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कृष्णा नदी में मिली भगवान विष्णु की मूर्ति, आभा रामलला जैसी: प्राचीन शिवलिंग भी मिला, इस्लामी आक्रांताओं से बचाने के लिए तलहटी में डालने का अनुमान

कर्नाटक के रायचूर जिले में कृष्णा नदी से भगवान विष्णु की मूर्ति और शिवलिंग मिला है। भगवान विष्णु की मूर्ति पर उनके दशावतार उकेरे हुए हैं। इसकी आभा हाल ही में अयोध्या में स्थापित की गई रामलला की प्रतिमा जैसी बताई जा रही है। कहा जा रहा है कि इस्लामी आक्रांताओं से बचाने के लिए मूर्ति नदी की तलहटी में डाल दी गई होगी।

जानकारी के अनुसार, कर्नाटक के रायचूर जिले के शक्ति नगर के पास कृष्णा नदी पर पुल बन रहा है। यहाँ पुल बनाने के दौरान भगवान विष्णु की मूर्ति और शिवलिंग नदी की तलहटी से मिली। नदी की तलहटी से निकली विष्णु प्रतिमा की तुलना रामलला की प्रतिमा से की जा रही है, जिसकी हाल ही में अयोध्या के राम मंदिर में प्राण-प्रतिष्ठा की गई है। रामलला की प्रतिमा के भी चारों तरफ दशावतार उकेरे गए हैं और उस प्रतिमा से इस मूर्ति का हावभाव मिलता-जुलता है। दोनों प्रतिमाओं में देवता बीच में शोभित हैं और प्रसन्न मुद्रा में हैं।

इस प्रतिमा के विषय में मीडिया को इतिहासकार पद्मजा देसाई ने बताया है कि यह 11वीं शताब्दी की है। यह कल्याण चालुक्य राजवंश के शासन के दौरान निर्मित की गई थी। देसाई ने बताया है कि इसके चारों तरफ विष्णु के दशावतार अंकित हैं। प्रतिमा में विष्णु की चार भुजाएँ हैं, इसमें ऊपर के दो हाथों में शंख और चक्र जबकि नीचे के हाथ वरदान देने की मुद्रा में हैं। उन्होंने बताया है कि मूर्ति वेंकटेश्वर से मिलती-जुलती है, लेकिन इसमें कुछ भिन्नताएँ भी हैं।

कृष्णा नदी की तलहटी से मिला प्राचीन शिवलिंग (फोटो साभारः न्यूज 9)

देसाई ने कहा है कि कभी यह मूर्ति किसी गर्भगृह में प्रतिष्ठित रही होगी। उन्होंने कहा है कि संभवतः इन मूर्तियों को आक्रान्ताओं के हमले से सुरक्षित करने के लिए नदी की तलहटी में डाल दिया गया होगा। बताया गया है कि इन प्रतिमाओं को इस्लामी बहमनी सुल्ताओं और आदिलशाही सुल्तानों से बचाने के लिए नदी की तलहटी में छुपाया गया होगा।

मूर्ति और शिवलिंग को भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) को सौंप दिया गया है। गौरतलब है कि अयोध्या में स्थापित की गई रामलला की प्रतिमा को मूर्तिकार अरुण योगिराज ने कर्नाटक से लाई गई श्यामल शिला से बनाया है। यह प्रभु श्रीराम के पाँच वर्षीय बालरूप को दर्शाती है।

पादरी की ‘भावना’ हुई आहत, लेकिन केजरीवाल पर वीडियो बनाने वाले को ‘किडनैप’ कर ले गई पंजाब पुलिस: रचित कौशिक की गिरफ्तारी क्यों, जानिए सब कुछ

6 फरवरी 2024 की रात सोशल मीडिया में ‘दिल्ली के एक पत्रकार’ को उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर से ‘किडनैप’ करने की खबरें आई। फिर पता चला कि जिनलोगों ने पत्रकार को उठाया है, वे आम आदमी पार्टी (AAP) शासित पंजाब पुलिस से थे। पंजाब पुलिस ने जिस जिस पत्रकार को उठाया है, वे यूट्यूबर रचित कौशिक हैं। वे ‘सब लोकतंत्र’ नाम से सोशल मीडिया में चैनल चलाते हैं।

ऑपइंडिया को मिली जानकारी के अनुसार दिल्ली के शाहदरा में रहने वाले रचित कौशिक अपनी भांजी की शादी में शामिल होने के लिए उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर गए थे। एक पादरी की शिकायत के आधार पर पंजाब पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार किया है। असल में दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और उनके बेटे के कथित भ्रष्टाचार को लेकर रचित ने एक वीडियो बनाया था। एक अन्य ट्विटर हैंडल ने यह वीडियो ट्वीट किया। इस ट्वीट देखकर एक पादरी की भावना आहत हुई और उसने पुलिस से शिकायत कर दी। इस शिकायत पर तत्परता दिखाते हुए पंजाब पुलिस ने किडनैपिंग वाले अंदाज में रचित कौशिक को यूपी से उठा लिया।

दिलचस्प यह है कि पादरी की शिकायत पर दर्ज FIR में कहीं भी रचित कौशिक या ‘सब लोकतंत्र’ चैनल का जिक्र नहीं है। न ही इसमें केजरीवाल के उस वीडियो का जिक्र है जिसे सोशल मीडिया में उनकी गिरफ्तारी का आधार बताया जा रहा है। यह एफआईआर ‘नो कन्वर्जन’ नामक ट्विटर हैंडल पर धार्मिक भावना आहत करने का आरोप लगाती है। इसी ट्विटर हैंडल से यह वीडियो साझा किया गया था।

जानकारी के अनुसार, 6 फरवरी 2024 की शाम 7 बजे के आसपास रचित कौशिक को एक सफ़ेद रंग की स्कार्पियो में आए चार सिख पुलिसकर्मी उठा ले गए। पुलिसकर्मियों ने वर्दी नहीं पहन रखी थी और ना ही उनके साथ स्थानीय पुलिस थी। पादरी ने लुधियाना में इसी साल जनवरी में मामला दर्ज कराया था।

रचित कौशिक के इन्स्टाग्राम से की गई पोस्ट के अनुसार, हाल ही में उन्होंने AAP नेताओं के भ्रष्टाचार को लेकर एक वीडियो बनाया था जिसके बाद उनकी गिरफ्तारी हुई है। उनके परिवार ने आरोप लगाया है कि ऐसा उनसे बदला लेने के लिए किया गया है। रचित के परिवार ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से इस मामले में दखल देने की अपील की है।

ऑपइंडिया ने रचित कौशिक के परिवार बात की है। उनकी माँ ने बताया है कि रचित कौशिक 6 फरवरी की शाम को मुजफ्फरनगर में अपनी भांजी को एक पार्लर से लेकर शादी वाली जगह पर जा रहे थे। इसी दौरान एकाएक एक सफेद स्कॉर्पियो उनकी गाड़ी के सामने आ गई। जब कौशिक ने गाड़ी रोकी तो स्कार्पियो से उतरे सिख व्यक्ति ने उन्हें उनकी गाड़ी से बाहर खींच लिया। उनके साथ के लोग जब तक कुछ समझ पाते तब तक उन्हें गाड़ी में बिठा लिया गया और सिर्फ इतना बताया गया कि उनके खिलाफ एक वारंट जारी किया गया है।

