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15 साल के नाबालिग को सुधारने के लिए कर्नाटक पुलिस ने जमात के पास भेजा, 3 दिन में भाग गया: चोरी की 10+ घटनाओं में था आरोपित, मंत्री तक को नहीं छोड़ा

कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु में पुलिस ने एक नाबालिग अपराधी को सुधरने के उद्देश्य से 30 दिनों के लिए जमात में भेजा। वह नाबालिग यहाँ सुधरने के बजाय तीन दिनों में ही जमात के पास से भाग गया। बताया जा रहा है कि यह नाबालिग आदतन अपराधी था और इसके 10 से अधिक मामलों में जुड़े होने की जानकारी है।

डेक्कन हेराल्ड की एक रिपोर्ट के अनुसार, कुछ दिन पहले बेंगलुरु पुलिस ने इस लड़के को गिरफ्तार किया था। यह नाबालिग लगातार कई अपराध में संलिप्त रहा था। हमेशा नई तकनीक का सहारा लेने वाली बेंगलुरु पुलिस ने इस बार सुधार लाने के लिए इसे जमात के पास भेजा, ताकि वह वहाँ दीन से प्रभावित होकर अपराध छोड़ दे।

नाबालिग ने बीते वर्ष कर्नाटक के एक मंत्री से भी फोन छीन लिया था। मंत्री उस समय बनासवाड़ी पुलिस स्टेशन के तहत सुबह की सैर पर थे और यह दौड़ता हुआ आकर उनसे फ़ोन छीनकर फरार हो गया था। मंत्री द्वारा शिकायत दर्ज करवाने के बाद इसे गिरफ्तार कर लिया गया था। गिरफ्तारी के बाद उसका इतिहास देखकर पुलिस चौंक गई। वह कई अपराधों में संलिप्त पाया गया।

लड़का पूर्वी बेंगलुरु के बनासवाड़ी उपखंड का निवासी है। कुछ साल पहले उनके पिता के निधन के बाद उनकी मां ही परिवार में कमाने वाली एकमात्र सदस्य हैं। उसका एक छोटा भाई है। पुलिस ने बताया कि यह नाबालिग चोरी और डकैती के तीन-तीन मामलों को मात्र 10 दिनों के भीतर अंजाम दे चुका है।

लगभग 15 साल के इस नाबालिग ने यह सारा कारनामा उसने 2023 के अंत में किया है। पुलिस ने बताया कि नाबालिग ने ताले तोड़कर गाड़ियाँ चुराने में महारत हासिल कर ली है और वह बिना किसी समस्या के गाड़ियों का ताला तोड़कर उन्हें लेकर भाग जाता था। वह 10 गाड़ियाँ चोरी कर चुका था, जो कि उसके पकड़े जाने के बाद बरामद कर ली गई हैं।

इन सबके बाद उसे गिरफ्तार करके बाल सुधार गृह भेजा गया। वहाँ उसमें कोई बदलाव नहीं आया और बाहर आकर फिर से चोरी करने लगा। इसके बाद पुलिस ने उसे फिर से पकड़ा। इस बार पुलिस ने उसे बाल सुधार गृह भेजने के बजाय उसे एक मदरसे में दाखिल करवाने का निर्णय लिया, ताकी उसे दीन की तालीम मिल सके।

हालाँकि, बेंगलुरु पुलिस का यह निर्णय उलटा पड़ा और यह नाबालिग तीन दिनों के भीतर ही जमात की निगरानी में मदरसे से चम्पत हो गया। उधर बेंगलुरु के डिप्टी पुलिस कमिश्नर का कहना है कि नाबालिग पर जमात और मदरसे ने सकारात्मक प्रभाव डाला है, क्योंकि बीते 25 दिनों से उसके किसी चोरी में पकड़े जाने की खबर नहीं आई है।

‘पुलिस नहीं, मुझ पर मुन्नन खाँ के वर्दी वाले गुर्गों ने चलाई थी गोली’: कारसेवक नरसंहार में जीवित बचे महंत ने बताया- मरा समझ सरयू में फेंकने जा रहे थे

अयोध्या में जन्मभूमि पर 22 जनवरी 2024 को राम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा सम्पन्न हर्षोउल्लास के साथ संपन्न हो गई। विधि-विधान से हुए इस आयोजन के बाद दुनिया भर के श्रद्धालुओं का रामजन्मभूमि पर दर्शन के लिए तांता लगा हुआ है। श्रद्धालुओं के मन में जहाँ राम मंदिर के लिए 500 वर्षों तक चले संघर्ष में प्राण गँवाने वाले रामभक्तों के लिए श्रद्धा है तो दूसरी तरफ पवित्र धर्मनगरी में नरसंहार करवाने वालों के प्रति आक्रोश भी।

ऑपइंडिया की पड़ताल में साल 1990 में कारसेवकों के हुए नरसंहार में मुन्नन खाँ का भी नाम सामने आया था। बलिदानियों के परिजनों ने नरसंहार में मुन्नन खाँ को आरोपित किया था। इस बीच हमने अपनी ग्राउंड रिपोर्ट में एक जीवित कारसेवक खोज निकाला है, जिनका दावा है कि उन पर लगी गोली पुलिस नहीं, बल्कि मुन्नन खाँ के गुर्गों द्वारा चलाई गई थी। हालाँकि, इस नरसंहार में वे बचने में कामयाब रहे।

रामजन्मभूमि संघर्ष के तमाम पहलुओं की पड़ताल करते हुए हम गोंडा जिले में पहुँचे। गोंडा में हमें लखनऊ रोड पर कमिश्नर आवास के पास दीवानी चौराहे पर बने माँ दुर्गा के मंदिर में गए। यह मंदिर आसपास के श्रद्धालुओं की आस्था का मुख्य केंद्र है। मंदिर के महंत 68 वर्षीय रामस्वरूप दास हैं, जो कि मूलतः गोंडा जिले के ही निवासी हैं। ऑपइंडिया से बातचीत में रामस्वरूप ने दावा किया कि मुलायम यादव की सरकार के दौरान 1990 की कारसेवा में वे सक्रिय रूप से शामिल थे।

