उत्तराखंड वक्फ बोर्ड के चेयरमैन ने कहा है कि उन्हें समान नागरिक संहिता से कोई समस्या नहीं है, उन्होंने इसके इस्लाम विरोधी होने की बातों को नकार दिया है। साथ ही साथ उन्होंने कहा है कि इसका पालन करने में कोई समस्या नहीं है, क्योंकि यह इस्लामिक मान्यताओं पर कहीं भी अतिक्रमण नहीं करता।
ANI से UCC पर बात करते हुए उत्तराखंड वक्फ बोर्ड के चेयरमैन शादाब शम्स ने कहा, “मुझे विश्वास है कि इस विधेयक को पूरा देश हाथों-हाथ स्वीकार करेगा। इसके बारे में यह अफवाह फैलाई जा रही है कि UCC इस्लाम विरोधी है, मैं यह कह सकता हूँ कि इसमें कुछ भी इस्लाम के खिलाफ नहीं है और यह इस्लामिक भावनाओ से कहीं नहीं टकराता।”
उन्होंने आगे कहा, “खुद के मुस्लिम होने के नाते मैं कुरान के सामने यह बात पूरी ईमानदारी से कहता हूँ कि UCC को मानने में कोई समस्या नहीं है। जो इसका विरोध कर रहे हैं वह असली मुसलमान नहीं हैं। वह राजनीतिक मुस्लिम हैं जिनका कनेक्शन समाजवादी पार्टी और कॉन्ग्रेस से है। मैं फिर से पूरी जिम्मेदारी से कहता हूँ कि यह बिल इस्लाम का उल्लंघन नहीं करता और मुस्लिम UCC का पालन कर सकते हैं।”
UCC को बुधवार (7 फरवरी, 2024) को उत्तराखंड विधानसभा से बहुत से पास किया गया था। इसके उत्तराखंड विधानसभा से पास होने पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी इसे ‘उत्तराखंड के लिए ऐतिहासिक दिन’ बताया। उन्होंने कहा कि इस कानून से समाज के सभी वर्गों को फायदा होगा।
UCC को उत्तराखंड विधानसभा में 6 फरवरी को रखा गया था। इससे पहले इसे कैबिनेट की मंजूरी हासिल हुई थी। इस बिल का ड्राफ्ट एक पाँच सदस्यीय पैनल ने 2 फरवरी, 2024 को उत्तराखंड सरकार को सौंपा था। इस तरह से उत्तराखंड आजाद भारत का पहला ऐसा राज्य बन गया है जिसने UCC लागू किया है। उत्तराखंड में लाए गए UCC के अंतर्गत विवाह, उत्तराधिकार, तलाक और लिव इन रिलेशनशिप जैसे मामलों के नए नियम बनाए गए हैं। इन्हें समान रूप से राज्य की पूरी जनता पर लागू किया जाएगा।
उत्तर प्रदेश के ग्रेटर नोएडा में माज पठान ने वैभव अग्रवाल की हत्या कर के उसका शव नहर में फेंक दिया। दोनों के बीच एक लड़की की फोटो को लेकर विवाद हुआ जिसके कारण वैभव की माज ने हत्या कर दी। माज को पुलिस ने मुठभेड़ के बाद गिरफ्तार कर लिया है।
जानकारी के अनुसार, ग्रेटर नोएडा के दनकौर इलाके के बिलासपुर का रहने वाला वैभव अग्रवाल 29 जनवरी, 2024 से घर से लापता था। परिजनों ने अपने स्तर से वैभव को ढूँढा लेकिन उसके ना मिलने पर पुलिस में शिकायत दर्ज करवाई।
पुलिस ने भी इस मामले में एक सप्ताह तक प्रयास कर लिए पर वैभव के विषय में कोई जानकारी नहीं मिली। पुलिस ने इसके बाद तकनीक का सहारा लेते हुए वैभव के फोन को सर्विलांस पर लगाया। पुलिस को इससे दो अन्य युवकों के विषय में पता चला। इन दोनों ने ही मिलकर वैभव अग्रवाल की हत्या की थी। इसके बाद इन्होंने शव को नहर में फेंक दिया था।
पुलिस की जाँच में सामने आया कि इनमें से एक आरोपित नाबालिग है जबकि मुख्य हत्यारा माज पठान वैभव को पहले से जानता था। उसका एक लड़की को लेकर वैभव से विवाद था। माज जिसे अपनी गर्लफ्रेंड बताता था, उसकी फोटो वैभव के फ़ोन में थी। माज इस गर्लफ्रेंड की फोटो डिलीट करने के लिए वैभव पर दबाव बना रहा था, जब वैभव नहीं माना तो माज पठान ने उसे एक जगह पर मिलने बुलाया और उसकी अपने नाबालिग दोस्त के साथ मिलकर हत्या कर दी। इसके बाद दोनों ने मिलकर शव को नहर में फेंक दिया।
पुलिस ने इन्हें एक मुठभेड़ के बाद पकड़ा। पुलिस ने बताया कि उसे इलेक्ट्रॉनिक सर्विलांस और गोपनीय सूचना प्राप्त हुई थी नोएडा के धनौरी से सक्का वाले रास्ते पर कहीं अभियुक्त मौजूद हैं। जब वह इस रास्ते पर आगे बढ़े तो उन्हें दो युवक बाइक से आते दिखे, पुलिस ने उन्हें रोकने का प्रयास किया तो वह भागने लगे और पुलिस पर फायर कर दिया।
थाना दनकौर पुलिस और हत्या में वांछित अभियुक्त के बीच हुई मुठभेड़ में अभियुक्त माज पठान गोली लगने से घायल/गिरफ्तार व बाल अपचारी कांबिंग के दौरान गिरफ्तार, कब्जे से अवैध हथियार तथा मृतक किशोर का मोबाइल फोन बरामद।
— POLICE COMMISSIONERATE GAUTAM BUDDH NAGAR (@noidapolice) February 7, 2024
पुलिस ने जवाबी फायर करते हुए मुठभेड़ में इन दोनों को गिरफ्तार कर लिया। इस मुठभेड़ में माज के पैर में गोली लगी है। इनके पास से मृतक वैभव अग्रवाल का फ़ोन भी बरामद हुआ है। इसके अलावा इनके पास से पुलिस ने एक तमंचा भी बरामद किया है। दोनों ने हत्या करने की बात कबूल कर ली है। इन्होंने बताया है कि वैभव की हत्या 30 जनवरी, 2024 को की गई है।
