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केजरीवाल हाजिर हों…: प्रवर्तन निदेशालय (ED) की शिकायत को बाद दिल्ली की कोर्ट ने AAP चीफ को तलब किया, समन का नहीं दे रहे थे जवाब

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को कोर्ट से करारा झटका लगा है। प्रवर्तन निदेशालय (ED) द्वारा पूछताछ के लिए लगातार बुलाए जाने के बाद सीएम केजरीवाल सहयोग नहीं कर रहे थे। इसके बाद ED ने दिल्ली के राऊज एवेन्यू कोर्ट में इसकी शिकायत की थी। अब कोर्ट ने उन्हें 17 फरवरी को कोर्ट में पेश होने के लिए कहा है। वहीं, एक अन्य मामले में भी कोर्ट ने हाजिर होने के लिए कहा है।

दरअसल, प्रवर्तन निदेशालय ने शराब घोटाले में पूछताछ के लिए सीएम अरविंद केजरीवाल को पाँच बार समन भेजा था। प्रवर्तन निदेशालय ने उन्हें पूछताछ के लिए 2 नवंबर 2023 और 21 दिसंबर 2023 के बाद इस साल 3 जनवरी, 18 जनवरी और 2 फरवरी 2024 को पूछताछ के लिए बुलाया था। हालाँकि, वे पूछताछ में कभी सहयोग नहीं किए।

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने ईडी द्वारा भेजे गए समन को राजनीतिक साजिश बताते रहे हैं। वे ये भी सवाल करते रहे हैं कि एक मुख्यमंत्री को ईडी किस हैसियत से पूछताछ के लिए बुला रही है। अरविंद केजरीवाल कहते रहे हैं कि उन्हें गिरफ्तार करने की साजिश की जा रही है, ताकि वे लोकसभा चुनावों में अपनी पार्टी AAP के लिए चुनाव प्रचार ना कर सकें।

लगातार पाँच बार समन को नजरअंदाज करने के बाद आखिरकार प्रवर्तन निदेशालय ने 3 फरवरी 2024 को कोर्ट का रूख किया। इसके बाद राऊज एवेन्यू कोर्ट की अतिरिक्त मुख्य मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट दिव्या मल्होत्रा ने मामले का संज्ञान लिया और उन्हें 17 फरवरी 2024 को अदालत में पेश होने के लिए समन जारी किया है।

बता दें कि प्रवर्तन निदेशालय के समन भेजने से पहले सीबीआई भी 16 अप्रैल 2023 को अरविंद केजरीवाल से पूछताछ कर चुकी है। उस दौरान उनसे 56 सवाल किए गए थे। वहीं, पार्टी की ओर से जैस्मीन शाह ने कहा कि कोर्ट के ऑर्डर का अध्ययन किया जाएगा। उन्होंने कहा कि इसके बाद कानून के मुताबिक कदम उठाएँगे और कोर्ट को बताएँगे ED के सभी समन कैसे गैर-कानूनी थे।

वहीं, यूट्यूबर ध्रुव राठी के यूट्यूब वीडियो को दोबारा ट्वीट करने के मामले में सीएम केजरीवाल को राऊज कोर्ट ने पेशी से छूट दे दी है। कोर्ट ने उन्हें 29 फरवरी 2024 को अदालत में पेश होने का निर्देश दिया है। दरअसल, सीएम केजरीवाल ने कोर्ट में पेशी से छूट माँगी थी। उनके वकील ने कहा था कि दिल्ली का बजट सेशन शुरू होने वाला है, जिसकी वजह से वे व्यस्त हैं। इसलिए उन्हें पेशी से छूट दी जाए।

इससे पहले दिल्ली उच्च न्यायालय ने सोमवार (5 फरवरी 2024) को यूट्यूबर ध्रुव राठी के वीडियो को रीट्वीट करने को लेकर दायर आपराधिक मानहानि मामले को रद्द करने से इनकार कर दिया था। दरअसल, ध्रुव राठी ने ‘बीजेपी आईटी सेल पार्ट 2’ शीर्षक से वीडियो वीडियो बनाया था।

नए नाम और पहचान की कश्मकश में फँसा शरद पवार गुट तो अजित पवार ने एनसीपी ऑफिस और अन्य संपत्तियों पर पेश कर दिया दावा: कहाँ तक जाएगी ये लड़ाई?

चुनाव आयोग ने मंगलवार (06 फरवरी 2024) को अजित पवार गुट को राष्ट्रवादी कॉन्ग्रेस पार्टी (एनसीपी) का असली दावेदार मान लिया और शरद पवार गुट को नए नाम और पहचान पर दावा करने के लिए आज (07 फरवरी 2024) का वक्त दिया था। इस दौरान शरद पवार गुट ने तीन नाम चुनाव आयोग को भेजे थे, जिसमें से नेशनलिस्ट कॉन्ग्रेस पार्टी-शरदचंद्र पवार नाम उनकी पार्टी को मिल गया है। इन नामों पर चर्चा के बीच ही ये खबर सामने आई कि अब अजित पवार गुट ने एनसीपी के कार्यालय और अन्य संपत्तियों पर दावेदारी करने की तैयारी कर ली है।

शरद पवार गुट ने तय किए ये तीन नाम

अपनी पार्टी का नाम और सिंबल छिनने के बाद शरद पवार की पार्टी की ओर से चुनाव आयोग को तीन नाम भेजे गए थे। केंद्रीय चुनाव आयोग को शरद पवार की पार्टी की ओर से भेजे गए इन नामों में नेशनलिस्ट कॉन्ग्रेस पार्टी-शरदचंद्र पवार, नेशनलिस्ट कॉन्ग्रेस पार्टी-शरद पवार और एसीपी -शरद पवार नाम शामिल थे, जिसमें से चुनाव आयोग ने पार्टी की पसंद के पहले नाम नेशनलिस्ट कॉन्ग्रेस पार्टी-शरदचंद्र पवार पर मुहर लगा दी। अब शरद पवार गुट महाराष्ट्र में राज्यसभा की 6 सीटों के लिए होने वाले चुनाव में अपने नए नाम और नई पहचान (चुनाव निशान) के साथ चुनाव में हिस्सा ले सकेगा। चुनाव आयोग ने इस बारे में शरद पवार को सूचना भी दे दी है।

चुनाव आयोग द्वारा जारी किया गया पत्र

अजित पवार गुट ने ठोकी एनसीपी की संपत्तियों पर दावेदारी

इस बीच, इंडिया टुडे ने सूत्रों के हवाले से बताया है कि अजित पवार गुट आधिकारिक तौर पर एनसीपी के कार्यालय समेत अन्य संपत्तियों पर अपनी दावेदारी करने चल रहा है। अजित पवार गुट का कहना है कि इस पार्टी कार्यालय को सरकार की तरफ से दिया गया है, खुद इसे पार्टी ने नहीं बनाया है। ऐसे में आधिकारिक तौर पर पार्टी कार्यालय और अन्य संपत्तियों पर एनसीपी की आधिकारिक इकाई की दावेदारी बनती है। अजित पवार गुट यही बात सामने रखने वाला है।

