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जिस मौलाना ने कहा- मुस्लिमों घबराना मत, उसके गिरफ्तार होते ही मुस्लिम पत्रकार करने लगे बाप रे बाप: बताया नया ‘औरंगजेब’, इस्लामी भीड़ पहले से सड़कों पर

हिंदुओं की आस्था पर जहर उगलने वाले और उनकी तुलना कुत्तों से करने वाले मौलाना सलमान अजहरी की गिरफ्तारी के बाद सोशल मीडिया पर तथाकथित निष्पक्ष पत्रकार उनके समर्थन में उतर गए हैं। कहा जा रहा है कि ऑनलाइन ट्रोलर्स ने जानबूझकर ऐसी वीडियो काटकर वायरल की जिसकी वजह से सलमान अजहरी को गिरफ्तार किया गया है।

जनता के रिपोर्टर के संस्थापक रिफत जावेद ने लिखा, “मुफ्ती सलमान अजहरी की गिरफ्तारी बहुत ही शर्मनाक बात है। हैरान भी नहीं हूँ कि इसमें गुजरात पुलिस का हाथ है। ये वही पुलिस है जो काजल हिंदुस्तानी जैसे नफरत फैलाने वालों को नहीं पकड़ती। डोंगरी के मुस्लिमों का क्या वो तो बस तीसरे दर्जे के कॉमेडियन और रियलिटी शो विजेता के लिए एकजुट होने में ही अच्छे हैं।”

पत्रकार वाजिद खान ने सलमान अजहरी की फोटो वीडियो डालते हुए अजहरी को छोड़ने की माँग की। वाजिद ने एक ट्वीट में लिखा, “वक्त के फिरओंन, तुम किस किस पे जुल्मों सितम ढाओगे। आज नहीं तो कल ज़रूर हश्र में पछताओगे।” इसके अलावा यह भी बताया कि AIMIM के राष्ट्रीय प्रवक्ता वारिस पठान ने घाटकोपर में मुफ्ती से मुलाकात की और साथ में लिखा कि भारत का हर मुसलमान सलमान अजहरी के साथ खड़ा है।

खुद को डरे हुआ पत्रकार बताने वाला अली सोहराब ने लिखा, सलमान अजहरी साहब को संवैधानिक पुलिस द्वारा कोर्ट के बाहर घुमाया जा रहा है।

बायो में खुद को खेल पत्रकार लिखने वाले रेहान मलिक ने भी इस मुद्दे को उठाया। रेहान ने लिखा, “मुसलमानों आज आवाज नहीं उठाओगे तो कल दबा दिए जाओगे, फिर रोना मत, मुस्लिमों के लिए एकजुट होने का समय है।”

रेहान ने अपने एक ट्वीट में मुफ्ती सलमान की तुलना औरंगजेब आलम से की और ये भी कहा कि हर मुसलमान को अजहरी का समर्थन करना चाहिए।

बता दें कि केवल इस्लामी पत्रकार ही नहीं, बल्कि सोशल मीडिया पर #ReleaseMuftiSalmanAzhari #IStandWithSalmanAzhari जैसे हैशटैग चलाए जा रहे हैं। इससे पहले सलमान अजहरी के समर्थक सड़कों पर उतरकर बवाल करने लगे थे। हालाँक पुलिस ने फिर मौलाना से बयान दिलवाया। जिसमें भीड़ से शांत रहने की अपील की गई।

मालूम हो कि सलमान अजहरी की एक 53 मिनट की वीडियो इस माह के शुरुआत में खूब वायरल हुई। इस वीडियो में अजहरी को कहते सुना गया कि बुत रखने से मस्जिद बुतखाना नहीं बनेगा। इसके अलावा वीडियो में हिंदुओं की तुलना कुत्तों से की गई थी और मुसलमानों को भी भड़काने का काम हुआ था। वीडियो में मौलाना ने कहा था,

”मुसलमानों घबराओ मत, अभी खुदा की शान बाकी है। अभी इस्लाम जिंदा है, अभी कुरान बाकी है, ऐ जालिम काफिर क्या समझता है जो रोज हमसे उलझता है, अभी तो कर्बला का आखिरी मैदान बाकी है। कुछ देर की खामोशी है, किनारा आएगा…आज कुत्तों का वक्त है, कल हमारा दौर आएगा।”

इस भाषण के वीडियो क्लिप वायरल होने के बाद ही मौलाना पर एफआईआर हुई और गुजरात एटीएस ने जाकर मौलाना को गिरफ्तार किया।

काले झंडों और जूतों से हुआ सनातन विरोधी स्वामी प्रसाद मौर्या का स्वागत, रोकना पड़ा काफिला: समाजवादी पार्टी ने आक्रोशित लोगों को कहा ‘गुंडा’

उत्तर प्रदेश के प्रयागराज से सटे कौशांबी में सनातन विरोधी समाजवादी पार्टी के नेता स्वामी प्रसाद मौर्या को काले झंडे दिखाए गए हैं। कौशांबी में हिंदू जागरण मंच के कार्यकर्ताओं ने स्वामी प्रसाद के काफिले को काले झंडे दिखाएँ और जमकर नारेबाजी की। इस दौरान हिंदू जागरण मंच के कार्यकर्ताओं ने जमकर प्रदर्शन भी किया। वो स्वामी प्रसाद मौर्या के सनातन निरोधी बयानों का विरोध कर रहे थे।

