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ED ने कोर्ट को दिखाए हेमंत सोरेन के व्हाट्सएप चैट: जमीन के लेनदेन से लेकर ट्रांसफर-पोस्टिंग तक की बातें, तगड़ी कमाई भी

जमीन घोटाले में गिरफ्तार झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं। प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने सोरेन के व्हाट्सएप चैट पीएमएलए कोर्ट को दिखाए हैं। कथित तौर पर इनमें जमीन की लेनदेन से लेकर ट्रांसफर-पोस्टिंग तक का जिक्र है।

रिपोर्ट के अनुसार ये चैट मनी लाॅन्ड्रिंग में गिरफ्तार किए गए हेमंत सोरेन और जमीन घोटाले के सूत्रधार बिनोद सिंह के बीच के हैं। ईडी ने 539 पेज के व्हाट्सएप चैट होने की बात कही है। इनमें से कुछ पन्ने कोर्ट में पेश किए हैं। एजेंसी ने कहा है कि इस चैट में पेपर लीक करने वाले गैंग से मिले पैसे, अधिकारियों के स्थानान्तरण से मिले पैसे और साथ ही सरकारी जमीन के रिकॉर्ड साझा करने की जानकारी है।

NEWS18 के अनुसार ED ने कोर्ट में कहा कि जमीन घोटाले का यह मामला एक अन्य आरोपित भानू प्रताप प्रसाद के यहाँ छापेमारी से प्राप्त जमीन के दस्तावेजों के आधार पर दर्ज किया गया है। यह छापेमारी अप्रैल 2023 में हुई थी। ED को इसमें 11 बक्से भरकर जमीनों के दस्तावेज मिले थे। इसमें 17 जमीन के असली रिकॉर्ड के रजिस्टर शामिल थे। ED ने कहा कि झारखंड में एक जमीन हथियाने वाला सिंडिकेट काम कर रहा था। यह जमीनों से संबधित कागजों में गड़बड़ी करके उन्हें हथिया रहा था।

ED ने यह जानकारी हेमंत सोरेन से पूछताछ के दौरान उनके सामने भी रखी। एजेंसी का कहना है कि हेमंत सोरेन जाँच में सहयोग नहीं कर रहे हैं और स्वयं या खुद से जुड़े व्यक्तियों के जमीनों को हथियाने के मामले में सही तथ्य नहीं बता रहे हैं।

जाँच एजेंसी ने हेमंत सोरेन की उनके करीबी बिनोद सिंह के साथ व्हाट्सएप पर की गई बातचीत का रिकॉर्ड कोर्ट के सामने रखते हुए कहा, “आरोपित (हेमंत सोरेन) के सामने उनकी बिनोद सिंह के साथ हुई बातचीत का ब्यौरा भी रखा गया। यह बातचीत ना सिर्फ आपराधिक है, बल्कि इसमें कई संपत्तियों की जानकारी भी है। आरोपित ने इन बातचीत के रिकॉर्ड पर हस्ताक्षर भी नहीं किए हैं। हालाँकि, उन्होंने बिनोद सिंह के साथ बातचीत स्वीकारी है।”

ED ने कहा, “जिस व्हाट्सएप बातचीत का ब्यौरा दिया गया है उसमें मात्र सम्पत्ति ही नहीं बल्कि ट्रांसफर-पोस्टिंग और सरकारी रिकॉर्ड साझा करने सम्बन्धी जानकारियाँ भी हैं। इससे बड़ी मात्रा में पैसा बनाया गया है उसका लेनदेन किया गया है।” जाँच एजेंसी ED ने इसके साथ ही बिनोद सिंह के झारखंड में पेपर लीक से जुड़े होने का भी आरोप लगाया है।

हेमंत सोरेन पर ED ने अपना मोबाइल भी जाँच के लिए नहीं देने का आरोप लगाया है। गौरतलब है कि हेमंत सोरेन को 31 जनवरी, 2024 को गिरफ्तार किया गया था। कोर्ट ने 5 दिन की रिमांड पर उन्हें भेजा था। अब में उनकी रिमांड 5 दिन और बढ़ा दी गई है। गिरफ्तारी के बाद उन्होंने झारखंड के मुख्यमंत्री पद से इस्तीफ़ा दे दिया था। उनकी जगह चंपई सोरेन मुख्यमंत्री बने हैं।

‘पूनम पांडे को कैंसर जागरूकता अभियान का चेहरा बना रही मोदी सरकार’: स्वास्थ्य मंत्रालय ने किया खंडन, बताया- नहीं बना रहे ब्रांड एंबेसडर

सर्वाइकल कैंसर पर जागरूकता फैलाने के लिए भारत सरकार के राष्ट्रीय अभियान की ब्रांड एंबेसडर पूनम पांडे नहीं होंगी। यह जानकारी स्वास्थ्य मंत्रालय के अधिकारियों ने खुद दी है।

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के अधिकारियों ने बुधवार (7 फरवरी 2024) को कहा कि एक्ट्रेस पूनम पांडे को सर्वाइकल कैंसर पर जागरूकता फैलाने के लिए सरकार के राष्ट्रीय अभियान का ब्रांड एंबेसडर बनाने पर विचार नहीं किया जा रहा है।

बता दें कि इससे पहले सोशल मीडिया पर खबर फैली थी सर्वाइकल कैंसर के लिए पूनम पांडे को जागरूकता अभियान का चेहरा बनवाने के लिए उनकी टीम, मंत्रालय के अधिकारियों से बात कर रही है। हालाँकि अब स्वास्थ्य मंत्रालय ने साफ कर दिया है कि उनका ऐसा कोई विचार नहीं है।

