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मणिशंकर अय्यर की बेटी को भारी पड़ी राम मंदिर पर टिप्पणी, अब साइबर पुलिस के पास पहुँची शिकायत: RWA भी कह चुका है – माफ़ी माँगो या खाली करो कॉलोनी

कॉन्ग्रेस नेता मणिशंकर अय्यर की बेटी सुरन्या के खिलाफ पुलिस में शिकायत दर्ज कराई गई है। सुरन्या अय्यर ने राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा के खिलाफ 3 दिनों का अनशन रखा था और कहा था कि वो देश के मुस्लिम नागरिकों के लिए ऐसा कर रही हैं। उन्होंने सोशल मीडिया में एक विवादित पोस्ट भी किया था। जिस सोसाइटी में वो रहती हैं, वहाँ के RWA ने नोटिस जारी कर के उनसे माफ़ी माँगने को कहा है। अब उनके खिलाफ दिल्ली पुलिस की साइबर क्राइम ब्रांच में शिकायत दर्ज कराई गई है।

सुप्रीम कोर्ट के वकील और भाजपा नेता अजय अग्रवाल ने शनिवार (3 फरवरी, 2024) को ये शिकायत दर्ज कराई है। उन्होंने अपनी इस शिकायत में इसका जिक्र किया कि कैसे मणिशंकर अय्यर की बेटी ने राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा से 2 दिन पहले 20 जनवरी, 2024 को फेसबुक और यूट्यूब के अलावा अपने अन्य सोशल मीडिया हैंडलों से गंभीर आपत्तिजनक पोस्ट लिखा है। साथ ही उन्होंने 36 मिनट का एक वीडियो भी दिल्ली पुलिस को सौंपा है और इसे भड़काऊ बताया है।

शिकायतकर्ता अजय अग्रवाल ने माँग की कि सुरन्या अय्यर के विरुद्ध IPC (भारतीय दंड संहिता) की धारा-153A (विभिन्न समुदायों के बीच वैमनस्य को बढ़ावा देना) सहित अन्य धाराओं में मुकदमा दर्ज किया जाए। इससे पहले RWA भी कह चुका है कि सुरन्या अय्यर कॉलोनी का नाम खराब कर रही हैं, वो माफ़ी माँगें या फिर किसी अन्य सोसाइटी में चली जाएँ। हालाँकि, इसके जवाब में कथित एक्टिविस्ट सुरन्या ने कहा कि ये RWA उनकी सोसाइटी से संबद्ध नहीं है, किसी अन्य सोसाइटी का है।

इससे पहले मणिशंकर अय्यर की बेटी ने एक तस्वीर शेयर की थी, जिसमें उनकी माँ उन्हें शहद पिला कर उनका अनशन तुड़वाते हुए दिख रही हैं। इससे सोसाइटी के लोगों में नाराज़गी का माहौल पनप आया। लोग कह रहे हैं कि कॉन्ग्रेस नेता की बेटी माफ़ी माँगे। कुछ दिनों पहले मणिशंकर अय्यर की दूसरी बेटी यामिनी से जुड़े थिंक टैंक ‘सेंटर फॉर पॉलिसी रिसर्च (CPR)’ का अवैध गतिविधियों में लिप्त रहने के कारण केंद्रीय गृह मंत्रालय ने FCRA लाइसेंस रद्द कर दिया था।

केजरीवाल के मोहल्ला क्लीनिक में 65000 ‘भूतों’ का टेस्ट, हर टेस्ट के लिए दिल्ली के सरकारी खजाने से पैसा: मोबाइल नंबर से धराया करोड़ों का घोटाला

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल की महत्वाकांक्षी योजना मोहला क्लीनिक में बड़े घोटाले की जानकारी सामने आई है। भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) द्वारा की गई जाँच में मोहल्ला क्लीनिक में किए गए हजारों टेस्ट फर्जी पाए गए हैं। इनके आधार पर बड़ी रकम सरकार से वसूली गई है।

ACB ने अपनी शुरुआती रिपोर्ट में बताया है कि मोहल्ला क्लीनिक द्वारा करवाए गए टेस्ट में डाले गए हजारों मोबाइल नम्बर फर्जी पाए गए। इनके आधार पर सरकार को तगड़ा चूना लगाया गया। ACB ने यह जाँच फरवरी 2023 से नवम्बर 2023 की अवधि के दौरान किए गए लैब टेस्ट के लिए की है।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, इस दौरान मोहल्ला क्लीनिक के पर्चों के आधार पर 22 लाख टेस्ट किए गए। इस जाँच में 65,000 टेस्ट फर्जी पाए गए हैं। इसमें एक टेस्ट के लिए दिल्ली सरकार ने ₹100-₹300 तक का भुगतान किया। बताया गया है कि इन फर्जी टेस्ट के कारण सरकार को ₹4.63 करोड़ का चूना लगा।

दरअसल, दिल्ली सरकार द्वारा चलाए जाने वाले मोहल्ला क्लीनिक में परामर्श लेने वाले रोगियों को टेस्ट करवाने के लिए निजी लैब में जाना होता है। इन लैब का सरकार के साथ एग्रीमेंट है। इन लैब टेस्ट का भुगतान सरकार करती है। इसके लिए पहले रोगी को मोहल्ला क्लीनिक में अपना रजिस्ट्रेशन करवाना होता है। इसके बाद लैब के रजिस्ट्रेशन सिस्टम जिसे LIMS कहा जाता है, में अपना मोबाइल नम्बर दर्ज करवाना होता है। इसके जरिए रोगी को उसकी लैब टेस्ट रिपोर्ट उसके मोबाइल नम्बर पर भेजी जाती है।

