Home Blog Page 1215

‘जब मैं होश में आई, वो मेरा रेप कर रहा था’ – इंस्टाग्राम पर दोस्ती के बाद बलात्कार, छठी क्लास की लड़की के शोषण का भी आरोप

मुंबई की एक लड़की को इंस्टाग्राम पर दोस्ती करना भारी पड़ गया। सोशल मीडिया के इस दोस्त (हीतिक शाह) ने लड़की को नाइट-ऑउट लिए बुलाया। इसके बाद ड्रग्स देकर उसका रेप किया। अब लड़की ने इंस्टाग्राम पोस्ट पर न्याय की गुहार लगाई है। पीड़ित लड़की ने साउथ मुंबई के वर्ली पुलिस स्टेशन में FIR भी दर्ज करवाई है। पुलिस मामले की जाँच कर रही है। पीड़िता का कहना है कि 12 दिन बीतने के बाद भी उसके बलात्कारी को गिरफ्तार नहीं किया गया है।

पीड़ित लड़की ने अपने इंस्टाग्राम की डीपी पर पिंक कलर से लिखा है – ‘पनिश माई रेपिस्ट’। इसके साथ ही उसने अपनी पोस्ट में 13 जनवरी, 2024 का वो वाकया शब्द दर शब्द लिख डाला है।

पीड़िता ने लिखा, “मैं मुंबई की 21 साल की लड़की हूँ और यह मेरी कहानी है। मैंने उस लड़के के साथ घूमने का फैसला किया, जिससे मैं इंस्टाग्राम पर बात कर रही थी। मैंने सोचा था कि यह एक मज़ेदार रात होगी लेकिन वह मेरी जिंदगी का सबसे दर्दनाक अनुभव बन गया।”

उसने आगे लिखा, “हीतिक शाह और मैं शहर में ड्रिंक और पार्टी करने के लिए निकले, शुरुआत एक जगह से हुई। उसके कुछ दोस्तों से मिलने के बाद, हम बास्टियन नाम के एक रेस्टॉरेंट के लिए रवाना हुए। वहाँ कुछ टकीला शॉट्स (दारू) पीने के बाद मुझे नशा चढ़ गया। उसने फिर भी मुझे जोर देकर और अधिक ड्रिंक करने के लिए कहा। इसके बाद मुझे ब्लैकआउट हो गया, याद नहीं कि आगे क्या हुआ।”

लड़की ने लिखा है, “मुझे शक है कि मुझे ड्रग्स दी गई होगी। मैं जागी तो देखा कि वह (हीतिक) मेरे साथ बलात्कार कर रहा है। उसे रोकने की मेरी कोशिशों के बावजूद, उसने ऐसा करना जारी रखा और मुझे बहुत गुस्से में तीन बार थप्पड़ भी मारे, जिससे मैं डर गई और भयभीत हो गई।”

पीड़िता ने आगे बताया, “वह जगह उसके दोस्त की थी। इससे पहले कि मैं मदद माँग पाती, उसने मुझे बाहर निकालने की कोशिश की, यहाँ तक कि दोस्तों की मौजूदगी में मुझे धमकी भी दी। इसके बाद उसने घटनास्थल से भागने की कोशिश भी की।” लड़की ने यह भी बताया कि उसके दोस्त रेप किए जाने वाले कमरे के बगल में ही थे लेकिन किसी ने मदद नहीं की। वो जल्द से जल्द इस घटना से छुटकारे पाने के लिए पीड़िता को ही वहाँ से निकालना चाहते थे।

लड़की ने अपनी बात जारी रखते हुए लिखा, “इसके बाद मैंने अपने चचेरे भाई को मुझे लेने के लिए बुलाया। आरोपित और उसके दोस्तों ने उसे भी धमकी दी। चोटिल और आहत होकर, मैं अपने माता-पिता को उस रात के बारे में बताने की हिम्मत नहीं कर सकी। जब मेरे परिवार को पता चला तो वे दंग रह गए। मैंने बाद में उसी हफ्ते हीतिक शाह के खिलाफ FIR दर्ज करवाई।”

पीड़िता की इस पोस्ट को एक्स हैंडल @AtharvaSoni17 ने शेयर करते हुए कुछ स्क्रीन शॉट लगाए हैं जो हीतिक शाह को जानने वालों ने उसके बारे में लिखा है। एक ने लिखा है, “वो 12 साल की उम्र से इस तरह के अपराध करता आ रहा है। वो हमारे स्कूल में था और उसने छठी क्लास की एक लड़की का शोषण किया था।”

वहीं एक लड़की ने लिखा है, “ये बलात्कारी है, हर रात अपने दोस्तों के साथ Bastian (रेस्टॉरेंट) में अलग-अलग लड़कियों के साथ आता रहता है। एक बार मैं अपनी दोस्तों के साथ वहाँ थी, उसने मुझे बहुत गंदी तरीके से घूरा था और अपने दोस्तों से फुसफुसाकर कुछ कहा था और इसके बाद सब मुझे घूरने लगे थे, मुझे बहुत खराब महसूस हुआ था।”

लड़की ने आगे लिखा है कि हीतिक ने सुबह उससे माफी माँगी, लेकिन इसका उसके लिए कोई मतलब नहीं है। वो भाग गया है क्योंकि वह जानता है कि उसने क्या किया है। पीड़िता का कहना है कि 12 दिन बीत गए और उसे गिरफ्तार नहीं किया गया। उसने अग्रिम जमानत के लिए आवेदन किया है।

पीड़िता ने बताया, “हीतिक शाह (आरोपित) पर IPC की धारा 376 (बलात्कार के लिए सजा) और 323 (स्वेच्छा से चोट पहुँचाने के लिए सजा) के तहत केस दर्ज किया गया है। मैं न्याय चाहती हूँ और अन्य लड़कियों से आग्रह करती हूँ कि वे इस बात से बहुत सावधान रहें कि वे किससे बात करती हैं और किसके साथ बाहर जाती हैं।”

मुंबई पुलिस ने लड़की की पोस्ट पर कॉमेंट किया,”हम आभारी हैं कि आपने इसकी ब्यौरावार रिपोर्ट की और हम आपको आश्वस्त करते हैं कि न्याय करने के लिए जाँच उचित तरीके से की जाएगी।”