कौशांबी में चल रहे ‘राष्ट्रीय बौद्ध महोत्सव’ में शामिल होने के लिए स्वामी प्रसाद मौर्या वहाँ पहुँचे थे। इसी दौरान ‘हिंदू जागरण मंच’ के कार्यकर्ताओं ने काले झंडे और जूते दिखाए। इसके बाद पुलिस ने दो कार्यकर्ताओं को हिरासत में ले लिया।

कौशांबी जिले के मंझनपुर के सीओ अभिषेक सिंह ने बताया कि सपा नेता स्वामी प्रसाद मौर्या मंझरपुर थाना इलाके में आयोजित ‘राष्ट्रीय बौध महोत्सव’ में हिस्सा लेने के लिए पहुँच रहे थे, तभी ये घटना हुई। यहाँ हिंदू जागरण मंच के कार्यकर्ताओं ने प्रदर्शन करते हुए सपा नेता स्वामी प्रसाद मौर्या का विरोध किया और काफिले का घेराव कर काला कपड़ा भी दिखाया।

इस मामले में समाजवादी पार्टी की प्रतिक्रिया भी सामने आई है। सपा ने एक्स पर लिखा- “कौशांबी में सपा के वरिष्ठ नेता एवं एमएलसी श्री स्वामी प्रसाद मौर्या जी की गाड़ी पर सत्ता संरक्षित गुंडों द्वारा हमला, अत्यंत निंदनीय. पिछड़ा विरोधी इस भाजपा सरकार में निरंतर पिछड़ों पर हो रहा आघात, शर्मनाक। मामले की जाँच कराए सरकार, आरोपितों के विरुद्ध हो सख्त से सख्त कार्रवाई।”

स्वामी प्रसाद मौर्या की भी इस मामले में प्रतिक्रिया सामने आई है। हर बार की तरह यहाँ भी उन्होंने विक्टिम कार्ड ही खेला। स्वामी प्रसाद मौर्या ने मीडिया से कहा, “दलितों, गरीबों, पिछड़े वर्ग पर सदियों से हमला हो रहा है, लेकिन हमारी संस्कृति हमलावरों को माफ करने की भी है… मुझे उम्मीद है कि वे अराजकता का रास्ता छोड़ेंगे।” उन्होंने कहा, “जिसके दिल में काला है, जिसका दिल काला है, जिसका मन काला है, जिसका विचार काला है, वह काला झंडा लेकर तो आयेगा ही।”

बता दें कि स्वामी प्रसाद मौर्या अक्सर सनातन विरोधी बयान देते रहे हैं। उन्होंने रामलला की प्राण प्रतिष्ठा के समय भी सनातन विरोधी बयान देते हुए रामचरित मानस को बकवास बताया था। स्वामी प्रसाद मौर्या ने कहा, “देखो-सुनो, पूरी दुनिया में भारत एक ऐसा देश है जहाँ पत्थरों में प्राण प्रतिष्ठा किया जाता है। हमारे समाजवादी पार्टी के प्रवक्ता हैं भाटी जी, जिन्होंने कहा कि संत जी वो तो अच्छा है, अपने परिवार में मरने वाले लोगों की जनवासे होती हैं। उसमें भी प्राण प्रतिष्ठा कर दो। हमेशा जिंदा रहा करेंगे, फिर मरेंगे ही नहीं अमर हो जाएँगे।”

उन्होंने आगे कहा था, “अगर प्राण प्रतिष्ठा करने से पत्थर सजीव हो जाता है तो प्राण प्रतिष्ठा करने से मुर्दा क्यों नहीं चल सकता है। यहाँ पर पाखंड है, ढोंग है, आडंबर है। और वैसे भी जो खुद भगवान है, जो सबका कल्याण करता है। हम इंसान की क्या हैसियत की हम उसको प्राण प्रतिष्ठा करें।”

उत्तराखंड कैबिनेट ने UCC की रिपोर्ट पर लगाई मुहर, अब विधानसभा में लाकर बनाया जाएगा कानून: CM धामी के आवास पर हुई बैठक में फैसला

उत्तराखंड सरकार द्वारा समान नागरिक संहिता (यूनिफॉर्म सिविल कोड-यूसीसी) लाने की तैयारी अंतिम चरण में है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के सरकारी आवास पर हुई कैबिनेट की बैठक में यूसीसी कमेटी की रिपोर्ट को स्वीकार कर लिया गया। इसे 6 फरवरी को विधानसभा के पटल पर रखा जा सकता है।

यूसीसी मसौदा रिपोर्ट को कैबिनेट की मंजूरी के साथ सरकार 6 फरवरी को उत्तराखंड विधानसभा सत्र के दौरान यूसीसी विधेयक पेश करने के लिए पूरी तरह तैयार है। उत्तराखंड विधानसभा का चार दिवसीय विशेष सत्र पहले ही 5-8 फरवरी तक बुलाया जा चुका है। इसके लागू होते ही उत्तराखंड आजादी के बाद यूसीसी अपनाने वाला पहला भारतीय राज्य बन जाएगा। यह पुर्तगाली शासन के दिनों से ही गोवा में चालू है।