पंजाब के कपूरथला में एक महिला को आवारा कुत्तों ने नोच कर मार डाला। महिला गाय के लिए चारा लेने घर से बाहर निकली थी। बाद में घंटों बाद उसकी लाश मिली। इससे पहले भी इस गाँव में कुत्तों ने दो और लोगों पर हमला किया था। यह एक सप्ताह के भीतर तीसरी ऐसी घटना है।
जानकारी के अनुसार, कपूरथला के पासां कादिम गाँव में रहने वाली 32 वर्षीय महिला रामपरी बुधवार (7 फरवरी, 2024) को शाम 6 बजे अपने घर से खेतों की तरफ गाय के लिए चारा लेने निकली थी। इसी दौरान उस पर यहाँ मौजूद लगभग 20 कुत्तों ने हमला बोल दिया और नोच-नोच कर मार डाला।
महिला पर जब कुत्तों ने हमला किया, उस समय वहाँ पर उसकी मदद के लिए कोई मौजूद नहीं था। महिला का पति केवल ठाकुर भी उस दौरान घर पर नहीं था और उसके तीन बच्चे भी इस बारे में बेखबर थे। जब शाम को पति घर वापस आया तो बच्चों ने बताया कि उनकी माँ काफी देर से वापस नहीं आई।
जब उन्होंने तलाश चालू की तो उन्हें अपनी पत्नी की लाश जानवरों के कंकालों के फेंके जाने वाली जगह पर मिली। महिला को कुत्तों ने बुरी तरीके से नोचा हुआ था। लाश पर जगह जगह काटने और नोचने के निशान थे।
महिला की मौत के बाद उसके पति और बच्चों का बुरा हाल है। केवल ठाकुर रोजाना मजदूरी करके परिवार का भरण पोषण करते हैं। उनके तीन बच्चे हैं, जिनमें से सबसे छोटा मात्र 9 माह का है। उनका कहना है कि उनके बच्चों की अब देखभाल कौन करेगा।
द ट्रिब्यून की एक रिपोर्ट बताती है कि इस गाँव मात्र एक सप्ताह पहले ही एक 6 साल की बच्ची को कुत्तों ने काटा था जिसके बाद उसकी मौत हो गई थी। एक और महिला को भी हाल ही में कुत्तों ने घायल कर दिया था जिसे अस्पताल में भर्ती करवाना पड़ा था। गाँव वालों का कहना है कि कुत्तों के आतंक के कारण उन्होंने बाहर निकलना छोड़ दिया है।
पुलिस ने इस मामले में बताया है कि जहाँ महिला की हत्या हुई वहाँ पर हड्डियों का ढेर लगा रहता है जिससे यहाँ कुत्ते और भी खतरनाक हो गए हैं। मृतका की लाश को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है। इलाके में कुत्तों को रोकने के लिए कार्रवाई की जा रही है।
भारत में चीन के बाद सबसे ज्यादा आवारा कुत्ते
विश्व स्वास्थ्य संगठन की रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में चीन के बाद सबसे ज्यादा आवारा कुत्ते हैं। भारत में 6 करोड़ से अधिक आवारा कुत्ते हैं। हालाँकि भारत सरकार के मत्स्यपालन, पशुपालन एवँ डेयरी मंत्रालय ने साल 2019 में जो पशुगणना कराई थी, उसमें आवारा पशुओं की संख्या दो करोड़ तीन लाख बताई गई। हालाँकि इसमें भी आवारा कुत्तों की संख्या 1 करोड़ 53 लाख बताई गई। उस पशुगणना के मुताबिक, भारत के दो केंद्र शासित प्रदेशों लक्षद्वीप के साथ ही दादरा और नागर हवेली में एक भी आवारा कुत्ते नहीं थे, तो मणिपुर में भी एक भी आवारा कुत्ता नहीं मिला।
कलकत्ता हाईकोर्ट में एक याचिका आई है। इसमें बताया गया है कि हिरासत में जेल में रहने के दौरान ही कई महिला कैदी गर्भवती हो गई हैं। मुख्य न्यायाधीश TS शिवज्ञानम और न्यायधीश सुप्रतिम भट्टाचार्य की पीठ ने इस याचिका पर सुनवाई की। याचिका में कहा गया है कि जेल में रहने के दौरान ही महिला कैदी गर्भवती हो रही हैं। विभिन्न जेलों में पहले से ही 196 बच्चों का पालन-पोषण हो रहा है। साथ ही माँग की गई है कि महिला जेलों में पुरुषों की एंट्री प्रतिबंधित की जाए।
कलकत्ता हाईकोर्ट के ‘Amicus Curiae’ (न्याय मित्र) ने ये याचिका दायर की है। उन्होंने राज्य के ‘इंस्पेक्टर जनरल ऑफ प्रिजन्स’ (IG – Prisons) के साथ एक जेल का दौरा भी किया। वहाँ उन्होंने एक महिला कैदी गर्भवती मिली। साथ ही वहाँ 15 बच्चे अपनी माँओं के साथ रह रहे थे। उनकी माँएँ करेक्शनल होम्स में ही हिरासत में रह रही थीं। कलकत्ता हाईकोर्ट ने इस याचिका पर विचार करने के बाद माना कि ‘न्याय मित्र’ ने एक गंभीर मुद्दे की तरफ ध्यान आकृष्ट कराया है।
साथ ही मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली पीठ ने आदेश दिया कि आपराधिक मामलों पर सुनवाई करने वाली खंडपीठ के समक्ष इस मामले को रखा जाए। साथ ही राज्य के पब्लिक प्रॉसिक्यूटर को भी उस दौरान उपस्थिति दर्ज कराने को कहा गया है। उच्च न्यायालय को बताया गया है कि जेल में ही बच्चों के जन्म हो रहे हैं। साथ ही करेक्शनल होम्स में जो पुरुष कर्मचारी काम करते हैं, उन्हें महिलाओं के रहने वाले सेक्शन में प्रवेश न देने की माँग की गई है।
Amicus in the PILs pertaining to prison reforms, informs the bench that women prisoners are getting pregnant while in custody.
