Home Blog Page 1215

ईरान में 9 पकिस्तामियों को गोलियों से भून डाला, ‘अज्ञात’ हत्यारे का अब तक कोई अता-पता नहीं

ईरान के सिस्तान बलूचिस्तान प्रांत में 9 पाकिस्तानियों की एक अज्ञात बंदूकधारी ने हत्या कर दी है। इसके अलावा इस हमले में कई लोग घायल हैं। पाकिस्तानियों की मौत की पुष्टि ईरान में पाक राजदूत ने भी कर दी है। अभी तक हत्यारे का पता नहीं लग पाया है।

जानकारी के अनुसार, ईरान के सिस्तान बलूचिस्तान के सरावान शहर में आज (27 जनवरी, 2024) को एक अज्ञात बन्दूकधारी ने घुस कर पाकिस्तानियों पर गोलियाँ बरसाईं। यह घटना सारवान शहर के सिरकान इलाके में स्थित एक ऑटोमोबाइल वर्कशॉप में हुई। इसमें मौके पर ही 9 लोग हताहत हो गए जबकि 3 लोग अभी घायल बताए जा रहे हैं।

जानकारी सामने आई है कि सभी मृतक पाकिस्तान के पंजाब प्रांत के शहरों के रहने वाले थे और इस वर्कशॉप में काम करते थे। अभी तक इस हमले की जिम्मेदारी किसी भी संगठन ने नहीं ली है। सुरक्षा एजेंसियाँ भी हमलावरों की जानकारी नहीं जुटा सकी हैं। गौरतलब है कि जिस शहर में यह हमला हुआ वह पाकिस्तान-ईरान सीमा से लगभग 100 किलोमीटर दूर है।

ईरान में पाकिस्तानियों के मारे जाने की पुष्टि तेहरान में मौजूद पाकिस्तानी राजदूत मुदस्सिर टीपू ने भी कर दी है। उन्होंने एक्स (पहले ट्विटर) पर लिखा, “सरावान में 9 पाकिस्तानियों की भयावह हत्या से मैं हैरान हूँ। पाकिस्तानी दूतावास पीड़ित परिवारों की पूरी मदद करेगा। जाहेदान में मौजूद राजदूत पहले से ही घटना स्थल और अस्पताल के लिए निकल चुके हैं जहाँ घायलों का इलाज चल रहा है। हमने ईरान से इस मामले में पूरा सहयोग देने की अपील की है।”

गौरतलब है कि ईरान और पाकिस्तान के बीच सम्बन्ध इस समय काफी निचले स्तर पर हैं। 16 जनवरी, 2024 को ईरान ने पाकिस्तान के भीतर घुस कर हवाई हमले किए थे। ईरान ने कहा था कि उसने पाकिस्तान के भीतर कुछ आतंकी कैम्प तबाह किए हैं। इसके बाद पाकिस्तान ने भी ईरान के भीतर हमले करने का दावा किया था। रिश्ते बिगड़ने पर राजदूतों को भी दोनों देशों ने वापस बुला लिया था। हालाँकि, हाल ही में हुई बातचीत के बाद दोनों देश राजदूत वापस भेजने पर राजी हो गए थे।

इसी चलते इस घटना से एक दिन पहले ही (26 जनवरी, 2024) को ईरान में पाकिस्तान के राजदूत पहुँचे थे। उन्होंने ईरान के राष्ट्रपति इब्राहिम रईसी को यहाँ पहुँचने के बाद अपनी जानकारी भी पेश की थी। इसके कुछ ही समय बाद यह हमला हो गया।

नीतीश ‘सबके क्यों हैं?’ – ‘पलटूराम’ की वर्तमान छवि में नहीं, इतिहास में है ‘सुशासन बाबू’ को लेकर इस सवाल का जवाब, जो दूध कब का उबला आज तक चाभ रहे उसकी मलाई

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने एक बार फिर से पाला बदल लिया है और उनकी पार्टी जदयू राजद छोड़ कर भाजपा के साथ आ गई है। जहाँ कई भाजपा समर्थक नाराज़ हैं कि बार-बार धोखा खाने के बावजूद भाजपा आखिर नीतीश कुमार को क्यों स्वीकार कर रही है। वहीं I.N.D.I. गठबंधन के समर्थक सोच ही नहीं पा रहे हैं कि नीतीश कुमार की आलोचना करें या प्रशंसा, क्योंकि कुछ दिनों पहले तक नीतीश कुमार ही राया-राज्य घूम कर गठबंधन बनाने की कोशिशों में लगे थे, लगातार सक्रिय थे।

आखिर क्या कारण है कि राजद हो या भाजपा, नीतीश कुमार को साथ लेने में कोई नहीं हिचकता और खुद नीतीश कुमार भी किसी के साथ भी जाने में नहीं हिचकते। इसका जवाब नीतीश कुमार की वर्तमान ‘पलटूराम’ वाली छवि नहीं, बल्कि इतिहास में है। उस इतिहास में, जब लालू यादव और रामविलास पासवान एक साथ सफलता की सीढ़ियाँ चढ़ रहे थे। उस इतिहास में, जब लालू यादव गाँव-जवार के पिछड़ों के नेता के रूप में उभर रहे थे, और उनका साथ दे रहे थे नीतीश कुमार।

न सिर्फ पटना यूनिवर्सिटी छात्र संघ का अध्यक्ष बनने में, बल्कि 1988 में कर्पूरी ठाकुर के निधन के बाद नेता प्रतिपक्ष बनने में, और 1990 में मुख्यमंत्री बनने में भी नीतीश कुमार ने लालू यादव की मदद की थी। ये वो दौर था, जब नीतीश कुमार मानते थे कि लालू यादव को आगे बढ़ाने में ही समाजवादी विचारधारा वाले धरे की भलाई है। लालू यादव ट्रांसफर-पोस्टिंग वाले हिसाब-किताब में दक्ष थे (जिससे उन दिनों विधायकों की कमाई होती थी), ड्रामा करने में उनका कोई सानी नहीं था और दिल्ली से लेकर पटना तक सेटिंग करने में भी उनकी दक्षता थी।

इसे एक वाकये से समझिए। एक बार लालू यादव एक श्रद्धांजलि सभा में गए। वहाँ रोना-धोना किया, शोक जताया, परिवार को ढाँढस बँधाया और फिर वापस जाने लगे। तभी वहाँ कुछ पत्रकार आ गए। लालू यादव उन्हें देख कर वापस गए और हूबहू अपना वही ड्रामा दोहरा दिया। जबकि नीतीश कुमार की छवि एक पढ़े-लिखे नौजवान की थी, एक सज्जन की थी, अच्छी वेशभूषा में रहने वाले एक युवा नेता की थी, विचारधारा पर चलने वाले व्यक्ति की थी।