1168 यूनिवर्सिटी, 4470 महिला कॉलेज: PM मोदी ने उच्च शिक्षा में कैसे लाई क्रांति, बता रहे AISHE के आँकड़े, महिलाओं की जबरदस्त बढ़ी भागीदारी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भाजपा ने साल 2014 में केंद्र की सत्ता सँभाली थी। इसके बाद पिछले 10 वर्षों ने सरकार ने आधारभूत संरचना निर्माण से लेकर हर क्षेत्र में तमाम सुधार किए। उन सुधारों का असर अब धरातल पर दिखने भी लगा है। शिक्षा क्षेत्र में इसका बड़ा असर हुआ। इसको लेकर भारत सरकार के शिक्षा मंत्रालय ने उच्च शिक्षा पर अखिल भारतीय सर्वेक्षण (AISHE) ने एक सर्वे रिपोर्ट जारी की है।

AISHE की 2021-22 की रिपोर्ट के अनुसार, पिछले कुछ वर्षों में उच्च शिक्षा में पढ़ने वाले विद्यार्थियों की संख्या में 26.5 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। इसी तरह उच्च शिक्षा की पढ़ाई करने वाली महिलाओं की संख्या में 32 प्रतिशत, अनुसूचित जाति के विद्यार्थियों की संख्या में 44 प्रतिशत और अनुसूचित जाति की महिलाओं संख्या में 51 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है।

शनिवार (27 जनवरी 2024) को जारी की गई रिपोर्ट के मुताबिक, वित्त वर्ष 2020-21 में उच्च शिक्षा में नामांकन 4.14 करोड़ था, जो 2021-22 में 91 लाख बढ़कर 4.33 करोड़ हो गया है। वित्त वर्ष 2014-15 में यह संख्या महज 3.42 करोड़ थी। वहीं, उच्च शिक्षा में महिला नामांकन 1.57 करोड़ से बढ़कर 2021-22 में 2.07 करोड़ हो गया है। 2014-15 में महिला नामांकन लगभग 1.57 करोड़ थी।

शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने आँकड़ों को साझा करते हुए सोशल मीडिया साइट X पर लिखा, “प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी द्वारा शुरू किए गए सुधारों ने हमारे शिक्षा क्षेत्र को बदल दिया है और सभी पहलुओं में अभूतपूर्व प्रगति हुई है। पहली बार महिलाओं ने 7 शीर्ष यूजी पाठ्यक्रमों में से 5 में पुरुषों को पछाड़ दिया है। पिछले 5 वर्षों में छात्राओं का नामांकन 76 लाख बढ़ गया है।”

उन्होंने आगे लिखा, सकल नामांकन अनुपात (GER) 28.4% की नई ऊँचाई हासिल करने के साथ ही महिला जीईआर पिछले 5 वर्षों से पुरुष छात्रों की तुलना में अधिक है। ये रुझान प्रोत्साहित करने वाले हैं, खासकर जब हम अपनी नारीशक्ति की ताकत, लचीलेपन और उपलब्धियों का जश्न मना रहे हैं और लैंगिक समानता एवं महिला-नेतृत्व वाले विकास के प्रयासों का नेतृत्व कर रहे हैं।”

AISHE रिपोर्ट के अनुसार, अल्पसंख्यक विद्यार्थियों के नामांकन में भी काफी प्रगति हुई है। अल्पसंख्यक नामांकन साल 2014-15 में 21.8 लाख से बढ़कर साल 2021-22 में 30.1 लाख हो गया है, जो 38 प्रतिशत की वृद्धि दर्शाता है। वहीं, महिला अल्पसंख्यक नामांकन 2014-15 में 10.7 लाख से बढ़कर 2021-22 में 15.2 लाख हो गया है, जो 42.3% वृद्धि है।

आँकड़ों के अनुसार, कुल विद्यार्थियों में से लगभग 78.9 प्रतिशत स्नातक स्तर के पाठ्यक्रमों में नामांकित हैं और 12.1% स्नातकोत्तर स्तर के पाठ्यक्रमों में नामांकित हैं। वहीं, साल 2014-15 में पीएचडी में कुल नामांकन 1.17 लाख था, जो 2021-22 में बढ़कर 2.12 लाख हो गया है। यह 81.2 प्रतिशत वृद्धि दर्शाता है। महिला पीएचडी नामांकन 2014-15 में 0.48 लाख से दोगुना होकर 2021-22 में 0.99 लाख हो गया है।

उच्च शिक्षा पर अखिल भारतीय सर्वेक्षण 2021-2022 की रिपोर्ट के मुताबिक, सरकारी विश्वविद्यालय कुल विश्वविद्यालयों के 58.6 प्रतिशत हैं। इन विश्वविद्यालयों का कुल नामांकन में 73.7 प्रतिशत योगदान था। वहीं, निजी विश्वविद्यालयों का कुल नामांकन में 26.3 प्रतिशत योगदान है।

साल 2021-22 तक पंजीकृत विश्वविद्यालयों एवं विश्वविद्यालय स्तर के संस्थानों की कुल संख्या 1,168 हो गई हैं। 2014-15 में इन संस्थानों की संख्या सिर्फ 341 थी। वहीं, 2021-22 तक कॉलेजों की संख्या 45,473 और स्वायत्त (स्टैंडअलोन) संस्थानों की संख्या 12,002 है। 17 विश्वविद्यालय (जिनमें से 14 राज्य सरकार विश्वविद्यालय हैं) और 4,470 कॉलेज महिलाओं के लिए हैं।

साल 2021-22 के आँकड़ों के अनुसार, 99 प्रतिशत विश्वविद्यालयों में पुस्तकालय, 93 प्रतिशत विश्वविद्यालयों में कंप्यूटर केंद्र, 91 प्रतिशत विश्वविद्यालयों में खेल के मैदान, 88 प्रतिशत विद्यालयों में प्रोयशालाएँ और 71 प्रतिशत विश्वविद्यालयों में कौशल विकास केंद्र स्थापित हैं।

2021-22 में फैकल्टी/शिक्षकों की कुल संख्या 15.98 लाख है। इनमें से लगभग 56.6% पुरुष और 43.4% महिलाएँ हैं। महिला फैकल्टी/शिक्षकों की संख्या 2014-15 में 5.69 लाख से बढ़कर 2021-22 में 6.94 लाख हो गई है। साल 2014-15 से 2021-22 तक में 22 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है।

कॉन्ग्रेस नेता लावण्या ज्ञानवापी पर ASI की रिपोर्ट को मानती हैं ‘सर्वे’, संघियों को देने लगीं गाली… सोशल मीडिया पर लोगों ने रगड़ा