Amicus: Milords, therefore, I pray total prohibition of male employees of correctional homes, in the enclosures where women prisoners are kept.…
कलकत्ता हाईकोर्ट के समक्ष इस प्रकरण को लेकर 2 नोट्स भी रखे गए। वहीं पश्चिम बंगाल के एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बताया कि अगर किसी ऐसी महिला को गिरफ्तार किया जाता है जिसके बच्चे की उम्र 6 वर्ष से कम है, तो उस स्थिति में बच्चे को भी अपनी माँ के साथ जेल में रहने की अनुमति दी जाती हैं। उन्होंने बताया कि जेल में महिला कैदियों के गर्भवती होने के संबंध में उन्हें कोई जानकारी नहीं है। उन्होंने कहा कि ऐसा कुछ संज्ञान में आया तो इस पर विचार किया जाएगा। मामले की सुनवाई अब सोमवार (12 जनवरी, 2024) को होगी।
गुजरात के जूनागढ़ में भड़काऊ भाषण देने वाले सलमान अजहरी पर सिर्फ गुजरात में नहीं बल्कि अन्य राज्यों में भी एफआईआर दर्ज है। ये शिकायतें बताती हैं कि अजहरी का आपराधिक इतिहास रहा है। उस पर कभी भड़काऊ भाषण देने के आरोप लगे हैं तो कभी हिंसक गतिविधियों में शामिल होने के।
इस रिपोर्ट में अजहरी के विरुद्ध दर्ज मामलों की हम आपको जानकारी पेश कर रहे हैं। ये सारे मामले 2015 के बाद के हैं उससे पहले अगर कोई शिकायत दर्ज हुई थी तो उसकी जानकारी अभी प्राप्त नहीं है। अगर मामला 2015 से पूर्व दर्ज हुआ होगा तो ये संख्या और भी बढ़ सकती है।
सलमान अजहरी के खिलाफ दायर 11 FIR का ब्यौरा
मुफ्ती सलमान अजहरी के खिलाफ पहली एफआईआर पुराने हुबली पुलिस स्टेशन, धारवाड़ (कर्नाटक) में 14 दिसंबर 2015 को दर्ज की गई थी। केस में आईपीसी की धारा 143, 147, 148, 153, 427 और 149 लगाई गई थी।
अजहरी के खिलाफ दूसरी एफआईआर भी ओल्ड हुबली पुलिस स्टेशन (कर्नाटक) में भी दर्ज की गई थी। लेकिन एक दिन बाद यानी 15 दिसंबर 2015 को। हुबली पुलिस स्टेशन (249/2015) में दर्ज इस एफआईआर में आईपीसी की धारा 143, 147, 148, 153, 427, 149 और संपत्ति क्षति से संबंधित धाराओं के तहत अपराध दर्ज किया गया था।
अजहरी के खिलाफ तीसरी एफआईआर भी 15 दिसंबर 2015 को दर्ज की गई थी। शिकायत धारवाड़ (कर्नाटक) कस्बापेठ पुलिस स्टेशन में दर्ज की गई थी। एफआईआर (1354/2015) आईपीसी की धारा 143, 147, 148, 153, 427 और 149 के तहत दर्ज की गई थी।
मौलाना के खिलाफ चौथी एफआईआर भी 15 दिसंबर 2015 को दर्ज की गई थी। यह शिकायत भी कस्बापेठ पुलिस स्टेशन में ही दर्ज की गई थी। इसमें आईपीसी की धारा 143, 147, 148, 153, 427 और 149 के तहत अपराध दर्ज किया गया था।
पाँचवीं एफआईआर भी 15 दिसंबर 2015 को कस्बापेठ पुलिस स्टेशन में ही दर्ज की गई थी। आईपीसी की धारा 143, 147, 148, 153, 427 और 149 के तहत अपराध दर्ज किया गया था।
इसके बाद 15 दिसंबर 2015 को अजहरी के खिलाफ छठी एफआईआर भी कस्बापेठ पुलिस स्टेशन में ही दर्ज कराई गई थी। केस को आईपीसी की धारा 143, 147, 148, 153, 427, 149 और संपत्ति क्षति से संबंधित धाराओं के तहत दर्ज किया गया था।
15 दिसंबर 2015 को कसाबापेठ पुलिस स्टेशन में ही अजहरी के खिलाफ सातवीं एफआईआर भी दर्ज की गई थी। एफआईआर आईपीसी की धारा 143, 147, 148, 153, 427 और 149 के तहत दर्ज की गई थी।
अजहरी के खिलाफ आठवीं एफआईआर 5 अप्रैल 2017 को दर्ज की गई थी। वह भी कस्बापेठ पुलिस स्टेशन में ही दर्ज की गई थी। केस को आईपीसी की धारा 143, 147, 148, 153, 427 और 149 के तहत दायर किया गया था।
नौवीं एफआईआर 26 अप्रैल, 2021 को मुंबई के विक्रोली पार्क साइट पुलिस स्टेशन में दर्ज की गई थी। एफआईआर आईपीसी की धारा 195 (ए) के तहत दर्ज की गई थी। इस मामले में पुलिस ने कोर्ट में ‘ए’ समरी दाखिल कर दी है।