इसके उलट लालू यादव की कोई विचारधारा ही नहीं थी। ‘नीतीश सबके हैं’, इसका एक कारण ये भी है कि लालू यादव, भाजपा और नीतीश कुमार – शुरू में इन सबका ‘दुश्मन’ एक ही हुआ करता था। JP आंदोलन से निकले लालू-नीतीश का ‘दुश्मन’ थी कॉन्ग्रेस। कॉन्ग्रेस पार्टी को सत्ता से बेदखल करने के लिए ही जनसंघ का जन्म हुआ था, जो बाद में भाजपा में परिवर्तित हो गई। इस तरह 1990 के वर्ष को उदाहरण लें तो बिहार में ये सारी शक्तियाँ एक थीं।

इनके एक होने की फिर वही वजह थी – कॉन्ग्रेस। लालू यादव जब पहली बार मुख्यमंत्री बने, तब उन्हें न सिर्फ नीतीश कुमार बल्कि भाजपा का समर्थन भी हासिल था। भले ही ये अल्प समय के लिए ही था। इसके बाद राम मंदिर वाला मुद्दा जोर पकड़ा, लालकृष्ण आडवाणी ने रथ यात्रा निकाली और तत्कालीन प्रधानमंत्री VP सिंह के कहने पर लालू यादव ने आडवाणी को समस्तीपुर में गिरफ्तार करवा दिया। मुलायम सिंह यादव कहीं क्रेडिट न लूट ले जाएँ, इस डर ने ऐसा किया गया था।

ऊपर से लालू यादव इसके बाद सेक्युलरिज्म के मसीहा बने सो अलग। लालू यादव हमेशा से महत्वाकांक्षी रहे थे, एक बार एक बड़े नेता का इंतज़ार करने के लिए जब मीडिया से लेकर छोटे-छोटे नेतागण एयरपोर्ट पर खड़े थे तभी लालू यादव ने कहा था कि एक दिन उनका भी ऐसे ही इंतज़ार किया जाएगा। राजनीति का खून जो उन्होंने चखा था, सत्ता का खुमार जो उन्होंने सूँघा था, वो उन्हें मतवाला किए जा रहा था। नीतीश कुमार तब ऐसे नहीं हुआ करते थे।

1994 ने जॉर्ज फर्नांडिस समता पार्टी का गठन करते हैं। भाजपा को भी समाजवाद वाली लहर की आवश्यकता थी। ऐसे समय में जॉर्ज फर्नांडिस जैसे नेता को वो साथ लेना चाहती थी और इस तरह लालू यादव के खिलाफ एक गठबंधन बनता है। जॉर्ज फर्नांडिस और नीतीश कुमार के साथ भाजपा की साझेदारी की शुरुआत होती है। विपक्ष की राजनीति तब न तो भाजपा के लिए नई बात थी, न ही जॉर्ज-नीतीश के लिए। विपक्षी राजनीति उन्हें सूट करती थी, वो इसके आदी भी हो चले थे।

चूँकि लालू यादव 1990 में ही सत्ता में पहुँच गए और नीतीश कुमार को इसके बाद 15 वर्ष और इंतज़ार करना पड़ा, उनकी छवि एक जुझारू नेता की बन गई। एक ऐसे नेता की, जो लगातार चुनावों में हार के बावजूद रुका नहीं, एक ऐसा नेता जिसने एक साथी को पकड़ा तो लंबे समय तक उसका साथ निभाया, एक ऐसा नेता जो नब्बे के दशक में अंग्रेजी बोल सकता था, एक ऐसा नेता जो एक दुर्घटना के बाद केंद्रीय रेल मंत्री के पद से इस्तीफा दे सकता था, एक ऐसा नेता जो जंगलराज के खिलाफ सबसे बड़ा चेहरा बन कर उभरा।

नीतीश कुमार को कभी किसी भाषण में चिल्लाते हुए, ड्रामा करते हुए या फिर उग्र होते हुए नहीं देखा गया। इस ‘सज्जन शहरी बाबू’ ने जब सत्ता सँभाली तो पहले 5 वर्ष में बहुत कुछ बदल गया। नक्सली वारदातों पर लगाम लगी, सड़कों का निर्माण शुरू हुआ, साइकिल योजना के कारण लड़कियों की शिक्षा-दीक्षा में तेज़ी आई, गाँवों में कैबिनेट बैठक होने लगी, जिले-जिले में CM की यात्राएँ निकलने लगीं, जनता दरबार तक आम लोगों की पहुँच बनी और नेताओं की दबंगई की जगह ब्यूरोक्रेसी ताकतवर हुई।

2013 तक सब ठीक-ठाक चला और आज भी नीतीश कुमार विपक्ष में किए गए संघर्षों और 8 साल किए गए काम की ही मलाई खा रहे हैं। यही कारण है कि इसके एक दशक बाद भी वो ‘सबके’ हैं। 2013 में वो राजद द्वारा बाहर से समर्थन लेकर सरकार बनाते हैं, 2014 के लोकसभा चुनावों में बुरी तरह पटखनी खाते हैं, जीतन राम माँझी को CM बना कर हार की जिम्मेदार लेकर सहानुभूति लहर का फायदा उठाना चाहते हैं, 2015 में राजद के साथ विधानसभा चुनाव जीतते हैं, 2017 में भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई के नाम पर राजद से गठबंधन तोड़ देते हैं, 2019 के लोकसभा चुनाव में भाजपा के साथ मिल कर बंपर सीटें जीतते हैं, 2020 के विधानसभा चुनाव में फिर भाजपा के साथ मिल कर सत्ता पर काबिज होते हैं, 2022 में वापस लालू की पार्टी के साथ जाते हैं और 2024 में उनका फिर से मोहभंग होता है और वो भाजपा के साथ आ जाते हैं।

अतः, नीतीश कुमार के सबके साथ चले जाने और सहज हो जाने के पीछे कारण यही है कि वो उस दौर में संघर्षों में रत रहे हैं जब इसी भाजपा के कई नेता उनके मित्र हुआ करते थे और ‘कॉमन एनिमी’ से लड़ रहे थे। खुद लालू यादव उनके जवानी के मित्र हैं। सुशील मोदी जैसे भाजपा नेता कॉलेज के दिनों के मित्र हैं। उस समय की उनकी सज्जन, सौम्य और फिर बाद में सुशासन वाली छवि आज तक उनके काम आ रही है। जो सोशल इंजीनियरिंग उन्होंने पहले की थी और ‘महादलित’ समुदाय वाला दर्जा कई तबकों को दिया, वो आज तक उनके काम आ रहा है।

