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इलाके में रहते हैं ‘अन्य समुदाय’ के लोग – राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा समारोह का टेलीकास्ट रोकने के लिए नहीं चलेगा ये बहाना: सुप्रीम कोर्ट ने तमिलनाडु सरकार को लताड़ा

मुख्यमंत्री एमके स्टालिन की नेतृत्व वाली तमिलनाडु की DMK सरकार ने 22 जनवरी को अयोध्या में हो रहे राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रमों के लाइव टेलीकास्ट पर प्रतिबंध लगा दिया है। अब स्टालिन सरकार के इस कदम के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में 22 जनवरी 2024 को एक जनहित याचिका दायर की गई है। इस शीर्ष न्यायालय ने राज्य सरकार को नोटिस भेजा है।

तमिलनाडु भाजपा के एक नेता द्वारा दायर याचिका में कहा गया है कि तमिलनाडु सरकार ने इस अवसर पर सभी प्रकार की पूजा-अर्चना, भजन और अन्नदान पर प्रतिबंध लगा दिया है। राज्य सरकार पुलिस-प्रशासन एवं अधिकारियों के माध्यम से अपनी शक्ति का मनमाना प्रयोग कर रही है। याचिका में कहा गया है कि सरकार का यह कदम संविधान के तहत प्रदत्त मौलिक अधिकारों का उल्लंघन है।

सुप्रीम कोर्ट न्यायाधीश जस्टिस संजीव खन्ना ने तमिलनाडु सरकार के उस मौखिक आदेश के खिलाफ दायर याचिका पर राज्य सरकार एवं अन्य को नोटिस जारी किया है। इस पर तमिलनाडु ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि इस तरह का कोई प्रतिबंध नहीं लगाया गया है। राज्य सरकार ने अपने जवाब में कहा कि याचिका सिर्फ राजनीति से प्रेरित है।

सुप्रीम कोर्ट ने तमिलनाडु सरकार से कहा कि अनुमति को केवल इस आधार पर खारिज नहीं किया जा सकता कि इलाके में अन्य समुदाय रह रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट ने तमिलनाडु सरकार से कहा कि यह एक समरूप समाज है और इसे केवल इस आधार पर न रोकें कि उस जगह पर अन्य समुदाय के लोग भी रहते हैं।

तमिलनाडु सरकार की ओर से कोर्ट में पेश अमित आनंद तिवारी ने कहा कि सरकार ने ऐसा कोई मौखिक आदेश नहीं है और राम मंदिर प्रतिष्ठा के अवसर पर पूजा आदि के सीधे प्रसारण पर कोई प्रतिबंध नहीं है। तिवारी ने कहा, “हम मानते हैं और विश्वास करते हैं कि अधिकारी कानून के अनुसार कार्य करेंगे, न कि मौखिक निर्देशों के अनुसार।”

बताते चलें कि 21 जनवरी 2024 को X पर सीतारमण ने कहा, “तमिलनाडु सरकार ने 22 जनवरी को अयोध्या राम मंदिर के कार्यक्रमों के लाइव प्रसारण को देखने पर प्रतिबंध लगा दिया है। TN में श्री राम के 200 से अधिक मंदिर हैं। HR&CE प्रबंधित मंदिरों में श्री राम के नाम पर किसी भी पूजा/भजन/प्रसादम/अन्नदानम की अनुमति नहीं है। पुलिस निजी तौर पर संचालित मंदिरों को भी कार्यक्रम आयोजित करने से रोक रही है। वे आयोजकों को धमकी दे रहे हैं कि वे पंडाल तोड़ देंगे। इस हिंदू विरोधी, घृणित कार्रवाई की कड़ी निंदा करती हूँ।”

सीतारमण ने अपने एक्स थ्रेड में आगे लिखा कि लोगों को भजन आयोजित करने, गरीबों को खाना खिलाने, मिठाइयाँ बाँटने और जश्न मनाने से रोका और धमकाया जा रहा है, जबकि वे केवल अयोध्या में राम मंदिर अभिषेक समारोह में पीएम नरेंद्र मोदी को देखना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि तमिलनाडु सरकार अनौपचारिक लाइव टेलीकास्ट प्रतिबंध को उचित ठहराने के लिए कानून व्यवस्था के बिगड़ने का दावा कर रही है, जो कि झूठी और फर्जी कहानी है!

उन्होंने कहा, “अयोध्या फैसले के दिन कानून-व्यवस्था की कोई समस्या नहीं थी। देश-भर यह समस्या उस दिन भी नहीं थी जब माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी ने राम मंदिर का शिलान्यास किया था। तमिलनाडु में प्रभु श्रीराम के प्राण प्रतिष्ठा उत्सव मनाने के लिए लोगों में उमड़े स्वैच्छिक भागीदारी और भावना ने हिंदू विरोधी DMK सरकार को बेहद परेशान कर दिया है!”

‘निजी जगहों को राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा के आयोजन के लाइव टेलीकास्ट के लिए पुलिस की अनुमति की ज़रूरत नहीं’: तमिलनाडु में राम का नाम लेने के लिए जाना पड़ा हाईकोर्ट

मद्रास उच्च न्यायालय ने कहा है निजी जगहों पर कि राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा समारोह के लाइव प्रसारण के लिए सरकार या पुलिस की अनुमति लेने की ज़रूरत नहीं है। तमिलनाडु में DMK की सरकार है, जिसके मंत्री उदयनिधि स्टालिन सनातन धर्म को खत्म करने की बात कर चुके हैं। भाजपा ने आरोप लगाया था कि वहाँ के मंदिरों को राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा वाले दिन विशेष पूजा का आयोजन करने या फिर विशेष प्रसाद वितरित करने से रोका जा रहा है। मंदिरों को धमकाया जा रहा है।