उत्तर प्रदेश के वाराणसी स्थित ज्ञानवापी ढाँचे को लेकर हिंदू और मुस्लिम पक्ष में विवाद चल रहा है। यह मामला न्यायालय के विचाराधीन है। जिस जगह पर ढाँचा खड़ा किया गया है, उसे काशी विश्वनाथ मंदिर को तोड़कर बनाया गया है। इसको लेकर हिंदू पक्ष ने कोर्ट में वाद दायर किया है, जिसकी सुनवाई जारी है।

इस बीच पर कोर्ट के आदेश पर भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) ने ढाँचे अंदर जाँच की। ASI ने कोर्ट में 839 पेज की रिपोर्ट पेश की, जिसे हाल ही सार्वजनिक किया गया है। रिपोर्ट इस बात की ओर साफ इशारा कर रही है कि ज्ञानवापी ढाँचे की जगह कभी बड़ा हिंदू मंदिर था।

अपनी रिपोर्ट में ASI ने कहा है कि विवादित स्थान पर मंदिर होने के 32 सबूत मिले हैं। इनमें संस्कृत सहित कई भाषाओं में शिलालेख, देवी-देवताओं की खंडित मूर्तियाँ, खंभे और उन पर बनी कलाकृतियाँ, प्राचीन दिवारें आदि शामिल हैं। दीवार के नीचे 1 हजार साल पुराने अवशेष भी मिले हैं।

हालाँकि, तुष्टीकरण में डूबी कॉन्ग्रेस ASI द्वारा इकट्ठा किए गए प्रमाणों को ही नकारने लगी है। कॉन्ग्रेस की प्रवक्ता लावण्य बल्लाल जैन ने ASI की रिपोर्ट और उसमें दिए गए सबूतों पर सवाल खड़े किए हैं। अब सोशल मीडिया यूजर लावण्या की समझ पर ही सवाल खड़े रहे हैं।

दरअसल, ऑपइंडिया की एडिटर-इन-चीफ नूपुर जे शर्मा ने ASI की रिपोर्ट का हवाला देते हुए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (पूर्व में ट्विटर) पर एक पोस्ट किया। इस पोस्ट में उन्होंने लिखा, “इससे कहा जा सकता है कि वर्तमान ढाँचे को बनाने से पहले वहाँ (ज्ञानवापी ढाँचे की जगह) एक विशाल हिंदू मंदिर था।- ज्ञानवापी पर ASI की सर्वे रिपोर्ट।”

नूपुर जे शर्मा की पोस्ट का स्क्रीनशॉट शेयर करते हुए कॉन्ग्रेस नेता लावण्या ने ASI की रिपोर्ट पर ही सवाल खड़ा कर दिया और कहा कि यह एक सर्वे है, ना कि निष्कर्ष। लावण्या ने अपनी पोस्ट में लिखा, “यह एक सर्वेक्षण है न कि पुरातत्व संबंधी निष्कर्ष। कट्टरता के अलावा संघियों की खोपड़ी में और क्या है?”

लावण्या की इस ‘परिभाषा’ पर सोशल मीडिया यूजर भड़क उठे। भट नेचुरली नाम के एक यूजर ने लिखा, “हे भगवान, असल में उन्होंने (लावण्या ने) सोचा था कि यह मार्केट रिसर्च की तरह 100 लोगों से उनकी राय पूछने के बारे में था?”

इसी तरह, AI भगवा नाम के एक यूजर ने लिखा, “ASI में ‘A’ का मतलब ‘आर्कियोलॉजिकल’ लावण्या जी है।”

वहीं, डॉक्टर गणेश श्रीनिवास प्रसाद ने कटाक्ष करते हुए लिखा, “लावण्या बीजे के अनुसार… भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण लोगों से उनकी राय पूछकर सर्वेक्षण करता है। राजस्व अधिकारी भी राजस्व रिकॉर्ड की जांँच करके नहीं, बल्कि लोगों से पूछकर भूमि का सर्वेक्षण करते हैं कि जमीन किसकी है।”

पुनिता तोरासकर नाम की एक यूजर ने लिखा, “मूर्ख होना एक बात है, लेकिन इसे मुकुट की तरह पहनना सिर्फ लावण्या बीजे ही कर सकती हैं।”

ज्ञानवापी भगवान शिव का मंदिर, जल्दी शुरू हो पूजा-अर्चना: रामलला के मुख्य पुजारी बोले- कोर्ट को सबूत मिल गए हैं, अब हिंदुओं के पक्ष में आदेश पारित हो

अयोध्या के राम मंदिर के मुख्य पुजारी सत्येंद्र दास ने कहा है कि काशी स्थित ज्ञानवापी ढाँचा भगवान शिव का मंदिर है। उन्होंने कहा कि कोर्ट को सबूत मिल गए हैं और अब उसे हिंदुओं के पक्ष में आदेश पारित कर देना चाहिए, ताकि वहाँ भगवान शंकर का पूजा-पाठ शुरू करें हिंदू। उन्होंने कहा कि ज्ञानवापी सर्वे में जो सबूत मिले हैं उनमें शिवलिंग, योनि पिंड, नंदी की मूर्ति, शिवलिंग के आकार का पत्थर आदि सबूत मंदिर होने की पुष्टि करते हैं।

रामलला के पुजारी सत्येंद्र दास ने कहा कि अयोध्या में राम मंदिर का मामला भी इसी तरह का था। वहाँ भी मंदिर तोड़ा गया था और उसकी जगह पर मस्जिद बनाई गई थी। दोनों मामलों में समानता है और उसी तरह न्याय होना चाहिए। दास ने कहा कि रिपोर्ट आने के बाद हिंदुओं के पक्ष में तो कई सबूत मिल गए हैं, जबकि मुस्लिम पक्ष की ओर से कोई सबूत ही नहीं है। इसलिए कोर्ट को आदेश पारित करना चाहिए।

सत्येंद्र दास ने कहा कि हिंदू पक्ष को पूरा भरोसा है कि अदालत न्याय करेगी और मंदिर को उसके मूल स्वरूप में लाया जाएगा। ANI से बातचीत में उन्होंने कहा कि ज्ञानवापी सर्वे की रिपोर्ट अकाट्य है और जो सबूत मिले हैं उसे कोई नाकार नहीं सकता। उन्होंने कहा कि अब कोर्ट को जल्द से जल्द आदेश दे देना चाहिए। जैसे अयोध्या का हुआ वैसे ही काशी का भी हो जाना चाहिए।

