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6 जिलों की पुलिस-पैरामिलिट्री के बाद हल्द्वानी में अब सेना सँभालेगी मोर्चा, भीड़ ने थाना ही नहीं पेट्रोल पंप भी फूँका: CM धामी बोले – एक-एक दंगाई की हो रही पहचान

उत्तराखंड के कुमाऊँ मंडल के नैतीताल जनपद स्थित हल्द्वानी ने बनभूलपुरा में हिंसा भड़की हुई है। हल्द्वानी को उत्तराखंड की आर्थिक राजधानी भी कहा जाता है। वहाँ बड़ी संख्या में मुस्लिमों ने सरकार जमीन पर कब्ज़ा कर के बस्तियाँ बसा रखी हैं। पुलिस-प्रशासन का बुलडोजर जब गुरुवार (8 फरवरी, 2024) को कार्रवाई करने पहुँचा तो हजारों की भीड़ जमा हो गई और थाने को घेर कर आग लगा दी गई। पत्थरबाजी हुई, गोलीबारी हुई, कई महिला पुलिसकर्मी भी घायल हुईं और वाहनों को क्षतिग्रस्त कर दिया गया।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि दंगाइयों और उपद्रवियों के विरुद्ध कठोरतम कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने हल्द्वानी के बनभूलपुरा में हुई घटना के संबंध में शासकीय आवास पर अधिकारियों के साथ उच्चस्तरीय बैठक कर वर्तमान स्थिति की समीक्षा की। CM ने पुलिस को अराजक तत्वों से सख़्ती से निपटने के स्पष्ट निर्देश दिए हैं। उन्होंने बताया कि आगजनी-पथराव करने वाले एक-एक दंगाई की पहचान की जा रही है, साथ ही आश्वासन दिया कि सौहार्द और शांति बिगाड़ने वाले किसी भी उपद्रवी को बख्शा नहीं जाएगा।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अपील की, “हल्द्वानी की सम्मानित जनता से अनुरोध है कि शांति व्यवस्था बनाए रखने में पुलिस-प्रशासन का सहयोग करें।” भीड़ द्वारा की गई हिंसा में 300 से अधिक लोग जख्मी हुए हैं। DM वंदना सिंह ने बताया है कि पुलिसकर्मियों को ज़िंदा जलाने की कोशिश भी की गई। हिंसक भीड़ में महिलाएँ भी शामिल थीं। मुस्लिम कह रहे हैं कि पुलिस मदरसे और मस्जिद को तोड़ने आई थी, जबकि प्रशासन का कहना है कि वहाँ जो संरचनाएँ हैं वो धार्मिक संरचनाओं के रूप में रजिस्टर्ड नहीं हैं।

फ़िलहाल हल्द्वानी में इंटरनेट सेवाएँ बंद हैं, शैक्षणिक संस्थानों में छुट्टी घोषित कर दी गई है और पूरे राज्य में हाई अलर्ट है। पुलिस को 3 तरफ से घेर कर पथराव किया गया। भीड़ में शामिल लोग लगातार अपशब्दों का इस्तेमाल कर रहे थे और ‘मारो-मारो’ नारा लगा रहे थे। पत्रकारों पर भी हमला किया गया है। अब तक 6 जिलों से पैरामिलिट्री फ़ोर्स मँगाई गई है। भारतीय सेना भी शनिवार को पहुँच जाएगी। उपद्रवियों को चिह्नित किया जा रहा है।

थाना ही नहीं, बल्कि एक पेट्रोल पंप भी फूँक दिया गया। DM ने बताया कि हल्द्वानी में न्यायालय के आदेश के बाद कुछ और जगह भी अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई की गई है। राज्य सरकार ने इसके लिए टास्क फ़ोर्स भी गठित कर रखी है। बताया जा रहा है कि पुलिस-प्रशासन ने कार्रवाई से पहले हवाई सर्वे नहीं कराया और प्रकरण को हल्के में लिया। उधर सोशल मीडिया में इस्लामी कट्टरपंथियों का साथ देने वाले उलटे हिंसक भीड़ का ही बचाव कर रहे हैं।

पुलिस पत्थर खाए, जिंदा जल कर मर जाए… लेकिन दंगाइयों पर न करे कार्रवाई: हल्द्वानी के कट्टरपंथियों को ‘विक्टिम’ दिखाने का काम शुरू

उत्तराखंड के हल्द्वानी में क्या हो रहा है ये किसी से छिपा नहीं है। 8 फरवरी 2024 को एक बार फिर इस्लामी कट्टरपंथियों की भीड़ अपने पुराने पैटर्न के साथ सड़कों पर आई। भीड़ ने जगह-जगह तोड़फोड़ की। आगजनी की-पत्थर फेंके। 300 से ज्यादा पुलिसकर्मियों को घायल किया, उन्हें जिंदा जलाकर मारने की कोशिश की और जब इन सबके खिलाफ पुलिस ने अपनी कार्रवाई को शुरू की तो इन्होंने खुद को विक्टिम दिखाना शुरू कर दिया।

इनके बचाव में सोशल मीडिया पर बैठे इस्लामी कट्टरपंथी भी अपने काम में जुट गए और ऐसी-ऐसी वीडियो की क्लिप काटकर डालने लगे जिसमें उलटा पुलिस को ही दोषी दिखाया जा रहा है और ये समझाया जा रहा है कि अवैध मस्जिद का ढाँचा गिरने पर दंगे कट्टरपंथी मुस्लिम भीड़ ने नहीं किए।

जैसे एक वीडियो क्लिप में आगजनी साफ देखी जा रही है और कुछ लोग क#% जैसे शब्दों का इस्तेमाल कर रहे हैं। इस क्लिप को दिखाकर ये साबित करने की हो रही है कि इस अवैध मस्जिद हटाए जाने की कार्रवाई पर हिंसा को कट्टरपंथी भीड़ अंजाम नहीं दे रही। बल्कि वो लोग दे रहे हैं जो इन कट्टरपंथियों से घृणा करते हैं।

इसी तरह एक वीडियो है जिसमें ये दिखाने का प्रयास हो रहा है पुलिस ने निहत्थी बुर्काधारी महिलाओं पर लाठी चार्ज किया तब भीड़ भड़की, जबकि हल्द्वानी की जिलाधिकारी ने अपने बयान में साफ कहा है कि अवैध मस्जिद हटाने की कार्रवाई से पहले ही वहाँ अराजक तत्वों (इस्लामी कट्टरपंथियों) ने हमले की तैयारी की हुई थी। उन्होंने सोचा हुआ था अवैध अतिक्रमण हटाने जब टीम आएगी तो वो हमला करेंगे। उनकी छतों पर पत्थर थे, हाथों में पेट्रोल बम थे।

अब आप अगर इन इस्लामी कट्टरपंथियों द्वारा किए गए उत्पात या दंगों की कोई भी खबर को पढ़ेंगे तो यही निष्कर्ष पाएँगे कि दंगा उन्हें उकसाने से नहीं होता बल्कि वो तय करके रखते हैं कि कब कौन सी कार्रवाई के बाद उन्हें कैसे हमला करना है। इस पैटर्न में छतों पर खड़े होकर पत्थरबाजी करने का काम बुर्काधारी महिलाओं को दे दिया जाता है और कट्टरपंथी युवक खुद सड़कों पर आ जाते हैं। इसके बाद इनके पास से पेट्रोल बम फेंके जाते हैं। गाड़ियों में आग लगा दी जाती है। पुलिस का घेराव होता है और ठीक उसी तरह से पुलिस को निशाना बनाया जाता है जैसे इस बार हल्द्वानी पुलिस को बनाया गया।