दसवीं शिकायत गुजरात के जूनागढ़ में दर्ज की गई है। मुफ़्ती सलमान अजहरी ने जूनागढ़ आकर भड़काऊ भाषण दिया। जिसके बाद जूनागढ़ पुलिस ने स्वत: संज्ञान लेते हुए एफआईआर दर्ज की। एफआईआर आईपीसी की धारा 153(बी), 505(2), 188 और 114 के तहत दर्ज की गई है। इस मामले पर कार्रवाई फिलहाल जारी है।
11वीं एफआईआर भी गुजरात में ही दर्ज की गई है। लेकिन ये कच्छ के समखियाली पुलिस स्टेशन में दर्ज है। दरअसल, जूनागढ़ में भड़काऊ भाषण देने से पहले अजहरी ने कच्छ में भी भड़काऊ भाषण दिया था। इस संबंध में कच्छ पुलिस ने मामला भी दर्ज कर लिया है।
उपरोक्त जानकारी से पता चलता है कि 14 और 15 दिसंबर 2015 को अजहरी के खिलाफ 8 एफआईआर दर्ज की गई थी। ये सभी शिकायतें कर्नाटक में दर्ज हुई थीं और इनमें लगाई धाराएँ भी एक जैसी थीं। अब सिर्फ 2 दिन में सामने आए 8 अपराध और सभी अपराध की धाराएँ एक जैसी होने से आपको लग सकता है कि अजहरी ने ऐसा क्या किया। तो आइए धारा आईपीसी की धारा 143, 147, 148, 153, 427 और 149 के तहत दर्ज की गई हैं। यह भी पता चलेगा कि अजहरी का आपराधिक इतिहास रहा है।
अजहरी के खिलाफ लगाई धाराओं से पता चलता है उसकी प्रवृत्ति
धारा 143 तब लागू की जाती है जब कोई व्यक्ति किसी गैरकानूनी सभा में भाग लेता है। धारा 147 तब लागू की जाती है जब कोई व्यक्ति सांप्रदायिक दंगों, हिंसा में भाग लेकर शांति भंग करने की कोशिश करता है। धारा 148 तब लगाई जाती है जब कोई व्यक्ति किसी घातक हथियार के साथ दंगे में भाग लेता है। धारा 153 तब जोड़ी जाती है जब कोई व्यक्ति भड़काऊ भाषण देकर भीड़ को भड़काने की कोशिश करता है और धार्मिक-सांप्रदायिक सौहार्द बिगाड़ने की कोशिश करता है।
धारा 149 भी तभी जोड़ी जाती है जब कोई व्यक्ति किसी निषिद्ध सभा में भाग लेता है और धारा 427 तब लगाई जाती है जब किसी व्यक्ति ने कोई ऐसा कार्य किया हो जिससे दूसरे पक्ष को 50 रुपए या उससे अधिक का नुकसान हुआ हो। संक्षेप में कहें तो इस धारा के तहत किसी की संपत्ति को नष्ट करना या तोड़फोड़ करना अपराध है।
अब अगर इन सभी धाराओं की समीक्षा की जाए तो पता चलता है कि मुफ्ती सलमान अजहरी का आपराधिक इतिहास है और वह ऐसे अपराधों में शामिल है जिनके कारण उसपर उक्त एफआईआर लगाई गई। अब एटीएस उसके खिलाफ गहनता से जाँच कर रही है। उसके तीन ट्रस्ट भी संदेह के घेरे में हैं। साथ ही आतंकी संगठन से कनेक्शन की भी जाँच की जा रही है।
पाकिस्तान में आम चुनाव के लिए आज (08 फरवरी 2024) मतदान हो रहे हैं। चुनावी नतीजे अगले दिन से आएँगे। मतदान के दौरान कई मतदान केंद्रों पर गड़बड़ियाँ सामने आई हैं। इस चुनाव में सबसे बड़े खिलाड़ी के तौर पर बिलावल भुट्टो जरदारी की अगुवाई में पाकिस्तान पीपल्स पार्टी (पीपीपी) और नवाज शरीफ के नेतृत्व में पाकिस्तान मुस्लिम लीग-नवाज (PML-N) मैदान में हैं, तो कई छोटी पार्टियाँ भी अपनी किस्मत आजमा रही हैं। वहीं, इमरान खान की पार्टी पीटीआई के नेता निर्दलीय चुनाव लड़ रहे हैं। मतदाता सुबह से ही मतदान केंद्रों पर पहुँच रहे हैं। हालाँकि कई मतदान केंद्रों पर मतदाताओं की संख्या काफी कम होने की भी बात सामने आ रही है। इस बीच, पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान ने जेल से बाहर निकलने की जगह जेल से ही मतदान किया। हालाँकि उनकी बीबी-बुशरा को वोट देने की इजाजत नहीं मिली।
पाकिस्तान में मोबाइल सेवाएँ ठप
पूरे देश में मतदान के बीच पाकिस्तान में मोबाइल सेवाओं पर बैन लगा दिया गया है। पाकिस्तान के गृह मंत्रालय ने पूरे देश में इंटरनेट सेवाएँ बंद कर दी हैं। ये कदम सुरक्षा के मद्देनजर उठाना पड़ा है। लोकल मीडिया के हवाले से एएनआई ने ये खबर दी है।
Pakistan's Interior Ministry temporarily suspends mobile services across the country in light of the deteriorating security situation, reports local media
Parliamentary general elections are underway in Pakistan.