नीतीश कुमार को पता है कि ये वोट बैंक ऐसा नहीं है कि अकेले 240 सीटों में लड़ कर वो CM बन जाएँ, लेकिन इतना ज़रूर है कि अगर वो किसी के साथ जुड़ जाते हैं तो उनका मुख्यमंत्री पद बरकरार रहे। नीतीश कुमार आज ‘मोदी लहर’ को स्वीकार कर रहे हैं, तभी लोकसभा चुनाव से ऐन पहने पाला बदल रहे हैं। ‘नीतीश सबके हैं’ – क्योंकि I.N.D.I. गठबंधन में उन्हें भाव नहीं मिला, संयोजक का पद नहीं मिला। ‘सबके’ बन कर रहना आज उनकी मजबूरी भी बन गई है।

‘नीतीश सबके हैं’, क्योंकि लालू यादव की ‘गँवार’ वाली छवि के विकल्प के रूप में लोगों ने उनमें एक पढ़ा-लिखा व्यक्ति दिखा। क्योंकि मंच पर ड्रामेबाजी के विकल्प के रूप में आम जनता ने सामान्य तरीके से दिल की बात करने वाले एक नेता के रूप में उन्हें देखा। क्योंकि एक पार्टी विशेष के गुंडों की दबंगई से त्रस्त जनता ने उनमें एक ‘सुशासन बाबू’ को देखा। क्योंकि लोगों ने इतने बुरे दौर देखे हैं कि ‘सामान्य’ भी बेहतर लगता है। नीतीश पहले विकल्प थे, अब मजबूरी हैं। उनकी राजनीति का ये अंतिम अध्याय है, शायद इसका अंत किसी संवैधानिक पद पर हो!

‘इस्लाम कबूल कर वरना तुझे और तेरे परिवार को ठिकाने लगा देंगे’: यूपी में वाल्मीकि समाज के परिवार को मिल रही धमकी, बताया – मुस्लिम बहुल गाँव में हम अकेले हिन्दू

उत्तर प्रदेश के सहारनपुर में एक दलित परिवार को इस्लाम कबूलने की धमकी दी जा रही है। उसको आसपास के दबंग मुस्लिम धमकी दे रहे हैं कि वह जमीन खाली कर दे या फिर इस्लाम अपना ले। पीड़ित ने इसको लेकर सहारनपुर पुलिस को प्रार्थना पत्र दिया है। जानकारी के अनुसार, सहारनपुर के गंगोह थाना क्षेत्र के कुंडाकला गाँव में वाल्मीकि जाति के साधूराम के परिवार को यह धमकियाँ मिल रही हैं। साधूराम के परिवार को असलम, नियाज, एजाज, सोनू, आमिर, कामिल, सलीम और काला जमीन खाली करने के लिए धमका रहे हैं।

साधूराम ने इस सम्बन्ध में पुलिस को शिकायत दी है। शिकायत में साधूराम ने बताया है कि वह 1967 से ढलावली कस्बे में रह रहा है। यहाँ वह अपने गाँव से इसलिए आया था क्योंकि वहाँ बाढ़ आ गई थी। साधूराम ने पुलिस को बताया है कि यहाँ वह जिस जमीन पर रह रहा है, उसे कब्जाने की नीयत से यह सभी मुस्लिम दबंग उसे धमकी दे रहे हैं। साधूराम द्वारा दिया गया प्रार्थना पत्र ऑपइंडिया के पास मौजूद है।

साधूराम ने प्रार्थना पत्र में बताया है, “वो धमकाते हैं – या तो तू अपने परिवार सहित इस्लाम मजहब कबूल कर ले वरना तुझे और तेरे परिवार को ठिकाने लगाकर सारी जमीन पर अपना कब्जा कर लेंगे।” पीड़ित ने कहा है कि इन मुस्लिम दबंगों की दबंगई की वजह से उसके बाकी परिवारीजन पहले ही घर छोड़ कर अलग अलग शहरों में जा चुके हैं। साधूराम ने यह भी आरोप लगाया है इनकी जमीनें कब्जाने के अलावा मुस्लिम दबंगों ने ग्राम समाज की भी जमीन कब्जा रखी है।

पीड़ितों ने मीडिया से बात करते हुए बताया, “कुंडाकला गाँव से हैं हम, हमारा अकेला घर वहाँ वाल्मीकियों का है। बाकी पूरा गाँव मुस्लिमों का है। पहले मुझसे मारपीट की अब मेरा घर छीनना चाह रहे हैं। हमसे कहते हैं कि यहाँ से भाग जाओ या फिर मुसलमान बन जाओ। हमें उनसे बहुत खतरा है।”

साधूराम ने यह भी बताया है कि यहाँ पर यह मुस्लिम दबंग हिन्दुओं का धर्मांतरण कराते हैं और उनकी जमीन पर अवैध रूप से कब्जा करते हैं। यह भी आरोप लगाया गया है कि हिन्दू परिवारों की महिलाओं के साथ छेड़छाड़ की जाती है। इस मुस्लिम दबंगों पर साधूराम ने हथियार तस्करी का भी आरोप लगाया है। साधूराम ने इन मुस्लिम दबंगों के विरुद्ध कार्रवाई की माँग पुलिस प्रशासन से की है।

यूपी पुलिस को देखते ही राशिद ने किया हवाई फायर, फिर अपनी ही कनपटी से लगा दिया तमंचा: आत्महत्या की दे रहा था धमकी, दबोचा गया

उत्तर प्रदेश के मेरठ में एक जानलेवा हमले के आरोपित ने पुलिस के सामने खूब ड्रामा किया। आरोपित राशिद ने उसे पकड़ने आई पुलिस को आत्महत्या की धमकी दी और कनपटी पर तमंचा सटा लिया। इस दौरान वह पुलिस वालों को फायर करने की धमकी देता रहा। इसका वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो गया।

यह घटना मेरठ के कोतवाली क्षेत्र में हुई। यहाँ शनिवार (27 जनवरी, 2024) को एक जानलेवा हमले के आरोपित को पकड़ने पहुँची थी, इसके खिलाफ एक व्यक्ति ने मामला दर्ज करवाया था। पीड़ित ने बताया था कि राशिद और दानिश ने उसे तमंचा दिखाकर हत्या की धमकी दी थी।

इस मामले में पहले ही दानिश को गिरफ्तार कर लिया गया था। मेरठ पुलिस राशिद को इसके बाद पकड़ने पहुँची थी। जब राशिद घटनास्थल से भाग नहीं पाया तो उसने पुलिस को देखते हुए पहले हवाई फायर किया और फिर जब खुदको घिरता देखा तो खुद की कनपटी पर तमंचा लगा लिया।

इसने इस दौरान पुलिस वालों को आत्महत्या की धमकी दी और दानिश को छोड़ने की माँग करने लगा। इस दौरान वह यहाँ मौजूद बाकी लोगों को भी धमकाता रहा। पुलिस उसे इस दौरान समझाती रही। हालाँकि, उसने अपने ड्रामा जारी रखा। जब उसके पास एक पुलिसकर्मी पहुँचा तो राशिद ने उसका कॉलर पकड़ लिया।