शरद पवार गुट से पहले सुप्रीम कोर्ट पहुँच गया अजित पवार गुट

बता दें कि अजित पवार गुट को चुनाव आयोग द्वारा असली एनसीपी बताए जाने के बाद शरद पवार गुट ने कहा था कि वो सुप्रीम कोर्ट में चुनाव आयोग के फैसले को चुनौती देगा। शरद पवार गुट ने ये दावा भले किया कि वो सुप्रीम कोर्ट पहुँचेगा, लेकिन मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया जा रहा है कि शरद पवार गुट से पहले ही अजित पवार गुट सुप्रीम कोर्ट में पहुँच गया है। अजित पवार गुट ने सुप्रीम कोर्ट में कैविएट (खास याचिका) दाखिल की है कि शरद पवार गुट की तरफ से किए गए किसी भी दावे पर वो तब तक निष्कर्ष पर न पहुँचे, जब तक अजित पवार गुट भी अपनी बात सुप्रीम कोर्ट में न कह ले।

बता दें कि चुनाव आयोग ने मंगलवार (06 फरवरी 2024) को चुनाव आयोग ने एनसीपी को लेकर चल रही लड़ाई पर विराम लगा दिया था। आयोग ने अजित पवार की अगुवाई वाले एनसीपी के धड़े को ही असली माना। एनसीपी का चुनाव निशान घड़ी अब अजित पवार वाला गुट इस्तेमाल करेगा। चुनाव आयोग का फैसला ऐसे वक्त पर आया, जब महाराष्ट्र विधानसभा स्पीकर राहुल नार्वेकर को 15 फरवरी तक एनसीपी विधायकों की सदन की सदस्यता पर अयोग्यता को लेकर अपना फैसला सुनाना है।

‘आरक्षण विरोधी’ नेहरू से लेकर ‘नाॅनस्टार्टर’ राहुल तक राज्यसभा में PM मोदी ने काॅन्ग्रेस को धोया, आंबेडकर से लेकर केसरी तक का अपमान दिलाया याद

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बुधवार (7 फरवरी 2024) को राज्यसभा में काॅन्ग्रेस पर जमकर बरसे। उनके शब्दबाण से जवाहर लाल नेहरू से लेकर राहुल गाँधी तक कोई नहीं बचा। नेहरू के आरक्षण विरोधी चिट्ठी का जिक्र किया तो राहुल गाँधी को ‘नाॅनस्टार्टर’ बताया। भीमराव आंबेडकर से लेकर सीताराम केसरी तक के अपमान की याद काॅन्ग्रेस को दिलाई। साथ ही 2024 के आम चुनावों में बीजेपी नेतृत्व वाले एनडीए के 400 से अधिक सीट जीतने की भविष्यवाणी को दोहराया।

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रताव पर चर्चा का प्रधानमंत्री जवाब दे रहे थे। इससे पहले लोकसभा में भी उन्होंने काॅन्ग्रेस की कारगुजारियों को गिनाते हुए कहा था कि बीजेपी को कम से कम 370 सीटें इस बार आएँगी। साथ ही एनडीए के 400 पार जाने की भविष्यवाणी की थी।

राज्यसभा में अपने संबोधन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आरक्षण को लेकर देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू को घेरा। उन्होंने नेहरू की आरक्षण विरोधी चिट्ठी का जिक्र किया, जो उन्होंने राज्यों के मुख्यमंत्री को लिखे थे। इस चिट्ठी में नेहरू ने लिखा था, “मैं आरक्षण के खिलाफ हूँ। नौकरियों में आरक्षण के खिलाफ तो पूरी तरह।”

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि आज की काॅन्ग्रेस ही नहीं, बल्कि देश के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू भी आरक्षण के खिलाफ थे। अगर बाबा साहब आंबेडकर नहीं होते तो देश के वंचित वर्गों को काॅन्ग्रेस कभी आरक्षण नहीं देती। पीएम मोदी ने कहा, “मैं आदरपूर्वक नेहरू जी को बहुत याद करता हूँ। एक बार नेहरू जी ने मुख्यमंत्रियों को चिट्ठी लिखी थी। उन्होंने लिखा कि मैं किसी भी आरक्षण को पसंद नहीं करता और खासकर नौकरी में आरक्षण तो कतई ही नहीं। मैं ऐसे किसी भी कदम के खिलाफ हूँ जो अकुशलता को बढ़ावा दे, जो दोयम दर्जे की ओर ले जाएँ।”

काॅन्ग्रेस ने आरक्षण से लोगों को वंचित रखा

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि कॉन्ग्रेस ने आरक्षण से लोगों को वंचित रखा। पीएम मोदी ने जम्मू-कश्मीर का उदाहरण देते हुए कहा कि कॉन्ग्रेस ने बीते सात दशकों तक जम्मू-कश्मीर में ओबीसी, एसटी और एससी आरक्षण से वहाँ के लोगों को वंचित रखा। पीएम मोदी ने कहा कि केंद्र सरकार ने जम्मू-कश्मीर की ऐसी हालत कर दी थी कि वहाँ तमाम लोग सात दशक से रह रहे थे, लेकिन उनको डोमिसाइल का अधिकार नहीं दिया गया। हमारी सरकार ने पूरे देश की तरह जम्मू-कश्मीर के लोगों को भी समान अधिकार दिए।

बाबा साहब को भारत रत्न नहीं देना चाहती थी कॉन्ग्रेस: पीएम मोदी

राज्यसभा में बोलते हुए पीएम मोदी ने कहा कि कॉन्ग्रेस ने बाबा साहब के विचारों को खत्म करने के लिए कोई कसर नहीं छोड़ी। इन्हें भारत रत्न देने की भी तैयारी नहीं थी। बीजेपी के समर्थन से बनी सरकार में बाबा साहब को भारत रत्न मिला। पीएम मोदी ने कहा कि अति पिछड़ी समुदाय से आने वाले सीताराम केसरी को उठाकर फुटपाथ पर फेंक दिया गया, वो वीडियो भी सार्वजनिक तौर पर उपलब्ध है और पूरे देश ने उसे देखा है।

सैम पित्रोदा को भी निशाने पर लिया

पीएम मोदी ने सैम पित्रोदा पर हमला बोलते हुए कहा कि इनके एक मार्गदर्शक अमेरिका में बैठे हैं, जो पिछले चुनाव में ‘हुआ तो हुआ’ के लिए फेमस हो गए थे। कॉन्ग्रेस के परिवार के काफी करीबी हैं। उन्होंने अभी-अभी बाबा साहब के योगदान को छोटा करने का भरपूर प्रयास किया।

राहुल गाँधी नॉन-स्टार्टर

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राहुल गाँधी को ‘युवराज’ और ‘नॉन स्टार्टर’ करार दिया। पीएम मोदी ने कहा, “अब इन्होंने अपने युवराज को एक स्टार्टअप बनाकर दिया है। अभी वो नॉन-स्टार्टर है। न तो वो लिफ्ट हो रहा है और न ही लॉन्च हो रहा है।”

पीएम मोदी ने बताया राज्य का महत्व

इस दौरान पीएम मोदी ने विभाजन की राजनीति पर भी जमकर हमला बोला। पीएम मोदी ने कहा कि हिंदुस्तान के किसी भी कोने में दर्द हो तो पीड़ा सबको होना चाहिए। अगर शरीर का एक अंग काम नहीं करता है तो पूरा शरीर अपंग माना जाता है। देश का कोई अंग विकास से वंचित रह जाएगा तो भारत विकसित नहीं हो पाएगा। राजनीतिक स्वार्थ के लिए देश को तोड़ने वाली भाषाएँ बोली जा रही हैं।