अजीब बात ये है कि इंसानियत का नाम लेकर बुर्काधारी महिलाओं के बचाव में सोशल मीडिया पर बैठी टीम को वो फुटेज नहीं मिली जहाँ हमलों में महिला पुलिकर्मियों पर जानलेवा हमले हुए। उन्हें मारने की कोशिश हुई। उन्हें मिली तो ऐसी महिलाओं की वीडियो जो दंगों के वक्त पुलिस के सामने खड़ी थीं। क्या पुलिस ये सोचकर उन्हें तितर-बितर न करती कि वो अवैध ढाँचे की कार्रवाई देखने आई ‘दर्शक’ थीं।

दंगों के वक्त 300 से ज्यादा पुलिसकर्मी घायल हुए हैं। ये कोई सामान्य आँकड़ा नहीं है। सोचिए कितने कट्टरपंथियों की अनियंत्रित भीड़ उनपर टूटी होगी जो इतना पुलिस बल मौजूद होकर भी उनका कुछ नहीं कर पाया और जब बचाव में अपनी कार्रवाई की तो सोशल मीडिया पर सवाल खड़े हो गए कि आखिर क्यों बेचारी निहत्थों को लाठी मारी जा रही है। क्या ऐसे में पुलिस को दंगाइयों के सामने खड़े होकर मार खानी चाहिए, जलकर मर जाना चाहिए या फिर स्थिति कंट्रोल करने के लिए उपयुक्त कार्रवाई करनी चाहिए वो चाहे छतों से पत्थर फेंकती बुर्काधारी महिलाओं के खिलाफ हो या फिर पेट्रोल बम लेकर सड़क पर उतरी भीड़ पर।

छतों पर पत्थर, पुलिस पर पेट्रोल बम, पूरी कॉलोनी को घेर कर आतंक और खौफ… हल्द्वानी में कट्टरपंथी मुस्लिम भीड़ ने वही किया, जो दिल्ली दंगों की थी प्लानिंग

उत्तराखंड के हल्द्वानी में मुस्लिम कट्टरपंथियों की भीड़ ने वो सबकुछ किया, जो दिल्ली में हिंदुओं के खिलाफ हुए दंगों में किया गया था। एक तरफ प्रशासन शांतिपूर्वक अतिक्रमण विरोधी अभियान चला रहा था, तो दूसरी तरफ इस्लामिक कट्टरपंथियों की नीयत के हिसाब से बड़े हमलों की चाल चली जा रही थी। हल्द्वानी के बनभूलपुरा में इस्लामिक हमलावरों की भीड़ ने दो हिस्सों में हमला किया। पहली बार में उन्होंने पत्थरबाजी की, इसके बाद पत्थरबाजों की भीड़ पीछे हटी, तो दूसरा हमला शुरू हुआ पेट्रोल बमों का। उसके बाद हमलावर दूसरे इलाके में घुसे। ये सबकुछ उसी तर्ज पर हुआ, जैसे साल 2020 के दिल्ली दंगों में हुआ था। आइए, हम आपको पूरी क्रोनोलॉजी समझाते हैं।

अतिक्रमण कर बनाए हजारों घर, मस्जिद-मदरसा भी बनाया

हल्द्वानी में जिस बनभूलपुरा में ये सारा बवाल हुआ, वो पूरा इलाका सरकारी जमीन पर बसा है। प्रशासन लगातार अतिक्रमण विरोधी कार्रवाई कर रहा था। हाई कोर्ट से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक के आदेश के बाद ये कार्रवाई की जा रही थी। पिछले साल भी यहाँ बड़ा तनाव फैल गया था। इस बार अतिक्रमण विरोधी अभियान के तहत अवैध रूप से बने मस्जिद और मदरसा को हटाया जा रहा था। ये कार्रवाई लगभग पूरी भी हो गई थी। तभी वहाँ पहुँचती है एक मुस्लिम कट्टरपंथियों की बड़ी भारी भीड़। इस भीड़ में महिलाएँ और किशोर उम्र के बालक भी शामिल थे। उन्होंने प्रशासनिक कर्मचारियों से बहस की, और फिर देखते ही देखते आसपास की छतों से पत्थरबाजी शुरू हो गई। यहाँ करीब 800 की संख्या में मौजूद पुलिस वालों, मीडिया व अन्य प्रशासनिक कर्मचारियों-अधिकारियों को घेर लिया गया, उन पर हमला बोल दिया गया। ये एक तरह से एकतरफा जंग की तरह हो गया।

खुद नैनीताल की डीएम वंदना सिंह ने बताया कि अतिक्रमण विरोधी अभियान पर कोर्ट की कोई रोक नहीं थी। कोर्ट से फैसला आने के बाद ही ये अभियान चलाया जा रहा था। जिन संपत्तियों को हटाने की कार्रवाई की जा रही थी, उसका कोई मालिक नहीं था। उन्होंने आगे कहा, “अतिक्रमण विरोधी अभियान कानूनी तौर पर सही तरीके से चलाया जा रहा था। हमारी टीमें वहाँ पहुँची। सारे संसाधन (बुलडोजर व अन्य गाड़ियाँ) मौके पर पहुँची। किसी को उकसाने या नुकसान पहुँचाने की कोशिश प्रशासन की तरफ से नहीं की गई। ये अभियान शांतिपूर्वक चल रहा था, तभी आधे घंटे के भीतर एक बड़ी भीड़ ने नगर निगम टीम पर पहला हमला किया।”

डीएम वंदना सिंह ने बताया, “ये हमला छतों पर इकट्ठे किए गए पत्थरों के जरिए किया गया। 30 जनवरी तक उन छतों पर कोई भी पत्थर नहीं था। न्यायालय में जब सुनवाई चल रही थी, तब भी वहाँ पत्थर नहीं थे। जिस दौरान सुनवाई चल रही थी, उस दौरान छतों पर पत्थर इकट्ठे किए गए। इसका मतलब है कि ये पूरी तरह से प्लानिंग की गई थी कि जिस दिन अतिक्रमण विरोधी अभियान चलाया जाएगा, उस समय हमला किया जाएगा। ताकि प्रशासन बैकफुट पर चला जाए। पत्थरों से हमला हुआ, तो हमारी टीम पीछे नहीं हटी। हमारी टीम काम करती रही, इसके बाद दूसरी टीम आई। उनके हाथों में पेट्रोल बम थे। उन्होंने हाथों में प्लास्टिक की बोतलें पकड़ी हुई थी, उन्होंने उसमें आग लगाकर फेंकना शुरू किया। हमारी टीम तब भी अवैध ढांचे को तोड़ने में लगी रही।”

थाने को घेरकर पत्थरबाजी और पेट्रोल बम से आगजनी

अतिक्रमण विरोधी अभियान वाली जगह पर कट्टरपंथियों के हमले में पुलिस के कई जवान घायल हो गए। कट्टरपंथी मुस्लिमों की भीड़ लगातार बढ़ती ही जा रही थी। इसके बाद इस भीड़ ने बनफूलपुरा पुलिस थाने को घेर लिया। उन्होंने पहले थाने पर पत्थर बरसाए। फिर पत्थरबाज पीछे हो गए। यहाँ भी पूरी सोची समझी प्लानिंग के तहत पत्थरबाजों के बाद आई हमलावरों की नई टीम। इस टीम के हाथों में पेट्रोल बम थे। उन्होंने बनफूलपुरा पुलिस थाने, बाहर खड़ी गाड़ियों को आग के हवाले करना शुरू कर दिया। आसपास से पुलिस पहुँचती, कि थाने में मौजूद पुलिस टीम को खुद को बचाने के लिए आँसू गैस के गोले छोड़ने पड़ गए।

