज का अपमान कर रहे हैं। मोढ़-घांची जाति को OBC का दर्जा दिए जाने का नोटिफिकेशन जब आया, तब नरेंद्र मोदी विधायक-सांसद तक नहीं बने थे, मुख्यमंत्री तो छोड़ दीजिए। मेरी माँग है कि राहुल गाँधी तुरंत अपना झूठ वापस लें। उन्हें OBC को बदनाम करना बंद कर देना चाहिए और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लेकर घृणा फैलाने के लिए गुजरात से माफ़ी माँगनी चाहिए।”

राहुल गाँधी ने कहा था, “मैं बहुत गहरी बात बोल रहा हूँ। आप सब लोगों को भयंकर बेवकूफ बनाया जा रहा है। सुनो, मैं जो कह रहा हूँ। नरेंद्र मोदी OBC नहीं पैदा हुए थे, वो गुजरात में तेली जाति में पैदा हुए थे। उनकी जाति को भाजपा ने सन् 2000 में ओबीसी बनाया। आपके प्रधानमंत्री OBC नहीं पैदा हुए, सामान्य वर्ग में पैदा हुए।” मई 2014 में जब ये मामला उठा था, तब भी भाजपा सरकार ने इस चीज को स्पष्ट किया था कि गुजरात में उसकी सरकार बनने से पहले से ही ये जाति ओबीसी क्लास में है।

जीशान और मुबारक सहित 4 युवकों ने सुशील की छाती और पेट में गोदा चाकू, स्टंट करने से रोका तो कर दिया हमला: कर्नाटक के इसी जिले में हुई थी ‘बजरंग दल’हर्ष की हत्या

कर्नाटक के शिवमोगा में एक हिन्दू युवक को चार मुस्लिम लड़कों ने चाकू मार कर गंभीर रूप से घायल कर दिया। हिन्दू युवक ने मुस्लिमों को अपने घर की सामने की गली में स्टंट करने से रोका था। इसी से गुस्साए मुस्लिम लड़कों ने हिन्दू युवक को छाती और पेट पर चाकू मार कर घायल कर दिया।

जानकारी के अनुसार, यह घटना मंगलवार (6 फरवरी, 2024) शाम की है। मीडिया रिपोर्ट्स में बताया गया है कि पीड़ित हिन्दू युवक शाम को अपने कुत्ते को टहलाने निकला था। इस दौरान उसकी गली में कुछ मुस्लिम लड़के स्टंट कर रहे थे। सुशील ने जब इन मुस्लिम लड़कों को ऐसा करने से मना किया तो पहले तो वह यहाँ से चले गए लेकिन थोड़ी देर में अपने साथ और लड़कों को लेकर आए और सुशील पर हमला बोल दिया। सुशील के साथ मारपीट की गई और चाकू मार दिया गया।

सुशील के छाती और पेट पर चाकू से वार किए गए हैं, उनका इलाज शिवमोगा के एक निजी अस्पताल में जारी है। सुशील को चाकू मारने के बाद यह मुस्लिम लड़के यहाँ से भाग गए बताया जा रहा है कि पीड़ित हिन्दू युवक सुशील 23 वर्ष का है और एक कॉलेज में कम्यूटर ऑपरेटर का काम करता है।

पुलिस ने इस मामले में बताया है कि उसने केस दर्ज कर लिया है और शुरुआती जाँच करके अभी तक तीन हमलावरों को गिरफ्तार किया है। इनमें से एक नाबालिग भी बताया जा रहा है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, हिन्दू युवक सुशील को चाकू मारने वाले दो हमलावरों का नाम जीशान और मुबारक बताया गया है।

इस हमले के बाद शिकारीपुरा से विधायक और भाजपा प्रदेश अध्यक्ष बीवाई विजयेन्द्र ने राज्य की कॉन्ग्रेस सरकार पर हमला बोला है। उन्होंने कहा, “‘चाहे बेलगावी की घटना हो, हावेरी या मंगलुरु की या फिर कल शिकारीपुरा की, अब तो ऐसा लगता है जैसे कोई भी कुछ भी कर सकता है। हालात तो ऐसे लग रहे हैं जैसे राज्य में कानून व्यवस्था चरमरा गई है। भले ही यहाँ पुलिस व्यवस्था एकदम ध्वस्त हो गई हो लेकिन मुख्यमंत्री अपने पूरे मंत्रिमंडल के साथ दिल्ली में बैठे हैं।”