मोदी 3.0 विकसित भारत की नींव मजबूत करने के लिए पूरी शक्ति लगा देगी

पीएम मोदी ने कहा कि मोदी 3.0 विकसित भारत की नींव मजबूत करने के लिए पूरी शक्ति लगा देगी। उन्होंने कहा, “अगले 5 साल में डॉक्टरों की संख्या कई गुना बढ़ेगी। मेडिकल कॉलेजों की संख्या बढ़ेगी। इलाज सस्ता और सुलभ हो जाएगा। अगले 5 साल में हर गरीब के घर नल से जल का कनेक्शन होगा। गरीबों को पीएम आवास दिया जाएगा, कोई वंचित नहीं रहेगा। अगले 5 साल में सोलर पॉवर से बिजली बिल जीरो किया जाएगा। अगर ठीक से काम करेंगे, तो बिजली बनाकर लोग कमाई भी करेंगे। अगले पाँच साल में देश में पाइप से गैस कनेक्शन का नेटवर्क बनाने का काम किया जाएगा। हमारे युवा स्टार्टअप, यूनिकॉर्न की संख्या लाखों में होने वाली है। कई टियर-2, टियर-3 शहर उभरेंगे। रिसर्च फंडिंग जो सरकार ने जारी की है, अगले पाँच साल में रिकॉर्ड पेटेंट जारी होंगे।”

युवाओं को विदेश भेजने की जगह भारत में ही उच्च शिक्षा के स्तर को उठाया जाएगा। अगले पाँच साल में हर इंटरनेशनल स्पोर्ट्स कॉम्प्टिशन में भारत का तिरंगा लहराएगा। पीएम मोदी ने कहा कि अगले 5 साल में पब्लिक ट्रांसपोर्ट पूरी तरह से बदल जाएगा। देश वंदे भारत का विस्तार भी देखेगा और बुलेट ट्रेन भी देखेगा। देश हर क्षेत्र में आत्मनिर्भर होता नजर आएगा। अगले पाँच साल में भारत का सेमीकंडक्टर पूरी दुनिया में होगा।

पीएम मोदी ने कहा कि अपनी उर्जा जरूरतों के लिए लाखों-करोड़ों डॉलर का तेल मँगाता है, हम अगले पाँच सालों में दूसरों पर निर्भरता कम करने की कोशिश करेंगे। इसके लिए हम ग्रीन हाईड्रोजन अभियान चलाएँगे, जिससे उर्जा जरूरतें पूरी होंगी। हम 20 प्रतिशत इथेनॉल का इस्तेमाल करेंगे, जिससे किसानों को फायदा होगा। हम एडिबल ऑयल यानी खाने के तेल मँगाते हैं, उसे कम करेंगे। हम नेचुरल फार्मिंग के क्षेत्र में आगे बढ़ेंगे।

पीएम ने मोदी 3.0 को लेकर तमाम योजनाओं को भी सामने रखा। पीएम मोदी ने कहा कि एआई से लेकर डिजिटल इंडिया तेजी से आगे बढ़ेगा। भारत में तेजी से तकनीक का इस्तेमाल होगा। स्पेस के क्षेत्र में अगले पाँच साल में हम नई ऊँचाइयों को छुएँगे। पीएम मोदी ने कहा कि ग्रास-रूट इकोनॉमी में तेजी से बदलाव होगा। तीन करोड़ लखपति दीदी और 10 करोड़ महिलाएँ जो स्वयंसेवी समूहों से जुड़ी हैं, वो भारत को बदल देंगी।

पीएम मोदी ने कहा कि विकसित भारत हमारी कमिटमेंट है। हमारी हर साँस विकसित भारत के लिए समर्पित है। उसी विश्वास के साथ हम चलते रहे हैं, चल रहे हैं और चलते रहेंगे। ये समय देश के स्वर्णकाल के रूप में सदियों तक जाना जाएगा। देश तेज गति से बदल रहा है। जीवन के हर क्षेत्र में भारतीय नई ऊँचाई पर पहुँच रहे हैं।

थाने के बाहर मुस्लिम भीड़, धमकी सिर तन से जुदा, हाथ-पैर काटने की… SHO आनंद सिंह ठाकुर अकेले भिड़े, सोशल मीडिया पर कहा जा रहा- रियल सिंघम

मध्य प्रदेश के दमोह में कट्टरपंथी मुस्लिमों की एक भीड़ ने चार हिन्दू युवकों के हाथ-पैर और सिर काटने की धमकी दी गई। यह धमकी पुलिस के सामने मुस्लिमों की भीड़ इकट्ठा कर के दी गई। यहाँ मौजूद पुलिसकर्मियों से भी अभद्रता की गई और काफी बवाल काटा गया। पुलिस ने इस मामले में केस दर्ज कर लिया है। इसका एक वीडियो भी सामने आया है, जिसमें सैकड़ों की संख्या में जुटे कट्टरपंथियों के बीच इंस्पेक्टर आनंद सिंह ठाकुर पूरी निर्भयता के साथ भीड़ को चेतावनी देते नजर आ रहे हैं।

यह पूरा मामला मध्य प्रदेश के दमोह का है, जहाँ रविवार (3 फरवरी 2024) को चार हिन्दू युवकों का अंसार खान नाम के एक मुस्लिम दर्जी से कुछ विवाद हो गया। इस विवाद को देखकर एक इमाम हाफिज रिजवान खान यहाँ पहुँचा। बताया गया कि युवकों के कपड़े समय पर सिलकर नहीं दिए गए, जिसके कारण उनका आपस में विवाद हो गया।

यह विवाद इतना बढ़ गया कि मारपीट तक की नौबत आ गई। दावा यह भी किया गया है कि इस दौरान दर्जी अंसार खान के साथ-साथ इमाम हाफिज रिजवान खान की भी पिटाई कर दी गई। यहाँ तक कि मुस्लिम पक्ष इमाम की बाइक तोड़ने का भी आरोप उन युवकों पर लगा रही है। आखिरकार दर्जी और इमाम ने मामले की शिकायत नजदीकी पुलिस थाने में कर दी।

शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने FIR दर्ज करके आगे की जाँच शुरू कर दी। पुलिस जब तक इन युवकों पर एक्शन लेती, तब तक इमाम की पिटाई की अफवाह शहर भर में फैला दी गई। इसके बाद सैकड़ों मुस्लिमों की भीड़ कोतवाली थाने के बाहर इकट्ठा हो गई। वे पुलिस पर 24 घंटे में उन्हें गिरफ्तार करने का दबाव बनाने लगे। इस दौरान यह भीड़ पुलिस और हिन्दुओं को धमकियाँ देने लगी।

इसी बीच एक मुस्लिम व्यक्ति अकरम राईन ने यहाँ पर लाउडस्पीकर लगाकर मुस्लिमों को भड़काना शुरू कर दिया। उसने कहा कि यदि पुलिस हिन्दू युवकों पर कार्रवाई नहीं करती तो मुस्लिम खुद ही उनके हाथ-पैर काट देंगे। उसने इन हिंदू युवकों का ‘सर तन से जुदा’ करने की भी धमकी दी। इस दौरान भीड़ अल्लाह-हू-अकबर और नारा-ए-तकबीर जैसे आपत्तिजनक नारे लगाने लगी।

जब पुलिस थाने SHO आनंद सिंह ठाकुर ने भीड़ में अकेले घुसकर भड़काने वाले युवक से माइक लिया और उद्दंडता पर उतरे मुस्लिमों को कानून प्रक्रिया में बाधा डालने की चेतावनी देने लगे। इसके बाद राईन की जहरीले बयानबाजी से भड़के मुस्लिम उनके धक्का-मुक्की करने की कोशिश करने लगे। हालाँकि, SHO आनंद सिंह ठाकुर के सख्त रूप को देखकर भीड़ उन्हें अपने दबाव में नहीं ले सकी।