पुलिस में फॉलोवर की नौकरी छोड़कर निकले पड़े थे अयोध्या

सन 1990 में रामस्वरूप दास उत्तर प्रदेश पुलिस की PAC विंग में फॉलोवर की नौकरी करते थे। गोंडा स्थित उनके गाँव से होकर कई राज्यों के कारसेवक निकलते थे। इस दौरान वे ग्रामीणों के साथ मिलकर इन कारसेवकों के लिए खाना-पीना और रहने आदि का इंतजाम करते थे। बचपन से ही रामभक्ति में लीन रहने वाले रामस्वरूप दास ने बताया कि उन्होंने महीनों तक कारसेवकों की सेवा की।

इस बीच उत्तर प्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव द्वारा ‘अयोध्या में परिंदा भी पर न मार पाने’ वाला चैलेन्ज दिया गया। रामस्वरूप ने बताया कि अपने ही धर्मस्थल के लिए सरकार द्वारा दी गई ये चुनौती उन्हें अखर गई। इसके बाद वे कारसेवा के लिए अपने गाँव और आसपास के लोगों का जत्था बनाकर अयोध्या की ओर कूच कर गए।

पुलिस पहरे से बचकर पहुँचे अयोध्या

रामस्वरूप जब अयोध्या की तरफ कूच किए तब उनके साथ राजस्थान से आए रामभक्तों का भी एक जत्था जुड़ गया था। इन सभी को गाँव के अलग-अलग रास्तों से निकाल कर खेतों में रात्रि विश्राम आदि करवाते हुए आखिरकार रामस्वरूप 29 अक्टूबर 1990 में अयोध्या की सीमा पर पहुँच गए। अब अयोध्या में घुसने के लिए नदी पार करनी थी। दूसरी तरफ गुप्तार घाट था, जहाँ उन्हें अपने जत्थे सहित पुलिस से पहरे से बच कर उतरना था।

PAC और मिलिट्री वालों ने दिया खाना और दी सुरक्षित रहने की सलाह

रामस्वरूप का दावा है कि जब उन्होंने अपने साथियों सहित नदी पार की, तब उनको गुप्तार घाट पर यूपी PAC के जवान मिले। उन्होंने कारसेवकों से किसी भी प्रकार की अभद्रता नहीं की, बल्कि वे उनसे सम्मानित ढंग से पेश आए। PAC के जवानों की रामस्वरूप इस बात के लिए भी तारीफ कर रहे थे कि अगर वो बल प्रयोग करते तो इसकी भी आशंका थी कि नाव नदी में ही पलट जाती और सभी कारसेवक डूब जाते।

महंत रामस्वरूप ने आगे बताया कि नदी के पार उतरते ही कारसेवक भारतीय सेना की डोगरा रेजिमेंट सेंटर के रास्ते से निकलने लगे। तब सेना के जवानों ने उन सभी कारसेवकों को अपने हिस्से का खाना खिलाया। रामस्वरूप का दावा है कि इन्हीं सैनिकों ने कारसेवकों को वो जगह भी बताई थी, जहाँ वो रात भर चैन से सो सकते थे।

विवादित ढाँचे तक पहुँचा था रामभक्तों का जत्था

रामस्वरूप ने बताया कि 29 अक्टूबर की रात में नींद लेने के बाद 30 अक्टूबर 1990 की सुबह 4 बचे भोर में ही उनका जत्था वहाँ से महज 5 से 6 किलोमीटर स्थित रामजन्मभूमि की तरफ कूच कर गया। इसी दिन सुबह लगभग 9 बजे तक यह जत्था छिपते-छिपाते विवादित ढाँचे तक पहुँच गया।

रामस्वरूप के मुताबिक, तब तक अयोध्या में इतने रामभक्त जुट चुके थे कि हर तरफ भगवा रंग और जय श्रीराम की ही गूँज ही सुनाई दे रही थी। हर कारसेवक जल्द से जल्द विवादित ढाँचे तक पहुँचना चाहता था। इसी जनसैलाब ने अयोध्या में पुलिस द्वारा लगाई गई पहली बैरिकेड को पार कर लिया।उस समय तक किसी भी रामभक्त को जीने-मरने की चिंता नहीं थी।

ढाँचे पर झंडा लगाने बढ़े तो पीछे से ललकारा गया

रामस्वरूप बताते हैं कि वे उन गिने-चुने लोगों में शामिल थे, जो विवादित ढाँचे तक पहुँच गए थे। यहाँ गुंबद से सटा हुआ एक नीम का पेड़ था, जिसने रामभक्तों के लिए सीढ़ी का काम किया। उसी पर चढ़कर कई लोग गुंबद पर पहुँच गए। ये लोग वहाँ भगवा ध्वज फहराना चाहते थे। तभी पीछे से एक चेतावनी आई, “नीचे उतर जाओ, वरना गोली मार दी जाएगी”। हालाँकि, रामभक्त झंडा लगाना कोई ऐसा अपराध नहीं मान रहे थे, जिसके लिए उन्हें गोली मार दी जाएगी।

गोली लगते ही बेहोश हो गए रामस्वरूप दास

रामस्वरूप दास हमें आगे बताते हैं कि नीम के पेड़ से ढाँचे पर चढ़ने वालों में वो खुद भी शामिल थे। एक आवाज के बाद किसी को उस पर अमल नहीं करने दिया गया और गोलियाँ चलनी शुरू हो गईं। रामस्वरूप के आगे ही उनके कई साथी गोली लगते ही बलिदान हो गए। मौके पर अफरा-तफरी मच गई। इसी बीच एक गोली रामस्वरूप की कमर के निचले हिस्से में लगी। गोली लगते ही रामस्वरूप काफी ऊँचाई पर बने गुंबद से नीचे गिर पड़े और बेहोश हो गए। इसके बाद क्या हुआ उनको पता नहीं चला।