राशिद को नियंत्रित करने के लिए पुलिस ने उसके जानने वालों को भी बुलाया और आत्मसमर्पण के बाद उसकी जमानत की बात भी कहलवाई लेकिन वह नहीं माना। इस दौरान राशिद के परिवार वाले भी उसे समझाते रहे लेकिन वह कहता रहा कि तीन तक गिनते खुद को गोली मार लगा।

इस पूरे ड्रामे के बीच यहाँ काफी भीड़ इकट्ठा हो गई। बाद में राशिद को पकड़ने के लिए और भी फ़ोर्स बुलाई गई। किसी तरह से उससे तमंचा छीन कर उसे नियंत्रित किया और गिरफ्तार किया। पुलिस ने इस संबंध में एक बयान भी जारी किया है।

पुलिस ने बयान जारी करके कहा है, “थाना देहली गेट के अंतर्गत वादी मनीष प्रजापति के द्वारा एक 307 आईपीसी का मुकदमा प्रतिवादी राशिद, दानिश आदि के विरुद्ध पंजीकृत कराया गया था। इसमें वादी को तमंचा दिखाकर प्रतिवादियों द्वारा होटल में धमकाया गया था।”

मेरठ में राशिद के सम्बन्ध में पुलिस का बयान

आगे पुलिस ने बताया, “आज देहली गेट थाने की पुलिस राशिद को पकड़ने गई थी, जिसमें राशिद द्वारा अपने ऊपर तमंचा लगाकर आत्महत्या की धमकी देने लगा और हवाई फायर भी किया तथा सह अभियुक्त दानिश जो पुलिस द्वारा पहले से ही गिरफ़्तार किया गया है उसको छोड़ने की शर्त रखने लगा । पुलिस द्वारा तमंचा छीनकर राशिद को पकड़ लिया गया है और गिरफ्तार किया जा रहा है। राशिद के पास 32 बोर के दो तमंचे और कारतूस मिले हैं।”

केरल के राज्यपाल को अब Z+ सिक्योरिटी, SFI के गुंडों ने दिखाए थे काले झंडे: बोले आरिफ मोहम्मद खान – अराजकता को बढ़ावा दे रहे CM पिनाराई विजयन

केंद्रीय गृह मंत्रालय ने केरल के राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान को Z+ सिक्योरिटी देने का फैसला किया है। दरअसल केंद्र सरकार का ये फैसला राज्यपाल को स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (SFI) के गुंडों के शनिवार (27 जनवरी, 2024) को काले झंडे दिखाए जाने के बाद आया है।

राज्यपाल के आधिकारिक एक्स हैंडल पर केरल राजभवन PRO के हवाले से पोस्ट किया गया, “केंद्रीय गृह मंत्रालय ने केरल राजभवन को सूचित किया है कि सीआरपीएफ का जेड+ सुरक्षा कवर माननीय राज्यपाल और केरल राजभवन तक बढ़ाया जा रहा है।” राज्यपाल ने सबसे लिए सीएम को जिम्मेदार ठहराया है।

राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान ने मीडिया से कहा, “मुझे 11 बजे स्वामी सदानंद आश्रम में सुबह 11 बजे एक बैठक में जाना था। जब मैं यहाँ पहुँचा तो कुछ लोगों ने मेरी कार को हिट करने की कोशिश की। मैंने पहले ही कहा मुझे कोई परेशानी नहीं है, किसी ने काले झंडे दिखाए, लेकिन अगर कोई मेरी कार के नजदीक आता है। तब मैं नीचे उतरूँगा।”

उन्होंने आगे कहा,”जो मैंने देखा वो अहम नहीं है, लेकिन ये महत्वपूर्ण है वहाँ 70 पुलिस वाले थे और आप यहाँ पर खड़े पुलिसवालों को गिन सकते हैं यहाँ कितने पुलिस वाले हैं। मेरा केवल एक सवाल है कि अगर चीफ मिनिस्टर इस रोड से जा रहे होते तो क्या पुलिस उन लोगों के साथ जाकर खड़ी होती तो हाथों में काले झंडे लिए थे और उन्हें कार को हिट करने की इजाजत देती। मैं पुलिस को दोष नहीं दे रहा, क्योंकि उनको आदेश सुप्रीम ऑथिरीटी से मिलते हैं और वो राज्य के चीफ मिनिस्टर हैं।”

राज्यपाल खान ने आरोप लगाया हैं, “यह राज्य के मुख्यमंत्री हैं जो राज्य में अराजकता को बढ़ावा दे रहे हैं। वह पुलिस को इन कानून तोड़ने वालों को संरक्षण देने का निर्देश दे रहे हैं। उनमें से कई ऐसे हैं जिनके खिलाफ कई आपराधिक मामले अदालत में लंबित हैं। वही इन लोगों को संरक्षण दे रहे हैं। पुलिस ने 17 लोगों पर केस दर्ज किया है। हालाँकि मैंने देखा कि वहाँ 50 से ज्यादा लोग थे।”

दरअसल मुख्यमंत्री पिनराई विजयन की पार्टी सीपीआई (एम) की स्टूडेंट ब्रॉन्च SFI के गुंडों ने राज्यपाल आरिफ के शनिवार कोट्टाराक्करा जिले में एक समारोह में जाने के दौरान काले झंडे दिखाकर विरोध प्रदर्शन किया।

इससे राज्यपाल गुस्से में आ गए और SFI के गुड़ों की गिरफ्तारी की माँग को लेकर सड़क किनारे एक दुकान पर धरने पर जा बैठे। सोशल मीडिया पर इस घटना के वीडियो वायरल हैं।

इनमें राज्यपाल को कोल्लम जिले के निलामेल इलाके में एक व्यस्त एमसी रोड पर कार से बाहर निकलते हुए देखा जा सकता है। यहाँ वो एक स्थानीय दुकान से कुर्सी लेते हुए और सड़क के किनारे बैठकर प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कार्रवाई की माँग करते दिखते हैं।

राज्यपाल को ऐसे सड़क किनारे बैठे देख मौके पर कई लोग इकट्ठा हो गए। इससे राज्यपाल का पारा और चढ़ गया और उनका सारा गुस्सा पुलिसकर्मियों पर निकला। उन्हें वीडियो में पुलिसकर्मियों से सख्ती से बात करते हुए भी देखा जा सकता है। वो गुस्से में कहते दिखते हैं कि पुलिस ही कानून तोड़ेगी तो कानून का पालन कौन करवाएगा। बता दें कि ये पहली बार नहीं है जब राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान के खिलाफ SFI के गुंडों ने मोर्चा खोला है।