सोशल मीडिया पर फैली खबर

गौरतलब है कि अभिनेत्री पूनम पांडे ने कुछ दिन पहले अपनी मौत की झूठी खबर फैलाकर सबको हैरानी में डाल दिया था। लेकिन एक दिन बाद उन्होंने एक वीडियो डाल बताया था, “मैं आप सभी के साथ कुछ महत्वपूर्ण शेयर करने के लिए मजबूर महसूस कर रही हूँ? मैं यहाँ हूँ, जीवित हूँ। सर्वाइकल कैंसर ने मुझे नहीं मारा, लेकिन दुखद है कि इसने हजारों महिलाओं की जान ले ली है, जो इस बीमारी से निपटने के बारे में ज्ञान की कमी के कारण पैदा हुईं।”

उन्होंने अपने इंस्टा पर वीडियोज डाल दावा किया कि उन्होंने इतना बड़ा कारनामा सिर्फ सर्वाइकल कैंसर के प्रति लोगों को जागरूक करने के लिए किया।

हालाँकि जागरूकता फैलाने के लिए किया गया उनका ये स्टंट लोगों को पसंद नहीं आया। लोगों ने इसकी निंदा की। वहीं पूनम पांडे ने फिर जोर देकर कहा कि उन्होंने ऐसा इसलिए क्योंकि आज सर्वाइकल कैंसर हजारों महिलाओं की जान ले रहा है।

उन्होंने कहा कुछ अन्य कैंसरों के विपरीत सर्वाइकल कैंसर को पूरी तरह से रोका जा सकता है। इसकी कुंजी एचपीवी वैक्सीन और शीघ्र पता लगाने वाले परीक्षणों में निहित है। हमारे पास यह सुनिश्चित करने के साधन हैं कि इस बीमारी से किसी की जान न जाए।

बिहार के डिप्टी CM रहते हुए भी तेजस्वी यादव पीते थे दारू, राजद MLC ने ही स्टिंग में खोल दी थी पोल: अब जाँच की माँग ने पकड़ा जोर

वैसे तो बिहार में शराबबंदी है। पर राजद नेता तेजस्वी यादव उप मुख्यमंत्री रहते हुए भी शराब पीते थे। यह खुलासा एक स्टिंग में उनकी ही पार्टी के विधान पार्षद रहे रामबली सिंह ने किया था। अब जब बिहार में फिर से एनडीए की सरकार बन चुकी है तो इसकी जाँच की माँग ने जोर पकड़ लिया है।

बीजेपी के राज्यसभा सांसद और बिहार के डिप्टी सीएम रहे सुशील मोदी ने इस आरोप की जाँच की माँग की है। उन्होंने कहा है कि बिहार में जब पूर्ण मद्यनिषेध का कानून लागू है, तब पिछली सरकार के समय उप मुख्यमंत्री तेजस्वी प्रसाद यादव पर शराब पीने का आरोप एक गंभीर मामला है। राज्य सरकार को इसकी विस्तृत जाँच करानी चाहिए।

सुशील मोदी ने कहा है, “तेजस्वी यादव के पद पर रहते उनकी ही पार्टी के विधान परिषद सदस्य रामबली सिंह ने यदि आरोप लगाए तो उनके पास कुछ प्रमाण भी होंगे। उन्होंने कहा कि किसी की विधान परिषद सदस्यता समाप्त या बहाल करना सभापति का विशेषाधिकार है, लेकिन शराबबंदी कानून तोड़ने के आरोप की जाँच तो सरकार करा ही सकती है।”

बीजेपी नेता ने कहा है कि बिहार में 2016 से ही शराब पीने, रखने और उसका कारोबार करने पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगा हुआ है। कानून तोड़ने पर आम लोगों को दंडित भी किया जाता है। डिप्टी सीएम रहते हुए शराबबंदी कानून को लागू कराना तेजस्वी यादव की जिम्मेदारी थी। ऐसे में उन पर ही कानून तोड़ने का आरोप लगना कोई सामान्य बात नहीं है।

गौरतलब है कि रामबली सिंह के जिन आरोपों का सुशील मोदी हवाला दे रहे हैं वह दिसंबर 2022 में एक स्टिंग के दौरान सामने आए थे। यह स्टिंग एबीपी न्यूज ने किया था। उस समय बिहार में जहरीली शराब पीने से मौतें हुई थी। स्टिंग ऑपरेशन में रामबली सिंह ने कहा था कि शराबबंदी पर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार किसी की सुनना नहीं चाहते हैं, जबकि सभी लोग मानते हैं कि इस नीति की समीक्षा होनी चाहिए।

रामबली सिंह ने कहा था, “शराबबंदी के बावजूद शराब मिल रहा है। तेजस्वी भी नहीं बोल पाते हैं नीतीश जी के सामने। तेजस्वी खुद दारू पीते हैं तो वो क्यों नहीं चाहेंगे कि दारू मिलनी शुरू हो।” स्टिंग कर रहे रिपोर्टर ने तेजस्वी यादव का नाम सुनने के बाद दोबारा पूछा, “पीते हैं तेजस्वी जी?” इस पर रामबली सिंह ने जवाब दिया, “आधे से ज्यादा मंत्री और विधायक माननीय पीते हैं, आधे से ज्यादा ऑफिसर शराब पीते हैं। बंदी तो यहाँ दिखाने के लिए है। रात में जाकर पता कीजिए कितने ऑफिसरों के यहाँ दारू चल रहा है।”