जिन्दा ही थी नदी में फेंकने की तैयारी पर पहचान गए PAC वाले

रामस्वरूप का कहना है कि उनको जिन्दा ही नदी में फेंकने के लिए तत्कालीन प्रशासन तैयारी कर चुका था। बेहोशी की हालत में उनको एक ट्रक में कई बलिदानियों के साथ लाद लिया गया था। इन सभी को सरयू नदी के घाट पर ले जाकर एक-एक करके नदी में फेंका जा रहा था। रामस्वरूप PAC में फॉलोवर थे, जिसकी वजह से उनको कई PAC वाले पहचानते थे।

उनका दावा है कि इसी दौरान उनका नंबर आते ही एक जवान ने उन्हें पहचान लिया। उसे साथी जवानों को बुलाया, तब तक रामस्वरूप की साँसे चल रही थीं। आनन-फानन में रामस्वरूप को अयोध्या के श्रीराम अस्पताल में भर्ती करवाया गया। कई दिनों तक चले इलाज के बाद रामस्वरूप को जीवित बचाया जा सका।

रामस्वरूप को लगी गोली डोगरा मिलिट्री हॉस्पिटल में निकाली गई थी। आज भी रामस्वरूप गोली के कुप्रभाव से उबर नहीं पाए हैं। वो अभी भी दौड़ नहीं पाते हैं। रामस्वरूप का यह भी दावा है कि तब ऐसे कई घायल रामभक्त भी थे, जिनको जिन्दा ही नदी में फेंक दिया गया था। बाद में उनका कुछ भी अता-पता नहीं चल पाया।

पुलिस ने नहीं बल्कि मुन्नन खाँ के गुर्गों ने चलाई थी गोली

रामस्वरूप ने बड़े विश्वास के साथ दावा किया कि उनको गोली मारकर घायल करने और उनके जत्थे वाले साथियों की जान लेने वाली हरकत पुलिस ने नहीं, बल्कि गोंडा के माफिया और तत्कालीन सांसद मुन्नन खाँ के साथियों ने की थी। रामस्वरूप ने बताया कि रामजन्मभूमि परिसर तक मुन्नन खाँ के अपराधी गुर्गे पुलिस की वर्दी पहनकर हथियारों से लैस खड़े थे।

बकौल रामस्वरूप दास, गोंडा में जहाँ का रहने वाला मुन्नन खाँ भी रहने वाला था, उस जगह के रहने वाले कई लोग उनके जत्थे में शामिल थे। जब गोलियाँ चलने लगीं तब गोंडा के कारसेवकों ने पहचान लिया कि पुलिस की वर्दी में गोली चलाने वाला असल में यूपी पुलिस के सिपाही नहीं, बल्कि मुन्नन खाँ के गुर्गे थे।

जब रामस्वरूप दास काफी दिनों बाद ठीक हुए तब भी उनके साथी कारसेवकों ने इस बात पर चर्चा की थी कि मुन्नन खाँ के लोगों ने रामभक्तों की हत्या की है। हालाँकि, मुन्नन खाँ पर कोई कार्रवाई नहीं करवाई जा सकी। रामस्वरूप के मुताबिक, तब मुलायम यादव की सरकार में मुन्नन खाँ का बहुत बड़ा रुतबा हुआ करता था।

अब मुस्लिम भी करेंगे भगवान वेंकटेश्वर की सेवा! हुसैन की अर्जी के बाद रास्ता निकालने में जुटा तिरुपति बोर्ड, कहा – ये ख़ुशी की बात

तिरुमला तिरुपति देवस्थानम (TTD) ने कहा है कि वह मुस्लिम भक्तों के तिरुपति की सेवा करने के रास्ते तलाशेंगे। ऐसा मुस्लिम भक्तों के अनुरोध पर किया जा रहा है। कुछ मुस्लिम भक्तों ने भगवान् वेंकटेश्वरा की सेवा करने की माँग बोर्ड से की है।

कुछ मुस्लिम भक्तों ने माँग की है कि उन्हें श्रीवरी सेवा करने का अवसर दिया जाए। यह एक प्रकार की कारसेवा होती है, इसमें बोर्ड हिन्दू श्रद्धालुओं को मंदिर से जुड़े कामों में लगाता है। हिन्दू भक्त इसे अपनी श्रद्धानुसार कर सकते हैं, इसके लिए रजिस्ट्रेशन करवाना होता है। इसकी शुरुआत TTD ने वर्ष 2000 में की थी। इस सेवा के तहत मंदिर प्रशासन ऐसे श्रृद्धालुओं को 60 से अधिक क्षेत्रों, जैसे कि- ट्रांसपोर्ट, साफ़ सफाई, अन्नप्रसादम और अन्य कार्यों में लगाता है।

TTD से आंध्र प्रदेश के नायडूपेट्टा के रहने वाले मुस्लिम भक्त हुसैन भासा ने यह अर्जी की है कि उन्हें तिरुपति में सेवा करने का अवसर दिया जाए। उन्होंने TTD से माँग की थी कि उन्हें भी श्रीवरी सेवा में हिस्सा लेना है। इसी को लेकर TTD के एग्जीक्यूटिव ऑफिसर वी धर्मा रेड्डी ने कहा है कि वह बोर्ड से बात करके इसकी संभावनाएँ तलाशेंगे। रेड्डी का कहना है यह प्रसन्नता की बात है कि अन्य धर्मों के लोग भी भगवान वेंकटेश्वर में श्रद्धा रखते हैं और उनकी उपासना करना चाहते हैं।

वेंकटेश्वर स्वामी मंदिर भगवान विष्णु को समर्पित है। यह आंध्र प्रदेश के तिरुपति जिले में स्थित है। इस मंदिर का निर्माण ईस्वी 300 से चालू हुआ माना जाता है। यहाँ प्रत्येक वर्ष लगभग 3-4 करोड़ श्रद्धालु भगवान वेंकटेश्वर के दर्शन करने आते हैं।

TTD 90 वर्षों से भी अधिक से तिरुमला वेंकटेश्वरा मंदिर का प्रबन्धन करता आ रहा है। इसके अंतर्गत अभी 12 मंदिर आते हैं। TTD वर्तमान में देश में सबसे सुप्रबंधित बोर्ड में से एक है और अन्य जगहों पर भीड़ व्यवस्थित करने और धार्मिक संस्थान चलाने को लेकर इसका उदाहरण दिया जाता है।

