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गुजरात में जहाँ निर्दोष राम भक्तों पर हुआ था पथराव, वहाँ चला बुलडोजर: कड़ी सुरक्षा के बीच महेसाणा के हटड़िया बाजार इलाके से हटाया गया अवैध अतिक्रमण

गुजरात के मेहसाणा जिले में बुलडोजर एक्शन की खबर है। मेहसाणा के खेरालू स्थित हटड़िया बाजार इलाके में बुलडोजर कार्रवाई की गई है। यह वही इलाका है जहाँ पिछले 21 जनवरी 2024 को भगवान श्री राम की शोभा यात्रा पर पथराव किया गया था।

प्रशासन ने यह ऑपरेशन खेरालू के हटड़िया बाजार और जकातनाका के पास चलाया है। ये वही इलाके हैं, जहाँ मुस्लिम भीड़ ने भगवान राम की यात्रा पर पथराव किया था। हटड़िया में पंचमुखी हनुमान मंदिर से बेलीम वाडा तक कुल 30-35 कच्चे अतिक्रमण हटाने के लिए नगर पालिका ने उनके मालिकों को नोटिस जारी किया था और उन्हें उन जगहों के स्वामित्व का सबूत पेश करने या फिर खुद ही उस अतिक्रमण को हटाने के लिए कहा गया था। इसके बावजूद वो अतिक्रमण नहीं हटाया गया, तो फिर प्रशासन ने बुलडोजर एक्शन के साथ कार्रवाई को अंजाम दिया।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबित, प्रशासन द्वारा जारी किए गए नोटिस का कोई जवाब न मिलने पर आखिरकार सोमवार (फरवरी 5, 2024) को सिटी सर्वे डिपार्टमेंट ने सर्वे शुरू किया। इस सर्वे कार्य के बाद प्रशासन ने आखिरकार बुलडोजर चलाने का निर्णय लिया और अवैध निर्माण कार्यों को ध्वस्त कर पूरे बाजार को अतिक्रमण से मुक्त कराया। इस दौरान नगर पालिका के उच्चाधिकारी और बड़ी संख्या में पुलिस कर्मी मौजूद रहे।

22 जनवरी को राम यात्रा पर हुआ था पथराव

बता दें कि अयोध्या में भगवान राम के मंदिर के प्राण प्रतिष्ठा महोत्सव से एक दिन पहले 22 जनवरी को मेहसाणा के खेरालु में हिंदू संगठनों द्वारा एक यात्रा का आयोजन किया गया था। यात्रा जब शहर के मुस्लिम इलाके में स्थित मस्जिद के पास पहुँची तो अचानक उस पर पथराव शुरू हो गया था। यात्रा पर पथराव की घटना का वीडियो भी सामने आया था, जिसमें यात्रा में शामिल भारी भीड़ पर एक इमारत की छत से लोग पत्थर फेंकते नजर आ रहे थे। इस पथराव के बाद अफरातफरी मच गई थी।

पथराव के साथ ही हुआ था तलवारों से हमला

इस मामले में पुलिस ने नामजोग गैंग के साथ ही 2 लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई थी। शिकायत में कहा गया था कि आरोपियों ने एकजुट होकर खेरालू के लिए निकलने वाली भगवान श्रीराम की शोभा यात्रा पर पथराव करने की साजिश रची थी। इसके लिए बेलिम ​​वासन के घरों की छत पर पत्थर इकट्ठे किए गए थे। इसके साथ ही तलवारों से लैस हमलवरों ने जुलूस में शामिल लोगों पर हमला भी किया था।

‘मोदी जी किसी भी प्रकार के आरक्षण के खिलाफ हैं’: कॉन्ग्रेसी नेता ने शेयर की वीडियो, फैक्ट चेक में फँस गए नेहरू

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राज्यसभा में जोरदार भाषण दिया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तमाम मुद्दों पर कॉन्ग्रेस की धज्जियाँ उड़ाई और कॉन्ग्रेस के आरक्षण विरोधी रूख को सबके सामने ला दिया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जम्मू-कश्मीर जैसे राज्य में लोगों को आरक्षण का लाभ न मिलने को लेकर भी कॉन्ग्रेस पर निशाना साधा, तो राज्यसभा में देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के आरक्षण विरोधी रूख को भी बेपर्दा कर दिया। इस दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जवाहरलाल नेहरू के एक पत्र को पढ़ा, जिसे उन्होंने उस समय राज्यों के मुख्यमंत्रियों को लिखा था और अपने आरक्षण विरोधी रुख को साफ किया था।

हालाँकि पीएम मोदी के इस भाषण का एक छोटा हिस्सा जान-बूझकर कॉन्ग्रेस के प्रवक्ता सुरेंद्र राजपूत ने एक्स पर शेयर किया। इस वीडियो को शेयर करते हुए सुरेंद्र राजपूत ने लिखा, “मोदी जी क्या कह रहे हैं? “ये किसी भी प्रकार के आरक्षण के ख़िलाफ़ हैं? नौकरी में तो बिलकुल नहीं”? क्या हो रहा है भाजपा में?”। सुरेंद्र राजपूत ने भ्रम फैलाने के लिए पीएम मोदी के भाषण का 33 सेकंड का हिस्सा ही शेयर किया।

हकीकत ये है कि जवाहरलाल नेहरू को लेकर पीएम मोदी ने राज्यसभा में उनका एक पत्र पढ़ा था। इस पत्र को पढ़ते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि आज की काॅन्ग्रेस ही नहीं, बल्कि देश के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू भी आरक्षण के खिलाफ थे। अगर बाबा साहब आंबेडकर नहीं होते तो देश के वंचित वर्गों को काॅन्ग्रेस कभी आरक्षण नहीं देती।

राज्यसभा में पीएम मोदी ने कहा, “मैं आदरपूर्वक नेहरू जी को बहुत याद करता हूँ। एक बार नेहरू जी ने मुख्यमंत्रियों को चिट्ठी लिखी थी। उन्होंने लिखा कि मैं किसी भी आरक्षण को पसंद नहीं करता और खासकर नौकरी में आरक्षण तो कतई ही नहीं। मैं ऐसे किसी भी कदम के खिलाफ हूँ जो अकुशलता को बढ़ावा दे, जो दोयम दर्जे की ओर ले जाएँ।”