जब कौशिक के परिवार वालो ने उत्तर प्रदेश पुलिस को सूचना दी तो पता चला कि उनकी गिरफ्तारी के विषय में स्थानीय थाने को बताया गया था। पंजाब पुलिस ने यूपी पुलिस को वह FIR भी भेजी जिसके आधार पर उन्हें गिरफ्तार किया गया था। हालाँकि, रचित के परिवार को FIR के विषय में नहीं बताया गया है।

बताया गया है कि रचित कौशिक को धार्मिक भावनाएँ भड़काने के मामले में गिरफ्तार किया गया है। उनको गिरफ्तार करने के पीछे लुधियाना में की गई एक FIR का उपयोग किया गया है। इस FIR में पंजाब के लुधियाना के रहने वाले पादरी अलीशा सुलतान ने ट्विटर अकाउंट नो कन्वर्जन (@noconversion) के खिलाफ धार्मिक भावनाएँ आहत करने का आरोप लगाया है।

इस अकाउंट के विरुद्ध खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 295A, 153A, 153, 504 और आईटी एक्ट की धारा 67 के तहत मामला दर्ज किया गया है। जिस अकाउंट के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है, उसने रचित कौशिक का एक वीडियो ट्वीट किया था। इस वीडियो में रचित ने केजरीवाल के बेटे के भ्रष्टाचार को लेकर खुलासा कर रहे हैं। इस वीडियो में उन्होंने केजरीवाल के बेटे पुलकित पर आरोप लगाया था कि उन्होंने मुख्यमंत्री के बंगले में जिम का सामान किराए पर बाजार भाव से कहीं ज्यादा कीमत पर दिया है।

उन्होंने आरोप लगाया कि यहाँ लगी चार ट्रेडमिल को उन्होंने किराए पर दिया और इससे ₹10 लाख/माह वसूले। दावा किया जा रहा है कि इसी आधार पर रचित कौशिक को गिरफ्तार किया गया है। पंजाब पुलिस से उन्हें छोड़े जाने के लिए अब सोशल मीडिया पर आवाज उठ रही है।

इस गिरफ्तारी को अवैध बताया जा रहा है। रचित कौशिक के परिवार और उनके सोशल मीडिया हैंडल्स से भी गिरफ्तारी का विरोध किया गया है।

धर्मेंद्र-हेमा मालिनी की बेटी ईशा देओल अपने पति से हुईं अलग: 11 साल पहले हुई थी शादी, दो बेटियों की हैं माँ

तलाक की अफवाहों के बीच धर्मेंद्र और हेमा मालिनी की बेटी ईशा देओल ने कंन्फर्म कर दिया है कि वह अपने पति भरत तख्तानी से अलग हो गई हैं। ईशा और भरत ने एक जॉइन्ट स्टेटमेंट जारी किया है। स्टेटमेंट में लिखा है, “हम दोनों ने आपसी सहमति से अलग होने का फैसला लिया है। अब हम भले साथ नहीं हैं, लेकिन हमारे लिए हमारे दोनों बच्चों का भविष्य सबसे अहम है और हमेशा रहेगा। उम्मीद करते हैं कि आप लोग हमारी प्राइवेसी की रेस्पेक्ट करेंगे।”

टाइम्स ऑफ इंडिया की सहयोगी दिल्ली टाइम्स के मुताबिक, ईशा देओल और भरत तख्तानी का रिश्ता उस जगह पर पहुँच गया था, जहाँ से आगे बढ़ना संभव नहीं था। ऐसे में दोनों ने आपसी रजामंदी से अपनी-अपनी राहें अलग करने का फैसला ले लिया। उन्होंने अपनी निजता का आदर करने की भी अपील की है। बता दें कि जून 2012 में दोनों की शादी हुई थी। शादी के अभी 12 साल भी पूरे नहीं हुए हैं।

दो बेटियों की माँ हैं ईशा

ईशा और भरत की दो बेटियाँ हैं। दोनों की पहली बेटी राध्या का जन्म शादी के पाँच साल बाद 2017 में हुआ था। वहीं, दूसरी बेटी मिराया का जन्म 2019 में हुआ। ईशा देओल ने पैरेंटिंग पर एक किताब भी लिखी है। ईशा देओल बॉलीवुड की कई फिल्मों में काम किया है। हालाँकि, उनकी पहचान ‘धूम’ फिल्म से ज्यादा होती है।

लंबे समय से लग रही थी अटकलें

बता दें कि ईशा देओल और भरत तख्तानी के बीच तलाक की खबरें काफी समय से मीडिया में आ रही थीं। एक समय अपने पति के साथ तस्वीरें शेयर करने वाली ईशा की सोशल मीडिया पोस्ट से पति भरत तख्तानी गायब हो गए थे। पिछले साल हेमा मालिनी के जन्मदिन पर भरत तख्तानी नहीं दिखे तो रिश्तों को लेकर अफवाहें उड़ने लगीं। ईशा भी अधिकतर कार्यक्रमों में माँ हेमा मालिनी के साथ ही दिखती थीं।

भतीजे से NCP की जंग हारे शरद पवार: EC ने अजित के गुट को ही माना ‘असली’, पार्टी के नाम और चुनाव चिह्न पर दावा माना

महाराष्ट्र की सियासत में बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। ‘असली’ शिवसेना के बाद अब ‘असली’ राष्ट्रवादी कॉन्ग्रेस पार्टी (NCP) भी एनडीए गठबंधन का हिस्सा बन गई। चुनाव आयोग ने NCP को लेकर चल रही लड़ाई पर विराम लगा दिया है। आयोग ने अजित पवार की अगुवाई वाले एनसीपी के धड़े को ही असली माना है। एनसीपी का चुनाव निशान घड़ी अब अजित पवार वाला गुट इस्तेमाल करेगा।

चुनाव आयोग ने शरद पवार गुट को कुछ समय दिया है कि वो अपने नए नाम के चुनाव के लिए तीन नाम दें, ताकि अगले राज्यसभा चुनाव में उसका इस्तेमाल किया जा सके। हालाँकि, इसके लिए 7 फरवरी 2024 के दोपहर तीन बजे तक का ही समय है। इस तरह 7 माह से चल रहा विवाद खत्म हो गया है। 10 से ज्यादा सुनवाई के बाद चुनाव आयोग ने अपना फैसला सुनाया। इस दौरान दोनों पक्षों ने दलीलें दीं।

अजित पवार ने जताई खुली

चुनाव आयोग के फैसले के बाद एनसीपी अध्यक्ष अजित पवार ने खुशी जताई है। अजित पवार के हवाले से एनसीपी के एक्स हैंडल पर लिखा गया, “हमारे वकीलों द्वारा प्रस्तुत पक्ष को सुनने के बाद चुनाव आयोग द्वारा दिए गए निर्णय को विनम्रतापूर्वक स्वीकार करते हैं!”