डीएम वंदना सिंह ने बताया, “परिसंपत्तियों के नुकसान के तौर पर थाने को नुकसान पहुँचा। मुख्य बिल्डिंग को ज्यादा नुकसान नहीं हुआ, लेकिन उसे हथौड़े से तोड़ने की कोशिश की गई। थाने में और थाने के बाहर खड़ी गाड़ियों खासकर पुलिस की गाड़ियों, प्रशासनिक गाड़ियों, नगर निगम की गाड़ियों और मीडिया कर्मियों की गाड़ियों को आग लगा दी गई। इस दौरान किसी भी दूसरे समुदाय ने इस भीड़ का विरोध किया, ऐसे में इसे धार्मिक तनाव नहीं कर सकते। ये पूरी तरह से बनभूलपुरा की भीड़ द्वारा राज्य सरकार को चैलेंज किया जा रहा था, प्रशासन पर दबाव बनाया जा रहा था।” उनका इशारा इसी तरफ रहा कि ये भीड़ कुछ भी करके सरकार और प्रशासन पर दबाव बनाना चाहती थी, ताकि आगे अतिक्रमण विरोधी अभियान न चलाया जा सके।

फिर दूसरे मोहल्ले में इस्लामिक भीड़ ने दिखाई ‘ताकत’

बनभूलपुरा में सबसे ज्यादा नुकसान थाने के आसपास हुआ है। इस्लामिक कट्टरपंथियों की भीड़ ये कोशिश कर रही थी कि ये आग जल्द ही पूरे हल्द्वानी में फैल जाए। बनभूलपुरा थाने को नष्ट करने के बाद ये भीड़ गाँधी नगर इलाके की ओर बढ़ी। गाँधी नगर में मिश्रित आबादी है। किसी एक समुदाय का बहुमत नहीं है। ऐसे में प्रशासन और गाँधी नगर को आतंकित करने के लिए ये भीड़ उधर की तरफ बढ़ी। हालाँकि तब तक बाहर से सुरक्षा बल पहुँच गए। पीएसी के साथ ही अन्य केंद्रीय सुरक्षा बलों के जवान पहुँच गए। उन्होंने बड़ी मुश्किल से गाँधी नगर में हिंसा होने से रोका। हालाँकि गाँधी नगर को पूरी तरह से दहशत में डाल दिया गया था। इस दौरान बनभूलपुरा से लेकर गाँधी नगर तक भारी मात्रा में सुरक्षा बलों ने मोर्चा संभाल लिया और किसी तरह से इस हिंसा को हल्द्वानी के मुख्य शहर में पहुँचने से रोका।

नैनीताल की डीएम वंदना सिंह ने बताया, “प्रशासन की पूरी ताकत थाने को बचाने की थी। यहाँ से बलपूर्वक जब हमलावर भीड़ को हटाया गया, तब इस भीड़ ने पास के गाँधी नगर की ओर कूच किया। और पूरे गाँधी नगर को घेर लिया गया। इस क्षेत्र की आबादी मिली-जुली है। उस पूरे क्षेत्र को आतंकित करने की कोशिश की गई और प्रशासन को भी। चूँकि उस दौरान पीएसी, अर्धसैनिक बल और री-इन्फोर्समेंट फोर्स आ गई थी, तो वहाँ किसी तरह की जनहानि होने से रोक लिया गया। इस दौरान बनभूलपुरा के निकली हिंसक भीड़ को हल्द्वानी के मुख्य शहर में पहुँचने से रोका गया। इसके लिए प्रशासन ने पूरी ताकत झोंक दी कि हिंसा बनभूलपुरा के बाहर न फैलने पाए।”

ये पूरा घटनाक्रम उसी पैटर्न को दोहरा रहा है, जिसके तहत देश की राजधानी दिल्ली को काफी समय तक आतंकित करके रखा गया था। नैनीताल की डीएम वंदना सिंह के बयानों से स्पष्ट है कि इस बनफूलपुरा में पूरी प्लानिंग करके ही हमला किया गया। उनके बयानों को गंभीरता से सुनें, तो आखिर में वो बोलती हैं कि थाने पर हमले के बाद ये भीड़ गाँधी नगर को घेर चुकी थी। इसके बाद कट्टरपंथी हमलों की इस भीड़ ने हल्द्वानी में हाहाकार मचाने के लिए आगे बढ़ने की कोशिश की, लेकिन प्रशासनिक सक्रियता के चलते ऐसा न हो सका। जबकि दिल्ली में ये हिंसा उत्तर-पूर्वी दिल्ली में फैल गई थी।

दिल्ली का प्रयोग हल्द्वानी में दोबारा!

बता दें कि दिल्ली में खौफ और खून से सने हिंदू-विरोधी दंगों को अंजाम देने के लिए ये ईंट-पत्थर एक सप्ताह पहले से ही इकट्ठा करना शुरू कर दिया गया था। बताया जा रहा है कि इस हिंसा के लिए ट्रैक्टरों की मदद से एक हफ्ते पहले ही भट्ठों से ईंटे मँगवा ली गई थीं। सात ट्रक पत्थर तो करावल नगर के AAP पार्षद ताहिर हुसैन के घर के पास ही उठाए गए। बता दें कि इस दंगे के पीछे ताहिर हुसैन का बड़ा हाथ बताया जा रहा है। ताहिर पर आईबी ऑफिसर अंकित शर्मा की मौत का भी आरोप है।

ताहिर के घर के आगे लगे पत्थरों के ढेर को देखकर साफ लग रहा था कि इस दंगे के लिए जबरदस्त तैयारी की गई थी। उसके घर के आगे पत्थरों के इतने ढेर को देखकर निगमकर्मी भी सन्न रह गए, क्योंकि वहाँ पर इतना ज्यादा पत्थर था कि उससे एक मंजिला मकान बन सकता था। बता दें कि हिंसाग्रस्त इलाके मुस्तफाबाद, करावल नगर, चमन पार्क, शिव विहार सहित अन्य इलाकों में हिंसा के एक सप्ताह पहले से ही ट्रैक्टरों में भरकर ईंट मँगवाए गए और फिर इसके टुकड़े-टुकड़े किए गए ताकि इसे बोरियों में भरकर छतों पर रखा जा सके।

दिल्ली से लेकर हल्द्वानी तक की कड़ियों को जोड़ेंगे, तो साफ हो जाएगा कि हल्द्वानी में हुई हिंसा कोई अचानक हुई हिंसा नहीं, बल्कि पूरे देश को दहलाने की एक बड़ी साजिश थी। उनकी कोशिश थी कि पुलिस प्रशासन पर हुआ इस्लामिक हमला धीरे-धीरे पहले हल्द्वानी, फिर पूरे उत्तराखंड और फिर पूरे देश को अपनी चपेट में ले ले। हालाँकि अब प्रशासन ऐसे लोगों की पहचान करने में जुटा है, जो अतिक्रमण विरोधी अभियान के विरोध की आड़ में पूरे देश को जलाने की कोशिश में जुटे थे।