जो रूस में भारतीय दूतावास की सिक्योरिटी में था तैनात, वो निकला ISI का एजेंट: यूपी ATS ने पाकिस्तान के लिए काम कर रहे जासूस को दबोचा

उत्तर प्रदेश आतंकवाद विरोधी दस्ते (ATS) ने मेरठ से एक ऐसे ISI एजेंट को गिरफ्तार किया है, जो मॉस्को स्थित भारतीय दूतावास से जुड़ा रह चुका है। आरोपित का नाम सत्येंद्र सिवाल है और वह हापुड़ का रहने वाला है। वह रूस के मॉर्को में भारतीय दूतावास में मल्टी टास्किंग स्टाफ (MTS) के पद पर तैनात था। वो महत्वपूर्ण जानकारियाँ अपने आईएसआई हैंडलर को भेज रहा था। इसके लिए वो पैसे देकर जानकारियाँ निकाल रहा था और फिर उसे पाकिस्तान भेज रहा था।

‘इंडिया टुडे’ की रिपोर्ट के मुताबिक, सत्येंद्र सिवाल को यूपी ATS ने मेरठ से पकड़ा। एटीएस को सूचना मिली थी कि सत्येंद्र सिवाल पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी ISI के लिए जासूसी कर रहा है। इसके बाद एटीएस ने उसकी गतिविधियों पर नजर रखनी शुरू की। ATS ने जब सत्येंद्र सिवाल को गिरफ्तार किया तो उसके पास से कुछ संदिग्ध दस्तावेज और इलेक्ट्रॉनिक उपकरण बरामद हुए। उसके कब्जे से 2 मोबाइल भी बरामद हुए थे।

पूछताछ में सिवाल ने कबूल किया कि वह पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई के लिए जासूसी कर रहा था। सिवाल ने बताया कि आईएसआई के एजेंटों ने उसे भारतीय दूतावास से संवेदनशील जानकारी इकट्ठा करने का काम दिया था। वो पैसे देकर आर्मी से जुड़ी जानकारियाँ हासिल कर रहा था और फिर से अपने हैंडलर को भेज रहा था। वो मॉस्को में तैनाती के दौरान ही पाकिस्तान के लिए काम करने लगा था, या बाद में, अभी सुरक्षा एजेंसियाँ इसका पता लगाने की कोशिश कर रही हैं।

एटीएस अब सत्येंद्र सिवाल से पूछताछ कर रही है। एटीएस को उम्मीद है कि सत्येंद्र सिवाल से पूछताछ में आईएसआई के बारे में अहम जानकारी मिल सकती है। यह गिरफ्तारी भारत के लिए एक बड़ी सफलता है। साथ ही यह घटना भारतीय सुरक्षा एजेंसियों के लिए एक चेतावनी है। एजेंसियों को अधिक सतर्क रहने की आवश्यकता है ताकि आईएसआई जैसे आतंकवादी संगठनों के एजेंटों को भारत में घुसपैठ करने से रोका जा सके।

‘पूनम पांडेय ने अपनी हरकत से कैंसर पीड़ितों का बनाया मजाक’: MLA ने की कार्रवाई की माँग, दोस्त बोली – कुछ हुआ तो अब कुत्ता भी नहीं भौंकेगा

खबरों में बने रहने के लिए कुछ भी करने वाली पूनम पांडेय सर्वाइकल कैंसर से अपनी मौत की अफवाह उड़ाकर बुरी फँसी हैं। हर तरफ उनकी आलोचना हो रही है। महाराष्ट्र के नेता सत्यजीत तांबे ने अफवाह उड़ाने के लिए पूनम पांडेय के खिलाफ पुलिस कार्रवाई की माँग की है। उन्होंने कहा कि पांडेय ने कैंसर से बचे लोगों के साथ मजाक किया है। वहीं, भोजपुरी फिल्मों की अभिनेत्री संभावना सेठ ने पूछा है कि क्या रेप पर भी ऐसे ही अलर्ट करेंगी पूनम पांडेय।

महाराष्ट्र के निर्दलीय विधायक सत्यजीत तांबे ने शनिवार (3 फरवरी 2024) को कहा कि मुंबई पुलिस को पूनम पांडे के खिलाफ मामला दर्ज करना चाहिए, ताकि उन लोगों के लिए एक उदाहरण स्थापित किया जा सके जो खुद के प्रचार के लिए ऐसी हरकतें करते हैं। बता दें कि बाद में पूनम पांडे ने कहा था कि उनकी मौत का नाटक सर्वाइकल कैंसर जागरूकता अभियान का हिस्सा था।

तांबे ने कहा, “सर्वाइकल कैंसर से एक प्रभावशाली व्यक्ति/मॉडल की मृत्यु की खबर बीमारी के बारे में जागरूकता फैलाने का साधन नहीं हो सकती है। यह पूरा प्रकरण सर्वाइकल कैंसर की गंभीर प्रकृति को दूर कर देता है और ध्यान पूरी तरह से प्रभावित करने वाले की ओर आकर्षित कर देता है। अभिनेता ने जागरूकता बढ़ाने के बजाय कैंसर से बचे लोगों के साथ मजाक किया है।”

उन्होंने पूनम पांडेय की मौत की खबर छापने वाले समाचार संस्थानों पर भी सवाल उठाया। सत्यजीत तांबे ने आगे कहा, “एक और समस्या यह है कि तथ्यों की पुष्टि किए बिना समाचार एजेंसियों द्वारा नाटक की रिपोर्ट कैसे की गई। मीडिया का इस्तेमाल अनुचित तरीकों से अपने एजेंडे को आगे बढ़ाने के लिए किया जा रहा था।”

इतना ही नहीं, भोजपुरी फिल्मों की ऐक्ट्रेस संभावना सेठ ने भी पूनम पांडेय की इस हरकत पर सवाल उठाया है। उन्होंने कहा, मुझे मालूम हुआ कि जो व्यक्ति कल मर चुका था, वह आज फिर से जिंदा हो गया। ये किस किस्म की पीआर ऐक्टिविटी है?” उन्होंने पूनम पांडेय से सवाल किया, आपके पीआर ने समझाया नहीं कि ये नहीं करना चाहिए। पूरी मीडिया कल डिस्टर्ब थी।”

संभावना सेठ ने आगे कहा, “आप कह रहे हो आपने अवेयरनेस के लिए ये सब किया, लेकिन आप करोड़ों लोगों की मेंटल हेल्थ से खेले हो आप। मैं पूरा दिन यही सोचती रही कि 32 साल की लड़की थी यार, वो चली गई। सुबह से शाम तक ये मेरे साथ होता रहा। मैं सपने देख रही थी। बाद में पता चला कि ये अवेयरनेस प्रोग्राम था। तो आप अवेयरनेस के लिए और क्या-क्या करने वाली हो?”