इसी मोबाइल नम्बर को दर्ज करने में गड़बड़ी की गई है। ACB की जाँच में बताया गया है कि 12457 टेस्ट में कोई नम्बर नहीं डाला गया जबकि 25732 टेस्ट में 00 करके नम्बर डाल दिए गए। इसके अलावा 967 टेस्ट में ऐसे नम्बर डाले गए जो कि 1, 2 और 3 से चालू होते थे। इसके अलावा 2467 टेस्ट ऐसे नम्बर पर किए गए जो कि 80 अलग-अलग रोगियों के लिए टेस्ट में डाले गए। जाँच का कहना है कि ऐसा ज्यादा से ज्यादा फर्जी जाँच रसीदें बनाकर सरकारी खजाना खाली करने के लिए किया गया।

जाँच में सामने आया है कि यह घोटाला करने के लिए LIMS सिस्टम तक में दो लैब वालों ने गड़बड़ कर दिया। इनके पास इस पूरे सिस्टम का सारा डाटा है, ऐसे में गड़बड़ी की संभावनाओं से इनकार नहीं किया जा सकता। यह सारी बातें ACB ने अपनी रिपोर्ट में बताई है। हालाँकि इस मामले में जिन लैब पर प्रश्न उठे हैं, उन्होंने अपना जवाब भी दाखिल किया है। मोहल्ला क्लीनिक में हुई गड़बड़ी की जाँच अब सीबीआई कर रही है। इसके लिए बीते माह दिल्ली के उपराज्यपाल वीके सक्सेना ने जाँच के आदेश दिए थे।

मरने वाले का AADHAAR-PAN रोहिंग्या मुस्लिमों के नाम, गैंग ऐसे कर रहा भारत में काम: NIA कर रही पहचान, जुटा रही डेटा

बांग्लादेश और म्यांमार से अवैध रूप से भारत में घुसे रोहिंग्या एवं बांग्लादेशी मुस्लिम अब देश के लिए नासूर बनते जा रहे हैं। वे ना सिर्फ अवैध रूप से देश में घुसकर काम-काज कर रहे हैं, बल्कि खुद को यहाँ का निवासी साबित करने के लिए आधार और वोटर कार्ड जैसे फर्जी दस्तावेज भी बना रहे हैं। अब वे मृत लेगों के आधार और वोटर कार्ड आदि दस्तावेज अपने नामों पर हस्तांतरण करा रहे हैं।

ये घुसपैठिए भारत के अलग-अलग राज्यों में छिप कर रह रहे हैं और अपनी पहचान छिपाने के लिए ऐसे लोगों के पहचान पत्र का इस्तेमाल कर रहे हैं, जिनकी मौत हो चुकी है। इन नामों से ये घुसपैठिए ना सिर्फ अपना कारोबार चला रहे हैं कि बैंकों में खाते भी खुलवा लिए हैं। इस तरह के मामले सामने आने के बाद खुफिया एजेंसियाँ भी सतर्क हो गई हैं।

राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (NIA) सहित भारत की अन्य एजेंसियों को हाल ही में इस तरह के कई सबूत मिले हैं, जिनमें इन्हें अवैध रूप से भारत में लाकर अलग-अलग राज्यों में बसाने वाले गिरोह का पता चला है।ऐसे लोगों की पहचान की जा रही है। कुछ बांग्लादेशी एवं रोहिंग्या मुस्लिमों को राज्य के विभिन्न जगहों से पकड़ा भी गया है।

हाल ही में यूपी एटीएस ने विदेशी फंडिंग लेकर अवैध घुसपैठियों की मदद करने वाले एक सिंडीकेट से जुड़े कुछ लोगों को पकड़ा था। कानपुर से पकड़े गए गिरोह के सक्रिय सदस्य और बांग्लादेश निवासी मोहम्मद राशिद अहमद ने पूछताछ में बताया कि उसने पाँच अन्य बांग्लादेशियों को फर्जी दस्तावेजों की मदद से पहचान बदलकर देवबंद में ठिकाना दिलाया था।

इससे पहले पकड़े जा चुके बांग्लादेशी आदिलुर्रहमान को भी फर्जी दस्तावेज राशिद ने ही उपलब्ध कराए थे। एटीएस ने विदेशी फंडिंग के मास्टरमाइंड और एनजीओ चलाने वाले अबू सालेह मंडल को बीते दिनों लखनऊ से पकड़ा था। वह अपने एनजीओ में विदेशी फंडिंग लेता था और अवैध घुसपैठियों को भारत में बसाने में उनकी मदद करता था।

अबू सालेह ने ATS को बताया कि वह हरोआ-अल जमियातुल इस्लामिया दारूल उलूम मदरसा और कबीरबाग मिल्लत एकेडमी नाम से दो ट्रस्ट चलाता है। इन ट्रस्टों के FCRA खातों में ब्रिटेन के उम्मा वेलफेयर ट्रस्ट से साल 2018-22 तक लगभग 58 करोड़ रुपए आए। उम्मा ट्रस्ट को आतंकी गतिविधियों में शामिल होने और उनकी मदद करने के कारण अमेरिका प्रतिबंधित कर चुका है।

उधर, दैनिक भास्कर ने सूत्रों के हवाले से बताया है कि NIA ने कार्रवाई करते हुए तमिलनाडु में मोहम्मद सोरीफुल बाबू मियां, शहाबुद्दीन हुसैन और मुन्ना उर्फ नूर करीम को गिरफ्तार किया था। ये तीनों लंबे समय से बांग्लादेश से भारत में लाए गए रोहिंग्या मुस्लिमों के लिए फर्जी आधार कार्ड, राशन कार्ड, पैन कार्ड, मार्कशीट आदि बनाकर देते थे।