दंगों के बाद पूरे राज्य में अलर्ट

गौरतलब है कि हल्द्वानी में अतिक्रमण पर कार्रवाई हटाना अभी प्रशासन के लिए चुनौती बना हुआ है। एक कार्रवाई के बाद दंगाई भीड़ का सड़कों पर उतरना, उत्पात मचाने ने तनाव बढ़ा दिया है। हालातों को देखते हुए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने हाई लेवल मीटिंग की। इस दौरान पुलिस के आला अधिकारी बैठकक में रहे। बाद में नैनीताल जिला प्रशासन ने दंगा प्रभावित क्षेत्र में कर्फ्यू लगा दिया है। इसके साथ ही उपद्रवियों को देखते ही गोली मारने का आदेश जारी कर दिया गया है। वहीं, प्रशासन ने अफवाहों को फैलने से रोकने के लिए दंगाईयों को देखते ही गोली मारने के आदेश जारी किए हैं। इस बीचराज्य सरकार ने पूरे राज्य में हाई अलर्ट जारी कर दिया है। इस हिंसा में अभी तक 6 लोगों की मौत हो चुकी है, तो 300 से अधिक लोग घायल हैं। घायलों में 200 से अधिक लोग अकेले पुलिस के जवान ही हैं।

‘हमको कमजोर समझ गलती कर रहे, हमारी ताकत का अंदाजा तुम नहीं लगा सकते’ – नेता से लेकर वकील और मुल्ले सबने भड़काई हल्द्वानी में हिंसा

उत्तराखंड के हल्द्वानी में कट्टरपंथी मुस्लिमों ने जम कर हिंसा की है। इस हिंसा में 300 से ज्यादा पुलिसकर्मी घायल हुए हैं। यह हिंसा कट्टरपंथी मुस्लिमों ने इसलिए की क्योंकि यहाँ प्रशासन अतिक्रमण हटाना चाहता था। हालाँकि, उत्तराखंड में दंगा भड़काने की धमकियाँ पहले से दी जा रही थीं, इससे संबंधित ट्वीट और बयान अब वायरल हो रहे हैं।

गौरतलब है कि हाल ही में उत्तराखंड विधानसभा में UCC विधेयक पारित हुआ है। इसी को लेकर मुस्लिमों के सड़कों पर उतरने की धमकी बड़े मौलानाओं से लेकर मुस्लिम सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर तक दे रहे थे। इसमें कॉन्ग्रेस के बड़े नेता भी शामिल थे। ऐसी ही कई धमकियाँ अब वायरल हो रही हैं। एक पोस्ट में एक कट्टरपंथी मुस्लिम इन्फ्लुएन्सर शादाब चौहान, जो कि खुद को पीस पार्टी का राष्ट्रीय प्रवक्ता बताता है, उत्तराखंड के मुख्यमंत्री को धमकी देता दिखा था। उसने मुस्लिमों की ताकत को कम ना आँकने की धमकी दी थी।

शादाब चौहान ने हल्द्वानी दंगे (8 फरवरी, 2024) से दो दिन पहले सीधी धमकी देते हुए लिखा था, “कान खोल करके सुन लो पुष्कर सिंह धामी, किसी की औकात नहीं है जो भारत के मुसलमानों को अल्लाह के हुकुम और हमारे नबी के तरीके पर चलने से रोक सके। अगर तुम हमको कमजोर समझ रहे हो तो गलती कर रहे हो, हमारी ताकत का अंदाज़ा तुम नहीं लगा सकते। हम हर संवैधानिक संघर्ष के लिए तैयार हैं। हमारी ताकत संविधान का अनुच्छेद 25 है, जिसके सामने तुम्हारी कोई हैसियत नहीं है। उत्तराखंड के मुख्यमंत्री और कॉन्ग्रेस, तुम्हारी भी जिम्मेदारी है कि इसके लिए संवैधानिक संघर्ष करो।”

उत्तराखंड के मुख्यमंत्री रहे कॉन्ग्रेस नेता हरीश रावत ने भी ऐसे हालातों की चेतावनी दी थी। उन्होंने UCC पर कहा था कि इससे राज्य में अशांति हो सकती है। राज्य के हालत मणिपुर में तब्दील हो सकते हैं। उन्होंने UCC के बाद होने वाली हिंसा का उदाहरण कूकी-मैतेई समुदाय से जोड़कर दिया था। उनका यह बयान भी अब वायरल हो रहा है।

उत्तराखंड में UCC के आते ही मुस्लिम मौलानाओं ने धमकियाँ देना चालू कर दी थीं। देहरादून के शहर काजी हम्मद अहमद कासमी ने सड़क पर उतरने का ऐलान किया था। उन्होंने कहा था कि देश के बुद्धिमान लोग यूनिफॉर्म सिविल कोड की जरूरत नहीं मानते हैं। वहीं मुस्लिम युवाओं ने भी इस कानून को ना मानने की बात कही थी।

गौरतलब है कि उत्तराखंड में मुस्लिम आबादी का एक हिस्सा UCC लाने के विरोध में था। कई कट्टरपंथी इसके खिलाफ बड़े प्रदर्शन और सड़कों को जाम करने की धमकी दे रहे थे। इसके दो दिनों के भीतर ही हल्द्वानी से हिंसा की खबर आ गई।

जिस हल्द्वानी में इस्लामी कट्टरपंथियों ने किया दंगा, वहाँ मंदिर तोड़ कर चुके हैं कब्जा, हिंदू डर में जीने को मजबूर: ऑपइंडिया ग्राउंड रिपोर्ट के खुलासे

उत्तराखंड के हल्द्वानी में इस्लामी कट्टरपंथी भीड़ ने खुलेआम हिंसा की। कल (8 फरवरी 2024) वहाँ बनभूलपुरा थाना इलाके में नगर निगम द्वारा मस्जिद हटाने की कार्रवाई के बाद से दंगे वाले हालात हो गए। दंगे में 6 लोगों की जान चली गई। 300 से ज्यादा पुलिस वाले घायल हो गए। पत्थरबाजी-आगजनी जैसी घटनाओं को अंजाम दिया गया। दर्जनों गाड़ियों को आग लगा दी गई।

उत्तराखंड के हल्द्वानी का यह इलाका पहली बार इस्लामी कट्टरपंथियों की वजह से चर्चा में नहीं आया है। पिछले साल भी जब कोर्ट ने रेलवे की जमीन, जिसपर कब्जा किया गया था, उससे अतिक्रमण हटाने के आदेश दिए थे (जिस पर बाद में स्टे लगा दिया गया), उस समय भी इन लोगों ने माहौल बिगाड़ने का प्रयास किया था। उस दौरान ऑपइंडिया के पत्रकार राहुल पांडे भी ग्राउंड रिपोर्ट के लिए वहाँ पर पहुँचे थे, जिसमें बहुत से खुलासे हुए थे।

ऑपइंडिया ग्राउंड रिपोर्ट में हल्द्वानी को लेकर खुलासे

ऑपइंडिया पत्रकार राहुल पांडे ने पिछले साल जनवरी 2023 में वहाँ जाकर स्थानीयों से बात कर हालातों को हर सिरे से जानने का प्रयास किया था। इसी क्रम में हमें स्थानीयों से पता चला था कि कैसे हल्द्वानी में बाहरी मुस्लिमों की संख्या बढ़ी। कैसे वो रामपुर, नजीमाबाद, बिजनौर जैसी जगहों से मजदूरी के लिए आए और फिर जमीनों पर कब्जा करके बस गए। एक हिंदू व्यक्ति ने जानकारी दी थी कि पूरे इलाके में (कट्टरपंथियों के पास) इतने हथियार इकट्ठा हो चुके हैं जिसकी हद्द नहीं।

हल्द्वानी में कट्टरपंथियों का खौफ, हिंदू डर में जीने को मजबूर

इसी तरह इंदिरा नगर बस्ती में राहुल पांडे ने जाकर देखा तो हिंदू डरे हुए थे। उन्होंने बताया था कि कैसे वहाँ की मुस्लिम आबादी उनके घरों पर चरस और शराब के नशे में लात मारती है। विरोध करने पर मामले को शांत करवा दिया जाता है। हिंदुओं के सवाल थे कि पिछले एक दशक में मुस्लिमों की संख्या इतनी कैसे बढ़ी कुछ समझ नहीं आता।