जब उन्मादी भीड़ थाने पर पहुँचकर चिल्लाती है और हाथ-पैर काटने की धमकी देती है तो SHO आनंद सिंह ठाकुर अकेले ही उन्मादी भीड़ में घुस जाते हैं। वे कहते हैं, “मैं अकेले आ गया हूँ। मैं अकेला खड़ा होता हूँ, हाथ लगाओ कोई। ये कौन सी बात होती है कि हाथ काट देंगे, जब मैं बोल रहा हूँ कि हम कार्रवाई करेंगे।”

SHO आनंद सिंह ठाकुर ने भीड़ को समझाया और साथ ही हंगामा कर रहे मुस्लिम युवकों को शांत रहने और हाथ-पैर काटने की धमकी देने वाले को चेतावनी दी। इस पूरे घटनाक्रम के कई वीडियो सामने आए हैं। SHO आनंद सिंह ठाकुर की बहादुरी की सोशल मीडिया पर जमकर तारीफ की जा रही है। उन्हें रियल सिंघम कहा जा रहा है।

दमोह कोतवाली SHO आनंद सिंह ठाकुर ने बताया कि अकरम राइन के खिलाफ आर्म्स एक्ट समेत कई मामले दर्ज हैं। माइक से भड़काऊ भाषण देने के बाद पुलिस ने उसके खिलाफ भारतीय दंड विधान की धारा 153ए, 141, 147 के तहत केस दर्ज किया है। SHO ने बताया कि जब पुलिस ने अकरम को गिरफ्तार किया तो उसके पास से एक पिस्टल भी जब्त की गई।  

पुलिस ने इस पूरे विवाद में 4 FIR दर्ज की है। जिन हिन्दू युवकों पर दर्जी और इमाम की पिटाई का आरोप है, उन पर भी मामला दर्ज किया गया है। वहीं, हंगामा मचाने वाली मुस्लिम भीड़ के 40 अज्ञात लोगों के विरुद्ध भी पुलिस ने मामला दर्ज किया है। हाथ-पैर काटने की धमकी देने वाले अकरम राईन को पुलिस ने गिरफ्तार भी कर लिया है।

अकरम पर रासुका लगाई गई है। इसके अलावा पुलिस ने आरिफ, राशिद, समीर और मोहम्मद इंतशार को भी गिरफ्तार किया है। फुटेज के आधार पर दमोह में दंगा भड़काने और हंगामा काटने वालों की पहचान की जा रही है। इस मामले का मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने भी संज्ञान लिया है और इस घटना के मैजिस्ट्रेट जाँच के आदेश दिए हैं।

जो मजबूत और समृद्ध उन्हें SC/ST आरक्षण से क्यों नहीं किया जा रहा बाहरः सुप्रीम कोर्ट ने उठाया सवाल, कहा- जिन्हें जरूरत, उन्हें मिले लाभ

राज्य सरकारें क्या एससी/एसटी आरक्षण में शामिल जातियों का उप-वर्गीकरण कर सकती कर सकती है या नहीं, इसको लेकर सुप्रीम कोर्ट की 7 सदस्यीय संवैधानिक बेंच मंगलवार (06 फरवरी 2024) से कर रही है। सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि एससी-एसटी आरक्षण का लाभ लेने वाले मजबूत जातियों को उप-समूह के तौर पर चिन्हित करके बाहर निकाला जा सकता है।

सुप्रीम कोर्ट की 7 सदस्यीय संवैधानिक पीठ की अगुवाई CJI डीवाई चंद्रचूड़ कर रहे हैं। इस पीठ में जस्टिस बीआर गवई, जस्टिस विक्रम नाथ, जस्टिस बेला एम त्रिवेदी, जस्टिस पंकज मिथल, जस्टिस मनोज मिश्रा और जस्टिस सतीशचंद्र शर्मा शामिल हैं। यह पीठ एससी-एसटी आरक्षण के भीतर वर्गीकरण की अनुमति के संदर्भ में सुनवाई कर रही है।

साल 2020 में पंजाब राज्य बनाम दविंदर सिंह मामले में 5 सदस्यीय पीठ ने फैसला दिया था। अब उसे 7 सदस्यीय संवैधानिक पीठ के पास भेजा गया है। उस फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने साल 2005 के ईवी चिन्नैया बनाम आंध्र प्रदेश राज्य (2005) 1 एससीसी 394 के फैसले पर पुनर्विचार करने की जरूरत बताई थी। उस दौरान कहा गया था कि एससी-एसटी वर्ग में वर्गीकरण की जरूरत नहीं है।

सुनवाई दे दौरान सुप्रीम कोर्ट ने 6 फरवरी को कहा कि जो जाति समृद्ध हैं, उन्हें सामान्य वर्ग के साथ प्रतिस्पर्धा क्यों नहीं करना चाहिए? जस्टिस नाथ ने कहा, “कुछ उपजातियों ने अच्छा किया है और वो आगे बढ़ी हैं। ऐसे में उन्हें क्यों नहीं बाहर (रिजर्वेशन लिस्ट से) किया जाए? वो जातियाँ आरक्षण से बाहर आएँ और सामान्य वर्ग के साथ प्रतिस्पर्ध करें। अब वो वहाँ क्या कर रही हैं?”

जस्टिस बीआर गवई ने आगे कहा कि मजबूत हो चुकीं उप-जातियों को रिजर्वेशन से बाहर आना चाहिए, ताकि अन्य पिछली उपजातियों या सर्वाधिक पिछड़ी जातियों को भी आरक्षण का मौका मिल सके। उन्होंने कहा, “जिन पिछड़ी उप-जातियों को मौका नहीं मिला है, चलिए उन्हें मौका देते हैं।”

जस्टिस गवई ने आगे कहा, “गाँव में रहने वाला कोई व्यक्ति अगर आईएएस-आईपीएस बन जाता है तो उसके बच्चों को गाँव में रहने वाले अन्य बच्चों की तरह की कठिनाइयाँ नहीं झेलनी पड़ती। इसके बावजूद वो परिवार पीढ़ी दर पीढ़ी आरक्षण का लाभ पाता रहता है।” उन्होंने यह भी कहा कि ये संसद को तय करने दें कि ‘मजबूत और प्रभावी’ समूहों को आरक्षण की सीमा से बाहर निकालना है या नहीं।

सीजेआई डीवाई चंद्रचूड़ की अगुवाई वाली सात सदस्यीय संविधान पीठ पंजाब अनुसूचित जाति और पिछड़ा वर्ग (सेवाओं में आरक्षण) अधिनियम 2006 की वैधता का भी अध्ययन कर रही है। यह अधिनियम अनुसूचित जातियों (एससी) के लिए तय आरक्षण के तहत सरकारी नौकरियों में ‘मजहबी सिख’ और ‘वाल्मीकि’ समुदायों को 50 प्रतिशत आरक्षण और प्रथम वरीयता देती है।

दरअसल, CJI चंद्रचूड़ की अगुवाई वाली यह पीठ इससे संबंधित 23 याचिकाओं को एक साथ करके इस पर सुनवाई कर रही है। इसमें सुप्रीम कोर्ट द्वारा साल 2004 में दिए गए फैसले की समीक्षा भी है। इसके अलावा, पंजाब सरकार द्वारा जारी एक प्रमुख याचिका भी शामिल है। उस याचिका में पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट के साल 2010 के फैसले को चुनौती दी गई है।

