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जानिए कौन हैं वो महंत, जिनके हाथ से PM मोदी ने तोड़ा 11 दिनों के उपवास: प्राण प्रतिष्ठा पर दिया ऐसा संबोधन कि वायरल होने लगा वीडियो

अयोध्या के नवनिर्मित राम मंदिर में भगवान रामलला की प्राण प्रतिष्ठा के बाद प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 11 दिनों का अपना व्रत तोड़ा। उनका व्रत स्वामी गोविन्द गिरी ने तुड़वाया। श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष स्वामी गोविन्द गिरी ने अपने संबोधन में बताया कि प्रधानमंत्री ने कैसे भगवान की प्राण प्रतिष्ठा के लिए कैसे कठिन व्रत रखा था।

स्वामी गोविन्द गिरी ने कहा कि उस समय उन्हें आश्चर्य हुआ, जब प्राण प्रतिष्ठा के लिए जरूरी नियम एवं व्रत के बारे में प्रधानमंत्री मोदी ने उनसे जानकारी माँगी। उन्होंने कहा कि 20 दिन पहले पीएम ने व्रत के लिए नियमावली माँगी थी। गोविंद गिरी ने कहा, “अपने आप को सिद्ध (व्रत के लिए) करने की भावना कहाँ होती है। यह भावना यहाँ (मोदी जी में) होती है।”

उन्होंने कहा कि कर्म, वाणी और मन से प्रधानमंत्री मोदी ने अपने आप को सिद्ध करने के लिए कठिन तप किया। तप से ही विशेष परिशुद्धि होती है। गोविंद गिरी ने कहा, “हम लोगों ने महापुरुषों से परामर्श करके प्रधानमंत्री से कहा था कि आपको मात्र 3 दिन का उपवास करना होगा, लेकिन उन्होंने 11 दिन का उपवास किया। हमने 11 दिन एकभुक्त (अनुष्ठान से पहले अन्न खाने का विधान) कहने के लिए कहा था, उन्होंने अन्न का ही त्याग कर दिया।”

प्रधानमंत्री के कठिन व्रत के विषय में बताते हुए कहा कि उन्हें 3 दिन जमीन पर सोने की बात कही गई थी लेकिन वह इस कड़कड़ाती ठण्ड में 11 दिनों तक जमीन पर सोते रहे। वह इस दौरान भावुक भी हो गए। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री के तप से तप की कमी हो गई। प्रधानमंत्री की तुलना गोविन्द गिरी ने छत्रपति शिवाजी महाराज से की और एक किस्सा भी सुनाया।

उन्होंने यह बताया कि प्रधानमंत्री ने इस दौरान सांसारिक दोषों से बचने के लिए विदेश यात्राएँ टाल दी थीं। स्वामी गोविन्द गिरी ने कहा कि देश को ऐसा तपस्वी राष्ट्रीय नेता मिले, यह सामान्य बात नहीं है। स्वामी गोविन्द गिरी ने बताया कि वह प्रधानमंत्री मोदी की माता से मिले थे। इससे उन्हें मालूम हुआ था कि वह 40 वर्षों से ऐसा ही तप कर रहे हैं।

गोविंद गिरी ने प्रधानमंत्री की दक्षिण के मंदिरों के यात्राओं के विषय में भी बताया। उन्होंने कहा कि भारत के हर कोने में जाकर वह अयोध्या आने का निमंत्रण दे रहे थे, ताकि ये दिव्य आत्माएँ आकर भारत को महान बनाने के लिए आशीर्वाद दें।

कौन हैं स्वामी गोविन्द गिरी?

स्वामी गोविन्द गिरी एक मराठी परिवार से आते हैं। संन्यास से पहले उनका नाम आचार्य किशोरजी मदनगोपाल व्यास था। उनका जन्म 1949 में महाराष्ट्र के बेलापुर में एक ब्राह्मण परिवार में हुआ था। वह वेद, उपनिषद पढ़े हुए हैं और उन्हें दर्शनाचार्य की उपाधि मिली है। ये उपाधि वाराणसी में मिली है। इसके अतिरिक्त वे रामायण, महाभारत और शिव पुराण जैसे पुराणों के ज्ञाता हैं। उन्होंने साल 2006 में कांची कामकोटि पीठ के स्वामी जयेंद्र सरस्वती से दीक्षा लेकर संन्यास लिया था।

जिनके पुरखों को घर छोड़ भागना पड़ा था, वो हैं राम मंदिर के सबसे बड़े दानकर्ता: रामलला के लिए दिया 101 किलो सोना, जानिए कौन हैं दिलीप V लाखी

अयोध्या के राम मंदिर निर्माण के लिए कई बड़े कारोबारियों और हस्तियों ने दान दिया है, लेकिन गुजरात के सूरत के हीरा कारोबारी दिलीप V लाखी ने इस दान में भी इतिहास रच दिया है। उन्होंने राम मंदिर के लिए 101 किलोग्राम सोना का दान किया है।

बताते चलें कि आज यानी 22 जनवरी, 2024 को अयोध्या के राम मंदिर के गर्भ गृह में प्राण प्रतिष्ठा समारोह में रामलला विराज गए हैं। इस समारोह के लिए शहर को फूलों और चमकदार रोशनी से सजाया गया है। इस बीच फूलों से सजे-धजे मंदिर की अलौकिक छवि देखते ही बन रही है। इस पल को एक बात खास बनाती है कि 500 साल से जिस राम मंदिर का सब लंबे वक्त से इंतजार कर रहे थे उसका पूरा निर्माण पूरी तरह से समर्पित अनुयायियों के दान से हुआ है।

राम के इन दान देने वालों में दिलीप V लाखी नंबर वन रहे हैं। उन्होंने मंदिर को इतना सोना दान किया है कि लोग दाँतों तले उँगली दबा लें। राम मंदिर निर्माण के लिए 5500 करोड़ रुपए से अधिक का दान दिया गया है, लेकिन इन सबके बीच दिलीप V लाखी अपनी अलग जगह बना ले गए।

राम मंदिर में उनके असाधारण योगदान में 101 किलोग्राम सोने का दान शामिल है। इसका मूल्य लगभग 68 करोड़ रुपए है। इस सोने का इस्तेमाल राम मंदिर के दरवाजे, गर्भगृह, त्रिशूल, डमरू और स्तंभों को सजाने के लिए किया जाएगा, जो पवित्र संरचना में एक अलग रूप देते हैं।

बताते चलें कि राम मंदिर में भूतल पर गर्भगृह के द्वार सहित कुल 15 स्वर्ण द्वार बनाए गए हैं। अब बात करते दिलीप वी लाखी के परिवार की। उनका परिवार सूरत में हीरा का सबसे बड़ा कारोबारी हैं। दिलीप कुमार के पिता विशिनदास होलाराम भारत-पाकिस्तान के बँटवारे से पहले 1944 में जयपुर आए थे। पहले से ही मेहनत के पुजारी रहे दिलीप ने 13 साल की उम्र से ट्यूशन देते थे और खाली वक्त में पिता का कारोबार सँभालते थे। इसके साथ ही उनमें कारोबारी कुशलता और अनुभव बढ़ता गया।

जब वो 22 साल के थे उनके पिता ने 1972 में उन्हें मुंबई के जवेरी बाजार कारोबार के लिए भेजा था। पिता के विश्वास पर खरा उतरते हुए उन्होंने हीरे के कारोबार में खासी तरक्की की।

यही वजह है कि दिलीप कुमार लाखी सूरत में बड़ी हीरा पॉलिशिंग की फैक्ट्री के मालिक हैं। उनकी फैक्ट्री में 6000 से अधिक कर्मचारी को रोजगार मिला हुआ हैं। दिलीप कुमार के तीन भाई मोतीराम वी लाखी, प्रकाश वी. लाखी और दीपक वी लाखी हैं। ये तीनों अलग-अलग हॉन्गकॉन्ग, न्यूयॉर्क और संयुक्त अरब अमीरात में कारोबार सँभालते हैं। वहीं गुजरात के प्रसिद्ध राम कथाकार मोरारी बापू के अनुयायी दान देने में दूसरे नंबर रहे। उनके अनुयायियों ने 16.3 करोड़ रुपए का दान दिया।