इसके लिए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में मुख्यमंत्री आवास पर कैबिनेट की बैठक बुलाई गई थी, जिसमें उत्तराखंड कैबिनेट ने यूसीसी रिपोर्ट को मंजूरी दे दी।

सुप्रीम कोर्ट की सेवानिवृत्त न्यायाधीश रंजना प्रकाश देसाई की अगुवाई वाली यूसीसी मसौदा समिति ने शुक्रवार (2 फरवरी 2024) को मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को मसौदा सौंपा। धामी ने पहले बताया था कि यूसीसी ड्राफ्ट पर 2,33,000 लोगों ने सुझाव दिए हैं। उन्होंने इस सप्ताह की शुरुआत में कहा था, “मसौदा रिपोर्ट लगभग 740 पेज लंबी है और 4 खंडों में है…।”

यूसीसी राज्य में जाति और धर्म के बावजूद सभी समुदायों के लिए समान नागरिक कानून का प्रस्ताव करता है। यह सभी नागरिकों के लिए समान विवाह, तलाक, भूमि, संपत्ति और विरासत कानूनों के लिए एक कानूनी ढाँचा प्रदान करेगा। उत्तराखंड में यूसीसी विधेयक का पारित होना 2022 के विधानसभा चुनावों के दौरान राज्य के लोगों से भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) द्वारा किए गए एक प्रमुख वादे को पूरा करने का प्रतीक होगा।

यूसीसी के विरोध में तीखी प्रतिक्रिया

बता दें कि देहरादून के शहर काजी ने धमकी देते हुए इस पर आपत्ति जताई थी। देहरादून के शहर काजी मोहम्मद अहमद कासमी ने यूसीसी लागू किए जाने पर नुकसान की चेतावनी हेते हुए कहा है कि सरकार जो चाहे वह फैसला ले सकती है। उनके हाथ में प्रदेश की बागडोर है। लेकिन, इस फैसले को लागू किए जाने के बाद आगे जो भी नुकसान होगा, उसकी भी जिम्मेदारी सरकार की होगी।

कॉन्ग्रेस ने भी किया विरोध

इस्लामी तुष्टिकरण की अपनी लाइन पर चलते हुए कॉन्ग्रेस भी इस फैसले पर सवाल उठा रही है। राज्य सरकार पर निशाना साधते हुए पार्टी ने कहा है कि इस तरह की नीति से उत्तराखंड को कोई फायदा नहीं होने वाला। भाजपा सिर्फ लोकसभा चुनाव में फायदा उठाने की कोशिश के लिए ऐसे काम कर रही है।

कॉन्ग्रेस नेता सूर्यकांत धस्माना ने बीजेपी पर ध्रुवीकरण के आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि सरकार ने यूसीसी पर किन लोगों की राय ली है, वो बताए। सिविल लॉ के किन प्रावधानों को बदले जाने की जरूरत महसूस हुई, सरकार वो भी सामने रखे। धस्माना ने कहा कि हमें यूसीसी से कोई दिक्कत नहीं है, लेकिन इससे उत्तराखंड में किसी भी तबके को कोई लाभ नहीं होने वाला है।

पोलैंड भागने की तैयारी में था तिहरे हत्याकांड वाला लल्लन खान, योगी सरकार ने बाप-बेटे पर लगा दिया NSA: नेपाल जाने से पहले ही धरा गया ‘गब्बर’

उत्तर प्रदेश के लखनऊ के मलिहाबाद में हुए तिहरे हत्याकांड के मुख्य आरोपित लल्लन खान उर्फ सिराज और उसके बेटे फराज पर राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) लगाया जाएगा। पुलिस ने दोनों आरोपितों को गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस का मानना है कि यह हत्याकांड सिर्फ आपसी रंजिश का मामला नहीं है, बल्कि इसके पीछे पाकिस्तान और नेपाल से तार जुड़े हो सकते हैं। पुलिस दोनों आरोपितों से पूछताछ कर रही है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, लल्लन खान उर्फ गब्बर खान उर्फ सिराज (उम्र 70) ने अपने बेटे फराज के साथ शुक्रवार (2 फरवरी, 2024) शाम जमीन विवाद में 15 साल के मासूम बच्चे समेत 3 लोगों की गोली मारकर हत्या कर दी थी। इसके बाद से दोनों फरार हो गए थे और मुरादाबाद में जाकर छिप गए थे। अब दोनों को ही पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। लल्लन खान के दो बेटे पोलैंड रहते हैं, वो किसी तरह से नेपाल भाग जाना चाहता था और वहाँ से वो भी अपने तीसरे बेटे के साथ पोलैंड ही भागने की जुगत में था। जब उसके सारे रास्ते बंद हो गए, तब वो अपने वकीलों के माध्यम से कोर्ट में सरेंडर की योजना बनाने लगा, लेकिन वो सरेंडर कर पाता, इससे पहले ही पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया।

लल्लन खान का पाकिस्तान से भी कनेक्शन सामने आ रहा है, साथ ही वो जिस नेपाल के रास्ते पोलैंड भागने की फिराक में था, वहाँ से भी उसका और पोलैंड में बैठे बेटों का कनेक्शन है। लल्लन खान को इस वारदात के महज 36 घंटों में ही गिरफ्तार कर लिया गया। दरअसल, उसके पास पासपोर्ट समेत जरूरी चीजें मौजूद थी। उसके पास पैसों की भी कोई कमीं नहीं। ऐसे में पुलिस ने आशंका जताई थी कि वो विदेश भागने का प्रयास कर सकता है।