मोबाइल सेवाओं पर रोक लगाने का विरोध सभी राजनीतिक दल कर रहे हैं। इस बीच, इमरान खान की पार्टी पीटीआई ने लोगों से अपील की है कि वो अपने वाई-फाई के पासवर्ड हटा दें, ताकी तानाशाह सरकारों को जवाब दिया जा सके और अधिकतम लोग इंटरनेट से जुड़कर पार्टी के लिए वोटिंग बढ़ाने में मदद कर सकें।
पीटीआई ने एक्स पर लिखा, “पाकिस्तानियों, नाजायज- फासीवादी शासन ने मतदान के दिन पूरे पाकिस्तान में सेल फोन सेवाएँ बंद कर दी हैं। आप सभी से अनुरोध है कि अपने व्यक्तिगत वाईफाई खातों से पासवर्ड हटाकर इस कायरतापूर्ण कृत्य का मुकाबला करें, ताकि आसपास के किसी भी व्यक्ति को इस अत्यंत महत्वपूर्ण दिन पर इंटरनेट तक पहुँच मिल सके। हम सब इसमें एक साथ हैं और हम एक साथ जीतेंगे!”
Pakistanis, the illegitimate, fascist regime has blocked cell phone services across Pakistan on polling day.
You are all requested to counter this cowardly act by removing passwords from your personal WiFi accounts, so anyone in the vicinity can have access to internet on this… pic.twitter.com/b0OwDhwBaB
वहीं, पाकिस्तान पीपल्स पार्टी (पीपीपी) की ओर से प्रधानमंत्री पद के दावेदार और तीन जगहों से चुनाव लड़ रहे बिलावल भुट्टो जरदारी ने भी मोबाइल सेवाओं पर रोक का विरोध किया है। उन्होंने अपनी पार्टी के कार्यकर्ताओं और नेताओं से चुनाव आयोग के साथ ही कोर्ट में भी जाने के लिए कहा है। उन्होंने एक्स पर पोस्ट किया, “पूरे देश में मोबाइल फोन सेवाएँ तुरंत बहाल की जानी चाहिए, मैंने अपनी पार्टी के लोगों से कहा है कि वो मोबाइल सेवाओं पर रोक हटाने के लिए पाकिस्तान चुनाव आयोग और कोर्ट दोनों ही जगहों पर जाएँ।”
Mobile phone services must be restored immediately across the country have asked my party to approach both ECP and the courts for this purpose.
पाकिस्तान की पिछली सरकार में विदेश मंत्री रहे बिलावल भुट्टो जरदारी पीपीपी के अध्यक्ष हैं। वो तीन जगहों- एनए194 लरकाना, एनए196 शाहदादकोट और एनए127 लाहौर से चुनाव लड़ रहे हैं। उनकी माँ बेनजीर भुट्टो दो बार देश की प्रधानमंत्री रही हैं, तो पिता आसिफ अली जरदारी देश के राष्ट्रपति रह चुके हैं। इमरान खान की सरकार गिरने के बाद उन्होंने नवाज शरीफ की पार्टी के साथ गठजोड़ करके नई सरकार बनाई थी और उन्हें विदेश मंत्रालय का काम मिला था।
नवाज शरीफ चुनावी मैदान में लौटे, बनेंगे प्रधानमंत्री?