बनभूलपुरा के एक दिव्यांग हिंदू ने राहुल पांडे से कहा था कि वो चाहते हैं कि भारत सरकार उन्हें परिवार सहित निकाल ले, क्योंकि वहाँ अब हिंदुओं के रहने के हालात नहीं बचे हैं। इसी तरह एक युवक ने जानकारी दी थी कि इन इलाकों में लव-जिहाद और धर्मांतरण की घटनाएँ भी घटित हो चुकी हैं। हिंदू लोग होली तक सही से नहीं खेल पाते हैं।

मंदिर तोड़ किया था कब्जा

स्थानीयों ने यह भी बताया कि एक स्थानीय बुजुर्ग सत्यनारायण तिवारी ने अपने घर के पास मंदिर बनवाया तो लेकिन जब वो इलाके से चले गए तो मुस्लिमों ने उनके घर के साथ उस मंदिर को तोड़कर भी वहाँ कब्जा कर लिया। ऐसे ही स्कूलों में बच्चों को पढ़ाई जाने वाली इस्लामी दुआ का भी पता चला। इसके अलावा ये भी बताया गया था हिंदू लड़कियों का ऐसे इलाकों में आना-जाना मुहाल किया जा चुका है।

रोहिंग्या-बांग्लादेशी भी बसे

ग्राउंड पर रहते हुए यह भी पता चला था कि जिस जमीन के लिए पिछले साल मुस्लिम भीड़ ने प्रदर्शन किया था, वहाँ रोहिंग्याओं और बांग्लादेशियों ने भी घर बना रखे हैं। इन इलाकों को बुलडोजर कार्रवाई से बचाने के लिए जो विरोध प्रदर्शन इन्होंने शुरू किया था उसमें लोकल नेता, धार्मिक नेता मिलकर बच्चों का इस्तेमाल कर रहे थे।

रेल की पटरियों पर खेलते बच्चों ने बताया था कि मोहम्मद समीर नाम के बच्चे ने स्वीकार किया कि बच्चों को मदरसे का ड्रेस पहनाकर धरने में शामिल करवाया गया था। बच्चों ने ऑन कैमरा इन बातों को स्वीकारा था कि सपा से जुड़े मतीन सिद्दकी उस प्रदर्शन के मुख्य आयोजक थे। बच्चों ने बताया मतीन ने ही इरफान हाफिज से बच्चों को तैयार कर प्रदर्शन में लाने की हिदायत दी थी।

प्रोपेगेंडा फैलाने में द वायर का साथ

यह भी ऑपइंडिया पत्रकार राहुल पांडे की ग्राउंड रिपोर्ट में खुलासा हुआ था कि प्रदर्शन वाली भीड़ को एक पत्रकार आरफा खानुम शेरवानी का नाम ले लेकर समझा रहा था कि उन्हें कैमरे पर कैसे अपनी बात रखनी है। उस पत्रकार का कहना था कि वो वीडियो द वायर पर चलवाएगा।

दंगों के बाद पूरे राज्य में अलर्ट

गौरतलब है कि हल्द्वानी में अतिक्रमण पर कार्रवाई हटाना अभी प्रशासन के लिए चुनौती बना हुआ है। एक कार्रवाई के बाद दंगाई भीड़ का सड़कों पर उतरना, उत्पात मचाने ने तनाव बढ़ा दिया है। हालातों को देखते हुए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने हाई लेवल मीटिंग की। इस दौरान पुलिस के आला अधिकारी बैठकक में रहे। बाद में नैनीताल जिला प्रशासन ने दंगा प्रभावित क्षेत्र में कर्फ्यू लगा दिया है। इसके साथ ही उपद्रवियों को देखते ही गोली मारने का आदेश जारी कर दिया गया है। वहीं, प्रशासन ने अफवाहों को फैलने से रोकने के लिए दंगाईयों को देखते ही गोली मारने के आदेश जारी किए हैं। इस बीचराज्य सरकार ने पूरे राज्य में हाई अलर्ट जारी कर दिया है।

पुलिस वालों को जिंदा जला रहे थे कट्टरपंथी मुस्लिम दंगाई, जिस घर में जान बचाने के लिए घुसे… उसे ही किया टारगेट: पुलिसवालों ने सुनाई आपबीती

हल्द्वानी में नगर निगम की जमीन पर अतिक्रमण हटाने गई पुलिस-प्रशासन की टीम पर कट्टरपंथी मुस्लिमों की भीड़ ने हमला कर दिया। दंगाई मुस्लिमों की भीड़ ने पुलिसकर्मियों को घेर कर जलाने का प्रयास किया। पुलिसकर्मियों ने दंगाइयों के हमले की करतूत कैमरे पर आकर बताई है। इसमें कई महिला पुलिसकर्मी भी घायल हुई हैं।

हल्द्वानी हिंसा में घायल एक महिला पुलिसकर्मी ने मीडिया को बताया, “वहाँ से हम बच कर आए। एक घर के अंदर घुस गए हम, जिसमें आग लगाने की उन्होंने कोशिश की। पथराव किया। हम मुश्किल से वहाँ से जान बचा कर आए। हमारी फ़ोर्स काफी देर बाद आई, तब हम निकल कर आए। हर गलियों से, हर जगह से भी पथराव हो रहा था। उन लोगों ने गलियाँ घेर ली थीं। हमलोग 15-20 लोग एक घर के भीतर दबे पड़े थे। जिन्होंने हमें शरण दी, उसको भी गालियाँ दी गईं। उसका घर तोड़ा गया, जब हम वापस आ रहे थे तब शीशे, बोतलें और ईंट फेंकी।”

बताया गया है कि इस हिंसा में अब तक 6 लोगों की मौत हो चुकी है। कट्टरपंथी मुस्लिमों के हमले में 300 से अधिक पुलिसकर्मी घायल हैं। राज्य के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने दंगाइयों को देखते ही गोली मारने के आदेश दिए हैं। हल्द्वानी में अभी कर्फ्यू लगाया गया है।

हल्द्वानी में हुए इस हमले से बच कर आए एक अन्य पुलिसकर्मी ने बताया है कि इन दंगाइयों ने गलियों से आकर पथराव किया। पुलिसकर्मी ने बताया है कि उनके वापस आते वक्त उन पर गोलियाँ बरसाई गईं। मुस्लिम दंगाइयों ने कट्टों से उन पर गोलियाँ चलाई। उन्होंने नगर निगम का ट्रैक्टर, एक गश्ती वाहन और कई मोटरसाइकिल जला दी।

एक अन्य वीडियो में एक पुलिसकर्मी अपने घाव को दिखाते हुए बताता है कि कैसे वह दंगाइयों से बच कर आया। एक सिख पुलिसकर्मी भी इन दंगों में घायल हुआ है।

हमले के बाद घायल हुए पुलिसकर्मियों का वीडियो भी आया है। इसमें बड़ी संख्या में पुलिसकर्मी घायल दिख रहे हैं। पुलिसवालों का इलाज चल रहा है। वीडियो में दिखता है कि किसी पुलिसकर्मी के सर पर चोट लगी तो किसी के हाथ पर चोट आई है।

हल्द्वानी में इन्टरनेट सुविधाओं को भी बंद कर दिया गया है। हल्द्वानी में स्कूल कॉलेज भी बंद हैं। राज्य के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने लोगों से शान्ति बनाए रखने की अपील की है।