सर्वे रिपोर्ट पर साधु-संतों की भावना के सवाल पर उन्होंने कहा कि प्रबल भावना है कि वहाँ मंदिर बने। उन्होंने कहा कि अब तक कहा जाता था कि वहाँ मस्जिद है, लेकिन सबूत मिलने से साफ हो गया है कि ज्ञानवापी मंदिर है। सत्येंद्र दास ने कहा कि जिस भाग में मस्जिद बनाई गई है, वहाँ मंदिर के अवशेष अभी भी हैं। इसलिए ज्ञानवापी भगवान शिव का मंदिर है। इसमें कोई संदेह नहीं है।

बता दें कि 18 दिसंबर 2023 को ASI ने अदालत में सीलबंद लिफाफे में अपनी रिपोर्ट सौंपी थी। उस दिन हिंदू पक्ष की ओर से रिपोर्ट को सार्वजनिक करने की माँग की गई थी, लेकिन मुस्लिम पक्ष ने इस पर आपत्ति जताई थी। हालाँकि, 24 जनवरी 2024 को वाराणसी कोर्ट ने कहा कि सर्वे की कॉपियाँ हिंदू पक्ष और मुस्लिम पक्ष को दिया जाए।

ज्ञानवापी ढाँचे के ASI सर्वेक्षण के बाद कई बातों का खुलासा हुआ है। सामने आई 839 पेज की रिपोर्ट साफ इशारा कर रही है कि ज्ञानवापी ढाँचे की जगह कभी बड़ा हिंदू मंदिर था। इसके प्रमाण वहाँ के खंभों, दीवारों और शिलापट से मिले हैं। कोर्ट ने ASI से कहा है कि वो इस रिपोर्ट की प्रतियाँ हिंदू और मुस्लिम दोनों पक्षों को दे। कोर्ट ने कहा कि दोनों पक्ष इस संबंध में 6 फरवरी तक आपत्ति दर्ज करवा सकते हैं।

ASI रिपोर्ट आने के बाद हिंदू पक्ष के वकील विष्णु जैन ने इस संबंध में मीडिया को विस्तार से बताया। उन्होंने कहा कि रिपोर्ट में मंदिर होने के 32 सबूत मिले हैं। ज्ञानवापी की जगह एक बड़ा हिंदू मंदिर था… ऐसा भारतीय पुरात्व सर्वेक्षण ने अपनी रिपोर्ट में बताया है। उन्होंने कई सबूत पेश किए हैं, जिनसे पता चलता है कि हिंदू मंदिर को तोड़कर ढाँचा खड़ा किया गया। अब रिपोर्ट में जोड़ी गई कुछ तस्वीरें भी मीडिया में आ गई हैं जिन्हें देखकर हिंदू आक्रोशित हैं।

BJP के साथ बिहार में सरकार बनाएँगे नीतीश कुमार, सुशील मोदी होंगे डिप्टी सीएम: रिपोर्ट्स में दावा, लालू ने 5 बार किया कॉल, लेकिन नहीं दिया जवाब

बिहार की राजनीति में फिर से परिवर्तन की सुगबुगाहट है। नीतीश कुमार पहले से ही मुख्यमंत्री हैं, लेकिन वे फिर से मुख्यमंत्री बनने जा रहे हैं। इसके कयास लगाए जा रहे हैं। ये नौवाँ मौका होगा, जब नीतीश कुमार बिहार के मुख्यमंत्री बनेंगे। ये अलग बात है कि उनके साथी वक्त के साथ बदलते रहते हैं। मीडिया रिपोर्ट में कहा जा रहा है कि वे 28 जनवरी 2024 को एक बार फिर से भाजपा के साथ मिलकर बिहार में सरकार बनाएँगे। खबर ये भी है कि नीतीश कुमार को मनाने के लिए उनके सहयोगी राजद के सुप्रीमो लालू यादव ने उन्हें पाँच बार फोन किया, लेकिन उन्होंने बात करने से साफ मना कर दिया।

इंडिया टुडे की रिपोर्ट की मानें तो बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार 28 जनवरी 2024 को फिर से मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ले सकते हैं। इस बार वे जेडीयू-बीजेपी गठबंधन के साथ सरकार बनाएँगे। इस गठबंधन सरकार में भाजपा के राज्यसभा सांसद सुशील मोदी उप-मुख्यमंत्री बनेंगे। भाजपा-जदयू की गठबंधन सरकार में सुशील मोदी पहले भी उपमुख्यमंत्री रहे हैं। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, नीतीश कुमार महागठबंधन से बाहर निकलने का फैसला कर लिया है। इसके पीछे मतभेद बड़ा कारण बताया जा रहा है। INDI गठबंधन में राष्ट्रीय संयोजक नहीं बनाए जाने से वे नाराज बताए जा रहे हैं।

जेडीयू के सूत्र बताते हैं कि नीतीश कुमार कॉन्ग्रेस से सुलह के मूड में नहीं हैं। उनकी नाराजगी की बड़ी वजह इंडी गठबंधन में उन्हें संयोजक पद नहीं मिलने के अलावा सीटों के बँटवारे में देरी भी शामिल है। जेडीयू की नजर इंडी गठबंधन के 17 (16+1) लोकसभा सीटों पर है। इस मामले में कॉन्ग्रेस ढील नहीं दे रही है। वहीं, इंडी गठबंधन का संयोजक पद भी कॉन्ग्रेस के पास जा चुका है। विधानसभा में पहले से ही कम विधायकों की वजह से नीतीश कुमार में छटपटाहट है। ऐसे में सांसदों की कमी के बाद वे अपनी राजनीतिक ताकत कम नहीं होने देना चाहते। लोकसभा चुनाव के साल भर बाद ही बिहार विधानसभा का भी चुनाव है।

नीतीश कुमार और उनकी पार्टी हर जगह ये संकेत दे रही है कि नीतीश कुमार महागठबंधन से दूर जा रहे हैं। राजभवन में आयोजित कार्यक्रम में भी तेजस्वी यादव नदारद दिखे। तेजस्वी यादव के नाम की पर्ची लगी कुर्सी पर बैठने के लिए अशोक चौधरी ने उसे हटा दी और फिर वो नीतीश कुमार के साथ गुफ्तगू करते देखे गए। वहीं, बाद में पत्रकारों ने नीतीश कुमार से पूछा कि तेजस्वी यादव कार्यक्रम में क्यों नहीं आए तो नीतीश कुमार ने कहा कि ये तो उन्हीं से पूछा जाना चाहिए, जो कार्यक्रम में नहीं आए। जाहिर है कि नीतीश कुमार अब तेजस्वी का नाम भी नहीं ले रहे हैं।

