Home Blog Page 1190

‘कॉन्ग्रेस सरकार ने मोढ़-घांची को दिया OBC का दर्जा, मैं ही था डिप्टी CM’: गुजरात के नेता ने खोल दी राहुल गाँधी के झूठ की पोल, PM मोदी की जाति पर की थी टिप्पणी

कॉन्ग्रेस पार्टी के पूर्व अध्यक्ष राहुल गाँधी ने ‘भारत जोड़ो न्याय यात्रा’ के दौरान ओडिशा में कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी OBC के रूप में पैदा नहीं हुए थे, बल्कि सन् 2000 में भाजपा सरकार ने उनकी जाति को ओबीसी का दर्जा दिया। अब कॉन्ग्रेस की सरकार में ही उप-मुख्यमंत्री रहे नेता ने राहुल गाँधी के दावों की पोल खोल दी है। नरहरि अमीन ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ के माध्यम से ऐसा बयान जारी किया है, जो राहुल गाँधी को असहज कर सकता है।

नरहरि अमीन 1974 में गुजरात में हुए ‘नवनिर्माण आंदोलन’ के सबसे सक्रिय नेताओं में से एक थे। युवाओं और मध्यम वर्ग के उस आंदोलन ने तत्कालीन CM चिमनभाई पटेल की सरकार गिरा दी थी। वो फरवरी 1994 से मार्च 1995 तक राज्य के उप-मुख्यमंत्री रहे हैं। उन्होंने बताया है कि 25 जुलाई, 1994 को गुजरात सरकार ने मोढ़-घांची जाति को OBC के भीतर सूचीबद्ध करते हुए अधिसूचना जारी की थी। उस समय वो डिप्टी सीएम हुआ करते थे।

बता दें कि नरेंद्र मोदी इसी समुदाय से आते हैं। नरहरि अमीन ने कहा, “राहुल गाँधी इस मुद्दे पर बेवकूफाना झूठ फैला कर OBC समाज का अपमान कर रहे हैं। मोढ़-घांची जाति को OBC का दर्जा दिए जाने का नोटिफिकेशन जब आया, तब नरेंद्र मोदी विधायक-सांसद तक नहीं बने थे, मुख्यमंत्री तो छोड़ दीजिए। मेरी माँग है कि राहुल गाँधी तुरंत अपना झूठ वापस लें। उन्हें OBC को बदनाम करना बंद कर देना चाहिए और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लेकर घृणा फैलाने के लिए गुजरात से माफ़ी माँगनी चाहिए।”

राहुल गाँधी ने कहा था, “मैं बहुत गहरी बात बोल रहा हूँ। आप सब लोगों को भयंकर बेवकूफ बनाया जा रहा है। सुनो, मैं जो कह रहा हूँ। नरेंद्र मोदी OBC नहीं पैदा हुए थे, वो गुजरात में तेली जाति में पैदा हुए थे। उनकी जाति को भाजपा ने सन् 2000 में ओबीसी बनाया। आपके प्रधानमंत्री OBC नहीं पैदा हुए, सामान्य वर्ग में पैदा हुए।” मई 2014 में जब ये मामला उठा था, तब भी भाजपा सरकार ने इस चीज को स्पष्ट किया था कि गुजरात में उसकी सरकार बनने से पहले से ही ये जाति ओबीसी क्लास में है।

जीशान और मुबारक सहित 4 युवकों ने सुशील की छाती और पेट में गोदा चाकू, स्टंट करने से रोका तो कर दिया हमला: कर्नाटक के इसी जिले में हुई थी ‘बजरंग दल’हर्ष की हत्या

कर्नाटक के शिवमोगा में एक हिन्दू युवक को चार मुस्लिम लड़कों ने चाकू मार कर गंभीर रूप से घायल कर दिया। हिन्दू युवक ने मुस्लिमों को अपने घर की सामने की गली में स्टंट करने से रोका था। इसी से गुस्साए मुस्लिम लड़कों ने हिन्दू युवक को छाती और पेट पर चाकू मार कर घायल कर दिया।

जानकारी के अनुसार, यह घटना मंगलवार (6 फरवरी, 2024) शाम की है। मीडिया रिपोर्ट्स में बताया गया है कि पीड़ित हिन्दू युवक शाम को अपने कुत्ते को टहलाने निकला था। इस दौरान उसकी गली में कुछ मुस्लिम लड़के स्टंट कर रहे थे। सुशील ने जब इन मुस्लिम लड़कों को ऐसा करने से मना किया तो पहले तो वह यहाँ से चले गए लेकिन थोड़ी देर में अपने साथ और लड़कों को लेकर आए और सुशील पर हमला बोल दिया। सुशील के साथ मारपीट की गई और चाकू मार दिया गया।