मद्रास उच्च न्यायालय ने कहा है कि राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा समारोह के लाइव टेलीकास्ट या फिर भजन के आयोजन के लिए सरकार या पुलिस की अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है। सोशल मीडिया पर लोगों ने इसे धर्म की विजय बताते हुए पेश किया। तमिलनाडु का HRCE विभाग वहाँ के मंदिरों की निगरानी करता है। प्राइवेट मंदिरों और मैरिज हॉल्स में भी ऐसे आयोजन हो सकते हैं। इसके लिए सिर्फ मंदिर के एग्जीक्यूटिव अधिकारी को सूचित करना होगा।

इसके बाद एग्जीक्यूटिव अधिकारी इसकी अनुमति देगा, साथ ही अगर कुछ पाबंदियाँ हैं तो इस बारे में भी बता दिया जाएगा। ‘विवेकानंद हिन्दू मूवमेंट’ ने इस संबंध में याचिका दायर की थी, जिस पर जजों ने अपने चैंबर में ही त्वरित सुनवाई की। पट्टाभिराम स्थित KKR कल्याण मंडपन में भी राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा समारोह का लाइव टेलीकास्ट चल रहा है, पहले इसी संबंध में अनुमति वाला संशय था। पुलिस ने इसकी अनुमति नहीं दी थी, जिसके बाद याचिकाकर्ताओं को हाईकोर्ट जाना पड़ा।

तमिलनाडु सरकार ने इस दौरान मद्रास उच्च न्यायालय में अपना रुख स्पष्ट करते हुए कहा कि अगर भीड़भाड़ ज़्यादा हो तो इसके लिए पुलिस को पूर्व में सूचित करना आवश्यक है। हालाँकि, सरकार के नियंत्रण वाले मंदिरों में इसके लिए अधिकारी को सूचित कर अनुमति लेनी होगी, जिसकी कुछ शर्तें भी होंगी। हाईकोर्ट ने कहा कि राम नाम के पाठ का आयोजन प्रतिबंधित नहीं है। साथ ही कहा कि ईश्वर भक्ति से शांति और एकता का सन्देश मिलना चाहिए, समाजिक सौहार्द बिगाड़े बिना।

33000 दीयों से जगमगाया ‘सियावर रामचंद्र की जय’, बना गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड: 11 लाख दीपों से अयोध्या भी रौशन

अयोध्या में आज (22 जनवरी, 2024) को रामलला की प्राण प्रतिष्ठा होनी है। इसके चलते पूरे देश में उत्सव का माहौल है। राम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा से पहले महाराष्ट्र के चंद्रपुर में एक अनोखा रिकॉर्ड बनाया गया। यहाँ रिकॉर्ड संख्या में दीये जलाए गए। इसका विहंगम वीडियो भी सामने आया है।

शनिवार (21 जनवरी, 2024) को महाराष्ट्र के चंद्रपुर के चंदा क्लब ग्राउंड में 33,258 दियों से ‘सियावर रामचंद्र की जय’ लिखा गया। इसके साथ ही यह एक गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड बन गया। यहाँ गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड की एक टीम मौजूद थी। इस कार्यक्रम को डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी सार्वजनिक वाचनालय द्वारा आयोजित किया गया था। कार्यक्रम में हजारों लोग शामिल हुए।

इस पूरे कार्यक्रम के दौरान महाराष्ट्र सरकार में मंत्री सुधीर मुनगंटीवार को गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड की तरफ से मिलिंद वर्लेकर और प्रसाद कुलकर्णी ने इस कार्यक्रम के सफल आयोजन के साथ ही रिकॉर्ड बनने का प्रमाण पत्र दिया

गौरतलब है कि आज अयोध्या में भी दीये जलाए जाएँगे। अयोध्या में जलाए जाने वाले 11 लाख दीयों में मुख्य मंदिर से लेकर हनुमानगढ़ी, सरयू के घाटों समेत प्रत्येक घर में जलाए जाएँगे। इसके लिए घरों में दियों का वितरण भी किया गया है। यह दीये शाम को जलाए जाएँगे।

अयोध्या में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी भी पहुँच चुके हैं। यहाँ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पहले से ही मौजूद है। इसके अलावा पूरे देश से बड़े नाम कल से ही अयोध्या पहुँचना चालू हो गए थे। राजनेताओं से लेकर अभिनेता, क्रिकेटर, कलाकार और हर क्षेत्र के दिग्गज यहाँ पहुँच चुके हैं।

अयोध्या में मंदिर के भीतर प्राण प्रतिष्ठा का कार्यक्रम दोपहर 12 बजकर 20 मिनट से लेकर 1 बजे तक होगा। इस दौरान 84 सेकेण्ड का एक शुभ मुहूर्त निकाला गया है। प्रधानमंत्री 1 बजे के बाद एक जनसभा को भी संबोधित करेंगे। इसके बाद वह कुबेर टीला के दर्शन के लिए जाएँगे।

मंत्रोच्चार से जागेंगे रामलला, 84 सेकेंड के शुभ मुहूर्त में होगी प्राण-प्रतिष्ठा: अयोध्या में सिक्योरिटी टाइट, पुष्प वर्षा के लिए हेलीकॉप्टर भी तैयार

500 साल बाद आज दोबारा अयोध्या में रामलला अपने भवन में विराजने जा रहे हैं। बस प्रतीक्षा है तो शुभ मुहूर्त की जो मात्र 84 सेकेंड ही रहने वाला है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस अवसर पर अयोध्या में 10 बजकर 20 मिनट पर पहुँच रहे हैं। इसके बाद आगे का कार्यक्रम आरंभ होगा। वहीं आरती के समय हेलीकॉप्टर से पुष्पवर्षा भी की जाएगी और हर अतिथि के हाथ में घंटी होगी

जानकारी के मुताबिक, प्राण-प्रतिष्ठा का शुभ मुहूर्त दोपहर 12:29:08 से 12:30:32 तक का है। ये 84 सेकेंड्स का समय आज पूरे दिन में सबसे खास है। इस समय मृगशिरा नक्षत्र और वाणमुक्‍त का है। इसका अर्थ है कि इस समय किए गए काम में कोई रुकावट नहीं आती है।