उन्होंने पूनम पांडेय पर सवाल उठाते हुए कहा, “कल को अगर असल में कुछ हो गया तो एक कुत्ता भी नहीं भौंकने वाला। अगर कल को रेप अवेयरनेस आ गई तब क्या करोगी। शर्म आनी चाहिए। ये बहुत ही शर्मनाक ऐक्टिविटी है।” संभावना सेठ ने कहा कि उनके एक मीडिया फ्रेंड ने कहा था कि अवेयरनेस जैसा कुछ आ रहा है, लेकिन उन्होंने कह दिया था कि कोई मौत से नहीं खेल सकता।

इसके पहले ‘लॉकअप’ शो में कंटेस्टेंट रहीं डिजाइनर सायशा शिंदे भी उन्हें लताड़ चुकी हैं। सायशा शिंदे ने कहा कि मौत न कोई मजाक है और न ही कोई पब्लिसिटी स्टंट है। उन्होंने पूनम पांडेय को लताड़ते हुए कहा था कि वह उन्हें कभी माफ़ नहीं करेंगी।

सायशा शिंदे ने कहा था, “पूनम पांडेय को शर्म आनी चाहिए। तुम दोस्त बनाने लायक नहीं हो। तुम इसे जागरूकता कहती हो? बकवास बंद करो। मेरी माँ की ब्रेस्ट कैंसर सर्जरी हुई है। किडनी फेल होने से मेरी बहन का निधन हो गया। मानसिक बीमारी से मेरी चाची चल बसीं। तुम्हारी तरह वो सब कभी वापस नहीं आ सकतीं।”

वहीं अभिनेत्री पूजा भट्ट ने भी पूनम पांडेय की मौत पर शोक जताया था। हालाँकि, बाद में ट्वीट को डिलीट करते हुए उन्होंने कहा था कि ये बीमारी से जूझ रहे लोगों का अपमान है। वहीं एक्टर अली गोनी ने इसे पब्लिसिटी स्टंट बताते कहा था कि पूनम पांडेय और उनकी PR टीम का बॉयकॉट होना चाहिए, शर्म आती है।

‘खातूनों को हिजाब में रखो, पब्लिक में मत डालो फोटो’: बुर्के में नहीं दिखी इरफ़ान पठान की बीवी तो कट्टरपंथी पढ़ाने लगे इस्लाम का पाठ

पूर्व भारतीय क्रिकेटर इरफ़ान पठान ने अपनी पत्नी का बिना बुर्का के फोटो डाला तो इस्लामी कट्टरपंथी उन पर भड़क गए। इस्लामी कट्टरपंथियों ने उनको इस्लाम और दीन का पाठ पढ़ाना चालू कर दिया। ऐसा पहली बार हुआ कि इरफ़ान पठान ने अपनी पत्नी का बिना मुँह ढका हुआ फोटो डाला था।

इरफ़ान पठान ने यह फोटो अपनी शादी की 8वीं सालगिरह पर डाली। उन्होंने लिखा, “एक शख्स द्वारा न जाने कितने ही कार्य में खुद को दक्ष कर लिया गया है – मूड अच्छा करने वाली, कॉमेडियन, गड़बड़ करने वाली और एक अच्छी साथी, दोस्त, और मेरे बच्चों की माँ। मैं इस यात्रा में तुम्हें अपनी पत्नी के तौर पर पाकर प्रसन्न हूँ। आठवीं सालगिरह की बधाइयाँ।”

हालाँकि, इरफ़ान पठान का अपनी पत्नी के साथ फोटो डालना इस्लामी कट्टरपंथियों को रास नहीं आया। उनकी पत्नी के साथ डाले गए फोटो पर बड़ी संख्या में कट्टरपंथी उन्हें इस्लाम और दीं की तालीम देने लगे और उनकी पत्नी पर टिप्पणियाँ करने लगे।

एक यूजर ने लिखा, “मुस्लिम खातून को हिजाब में रहना चाहिए।”

एक और ने लिखा, “एक मुस्लिम होने के नाते उनकी फोटो जनता में मत डालो।”

इरफ़ान पठान पर हमला करते कट्टरपंथी

इसके बाद एक यूजर ने उनके भाई युसूफ पठान की फोटो उनकी पत्नी के साथ डाली। इसमें युसूफ पठान की पत्नी ने बुर्का पहन रखा है। इसने लिखा, “इसीलिए तुम्हारा भाई तुमसे अच्छा है।”

इरफ़ान पठान पर हमला करते कट्टरपंथी

एक यूजर ने उनसे पूछा कि इतने दिन से चेहरा छुपा कर रखा था तो अब दिखाने की क्या जरूरत पड़ गई।

इरफ़ान पठान पर हमला करते कट्टरपंथी

इरफ़ान पठान की पत्नी का नाम सबा बेग है। वह पूर्व में एक मॉडल थीं और उनकी परवरिश सऊदी अरब में हुई है। उनकी शादी 4 फरवरी, 2016 को सबा बेग से हुई थी। सबा ने इरफ़ान के साथ शादी के बाद अपना मॉडलिंग करियर छोड़ दिया था।