सुशील के छाती और पेट पर चाकू से वार किए गए हैं, उनका इलाज शिवमोगा के एक निजी अस्पताल में जारी है। सुशील को चाकू मारने के बाद यह मुस्लिम लड़के यहाँ से भाग गए बताया जा रहा है कि पीड़ित हिन्दू युवक सुशील 23 वर्ष का है और एक कॉलेज में कम्यूटर ऑपरेटर का काम करता है।

पुलिस ने इस मामले में बताया है कि उसने केस दर्ज कर लिया है और शुरुआती जाँच करके अभी तक तीन हमलावरों को गिरफ्तार किया है। इनमें से एक नाबालिग भी बताया जा रहा है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, हिन्दू युवक सुशील को चाकू मारने वाले दो हमलावरों का नाम जीशान और मुबारक बताया गया है।

इस हमले के बाद शिकारीपुरा से विधायक और भाजपा प्रदेश अध्यक्ष बीवाई विजयेन्द्र ने राज्य की कॉन्ग्रेस सरकार पर हमला बोला है। उन्होंने कहा, “‘चाहे बेलगावी की घटना हो, हावेरी या मंगलुरु की या फिर कल शिकारीपुरा की, अब तो ऐसा लगता है जैसे कोई भी कुछ भी कर सकता है। हालात तो ऐसे लग रहे हैं जैसे राज्य में कानून व्यवस्था चरमरा गई है। भले ही यहाँ पुलिस व्यवस्था एकदम ध्वस्त हो गई हो लेकिन मुख्यमंत्री अपने पूरे मंत्रिमंडल के साथ दिल्ली में बैठे हैं।”

गौरतलब है कि इससे पहले भी शिवमोगा में हिंसा होती रही है। इससे पहले फरवरी 2022 में शिवमोगा में ही ‘बजरंग दल’ के एक कार्यकर्ता हर्षा की हत्या कर दी गई थी। उसका कसूर बस इतना था कि उसने हिजाब पर पोस्ट कर दिया था।

यूपीए सरकार के 10 साल का खुलेगा काला चिट्ठा, 15 घोटालों का पूरा ब्यौरा दर्ज: लोकसभा में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने पेश किया श्वेत पत्र

मोदी सरकार की तरफ से लोकसभा में श्वेत पत्र पेश किया है। एनडीए सरकार की तरफ से वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने ये श्वेत पत्र पेश किया। मोदी सरकार ने यूपीए सरकार के दौरान कथित आर्थिक कुप्रबंधन का काला चिट्ठा इस श्वेत पत्र के जरिए रखने की कोशिश की है। एनडीए सरकार के श्वेत पत्र के विरोध में कॉन्ग्रेस ने ‘ब्लैक पेपर’ लाने की बात कही है। मोदी सरकार के श्वेत पत्र पर शुक्रवार को चर्चा हो सकती है।

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा लोकसभा में रखे गए श्वेत पत्र के जरिए सांसदों को बताया जाएगा कि साल 2014 से पहले (मोदी सरकार बनने से पहले) देश के सामने किस तरह के शासन, आर्थिक और राजकोषीय संकट थे। लोकसभा में मोदी सरकार ये बताएगी कि यूपी सरकार के समय में हुए आर्थिक कुप्रबंधन को सुधारने के लिए मोदी सरकार ने क्या कदम उठाए हैं। लोकसभा में रखे गए श्वेत पत्र में यूपीए शासनकाल के समय हुए 15 बड़े घोटालों का जिक्र है। इन घोटालों में 2जी घोटाला, कोयला घोटाला, कॉमनवेल्थ घोटाले का भी जिक्र है।

बता दें कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राज्यसभा में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद ज्ञापन के समय कहा था कि उनकी सरकार यूपीए सरकार के 10 सालों 2004-2014 के शासनकाल के समय हुए आर्थिक कुप्रबंधन को सामने लाने के लिए श्वेत पत्र सदन में रखेगी। इस श्वेत पत्र के माध्यम से यूपीए सरकार की वजह से देश को हुए नुकसान के बारे में भी बताया जाएगा। अब वित्त मंत्री ने ये श्वेतपत्र सदन में रख दिया है, जिसपर शुक्रवार को चर्चा होगी।