पीएम मोदी के पत्र पढ़ते हुए वीडियो को समाचार एजेंसी एएनआई ने भी साझा किया है।

बहरहाल, कॉन्ग्रेस प्रवक्ता द्वारा ये क्लिप शेयर करने के कुछ सेंकड में ही लोगों ने उसे एक्सपोज कर दिया था। सुरेंद्र राजपूत के ट्वीट के जवाब में ही लोगों ने असली वीडियो सामने रख दिया। ऐसे में भले ही कॉन्ग्रेस प्रवक्ता की फेक न्यूज फैलाने की कोशिशें नाकाम हो गई हों, लेकिन आम लोगों को जरूर इनकी साजिशों से सावधान रहने की जरूरत है।

हागिया सोफिया के बाद एक और चर्च को मस्जिद बना रहा है तुर्की, मई से पढ़ सकेंगे नमाज: राम मंदिर पर जहर उगलने वाले इस्लामी संगठन भी खामोश

तुर्की के इस्तांबुल शहर में स्थित चोरा चर्च को मई 2024 तक मस्जिद में बदल दिया जाएगा। इसके बाद मुस्लिम यहाँ नमाज अता कर सकेंगे। अभी इस चर्च को मस्जिद में बदलने का काम चल रहा है। इस चर्च को मस्जिद में बदलने का फैसला तुर्की के राष्ट्रपति रेचप तैय्यप एर्दोगन ने किया था। इसके पहले ऐतिहासिक हागिया सोफिया चर्च को मस्जिद बनाया जा चुका है।

जिस चर्च को मस्जिद में बदलने का काम किया जा रहा है, वह लगभग 1400 साल पुराना है। इसे कुस्तुनतुनिया (Constantinople- जिसे आज का इस्तांबुल कहा जाता है) पर रोमन शासन के दौरान बनाया गया था। इसके भीतर और अधिक साज सज्जा का काम बाईजेंटाइन शासन के दौरान किया गया था। इसमें बनी हुई मोजायक फर्श और भित्ति चित्र अपने आप में अद्वितीय हैं।

यह 15वीं शताब्दी तक चर्च के रूप में ही था, लेकिन इसके बाद जब यहाँ तुर्कों के ऑटोमन साम्राज्य ने अधिकार हुआ तो इसे मस्जिद में बदल दिया गया। कुछ शताब्दियों तक यह मस्जिद ही बना रहा। इसके बाद सन 1945 में जब द्वितीय विश्व युद्ध के बाद यहाँ फिर से उदारवाद का दौर चालू हुआ तो इसे एक म्यूजियम के रूप में बदल दिया गया। वर्ष 2019 तक यह उसी रूप में रहा।

इसके बाद साल 2020 में तुर्की के राष्ट्रपति रेचप तैय्यप एर्दोगन ने इसे एक सक्रिय मस्जिद में बदलने का ऐलान किया था। इसके बाद से इसमें कुछ मरम्मत का काम किया जा रहा था। अब सरकार ने बताया है कि इस चर्च को मई 2024 में मुस्लिमों की नमाज के लिए खोल दिया जाएगा। इसके पहले इसे फरवरी 2024 में खोले जाने की अटकलें थीं।

गौरतलब है कि एर्दोगन लगातार खुद को दुनिया के मुस्लिमों के संरक्षक के तौर पर पेश करते रहे हैं। वह तुर्की को खिलाफत के दौर में वापस ले जाना चाहते हैं। प्रथम विश्व युद्ध से पहले तुर्की में खलीफा का शासन था, जिसे पूरी दुनिया के मुस्लिमों का नेता माना जाता था। एर्दोगन खुद के लिए वही पदवी की चाह लिए बैठे हैं। इसी क्रम में उन्होंने यह कदम उठाया है।

हालाँकि, यह पहली बार नहीं हो रहा है कि किसी चर्च को मस्जिद में बदला जा रहा है। इससे पहले वर्ष 2020 में इस्तांबुल में ही हागिया सोफिया चर्च को मस्जिद में तब्दील कर दिया गया था। इसके चर्च से मस्जिद में बदले जाने पर काफी हो हल्ला भी हुआ था। हागिया सोफिया भी रोमन शासन के बना एक ऐतिहासिक चर्च है, जिसे मस्जिद में तब्दील कर दिया गया है।

तुर्की के भीतर चर्चों को मस्जिद में बदलने को लेकर कोई भी आवाज नहीं उठ रही है। इसको लेकर कोई मुस्लिम संगठन या अन्य लिबरल गैंग भी अपना असंतोष नहीं जता रहे हैं। यहाँ उन मौलवियों के दावे भी झूठे साबित हो रहे हैं कि इस्लाम दूसरे के इबादतगाहों पर मस्जिद बनाने की इजाजत नहीं देता है, जैसा कि ज्ञानवापी और श्रीकृष्ण जन्मभूमि के मामले में कुछ मौलानाओं ने यह बात कही है।

भारत में सुप्रीम कोर्ट में न्यायिक लड़ाई जीत कर बनाए गए राम मंदिर को लेकर खूब रोना-धोना हुआ था। इसके बाबरी मस्जिद वाले स्थान पर बनाए जाने को लेकर चिंताएँ जताई गईं थी, जबकि यह निर्विवाद रूप से सिद्ध हो चुका था कि जहाँ मंदिर बना वहीं पर पहले भी मंदिर ही था और उसे तोड़कर मस्जिद बनाई गई थी।

UCC पर विधानसभा की मुहर, स्वतंत्र भारत में ऐसा करने वाला पहला राज्य बना उत्तराखंड: बोले सीएम धामी- यह पूरे देश को राह दिखाएगा

उत्तराखंड विधानसभा में बुधवार (7 फरवरी 2024) को समान नागरिक संहिता (UCC) ध्वनिमत के साथ पास हो गया। इसके नोटिफाई करते ही यह विधेयक कानून का रूप ले लेगा। इसके साथ ही उत्तराखंड आजाद भारत का पहला राज्य बन जाएगा, जहाँ समान नागरिक संहिता लागू किया जाएगा।

बता दें कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने स्वयं इस बिल को 6 फरवरी 2024 को सदन में पेश किया था। उत्तराखंड के मुख्यमंत्री धामी के विधानसभा में UCC बिल पेश करते ही यहाँ मौजूद विधायकों ने वन्दे मातरम और जय श्रीराम के नारे लगाए थे। इसके बाद सदन में इस पर चर्चा हुई और आखिरकार यह बिल पारित हो गया।