रिपोर्ट्स के अनुसार, उनकी इरफ़ान के साथ मुलाक़ात 2014 में हुई थी। इसके बाद दोनों में नजदीकियाँ बढ़ना चालू हो गईं। 2016 में दोनों ने विवाह कर लिया। जब सबा की शादी इरफ़ान से हुई थी तब वह आत्र 21 साल की थीं। उनकी और इरफ़ान की उम्र में 10 वर्ष का अंतर है। उन दोनों के दिसम्बर 2016 में एक बेटा इमरान खान भी हुआ था।

इरफ़ान पठान अब तक अपनी पत्नी की फोटो नहीं डालते थे जिनमें उनका चेहरा दिखता हो। इससे पहली डाली गई फोटो में उनकी पत्नी का चेहरा बुर्का या फिर हाथों से ढका हुआ होता था। मुस्लिम कट्टरपंथियों के अनुसार, इस्लाम में महिलाओं को सार्वजनिक स्थान पर चेहरा ढकने की हिदायत दी गई है। इससे पहले मोहम्मद शामी की बेटी के सरस्वती पूजा करने और अभिनेत्री सारा अली खान के मंदिर जाने को लेकर भी इस्लामी कट्टरपंथी बवाल मचाते आए हैं।

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मणिशंकर अय्यर की बेटी को भारी पड़ी राम मंदिर पर टिप्पणी, अब साइबर पुलिस के पास पहुँची शिकायत: RWA भी कह चुका है – माफ़ी माँगो या खाली करो कॉलोनी

कॉन्ग्रेस नेता मणिशंकर अय्यर की बेटी सुरन्या के खिलाफ पुलिस में शिकायत दर्ज कराई गई है। सुरन्या अय्यर ने राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा के खिलाफ 3 दिनों का अनशन रखा था और कहा था कि वो देश के मुस्लिम नागरिकों के लिए ऐसा कर रही हैं। उन्होंने सोशल मीडिया में एक विवादित पोस्ट भी किया था। जिस सोसाइटी में वो रहती हैं, वहाँ के RWA ने नोटिस जारी कर के उनसे माफ़ी माँगने को कहा है। अब उनके खिलाफ दिल्ली पुलिस की साइबर क्राइम ब्रांच में शिकायत दर्ज कराई गई है।

सुप्रीम कोर्ट के वकील और भाजपा नेता अजय अग्रवाल ने शनिवार (3 फरवरी, 2024) को ये शिकायत दर्ज कराई है। उन्होंने अपनी इस शिकायत में इसका जिक्र किया कि कैसे मणिशंकर अय्यर की बेटी ने राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा से 2 दिन पहले 20 जनवरी, 2024 को फेसबुक और यूट्यूब के अलावा अपने अन्य सोशल मीडिया हैंडलों से गंभीर आपत्तिजनक पोस्ट लिखा है। साथ ही उन्होंने 36 मिनट का एक वीडियो भी दिल्ली पुलिस को सौंपा है और इसे भड़काऊ बताया है।

शिकायतकर्ता अजय अग्रवाल ने माँग की कि सुरन्या अय्यर के विरुद्ध IPC (भारतीय दंड संहिता) की धारा-153A (विभिन्न समुदायों के बीच वैमनस्य को बढ़ावा देना) सहित अन्य धाराओं में मुकदमा दर्ज किया जाए। इससे पहले RWA भी कह चुका है कि सुरन्या अय्यर कॉलोनी का नाम खराब कर रही हैं, वो माफ़ी माँगें या फिर किसी अन्य सोसाइटी में चली जाएँ। हालाँकि, इसके जवाब में कथित एक्टिविस्ट सुरन्या ने कहा कि ये RWA उनकी सोसाइटी से संबद्ध नहीं है, किसी अन्य सोसाइटी का है।

इससे पहले मणिशंकर अय्यर की बेटी ने एक तस्वीर शेयर की थी, जिसमें उनकी माँ उन्हें शहद पिला कर उनका अनशन तुड़वाते हुए दिख रही हैं। इससे सोसाइटी के लोगों में नाराज़गी का माहौल पनप आया। लोग कह रहे हैं कि कॉन्ग्रेस नेता की बेटी माफ़ी माँगे। कुछ दिनों पहले मणिशंकर अय्यर की दूसरी बेटी यामिनी से जुड़े थिंक टैंक ‘सेंटर फॉर पॉलिसी रिसर्च (CPR)’ का अवैध गतिविधियों में लिप्त रहने के कारण केंद्रीय गृह मंत्रालय ने FCRA लाइसेंस रद्द कर दिया था।

केजरीवाल के मोहल्ला क्लीनिक में 65000 ‘भूतों’ का टेस्ट, हर टेस्ट के लिए दिल्ली के सरकारी खजाने से पैसा: मोबाइल नंबर से धराया करोड़ों का घोटाला

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल की महत्वाकांक्षी योजना मोहला क्लीनिक में बड़े घोटाले की जानकारी सामने आई है। भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) द्वारा की गई जाँच में मोहल्ला क्लीनिक में किए गए हजारों टेस्ट फर्जी पाए गए हैं। इनके आधार पर बड़ी रकम सरकार से वसूली गई है।

ACB ने अपनी शुरुआती रिपोर्ट में बताया है कि मोहल्ला क्लीनिक द्वारा करवाए गए टेस्ट में डाले गए हजारों मोबाइल नम्बर फर्जी पाए गए। इनके आधार पर सरकार को तगड़ा चूना लगाया गया। ACB ने यह जाँच फरवरी 2023 से नवम्बर 2023 की अवधि के दौरान किए गए लैब टेस्ट के लिए की है।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, इस दौरान मोहल्ला क्लीनिक के पर्चों के आधार पर 22 लाख टेस्ट किए गए। इस जाँच में 65,000 टेस्ट फर्जी पाए गए हैं। इसमें एक टेस्ट के लिए दिल्ली सरकार ने ₹100-₹300 तक का भुगतान किया। बताया गया है कि इन फर्जी टेस्ट के कारण सरकार को ₹4.63 करोड़ का चूना लगा।