इस चुनाव से ठीक पहले पाकिस्तान के तीन बार प्रधानमंत्री रहे नवाज शरीफ भी पाकिस्तान पहुँचे हैं और वो चौथी बार प्रधानमंत्री बनने के लिए ताकत आजमा रहे हैं। अभी उनके छोटे भाई शहबाज शरीफ सत्ता संभाल रहे थे। इसके बाद केयरटेकर सरकार की देखरेख में चुनाव हो रहा है। नवाज शरीफ कई जगहों से चुनाव लड़ रहे हैं। इस बीच उन्होंने मतदान किया और लोगों ने अपनी पार्टी के पक्ष में भारी मतदान की भी अपील की है।
पीएमएल-एन के मुखिया नवाज शरीफ ने मतदान के बाद लाहौर में मीडिया से बातचीत की (फोटो साभार – डॉन न्यूज टीवी
पाकिस्तान नेशनल असेंबली की 265 सीटों पर मतदान
पाकिस्तान के आम चुनाव में इस बार करीब 5000 उम्मीदवार मैदान में हैं। ये उम्मीदवार 265 सीटों के लिए अपनी किस्मत आजमा रहे हैं। पाकिस्तान नेशनल असेंबली चुनाव में इस बार पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की पार्टी हिस्सा नहीं ले पा रही है, क्योंकि उनकी पार्टी के चुनाव निशान ‘बैट’ को जब्त कर लिया गया है। ऐसे में उनकी पार्टी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) के उम्मीदवार अलग-अलग चुनाव निशान के साथ निर्दलीय मैदान में हैं। पाकिस्तान में नेशनल असेंबली के लिए हो रहे चुनाव में सुरक्षा व्यवस्था को संभालने के लिए साढ़े 6 लाख से ज्यादा जवानों को जिम्मेदारी सौंपी गई है।
पाकिस्तान चुनाव आयोग के मुताबिक, पूरे देश में करीब साढ़े 12 करोड़ मतदाता हैं। देश भर में 90 हजार से ज्यादा पोलिंग स्टेशन बनाए गए हैं। चुनाव आयोग ने महिलाओं को मतदान से जोड़ने के लिए कई जगहों पर महिलाओं के लिए विशेष पोलिंग बूथ भी बनाए हैं। पाकिस्तान में 44 हजार मतदान केंद्रों को सामान्य, 29,985 मतदान केंद्रों को संवेदनशील तो 16,766 मतदान केंद्रों को अति संवेदनशील घोषित किया गया है। गुरुवार (7 फरवरी 2024) को मतदान पूरा हो जाने के बाद अगले ही दिन यानी शुक्रवार (9 फरवरी 2024) को ही नतीजे आने लगेंगे।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की गिनती ऐसे उदार नेताओं में होती है जो विपक्षी दलों के नेताओं के अच्छे कार्यों की सराहना करने में कभी कंजूसी नहीं बरतते। उनका यही रूप गुरुवार (8 फरवरी 2024) को संसद के उच्च सदन राज्यसभा में दिखा। उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री और कॉन्ग्रेस के राज्यसभा सांसद डॉ. मनमोहन सिंह की संसद के प्रति प्रतिबद्धता को याद करते हुए उनसे सीखने की सलाह सभी सांसदों को दी।
मनमोहन सिंह समेत 56 सदस्य राज्यसभा से रिटायर होने वाले हैं। इनकी विदाई के मौके पर प्रधानमंत्री सदन में बोल रहे थे। सिंह वर्तमान में राजस्थान से राज्यसभा सांसद हैं। प्रधानमंत्री ने विदाई के मौके पर उनकी कर्मठता की तारीफ की।
प्रधानमंत्री ने कहा, “मैं विशेष रूप से माननीय डॉक्टर मनमोहन सिंह जी का स्मरण करना चाहूँगा। 6 बार वह इस सदन में रहे। अपने मूल्यवान विचारों से, नेता के रूप में भी और प्रतिपक्ष के नेता के रूप में उनका बहुत बड़ा योगदान रहा है। वैचारिक मतभेद, बहस में छींटाकशी, यह तो बहुत अल्पकालिक होता है। लेकिन इतने लम्बे अरसे तक जिस प्रकार से उन्होंने इस सदन का मार्गदर्शन किया है, देश का मार्गदर्शन किया है, जब भी कभी हमारे लोकतंत्र की चर्चा के दौरान जब कुछ माननीय सदस्यों की चर्चा होगी उसमें माननीय मनमोहन सिंह के योगदान को जरूर याद किया जाएगा।”
#WATCH | PM Modi lauds the contribution of Congress MP and former PM Manmohan Singh
The PM is addressing during the farewell of retiring members of the Rajya Sabha pic.twitter.com/1MATqWIGhd
आगे उन्होंने कहा, “मैं सभी सांसदों से, चाहे इस सदन में हो या फिर उस सदन में, जो आज हैं और जो भविष्य में आने वाले हैं, उनसे कहूँगा कि यह जो माननीय सांसद होते हैं किसी भी दल में हों, जिस प्रकार से उन्होंने (मनमोहन सिंह) अपना जीवन अपना जिया होता है, जिस प्रकार की प्रतिभा का प्रदर्शन कराया होता है, उसका हमें एक मार्गदर्शक के रूप में उपयोग करना चाहिए।”
प्रधानमंत्री मोदी ने इस दौरान डॉ. मनमोहन सिंह के व्हीलचेयर पर राज्यसभा में आने की चर्चा भी की। उन्होंने कहा, “मुझे याद है कि सदन में वोटिंग का एक अवसर था। पता था उन्हें विजय ट्रेजरी बेंच (सरकार) की होने वाली है, अंतर भी बहुत था, लेकिन डॉ. सिंह व्हीलचेयर पर आए और वोट किया।”
आगे उन्होंने कहा, “एक सांसद अपने दायित्व के लिए कितना सजग है, उसका वो प्रेरक उदाहरण हैं। इतना ही नहीं मैं देख रहा था कि कभी कमेटी मेम्बर्स के चुनाव हुए तो व्हीलचेयर पर वोट देने आए। सवाल यह नहीं है कि वह किसको मजबूत करने के लिए वोट देने आए थे, वह लोकतंत्र को मजबूत करने के लिए आए थे।” गौरतलब है कि मनमोहन सिंह अगस्त 2023 में मॉनसून सत्र के दौरान दिल्ली सेवा बिल पर मतदान के लिए व्हीलचेयर पर राज्यसभा में आए थे।