इस विधेयक का मसौदा एक पाँच सदस्यीय पैनल ने किया है, जिसकी अध्यक्षता सुप्रीम कोर्ट की रिटायर जज रंजना देसाई ने की थी। समिति ने 2 फरवरी को अपनी रिपोर्ट उत्तराखंड सरकार को सौंप दी थी। यह पाँच सदस्यीय पैनल इस विधेयक की बारीकियों को समझने और उसे मूर्त रूप देने के लिए बनाया गया था।

इसके लेकर उत्तराखंड के मुख्यमंत्री धामी ने सोशल मीडिया साइट एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर खुशी जाहिर है। उन्होंने इतिहास रचने वाली उत्तराखण्ड की विधायिका के सभी सदस्यों, UCC का ड्राफ्ट बनाने वाली कमेटी के सभी सदस्यगणों एवं राज्य की जनता का आभार व्यक्त किया है।

अपने पोस्ट में सीएम धामी ने लिखा, “ऐतिहासिक समान नागरिक संहिता विधेयक-2024 विधानसभा में पारित.. माँ गंगा व यमुना की उद्गम स्थली देवभूमि उत्तराखण्ड से निकली UCC के रूप में समानता और समरूपता की यह अविरल धारा संपूर्ण देश का पथ प्रदर्शित करेगी। यह विधेयक मातृशक्ति के सम्मान एवं उनकी सुरक्षा के प्रति हमारी सरकार की प्रतिबद्धता को भी परिलक्षित करता है।”

पीएम मोदी को आभार व्यक्त करते हुए उन्होंने आगे लिखा, “आज पुनः आदरणीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के मुखारबिंद से निकली वह शिववाणी याद आती है कि ’21वीं सदी का तीसरा दशक उत्तराखण्ड का दशक है’ प्रधानमंत्री जी के विजन ‘एक भारत-श्रेष्ठ भारत’ एवं प्रदेशवासियों की आकांक्षाओं के अनुरूप हमारी सरकार ने चुनाव से पूर्व देवतुल्य जनता से किए गए अपने वादे को पूर्ण किया है।”

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अपने X पोस्ट में आगे लिखा, “आज 24 साल के सशक्त, स्वाभिमानी एवं ऊर्जावान उत्तराखण्ड को देखकर हमारे राज्य आंदोलनकारियों का मस्तक गर्व से ऊँचा हो गया होगा। हमारे शहीदों के प्रति यह एक सच्ची श्रद्धांजलि है जब हमारा प्रदेश विश्व पटल पर एक नई पहचान बना रहा है।”

समान नागरिक संहिता बिल में विवाह, तलाक, संपत्ति में हिस्सेदारी, गोद लेने की प्रक्रिया और लिव-इन रिलेशनशिप से जुड़े अहम बिंदु भी शामिल किए गए हैं। इसमें उत्तराधिकार के महत्वपूर्ण मामले पर भी जोर दिया गया है। हालाँकि, इस बिल को लेकर मुस्लिम समाज विरोध कर रहा है।

पांडवों ने माँगे 5 गाँव, हिंदुओं ने 3 स्थान: हमने वचन निभाया, मंदिर वहीं बनाया, बोले योगी आदित्यनाथ, ‘आजादी के तुरंत बाद होना चाहिए था ये काम’

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बुधवार (07 फरवरी 2024) को विधानसभा में राज्यपाल के अभिभाषण पर चर्चा में भाग लिया और राज्यपाल को धन्यवाद ज्ञापित किया। इस दौरान उन्होंने विपक्ष को चुन-चुन का निशाना बनाया, तो हिंदुओं की आस्था से जुड़े तीन स्थलों को लेकर भी खुलकर अपनी बात रखी। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने विपक्ष समेत तमाम दलों से सवाल पूछा कि सनातन धर्म की आस्था के तीन प्रमुख स्थलों अयोध्या, काशी और मथुरा का विकास आखिर किस मंशा से रोका गया था?

वचन निभाया, मंदिर वहीं बनाया: सीएम योगी

विधानसभा में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने आगे कहा, “महाभारत रचने वाले वेदव्यास की एक पीड़ा थी कि मैं बाहें उठाकर लोगों को समझा रहा हूँ कि धर्म से ही अर्थ और काम की प्राप्ति होती है इसलिए क्यों नहीं धर्म के मार्ग पर चलते हो? ये केवल वेदव्यास की ही पीड़ा नहीं थी, 2014 के पहले पूरे देश की और 2017 के पहले पूरे प्रदेश की भी यही पीड़ा थी।”

उन्होंने आगे कहा, “2017 के पहले उत्तर प्रदेश को जिन लोगों ने चार-चार बार प्रदेश में शासन किया, लंबे समय तक सत्ता पर विराजमान रहे उन्होंने यूपी के लोगों के सामने पहचान का संकट खड़ा कर दिया। यहाँ का नौजवान पहचान छिपाने के लिए मजबूर था। उसे यूपी से बाहर हेय दष्टि से देखा जाता था। मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि यहाँ तो नौकरी नहीं थी, यूपी से बाहर भी नहीं मिलती थी। किराये के कमरे तो दूर होटल और धर्मशालाओं में भी जगह नहीं मिलती थी।”

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा, “गत 22 जनवरी को पूरे हिंदुस्तान और दुनिया के अंदर जहाँ कहीं भी हम देख रहे थे, हर ओर से एक ही आवाज आ रही थी। यह अद्भुत क्षण था। भारत के गौरव की प्राण प्रतिष्ठा का कार्यक्रम संपन्न हुआ है लेकिन प्रसन्नता इस बात की भी थी कि हमने वचन निभाया और मंदिर वहीं बनाया।”

मुख्यमंत्री योगी ने कहा, “उत्तर प्रदेश ने 22 जनवरी 2024 की घटना को भी देखा है। पूरा देश अभिभूत था। पूरी दुनिया के अंदर हर वह व्यक्ति जो न्याय का पक्षधर है, गौरवान्वित था। हर धर्मावलंबी की आँखों में आँसू थे। अयोध्या को लेकर हर किसी के मन में संतोष था कि जो हुआ है अच्छा हुआ है। अविस्मरणीय क्षण था वो और हर व्यक्ति गौरव की अनुभूति कर रहा था। क्योंकि 500 वर्षों के लंबे संघर्ष के बाद सर्वानुमति के साथ उसके समाधान का रास्ता निकला और आज रामलला के भव्य मंदिर का निर्माण न सिर्फ प्रशस्त हुआ बल्कि रामलला वहाँ स्थापित हुए।”