इससे पहले दिसंबर, 2023 में राज्यपाल खान के काफिले पर राजधानी तिरुवनंतपुरम में SFI ने हमला किया था। तब राज्य खुफिया विभाग ने कहा था कि हमारी राज्यपाल के खिलाफ SFI के विरोध प्रदर्शन को लेकर चेतावनियाँ जारी करने के बाद उन्हें अतिरिक्त सुरक्षा नहीं दी गई। पुलिस के आला अधिकारियों ने इसे नजरअंदाज कर दिया।

यही नहीं CM पिनाराई विजयन के दामाद PA मोहम्मद रियास ने राज्यपाल खान को लेकर 17 दिसंबर, 2023 को तीखा बयान दिया था। राज्य के पयर्टन मंत्री रियास ने कहा था CPM राज्यपाल खान को उनकी बकवास को बंद करने के लिए नहीं कह रही, क्योंकि वो उनके पद की इज्जत करती है।

‘ईश्वर की देन है दारू, देता है मजा’: वेटिकन से पोप फ्रांसिस का सन्देश

ईसाइयों के सबसे बड़े धर्मगुरु पोप फ्रांसिस ने कहा है कि दारू भगवान की देन है और यह आनंद का असली स्रोत है। पोप फ्रांसिस ने यह बयान वेटिकन सिटी में दिया है, जो ईसाइयों की धर्मनगरी है। उन्होंने इसके पहले भी शराब के समर्थन में कई बयान दिए हैं।

पोप फ्रांसिस ने यह बयान एक समारोह में दिया, जिसमें इटली से आए हुए तमाम शराब निर्माता शामिल थे। यह समारोह इतालवी शहर वेरोना के बिशप डोमेनिको पोम्पिली द्वारा आयोजित किया गया था। यह समारोह वेरोना में हर साल अप्रैल माह में होने वाली वाइन प्रतियोगिता के पहले आयोजित किया जाता है।

पोप फ्रांसिस ने इस सभा में कहा, “यह ऐसा लगेगा जैसे पोप नशे में बोल रहे हैं। शराब, जमीन, कृषि का कौशल और व्यापारिक कौशल भगवान के उपहार हैं। सृष्टि निर्माता ने इन्हें हमें इसलिए दिए हैं, क्योंकि हम संवेदनशीलता और ईमानदारी के साथ इन्हें अपने आनंद का असली स्रोत बनाते हैं।”

पोप फ्रांसिस ने शराब बनाने वालों से कहा कि वह इससे सम्बंधित नैतिक जिम्मेदारियों का वहन करें और साथ ही पीने की सही आदतों को बढ़ावा दें। इस कार्यक्रम के आयोजक दूसरे ईसाई धर्मगुरु डोमेनिको पोम्पेली ने कहा कि संत पॉल ने कहा है कि शराब का एक ग्लास उत्साह बढ़ाने के लिए है, अगर इसे संभल कर लिया जाए।”

बता दें कि पोप फ्रांसिस इससे पहले भी शराब का समर्थन कर चुके हैं। उन्होंने वर्ष 2016 में भी शराब के समर्थन में बयान दिया था। उन्होंने शराब को शादी समारोह का प्रमुख अंग कहा था। उन्होंने कहा था, “नवविवाहित जोड़े की शादी में शराब ना हो तो उन्हें शर्मिंदगी महसूस होती है, जैसे आपने चाय पीकर आपने शादी समारोह पूरा कर लिया।”

गौरतलब है कि इटली विश्व में दूसरा सबसे बड़ा शराब उत्पादक देश है। बीते कुछ वर्षों से यूरोप में शराब की बोतलों पर स्वास्थ्य समस्याओं को लेकर चेतावनी जारी की माँग यूरोपीय यूनियन से की जा रही है। हालाँकि, इटली के शराब उत्पादक इसके खिलाफ रहे हैं। पोप फ्रांसिस के इस बयान का इन शराब उत्पादकों ने स्वागत किया है।

राहुल गाँधी ने माँझी को फोन कर के दिया CM बनाने का ऑफर, राबड़ी देवी को कोर्ट का समन: बिहार में पल-पल बदल रही राजनीति, कॉन्ग्रेस की बैठक से कई MLA रहे गायब

बिहार में राजनीतिक घटनाक्रम पल-पल बदल रहा है। जहाँ नीतीश कुमार इस्तीफा देने की तैयारी कर रहे हैं और शनिवार (27 जनवरी, 2024) को शाम 7 बजे जदयू के विधायक दल की बैठक बुलाई गई है, जिसमें इस्तीफे के फैसले पर अंतिम मुहर लग जाएगी। अगले ही दिन शपथग्रहण भी हो जाएगा, ऐसा मीडिया में चल रहा है। उधर अब खबर आई है कि कॉन्ग्रेस पार्टी के पूर्व अध्यक्ष राहुल गाँधी ने बिहार के मुख्यमंत्री रहे जीतन राम माँझी को फोन कॉल किया है।

राहुल गाँधी ने ‘हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा (सेक्युलर)’ के अध्यक्ष माँझी को बिहार का मुख्यमंत्री बनाने का ऑफर दिया है। HAM के पास 4 विधायक हैं, जबकि जबकि राजद के पास 79 और कॉन्ग्रेस के 19 विधायक हैं। वैसे तो भाजपा और जदयू मिल जाएँ तो बहुमत का आँकड़ा आसानी से पार हो जाता है। बिहार में बहुमत के लिए 122 विधायक चाहिए, भाजपा-जदयू के पास इससे एक ज़्यादा हैं। लेकिन, वामपंथी दलों के 16 विधायकों और HAM को जोड़ कर राजद-कॉन्ग्रेस सरकार बनाने की जुगत में है।

यही कारण है कि पहले लालू यादव ने जीतन राम माँझी को डिप्टी CM बनाने का ऑफर दिया था, अब उन्हें सीधा मुख्यमंत्री बनाने का ऑफर दिया जा रहा है। हालाँकि, ये तभी संभव है जब जदयू के विधायकों में से एकाध वोटिंग से अनुपस्थित रहे जाएँ। उधर पूर्णिया में होने वाली कॉन्ग्रेस विधायक दल की बैठक टाल दी गई है, क्योंकि पार्टी के सभी विधायक तय समय पर पहुँचे ही नहीं। अब ये बैठक अगले दिन होगी। उधर ‘जमीं के बदले नौकरी’ घोटाले में कोर्ट ने पूर्व सीएम राबड़ी देवी को समन भेजा है।

कोर्ट ने व्यवसायी अमित कात्याल के खिलाफ प्रोडक्शन वॉरंट भी जारी किया है, जो पहले से ही न्यायिक हिरासत में हैं। जीतन राम माँझी I.N.D.I. गठबंधन में आने के न्योते पर क्या फैसला लेते हैं, इस पर सभी की निगाहें टिकी हैं। AIMIM, HAM और एक निर्दलीय को मिला कर राजद-कॉन्ग्रेस-लेफ्ट गठबंधन 120 के आँकड़े को छू सकता है। राजद राज्यपाल को समर्थन-वापसी का पत्र देने का भी विचार कर रही है, क्योंकि उसे आशंका है कि नीतीश कुमार विधानसभा भंग कर सकते हैं। राजद सरकार बनाने का दावा पेश करेगी।