हाई कोर्ट ने वाल्मीकि और मजहबी सिखों को एससी वर्ग का 50 प्रतिशत आरक्षण देने के प्रावधान को गलत बताया था। हाई कोर्ट ने ईवी निन्नैया बनाम आंध्र प्रदेश राज्य के मामले में सुप्रीम कोर्ट के साल 2004 के फैसले को आधार बनाकर यह फैसला दिया था। सुप्रीम कोर्ट ने साल 2004 में अपने फैसले में एससी-एसटी के भीतर उप-जाति विभाजन को गलत बताया था।

इस मामले को पंजाब सरकार ने साल 2011 में सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी और कहा था कि आंध्र प्रदेश का मामला उस पर लागू नहीं होता। चूँकि हरियाणा और पंजाब में अनुसूचित जनजाति की आबादी नहीं है, इसलिए उनके हिस्से का आरक्षण मजहबी सिखों और वाल्मीकि समुदाय को दी गई थी।

Exclude the strong sub-castes taking advantage of SC-ST reservation says Supreme Court

जज श्रीदेवी की हत्या के लिए उकसाने वाला मुहम्मद हादी गिरफ्तार, आतंकियों को मौत की सजा सुनाने के बाद से हैं इस्लामी कट्टरपंथियों के निशाने पर

केरल पुलिस ने जज वीजी श्रीदेवी को हत्या के लिए उकसाने वाले असरिकंडी मुहम्मद हादी को गिरफ्तार किया है। प्रतिबंधित इस्लामी आतंकी संगठन PFI और उसके राजनीतिक संगठन SDPI के आतंकियों को मौत की सजा सुनाने के बाद से महिला जज कट्टरपंथियों के निशाने पर हैं। इन आतंकियों को बीजेपी नेता रंजीत श्रीनिवास की निर्मम हत्या में सजा सुनाई गई थी।

26 साल के इस्लामी कट्टरपंथी मुहम्मद हादी को पेरुवन्नामुझी पुलिस ने पेरम्परा से गिरफ्तार किया है। उसने सोशल मीडिया पर पोस्ट कर महिला जज की हत्या की वकालत की थी। पुलिस ने उसे उसके कार्यस्थल से गिरफ्तार किया है। पुलिस ने खुद से संज्ञान लेते हुए उसके खिलाफ एफआईआर दर्ज की थी।

महिला जज की धमकी देने को लेकर पुलिस इससे पहले भी तीन कट्टरपंथियों को गिरफ्तार कर चुकी है। इनके नाम नासिर मोन, नवाज नैना और राफी हैं। ये केरल के अलग-अलग शहरों के रहने वाले हैं। केरल पुलिस ने इस सम्बन्ध में मामले दर्ज करते हुए जज श्रीदेवी की सुरक्षा भी बढ़ाई थी।

गौरतलब है कि केरल की एक अदालत ने भाजपा नेता रंजीत श्रीनिवास की हत्या के मामले में 15 PFI-SDPI के आतंकियों को सजा सुनाई थी। जज श्रीदेवी ने इस अपराध को गंभीरतम बताते हुए दोषियों को मौत की सजा सुनाई थी। रंजीत श्रीनिवास की उनके घर में घुसकर 19 दिसम्बर 2021 को परिजनों के सामने ही हत्या कर दी गई थी। इस मामले में केरल के अलप्पुझा जिले की मवेलिकारा कोर्ट ने नईम, मोहम्मद असलम, अनूप, अजमल, अब्दुल कलाम उर्फ़ सलाम, अब्दुल कलाम, सफरुद्दीन, मनषद, जसीब राजा, नवास, समीर, नज़ीर, जाकिर हुसैन, शाजी और शेरनस अशरफ को हत्या का दोषी पाया था।

हत्या में दोषी पाए गए अभी व्यक्ति अलप्पुझा के ही रहने वाले हैं और प्रतिबंधित इस्लामिक संगठन PFI और इसकी राजनीतिक शाखा SDPI से जुड़े हुए हैं। इन दोषियों में से शुरुआती 8 को रंजीत की हत्या में सीधे तौर पर दोषी माना गया है। इन पर कोर्ट ने धारा 302 समेत चार और धाराएँ लगाई थीं। दोषी नम्बर 9 से 12 को लेकर यह तथ्य सामने आया था कि बाकी 8 आरोपित जब रंजीत की हत्या कर रहे थे, तब ये उनके घर के बाहर खतरनाक हथियारों के साथ पहरा दे रहे थे। इसके अलावा 13वें, 14वें और 15वें दोषी को इस हत्या की साजिश रचने का दोषी करार दिया गया था।

‘हम चार निकाह ही करेंगे’: UCC के विरोध में बोले मुस्लिम- हम शरीयत से ही चलेंगे, देहरादून का शहर काजी बोला- सड़कों पर उतरेंगे

उत्तराखंड विधानसभा में सामान नागरिक संहिता (UCC) बिल पेश की जा चुकी है। इस पर विधानसभा में चर्चा चल रही है। प्रदेश के सभी नागरिकों के लिए समान कानून का आधार बनने वाला यह UCC मुस्लिम तबके के एक बड़े हिस्से को रास नहीं आ रही है। UCC के विरुद्ध अजीब-अजीब तर्क दिए जा रहे हैं। कई मुस्लिम नेता संविधान के ऊपर शरीयत को रखने की बात कर रहे हैं। ऐसी कई वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं।

ऐसे ही एक वीडियो में एक पत्रकार मुस्लिम भीड़ से UCC के मुद्दे पर बात करता दिखाई देता है। इस दौरान एक मुस्लिम युवक UCC की कमियाँ गिनाता है। युवक बताता है, “ये कानून सही नहीं है, क्योंकि हम किसके हिसाब से चलेंगे, हम चलेंगे शरीयत के हिसाब से। क्यों चलेंगे? क्योंकि शरीयत में लिखा हुआ कि आप चार निकाह कर सकते हैं। आप इसमें (UCC में) कह रहे हो कि एक निकाह कर सकते हैं। क्यों कर सकते एक निकाह, जब चार करने हैं?”

युवक आगे तर्क देता है, “वैसे तो हम एक ही करते हैं, लेकिन जब शरीयत में लिखा हुआ कि चार कर सकते हैं तो चार ही करेंगे। अब मान लो एक बीवी है, उससे शादी हो गई। अब एक अच्छी नहीं लग रही और दूसरी रेडी है तो हम क्यों ना करेंगे। इसमें दो बच्चे को लेकर लिखा हुआ है। बच्चे दो कैसे? वो तो अल्लाह के हाथ में हैं।”

जब उस मुस्लिम युवक से पत्रकार पूछता है कि वह शरीयत को मानता है या फिर देश के संविधान को। इस पर वह युवक कहता है कि ‘देश चलेगा संविधान से, लेकिन हम (मुस्लिम) चलेंगे शरीयत से’।

वहीं, UCC के विरोध में देहरादून की जामा मस्जिद के शहर काजी मुहम्मद अहमद कासमी ने सड़क पर उतरने का ऐलान किया है। उन्होंने कहा कि देश के बुद्धिमान लोग यूनिफार्म सिविल कोड की जरूरत नहीं मानते हैं। उन्होंने मुस्लिमों को लक्षित करके UCC लाने का आरोप लगाते हुए कहा कि उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी अपने नेताओं को खुश करने के लिए UCC ला रहे हैं।

उधर UCC के विरोध में अजीब तर्कों के और भी वीडियो सामने आए हैं। एक बुजुर्ग मुस्लिम व्यक्ति भी इस पर अपना पक्ष रखता नजर आ रहा है। गौरलतब है कि उत्तराखंड में लाए गए UCC का ड्राफ्ट 2 फरवरी 2024 को सरकार को सौंपा गया था। इसे पाँच सदस्यीय पैनल ने तैयार किया है। इसमें विवाह, तलाक, उत्तराधिकार और विरासत सम्बन्धी तमाम मुद्दों के विषय में नियम बनाए गए हैं।