इस बीच अपने बेटे की कुर्सी बचाने के लिए राजद सुप्रीमो लालू यादव सीधे मैदान में आ गए। उन्होंने नीतीश कुमार से बात करने के लिए पाँच बार फोन मिलाया, लेकिन नीतीश कुमार ने उनसे बात करने से साफ इनकार कर दिया। मीडिया रिपोर्ट में कहा जा रहा है कि लालू यादव ने नीतीश कुमार को लैंडलाइन से भी फोन किया, लेकिन उस पर भी बात नहीं हुई है। दरअसल, लालू यादव इस पूरे मामले में नीतीश कुमार से बात करना चाह रहे थे, लेकिन नीतीश कुमार ने साफ संकेत दे दिया कि वे अब किसी से सुलह के मूड में नहीं हैं।

राजद के उपाध्यक्ष शिवानंद तिवारी ने कहा कि भाजपा के दफ़्तर के चपरासी ने भी कह दिया है नीतीश कुमार को पार्टी में नहीं लेंगे, फिर कैसे वो जा सकते है। तिवारी ने आगे कहा, “नीतीश कुमार से मिलने के लिए मैंने कल समय माँगा था, लेकिन अभी तक नहीं समय मिला है। हमने नीतीश से कहा भी कि बात क्या है कि मेरे लिए समय नहीं है। इस पर उन्होंने कहा कि वे आज (26 जनवरी को) बताते हैं। हमें अभी भी भरोसा नहीं है कि नीतीश कुमार इधर से उधर चले जाएँगे।”

लालू यादव भी चल रहे अपनी चाल

सूत्रों की मानें तो लालू यादव अब नीतीश कुमार से अलगाव की सूरत में किसी भी शर्त पर तेजस्वी यादव को मुख्यमंत्री बनाना चाहेंगे। इसके लिए नीतीश कुमार के पूर्व साथी जीतनराम माँझी, कॉन्ग्रेस, वाम दलों, एआईएमआईएम के एक विधायक के अलावा एक निर्दलीय विधायक को भी अपनी ओर करना चाहेंगे। वहीं, दूसरी ओर चर्चा ये भी है कि कॉन्ग्रेस के 19 में से 10 विधायक बीजेपी के संपर्क में हैं। वो कॉन्ग्रेस के भीतर ही अलग गुट भी बना सकते हैं। ऐसे में अगले दो दिन सभी दल अपनी जोर-आजमाइश करने वाले हैं।

‘माँ का दूध पीया है तो आकर दिखाए पन्नू, औकात बता दूँगी’: दुर्ग्याणा मंदिर को बम से उड़ाने की धमकी पर बिफरीं पंजाब की पूर्व मंत्री, बोलीं- मैं गुरु तेगबहादुर की बेटी

पंजाब की पूर्व स्वास्थ्य मंत्री और दुर्ग्याणा मंदिर कमिटी की अध्यक्ष लक्ष्मी कांता चावला ने खालिस्तानी आतंकी और अलगाववादी संगठन ‘सिख फॉर जस्टिस’ के सरगना गुरपतवंत सिंह पन्नू को सख्त लहजे में चेतावनी दी है। 26 जनवरी को एक बार फिर मंदिर को बम से उड़ाने की धमकी भरा कॉल आने के बाद भाजपा नेता चावला ने कहा कि अगर पन्नू में हिम्मत है तो वह दुर्ग्याणा मंदिर आकर दिखाए।

दरअसल दुर्ग्याणा मंदिर कमिटी के प्रबंधक राम पाठक ने कहा कि 25 जनवरी 2024 को धमकी भरे दो फोन कॉल आए। पाठक ने मीडिया को बताया कि कॉल करने वाले ने मंदिर को बम से उड़ाने की धमकी दी है। इसके साथ ही कमिटी की अध्यक्ष लक्ष्मी कांता चावला और सचिव अरुण खन्ना को गोली मारने की भी बात कही गई।

इस धमकी का जवाब अब अयोध्या राम मंदिर से लौटकर आई लक्ष्मी कांता चावला ने दिया है। उन्होंने कहा है कि खालिस्तानी आतंकी पन्नू की धमकियों पर उन्हें तरस आता है। वह लाइमलाइट में रहने के लिए ये सब करता है। उन्होंने कहा, “हमारा देश इतना मजबूत है कि उसे उसकी औकात बताने में देर नहीं करेंगे, बस एक बार वो भारत आ तो जाए।”

चावला ने आगे कहा कि गुरपतवंत का अर्थ ‘गुरु के उपदेश का मान रखने वाला’ होता है। उन्होंने कहा, “पन्नू सिख भी नहीं है। अगर वह सिख होता तो युवाओं को गुमराह कर और पैसों का लालच देकर गलत काम नहीं करवाता। उसे पैसे मिल रहे हैं। कोई विदेशी एजेंसी उससे ये करवा रही है। विदेश में बैठ वो देश का माहौल खराब करना चाहता है।”

भास्कर की रिपोर्ट के मुताबिक, चावला ने कहा कि अगर पन्नू ने माँ का दूध पीया है तो एक बार दुर्ग्याणा आ जाए। उसे प्रसाद चखाया जाएगा। उससे पूछा जाएगा कि किसके कहने पर ये आग लगाने वाली बातें कर रहा है। उन्होंने कहा कि बीते 40 साल से ऐसी धमकियाँ आ रही हैं, लेकिन वे इससे डरने वाली नहीं हैं। उन्होंने सलाह दी कि पन्नू को अपना नाम बदल लेना चाहिए।

लक्ष्मी कांता चावला ने कहा कि वो खुद को गुरु तेगबहादुर की बेटी कहती हैं और वो डरने वाली नहीं हैं। पंजाब ने कई साल संताप झेला है। उन्होंने कहा कि पन्नू को अब समझ जाना चाहिए कि पंजाब में सांप्रदायिक माहौल नहीं खराब किया जा सकता। उन्होंने देश और पंजाब के युवाओं से गलत कदम नहीं उठाने का भी आग्रह किया।

बता दें कि इससे पहले 22 जनवरी 2024 को खालिस्तान समर्थक पन्नू ने एक वीडियो जारी कर दुर्ग्याणा मंदिर बंद करके इसकी चाबियाँ हरमंदिर साहिब को सौंपने की बात कही थी। इसके बाद अमृतसर पुलिस ने पन्नू के खिलाफ मामला दर्ज किया था। पुलिस ने पन्नू के खिलाफ देश की एकता, अखंडता और माहौल खराब करने की विभिन्न धाराओं के साथ-साथ आईटी एक्ट में भी केस दर्ज किया है।

