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‘अब बुलडोजर बर्दाश्त नहीं करेंगे, जान से मार देंगे’: हल्द्वानी दंगों पर मौलाना तौकीर रज़ा ने धमकाया, बरेली की सड़कों पर उतरी इस्लामी भीड़, अलर्ट पर पुलिस-प्रशासन

एक तरफ उत्तराखंड के हल्द्वानी में इस्लामी कट्टरपंथी भीड़ हिंसा कर रही है, वहीं दूसरी तरफ उत्तर प्रदेश के बरेली से धमकी दी जा रही है। मौलाना तौकीर रज़ा ने कहा है कि जो हम पर हमला करेगा, उसे मार देंगे। मौलाना तौकीर रज़ा का कहना है कि बुलडोजर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। इतना ही नहीं, उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के लिए आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल भी कर दिया। मौलाना तौकीर रज़ा पहले भी अपने भड़काऊ बयानों के कारण जाने जाते रहे हैं।

मौलाना तौकीर रज़ा ने कहा, “अब किसी बुलडोजर को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। अगर कोर्ट संज्ञान नहीं ले रहा है तो हम अपनी हिफाजत खुद करेंगे। हमें कानूनी अधिकार है अगर हमारे ऊपर हमला होता है तो हम उसको जान से मार दें। ये हमारा कानूनी अधिकार है।” मौलाना के इस भड़काऊ बयान के बाद बरेली में अलर्ट जारी कर दिया गया है। यूपी के प्रमुख मस्जिदों में नमाज के समय चौकसी रखने के लिए पुलिस को कहा गया है। यूपी पुलिस मुख्यालय से अलर्ट आया है। यूपी में जगह-जगह फ्लैग मार्च किया जा रहा है।

साथ ही तौकीर रज़ा खान ने सामूहिक गिरफ़्तारी और ‘जेल भरो आंदोलन’ का भी आह्वान किया है। इसके कारण हजारों लोग सड़क पर उतर आए हैं। पूरे इलाके को छावनी में तब्दील कर दिया गया है। ड्रोन से निगरानी की जा रही है। तौकीर रज़ा के समर्थकों को रोकने का प्रयास किया जा रहा है। समर्थक बैरिकेड्स गिरा कर आगे बढ़ गए। तौकीर रज़ा ने धमकाते हुए कहा है कि क्या तुम हमारे घर पर बुलडोजर चलाओगे तो हम चुप बैठेंगे?

तौकीर रज़ा का पूछना है कि अगर कोई अपराधी है तो उसके मकान, मदरसा या मस्जिद पर बुलडोजर क्यों चलाया जा रहा है? उन्होंने देश भर में नफरत का माहौल बनाए जाने का आरोप लगाते हुए कहा कि बरेली से शुरू हुए अभियान को पूरे भारत में चलाया जाएगा। सुरक्षा को लेकर 1000 से अधिक सुरक्षाकर्मी लगाए गए हैं। PAC और RAF को भी तैनात किया गया है। यूपी भाजपा के नेता मोहसिन ने इसे माहौल बिगाड़ने की साजिश करार दिया है।

हल्द्वानी में कूड़ा बीनता है अजय, दंगाइयों ने मार दी गोली: बिलखती माँ पूछ रही, क्या गलती थी उसकी?

हल्द्वानी में दंगाइयों के निशाने पर हर वो इंसान था, जो मुस्लिम नहीं था। इसी क्रम में दंगाइयों ने मासूम अजय को भी गोली मार दी, जो कूड़ा बीनता था और उससे मिले पैसों से अपने घर को चलाने में माँ की मदद करता था। उसकी माँ रोते हुए सभी से सवाल पूछ रही है कि उसके बेटे को क्यों मारा? उसकी गलती क्या थी?

निष्पक्ष प्रतिदिन नाम के एक्स हैंडल पर अजय की माँ का वीडियो पोस्ट किया गया। इस वीडियो में वो पूछ रही हैं कि आखिर उनके बेटे की गलती क्या है? जो उसे गोली मार दी? इस वीडियो को शेयर करते हुए कैप्शन में लिखा है, “मेरे बेटे को दंगाइयों ने गोली मार दी। मेरे बेटे की कोई गलती नहीं थी। वो जिंदगी और मौत की लड़ाई लड़ रहा है।” हल्द्वानी हिंसा में घायल अजय की माँ।”

जतिंदर पाल खन्ना नाम के एक्स हैंडल पर बताया गया है कि अजय दवा लेने जा रहा था, जब उसे गोली मारी गई। अजय की तस्वीर पोस्ट करते हुए लिखा, “आखिर अजय की क्या गलती थी कि दंगाइयों ने इसपर गोली चला दी? मेडिकल से दवाई लेकर आते वक्त दंगाइयों ने मारी गोली। गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती।”

हल्द्वानी में इस्लामी कट्टरपंथियों का कहर

बता दें कि हल्द्वानी के बनभूलपुरा थाना इलाके के ‘मालिक का बगीचा’ में गुरुवार (08 फरवरी 2024) को अतिक्रमण विरोधी अभियान चला रही नगर निगम और पुलिसकर्मियों पर पथराव हुआ। इसके बाद टीम पर पेट्रोल बम से हमला किया गया, तो इस्लामिक कट्टरपंथियों की भीड़ ने थाने को घेरकर गाड़ियों को आग लगा दी और थाने को भी छतिग्रस्त कर दिया। इस दौरान हिंसा में 6 लोगों की मौत भी हो गई है, वहीं, तीन सौ से अधिक लोग घायल हो गए हैं। घायलों में प्रशासनिक अधिकारियों के अलावा 200 से अधिक पुलिसकर्मी भी शामिल हैं।

उत्तराखंड में नाई की दुकान में काम करता था इरफान, दोस्त के साथ मिल 2 हिंदू नाबालिग को ले भागा: बरेली से गिरफ्तार, लड़कियाँ बरामद