‘मुहम्मद का गुलाम आएगा, मस्जिद को पाक करेगा और फिर अजान की आवाज गूँजेगी’: मुफ्ती अजहरी पर एक और FIR, ‘कुत्तों का वक्त’ पर हुआ था गिरफ्तार

गुजरात के जूनागढ़ में भड़काऊ भाषण देने वाले मुफ्ती सलमान अजहरी के खिलाफ एक और FIR दर्ज की गई है। बताया जा रहा है कि मुफ्ती ने कच्छ की एक सभा में भी भड़काऊ बयान दिया था। इसको लेकर ही यह FIR दर्ज की गई है।

जानकारी के अनुसार, कच्छ में मुफ्ती अजहरी की तकरीर के आयोजक मामद खान को भी आरोपित बनाया गया है। वह समखियारी का रहने वाला है और उसने ही ‘धार्मिक तकरीर’ नाम के आयोजन के लिए प्रशासन से अनुमति ली थी। यहीं मुफ्ती सलमान अजहरी ने भड़काऊ भाषण दिया था। पुलिस और गुजरात ATS इस मामले की जाँच कर रही है।

यहाँ से सामने आए वीडियो में सलमान अजहरी कहता है, “हमारा ये यकीन है कि तुमने अगर नापाक किया किसी मस्जिद को तो मुहम्मद-ए-अरबी का कोई गुलाम आएगा। कोई गुलाम आएगा और मस्जिद को पाक करेगा और फिर अजान की आवाज गूँजेगी। कुछ दिनों की खामोशी है, फिर शोर आएगा, आज कुत्तों का वक्त है कल हमारा दौर आएगा।” इसके बाद वहाँ मौजूद भीड़ नारा-ए-तकबीर और अल्लाह-हू-अकबर के नारे लगाती है।

कच्छ (पूर्वी) के एसपी सागर बागमार ने बताया है कि दोनों आरोपितों पर धारा 153(B) और 505(2) लगाई गई है। उन्होंने कहा, “हमने इस भड़काऊ भाषण की वीडियो वायरल होने के बाद मामला दर्ज किया है। वर्तमान में मुफ्ती सलमान अजहरी जूनागढ़ पुलिस की गिरफ्त में हैं। हम उसको यहाँ लाने के लिए वारंट जारी करवाएँगे।”

मुफ्ती अजहरी के भड़काऊ भाषण के विरुद्ध कच्छ के स्थानीय लोगों में काफी गुस्सा है। अखिल भारतीय संत समिति के अध्यक्ष मोहनदास महाराज ने मुफ्ती अजहरी की तकरीर का विरोध किया है और कार्रवाई की माँग की है। गुजरात ATS और जूनागढ़ पुलिस इस मामले में सोशल मीडिया समेत तमाम स्रोत से मुफ्ती के कच्छ वाले बयान के विषय में जानकारी इकट्ठा कर रही है। उससे जुड़े हुए तीन ट्रस्ट – जामिया रियाजुल जन्नाह, अल अमन एजुकेशन एंड वेलफेयर ट्रस्ट और दारुल अमन ट्रस्ट भी जाँच के घेरे में हैं।

मुफ्ती सलमान अजहरी के कुछ कट्टरपंथी संगठनों के साथ लिंक भी सामने आए हैं, जिनकी जाँच हो रही है। गौरतलब है कि मुफ्ती अजहरी को जूनागढ़ में एक भड़काऊ भाषण देने के लिए मुंबई से गिरफ्तार किया गया था। उसे गुजरात ATS ने गिरफ्तार किया था। उसकी गिरफ्तारी के दौरान कट्टरपंथियों ने बवाल भी काटा था।

जूनागढ़ में भी मुफ्ती सलमान अजहरी ने उगला था जहर

ऑपइंडिया ने सबसे पहले इस मामले की रिपोर्ट की थी। 20-22 सेकंड के वायरल वीडियो को सर्च करने पर हमें मुफ्ती सलमान अजहरी का वो भाषण मिला था, जो 53 मिनट का था। वायरल वीडियो इसी भाषण का एक छोटा सा हिस्सा थी। इस भाषण में मुफ्ती ने कई जगह भड़काऊ बातें कही थीं।

वीडियो को इस्लामिक चैनल ने पोस्ट किया था। इसमें वक्ता के तौर पर मुफ्ती सलमान अजहरी मंच पर दिख रहा था। यह कार्यक्रम गुजरात के जूनागढ़ में 31 जनवरी को हुआ था, जबकि वीडियो 1 फरवरी 2024 को अपलोड किया गया था। मुफ्ती सलमान अजहरी ने अपने भाषण में कहा था, “मस्जिद में बुत रखने से मस्जिद बुतखाना नहीं बन जाती। तुमने एक रखा है, काबा में 360 रखे थे, फिर भी काबा तो काबा ही रहा, न तवाफ रुका, न हज रुका।”

अपने भाषण में मुफ्ती ने कहा, “इंकलाब आपके घर से होगा। उनमें मस्जिदों को बुतखाना बनाने की हिम्मत नहीं है। आपने मस्जिदों को वीरान छोड़ दिया है और हमारे यहाँ मुहावरा है कि जब मैदान खुला होता है तो कुत्तों का राज होता है। यदि तुम मैदान में घूमते रहोगे तो कोई कुत्ते नहीं होंगे।”

भाषण के अंत में उसने कहा था, ”मुसलमानों घबराओ मत, अभी खुदा की शान बाकी है। अभी इस्लाम जिंदा है, अभी कुरान बाकी है, ऐ जालिम काफिर क्या समझता है जो रोज हमसे उलझता है, अभी तो कर्बला का आखिरी मैदान बाकी है। कुछ देर की खामोशी है, किनारा आएगा… आज कुत्तों का वक्त है, कल हमारा दौर आएगा।”

जिस मुन्नन खाँ को लोग बताते हैं कारसेवकों का हत्यारा, उसके नाम पर चौक-चौराहा और गाँव: सरकारी रिकॉर्ड में भी उसी का नाम, उसके नाम पर आयोजित होती है प्रतियोगिता

अयोध्या में 22 जनवरी 2024 को भगवान रामलला की विधि-विधान से प्राण प्रतिष्ठा हो चुकी है। पिछले एक माह से अधिक समय से ऑपइंडिया की टीम ने ग्राउंड से लोगों को ऐसे कई गुमनाम रामभक्तों के बारे में बताया, जिन्होंने राम मंदिर के लिए 500 वर्ष तक चले संघर्ष एवं आंदोलन में अपने प्राणों की आहुति तक दे दी। इस बीच कुछ गुमनाम विलेन भी सामने आए, जिनमें से एक मुन्नन खाँ भी है।

सन 1990 में बलरामपुर से सांसद और मुलायम सिंह यादव के करीबी रहे मुन्नन खाँ पर लोगों ने पुलिस की वर्दी पहनकर अयोध्या में कारसेवकों का नरसंहार करने का आरोप लगाया है। मुन्नन खाँ की मौत के बाद उसका बेटा कासिम खाँ अपने अब्बा की आपराधिक विरासत को संभाल रहा है। हमारी पड़ताल में यह भी निकल कर आया है कि मुन्नन के नाम पर न सिर्फ जगहों, बल्कि खेल प्रतियोगिताओं तक का नामकरण हुआ है।

