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भीड़ को भड़काना, दंगा करना, संपत्तियों को नष्ट करना… मुफ्ती सलमान अजहरी पर दर्ज हैं 11 FIR, गुजरात ही नहीं महाराष्ट्र-कर्नाटक में भी शिकायतें

गुजरात के जूनागढ़ में भड़काऊ भाषण देने वाले सलमान अजहरी पर सिर्फ गुजरात में नहीं बल्कि अन्य राज्यों में भी एफआईआर दर्ज है। ये शिकायतें बताती हैं कि अजहरी का आपराधिक इतिहास रहा है। उस पर कभी भड़काऊ भाषण देने के आरोप लगे हैं तो कभी हिंसक गतिविधियों में शामिल होने के।

इस रिपोर्ट में अजहरी के विरुद्ध दर्ज मामलों की हम आपको जानकारी पेश कर रहे हैं। ये सारे मामले 2015 के बाद के हैं उससे पहले अगर कोई शिकायत दर्ज हुई थी तो उसकी जानकारी अभी प्राप्त नहीं है। अगर मामला 2015 से पूर्व दर्ज हुआ होगा तो ये संख्या और भी बढ़ सकती है।

सलमान अजहरी के खिलाफ दायर 11 FIR का ब्यौरा

  • मुफ्ती सलमान अजहरी के खिलाफ पहली एफआईआर पुराने हुबली पुलिस स्टेशन, धारवाड़ (कर्नाटक) में 14 दिसंबर 2015 को दर्ज की गई थी। केस में आईपीसी की धारा 143, 147, 148, 153, 427 और 149 लगाई गई थी।
  • अजहरी के खिलाफ दूसरी एफआईआर भी ओल्ड हुबली पुलिस स्टेशन (कर्नाटक) में भी दर्ज की गई थी। लेकिन एक दिन बाद यानी 15 दिसंबर 2015 को। हुबली पुलिस स्टेशन (249/2015) में दर्ज इस एफआईआर में आईपीसी की धारा 143, 147, 148, 153, 427, 149 और संपत्ति क्षति से संबंधित धाराओं के तहत अपराध दर्ज किया गया था।
  • अजहरी के खिलाफ तीसरी एफआईआर भी 15 दिसंबर 2015 को दर्ज की गई थी। शिकायत धारवाड़ (कर्नाटक) कस्बापेठ पुलिस स्टेशन में दर्ज की गई थी। एफआईआर (1354/2015) आईपीसी की धारा 143, 147, 148, 153, 427 और 149 के तहत दर्ज की गई थी।
  • मौलाना के खिलाफ चौथी एफआईआर भी 15 दिसंबर 2015 को दर्ज की गई थी। यह शिकायत भी कस्बापेठ पुलिस स्टेशन में ही दर्ज की गई थी। इसमें आईपीसी की धारा 143, 147, 148, 153, 427 और 149 के तहत अपराध दर्ज किया गया था।
  • पाँचवीं एफआईआर भी 15 दिसंबर 2015 को कस्बापेठ पुलिस स्टेशन में ही दर्ज की गई थी। आईपीसी की धारा 143, 147, 148, 153, 427 और 149 के तहत अपराध दर्ज किया गया था।
  • इसके बाद 15 दिसंबर 2015 को अजहरी के खिलाफ छठी एफआईआर भी कस्बापेठ पुलिस स्टेशन में ही दर्ज कराई गई थी। केस को आईपीसी की धारा 143, 147, 148, 153, 427, 149 और संपत्ति क्षति से संबंधित धाराओं के तहत दर्ज किया गया था।
  • 15 दिसंबर 2015 को कसाबापेठ पुलिस स्टेशन में ही अजहरी के खिलाफ सातवीं एफआईआर भी दर्ज की गई थी। एफआईआर आईपीसी की धारा 143, 147, 148, 153, 427 और 149 के तहत दर्ज की गई थी।
  • अजहरी के खिलाफ आठवीं एफआईआर 5 अप्रैल 2017 को दर्ज की गई थी। वह भी कस्बापेठ पुलिस स्टेशन में ही दर्ज की गई थी। केस को आईपीसी की धारा 143, 147, 148, 153, 427 और 149 के तहत दायर किया गया था।
  • नौवीं एफआईआर 26 अप्रैल, 2021 को मुंबई के विक्रोली पार्क साइट पुलिस स्टेशन में दर्ज की गई थी। एफआईआर आईपीसी की धारा 195 (ए) के तहत दर्ज की गई थी। इस मामले में पुलिस ने कोर्ट में ‘ए’ समरी दाखिल कर दी है।
  • दसवीं शिकायत गुजरात के जूनागढ़ में दर्ज की गई है। मुफ़्ती सलमान अजहरी ने जूनागढ़ आकर भड़काऊ भाषण दिया। जिसके बाद जूनागढ़ पुलिस ने स्वत: संज्ञान लेते हुए एफआईआर दर्ज की। एफआईआर आईपीसी की धारा 153(बी), 505(2), 188 और 114 के तहत दर्ज की गई है। इस मामले पर कार्रवाई फिलहाल जारी है।
  • 11वीं एफआईआर भी गुजरात में ही दर्ज की गई है। लेकिन ये कच्छ के समखियाली पुलिस स्टेशन में दर्ज है। दरअसल, जूनागढ़ में भड़काऊ भाषण देने से पहले अजहरी ने कच्छ में भी भड़काऊ भाषण दिया था। इस संबंध में कच्छ पुलिस ने मामला भी दर्ज कर लिया है।

उपरोक्त जानकारी से पता चलता है कि 14 और 15 दिसंबर 2015 को अजहरी के खिलाफ 8 एफआईआर दर्ज की गई थी। ये सभी शिकायतें कर्नाटक में दर्ज हुई थीं और इनमें लगाई धाराएँ भी एक जैसी थीं। अब सिर्फ 2 दिन में सामने आए 8 अपराध और सभी अपराध की धाराएँ एक जैसी होने से आपको लग सकता है कि अजहरी ने ऐसा क्या किया। तो आइए धारा आईपीसी की धारा 143, 147, 148, 153, 427 और 149 के तहत दर्ज की गई हैं। यह भी पता चलेगा कि अजहरी का आपराधिक इतिहास रहा है।