कौन है लक्ष्मी कांता चावला

बता दें कि 83 साल की लक्ष्मी कांता चावला पंजाब सरकार की पूर्व कैबिनेट मंत्री रही हैं। अभी वह बीजेपी की सदस्य और सामाजिक कार्यकर्ता हैं। राजनीति में आने से पहले वह एक कॉलेज लेक्चरर थीं। साल 2022 में 496 वोट पाकर वह श्री दुर्ग्याणा मंदिर की पहली महिला प्रधान बनी थीं। उनके प्रतिद्वंद्वी कॉन्ग्रेस पार्टी के समर्थक रमेश शर्मा को सिर्फ 350 वोट मिले थे।

‘जब वक्त हमारा आएगा, तब सिर धड़ से अलग किए जाएँगे…’: धमकी दे रहा था मोहम्मद कैफ, राम मंदिर तोड़ने की बात कर रहा था इरशाद: यूपी पुलिस ने दबोचा

अयोध्या में प्रभु श्रीराम की प्राण प्रतिष्ठा के बाद भी बाबरी का विलाप जारी है और ऐसा करने वालों की संख्या में कोई कमी नहीं आ रही है। हालाँकि, बाबरी के नाम पर समाज में द्वेष फैलाने के खिलाफ यूपी पुलिस त्वरित कार्रवाई भी कर रही है। इस बीच अयोध्या के राम मंदिर को लेकर आपत्तिजनक टिप्पणी करने वाले इरशाद अहमद को बिजनौर और मोहम्मद कैफ को गोंडा से गिरफ्तार किया गया है।

इरशाद ने बाबरी के नाम पर एक वीडियो बनाकर वायरल किया था। इसमें उसने राम मंदिर को तोड़कर फिर से बाबरी खड़ा करने की बात कही थी। इस मामले में बिजनौर पुलिस ने इरशाद के साथ-साथ उसके दो साथियों को भी गिरफ्तार किया है। वहीं, गोंडा का मोहम्मद कैफ बाबरी को लेकर आतंकी संगठन आईएसआईएस की तर्ज पर ‘सर तन से जुदा’ करने की धमकी दे रहा था।

दरअसल, ये उन कट्टरपंथियों के बीच के कुछ नमूने हैं जो अदालत के आदेश के बाद बने राम मंदिर को तोड़कर फिर से बाबरी ढाँचा खड़ा करने का सपना पाले बैठे हैं। इसके लिए वे हिंदुओं को खुलेआम धमकी भी दे रहे हैं। हालाँकि, इनके सपनों के साथ ही इन्हें भी यूपी पुलिस जेल की चहारदीवारी के पीछे भेज रही है।

आजतक की रिपोर्ट के मुताबिक, बिजनौर में एक वीडियो तेजी से वायरल हुआ। इस वीडियो में इरशाद नाम का युवक बोल रहा है, “हम राम मंदिर तोड़ेंगे और फिर से बाबरी मस्जिद बनाएँगे।” इसके अलावा भी इरशाद ने अपने वीडियो में काफी कुछ कहा है। वो हिंदुओं को ललकारता भी दिख रहा है। ये वीडियो सोशल मीडिया पर आया तो लोग भड़क उठे।

पुलिस ने मामले की संवेदनशीलता को भाँपते हुए तुरंत कार्रवाई की और इरशाद अहमद को गिरफ्तार कर लिया। इरशाद बिजनौर के धामपुर स्थित नई सराय का रहने वाला है। पुलिस ने उसके दो साथियों- भूरा और अजमल को भी गिरफ्तार किया है। तीनों के खिलाफ धारा 153 ए/295ए/505 (1) सी 502 और आईटी एक्ट की धारा 66 के तहत मुकदमा दर्ज करके जेल भेज दिया गया है।

वहीं, मोहम्मद कैफ गोंडा जिले के नवाबगंज स्थित चाईटोला मोहल्ले का रहना वाला है। वह कैफ_नवाबजादा नाम से इंस्ट्राग्राम आईडी चलाता है। मोहम्मद कैफ ने अपनी आईडी से 23 जनवरी 2024 को बाबरी ढाँचे की एक तस्वीर लगाई गई थी। इसके साथ ही हिंदुओं को धमकाया था, “सब्र… जब वक्त हमारा आएगा, तब सिर धड़ से अलग किए जाएँगे।”

मोहम्मद कैफ कैफ ने अपनी पोस्ट में लोगों को जान से मारने की भी धमकी दी थी। उसके तेवर और भाषा से साफ है कि वह ‘सर तन से जुदा’ गैंग से सिर्फ प्रेरित है। ऑपइंडिया के पास मौजूद एफआईआर की कॉपी में उसकी धमकियों के साथ ही उसके इंस्टाग्राम पर लगाए गए पोस्ट के बारे में भी बताया गया है।

बंगाल में पहले ममता बनर्जी ने हाथ झटका, अब राहुल गाँधी की यात्रा पर लगाया ब्रेक: सिलीगुड़ी में घुसने से रोका, कहा- मुझे इसके बारे में बताया तक नहीं

I.N.D.I गठबंधन को बिहार के सीएम नीतीश कुमार के बाद पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने जोरदार झटका दिया है। सीएम ममता बनर्जी ने राहुल गाँधी की ‘भारत जोड़ो न्याय यात्रा’ को सिलीगुड़ी में प्रवेश नहीं देने का ऐलान किया है। इसके साथ ही साफ किया है कि तृणमूल कॉन्ग्रेस (TMC) इस यात्रा में शामिल नहीं होगी।

इसके पीछे ममता बनर्जी ने तर्क दिया है कि भारत जोड़ो यात्रा के बारे में बंगाल की सरकार को सूचित तक नहीं किया गया। खैर, ममता बनर्जी की कॉन्ग्रेस से किस बात को लेकर नाराजगी है, ये तो जगजाहिर है। दरअसल, लोकसभा चुनाव 2024 को लेकर पश्चिम बंगाल में दोनों पार्टियों के बीच सीट बँटवारे पर एकराय नहीं बन पाई है।

बता दें कि ‘भारत जोड़ो न्याय यात्रा’ के 12वें दिन असम से उत्तरी पश्चिम बंगाल के कूच बिहार क्षेत्र में बसीरहाट पहुँचने पर इस यात्रा को रोक दिया गया। इसके बाद फिर राहुल गाँधी दिल्ली के लिए रवाना हो गए। दरअसल, राहुल गाँधी 25 जनवरी 2024 की सुबह यात्रा का नेतृत्व करते हुए बसीरहाट पहुँचे थे।