लल्लन खान खुद को गब्बर खान कहलवाना पसंद करता था, उसके ऊपर कभी दो दर्जन मामले दर्ज हुआ करते थे। भले ही आखिरी मुकदला 1999 में दर्ज हुआ हो, लेकिन 70 साल की उम्र में जिस खौफनाक तरीके से उसने ट्रिपल मर्डर को अंजाम दिया, उससे उसकी दबंगई का अंदाजा लगाया जा सकता है। ऐसे में पुलिस ने उसे पकड़ने के लिए मजबूत जाल बिछाया। उसकी तस्वीरें एयरपोर्ट से लेकर बड़े बस अड्डों को भी भेजी गई। पुलिस ने एयरपोर्ट के साथ-साथ यूपी के सभी जिलों और एसएसबी को भी अलर्ट पर रखा था। चूँकि मुरादाबाद की तरफ उसका लोकेशन मिल रहा था, ऐसे में पुलिस ने मुरादाबाद की तरफ ध्यान केंद्रित किया।

यूपी तक के मुताबिक, डीसीपी वेस्ट राहुल राज ने बताया कि 36 घंटे के अंदर दोनों मुख्य संदिग्धों को पकड़ लिया गया। उन्होंने यह भी कहा कि सिराज के दो बेटे नेपाल कनेक्शन के कारण पोलैंड में हैं, जिससे उनके भागने की चिंता बढ़ गई थी। पुलिस ने हवाई अड्डों और सीमाओं पर अधिकारियों को सतर्क कर दिया और पाँच टीमों के साथ निगरानी शुरू कर दी। हालाँकि, अब वो पकड़ लिया गया है और उससे पूछताछ शुरू कर दी गई है।

लखनऊ पुलिस ने बताया है कि लल्लन खान जैसे आपराधिक रिकॉर्ड वाला व्यक्ति इतने समय तक शांत कैसे बैठा था, ऐसे में उसकी जाँच बेहद जरूरी है। पुलिस ने बताया है कि वो अब लल्लन खान पर गैंगस्टर एक्ट के तहत कार्रवाई करेगी। इसके तहत लल्लन खान की अवैध संपत्तियाँ भी कुर्क की जाएँगी। यही नहीं, इनके नेपाल, पोलैंड और पाकिस्तानी कनेक्शन को देखते हुए एनएसए लगाया जा रहा है और इन कनेक्शन की भी पूरी तरह से जाँच की जाएगी। अब ये अपराधी किसी भी सूरत में बच नहीं पाएंगे।

पूनम पांडेय के सस्ते पब्लिसिटी स्टंट पर होगी कार्रवाई? अगर किसी पुरुष ने ऐसा किया होता तब?

तो जिंदा है पूनम पांडेय? आखिर यह स्टंट क्यों और इस पर कार्रवाई कब? यह कितनी अजीब बात है कि एक दिन पहले जिसने अपने मरने की अफवाह फैलाई, वह अगले दिन जिंदा निकली। और वह भी इस कारण अफवाह फैलाई थी क्योंकि वह कथित रूप से जागरूकता पैदा करना चाहती थी। यह जागरूकता भी अजीब चीज है, जो पैदा करने के लिए इतनी बड़ी सनसनी फैलाई जा सकती है। वैसे पूनम पांडेय सनसनी का ही दूसरा नाम है।

पूनम पांडेय के कार्य पर कोई टिप्पणी न करते हुए उनके सनसनी फैलाने वाले क़दमों पर ही बात की जानी चाहिए। पूनम पांडेय, पहले भी इस प्रकार के कार्य कर चुकी हैं और इसे लेकर किसी को हैरानी नहीं होनी चाहिए थी, मगर इस प्रकार से मौत का मजाक बनाना? लोगों को बेवकूफ समझना? कुछ देर के लिए लोगों को यह खबर सही लगी कि पूनम पांडेय अब इस दुनिया में नहीं रही हैं, मगर उसके बाद लोगों के दिल में संदेह पैदा होने लगा।

क्योंकि, सर्वाइकल कैंसर एकदम से जान नहीं ले सकता है और जो महिला कुछ ही दिन पहले आयोजनों में सम्मिलित हो रही हो, वह एकदम से कैसे मर सकती है? यह एकदम से मरने की बात लोगों को समझ नहीं आई और लोग कहने लगे कि कुछ गलत है। मगर जब पूनम पांडेय ने आकर यह कहा कि वह जीवित हैं तो लोगों का गुस्सा भड़क गया। उन्हें लगा कि कैसे कोई अपनी मौत को लेकर पब्लिसिटी स्टंट कर सकता है? ‘ऑल इंडियन सिने वर्कर्स एसोसिएशन’ के अध्यक्ष सुरेश श्यामलाल गुप्ता ने तो पूनम पांडेय पर FIR दर्ज कराने की भी बात की।

उनका कहना था कि क्या यह मजाक है? आप सस्ती लोकप्रियता के लिए इस सीमा तक नीचे गिर सकती हैं? बॉलीवुड में अभी तक किसी ने ऐसी सस्ती हरकत नहीं की है। आपने लोगों की भावनाओं के साथ खिलवाड़ किया है और उन्होंने यह भी कहा कि एफआईआर कराना इसलिए आवश्यक है जिससे कोई और व्यक्ति कभी भी ऐसी हरकत न करे। अब एक सबसे महत्वपूर्ण बात यहाँ पर उभरकर आती है कि यदि पूनम पांडेय के स्थान पर कोई पुरुष ऐसा कोई चीप पब्लिसिटी स्टंट करता तो क्या होता?