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने आगे कहा, “दुनिया के अंदर यह पहली घटना थी, जहाँ प्रभु को अपने स्वयं के अस्तित्व के लिए स्वयं प्रमाण जुटाने पड़े थे, लेकिन राम की मर्यादा हमें धैर्य की प्रेरणा देती है। हमें प्रसन्नता इस बात की थी, कि हमने वचन निभाया और मंदिर वहीं बनाया। केवल बोलते नहीं हैं। करते भी हैं। जो कहा, करके दिखाया। संकल्प की सिद्धि की।”

पांडवों ने माँगे पाँच गाँव, यहाँ की आस्था कर रही केवल की तीन की बात

योगी आदित्यनाथ ने विधानसभा में अपनी बात को विस्तार देते हुए कहा, “अयोध्या की बात होती है तो हमें पांडवों की याद आती है। कृष्ण गए थे दुर्योधन के पास उन्होंने कहा था कि ‘दे दो हमको पाँच ग्राम, रखो अपनी धरती तमाम’, लेकिन दुर्योधन वह भी दे न सका। यहाँ तक कि उसने भगवान कृष्ण को बंधक बनाने का प्रयास किया।’

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि यही तो हुआ था अयोध्या के साथ। यही हुआ था काशी के साथ। यही हुआ था मथुरा के साथ। पांडवों ने भी केवल पाँच ग्राम माँगे थे लेकिन यहाँ कोई समाज, यहाँ की आस्था केवल तीन के लिए बात कर रही है। वो तीन के लिए भी इसलिए कि वे विशिष्ट स्थल हैं। ईश्वर की अवतरण की धरती हैं। वह सामान्य नहीं है लेकिन एक जिद है। उस जिद में जब राजनैतिक तड़का पड़ने लगता है तो वहीं से फिर विवाद की स्थिति खड़ी होने लगती है।”

मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत के अंदर लोकआस्था का अपमान हो और बहुसंख्यक समुदाय गिड़गिड़ाए। ऐसा दुनिया में कहीं नहीं हुआ। उन्होंने कहा कि जो काम हो रहा है वह काम आजाद भारत में पहले पहल होना चाहिए था। 1947 में ही हो जाना चाहिए था।

अयोध्या-काशी और मथुरा की ओर इशारा करते हुए मुख्यमंत्री योगी ने कहा, ‘हमने तो केवल तीन जगह माँगी है। अन्य जगहों के बारे में कोई मुद्दा नहीं था। अयोध्या का उत्सव लोगों ने देखा तो नंदी बाबा ने कहा कि भाई हम काहे इंतजार करें। इंतजार किए बगैर रात में बैरिकेड तोड़वा डाले। अब हमारे कृष्ण कन्हैया कहाँ मानने वाले हैं?’

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा, “विदेशी आक्रांताओं ने केवल इस देश के अंदर धन दौलत ही नहीं लूटा था। इस देश की आस्था भी रौदने का काम किया था। आजादी के बाद उन आक्रांताओं को महिमामंडित करने का कुत्सित कार्य किया गया, अपने वोटबैंक के लिए। दुर्योधन ने कहा था कि सुई की नोक बराबर भूमि भी नहीं दूंगा। फिर तो महाभारत होना ही था। फिर क्या हुआ? कौरव पक्ष समाप्त हो गया।”

लक्षद्वीप को टूरिस्ट हब बनाएगी मोदी सरकार: विकास पर खर्च करेगी ₹3600 करोड़, 6 द्वीपों की बदलेगी सूरत

केंद्र सरकार लक्षद्वीप के विकास पर ₹3600 करोड़ से अधिक खर्च करेगी। दरअसल, केंद्र सरकार इसके अलग-अलग द्वीपों में विभिन्न तरह की सुविधाएँ विकसित की करेगी। इससे भारतीय टूरिस्ट बिना विदेश गए ही अपने देश में सुंदर समुद्री तटों का आनंद उठा सकेंगे। केंद्र सरकार लक्षद्वीप को टूरिस्ट हब में बदलने की कोशिश में लगी हुई है।

इकॉनोमिक टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, केंद्र सरकार लक्षद्वीप समूह में शामिल कवरत्ती, अगात्ति, अन्द्रोथ, कदामत और कल्पेनी द्वीप को विकसित करेगी। इन पोर्ट पर रोड बनाई जाएगी और हर तरह की सुविधाएँ विकसित की जाएँगी। यहाँ हवाई सुविधाओं का भी विकास किया जाएगा।

रिपोर्ट में बताया गया है कि सरकार लक्षद्वीप को सागरमाला परियोजना के तहत विकसित करेगी। इस विकास में लगने वाले फंड को सागरमाला परियोजना के फंड से लिया जाएगा। लक्षद्वीप के विकास के लिए कुल 13 प्रोजेक्ट सरकार ने चुने हैं। इन प्रोजेक्ट के जरिए लक्षद्वीप समूह के 36 द्वीपों की तस्वीर बदलेगी।

रिपोर्ट बताती है कि सरकार कदामत द्वीप पर सर्वाधिक ₹1034 करोड़ खर्च करेगी। यह फंड पोर्ट और बीच के विकास में लगाया जाएगा। इसके अलावा, कल्पेनी द्वीप पर ₹804 करोड़ का खर्चा होगा। अन्द्रोथ द्वीप को ₹762 करोड़ से विकसित किया जाएगा। मिनिकॉय और कवरत्ती द्वीप को भी बड़ी धनराशि विकास के लिए दी गई है।

इससे पहले भी सरकार कह चुकी है कि वह लक्षदीप में हवाई सुविधाओं को बढ़ावा देगी, जिससे भारत भर से टूरिस्ट यहाँ आएँ। हाल ही में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भी लक्षद्वीप का दौरा किया था। इसके बाद देश की वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने भी भारतीय द्वीपों के विकास को लेकर बात की थी। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने लक्षद्वीप की सुन्दरता को दिखाते हुए फोटो भी डाली थी।