बताते चलें कि 22 जनवरी यानी आज पौष माह के शुक्‍ल पक्ष की द्वादशी यानी कुर्म द्वादशी तिथि है। इस दिन प्राण प्रतिष्‍ठा के लिए अभिजीत मुहूर्त, इंद्र योग, मृगशिरा नक्षत्र, मेष लग्न एवं वृश्चिक नवांश को चुना गया है। सभी शास्त्रीय परंपराओं का पालन करते हुए अभिजीत मुहूर्त में रामलला की प्राण-प्रतिष्ठा की जाएगी वो गर्भ गृह में विराजेंगे।

प्राण प्रतिष्‍ठा समारोह के अनुष्ठान के सभी कार्य गणेशवर शास्त्री द्रविड़ की निगरानी में 121 आचार्य कर रहे हैं। मुख्‍य आचार्य की भूमिका में काशी के विद्वान लक्ष्मीकांत दीक्षित हैं।प्राण प्रतिष्‍ठा के अवसर पर गर्भगृह में मुख्‍य यजमान पीएम मोदी सहित राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत, उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल और सीएम योगी आदित्यनाथ मौजूद रहेंगे।

इससे पहले रामलला को मंत्रोच्चार के साथ जगाया जाएगा और उसके बाद सुबह 10 बजे से मंगलध्वनियाँ का गान होगा। इसमें कई राज्यों के 50 से भी अधिक वाद्य यंत्रों से मंगल ध्वनियाँ गुँजायमान होगी। इसके बाद पीएम मोदी सहित अतिथियों के पहुँचने के बाद सुबह 11 बजे से दोपहर 12.55 तक गर्भगृह में पूजा, वेद-मंत्रों का मंगलाचरण होगा। मुख्य यजमान पीएम मोदी ने इसके लिए 11 दिनों का व्रत रखा है।

इसके बाद पीएम मोदी अतिथियों को संबोधित करेंगे और मंदिर बनाने वाले श्रमजीवियों से मिलेंगे। दोपहर 2.15 बजे कुबेर टीला में भगवान शिव का पूजन करेंगे। दोपहर 2.30 बजे मंदिर में वसोधारा पूजन के साथ पारायण होगा। शाम को पूर्णाहुति यज्ञ के साथ देवता विसर्जित होंगे।

शाम 7 बजे से अतिथिराम लला का दर्शन करेंगे और शाम को दीप प्रज्ज्वलित कर देशभर में फिर दिवाली मनाई जाएगी।

अयोध्या में सुरक्षा की व्यवस्था

इन सबके बीच अयोध्या में सुरक्षा के भी पुख्ता इंतजाम किए गए हैं। अयोध्या में हर जगह मशीन गन और AK-47 लिए कमांडो तैनात हैं। हेलिकॉप्टर से निगरानी हो रही है। अयोध्या की सीमा में प्राण प्रतिष्ठा का न्योता और पास रहने वाले लोगों को ही प्रवेश दिया जा रहा है।

सुरक्षा के मद्देनजर अयोध्या को 9 जोन में बाँटा गया है। राम मंदिर रेड जोन में है। परिसर की सुरक्षा 6 लेयर की है। यहाँ सुरक्षा के लिए स्पेशल STF टीम, एटीएस कमांडो क्रैश रेटेड बोलार्ड, अंडर व्हीकल स्कैनर, टायर किलर, बूम बैरियर के लिए तैनात हैं।

हनुमान गढ़ी येलो जोन में हैं। इन दोनों जगहों में 34 सब इंस्पेक्टर, 71 हेड कॉन्स्टेबल, 312 कॉन्स्टेबल को तैनात हैं। हेलिकॉप्टर से राम मंदिर की निगरानी हो रही है तो मंदिर परिसर के ऊपर से ड्रोन, हवाई जहाज या चॉपर के गुजरने पर मनाही है।

महर्षि वाल्मीकि इंटरनेशनल एयरपोर्ट की सुरक्षा NSG और CISF के हाथ हैं। PM मोदी और अन्य VVIP मेहमानों के जाने वाले रास्तों के दौरान पड़ने वाले घरों वेरिफिकेशन किया गया है। यहाँ करीब सभी घरों की छतों पर सिक्योरिटी फोर्स के जवान तैनात हैं।

अयोध्या में इस दौरान बस और ट्रेन जैसे सार्वजनिक वाहनों की एंट्री बंद हैं। अभी यहाँ 25 हजार से अधिक जवान, एयरपोर्ट से राम मंदिर की सभी ऊँची इमारतों पर स्नाइपर्स तैनात हैं तो 31 IPS अधिकारी ड्यूटी पर हैं। 10 हजार CCTV और AI से सुरक्षा पर नजर है तो एंटी ड्रोन सिस्टम लगाए गए हैं।

खुफिया विभाग भी अलर्ट है सादी वर्दी में 1 हजार से अधिक जवान यहाँ हैं। सोमवार को नगरी का कण-कण जैसे राम नाम जपता लग रहा है। फूलों से सजी अयोध्या में 21 जनवरी रात से ही लोग भजन गाते राम का नाम लेते झूम रहे हैं।

शोभा यात्रा पर पथराव, हिंदुओं की गाड़ियों पर लाठी-डंडे से हमला: प्राण-प्रतिष्ठा से पूर्व गुजरात-मुंबई में हिंसा की खबर; राम मंदिर को उड़ाने की धमकी भी

राम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा से पहले कुछ जगहों से हिंसा की खबरें हैं। कहीं बताया जा रहा है कि मुस्लिम भीड़ ने छतों से पत्थरबाजी की है तो कहीं पर चलती सड़क पर हिंदुओं को निशाना बनाया है। एक जगह तो तिलमिलाहट में इस्लामी कट्टरपंथी ने अयोध्या के राम मंदिर को ही उड़ा डालने की धमकी दी है।