शरद पवार फीनिक्स पक्षी की तरह, राख से फिर खड़े होंगे : आव्हाड

अजित पवार को NCP का नाम और चुनाव चिह्न मिलने पर शरद पवार गुट के नेता जीतेंद्र आव्हाड का बयान सामने आया है। उन्होंने कहा, “वो (अजित पवार) जाने वाला था, ये हमें पहले से ही पता था… इन्होंने शरद पवार का राजनीतिक गला घोंट दिया.. शरद पवार फीनिक्स हैं। वह राख से फिर उठ खड़े होंगे। हमारे पास अभी भी शक्ति है, क्योंकि हमारे पास शरद पवार हैं… हम सुप्रीम कोर्ट जाएँगे।”

अजित पवार की NCP ने मनाया जश्न

अजित पवार गुट के प्रदेश अध्यक्ष (महाराष्ट्र) सुनील तटकरे ने कहा, “हमें खुशी है कि फैसला हमारे पक्ष में आया है। हमारे फैसले को आज चुनाव आयोग ने कानूनी रूप से मान्य कर दिया है।”

बता दें कि 2 जुलाई 2023 को अजित पवार 40 विधायकों के साथ बीजेपी और शिवसेना (शिंदे) की अगुवाई वाली सरकार में शामिल हो गए थे। उन्होंने उप-मुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी। उनके साथ-साथ छगन भुजबल और प्रफुल्ल पटेल जैसे पार्टी के वरिष्ठ नेता भी सरकार में शामिल हुए थे। इस बगावत के समय प्रफुल्ल पटेल तो एनसीपी के कार्यकारी अध्यक्ष भी थे।

यही नहीं, धनंजय मुंडे और दिलीप वालसे पाटिल जैसे शरद पवार के करीबी नेता भी भतीजे अजित के साथ गए थे। इसके बाद 5 जुलाई 2023 को अजित पवार ने एनसीपी पर दावा ठोक दिया। अजित पवार के गुट ने 31 विधायकों और पाँच विधान पार्षदों के समर्थन का दावा किया था, जो बाद में बढ़ते चले गए। बताते चलें कि यही हाल उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना के साथ भी हुआ था।

इस पूरे मामले में चुनाव आयोग ने 10 सुनवाई की और अब जाकर फैसला दिया है। आयोग के फैसले के बाद अजित पवार का गुट ही असली एनसीपी हो गया है। चुनाव आयोग का फैसला ऐसे वक्त पर आया है जब महाराष्ट्र विधानसभा स्पीकर राहुल नार्वेकर को 15 फरवरी तक एनसीपी विधायकों की सदन की सदस्यता पर अयोग्यता को लेकर अपना फैसला सुनाना है।

म्यांमार बाॅर्डर की बाड़बंदी करेगा भारत, अमित शाह का ऐलान: 1643 किमी लंबी सीमा होगी सील, गश्त के लिए ट्रैक बनाने का भी मोदी सरकार ने किया फैसला

पूर्वोत्तर के उग्रवादियों और आतंकवादियों की शरणस्थली बन चुकी म्यांमार की सीमा को अब सील कर दिया जाएगा। भारत सरकार ने फैसला लिया है कि बॉर्डर को पूरी तरह से सील करके उसकी पेट्रोलिंग की जाएगी। अभी तक भारत और म्यांमार के बीच खुली सीमा थी, जिसके दोनों तरफ 16 किलोमीटर की आवाजाही पर प्रतिबंध नहीं था। इसका फायदा विद्रोही गुट भी उठाते थे।

कुछ साल पहले भारतीय सेना ने सीमा-पार म्यांमार में स्ट्राइक भी की थी। वहीं, पिछले कुछ समय से मणिपुर समेत पूर्वोत्तर के कई राज्यों में म्यांमार से आ रही भीड़ को देखते हुए सीमा को पूरी तरह से बंद करने का निर्णय लिया गया है। इसकी जानकारी केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने दी है।

केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा है कि मोदी सरकार देश की सीमाओं को अभेद्य बनाने के लिए कटिबद्ध है। उन्होंने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर लिखा, “सरकार ने पूरी 1643 किलोमीटर लंबी भारत-म्यांमार सीमा पर बाड़ लगाने का निर्णय लिया है। बेहतर निगरानी के लिए सीमा के साथ-साथ एक पेट्रोल ट्रैक भी बनाया जाएगा। मणिपुर के मोरेह में 10 किलोमीटर के हिस्से में बाड़ लगाई जा चुकी है।”

अमित शाह ने आगे लिखा, “Hybrid Surveillance System (HSS) के माध्यम से बाड़ लगाने के लिए 2 पायलट प्रोजेक्ट पर काम चल रहा है। इसके तहत अरुणाचल प्रदेश और मणिपुर में प्रत्येक 1 किलोमीटर सीमा पर बाड़ लगाई जाएगी। मणिपुर में लगभग 20 किलोमीटर लंबी सीमा पर बाड़ लगाने को भी मंजूरी मिल चुकी है और इस पर काम जल्द शुरू हो जाएगा।”

बता दें कि म्यांमार में मौजूदा समय में सैन्य शासन है। वहाँ के कई विद्रोही गुटों ने सीमा के आसपास के शहरों पर कब्जा कर लिया है। कई बड़े इलाके म्यांमार की सेना के हाथ से निकल गए हैं। ऐसे में खुली सीमा की वजह से म्यांमार के लोग भारत में घुस रहे हैं। मिजोरम में 40 हजार से अधिक शरणार्थी आ चुके हैं।

वहीं, म्यांमार से भारत में बड़ी संख्या में आने वाले रोहिंग्या मुस्लिमों के कारण देश में कानून-व्यवस्था से जुड़ीं समस्याएँ खड़ी हो गई हैं। ऐसे में भारत सरकार का यह फैसला अहम है। इससे पूर्वोत्तर राज्यों के रास्ते भारत में घुसने वाले लोगों पर लगाम लगेगी।

Modi government has decided to construct a fence along the Indo-Myanmar border, says Amit Shah

जो कुरान में नहीं वह नहीं मानेंगे: UCC पर बोले सपा सांसद एसटी हसन, असम वाले अजमल बोले- यह कानून कूड़ा में फेंकने लायक, मुस्लिम पर्सनल बोर्ड भी बिगड़ा

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मंगलवार (6 फरवरी 2024) को उत्तराखंड विधानसभा में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) से जुड़ा बिल पेश कर दिया। इसको लेकर तमाम मुस्लिम नेताओं की प्रतिक्रिया सामने आ रही है। कई मुस्लिम नेताओं और संगठनों ने अपनी प्रतिक्रिया दी है और UCC को नकार दिया है।

खुद को मुस्लिमों का रहनुमा मानने वाला ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (AIMPLB) ने समान नागरिक संहिता की की जरूरत को ही नकार दिया। कॉन्ग्रेस नेता इमरान प्रतापगढ़ी ने समान नागरिक संहिता को मुद्दे से भटकाने वाला बताया। वहीं, सपा नेता एसटी हसन ने कहा कि यह बिल कुरान के खिलाफ होगा तो उसका विरोध किया जाएगा।

मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड बोला- यूसीसी की जरूरत ही नहीं

मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के मौलाना खालिद रशीद फरंगी महली ने कहा, “जहाँ तक ​​यूसीसी का सवाल है, हमारी राय है कि प्रत्येक कानून में एकरूपता नहीं लाई जा सकती है। यदि आप किसी खास समुदाय को इस यूसीसी से छूट देते हैं तो इसे एक समान कोड कैसे कहा जा सकता है? संविधान का आर्टिकल 25 अभी भी है।”

फिरंगी महली ने आगे कहा, “संविधान में धार्मिक स्वतंत्रता दी गई है। मुस्लिमों में शादी विवाह के लिए के लिए शरिया लॉ 1937 से मौजूद है। हिंदुओं, सिखों के लिए कानून मौजूद है। ऐसे में किसी यूसीसी की जरूरत नहीं ही है। बाकी हमारी टीम इस बिल की कॉपी मिलने के बाद इसे पढ़ेगी, फिर आगे का फैसला लिया जाएगा।”