इन तीनों ने पूछताछ में बताया कि रोहिंग्या मुस्लिमों को भारतीय पहचान देने के लिए वे मृतकों के दस्तावेज इस्तेमाल करते हैं। NIA को ऐसे लोगों की सूची आरोपितों से मिले हैं। इसकी पड़ताल और फर्जी दस्तावेज पर रह रहे घुसपैठियों की पहचान की जा रही है। NIA की जाँच में तमिलनाडु, हरियाणा, असम, पश्चिम बंगाल, महाराष्ट्र, जम्मू सहित कई राज्यों में रोहिंग्या घुसपैठियों के रहने की जानकारी मिली है।

दरअसल, शहाबुद्दीन हुसैन सरकारी अधिकारियों से साँठ-गाँठ करके मृत लाेगाें का डेटा हासिल करता था। इसके बाद बाबू मियां और नूर करीम इनके आधार नंबर का इस्तेमाल करते हुए उस उम्र से मिलते-जुलते घुसपैठियों का डेटा उनमें अपडेट कराते थे। डेटा अपडेट होने के बाद वे उसमें पता बदलवाते थे। फिर आधार कार्ड के जरिए राशन कार्ड, पैन कार्ड और अन्य दस्तावेज तैयार बनवाते थे।

इन सब फर्जीवाड़े को देखते हुए सरकार की ओर से अक्टूबर 2023 से जन्म और मृत्यु प्रमाण-पत्र हासिल करने के लिए आधार कार्ड अनिवार्य कर दिया गया। अब मृत्यु प्रमाण-पत्र पाने के मृतक का आधार कार्ड देना होगा। इसके बाद संबंधित अधिकारी उस आधार कार्ड की जानकारी UADAI को भेज देंगे। इसके बाद UADAI मृतक का आधार निष्क्रिय कर देगा और उसका नाम हर जगह से हट जाएगा।

नाथूराम गोडसे के लिए किया कमेन्ट तो प्रोफ़ेसर पर हो गई FIR, केरल के कोझिकोड का मामला

केरल के कोझिकोड में एक महिला प्रोफ़ेसर पर नाथूराम गोडसे के समर्थन में कमेन्ट करने पर FIR हो गई है। केरल के कोझिकोड की पुलिस ने उनके विरुद्ध दंगा भड़काने की धारा के अंतर्गत मामला दर्ज कर लिया है। उनके खिलाफ केरल के वामपंथी छात्र संगठन ने FIR दर्ज करवाई है।

जिन महिला प्रोफ़ेसर के विरुद्ध FIR दर्ज की गई है, वह नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ़ टेक्नोलॉजी (NIT) कालीकट में वरिष्ठ प्रोफ़ेसर हैं। उनका नाम शैजा अन्दावन है। वह NIT में मैकेनिकल इंजीयनियरिंग विभाग में पढ़ाती हैं। उन्होंने 30 जनवरी को महात्मा गाँधी की हत्या की बरसी पर एक पोस्ट पर कमेन्ट किया था। पोस्ट में नाथूराम गोडसे को भारत में अनेकों लोगों का नायक बताया गया था। इसमें उन्होंने नाथूराम गोडसे का समर्थन किया था।

उन्होंने एक पोस्ट पर कमेन्ट किया, “भारत को बचाने के लिए गोडसे पर गर्व है।” यह पोस्ट गोडसे के समर्थन में किया गया था। उनके इस कमेन्ट का स्क्रीनशॉट वायरल हो गया। हालाँकि, उन्होंने यह कमेन्ट बाद में हटा दिया। यह पोस्ट एक हिंदूवादी वकील कृष्णा राज की पोस्ट पर किया गया था। जब प्रोफ़ेसर अन्दावन से इस सम्बन्ध में बात की गई तो उन्होंने कहा कि वह यूनिवर्सिटी में विवाद नहीं पैदा करना चाहती, इसलिए उन्होंने कमेन्ट हटा दिया।

कमेंट डिलीट करने के बावजूद उनके खिलाफ वामपंथी छात्र संगठनों ने दो FIR दर्ज करवा दी। उनके खिलाफ राजद्रोह की धाराओं में मामला दर्ज करवाया गया है। वामपंथी छात्र संगठनों का प्रोफ़ेसर पर आरोप है कि उन्होंने इस कमेन्ट के जरिए द्वेष फैलाने का प्रयास किया। इन संगठनों ने उन्हें NIT से निष्कासित करने की माँग की है। केरल के कोझिकोड से कॉन्ग्रेस सांसद एमके राघवन ने NIT के डायरेक्टर को पत्र लिखकर उनके खिलाफ कार्रवाई की माँग की है।

प्रोफ़ेसर शैजा अन्दावन ने इंडियन एक्सप्रेस से बातचीत में बताया, “मेरा कमेन्ट गाँधीजी की हत्या की प्रशंसा करना नहीं था और ना ही मैं कभी ऐसा करना चाहती थी। मैंने गोडसे की ‘मैंने गाँधी को क्यों मारा’ किताब पढ़ी है। इस किताब में कई खुलासे और जानकारियाँ हैं, जो कि आम लोगों को नहीं पता। गोडसे ने इस किताब में हमें वह बताया है। मैंने इसी सम्बन्ध में फेसबुक पर डाली गई एक पोस्ट पर कमेन्ट किया था। जब मैंने देखा कि लोग मेरे कमेन्ट का गलत मतलब निकाल रहे हैं, तो मैंने वह हटा दिया।”