PWD के बोर्ड पर मुन्नन खाँ चौराहा

गोंडा में शहर के बाहरी हिस्से पर मुन्नन खाँ नाम से एक चौराहा है। गौर करने वाली बात ये है कि यह चौराहा उस अयोध्या मार्ग पर है, जहाँ मुन्नन खाँ द्वारा कारसेवकों के नरसंहार का आरोप है। यहाँ PWD के 2 बोर्ड लगे हैं। एक बड़ा बोर्ड सड़क के बीचों बीच लगा है, जबकि दूसरा दिशा सूचक के तौर पर प्रयोग होता है।

PWD द्वारा लगवाए गए इन दोनों बोर्ड पर अयोधा से गोंडा-तिराहे को मुन्नन खाँ चौराहा लिखा गया है। इस तिराहे पर अधिकतर दुकानें मुस्लिम समुदाय के लोगों की हैं। उन सभी दुकानों के बोर्ड पर मुन्नन खाँ चौराहा लिखा हुआ है। गूगल मैप की लोकेशन सर्च करने में भी इस जगह का नाम मुन्नन खाँ चौराहा ही आता है।

मुन्नन खाँ चौराहे पर PWD का बोर्ड गोंडा अयोध्या-रोड

चौराहे पर मुन्नन खाँ का घर और बेटे का ऑफिस

जब ऑपइंडिया की टीम मुन्नन खाँ चौराहे पर पहुँची तो पाया कि वहाँ मुन्नन खाँ का एक घर बना हुआ है। यहाँ पर मुन्नन अपने राजनैतिक चरम के दौरान रहा करता था। घर काफी बड़े हिस्से में बना हुआ है। बाउंड्री से सटकर ही बहराइच जिले को जाने वाला बाईपास बना है। बाहर मुन्नन खाँ और उसके अब्बा का शिलापट लगा हुआ है। घर के चारों तरफ बड़ी सी बाउंड्री है, जिसके बाहर कई गाड़ियाँ खड़ी थीं।

मुन्नन खाँ का घर

वहीं रोडवेज की तरफ जाने वाली सड़क पर मुन्नन खाँ के बेटे मोहम्मद आसिम खाँ ने अपना ऑफिस खोल रखा है। इसके आसपास टायर-पंचर आदि की दुकानें हैं।

मुन्नन के बेटे का ऑफिस

चौराहे के पास सड़क से सटी मज़ार

मुन्नन खाँ चौराहे से बहराइच जाने वाली सड़क के किनारे महज 100 मीटर के आसपास चलने पर एक हरे रंग की मजार दिखाई देती है। मजार पक्की है और इसे देखकर लगता है कि इसका हाल ही में रंगाई-पुताई की गई है। इस पर बाकायदा अगरबत्ती और चादरपोशी भी की हुई है। मजार की वजह से सड़क को दबाना पड़ा है, जिसकी वजह से यहाँ अक्सर जाम आदि की भी समस्या आती रहती है।

मुन्नन खाँ चौराहे के पास सड़क से सटी मजार

मुन्नन खाँ के नाम पर M.K. पेट्रोल पम्प, ग्राहकों से अभद्रता

मुन्नन खाँ चौराहे पर एक MK पेट्रोल पम्प है। यहाँ MK का फुल फॉर्म (मुन्नन खाँ) है। इसका पूरा नाम MK फिलिंग पॉइंट है। इस पेट्रोल पम्प की देखरेख और मालिकाना हक मुन्नन खाँ के एक अन्य बेटे सलाहुद्दीन खाँ के पास है। सलाहुद्दीन को पेट्रोल पम्प की डीलरशिप भारत पेट्रोलियम ने साल 2019 में दी है।

दरअसल, 18 मार्च 2022 को MSSM नाम के एक ग्राहक ने इस पेट्रोल पम्प पर कम मात्रा में तेल देने और ग्राहकों से खराब व्यवहार की शिकायत की थी। यह शिकायत Indiapl.com नाम की वेबसाइट पर रिव्यू सेक्शन में दर्ज करवाई गई है।

ग्राहक होने का दावा करने वाले व्यक्ति का आरोप है कि तेल भरवाने के बाद जब पर्ची माँगी जाती है तो पेट्रोल पम्प के कर्मचारी ग्राहकों से अभद्रता करते हैं। शिकायतकर्ता ने लोगों को किसी और टंकी पर तेल भरवाने की सलाह दी है। इस पेट्रोल पंप के रिव्यू में 5 में से महज एक स्टार दिया गया है।

MK फिलिंग के लिए एक ग्राहक का रिव्यू

पुलिस रिकॉर्ड में भी चौराहा मुन्नन खाँ के नाम पर

PWD (लोक निर्माण विभाग) के अलावा UP पुलिस भी अपने रिकॉर्ड में चौराहे को मुन्नन खाँ के नाम से ही दर्ज करती है। पुलिस के DCRB (डिस्ट्रिक्ट क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो) द्वारा इस इस चौराहे को मुन्नन खाँ के नाम से दर्ज किया गया है।

UP पुलिस के रिकॉर्ड में भी चौराहे का नाम मुन्नन खाँ

मुन्नन खाँ के नाम पर एक गाँव का पुरवा भी

गोंडा के कटरा बाजर थाना क्षेत्र में एक गाँव को भी लोग मुन्नन खाँ पुरवा बोलते हैं। इस नाम को बाकायदा onefivenine.com वेबसाइट पर गूगल मैप लोकेशन के साथ दर्ज भी करवाया गया है। इस जगह के मूल गाँव का नाम मोहन टेपरा है। यहाँ का पिनकोड 271126 है।

गोंडा शहर से इस पुरवा की दूरी लगभग 25 किलोमीटर है। यहाँ यह ध्यान देना जरूरी है कि मुन्नन खाँ ने अपने राजनैतिक करियर की शुरुआत इसी कटरा विधानसभा से विधायक के रूप में की थी। आज भी उसके परिवार के तमाम सदस्य कटरा के हरधर मऊ इलाके में रहते हैं।

गोंडा में मौजूद है मुन्नन खाँ का पुरवा भी

मुन्नन खाँ की याद में हर वर्ष क्रिकेट टूर्नामेंट

गोंडा जिले के कटरा बाजार में मुन्नन खाँ के नाम पर खेल प्रतियोगिताओं का आयोजन होता है। इन आयोजनों में मुन्नन खाँ क्रिकेट टूर्नामेंट भी शामिल है। यह आयोजन मुन्नन खाँ की मेमोरियल के तत्वाधान में होता है। टूर्नामेंट में गोंडा ही नहीं, बल्कि आसपास के जिलों की टीमें हिस्सा लेती हैं। बाकायदा माइक आदि बाँधे जाते हैं और आसपास के ग्रामीण दर्शक के तौर पर जमा होते हैं।

इस दौरान मैदान के चारों तरफ समाजवादी पार्टी के बड़े-बड़े होर्डिंग्स लगाए जाते हैं। इनमें से कई होर्डिंग्स में तो अखिलेश यादव के उर्दू भाषा में लिखे पोस्टर होते हैं। उर्दू में लिखे इन शब्दों को हिंदी में ‘खैर मक़दम इस्तक़बाल’ कहते हैं। इसका मतलब होता है कि ‘आपका स्वागत है’। बैनरों में सपा के अलावा मुन्नन खाँ के मौजूदा परिवारिक सदस्यों का जिक्र रहता है।