इन फोटो को देखकर मालदीव की मुइज्जू सरकार के तत्कालीन मंत्रियों ने भारत और पीएम मोदी पर अभद्र टिप्पणी की थी। इसके बाद भारत में मालदीव के बॉयकॉट को लेकर अभियान चला था। इसके बाद से भारत और मालदीव के सम्बन्धों में खटास दिख रही है। मालदीव वर्तमान में चीन की कठपुतली बना हुआ है और उसके राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जू लगातार भारत विरोधी भावनाओं को हवा देते रहे हैं।

केजरीवाल हाजिर हों…: प्रवर्तन निदेशालय (ED) की शिकायत को बाद दिल्ली की कोर्ट ने AAP चीफ को तलब किया, समन का नहीं दे रहे थे जवाब

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को कोर्ट से करारा झटका लगा है। प्रवर्तन निदेशालय (ED) द्वारा पूछताछ के लिए लगातार बुलाए जाने के बाद सीएम केजरीवाल सहयोग नहीं कर रहे थे। इसके बाद ED ने दिल्ली के राऊज एवेन्यू कोर्ट में इसकी शिकायत की थी। अब कोर्ट ने उन्हें 17 फरवरी को कोर्ट में पेश होने के लिए कहा है। वहीं, एक अन्य मामले में भी कोर्ट ने हाजिर होने के लिए कहा है।

दरअसल, प्रवर्तन निदेशालय ने शराब घोटाले में पूछताछ के लिए सीएम अरविंद केजरीवाल को पाँच बार समन भेजा था। प्रवर्तन निदेशालय ने उन्हें पूछताछ के लिए 2 नवंबर 2023 और 21 दिसंबर 2023 के बाद इस साल 3 जनवरी, 18 जनवरी और 2 फरवरी 2024 को पूछताछ के लिए बुलाया था। हालाँकि, वे पूछताछ में कभी सहयोग नहीं किए।

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने ईडी द्वारा भेजे गए समन को राजनीतिक साजिश बताते रहे हैं। वे ये भी सवाल करते रहे हैं कि एक मुख्यमंत्री को ईडी किस हैसियत से पूछताछ के लिए बुला रही है। अरविंद केजरीवाल कहते रहे हैं कि उन्हें गिरफ्तार करने की साजिश की जा रही है, ताकि वे लोकसभा चुनावों में अपनी पार्टी AAP के लिए चुनाव प्रचार ना कर सकें।

लगातार पाँच बार समन को नजरअंदाज करने के बाद आखिरकार प्रवर्तन निदेशालय ने 3 फरवरी 2024 को कोर्ट का रूख किया। इसके बाद राऊज एवेन्यू कोर्ट की अतिरिक्त मुख्य मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट दिव्या मल्होत्रा ने मामले का संज्ञान लिया और उन्हें 17 फरवरी 2024 को अदालत में पेश होने के लिए समन जारी किया है।

बता दें कि प्रवर्तन निदेशालय के समन भेजने से पहले सीबीआई भी 16 अप्रैल 2023 को अरविंद केजरीवाल से पूछताछ कर चुकी है। उस दौरान उनसे 56 सवाल किए गए थे। वहीं, पार्टी की ओर से जैस्मीन शाह ने कहा कि कोर्ट के ऑर्डर का अध्ययन किया जाएगा। उन्होंने कहा कि इसके बाद कानून के मुताबिक कदम उठाएँगे और कोर्ट को बताएँगे ED के सभी समन कैसे गैर-कानूनी थे।

वहीं, यूट्यूबर ध्रुव राठी के यूट्यूब वीडियो को दोबारा ट्वीट करने के मामले में सीएम केजरीवाल को राऊज कोर्ट ने पेशी से छूट दे दी है। कोर्ट ने उन्हें 29 फरवरी 2024 को अदालत में पेश होने का निर्देश दिया है। दरअसल, सीएम केजरीवाल ने कोर्ट में पेशी से छूट माँगी थी। उनके वकील ने कहा था कि दिल्ली का बजट सेशन शुरू होने वाला है, जिसकी वजह से वे व्यस्त हैं। इसलिए उन्हें पेशी से छूट दी जाए।

इससे पहले दिल्ली उच्च न्यायालय ने सोमवार (5 फरवरी 2024) को यूट्यूबर ध्रुव राठी के वीडियो को रीट्वीट करने को लेकर दायर आपराधिक मानहानि मामले को रद्द करने से इनकार कर दिया था। दरअसल, ध्रुव राठी ने ‘बीजेपी आईटी सेल पार्ट 2’ शीर्षक से वीडियो वीडियो बनाया था।

नए नाम और पहचान की कश्मकश में फँसा शरद पवार गुट तो अजित पवार ने एनसीपी ऑफिस और अन्य संपत्तियों पर पेश कर दिया दावा: कहाँ तक जाएगी ये लड़ाई?

चुनाव आयोग ने मंगलवार (06 फरवरी 2024) को अजित पवार गुट को राष्ट्रवादी कॉन्ग्रेस पार्टी (एनसीपी) का असली दावेदार मान लिया और शरद पवार गुट को नए नाम और पहचान पर दावा करने के लिए आज (07 फरवरी 2024) का वक्त दिया था। इस दौरान शरद पवार गुट ने तीन नाम चुनाव आयोग को भेजे थे, जिसमें से नेशनलिस्ट कॉन्ग्रेस पार्टी-शरदचंद्र पवार नाम उनकी पार्टी को मिल गया है। इन नामों पर चर्चा के बीच ही ये खबर सामने आई कि अब अजित पवार गुट ने एनसीपी के कार्यालय और अन्य संपत्तियों पर दावेदारी करने की तैयारी कर ली है।

शरद पवार गुट ने तय किए ये तीन नाम

अपनी पार्टी का नाम और सिंबल छिनने के बाद शरद पवार की पार्टी की ओर से चुनाव आयोग को तीन नाम भेजे गए थे। केंद्रीय चुनाव आयोग को शरद पवार की पार्टी की ओर से भेजे गए इन नामों में नेशनलिस्ट कॉन्ग्रेस पार्टी-शरदचंद्र पवार, नेशनलिस्ट कॉन्ग्रेस पार्टी-शरद पवार और एसीपी -शरद पवार नाम शामिल थे, जिसमें से चुनाव आयोग ने पार्टी की पसंद के पहले नाम नेशनलिस्ट कॉन्ग्रेस पार्टी-शरदचंद्र पवार पर मुहर लगा दी। अब शरद पवार गुट महाराष्ट्र में राज्यसभा की 6 सीटों के लिए होने वाले चुनाव में अपने नए नाम और नई पहचान (चुनाव निशान) के साथ चुनाव में हिस्सा ले सकेगा। चुनाव आयोग ने इस बारे में शरद पवार को सूचना भी दे दी है।