इसके बाद तीसरे नंबर पर गुजरात के हीरा कारोबारी गोविंदभाई ढोलकिया हैं। डायमंड कंपनी श्री राम कृष्णा एक्सपोर्ट्स के मालिक ढोलकिया ने 11 करोड़ रुपए की बड़ी राशि दान की है। दुनिया भर में राम मंदिर में दान के लिए पटना का महावीर मंदिर भी अव्वल रहा है। वहाँ से राम मंदिर के निर्माण के लिए 10 करोड़ रुपए का अहम योगदान दिया है। इसके अलावा संयुक्त राज्य अमेरिका, कनाडा और ब्रिटेन के राम भक्तों ने अलग से 8 करोड़ का योगदान दिया।

दरअसल राममंदिर के लिए हर दो घंटे में दान दोगुना हो रहा है। इसमें कई मशहूर हस्तियों और राजनेताओं के अघोषित रकम दान करने की अफवाहें भी हैं।वहीं कुछ और कारोबारी भी हैं जिन्होंने अयोध्या में राम मंदिर के लिए उदारतापूर्वक दान दिया है।

₹20 करोड़ में बनी ‘हनुमान’ ने 10 दिन में ही कमा लिए ₹200 करोड़: बॉक्स ऑफिस पर धूम मचा रही है टॉलीवुड की ‘पहली सुपरहीरो फिल्म’, राम मंदिर को भी जाता है दान

फिल्म ‘हनुमान’ बॉक्स ऑफिस पर बीते 10 दिनों से शानदार कमाई कर रही है। तेजा सज्जा के अभिनय से सजी और प्रशांत वर्मा के निर्देशन में बनी इस फिल्म का वर्ल्डवाइड कलेक्शन 200 करोड़ के पार पहुँच चुका है। ये फिल्म 12 जनवरी, 2024 को रिलीज़ हुई थी। मात्र 10 दिनों में फिल्म 200 करोड़ रुपए की कमाई को पार कर गई है।

फिल्म ‘हनुमान’ में सेकेंड वीकेंड पर भी पहले वीकेंड के करीब कमाई की है। फर्स्ट वीकेंड में फिल्म ने 41 करोड़ 59 लाख रुपए कमाए थे। वहीं सेकेंड वीकेंड पर फिल्म में 41 करोड़ 25 लाख रुपए का कलेक्शन किया।

इसे फिल्म ने टोटल डोमेस्टिक कलेक्शन में महेश बाबू जैसे सुपरस्टार की फिल्म ‘गुंटूर कारम’ को पछाड़ दिया है। जहाँ ‘गुंटूर कारम’ ने 21 जनवरी, 2024 को 3 करोड़ 75 लाख रुपए का कारोबार किया। वहीं वहीं ‘हनुमान’ ने रविवार को ही इससे करीब 5 गुना अधिक कलेक्शन किया।

इस फिल्म ने 21 जनवरी को 16 करोड़ 50 लाख रुपए का कलेक्शन किया। इसके साथ ही हनुमान का टोटल डोमेस्टिक कलेक्शन अब 130 करोड़ 60 लाख रुपए हो गया है। उधर ‘गुंटूर कारम’ का टोटल डोमेस्टिक कलेक्शन 118 करोड़ रुपए है।

वहीं ‘हनुमान’ का वर्ल्ड वाइड कलेक्शन 200 करोड़ रुपए के पार पहुँच चुका है। फिल्म के रिलीज़ होने के 10 दिनों बाद रविवार (21 जनवरी, 2024) को पूरी दुनिया में 23 करोड़ 91 लाख रुपए का कारोबार किया। इसके साथ ही इसका कुल वर्ल्ड वाइड कलेक्शन 209 करोड़ रुपए तक जा पहुँचा।

ये फिल्म उत्तरी अमेरिका में 5वीं सबसे अधिक कमाई करने वाली टॉलीवुड फिल्म बन चुकी है। नॉर्थ अमेरिकन बॉक्स ऑफिस पर ‘हनुमान’ फिल्म का कलेक्शन 32 करोड़ रुपए से अधिक तक जा पहुँचा। इस तरह से इस फिल्म ने कमाई के मामले में अल्लू अर्जुन की ‘अला वैकुंठपुरमलू’, राम चरण की ‘रंगस्थलम’, महेश बाबू की ‘भरत अने नेनू’ और प्रभास की ‘साहो’ और ‘आदिपुरुष’ जैसी फिल्मों को पीछे छोड़ दिया है।

दिलचस्प बात है कि बगैर किसी सुपर स्टार के कम बजट में बनी इस फिल्म ने इतनी कमाई करना इसकी उपलब्धि भी है। 34 साल के निर्देशक प्रशांत वर्मा और 29 साल अभिनेता तेजा सज्जा की इस फिल्म ‘HanuMan’ ने धमाल मचा दिया। ये फिल्म बड़ों के साथ ही बच्चों को ध्यान में रखते हुए बनाई गई है। राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा के वक्त इसका रिलीज होना भी इसका प्लस प्वाइंट है। इस फिल्म को पूरे परिवार के साथ देखे जा सकने वाला यूनिवर्सल यानी U सर्टिफिकेट दिया गया है।

ये फिल्म पूरी तरह से न तो एनिमेशन बेस्ड है और न ही पूरी तरह से धार्मिक है। इसके साथ एक बात और खास है कि इस फिल्म के हर टिकट पर 5 रुपए अयोध्या में बन रहे राम मंदिर के निर्माण के लिए दिए जाएँगे। तकनीक के मामले में ‘हनुमान’ फिल्म की सिनेमाटोग्राफी और VFX इसका एक अहम हिस्सा है।

फिल्म की कहानी की बात करें तो गाँव में हो रही राजनीति, हीरो और विलेन के साथ एक-एक कॉमेडियन, कमजोरों का शोषण करते ताकतवर, प्रेमिका को बचाता प्रेमी और इन सबके साथ बजरंग बली है। ये फिल्म डायरेक्टर प्रशांत वर्मा ने मूलतः ये फिल्म तेलुगू में बनाई है। ये मूवी हिंदी, तमिल, कन्नड़, मलयालम, मराठी, अंग्रेजी, स्पेनिश, कोरियन, जापानी और मंदारिन (चीनी) सहित 11 भाषाओं में एक साथ रिलीज की गई थी।

प्राण-प्रतिष्ठा के उत्सव में डूबे थे हिन्दू… बुर्काधारी महिला लगाने लगी अल्लाह-हू-अकबर के नारे: अब्बा बोले- बेटी मानसिक रूप से बीमार है

कर्नाटक के शिवमोगा में राम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा के मौके पर उत्सव मना रहे हिन्दुओं के बीच एक महिला ने घुस कर अल्लाह-हू-अकबर के नारे लगाए। उसने यहाँ लोगों को भड़काने वाली बातें भी कहीं। महिला को पुलिस ने हिरासत में ले लिया है।

जानकारी के अनुसार, कर्नाटक के शिवमोगा में हिन्दू कार्यकर्ता अयोध्या के राम मंदिर में भगवान राम की प्राण प्रतिष्ठा को लेकर उत्सव मनाने को इकट्ठा हुए थे। यह कार्यक्रम शिवमोगा के शिवप्पा नायक चौक पर हो रहा था। यहाँ एकत्रित हुए हिन्दू ‘जय श्रीराम’ के नारे लगा रहे थे।

इसी दौरान एक बुर्के वाली महिला आई और लोगों से बहस करने लगी। महिला ने इस दौरान भक्तों के बीच में अल्लाह-हू-अकबर के नारे भी लगाए। बताया गया कि यह महिला एक बाइक पर यहाँ पहुँची थी और साथ में एक बच्चे को लिए हुए थी। हिन्दू कार्यकर्ताओं ने आरोप लगाया कि महिला यहाँ साम्प्रादायिक सौहार्द बिगाड़ने आई थी।