गौरतलब है कि हाल ही में NIT कोझिकोड में श्रीराम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा एक विरोध में एक छात्र ने यहाँ पूरे कैम्पस में पोस्टकार्ड लहराए थे, जिसके बाद विवाद हो गया था। उसने यहाँ कुछ छात्रों द्वारा प्राण प्रतिष्ठा उत्सव मनाए जाने का विरोध किया था।

‘देश प्रेम की वजह से मुस्लिमों ने किया है सब्र… अगर कंट्रोल से बाहर हुए तो हिंदुस्तान में जंग का माहौल’ – भारत रत्न पर मौलाना तौकीर रजा की धमकी

भारत सरकार की ओर से बीजेपी के वयोवृद्ध नेता लाल कृष्ण आडवाणी को ‘भारत रत्न’ से सम्मानित किए जाने के फैसले के बाद भारत में इस्लामी कट्टरपंथियों की ओर से जहर उगलने का सिलसिला शुरू हो गया है। जमात-ए-इस्लामी हिंद के नेता के बाद अब इत्तेहादे मिल्लत काउंसिल प्रमुख मौलाना तौकीर रजा ने भी जमकर जहर उगला है। मौलाना तौकीर रजा ने कहा है कि हिन्दुस्तान में आज जो राजनीति चल रही है, नफरतों का बाजार गर्म है, बेईमानी नइंसाफी, भूखमरी, बेरोजगारी इन सबके लिए जिम्मेदार लाल कृष्ण आडवाणी हैं। ये भारत रत्न का घोर अपमान है।

तौकीर रजा ने धमकी भरे अंदाज में कहा है कि लाल कृष्ण आडवाणी ने देश को बाँटने और नफरत फ़ैलाने का काम किया है। उन्होंने कहा:

“देश प्रेम की वजह से मुस्लिमों ने सब्र किया हुआ है, हमारे नौजवान अगर कंट्रोल से बाहर हो गए तो हिंदुस्तान में जंग का माहौल हो जाएगा।”

मौलाना तौकीर रज़ा ने लाल कृष्ण आडवाणी और मोदी सरकार पर हमला बोलते हुए कहा कि यह भारत रत्न का घोर अपमान है। उन्होंने कहा कि जिसने अच्छे काम किए हों, उन्हें भारत रत्न दिया जाता है। लेकिन लाल कृष्ण आडवाणी ने कोई अच्छा काम नहीं किया है।

मौलाना तौकीर रजा खान ने कहा कि मुसलमान डरा हुआ नहीं है। मुसलमान नहीं चाहता कि मुल्क में फिरका परस्ती का माहौल बने। मुसलमान नहीं चाहता कि देश में जंग का माहौल बने, मस्जिद तोड़ दी जाए, मुसलमान की लिंचिंग कर दी जाए, उनकी बेइज्जती कर दी जाए, उनकी बेटियों को गुमराह कर दिया जाए। उनके अनुसार सभी मुस्लिम अपने देश से प्यार करते हैं, वो किसी से डरते नहीं हैं और ये सब देश प्रेम की वजह से सब्र कर रहे हैं।

इससे पहले जमात-ए-इस्लामी हिंद के सचिव मलिक मोहतसिम खान ने कहा कि मौजूदा सरकार से ऐसे ही लोगों को सम्मानित करने की उम्मीद की जा सकती है, जिन्होंने बाबरी ढाँचे को तोड़ा है। मोहतसिम खान ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि यह सरकार नफरत के बलबूते अपनी राजनीति को आगे बढ़ाना चाहती है। मौजूदा सरकार ऐसे लोगों को इनाम देगी, जो अमन और शांति नहीं चाहते हैं। उन्होंने कहा कि ये देश के लोगों को सोचना चाहिए कि क्या मौजूदा सरकार कानून के हिसाब से काम कर रही है।

बता दें कि लालकृष्ण आडवाणी को ‘भारत रत्न’ सम्मान से नवाज़ा जाएगा। खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक ट्वीट के जरिए ये घोषणा की है। उन्होंने कहा कि उन्हें ये बताते हुए ख़ुशी हो रही है कि पूर्व उप-प्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवाणी को ‘भारत रत्न’ से सम्मानित किया जाएगा। पीएम मोदी ने भाजपा के वयोवृद्ध नेता से बात करके उन्हें इसके लिए बधाई भी दी।

भगवान राम का मजाक और देवी सीता को सिगरेट पीते हुए दिखाने के मामले में प्रोफेसर सहित 6 गिरफ्तार, कोर्ट से मिली जमानत: पुणे यूनिवर्सिटी ने माँगी माफी

पुणे के सावित्रीबाई फुले विश्वविद्यालय में रामलीला पर आधारित नाटक के मंचन के दौरान भगवान राम और देवी सीता का मजाक उड़ाने पर विश्वविद्यालय प्रशासन ने माफी माँगी है। वहीं, नाटक के आपत्तिजनक मंचन के जरिए हिंदुओं की धार्मिक भावना को आहत करने पर पुलिस ने विश्वविद्यालय के प्रोफेसर और पाँच विद्यार्थियों को गिरफ्तार कर लिया। हालाँकि, बाद में सबको बेल मिल गई।

दरअसल, शुक्रवार (2 फरवरी 2024) को विश्वविद्यालय परिसर में ललित कला विभाग की ओर से नाटक ‘जब वी मेट’ का मंचन किया था। इसमें भगवान राम, माता सीता और भगवान बजरंग बली का मजाक बनाया गया था। इस में माता सीता को सिगरेट पीते हुए भी दिखाया गया था। इसके बाद ABVP के छात्रों ने इसका विरोध किया तो उनके साथ मारपीट की गई। इसके बाद ABVP के छात्रों ने थाने में जाकर शिकायत दर्ज करवाई।

शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने ललित कला केंद्र के प्रमुख और विश्वविद्यालय में थिएटर आर्ट्स के प्रोफेसर डॉक्टर प्रवीण दत्तात्रेय भोले और पाँच छात्रों को गिरफ्तार कर लिया। जिन छात्रों को गिरफ्तार किया गया, उनके नाम हैं- भावेश राजेंद्र पाटिल, जय पेडणेकर, प्रथमेश सावंत, हृषिकेश दलवी और यश चिखले। पाटिल ने नाटक लिखा और निर्देशित किया था, जबकि अन्य छात्रों ने अभिनय किया था।

पुलिस ने कहा कि इन छह लोगों पर भारतीय दंड संहिता की धारा 295A (धार्मिक मान्यताओं का अपमान करना), 294 (अश्लील कृत्य और गाने), 143/149 (गैरकानूनी सभा), 147 (दंगा करने की सजा), 323 (जानबूझकर चोट पहुँचाना) सहित सिगरेट और अन्य तंबाकू उत्पाद अधिनियम (सीओटीपीए) 2003 की धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है।

पुलिस ने सभी छह आरोपियों को गिरफ्तार करने के बाद शनिवार को पुणे की एक अदालत में पेश किया। अदालत ने उन्हें मजिस्ट्रेट हिरासत में भेज दिया। इसके बाद आरोपितों ने जमानत के लिए आवेदन किया। इसके बाद कोर्ट ने आरोपितों को जमानत दे दी। हालाँकि, आरोपियों को सप्ताह में दो बार पुलिस स्टेशन में रिपोर्ट करने के लिए कोर्ट ने कहा है।

उधर, विश्वविद्यालय प्रशासन ने एक प्रेस विज्ञप्ति जारी करके माफी माँगी है। इसके साथ ही मामले की जाँच के लिए सेवानिवृत्त एक जिला जज की अध्यक्षता में एक तथ्यान्वेषी समिति का गठन किया है। विश्वविद्यालय ने अपनी प्रेस विज्ञप्ति में कहा, “किसी भी व्यक्ति, किंवदंती या ऐतिहासिक शख्सियत की पैरोडी पूरी तरह से गलत और निषिद्ध है।”

वहीं, शनिवार की शाम को भाजपा एवं हिंदू संगठनों से जुड़े प्रदर्शनकारियों के एक समूह ने सेंटर फॉर परफॉर्मिंग आर्ट्स के साइन-बोर्ड पर स्याही पोतकर अपना विरोध जताया। विश्वविद्यालय परिसर में किसी तरह की कानून-व्यवस्था की स्थिति ना बिगड़े, इसके लिए भारी संख्या में पुलिस बल को तैनात किया गया था।

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, प्रो वाइस चांसलर पराग कालकर ने कहा कि विश्वविद्यालय विभाग प्रमुख से स्पष्टीकरण का इंतजार कर रहा है। उन्होंने कहा, “हमें अभी तक नहीं पता कि यह अभ्यास था या व्यवहारिक। हमें यह भी पता लगाना होगा कि इस सत्र के लिए इतने सारे लोगों को क्यों आमंत्रित किया गया था।”

ताजमहल में रोको उर्स का आयोजन, न्यायालय में याचिका: न नमाज का ऐतिहासिक प्रमाण, ना ASI से अनुमति – कोर्ट में दिया सारे सबूत

उत्तर प्रदेश के आगरा स्थित ताजमहल में मुग़ल शासक शाहजहाँ का सालाना उर्स मनाने के विरुद्ध आगरा के एक न्यायालय में याचिका डाली गई है। हिन्दू महासभा ने कहा है कि ताजमहल में होने वाले उर्स के लिए सरकार की अनुमति नहीं है, फिर भी इसका आयोजन किया जा रहा है।

अखिल भारतीय हिन्दू महासभा के कार्यकर्ताओं मीना देवी दिवाकर और सौरभ शर्मा ने शुक्रवार (2 फरवरी, 2024) को आगरा के जिला न्यायालय के समक्ष एक याचिका लगाई। इसमें आगामी 6-8 फरवरी के बीच ताजमहल में होने वाले शाहजहाँ के उर्स पर रोक लगाने की माँग की गई है।

6-8 फरवरी के बीच आगरा की ताजगंज कमिटी मुग़ल शासक शाहजहाँ की मौत का 369वाँ उर्स मनाएगी। इस्लाम का सूफी मत मानने वाले उर्स का आयोजन किसी बड़ी हस्ती की बरसी पर करते हैं। आगरा के ताजमहल में इसका आयोजन ताजगंज कमिटी के सैयद इब्राहिम जैदी करवा रहे हैं।

इब्राहिम जैदी को हिन्दू कार्यकर्ताओं ने इस याचिका में प्रतिवादी बनाया है। हिन्दू पक्ष का कहना है कि ताजमहल ASI संरक्षित है। इसके अंदर उर्स मनाने के लिए अनुमति ASI से नहीं ली गई है। उनका कहना है कि ASI के उर्स को अनुमति ना देने के सम्बन्ध में उन्हें एक RTI से जानकारी प्राप्त हुई है।

हिन्दू महासभा के कार्यकर्ताओं ने कहा है कि इस उर्स का आयोजन करवाने वाले जैदी का किसी भी प्रकार से ताजमहल से कोई सम्बन्ध नहीं है। ना ही वह ताजमहल में कर्मचारी हैं और ना ही वह स्मारक से सीधे तौर पर जुड़े हुए हैं। ऐसे में उनके उर्स आयोजित करने का कोई तुक नहीं बनता है।