दरअसल, दिल्ली सरकार द्वारा चलाए जाने वाले मोहल्ला क्लीनिक में परामर्श लेने वाले रोगियों को टेस्ट करवाने के लिए निजी लैब में जाना होता है। इन लैब का सरकार के साथ एग्रीमेंट है। इन लैब टेस्ट का भुगतान सरकार करती है। इसके लिए पहले रोगी को मोहल्ला क्लीनिक में अपना रजिस्ट्रेशन करवाना होता है। इसके बाद लैब के रजिस्ट्रेशन सिस्टम जिसे LIMS कहा जाता है, में अपना मोबाइल नम्बर दर्ज करवाना होता है। इसके जरिए रोगी को उसकी लैब टेस्ट रिपोर्ट उसके मोबाइल नम्बर पर भेजी जाती है।

इसी मोबाइल नम्बर को दर्ज करने में गड़बड़ी की गई है। ACB की जाँच में बताया गया है कि 12457 टेस्ट में कोई नम्बर नहीं डाला गया जबकि 25732 टेस्ट में 00 करके नम्बर डाल दिए गए। इसके अलावा 967 टेस्ट में ऐसे नम्बर डाले गए जो कि 1, 2 और 3 से चालू होते थे। इसके अलावा 2467 टेस्ट ऐसे नम्बर पर किए गए जो कि 80 अलग-अलग रोगियों के लिए टेस्ट में डाले गए। जाँच का कहना है कि ऐसा ज्यादा से ज्यादा फर्जी जाँच रसीदें बनाकर सरकारी खजाना खाली करने के लिए किया गया।

जाँच में सामने आया है कि यह घोटाला करने के लिए LIMS सिस्टम तक में दो लैब वालों ने गड़बड़ कर दिया। इनके पास इस पूरे सिस्टम का सारा डाटा है, ऐसे में गड़बड़ी की संभावनाओं से इनकार नहीं किया जा सकता। यह सारी बातें ACB ने अपनी रिपोर्ट में बताई है। हालाँकि इस मामले में जिन लैब पर प्रश्न उठे हैं, उन्होंने अपना जवाब भी दाखिल किया है। मोहल्ला क्लीनिक में हुई गड़बड़ी की जाँच अब सीबीआई कर रही है। इसके लिए बीते माह दिल्ली के उपराज्यपाल वीके सक्सेना ने जाँच के आदेश दिए थे।

मरने वाले का AADHAAR-PAN रोहिंग्या मुस्लिमों के नाम, गैंग ऐसे कर रहा भारत में काम: NIA कर रही पहचान, जुटा रही डेटा

बांग्लादेश और म्यांमार से अवैध रूप से भारत में घुसे रोहिंग्या एवं बांग्लादेशी मुस्लिम अब देश के लिए नासूर बनते जा रहे हैं। वे ना सिर्फ अवैध रूप से देश में घुसकर काम-काज कर रहे हैं, बल्कि खुद को यहाँ का निवासी साबित करने के लिए आधार और वोटर कार्ड जैसे फर्जी दस्तावेज भी बना रहे हैं। अब वे मृत लेगों के आधार और वोटर कार्ड आदि दस्तावेज अपने नामों पर हस्तांतरण करा रहे हैं।

ये घुसपैठिए भारत के अलग-अलग राज्यों में छिप कर रह रहे हैं और अपनी पहचान छिपाने के लिए ऐसे लोगों के पहचान पत्र का इस्तेमाल कर रहे हैं, जिनकी मौत हो चुकी है। इन नामों से ये घुसपैठिए ना सिर्फ अपना कारोबार चला रहे हैं कि बैंकों में खाते भी खुलवा लिए हैं। इस तरह के मामले सामने आने के बाद खुफिया एजेंसियाँ भी सतर्क हो गई हैं।

राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (NIA) सहित भारत की अन्य एजेंसियों को हाल ही में इस तरह के कई सबूत मिले हैं, जिनमें इन्हें अवैध रूप से भारत में लाकर अलग-अलग राज्यों में बसाने वाले गिरोह का पता चला है।ऐसे लोगों की पहचान की जा रही है। कुछ बांग्लादेशी एवं रोहिंग्या मुस्लिमों को राज्य के विभिन्न जगहों से पकड़ा भी गया है।

हाल ही में यूपी एटीएस ने विदेशी फंडिंग लेकर अवैध घुसपैठियों की मदद करने वाले एक सिंडीकेट से जुड़े कुछ लोगों को पकड़ा था। कानपुर से पकड़े गए गिरोह के सक्रिय सदस्य और बांग्लादेश निवासी मोहम्मद राशिद अहमद ने पूछताछ में बताया कि उसने पाँच अन्य बांग्लादेशियों को फर्जी दस्तावेजों की मदद से पहचान बदलकर देवबंद में ठिकाना दिलाया था।

इससे पहले पकड़े जा चुके बांग्लादेशी आदिलुर्रहमान को भी फर्जी दस्तावेज राशिद ने ही उपलब्ध कराए थे। एटीएस ने विदेशी फंडिंग के मास्टरमाइंड और एनजीओ चलाने वाले अबू सालेह मंडल को बीते दिनों लखनऊ से पकड़ा था। वह अपने एनजीओ में विदेशी फंडिंग लेता था और अवैध घुसपैठियों को भारत में बसाने में उनकी मदद करता था।

अबू सालेह ने ATS को बताया कि वह हरोआ-अल जमियातुल इस्लामिया दारूल उलूम मदरसा और कबीरबाग मिल्लत एकेडमी नाम से दो ट्रस्ट चलाता है। इन ट्रस्टों के FCRA खातों में ब्रिटेन के उम्मा वेलफेयर ट्रस्ट से साल 2018-22 तक लगभग 58 करोड़ रुपए आए। उम्मा ट्रस्ट को आतंकी गतिविधियों में शामिल होने और उनकी मदद करने के कारण अमेरिका प्रतिबंधित कर चुका है।

उधर, दैनिक भास्कर ने सूत्रों के हवाले से बताया है कि NIA ने कार्रवाई करते हुए तमिलनाडु में मोहम्मद सोरीफुल बाबू मियां, शहाबुद्दीन हुसैन और मुन्ना उर्फ नूर करीम को गिरफ्तार किया था। ये तीनों लंबे समय से बांग्लादेश से भारत में लाए गए रोहिंग्या मुस्लिमों के लिए फर्जी आधार कार्ड, राशन कार्ड, पैन कार्ड, मार्कशीट आदि बनाकर देते थे।