उधर RJD नेता तेजस्वी यादव ने कहा है कि बिहार में अभी खेला होना बाकी है, उन्होंने कहा कि नीतीश कुमार आदरणीय थे और हैं, कई चीजें उनके नियंत्रण में नहीं हैं। वहीं अब कॉन्ग्रेस व राजद नेताओं ने भी महागठबंधन के टूटने की बातें स्वीकार करना शुरू कर दिया है।

‘तेरा राम बचाने आएगा क्या?’: राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा के आयोजन पर कट्टरपंथियों ने ठाणे में की थी पत्थरबाजी, हुसैन और अख्तर पर FIR

महाराष्ट्र में ठाणे के मीरा रोड भायंदर इलाके में अभी भी तनाव का माहौल बना हुआ है। इस इलाके में राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा से एक दिन पहले हिंदुओं पर हुए हमले के बाद यहाँ मुस्लिमों की हिंसा में कोई कमी नहीं आई है। इस मामले में पुलिस ने भयंदर इलाके के मोहम्मद हुसैन शमी मोहम्मद शेख और अख्तर नाम के दो आरोपितों पर मामला दर्ज किया है।

पुलिस ने मोहम्मद हुसैन शमी मोहम्मद शेख और अख्तर के खिलाफ पुलिस ने IPC की धारा 153A, 504, 506 और 34 के तहत केस दर्ज किया है। दोनों पर ये केस 25 जनवरी 2024 को राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा समारोह मना रहे हिंदू समुदाय के लोगों पर पथराव करने को लेकर दर्ज हुआ है।

घटना की FIR कॉपी ऑपइंडिया के पास मौजूद है। प्राथमिकी के अनुसार, 22 जनवरी 2024 को राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा समारोह पर जश्न मनाने के लिए स्थानीय स्तर पर एक कार्यक्रम आयोजित किया गया था। इसमें आरोपित घुस गए और वलोगों पर पथराव कर दिया। आरोपितों ने हिंदू धर्म और भगवान राम को भी अपशब्द कहे।

शिकायतकर्ता ने कहा, “हमने हिंदू समारोह का जश्न मनाने के लिए एक छोटा-सा कार्यक्रम आयोजित किया था और इस मौके पर भंडारा कर रहे थे। 22 जनवरी को शमी और अख्तर कार्यक्रम में घुस आए और हिंदुओं पर पथराव शुरू कर दिया। इसकी वजह पूछने पर उन्होंने कहा कि वो सिर्फ इस पर नजर रख रहे थे कि स्थानीय मस्जिद पर कौन पथराव कर रहा है।”

हिंदू शिकायतकर्ता ने कहा है, “बाद में हिंदुओं की एक रैली पास की स्थानीय मस्जिद के पास से गुजरी और हमारे कार्यक्रम में घुसे दोनों आरोपितों ने रैली में भाग लेने वालों पर पथराव करना शुरू कर दिया।” इसके बाद शिकायतकर्ता ने वहाँ तैनात स्थानीय पुलिस को सूचित किया था, लेकिन तब तक आरोपित फरार हो चुके थे।

शिकायत में आगे कहा गया है कि आरोपित उन्हें लगातार धमकाते रहे हैं। 23 जनवरी को मुख्य आरोपित ने धमकाते हुए कहा था, “हमने देखा कि तुमने पुलिस को सूचना दी है। तुम कुछ ज़्यादा नहीं कर रहे हो? क्या रे तेरे को बहुत चर्बी आया है क्या? मैं तुम्हें मार डालूँगा, देखते हैं तुम्हारा राम तुम्हें बचाने आता है क्या।”

इसके बाद भी शिकायकर्ता को कई दिनों तक धमकी दी जाती रही। आखिरकार उन्होंने 25 जनवरी 2024 को शिकायत दर्ज करा दी। ये घटना राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा वाले दिन 22 जनवरी को हुई थी। इससे पहले 21 जनवरी 2024 की रात को भायंदर इलाके में मीरा रोड पर हिदुओं की शोभायात्रा पर 50-60 मुस्लिमों ने हमला कर दिया था।

इस दौरान मुस्लिम उपद्रवियों ने गाड़ियों में तोड़फोड़ की और यात्रा में शामिल महिलाओं के साथ मारपीट और अभद्रता की। जिहादियों ने भगवान हनुमान की तस्वीर वाले झंडे भी फाड़ दिए थे। इस मामले में पुलिस ने ऑपइंडिया को बताया था कि 13 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। हालाँकि, मामले की गंभीरता को देखते हुए IO दिलीप राख ने आरोपितों के बारे में कोई जानकारी नहीं दी।

महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने राज्य में कानून और व्यवस्था को बिगाड़ने वाले दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने का निर्देश दिया था। इसके बाद मुंबई प्रशासन ने बुलडोजर कार्रवाई की और आरोपितों की लगभग 15 अवैध संपत्तियों को जमींदोज कर दिया। BMC ने मुंबई में मोहम्मद अली रोड पर 40 और अवैध अतिक्रमणों को भी ध्वस्त कर दिया।

जिन लोगों की संपत्तियों पर कार्रवाई की गई थी, उनमें इब्राहिम मोहम्मद की दुकान भी शामिल थी। इब्राहिम मोहम्मद की मर्चेंट रोड की दुकानें और फेरीवालों के स्टॉल पर भी कार्रवाई की गई थी। मीरा रोड, कल्याण, ठाणे और भयंदर में हिंसा के बाद माहौल तनावपूर्ण बना हुआ है। आगे की जाँच जारी है।

यह खबर सिद्धि सोमानी ने लिखी है। आप इसे ऑपइंडिया की अंग्रेजी वेबसाइट पर विस्तार से पढ़ सकते हैं।

महिलाओं का वोट माँगना हराम, फतवे को 400+ मौलानाओं का समर्थन: कहा – ये शरिया कानून के खिलाफ है, जो फतवे का विरोध करेंगे वो इस्लाम के खिलाफ

महिलाओं का घर-घर जाकर वोट माँगना और किसी के लिए चुनाव प्रचार करना इस्लाम में हराम है और शरिया तथा इस्लामी क़ानूनों के खिलाफ है। चुनाव में भाग लेने वाली पार्टियों को महिलाओं को चुनाव प्रचार के लिए नहीं भेजने दिया जाएगा। यह फतवा एक मौलाना ने पाकिस्तान चुनावों के लिए दिया है।