गुजरात में पत्थरबाजी

पहली खबर गुजरात के मेहसाना की है। वहाँ राम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा से पहले भगवान राम की निकाली गई शोभा यात्रा पर छतों से पत्थरबाजी हुई। हिंदुओं पर ये हमले इतनी तेजी से हो रहे थे कि पुलिस को स्थिति काबू करने के लिए आँसू गैस के छोड़ने पड़े। इलाके में पुलिस बल तैनात है और पत्थरबाजों पर कार्रवाई करते हुए 15 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। इनमें महिलाएँ भी शामिल हैं।

पुलिस कार्रवाई की जानकारी देते हुए रेंज आईजी ने कहा, ”आज इलाके में जुलूस के दौरान पथराव हुआ। पुलिस ने तत्काल कार्रवाई करते हुए स्थिति को नियंत्रण में कर लिया, जिससे कोई बड़ी घटना नहीं घटी। फिलहाल इलाके में शांति है और पुलिस गश्त कर रही है। फिलहाल 15 लोगों को राउंडअप किया गया है। जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।”

मुंबई में सनातन यात्रा पर भीड़ का हमला

इसी तरह मुंबई के मीरा रोड से भी खबर आ रही हैं कि सनातन यात्रा पर भीड़ ने हमला किया है। ये भीड़ इस्लामी कट्टरपंथियों की थी। कुछ वीडियोज सोशल मीडिया पर तेजी से शेयर हो रही हैं। वीडियो में दिख रहा है कि चलती सड़क पर भीड़ उन गाड़ियों को निशाना बना रही है जिनके ऊपर भगवान राम और हनुमान जी की तस्वीर के साथ भगवा पताके लगे हैं।

अराजक तत्वों को गाड़ी के शीशे तोड़ते, हिंदुओं पर हमला करते, गंदी-गंदी गाली बकते वीडियोज में साफ देखा जा सकता है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, हिंसा का शिकार लोगों का कहना है कि वे शांति पूर्वक धर्म ध्वजा लेकर यात्रा निकाल रहे थे लेकिन तभी उनके सामने ये भीड़ आई जिसने उनके ऊपर अचानक हमला कर दिया। आरोप ये भी हैं कि हमले के दौरान भीड़ अल्लाह-हू-अकबर और नारा-ए-तकबीर के नारे लगा रही थी। ये वीडियोज विचलित करने वाली हैं। प्राण-प्रतिष्ठा से पहले हिंदुओं को निशाना बनाया गया है। फोटो में महिला के माथे से खून निकलता भी दिखा।

टाइम्स नाऊ में प्रकाशित खबर में अल्लाह-हू-अकबर और नारा-ए-तकबीर नारों का जिक्र

टाइम्स नाऊ की रिपोर्ट के अनुसार, इस मामले में नया नगर थाने में प्राथमिकी दर्ज हुई है। केस को आईपीसी की धारा 307 और 153 ए के साथ अज्ञातों के विरुद्ध दर्ज किया गया है। पुलिस आरोपितों को ढूँढने का प्रयास कर रही है। सीसीटीवी खंगाले जा रहे हैं। पुलिस का कहना है कि स्थिति कंट्रोल में है इसलिए अफवाहों पर ध्यान न दें और शांति बनाए रखें। कुछ रिपोर्ट्स में इस मामले को सामान्य हाथापाई का विवाद भी कहा जा रहा है।

बिहार में ‘दाऊद इब्राहिम का आतंकी’ गिरफ्तार

मुंबई गुजरात के अलावा बिहार में भी एक कट्टरपंथी युवक मुं इंतखाब के खिलाफ कार्रवाई हुई है। इसने कॉल करके राम मंदिर को उड़ाने की धमकी दी थी। बिहार पुलिस ने कार्रवाई करते हुए इसे अररिया जिले के पलासी थाना क्षेत्र से गिरफ्तार किया है। आरोपित बलुआ कलियागंज का रहने वाला है। इसने 112 नंबर पर कॉल करके धमकी दी थी। आरोपित खुद को छोटा शकील बता रहा था। साथ ही यह भी कि वह दाऊद इब्राहिम का आतंकी है। पुलिस ने मामले की संवेदनशीलता देखते हुए आरोपित को गिरफ्तार कर लिया।

‘सौभाग्य से मिला राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा देखने का मौका’: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने PM मोदी को लिखी चिट्ठी, कहा – राम-कथा के आदर्शों से राष्ट्र-निर्माताओं को मिली प्रेरणा

अयोध्या में रामलला के मंदिर में प्राण प्रतिष्ठा समारोह से एक शाम पहले राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखा है। उन्होंने पत्र में लिखा है कि ये सौभाग्य ही है कि उन्हें राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा देखने का मौका मिल रहा है। राष्ट्रपति ने अपनी चिट्ठी में लिखा है कि ‘राम कथा के आदर्शों से राष्ट्र निर्माताओं को प्रेरणा मिली है।’ अपने पत्र में उन्होंने पीएम मोदी को अयोध्या में होने वाले राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठान के लिए धन्यवाद कहा है।

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने अपने पत्र में लिखा है, “आदरणीय श्री नरेंद्र भाई मोदी जी, अयोध्या धाम में नए मंदिर में प्रभु श्री राम की जन्म-स्थली पर स्थापित मूर्ति की प्राण प्रतिष्ठा के लिए आप विधिवत तपश्चर्या कर रहे हैं। इस अवसर पर, मेरा ध्यान इस महत्वपूर्ण तथ्य पर है कि उस पावन परिसर में, आपके द्वारा सम्पन्न की जाने वाली अर्चना से हमारी अद्वितीय सभ्यतागत यात्रा का एक ऐतिहासिक चरण पूरा होगा। आपके द्वारा किया गया 11 दिवसीय कठिन अनुष्ठान, पवित्र धार्मिक पद्धतियों का अनुसरण मात्र नहीं है बल्कि त्याग की भावना से प्रेरित सर्वोच्च आध्यात्मिक कृत्य है और प्रभु श्री राम के प्रति सम्पूर्ण समर्पण का आदर्श है।