लोकसभा में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा रखे गए श्वेत पत्र में कहा गया है कि यूपीए सरकार को अधिक सुधारों के लिए तैयार एक स्वस्थ अर्थव्यवस्था विरासत में मिली, लेकिन अपने दस वर्षों में इसे नॉन परफॉर्मिंग बना दिया। 2004 में जब यूपीए सरकार ने अपना कार्यकाल शुरू किया था, तो अच्छे विश्व आर्थिक माहौल के बीच अर्थव्यवस्था 8 प्रतिशत की दर से बढ़ रही थी। उद्योग और सेवा क्षेत्र की वृद्धि दर 7 प्रतिशत से अधिक थी और वित्त वर्ष 2004 में कृषि क्षेत्र की वृद्धि दर 9 प्रतिशत से अधिक थी। 2003-04 के आर्थिक सर्वेक्षण में भी कहा गया था कि विकास, मुद्रास्फीति और भुगतान संतुलन के मामले में अर्थव्यवस्था एक लचीली स्थिति में प्रतीत होती है, एक जोड़ जो कि निरंतर व्यापक आर्थिक स्थिरता के साथ विकास की गति को मजबूत करने की बड़ी गुंजाइश प्रदान करता है।

एनडीए सरकार द्वारा लाए गए श्वेत पत्र में लिखा गया है कि यूपीए सरकार के 122 टेलीकॉम लाइसेंस से जुड़े 2जी स्पेक्ट्रम घोटाले ने सरकारी खजाने से 1.76 लाख करोड़ रुपये की कटौती की थी। नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (सीएजी) के अनुमान, सरकारी खजाने को 1.86 लाख करोड़ रुपये की चपत लगाने वाला कोल गेट घोटाला, कॉमन वेल्थ गेम्स घोटालों ने देश को नुकसान पहुँचाया।

कॉन्ग्रेस लाई ब्लैक पेपर

एनडीए सरकार के श्वेत पत्र के जवाब में कॉन्ग्रेस ब्लैक पेपर लेकर आई है। कॉन्ग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने गुरुवार (08 फरवरी 2024) को ब्लैक पेपर जारी किया। खरगे ने कहा कि बीजेपी लोकतंत्र को खत्म कर रही है। इसके अलावा इसमें रोजगार, बेरोजगारी, महँगाई का मुद्या उठाया गया। बता दें कि पीएम मोदी ने सदन में कहा था कि कॉन्ग्रेस का ब्लैक पत्र उनके सरकार द्वारा किए जा रहे कामों पर ‘काले टीके’ की तरह है, जिससे नजर नहीं लगेगी।

हम कश्मीर को इस हाल में नहीं छोड़ेंगे… यामी गौतम की ‘Article 370’ में ‘PM मोदी’ और ‘अमित शाह’ भी, दिखाया कैसे ‘अल जिहाद’ नारे के साथ बहता था खून

यामी गौतम की फिल्म ‘Article 370’ का ट्रेलर आ गया है। इसका निर्देशक राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता आदित्य सुहास जांभले ने किया है। गुरुवार (8 फरवरी, 2024) को इसका ट्रेलर रिलीज हुआ। 23 फरवरी को फिल्म सिनेमाघरों में दस्तक देगी। यामी गौतम ने इस फिल्म में एक NIA अधिकारी का किरदार निभाया है। ये फिल्म जम्मू कश्मीर में आतंकवाद के बढ़ने और फिर मोदी सरकार द्वारा अनुच्छेद-370 को निरस्त किए जाने के ऐतिहासिक फैसले पर केंद्रित है।

शाश्वत सचदेव ने फिल्म में संगीत दिया है, जिन्होंने अपने गानों के माध्यम से बलिदानी सैनिकों को नमन भी किया है। 1980 के दशक में आए रामानंद सागर के ‘रामायण’ सीरियल में भगवान श्रीराम का किरदार निभा कर घर-घर में शोहरत बटोरने वाले अरुण गोविल भी इस फिल्म का हिस्सा हैं। यामी गौतम के पति आदित्य धर ने मोहन ठाकर के साथ मिल कर ‘आर्टिकल 370’ की कहानी लिखी है। फिल्म के ट्रेलर को अच्छी प्रतिक्रिया मिल रही है। फिल्म में प्रधानमंत्री के रूप में नरेंद्र मोदी से मिलता-जुलता एक किरदार भी है।