अब यह यात्रा 26 और 27 जनवरी 2024 को आगे नहीं बढ़ेगी। इसके बाद 28 जनवरी 2024 को यह यात्रा बंगाल के सिलीगुड़ी से होकर गुजरने वाली थी, लेकिन ममता बनर्जी की सरकार ने इसकी इजाजत देने से मना कर दिया। बता दें कि राहुल गाँधी की यह यात्रा मणिपुर से शुरू हुई है और यह मुंबई तक चलेगी। इस दौरान 6700 किलोमीटर से अधिक का सफर तय किया जाएगा।

राहुल गाँधी की न्याय यात्रा रोकने को लेकर बंगाल प्रशासन ने कहा कि यह फैसला इसलिए लिया गया है, क्योंकि उसी तारीख को विद्यार्थियों की परीक्षा होनी है। दरअसल, 25 जनवरी को राहुल गाँधी के ‘भारत जोड़ो न्याय यात्रा’ के लिए पूरे दिन के कार्यक्रम का ऐलान किया था। हालाँकि, राहुल गाँधी ने बसीरहाट में एक छोटी बैठक और जिला मुख्यालय पर एक रोड शो करने के बाद दिल्ली के लिए रवाना हो गए। .

इन कार्यक्रमों में राहुल गाँधी ने TMC सुप्रीमो ममता बनर्जी द्वारा आगामी लोकसभा चुनाव अकेले लड़ने के ऐलान के बारे में बातें कीं। बंगाल में राहुल गाँधी की यात्रा बीरभूम, उत्तर दिनाजपुर, जलपाईगुड़ी, दार्जिलिंग, उत्तर दिनाजपुर, मालदा और अलीपुरद्वार जिले में प्रस्तावित है। 29 जनवरी 2024 को पड़ोसी राज्य बिहार में प्रवेश करने से पहले इस यात्रा में थोड़ा बदलाव किया गया है।

‘मुझे बताने की जहमत नहीं उठाई’

बता दें कि सीएम बनर्जी ने लोकसभा चुनाव में विपक्षी I.N.D.I गठबंधन से अलग अकेले उतरने का फैसला किया। अगले कुछ महीनों में होने जा रहे आम चुनाव के लिए सीट बँटवारे पर सहमति नहीं बन पाने के बाद दोनों दलों के रिश्तों में खटास दिखने लगी है। ममता बनर्जी ने यहाँ तक कह दिया कि उनकी पार्टी INDI गठबंधन में रहने का पुनर्मूल्यांकन कर रही है।

TMC पहले ही कह चुकी है कि वह बंगाल में कॉन्ग्रेस की यात्रा का हिस्सा नहीं बनेगी। TMC सुप्रीमो ने आरोप लगाया, “उन्होंने मुझे शिष्टाचार के नाते भी यह बताने की जहमत नहीं उठाई कि वे पश्चिम बंगाल आ रहे हैं, भले ही मैं I.N.D.I गठबंधन हिस्सा हूँ। इसलिए जहाँ तक बंगाल का सवाल है, मेरे साथ उनका कोई संबंध नहीं है।”

ये भी माना जा रहा है कि कॉन्ग्रेस के राज्य अध्यक्ष अधीर रंजन चौधरी की लगातार पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री की आलोचना के परिणामस्वरूप TMC ने कॉन्ग्रेस से किनारा कर लिया है। वहीं, दिलचस्प बात यह है कि राज्य में विपक्षी गठबंधन में शामिल भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) सहित वामपंथी दल इस यात्रा में शामिल होने जा रहे हैं।

इस न्याय यात्रा के बीच I.N.D.I गठबंधन में बिखराव का सफर शुरू हो चुका है। इसके तुरंत बाद पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने ऐलान किया कि आम आदमी पार्टी पंजाब में अकेले चुनाव लड़ेगी। वहीं, I.N.D.I गठबंधन को खड़ा करने वाले नीतीश कुमार अब भाजपा के नेतृत्व वाली एनडीए गठबंधन की ओर झुकते दिखाई दे रहे हैं।

ज्ञानवापी को राष्ट्रीय स्मारक घोषित कर हिंदुओं को दे देना चाहिए: ASI सर्वे रिपोर्ट का हवाला दे बोले वकील हरिशंकर जैन, कहा- कानून बनाए सरकार, जाएँगे सुप्रीम कोर्ट

ज्ञानवापी की ASI रिपोर्ट आने के बाद हिंदू पक्ष के वकील हरि शंकर जैन ने कहा है कि वो लोग अब सुप्रीम कोर्ट का रुख करेंगे। उनका कहना है कि रिपोर्ट में स्पष्ट तौर पर लिखा गया है कि उस ढाँचे की जगह हिंदू मंदिर था। सरकार को उसे राष्ट्रीय स्मारक घोषित करना चाहिए।

वकील हरि शंकर जैन ने समाचार एजेंसी एएनआई से बात करते हुए कहा, “रिपोर्ट में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि (ज्ञानवापी मस्जिद) स्थल पर एक मंदिर मौजूद था। भारत सरकार को इस मामले में आगे कदम उठाते हुए इसे राष्ट्रीय स्मारक घोषित करना चाहिए और कानून पारित कर पूरा क्षेत्र हिंदुओं को सौंप देना चाहिए।”

वहीं वकील विष्णु जैन एएसआई की रिपोर्ट की मुख्य लाइनें पढ़कर पूछते हैं कि क्या एएसआई ने जो अपनी रिपोर्ट दी है, जिसमें साफ तौर पर लिखा है कि मंदिर तोड़कर उस ढाँचे को खड़ा किया गया था और उसी का मलबा उस ढाँचे में लगा था, तो क्या कोई इस्लामिक स्कॉलर ये बात कह सकता है कि ये सही हुआ था?