सौभाग्य से मिला राम मंदिर प्रतिष्ठान देखने का मौका

राष्ट्रपति ने आगे लिखा, “आपकी अयोध्या धाम की यात्रा के इस पावन अवसर पर मैं आपको अपनी हार्दिक शुभकामनाएँ प्रेषित करती हूँ। अयोध्या धाम में प्रभु श्री राम के भव्य मंदिर के उद्घाटन से जुड़े देशव्यापी उत्सवों के वातावरण में, भारत की चिरंतन आत्मा की उन्मुक्त अभिव्यक्ति दिखाई देती है। यह हम सभी का सौभाग्य है कि हम सब अपने राष्ट्र के पुनरुत्थान के एक नए काल-चक्र के शुभारम्भ के साक्षी बन रहे हैं।”

राम-कथा के आदर्शों से राष्ट्र-निर्माताओं को मिली प्रेरणा

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने पत्र में आगे लिखा- प्रभु श्री राम द्वारा साहस, करुणा और अटूट कर्तव्यनिष्ठा जैसे जिन सार्वभौमिक मूल्यों की प्रतिष्ठा की गई थी उन्हें इस भव्य मंदिर के माध्यम से जन-जन तक पहुँचाया जा सकेगा। प्रभु श्री राम हमारी सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत के सर्वोत्तम आयामों के प्रतीक हैं। वे बुराई के विरुद्ध निरंतर युद्धरत अच्छाई का आदर्श प्रस्तुत करते हैं। हमारे राष्ट्रीय इतिहास के अनेक अध्याय, प्रभु श्री राम के जीवन चरित और सिद्धांतों से प्रभावित रहे हैं और राम-कथा के आदर्शों से राष्ट्र-निर्माताओं को प्रेरणा मिली है।

पत्र में आगे लिखा है, “गाँधीजी ने बचपन से ही रामनाम का आश्रय लिया और उनकी अंतिम सांस तक रामनाम उनकी जिह्वा पर रहा। गाँधी जी ने कहा था ‘यद्यपि मेरी बुद्धि और हृदय ने, बहुत पहले ही, ईश्वर के सर्वोच्च गुण और नाम को, सत्य के रूप में अनुभव कर लिया था, मैं सत्य को राम के नाम से ही पहचानता हूँ। मेरी अग्नि परीक्षा के सबसे कठिन दौर में राम का नाम ही मेरा रक्षक रहा है और अब भी वह नाम ही मेरी रक्षा कर रहा है। लोगों की सामाजिक पृष्ठभूमि से प्रभावित हुए बिना, भेदभाव से मुक्त रहकर, हर किसी के साथ, प्रेम और सम्मान का व्यवहार करने के प्रभु श्री राम के आदर्शों का हमारे पथ- प्रदर्शक विचारकों की बौद्धिक चेतना पर भी गहरा प्रभाव पड़ा है।”

मानवता के सर्वोत्कृष्ट पक्षों के प्रतीक हैं भगवान राम

न्याय और जन-कल्याण पर केन्द्रित प्रभु श्री राम की रीति का प्रभाव, हमारे देश के शासन संबंधी वर्तमान दृष्टिकोण पर भी दिखाई देता है। इसका उदाहरण, हाल ही में, आपके द्वारा, अति पिछड़े जनजातीय समुदायों के कल्याण हेतु ‘पीएम- जन मन’ पहल के तहत, अनेक लाभकारी सहायताओं की पहली किस्त जारी करने में स्पष्ट दिखाई दिया। आपके द्वारा अपने संबोधन में माता शबरी का उल्लेख करने से एक हृदयस्पर्शी अनुभूति हुई। निश्चय ही, प्रभु श्री राम के मंदिर के साथ-साथ, जन-कल्याण कार्यों को देखकर माता शबरी को दोहरा संतोष प्राप्त होगा। प्रभु श्री राम, हमारी भारत-भूमि के सर्वोत्तम आयामों का प्रतीक हैं। वस्तुत: वे पूरी मानवता के सर्वोत्कृष्ट पक्षों के प्रतीक हैं। मेरी प्रार्थना है कि प्रभु श्री राम विश्व-समुदाय को सही मार्ग पर ले जाएँ; वे सभी के जीवन में सुख और शांति का संचार करें। सियावर रामचन्द्र की जय !

गौरतलब है कि 22 जनवरी 2024 को अयोध्या में भगवान राम अपने जन्मस्थान पर विराजमान हो जाएँगे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी उस समय गर्भगृह में मौजूद रहेंगे। सारी दुनिया की नजरें अयोध्या पर टिकी हैं।

2.5 लाख करोड़ तक पहुँचेगा टैक्स कलेक्शन, सिर्फ पर्यटन से ₹25000 करोड़ की एक्स्ट्रा कमाई: राम मंदिर भर देगा यूपी की झोली, SBI की रिपोर्ट आ गई

उत्तर प्रदेश की अयोध्या में नगरी में भगवान राम अपने जन्मस्थान पर विराजमान हो रहे हैं। ये शुभ घड़ी न सिर्फ भक्ति और अध्यात्म के लिहाज से बेहद अच्छी है, बल्कि ये उत्तर प्रदेश के विकास को नई ऊँचाईयों पर पहुँचाने की भी एक नई शुरूआत होगी। जी हाँ, स्टेट बैंक ऑफ इंडिया की एक रिपोर्ट जारी हुई है, जिसमें बताया गया है कि आने वाले समय में अयोध्या का भव्य राम मंदिर उत्तर प्रदेश के सरकार के लिए बेहद फायदेमंद रहेगा। अयोध्या से जुड़े पूरे धार्मिक-आर्थिक तंत्र की वजह से यूपी सरकार को हर साल कम से कम 20 से 25 हजार करोड़ रुपए का फायदा होगा।