क्या पुलिस अभी तक उसके घर पर नहीं पहुँच गई होती? क्या उसे लेकर नकारात्मक बातें नहीं हो रही होतीं? उसे माफी माँगने पर मजबूर नहीं किया जा रहा होता? सब कुछ होता? पूनम पांडेय की इस हरकत पर लोग निंदा तो कर रहे हैं, मगर यह तब तक अधूरा है जब तक इस प्रकार के पब्लिसिटी स्टंट को लेकर कोई कानूनी कदम नहीं उठाया जाता। क्या पूनम पांडेय का यह जागरूकता स्टंट सरकार द्वारा की गई इस घोषणा से बढकर है कि वह सर्वाइकल कैंसर के लिए टीकाकरण अभियान चलाएगी?

क्या कई डॉक्टरों द्वारा चलाए जा रहे जागरूकता अभियानों से बढ़ कर यह स्टंट था? यदि नहीं तो क्या पूनम पांडेय को बिना किसी कानूनी कार्यवाही के छोड़ दिया जाना चाहिए? हालाँकि, उन पर कदम तभी उठाया जाना चाहिए था, जब उन्होंने वर्ष 2011 में क्रिकेट विश्व कप के दौरान यह दावा किया था कि विश्व कप जीतने पर वह न्यूड होंगी और इसके बाद भी कई अनाप-शनाप बातों के चलते वह चर्चा में रही थीं। दरअसल, पूनम पांडेय जैसे लोगों को चर्चा ही चाहिए होती है, परन्तु मौत को लेकर इस प्रकार के स्टंट नहीं होने चाहिए और अगर ऐसा कोई करता है, तो इस पर कड़े से कड़ा कदम उठाया जाना चाहिए, इसमें कोई भी रियायत नहीं होनी चाहिए।

हिंदू परिवार ने मुस्लिमों पर लगाया प्रताड़ित करने का आरोप, धर्मांतरण की दी धमकी: दरभंगा पुलिस ने बताया जमीनी विवाद

बिहार के दरभंगा जिले के एक हिंदू परिवार ने इस्लाम अपनाने के लिए मजबूर किया जाने का आरोप लगाया है। परिवार ने मारपीट और आपत्तिजनक चीजें फेंकेने का भी आरोप लगाया है। पीड़ित परिवार का कहना है कि मुस्लिम बाहुल्य गाँव में वे इकलौते हिंदू परिवार हैं जिसके कारण उन्हें परेशान किया जा रहा है। हालाँकि प्रशासन ने इसे जमीनी विवाद बताते हुए धार्मिक विवाद या दबंगई के आरोपों को खारिज किया है।

पीड़ित परिवार ने मोहम्मद गुड्डू और मोहम्मद लड्डू समेत उनके पाँच भाइयों पर प्रताड़ित करने के आरोप लगाए हैं। ये मामला दरभंगा के भालपट्टी ओपी थाना इलाके के मुरिया गाँव का है। यहाँ राजधन देवी अपने परिवार के साथ रहती हैं। उनके बेटे विक्की अपनी परेशानी लेकर डीएम राजीव रौशन के पास पहुँचे, तब जाकर मामला मीडिया की नजर में आया।

पीड़िता महिला ने अपने बेटे के माध्यम से जिलाधिकारी को दिए गए आवेदन में कहा है कि उसका परिवार जिस गाँव में रहता है, वह पूरा इलाका मुस्लिमों का है और गाँव में उसका अकेला हिन्दू परिवार है। ऐसे में दूसरे समुदाय के लोग लगातार उसे अलग अलग तरह से न सिर्फ प्रताड़ित कर रहे हैं बल्कि उसके घर में भी घुसकर हंगामा करता है। विक्की ने यह भी आरोप लगाया है कि मुस्लिम समुदाय के लोगों द्वारा उसके घर के अंदर आपत्तिजनक सामान फेंक दिया जाता है।

विक्की ने दैनिक भास्कर से बातचीत में मोहम्मद गुड्डू और मोहम्मद लड्डू के परिवार पर आरोप लगाए हैं। विक्की ने कहा कि गुड्डू और लड्डू 5 भाई हैं और वो लोग चाहते हैं कि उनका परिवार अपना घर छोड़कर चला जाए। या फिर इस्लाम धर्म कबूल कर लें। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, विक्की ने कहा अब मुझे लगता है कि हमारे संविधान में हिन्दू को रहने का अधिकार नहीं है। इसलिए सभी अधिकारी हमें घुमा रहे है।

पीड़ित परिवार का आरोप है कि वह पिछले तीन साल से अधिकारियों के यहाँ चक्कर लगा रहे हैं लेकिन उनकी बात नहीं सुनी जा रही है। जिलाधिकारी राजीव रौशन ने कहा है कि एक लड़का इस संबंध में हमसे मुलाकात करने आया था। आवेदन प्राप्त होने के बाद जाँच के लिए सदर अनुमंडल अधिकारी को निर्देशित किया गया है कि तुरंत गाँव पहुँच कर पूरे मामले की जांच कर आवश्यक कार्रवाई करे।

नोटः दरभंगा पुलिस ने इस मामले में धार्मिक विवाद से इनकार किया है। यह तथ्य सामने आने के बाद इसे रिपोर्ट में शामिल कर दिया गया है। इस मामले से जुड़ी अपडेटेड खबर पढ़ने के लिए इस लिंक पर क्लिक करें

कुर्क होगी अतीक अहमद की कोठी ‘मन्नत’, शाहरुख़ खान का फैन था माफिया: काली कमाई से बवनाया था

उत्तर प्रदेश सरकार ने माफिया सरगना अतीक अहमद की ग्रेटर नोएडा स्थित कोठी ‘मन्नत’ को जल्दी की कुर्क करेगी। पुलिस कमिश्नर कोर्ट ने चार करोड़ रुपए से अधिक की इस कोठी को जब्त करने का आदेश जारी कर दिया है। अब किसी भी समय भी उस पर कार्रवाई हो सकती है। पता चला कि अतीक ने अपनी काली कमाई से मन्नत कोठी को तैयार किया था।

माफिया अतीक अहमद के खिलाफ कैंट थाने में दर्ज गैंगस्टर के मुकदमे के तहत इसकी छानबीन की गई है। पुलिस कमिश्नर की कोर्ट में इस मामले की सुनवाई हुई। इसके बाद गैंगस्टर एक्ट की धारा 14 (1) के तहत इस संपत्ति को कुर्क करने का आदेश जारी किया गया। यह कोठी ग्रेटर नोएडा के सेक्टर 36 के A ब्लॉक में स्थित है, जिसका नंबर 107 है।

सीटी डीसीपी दीपक भूकर के अनुसार, प्रयागराज के पुलिस कमिश्नर रमित शर्मा की कोर्ट ने गैंगस्टर एक्ट के तहत अतीक अहमद की कोठी को जब्त करने का आदेश दिया है। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि अतीक को ग्रेटर नोएडा में साल 1994 में 500 वर्गमीटर के इस भूखंड को आवंटित किया गया था। इसके बाद वह उसने कोठी बनवाई थी।

माफिया अतीक अहमद बॉलीवुड ऐक्टर शाहरुख खान का फैन था। उसने शाहरुख खान की कोठी के नाम पर अपनी कोठी का नाम मन्नत रखा था। अतीक अहमद इस कोठी में आता-जाता भी था। जाँच के दौरान पुलिस को काली कमाई से खरीदी गई इस कोठी को लेकर तमाम अहम दस्तावेज मिले थे। पुलिस ने जाँच के दौरान प्रशासन, विकास प्राधिकरण और बैंक की भी मदद ली थी।

दरअसल, 24 फरवरी 2023 को उमेश पाल और उनके दो सरकारी सुरक्षाकर्मियों की हत्या कर दी गई थी। इस हत्याकांड में अतीक अहमद और उसके शूटरों का नाम आया था। जब पुलिस और एसटीएफ उन शूटरों की तलाश करने के दौरान अतीक के ठिकानों पर छापेमारी की थी। इसी दौरान नोएडा स्थित उसकी कोठी के बारे में पता चला था।

अतीक अहमद के बेटे ने वर्ष 2015 में ग्रेटर नोएडा के सेक्टर-36 में स्थित इसी कोठी में रहकर एक यूनिवर्सिटी में पढ़ाई की थी। इतना ही नहीं, अतीक अहमद की बड़ी-बड़ी बैठक इस मकान में होती थीं। जमीन और रंगदारी से जुड़ी डील यहाँ फाइनल होती थी। इस वजह से यह कोठी अपराधियों का अड्डा भी बन गई थी।

जाँच के दौरान यह भी सामने आया था कि उमेश पाल की हत्या करने के बाद अतीक का बेटा असद और उसका साथी शूटर गुलाम इस मन्नत में पहुँचे थे और कुछ देर रूकने के बाद वहाँ से निकल गए थे। आशंका जताई जा रही है कि कोठी में पहले से ही पैसा छिपा कर रखा गया था और असद व गुलाम पैसों को लेने के लिए ही ग्रेटर नोएडा की इस कोठी में गए थे।

नोएडा पुलिस और एलआइयू ने जब छानबीन शुरू की थी तो पता चला कि एक राजमिस्त्री मन्नत नाम की इस कोठी में पिछले कई सालों से रह रहा था। यह कोठी बीपीएल कार्डधारक राजमिस्त्री हुब लाल के नाम खरीदी गई थी। अब प्रयागराज पुलिस की एक टीम जल्द ही ग्रेटर नोएडा जाकर मन्नत को कुर्क करेगी। कुर्की की कार्रवाई के दौरान डुगडुगी बजाकर पुलिस मुनादी भी कराएगी।