उत्तराखंड में लव जिहाद के मामले लगातार बढ़ते जा रहे हैं। मामला पिथौरागढ़ के धारचूला का है। यहाँ दो हिंदू नाबालिग बहनों को दो मुस्लिम शादी के नाम पर बहला-फुसलाकर अपने साथ लेकर भाग गए। इसको लेकर इलाके में तनाव फैल गया है। हालाँकि, मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने दोनों नाबालिग बहनों को उत्तर प्रदेश के बरेली से बरामद कर लिया है।

पिथौरागढ़ के पुलिस अधीक्षक लोकेश्वर सिंह ने गुरुवार (8 फरवरी 2024) को बताया कि दोनों लड़कियों को बरेली से बचाया गया और एक आरोपित को गिरफ्तार कर लिया गया है। आरोपित के खिलाफ IPC (आईपीसी) की धारा 363 और 376 तथा यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण अधिनियम (POCSO) के तहत भी मामला दर्ज किया गया है। दूसरे आरोपित की गिरफ्तारी के लिए पुलिस लगातार छापेमारी कर रही है।

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, इस घटना का मुख्य आरोपित मोहम्मद इरफान धारचूला शहर में एक नाई की दुकान में काम करता था। वह किसी तरह दोनों नाबालिग लड़कियों के संपर्क में आया और उन्हें अपनी जाल में फँसा लिया। इसके बाद उन लड़कियों को वह बहला-फुसलाकर उत्तर प्रदेश स्थित अपने गृह नगर बरेली लेकर चला गया।

पुलिस ने बताया कि पूछताछ के दौरान इरफान ने खुलासा किया कि उसका इरादा लड़कियों को कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु ले जाने का था। इस घटना के बाद स्थानीय लोगों और हिंदू संगठनों ने शहर में विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया। स्थानीय लोगों ने इस घटना को लव जिहाद का मामला बताया और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की माँग शुरू कर दी।

यह घटना 1 फरवरी 2024 की है। शहर में तनाव को देखते हुए पुलिस ने लड़कियों को बरामद कर लिया और 4 फरवरी को इरफान को भी गिरफ्तार कर लिया। एक अपराधी की गिरफ्तारी के बाद शहर में शांति और सामान्य स्थिति लौट आई है। इस घटना के बाद एसपी लोकेश्वर सिंह ने स्थानीय पुलिस को पिथौरागढ़ में रहने वाले सभी बाहरी लोगों का सत्यापन फिर से शुरू करने का फैसला किया है।

घटना के विरोध में धारचूला व्यापारी संघ का कहना है कि शहर में व्यापार करने वाले सभी बाहरी व्यापारियों का जब तक पुलिस सत्यापन नहीं हो जाता है, तब तक पंजीकरण नहीं होगा। धारचूला व्यापार संघ के अध्यक्ष भूपेंद्र सिंह थापा ने कहा, “हमने व्यापार संघ धारचूला में पंजीकृत सभी 630 व्यापारियों की सदस्यता रद्द कर दी है। व्यापारियों का नया पंजीकरण पुलिस द्वारा सत्यापन के बाद ही किया जाएगा।”

भूपेंद्र सिंह थापा ने कहा कि पुलिस सत्यापन की प्रक्रिया पूरी होने के बाद केवल उन्हीं व्यापारियों का पंजीकरण किया जाएगा, जो वर्ष 2000 से धारचूला में व्यापार कर रहे हैं। उन्होंने कहा, “यदि किसी परियोजना के लिए मजदूरों को शामिल करना आवश्यक हो जाता है तो संबंधित ठेकेदारों को अपनी जिम्मेदारी पर बाहर से मजदूरों को लेने की अस्थायी अनुमति दी जाएगी।”

बता दें कि उत्तराखंड लव जिहाद का नया टारगेट प्वॉइंट बना है। इसी शहर में साल 2019 में एक हिंदू युवती के साथ दुष्कर्म करके उसका वीडियो वायरल कर दिया गया था। उस दौरान स्थानीय लोगों ने इसके लिए एक मुस्लिम युवक को दोषी बताया था। हिंदू संगठनों ने इस मामले को लव जिहाद बताते हुए कड़ी कार्रवाई की माँग करते हुए प्रदर्शन भी किया था।

इसी तरह, अभी कुछ दिन पहले ही हल्द्वानी के मुखानी थाना क्षेत्र में नावेद मलिक नाम के एक युवक ने अमन बनकर एक हिंदू युवती को फँसाया। इसके बाद उसे अपने घर बुलाया और उसे नशीला पदार्थ पिलाकर दुष्कर्म किया। इसके बाद युवती पर वह धर्म परिवर्तन का दबाव डाल रहा था। इस घटना में पहले से ही शादीशुदा नावेद की बीवी भी शामिल रही।

हिंसा के पीछे PFI और बांग्लादेशी घुसपैठिए, ऐसी धाराएँ लगे जो जमानत भी न मिले: हल्द्वानी दंगों पर बोले MP बृजलाल, UP के रह चुके हैं DGP

हल्द्वानी हिंसा के पीछे प्रतिबंधित इस्लामी संगठन पाॅपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (PFI) और बांग्लादेशी घुसपैठियों का हाथ हो सकता है। यह आशंका बीजेपी के राज्यसभा सांसद बृजलाल ने जताई है। वे उत्तर प्रदेश के पुलिस महानिदेशक (EX DGP) भी रह चुके हैं। अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई को जायज ठहराते हुए उन्होंने दंगाइयों पर ऐसी धाराएँ लगाने की वकालत की है जिससे उन्हें जमानत भी न मिल सके।

हल्द्वानी में गुरुवार (8 फरवरी, 2024) को मुस्लिम भीड़ ने अतिक्रमण हटाने पहुँची पुलिस-प्रशासन की टीम पर हमला कर दिया था और जम कर हिंसा की थी। सांसद बृजलाल का कहना है कि जिस तरीके से इस हिंसा को अंजाम दिया गया है उससे यह सुनियोजित लगता है। घटना की विस्तृत जाँच और दोषियों को कड़ी सजा दिलाने की उन्होंने माँग की है। इसके लिए उन्होंने कहा है कि आरोपितों पर ऐसी धाराएँ लगाईं जाएँ, जिनमें उन्हें जमानत तक ना मिले।