ट्रेलर की शुरुआत में ही यामी गौतम कहती हैं कि जब तक विशेष दर्जा है, हम उन्हें हाथ भी नहीं लगा सकते और वो हमें आर्टिकल-370 को हाथ भी नहीं लगाने देंगे। इसके बाद एक युवक ‘हर घर से निकलेगा बुरहान, तुम कितने बुरहान मारोगे’ का नारा लगाता हुए दिखता है। बता दें कि आतंकी बुरहान वानी की मौत के बाद बड़ी संख्या में कश्मीरी मुस्लिम उसके जनाजे में शामिल हुए थे। साथ ही एक कश्मीरी नेता को पुलवामा हमले में 40 CRPF जवानों के बलिदान होने का मजाक बनाते हुए दिखाया गया है।

इसके बाद पीएम मोदी का किरदार आता है, जो कहते हैं, “हम कश्मीर को इस हाल में नहीं छोड़ेंगे।” फिल्म में गोलीबारी, बम विस्फोट और पत्थरबाजी भी दिखाई गई है जो कश्मीर में आम थी। फिर बताया जाता है कि कश्मीर में हजारों भारत विरोधी हैं। ‘अल जिहाद’ के नारे भी लगते दिखाए गए हैं। फिल्म के ट्रेलर में अमित शाह का भी किरदार दिखाया गया है। संसद में अमित शाह ने कहा था कि पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर भी भारत का हिस्सा है, हम उसके लिए जान दे देंगे। इस दृश्य को भी उसी जोश के साथ फिल्माया गया है। बता दें कि यामी गौतम माँ भी बनने वाली हैं।

जिस कॉन्ग्रेस MP के ठिकानों से मिला ₹390 करोड़ कैश, उसी ने हेमंत सोरेन को दी BMW कार: ED ने धीरज साहू को बुलाया, झारखंड के पूर्व CM की रिमांड बढ़ी

झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन फ़िलहाल ED (प्रवर्तन निदेशालय) की गिरफ्त में हैं। जाँच एजेंसी ने उनकी एक BMW कार भी जब्त की थी। अब पता चला है कि ये कार कॉन्ग्रेस के राज्यसभा सांसद और शराब कारोबारी धीरज साहू ने ये लक्जरी कार खरीद कर उन्हें दी थी। ‘रिपब्लिक’ ने अपने सूत्रों के हवाले से ये दावा किया है। बता दें कि धीरज साहू के घर से ही आयकर (IT) विभाग ने 390 करोड़ रुपए जब्त किए थे। गुरुग्राम और कई ठिकानों पर छापेमारी कर के ED ने साहू-सोरेन लिंक का पता लगाया।

इसी दौरान पता चला कि उक्त BMW कार एक प्राइवेट कंपनी के नाम पर रजिस्टर्ड है, जब कंपनी को लेकर छानबीन की गई तो पता चला कि इसका स्वामित्व हेमंत सोरेन के पास है। बता दें कि 7 घंटे की पूछताछ के बाद उन्हें गिरफ्तार किया गया था। एक नहीं, बल्कि 2 BMW कार उनके ठिकानें से बरामद की गई थीं। साथ ही 36 लाख रुपए और कुछ दस्तावेज भी मिले थे। हेमंत सोरेन 2 दिनों तक गायब रहे थे। वो दिल्ली से निकले, राँची में प्रकट हुए और इस्तीफा देकर चंपई सोरेन को CM नियुक्त किया।

आर्किटेक्ट विनोद सिंह को भी मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में ही गिरफ्तार किया गया है, अब ED ने उसके साथ हेमंत सोरेन के चैट्स होने का भी खुलासा किया है। ये चैट्स 539 पेज की है। इसमें JSSC के कई एडमिट कार्ड्स भी हैं, ट्रांसफर-पोस्टिंग और लेनदेन की बातें हैं। उधर हेमंत सोरेन की रिमांड भी 5 दिन बढ़ा दी गई है। बिरसा मुंडा जेल (होटवार) में पदस्थापित जेल अधीक्षक नरेंद्र प्रसाद सिंह और हजारीबाग सेन्ट्रल जेल के अधीक्षक जितेंद्र कुमार की पोस्टिंग के लिए 75 लाख रुपए का ऑफर दिया गया था।

इसी तरह IAS शशि रंजन को हजारीबाग या बोकारो का DC बनाने के लिए पैरवी की गई थी। इसी तरह JSSC के तत्कालीन डिप्टी सेक्रेट्री रविराज शर्मा को RTA हजारीबाग का सेक्रेट्री या राँची नगर निगम का AMC और DRDA के ज्वाइंट सेक्रेटरी मोहम्मद हैदर अली को लातेहार का DDC बनाने की पैरवी भी की थी। बड़गाई अंचलाधिकारी, राजस्व उप निरीक्षक भानु प्रताप प्रसाद की भी हेमंत सोरेन के साथ मिलीभगत है और इन्होंने मिल कर जमीन पर कब्ज़ा किया था।