यहाँ मौजूद इस महिला ने प्रधानमंत्री मोदी और हिन्दू भक्तों के खिलाफ भी उलटी सीधी बातें कीं। इसका वीडियो भी सामने आया है। वहीं महिला के घरवालों ने उसको बचाने के लिए बताया है कि महिला मानसिक रूप से अस्थिर है।

रिपोर्ट्स के अनुसार, पुलिस ने इस महिला को मौके से हटा कर हिरासत में लिया है। शिवमोगा के एसपी ने बताया, “शिवप्पा नायक चौक पर हिन्दू कार्यकर्ता राम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा के अवसर पर प्रसाद तैयार कर रहे थे। इस दौरान यह महिला यहाँ पहुँची और फोटो लिए फिर अल्लाह-हू-अकबर के नारे लगाने लगी और प्रधानमंत्री मोदी के लिए अपमानजनक बातें करने लगी। यहाँ इसके जवाब में हिन्दू कार्यकर्ताओं ने ‘जय श्रीराम’ के नारे लगाए। स्थिति बिगड़ती देख पुलिस ने महिला को यहाँ से हटा दिया और अपने साथ थाने ले गई।”

बता दें कि पुलिस महिला को अपने साथ ले गई है लेकिन गिरफ्तारी न होने पर हिन्दू कार्यकर्ताओं ने अपनी नाराजगी जताई है। मामले में रिपोर्ट भी दर्ज न किए जाने की बात सामने आई है। वहीं महिला के अब्बा ने दावा किया है कि वह मानसिक रूप से बीमार है और उसका कुछ समय से इलाज चल रहा है।

एक ऐसा ‘कारसेवक’ जिसने ढाँचे का गुंबद तोड़ने का दावा किया, बाद में अपना लिया इस्लाम और फिर संदिग्ध हालत में हो गई मौत: जानिए खबर की सच्चाई

धर्मनगरी अयोध्या के राम मंदिर में आज सोमवार (22 जनवरी 2024) को रामलला की मूर्ति की प्राण प्रतिष्ठा हो गई। ज्यादातर लोग इस दिन का श्रेय उन रामभक्तों को दे रहे हैं, जिन्होंने मुगल काल से मुलायम यादव सरकार के बीच जन्मभूमि के लिए अपने प्राण दे दिए। मंदिर प्राण प्रतिष्ठा में उन तमाम कारसेवकों के परिजनों को विशेष तौर पर आमंत्रित भी किया गया है।

कारसेवकों के बारे में भ्रम फैलाते हुए वामपंथी और इस्लामी समूह के लोग बलवीर नाम के एक व्यक्ति का खूब प्रचार किया था। बलवीर ने बाद में इस्लाम अपनाकर आमिर नाम रख लिया था। उसने कहा था कि वह 6 दिसंबर 1992 की उस कारसेवा में शामिल था। ऑपइंडिया ने इस दावे की पड़ताल कागजातों और अयोध्या में मौजूद उन लोगों से की, जो इसके चश्मदीद हैं।

क्या है इस्लामी समूह और वामपंथियों का दावा?

इस्लाम कबूल करके मोहम्मद आमिर बने बलबीर का कई मीडिया संस्थानों ने इंटरव्यू प्रकाशित किया था। बलबीर ने खुद को मूलतः हरियाणा के पानीपत का निवासी बताया था। उसने कहा था कि वह शिवसेना का सदस्य था।, लेकिन हिन्दू संगठनों ने उसके मन में मुस्लिमों के खिलाफ नफरत भरी, जिसके कारण वह बाद में बजरंग दल में शामिल हो गया था।

बलवीर ने कहा था कि उसे जज्बाती करके 1 दिसंबर 1992 को अयोध्या ले जाया गया था और 6 दिसंबर 1992 की घटना में उसने विवादित ढाँचे के बीच वाले गुंबद पर सबसे पहला वार किया था। उसने यह भी कहा था कि जब वो पानीपत पहुँचा हीरो जैसा स्वागत हुआ था, लेकिन उसके माता-पिता नाराज हो गए थे।

बलबीर ने कहा था कि नाराजगी को दूर करने के लिए उसने इस्लाम कबूल कर लिया और 100 मस्जिदें बनवाने का निर्णय लिया। बलबीर ने दावा किया था कि उसने 5 साल पहले तक 92 मस्जिदों को बनवाने में मदद कर चुका है। उसने दावा किया कि वह जल्दी ही 100 मस्जिद बनवाने के अपने प्रण को दूर कर लिया जाएगा। धर्मांतरण के बाद बलबीर ने घूम-घूम कर खुद को पूर्व कारसेवक बताया था।

इस दौरान आजतक जैसे संस्थानों ने बलवीर के इंटरव्यू लिए। बाद में वो हरियाणा छोड़कर आमिर बना बलबीर हैदराबाद शिफ्ट हो गया। यहाँ वो हाफिज बाबा नगर में किराए के मकान में रहता था। 24 जुलाई 2021 को संदिग्ध हालातों में मोहम्मद आमिर की मौत की सूचना सामने आई। उसके कमरे से बदबू आने लगी तो लोगों ने इसकी जानकारी पुलिस को दी थी।

अयोध्या के संतों ने खबरों को बताया साजिश

इस दावे की पड़ताल करते हुए ऑपइंडिया ने 6 दिसंबर 1992 की कारसेवा के तमाम चश्मदीद खोजे। अयोध्या के प्रमोद इलाके में पड़ने वाले नायक मंदिर के महंत महेश दास ने हमसे बातचीत में इन खबरों को सरासर झूठ का पुलिंदा बताया। उन्होंने दावा किया कि 6 दिसंबर 1992 में वो पूरी कारसेवा के चश्मदीद गवाह हैं।

महंत महेश दास का कहना है कि भले ही मौके पर हजारों की भीड़ थी, लेकिन गुंबद पर गिने-चुने लोग ही चढ़े थे। उन्होंने कहा कि पहली कुदाल चलाने का दावा करने वाला कथित बलवीर उर्फ़ मोहम्मद आमिर कतई नहीं था। अयोध्या के निवासी आशुतोष, मीरा, कपिल, रघुवीर, अजय दास और हनुमंत ने भी बताया कि वो भी 6 दिसंबर 1992 की घटना से अच्छे से वाकिफ हैं।

बलवीर उर्फ़ आमिर के दावों का खंडन करते हुए 6 दिसंबर 1992 के चश्मदीद और नायक मंदिर के महंत महेश दास

इन सभी ने कहा कि मीडिया में आई चर्चा के अलावा तब 6 दिसंबर 1992 की घटना में जमीनी तौर पर शामिल किसी बलवीर उर्फ़ मोहम्मद आमिर का वो नाम भी नहीं सुने थे। इन सभी लोगों ने वायरल की जा रहीं तमाम खबरों को धर्मान्तरण बढ़ाने की साजिश करार दिया और सरकार से माँग की है कि ऐसी निराधार खबरों को फैलाने वालों पर कड़ी कार्रवाई की जाए।

CBI की FIR में नामजद कारसेवक ने भी खबरों को बताया अफवाह

ऑपइंडिया ने इन खबरों की सत्यता जाँचने के लिए उस कारसेवक को खोज निकाला जो 6 दिसंबर 1992 की घटना में सीबीआई द्वारा जाँचे गए केस में नामजद आरोपित हैं। 6 दिसंबर 1992 की घटना में पहली गिरफ्तारी अयोध्या जिले से सटे टांडा (अब अम्बेडकरनगर जिला) निवासी रामजी गुप्ता की हुई थी।