अजहरी के खिलाफ लगाई धाराओं से पता चलता है उसकी प्रवृत्ति

धारा 143 तब लागू की जाती है जब कोई व्यक्ति किसी गैरकानूनी सभा में भाग लेता है। धारा 147 तब लागू की जाती है जब कोई व्यक्ति सांप्रदायिक दंगों, हिंसा में भाग लेकर शांति भंग करने की कोशिश करता है। धारा 148 तब लगाई जाती है जब कोई व्यक्ति किसी घातक हथियार के साथ दंगे में भाग लेता है। धारा 153 तब जोड़ी जाती है जब कोई व्यक्ति भड़काऊ भाषण देकर भीड़ को भड़काने की कोशिश करता है और धार्मिक-सांप्रदायिक सौहार्द बिगाड़ने की कोशिश करता है।

धारा 149 भी तभी जोड़ी जाती है जब कोई व्यक्ति किसी निषिद्ध सभा में भाग लेता है और धारा 427 तब लगाई जाती है जब किसी व्यक्ति ने कोई ऐसा कार्य किया हो जिससे दूसरे पक्ष को 50 रुपए या उससे अधिक का नुकसान हुआ हो। संक्षेप में कहें तो इस धारा के तहत किसी की संपत्ति को नष्ट करना या तोड़फोड़ करना अपराध है।

अब अगर इन सभी धाराओं की समीक्षा की जाए तो पता चलता है कि मुफ्ती सलमान अजहरी का आपराधिक इतिहास है और वह ऐसे अपराधों में शामिल है जिनके कारण उसपर उक्त एफआईआर लगाई गई। अब एटीएस उसके खिलाफ गहनता से जाँच कर रही है। उसके तीन ट्रस्ट भी संदेह के घेरे में हैं। साथ ही आतंकी संगठन से कनेक्शन की भी जाँच की जा रही है।

पूरे देश में मोबाइल सेवा बंद कर मतदान करवा रहा है पाकिस्तान, इमरान खान ने जेल से डाला वोट: PM की रेस में नवाज शरीफ और बिलावल भुट्टो

पाकिस्तान में आम चुनाव के लिए आज (08 फरवरी 2024) मतदान हो रहे हैं। चुनावी नतीजे अगले दिन से आएँगे। मतदान के दौरान कई मतदान केंद्रों पर गड़बड़ियाँ सामने आई हैं। इस चुनाव में सबसे बड़े खिलाड़ी के तौर पर बिलावल भुट्टो जरदारी की अगुवाई में पाकिस्तान पीपल्स पार्टी (पीपीपी) और नवाज शरीफ के नेतृत्व में पाकिस्तान मुस्लिम लीग-नवाज (PML-N) मैदान में हैं, तो कई छोटी पार्टियाँ भी अपनी किस्मत आजमा रही हैं। वहीं, इमरान खान की पार्टी पीटीआई के नेता निर्दलीय चुनाव लड़ रहे हैं। मतदाता सुबह से ही मतदान केंद्रों पर पहुँच रहे हैं। हालाँकि कई मतदान केंद्रों पर मतदाताओं की संख्या काफी कम होने की भी बात सामने आ रही है। इस बीच, पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान ने जेल से बाहर निकलने की जगह जेल से ही मतदान किया। हालाँकि उनकी बीबी-बुशरा को वोट देने की इजाजत नहीं मिली।

पाकिस्तान में मोबाइल सेवाएँ ठप

पूरे देश में मतदान के बीच पाकिस्तान में मोबाइल सेवाओं पर बैन लगा दिया गया है। पाकिस्तान के गृह मंत्रालय ने पूरे देश में इंटरनेट सेवाएँ बंद कर दी हैं। ये कदम सुरक्षा के मद्देनजर उठाना पड़ा है। लोकल मीडिया के हवाले से एएनआई ने ये खबर दी है।

मोबाइल सेवाओं पर रोक लगाने का विरोध सभी राजनीतिक दल कर रहे हैं। इस बीच, इमरान खान की पार्टी पीटीआई ने लोगों से अपील की है कि वो अपने वाई-फाई के पासवर्ड हटा दें, ताकी तानाशाह सरकारों को जवाब दिया जा सके और अधिकतम लोग इंटरनेट से जुड़कर पार्टी के लिए वोटिंग बढ़ाने में मदद कर सकें।

पीटीआई ने एक्स पर लिखा, “पाकिस्तानियों, नाजायज- फासीवादी शासन ने मतदान के दिन पूरे पाकिस्तान में सेल फोन सेवाएँ बंद कर दी हैं। आप सभी से अनुरोध है कि अपने व्यक्तिगत वाईफाई खातों से पासवर्ड हटाकर इस कायरतापूर्ण कृत्य का मुकाबला करें, ताकि आसपास के किसी भी व्यक्ति को इस अत्यंत महत्वपूर्ण दिन पर इंटरनेट तक पहुँच मिल सके। हम सब इसमें एक साथ हैं और हम एक साथ जीतेंगे!”

वहीं, पाकिस्तान पीपल्स पार्टी (पीपीपी) की ओर से प्रधानमंत्री पद के दावेदार और तीन जगहों से चुनाव लड़ रहे बिलावल भुट्टो जरदारी ने भी मोबाइल सेवाओं पर रोक का विरोध किया है। उन्होंने अपनी पार्टी के कार्यकर्ताओं और नेताओं से चुनाव आयोग के साथ ही कोर्ट में भी जाने के लिए कहा है। उन्होंने एक्स पर पोस्ट किया, “पूरे देश में मोबाइल फोन सेवाएँ तुरंत बहाल की जानी चाहिए, मैंने अपनी पार्टी के लोगों से कहा है कि वो मोबाइल सेवाओं पर रोक हटाने के लिए पाकिस्तान चुनाव आयोग और कोर्ट दोनों ही जगहों पर जाएँ।”

पाकिस्तान की पिछली सरकार में विदेश मंत्री रहे बिलावल भुट्टो जरदारी पीपीपी के अध्यक्ष हैं। वो तीन जगहों- एनए194 लरकाना, एनए196 शाहदादकोट और एनए127 लाहौर से चुनाव लड़ रहे हैं। उनकी माँ बेनजीर भुट्टो दो बार देश की प्रधानमंत्री रही हैं, तो पिता आसिफ अली जरदारी देश के राष्ट्रपति रह चुके हैं। इमरान खान की सरकार गिरने के बाद उन्होंने नवाज शरीफ की पार्टी के साथ गठजोड़ करके नई सरकार बनाई थी और उन्हें विदेश मंत्रालय का काम मिला था।

नवाज शरीफ चुनावी मैदान में लौटे, बनेंगे प्रधानमंत्री?