अब्बा जॉनी और बेटा अनस सहित आरिस, फहीम, इसरार, सीवान की मौत: हल्द्वानी में इस्लामी भीड़ का हमला, 300+ पुलिसकर्मी घायल

उत्तराखंड के हल्द्वानी में हर तरफ तनाव फैला है। इंटरनेट बंद है। कर्फ्यू लागू है और देखते ही गोली मारने के आदेश डीएम की तरफ से दिए गए हैं। ऐसा इसलिए, क्योंकि हल्द्वानी का बनभूलपुरा थाना इलाके में अवैध अतिक्रमण हटाने पहुँची पुलिस-प्रशासन पर इस्लामिक कट्टरपंथियों की भीड़ ने हमला बोल दिया। इस हमले में पत्थरबाजी के साथ ही पेट्रोल-बम भी चलाए गए। दर्जनों गाड़ियों को आग लगा दिया गया। पुलिस थाने को घेर लिया गया और पुलिस वालों को निशाना बनाया गया। अभी तक मिल रही जानकारियों के मुताबिक, इस हिंसा में 6 लोगों की मौत हो चुकी है, तो करीब 300 लोग घायल हो चुके हैं, जिसमें अधिकाँश पुलिस कर्मी और अधिकारी हैं।

लाइव हिंदुस्तान की रिपोर्ट के मुताबिक, इस हिंसा में अब तक 6 लोगों की जान जा चुकी है। जिसमें गफूर बस्ती के रहने वाले पिता-पुत्र जॉनी और अनस की मौत हो गई है। इसमें आरिस पुत्र गौहर उम्र – 16 साल की भी जान गई है। गाँधी नगर के रहने वाले फहीम की मौत हुई है, तो बनभूलपुरा के रहने वाले इसरार और सीवान (32) की भी मौत हुई। वहीं, पत्थरबाजी की घटनाओं में 300 से अधिक लोग घायल हो गए हैं। इन घायलों में हल्द्वानी के एसडीएम पारितोष वर्मा, कालाढूँगी की एसडीएम रेखा कोहली, तहसीलदार सचिन कुमार, सीओ स्पेशल ऑपरेशन नितिन लोहनी समेत 200 से अधिक पुलिसकर्मी और अधिकारी शामिल हैं।

ये मामला गुरुवार (08 फरवरी 2024) का है। जहाँ हल्द्वानी के बनभूलपुरा थाना इलाके में कोर्ट के ऑर्डर के बाद अतिक्रमण हटाने पहुँचे 800 प्रशासनिक कर्मचारियों, अधिकारियों और पुलिस को घेर लिया गया। छतों से पत्थर चलाए गए। पुलिस को पूरी तरह से पीछे ढकेल दिया गया और बनफूलपुरा थाने को ही घेर लिया गया। गाड़ियों को आग लगा दिया गया। भीड़ को रोकने के लिए छोड़े गए आँसू गैस के गोलों का भी कोई असर नहीं दिखा। इस्लामिक भीड़ पूरी तरह से बेपरवाह दिखी, मानों वो सिर्फ आतंक का राज कायम करने पर ही उतारू थी।

इंटरनेट बंद, कर्फ्यू लागू, देखते ही गोली मारने के आदेश

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने हल्द्वानी के हालात पर चर्चा के लिए हाई लेवल मीटिंग बुलाई। बैठक में शासन और पुलिस के अधिकारी मौजूद रहे। बैठक में मुख्यमंत्री ने पुलिस अधिकारियों को जरूरी दिशा-निर्देश दिए। इसी के साथ नैनीताल जिला प्रशासन ने दंगा प्रभावित क्षेत्र में कर्फ्यू लगा दिया है। इसके साथ ही उपद्रवियों को देखते ही गोली मारने का आदेश जारी कर दिया गया है। वहीं, प्रशासन ने अफवाहों को फैलने से रोकने के लिए दंगाईयों को देखते ही गोली मारने के आदेश जारी किए हैं। इस बीचराज्य सरकार ने पूरे राज्य में हाई अलर्ट जारी कर दिया है।

अवैध मस्जिद-मदरसा तोड़ने पर कार्रवाई

बता दें कि जिस मदरसे और मस्जिद को लेकर कट्टर मुस्लिम भीड़ सड़क पर उतरी है, वो मलिका बगीचा में स्थित है। उत्तराखंड पुलिस प्रवक्ता और IG नीलेश भरने ने जानकारी दी है कि कई जिलों की पुलिस फ़ोर्स और पैरामिलिट्री को भी हल्द्वानी में लगाया गया है। साथ ही शुक्रवार (9 फरवरी, 2024) को सभी स्कूलों में छुट्टी घोषित कर दी गई है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने बताया कि अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई न्यायालय के आदेश के बाद हो रही थी।

सीएम धामी ने आश्वासन दिया है कि तोड़फोड़ व हिंसा करने वालों पर कठोरतम कार्रवाई की जाएगी। नगर आयुक्त पंकज उपाध्याय का कहना है कि पत्थरबाजों को चिह्नित किया जा रहा है, उन पर कार्रवाई की जाएगी। घायलों में SDM भी शामिल हैं। DCP अभिनव कुमार ने बताया कि अराजक तत्वों ने गोलीबारी भी की है। इलाके में 4000 से अधिक मकान अवैध अतिक्रमण कर के बनाए गए हैं।

335 सीटों पर NDA की जीत के साथ मोदी सरकार, राम मंदिर और विदेश में भारत के बढ़ते कद से उफान पर लोकप्रियता: देखिए सर्वे में और क्या-क्या

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संसद में विपक्ष को ललकार कर कहा कि तीसरी बार एनडीए सत्ता में आ रही है, वो भी पूर्ण बहुमत के साथ। अब तक के सबसे बड़े जनमत के साथ। इंडिया टुडे-सी वोटर का सर्वे भी यही कहता है। इंडिया टुडे-सी वोटर के सर्वे ‘मूड ऑफ द नेशन’ में एनडीए को 543 सीटों में से 335+ सीटें मिलती दिख रही हैं।

मूड ऑफ द नेशन सर्वे में करीब डेढ़ लाख लोग शामिल हुए, इनमें से 35 हजार लोगों से सीधी बात की गई। इस सर्वे रिपोर्ट के मुताबिक, इंडी गठबंधन का बेड़ा गर्क होता दिख रहा है। इंडी गठबंधन महज 166 सीटों पर सिमटता दिख रहा है, तो अन्य को 42 सीटें मिलती दिख रही हैं। वहीं, एनडीए लगातार तीसरी बार प्रचंड बहुमत के साथ सत्ता में वापसी करती दिख रही है। पीएम नरेंद्र मोदी की अगुवाई में एनडीए गठबंधन 543 में से 335 से भी अधिक सीटों पर जीत दर्ज करता दिख रहा है।

हर राज्य में पीएम मोदी का जादू, यूपी-बिहार-झारखंड का हाल

इस सर्वे के मुताबिक, राज्यवार जो आँकड़े सामने आए हैं, वो बताते हैं कि उत्तर भारत एक बार फिर से पूरी तरह से भगवामय हो रहा है। उत्तर प्रदेश, बिहार और झारखंड में फिर से नरेंद्र मोदी का डंका बज रहा है। उत्तर प्रदेश की 80 सीटों में से 73 सीटें एनडीए को मिलती दिख रही हैं, जिसमें 72 अकेले बीजेपी को, तो 1 सीट सहयोगी दल को मिलता दिख रहा है। वहीं, विपक्षी दल महज 7 सीटों तक सिमटते दिख रहे हैं। यूपी में बीजेपी को 52 प्रतिशत मत मिलने का अनुमान जताया जा रहा है, तो विपक्षी गठबंधन को 36 प्रतिशत वोट मिलते दिख रहे हैं। यूपी के साथ ही उत्तराखंड में बीजेपी को भारी बहुमत मिलता दिख रहा है। उत्तराखंड में बीजेपी को 58.6 प्रतिशत मत मिलते दिख रहे हैं और पाँचों सीटों पर बीजेपी को प्रचंड बहुमत मिलता दिख रहा है।