रामजी गुप्ता ने ऑपइंडिया से दावा किया कि वो विवादित ढाँचा गिराने के सभी आरोपितों और गुंबद पर चढ़े गिने-चुने रामभक्तों को अच्छे से जानते हैं, जिनमें बलवीर नाम का कोई भी कारसेवक नहीं था। खुद को एक-एक मिनट का गवाह बताते हुए रामजी गुप्ता ने इस्लाम कबूलने वाले बलवीर के कारसेवक होने जैसी खबरों को सरासर शरारतपूर्ण और सोची-समझी साजिश करार दिया।

बलवीर की कहानी को झूठी बताते विवादित ढाँचे के ध्वंस केस में नामजद रामजी गुप्ता

मैं था गुंबद के पास, बलवीर नहीं

ऑपइंडिया ने 6 दिसंबर 1992 की कारसेवा में शामिल रहे मुजफ्फरनगर के अम्बरीश गोयल से बात की। अम्बरीश ने हमें बताया कि वो 6 दिसंबर 1992 की कारसेवा के सक्रिय कारसेवक रहे हैं। तब कई टोलियाँ देश के अलग-अलग हिस्सों से निकली थीं। उन्होंने कहा कि पश्चिम उत्तर प्रदेश और आसपास के हिस्सों से निकली टोलियों में अधिकतर लोगों से वे परिचित थे।

अम्बरीश ने बताया कि उन्होंने सोशल मीडिया पर कथित कारसेवक मोहम्मद आमिर उर्फ़ बलबीर की तस्वीर देखी थी। वह कारसेवा के दौरान गुंबद तो दूर, कहीं आसपास भी मौजूद नहीं था। अम्बरीश गोयल ने इन खबरों को रामभक्तों का मनोबल गिराने की साजिश करार देते हुए कहा कि वे इसके खिलाफ जल्द ही मुख्यमंत्री से शिकायत करेंगे।

6 दिसंबर 1992 के कारसेवक अंबरीश गोयल

न FIR और न ही कोर्ट कार्रवाई में नाम, फिर भी इतना बड़ा झूठ

मोहम्मदी मस्जिद में मुलायम सिंह यादव की प्रतिमा स्थापित करने का ऐलान करके चर्चा में आए राष्ट्रीय हिन्दू दल नामक संगठन के अध्यक्ष रोशन पांडेय ने अयोध्या में ऑपइंडिया से बात की। रोशन ने कहा, “मैंने विवादित ढाँचे के ध्वंस से जुड़े सभी सरकारी कागजातों और अदालती कार्रवाई का बारीकी से अध्ययन किया है। कहीं एक सिंगल जगह भी हरियाणा के किसी बलवीर का जिक्र नहीं है।”

उन्होंने कहा, “जिनका ध्वंस से कोई वास्ता ही नहीं था, उनको तत्कालीन कॉन्ग्रेस सरकार ने आरोपित बना डाला था। खुद मीडिया में आकर जिम्मेदारी ले रहे मोहम्मद आमिर बने बलबीर पर केस नहीं दर्ज हुआ, क्योंकि वो वहाँ था ही नहीं।” उन्होंने कहा कि मीडिया संस्थान हिन्दुओं के खिलाफ ऐसी साजिशों का प्रचार करने से बाज आना चाहिए।

झूठ फ़ैलाने वालों से बाज आने की अपील करते रोशन पांडेय

इतना ही बड़ा रामभक्त था तो 1990 में क्यों नहीं आया ?

मूल रूप से एटा निवासी और हिन्दू एकता समूह नामक संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष शुभम हिन्दू ने इस मामले में ऑपइंडिया से बात की। शुभम ने विवादित ढाँचे के गिरने के गम में बलबीर से मोहम्मद आमिर बन जाने जैसी खबरों को महज कुछ साजिशकर्ताओं के मन की उपज करार दिया।

बलवीर का इंटरव्यू प्रकशित करने वाले मीडिया संस्थानों से सवाल ठोकते हुए शुभम ने कहा कि अगर बलबीर इतना ही बड़ा रामभक्त था तो साल 1990 की कारसेवा में वो क्यों नहीं आया, जब मुलायम सिंह यादव की सरकार के आदेश पर हर तरफ गोलियाँ चल रहीं थीं?

शुभम हिन्दू ने कहा कि वो ऐसी खबरों को वायरल करने वाले साजिशकर्ताओं का पर्दाफाश करने के लिए सरकार को पत्र लिखेंगे। शुभम चाहते हैं कि इस बात की भी जाँच हो कि इस प्रकार की झूठी खबरों को वायरल कर के साजिशकर्ताओं ने हिन्दू समाज का कितना नुकसान किया है।

धर्मांतरण रैकेट का आरोपित कलीम सिद्दीकी था आमिर उर्फ़ बलवीर का गुरु

बलवीर ने अपने इंटरव्यू में कहा था कि वह देवबंद के मौलाना कलीम सिद्दीकी से मिलकर इस्लाम से प्रभावित हुआ था। कलीम सिद्दीकी के मदरसे में कुछ दिन रहने के बाद बलवीर ने ईमान लाने (मुस्लिम बनने) की बात कही थी। जनसत्ता का यहाँ तक दावा है कि विवादित ढाँचा ध्वंस के बाद बलबीर देवबंद में कलीम सिद्दीकी को मारने गया था, लेकिन यहाँ उसका मन बदल गया।

हालाँकि, जनसत्ता ने इस घटना का समय नहीं बताया है। कलीम सिद्दीकी वही शख्स है, जिसे उत्तर प्रदेश पुलिस की आतंकवाद निरोधक शाखा (ATS) ने पूरे देश में फैले धर्मान्तरण का सरगना बताया था। कलीम सिद्दीकी का आपराधिक नेटवर्क मुंबई और गुजरात तक पाया गया था। वह लम्बे समय तक जेल में भी रहा था। अभी भी UP ATS कलीम के खिलाफ सबूत जुटा रही है।

बार-बार बयान बदला बलबीर

जनसत्ता जैसे संस्थानों ने दावा किया कि बलबीर मौलाना कलीम सिद्दीकी की हत्या करने गया था और वहाँ उसका मन बदल गया, जबकि एक इंटरव्यू में बलबीर ने खुद कहा था कि बाबरी गिराने के बाद उसके मन में डर जैसा बैठ गया था और वो कलीम सिद्दीकी के पास उस डर की ताबीज लेने गया था। वो कई डॉक्टरों और पंडितों के पास जाकर थक गया था, लेकिन उसका डर खत्म नहीं हुआ था।

कलीम सिद्दीकी के बारे में बलबीर को किसी अन्य व्यक्ति ने बताया था, जहाँ वो मिन्न्नत करके मिलने का दावा करते सुना जा सकता था। मौलाना कलीम के माध्यम से इस्लाम कबूल करने वाले बलबीर को थोड़े ही दिनों में मीडिया का पोस्टर ब्वॉय बना दिया गया। बलबीर उर्फ़ आमिर को हैदराबाद भेज दिया गया, जहाँ वह दीनी इदारा (इस्लाम की जानकारी देने वाले स्कूल) चलाने लगा।

यहीं पर एक मुस्लिम लड़की से बलबीर का निकाह भी करवा दिया गया। जुलाई 2021 में बलबीर की संदिग्ध हालातों में मौत हो गई। यह मौत तब हुई, जब उत्तर प्रदेश ATS कलीम सिद्दीकी के खिलाफ सबूत जुटाने में लगी हुई थी। कलीम को सितंबर 2022 में गिरफ्तार किया गया था। इसी के साथ उसके देशव्यापी धर्मान्तरण नेटवर्क का खुलासा भी हुआ था, जिसमें अधिकतर पीड़ित हिन्दू समुदाय से थे।

हमारा शिवसैनिक नहीं था बलबीर, भेजेंगे लीगल नोटिस

लल्लनटॉप जैसे संस्थानों ने धर्मान्तरित बलबीर के शिव सैनिक होने का दावा किया था। इन दावों की पुष्टि के लिए ऑपइंडिया ने हरियाणा प्रदेश के युवा शिवसेना प्रमुख रितुराज से बात की। रितुराज ने साफ़ तौर पर बलबीर के शिव सैनिक होने की खबरों को कोरी बकवास बताया। रितुराज ने बताया कि इस तरह की खबरें छवि धूमिल करने की साजिश के तहत उड़ाई गईं।