उत्तराखंड सरकार फेल, मुद्दों से ध्यान भटकाने की कोशिश: कॉन्ग्रेस

कॉन्ग्रेस के राज्यसभा सांसद इमरान प्रतापगढ़ी की भी प्रतिक्रिया सामने आई है। उन्होंने इस मामले को सियासी बताते हुए कहा, “भारतीय जनता पार्टी की राज्य सरकारों के पास भी गिनाने के लिए काम के तौर पर कुछ नहीं है। उत्तराखंड की सरकार कानून व्यवस्था से लेकर महिला सुरक्षा तक में पूरी तरह विफल हो चुकी है। पुष्कर सिंह धामी के पास और कोई तरीका नहीं बचा है लोकसभा चुनाव में जाने के लिए। यूसीसी का प्रोपेगेंडा खड़ा करना है।”

प्रतापगढ़ी ने कहा, “इस देश में अलग-अलग रंग के फूल हैं। अलग-अलग रंग के फूलों की महत्ता है। आप पूरे देश को एक रंग में रंग देना चाहते हैं। ये कहीं से भी भारत जैसे विविधता वाले देश के लिए अच्छा नहीं है। लेकिन पूरी तरह विफल है। अंकिता भंडारी को आजतक इंसाफ नहीं मिला है। उत्तराखंड में आज भी लोगों के पास रोजगार नहीं है, अग्निवीर योजना को लेकर युवाओं में गुस्सा.. इस सारे मुद्दों पर घिरी हुई उत्तराखंड की सरकार के और कुछ नहीं है।”

असम के बदरुद्दीन अजमल बोले- कचरे में डाल देना चाहिए ये बिल

एआईयूडीएफ के अध्यक्ष और असम से सांसद बदरुद्दीन अजमल ने कहा, “हमारा हिंदुस्तान एक रंगा-रंग बगीचा है। कोई भी बगीचा कितना भी खूबसूरत क्यों न हो, अगर उसमें सिर्फ एक फूल है तो आप उसे ज्यादा देर तक देख नहीं पाएँगे। भारत में लोग सभी धर्मों की संस्कृति जीवित है। यही हमारी खूबसुरती है। एक जिन्न आकर औरत-मर्द सबको एक कर दे… तो ऊपर वाला चाहता तो वैसा ही बना देता। दुनिया में मर्द बनाते ही नहीं, सारी औरतें बन जातीं। औरत नहीं बनाता तो सारे मर्द बन जाते। प्रकृति के खिलाफ कुछ भी ज्यादा दिन चलने वाला नहीं है।”

अजमल ने आगे कहा, “जब सरकार विफल हो जाती है तो कुछ चमकदार लाना होता है। असम के सीएम हिमंत बिस्वा सरमा भी समय-समय पर ऐसा ही करते हैं। लोगों का ध्यान भटकाने के लिए वो कुछ न कुछ बोलते रहते हैं। उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पीएम मोदी को खुश करना चाहते हैं। ये चलेगा नहीं, क्योंकि ये नेचर के खिलाफ है। बाकी इस बिल को कूड़ेदान में फेंक देना चाहिए।”

शरियत के खिलाफ कानून बना तो मंजूर नहीं: सपा संसद

इस बिल पर सपा सांसद एसटी हसन ने कहा कि कुरान के खिलाफ कोई भी कानून मंजूर नहीं है। उन्होंने कहा, “अगर कोई कानून ऐसा बनता है, जो हमें… मुसलमानों को कुरान-ए-पाक ने दी गई हिदायत के खिलाफ बनता है। जैसे कि हम साढ़े 14 सौ साल से पैतृक संपत्ति में बेटी को हिस्सा दे रहे हैं। कितना देते हैं, वो अलग बात है। उसके खिलाफ कोई कानून बनता है तो हम उसे मानने को तैयार नहीं है।”

एसटी हसन ने आगे कहा, “अगर मुसलमानों के हित में है, अगर शरियत के हिसाब से है… हर वो कानून शरियत का जिससे दूसरे को परेशानी नहीं हो रही तो इन्हें (भाजपा को) क्यों परेशानी है? कब तक ये हिंदू-मुसलमान कहकर पोलराइज करते रहेंगे। अब लोग तंग आ चुके हैं इस राजनीति से।”

गौरतलब है कि उत्तराखंड में समान नागरिक संहिता (UCC) आने के बाद समाज में कई बदलाव होने वाले हैं। नए कानून में विवाह, लिव-इन रिलेशनशिप, उत्तराधिकार से लेकर तमाम सिविल मामलों को लेकर प्रावधान किए गए हैं। ये सारे प्रावधान बिन किसी धार्मिक भेदभाव के सब पर लागू होंगे। मसलन, 18 साल की उम्र में अगर लड़की की शादी होनी है तो यह कानून सारे लोगों पर लागू होगा। 

लिव इन के लिए कराना होगा रजिस्ट्रेशन, माता-पिता की इजाजत जरूरी: रिलेशन खत्म होने पर भरण-पोषण की माँग कर सकती है महिला, जानिए उत्तराखंड के UCC में क्या-क्या प्रावधान

उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की सरकार ने समान नागरिक संहिता (यूसीसी) को लागू करने के लिए कानूनी जामा पहनाना शुरू कर दिया है। बिल को उत्तराखंड विधानसभा में रखा गया है। सीएम धामी ने खुद इस बिल को विधानसभा के पटल पर रखा। विधानसभा में UCC पेश करते ही यहाँ मौजूद विधायकों ने वन्दे मातरम और जय श्रीराम के नारे लगाए।

समान नागरिक संहिता बिल में विवाह, तलाक और लिव-इन रिलेशनशिप से जुड़े अहम बिंदु भी शामिल किए गए हैं। इसमें उत्तराधिकार के महत्वपूर्ण मामले पर भी जोर दिया गया है। इस बिल में लिव-इन रिलेशनशिप को लेकर जो खास प्रावधान किए गए हैं, उसके बारे में हम यहाँ विस्तार से बता रहे हैं।

उत्तराखंड की धामी सरकार ने लिव-इन रिलेशनशिव को कानून के दायरे में ला दिया है। उत्तराखंड सरकार ने लिव-इन रिलेशनशिप का रजिस्ट्रेशन अनिवार्य कर दिया है। इसके लिए दोनों (पुरुष और महिला) को अपना स्टेटमेंट जमा कराना होगा। इसमें दो बिंदु हैं।

I – उत्तराखंड में लिव-इन रिलेशनशिप में रहने वालों के लिए रजिस्ट्रेशन जरूरी है, भले ही वो बाहर के रहने वाले हों। इसके लिए जिले के रजिस्ट्रार से संपर्क करना होगा।

II – अन्य राज्यों में रहने वाले उत्तराखंड के निवासी उस रजिस्ट्रार के यहाँ संपर्क कर सकता है, जिसके अधिकार क्षेत्र में वह राज्य में आमतौर पर निवास करता है।

बच्चे को कानूनी वैधता: लिव-इन रिलेशनशिप के दौरान यदि बच्चा पैदा होता है तो उस बच्चे को अवैध नहीं कहा जाएगा। उस बच्चे को कानूनी संरक्षण मिलेगा। वो उस कपल का कानूनी बच्चा रहेगा।

किन परिस्थितियों में लिव-इन रिलेशनशिप का रजिस्ट्रेशन नहीं होगा?: लिव-इन रिलेशनशिप का रजिस्ट्रेशन नहीं किया जा सकता, अगर..