BJP-RSS नेताओं पर हमला करने वाले थे ‘रिपोर्टर्स’, PFI ने तैयार किया था दस्ता: ED की चार्जशीट से खुलासा, विदेशों से आ रहा था पैसा

पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (पीएफआई) ने बीजेपी और आरएसएस के नेताओं, कार्यकर्ताओं पर हमले के लिए एलीट टीम बनाई थी, जिन्हें ‘रिपोर्टर’ कहा जाता था। इन ‘रिपोर्टर्स’ को बीजेपी-आरएसएस नेताओं पर हमले के लिए ट्रेंड किया गया था और किस तरह से उनपर हमला बोलना है। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने अपनी सप्लिमेंट्री चार्जशीट में इस बात का खुलासा किया है। ईडी ने ये चार्जशीट दिल्ली के पटियाला हॉउस कोर्ट में दाखिल की है।

आजतक के मुताबिक, ईडी ने अपनी सप्लिमेंट्री चार्जशीट में कहा है कि बीजेपी-आरएसएस के लोगों पर हमले करने के लिए जिस टीम को बनाया गया, उसे ‘रिपोर्टर्स’ कोडनेम दिया गया। इसमें शामिल लोग अपने लक्ष्य की पहचान करने और उन्हें नुकसान पहुँचाने के लिए तैयार किए गए थे।

ईडी ने कथित 120 करोड़ रुपये के धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) मामले में 12 पीएफआई सदस्यों के खिलाफ कोर्ट में सप्लिमेंट्री चार्जशीट दायर की है। इस सप्लिमेंट्री चार्जशीट में ईडी ने बताया है कि पीएफआई ने 120 करोड़ रुपए अपराध के जरिए कमाई थी। इसमें से 60 करोड़ रुपए सीधे पीएफआई के ही खाते में जमा की गई थी।

ईडी ने कहा कि पीएफआई इस धन का इस्तेमाल अवैध गतिविधियों में कर रही थी। जिसमें हिंसा में शामिल पीएफआई कार्यकर्ताओं को घर देना और उनकी शादियों में पैसों की मदद करना शामिल था। ईडी का दावा है कि पीएफआई ने ट्रेनिंग के नाम पर पीएफआई के मेंबर्स को लड़ाई के लिए तैयार किया। उन्हें हत्याओं के लिए तैयार किया गया। यही नहीं, इस तरह की ट्रेनिंग पाए लोगों को अपराधों में शामिल करने के लिए प्रेरित किया गया।

ईडी की चार्जशीट का पन्ना (फोटो साभार : newindian)

ईडी की जाँच मुख्य रूप से फेमा के तहत रुपए के हेरफेर से जुड़ी थी। लेकिन इस जाँच में ये तथ्य सामने आए कि पीएफआई ने अपने सदस्यों को हिंसक घटनाओं में ट्रेंड करने के लिए भी इन पैसों का इस्तेमाल किया गया। हालाँकि पीएफआई इन आरोपों को खारिज करता रहा है। पीएफआई के राष्ट्रीय महासचिव अनीस अहमद का दावा है कि पीएफआई पूरी तरह से भारत में ही संचालित होता है, लेकिन ईडी ने जो चार्जशीट दाखिल की है, उसमें साफ है कि पीएफआई के सैकड़ों सदस्य खाड़ी देशों में काम करते हैं और पैसे इकट्ठे करके भारत में पीएफआई के पास भेजते हैं।

ईडी ने 14,428 लोगों का ऐसा डाटा तैयार किया है, जो विदेशों में रहते हैं। ये डाटा कोझिकोड के यूनिटी हाउस में जब्त हार्ड डिस्क में मिला था। इसमें जिन लोगों के नाम पाए गए, वो सऊदी अरब की राजधानी जेद्दा, रियाद, दम्माम, यूएई से लेकर कतर, बहरीन, कुवैत, ओमान और एशिया के अन्य देशों में काम करते हैं। जो ये बताता है कि पीएफआई का नेटवर्क कितना विशाल है।

UCC इस्लाम विरोधी नहीं, जो इसे नहीं मानेगा वो असली मुस्लिम नहीं: उत्तराखंड वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष ने किया समान नागरिक संहिता का स्वागत