रितुराज ने कहा, “हमें गर्व है कि बाला साहेब ठाकरे से मिली प्रेरणा से कई शिव सैनिकों ने कलंक रूपी ढाँचे को ध्वस्त करने में अपनी सक्रिय भूमिका निभाई, लेकिन बलबीर जैसे लोगों को शिव सैनिक बताकर हमारी छवि धूमिल करने की भी साजिश रची गई, जो कि निंदनीय है। बलबीर जैसे लोगों की शिवसेना में न तो कभी जगह थी, न है और न ही आगे रहेगी।”

FIR दर्ज करवाकर बजरंग दल करेगा साजिश का पर्दाफाश

ऑपइंडिया ने इस पूरे मामले की जानकारी हरियाणा बजरंग दल प्रदेश के विद्यार्थी प्रमुख ललित भाटी से ली। ललित भाटी ने हमें बताया कि उन्होंने भी सोशल मीडिया और कुछ मीडिया संस्थानों के माध्यम से इन खबरों को सुना है। ललित ने बताया कि उन्होंने बलबीर के बारे में जानकारी जुटाई और निष्कर्ष के तौर पर यह निकला कि वो कभी भी कारसेवक नहीं रहा था।

ललित ने कहा, “विवादित ढाँचे के ध्वस्त होने के बाद मुस्लिम समूहों ने बड़ी साजिश रची और बलबीर नाम के व्यक्ति को मोहरा बनाया। बलबीर उनका शिकार आसानी से इसलिए बन गया, क्योंकि वो एक गाँधीवादी परिवार से था। उसको आगे रखकर बाबरी से जोड़ा गया, जो सम्भवतः कभी विवादित ढाँचे तक गया ही नहीं।”

ललित भाटी ने बताया कि तमाम साजिशकर्ताओं ने बलवीर को आगे कर के न सिर्फ धर्मान्तरण मामले को हवा दी बल्कि मस्जिदों को भी बनवाने के लिए पैसे आई जुटाने में अपना उल्लू सीधा किया। बकौल ललित भविष्य में ऐसी साजिश को अंजाम न दिया जा सके इसलिए वो जल्द ही संगठन की बैठक में इस मुद्दे को रखेंगे और FIR दर्ज करवा के पूरे मामले का पर्दाफाश करवाएँगे।

टीवी पर रामलला, हाथ जोड़ दर्शन करते ओडिशा के CM… प्राण प्रतिष्ठा पर बोले नवीन पटनायक – एक साथ आया पूरा राष्ट्र, धार्मिक उत्साह देख कर हुई ख़ुशी

ओडिशा के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक ने सोमवार को राज्य की राजधानी में अपने आवास पर अयोध्या में श्री राम जन्मभूमि मंदिर में ‘प्राण प्रतिष्ठा’ समारोह का सीधा प्रसारण देखा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, RSS प्रमुख मोहन भागवत और अन्य गणमान्य व्यक्तियों की मौजूदगी में एक घंटे तक चले समारोह के दौरान जन्मस्थान पर बने मंदिर में रामलला की मूर्ति की प्राण प्रतिष्ठा की गई।

नवीन पटनायक ने ‘X’ पर लिखा, “अयोध्या में आयोजित होने हुए शुभ राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा का साक्षी बना। राष्ट्र को प्राण प्रतिष्ठा के लिए धार्मिक उत्साह के साथ एक साथ आते देखकर खुशी हुई।” तस्वीर भी सामने आई है, जिसमें हाथ जोड़ कर टीवी पर रामलला का दर्शन करते हुए नज़र आ रहे हैं।

अयोध्या में रामलला अपने जन्मस्थान पर हमेशा के लिए विराजमान हो गए। इसी के साथ सनातनियों की सदियों की तपस्या भी पूर्ण हो गई, जिसके लिए वो 500 वर्षों तक त्याग और बलिदान करते रहे। इस दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत, उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, राम मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष महंत नृत्य गोपाल दास व अन्य प्रमुख लोग मौजूद रहे। मंत्रोच्चार एवं वैदिक कर्मकांड के साथ रामलला को प्राण प्रतिष्ठित किया गया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने प्राण प्रतिष्ठा समारोह के दौरान मुख्य यजमान की भूमिका निभाई। वो चाँदी का मुकुट लेकर गर्भगृह में पहुँचे थे।

रामलला प्राण प्रतिष्ठा समारोह (फोटो साभार : इंडिया टीवी)

इस दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, “हमारे राम आ गए। सदियों की प्रतीक्षा के बाद हमारे राम आ गए। सदियों के त्याग और तपस्या के बाद हमारे प्रभु राम आ गए हैं।” वहीं, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि आज आत्मा इस बात से प्रफुल्लित है कि मंदिर वहीं बना है, जहाँ बनाने का संकल्प लिया था।

प्राण प्रतिष्ठा के बाद श्रमजीवियों का सम्मान, PM मोदी ने राम मंदिर के निर्माण में लगे श्रमवीरों पर की पुष्पवर्षा: कुबेर टीला पर जटायु की प्रतिमा का भी अनावरण

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अयोध्या में राम मंदिर में प्राण प्रतिष्ठा समारोह में हिस्सा लिया, उसके बाद उन्होंने मंच से लोगों को संबोधित करते हुए कहा कि कालचक्र बदल रहा है, ये एक नए युग का उद्गम है। इसके बाद वो कुबेर टीला पहुँचे, जहाँ उन्होंने राम मंदिर के निर्माण के शुभ कार्य में लगे मजदूरों से मुलाकात की। पीएम मोदी ने श्रमजीवियों पर पुष्पवर्षा की। बता दें कि वाराणसी में काशी विश्वनाथ कॉरिडोर का उद्घाटन हो या फिर दिल्ली में ‘भारत मंडपम’ का उद्घाटन, वो हमेशा से इन मौकों पर श्रमजीवियों का सम्मान करते रहे हैं।

वीडियो में देखा जा सकता है कि पीएम मोदी कुर्सी पर बैठे मजदूरों पर फूल बरसा रहे हैं। उन्होंने टोकरी में से लेकर लाल रंग के फूल बरसा कर इन मजदूरों को सम्मान दिया। ये वही ‘श्रमवीर’ हैं, जिनकी महीनों की मेहनत के बाद राम मंदिर का गर्भगृह तैयार हुआ और आज उसमें प्राण प्रतिष्ठा का कार्यक्रम संभव हो पाया है। पीएम मोदी हमेशा से ‘श्रमेव जयते’ का नारा देते रहे हैं और ये मोदी सरकार की विकास योजनाओं में भी झलकता है। श्रम का सम्मान उनकी सरकार के मुख्य केन्द्रबिन्दुओं में से एक है।

ये सभी मजदूर अलग-अलग कंपनियों से जुड़े हुए हैं, जिन पर पीएम मोदी ने फूल बरसाया। कुबेर टीला पर उन्होंने पक्षीराज जटायु की मूर्ति का अनावरण भी किया। कुबेर टीला पर ही प्राचीन शिव मंदिर भी स्थित है, जिसका ‘श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट’ ने पुनर्निर्माण करवाया है। मान्यता है कि यहाँ स्वयं धन के देवता कुबेर ने आकर शिवलिंग की स्थापना की थी। उससे पहले पीएम मोदी ने कहा कि वो भी एक समय था, जब कुछ लोग कहते थे कि राम मंदिर बना तो आग लग जाएगी। उन्होंने रामलला के मंदिर के निर्माण को भारतीय समाज के शांति, धैर्य, आपसी सद्भाव और समन्वय का प्रतीक बताया।