बिहार की बात करें तो 40 में से 32 सीटों पर एनडीए को भारी बहुमत से जीत मिलती दिख रही है। इंडी गठबंधन 8 सीटों तक पहुँचता दिख रहा है। बिहार में एनडीए गठबंधन को 52 प्रतिशत वोट मिलते दिख रहे हैं, वहीं इंडी गठबंधन का मत प्रतिशत 7 प्रतिशत बढ़ते दिख रहे हैं। वहीं, झारखंड की बात करें तो 14 में से 12 सीटों पर बीजेपी की अगुवाई वाली एनडीए को जीत मिलती दिख रही है, तो 2 सीटों पर इंडी गठबंधन का मामला बनता दिख रहा है।

पश्चिम बंगाल में बीजेपी को बड़ी जीत

पश्चिम बंगाल में बीजेपी को अपने दम पर 19 सीटें मिलती दिख रही हैं। एक सीट पर इंडी गठबंधन तो 22 सीटें अन्य को मिलती दिख रही हैं। यहाँ मत प्रतिशत के मामले में बीजेपी करीब-करीब टीएमसी के पास पहुँचती दिख रही है। पश्चिम बंगाल में टीएमसी को करीब 43 प्रतिशत मत मिलते दिख रहे हैं, तो बीजेपी सिर्फ 3 प्रतिशत के फासले के साथ 40 प्रतिशत वोट पाती दिख रही है।

मध्य प्रदेश-छत्तीसगढ़-राजस्थान में फिर से कमाल

हाल ही में मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान में हुए विधानसभा चुनावों में भारी जीत दर्ज करने वाली बीजेपी लोकसभा चुनाव में भी भारी बहुमत हासिल करती दिख रही है। इन तीनों राज्यों की 65 लोकसभा सीटों में से 62 पर बीजेपी को जीत मिलती दिख रही है। मध्य प्रदेश की 29 में से 27 सीटों पर बीजेपी को जीत मिलती दिख रही है। यहाँ बीजेपी 58 प्रतिशत वोट मिलते दिख रहे हैं, जबकि कॉन्ग्रेस को 38.2 प्रतिशत वोट मिलते दिख रहे हैं। ये पिछली बार के मुकाबले कहीं अधिक है।

बात छत्तीसगढ़ की करें तो छत्तीसगढ़ में बीजेपी 11 में से 10 सीटों पर जीत दर्ज करती दिख रही है। ये पिछली बार के मुकाबले एक सीट ज्यादा है। साल 2019 में बीजेपी को 9 सीटों पर जीत मिली थी, लेकिन इस बार बीजेपी का वोट शेयर बढ़कर 53.9 प्रतिशत हो गया है। वहीं, कॉन्ग्रेस के हिस्से 38.2 प्रतिशत वोट ही मिल रहे हैं।

राजस्थान में बीजेपी क्लीन स्वीप करती दिख रही है। बीजेपी राजस्थान की सभी 25 लोकसभा सीटों पर जीत दर्ज करती दिख रही है। इस बार बीजेपी को 58.6 प्रतिशत मत मिलने के अनुमान सामने आ रहे हैं, तो कॉन्ग्रेस को 35 प्रतिशत वोट मिलते दिख रहे हैं। पिछली बार भी बीजेपी ने सभी सीटें जीती थी, लेकिन इस बार हनुमान बेनीवाल साथ छोड़ चुके हैं। इसके बावजूद एक बार फिर से बीजेपी राजस्थान की सभी 25 सीटों पर जीत दर्ज करती दिख रही है।

दक्षिण भारत में इंडी गठबंधन भारी

मूड ऑफ द नेशन के सर्वे के मुताबिक, दक्षिण भारत के पाँच राज्यों में कुल 129 लोकसभा सीटें हैं, जिसमें इंडी गठबंधन भारी पड़ता दिख रहा है। हालाँकि आँध्र प्रदेश से लेकर तेलंगाना में गठबंधनों में बदलाव हो सकता है। मौजूदा गठबंधन के हिसाब से बात करें तो तमिलनाडु में डीएमके-कॉन्ग्रेस क्लीन स्वीप करती दिख रही हैं। वहीं, कर्नाटक में एनडीए गठबंधन को 28 में से 24 सीटों पर जीत मिलती दिख रही है। यहाँ इंडी गठबंधन चार सीटों तक सिमटती दिख रही है।

आँध्र प्रदेश की कुल 25 लोकसभा सीटों में से एनडीए और इंडी गठबंधन दोनों का ही पत्ता साफ होता दिख रहा है। यहाँ टीडीपी को 17 सीटों पर जीत मिलने का अनुमान है, तो वाईएसआरसीपी को 8 सीटें मिलती दिख रही हैं। हालाँकि दोनों ही दलों के शीर्ष नेता दिल्ली का चक्कर काट रहे हैं, ऐसे में किसका बीजेपी के साथ गठबंधन हो जाए अभी कहा नहीं जा सकता। ऐसे में आँध्र प्रदेश में एनडीए बड़ा पलटवार कर सकता है।

केरल में इंडी गठबंधन सभी 20 सीटों पर जीत दर्ज करता दिख रहाहै। यहाँ एनडीए का मत प्रतिशत को बढ़ रहा है, लेकिन ये सीट में बदलता नहीं दिख रहा। वहीं, तेलंगाना की बात करें तो यहाँ की कुल 17 लोकसभा सीटों में से 10 सीटें इंडी गठबंधन को तो बीजेपी को सिर्फ तीन सीटें मिलती दिख रही हैं। एक सीट एआईएमआईएम के हिस्से जाती दिख रही है।

रोती महिला पुलिसकर्मी, धधकती आग, जलता थाना, टूटी गाड़ियाँ… जुमे के 1 दिन पहले यही है हल्द्वानी की पहचान, अवैध अतिक्रमण हटाने पर उग्र हुई कट्टर इस्लामी भीड़

उत्तराखंड के हल्द्वानी में बवाल हो गया है, जहाँ कट्टर इस्लामी भीड़ ने पुलिस पर धावा बोल दिया। थाना घेर लिया गया, गाड़ियों को आग के हवाले कर दिया गया और जम कर पत्थरबाजी की गई। कारण – वहाँ स्थित एक अवैध मस्जिद व मदरसे पर प्रशासन ने बुलडोजर चलाया था। मामला बनभूलपुरा क्षेत्र का है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने पूरे मामले पर बड़ी बैठक की है, दंगाइयों को देखते ही गोली मारने का आदेश जारी कर दिया गया है। हल्द्वानी सरकारी जमीन, रेलवे की जमीन पर अतिक्रमण के कारण भी चर्चा में आया था।

जिस मदरसे और मस्जिद को लेकर कट्टर मुस्लिम भीड़ सड़क पर उतरी है, वो मलिका बगीचा में स्थित है। उत्तराखंड पुलिस प्रवक्ता और IG नीलेश भरने ने जानकारी दी है कि कई जिलों की पुलिस फ़ोर्स और पैरामिलिट्री को भी हल्द्वानी में लगाया गया है। साथ ही शुक्रवार (9 फरवरी, 2024) को सभी स्कूलों में छुट्टी घोषित कर दी गई है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने बताया कि अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई न्यायालय के आदेश के बाद हो रही थी।