गौरतलब है कि इससे पहले भी शिवमोगा में हिंसा होती रही है। इससे पहले फरवरी 2022 में शिवमोगा में ही ‘बजरंग दल’ के एक कार्यकर्ता हर्षा की हत्या कर दी गई थी। उसका कसूर बस इतना था कि उसने हिजाब पर पोस्ट कर दिया था।

यूपीए सरकार के 10 साल का खुलेगा काला चिट्ठा, 15 घोटालों का पूरा ब्यौरा दर्ज: लोकसभा में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने पेश किया श्वेत पत्र

मोदी सरकार की तरफ से लोकसभा में श्वेत पत्र पेश किया है। एनडीए सरकार की तरफ से वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने ये श्वेत पत्र पेश किया। मोदी सरकार ने यूपीए सरकार के दौरान कथित आर्थिक कुप्रबंधन का काला चिट्ठा इस श्वेत पत्र के जरिए रखने की कोशिश की है। एनडीए सरकार के श्वेत पत्र के विरोध में कॉन्ग्रेस ने ‘ब्लैक पेपर’ लाने की बात कही है। मोदी सरकार के श्वेत पत्र पर शुक्रवार को चर्चा हो सकती है।

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा लोकसभा में रखे गए श्वेत पत्र के जरिए सांसदों को बताया जाएगा कि साल 2014 से पहले (मोदी सरकार बनने से पहले) देश के सामने किस तरह के शासन, आर्थिक और राजकोषीय संकट थे। लोकसभा में मोदी सरकार ये बताएगी कि यूपी सरकार के समय में हुए आर्थिक कुप्रबंधन को सुधारने के लिए मोदी सरकार ने क्या कदम उठाए हैं। लोकसभा में रखे गए श्वेत पत्र में यूपीए शासनकाल के समय हुए 15 बड़े घोटालों का जिक्र है। इन घोटालों में 2जी घोटाला, कोयला घोटाला, कॉमनवेल्थ घोटाले का भी जिक्र है।

बता दें कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राज्यसभा में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद ज्ञापन के समय कहा था कि उनकी सरकार यूपीए सरकार के 10 सालों 2004-2014 के शासनकाल के समय हुए आर्थिक कुप्रबंधन को सामने लाने के लिए श्वेत पत्र सदन में रखेगी। इस श्वेत पत्र के माध्यम से यूपीए सरकार की वजह से देश को हुए नुकसान के बारे में भी बताया जाएगा। अब वित्त मंत्री ने ये श्वेतपत्र सदन में रख दिया है, जिसपर शुक्रवार को चर्चा होगी।

लोकसभा में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा रखे गए श्वेत पत्र में कहा गया है कि यूपीए सरकार को अधिक सुधारों के लिए तैयार एक स्वस्थ अर्थव्यवस्था विरासत में मिली, लेकिन अपने दस वर्षों में इसे नॉन परफॉर्मिंग बना दिया। 2004 में जब यूपीए सरकार ने अपना कार्यकाल शुरू किया था, तो अच्छे विश्व आर्थिक माहौल के बीच अर्थव्यवस्था 8 प्रतिशत की दर से बढ़ रही थी। उद्योग और सेवा क्षेत्र की वृद्धि दर 7 प्रतिशत से अधिक थी और वित्त वर्ष 2004 में कृषि क्षेत्र की वृद्धि दर 9 प्रतिशत से अधिक थी। 2003-04 के आर्थिक सर्वेक्षण में भी कहा गया था कि विकास, मुद्रास्फीति और भुगतान संतुलन के मामले में अर्थव्यवस्था एक लचीली स्थिति में प्रतीत होती है, एक जोड़ जो कि निरंतर व्यापक आर्थिक स्थिरता के साथ विकास की गति को मजबूत करने की बड़ी गुंजाइश प्रदान करता है।