चुनाव आयोग द्वारा जारी किया गया पत्र

अजित पवार गुट ने ठोकी एनसीपी की संपत्तियों पर दावेदारी

इस बीच, इंडिया टुडे ने सूत्रों के हवाले से बताया है कि अजित पवार गुट आधिकारिक तौर पर एनसीपी के कार्यालय समेत अन्य संपत्तियों पर अपनी दावेदारी करने चल रहा है। अजित पवार गुट का कहना है कि इस पार्टी कार्यालय को सरकार की तरफ से दिया गया है, खुद इसे पार्टी ने नहीं बनाया है। ऐसे में आधिकारिक तौर पर पार्टी कार्यालय और अन्य संपत्तियों पर एनसीपी की आधिकारिक इकाई की दावेदारी बनती है। अजित पवार गुट यही बात सामने रखने वाला है।

शरद पवार गुट से पहले सुप्रीम कोर्ट पहुँच गया अजित पवार गुट

बता दें कि अजित पवार गुट को चुनाव आयोग द्वारा असली एनसीपी बताए जाने के बाद शरद पवार गुट ने कहा था कि वो सुप्रीम कोर्ट में चुनाव आयोग के फैसले को चुनौती देगा। शरद पवार गुट ने ये दावा भले किया कि वो सुप्रीम कोर्ट पहुँचेगा, लेकिन मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया जा रहा है कि शरद पवार गुट से पहले ही अजित पवार गुट सुप्रीम कोर्ट में पहुँच गया है। अजित पवार गुट ने सुप्रीम कोर्ट में कैविएट (खास याचिका) दाखिल की है कि शरद पवार गुट की तरफ से किए गए किसी भी दावे पर वो तब तक निष्कर्ष पर न पहुँचे, जब तक अजित पवार गुट भी अपनी बात सुप्रीम कोर्ट में न कह ले।

बता दें कि चुनाव आयोग ने मंगलवार (06 फरवरी 2024) को चुनाव आयोग ने एनसीपी को लेकर चल रही लड़ाई पर विराम लगा दिया था। आयोग ने अजित पवार की अगुवाई वाले एनसीपी के धड़े को ही असली माना। एनसीपी का चुनाव निशान घड़ी अब अजित पवार वाला गुट इस्तेमाल करेगा। चुनाव आयोग का फैसला ऐसे वक्त पर आया, जब महाराष्ट्र विधानसभा स्पीकर राहुल नार्वेकर को 15 फरवरी तक एनसीपी विधायकों की सदन की सदस्यता पर अयोग्यता को लेकर अपना फैसला सुनाना है।

‘आरक्षण विरोधी’ नेहरू से लेकर ‘नाॅनस्टार्टर’ राहुल तक राज्यसभा में PM मोदी ने काॅन्ग्रेस को धोया, आंबेडकर से लेकर केसरी तक का अपमान दिलाया याद

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बुधवार (7 फरवरी 2024) को राज्यसभा में काॅन्ग्रेस पर जमकर बरसे। उनके शब्दबाण से जवाहर लाल नेहरू से लेकर राहुल गाँधी तक कोई नहीं बचा। नेहरू के आरक्षण विरोधी चिट्ठी का जिक्र किया तो राहुल गाँधी को ‘नाॅनस्टार्टर’ बताया। भीमराव आंबेडकर से लेकर सीताराम केसरी तक के अपमान की याद काॅन्ग्रेस को दिलाई। साथ ही 2024 के आम चुनावों में बीजेपी नेतृत्व वाले एनडीए के 400 से अधिक सीट जीतने की भविष्यवाणी को दोहराया।

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रताव पर चर्चा का प्रधानमंत्री जवाब दे रहे थे। इससे पहले लोकसभा में भी उन्होंने काॅन्ग्रेस की कारगुजारियों को गिनाते हुए कहा था कि बीजेपी को कम से कम 370 सीटें इस बार आएँगी। साथ ही एनडीए के 400 पार जाने की भविष्यवाणी की थी।

राज्यसभा में अपने संबोधन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आरक्षण को लेकर देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू को घेरा। उन्होंने नेहरू की आरक्षण विरोधी चिट्ठी का जिक्र किया, जो उन्होंने राज्यों के मुख्यमंत्री को लिखे थे। इस चिट्ठी में नेहरू ने लिखा था, “मैं आरक्षण के खिलाफ हूँ। नौकरियों में आरक्षण के खिलाफ तो पूरी तरह।”

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि आज की काॅन्ग्रेस ही नहीं, बल्कि देश के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू भी आरक्षण के खिलाफ थे। अगर बाबा साहब आंबेडकर नहीं होते तो देश के वंचित वर्गों को काॅन्ग्रेस कभी आरक्षण नहीं देती। पीएम मोदी ने कहा, “मैं आदरपूर्वक नेहरू जी को बहुत याद करता हूँ। एक बार नेहरू जी ने मुख्यमंत्रियों को चिट्ठी लिखी थी। उन्होंने लिखा कि मैं किसी भी आरक्षण को पसंद नहीं करता और खासकर नौकरी में आरक्षण तो कतई ही नहीं। मैं ऐसे किसी भी कदम के खिलाफ हूँ जो अकुशलता को बढ़ावा दे, जो दोयम दर्जे की ओर ले जाएँ।”

काॅन्ग्रेस ने आरक्षण से लोगों को वंचित रखा

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि कॉन्ग्रेस ने आरक्षण से लोगों को वंचित रखा। पीएम मोदी ने जम्मू-कश्मीर का उदाहरण देते हुए कहा कि कॉन्ग्रेस ने बीते सात दशकों तक जम्मू-कश्मीर में ओबीसी, एसटी और एससी आरक्षण से वहाँ के लोगों को वंचित रखा। पीएम मोदी ने कहा कि केंद्र सरकार ने जम्मू-कश्मीर की ऐसी हालत कर दी थी कि वहाँ तमाम लोग सात दशक से रह रहे थे, लेकिन उनको डोमिसाइल का अधिकार नहीं दिया गया। हमारी सरकार ने पूरे देश की तरह जम्मू-कश्मीर के लोगों को भी समान अधिकार दिए।