हिन्दू महासभा के जिलाध्यक्ष और इस मामले में याचिकाकर्ता सौरभ शर्मा ने कहा है कि ASI संरक्षित स्मारकों में कोई मजहबी काम नहीं हो सकते हैं, ऐसे में यह उर्स मनाया जाना अवैध है। हिन्दू महासभा ने इस उर्स के दौरान ताजमहल में प्रवेश निशुल्क किए जाने को भी चुनौती दी है।

अखिल भारतीय हिन्दू महासभा के प्रवक्ता संजय जाट के अनुसार न तो मुगलों, न ही अंग्रेजों और न ही कभी केंद्र सरकार ने ताज महल परिसर के अंदर उर्स की इजाजत दी थी। उन्होंने बताया:

“यह याचिका आगरा के इतिहासकार राज किशोर राजे द्वारा आरटीआई से प्राप्त एक जानकारी के आधार पर दायर की गई है। आरटीआई में, उन्होंने ASI से पूछा कि ताज महल परिसर में ‘उर्स’ समारोह और ‘नमाज़’ की अनुमति किसने दी। इस पर ASI ने जवाब दिया था, ”न तो मुगलों, न ही ब्रिटिश सरकार या भारत सरकार ने ताज महल में ‘उर्स’ मनाने की अनुमति दी है।”

यह याचिका कोर्ट में डालने वाले संगठन हिन्दू महासभा के प्रवक्ता संजय जाट ने बताया कि वह ताजमहल के सर्वे के लिए भी याचिका डालेंगे।

औरंगजेब ने ही तुड़वाया था केशवदेव मंदिर, बनवा दिया था ईदगाह ढाँचा: ASI ने ऐतिहासिक रिकॉर्ड से दिया जवाब, हिंदू पक्ष कोर्ट में सबूत के तौर पर करेगा पेश

मुस्लिम समाज चाहे कितना भी दावा करे कि किसी भी मुस्लिम शासक ने हिंदू मंदिरों को नहीं तोड़ा, लेकिन सच्चाई इससे अलग है और ऐतिहासिक रिकॉर्ड इसकी पुष्टि भी करते हैं। मथुरा के श्रीकृष्ण जन्मभूमि को तोड़कर वहाँ मुगल आक्रांता औरंगजेब ने शाही ईदगाह ढाँचा खड़ा करवाया था। एक आरटीआई के जवाब में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) ने ऐतिहासिक तथ्यों के आधार पर यह बात कही है।

दरअसल, उत्तर प्रदेश के मैनपुरी के रहने वाले अजय प्रताप सिंह ने देश भर के मंदिरों के बारे में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण से आरटीआई के तहत जानकारी माँगी थी। इसमें मथुरा का श्रीकृष्ण जन्मभूमि के बारे में भी पूछा गया था। इसी जवाब में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण, आगरा ने ऐतिहासिक रिकॉर्ड का हवाला दिया है।

आरटीआई में दिए गए जवाब में कहा गया है कि अंग्रेजों के शासन के दौरान सन 1920 में इलाहाबाद से प्रकाशित गजट में यूपी के विभिन्न जिलों के 39 स्मारकों की सूची दी गई है। इसमें 37 नंबर पर कटरा केशवदेव भूमि पर श्रीकृष्ण जन्मभूमि का उल्लेख है। उसमें कहा गया है कि मस्जिद के स्थान पर पहले कटरा टीले पर केशवदेव मंदिर था, जिसे ध्वस्त करके मस्जिद बनाया गया है।

पुरातत्व विभाग की पुष्टि के बाद श्रीकृष्ण जन्मभूमि के पक्षकार और कृष्ण जन्मभूमि के वादी एडवोकेट महेंद्र प्रताप सिंह इस महत्वपूर्ण साक्ष्‍य को 22 फरवरी 2024 को हाई कोर्ट और उसके बाद सुप्रीम कोर्ट में पेश करेंगे। उन्होंने कहा कि यह सरकार का गजट है। इससे स्थिति एकदम साफ हो गई है।

श्रीकृष्ण जन्मभूमि मुक्ति न्यास के अध्यक्ष एडवोकेट महेंद्र प्रताप सिंह ने आगे बताया कि आगे अगर मंदिर का ASI सर्वे होता है तो आरटीआई में मिला यह जवाब उसमें बड़ा सबूत साबित होगा। उन्होंने कहा कि यह पुरातत्व विभाग के अधिकारियों के द्वारा खुद सूचना दी गई है।

बता दें कि मथुरा का केशवदेव मंदिर अति प्राचीन मंदिर है, लगभग पाँच हजार वर्ष पुराना। कहा जाता है कि जिस जगह पर कंस के कारागार में देवकी के गर्भ से भगवान विष्णु के परमावतार श्रीकृष्ण का जन्म हुआ था, कालांतर में वहीं पर केशवदेव मंदिर का निर्माण हुआ था। श्रीकृष्ण के प्रपौत्र व्रज और व्रजनाभ ने राजा परीक्षित के सहयोग से इस मंदिर का निर्माण कराया था। जिसे समय-समय पर अन्य राजाओं ने इसका जीर्णोद्धार कराया।

हिंदू पक्ष का दावा है कि मुगल आक्रांता औरंगजेब ने 1670 में फरमान जारी करके मथुरा में भगवा केशवदेव के मंदिर को तोड़ने के लिए फरमान जारी किया था। इसके बाद वहाँ शाही ईदगाह मस्जिद बना दी गई। कहा जाता है कि इस मस्जिद में नमाज पढ़ने के लिए औरंगजेब खुद भी आया था।