पीएम मोदी ने कहा कि ये निर्माण आग को नहीं, ऊर्जा को जन्म दे रहा है। पीएम मोदी ने कहा, “ये मंदिर, मात्र एक देव मंदिर नहीं है। ये भारत की दृष्टि का, भारत के दर्शन का, भारत के दिग्दर्शन का मंदिर है। ये राम के रूप में राष्ट्र चेतना का मंदिर है। राम भारत की आस्था हैं, राम भारत का आधार हैं, राम भारत का विचार हैं, राम भारत का विधान हैं, राम भारत की चेतना हैं, राम भारत का चिंतन है, राम भारत की प्रतिष्ठा है। मैं आभार व्य​क्त करूँगा भारत की न्यायपालिका का जिसने न्याय की लाज रख ली। न्याय के पर्याय प्रभु श्रीराम का मंदिर भी न्याय बद्ध तरीके से बना।”

अयोध्या में खुद की ‘छाया’ का आलिंगन कर साध्वी ऋतम्भरा के नेत्र हुए गीले, राम जन्मभूमि मुक्ति की आवाज़ बनी थीं नारी शक्तियाँ

राम मंदिर केवल एक मंदिर नहीं है। ये एक विश्वास है, एक आस्था है। इसके साकार होने से जहाँ दुनिया भर के रामभक्त भावविह्वल है तो वहीं श्रीराम जन्मभूमि आंदोलन में अहम भूमिका निभाने वाली बीजेपी नेता उमा भारती और साध्वी ऋतंभरा के एहसास उनकी आँखों से छलक पड़े।

सोमवार (22 जनवरी 2024) को अयोध्या के राम मंदिर में ‘प्राण प्रतिष्ठा’ समारोह से कुछ घंटे पहले उमा भारती और साध्वी ऋतंभरा ने राम मंदिर परिसर के सामने पहुँचते ही भावुक हो गई। उनके इन भावुक पलों की तस्वीरें वायरल हो रही हैं। इन तस्वीरों में दोनों एक-दूसरे को गले लगाते नजर आ रही हैं। देख सकते हैं कि दोनों की आँखों से खुशी के आँसू छलक आए हैं।

इनकी तस्वीरें देखने के बाद लोग उस समय को भी याद कर रहे हैं जब साध्वी ऋतंभरा और उमा भारती ने राम मंदिर आंदोलन में हिंदुओं को जगाने का काम किया था। नारे दिए थे- “कहो गर्व से हम हिन्दू हैं, हिंदुस्तान हमारा है।”

वो बयान भी वायरल हैं जिसमें साध्वी ऋतंभरा बार-बार दोहराती है। हिंदुओं ने अयोध्या में भगवान राम के मंदिर के साथ, काशी और मथुरा की भी बात की थी।

बता दें कि 90 के दशक की शुरुआत में उमा भारती और साध्वी ऋतंभरा दोनों ने बीजेपी द्वारा शुरू किए गए राम मंदिर आंदोलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। राम मंदिर आंदोलन को भारत के घर-घर तक पहुँचाने में इन दोनों के भाषणों की भूमिका थी। अयोध्या आंदोलन के दौरान साध्वी ऋतंभरा के भाषणों के ऑडियो कैसेट पूरे देश में सुनाई देते थे। इसमें वे विरोधियों को ‘बाबर की आलौद’ कह ललकारती थीं।

जब आचार्य धर्मेंद्र रामकथा कुंज से कारसेवकों को प्रसाद यानी बाबरी की ईंटों को लेने को कहा था। तब वो उमा भारती ही थीं जिन्होंने कहा था कि जब तक काम पूरा न हो जाए तक इलाका न छोड़ा जाए। इसे समतल किया जाए। उमा भारती ने नारा दिया था, “राम नाम सत्य है, बाबरी ध्वस्त है।”

एक कारसेवक ने दोनों साध्वियों के राम मंदिर बनाने के उत्साह और संकल्प को लेकर एक याद शेयर की है। वो कहते हैं, “उस ढाँचे को ढहाने के वक्त हमारी उम्र 22 साल थी और आज भी हमारे वहाँ वो पाइप वो ईंट रखी गई है। वहाँ गुंबद तोड़ने के लिए छेनी हथौड़ी कुछ काम नहीं आई। वो इतना सड़ा हुआ था कि वो बाँस और बल्ली मारने से ही गिर गया। बस लोगों के जुनून ने वो तोड़ डाला था।”

वो कहते हैं कि साध्वी ऋतंभरा ने तब कहा था कि डायनामाइट से उड़ा दिया जाए तो तब उमा भारती ने तुरंत माइक संभाल लिया और कहा जो आनंद इस तरह से कार सेवा करने में है वो डायनामाइट से तोड़ने में कतई नहीं आएगा।

उन्होंने आगे बताया कि गुबंद तोड़ने के बाद एक-एक चूरा, एक-एक ईंट जो चौकोर थीं प्रसाद के रूप में वहाँ से सारे लोग अपने घर उठा ले गए। वहाँ कुछ भी बचा नहीं मैदान साफ हो गया। उन्होंने आगे कहा, “हमें अपार खुशी है कि मंदिर बनकर तैयार हो गया है। हमारा आंदोलन सफल हुआ। हमारे पूर्वजों का त्याग और बलिदान व्यर्थ नहीं गया। हमारे सामने हमारी आँखों के सामने जीते जी मंदिर बन गया।”

‘मन किया गले लगा लूँ, लेकिन चरण स्पर्श किया’: अयोध्या में बागेश्वर धाम वाले बाबा से मिलीं कंगना रनौत, कहा – कोई उम्र से नहीं, अपने कर्मों से होता है गुरु

बॉलीवुड अभिनेत्री कंगना रनौत प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम में शामिल होने के लिए अयोध्या पहुँचीं। यहाँ उन्होंने रामलला की प्राण प्रतिष्ठा के कार्यक्रम में हिस्सा लिया। जब भव्य राम मंदिर के ऊपर सेना के हेलिकॉप्टर ने पुष्पवर्षा की तो उन्होंने जय श्रीराम के नारे लगाए। उन्होंने इससे पहले बागेश्वर धाम के महंत पंडित धीरेन्द्र कृष्ण शास्त्री से मिलने के विषय में भी लिखा।

कंगना ने यहाँ मंदिर परिसर में जय श्रीराम के नारे लगाए और इसकी वीडियो एक्स (पहले ट्विटर) पर वीडियो साझा की। राम मंदिर में प्राण प्रतिष्ठा से पहले वह यहाँ बागेश्वर धाम सरकार पंडित धीरेन्द्र कृष्ण शास्त्री के साथ ही अन्य साधुओं से मिलीं। उन्होंने इसकी जानकारी भी सोशल मीडिया पर दी।

उन्होंने बागेश्वर धाम सरकार के बारे में इंस्टाग्राम पर लिखा, “पहली बार अपनी उम्र से छोटे गुरुजी से मिली, मुझसे लगभग 10 वर्ष छोटे हैं, मन किया कि छोटे भाई की तरह गले लगा लूँ, लेकिन फिर याद आया कि कोई उम्र से नहीं बल्कि अपने कर्मों से गुरु होता है। गुरुजी के चरण स्पर्श किए और आशीर्वाद लिया, जय बजरंग बली।”

इंस्टाग्राम पर कंगना रनौत की स्टोरी, बागेश्वर धाम के महंत पंडित धीरेन्द्र कृष्ण शास्त्री से मिलीं

कंगना रनौत ने अन्य साधु-संतों के साथ मिलने की तस्वीरें भी साझा कीं। वो प्राण प्रतिष्ठा से एक दिन पहले ही अयोध्या पहुँच गई थीं। वो अपनी बहन के साथ अयोध्या पहुँची हैं। यहाँ उन्होंने का (21 जनवरी, 2023) को अयोध्या के मंदिर में सफाई करने पहुँची थी।