SBI की एक रिपोर्ट में यह दावा किया गया है कि अयोध्या में राम मंदिर के पूरे होने और यूपी सरकार द्वारा पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए किए गए कामों की वजह से वित्त वर्ष 2025 में 20 से 25 हजार करोड़ रुपए की ज्यादा कमाई हो सकती है। साल 2022 में उत्तर प्रदेश में आए घरेलू पर्यटकों की ओर से जो खर्च किया गया था, वह 2.2 लाख करोड़ रुपए था। वहीं, विदेशी पर्यटकों की ओर से 10 हजार करोड़ रुपए खर्च किए गए थे। इस बार देखें तो यूपी सरकार के बजट में टैक्स कलेक्शन 2.5 लाख करोड़ रुपए तक पहुँच सकता है।

इस साल टूट जाएँगे सारे रिकॉर्ड

बता दें कि यूपी ने पर्यटन के क्षेत्र में साल 2023 में सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए थे। जहाँ साल 2021 की तुलना में साल 2022 में 200 प्रतिशत ज्यादा पर्यटक आए थे, जिनकी संख्या 32 करोड़ से ज्यादा थी, तो विदेशी पर्यटकों की संख्या भी 2.21 करोड़ को पार गई। चूँकि अब अयोध्या में रामलला की प्राण प्रतिष्ठा के बाद आम भक्तों का आना शुरू हो जाएगा, तो ये आँकड़ा बेहद तेजी से बढ़ेगा।

एसबीआई की रिपोर्ट को माने तो साल 2028 तक भारत की अर्थव्यवस्था 5 ट्रिलियन की हो जाएगी। अकेले यूपी की जीडीपी 50 बिलियन डॉलर को पार कर सकेगी। ये पूरे देश के किसी भी राज्य की तुलना दूसरे नंबर की रहेगी। वहीं, उत्तर प्रदेश राज्य को केंद्र की तीर्थयात्रा कायाकल्प और आध्यात्मिक विरासत संवर्धन अभियान (PRASHAD) योजना से बड़ा लाभ मिलता हुआ दिखाई दे रहा है। इसमें कहा गया है कि अयोध्या के राम मंदिर और राज्य सरकार की अन्य पर्यटन योजनाओं के चलते यूपी सरकार को मोटी कमाई होगी।

अयोध्या पहले से ही आस्था का बड़ा केंद्र है और यहां बड़ी संख्या में पर्यटक पहुँचते हैं। अब जबकि, राम मंदिर का उद्घाटन होने जा रहा है, तो इसके बाद पर्यटकों की संख्या में और बढ़ोतरी होने की उम्मीद जताई जा रही है।

‘जब अयोध्या में हो रही होगी रामलला की प्राण प्रतिष्ठा, केजरीवाल सरकार काटेगी दिल्ली की बिजली’: BJP नेता ने नोटिस का स्क्रीनशॉट शेयर कर किया दावा

दावा किया जा रहा है कि अरविंद केजरीवाल की सरकार दिल्ली में उस समय बिजली काट रही है, जब अयोध्या में रामलला की प्राण प्रतिष्ठा हो रही होगी। दिल्ली बीजेपी नेता कपिल मिश्रा ने दिल्ली में बिजली कंपनी द्वारा भेजे गए एक मैसेज का स्क्रीनशॉट शेयर करके ये दावा किया है। इस मैसेज में ये जानकारी दी गई है कि प्लान्ड शटडाउन के तहत 22 जनवरी, 2024 को सुबह 10.01 बजे से दोपहर 13.01 बजे तक बिजली की सप्लाई नहीं रहेगी। ये मैसेज बीएसईएसवाईपीएल की तरफ से भेजा गया है।

बीजेपी नेता कपिल मिश्रा ने ये स्क्रीनशॉट शेयर करके लिखा है, “दिल्ली में बिजली कंपनियों के द्वारा कल (22 जनवरी, 2024 को) सुबह 10 से 1 बजे तक बिजली सप्लाई नहीं होने के मेसेज भेजे जा रहे हैं। राम मंदिर के उत्सव में भागीदारी से दिल्ली की जनता को रोकने की ऐसी साज़िश शर्मनाक है। बिजली कंपनियों को कल (22 जनवरी, 2024 को) सुचारू बिजली सप्लाई सुनिश्चित करनी ही पड़ेगी। केजरीवाल गैंग की किसी भी नीच हरकत को स्वीकार नहीं किया जाएगा।”

अमात्य राक्षस नाम के एक्स यूजर ने लिखा, “कट्टर रोहिंग्या हृदय सम्राट आदरणीय लोकनायक ने दिल्ली में कल सुबह 10 बजे से दोपहर 1 बजे तक बिजली सप्लाई बंद करने का आदेश दिया है, यह कोई संयोग नहीं अपितु प्रयोग है, ये नहीं चाहते कि दिल्ली वाले भगवान श्री राम की प्राण प्रतिष्ठा का सीधा प्रसारण देखें।”

शिवम त्यागी लिखते हैं, “नफ़रती चिंटू रामविरोधी केजरीवाल दिल्ली को श्रीराम मंदिर की प्राण-प्रतिष्ठा नहीं देखना चाहता इस तरह के मैसेज आ रहे हैं के दिल्ली में सुबह 10 बजे से 1 बजे तक इलेक्ट्रिसिटी ‘बिजली’ नहीं रहेगी। ये कालनेमि हैं सारे के सारे।”

गौरतलब है कि दिल्ली में इस समय सर्दियों के बढ़ने की वजह से बिजली की डिमांड काफी बढ़ चुकी है। दिल्ली में 5798 मेगावॉट तक की बिजली डिमाँड पहुँच चुकी है। ये आँकड़ा 19 जनवरी का है, जोकि एक रिकॉर्ड है। दिल्ली में पिछली सर्दियों का रिकॉर्ड 5726 मेगावाट (17 जनवरी 2023) और 5701 मेगावाट (12 जनवरी, 2023) था। 

रामलला की प्राण प्रतिष्ठा के दिन छुट्टी घोषित करने के खिलाफ बॉम्बे हाईकोर्ट पहुँच गए कानून के 4 छात्र, जज ने फटकार कर खारिज कर दी याचिका