इस चुनाव से ठीक पहले पाकिस्तान के तीन बार प्रधानमंत्री रहे नवाज शरीफ भी पाकिस्तान पहुँचे हैं और वो चौथी बार प्रधानमंत्री बनने के लिए ताकत आजमा रहे हैं। अभी उनके छोटे भाई शहबाज शरीफ सत्ता संभाल रहे थे। इसके बाद केयरटेकर सरकार की देखरेख में चुनाव हो रहा है। नवाज शरीफ कई जगहों से चुनाव लड़ रहे हैं। इस बीच उन्होंने मतदान किया और लोगों ने अपनी पार्टी के पक्ष में भारी मतदान की भी अपील की है।

पीएमएल-एन के मुखिया नवाज शरीफ ने मतदान के बाद लाहौर में मीडिया से बातचीत की (फोटो साभार – डॉन न्यूज टीवी

पाकिस्तान नेशनल असेंबली की 265 सीटों पर मतदान

पाकिस्तान के आम चुनाव में इस बार करीब 5000 उम्मीदवार मैदान में हैं। ये उम्मीदवार 265 सीटों के लिए अपनी किस्मत आजमा रहे हैं। पाकिस्तान नेशनल असेंबली चुनाव में इस बार पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की पार्टी हिस्सा नहीं ले पा रही है, क्योंकि उनकी पार्टी के चुनाव निशान ‘बैट’ को जब्त कर लिया गया है। ऐसे में उनकी पार्टी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) के उम्मीदवार अलग-अलग चुनाव निशान के साथ निर्दलीय मैदान में हैं। पाकिस्तान में नेशनल असेंबली के लिए हो रहे चुनाव में सुरक्षा व्यवस्था को संभालने के लिए साढ़े 6 लाख से ज्यादा जवानों को जिम्मेदारी सौंपी गई है।

पाकिस्तान चुनाव आयोग के मुताबिक, पूरे देश में करीब साढ़े 12 करोड़ मतदाता हैं। देश भर में 90 हजार से ज्यादा पोलिंग स्टेशन बनाए गए हैं। चुनाव आयोग ने महिलाओं को मतदान से जोड़ने के लिए कई जगहों पर महिलाओं के लिए विशेष पोलिंग बूथ भी बनाए हैं। पाकिस्तान में 44 हजार मतदान केंद्रों को सामान्य, 29,985 मतदान केंद्रों को संवेदनशील तो 16,766 मतदान केंद्रों को अति संवेदनशील घोषित किया गया है। गुरुवार (7 फरवरी 2024) को मतदान पूरा हो जाने के बाद अगले ही दिन यानी शुक्रवार (9 फरवरी 2024) को ही नतीजे आने लगेंगे।

विदाई का वक्त आया तो मनमोहन सिंह के लिए PM मोदी ने खोल दिया दिल, कहा- वे लोकतंत्र को मजबूती देने सदन में आएः काॅन्ग्रेस के ‘ब्लैक पेपर’ को बताया ‘काला टीका’

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की गिनती ऐसे उदार नेताओं में होती है जो विपक्षी दलों के नेताओं के अच्छे कार्यों की सराहना करने में कभी कंजूसी नहीं बरतते। उनका यही रूप गुरुवार (8 फरवरी 2024) को संसद के उच्च सदन राज्यसभा में दिखा। उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री और कॉन्ग्रेस के राज्यसभा सांसद डॉ. मनमोहन सिंह की संसद के प्रति प्रतिबद्धता को याद करते हुए उनसे सीखने की सलाह सभी सांसदों को दी।

मनमोहन सिंह समेत 56 सदस्य राज्यसभा से रिटायर होने वाले हैं। इनकी विदाई के मौके पर प्रधानमंत्री सदन में बोल रहे थे। सिंह वर्तमान में राजस्थान से राज्यसभा सांसद हैं। प्रधानमंत्री ने विदाई के मौके पर उनकी कर्मठता की तारीफ की।

प्रधानमंत्री ने कहा, “मैं विशेष रूप से माननीय डॉक्टर मनमोहन सिंह जी का स्मरण करना चाहूँगा। 6 बार वह इस सदन में रहे। अपने मूल्यवान विचारों से, नेता के रूप में भी और प्रतिपक्ष के नेता के रूप में उनका बहुत बड़ा योगदान रहा है। वैचारिक मतभेद, बहस में छींटाकशी, यह तो बहुत अल्पकालिक होता है। लेकिन इतने लम्बे अरसे तक जिस प्रकार से उन्होंने इस सदन का मार्गदर्शन किया है, देश का मार्गदर्शन किया है, जब भी कभी हमारे लोकतंत्र की चर्चा के दौरान जब कुछ माननीय सदस्यों की चर्चा होगी उसमें माननीय मनमोहन सिंह के योगदान को जरूर याद किया जाएगा।”

आगे उन्होंने कहा, “मैं सभी सांसदों से, चाहे इस सदन में हो या फिर उस सदन में, जो आज हैं और जो भविष्य में आने वाले हैं, उनसे कहूँगा कि यह जो माननीय सांसद होते हैं किसी भी दल में हों, जिस प्रकार से उन्होंने (मनमोहन सिंह) अपना जीवन अपना जिया होता है, जिस प्रकार की प्रतिभा का प्रदर्शन कराया होता है, उसका हमें एक मार्गदर्शक के रूप में उपयोग करना चाहिए।”

प्रधानमंत्री मोदी ने इस दौरान डॉ. मनमोहन सिंह के व्हीलचेयर पर राज्यसभा में आने की चर्चा भी की। उन्होंने कहा, “मुझे याद है कि सदन में वोटिंग का एक अवसर था। पता था उन्हें विजय ट्रेजरी बेंच (सरकार) की होने वाली है, अंतर भी बहुत था, लेकिन डॉ. सिंह व्हीलचेयर पर आए और वोट किया।”