बाबा साहब को भारत रत्न नहीं देना चाहती थी कॉन्ग्रेस: पीएम मोदी

राज्यसभा में बोलते हुए पीएम मोदी ने कहा कि कॉन्ग्रेस ने बाबा साहब के विचारों को खत्म करने के लिए कोई कसर नहीं छोड़ी। इन्हें भारत रत्न देने की भी तैयारी नहीं थी। बीजेपी के समर्थन से बनी सरकार में बाबा साहब को भारत रत्न मिला। पीएम मोदी ने कहा कि अति पिछड़ी समुदाय से आने वाले सीताराम केसरी को उठाकर फुटपाथ पर फेंक दिया गया, वो वीडियो भी सार्वजनिक तौर पर उपलब्ध है और पूरे देश ने उसे देखा है।

सैम पित्रोदा को भी निशाने पर लिया

पीएम मोदी ने सैम पित्रोदा पर हमला बोलते हुए कहा कि इनके एक मार्गदर्शक अमेरिका में बैठे हैं, जो पिछले चुनाव में ‘हुआ तो हुआ’ के लिए फेमस हो गए थे। कॉन्ग्रेस के परिवार के काफी करीबी हैं। उन्होंने अभी-अभी बाबा साहब के योगदान को छोटा करने का भरपूर प्रयास किया।

राहुल गाँधी नॉन-स्टार्टर

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राहुल गाँधी को ‘युवराज’ और ‘नॉन स्टार्टर’ करार दिया। पीएम मोदी ने कहा, “अब इन्होंने अपने युवराज को एक स्टार्टअप बनाकर दिया है। अभी वो नॉन-स्टार्टर है। न तो वो लिफ्ट हो रहा है और न ही लॉन्च हो रहा है।”

पीएम मोदी ने बताया राज्य का महत्व

इस दौरान पीएम मोदी ने विभाजन की राजनीति पर भी जमकर हमला बोला। पीएम मोदी ने कहा कि हिंदुस्तान के किसी भी कोने में दर्द हो तो पीड़ा सबको होना चाहिए। अगर शरीर का एक अंग काम नहीं करता है तो पूरा शरीर अपंग माना जाता है। देश का कोई अंग विकास से वंचित रह जाएगा तो भारत विकसित नहीं हो पाएगा। राजनीतिक स्वार्थ के लिए देश को तोड़ने वाली भाषाएँ बोली जा रही हैं।

मोदी 3.0 विकसित भारत की नींव मजबूत करने के लिए पूरी शक्ति लगा देगी

पीएम मोदी ने कहा कि मोदी 3.0 विकसित भारत की नींव मजबूत करने के लिए पूरी शक्ति लगा देगी। उन्होंने कहा, “अगले 5 साल में डॉक्टरों की संख्या कई गुना बढ़ेगी। मेडिकल कॉलेजों की संख्या बढ़ेगी। इलाज सस्ता और सुलभ हो जाएगा। अगले 5 साल में हर गरीब के घर नल से जल का कनेक्शन होगा। गरीबों को पीएम आवास दिया जाएगा, कोई वंचित नहीं रहेगा। अगले 5 साल में सोलर पॉवर से बिजली बिल जीरो किया जाएगा। अगर ठीक से काम करेंगे, तो बिजली बनाकर लोग कमाई भी करेंगे। अगले पाँच साल में देश में पाइप से गैस कनेक्शन का नेटवर्क बनाने का काम किया जाएगा। हमारे युवा स्टार्टअप, यूनिकॉर्न की संख्या लाखों में होने वाली है। कई टियर-2, टियर-3 शहर उभरेंगे। रिसर्च फंडिंग जो सरकार ने जारी की है, अगले पाँच साल में रिकॉर्ड पेटेंट जारी होंगे।”

युवाओं को विदेश भेजने की जगह भारत में ही उच्च शिक्षा के स्तर को उठाया जाएगा। अगले पाँच साल में हर इंटरनेशनल स्पोर्ट्स कॉम्प्टिशन में भारत का तिरंगा लहराएगा। पीएम मोदी ने कहा कि अगले 5 साल में पब्लिक ट्रांसपोर्ट पूरी तरह से बदल जाएगा। देश वंदे भारत का विस्तार भी देखेगा और बुलेट ट्रेन भी देखेगा। देश हर क्षेत्र में आत्मनिर्भर होता नजर आएगा। अगले पाँच साल में भारत का सेमीकंडक्टर पूरी दुनिया में होगा।

पीएम मोदी ने कहा कि अपनी उर्जा जरूरतों के लिए लाखों-करोड़ों डॉलर का तेल मँगाता है, हम अगले पाँच सालों में दूसरों पर निर्भरता कम करने की कोशिश करेंगे। इसके लिए हम ग्रीन हाईड्रोजन अभियान चलाएँगे, जिससे उर्जा जरूरतें पूरी होंगी। हम 20 प्रतिशत इथेनॉल का इस्तेमाल करेंगे, जिससे किसानों को फायदा होगा। हम एडिबल ऑयल यानी खाने के तेल मँगाते हैं, उसे कम करेंगे। हम नेचुरल फार्मिंग के क्षेत्र में आगे बढ़ेंगे।

पीएम ने मोदी 3.0 को लेकर तमाम योजनाओं को भी सामने रखा। पीएम मोदी ने कहा कि एआई से लेकर डिजिटल इंडिया तेजी से आगे बढ़ेगा। भारत में तेजी से तकनीक का इस्तेमाल होगा। स्पेस के क्षेत्र में अगले पाँच साल में हम नई ऊँचाइयों को छुएँगे। पीएम मोदी ने कहा कि ग्रास-रूट इकोनॉमी में तेजी से बदलाव होगा। तीन करोड़ लखपति दीदी और 10 करोड़ महिलाएँ जो स्वयंसेवी समूहों से जुड़ी हैं, वो भारत को बदल देंगी।

पीएम मोदी ने कहा कि विकसित भारत हमारी कमिटमेंट है। हमारी हर साँस विकसित भारत के लिए समर्पित है। उसी विश्वास के साथ हम चलते रहे हैं, चल रहे हैं और चलते रहेंगे। ये समय देश के स्वर्णकाल के रूप में सदियों तक जाना जाएगा। देश तेज गति से बदल रहा है। जीवन के हर क्षेत्र में भारतीय नई ऊँचाई पर पहुँच रहे हैं।