I- जिन रिश्तों को कानूनी रूप से लिव-इन रिलेशिनशिप धारा 3 के उपधारा (1) के खंड डी के तहत प्रतिबंधित किया गया हो। इनमें 74 नजदीकी रिश्तों की सूची है।

हालाँकि जिन लोगों की स्थानीय प्रथाएँ या मान्यताएँ इसका (लिव-इन रिलेशनशिप) का विरोध नहीं करते, वैसे लोगों को अनुमति दी जाएगी। बस, ये लोकनीति और नैतिकता के खिलाफ न हो।

II- ऐसे लोग लिव-इन रिलेशनशिप में नहीं जा सकते, जिनमें से एक-से-कम एक व्यक्ति शादीशुदा है या पहले से किसी के साथ लिव-इन रिलेशनशिप में रह रहा है, लेकिन उससे अलग नहीं हुआ है।

III- लिव-इन रिलेशनशिप के लिए पहुँचे जोड़ों में कोई नाबालिग होगा तो इसका रजिस्ट्रेशन नहीं हो पाएगा।

IV- जोड़ों में से कोई एक भी व्यक्ति किसी भी तरह से दबाव में हो या उससे झूठ बोला गया हो या किसी तरह के पहचान की समस्या हो (पहचान छिपाने का मामला), वह लिव-इन रिलेशन के योग्य नहीं है।

लिव-इन रिलेशनशिप को कानूनी सुरक्षा- रजिस्ट्रेशन अनिवार्य

लिव-इन रजिस्ट्रेशन को कैसे रजिस्टर्ड कराएँ, इसके लिए चार महत्वपूर्ण बिंदुओं में बताया गया है कि किस तरह से इसका रजिस्ट्रेशन होगा।

1-लिव-इन रिलेशनशिप में रह रहे, या लिव-इन रिलेशनशिप शुरू करना चाहते हैं, तो आपको रजिस्ट्रार ऑफिस में स्टेटमेंट जमा कराना होगा। यानी इसका रजिस्ट्रेशन कराना होगा।

2- रजिस्ट्रार स्टेटमेंट की जाँच करेगा और उसके सही पाए जाने पर आगे की प्रक्रिया को बढ़ाएगा। इसमें सेक्शन 380 (प्रतिबंधित रिश्तों) के तहत बताए रिश्तों को मान्यता नहीं मिलेगी।

3- रजिस्ट्रार दावों की पुष्टि के लिए आवेदक को बुला सकता है। सभी कागजातों की जाँच करने और संतुष्ट नहीं होने पर अधिकारी अन्य साक्ष्य या कागजात की माँग कर सकता है।

रजिस्ट्रार को मेनटेन करना होगा रजिस्टर : लिव-इन रिलेशनशिप के रजिस्ट्रेशन से लेकर संबंध विच्छेद तक की पूरी जानकारी रजिस्ट्रार को रखनी पड़ेगी। इसके लिए कानूनी व्यावधान किए गए हैं।

लिव-इन रिलेशनशिप का रिश्ता खत्म करने का फैसला: लिव-इन रिलेशनशिप में रह रहे युगल, या उनमें से कोई भी एक रजिस्ट्रा ऑफिस में स्टेटमेंट जमा करके इस रिस्थे को खत्म करने की अपील कर सकता है। अगर एक व्यक्ति ऐसा कर रहा है, तो उसे रजिस्ट्रार के साथ ही दूसरे साथी को भी इसकी एक प्रति देगा, यानी लिखित में उसे लिव-इन रिलेशनशिप से बाहर निकलने की जानकारी देनी होगी।

लिव-इन रिलेशनशिप से जुड़ी रजिस्ट्रार की जिम्मेदारियाँ

1-इस कानून के लागू हो जाने के बाद रजिस्ट्रार की जिम्मेदारियाँ बढ़ जाएँगी, क्योंकि उसे स्थानीय पुलिस थाने में इसकी सूचना देनी पड़ेगी। अगर युगल की उम्र 21 वर्ष से कम होगी, तो उनके माता-पिता को भी सूचना देनी पड़ेगी।

2- अगर लिव-इन पार्टनर द्वारा रजिस्ट्रार को दी गई जानकारी गलत पाई जाती है या कोई शक होता है तो रजिस्ट्रार तुरंत इसकी सूचना स्थानीय थाना अधिकारी को देंगे।

3-अगर लिव-इन रिलेशनशिप का रिश्ता तोड़ने के लिए एक पक्ष आगे बढ़ता है तो रजिस्ट्रार के सामने अपना स्टेटमेंट दर्ज कराएगा। रजिस्ट्रार इसकी सूचना दूसरे पक्ष को देगा। अगर जोड़े में से एक कोई 21 वर्ष से कम उम्र का/की है तो उनके माता-पिता को भी इस बारे में सूचना दी जाएगी।

लिव-इन रिलेशनशिप की सूचना न देने पर रजिस्ट्रा को इस बारे में जानकारी मिलती है तो वो एक नोटिस जारी करेगा। इस नोटिस के जारी करने के 30 दिन के भीतर जोड़े को अपना स्टेटमेंट जमा कराना होगा और रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया को पूरा करना होगा। अगर ऐसा नहीं किया तो कानूनी कदम उठाए जा सकते हैं।

कानूनी कार्रवाई और दंड प्रक्रिया

1- लिव-इन रिलेशनशिप में रहने वाले जोड़े अगर एक माह के अंदर रजिस्ट्रेशन नहीं कराते हैं और ये दोष साबित हो जाता है तो उन्हें तीन माह की जेल और 10 हजार रुपए तक जुर्माना लगाया जा सकता है।

2- लिव-इन रिलेशनशिप के रजिस्ट्रेशन के दौरान जानकारी छिपाने जैसे मामलों में रजिस्ट्रार उनका रजिस्ट्रेशन भी रद्द कर सकता है। इसके लिए उसे तीन माह तक की जेल और 25 हजार रुपए तक का जुर्माना या दोनों दंड साथ दिए जा सकते हैं।

3-लिव-इन रिलेशनशिप में रहने वाले जोड़े अगर स्टेटमेंट दर्ज नहीं कराते हैं और नोटिस का भी जवाब नहीं देते हैं तो ऐसे लोगों को 6 माह की सजा और 25 हजार रुपए का जुर्माना या दोनों दंड लगाए जा सकते हैं।

लिव-इन रिलेशनशिप के बाद भरण-पोषण की जिम्मेदारी: अगर एक महिला को उसका लिव-इन पार्टनर छोड़ता है तो वो भरण-पोषण के खर्चे को क्लेम कर सकती है। इसके लिए वो तय नियमों के तहत कोर्ट का सहारा ले सकती है।

बता दें कि समान नागरिक संहिता विधेयक के ड्राफ्ट को पाँच सदस्यीय पैनल ने 2 फरवरी 2024 को उत्तराखंड सरकार को सौंपा था। इस पैनल की अध्यक्षता सुप्रीम कोर्ट की पूर्व जज रंजना देसाई कर रही थीं। इस विधेयक को पेश करने के साथ ही उत्तराखंड देश का पहला ऐसा राज्य बन गया है, जहाँ UCC कानून लाने की प्रक्रिया शुरू की गई है।

बहन, भतीजी, भांजी, बुआ, मौसी… नहीं बना सकेंगे बीवी, उत्तराखंड में UCC लागू होते ही इन रिश्तों के बीच ‘निकाह’ नहीं होगा मुमकिन

उत्तराखंड विधानसभा के विशेष सत्र में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने आज (6 फरवरी 2024) समान नागरिक संहिता (UCC) बिल पेश किया। इस बिल पर उत्तराखंड विधानसभा में चर्चा चल रही है। समान नागरिक संहिता के अंतर्गत सभी धर्मों के नागरिकों पर समान कानून लागू होगा। इसमें विवाह से जुड़े प्रावधानाओं को लेकर भी स्पष्ट जानकारी दी गई है।

UCC के अंतर्गत किन रिश्तों में विवाह को कानूनी रूप से निषिद्ध किया गया है, इसे आप नीचे दी गई सूची से समझ सकते हैं। ये सूची बताती है कि UCC लागू होने के बाद पुरुष किन महिलाओं और महिलाएँ किन पुरुषों से विवाह नहीं कर सकेंगी।

कोई भी पुरुष इन महिलाओं से विवाह नहीं कर सकेगाकोई भी महिला इन पुरुषों से विवाह नहीं कर सकेगी
बहनभाई
भांजी भांजा
भतीजीभतीजा
मौसीचाचा/ताऊ
बुआ चचेरा भाई
चचेरी बहनफुफेरा भाई
फुफेरी बहनमौसेरा भाई
मौसेरी बहनममेरा भाई
ममेरी बहननातिन का दामाद
माँपिता
सौतेली माँसौतेला पिता
नानी दादा
सौतेली नानी सौतेला दादा
परनानी परदादा
सौतेली परनानीसौतेला परदादा
माता की दादीपरनाना (पिता का नाना)
माता की दादीसौतेला परनाना
दादीनाना
सौतेली दादीसौतेला नाना
पिता की नानी परनाना
पिता की सौतेली नानी सौतेला परनाना (माता का सौतेला परनाना)
पिता की परनानी माता के दादा
पिता की सौतेली परनानीमाता का सौतेला दादा
परदादीबेटा
सौतेली परदादीदामाद
बेटीपोता
बहू (विधवा)बेटे का दामाद
नातिन नाती
पोतीबेटी का दामाद
पोते की विधवा बहूपरपोता
परनातिनपोते का दामाद
परनाती की विधवाबेटे का नाती
बेटी के पोते की विधवापोती का दामाद
बेटे की नातिनबेटी का पोता
परपोतीनाती का दामाद
परपोते की विधवानातिन का बेटा
नाती की विधवामाता का नाना

इन सभी रिश्तों में किए गए विवाह को UCC के अंतर्गत वैध रिश्ते नहीं माना जाएगा। गौरतलब है कि हिन्दू विवाह अधिनियम के तहत यह बंदिशें पहले से देश की बहुसंख्यक आबादी पर लागू थीं। अब यह उत्तराखंड के भीतर पूरी जनता पर लागू होंगी।

उत्तराखंड पहला ऐसा भारतीय राज्य होगा जहाँ UCC लागू किया जाएगा। अभी तक देश में केवल गोवा में ही UCC लागू था जो कि पुर्तगालियों के दौर से चला आ रहा है। उत्तराखंड के इस UCC कानून का ड्राफ्ट एक 5 सदस्यीय पैनल द्वारा बनाया गया था और इसे 2 फरवरी को उत्तराखंड सरकार को सौंपा गया था। इसके बाद 4 फरवरी, 2024 को इसको कैबिनेट की मंजूरी भी मिल गई थी।

कौन है आसिफ मुज्तबा जिसे दिल्ली दंगों के मास्टरमाइंड शरजील इमाम ने बताया है सह-साजिशकर्ता, रोहिंग्या मुस्लिमों के नाम पर उगाह चुका है करोड़ों रुपए

साल 2020 में देश की राजधानी दिल्ली में हुए हिंदू विरोधी दंगों ने पूरी दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींचा था। इन दंगों के मास्टरमाइंड में एक शरजील इमाम भी था। शरजील पिछले चार सालों से जेल में है। दिल्ली पुलिस की चार्जशीट में उसका पूरा खेल सामने आ चुका है। चार्जशीट में एक और नाम सामने आया था, जो अब भी आजाद है और अपने काम को बेहद चालाकी से अंजाम भी दे रहा है। वो भी पूरे इस्लामी इकोसिस्टम के साथ समन्वय बनाकर। उसका नाम है आसिफ मुज्तबा।

खास बात ये है कि शरजील इमाम की गिरफ्तारी के बाद लेफ्ट और इस्लामी इकोसिस्टम से जुड़ी मीडिया ने उसे बेगुनाह ठहराने की कोशिश की। उसके भाई मुजम्मिल के बयानों को आधार बनाकर बेगुनाही की कहानियों को बढ़ा-चढ़ाकर छापा। मुजम्मिल भी शरजील इमाम और आसिफ मुज्तवा के सारे कारनामों को जानता था। ये पूरी रिपोर्ट इसी खास मुद्दे पर…

दिल्ली में हिंदू विरोधी दंगों के 4 साल हो चुके हैं। शरजील इमाम तब से जेल में है। इस मामले में दिल्ली पुलिस ने 15,000 पन्नों की चार्जशीट में पूरी क्रोनोलॉजी को समझाई है कि कैसे शरजील इमाम, उमर खालिद और अन्य मास्टरमाइंड ने मिलकर 5 दिसंबर 2019 से ही दिल्ली को जलाने की पूरी रूपरेखा तैयार कर ली थी। इस बीच, शरजील को बेगुनाह बताने में वामपंथी और इस्लामी इकोसिस्टम पूरा जोर लगा रहा है।

इस बीच ‘द वायर’ ने एक रिपोर्ट प्रकाशित की, जिसका शीर्षक था ‘दोषसिद्धि नहीं, एक्टिविस्टों से मदद नहीं, शरजील इमाम ने जेल में बिताए चार साल’। इसमें शरजील के भाई मुजम्मिल का बयान छापा गया है। उसने तमाम भावुक बातें तो कही हैं, साथ ही कहा है कि उसका भाई यानी शरजील इमाम बेगुनाह है। मुजम्मिल लिबरल गिरोह से नाकाफी मदद की भी शिकायत करता है।

इसी समय आसिफ मुज्तबा का एक ट्वीट सामने आया है। आसिफ मुज्तबा माइल्स2स्माइल नाम का एक एनजीओ का चलाता है और अपनी प्रोफाइल पर गर्व से ‘शाहीन बाग मूवमेंट’ लिखता है। वह खुद को शरजील इमाम का छोटा भाई बताता है और उसकी मदद के लिए लोगों को आगे आने के लिए कहता है।

आसिफ मुज्तबा शरजील इमाम के जेल में बिताए 4 साल पर अपनी बात रखता है और मुजम्मिल के बयान को भी एक्स पर शेयर करता है। वो शरजील इमाम को इनोसेंट यानि ‘मासूम और बेगुनाह’ बताता है।

अगर दिल्ली दंगों के केस नंबर 59 के चार्जशीट को देखें तो इसमें कहा गया है कि शरजील इमाम के मोबाइल से एक ह्वाट्सएप ग्रुप चैट मिला था। इस ग्रुप में आसिफ मुज्तबा और मुज्जमिल के नाम सामने आए हैं। इसमें शरजील इमाम के वॉट्सऐप चैट की एक तस्वीर है, जिसमें वो अपने छोटे भाई मुजम्मिल से बात कर रहा है। ये वही मुजम्मिल है, जो अभी शरजील को बेगुनाह बता रहा है।

इस चैट में मुजम्मिल वैश्विक न्यूज एजेंसी रॉयटर्स का शाहीन बाग प्रदर्शनों से जुड़ा एक आर्टिकल शेयर करता है। मुज्जमिल सवाल करता है कि इस आर्टिकल में सिर्फ आसिफ मुज्तबा का बयान छापा गया है, शरजील इमाम का नहीं। इस पर शरजील कहा कि कोई बात नहीं है, वे दोनों (शरजील इमाम और आसिफ मुज्तबा) ही मास्टरमाइंड हैं।

शरजील और मुजम्मिल की बातचीत

मुजम्मिजल आसिफ के जिस बयान की शिकायत कर रहा है वो है, “The masterminds of the intricately organized operation are two young engineers, trained at the elite Indian Institute of Technology (IIT) – Aasif Mujtaba and Sharjeel, who gave only one name. Mujtaba said he and Sharjeel identify volunteers, delegate tasks, bring in speakers from outside the area, and made sure the protesters avoided any confrontations with police.”

इसका हिंदी अनुवाद इस तरह से है कि ‘इस जटिल लेकिन संगठित ऑपरेशन के मास्टरमाइंड दो युवा इंजीनियर हैं, जो भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) से प्रशिक्षित हैं – आसिफ मुज्तबा और शरजील, जिन्होंने केवल एक नाम बताया। मुज्तबा ने कहा कि वह और शरजील वॉलंटियर्स की पहचान करते हैं, उन्हें उनका काम बताते हैं, वो बाहर से वक्ता बुलाते हैं और ये कोशिश करते हैं कि प्रदर्शन कर रहे लोग पुलिस के साथ कोई झड़प न करें।’

ये तो वो सबूत है, जो ये साफ बता रहा है कि मुज्जमिल को दिल्ली में हिंदुओं के खिलाफ हुई हिंसा से जुड़ी शरजील इमाम की हर बात पता थी। हालाँकि, वो अभी भी छाती पीटते हुए ये साबित करने का प्रयास कर रहा है कि शरजील बेगुनाह है और उसे जानबूझकर फँसाया गया है।

अब हम आपको बताते हैं कि आसिफ मुज्तबा का असली काम क्या है और उसे कब शुरू किया। आसिफ मुज्तबा माइल्स2स्माइल नाम का एक एनजीओ को चलाता है। इस एनजीओ उद्देश्य मुस्लिमों के उत्थान के लिए काम करता है। ट्विटर बायो में भी वो खुद को शाहीन बाग से जुड़ा बताता है। रॉयटर्स जैसे इंटरनेशनल एजेंसियों के आर्टिकल इसकी पुष्टि कर चुके हैं।

आसिफ मुज्तबा का ट्विटर बायो

माइल्स2स्माइल एनजीओ वही संगठन है, जो साल 2020 में हुए दिल्ली के हिंदू विरोधी दंगों के भुक्तभोगी मुस्लिमों और म्यांमार से आए रोहिंग्या घुसपैठियों के नाम पर ‘राहत’ कार्य चलाकर चर्चा में आया था। इस एनजीओ की स्थापना आसिफ मुज्तबा (शरजील इमाम ने सहयोगी मास्टरमाइंड के तौर पर नाम लिया है) ने जून 2020 में की थी। वहीं, ट्विटर आईडी अप्रैल 2020 में ही बना ली गई थी। ये समय दिल्ली में हुए एंटी-हिंदू दंगों के ठीक बाद का समय था।

तब तक दिल्ली दंगों को लेकर शरजील इमाम को गिरफ्तार किया जा चुका था। इस एनजीओ की वेबसाइट पर दी गई जानकारी के अनुसार, इसका पहला काम हिंदू विरोधी दंगों के दौरान घायल हुए मुस्लिमों की मदद के लिए अल-इस्लाह पब्लिक स्कूल में मेडिकल कैंप चलाने का था। उसी समय स्क्रॉल ने हर्ष मंदर के एनजीओ द्वारा उसी स्कूल में ‘मुस्लिम पीड़ितों की मदद’ के लिए चलाए जा रहे कैंप को लेकर रिपोर्ट लिखी थी।

स्क्रॉल की रिपोर्ट में हर्ष मंदर ने लिखा था, “वॉलंटियर नेटवर्क के माध्यम से स्थानीय लोग भी सामने आ रहे हैं और हर्ष मंदर के ‘कारवाँ-ए-मोहब्बत’ के जरिए अंजाम दिया जा रहा है। उन्होंने बाबू नगर के अल-इस्लाह स्कूल में इमरजेंसी कैंप लगाया है, जहाँ मेडिकल और लीगल मदद दी जा रही है।” यहाँ ये बात ध्यान रखना जरूरी है कि हर्ष मंदर ने भी सीएए विरोधी प्रदर्शनों में भाषण दिए थे।

माइल्स2स्माइल्स फाउंडेशन का रोहिंग्या और नूहं कनेक्शन

माइल्स2स्माइल्स फाउंडेशन के संस्थापक आसिफ मुज्तबा के अनुसार, इस एनजीओ ने हरियाणा के नूहं में रोहिंग्या शिविर में एक एजुकेशन सेंटर बनाया था। आसिफ ने ट्विटर पर दावा किया था कि उसके संगठन ने हरियाणा के नूहं में रोहिंग्या शरणार्थियों (घुसपैठिए पढ़ें) के लिए कंस्ट्रक्शन कराए और रहने के लिए घर बनाए। इसके लिए उसके एनजीओ को फंड भी मिला था।

बता दें कि नूहं हरियाणा के मेवात इलाके में है और ये इलाका ‘मिनी पाकिस्तान‘ के रूप में जाना जाता है। यहाँ हिंदुओं महिलाओं के अपहरण, बलात्कार और जबरन धर्मांतरण की खबरें नियमित रूप से सामने आती रही हैं। बता दें कि ऑपइंडिया ने बताया था कि आसिफ मुज्तबा ने सरकार से अनुमति लिए बिना ही अवैध रूप से रह रहे रोहिंग्याओं के लिए घर बनाए थे।

दरअसल, जब हरियाणा सरकार अतिक्रमण विरोधी अभियान चला रही थी, तब आसिफ काफी हल्ला मचा रहा था। बता दें कि माइल्स2स्माइल जब से बना है, तब से लेकर अब तब वह रोहिंग्या घुसपैठियों के लिए काम करता रहा है। अपनी वेबसाइट पर भी इस एनजीओ ने रोहिंग्याओं के लिए किए जा रहे कामों को लिस्ट किया है।

यही नहीं, नूहं हिंसा के बाद जब सरकार ने कार्रवाई की, तब भी वो सिर्फ रोहिंग्याओं के खिलाफ कार्रवाई को ही मुद्दा बना रहा था।

आसिफ के ट्वीट का स्क्रीनशॉट

आसिफ और इस्लामी गिरोह के फेक न्यूज पेडलर जुबैर का कनेक्शन

साल 2022 में देश के कई राज्यों में अवैध अतिक्रमण के खिलाफ अभियान चलाए गए। तब आसिफ मुज्तबा के एनजीओ माइल्स2स्माइल ने उनके नाम पर पूरे देश में उगाही की। यही नहीं, जुबैर ने इस काम को आगे बढ़ाया और लोगों से बढ़-चढ़कर मदद देने की अपील की।

इस काम के लिए कीटो जैसी फंडराइजिंग साइट्स की मदद ली गई। इस तरह से एक करोड़ रुपए से अधिक की धनराशि उगाही गई, उसे इस्लामी इकोसिस्टम ने सिर्फ मुस्लिमों में बाँटे गए। इसके लिए जुबैर ने एनजीओ को बधाई भी दी।

अब तक तो ये साफ ही हो चुका है कि आसिफ मुज्तबा वही आदमी है, जिसका जिक्र खुद शरजील इमाम ने मास्टरमाइंड के तौर पर किया है। दिल्ली पुलिस की चार्जशीट में भी उसका नाम आया है। शरजील के भाई मुजम्मिल को भी दोनों के बारे में पता है। इंटरनेशनल मीडिया रिपोर्ट्स में भी उसके बयान छपे हैं।

न सबके बावजूद आसिफ मुज्तबा न सिर्फ खुलकर अपना एनजीओ चला रहा है, बल्कि उसकी आड़ में वह रोहिंग्याओं की खुलकर मदद कर रहा है। इसमें मोहम्मद जुबैर जैसे फेक न्यूज पेडलर का भी उसे साथ मिल रहा है, जो शुरू से ही दिल्ली के एंटी-हिंदू दंगों के दोषियों को बचाने के लिए काम करता रहा है।

यह लेख मूल रूप से अंग्रेजी भाषा में नूपुर जे शर्मा द्वारा लिखा गया है। मूल रिपोर्ट को पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें।

कोई भी बच्चा नहीं होगा नाजायज, पर पैत्तृक संपत्ति में ‘श्रवण कुमार’ के बराबर नहीं होगी ‘औरंगजेब’ की औकातः उत्तराखंड के UCC बिल में सबको सम्मान, सबको समान अधिकार

उत्तराखंड में समान नागरिक संहिता (UCC) आने के बाद समाज में कई बदलाव होने वाले हैं। नए कानून में शादी विवाह, लिव-इन रिलेशनशिप को लेकर भी कुछ प्रावधान किए गए हैं। ये सारे प्रावधान बिन किसी भेदभाव के सब पर लागू होंगे। मसलन 18 साल की उम्र में अगर लड़की की शादी होनी है तो 18 में ही होगी। चाहे वो हिंदू परिवार की लड़की हो या मुस्लिम परिवार की। इसी तरह डॉयवोर्स भी कानूनी ढंग से ही लिया जाएगा। किसी के मुँह से कह देने भर से ये तलाक नहीं वैध्य होगा। इसी तरह लिव-इन रिलेशन में भी रहने के लिए दोनों पार्टनर के माता-पिता को जानकारी देना जरूरी होगा। वहीं उत्तराधिकारी संबंधी प्रावधान की बात करें तो कानून में सम्मान श्रवण कुमार जैसे बच्चों को दिया गया है, औरंगजेब जैसे बच्चों को नहीं।

अब आइए बिंदुवार ढंग से समझते हैं कि समान नागरिक संहिता से शादी संबंधी मामलों में क्या प्रावधान रहेगा।

समान नागरिक संहिता में विवाह से संबंधित प्रमुख बिंदु

  • किसी भी वर्ग में शादी करने की उम्र लड़के के लिए न्यूनतम 21 वर्ष और लड़की की 18 वर्ष होगी।
  • विवाह केवल एक पुरुष और एक महिला के मध्य होगा।
  • बहुविवाह प्रतिबंधित होगा। पति-पत्नी के जीवित रहते दूसरे से शादी करने का अधिकार नहीं होगा।
  • तलाक के बाद अगर उसी पुरुष से या अन्य पुरुष से शादी करनी हो तो महिला को किसी शर्त में नहीं बाँधा जाएगा।
  • विवाह के बाद यदि धर्म परिवर्तन करना है तो पति/पत्नी को बताना जरूर होगा। अगर ऐसा नहीं होता तो दूसरे व्यक्ति को तलाक का और गुजारा भत्ता क्लेम करने का अधिकार होगा।
  • शादी के बाद पंजीकरण अनिवार्य होगा। प्रक्रिया सरल बनाने के लिए रजिस्ट्रेशन का वेब पोर्टल भी होगा।
  • सरकारी योजना का लाभ भी केवल उन्हीं दंपतियों को मिलेगा जिनकी शादी रजिस्टर्ड होगी।
  • विवाह में धार्मिक विधि-विधानों से बिलकुल छेड़छाड़ नहीं हुई है। हर समुदाय अपनी परंपरा अनुसार शादी कर सकता है।

UCC में उत्तराधिकार संबंधी कानून

  • व्यक्ति की सभी संतानों का, चाहे वो पुत्र को या पुत्री, उनके पिता की संपत्ति में बराबर का अधिकार होगा।
  • रिश्ता जायज हो या नाजायज… अगर उस रिश्ते से संतान उत्पन्न होती है तो उसे जायज मानकर सम्मान भी दिया जाएगा और संपत्ति में अधिकार भी।
  • अगर बच्चे के गर्भ में रहने के दौरान पिता का देहांत हो जाता है तो तब भी उसे इस कानून की धारा-55 के तहत अन्य संतानों की तरह संपत्ति में अधिकार मिलेगा।
  • अगर कोई संतान श्रवण कुमार की तरह अपने माता-पिता की सेवा करता है और दूसरा औरंगजेब की तरह संपत्ति के लिए अपने माता पिता से गल बर्ताव करता है तो इस नए कानून के तहत दोनों तरह के बच्चों का संपत्ति में समान अधिकार नहीं होगा।
  • नए कानून में धारा-3(1-ड़), 3 (3-झ) के तहत प्रावधान है कि कोई भी व्यक्ति किसी को भी स्वेच्छा अपनी वसीयत में शामिल कर सकता है और चाहे तो उसे हटा भी सकता है।
यूसीसी में अधिकार


विवाह-विच्छेदन या डायवोर्स

  • – UCC में हर वर्ग के लिए प्रावधान है कि डायवोर्स एक प्रक्रिया (कानूनी) से ही होगा। किसी मजहब को पर्सनल लॉ के नाम पर इसमें रियायत नहीं मिलेगी।

लिव-इन रिलेशनशिप

लिव-इन रिलेशनशिप के दौरान या उसके बाद होने वाले विवादों से बचने के लिए सरकार यूसीसी में प्रावधान लाई है कि:

  • शादी से पहले एक दूसरे के साथ लिव-इन में रहने के लिए कपल्स के लिए एक रजिस्ट्रेशन करवाना होगा ताकि दोनों के सहवास की जानकारी और उनके पहचान के बारे में प्रशासन पर रहे।
  • इसके बाद इस रजिस्ट्रेशन के बारे में माता-पिता को भी बताना होगा कि वो घर से अलग कहाँ और किसके साथ रहते हैं। ऐसा लड़के और लड़की दोनों को करना होगा।
  • लिव में रहने के लिए लड़की की उम्र 18 साल और लड़की की उम्र 21 होनी जरूरी है।