भाजपा सांसद ने कहा है कि इस हिंसा के पीछे प्रतिबंधित इस्लामी संगठन PFI और भारत में चोरी-छुपे आए बांग्लादेशी घुसपैठियों का हाथ भी हो सकता है। हल्द्वानी में थाने पर हमले को उन्होंने गंभीर अपराध बताते हुए इन दंगों के मास्टरमाइंड को जेल भेजने की माँग की है। जिस अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई के दौरान पुलिस और प्रशासन पर हमला हुआ, उसे सांसद बृजलाल ने पूरी तरह से कानूनी बताया है। उन्होंने कहा है कि यह मामला न्यायालय में नहीं था, ऐसे में कार्रवाई होनी थी और यह सही है।

बृजलाल वर्ष 2011-12 के बीच उत्तर प्रदेश के पुलिस के मुखिया रहे थे। वह 1977 बैच के आईपीएस अधिकारी हैं। गौरतलब है कि हल्द्वानी में पुलिस-प्रशासन की टीम मुस्लिम बहुल इलाके बनभूलपुरा में अतिक्रमण हटाने पहुँची थी। इस दौरान कट्टरपंथी मुस्लिम दंगाइयों ने इन पर हमला बोल दिया। हमले में सैकड़ों पुलिसकर्मी घायल हो गए हैं।

इस्लामी दंगाइयों ने इस दौरान खूब उत्पात मचाया और कई वाहन भी जलाए। हमले में कई महिला पुलिसकर्मी भी घायल हुई हैं। इस पूरे बवाल के बाद हल्द्वानी में कर्फ्यू लगा दिया गया है और सुरक्षा बलों की तैनाती कर दी गई है। प्रशासन ने दंगाइयों को देखते ही गोली मारने के आदेश दिए हैं। हिंसा में अब तक 6 व्यक्तियों की मौत हो चुकी है।

‘विराट कोहली-अनुष्का शर्मा का होने वाला है दूसरा बच्चा’ : एबी डी विलियर्स ने पहले किया दावा, फिर यू-टर्न लेकर कहा- मुझसे गलती हो गई

भारत और इंग्लैंड के बीच जारी 5 मैचों की टेस्ट सीरीज के शुरुआती दो मुकाबलों में भारतीय क्रिकेटर विराट कोहली के नजर न आने के बाद संस्पेंस था कि आखिर भारत के पूर्व कप्तान विराट कोहली ब्रेक लेकर कहाँ गायब हैं। लोग इस पर अपने-अपने कयास लगा ही रहे थे कि 3 फरवरी को खबर फैली कि विराट कोहली दूसरी बार पिता बनने वाले हैं। ये खबर उनके मित्र एबी डीविलियर्स ने फैलाई।

उन्होंने कहा कि कोहली दोबारा पिता बनने वाले हैं इसलिए वो ब्रेक पर हैं। हालाँकि अब एबी ने अपने बयान को वापसी लिया है। साउथ अफ्रीका के दिग्गज बल्लेबाज एबी डिलिवियर्स ने कुछ दिनों पहले विराट कोहली के ब्रेक को लेकर अपनी ओर से दी गई जानकारी को गलत बताया है। उन्होंने कहा,

“क्रिकेट बाद में आता है, सबसे पहले परिवार आता है। मुझसे बहुत बड़ी गलती हो गई, मैंने जो जानकारी दी, वह गलत थी। विराट कोहली को देश के लिए खेलते हुए बीच में ब्रेक लेने का पूरा अधिकार है। परिवार सबसे पहले और उसके बाद क्रिकेट आता है। विराट कोहली फैमिली इमरजेंसी के चलते बाहर हैं। वह इस समय कहाँ हैं किसी को भी नहीं पता है। विराट कोहली के दुनियाभर में जितने भी फैन्स हैं, वह बस उनके लिए बेस्ट विश करें। विराट कोहली के ब्रेक लेने का जो भी कारण हो, उम्मीद करता हूँ और मजबूत होकर मैदान पर वापसी करेंगे।”

बता दें कि एबी डीविलियर्स ने विराट कोहली के गायब होने पर कहा था, “मैं बस इतना जानता हूँ कि वह ठीक हैं।” वह अपने परिवार के साथ थोड़ा समय बिता रहे हैं, यही कारण है कि वह पहले दो टेस्ट मैच मिस कर रहे हैं। मैं किसी और चीज की पुष्टि नहीं करने जा रहा हूँ। मैं उसे वापस देखने के लिए इंतजार नहीं कर सकता। वह ठीक हैं, अच्छा कर रहे हैं।”

इसी दौरान उन्होंने यह भी कहा था, “हाँ, उनका दूसरा बच्चा आने वाला है। हाँ, यह परिवार का समय है और चीजें उनके लिए महत्वपूर्ण हैं। यदि आप खुद के प्रति सच्चे और सच्चे नहीं हैं, तो आप इस बात का ध्यान नहीं रखते कि आप यहा किस लिए हैं। मुझे लगता है कि ज्यादातर लोगों की प्राथमिकता परिवार है। आप इसके लिए विराट को जज नहीं कर सकते।”

हल्द्वानी जल गया, पर रवीश कुमार की नहीं बुझी है प्यास: चाहते हैं अब मौके पर पहुँचकर आग भड़काए विपक्ष, दंगाइयों की बने ढाल

उत्तराखंड के हल्द्वानी में गुरुवार (8 फरवरी, 2024) को हिंसा भड़क गई। थाना फूँक दिया गया, पेट्रोल पंप जला दिया गया, महिला पुलिसकर्मियों को घायल अवस्था में इलाज कराते हुए देखा गया, पत्थरबाजी-गोलीबारी हुई और 6 जिलों की पैरामिलिट्री के अलावा भारतीय सेना को भी बुलाया गया है। हल्द्वानी का बनभूलपुरा अवैध अतिक्रमण के लिए कुख्यात है, जहाँ 4000 से भी अधिक घर सरकारी जमीन पर अवैध कब्ज़ा कर के बनाए गए हैं।