वह कहते हैं कि मस्जिद तो वक्फ की जमीन पर बनता है और वक्फ की जमीन वो होती है जो मुस्लिमों ने अपने पैसों से खरीदी हो। वहीं हिंदू धर्म के अनुसार ये बात साफ है कि एक बार अगर बार मंदिर के लिए बनाई जगह हमेशा मंदिर की ही जगह रहेगी और अंत तक सिर्फ ये मंदिर की ही प्रॉपर्टी होगी।

विष्णु जैन इस मामले में हिंदू पक्ष का पाला भारी बताते हुए कहते हैं कि राम मंदिर के समय तो खुदाई के बाद सबूत मिले कि वो जगह राम जन्मभूमि ही है लेकिन यहाँ तो ढाँचा खुद ही गवाही दे रहा है कि वो हिंदू मंदिर है। ढाँचे की पश्चिमी दीवार पर लगे हिंदू चिह्न भी यही बता रहे हैं कि हिंदू मंदिर की दीवार है किसी उस ढाँचे का भाग नहीं। खंभे भी यही कह रहे हैं कि वो हिंदू मंदिर के खंभे हैं।

विष्णु जैन कहते हैं, “सारे सबूत हमारे केस को मजबूत बनाते हैं कि हमारे धर्मस्थल पर, हमारे मंदिर पर अंजुमन इंतजामिया मसाजिद कमेटी द्वारा कब्जा किया गया है। हमारे मंदिर को मस्जिद की तरह इस्तेमाल करने की कोशिश हो रही है।”

उन्होंने कहा कि एएसआई का जो सर्वे हुआ है वो वजू खाने को छोड़कर हुआ है। उनकी यह माँग कि वजू खाने का भी एएसआई सर्वे हो, अभी सुप्रीम कोर्ट में पेंडिंग है। अंजुमन इंतेजामिया ने जाकर कोर्ट में कहा है कि वजू खाने के सर्वे पर रोक लगे। उन्होंने कहा कि इसी सर्वे में ढाँचे से बहुत सारे देवी-देवताओं की मूर्तियाँ मिली हैं।

क्या-क्या प्रमाण मिले सर्वे में?

गौरतलब है कि ज्ञानवापी ढाँचे पर ASI की 839 पेज की रिपोर्ट से साफ हुआ है कि ज्ञानवापी ढाँचे की जगह कभी बड़ा हिंदू मंदिर था। इसके प्रमाण वहाँ के खंभों, दीवारों और शिलापट से मिले हैं।

दीवारों पर कन्नड़, तेलुगु, देवनागरी और ग्रंथा भाषाओं में लेखनी मिली है। वहीं भगवान शिव के 3 नाम दीवारों पर लिखे मिले हैं- जनार्दन, रुद्र और ओमेश्वर।ढाँचे के सारे खंभे भी गवाही दे रहे हैं कि वह पहले मंदिर का हिस्सा थे उन्हें मॉडिफाई करके वहाँ नए ढाँचे में शामिल किया गया। ढाँचे की पश्चिमी दीवार से भी पता चलता है कि वो मंदिर की दीवार है। दीवार के नीचे 1 हजार साल पुराने अवशेष भी मिले हैं। कुछ खंबों से हिंदू चिह्नों को मिटाने के भी प्रमाण मिले हैं। इसके अलावा हनुमान जी और गणेश जी की खंडित मूर्तियाँ, दीवार पर त्रिशूल की आकृति भी मिली हैं। साथ ही तहखाने में भी हिंदू देवी-देवताओं की मूर्तियाँ मिलीं।

1 ओवर में 3 नो बाॅल, टी-20 मैच में 6 गेंद पर सिर्फ 5 रन… क्या शोएब मलिक ने की फिक्सिंग? BPL टीम ने काॅन्ट्रैक्ट खत्म कर क्यों लिया यू टर्न, जानिए सब कुछ

पाकिस्तान क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान शोएब मलिक की यूँ तो गिनती टी-20 के टाॅप प्लेयरों में होती है, लेकिन एक मैच में उनके ‘प्रदर्शन’ ने उनको कठघरे में खड़ा कर दिया है। मलिक के मैच फिक्सिंग में शामिल होने के संदेह जताए जा रहे हैं। बांग्लादेश प्रीम‍ियर लीग (BPL) में इस ‘प्रदर्शन’ के बाद टीम ने पहले उनका कांट्रैक्ट खत्म करने की घोषणा की। हालाँकि बाद में मलिक को ‘महान’ बताते हुए उनका अनुबंध रद्द करने से टीम ने इनकार कर दिया है।

बीपीएल में शोएब मलिक फॉर्च्युन बार‍िशल टीम के लिए खेलते हैं। जिस मैच के बाद वे फैंस के निशाने पर आए हैं और उन पर फिक्सिंग के आरोप लग रहे हैं वह 22 जनवरी 2024 को मीरपुर में खुलना टाइगर्स के खिलाफ खेला गया था। इस मैच में मलिक ने एक ओवर में तीन नो बाॅल फेंकी थी। छह गेंद में 5 रन बनाए थे।

चूँकि शोएब मलिक एक स्पिनर हैं, ऐसे में एक ही ओवर में 3-3 नो बॉल फेंकना कहीं से भी उनके जैसे कद के खिलाड़ी के लिए सामान्य नहीं है। खास बात ये है कि शोएब मलिक ने जिस ओवर में 3 नो-बॉल फेंकी, वो 18 रनों का गया। इसमें नो-बॉल पर भी चौका और छक्का लगा था। यही कारण है कि उन पर फिक्सिंग के आरोप लग रहे हैं।

फिक्सिंग के संदेहों के बीच फॉर्चून बारिशल के मालिक मिनाजुर रहमान ने मलिक का कॉन्ट्रैक्ट खत्म करने की बात कही थी। लेकिन बाद में उन्होंने इसका खंडन कर दिया। रिपोर्ट के अनुसार उन्होंने अनुबंध समाप्त करने को अफवाह करार दिया। मलिक को महान खिलाड़ी बताते हुए कहा कि उन्होंने टीम को अपना बेस्ट दिया है। रहमान ने कहा कि टीम के लगातार दो मैच हारने के कारण यह विवाद हो रहा है। ऐसे में आगे के मैचों पर पलटवार करने को लेकर टीम को ध्यान केंद्रित करना चाहिए।

बता दें कि अभी कुछ दिन पहले शोएब मलिक पाकिस्तानी मॉडल-एक्ट्रेस सना से निकाह करने को लेकर चर्चा में थे। यह उनका तीसरा निकाह है। इससे पहले उन्होंने आयशा से निकाह किया था, लेकिन बाद में उस निकाह को खारिज कर दिया था। फिर दुनिया की सफल टेनिस खिलाड़ियों में से एक सानिया मिर्जा के साथ साल 2010 में उन्होंने निकाह किया। दोनों का एक बेटा भी है। तीसरी निकाह के बाद सानिया के पिता इमरान मिर्जा ने बताया था कि उनकी बेटी ने शोएब मलिक से खुला के जरिए अपना संबंध समाप्त किया है।