कंगना अयोध्या में इससे पहले रामभद्राचार्य से भी मिलीं थी। रामभद्राचार्य से मिलने की तस्वीरों में दिखा था कि वह रामभद्राचार्य से आशीर्वाद ले रही हैं। उन्होंने इन तस्वीरों को साझा करते हुए ट्विटर पर लिखा, “आओ मेरे राम। आज परमपूजनीय श्री रामभद्राचार्य जी से भेंट हुई, उनका आशीर्वाद लिया। उनके द्वारा आयोजित शास्त्रवत् सामूहिक हनुमान जी यज्ञ में भाग लिया। अयोध्या धाम में श्री राम के स्वागत में सब राममयी हैं। कल अयोध्या के राजा लम्बे वनवास के बाद अपने घर आ रहे हैं । आओ मेरे राम, आओ मेरे राम।” उन्होंने इस दौरान हवन में भी भाग लिया।

कालचक्र बदल रहा है… प्राण प्रतिष्ठा के बाद बोले PM मोदी – भारत की आत्मा के कण-कण से जुड़े हुए हैं राम, संविधान की पहली प्रति में भी राम

अयोध्या में दिव्य और भव्य मंदिर में प्रभु श्रीराम के बाल स्वरूप रामलला की मूर्ति की प्राण प्रतिष्ठा हो चुकी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ, राज्यपाल आनंदीबेन पटेल और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत की उपस्थिति में यह अनुष्ठान पुरा हुआ है। इस मौके पर खुद को धन्य बताते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि राम मंदिर को भारतीय चेतना का मंदिर बताया। पीएम मोदी ने कहा, “हमारे राम आ गए। सदियों की प्रतीक्षा के बाद हमारे राम आ गए। सदियों के त्याग और तपस्या के बाद हमारे प्रभु राम आ गए हैं।” वहीं, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि आज आत्मा इस बात से प्रफुल्लित है कि मंदिर वहीं बना है, जहाँ बनाने का संकल्प लिया था।

पीएम मोदी ने इस शुभ घड़ी की देशवासियों को बधाई देते हुए कहा, “मैं अभी गर्भगृह में ईश्वरीय चेतना का साक्षी बनकर आपके सामने उपस्थित हुआ हूँ। आज के इस पल की चर्चा अब हमेशा होगी। ये राम जी की कृपा है कि हम सब साक्षात इस पल को जी रहे हैं, इसे घटित होते देख रहे हैं। यह मौका दिव्यता से परिपूर्ण है। प्रभु राम को भारत की आत्मा के कण-कण से जुड़े हुए हैं। राम तो भारतवासियों के मन-मन में विराजे हुए हैं। हम किसी के भी मन को छुएंगे, तो एकत्व की अनुभूति होगी। इससे उत्कृष्ट भारत को समायोजित करने का सूत्र और क्या हो सकता है?”

पीएम मोदी ने भगवान हनुमान को प्रणाम करते हुए कहा कि जहाँ भी राम का काम होता है, वहाँ पवनपुत्र हनुमान अवश्य उपस्थित होते हैं। उन्होंने कहा, “मैं अयोध्या पुरी, पावन सरयू माँ को प्रणाम करता हूँ। मैं माता सीता, भरत, लक्ष्मण, शत्रुघ्न को नमन करता हूँ। सब हमारे आसपास उपस्थित हैं। मैं सभी को कृतज्ञतापूर्वक नमन करता हूँ। मैं आज प्रभु श्री राम से क्षमायाचना भी करता हूँ। हमारे पुरुषार्थ, हमारे त्याग, हमारी तपस्या में कुछ तो कमी रह गई होगी कि हम इतनी सदियों तक ये कार्य कर नहीं पाए। आज वो कमी पूरी हुई है। मुझे विश्वास है कि प्रभु राम आज हमें अवश्य क्षमा करेंगे।”

पीएम मोदी ने कहा, “त्रेता में राम आगमन पर पूज्य संत तुलसीदास ने लिखा है- प्रभु का आगमन देखकर ही समस्य देशवासी हर्ष से भर गए। लंबे वियोग से जो आपत्ति आई थी, उसका अंत हो गया। उस काल खंड में तो वो वियोग केवल 14 वर्षों का था, तब भी इतना असह्य था। इस युग में तो अयोध्या और देशवासियों ने सैकड़ों वर्षों का वियोग सहा है। हमारी कई-कई पीढ़ियों ने वियोग सहा है। भारत के संविधान में उसकी पहली प्रति में भगवान राम विराजमान हैं। संविधान के अस्तित्व में आने के बाद भी दशकों तक प्रभु श्रीराम के अस्तित्व को लेकर कानूनी लड़ाई चली। मैं आभार व्यक्त करूँगा भारत की न्यायपालिका को, जिसने न्याय की लाज रख ली। न्याय के पर्याय प्रभु राम का मंदिर भी न्यायबद्ध तरीके से ही बना।”

पीएम मोदी ने कहा, “आज गाँव-गाँव में एक साथ कीर्तन संकीर्तन हो रहे। मंदिरों में उत्सव हो रहे। स्वच्छता अभियान चल रहे हैं। पूरा देश आज दीपावली मना रहा है। शाम को घर-घर में रामज्योति जलाने की तैयारी हो रही है। कल मैं भगवान राम के आशीर्वाद से रामसेतु के प्रारंभ बिंदु अरिचल मुनाई पर था। जिस घड़ी राम जी लंका पर चढ़ाई करने निकले थे, मैं उस अद्भुत पल को महसूस कर रहा था। वहाँ मैंने पुष्प वंदना की। वहाँ मेरे भीतर एक विश्वास जगा, जैसे उस समय कालचक्र बदला था, वैसे फिर बदलेगा। शुभ दिशा में बढ़ेगा।”

अपनी बात को जारी रखते हुए पीएम मोदी ने कहा, “अपने 11 दिनों के व्रत के दौरान मैंने उन जगहों पर जाने का प्रयास किया, जहाँ प्रभु के चरण पड़े थे। चाहे नासिक हो, केरल हो, आंध्र प्रदेश का लेपाक्षी मंदिर हो या रामेश्वर और धनुषकोड़ी। मेरा सौभाग्य है कि मुझे सागर से सरयू तक आने का सौभाग्य मिला। मुझे देश के कोने-कोने में अलग-अलग भाषाओं में रामायण सुनने का अवसर मिला है। विशेषकर पिछले 11 दिनों में रामायण को अलग-अलग भाषा में अलग-अलग राज्यों में सुनने का मौका मिला।”

पीएम मोदी ने कहा, “राम लोक की स्मृतियों में लोक से लेकर परंपरा में सर्वत्र समाए हुए हैं। हर युग में लोगों ने राम को जिया है। हर युग में लोगों ने अपने-अपने शब्दों में अपनी-अपनी तरह से राम को अभिव्यक्त किया है और ये रामरस जीवन प्रवाह की तरह निरंतर बहता रहता है। प्राचीन काल से भारत के हर कोने के लोग रामरस का आचमन करते रहे हैं। रामकथा असीम है और रामायण भी अनंत है। राम के आदर्श, मूल्य और शिक्षाएँ सब जगह एक समान हैं। आज इस ऐतिहासिक समय में देश उन व्यक्तियों को याद कर रहा है, जिसके समर्पण की वजह से आज हम ये दिन देख रहे हैं।”

प्रधानमंत्री ने कहा, “राम विवाद नहीं, राम समाधान हैं। राम सबके हैं। राम सिर्फ वर्तमान ही नहीं, राम अनंत काल तक हैं। आज जिस तरह राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा आयोजन से पूरा विश्व जुड़ा है, उसमें राम की सर्वव्यापकता का अनुभव हो रहा है। जैसा उत्सव भारत में है, वैसे ही दुनिया के अन्य देशों में है। राम का ये उत्सव वैश्विक उत्सव है। राम का होना वसुधैव कुटुंबकम है। ये साक्षात मानवीय मूल्यों और सर्वोच्च आदर्शों की प्राण प्रतिष्ठा है। सर्वे भवन्तु सुखिना। ये संकल्प हम सदियों से दोहराते रहे हैं। आज राम मंदिर में उसे साक्षात देखा जा सकता है।”