इतनी हिंसा हो गई लेकिन इसके बावजूद NDTV के पत्रकार रहे रवीश कुमार जो अब यूट्यूबर हैं, वो दंगाइयों के बचाव में उतर आए। रवीश कुमार को दुःख है कि हल्द्वानी में 6 लोगों की मौत हुई है और 300 घायल हैं। उनका कहना है कि विपक्ष के बड़े नेताओं को बनभूलपुरा जाना चाहिए और वहाँ ठहर कर चीजों का पता लगाना चाहिए। रवीश कुमार को वहाँ जो भी हुआ है उसमें कब्ज़ा हटाने के नाम पर कुछ और होता हुआ नज़र आ रहा है। पता नहीं उन्होंने किस रंग का चश्मा लगा रखा है।

DM वंदना सिंह ने स्पष्ट कहा है कि भीड़ ने न सिर्फ थाने को जलाने की कोशिश की, बल्कि पुलिसकर्मियों को ज़िंदा जलाने का भी प्रयास किया। रवीश कुमार जैसे तथाकथित पत्रकारों को यही तरीका आता है – भाजपा शासित राज्य में कुछ गलत हो तो सरकार की आलोचना करो, अपराधियों पर कार्रवाई हो तो उन अपराधियों को ही पाक-साफ़ साबित करने का प्रयास करो। रवीश कुमार यही कर रहे हैं। दंगाइयों का बचाव कर रहे हैं, आग और भड़के इसकी जुगत लगा रहे हैं।

दंगों के बीच विपक्षी नेताओं को कहीं डेरा डालने के लिए कहने का क्या अर्थ है? विपक्षी नेता जाएँगे तो उनके लिए अतिरिक्त सुरक्षा की व्यवस्था करनी पड़ेगी, उनके समर्थक वहाँ पर जुटेंगे, नारेबाजी-विरोध प्रदर्शनों का माहौल बनेगा, प्रशासन पर अतिरिक्त दबाव पड़ेगा – ये सब करवा के रवीश कुमार क्या हासिल करना चाहते हैं? जो इलाका पहले से ही हिंसा का अड्डा बन चुका है, उसे अब राजनीति का अड्डा क्यों बनाना चाहते हैं? क्या वो अपने साथी राजदीप सरदेसाई की तर्ज पर ‘गिद्ध पत्रकारिता’ को बढ़ावा दे रहे हैं?

रवीश कुमार लिखते हैं कि कब्ज़ा हटाने के नाम पर कुछ और हो रहा है। ऐसा कर के वो उस न्यायालय का भी अपमान कर रहे हैं, जिसके आदेश पर प्रशासन अवैध अतिक्रमण हटाने पहुँचा था। मुस्लिम कह रहे हैं कि मस्जिद और मदरसे को तोड़ा गया, जबकि डीएम वंदना सिंह का कहना है कि वो संरचनाएँ धार्मिक के रूप में पंजीकृत ही नहीं थीं। क्या रवीश कुमार अवैध अतिक्रमण का समर्थन कर रहे हैं? भारत का विपक्ष जब अभी के संवेदनशील मुद्दों पर भी राजनीति करने से बाज नहीं आता, उसे आग भड़काने की सलाह देना सचमुच घातक है।

रवीश कुमार का आरोप है कि चुनावी ध्रुवीकरण हो रहा है। उनका कहना है कि बहुसंख्यक आबादी ‘गोदी मीडिया’ और Whatsapp के सहारे है। यानी, अवैध अतिक्रमण करने वाले मुस्लिम, हिंसा करने वाले मुस्लिम – लेकिन दोष बहुसंख्यक हिन्दुओं का। जब राष्ट्रपति भवन में इफ्तार पार्टी होती थी और NDTV के कार्यक्रम होते थे, तब इस ‘ध्रुवीकरण’ की याद नहीं आई? क्या हिन्दू मूर्ख हैं? रवीश की मानें तो मुस्लिम समाज संविधान का कोई अनुच्छेद पढ़ कर उसके हिसाब से अतिक्रमण और हिंसा कर रहा है, जबकि इसका विरोध करने वाले हिन्दू भ्रमित हैं।

क्या अवैध अतिक्रमण का विरोध का मतलब है ‘गोदी मीडिया’ से प्रभावित होना या फिर Whatsapp संदेशों के हिसाब से राय बनाना? या फिर हिंसा का विरोध करने वाले मूर्ख हैं और हिंसा करने वाले पाक-साफ़? रवीश कुमार युवाओं को भड़का रहे हैं कि उन्होंने गलत रास्ता चुन लिया है। भारतीय सेना की ‘अग्निवीर’ योजना के खिलाफ भी ऐसे ही माहौल बनाया गया था, लेकिन इस गिरोह को अफ़सोस है कि देश में आग क्यों नहीं लगी। अब ये युवाओं से नाराज़ हैं, हिंसा क्यों नहीं तेज़ हो रही।

रवीश कुमार को हिंदी समाचारपत्रों से भी शिकायतें हैं। उनमें मस्जिदों के नीचे मंदिर होने की खबर होती है, जिससे रवीश को समस्या है। क्या रवीश कुमार को संतुष्ट करने के लिए इतिहास बदल दिया जाए? अगर बाबरी ढाँचे के नीचे राम मंदिर था तो क्या एक व्यक्ति की संतुष्टि के लिए इसे बदल दिया जाए? आर्कियोलॉजिस्ट KK मुहम्मद के शोध में भी यही मिला। केके मुहम्मद भी झूठे हैं? काशी, मथुरा या भोजशाला जैसे ऐसे कई मंदिर हैं, जिन पर कब्ज़ा किया गया। इस पर बात क्यों न हो, जब इतिहास के तथ्य मौजूद हैं, सबूत मौजूद हैं?