रामबली सिंह के इन आरोपों पर तब कोई जाँच नहीं हुई थी। हालाँकि, उनके इस बयान के बाद उनसे पार्टी की नाराजगी सामने आई थी। नवम्बर 2023 में उनकी विधान परिषद सदस्यता रद्द करवाने के लिए राजद के सचेतक सुनील सिंह ने विधान परिषद अध्यक्ष को आवेदन दिया था। पार्टी ने विधान परिषद अध्यक्ष को दिए गए अपने आवेदन में पार्टी विरोधी गतिविधियों में शामिल होने के आरोप रामबली सिंह पर लगाए थे।

रामबली सिंह ने इस सम्बन्ध में अपनी सफाई भी विधान परिषद में पेश की थी, लेकिन मंगलवार (6 फरवरी, 2024) को उनकी विधान परिषद् सदस्यता रद्द कर दी गई। सदस्यता रद्द किए जाने के बाद से वह चर्चा में हैं और उनके द्वारा तेजस्वी यादव पर लगाए गए आरोपों की जाँच की माँग तेज हो गई है।

‘कुत्तों का वक्त’ वाले सलमान अजहरी को बेल, पर राहत नहीं: अब कच्छ हेट स्पीच में हो सकती है गिरफ्तारी, आतंकी लिंक के भी दावे

जूनागढ़ में भड़काऊ भाषण देने वाले मुफ्ती सलमान अजहरी को गुजरात की जूनागढ़ कोर्ट ने जमानत दे दी। हालाँकि, इससे उसे राहत नहीं मिली क्योंकि कच्छ के समखियाली में भी उसके खिलाफ एफआईआर दर्ज हुई है जिसके कारण कच्छ पुलिस उसे पकड़ने की तैयारी कर रही है।

जानकारी के मुताबिक, सलमान अजहरी की 1 दिन की रिमांड पूरी होने के बाद उसको जूनागढ़ कोर्ट में पेश किया गया था, जहाँ कोर्ट ने उसे जमानत दे दी। पर, चूँकि उसके खिलाफ एक एफआईआर कच्छ में भी दर्ज है इसलिए उसे रिहा करने की बजाय कच्छ पुलिस को सौंपा जाएगा।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, कच्छ पुलिस ट्रांसफर वारंट मिलने के बाद पाने के बाद अजहरी को हिरासत में लेगी। तब तक जूनागढ़ के बाद अजहरी को राजकोट जेल में रखा जाएगा।

गौरतलब हो कि मुफ्ती अज़हरी ने जिस दिन जूनागढ़ में अपना भाषण दिया था, उसी दिन उसने कच्छ के समखियाली में भी एक कार्यक्रम को संबोधित किया था। इस कार्यक्रम में भी उसने भड़काऊ शब्द कहे थे। इसके बाद पुलिस ने मुफ्ती और कार्यक्रम के आयोजक के खिलाफ एफआईआर दर्ज की। फिर बुधवार (फरवरी 7, 2024) को आयोजक ममद खान मुर को गिरफ्तार कर लिया गया।

बताया जा रहा है कि आयोजक की गिरफ्तारी के बाद कच्छ पुलिस की एक टीम जूनागढ़ आएगी और मुफ्ती अज़हरी को हिरासत में लेगी। इसके बाद उसे समखियाली में दर्ज अपराध के मामले में गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश किया जाएगा और रिमांड की माँग की जाएगी। जहाँ मुफ्ती को जमानत के लिए नए सिरे से आवेदन करना होगा।

मुस्लिम संगठन के अध्यक्ष ने की अजहरी की गिरफ्तारी का स्वागत

सलमान अजहरी की गिरफ्तारी को लेकर सूफी ख्वानखाह एसोसिएशन के अध्यक्ष सूफी मोहम्मद कौसर हसन का भी बयान आया। उन्होंने इस कार्रवाई की तारीफ करते हुए बताया कि अजहरी सांप्रदायिक तनाव भड़काने और मुस्लिम युवाओं के बीच मजहबी नफरत को बढ़ावा देने में शामिल था। उन्होंने सलमान अजहरी पर आरोप लगाया कि वो तबलीगी जमात के पैटर्न को फॉलो करके हिंदू-मुस्लिम करता है। इसके अलावा वो ‘गजवा-ए-हिंद’ प्रोजेक्ट की गतिविधियों में भी संलिप्त है।

उन्होंने आरोप लगाया कि अजहरी ने अपनी तालीम मिस्र में ली है और हमास जैसा तंत्र भारत में लाना चाहता है। उन्होंने ये भी बताया कि अजहरी के विरुद्ध तो हुबली और धारवाड़ में दंगे करवाने के मामले में भी केस दर्ज है। उन्होंने गुजरात पुलिस की कार्रवाई को सराहते हुए बताया कि मजहब के नाम पर घृणा फैलाने वाले बर्दाश्त नहीं किए जाने चाहिए।

उन्होंने गुजरात के सीएम, गृहमंत्री और डीजीपी को अपील को पत्र भी लिखा है। उन्होंने ये भी अपील की है कि अजहरी का पाकिस्तान कनेक्शन पर जाँच की जाए। उन्होंने इस बात पर जोर दिया है कि जो लोग भारत में रहकर पाकिस्तानी आतंकियों को समर्थन देते हैं उनपर नजर रखनी चाहिए।

बता दें कि जहाँ सूफी ख्वानखाह के अध्यक्ष ने अजहरी के खिलाफ ऐसा दावा किया है वहीं इंडिया टीवी की रिपोर्ट कह रही है कि गुजरात एटीएस हेट स्पील मामले में पकड़े गए मुफ्ती के खिलाफ आतंकी एंगल से जाँच कर सकती है।