आगे उन्होंने कहा, “एक सांसद अपने दायित्व के लिए कितना सजग है, उसका वो प्रेरक उदाहरण हैं। इतना ही नहीं मैं देख रहा था कि कभी कमेटी मेम्बर्स के चुनाव हुए तो व्हीलचेयर पर वोट देने आए। सवाल यह नहीं है कि वह किसको मजबूत करने के लिए वोट देने आए थे, वह लोकतंत्र को मजबूत करने के लिए आए थे।” गौरतलब है कि मनमोहन सिंह अगस्त 2023 में मॉनसून सत्र के दौरान दिल्ली सेवा बिल पर मतदान के लिए व्हीलचेयर पर राज्यसभा में आए थे।

डॉ मनमोहन सिंह वर्ष 1991 में पहली बार राज्यसभा के सदस्य बने थे। इसके बाद वह पाँच बार इस सदन के लिए चुने गए। वह सर्वाधिक बार असम से राज्यसभा के सदस्य रहे। वह प्रधानमंत्री भी राज्यसभा के सदस्य रहते हुए बने थे। प्रधानमंत्री मोदी ने सदस्यों को विदाई देने के अलावा कॉन्ग्रेस पर उनकी सरकार के खिलाफ ब्लैक पेपर लाने को लेकर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि कॉन्ग्रेस की तरफ से आज काला टीका लगाने का प्रयास किया गया है।

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, “काले कपड़ों में सदन को फैशन शो देखने का भी मौका मिला है। कभी-कभी कुछ काम इतने अच्छे होते हैं जो लम्बे समय तक उपयोगी होते हैं। हमारे यहाँ कुछ अच्छी चीज करते हैं तो परिवार में एक स्वजन ऐसा भी होता है, जो कहता है कि अरे नजर लग जाएगी काला टीका लगा देता हूँ। आज पिछले 10 वर्षों में जो काम हुए हैं उसको किसकी नजर ना लग जाए इसलिए आज खड़गे जी काला टीका लगाकर आए हैं। हमारे कार्यों को नजर ना लग जाए इसलिए आप जैसे वरिष्ठ सांसद काला टीका लगाकर आए हैं तो यह अच्छी बात है।”

‘नरेंद्र मोदी OBC नहीं, BJP सरकार ने तेली को सन् 2000 में इस कैटेगरी में डाला’: PM की जाति पर राहुल गाँधी ने फिर फैलाया झूठ, पहले भी कॉन्ग्रेस की हो चुकी है फजीहत

कॉन्ग्रेस पार्टी के पूर्व अध्यक्ष राहुल गाँधी ने एक बार फिर से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की जाति को लेकर टिप्पणी की है। राहुल गाँधी ने ‘भारत जोड़ो न्याय यात्रा’ के दौरान कहा, “मैं बहुत गहरी बात बोल रहा हूँ। आप सब लोगों को भयंकर बेवकूफ बनाया जा रहा है। सुनो, मैं जो कह रहा हूँ। नरेंद्र मोदी OBC नहीं पैदा हुए थे, वो गुजरात में तेली जाति में पैदा हुए थे। उनकी जाति को भाजपा ने सन् 2000 में ओबीसी बनाया। आपके प्रधानमंत्री OBC नहीं पैदा हुए, सामान्य वर्ग में पैदा हुए।”

नरेंद्र मोदी OBC पैदा नहीं हुए: राहुल गाँधी

उन्होंने पीएम मोदी पर पूरी दुनिया में झूठ बोलने का आरोप लगाते हुए कहा कि वो किसी ओबीसी से गले नहीं मिलते, किसान-मजदूर का हाथ नहीं पकड़ते, बल्कि अडानी का हाथ पकड़ते हैं। राहुल गाँधी ने ओडिशा में ये बात कही, जहाँ से यात्रा गुरुवार (8 फरवरी, 2024) को छत्तीसगढ़ में घुसी। रायगढ़, कोरबा और सक्ती जिलों से गुजरेगी। 14 फरवरी को यात्रा झारखंड में एंटर करेगी। उससे पहले ही राहुल गाँधी ने पीएम मोदी के जाति-वर्ग को लेकर झूठ फैला दिया है।

असल में बजट सत्र में लोकसभा में अपने संबोधन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विपक्ष द्वारा OBC को लेकर सवाल उठाए जाने पर खुद की तरफ इशारा करते हुए कहा था कि आपको सबसे बड़ा ओबीसी ही नहीं दिखाई दे रहा है। अब राहुल गाँधी का कहना है कि भाजपा सरकार ने नरेंद्र मोदी की जाति को ओबीसी कैटेगरी में डाल दिया। नरेंद्र मोदी अक्टूबर 2001 में पहली बार गुजरात के मुख्यमंत्री बने थे। वहीं राज्य में भाजपा की सरकार पहली बार मार्च 1995 में बनी थी।

1994 में भी OBC में थी मोढ़-घांची जाति

अब आपको बताते हैं कि राहुल गाँधी के दावे की सच्चाई क्या है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तेली जाति के मोढ़-घांची वर्ग से ताल्लुक रखते हैं। तेली जाति, वैश्य समाज के अंतर्गत आती है, जिन्हें बनिया भी कहा जाता है। गुजरात सरकार के सामाजिक कल्याण विभाग ने 25 जुलाई, 1994 को एक अधिसूचना जारी की थी, जिसमें OBC के अंतर्गत आने वाली 36 जातियों का जिक्र किया गया था। इस अधिसूचना में 25वें नंबर के b सेक्शन (25b) में मोढ़-घांची जाति का भी नाम था।

मई 2014 में जब ये मामला उठा था, तब भी भाजपा सरकार ने इस चीज को स्पष्ट किया था कि गुजरात में उसकी सरकार बनने से पहले से ही ये जाति ओबीसी क्लास में है। 1994 में राज्य में कॉन्ग्रेस की सरकार थी। अक्टूबर 1990 से फरवरी 1994 तक चिमनभाई पटेल राज्य के मुख्यमंत्री थे, वहीं फरवरी 1994 से मार्च 1995 तक छबीलदास मेहता मुख्यमंत्री थे। दोनों ही कॉन्ग्रेस की सरकारें थीं। ऐसे में उस समय नरेंद्र मोदी की जाति का ओबीसी में होना बताता है कि भाजपा या मोदी सरकार ने ये नहीं किया, ये कॉन्ग्रेस के शासनकाल में ही हुआ।