एनडीए सरकार द्वारा लाए गए श्वेत पत्र में लिखा गया है कि यूपीए सरकार के 122 टेलीकॉम लाइसेंस से जुड़े 2जी स्पेक्ट्रम घोटाले ने सरकारी खजाने से 1.76 लाख करोड़ रुपये की कटौती की थी। नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (सीएजी) के अनुमान, सरकारी खजाने को 1.86 लाख करोड़ रुपये की चपत लगाने वाला कोल गेट घोटाला, कॉमन वेल्थ गेम्स घोटालों ने देश को नुकसान पहुँचाया।

कॉन्ग्रेस लाई ब्लैक पेपर

एनडीए सरकार के श्वेत पत्र के जवाब में कॉन्ग्रेस ब्लैक पेपर लेकर आई है। कॉन्ग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने गुरुवार (08 फरवरी 2024) को ब्लैक पेपर जारी किया। खरगे ने कहा कि बीजेपी लोकतंत्र को खत्म कर रही है। इसके अलावा इसमें रोजगार, बेरोजगारी, महँगाई का मुद्या उठाया गया। बता दें कि पीएम मोदी ने सदन में कहा था कि कॉन्ग्रेस का ब्लैक पत्र उनके सरकार द्वारा किए जा रहे कामों पर ‘काले टीके’ की तरह है, जिससे नजर नहीं लगेगी।

हम कश्मीर को इस हाल में नहीं छोड़ेंगे… यामी गौतम की ‘Article 370’ में ‘PM मोदी’ और ‘अमित शाह’ भी, दिखाया कैसे ‘अल जिहाद’ नारे के साथ बहता था खून

यामी गौतम की फिल्म ‘Article 370’ का ट्रेलर आ गया है। इसका निर्देशक राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता आदित्य सुहास जांभले ने किया है। गुरुवार (8 फरवरी, 2024) को इसका ट्रेलर रिलीज हुआ। 23 फरवरी को फिल्म सिनेमाघरों में दस्तक देगी। यामी गौतम ने इस फिल्म में एक NIA अधिकारी का किरदार निभाया है। ये फिल्म जम्मू कश्मीर में आतंकवाद के बढ़ने और फिर मोदी सरकार द्वारा अनुच्छेद-370 को निरस्त किए जाने के ऐतिहासिक फैसले पर केंद्रित है।

शाश्वत सचदेव ने फिल्म में संगीत दिया है, जिन्होंने अपने गानों के माध्यम से बलिदानी सैनिकों को नमन भी किया है। 1980 के दशक में आए रामानंद सागर के ‘रामायण’ सीरियल में भगवान श्रीराम का किरदार निभा कर घर-घर में शोहरत बटोरने वाले अरुण गोविल भी इस फिल्म का हिस्सा हैं। यामी गौतम के पति आदित्य धर ने मोहन ठाकर के साथ मिल कर ‘आर्टिकल 370’ की कहानी लिखी है। फिल्म के ट्रेलर को अच्छी प्रतिक्रिया मिल रही है। फिल्म में प्रधानमंत्री के रूप में नरेंद्र मोदी से मिलता-जुलता एक किरदार भी है।

ट्रेलर की शुरुआत में ही यामी गौतम कहती हैं कि जब तक विशेष दर्जा है, हम उन्हें हाथ भी नहीं लगा सकते और वो हमें आर्टिकल-370 को हाथ भी नहीं लगाने देंगे। इसके बाद एक युवक ‘हर घर से निकलेगा बुरहान, तुम कितने बुरहान मारोगे’ का नारा लगाता हुए दिखता है। बता दें कि आतंकी बुरहान वानी की मौत के बाद बड़ी संख्या में कश्मीरी मुस्लिम उसके जनाजे में शामिल हुए थे। साथ ही एक कश्मीरी नेता को पुलवामा हमले में 40 CRPF जवानों के बलिदान होने का मजाक बनाते हुए दिखाया गया है।