उन्होंने कहा, “ये मात्र राम मंदिर नहीं है, ये भारत की दृष्टि का, दर्शन का, दिग्दर्शन का मंदिर है। ये राष्ट्र चेतना का मंदिर है। राम भारत की चेतना है… आधार है… विचार है। राम भारत का विधान हैं। राम भारत की चेतना हैं, राम भारत का चिंतन है। प्रवाह है, प्रभाव है। राम नेती भी है, नीति भी है, नित्यता भी है, निरंतरता भी है। विश्व है, विश्वात्मा है। इसलिए जब राम की प्राण प्रतिष्ठा होती है, तो उसका प्रभाव वर्षों शताब्दियों तक नहीं होता, सहस्त्राब्दियों तक होता है। राम 10 हजार वर्षों के लिए राज्य पर प्रतिष्ठित हुए यानि हजारों वर्षों के लिए रामराज्य स्थापित हुआ।”

नरेंद्र मोदी ने कहा, “जब त्रेता में राम आए थे, तो हजारों वर्षों के लिए राम राज्य की स्थापना हुई थी। इसलिए देशवासियों, आज अयोध्या भूमि प्रत्येक भारतीय से कुछ सवाल कर रही है। श्रीराम का भव्य मंदिर तो बन गया। अब आगे क्या? आज के इस अवसर पर, जो दैव, दैवीय आत्माएँ हमें आशीर्वाद देने के लिए उपस्थित हुए हैं, क्या हम उन्हें ऐसे ही विदा करेंगे? कदापि नहीं। आज मैं महसूस कर रहा हूँ कि कालचक्र बदल रहा है। हमारी पीढ़ी को कालचक्र के परिवर्तन के तौर पर चुना गया है। हजार वर्ष बाद भी हमें इसी रूप में याद किया जाएगा।”

उन्होंने कहा, “यही समय है, सही समय है। हमें आज से, इस पवित्र समय से अगले एक हजार साल के भारत की नींव रखनी है। मंदिर निर्माण से आगे बढ़कर हमें सभी देशवासी को इसी पल से समर्थ, सक्षम, भव्य, दिव्य भारत के निर्माण की सौगंध लेते हैं। राम के विचार मानस के साथ जनमानस में भी हो, यही राष्ट्रनिर्माण की सीढ़ी है। साथियों आज के युग की माँग है कि हमें अपने अंत:करण को विस्तार देना होगा। हमारी चेतना का विस्तार देव से देश तक, राम से राष्ट्र तक होनी चाहिए। हनुमान जी की भक्ति, सेवा, समर्पण ऐसे गुण हैं, जिन्हें हमें बाहर नहीं खोजना पड़ता।”

पीएम मोदी के अनुसार, “प्रत्येक भारतीय में भक्ति, सेवा और समर्पण के लिए भाव समर्थ, सक्षम, भव्य, दिव्य भारत का निर्माण करेंगे। दूर-सुदूर कुटिया में जीवन गुजारने वाली मेरी आदिवासी माँ शबरी का ध्यान आते ही अप्रतिम विश्वास जागृत होता है। माँ शबरी तो कब से कहती थी, राम आएँगे। प्रत्येक भारतीय में जन्मा यही विश्वास समर्थ, सक्षम, भव्य भारत का आधार बनेगा। यही तो है देव से देश तक, राम से राष्ट्र की चेतना का विस्तार। आज देश में निराशा के लिए रत्ती भर भी स्थान नहीं है। आज कोई अगर कोई खुद को छोटा समझता है, तो उसे गिलहरी के योगदान को याद करना चाहिए।”

प्रधानमंत्री ने कहा, “गिलहरी का स्मरण ही हमें सिखाएगा कि छोटी-बड़ी ताकत का अपना योगदान होता है। यही भावना समर्थ, सक्षम, भव्य, दिव्य भारत का आधार बनेगी। यही तो है देव से देश तक, राम से राष्ट्र की चेतना का विस्तार। लंकापति रावण प्रकांड विद्वान, शक्तिशाली थे। लेकिन जटायू जी महाबली रावण से भिड़ गए। उन्हें भी पता था कि वो रावण को परास्त नहीं कर पाएँगे, लेकिन उन्होंने रावण को चुनौती दी। कर्तव्य की यही पराकाष्ठा समर्थ, सक्षम, भव्य भारत का आधार बनेगा। यही तो है देव से देश तक, राम से राष्ट्र की चेतना का विस्तार। हम संकल्प लें कि हम अपने जीवन का पल-पल, शरीर का कण-कण राम से राष्ट्र की चेतना में जोड़ देंगे।”

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत ने कहा, “आज 500 वर्षों बाद रामलला यहाँ लौटे हैं। जिनके प्रयासों से हम आज का यह स्वर्ण दिन देख रहे हैं, उन्हें हम कोटि-कोटि नमन करते हैं। इस युग में रामलला के यहाँ वापस आने का इतिहास जो कोई भी श्रवण करेगा उसके सारे दुख-दर्द मिट जाएँगे, इतना इस इतिहास में सामर्थ्य है।”

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा, “श्रीराम जन्मभूमि संभवत: विश्व में पहला ऐसा अनूठा प्रकरण होगा, जिसमें किसी राष्ट्र के बहुसंख्यक समाज ने अपने ही राष्ट्र में अपने आराध्य की जन्मस्थली पर मंदिर निर्माण के लिए इतने वर्षों और इतने स्तरों पर लड़ाई लड़ी हो… आज आत्मा प्रफुल्लित है इस बात से कि मंदिर वहीं बना है, जहाँ बनाने का संकल्प लिया था।”

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा, “प्रभु रामलला के भव्य, दिव्य और नव्य धाम में विराजने की आप सभी को कोटि-कोटि बधाई… मन भावुक है… निश्चित रूप से आप सब भी ऐसा महसूस कर रहे होंगे… आज इस ऐतिहासिक अवसर पर भारत का हर नगर, हर ग्राम अयोध्या धाम है… हर मन में राम नाम है। हर आँख हर्ष और संतोष के आँसू से भीगी है। हर जुबान राम नाम जप रही है। रोम-रोम में राम रमे हैं…ऐसा लगता है कि हम त्रेतायुग में आ गए हैं…”

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा, “अब अयोध्या की सड़कें गोलियों की आवाज से नहीं गूँजेंगी। कोई कर्फ्यू नहीं होगा। अब यहाँ दीपोत्सव और रामोत्सव होगा। स्थापना के चलते सड़कों पर श्रीराम नाम संकीर्तन गूँजेगा, यहाँ रामलला के रामराज्य का उद्घोष हैं…”

अयोध्या में श्री राम जन्मभूमि मंदिर में ‘प्राण प्रतिष्ठा’ समारोह के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपना उपवास तोड़ा।

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने श्री राम जन्मभूमि मंदिर में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अयोध्या के पूर्ण राम मंदिर की चाँदी की प्रतिकृति भेंट की।

राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा समारोह में आज कई बॉलीवुड हस्तियां शामिल हुईं। निर्देशक रोहित शेट्टी और राजकुमार हिरानी, अभिनेत्री माधुरी दीक्षित नेने, आलिया भट्ट-रणबीर कपूर, कैटरीना कैफ-विक्की कौशल और आयुष्मान खुराना ने कार्यक्रम स्थल पर एक तस्वीर के लिए पोज दिया।

बता दें कि रामलला की प्राण प्रतिष्ठा का कार्यक्रम दोपहर में भव्य तरीके से संपन्न हो गया। इसी के साथ सनातनियों की सदियों की तपस्या भी पूर्ण हो गई, जिसके लिए वो 500 वर्षों तक त्याग और बलिदान करते रहे। मंत्रोच्चार एवं वैदिक कर्मकांड के साथ रामलला को प्राण प्रतिष्ठित किया गया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने प्राण प्रतिष्ठा समारोह के दौरान मुख्य यजमान की भूमिका निभाई। वो चाँदी का मुकुट लेकर गर्भगृह में पहुँचे थे।