टूर्नामेंट के मैदान पर लगते हैं अखिलेश यादव के उर्दू में लिखे बैनर

इसके अलावा, मुन्नन खाँ का बेटा कासिम खाँ कटरा के हलधर मऊ में एक स्कूल चलाता है। इसका नाम यूनिटी पब्लिक स्कूल है। गोंडा शहर में मुन्नन खाँ और उनके परिजनों के अलावा रिश्तेदारों की भी कई जमीनें हैं। साल 2017 में कासिम खाँ पर गैंगस्टर ऐक्ट लगने के बाद जिला प्रशासन उन तमाम जमीनों की खोजबीन में भी जुटा था। नजूल की जमीन पर पुलिस ने अवैध निर्माण बताकर कार्रवाई भी की थी।

पादरी ने ‘नो कन्वर्जन’ के खिलाफ की शिकायत, FIR में रचित कौशिक का जिक्र तक नहीं; फिर क्यों उठाकर ले गई पंजाब पुलिस

सब लोकतंत्र’ न्यूज पोर्टल के फाउंडर रचित कौशिक को बुधवार (6 फरवरी, 2024) को पंजाब के चार पुलिसकर्मियों ने उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर से उठा लिया। कौशिक एक पारिवारिक शादी समारोह में शामिल होने के लिए मुजफ्फरनगर आए थे। घटना शाम के करीब 7 बजे की बताई जा रही है। कौशिक अपनी भांजी को पार्लर से लेकर विवाह स्थल पर जा रहे थे, जिस दौरान उन्हें गिरफ्तार किया गया।

ऑपइंडिया से रचित कौशिक की माँ ने बताया है कि उनका बेटा अपनी भांजी को लेकर शादी वाली जगह पर जा रहा था। अचानक से एक स्कॉर्पियो उनकी गाड़ी के सामने आ गई। इस गाड़ी से एक सिख व्यक्ति सामान्य कपड़ों में बाहर निकला।

कौशिक ने समझा कि उनकी कार स्कॉर्पियो को टच कर गई है, इसलिए उन्होंने इस व्यक्ति से बात करने के लिए गाड़ी का शीशा नीचे किया। लेकिन सिख व्यक्ति ने बिना किसी चेतावनी के उनकी गाड़ी का दरवाजा खोला और कौशिक को बाहर खींच लिया। इससे पहले कि कौशिक के साथ वाले लोग कुछ समझ पाते वह उन्हें खींचकर अपनी गाड़ी में ले गया।

कुछ ही मिनटों में कौशिक के रिश्तेदार और चश्मदीद यहाँ जमा हो गए। कौशिक की माँ ने बताया कि उनलोगों ने स्थानीय पुलिस से सम्पर्क किया। थोड़ी देर बाद पता चला कि इसके बारे में पंजाब पुलिस ने स्थानीय थाने को जानकारी दी थी। इसके बाद पंजाब पुलिस ने कौशिक को हिरासत में ले लिया। लेकिन दिलचस्प बात यह है कि कौशिक के परिवार को इस सम्बन्ध में कोई वारंट नहीं मिला।

FIR में सब लोकतंत्र या रचित कौशिक का नाम तक नहीं

इस मामले में दर्ज एफआईआर की काॅपी ऑपइंडिया के पास मौजूद है। ध्यान देने वाली बात है कि इस एफआईआर में कहीं भी रचित कौशिक या ‘सब लोकतंत्र’ चैनल का नाम नहीं है। यह एफआईआर लुधियाना के सलेम टाबरी थाना क्षेत्र के अलीशा सुल्तान की शिकायत के आधार पर दर्ज की गई है।

FIR की प्रति (स्रोत: रचित कौशिक का परिवार)
FIR की प्रति (स्रोत: रचित कौशिक का परिवार)

शिकायतकर्ता ने खुद को पादरी बताते हुए कहा कि 17 जनवरी 2024 को उन्होंने ईसाई समुदाय के खिलाफ एक पोस्ट ‘नो कन्वर्जन (@noconversion)’ नाम के एक्स/ट्विटर हैंडल पर देखी। सुल्तान ने इस अकाउंट के खिलाफ ईसाई महिलाओं और ननों का अपमान करने का आरोप लगाते हुए कहा है कि ऐसे पोस्ट सांप्रदायिक तनाव भड़का सकते हैं, जिससे देश में अशान्ति हो सकती है।

FIR में बताया गया है कि उन पोस्टों की प्रतियाँ शिकायत के साथ संलग्न थी, लेकिन उन पोस्ट के लिंक एफआईआर में नहीं थे। इस FIR को भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 295ए, 153ए, 153, 504 और आईटी अधिनियम की धारा 67 के तहत दर्ज किया गया है। लेकिन एफआईआर में कहीं भी यह उल्लेख नहीं किया गया है कि ‘नो कन्वर्जन’ नामक हैंडल के किस पोस्ट से शिकायतकर्ता की धार्मिक भावनाएँ आहत हुई हैं।

ऑपइंडिया से बात करते हुए कौशिक की माँ ने बताया है कि हो सकता है कौशिक को इसलिए गिरफ्तार किया गया हो क्योंकि उन्हें दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल के बेटे पुलकित के खिलाफ वीडियो बनाए थे। ऐसी ही एक वीडियो ‘नो कन्वर्जन’ नाम के हैंडल से 16 जनवरी 2024 को साझा की गई थी। इसमें रचित कौशिक केजरीवाल के बेटे पुलकित के विषय में बात कर रहे थे। उन्होंने इस वीडियो में पुलकित केजरीवाल पर जिम का सामान किराए पर देकर सरकारी खजाने से पैसा लेने का आरोप लगाया था।

इसके अलावा ऐसा कोई अन्य वीडियो नहीं है जो कि इस अकाउंट पर कौशिक को दिखाता हो। कौशिक की माँ के अनुसार गिरफ्तारी के समय पंजाब पुलिस को यह कहते सुना गया, “तुमको लम्बे समय से ढूँढ रहे थे, आखिर में पकड़ लिया।” ध्यान देने वाली बात है कि ‘नो कन्वर्जन’ हैंडल से कौशिक की जो क्लिप साझा की गई है उसमें कहीं भी ईसाइयों या धर्मांतरण के विषय में बात नहीं है। ऑपइंडिया को ऐसी कोई वीडियो नहीं मिली है जिसे ‘नो कन्वर्जन’ ने पोस्ट किया हो और उसमें कौशिक इस विषय में बात कर रहे हों।

नो कन्वर्जन नाम के अकाउंट द्वारा शेयर की गई रचित कौशिक की वीडियो (चित्र स्रोत: X)
नो कन्वर्जन नाम के अकाउंट द्वारा शेयर की गई रचित कौशिक की वीडियो (चित्र स्रोत: X)

लिहाजा यह स्पष्ट नहीं है कि कौशिक को पुलिस ने इसी वीडियो के आधार पर उठाया है। यह भी साफ़ नहीं कि कौशिक को ‘नो कन्वर्जन’ द्वारा की गई किस पोस्ट के लिए गिरफ्तार किया गया है।

सबसे हैरानी वाली बात ये है कि पीड़ित परिवार को जो FIR दी गई है, उसमें रचित कौशिक का कहीं नाम तक नहीं है। इसमें सिर्फ और सिर्फ ‘नो कन्वर्जन’ ट्विटर हैंडल का ही नाम है। इस वीडियो में अरविन्द केजरीवाल वाले वीडियो का भी जिक्र नहीं है। ऐसे में अंदाजा लगाया जा रहा है कि कौशिक को इसी बात के लिए उठा लिया गया है क्योंकि उनकी वीडियो को ‘नो कन्वर्जन’ ने साझा किया था। ऑपइंडिया ने पंजाब पुलिस से भी इस विषय में बात करने की कोशिश की लेकिन सम्पर्क नहीं हो सका।