रवीश कुमार को इन सब में वोट बैंक दिख रहा है। रवीश कुमार ने तो इस पोस्ट में अदालतों तक को सांप्रदायिक बता दिया है। उन्होंने इसे ‘अदालती सांप्रदायिकता’ करार दिया है। फ़िलहाल सुप्रीम कोर्ट उनकी नज़र में क्लीन है, इसीलिए वो सुप्रीम कोर्ट से इस पर ध्यान देने के लिए कह रहे हैं। कल को सुप्रीम कोर्ट को भी वो इसी तरह गाली देंगे। मतलब निचली अदालतों को खत्म कर दिया जाए? रवीश को हर उस व्यवस्था और व्यक्ति से दिक्कत है, जो मुस्लिम तुष्टिकरण के हिसाब से काम नहीं करता।

रवीश कुमार को घायल पुलिसकर्मियों के चेहरे नज़र नहीं आते। उन्हें थाना और पेट्रोल पंप फूँकने वाली भीड़ नहीं दिखती, उस भीड़ के मजहबी इरादे नहीं दिखते। दिखते भी होंगे तो उन्हें इसका बचाव करना है। रवीश कुमार को सरकारी जमीन पर कब्ज़ा ठीक लगता है। रवीश कुमार को ये भी ठीक लगता है कि हिंसक भीड़ महिलाओं-बच्चों को आगे कर के ढाल बनाए। रवीश कुमार को ये नहीं दिख रहा कि उत्तराखंड को ‘देवभूमि’ कहा जाता है, यहाँ हिन्दू धर्म से संबंधित कई तीर्थ स्थल हैं और वहाँ अमानुषिक गतिविधियों की अनुमति नहीं दी जा सकती।

असल में रवीश कुमार इतिहास को नकार देना चाहते हैं। वर्तमान को नकार देना चाहते हैं। उनका कहना है कि दिल्ली में मस्जिद ध्वस्त कर दिया गया। नहीं, दिल्ली और यूपी में कई मंदिरों को भी हटाया गया जो अतिक्रमण विरोधी कार्रवाई का ही हिस्सा था। कहीं किसी प्रकार की हिंसा नहीं हुई। झंडेवालान मंदिर ने तो खुद अपना गेट तोड़ा। प्रशासन के साथ सहयोग किया। लेकिन, मस्जिदों-मजारों के नाम पर अवैध अतिक्रमण की इजाजत क्यों दी जाए?

‘राम मंदिर तोड़ दो, उस पर मस्जिद बना दो’: OP जिंदल यूनिवर्सिटी बना नया ‘JNU’, वामपंथी गैंग ने ब्राह्मणों-हिंदुत्व पर उगला जहर

हरियाणा के सोनीपत में एक विश्वविद्यालय है, नाम है- ओपी जिंदल ग्लोबल यूनिवर्सिटी (विश्वविद्यालय)। ये एक बार फिर से विवादों में आ गया है। यहाँ पर वामपंथी छात्रों ने एक गोष्ठी यानी सेमिनार का आयोजन किया, जो हिंदुओं के खिलाफ घृणा से भरा रहा। इस कार्यक्रम में राम मंदिर को गिराने और उसकी जगह पर वहाँ मस्जिद बनाने तक की बात कही गई, साथ ही हिंदुओं के विरुद्ध जमकर आग उगली गई।

ओपी जिंदल ग्लोबल यूनिवर्सिटी में भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) से कथित रूप से जुड़े छात्र संगठन रिवोल्यूशनरी स्टूडेंट्स लीग (आरएसएल) ने बुधवार ( 7 फरवरी 2024 ) को इस कार्यक्रम का आयोजन किया था। इसमें “राम मंदिर: ब्राह्मणवादी हिंदुत्व फासीवाद का एक हास्यास्पद प्रोजेक्ट” (Ram Mandir: A Farcical Project of Brahmanical Hindutva Fascism) नाम से परिचर्चा रखी गई। जिसमें आरएसएल से जुड़े वामपंथी छात्रों ने कथित तौर पर राम मंदिर तोड़ने और उसकी जगह पर एक मस्जिद को बनाने का प्रस्ताव रखा।

इस कार्यक्रम का आयोजन करने वालों ने तर्क दिया कि राम मंदिर का निर्माण पूरे भारत में मुसलमानों और दलितों के खिलाफ किए गए घृणा अपराधों से जुड़ी हुई है। यही नहीं, 22 जनवरी 2024 को अयोध्या के भव्य मंदिर में रामलला की प्राण प्रतिष्ठा को ‘ब्राह्मणवादी हिंदुत्व फासीवादी शासन’ की क्रूरता और जन-विरोधी भावना के सबके सामने आ जाने का दावा किया गया। यही नहीं, इस कार्यक्रम से जुड़े ब्रोशन में रिवोल्यूशनरी स्टूडेंट्स लीग ने लोगों से भीमा कोरेगाँव काँड के आरोपितों में से एक अर्बन नक्सल कवि वरवर राव की विवादास्पद पुस्तक “फाइट ब्राह्मणिकल हिंदुत्व फासीवाद” को भी पढ़ने के लिए कहा।

वरवर राव की किताब में हिंदुत्व विरोधी प्रोपेगेंडा जमकर भरा है। उसके एक अंश में “मोहम्मद अखलाक, प्रोफेसर एमएम कलबुर्गी और याकूब मेमन की हत्याएं कई मायनों में मोदी के नेतृत्व वाले भाजपा-शासन के तहत देश में मौजूदा स्थिति का प्रतीक बन गई हैं।” जैसी बातें लिखी गई हैं।

वरवर राव के किताब का एक अंश

कई विवादों में घिरा रहा है ओपी जिंदल ग्लोबल यूनिवर्सिटी

ओपी जिंदल ग्लोबल यूनिवर्सिटी के इतिहास में यह घटना अकेली नहीं है। इससे पहले भी विश्वविद्यालय शैक्षणिक उत्पीड़न के आरोपों से लेकर यहूदी विरोधी और हिंदू विरोधी विचारों को मंच देने जैसे विवादों के घेरे में आ चुका है। ऐसी ही एक घटना में प्रोफेसर समीना दलवाई एक क्लास के अंदर एक छात्र की डेटिंग एप प्रोफाइल स्क्रीन पर दिखाई थी। इसके बाद उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई थी।

इसी विश्वविद्यालय में 8 फरवरी, 2023 को बीबीसी की प्रतिबंधित डॉक्यूमेंट्री “इंडिया: द मोदी क्वेश्चन” की स्क्रीनिंग भी की गई थी। यही नहीं, साल 2022 में जिंदल ग्लोबल लॉ स्कूल में चल रहे कक्षा सत्र का एक वीडियो सामने आया था, जिसमें विश्वविद्यालय के सहायक प्रोफेसर अरिजीत घोष को कश्मीर के बारे में “भारत के कब्जे वाला” क्षेत्र बताते हुए देखा गया था।