उत्तराखंड वक्फ बोर्ड के चेयरमैन ने कहा है कि उन्हें समान नागरिक संहिता से कोई समस्या नहीं है, उन्होंने इसके इस्लाम विरोधी होने की बातों को नकार दिया है। साथ ही साथ उन्होंने कहा है कि इसका पालन करने में कोई समस्या नहीं है, क्योंकि यह इस्लामिक मान्यताओं पर कहीं भी अतिक्रमण नहीं करता।

ANI से UCC पर बात करते हुए उत्तराखंड वक्फ बोर्ड के चेयरमैन शादाब शम्स ने कहा, “मुझे विश्वास है कि इस विधेयक को पूरा देश हाथों-हाथ स्वीकार करेगा। इसके बारे में यह अफवाह फैलाई जा रही है कि UCC इस्लाम विरोधी है, मैं यह कह सकता हूँ कि इसमें कुछ भी इस्लाम के खिलाफ नहीं है और यह इस्लामिक भावनाओ से कहीं नहीं टकराता।”

उन्होंने आगे कहा, “खुद के मुस्लिम होने के नाते मैं कुरान के सामने यह बात पूरी ईमानदारी से कहता हूँ कि UCC को मानने में कोई समस्या नहीं है। जो इसका विरोध कर रहे हैं वह असली मुसलमान नहीं हैं। वह राजनीतिक मुस्लिम हैं जिनका कनेक्शन समाजवादी पार्टी और कॉन्ग्रेस से है। मैं फिर से पूरी जिम्मेदारी से कहता हूँ कि यह बिल इस्लाम का उल्लंघन नहीं करता और मुस्लिम UCC का पालन कर सकते हैं।”

UCC को बुधवार (7 फरवरी, 2024) को उत्तराखंड विधानसभा से बहुत से पास किया गया था। इसके उत्तराखंड विधानसभा से पास होने पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी इसे ‘उत्तराखंड के लिए ऐतिहासिक दिन’ बताया। उन्होंने कहा कि इस कानून से समाज के सभी वर्गों को फायदा होगा।

UCC को उत्तराखंड विधानसभा में 6 फरवरी को रखा गया था। इससे पहले इसे कैबिनेट की मंजूरी हासिल हुई थी। इस बिल का ड्राफ्ट एक पाँच सदस्यीय पैनल ने 2 फरवरी, 2024 को उत्तराखंड सरकार को सौंपा था। इस तरह से उत्तराखंड आजाद भारत का पहला ऐसा राज्य बन गया है जिसने UCC लागू किया है। उत्तराखंड में लाए गए UCC के अंतर्गत विवाह, उत्तराधिकार, तलाक और लिव इन रिलेशनशिप जैसे मामलों के नए नियम बनाए गए हैं। इन्हें समान रूप से राज्य की पूरी जनता पर लागू किया जाएगा।

फोन से नहीं डिलीट की गर्लफ्रेंड की फोटो तो माज पठान ने वैभव अग्रवाल को मार डाला, नहर में फेंक दिया शव: अब पाँव में लगी यूपी पुलिस की गोली

उत्तर प्रदेश के ग्रेटर नोएडा में माज पठान ने वैभव अग्रवाल की हत्या कर के उसका शव नहर में फेंक दिया। दोनों के बीच एक लड़की की फोटो को लेकर विवाद हुआ जिसके कारण वैभव की माज ने हत्या कर दी। माज को पुलिस ने मुठभेड़ के बाद गिरफ्तार कर लिया है।

जानकारी के अनुसार, ग्रेटर नोएडा के दनकौर इलाके के बिलासपुर का रहने वाला वैभव अग्रवाल 29 जनवरी, 2024 से घर से लापता था। परिजनों ने अपने स्तर से वैभव को ढूँढा लेकिन उसके ना मिलने पर पुलिस में शिकायत दर्ज करवाई।

पुलिस ने भी इस मामले में एक सप्ताह तक प्रयास कर लिए पर वैभव के विषय में कोई जानकारी नहीं मिली। पुलिस ने इसके बाद तकनीक का सहारा लेते हुए वैभव के फोन को सर्विलांस पर लगाया। पुलिस को इससे दो अन्य युवकों के विषय में पता चला। इन दोनों ने ही मिलकर वैभव अग्रवाल की हत्या की थी। इसके बाद इन्होंने शव को नहर में फेंक दिया था।