बॉम्बे हाई कोर्ट ने लॉ की पढ़ाई कर रहे 4 छात्रों की याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें महाराष्ट्र सरकार के फैसले को चुनौती दी गई थी कि सोमवार (22 जनवरी, 2024) को अयोध्या में राम मंदिर के उद्घाटन के दिन राज्य में छुट्टी रहेगी। याचिकाकर्ताओं का तर्क था कि यह छुट्टी संविधान के अनुच्छेद 14, 15 और 25 का उल्लंघन करती है, जो धर्म की स्वतंत्रता और सभी नागरिकों के लिए समानता की गारंटी देता है। उन्होंने यह भी तर्क दिया कि यह छुट्टी धार्मिक भेदभाव को बढ़ावा देगी।

शिवांगी अग्रवाल और अन्य बनाम भारत संघ और अन्य मामले की सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति जी.एस. कुलकर्णी और न्यायमूर्ति नीला गोखले की पीठ ने याचिका खारिज कर दी। कोर्ट ने कहा कि छुट्टी एक नीतिगत निर्णय है और इसे चुनौती देने का कोई कानूनी आधार नहीं है। कोर्ट ने यह भी कहा कि याचिकाकर्ताओं ने यह नहीं दिखाया कि छुट्टी से किसी व्यक्ति के अधिकारों का उल्लंघन हुआ है।

‘बार एंड बेंच’ की रिपोर्ट के मुताबिक, हाईकोर्ट ने कहा कि ये निर्णय कार्यकारी निर्णय है। ये निर्णय धर्मनिरपेक्षता के सिद्धांतों के अनुरूप नहीं है और ये शक्ति के प्रयोग का मनमाना मामला भी नहीं है। हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ताओं की ओर से 2019 में सुप्रीम कोर्ट द्वारा अयोध्या जन्मभूमि फैसले पर सवाल उठाने पर फटकार भी लगाई। हाई कोर्ट ने कहा, ‘याचिकाकर्ताओं ने सुप्रीम कोर्ट की बुद्धिमत्ता पर सवाल उठाए हैं, जो कि खास मकसद से किया गया है। ऐसे आरोप कोई भी बुद्धिशील इंसान नहीं लगा सकता।’ हाई कोर्ट ने कहा कि ऐसा लगता है कि ये याचिका राजनीति से प्रेरित है और इसे प्रचार की चाहत रखने वालों की तरफ से दायर की गई है।

हाई कोर्ट ने पीआईएल के पीठ के सामने आने से पहले ही मीडिया में आ जाने को लेकर भी कड़ी टिप्पणी की। कोर्ट ने पूछा कि ये लीक कैसे हो गई। हालाँकि याचिकाकर्ताओं ने कहा कि ये पीआईएल सुबह से इस फाइल से उस फाइल की तरफ जा रही है, ऐसे में ये कैसे लीक हुई, इस बारे में उन्हें जानकारी नहीं है। इस मामले में हाई कोर्ट ने याचिका खारिज कर दी, साथ ही हिदायत भी दी कि कानून का छात्र होने के नाते याचिककर्ताओं को अपने विवेक का अच्छे से इस्तेमाल करना चाहिए।

हाई कोर्ट ने ये भी कहा कि याचिकाकर्ताओं ने केंद्र सरकार की 1968 की अधिसूचना को भी चुनौती दी है, लेकिन उस अधिसूचना को ही याचिका के साथ संलग्न नहीं किया है। ये याचिका महाराष्ट्र नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी (एमएनएलयू), गवर्नमेंट लॉ कॉलेज (जीएलसी), मुंबई और एनआईआरएमए लॉ यूनिवर्सिटी, गुजरात से एलएलबी कर रहे चार कानून छात्रों, शिवांगी अग्रवाल, सत्यजीत साल्वे, वेदांत अग्रवाल, खुशी बंगिया द्वारा दायर की गई थी। इस मामले में गनीमत ये रही कि हाई कोर्ट ने लॉ कर रहे छात्रों पर कोई जुर्माना नहीं लगाया। लेकिन हाई कोर्ट ने ऐसे मामलों में व्यक्तिगत रूप से पेश होने को लेकर भी सावधानी बरतने की सलाह दी।

मंच से ज्ञान बाँचते नीतीश कुमार, नीचे गूँजते रहे ‘तेजस्वी यादव ज़िंदाबाद’ के नारे: बिहार के सत्ताधारी गठबंधन में फिर से दिखी दरार, मुस्कुराते रहे RJD नेता

बीजेपी को 2024 आम चुनावों में हराने की जुगत भिड़ा रहे और I.N.D.I. गठबंधन के सर्वेसर्वा बने ‘सुशासन बाबू’ के राज में सबकुछ सही नहीं चल रहा है। इसका एक नमूना समस्तीपुर में श्रीराम जानकी मेडिकल कॉलेज और अस्पताल के उदघाटन समारोह में रविवार (21 जनवरी, 2024) देखने को मिला है।

कार्यक्रम में इसमें सीएम नीतीश कुमार और डिप्टी सीएम तेजस्वी यादव दोनों मौजूद थे, लेकिन जनता दल यूनाईटेड (JDU) और राष्ट्रीय जनता दल (RJD) की रार सामने आने में पल भर नहीं लगा। इस बीच सुशासन बाबू की तरफ से ऐसे इशारे भी हैं कि वो NDA का दामन फिर से थाम सकते हैं।

दरअसल हुआ ये कि प्रोटोकॉल के हिसाब से उप-मुख्यमंत्री यानी तेजस्वी यादव को पहले भाषण देना था, लेकिन सीएम नीतीश का पहले भाषण करवाया गया। बिहार सरकार के मंत्री विजय कुमार चौधरी ने मंच से ऐलान किया कि वक्त कम है, इसलिए सीएम नीतीश उनको दो मिनट उनको संबोधित करेंगे।