इन तीनों ने पूछताछ में बताया कि रोहिंग्या मुस्लिमों को भारतीय पहचान देने के लिए वे मृतकों के दस्तावेज इस्तेमाल करते हैं। NIA को ऐसे लोगों की सूची आरोपितों से मिले हैं। इसकी पड़ताल और फर्जी दस्तावेज पर रह रहे घुसपैठियों की पहचान की जा रही है। NIA की जाँच में तमिलनाडु, हरियाणा, असम, पश्चिम बंगाल, महाराष्ट्र, जम्मू सहित कई राज्यों में रोहिंग्या घुसपैठियों के रहने की जानकारी मिली है।

दरअसल, शहाबुद्दीन हुसैन सरकारी अधिकारियों से साँठ-गाँठ करके मृत लाेगाें का डेटा हासिल करता था। इसके बाद बाबू मियां और नूर करीम इनके आधार नंबर का इस्तेमाल करते हुए उस उम्र से मिलते-जुलते घुसपैठियों का डेटा उनमें अपडेट कराते थे। डेटा अपडेट होने के बाद वे उसमें पता बदलवाते थे। फिर आधार कार्ड के जरिए राशन कार्ड, पैन कार्ड और अन्य दस्तावेज तैयार बनवाते थे।

इन सब फर्जीवाड़े को देखते हुए सरकार की ओर से अक्टूबर 2023 से जन्म और मृत्यु प्रमाण-पत्र हासिल करने के लिए आधार कार्ड अनिवार्य कर दिया गया। अब मृत्यु प्रमाण-पत्र पाने के मृतक का आधार कार्ड देना होगा। इसके बाद संबंधित अधिकारी उस आधार कार्ड की जानकारी UADAI को भेज देंगे। इसके बाद UADAI मृतक का आधार निष्क्रिय कर देगा और उसका नाम हर जगह से हट जाएगा।

नाथूराम गोडसे के लिए किया कमेन्ट तो प्रोफ़ेसर पर हो गई FIR, केरल के कोझिकोड का मामला

केरल के कोझिकोड में एक महिला प्रोफ़ेसर पर नाथूराम गोडसे के समर्थन में कमेन्ट करने पर FIR हो गई है। केरल के कोझिकोड की पुलिस ने उनके विरुद्ध दंगा भड़काने की धारा के अंतर्गत मामला दर्ज कर लिया है। उनके खिलाफ केरल के वामपंथी छात्र संगठन ने FIR दर्ज करवाई है।

जिन महिला प्रोफ़ेसर के विरुद्ध FIR दर्ज की गई है, वह नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ़ टेक्नोलॉजी (NIT) कालीकट में वरिष्ठ प्रोफ़ेसर हैं। उनका नाम शैजा अन्दावन है। वह NIT में मैकेनिकल इंजीयनियरिंग विभाग में पढ़ाती हैं। उन्होंने 30 जनवरी को महात्मा गाँधी की हत्या की बरसी पर एक पोस्ट पर कमेन्ट किया था। पोस्ट में नाथूराम गोडसे को भारत में अनेकों लोगों का नायक बताया गया था। इसमें उन्होंने नाथूराम गोडसे का समर्थन किया था।

उन्होंने एक पोस्ट पर कमेन्ट किया, “भारत को बचाने के लिए गोडसे पर गर्व है।” यह पोस्ट गोडसे के समर्थन में किया गया था। उनके इस कमेन्ट का स्क्रीनशॉट वायरल हो गया। हालाँकि, उन्होंने यह कमेन्ट बाद में हटा दिया। यह पोस्ट एक हिंदूवादी वकील कृष्णा राज की पोस्ट पर किया गया था। जब प्रोफ़ेसर अन्दावन से इस सम्बन्ध में बात की गई तो उन्होंने कहा कि वह यूनिवर्सिटी में विवाद नहीं पैदा करना चाहती, इसलिए उन्होंने कमेन्ट हटा दिया।

कमेंट डिलीट करने के बावजूद उनके खिलाफ वामपंथी छात्र संगठनों ने दो FIR दर्ज करवा दी। उनके खिलाफ राजद्रोह की धाराओं में मामला दर्ज करवाया गया है। वामपंथी छात्र संगठनों का प्रोफ़ेसर पर आरोप है कि उन्होंने इस कमेन्ट के जरिए द्वेष फैलाने का प्रयास किया। इन संगठनों ने उन्हें NIT से निष्कासित करने की माँग की है। केरल के कोझिकोड से कॉन्ग्रेस सांसद एमके राघवन ने NIT के डायरेक्टर को पत्र लिखकर उनके खिलाफ कार्रवाई की माँग की है।

प्रोफ़ेसर शैजा अन्दावन ने इंडियन एक्सप्रेस से बातचीत में बताया, “मेरा कमेन्ट गाँधीजी की हत्या की प्रशंसा करना नहीं था और ना ही मैं कभी ऐसा करना चाहती थी। मैंने गोडसे की ‘मैंने गाँधी को क्यों मारा’ किताब पढ़ी है। इस किताब में कई खुलासे और जानकारियाँ हैं, जो कि आम लोगों को नहीं पता। गोडसे ने इस किताब में हमें वह बताया है। मैंने इसी सम्बन्ध में फेसबुक पर डाली गई एक पोस्ट पर कमेन्ट किया था। जब मैंने देखा कि लोग मेरे कमेन्ट का गलत मतलब निकाल रहे हैं, तो मैंने वह हटा दिया।”

गौरतलब है कि हाल ही में NIT कोझिकोड में श्रीराम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा एक विरोध में एक छात्र ने यहाँ पूरे कैम्पस में पोस्टकार्ड लहराए थे, जिसके बाद विवाद हो गया था। उसने यहाँ कुछ छात्रों द्वारा प्राण प्रतिष्ठा उत्सव मनाए जाने का विरोध किया था।