सलमान अजहरी की गिरफ्तारी

मालूम हो कि 31 जनवरी 2024 को जूनागढ़ में मुस्लिम समुदाय के एक कार्यक्रम में मौलाना मुफ्ती सलमान अज़हरी ने भड़काऊ भाषण दिया था, जिसका वीडियो वायरल हो गया था। इसके बाद पुलिस ने मामले का संज्ञान लेते हुए कार्रवाई शुरू की और अज़हरी और 2 आयोजकों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की। आयोजकों ने कार्यक्रम को नशामुक्ति का कार्यक्रम बताते हुए अनुमति माँगी थी।

हालाँकि भाषण में अजहरी ने “अभी तो कर्बला का मैदान बाकी है” और “आज कुत्तों का वक़्त है, कल हमारा दौर आएगा” जैसी बातें कहते दिखे। ऑपइंडिया ने इस भाषण पर एक विस्तृत रिपोर्ट की थी। बताया था कि एक 53 मिनट की स्पीच में अजहरी ने कितना जहर उगला।

हमारी रिपोर्ट के बाद गुजरात एटीएस ने इस पर एक्शन लिया। उन्होंने पहले आयोजकों को अरेस्ट किया उसके बाद सलमान अजहरी को लेने मुंबई गए, जहाँ मुस्लिम कट्टरपंथियों ने थाने का घेराव भी किया। हालाँकि पुलिस ने सूझ-बूझ से अजहरी से उन्हें समझाने को कहा और बवाल शांत होने के बाद वह अजहरी को हिरासत में लेकर जूनागढ़ लाए।

गुजरात में जहाँ निर्दोष राम भक्तों पर हुआ था पथराव, वहाँ चला बुलडोजर: कड़ी सुरक्षा के बीच महेसाणा के हटड़िया बाजार इलाके से हटाया गया अवैध अतिक्रमण

गुजरात के मेहसाणा जिले में बुलडोजर एक्शन की खबर है। मेहसाणा के खेरालू स्थित हटड़िया बाजार इलाके में बुलडोजर कार्रवाई की गई है। यह वही इलाका है जहाँ पिछले 21 जनवरी 2024 को भगवान श्री राम की शोभा यात्रा पर पथराव किया गया था।

प्रशासन ने यह ऑपरेशन खेरालू के हटड़िया बाजार और जकातनाका के पास चलाया है। ये वही इलाके हैं, जहाँ मुस्लिम भीड़ ने भगवान राम की यात्रा पर पथराव किया था। हटड़िया में पंचमुखी हनुमान मंदिर से बेलीम वाडा तक कुल 30-35 कच्चे अतिक्रमण हटाने के लिए नगर पालिका ने उनके मालिकों को नोटिस जारी किया था और उन्हें उन जगहों के स्वामित्व का सबूत पेश करने या फिर खुद ही उस अतिक्रमण को हटाने के लिए कहा गया था। इसके बावजूद वो अतिक्रमण नहीं हटाया गया, तो फिर प्रशासन ने बुलडोजर एक्शन के साथ कार्रवाई को अंजाम दिया।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबित, प्रशासन द्वारा जारी किए गए नोटिस का कोई जवाब न मिलने पर आखिरकार सोमवार (फरवरी 5, 2024) को सिटी सर्वे डिपार्टमेंट ने सर्वे शुरू किया। इस सर्वे कार्य के बाद प्रशासन ने आखिरकार बुलडोजर चलाने का निर्णय लिया और अवैध निर्माण कार्यों को ध्वस्त कर पूरे बाजार को अतिक्रमण से मुक्त कराया। इस दौरान नगर पालिका के उच्चाधिकारी और बड़ी संख्या में पुलिस कर्मी मौजूद रहे।

22 जनवरी को राम यात्रा पर हुआ था पथराव

बता दें कि अयोध्या में भगवान राम के मंदिर के प्राण प्रतिष्ठा महोत्सव से एक दिन पहले 22 जनवरी को मेहसाणा के खेरालु में हिंदू संगठनों द्वारा एक यात्रा का आयोजन किया गया था। यात्रा जब शहर के मुस्लिम इलाके में स्थित मस्जिद के पास पहुँची तो अचानक उस पर पथराव शुरू हो गया था। यात्रा पर पथराव की घटना का वीडियो भी सामने आया था, जिसमें यात्रा में शामिल भारी भीड़ पर एक इमारत की छत से लोग पत्थर फेंकते नजर आ रहे थे। इस पथराव के बाद अफरातफरी मच गई थी।

पथराव के साथ ही हुआ था तलवारों से हमला

इस मामले में पुलिस ने नामजोग गैंग के साथ ही 2 लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई थी। शिकायत में कहा गया था कि आरोपियों ने एकजुट होकर खेरालू के लिए निकलने वाली भगवान श्रीराम की शोभा यात्रा पर पथराव करने की साजिश रची थी। इसके लिए बेलिम ​​वासन के घरों की छत पर पत्थर इकट्ठे किए गए थे। इसके साथ ही तलवारों से लैस हमलवरों ने जुलूस में शामिल लोगों पर हमला भी किया था।

‘मोदी जी किसी भी प्रकार के आरक्षण के खिलाफ हैं’: कॉन्ग्रेसी नेता ने शेयर की वीडियो, फैक्ट चेक में फँस गए नेहरू