शरण लेने आए रोहिंग्या बांग्लादेश के लिए ‘बोझ’ बने, कहा- अब सीमा में घुसने नहीं देंगे, सुरक्षा के लिए बन गए हैं खतरा: भारत से भी की बात

बांग्लादेश ने रोहिंग्याओं को शरण देने से मना कर दिया है। वहाँ के नेताओं ने कहा है कि म्यामांर के रास्ते वो अब ज्यादा मात्रा में रोहिंग्याओं को बांग्लादेश की सीमा में नहीं आने देंगे क्योंकि इन लोगों के आने से देश की सुरक्षा में खतरा पैदा हो गया है।

बांग्लादेश के सड़क परिवहन और पुल मंत्री ओबैदुल कादिर ने बुधवार (7 फरवरी 2023) को पत्रकारों से कहा, “हम किसी और रोहिंग्या को देश में प्रवेश करने की अनुमति नहीं देंगे… वे पहले ही हमारे लिए बोझ बन चुके हैं।” उन्होंने बताया कि देश को मिलने वाली विदेशी सहायता पहले ही कम हो चुकी है ऐसे में उन लोगों को समर्थन कैसे दिया जाएगा।

इसी तरह बांग्लादेश के शरणार्थी राहत और प्रत्यावर्तन आयुक्त मोहम्मद मिजानुर रहमान ने कहा कि म्यांमार में जुंटा शासन व विद्रोहियों के बीच जारी जंग के बीच सैकड़ों लोग बांग्लादेश में प्रवेश करने के लिए म्यांमार की सीमा पर एकत्रित हैं। इनमें ज्यादातर चकमा समुदाय के लोग और रोहिंग्या हैं।

उन्होंने कहा, “बांग्लादेश पहले ही रोहिंग्याओं के अत्यधिक बोझ से दबा हुआ है। 7 साल हो गए हैं और अभी तक जो रोहिंग्या पहले से बांग्लादेश में हैं उन्हें उनकी सीमा में नहीं भेजा जा चुका है। अब ये लोग हमारे लिए, हमारी सुरक्षा के लिए खतरा बन गए हैं।”

बता दें कि बांग्लादेश का रोहिंग्याओं पर ऐसा बयान तब आया है जब भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर भी वहाँ के दौरे पर थे। एस जयशंकर से मिलने के बाद बांग्लादेश के विदेश मंत्री हसन महमूद ने कहा, “हमने बहुत अच्छी चर्चा की। हमने तमाम मुद्दों समेत क्रॉस बॉर्डर मुद्दे, रोहिंग्या मुद्दे, सुरक्षा मुद्दे समेत कई मुद्दों पर बात की।”

मालूम रहे कि रोहिंग्याओं की संदिग्ध गतिविधियाँ भारत में भी कम नहीं हैं। कुछ साल पहले खबर आई थी कि बांग्लादेश से एक नाव में भरकर 66 रोहिंग्या अंडमान आए थे। पुलिस ने जानकारी होते ही सबको हिरासत में लिया। इनमें 24 पुरुष, 27 औरतें और 15 बच्चे थे। पुलिस ने फौरन उन सबको वापस भेजने की व्यवस्था हुई।

गोरखपुर में करवाई पत्थरबाजी, फिर फर्जी CD दिखा योगी आदित्यनाथ पर ठोक दिया मुकदमा: परवेज परवाज को 7 साल की सजा, रेप में काट रहा है उम्रकैद

उत्तर प्रदेश के वर्तमान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सहित कई बीजेपी नेताओं की छवि धूमिल करने के लिए फर्जी सीडी पेश करने के मामले में गोरखपुर की कोर्ट ने परवेज परवाज को 7 साल की सजा सुनाई है। जुर्माना भी लगाया है। यह मामला 2007 का है। उस समय परवेज ने लोगों को भड़काकर एक वर्ग की दुकानों पर पथराव करवाया था। बाद में फर्जी सीडी पेश कर बीजेपी नेताओं पर माहौल खराब करने का आरोप लगाते हुए कोर्ट में मुकदमा दायर करवाया था।

जानकारी के अनुसार, वर्ष 2007 में जब इराक के तानाशाह सद्दाम हुसैन को फाँसी दी गई तो परवेज ने गोरखपुर भड़काऊ भाषण दिए और मुस्लिम भीड़ इकट्ठी कर शहर में हिन्दुओं की दुकानों पर पत्थरबाजी करवाई थी। इससे पूरे शहर का माहौल खराब हो गया था। इसके बाद उसने गोरखपुर के तत्कालीन सांसद योगी आदित्यनाथ समेत भाजपा नेता शिवप्रताप शुक्ला, राधामोहन दास अग्रवाल और अंजू चौधरी पर भड़काऊ भाषण देने का आरोप लगाते हुए एक फर्जी मामला दर्ज करवाया था।

जाँच में परवेज के दावे सिद्ध नहीं हो सके। न्यायालय ने परवेज से सबूत माँगा तो उसने एक सीडी उपलब्ध करवाई। उसने दावा किया कि इस सीडी में इन नेताओं के भड़काऊ भाषण हैं। इस सीडी को जब फॉरेंसिक जाँच के लिए भेजा गया तो यह फर्जी निकली और पाया गया कि भाषणों से छेड़छाड़ की गई है।

इस मामले में भाजपा के पूर्व एमएलसी स्वर्गीय वाईडी सिंह ने परवेज के विरुद्ध पार्टी नेताओं की छवि धूमिल करने का आरोप लगाते हुए मुकदमा दर्ज करवाया था। इसी से जुड़े मामलों में न्यायिक मजिस्ट्रेट आदर्श श्रीवास्तव ने उसे सजा सुनाई है। एक मामले में उसे पाँच वर्ष और दूसरे में सात वर्ष की सजा सुनाई गई है। दोनों सजाएँ साथ चलेंगी। उसके ऊपर ₹10,000 का जुर्माना भी लगाया गया है।