पुलिस की जाँच में सामने आया कि इनमें से एक आरोपित नाबालिग है जबकि मुख्य हत्यारा माज पठान वैभव को पहले से जानता था। उसका एक लड़की को लेकर वैभव से विवाद था। माज जिसे अपनी गर्लफ्रेंड बताता था, उसकी फोटो वैभव के फ़ोन में थी। माज इस गर्लफ्रेंड की फोटो डिलीट करने के लिए वैभव पर दबाव बना रहा था, जब वैभव नहीं माना तो माज पठान ने उसे एक जगह पर मिलने बुलाया और उसकी अपने नाबालिग दोस्त के साथ मिलकर हत्या कर दी। इसके बाद दोनों ने मिलकर शव को नहर में फेंक दिया।

पुलिस ने इन्हें एक मुठभेड़ के बाद पकड़ा। पुलिस ने बताया कि उसे इलेक्ट्रॉनिक सर्विलांस और गोपनीय सूचना प्राप्त हुई थी नोएडा के धनौरी से सक्का वाले रास्ते पर कहीं अभियुक्त मौजूद हैं। जब वह इस रास्ते पर आगे बढ़े तो उन्हें दो युवक बाइक से आते दिखे, पुलिस ने उन्हें रोकने का प्रयास किया तो वह भागने लगे और पुलिस पर फायर कर दिया।

पुलिस ने जवाबी फायर करते हुए मुठभेड़ में इन दोनों को गिरफ्तार कर लिया। इस मुठभेड़ में माज के पैर में गोली लगी है। इनके पास से मृतक वैभव अग्रवाल का फ़ोन भी बरामद हुआ है। इसके अलावा इनके पास से पुलिस ने एक तमंचा भी बरामद किया है। दोनों ने हत्या करने की बात कबूल कर ली है। इन्होंने बताया है कि वैभव की हत्या 30 जनवरी, 2024 को की गई है।

गाय के लिए चारा लेने निकली थी महिला, 20 आवारा कुत्तों ने नोच डाला: जानवर के कंकालों के बीच मिली लाश, ग्रामीणों ने खौफ में घर से निकलना बंद किया

पंजाब के कपूरथला में एक महिला को आवारा कुत्तों ने नोच कर मार डाला। महिला गाय के लिए चारा लेने घर से बाहर निकली थी। बाद में घंटों बाद उसकी लाश मिली। इससे पहले भी इस गाँव में कुत्तों ने दो और लोगों पर हमला किया था। यह एक सप्ताह के भीतर तीसरी ऐसी घटना है।

जानकारी के अनुसार, कपूरथला के पासां कादिम गाँव में रहने वाली 32 वर्षीय महिला रामपरी बुधवार (7 फरवरी, 2024) को शाम 6 बजे अपने घर से खेतों की तरफ गाय के लिए चारा लेने निकली थी। इसी दौरान उस पर यहाँ मौजूद लगभग 20 कुत्तों ने हमला बोल दिया और नोच-नोच कर मार डाला।

महिला पर जब कुत्तों ने हमला किया, उस समय वहाँ पर उसकी मदद के लिए कोई मौजूद नहीं था। महिला का पति केवल ठाकुर भी उस दौरान घर पर नहीं था और उसके तीन बच्चे भी इस बारे में बेखबर थे। जब शाम को पति घर वापस आया तो बच्चों ने बताया कि उनकी माँ काफी देर से वापस नहीं आई।

जब उन्होंने तलाश चालू की तो उन्हें अपनी पत्नी की लाश जानवरों के कंकालों के फेंके जाने वाली जगह पर मिली। महिला को कुत्तों ने बुरी तरीके से नोचा हुआ था। लाश पर जगह जगह काटने और नोचने के निशान थे।

महिला की मौत के बाद उसके पति और बच्चों का बुरा हाल है। केवल ठाकुर रोजाना मजदूरी करके परिवार का भरण पोषण करते हैं। उनके तीन बच्चे हैं, जिनमें से सबसे छोटा मात्र 9 माह का है। उनका कहना है कि उनके बच्चों की अब देखभाल कौन करेगा।

द ट्रिब्यून की एक रिपोर्ट बताती है कि इस गाँव मात्र एक सप्ताह पहले ही एक 6 साल की बच्ची को कुत्तों ने काटा था जिसके बाद उसकी मौत हो गई थी। एक और महिला को भी हाल ही में कुत्तों ने घायल कर दिया था जिसे अस्पताल में भर्ती करवाना पड़ा था। गाँव वालों का कहना है कि कुत्तों के आतंक के कारण उन्होंने बाहर निकलना छोड़ दिया है।