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राज्यसभा में जोरदार भाषण दिया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तमाम मुद्दों पर कॉन्ग्रेस की धज्जियाँ उड़ाई और कॉन्ग्रेस के आरक्षण विरोधी रूख को सबके सामने ला दिया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जम्मू-कश्मीर जैसे राज्य में लोगों को आरक्षण का लाभ न मिलने को लेकर भी कॉन्ग्रेस पर निशाना साधा, तो राज्यसभा में देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के आरक्षण विरोधी रूख को भी बेपर्दा कर दिया। इस दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जवाहरलाल नेहरू के एक पत्र को पढ़ा, जिसे उन्होंने उस समय राज्यों के मुख्यमंत्रियों को लिखा था और अपने आरक्षण विरोधी रुख को साफ किया था।

हालाँकि पीएम मोदी के इस भाषण का एक छोटा हिस्सा जान-बूझकर कॉन्ग्रेस के प्रवक्ता सुरेंद्र राजपूत ने एक्स पर शेयर किया। इस वीडियो को शेयर करते हुए सुरेंद्र राजपूत ने लिखा, “मोदी जी क्या कह रहे हैं? “ये किसी भी प्रकार के आरक्षण के ख़िलाफ़ हैं? नौकरी में तो बिलकुल नहीं”? क्या हो रहा है भाजपा में?”। सुरेंद्र राजपूत ने भ्रम फैलाने के लिए पीएम मोदी के भाषण का 33 सेकंड का हिस्सा ही शेयर किया।

हकीकत ये है कि जवाहरलाल नेहरू को लेकर पीएम मोदी ने राज्यसभा में उनका एक पत्र पढ़ा था। इस पत्र को पढ़ते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि आज की काॅन्ग्रेस ही नहीं, बल्कि देश के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू भी आरक्षण के खिलाफ थे। अगर बाबा साहब आंबेडकर नहीं होते तो देश के वंचित वर्गों को काॅन्ग्रेस कभी आरक्षण नहीं देती।

राज्यसभा में पीएम मोदी ने कहा, “मैं आदरपूर्वक नेहरू जी को बहुत याद करता हूँ। एक बार नेहरू जी ने मुख्यमंत्रियों को चिट्ठी लिखी थी। उन्होंने लिखा कि मैं किसी भी आरक्षण को पसंद नहीं करता और खासकर नौकरी में आरक्षण तो कतई ही नहीं। मैं ऐसे किसी भी कदम के खिलाफ हूँ जो अकुशलता को बढ़ावा दे, जो दोयम दर्जे की ओर ले जाएँ।”

पीएम मोदी के पत्र पढ़ते हुए वीडियो को समाचार एजेंसी एएनआई ने भी साझा किया है।

बहरहाल, कॉन्ग्रेस प्रवक्ता द्वारा ये क्लिप शेयर करने के कुछ सेंकड में ही लोगों ने उसे एक्सपोज कर दिया था। सुरेंद्र राजपूत के ट्वीट के जवाब में ही लोगों ने असली वीडियो सामने रख दिया। ऐसे में भले ही कॉन्ग्रेस प्रवक्ता की फेक न्यूज फैलाने की कोशिशें नाकाम हो गई हों, लेकिन आम लोगों को जरूर इनकी साजिशों से सावधान रहने की जरूरत है।

हागिया सोफिया के बाद एक और चर्च को मस्जिद बना रहा है तुर्की, मई से पढ़ सकेंगे नमाज: राम मंदिर पर जहर उगलने वाले इस्लामी संगठन भी खामोश

तुर्की के इस्तांबुल शहर में स्थित चोरा चर्च को मई 2024 तक मस्जिद में बदल दिया जाएगा। इसके बाद मुस्लिम यहाँ नमाज अता कर सकेंगे। अभी इस चर्च को मस्जिद में बदलने का काम चल रहा है। इस चर्च को मस्जिद में बदलने का फैसला तुर्की के राष्ट्रपति रेचप तैय्यप एर्दोगन ने किया था। इसके पहले ऐतिहासिक हागिया सोफिया चर्च को मस्जिद बनाया जा चुका है।

जिस चर्च को मस्जिद में बदलने का काम किया जा रहा है, वह लगभग 1400 साल पुराना है। इसे कुस्तुनतुनिया (Constantinople- जिसे आज का इस्तांबुल कहा जाता है) पर रोमन शासन के दौरान बनाया गया था। इसके भीतर और अधिक साज सज्जा का काम बाईजेंटाइन शासन के दौरान किया गया था। इसमें बनी हुई मोजायक फर्श और भित्ति चित्र अपने आप में अद्वितीय हैं।

यह 15वीं शताब्दी तक चर्च के रूप में ही था, लेकिन इसके बाद जब यहाँ तुर्कों के ऑटोमन साम्राज्य ने अधिकार हुआ तो इसे मस्जिद में बदल दिया गया। कुछ शताब्दियों तक यह मस्जिद ही बना रहा। इसके बाद सन 1945 में जब द्वितीय विश्व युद्ध के बाद यहाँ फिर से उदारवाद का दौर चालू हुआ तो इसे एक म्यूजियम के रूप में बदल दिया गया। वर्ष 2019 तक यह उसी रूप में रहा।

इसके बाद साल 2020 में तुर्की के राष्ट्रपति रेचप तैय्यप एर्दोगन ने इसे एक सक्रिय मस्जिद में बदलने का ऐलान किया था। इसके बाद से इसमें कुछ मरम्मत का काम किया जा रहा था। अब सरकार ने बताया है कि इस चर्च को मई 2024 में मुस्लिमों की नमाज के लिए खोल दिया जाएगा। इसके पहले इसे फरवरी 2024 में खोले जाने की अटकलें थीं।