ये समाचार मूल रूप से अंग्रेजी भाषा में प्रकाशित किया गया है, मूल लेख पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें।

हिंदू बन मोहम्मद अनीश ने नाबालिग को फँसाया, गोरखपुर से सीतामढ़ी बुलाया; बेचने की कोशिश का दावा: पुलिस ने रेप-लव जिहाद नकारा

बिहार की सीतामढ़ी पुलिस ने मोहम्मद अनीश को गिरफ्तार किया है। उस पर एक हिंदू नाबालिग को इंस्टाग्राम के जरिए फँसाने और फिर गोरखपुर से सीतामढ़ी बुलाकर होटल में रखने का आरोप है। मीडिया रिपोर्टों में नाबालिग के साथ रेप और उसे बेचने की कोशिश का भी दावा किया गया है। लेकिन पुलिस ने इन दावों को नकार दिया है। ऑपइंडिया को बताया है कि न ही यह लव जिहाद का मामला है और न ही लड़की को बेचने की कोशिश की बात सामने आई है।

जानकारी के अनुसार, सीतामढ़ी के मोहम्मद अनीश का कुछ महीनों पहले गोरखपुर की हिंदू नाबालिग से सम्पर्क हुआ था। कथित तौर पर नजदीकियाँ बढ़ने के बाद अनीश ने नाबालिग को पहले पटना और फिर सीतामढ़ी बुलाया। अनीश ने उसका इलाज करवाने का वादा किया था। साथ ही खुद को पैसे वाले परिवार से बताया था।

इसके बाद नाबालिग और अनीश तीन दिन तक सीतामढ़ी के एक होटल में रुके। वे खाने के लिए ही बाहर आते थे। जागरण की एक रिपोर्ट में बताया गया है कि इस दौरान अनीश ने नाबालिग के साथ दुष्कर्म भी किया। रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया है कि आरोपित ने अपनी मजहबी पहचान छिपाकर हिंदू नाबालिग को प्रेमजाल में फँसाया था। वहीं अमर उजाला की रिपोर्ट में बताया गया है कि नाबालिग को अनीश रेड लाइट एरिया में बेचने की कोशिश कर रहा था। वह बचने के लिए होटल से भागी, जिसके बाद राहगीरों ने उसको बचाया।

हालाँकि, सीतामढ़ी के एसडीपीओ राम कृष्णा ने इन दावों को नकार दिया है। ऑपइंडिया से बातचीत में उन्होंने बताया है कि इस मामले में लव जिहाद और रेड लाइट एरिया में बेचने का एंगल नहीं है। उन्होंने कहा है कि नाबालिग और अनीश के बीच एक-दूसरे के धर्म को लेकर ज्यादा बातचीत नहीं हुई है।

उन्होंने बताया है कि नाबालिग ने पुलिस काउंसलिंग के दौरान दोनों के बीच चुम्बन की बात स्वीकारी है। हालाँकि, लड़की के नाबालिग होने के चलते POCSO के तहत मामला दर्ज किया गया है। नाबालिग को बचपन बचाओ NGO को सौंप दिया गया है। वह महिला पुलिस की देखरेख में हैं। अभी उसका कोर्ट में बयान कराया जाएगा। पुलिस नाबालिग के परिवार वालों के संपर्क में है। उसे घर वापस भेजने की तैयारी हो रही है।

कॉन्ग्रेस कह रही – कोर्ट के बजाय मौलवी-मौलानाओं से आदेश लेते: हल्द्वानी में कट्टरपंथियों के साथ खड़ी पार्टी, सुप्रीम कोर्ट पहुँच पहले भी इन्होंने ही भड़काए थे दंगे

कोर्ट के आदेश के बाद उत्तराखंड के हल्द्वानी में प्रशासन ने अवैध अतिक्रमण के खिलाफ अभियान चलाया, जिसके बाद कट्टरपंथियों ने इतना उपद्रव मचाया कि इसमें कम-से-कम 6 लोगों की मौत हो गई है। ये अभियान कई दिनों से चल रहा था, जिसके तहत सरकारी जमीनों पर अवैध रूप से कब्जा करके बनाए बनाए गए इमारतों को ध्वस्त किया जा रहा था। इन इमारतों में मकानों और धार्मिक स्थल भी थे।

प्रशासन गुरुवार (8 फरवरी 2024) को हल्द्वानी के बनफूलपुरा थाना इलाके के ‘मालिक के बगीचे’ में पहुँचा और अवैध रूप से बनी मस्जिद और मदरसे पर बुलडोजर चला दिया। इसके बाद इस्लामी कट्टरपंथियों की भीड़ ने पुलिस पर हमला कर दिया। इस भीड़ में पुरुषों के साथ महिलाएँ भी शामिल थीं। हमले में कई पुलिस वाले घायल भी हो गए हैं।

हमले में पत्थरबाजी के साथ ही पेट्रोल-बम भी चलाए गए। दर्जनों गाड़ियों को आग लगा दिया गया। उन्मादी भीड़ ने पुलिस थाने को घेर लिया गया और पुलिस वालों को निशाना बनाना शुरू कर दिया। इस हिंसा में 6 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 300 से अधिक लोग घायल हैं। घायलों में अधिकांश पुलिसकर्मी और अधिकारी हैं। हालात को देखकर हल्द्वानी में अगले आदेश तक कर्फ्यू लगा दिया गया है।

दरअसल, कोर्ट के आदेश पर की गई प्रशासन द्वारा अवैध मस्जिदों और मदरसों पर की गई कार्रवाई के खिलाफ के बाद कट्टरपंथियों की कार्रवाई का कॉन्ग्रेस नेताओं ने एक तरह से समर्थन कर दिया। कॉन्ग्रेस नेताओं ने जिस लहजे में इस पूरे घटनाक्रम पर अपनी प्रतिक्रिया दी, उससे यही लगता है कि कोर्ट के आदेश बजाय प्रशासन को मौलवी एवं मौलानाओं से आदेश लेना चाहिए था और उनकी सहमति होती, तभी प्रशासन को कार्रवाई करनी चाहिए थी।