डॉ मनमोहन सिंह वर्ष 1991 में पहली बार राज्यसभा के सदस्य बने थे। इसके बाद वह पाँच बार इस सदन के लिए चुने गए। वह सर्वाधिक बार असम से राज्यसभा के सदस्य रहे। वह प्रधानमंत्री भी राज्यसभा के सदस्य रहते हुए बने थे। प्रधानमंत्री मोदी ने सदस्यों को विदाई देने के अलावा कॉन्ग्रेस पर उनकी सरकार के खिलाफ ब्लैक पेपर लाने को लेकर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि कॉन्ग्रेस की तरफ से आज काला टीका लगाने का प्रयास किया गया है।
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, “काले कपड़ों में सदन को फैशन शो देखने का भी मौका मिला है। कभी-कभी कुछ काम इतने अच्छे होते हैं जो लम्बे समय तक उपयोगी होते हैं। हमारे यहाँ कुछ अच्छी चीज करते हैं तो परिवार में एक स्वजन ऐसा भी होता है, जो कहता है कि अरे नजर लग जाएगी काला टीका लगा देता हूँ। आज पिछले 10 वर्षों में जो काम हुए हैं उसको किसकी नजर ना लग जाए इसलिए आज खड़गे जी काला टीका लगाकर आए हैं। हमारे कार्यों को नजर ना लग जाए इसलिए आप जैसे वरिष्ठ सांसद काला टीका लगाकर आए हैं तो यह अच्छी बात है।”
कॉन्ग्रेस पार्टी के पूर्व अध्यक्ष राहुल गाँधी ने एक बार फिर से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की जाति को लेकर टिप्पणी की है। राहुल गाँधी ने ‘भारत जोड़ो न्याय यात्रा’ के दौरान कहा, “मैं बहुत गहरी बात बोल रहा हूँ। आप सब लोगों को भयंकर बेवकूफ बनाया जा रहा है। सुनो, मैं जो कह रहा हूँ। नरेंद्र मोदी OBC नहीं पैदा हुए थे, वो गुजरात में तेली जाति में पैदा हुए थे। उनकी जाति को भाजपा ने सन् 2000 में ओबीसी बनाया। आपके प्रधानमंत्री OBC नहीं पैदा हुए, सामान्य वर्ग में पैदा हुए।”
नरेंद्र मोदी OBC पैदा नहीं हुए: राहुल गाँधी
उन्होंने पीएम मोदी पर पूरी दुनिया में झूठ बोलने का आरोप लगाते हुए कहा कि वो किसी ओबीसी से गले नहीं मिलते, किसान-मजदूर का हाथ नहीं पकड़ते, बल्कि अडानी का हाथ पकड़ते हैं। राहुल गाँधी ने ओडिशा में ये बात कही, जहाँ से यात्रा गुरुवार (8 फरवरी, 2024) को छत्तीसगढ़ में घुसी। रायगढ़, कोरबा और सक्ती जिलों से गुजरेगी। 14 फरवरी को यात्रा झारखंड में एंटर करेगी। उससे पहले ही राहुल गाँधी ने पीएम मोदी के जाति-वर्ग को लेकर झूठ फैला दिया है।
#WATCH | Congress MP Rahul Gandhi says, "PM Modi was not born in the OBC category. He was born Teli caste in Gujarat. The community was given the tag of OBC in the year 2000 by the BJP. He was born in the General caste…He will not allow caste census to be conducted in his… pic.twitter.com/AOynLpEZkK
असल में बजट सत्र में लोकसभा में अपने संबोधन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विपक्ष द्वारा OBC को लेकर सवाल उठाए जाने पर खुद की तरफ इशारा करते हुए कहा था कि आपको सबसे बड़ा ओबीसी ही नहीं दिखाई दे रहा है। अब राहुल गाँधी का कहना है कि भाजपा सरकार ने नरेंद्र मोदी की जाति को ओबीसी कैटेगरी में डाल दिया। नरेंद्र मोदी अक्टूबर 2001 में पहली बार गुजरात के मुख्यमंत्री बने थे। वहीं राज्य में भाजपा की सरकार पहली बार मार्च 1995 में बनी थी।
1994 में भी OBC में थी मोढ़-घांची जाति
अब आपको बताते हैं कि राहुल गाँधी के दावे की सच्चाई क्या है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तेली जाति के मोढ़-घांची वर्ग से ताल्लुक रखते हैं। तेली जाति, वैश्य समाज के अंतर्गत आती है, जिन्हें बनिया भी कहा जाता है। गुजरात सरकार के सामाजिक कल्याण विभाग ने 25 जुलाई, 1994 को एक अधिसूचना जारी की थी, जिसमें OBC के अंतर्गत आने वाली 36 जातियों का जिक्र किया गया था। इस अधिसूचना में 25वें नंबर के b सेक्शन (25b) में मोढ़-घांची जाति का भी नाम था।
मई 2014 में जब ये मामला उठा था, तब भी भाजपा सरकार ने इस चीज को स्पष्ट किया था कि गुजरात में उसकी सरकार बनने से पहले से ही ये जाति ओबीसी क्लास में है। 1994 में राज्य में कॉन्ग्रेस की सरकार थी। अक्टूबर 1990 से फरवरी 1994 तक चिमनभाई पटेल राज्य के मुख्यमंत्री थे, वहीं फरवरी 1994 से मार्च 1995 तक छबीलदास मेहता मुख्यमंत्री थे। दोनों ही कॉन्ग्रेस की सरकारें थीं। ऐसे में उस समय नरेंद्र मोदी की जाति का ओबीसी में होना बताता है कि भाजपा या मोदी सरकार ने ये नहीं किया, ये कॉन्ग्रेस के शासनकाल में ही हुआ।
बांग्लादेश ने रोहिंग्याओं को शरण देने से मना कर दिया है। वहाँ के नेताओं ने कहा है कि म्यामांर के रास्ते वो अब ज्यादा मात्रा में रोहिंग्याओं को बांग्लादेश की सीमा में नहीं आने देंगे क्योंकि इन लोगों के आने से देश की सुरक्षा में खतरा पैदा हो गया है।
बांग्लादेश के सड़क परिवहन और पुल मंत्री ओबैदुल कादिर ने बुधवार (7 फरवरी 2023) को पत्रकारों से कहा, “हम किसी और रोहिंग्या को देश में प्रवेश करने की अनुमति नहीं देंगे… वे पहले ही हमारे लिए बोझ बन चुके हैं।” उन्होंने बताया कि देश को मिलने वाली विदेशी सहायता पहले ही कम हो चुकी है ऐसे में उन लोगों को समर्थन कैसे दिया जाएगा।
#FPWorld: Bangladesh declared that it will no longer accept the large number of Rohingya refugees from Myanmar into its borders, citing security concerns.