गौरतलब है कि एर्दोगन लगातार खुद को दुनिया के मुस्लिमों के संरक्षक के तौर पर पेश करते रहे हैं। वह तुर्की को खिलाफत के दौर में वापस ले जाना चाहते हैं। प्रथम विश्व युद्ध से पहले तुर्की में खलीफा का शासन था, जिसे पूरी दुनिया के मुस्लिमों का नेता माना जाता था। एर्दोगन खुद के लिए वही पदवी की चाह लिए बैठे हैं। इसी क्रम में उन्होंने यह कदम उठाया है।

हालाँकि, यह पहली बार नहीं हो रहा है कि किसी चर्च को मस्जिद में बदला जा रहा है। इससे पहले वर्ष 2020 में इस्तांबुल में ही हागिया सोफिया चर्च को मस्जिद में तब्दील कर दिया गया था। इसके चर्च से मस्जिद में बदले जाने पर काफी हो हल्ला भी हुआ था। हागिया सोफिया भी रोमन शासन के बना एक ऐतिहासिक चर्च है, जिसे मस्जिद में तब्दील कर दिया गया है।

तुर्की के भीतर चर्चों को मस्जिद में बदलने को लेकर कोई भी आवाज नहीं उठ रही है। इसको लेकर कोई मुस्लिम संगठन या अन्य लिबरल गैंग भी अपना असंतोष नहीं जता रहे हैं। यहाँ उन मौलवियों के दावे भी झूठे साबित हो रहे हैं कि इस्लाम दूसरे के इबादतगाहों पर मस्जिद बनाने की इजाजत नहीं देता है, जैसा कि ज्ञानवापी और श्रीकृष्ण जन्मभूमि के मामले में कुछ मौलानाओं ने यह बात कही है।

भारत में सुप्रीम कोर्ट में न्यायिक लड़ाई जीत कर बनाए गए राम मंदिर को लेकर खूब रोना-धोना हुआ था। इसके बाबरी मस्जिद वाले स्थान पर बनाए जाने को लेकर चिंताएँ जताई गईं थी, जबकि यह निर्विवाद रूप से सिद्ध हो चुका था कि जहाँ मंदिर बना वहीं पर पहले भी मंदिर ही था और उसे तोड़कर मस्जिद बनाई गई थी।

UCC पर विधानसभा की मुहर, स्वतंत्र भारत में ऐसा करने वाला पहला राज्य बना उत्तराखंड: बोले सीएम धामी- यह पूरे देश को राह दिखाएगा

उत्तराखंड विधानसभा में बुधवार (7 फरवरी 2024) को समान नागरिक संहिता (UCC) ध्वनिमत के साथ पास हो गया। इसके नोटिफाई करते ही यह विधेयक कानून का रूप ले लेगा। इसके साथ ही उत्तराखंड आजाद भारत का पहला राज्य बन जाएगा, जहाँ समान नागरिक संहिता लागू किया जाएगा।

बता दें कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने स्वयं इस बिल को 6 फरवरी 2024 को सदन में पेश किया था। उत्तराखंड के मुख्यमंत्री धामी के विधानसभा में UCC बिल पेश करते ही यहाँ मौजूद विधायकों ने वन्दे मातरम और जय श्रीराम के नारे लगाए थे। इसके बाद सदन में इस पर चर्चा हुई और आखिरकार यह बिल पारित हो गया।

इस विधेयक का मसौदा एक पाँच सदस्यीय पैनल ने किया है, जिसकी अध्यक्षता सुप्रीम कोर्ट की रिटायर जज रंजना देसाई ने की थी। समिति ने 2 फरवरी को अपनी रिपोर्ट उत्तराखंड सरकार को सौंप दी थी। यह पाँच सदस्यीय पैनल इस विधेयक की बारीकियों को समझने और उसे मूर्त रूप देने के लिए बनाया गया था।

इसके लेकर उत्तराखंड के मुख्यमंत्री धामी ने सोशल मीडिया साइट एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर खुशी जाहिर है। उन्होंने इतिहास रचने वाली उत्तराखण्ड की विधायिका के सभी सदस्यों, UCC का ड्राफ्ट बनाने वाली कमेटी के सभी सदस्यगणों एवं राज्य की जनता का आभार व्यक्त किया है।

अपने पोस्ट में सीएम धामी ने लिखा, “ऐतिहासिक समान नागरिक संहिता विधेयक-2024 विधानसभा में पारित.. माँ गंगा व यमुना की उद्गम स्थली देवभूमि उत्तराखण्ड से निकली UCC के रूप में समानता और समरूपता की यह अविरल धारा संपूर्ण देश का पथ प्रदर्शित करेगी। यह विधेयक मातृशक्ति के सम्मान एवं उनकी सुरक्षा के प्रति हमारी सरकार की प्रतिबद्धता को भी परिलक्षित करता है।”

पीएम मोदी को आभार व्यक्त करते हुए उन्होंने आगे लिखा, “आज पुनः आदरणीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के मुखारबिंद से निकली वह शिववाणी याद आती है कि ’21वीं सदी का तीसरा दशक उत्तराखण्ड का दशक है’ प्रधानमंत्री जी के विजन ‘एक भारत-श्रेष्ठ भारत’ एवं प्रदेशवासियों की आकांक्षाओं के अनुरूप हमारी सरकार ने चुनाव से पूर्व देवतुल्य जनता से किए गए अपने वादे को पूर्ण किया है।”