यह फतवा पाकिस्तान के ख़ैबर पख्तूनख्वा राज्य में कोहिस्तान के मुफ़्ती गुल शहजादा समेत तमाम मौलानाओं ने दिया है। इनमें से अधिकांश मौलाना ‘जमीयत उलेमा-ए-इस्लाम (फजल)’ से सम्बन्ध रखते हैं। इन्होंने पाकिस्तान में 8 फरवरी, 2024 को होने वाले आगामी आम चुनावों के लिए महिलाओं के वोट माँगने पर रोक लगा दी है। कोहिस्तान में मौलानाओं की एक बैठक में मुफ़्ती गुल शहजाद ने कहा, “महिलाओं को वोट मँगाने के लिए एक दरवाजे से दूसरे दरवाजे ले जाना गैर इस्लामी और शरिया के विरुद्ध है। अगर कोई भी इस्लामी सोच के खिलाफ वोट देता है, इसका मतलब है कि वह झूठे बयानों पर विश्वास कर रहा है। यह इस्लामी शरिया के विरुद्ध है और कुफ्र है।”

मुफ़्ती गुल शहज़ाद के इस फतवे को 400 से अधिक मौलानाओं का समर्थन मिला है। इसके अलावा इसे 30 मौलानाओं के समूह ने इसको सर्वसम्मति से पारित किया है। मौलानाओं ने यह भी कहा है कि जो भी फतवे का विरोध करेंगे वह इस्लाम के खिलाफ माने जाएँगे। मौलानाओं ने यह भी कहा है कि कुरान पर हाथ रखवा कर लोगों को वोट के लिए राजी करना इस्लाम के विरुद्ध है और अपराध है।

पाकिस्तानी समाचार वेबसाइट ‘डॉन‘ ने बताया है कि इस बार के पाकिस्तान के आम चुनावों में कोहिस्तान से दो महिलाएँ भी चुनाव लड़ रही हैं। इन दोनों महिलाओं को पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की पार्टी ‘तहरीक ए इंसाफ’ पाकिस्तान का समर्थन मिला है। यह फतवा इन्हीं को निशाने पर लेकर जारी किया गया है, ऐसा माना जा रहा है।

यह फतवा जिन मौलानाओं ने जारी किया है वह ‘जमीयत उलेमा-ए-इस्लाम (फजल)’ से सम्बन्ध रखते हैं। यह पार्टी पाकिस्तान के बड़े मौलाना और नेता फ़ज़लुर्रहमान की पार्टी है। यह भी इन चुनावों में हिस्सा ले रही है। यह सुन्नी इस्लाम के बल पर जीतने का दावा करती है। गौरतलब है कि पाकिस्तान में आगामी 8 फरवरी को आम चुनाव होने हैं। इसके लिए सारी पार्टियाँ अपना जोर लगा रही हैं। इस चुनाव में पाकिस्तान की सरकार ने पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की पार्टी ‘तहरीक-ए-इंसाफ’ का चुनाव चिन्ह बल्ला छीन लिया है। उनके सारे उम्मीदवार अब निर्दलीय चुनाव लड़ रहे हैं।

ऐसा फतवा पहली बार नहीं आया है, इससे पहले भी मौलाना कई अजीब फतवे जारी करते रहे हैं। इससे पहले मौलाना जाकिर नाईक ने नवंबर 23, 2020 को उसने इस्लाम और हस्तमैथुन पर अपनी व्याख्या दी थी। उससे व्हाट्सएप्प के जरिए किसी ने पूछा था कि इस्लाम में हस्तमैथुन हराम है या हलाल। मौलाना ने इस पर बताया था कि अगर किसी व्यक्ति की बीवी नहीं है और वो उसके बारे में सोचते हुए हस्तमैथुन करता है तो ये हराम नहीं है। पोर्न देखते हुए अगर किसी ने हस्तमैथुन किया है तो ये हराम है।

मौलाना जाकिर नाइक ने बताया था, “पैगंबर मुहम्मद ने लोगों को अपने प्राइवेट पार्ट्स को जब तक उसकी इच्छा हो, तब तक छूने की अनुमति दी है, बशर्ते वो बाएँ हाथ से किया गया हो। पैगंबर मुहम्मद ने कहा है कि ये आपका द्रव है और आप जब चाहें तब उसे निकाल सकते हैं।”

वो लोग जिनके रक्त का गारा बना कर जोड़ी गई बाबरी की ईंटें, 80000 सैनिकों के साथ बलिदान हुए थे भीटी नरेश महताब सिंह: 2 फकीरों ने की थी मुखबिरी

धर्मनगरी अयोध्या में भगवान राम अपने निर्माणाधीन मंदिर के गर्भगृह में 22 जनवरी 2024 को विराजमान हो गए। देश और दुनिया भर के हिन्दू इस अवसर पर भक्तिभाव से अपने आराध्य भगवान राम की पूजा करते हुए दीपावली जैसा पर्व मना रहे हैं। ऑपइंडिया ने इस अवसर पर अपनी ग्राउंड रिपोर्ट में तमाम ऐसे बलिदानियों से देश को परिचित करवाया, जिन्होंने मुलायम सिंह यादव की सरकार द्वारा की गई फायरिंग में अपने प्राणों की आहुति दी।

ग्राउंड रिपोर्ट के दौरान हमें 4 बड़े युद्धों के बारे में जानकारी मिली। ये युद्ध उस दौरान हुए जब आक्रांता बाबर की क्रूर फ़ौज मंदिर को तोड़ रही थी और उनसे लड़ते हुए क्षत्रिय योद्धा अपने प्राणों की आहुति दे रहे थे। इन सभी में सबसे पहले अपना बलिदान देने वालों में तत्कालीन भीटी नरेश महताब सिंह थे। हमने राजा महताब सिंह के महल में जाकर वर्तमान हालातों की जानकारी जुटाई।

ऑपइंडिया की टीम राजा महताब सिंह के महल पहुँची। यह महल अब अम्बेडकरनगर जिले के भीटी थाना क्षेत्र में तहसील कार्यालय के ठीक बगल है। महल अब बेहद जर्जर हालत में है। प्लास्टर उखड़ चुके हैं और छत कई जगहों से गिर चुकी है। महल के ऊपर आज भी भगवा ध्वज लहराता है। दीवालों पर भगवान गणेश और महादेव शिव के चित्र आज भी उकेरे हुए हैं।

महल को देखकर ऐसा लगता है कि इसके बाहरी और आंतरिक हिस्से की साफ़-सफाई और रंग-रोगन एक जमाने से नहीं हुई है। दरवाजे भी उखड़े हुए मिले। महल के एक हिस्से में दुधारु जानवर बँधे हुए मिले। हमें कुछ स्थानीय लोगों ने नाम नहीं जाहिर करने की शर्त पर यह भी बताया कि महल का अधिकतर हिस्सा अब बिक चुका है।