मथुरा का यह विवाद 13.37 एकड़ जमीन के मालिकाना हक से जुड़ा है। श्रीकृष्ण जन्मस्थानभूमि के पास 10.9 एकड़ जमीन का मालिकाना हक है, जबकि ढाई एकड़ जमीन शाही ईदगाह मस्जिद के पास है। हिंदू पक्ष इस पूरी जमीन पर अपना दावा करता है। हिंदू पक्ष ईदगाह ढाँचे को हटाकर श्रीकृष्ण जन्मस्थान मंदिर बनाने की भी माँग करता है।

गुजरात में कन्हैया लाल की तरह हत्या का प्रयास: हिंदू दर्जी ने कहा- हनुमान चालीसा को लेकर जानलेवा हमला, पुलिस बोली- शिकायत में इसका जिक्र नहीं

गुजरात के भावनगर में राजस्थान के दर्जी कन्हैयालाल हत्याकांड जैसी वारदात को दोहराने की कोशिश की गई है। पीड़ित विश्व हिंदू परिषद और अन्य हिंदू संगठनों से जुड़े यहाँ के एक हिंदू दुकानदार की हत्या करने की कोशिश की गई। हमलावरों की पहचान साहिल, शौकत और मुन्ना के रूप में हुई है। पीड़ित का आरोप है कि हनुमान चालीसा बजाने पर पहले भी उन पर हमला किया जा चुका है।

ऑपइंडिया के पास मौजूद एफआईआर की कॉपी के मुताबिक, भावनगर के कुंभरवाड़ा में राजेंद्र भाई चौहान दर्जी का काम करते हैं। उन्होंने बोरातलाव पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराई है कि 01 फरवरी 2024 की शाम करीब सात बजे वो अपनी दुकान में काम कर रहे थे। उसी समय पड़ोस में रहने वाले साहिल पादर्शी और शौकत माँकड़ वहाँ आ गए।

शिकायतकर्ता ने आगे बताया कि उस समय साहिल के हाथ में लोहे का पाइप था। दुकान पर आने के बाद दोनों ने उनके साथ गाली-गलौच शुरू कर दी। इस दौरान साहिल ने कहा, “तुमने मेरे दादा बिलाल भाई के खिलाफ शिकायत क्यों की है?” इतना कहकर साहिल ने लोहे की पाइप से हमला कर दिया। इस हमले में उनके दाहिने कान के ऊपर सिर में चोट लगी। इससे उनके सिर से खून निकलने लगा।

इसके बाद राजेंद्र भाई चिल्लाने लगे और शोर सुनकर आसपास के लोग मौके पर पहुँचे। लोगों को आता देख हमलावर वहाँ से भाग खड़े हुए। साहिल और शौकत के हमले में घायल राजेंद्र भाई चौहान को इलाज के लिए लोगों ने नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराया। इसके बाद उनका इलाज शुरू किया या। यह घटना सीसीटीवी में रिकॉर्ड हो गया है, जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है।

शिकायत में कहा गया है कि कुछ दिन पहले साहिल का अब्बू मुन्ना बिलाल पदर्षी उनकी दुकान पर आया था। वहाँ पहुँचकर उसने राजेंद्र भाई चौहान को धमकाते हुए पूछा था कि उन्होंने उसके बेटे साहिल के खिलाफ शिकायत क्यों करवाई है। मुन्ना बिलाल ने धमकी दी कि अगर राजेंद्र भाई ने उसके बेटे के खिलाफ दी गई शिकायत वापस नहीं ली तो उन्हें गंभीर परिणाम भुगतने होंगे।

हनुमान चालीसा बजाने को लेकर अक्सर धमकी देते थे: पीड़ित ने ऑपइंडिया से बातचीत की 

राजेंद्र भाई चौहान से ऑपइंडिया ने संपर्क किया और इस पूरे घटना क्रम की जानकारी ली। उन्होंने बताया कि दो दिन पहले पड़ोस में रहने वाले शौकत से उनका विवाद हो गया था। इसके बाद बिलाल के खिलाफ पुलिस में शिकायत दी थी। राजेंद्र भाई ने बताया कि यह हमला हनुमान चालीसा बजाने के मुद्दे पर हुई झड़प के जवाब में किया गया था।

उन्होंने ऑपइंडिया से बताया, ”मैं अपनी दुकान में हनुमान चालीसा बजाता रहता हूँ, जिसे लेकर 6-7 महीने पहले आरोपियों से हमारी झड़प हो गई थी। एक बार जब हनुमान चालीसा चल रही थी तो आरोपितों ने आकर टेप बंद कर दिया था।” उन्होंने कहा कि आसपास हिंदू-मुस्लिम, दोनों समुदायों के घर हैं, लेकिन हनुमान चालीसा का विरोध सिर्फ यही परिवार करता है। बाकी किसी को कोई आपत्ति नहीं थी।

हनुमान चालीसा की वजह से ही 31 जनवरी 2024 को भी झगड़ा हुआ था। इसको लेकर दोनों पक्षों ने पुलिस में शिकायत की थी। पुलिस में शिकायत दर्ज करा कर लौटे राजेंद्र भाई अपने दुकान के पास सीसीटीवी कैमरा लगवा रहे थे, तभी उसके साथ यह मारपीट हुई। उनका कहना है कि यह पिटाई हनुमान चालीसा के मुद्दे पर चल रहे झगड़े में ही की गई है।