पुलिस-प्रशासन के कई अधिकारी घायल हुए हैं। कर्फ्यू लगा दिया गया है। सीएम धामी ने आश्वासन दिया है कि तोड़फोड़ व हिंसा करने वालों पर कठोरतम कार्रवाई की जाएगी। महिला पुलिसकर्मियों तक को नहीं छोड़ा, उनमें से कई घायल होकर अस्पताल पहुँच गईं। मुख्य सचिव व पुलिस महानिदेशक के अलावा ख़ुफ़िया विभाग को भी मुख्यमंत्री ने तलब किया। अवैध मदरसा और नमाज स्थल को सील कर दिया गया था। 3 एकड़ जमीन प्रशासन ने अपने नियंत्रण में ली थी।

नगर आयुक्त पंकज उपाध्याय का कहना है कि पत्थरबाजों को चिह्नित किया जा रहा है, उन पर कार्रवाई की जाएगी। घायलों में SDM भी शामिल हैं। DCP अभिनव कुमार ने बताया कि अराजक तत्वों ने गोलीबारी भी की है। इलाके में 4000 से अधिक मकान अवैध अतिक्रमण कर के बनाए गए हैं। घायल पुलिसकर्मियों की संख्या 20 से अधिक बताई जा रही है। JCB का शीशा तोड़ डाला गया। ट्रैक्टर पलट दिया गया। टायर जला कर रास्ता बंद कर दिया गया। थाने में आग लगा दी गई।

कुमाऊँ मंडल के नैनीताल जनपद में स्थित हल्द्वानी में अगले आदेश तक कर्फ्यू लगा रहेगा।

भारी पत्थरबाजी, गाड़ियाँ फूँकी, कई पुलिस वाले घायल: हल्द्वानी में अवैध मदरसा-मस्जिद पर चला बुलडोजर तो हिंसक हुई कट्टरपंथी भीड़, सीएम ने की बैठक, देखते ही गोली मारने के आदेश

उत्तराखंड के हल्द्वानी में प्रशासन ने अवैध अतिक्रमण के खिलाफ अभियान चलाया। ये अभियान कई दिनों से सरकारी जमीनों पर हो चुके अवैध कब्जों के खिलाफ चल रहा था, जिसमें अवैध मकानों और अवैध धार्मिक स्थलों के ध्वस्तीकरण की कार्रवाई चल रही है। इसी क्रम में गुरुवार (8 फरवरी 2024) को बनफूलपुरा थाना इलाके के ‘मालिक के बगीचे’ में पहुँची और अवैध रूप से बनी मस्जिद और मदरसे पर बुलडोजर चलाया। इसके बाद पूरे इलाके में तनाव फैल गया। इस्लामिक कट्टरपंथियों की भीड़ ने पुलिस पर पथराव किया और पुलिस वालों पर हमला बोल दिया। इस हमले में कई पुलिसवाले घायल भी हो गए। इस बीच, उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने हाई लेवल मीटिंग बुलाई है।

सीएम की मीटिंग के बाद लगा कर्फ्यू, देखते ही गोली मारने के आदेश

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने हल्द्वानी के हालात पर चर्चा के लिए हाई लेवर मीटिंग बुलाई। बैठक में शासन और पुलिस के अधिकारी मौजूद रहे। बैठक में मुख्यमंत्री ने पुलिस अधिकारियों को जरूरी दिशा-निर्देश दिए। इसी के साथ नैनीताल जिला प्रशासन ने दंगा प्रभावित क्षेत्र में कर्फ्यू लगा दिया है। इसके साथ ही उपद्रवियों को देखते ही गोली मारने का आदेश जारी कर दिया गया है।

बताया जा रहा है कि हल्द्वानी में बवाल के बीच ही नैनीताल के एसएसपी प्रहलाद मीणा भी मौके पर पहुँच गए और उन्होंने भी मोर्चा संभाल लिया है। बताया जा रहा है कि मौके पर भारी पुलिस बल तैनात किया गया है।

मुख्यमंत्री धामी ने की शांति बनाए रखने की अपील

इस बैठक के बाद मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने लोगों से शांति बनाने की अपील की। सीएम धामी ने कहा, “हल्द्वानी के बनभूलपुरा इलाके में प्रशासन की एक टीम कोर्ट के आदेश के बाद अतिक्रमण विरोधी अभियान के लिए गई थी। वहाँ असामाजिक तत्वों ने पुलिस के साथ विवाद किया, जिसमें कई पुलिस कर्मियों और प्रशासनिक अधिकारियों को चोटें आईं। पुलिस और केंद्रीय बलों की अतिरिक्त कंपनियाँ वहाँ भेजी जा रही हैं। हमने सभी से शांति बनाए रखने की अपील की है। कर्फ्यू लगा हुआ है। आगजनी करने वाले दंगाइयों और अतिक्रमणकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।”

अवैध मस्जिद और मदरसे पर चला बुलडोजर को घेर लिया थाना

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस्लामिक भीड़ ने हल्द्वानी के बनभूलपुरा थाने को चारों ओर से घेर लिया और जमकर पथराव किया। इस भीड़ में पुरुषों के साथ महिलाएँ भी शामिल रही। कट्टरपंथियों की भीड़ ने कई गाड़ियों को आग के हवाले कर दिया। यही नहीं, ट्रांसफॉर्मर को आग के हवाले करके उन्होंने बिजली आपूर्ति भी रोक दी है। इस बवाल में पुलिस प्रशासन के साथ ही पत्रकार भी फंस गए। भीड़ को रोकने के लिए पुलिस को हवाई फायरिंग भी करनी पड़ी, तो गैस के गोले भी दागने पड़े। हल्द्वानी के हिंसाग्रस्त इलाके में कई थानों की पुलिस फोर्स पहुँची है।

जानकारी के मुताबिक, प्रशासन के जेसीबी ने जैसे ही अवैध मदरसे और अवैध मस्जिद पर कार्रवाई शुरू की, वैसे ही इस्लामिक कट्टरपंथियों की भीड़, जिसमें महिलाएँ भी शामिल ती, उन्होंने भी बवाल करना शुरू कर दिया। भीड़ ने पथराव शुरू कर दिया। इस पथराव में पुलिसकर्मियों के साथ ही नगर निगम की टीम के कई लोग भी घायल हो गए। पथराव को रोकने और भीड़ को समझाने के लिए नगर आयुक्त पंकज उपाध्याय, सिटी मजिस्ट्रेट ऋचा सिंह, एसडीएम परितोष वर्मा समेत नगर निगम की टीम ने कोशिश भी की, लेकिन भीड़ का हमलावर रुख नहीं बदला। कट्टरपंथियों को रोकने के लिए पुलिस को आँसू गैस के गोले भी छोड़ने पड़े।

अमर उजाला की रिपोर्ट के मुताबिक, नगर आयुक्त पंकज उपाध्याय ने बताया अवैध मदरसे से एवं नमाज वाले जगह पूरी तरह अवैध है। जिसके पास एक तीन एकड़ जमीन पर नगर निगम ने कब्जा पूर्व में ले लिया था, लेकिन अवैध मदरसे एवं नमाज स्थल को सील कर दिया था और अब इसे ध्वस्त कर दिया गया। इस दौरान प्रदर्शनकारियों को तितर-बितर करने के लिए पुलिस को आंसू गैस के गोले दागने पड़े। इस हिंसा में कई पुलिसकर्मी और लोग घायल हैं। घायलों को उपचार के लिए अस्पताल ले जाया गया है।