इसी तरह बांग्लादेश के शरणार्थी राहत और प्रत्यावर्तन आयुक्त मोहम्मद मिजानुर रहमान ने कहा कि म्यांमार में जुंटा शासन व विद्रोहियों के बीच जारी जंग के बीच सैकड़ों लोग बांग्लादेश में प्रवेश करने के लिए म्यांमार की सीमा पर एकत्रित हैं। इनमें ज्यादातर चकमा समुदाय के लोग और रोहिंग्या हैं।
उन्होंने कहा, “बांग्लादेश पहले ही रोहिंग्याओं के अत्यधिक बोझ से दबा हुआ है। 7 साल हो गए हैं और अभी तक जो रोहिंग्या पहले से बांग्लादेश में हैं उन्हें उनकी सीमा में नहीं भेजा जा चुका है। अब ये लोग हमारे लिए, हमारी सुरक्षा के लिए खतरा बन गए हैं।”
बता दें कि बांग्लादेश का रोहिंग्याओं पर ऐसा बयान तब आया है जब भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर भी वहाँ के दौरे पर थे। एस जयशंकर से मिलने के बाद बांग्लादेश के विदेश मंत्री हसन महमूद ने कहा, “हमने बहुत अच्छी चर्चा की। हमने तमाम मुद्दों समेत क्रॉस बॉर्डर मुद्दे, रोहिंग्या मुद्दे, सुरक्षा मुद्दे समेत कई मुद्दों पर बात की।”
#WATCH | Delhi: On his meetings with EAM Dr S Jaishankar, Bangladesh Foreign Minister Hasan Mahmud says, "We had a very good discussion. We discussed all the issues including cross-border issues, Rohingya issues, security issues, powersharing and connectivity issues. We discussed… pic.twitter.com/FddaC96lX6
मालूम रहे कि रोहिंग्याओं की संदिग्ध गतिविधियाँ भारत में भी कम नहीं हैं। कुछ साल पहले खबर आई थी कि बांग्लादेश से एक नाव में भरकर 66 रोहिंग्या अंडमान आए थे। पुलिस ने जानकारी होते ही सबको हिरासत में लिया। इनमें 24 पुरुष, 27 औरतें और 15 बच्चे थे। पुलिस ने फौरन उन सबको वापस भेजने की व्यवस्था हुई।
उत्तर प्रदेश के वर्तमान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सहित कई बीजेपी नेताओं की छवि धूमिल करने के लिए फर्जी सीडी पेश करने के मामले में गोरखपुर की कोर्ट ने परवेज परवाज को 7 साल की सजा सुनाई है। जुर्माना भी लगाया है। यह मामला 2007 का है। उस समय परवेज ने लोगों को भड़काकर एक वर्ग की दुकानों पर पथराव करवाया था। बाद में फर्जी सीडी पेश कर बीजेपी नेताओं पर माहौल खराब करने का आरोप लगाते हुए कोर्ट में मुकदमा दायर करवाया था।
जानकारी के अनुसार, वर्ष 2007 में जब इराक के तानाशाह सद्दाम हुसैन को फाँसी दी गई तो परवेज ने गोरखपुर भड़काऊ भाषण दिए और मुस्लिम भीड़ इकट्ठी कर शहर में हिन्दुओं की दुकानों पर पत्थरबाजी करवाई थी। इससे पूरे शहर का माहौल खराब हो गया था। इसके बाद उसने गोरखपुर के तत्कालीन सांसद योगी आदित्यनाथ समेत भाजपा नेता शिवप्रताप शुक्ला, राधामोहन दास अग्रवाल और अंजू चौधरी पर भड़काऊ भाषण देने का आरोप लगाते हुए एक फर्जी मामला दर्ज करवाया था।
जाँच में परवेज के दावे सिद्ध नहींहो सके। न्यायालय ने परवेज से सबूत माँगा तो उसने एक सीडी उपलब्ध करवाई। उसने दावा किया कि इस सीडी में इन नेताओं के भड़काऊ भाषण हैं। इस सीडी को जब फॉरेंसिक जाँच के लिए भेजा गया तो यह फर्जी निकली और पाया गया कि भाषणों से छेड़छाड़ की गई है।
इस मामले में भाजपा के पूर्व एमएलसी स्वर्गीय वाईडी सिंह ने परवेज के विरुद्ध पार्टी नेताओं की छवि धूमिल करने का आरोप लगाते हुए मुकदमा दर्ज करवाया था। इसी से जुड़े मामलों में न्यायिक मजिस्ट्रेट आदर्श श्रीवास्तव ने उसे सजा सुनाई है। एक मामले में उसे पाँच वर्ष और दूसरे में सात वर्ष की सजा सुनाई गई है। दोनों सजाएँ साथ चलेंगी। उसके ऊपर ₹10,000 का जुर्माना भी लगाया गया है।
गौरतलब है कि परवेज पहले से ही दुष्कर्म के एक मामले में जेल में बंद है। उसे कोर्ट ने इस मामले में आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी।