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यह केवल धर्म नहीं, राम सिर्फ भगवान नहीं, यह हर्ष मात्र भक्ति नहीं

मेरी बेटी के अंग्रेजीदां स्कूल में सप्ताह भर से ऐसी गतिविधियाँ चल रही हैं जो राम और अयोध्या को समर्पित हैं। कभी रामचरितमानस पर आधारित सामान्य ज्ञान प्रतियोगिता हो रही तो कभी बच्चों से कहा जाता है कि वे घर से दीया-बाती लेकर आएँ। स्कूल में सामूहिक दीपोत्सव हो रहा है।

नोएडा की एक एक्सपोर्ट कंपनी में काम कर रहे पप्पू कुमार गुप्ता की तनख्वाह 18 हजार रुपए मासिक है। 22 जनवरी 2024 को वे और उनके सहकर्मी मिलकर 101 किलो लड्डू बनवा रहे हैं। इसे वे आम लोगों के बीच वितरित करेंगे। इसके लिए पप्पू गुप्ता और उनके जैसे ही आय वाले कर्मचारी आपस में पैसा इकट्ठा कर रहे हैं। कोई 500 दे रहा तो कोई 2000।

मेरे घर में काम करने वाली शबाना सफाई करते समय गुनगुनाती रहती है ‘राम आएँगे तो अंगना सजाऊँगी’। रामेश्वर यादव दूध और घी बेचकर अपने परिवार का गुजारा करते हैं। लेकिन आज उन्होंने गाँव के हर घर में घी बाँटा है और सबसे आग्रह किया है कि 22 जनवरी को वे इसी घी से दीये जलाएँ।

बाजार जाता हूँ तो फल-फूल बेचने वाले से लेकर किताब-कपड़ों के दुकानदार तक राम की चर्चा कर रहे हैं। घर से कार्यालय जाता हूँ तो रास्ते में कहीं कोई हनुमान/राम का ध्वज बेचता मिल जाता है। कोई टकराता है तो अयोध्या, राम और 22 जनवरी की बात किए बिना आगे नहीं बढ़ता।

इसमें मुझे क्यों नहीं दिख रहा राम का सिर्फ ईश्वरत्व?

मैं जानता हूँ कि भारत उत्सवों का देश है। भारत धार्मिक राष्ट्र है। इसके सामाजिक ढाँचे के मूल में धर्म है। मैंने बचपन से हर माघ में कांवड़ लेकर टोली के साथ देवघर जाते पिता को देखा है। घर की महिलाओं को रोज मिट्टी से महादेव बनाते देखा है। फिर उस महादेव की पूजा करते हुए घंटेभर मंत्रोच्चार करते लाल कक्का को भी देखा है। मैंने मंदिर बनने और ईश्वर की प्राण-प्रतिष्ठा से पैदा हुए धार्मिक वातावरण को बचपन में ही अपने गाँव में जीया है। फिर भी आज कल जो कुछ देख रहा हूँ वह मुझे सिर्फ धर्म नहीं लगता। यह मुझे सिर्फ भक्ति भी नहीं लगती। इसमें मुझे राम का सिर्फ ईश्वरत्व नहीं दिखता।

वैसे भी इस उत्सवी और धार्मिक राष्ट्र भारत में केवल सनातन की ही बात करें तो कई धार्मिक परंपराएँ साथ चलती हैं। हर इलाके की अपनी धार्मिक मान्यताएँ हैं। अपने ईश्वर हैं। इन सभी मान्यताओं का अपना संपूर्ण संसार है। सकल विधान है। धार्मिक स्वतंत्रता इतनी है कि एक ही घर में पिता महादेव को पूज रहे हैं तो पुत्र दुर्गा को। उसी घर की महिला पीपल में ईश्वर देखती हैं। प्रकृति की पूजा करती हैं।

क्या संभव है कि इतनी विविधताओं वाले समाज को धर्म की एक परंपरा, जिसे श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ‘रामानंदी’ कहते हैं, एक सूत्र में पिरो दे? जब सबके अपने-अपने अराध्य हैं तो सब राम की आराधना में क्यों रत हैं? जब सबकी अपनी पूजा पद्धति है तो सब राममय क्यों हुए पड़े हैं?

ऐसा भी नहीं है कि राम परम ब्रह्म हैं और सारे ईश्वर उनके बाद पंक्ति में आते हैं। यदि राम को सिर्फ ईश्वर ही मान लें तो वे विष्णु के सिर्फ एक अवतार भर हैं। उनसे पहले भी विष्णु के अवतार हुए और उनके बाद भी। यदि इसे किसी सम्राट के प्रताप का ही द्योतक भर मान लें तब भी राम ही जिस कुल में पैदा हुए, उसमें उनसे पहले मनु आए जिससे हम मानव कहलाए। भागीरथ आए जो माँ गंगा को धरती पर लेकर आए। रघु आए जिसके कारण राम की एक पहचान रघुकुल नंदन के तौर पर हुई। वह कुल, रघुकुल कहलाया। राम के आने के बाद भी उसे रामकुल नहीं कहा गया।

यदि यह मान लूँ कि यह वातावरण उन संघर्षों और बलिदानों के कारण उत्पन्न हुआ है जो रामजन्मभूमि को प्राप्त करने के लिए हुआ है तो भी मुझे अपने अराध्य और मिट्टी के लिए संघर्ष और बलिदान के ऐसे कई प्रतिमान इतिहास में विद्यमान मिलते हैं। यदि इसे एक आंदोलन से पैदा हुई ऊर्जा मान लूँ तो मैंने वो दस्तावेज देखे हैं जो बताते हैं कि काशी, मथुरा और अयोध्या की मुक्ति के आंदोलन की पटकथा एक साथ लिखी गई थी।

कई दिनों से इन उधेड़बुनों में फँसे मेरे मस्तिष्क को राम के, ‘सबके राम’ होने का जवाब उनकी उस यात्रा में मिलता है, जिसमें न कोई चमत्कार है और न कोई ईश्वरत्व। मुझे इसका जवाब हमारी उन सामाजिक और धार्मिक परंपराओं में मिलता है, जिनमें राम आराध्य भले नहीं हैं, लेकिन उनका अस्तित्व सहर्ष स्वीकार है।

कुछ साल पहले दक्षिण भारत की यात्रा पर गया था। रामेश्वरम में कई स्थानीय लोग मिले जो खुलकर बता रहे थे कि रावण उनका राजा था, जिसकी राम ने हत्या कर दी। उनके हृदय में विभीषण को लेकर कोई सम्मान नहीं था। पर वे भी राम के अस्तित्व को नकार नहीं रहे थे, जबकि इस देश में हम जानते हैं कि राजनीतिक लाभ के लिए देश के सर्वाेच्च अदालत में राम के अस्त्तिव को ही नकार देने की कोशिश हुई है।

कुछ साल पहले जांजगीर के एक गाँव में जाना हुआ था। वहाँ जो भी मिला सबके शरीर पर राम दिखे। उनलोगों ने जो कुछ बताया था (जैसा मुझे स्मरण है) उसके अनुसार करीब सवा सौ साल पहले उनके किसी पूर्वज को मंदिर में जाने से रोक दिया गया था। इसके बाद उनके बीच ‘राम राम’ से शरीर को गुदवाने की परंपरा शुरू हुई। इनलोगों ने राम के अस्तित्व को नहीं नकारा, बल्कि राम में ही अपना अस्तित्व साकार कर लिया। ये लोग आज भी मृतकों के शव को जलाते नहीं हैं। मुझे बताया गया था कि जिस शरीर पर राम विद्यमान हैं, उसे कैसे जलाया जाए।

रामनामी संप्रदाय के लोगों के इस समर्पण से आज के वे ‘जय भीम-जय मीम’ वाले भी सीख सकते हैं जो तुच्छ राजनीति और सस्ती लोकप्रियता के बहकावे में राम और सीता को लेकर अश्लील बातें करते हैं। जांजगीर आज के उस छत्तीसगढ़ प्रदेश का हिस्सा है जहाँ के अलग-अलग धार्मिक परंपराओं के लोग भी खुद को राम के ननिहाल का बताकर उनके साथ जुड़ जाते हैं।

यह केवल राम का ईश्वरत्व नहीं

जिस दौर में अपने अलावा हर किसी के अस्तित्व को खारिज करने की सनक हो, मजहब के नाम पर ‘सर तन से जुदा’ कर देने का उन्माद हो, उस दौर में केवल ईश्वरत्व का होना समाज में इतना सहिष्णु हर्ष नहीं भर सकता है। किसी देश के शासक को खुद को राम कहलाने पर गौरवान्वित नहीं कर सकता है। दुनिया के सबसे बड़े इस्लामी मुल्क को अपनी रामलीलालों के मंचन पर गौरव की अनुभूति नहीं करा सकता है। हर सभ्यता-संस्कृति को राम से जुड़ जाने का आनंद नहीं दे सकता है। जैसे मिस्र की सभ्यता ‘रामसेस’ या मेसोपोटामिया अथवा सुमेरियन सभ्यता ‘राम सिन’ से खुद को जुड़ा पाकर आनंदित होती है।

राम का यह प्रभाव अवतार होने के कारण नहीं है। अराध्य होने के कारण नहीं है। किसी मायाजाल या चमत्कार से नहीं है। यह उस यात्रा की उपज है जो अयोध्या में राम के जन्म से लेकर जल समाधि लेने तक की है। इसी उपज का फल है कि राम में हर किसी को अपना अंश दिखता है। उन पर हर कोई अपना अधिकार मानता है।

राम राज को आज भी किसी भी व्यवस्था का लक्ष्य माना जाता है। उसकी सफलता मानी जाती है। यही कारण है कि राम का नाम आज भी हर्ष पैदा करता है, जबकि हम जानते हैं कि राम राज्य में भी काल की गति पर विराम नहीं लगा था। शोक के पल उस राज्य में भी आते रहे होंगे। पर शोक के उन काल में भी राम का होना शोकाकुल समाज को मुक्ति का प्रकाश प्रदान करता रहता होगा। सृजन की ऊर्जा से भरता रहता होगा।

राम हैं इसलिए हर सवाल निष्प्रभावी हैं

जिस समाज में धार्मिकता कूट-कूटकर भरी हुई हो उस समाज को आज शंकराचार्य की गद्दी पर आसीन धर्माचार्यों के सवाल व्याकुल नहीं कर रहे हैं। जबकि यही समाज यह भी जानता है कि श्री रामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने प्राण-प्रतिष्ठा समारोह के लिए सार्वजानिक तौर पर जो मापदंड सुनिश्चित किए थे, उनका पूरी तरह पालन नहीं हुआ है। इस समाज ने प्राण-प्रतिष्ठा से पहले विग्रह की नेत्र ढके बिना तस्वीरों को वायरल होते देखा है। इत्यादि, इत्यादि…

यदि यह केवल राम के ईश्वर भर होने का मामला होता है, यह केवल एक मंदिर का बनना भर होता है, यह केवल धार्मिकता मात्र होता, यह केवल अपने अराध्य को लेकर केवल भक्ति का भाव होता तो आज शंकराचार्यों की आपत्ति से लेकर ट्रस्ट की ओर से हुई चूकों का क्रंदन सर्वव्यापी होता। पर हम देख हैं वे भाव जिसमें कोई वृद्ध अक्षत निमंत्रण मिलने पर फूट-फूटकर रोने लगते हैं। कोई वृद्ध महिला वाहन पर राम की तस्वीर वाले पोस्टर देख बीच रास्ते अपने चप्पल उतार कर भाव विह्वल होकर उस तस्वीर को आलिंगन करने लगती है। किसी सैयदा बतूल जेहरा का गाया राम भजन वायरल हो जाता है।

इन सबमें कहीं भी वह धार्मिकता नहीं है जो आपको ईश्वर से अपनी दरिद्रता दूर करने की प्रार्थना के भाव से भरती है। कोई छात्र यह नहीं माँग रहा कि राम जी इस बार अच्छे नंबर से पास करवा देना। कार्यालयों में प्राण-प्रतिष्ठा पर आयोजन हो रहे हैं पर कोई व्यापारी यह नहीं कह रहा प्रभु मेरे कारोबार को उन्नति देना। धन-धान्य से भर देना। कोई अपने लिए संतान की कामना नहीं किए जा रहा। कोई ‘पत्नीं मनोरमां देहि’ की इच्छा लिए अयोध्या नहीं जा रहा…

यह राममय वातावरण जगत कल्याण के भाव से संचालित है। निज का भाव गौण है। यही भाव राम को ‘सबके राम’ बनाता है। यह व्यवस्था को बताता है कि हर्ष का भाव स्थायी नहीं है। शोक के क्षण भी आएँगे। पर समाज को सृजन की उस उर्जा से आलोकित करते रहना उसका परम दायित्व है जो राम का प्रभाव पैदा करता है। 2024 के आम चुनावों से ठीक पहले भारतीय समाज ने अपनी राजनीतिक व्यवस्था को इस दायित्व से बाँध दिया है। इस दायित्व को पूरा करना कोई विकल्प नहीं है। दायित्व से डिगने वाले मिट जाएँगे। राम राज का लक्ष्य अडिग रहेगा।

बिहार में नीतीश कुमार की नई टीम, JDU की कार्यकारिणी से पूर्व अध्यक्ष ललन सिंह और उनके करीबियों की भी छुट्टी: उधर ‘मिशन 2024’ पर बिहार पहुँच रहे JP नड्डा

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के संग ‘ऊँट किस करवट बैठेगा’ वाली कहावत अक्षरशः सही साबित होती है। बीते महीने वो जनता दल यूनाईटेट (JDU) के अध्यक्ष ललन सिंह को पद से हटा कर खुद पार्टी चीफ बन बैठे। अब उन्होंने शनिवार (20 जनवरी, 2024) को पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी का पुनर्गठन कर डाला है।

अब JDU ने अपने सभी विधायकों को 72 घंटे तक पटना में ही रुकने का फरमान सुनाया है। इस बीच बिहार के पल-पल बदलते सियासी माहौल पर पूरे देश की नजर बनी हुई है तो वहीं राजद के लालू-तेजस्वी की जोड़ी I.N.D.I. महागठबंधन की अगुवाई करने वाले सुशासन बाबू के मूड को लेकर पेशोपश में पड़ी है। हालिया कुछ घटनाक्रम ऐसे हैं जो इशारा कर रहे हैं कि सीएम नीतीश किसी को भी गच्चा दे सकते हैं और कभी भी पलट सकते हैं।

लोकसभा चुनावों के लिए JDU राष्ट्रीय कार्यकारिणी की नई टीम

हम शुरू करते हैं नीतीश कुमार के जदयू के राष्ट्रीय पदाधिकारियों की टीम का पुनर्गठन करने से। शनिवार को ही उन्होंने इस काम को अंजाम दिया है। नई टीम में कई लोकसभा सांसदों को उनके संगठनात्मक पदों से मुक्त कर दिया गया। इसे नीतीश की अपने हिसाब से डील करने की रणनीति माना जा रहा है।

राज्यसभा सांसद वशिष्ठ नारायण सिंह को मंगनी लाल मंडल की जगह उपाध्यक्ष बनाया गया है। मंगनी लाल नई टीम में अब संगठन के 11 महासचिवों में से एक हैं। केसी त्यागी को राजनीतिक सलाहकार के रूप में प्रमोशन दिया गया। वो पहले विशेष सलाहकार और पार्टी के चीफ प्रवक्ता रहे हैं।

नई टीम में पार्टी के पहले प्रवक्ता त्यागी है तो दूसरे नंबर पर राजीव रंजन हैं। पार्टी के मुताबिक, जेडीयू के 11 महासचिवों में पाँच लोकसभा सांसद भी शामिल हैं। कहा जा रहा है कि ये जेडीयू की लोकसभा चुनाव 2024 को लेकर बनाई रणनीति है।

नई टीम में पुरानी टीम के बिहार के मंत्री संजय झा, राज्यसभा सांसद रामनाथ ठाकुर, अली अशरफ फातमी और अफाक अहमद खान को महासचिव पद पर बरकरार रखा गया है। बताते चले कि पूर्व पार्टी अध्यक्ष ललन सिंह की टीम में 22 महासचिव थे। नई टीम से उत्तर प्रदेश के कद्दावर नेता धनंजय सिंह और हर्ष वर्धन सिंह समेत अन्य नेताओं को नई बाहर कर दिया गया हैं।

जेपी नड्डा का बिहार दौरा

वहीं नीतीश कुमार पर अमित शाह की नरमी से आरजेडी के नेताओं लालू-तेजस्वी के पेशानी पर बल पड़ रहे हैं। खबर है की बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा बिहार की 40 लोकसभा सीटों पर विजय पताका फहराने के लिए बिहार दौरे पर जाने वाले हैं।

नड्डा की 30 जनवरी को कटिहार में होने जा रही जनसभा कई मायनों में अहम मानी जा रही है। इसमें नड्डा मिशन 2024 के तहत सीमांचल के मतदाताओं किशनगंज, पूर्णिया, कटिहार और अररिया की सीटों को साधने की कोशिश में है।

चूँकि ये सीटें बीजेपी के लिए ही नहीं बल्कि सभी राजनीतिक दलों के लिए अहम मानी जाती हैं, यहाँ की हार-जीत का सीधा असर इसके साथ सटे बंगाल की सीटों पर पड़ता है। बिहार में लोकसभा चुनाव में 2019 में किशनगंज सीट से जेडीयू कॉन्ग्रेस से हार गई। तब कॉन्ग्रेस को बिहार में बस यही एक सीट मिली थी। साल 2019 बीजेपी-जेडीयू 17-17 सीटों पर लड़ी।

उस चुनाव में BJP 17 तो JDU 16 सीट जीती थी। वहीं टूटने से पहले लोकजनशक्ति पार्टी (LJP) 6 सीट पर लड़ी और सब जीती थी। इस तरह 2019 के आम चुनावों में NDA ने बिहार की 40 सीटों में 39 जीत ली थी।

अमित शाह ने खोली नीतीश के लिए खिड़की

बताते चलें कि साल 2022 में नीतीश कुमार ने NDA से नाता तोड़ कर महागठबंधन का दामन थाम लिय था। इसके बाद साल 2023 में झंझारपुर की रैली गृहमंत्री अमित शाह ने बिहार में बीजेपी की एक चुनावी जनसभा में साफ कहा था कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के लिए एनडीए के दरवाजे पूरी तरह बंद हो चुके हैं।

इसके बाद बिहार भाजपा के कई वरिष्ठ नेताओं ने भी अमित शाह के बयान को दोहराया था, लेकिन कुछ दिन पहले उन्होंने एक अखबार को दिए इंटरव्यू में जब अमित शाह से पूछा गया कि NDA को छोड़कर गए नेता अगर वापस आना चाहते हैं तो इस पर उनका क्या रुख है।