‘हमारी सभ्यता की यात्रा की अमिट निशानियाँ हैं हमारे तीर्थ स्थल’: राम मंदिर के बाद अब असम में ‘माँ कामाख्या दिव्यलोक’, PM मोदी ने किया शिलान्यास

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 4 फरवरी 2024 को असम का दौरा किया। इस दौरान उन्होंने 11,600 करोड़ रुपए की परियोजनाओं का उद्घाटन किया। इन परियोजनाओं में तेल और गैस, रेलवे, सड़क और स्वास्थ्य से जुड़ी परियोजनाएँ शामिल हैं। प्रधानमंत्री मोदी ने गुवाहाटी में कामाख्या मंदिर में दर्शन किए और फिर माँ कामाख्या दिव्यलोक परियोजना का शिलान्यास भी किया। यही नहीं, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुवाहाटी में रोडशो करने के बाद जनसभा को भी संबोधित किया और असम के विकास के लिए केंद्र सरकार की प्रतिबद्धता को दोहराया।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 4 फरवरी 2024 को असम के गुवाहाटी में कामाख्या मंदिर के दर्शन किए। उन्होंने कहा कि तीर्थ मंदिर हमारी आस्था के स्थान हैं और हमारी सभ्यता की यात्रा की अमिट निशानियाँ हैं। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि अयोध्या के बाद माँ कामाख्या के द्वार आना उनके लिए सौभाग्य की बात है। उन्होंने कहा कि माँ कामाख्या असम की आस्था का प्रतीक हैं और पूर्वोत्तर के लोगों के लिए शक्ति का स्रोत हैं। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि सरकार तीर्थ स्थलों के विकास के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि सरकार ने तीर्थ यात्रा को आसान बनाने के लिए कई पहल की हैं।

पीएम मोदी ने कहा, “अयोध्या में भव्य आयोजन के बाद मैं अब यहाँ माँ कामाख्या के द्वार पर आया हूँ। आज मुझे यहाँ माँ कामाख्या दिव्यलोक परियोजना का शिलान्यास करने का सौभाग्य प्राप्त हुआ। जब ये बनकर पूरा होगा तो ये देश और दुनिया भर से आने वाले माँ के भक्तों को असीम आनंद से भर देगा।”

जनसभा को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, “हमारे तीर्थ, हमारे मंदिर, हमारी आस्था के स्थान, ये सिर्फ दर्शन करने की स्थली ही नहीं हैं। ये हजारों वर्षों की हमारी सभ्यता की यात्रा की अमिट निशानियाँ हैं। भारत ने हर संकट का सामना करते हुए कैसे खुद को अटल रखा, ये उसकी साक्षी है।”

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि तीर्थ मंदिर केवल धार्मिक स्थान नहीं हैं, बल्कि वे हमारी सभ्यता और संस्कृति का भी प्रतीक हैं। उन्होंने कहा कि तीर्थ मंदिर हमें अपनी जड़ों से जोड़ते हैं और हमें प्रेरणा देते हैं। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि सरकार ने तीर्थ यात्रा को आसान बनाने के लिए कई पहल की हैं। उन्होंने कहा कि सरकार ने तीर्थ स्थलों को बेहतर बुनियादी ढाँचा प्रदान करने के लिए कई योजनाएँ शुरू की हैं। असम भारत के पूर्वोत्तर का एक राज्य है। यह राज्य अपनी समृद्ध संस्कृति और विविध धार्मिक परंपराओं के लिए जाना जाता है। कामाख्या मंदिर असम के सबसे प्रसिद्ध तीर्थस्थलों में से एक है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का यह दौरा असम के लोगों के लिए महत्वपूर्ण है। यह राज्य के धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व को मान्यता देता है।

पीएम मोदी ने आगे कहा, “असम में भाजपा की सरकार से पहले केवल 6 मेडिकल कॉलेज थे, जबकि आज यहाँ 12 मेडिकल कॉलेज हैं। असम आज नॉर्थ ईस्ट में कैंसर के इलाज का बहुत बड़ा केंद्र बन रहा है। पिछले 10 वर्षों में, हमने विश्वविद्यालय और कॉलेज बनाए हैं। पहले बड़े संस्थान बड़े शहरों में ही बनाये जाते थे। हमने देश में आईआईटी, आईआईएम और एम्स का नेटवर्क फैलाया है। पिछले 10 वर्षों में मेडिकल कॉलेजों की संख्या दोगुनी हो गई है।”

दरगाह के पास से गुजर रहीं 2 गायों पर डाल दिया तेजाब, एक की हालत गंभीर: गुजरात पुलिस ने 5 मुस्लिम नाबालिगों को पकड़ा, फिर भेजा बाल सुधार गृह

गुजरात के वडोदरा में एक दरगाह के पास कुछ नाबालिग मुस्लिमों ने 2 गायों पर तेज़ाब डालकर उन्हें जला दिया। इस मामले में पाँच मुस्लिम नाबालिगों को पुलिस ने हिरासत में लिया है। कहा जा रहा है कि इन लड़कों ने यहाँ से गुजर रही गायों को पहले तो घेरकर परेशान किया और फिर उन पर तेजाब डाल दिया।