इसके बाद पीएम मोदी का किरदार आता है, जो कहते हैं, “हम कश्मीर को इस हाल में नहीं छोड़ेंगे।” फिल्म में गोलीबारी, बम विस्फोट और पत्थरबाजी भी दिखाई गई है जो कश्मीर में आम थी। फिर बताया जाता है कि कश्मीर में हजारों भारत विरोधी हैं। ‘अल जिहाद’ के नारे भी लगते दिखाए गए हैं। फिल्म के ट्रेलर में अमित शाह का भी किरदार दिखाया गया है। संसद में अमित शाह ने कहा था कि पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर भी भारत का हिस्सा है, हम उसके लिए जान दे देंगे। इस दृश्य को भी उसी जोश के साथ फिल्माया गया है। बता दें कि यामी गौतम माँ भी बनने वाली हैं।

जिस कॉन्ग्रेस MP के ठिकानों से मिला ₹390 करोड़ कैश, उसी ने हेमंत सोरेन को दी BMW कार: ED ने धीरज साहू को बुलाया, झारखंड के पूर्व CM की रिमांड बढ़ी

झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन फ़िलहाल ED (प्रवर्तन निदेशालय) की गिरफ्त में हैं। जाँच एजेंसी ने उनकी एक BMW कार भी जब्त की थी। अब पता चला है कि ये कार कॉन्ग्रेस के राज्यसभा सांसद और शराब कारोबारी धीरज साहू ने ये लक्जरी कार खरीद कर उन्हें दी थी। ‘रिपब्लिक’ ने अपने सूत्रों के हवाले से ये दावा किया है। बता दें कि धीरज साहू के घर से ही आयकर (IT) विभाग ने 390 करोड़ रुपए जब्त किए थे। गुरुग्राम और कई ठिकानों पर छापेमारी कर के ED ने साहू-सोरेन लिंक का पता लगाया।

इसी दौरान पता चला कि उक्त BMW कार एक प्राइवेट कंपनी के नाम पर रजिस्टर्ड है, जब कंपनी को लेकर छानबीन की गई तो पता चला कि इसका स्वामित्व हेमंत सोरेन के पास है। बता दें कि 7 घंटे की पूछताछ के बाद उन्हें गिरफ्तार किया गया था। एक नहीं, बल्कि 2 BMW कार उनके ठिकानें से बरामद की गई थीं। साथ ही 36 लाख रुपए और कुछ दस्तावेज भी मिले थे। हेमंत सोरेन 2 दिनों तक गायब रहे थे। वो दिल्ली से निकले, राँची में प्रकट हुए और इस्तीफा देकर चंपई सोरेन को CM नियुक्त किया।

आर्किटेक्ट विनोद सिंह को भी मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में ही गिरफ्तार किया गया है, अब ED ने उसके साथ हेमंत सोरेन के चैट्स होने का भी खुलासा किया है। ये चैट्स 539 पेज की है। इसमें JSSC के कई एडमिट कार्ड्स भी हैं, ट्रांसफर-पोस्टिंग और लेनदेन की बातें हैं। उधर हेमंत सोरेन की रिमांड भी 5 दिन बढ़ा दी गई है। बिरसा मुंडा जेल (होटवार) में पदस्थापित जेल अधीक्षक नरेंद्र प्रसाद सिंह और हजारीबाग सेन्ट्रल जेल के अधीक्षक जितेंद्र कुमार की पोस्टिंग के लिए 75 लाख रुपए का ऑफर दिया गया था।

इसी तरह IAS शशि रंजन को हजारीबाग या बोकारो का DC बनाने के लिए पैरवी की गई थी। इसी तरह JSSC के तत्कालीन डिप्टी सेक्रेट्री रविराज शर्मा को RTA हजारीबाग का सेक्रेट्री या राँची नगर निगम का AMC और DRDA के ज्वाइंट सेक्रेटरी मोहम्मद हैदर अली को लातेहार का DDC बनाने की पैरवी भी की थी। बड़गाई अंचलाधिकारी, राजस्व उप निरीक्षक भानु प्रताप प्रसाद की भी हेमंत सोरेन के साथ मिलीभगत है और इन्होंने मिल कर जमीन पर कब्ज़ा किया था।