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अपने X पोस्ट में आगे लिखा, “आज 24 साल के सशक्त, स्वाभिमानी एवं ऊर्जावान उत्तराखण्ड को देखकर हमारे राज्य आंदोलनकारियों का मस्तक गर्व से ऊँचा हो गया होगा। हमारे शहीदों के प्रति यह एक सच्ची श्रद्धांजलि है जब हमारा प्रदेश विश्व पटल पर एक नई पहचान बना रहा है।”

समान नागरिक संहिता बिल में विवाह, तलाक, संपत्ति में हिस्सेदारी, गोद लेने की प्रक्रिया और लिव-इन रिलेशनशिप से जुड़े अहम बिंदु भी शामिल किए गए हैं। इसमें उत्तराधिकार के महत्वपूर्ण मामले पर भी जोर दिया गया है। हालाँकि, इस बिल को लेकर मुस्लिम समाज विरोध कर रहा है।

पांडवों ने माँगे 5 गाँव, हिंदुओं ने 3 स्थान: हमने वचन निभाया, मंदिर वहीं बनाया, बोले योगी आदित्यनाथ, ‘आजादी के तुरंत बाद होना चाहिए था ये काम’

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बुधवार (07 फरवरी 2024) को विधानसभा में राज्यपाल के अभिभाषण पर चर्चा में भाग लिया और राज्यपाल को धन्यवाद ज्ञापित किया। इस दौरान उन्होंने विपक्ष को चुन-चुन का निशाना बनाया, तो हिंदुओं की आस्था से जुड़े तीन स्थलों को लेकर भी खुलकर अपनी बात रखी। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने विपक्ष समेत तमाम दलों से सवाल पूछा कि सनातन धर्म की आस्था के तीन प्रमुख स्थलों अयोध्या, काशी और मथुरा का विकास आखिर किस मंशा से रोका गया था?

वचन निभाया, मंदिर वहीं बनाया: सीएम योगी

विधानसभा में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने आगे कहा, “महाभारत रचने वाले वेदव्यास की एक पीड़ा थी कि मैं बाहें उठाकर लोगों को समझा रहा हूँ कि धर्म से ही अर्थ और काम की प्राप्ति होती है इसलिए क्यों नहीं धर्म के मार्ग पर चलते हो? ये केवल वेदव्यास की ही पीड़ा नहीं थी, 2014 के पहले पूरे देश की और 2017 के पहले पूरे प्रदेश की भी यही पीड़ा थी।”

उन्होंने आगे कहा, “2017 के पहले उत्तर प्रदेश को जिन लोगों ने चार-चार बार प्रदेश में शासन किया, लंबे समय तक सत्ता पर विराजमान रहे उन्होंने यूपी के लोगों के सामने पहचान का संकट खड़ा कर दिया। यहाँ का नौजवान पहचान छिपाने के लिए मजबूर था। उसे यूपी से बाहर हेय दष्टि से देखा जाता था। मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि यहाँ तो नौकरी नहीं थी, यूपी से बाहर भी नहीं मिलती थी। किराये के कमरे तो दूर होटल और धर्मशालाओं में भी जगह नहीं मिलती थी।”

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा, “गत 22 जनवरी को पूरे हिंदुस्तान और दुनिया के अंदर जहाँ कहीं भी हम देख रहे थे, हर ओर से एक ही आवाज आ रही थी। यह अद्भुत क्षण था। भारत के गौरव की प्राण प्रतिष्ठा का कार्यक्रम संपन्न हुआ है लेकिन प्रसन्नता इस बात की भी थी कि हमने वचन निभाया और मंदिर वहीं बनाया।”

मुख्यमंत्री योगी ने कहा, “उत्तर प्रदेश ने 22 जनवरी 2024 की घटना को भी देखा है। पूरा देश अभिभूत था। पूरी दुनिया के अंदर हर वह व्यक्ति जो न्याय का पक्षधर है, गौरवान्वित था। हर धर्मावलंबी की आँखों में आँसू थे। अयोध्या को लेकर हर किसी के मन में संतोष था कि जो हुआ है अच्छा हुआ है। अविस्मरणीय क्षण था वो और हर व्यक्ति गौरव की अनुभूति कर रहा था। क्योंकि 500 वर्षों के लंबे संघर्ष के बाद सर्वानुमति के साथ उसके समाधान का रास्ता निकला और आज रामलला के भव्य मंदिर का निर्माण न सिर्फ प्रशस्त हुआ बल्कि रामलला वहाँ स्थापित हुए।”

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने आगे कहा, “दुनिया के अंदर यह पहली घटना थी, जहाँ प्रभु को अपने स्वयं के अस्तित्व के लिए स्वयं प्रमाण जुटाने पड़े थे, लेकिन राम की मर्यादा हमें धैर्य की प्रेरणा देती है। हमें प्रसन्नता इस बात की थी, कि हमने वचन निभाया और मंदिर वहीं बनाया। केवल बोलते नहीं हैं। करते भी हैं। जो कहा, करके दिखाया। संकल्प की सिद्धि की।”

पांडवों ने माँगे पाँच गाँव, यहाँ की आस्था कर रही केवल की तीन की बात

योगी आदित्यनाथ ने विधानसभा में अपनी बात को विस्तार देते हुए कहा, “अयोध्या की बात होती है तो हमें पांडवों की याद आती है। कृष्ण गए थे दुर्योधन के पास उन्होंने कहा था कि ‘दे दो हमको पाँच ग्राम, रखो अपनी धरती तमाम’, लेकिन दुर्योधन वह भी दे न सका। यहाँ तक कि उसने भगवान कृष्ण को बंधक बनाने का प्रयास किया।’