पुलिस ने इस मामले में बताया है कि जहाँ महिला की हत्या हुई वहाँ पर हड्डियों का ढेर लगा रहता है जिससे यहाँ कुत्ते और भी खतरनाक हो गए हैं। मृतका की लाश को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है। इलाके में कुत्तों को रोकने के लिए कार्रवाई की जा रही है।

भारत में चीन के बाद सबसे ज्यादा आवारा कुत्ते

विश्व स्वास्थ्य संगठन की रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में चीन के बाद सबसे ज्यादा आवारा कुत्ते हैं। भारत में 6 करोड़ से अधिक आवारा कुत्ते हैं। हालाँकि भारत सरकार के मत्स्यपालन, पशुपालन एवँ डेयरी मंत्रालय ने साल 2019 में जो पशुगणना कराई थी, उसमें आवारा पशुओं की संख्या दो करोड़ तीन लाख बताई गई। हालाँकि इसमें भी आवारा कुत्तों की संख्या 1 करोड़ 53 लाख बताई गई। उस पशुगणना के मुताबिक, भारत के दो केंद्र शासित प्रदेशों लक्षद्वीप के साथ ही दादरा और नागर हवेली में एक भी आवारा कुत्ते नहीं थे, तो मणिपुर में भी एक भी आवारा कुत्ता नहीं मिला।

पश्चिम बंगाल की जेलों में गर्भवती हो रहीं महिला कैदी, बैन की जाए पुरुष कर्मचारियों की एंट्री: कलकत्ता हाईकोर्ट ने लिया संज्ञान, कारागारों में रह रहे 196 बच्चे

कलकत्ता हाईकोर्ट में एक याचिका आई है। इसमें बताया गया है कि हिरासत में जेल में रहने के दौरान ही कई महिला कैदी गर्भवती हो गई हैं। मुख्य न्यायाधीश TS शिवज्ञानम और न्यायधीश सुप्रतिम भट्टाचार्य की पीठ ने इस याचिका पर सुनवाई की। याचिका में कहा गया है कि जेल में रहने के दौरान ही महिला कैदी गर्भवती हो रही हैं। विभिन्न जेलों में पहले से ही 196 बच्चों का पालन-पोषण हो रहा है। साथ ही माँग की गई है कि महिला जेलों में पुरुषों की एंट्री प्रतिबंधित की जाए।

कलकत्ता हाईकोर्ट के ‘Amicus Curiae’ (न्याय मित्र) ने ये याचिका दायर की है। उन्होंने राज्य के ‘इंस्पेक्टर जनरल ऑफ प्रिजन्स’ (IG – Prisons) के साथ एक जेल का दौरा भी किया। वहाँ उन्होंने एक महिला कैदी गर्भवती मिली। साथ ही वहाँ 15 बच्चे अपनी माँओं के साथ रह रहे थे। उनकी माँएँ करेक्शनल होम्स में ही हिरासत में रह रही थीं। कलकत्ता हाईकोर्ट ने इस याचिका पर विचार करने के बाद माना कि ‘न्याय मित्र’ ने एक गंभीर मुद्दे की तरफ ध्यान आकृष्ट कराया है।

साथ ही मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली पीठ ने आदेश दिया कि आपराधिक मामलों पर सुनवाई करने वाली खंडपीठ के समक्ष इस मामले को रखा जाए। साथ ही राज्य के पब्लिक प्रॉसिक्यूटर को भी उस दौरान उपस्थिति दर्ज कराने को कहा गया है। उच्च न्यायालय को बताया गया है कि जेल में ही बच्चों के जन्म हो रहे हैं। साथ ही करेक्शनल होम्स में जो पुरुष कर्मचारी काम करते हैं, उन्हें महिलाओं के रहने वाले सेक्शन में प्रवेश न देने की माँग की गई है।

कलकत्ता हाईकोर्ट के समक्ष इस प्रकरण को लेकर 2 नोट्स भी रखे गए। वहीं पश्चिम बंगाल के एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बताया कि अगर किसी ऐसी महिला को गिरफ्तार किया जाता है जिसके बच्चे की उम्र 6 वर्ष से कम है, तो उस स्थिति में बच्चे को भी अपनी माँ के साथ जेल में रहने की अनुमति दी जाती हैं। उन्होंने बताया कि जेल में महिला कैदियों के गर्भवती होने के संबंध में उन्हें कोई जानकारी नहीं है। उन्होंने कहा कि ऐसा कुछ संज्ञान में आया तो इस पर विचार किया जाएगा। मामले की सुनवाई अब सोमवार (12 जनवरी, 2024) को होगी।