अधिकारियों को उतावला बताते हुए कॉन्ग्रेस के स्थानीय विधायक सुमित हृदयेश ने कहा, “ये प्रशासन और अधिकारियों की बहुत बड़ी चूक है। स्थानीय लोगों, मौलानाओं को कॉन्फिडेंस में लेकर बात की जानी चाहिए थी। आप (प्रशासन) एकदम से वहाँ पहुँच जाते हैं और बिना इन्फॉरमेशन के वहाँ ऐसी कार्रवाई को अंजाम दिया। जो भी हुआ, अनुचित हुआ। आजादी के बाद से ऐसा हमने हल्द्वानी शहर में ऐसा कभी नहीं देखा। ये बड़ा काला दिन है।”

ये वही सुमित हृदयेश हैं, जो रेलवे की जमीन पर कब्जा करके बसे हजारों लोगों की बस्तियाँ को हटाने के खिलाफ खड़े हो गए थे। मीडिया रिपोर्ट में कहा गया था कि यहाँ 20 इबादतगाह भी बनाए गए हैं। मामला जब सुप्रीम कोर्ट में गया तो अवैध कब्जाधारियों को बचाने के लिए कॉन्ग्रेस के सलमान खुर्शीद खड़े हो गए। वहीं, कॉन्ग्रेस के स्थानीय विधायक सुमित हृदयेश भी खड़े हो गए।

लोगों का तो ये भी कहना है कि इन अवैध बस्तियों को बसाने में सुमित हृदयेश की माँ इंदिरा हृदयेश का भी बड़ा हाथ था। कहा जाता है कि वहाँ जब गफूर बस्ती के सीमांकन का काम होता था, तब भी यहाँ के लोग इसका विरोध करते थे और इंदिरा हृदयेश भी इसमें साथ रहती थीं। इंदिरा हृदयेश भी उत्तराखंड कॉन्ग्रेस की बड़ी नेता रही हैं। इस पूरे मामले में एकमुश्त वोट पाने की नीति की बहुत बड़ी भूमिका है।

दरअसल, उत्तराखंड विधानसभा में हाल में समान नागरिक संहिता (UCC) पारित किया गया है, जिसको लेकर भी विपक्षी दलों द्वारा माहौल खराब करने की कोशिश की गई। कॉन्ग्रेस के बड़े नेता एवं उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने भी कहा था कि UCC से राज्य में अशांति हो सकती है। राज्य के हालत मणिपुर में तब्दील हो सकते हैं। उन्होंने UCC के बाद होने वाली हिंसा का उदाहरण कूकी-मैतेई समुदाय से जोड़कर दिया था।

इतना ही नहीं, मुस्लिम मौलानाओं ने भी सड़कों पर उतरने की धमकी दी थी। इसके बाद मुस्लिम सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर और खुद को पीस पार्टी का राष्ट्रीय प्रवक्ता बताने वाला शादाब चौहान मुस्लिमों की ताकत को कम ना आँकने की धमकी दी थी। शादाब चौहान ने हल्द्वानी दंगे (8 फरवरी, 2024) से दो दिन पहले उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को धमकी देते हुए एक सोशल मीडिया पोस्ट लिखा था।

अपने पोस्ट में शादाब ने लिखा था, “किसी की औकात नहीं है जो भारत के मुसलमानों को अल्लाह के हुकुम और हमारे नबी के तरीके पर चलने से रोक सके। अगर तुम हमको कमजोर समझ रहे हो तो गलती कर रहे हो, हमारी ताकत का अंदाज़ा तुम नहीं लगा सकते। हम हर संवैधानिक संघर्ष के लिए तैयार हैं। हमारी ताकत संविधान का अनुच्छेद 25 है, जिसके सामने तुम्हारी कोई हैसियत नहीं है। उत्तराखंड के मुख्यमंत्री और कॉन्ग्रेस, तुम्हारी भी जिम्मेदारी है कि इसके लिए संवैधानिक संघर्ष करो।”

ऑपइंडिया पत्रकार राहुल पांडे ने पिछले साल जनवरी 2023 में वहाँ जाकर स्थानीय लोगों से बात करके हालात को जानने का प्रयास किया था। हमें स्थानीय लोगों से पता चला था कि कैसे हल्द्वानी में बाहरी मुस्लिमों की संख्या तेजी से बढ़ी है। रामपुर, नजीमाबाद, बिजनौर, बुलंदशहर जैसी जगहों से मजदूरी के लिए वे आए और फिर जमीनों पर कब्जा करके बस गए। इनमें अवैध रोहिंग्या और बांग्लादेशी मुस्लिमों की भी बड़ी संख्या है।

दरअसल, हल्द्वानी में जिस बनफूलपुरा में ये सारा बवाल हुआ, वो पूरा इलाका सरकारी जमीन पर बसा है। प्रशासन लगातार अतिक्रमण विरोधी कार्रवाई कर रहा था। हाई कोर्ट से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक के आदेश के बाद ये कार्रवाई की जा रही थी। पिछले साल भी यहाँ बड़ा तनाव फैल गया था। इस बार अतिक्रमण विरोधी अभियान के तहत अवैध रूप से बने मस्जिद और मदरसा को हटाया जा रहा था।

प्रशासन की कार्रवाई लगभग पूरी भी हो गई थी, तभी वहाँ कट्टरपंथियों की भारी भीड़ पहुँची। इनमें महिलाएँ और किशोर उम्र के बालक भी थे। उन्होंने प्रशासनिक कर्मचारियों से बहस की और फिर देखते ही देखते आसपास की छतों से पत्थरबाजी शुरू हो गई। यहाँ करीब 800 की संख्या में मौजूद पुलिस वालों, मीडिया व अन्य प्रशासनिक कर्मचारियों-अधिकारियों को घेर लिया गया और हमला बोल दिया गया।