गौरतलब है कि परवेज पहले से ही दुष्कर्म के एक मामले में जेल में बंद है। उसे कोर्ट ने इस मामले में आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी।

ED ने कोर्ट को दिखाए हेमंत सोरेन के व्हाट्सएप चैट: जमीन के लेनदेन से लेकर ट्रांसफर-पोस्टिंग तक की बातें, तगड़ी कमाई भी

जमीन घोटाले में गिरफ्तार झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं। प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने सोरेन के व्हाट्सएप चैट पीएमएलए कोर्ट को दिखाए हैं। कथित तौर पर इनमें जमीन की लेनदेन से लेकर ट्रांसफर-पोस्टिंग तक का जिक्र है।

रिपोर्ट के अनुसार ये चैट मनी लाॅन्ड्रिंग में गिरफ्तार किए गए हेमंत सोरेन और जमीन घोटाले के सूत्रधार बिनोद सिंह के बीच के हैं। ईडी ने 539 पेज के व्हाट्सएप चैट होने की बात कही है। इनमें से कुछ पन्ने कोर्ट में पेश किए हैं। एजेंसी ने कहा है कि इस चैट में पेपर लीक करने वाले गैंग से मिले पैसे, अधिकारियों के स्थानान्तरण से मिले पैसे और साथ ही सरकारी जमीन के रिकॉर्ड साझा करने की जानकारी है।

NEWS18 के अनुसार ED ने कोर्ट में कहा कि जमीन घोटाले का यह मामला एक अन्य आरोपित भानू प्रताप प्रसाद के यहाँ छापेमारी से प्राप्त जमीन के दस्तावेजों के आधार पर दर्ज किया गया है। यह छापेमारी अप्रैल 2023 में हुई थी। ED को इसमें 11 बक्से भरकर जमीनों के दस्तावेज मिले थे। इसमें 17 जमीन के असली रिकॉर्ड के रजिस्टर शामिल थे। ED ने कहा कि झारखंड में एक जमीन हथियाने वाला सिंडिकेट काम कर रहा था। यह जमीनों से संबधित कागजों में गड़बड़ी करके उन्हें हथिया रहा था।

ED ने यह जानकारी हेमंत सोरेन से पूछताछ के दौरान उनके सामने भी रखी। एजेंसी का कहना है कि हेमंत सोरेन जाँच में सहयोग नहीं कर रहे हैं और स्वयं या खुद से जुड़े व्यक्तियों के जमीनों को हथियाने के मामले में सही तथ्य नहीं बता रहे हैं।

जाँच एजेंसी ने हेमंत सोरेन की उनके करीबी बिनोद सिंह के साथ व्हाट्सएप पर की गई बातचीत का रिकॉर्ड कोर्ट के सामने रखते हुए कहा, “आरोपित (हेमंत सोरेन) के सामने उनकी बिनोद सिंह के साथ हुई बातचीत का ब्यौरा भी रखा गया। यह बातचीत ना सिर्फ आपराधिक है, बल्कि इसमें कई संपत्तियों की जानकारी भी है। आरोपित ने इन बातचीत के रिकॉर्ड पर हस्ताक्षर भी नहीं किए हैं। हालाँकि, उन्होंने बिनोद सिंह के साथ बातचीत स्वीकारी है।”

ED ने कहा, “जिस व्हाट्सएप बातचीत का ब्यौरा दिया गया है उसमें मात्र सम्पत्ति ही नहीं बल्कि ट्रांसफर-पोस्टिंग और सरकारी रिकॉर्ड साझा करने सम्बन्धी जानकारियाँ भी हैं। इससे बड़ी मात्रा में पैसा बनाया गया है उसका लेनदेन किया गया है।” जाँच एजेंसी ED ने इसके साथ ही बिनोद सिंह के झारखंड में पेपर लीक से जुड़े होने का भी आरोप लगाया है।

हेमंत सोरेन पर ED ने अपना मोबाइल भी जाँच के लिए नहीं देने का आरोप लगाया है। गौरतलब है कि हेमंत सोरेन को 31 जनवरी, 2024 को गिरफ्तार किया गया था। कोर्ट ने 5 दिन की रिमांड पर उन्हें भेजा था। अब में उनकी रिमांड 5 दिन और बढ़ा दी गई है। गिरफ्तारी के बाद उन्होंने झारखंड के मुख्यमंत्री पद से इस्तीफ़ा दे दिया था। उनकी जगह चंपई सोरेन मुख्यमंत्री बने हैं।

‘पूनम पांडे को कैंसर जागरूकता अभियान का चेहरा बना रही मोदी सरकार’: स्वास्थ्य मंत्रालय ने किया खंडन, बताया- नहीं बना रहे ब्रांड एंबेसडर

सर्वाइकल कैंसर पर जागरूकता फैलाने के लिए भारत सरकार के राष्ट्रीय अभियान की ब्रांड एंबेसडर पूनम पांडे नहीं होंगी। यह जानकारी स्वास्थ्य मंत्रालय के अधिकारियों ने खुद दी है।

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के अधिकारियों ने बुधवार (7 फरवरी 2024) को कहा कि एक्ट्रेस पूनम पांडे को सर्वाइकल कैंसर पर जागरूकता फैलाने के लिए सरकार के राष्ट्रीय अभियान का ब्रांड एंबेसडर बनाने पर विचार नहीं किया जा रहा है।

बता दें कि इससे पहले सोशल मीडिया पर खबर फैली थी सर्वाइकल कैंसर के लिए पूनम पांडे को जागरूकता अभियान का चेहरा बनवाने के लिए उनकी टीम, मंत्रालय के अधिकारियों से बात कर रही है। हालाँकि अब स्वास्थ्य मंत्रालय ने साफ कर दिया है कि उनका ऐसा कोई विचार नहीं है।