राजा महताब सिंह महल भीटी, अम्बेडकरनगर

महल के बाहर राजा अजय प्रताप सिंह के नाम से एक इंटर कॉलेज मौजूद है। इसका संचालन राजा महताब सिंह के वंशजों द्वारा किया जाता है। मैदान में टहल रहे लोगों ने बताया कि जहाँ आज इण्टर कॉलेज है, वहाँ कभी राजा साहब की अदालत लगा करती थी। इसमें वे जनता की समस्याओं का बेहद न्यायप्रिय ढंग से समाधान करते थे। राजा महताब सिंह के अधिकतर परिजन लखनऊ और काशी में बस चुके हैं। महज कुछ दूर के परिजन हवेली की देखरेख के लिए मौजूद मिले, जिनमें से एक थे विनय प्रताप सिंह।

महल के अंदर मौजूद धार्मिक चिन्ह

लोग भूल चुके हैं हमें

महल में मौजूद विनय प्रताप सिंह ने हमें बताया कि भले ही उनके पूर्वजों ने जन्मभूमि बचाने के लिए बाबर के खिलाफ पहला संघर्ष किया हो, लेकिन आज लोग उन्हें लोग भूल चुके हैं। उन्होंने हमें बताया कि राजा महताब सिंह के बलिदान पर पहले एक किताब भी छपी थी, लेकिन ना जाने क्यों और किसने उसने बाजार से गायब कर दिया।

विनय प्रताप सिंह का कहना है कि यह किताब कभी अयोध्या के सभी पुस्तक स्टॉल पर बिका करती थी। राम मंदिर में रामलला की प्राण प्रतिष्ठा से बेहद खुश विनय प्रताप सिंह चाहते हैं कि लोग इस मौके पर राजा महताब सिंह को भी याद रखें। इसके साथ ही उनकी यह इच्छा है कि जर्जर होते जा रहे इस महल को भारत सरकार संरक्षित करे।

महल में मौजूद विनय प्रताप सिंह

दोगुने मुगलों से लड़ी थी 80 हजार की सेना

राजा महताब के एक अन्य वंशज प्रणव प्रताप सिंह ने ऑपइंडिया से बात की। प्रणव प्रताप सिंह ने हमें बताया कि सन 1527-28 के आसपास बाबर के आदेश पर उसका कमांडर मीर बाकी लाखों की मुगल फ़ौज लेकर अयोध्या के रामजन्मभूमि मंदिर पर हमला बोला था। तब भीटी नरेश राजा महताब सिंह बद्रीनाथ की तीर्थयात्रा पर निकले थे।

जन्मभूमि पर हमले की खबर सुनकर वृद्ध हो चले राजा साहब ने अपनी यात्रा रद्द कर दी और अयोध्या की तरफ कूच कर गए। उन्होंने अपने राज्य में संदेश भेजवाया और खुद भी ज्यादा से ज्यादा लोगों को जमा करने में जुट गए। इस तरफ लगभग 80 हजार हिन्दुओं की फ़ौज रामजन्मभूमि को बचाने के लिए अयोध्या की तरफ निकल पड़ी।

17 दिन चली लड़ाई, राजा साहब और सैनिक सभी बलिदान हुए

प्रणव प्रताप सिंह ने हमें बताया कि मीर बाकी अयोध्या में घुसकर रामजन्मभूमि के नजदीक पहुँच चुका था। सारे सैनिकों ने जन्मभूमि पर घेरा बना लिया था। लगभग 17 दिनों तक मीरबाकी और उसकी फ़ौज मंदिर में नहीं घुस पाई। इस बीच हिन्दू सैनिक एक-एक कर के बलिदान होते गए। आखिरकार 17वें दिन की समाप्ति पर अंतिम योद्धा के तौर पर राजा महताब सिंह जन्मभूमि को बचाते हुए बलिदान हो गए।

प्रणव प्रताप सिंह के अनुसार, इसी युद्ध में राजा महताब सिंह के सहयोगी वयोवृद्ध केहरी सिंह भी बलिदान हुए थे। राजा महताब सिंह के बलिदान होने के बाद ही मुगल फ़ौज मंदिर प्रांगण में घुस पाई। तब के तमाम गायकों ने राजा महताब सिंह के बलिदान पर लोकगीत बनाए थे। इन लोकगीतों में कुछ गाने आज भी भीटी क्षेत्र के बड़े बुजुर्ग गाते हैं। राजा साहब की हार का मुख्य कारण उन्नत हथियार न होना था।

बकौल प्रणव प्रताप सिंह, राजा साहब के सैनिकों के पास भाला और तलवारें थीं, जबकि मुगलों के पास तोपें थीं। कहा जाता है कि मीर बाकी ने राजा महताब सिंह और उनकी 80 हजार फ़ौज को मारकर उनके खून का गारा बनाया था और बाबरी की पहली दीवाल उसी से तामीर की थी। इन दीवारों की तामीर करने के लिए ज्यादा से ज्यादा खून सोखने के लिए लखौरी ईंटों का इस्तेमाल किया गया था।

जिन मुगल फकीरों को दी शरण उन्होंने ही की मुखबिरी

अंबेडकरनगर के इतिहासकार बलराम मिश्रा ने ऑपइंडिया से बात करते हुए इतिहास के पन्नों को पलटा। बलराम मिश्रा ने हमें बताया कि 2 मुगल फकीरों को राम मंदिर के तत्कालीन पुजारी श्यामानन्द ने आश्रय दिया था। इनमें से पहले फकीर का नाम कज़ल अब्बास मूसा और दूसरे का नाम जलाल शाह था। इन फकीरों ने खुद को हिन्दू धर्म से प्रभावित बताया और मंदिर परिसर में ही रहने लगे थे।

इन दोनों ने मंदिर में मौजूद न सिर्फ सोने-चाँदी की जानकारी जुटाई, बल्कि उसकी सुरक्षा से संबंधित सारे राज जान गए। दोनों ने यह भी पता लगाया कि उत्तर भारत में हिन्दुओं की सबसे अधिक आस्था राम में थी। उस आस्था का केंद्र जन्मभूमि पर बना मंदिर था। बाद में इन्हीं दोनों फकीरों ने सारी मुखबिरी बाबर को की और मतान्ध बाबर ने सोमनाथ की तर्ज पर राम मंदिर को लूटने और ध्वस्त करने के लिए अपनी फ़ौज भेज दी थी।

हमने राजा महताब सिंह के महल के आसपास मौजूद लोगों से भी बातचीत की। महल के पास अनुसूचित जाति के लोगों की बस्ती है। उन्होंने बताया कि खुद राजा साहब ने उन्हें वहाँ बसाया था और महल के अंदर उनके साथ जाति आदि के नाम पर कभी भी भेदभाव नहीं किया गया। भीटी बाजार के वयोवृद्ध रामयज्ञ तिवारी ने कहा कि यह क्षेत्र का दुर्भाग्य है कि ऐसे ऐतिहासिक व्यक्ति की तस्वीर तक मौजूद नहीं है।