डीएम वंदना सिंह ने बताया, “ये हमला छतों पर इकट्ठे किए गए पत्थरों के जरिए किया गया। 30 जनवरी तक उन छतों पर कोई भी पत्थर नहीं था। न्यायालय में जब सुनवाई चल रही थी, तब भी वहाँ पत्थर नहीं थे। जिस दौरान सुनवाई चल रही थी, उस दौरान छतों पर पत्थर इकट्ठे किए गए। इसका मतलब है कि ये पूरी तरह से प्लानिंग की गई थी कि जिस दिन अतिक्रमण विरोधी अभियान चलाया जाएगा, उस समय हमला किया जाएगा। ताकि प्रशासन बैकफुट पर चला जाए।”

डीएम वंदना सिंह ने कहा, “पत्थरों से हमला हुआ, तो हमारी टीम पीछे नहीं हटी। हमारी टीम काम करती रही, इसके बाद दूसरी टीम आई। उनके हाथों में पेट्रोल बम थे। उन्होंने हाथों में प्लास्टिक की बोतलें पकड़ी हुई थी, उन्होंने उसमें आग लगाकर फेंकना शुरू किया। हमारी टीम तब भी अवैध ढाँचे को तोड़ने में लगी रही।”

नरसिम्हा राव, चौधरी चरण सिंह, एमएस स्वामीनाथन को भी ‘भारत रत्न’, मोदी सरकार में किसान से लेकर विज्ञान तक के दिग्गजों को देश का सर्वोच्च मान

नरेंद्र मोदी सरकार ने ऐलान किया है कि भारत के पूर्व प्रधानमंत्री पीवी नरसिम्हा राव को भारत रत्न से सम्मानित किया जाएगा। पीवी नरसिम्हा राव के अलावा पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह, वैज्ञानिक एमएस स्वामीनाथन को भी भारत रत्न देने का ऐलान किया है। इसकी जानकारी प्रधानमंत्री मोदी ने भी अपने एक्स पर शेयर की।

उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री पीवी नरसिम्हा राव के लिए कहा कि उन्हें यह साझा करते खुशी हो रही है- “हमारे पूर्व प्रधानमंत्री पीवी नरसिम्हा राव को भारत रत्न से सम्मानित किया जाएगा।”

उन्होंने कहा, “एक प्रतिष्ठित विद्वान और राजनेता के रूप में, नरसिम्हा राव गारू ने विभिन्न क्षमताओं में भारत की बड़े पैमाने पर सेवा की। उन्हें आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री, केंद्रीय मंत्री और कई वर्षों तक संसद और विधानसभा सदस्य के रूप में किए गए कार्यों के लिए समान रूप से याद किया जाता है। उनका दूरदर्शी नेतृत्व भारत को आर्थिक रूप से उन्नत बनाने, देश की समृद्धि और विकास के लिए एक ठोस नींव रखने में सहायक है।”

पीएम मोदी ने लिखा, “प्रधानमंत्री के रूप में नरसिम्हा राव गारू का कार्यकाल महत्वपूर्ण चीजों के लिए चिह्नित किया गया था जैसे जब भारत को वैश्विक बाजारों के लिए खोल दिया, जिससे आर्थिक विकास के एक नए युग को बढ़ावा मिला। इसके अलावा, भारत की विदेश नीति, भाषा और शिक्षा क्षेत्रों में उनका योगदान एक ऐसे नेता के रूप में उनकी बहुमुखी विरासत को रेखांकित करता है, जिन्होंने न केवल महत्वपूर्ण परिवर्तनों के माध्यम से भारत को आगे बढ़ाया बल्कि इसकी सांस्कृतिक और बौद्धिक विरासत को भी समृद्ध किया।”

पीएम ने चौधरी चरण सिंह के लिए लिखा, “हमारी सरकार का यह सौभाग्य है कि देश के पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह को भारत रत्न से सम्मानित किया जा रहा है। यह सम्मान देश के लिए उनके अतुलनीय योगदान को समर्पित है। उन्होंने किसानों के अधिकार और उनके कल्याण के लिए अपना पूरा जीवन समर्पित कर दिया था। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री रहे हों या देश के गृहमंत्री और यहाँ तक कि एक विधायक के रूप में भी, उन्होंने हमेशा राष्ट्र निर्माण को गति प्रदान की। वे आपातकाल के विरोध में भी डटकर खड़े रहे। हमारे किसान भाई-बहनों के लिए उनका समर्पण भाव और इमरजेंसी के दौरान लोकतंत्र के लिए उनकी प्रतिबद्धता पूरे देश को प्रेरित करने वाली है।”

वैज्ञानिक डॉ एमएस स्वामीनाथन के लिए उन्होंने कहा, “यह बेहद खुशी की बात है कि भारत सरकार कृषि और किसानों के कल्याण में हमारे देश में उल्लेखनीय योगदान के लिए डॉ. एमएस स्वामीनाथन को भारत रत्न से सम्मानित कर रही है। उन्होंने चुनौतीपूर्ण समय के दौरान भारत को कृषि में आत्मनिर्भरता हासिल करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और भारतीय कृषि को आधुनिक बनाने की दिशा में उत्कृष्ट प्रयास किए। हम एक अन्वेषक और संरक्षक के रूप में और कई छात्रों के बीच सीखने और अनुसंधान को प्रोत्साहित करने वाले उनके अमूल्य काम को भी पहचानते हैं। डॉ. स्वामीनाथन के दूरदर्शी नेतृत्व ने न केवल भारतीय कृषि को बदल दिया है बल्कि देश की खाद्य सुरक्षा और समृद्धि भी सुनिश्चित की है। वह ऐसे व्यक्ति थे जिन्हें मैं करीब से जानता था और मैं हमेशा उनकी अंतर्दृष्टि और इनपुट को महत्व देता था।”

बता दें कि इससे पहले बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री कर्पूरी ठाकुर और देश के पूर्व उपप्रधनमंत्री लालकृष्ण आणवाणी को भी यह सम्मान देने की घोषणा हो चुकी है। मालूम हो कि आडवाणी को छोड़कर बाकी चारों हस्तियों को मरणोपरांत यह सम्मान दिया जाएगा।