जानकारी के अनुसार, यह घटना वडोदरा के गोरवा इलाके की है। यहाँ गोरवा बापू की दरगाह के पास मुस्लिम समुदाय के 5 नाबालिगों ने दो गाय को घेर लिया और उन पर हमला कर दिया। इसके बाद उन बेजुबान जानवरों पर तेजाब फेंक दिया। इनमें से एक गाय तो तेजाब के हमले से बच गई, लेकिन दूसरी गंभीर रूप से घायल हो गई है।

मीडिया रिपोर्ट में बताया गया है कि नाबालिग अपने साथ एसिड लेकर आए थे। जब पुलिस ने इनसे पूछताछ की तो उन्होंने बताया कि यह तेज़ाब उन्होंने एक गाड़ी से निकाला और कुछ तेजाब जमीन में फेंकने के बाद गायों पर डाल दिया। यह घटना शुक्रवार (2 फरवरी 2024) की रात को लगभग 8:30 गोरव दरगाह इलाके में आईटीआई चौराहे के पास हुई।

जब गायों पर तेज़ाब फेंका गया तो वह डर कर इधर-उधर भागने लगीं। लोगों ने इन गायों को भागते हुए देखा तो उन्होंने पुलिस को सूचना दी। गायों पर हमले के बाद सुनील लिंबाचिया नाम के एक व्यक्ति ने पुलिस के पास इस मामले में शिकायत दर्ज करवाई है। उन्होंने पुलिस के पास जान से मारने और पशु क्रूरता अधिनियम के तहत मामला दर्ज करवाया है।

उन्होंने हिन्दुओं की भावनाओं को ठेस पहुँचाने का मामला दर्ज कराया है। गोरवा पुलिस ने इस सम्बन्ध में जाँच शुरू कर दी है। पुलिस ने जानकारी इकट्ठा करके इन पाँच नाबालिगों को हिरासत में ले लिया और उनसे पूछताछ की। बाद में इन्हें बाल सुधार गृह भेज दिया गया। पुलिस इस बात की जाँच कर रही है कि इन नाबालिगों ने घटना को खुद ही अंजाम दिया या फिर उनके पीछे कोई और भी है।

बिहार में NDA सरकार ने भंग किए महादलित और अति-पिछड़ा समेत 4 आयोग, नए चेहरों के साथ फिर से किया जाएगा गठित

बिहार की एनडीए सरकार ने 4 आयोगों को भंग करने का फैसला लिया है। इनमें महादलित आयोग, अति पिछड़ा आयोग, राज्य अनुसूचित जाति आयोग और राज्य अनुसूचित जनजाति (एसटी) आयोग शामिल हैं। सरकार का कहना है कि इन आयोगों का पुनर्गठन किया जाएगा। नए आयोगों में नए चेहरे होंगे और वे अधिक प्रभावी होंगे।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस बारे में बिहार सरकार के समान्य प्रशासन विभाग ने अधिसूचना भी जारी कर दी है। 2 फरवरी 2024 को जारी हुई अधिसूचना के मुताबिक, बिहार में अति पिछड़े वर्गों के लिए बने आयोग के अध्यक्ष डॉ नवीन कुमार आर्य के साथ ही इस आयोग के 4 अन्य सदस्य भी हटा दिए गए हैं।

इसी तरह महादलित आयोग के अध्यक्ष संतोष कुमार निराला और उसके चारों सदस्यों को भी पदमुक्त कर दिया गया है। बिहार राज्य के अनुसूचित जनजाति आयोग के अध्यक्ष शंभू कुमार सुमन और उसके तीन सदस्यों के साथ ही अनुसूचित जाति आयोग के अध्यक्ष राजेंद्र कुमार और आयोग के 4 अन्य सदस्यों की भी छुट्टी कर दी गई है। ये अधिसूचना सामान्य प्रशासन विभाग के सचिव मोहम्मद सोहैल ने जारी की। सरकार ने बताया है कि लोकहित और प्रशासनिक दृष्टिकोण को सुधारने के लिए सभी को पदमुक्त किया जाता है। जल्द ही इस आयोगों का पुनर्गठन किया जाएगा।

अतिपिछड़े वर्ग के लिए बनाए गए राज्य आयोग के लिए नियुक्तियाँ 2022 में की गई थी, तो अन्य तीनों आयोगों में नियुक्तियाँ 25 जुलाई, 2023 को की गई थी। यह फैसला राजनीतिक समीकरणों में बदलाव के बाद लिया गया है। बीजेपी के एनडीए में शामिल होने के बाद राज्य की राजनीतिक परिस्थितियाँ बदल गई हैं। सरकार नए सिरे से गठन के बाद इन आयोगों में नए चेहरे लाना चाहती है।

प्रभारी मंत्रियों के साथ ही 20 सूत्री समितियाँ भी भंग

नीतीश कुमार ने मुख्यमंत्री बनने के बाद बिहार के सभी जिलों में तैनात प्रभारी मंत्रियों को भी हटा दिया था। चूँकि, मंत्री आरजेडी के भी थे। ऐसे में सरकार की व्यवस्था को मजबूत करने के संदर्भ में हटा दिया गया। जो मंत्री काफी समय से एक जिले की कमान सँभाल रहा था, उसे दूसरे जिले की कमान सौंपने की कोशिश की जा रही है। यही नहीं, नीतीश कुमार ने राज्य में 20 सूत्री समितियाँ को भी भंग कर दिया था।