BJP-RSS नेताओं पर हमला करने वाले थे ‘रिपोर्टर्स’, PFI ने तैयार किया था दस्ता: ED की चार्जशीट से खुलासा, विदेशों से आ रहा था पैसा

पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (पीएफआई) ने बीजेपी और आरएसएस के नेताओं, कार्यकर्ताओं पर हमले के लिए एलीट टीम बनाई थी, जिन्हें ‘रिपोर्टर’ कहा जाता था। इन ‘रिपोर्टर्स’ को बीजेपी-आरएसएस नेताओं पर हमले के लिए ट्रेंड किया गया था और किस तरह से उनपर हमला बोलना है। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने अपनी सप्लिमेंट्री चार्जशीट में इस बात का खुलासा किया है। ईडी ने ये चार्जशीट दिल्ली के पटियाला हॉउस कोर्ट में दाखिल की है।

आजतक के मुताबिक, ईडी ने अपनी सप्लिमेंट्री चार्जशीट में कहा है कि बीजेपी-आरएसएस के लोगों पर हमले करने के लिए जिस टीम को बनाया गया, उसे ‘रिपोर्टर्स’ कोडनेम दिया गया। इसमें शामिल लोग अपने लक्ष्य की पहचान करने और उन्हें नुकसान पहुँचाने के लिए तैयार किए गए थे।

ईडी ने कथित 120 करोड़ रुपये के धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) मामले में 12 पीएफआई सदस्यों के खिलाफ कोर्ट में सप्लिमेंट्री चार्जशीट दायर की है। इस सप्लिमेंट्री चार्जशीट में ईडी ने बताया है कि पीएफआई ने 120 करोड़ रुपए अपराध के जरिए कमाई थी। इसमें से 60 करोड़ रुपए सीधे पीएफआई के ही खाते में जमा की गई थी।

ईडी ने कहा कि पीएफआई इस धन का इस्तेमाल अवैध गतिविधियों में कर रही थी। जिसमें हिंसा में शामिल पीएफआई कार्यकर्ताओं को घर देना और उनकी शादियों में पैसों की मदद करना शामिल था। ईडी का दावा है कि पीएफआई ने ट्रेनिंग के नाम पर पीएफआई के मेंबर्स को लड़ाई के लिए तैयार किया। उन्हें हत्याओं के लिए तैयार किया गया। यही नहीं, इस तरह की ट्रेनिंग पाए लोगों को अपराधों में शामिल करने के लिए प्रेरित किया गया।

ईडी की चार्जशीट का पन्ना (फोटो साभार : newindian)

ईडी की जाँच मुख्य रूप से फेमा के तहत रुपए के हेरफेर से जुड़ी थी। लेकिन इस जाँच में ये तथ्य सामने आए कि पीएफआई ने अपने सदस्यों को हिंसक घटनाओं में ट्रेंड करने के लिए भी इन पैसों का इस्तेमाल किया गया। हालाँकि पीएफआई इन आरोपों को खारिज करता रहा है। पीएफआई के राष्ट्रीय महासचिव अनीस अहमद का दावा है कि पीएफआई पूरी तरह से भारत में ही संचालित होता है, लेकिन ईडी ने जो चार्जशीट दाखिल की है, उसमें साफ है कि पीएफआई के सैकड़ों सदस्य खाड़ी देशों में काम करते हैं और पैसे इकट्ठे करके भारत में पीएफआई के पास भेजते हैं।

ईडी ने 14,428 लोगों का ऐसा डाटा तैयार किया है, जो विदेशों में रहते हैं। ये डाटा कोझिकोड के यूनिटी हाउस में जब्त हार्ड डिस्क में मिला था। इसमें जिन लोगों के नाम पाए गए, वो सऊदी अरब की राजधानी जेद्दा, रियाद, दम्माम, यूएई से लेकर कतर, बहरीन, कुवैत, ओमान और एशिया के अन्य देशों में काम करते हैं। जो ये बताता है कि पीएफआई का नेटवर्क कितना विशाल है।