सोशल मीडिया पर फैली खबर

गौरतलब है कि अभिनेत्री पूनम पांडे ने कुछ दिन पहले अपनी मौत की झूठी खबर फैलाकर सबको हैरानी में डाल दिया था। लेकिन एक दिन बाद उन्होंने एक वीडियो डाल बताया था, “मैं आप सभी के साथ कुछ महत्वपूर्ण शेयर करने के लिए मजबूर महसूस कर रही हूँ? मैं यहाँ हूँ, जीवित हूँ। सर्वाइकल कैंसर ने मुझे नहीं मारा, लेकिन दुखद है कि इसने हजारों महिलाओं की जान ले ली है, जो इस बीमारी से निपटने के बारे में ज्ञान की कमी के कारण पैदा हुईं।”

उन्होंने अपने इंस्टा पर वीडियोज डाल दावा किया कि उन्होंने इतना बड़ा कारनामा सिर्फ सर्वाइकल कैंसर के प्रति लोगों को जागरूक करने के लिए किया।

हालाँकि जागरूकता फैलाने के लिए किया गया उनका ये स्टंट लोगों को पसंद नहीं आया। लोगों ने इसकी निंदा की। वहीं पूनम पांडे ने फिर जोर देकर कहा कि उन्होंने ऐसा इसलिए क्योंकि आज सर्वाइकल कैंसर हजारों महिलाओं की जान ले रहा है।

उन्होंने कहा कुछ अन्य कैंसरों के विपरीत सर्वाइकल कैंसर को पूरी तरह से रोका जा सकता है। इसकी कुंजी एचपीवी वैक्सीन और शीघ्र पता लगाने वाले परीक्षणों में निहित है। हमारे पास यह सुनिश्चित करने के साधन हैं कि इस बीमारी से किसी की जान न जाए।

बिहार के डिप्टी CM रहते हुए भी तेजस्वी यादव पीते थे दारू, राजद MLC ने ही स्टिंग में खोल दी थी पोल: अब जाँच की माँग ने पकड़ा जोर

वैसे तो बिहार में शराबबंदी है। पर राजद नेता तेजस्वी यादव उप मुख्यमंत्री रहते हुए भी शराब पीते थे। यह खुलासा एक स्टिंग में उनकी ही पार्टी के विधान पार्षद रहे रामबली सिंह ने किया था। अब जब बिहार में फिर से एनडीए की सरकार बन चुकी है तो इसकी जाँच की माँग ने जोर पकड़ लिया है।

बीजेपी के राज्यसभा सांसद और बिहार के डिप्टी सीएम रहे सुशील मोदी ने इस आरोप की जाँच की माँग की है। उन्होंने कहा है कि बिहार में जब पूर्ण मद्यनिषेध का कानून लागू है, तब पिछली सरकार के समय उप मुख्यमंत्री तेजस्वी प्रसाद यादव पर शराब पीने का आरोप एक गंभीर मामला है। राज्य सरकार को इसकी विस्तृत जाँच करानी चाहिए।

सुशील मोदी ने कहा है, “तेजस्वी यादव के पद पर रहते उनकी ही पार्टी के विधान परिषद सदस्य रामबली सिंह ने यदि आरोप लगाए तो उनके पास कुछ प्रमाण भी होंगे। उन्होंने कहा कि किसी की विधान परिषद सदस्यता समाप्त या बहाल करना सभापति का विशेषाधिकार है, लेकिन शराबबंदी कानून तोड़ने के आरोप की जाँच तो सरकार करा ही सकती है।”

बीजेपी नेता ने कहा है कि बिहार में 2016 से ही शराब पीने, रखने और उसका कारोबार करने पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगा हुआ है। कानून तोड़ने पर आम लोगों को दंडित भी किया जाता है। डिप्टी सीएम रहते हुए शराबबंदी कानून को लागू कराना तेजस्वी यादव की जिम्मेदारी थी। ऐसे में उन पर ही कानून तोड़ने का आरोप लगना कोई सामान्य बात नहीं है।

गौरतलब है कि रामबली सिंह के जिन आरोपों का सुशील मोदी हवाला दे रहे हैं वह दिसंबर 2022 में एक स्टिंग के दौरान सामने आए थे। यह स्टिंग एबीपी न्यूज ने किया था। उस समय बिहार में जहरीली शराब पीने से मौतें हुई थी। स्टिंग ऑपरेशन में रामबली सिंह ने कहा था कि शराबबंदी पर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार किसी की सुनना नहीं चाहते हैं, जबकि सभी लोग मानते हैं कि इस नीति की समीक्षा होनी चाहिए।

रामबली सिंह ने कहा था, “शराबबंदी के बावजूद शराब मिल रहा है। तेजस्वी भी नहीं बोल पाते हैं नीतीश जी के सामने। तेजस्वी खुद दारू पीते हैं तो वो क्यों नहीं चाहेंगे कि दारू मिलनी शुरू हो।” स्टिंग कर रहे रिपोर्टर ने तेजस्वी यादव का नाम सुनने के बाद दोबारा पूछा, “पीते हैं तेजस्वी जी?” इस पर रामबली सिंह ने जवाब दिया, “आधे से ज्यादा मंत्री और विधायक माननीय पीते हैं, आधे से ज्यादा ऑफिसर शराब पीते हैं। बंदी तो यहाँ दिखाने के लिए है। रात में जाकर पता कीजिए कितने ऑफिसरों के यहाँ दारू चल रहा है।”

रामबली सिंह के इन आरोपों पर तब कोई जाँच नहीं हुई थी। हालाँकि, उनके इस बयान के बाद उनसे पार्टी की नाराजगी सामने आई थी। नवम्बर 2023 में उनकी विधान परिषद सदस्यता रद्द करवाने के लिए राजद के सचेतक सुनील सिंह ने विधान परिषद अध्यक्ष को आवेदन दिया था। पार्टी ने विधान परिषद अध्यक्ष को दिए गए अपने आवेदन में पार्टी विरोधी गतिविधियों में शामिल होने के आरोप रामबली सिंह पर लगाए थे।

रामबली सिंह ने इस सम्बन्ध में अपनी सफाई भी विधान परिषद में पेश की थी, लेकिन मंगलवार (6 फरवरी, 2024) को उनकी विधान परिषद् सदस्यता रद्द कर दी गई। सदस्यता रद्द किए जाने के बाद से वह चर्चा में हैं और उनके द्वारा तेजस्वी यादव पर लगाए गए आरोपों की जाँच की माँग तेज हो गई है।