यहाँ पहले डिप्टी सीएम के तौर पर तेजस्वी यादव को बोलने नहीं दिया गया। अब जैसे ही सीएम ने मंच से भाषण शुरू किया समारोह स्थल पर तेजस्वी यादव जिंदाबाद के नारे गूँजने लगे। सीएम नीतीश ने लगभग एक मिनट भाषण दिया। इस दौरान कार्यकर्ता तेजस्वी के पक्ष में नारे लगाते रहे।

इस दौरान मंच पर मौजूद डिप्टी सीएम तेजस्वी यादव सहित अन्य लोग मंद-मंद मुस्कुराते दिखे। ये देखकर सीएम कुमार ने तेजस्वी यादव को बोलने के लिए कहा और फिर डिप्टी सीए तेजस्वी यादव ने भाषण दिया। हालाँकि इस दौरान उनके बगल में सीएम नीतीश कुमार खड़े रहे।

बताते चलें कि बिहार के सीएम और डिप्टी सीएम के समारोह स्थल पर पहुँचते ही उनके बीच की दूरियाँ वहाँ मौजूद लोगों को भी साफ नजर आ रही थी। जब सीएम नीतीश श्रीराम जानकी मेडिकल कॉलेज और अस्पताल के उद्घाटन शिलापट्ट का फीता काटने पहुँचे उस वक्त भी डिप्टी सीएम उनसे दूर ही खड़े रहे।

उनकी जगह सीएम के बगल में मंत्री विजय कुमार चौधरी थे। इसके बाद डिप्टी सीएम यादव एक कोने में जाकर खड़े हो गए। इसके बाद जब सीएम नीतीश मंच पर मौजूद लोगों का अभिवादन करने के लिए गए तो वहाँ आने में भी तेजस्वी यादव ने देर लगाई।

बताते चलें कि एक दिन पहले ही 20 जनवरी,2024 को सीएम नीतीश कैबिनेट में तीन मंत्रियों की जिम्मेदारी बदली है और ये तीनों ही मंत्री लालू यादव की आरजेडी कोटे से हैं। शिक्षा मंत्रालय संभाल रहे आरजेडी के चंद्रशेखर यादव को गन्ना विकास विभाग की जिम्मेदारी दी गई।

अब शिक्षा विभाग की जिम्मेदारी आलोक मेहता दी गई है। मंत्री ललित यादव को भूमि राजस्व विभाग का अतिरिक्त प्रभार दिया गया। ललित यादव के पास पहले से लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण विभाग है।

चंद्रशेखर यादव वहीं मंत्री हैं जो गाहे-बगाहे हिंदू-देवी देवताओं के खिलाफ विष वमन करते रहते हैं। जनवरी 2023 में उन्होंने दावा किया था कि हिंदू महाकाव्य रामचरितमानस, मनु स्मृति और साथ ही ‘बंच ऑफ थॉट’ किताब समाज में नफरत फैलाती हैं।

बीते साल ही 7 सितंबर को उन्होंने नालंदा में एक और विवादास्पद बयान देते हुए दावा किया कि पैगंबर मोहम्मद ‘मर्यादा पुरोषोत्तम’ थे और भगवान ने उन्हें बुराई को मिटाने के लिए धरती पर भेजा था।

साफ है कि पूर्व शिक्षा मंत्री के इन आपत्तिजनक बयानों से सीएम नीतीश की गठबंधन सरकारी की खासी किरकिरी हुई थी। अब जब सीएम नीतीश के लिए बीजेपी के दरवाजे बंद हो चुके हैं कहने वाले गृहमंत्री अमित शाह उनके लिए नरम पड़े हैं। ऐसे में उनके और आरजेडी में दूरी होना स्वाभाविक है।

गृहमंत्री शाह ने एक सवाल के जवाब में हाल ही में कहा है कि NDA को छोड़कर गए नेता अगर वापस आना चाहते हैं और अगर इस संबंध में कोई प्रस्ताव आएगा तो उस पर विचार किया जाएगा। वहीं 30 जनवरी, 2024 को जेपी नड्डा बिहार के कटिहार में एक जनसभा करने जा रहे हैं।

नीतीश की फितरत रही है कि वो कभी भी करवट बदल सकते हैं। उनके और आरजेडी के गठबंधन को लेकर अमित शाह पहले ही चेता चुके हैं कि ये तेल और पानी का गठबंधन है जो कभी एक नहीं हो सकता है और अब आसार ऐसे ही नजर आ रहे हैं।

I.N.D.I गठबंधन को खड़ा करने वाले नीतीश कुमार उससे ही कटते नजर आ रहे है। दरअसल इसकी फिक्र आरजेडी अध्यक्ष लालू यादव को पहले ही सताने लगी थी। यही वजह रही कि उन्होंने कॉन्ग्रेस के गाँधी परिवार के पास नीतीश को इंडी गठबंधन का संयोजक बनाने की बात कही थीं।

लेकिन पलटीमार नीतीश कुमार इससे भी पलटी मार गए उन्होंने ये पद लेने से मना कर दिया। थक हार कर गठबंधन को कॉन्ग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे को I.N.D.I. गठबंधन का अध्यक्ष बनानना पड़ा।

इससे लालू का तेजस्वी यादव को बिहार के सीएम बनाने का ख्वाब टूटता नजर आ रहा है। वैसे ही I.N.D.I. गठबंधन के दलों में एक जुटता नजर नहीं आ रही है। जहाँ टीएमसी सुप्रीमो ममता बनर्जी और बीएसपी सुप्रीमो मायावती ने लोकसभा चुनाव 2024 में अपने दम पर उतरने का ऐलान किया है।

वहीं सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव के तेवर भी कम नहीं है। ऐसे में नीतीश को अपनी कुर्सी बचाने के लिए बीजेपी की नाव का ही सहारा है। एक तरफ सीएम नीतीश कुमार को बिहार में अपनी पार्टी की साख बचाने की फिक्र है तो दूसरी तरफ अपनी सीएम की कुर्सी बचाने की। इसके लिए उन्होंने धीरे-धीरे ही सही लेकिन पक्की कोशिशें शुरू कर दी हैं।