थाने के बाहर मुस्लिम भीड़, धमकी सिर तन से जुदा, हाथ-पैर काटने की… SHO आनंद सिंह ठाकुर अकेले भिड़े, सोशल मीडिया पर कहा जा रहा- रियल सिंघम

मध्य प्रदेश के दमोह में कट्टरपंथी मुस्लिमों की एक भीड़ ने चार हिन्दू युवकों के हाथ-पैर और सिर काटने की धमकी दी गई। यह धमकी पुलिस के सामने मुस्लिमों की भीड़ इकट्ठा कर के दी गई। यहाँ मौजूद पुलिसकर्मियों से भी अभद्रता की गई और काफी बवाल काटा गया। पुलिस ने इस मामले में केस दर्ज कर लिया है। इसका एक वीडियो भी सामने आया है, जिसमें सैकड़ों की संख्या में जुटे कट्टरपंथियों के बीच इंस्पेक्टर आनंद सिंह ठाकुर पूरी निर्भयता के साथ भीड़ को चेतावनी देते नजर आ रहे हैं।

यह पूरा मामला मध्य प्रदेश के दमोह का है, जहाँ रविवार (3 फरवरी 2024) को चार हिन्दू युवकों का अंसार खान नाम के एक मुस्लिम दर्जी से कुछ विवाद हो गया। इस विवाद को देखकर एक इमाम हाफिज रिजवान खान यहाँ पहुँचा। बताया गया कि युवकों के कपड़े समय पर सिलकर नहीं दिए गए, जिसके कारण उनका आपस में विवाद हो गया।

यह विवाद इतना बढ़ गया कि मारपीट तक की नौबत आ गई। दावा यह भी किया गया है कि इस दौरान दर्जी अंसार खान के साथ-साथ इमाम हाफिज रिजवान खान की भी पिटाई कर दी गई। यहाँ तक कि मुस्लिम पक्ष इमाम की बाइक तोड़ने का भी आरोप उन युवकों पर लगा रही है। आखिरकार दर्जी और इमाम ने मामले की शिकायत नजदीकी पुलिस थाने में कर दी।

शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने FIR दर्ज करके आगे की जाँच शुरू कर दी। पुलिस जब तक इन युवकों पर एक्शन लेती, तब तक इमाम की पिटाई की अफवाह शहर भर में फैला दी गई। इसके बाद सैकड़ों मुस्लिमों की भीड़ कोतवाली थाने के बाहर इकट्ठा हो गई। वे पुलिस पर 24 घंटे में उन्हें गिरफ्तार करने का दबाव बनाने लगे। इस दौरान यह भीड़ पुलिस और हिन्दुओं को धमकियाँ देने लगी।

इसी बीच एक मुस्लिम व्यक्ति अकरम राईन ने यहाँ पर लाउडस्पीकर लगाकर मुस्लिमों को भड़काना शुरू कर दिया। उसने कहा कि यदि पुलिस हिन्दू युवकों पर कार्रवाई नहीं करती तो मुस्लिम खुद ही उनके हाथ-पैर काट देंगे। उसने इन हिंदू युवकों का ‘सर तन से जुदा’ करने की भी धमकी दी। इस दौरान भीड़ अल्लाह-हू-अकबर और नारा-ए-तकबीर जैसे आपत्तिजनक नारे लगाने लगी।

जब पुलिस थाने SHO आनंद सिंह ठाकुर ने भीड़ में अकेले घुसकर भड़काने वाले युवक से माइक लिया और उद्दंडता पर उतरे मुस्लिमों को कानून प्रक्रिया में बाधा डालने की चेतावनी देने लगे। इसके बाद राईन की जहरीले बयानबाजी से भड़के मुस्लिम उनके धक्का-मुक्की करने की कोशिश करने लगे। हालाँकि, SHO आनंद सिंह ठाकुर के सख्त रूप को देखकर भीड़ उन्हें अपने दबाव में नहीं ले सकी।

जब उन्मादी भीड़ थाने पर पहुँचकर चिल्लाती है और हाथ-पैर काटने की धमकी देती है तो SHO आनंद सिंह ठाकुर अकेले ही उन्मादी भीड़ में घुस जाते हैं। वे कहते हैं, “मैं अकेले आ गया हूँ। मैं अकेला खड़ा होता हूँ, हाथ लगाओ कोई। ये कौन सी बात होती है कि हाथ काट देंगे, जब मैं बोल रहा हूँ कि हम कार्रवाई करेंगे।”

SHO आनंद सिंह ठाकुर ने भीड़ को समझाया और साथ ही हंगामा कर रहे मुस्लिम युवकों को शांत रहने और हाथ-पैर काटने की धमकी देने वाले को चेतावनी दी। इस पूरे घटनाक्रम के कई वीडियो सामने आए हैं। SHO आनंद सिंह ठाकुर की बहादुरी की सोशल मीडिया पर जमकर तारीफ की जा रही है। उन्हें रियल सिंघम कहा जा रहा है।

दमोह कोतवाली SHO आनंद सिंह ठाकुर ने बताया कि अकरम राइन के खिलाफ आर्म्स एक्ट समेत कई मामले दर्ज हैं। माइक से भड़काऊ भाषण देने के बाद पुलिस ने उसके खिलाफ भारतीय दंड विधान की धारा 153ए, 141, 147 के तहत केस दर्ज किया है। SHO ने बताया कि जब पुलिस ने अकरम को गिरफ्तार किया तो उसके पास से एक पिस्टल भी जब्त की गई।  

पुलिस ने इस पूरे विवाद में 4 FIR दर्ज की है। जिन हिन्दू युवकों पर दर्जी और इमाम की पिटाई का आरोप है, उन पर भी मामला दर्ज किया गया है। वहीं, हंगामा मचाने वाली मुस्लिम भीड़ के 40 अज्ञात लोगों के विरुद्ध भी पुलिस ने मामला दर्ज किया है। हाथ-पैर काटने की धमकी देने वाले अकरम राईन को पुलिस ने गिरफ्तार भी कर लिया है।

अकरम पर रासुका लगाई गई है। इसके अलावा पुलिस ने आरिफ, राशिद, समीर और मोहम्मद इंतशार को भी गिरफ्तार किया है। फुटेज के आधार पर दमोह में दंगा भड़काने और हंगामा काटने वालों की पहचान की जा रही है। इस मामले का मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने भी संज्ञान लिया है और इस घटना के मैजिस्ट्रेट जाँच के आदेश दिए हैं।