‘कुत्तों का वक्त’ वाले सलमान अजहरी को बेल, पर राहत नहीं: अब कच्छ हेट स्पीच में हो सकती है गिरफ्तारी, आतंकी लिंक के भी दावे

जूनागढ़ में भड़काऊ भाषण देने वाले मुफ्ती सलमान अजहरी को गुजरात की जूनागढ़ कोर्ट ने जमानत दे दी। हालाँकि, इससे उसे राहत नहीं मिली क्योंकि कच्छ के समखियाली में भी उसके खिलाफ एफआईआर दर्ज हुई है जिसके कारण कच्छ पुलिस उसे पकड़ने की तैयारी कर रही है।

जानकारी के मुताबिक, सलमान अजहरी की 1 दिन की रिमांड पूरी होने के बाद उसको जूनागढ़ कोर्ट में पेश किया गया था, जहाँ कोर्ट ने उसे जमानत दे दी। पर, चूँकि उसके खिलाफ एक एफआईआर कच्छ में भी दर्ज है इसलिए उसे रिहा करने की बजाय कच्छ पुलिस को सौंपा जाएगा।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, कच्छ पुलिस ट्रांसफर वारंट मिलने के बाद पाने के बाद अजहरी को हिरासत में लेगी। तब तक जूनागढ़ के बाद अजहरी को राजकोट जेल में रखा जाएगा।

गौरतलब हो कि मुफ्ती अज़हरी ने जिस दिन जूनागढ़ में अपना भाषण दिया था, उसी दिन उसने कच्छ के समखियाली में भी एक कार्यक्रम को संबोधित किया था। इस कार्यक्रम में भी उसने भड़काऊ शब्द कहे थे। इसके बाद पुलिस ने मुफ्ती और कार्यक्रम के आयोजक के खिलाफ एफआईआर दर्ज की। फिर बुधवार (फरवरी 7, 2024) को आयोजक ममद खान मुर को गिरफ्तार कर लिया गया।

बताया जा रहा है कि आयोजक की गिरफ्तारी के बाद कच्छ पुलिस की एक टीम जूनागढ़ आएगी और मुफ्ती अज़हरी को हिरासत में लेगी। इसके बाद उसे समखियाली में दर्ज अपराध के मामले में गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश किया जाएगा और रिमांड की माँग की जाएगी। जहाँ मुफ्ती को जमानत के लिए नए सिरे से आवेदन करना होगा।

मुस्लिम संगठन के अध्यक्ष ने की अजहरी की गिरफ्तारी का स्वागत

सलमान अजहरी की गिरफ्तारी को लेकर सूफी ख्वानखाह एसोसिएशन के अध्यक्ष सूफी मोहम्मद कौसर हसन का भी बयान आया। उन्होंने इस कार्रवाई की तारीफ करते हुए बताया कि अजहरी सांप्रदायिक तनाव भड़काने और मुस्लिम युवाओं के बीच मजहबी नफरत को बढ़ावा देने में शामिल था। उन्होंने सलमान अजहरी पर आरोप लगाया कि वो तबलीगी जमात के पैटर्न को फॉलो करके हिंदू-मुस्लिम करता है। इसके अलावा वो ‘गजवा-ए-हिंद’ प्रोजेक्ट की गतिविधियों में भी संलिप्त है।

उन्होंने आरोप लगाया कि अजहरी ने अपनी तालीम मिस्र में ली है और हमास जैसा तंत्र भारत में लाना चाहता है। उन्होंने ये भी बताया कि अजहरी के विरुद्ध तो हुबली और धारवाड़ में दंगे करवाने के मामले में भी केस दर्ज है। उन्होंने गुजरात पुलिस की कार्रवाई को सराहते हुए बताया कि मजहब के नाम पर घृणा फैलाने वाले बर्दाश्त नहीं किए जाने चाहिए।

उन्होंने गुजरात के सीएम, गृहमंत्री और डीजीपी को अपील को पत्र भी लिखा है। उन्होंने ये भी अपील की है कि अजहरी का पाकिस्तान कनेक्शन पर जाँच की जाए। उन्होंने इस बात पर जोर दिया है कि जो लोग भारत में रहकर पाकिस्तानी आतंकियों को समर्थन देते हैं उनपर नजर रखनी चाहिए।

बता दें कि जहाँ सूफी ख्वानखाह के अध्यक्ष ने अजहरी के खिलाफ ऐसा दावा किया है वहीं इंडिया टीवी की रिपोर्ट कह रही है कि गुजरात एटीएस हेट स्पील मामले में पकड़े गए मुफ्ती के खिलाफ आतंकी एंगल से जाँच कर सकती है।

सलमान अजहरी की गिरफ्तारी

मालूम हो कि 31 जनवरी 2024 को जूनागढ़ में मुस्लिम समुदाय के एक कार्यक्रम में मौलाना मुफ्ती सलमान अज़हरी ने भड़काऊ भाषण दिया था, जिसका वीडियो वायरल हो गया था। इसके बाद पुलिस ने मामले का संज्ञान लेते हुए कार्रवाई शुरू की और अज़हरी और 2 आयोजकों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की। आयोजकों ने कार्यक्रम को नशामुक्ति का कार्यक्रम बताते हुए अनुमति माँगी थी।

हालाँकि भाषण में अजहरी ने “अभी तो कर्बला का मैदान बाकी है” और “आज कुत्तों का वक़्त है, कल हमारा दौर आएगा” जैसी बातें कहते दिखे। ऑपइंडिया ने इस भाषण पर एक विस्तृत रिपोर्ट की थी। बताया था कि एक 53 मिनट की स्पीच में अजहरी ने कितना जहर उगला।

हमारी रिपोर्ट के बाद गुजरात एटीएस ने इस पर एक्शन लिया। उन्होंने पहले आयोजकों को अरेस्ट किया उसके बाद सलमान अजहरी को लेने मुंबई गए, जहाँ मुस्लिम कट्टरपंथियों ने थाने का घेराव भी किया। हालाँकि पुलिस ने सूझ-बूझ से अजहरी से उन्हें समझाने को कहा और बवाल शांत होने के बाद वह अजहरी को हिरासत में लेकर जूनागढ़ लाए।