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि यही तो हुआ था अयोध्या के साथ। यही हुआ था काशी के साथ। यही हुआ था मथुरा के साथ। पांडवों ने भी केवल पाँच ग्राम माँगे थे लेकिन यहाँ कोई समाज, यहाँ की आस्था केवल तीन के लिए बात कर रही है। वो तीन के लिए भी इसलिए कि वे विशिष्ट स्थल हैं। ईश्वर की अवतरण की धरती हैं। वह सामान्य नहीं है लेकिन एक जिद है। उस जिद में जब राजनैतिक तड़का पड़ने लगता है तो वहीं से फिर विवाद की स्थिति खड़ी होने लगती है।”

मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत के अंदर लोकआस्था का अपमान हो और बहुसंख्यक समुदाय गिड़गिड़ाए। ऐसा दुनिया में कहीं नहीं हुआ। उन्होंने कहा कि जो काम हो रहा है वह काम आजाद भारत में पहले पहल होना चाहिए था। 1947 में ही हो जाना चाहिए था।

अयोध्या-काशी और मथुरा की ओर इशारा करते हुए मुख्यमंत्री योगी ने कहा, ‘हमने तो केवल तीन जगह माँगी है। अन्य जगहों के बारे में कोई मुद्दा नहीं था। अयोध्या का उत्सव लोगों ने देखा तो नंदी बाबा ने कहा कि भाई हम काहे इंतजार करें। इंतजार किए बगैर रात में बैरिकेड तोड़वा डाले। अब हमारे कृष्ण कन्हैया कहाँ मानने वाले हैं?’

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा, “विदेशी आक्रांताओं ने केवल इस देश के अंदर धन दौलत ही नहीं लूटा था। इस देश की आस्था भी रौदने का काम किया था। आजादी के बाद उन आक्रांताओं को महिमामंडित करने का कुत्सित कार्य किया गया, अपने वोटबैंक के लिए। दुर्योधन ने कहा था कि सुई की नोक बराबर भूमि भी नहीं दूंगा। फिर तो महाभारत होना ही था। फिर क्या हुआ? कौरव पक्ष समाप्त हो गया।”

लक्षद्वीप को टूरिस्ट हब बनाएगी मोदी सरकार: विकास पर खर्च करेगी ₹3600 करोड़, 6 द्वीपों की बदलेगी सूरत

केंद्र सरकार लक्षद्वीप के विकास पर ₹3600 करोड़ से अधिक खर्च करेगी। दरअसल, केंद्र सरकार इसके अलग-अलग द्वीपों में विभिन्न तरह की सुविधाएँ विकसित की करेगी। इससे भारतीय टूरिस्ट बिना विदेश गए ही अपने देश में सुंदर समुद्री तटों का आनंद उठा सकेंगे। केंद्र सरकार लक्षद्वीप को टूरिस्ट हब में बदलने की कोशिश में लगी हुई है।

इकॉनोमिक टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, केंद्र सरकार लक्षद्वीप समूह में शामिल कवरत्ती, अगात्ति, अन्द्रोथ, कदामत और कल्पेनी द्वीप को विकसित करेगी। इन पोर्ट पर रोड बनाई जाएगी और हर तरह की सुविधाएँ विकसित की जाएँगी। यहाँ हवाई सुविधाओं का भी विकास किया जाएगा।

रिपोर्ट में बताया गया है कि सरकार लक्षद्वीप को सागरमाला परियोजना के तहत विकसित करेगी। इस विकास में लगने वाले फंड को सागरमाला परियोजना के फंड से लिया जाएगा। लक्षद्वीप के विकास के लिए कुल 13 प्रोजेक्ट सरकार ने चुने हैं। इन प्रोजेक्ट के जरिए लक्षद्वीप समूह के 36 द्वीपों की तस्वीर बदलेगी।

रिपोर्ट बताती है कि सरकार कदामत द्वीप पर सर्वाधिक ₹1034 करोड़ खर्च करेगी। यह फंड पोर्ट और बीच के विकास में लगाया जाएगा। इसके अलावा, कल्पेनी द्वीप पर ₹804 करोड़ का खर्चा होगा। अन्द्रोथ द्वीप को ₹762 करोड़ से विकसित किया जाएगा। मिनिकॉय और कवरत्ती द्वीप को भी बड़ी धनराशि विकास के लिए दी गई है।

इससे पहले भी सरकार कह चुकी है कि वह लक्षदीप में हवाई सुविधाओं को बढ़ावा देगी, जिससे भारत भर से टूरिस्ट यहाँ आएँ। हाल ही में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भी लक्षद्वीप का दौरा किया था। इसके बाद देश की वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने भी भारतीय द्वीपों के विकास को लेकर बात की थी। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने लक्षद्वीप की सुन्दरता को दिखाते हुए फोटो भी डाली थी।

इन फोटो को देखकर मालदीव की मुइज्जू सरकार के तत्कालीन मंत्रियों ने भारत और पीएम मोदी पर अभद्र टिप्पणी की थी। इसके बाद भारत में मालदीव के बॉयकॉट को लेकर अभियान चला था। इसके बाद से भारत और मालदीव के सम्बन्धों में खटास दिख रही है। मालदीव वर्तमान में चीन की कठपुतली बना हुआ है और उसके राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जू लगातार भारत विरोधी भावनाओं को हवा देते रहे हैं।