भारत-पाक मैच के दौरान भी हुआ था हंगामा

राजेंद्रभाई चौहान ने आगे बताया कि अक्टूबर में भारत-पाकिस्तान क्रिकेट वर्ल्ड कप मैच के दौरान जब लड़के चौक पर पटाखे फोड़ रहे थे तो बिलाल के परिवार का दामाद उनसे भिड़ गया था। उसने जान से मारने की धमकी भी दी थी। इसके बाद राजेंद्र भाई ने शिकायत दर्ज कराई थी।

जब उनसे एफआईआर में हनुमान चालीसा मुद्दे का जिक्र नहीं होने के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा, “मैंने पुलिस को सारी जानकारी दी, लेकिन उन्होंने एफआईआर में इसका जिक्र नहीं किया तो मैं क्या कर सकता हूँ? मैंने सारी जानकारी पुलिस को दे दी थी।” इस मामले में कुछ समय पहले ही कुछ पुलिस अधिकारी उनके घर आकर बयान ले गए थे।

राजेंद्रभाई ने बताया कि वो विश्व हिंदू परिषद (VHP) के सक्रिय कार्यकर्ता हैं। पिछले 2 वर्षों से वे प्रत्येक हनुमान जयंती के दिन शोभा यात्रा निकालने के क्रम में सक्रिय रहते हैं। इसके साथ ही वो आसपास के हिंदुओं को लेकर काँवड़ यात्रा भी निकालते हैं। इसके अलावा भी वह कई हिंदूवादी गतिविधियों में शामिल रहते हैं।

भावनगर पुलिस बोली- जाँच जारी है

ऑपइंडिया ने इस मामले में पुलिस से भी संपर्क किया। पूरे मामले की जाँच का जिम्मा संभाल रहे अधिकारी और बोरतलाव थाने के पीएसआई केसी रेहवार ने हमें बताया, “एफआईआर मौजूदा घटना के आधार पर दर्ज की गई है। इसलिए इसमें हनुमान चालीसा का कोई जिक्र नहीं है। दोनों पक्षों में आमना-सामना हुआ, जिसमें याचिका दायर होने के बाद एहतियाती कदम उठाए गए। हम जाँच कर रहे हैं जाँच के बाद ही पूरी जानकारी सामने आएगी।” 

‘यह मेरे आदर्शों और सिद्धांतों का सम्मान’: देश का सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘भारत रत्न’ मिलने पर भाजपा के वयोवृद्ध नेता लालकृष्ण आडवाणी ने PM मोदी का जताया आभार

पूर्व उप प्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवाणी को भारत रत्न से सम्मानित किए जाने की घोषणा के बाद उनकी पहली प्रतिक्रिया सामने आई है। लालकृष्ण आडवाणी ने कहा कि यह सम्मान केवल उनके लिए नहीं, बल्कि उन आदर्शों और सिद्धांतों के लिए भी है, जिनकी उन्होंने जीवन भर सेवा की है। इस सम्मान के लिए भारत सरकार का आभार जताते हुए उन्होंने कहा ये उनके लिए अत्यंत गौरव की बात है।

दरअसल, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार (3 फरवरी 2024) को BJP के वरिष्ठ नेता और पूर्व उपप्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवाणी को देश के सर्वोच्च नागरिक पुरस्कार ‘भारत रत्न’ से सम्मानित करने की घोषणा की। इस सम्मान की घोषणा के बाद भाजपा एवं अन्य दलों के नेताओं ने लालकृष्ण आडवाणी को बधाई दी।

खुद को भारत रत्न से सम्मानित किए जाने पर लालकृष्ण आडवाणी ने पत्र के माध्यम से अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने लिखा, “RSS (राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ) में शामिल होने के बाद से जीवन में मुझे जो भी जिम्मेदारी मिली, उसे निभाते हुए अपने प्रिय देश की समर्पित और निस्वार्थ सेवा करने में ही मुझे खुशी मिली। मुझे भारत रत्न देने के लिए राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू जी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी को हार्दिक धन्यवाद देता हूँ।”

लालकृष्ण आडवाणी ने आगे लिखा, “14 साल की उम्र में जबसे मैं राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ में स्वयंसेवक के रूप में शामिल हुआ, तब से मैंने केवल एक ही चीज की चाह की। वह है – जीवन में मुझे जो भी कार्य सौंपा गया है, उसमें अपने प्यारे देश की समर्पित और निस्वार्थ सेवा करना। जिस चीज ने मेरे जीवन को प्रेरित किया है, वह आदर्श वाक्य है इदं न मम- यह जीवन मेरा नहीं है। मेरा जीवन मेरे राष्ट्र के लिए है।”

इस अवसर पर उन्होंने पंडित दीन दयाल उपाध्याय और भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी को भी याद किया। इस सम्मान के लिए उन्होंने देश के लोगों, भाजपा के लाखों कार्यकर्ताओं और आरएसएस के स्वयंसेवकों को दिया, जिनके साथ उन्होंने अपने जीवनकाल में काम किया। उन्होंने अपने परिवार, खासकर अपनी दिवंगत पत्नी कमला का भी आभार जताया। उन्होंने अपनी पत्नी को अपनी सबसे बड़ी शक्ति बताया।

बता दें कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक ट्वीट के जरिए उन्हें भारत रत्न दिए जाने की घोषणा की। पीएम मोदी ने कहा कि उन्हें ये बताते हुए ख़ुशी हो रही है कि पूर्व उप-प्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवाणी को ‘भारत रत्न’ से सम्मानित किया जाएगा। पीएम मोदी ने भाजपा के वयोवृद्ध नेता से बात करके उन्हें बधाई भी दी। प्रधानमंत्री ने आडवाणी को इस समय के सबसे सम्मानित राजनेताओं में से एक बताया और कहा कि भारत के विकास में उनका योगदान चिरस्मरणीय है।