इस सवाल के जवाब में अमित शाह ने अपने तेवर नरम करते हुए कहा कि अगर इस संबंध में कोई प्रस्ताव आएगा तो विचार किया जाएगा। इसके बाद से ही नीतीश कुमार के एक बार फिर महागठबंधन और I.N.D.I. गठबंधन को छोड़कर एनडीए के साथ जाने की चर्चाएँ तेज हो गई हैं।

बीते दिनों RJD के अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव और उनके बेटे व राज्य के उप-मुख्यमंत्री तेजस्वी यादव ने जब मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के घर पर जाकर मुलाकात की तो चर्चाओं का बाजार और गर्म हो गया। बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री और ‘हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा (HAM) सेकुलर’ के अध्यक्ष जीतन राम माँझी ने कहा है कि अगर नीतीश कुमार एनडीए में वापस आते हैं तो वह इसका विरोध नहीं करेंगे।

बिहार की सियासत में इस बात की चर्चा आम है कि नीतीश कुमार लोकसभा सीटों के बँटवारे में हो रही देरी के वजह से ख़ासे नाराज हैं और वह चाहते हैं कि लोकसभा सीटों को लेकर जल्द से जल्द बँटवारा हो, जबकि राजद के अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव इसे लेकर जल्दबाजी में नहीं दिखाई देते।

कुल मिलाकर एक बार फिर नीतीश कुमार के एनडीए में वापसी की अटकलों ने बिहार से लेकर दिल्ली तक सियासी पारा चढ़ा दिया है। अगर नीतीश कुमार I.N.D.I. गठबंधन का साथ छोड़कर एनडीए से हाथ मिलाते हैं तो निश्चित रूप से यह इंडी गठबंधन के लिए बहुत बड़ा झटका साबित होगा क्योंकि नीतीश कुमार की पहल पर ही विपक्षी दलों को एक मंच पर लाने की कवायद शुरू हुई थी।

अयोध्या के नवनिर्मित मंदिर में भगवान रामलला का अधिवास: वैदिक मंत्रोच्चार के साथ सरयू नदी के जल से स्नान, 1008 हवन कुंडों में चल रहा महायज्ञ

अयोध्या में रामलला के मंदिर में प्राण प्रतिष्ठा का अनुष्ठान जारी है। 16 जनवरी 2024 से शुरु हुए प्राण प्रतिष्ठा अनुष्ठान में शनिवार (20 जनवरी 2024) को रामलला को तीन अधिवास कराए गए। रामलला का शर्कराधिवास और फलाधिवास कराने के बाद पुष्पाधिवास कराया गया। इसमें रामलला को पुष्प, फल और शक्कर चढ़ाया गया और उनका आह्वान वैदिक मंत्रोच्चार के साथ किया गया। इसके बाद 21 जनवरी (रविवार) को रामलला का मध्याधिवास कराया जाएगा, फिर शाम के समय शय्याधिवास कराया जाएगा।

शर्कराधिवास के तहत तहत सरयू नदी के पवित्र जल से गर्भगृह को धोया गया। इसके बाद वास्तु शांति और अन्नाधिवास अनुष्ठान हुआ। इस अनुष्ठान के तहत विग्रह को गेहूँ और धान आदि अन्न के भंडार में ढ़ँककर मंत्रोचारण किया गया। वहीं, अनुष्ठान के तहत अयोध्या में 1008 हवन कुंडों में लगातार यज्ञ चल रहा है। इसमें 1008 पुरोहित और 5000 से ज्यादा यजमान प्राण प्रतिष्ठा से पहले हवन और पूजन कर रहे हैं। यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी 1008 कुंडीय महाय़ज्ञ में शुक्रवार को शामिल हुए थे।

अयोध्या के भव्य मंदिर में राम लला को प्राण प्रतिष्ठित करने वाले सभी अनुष्ठान लगातार जारी हैं। सप्ताह भर के कार्यक्रमों में पहले दिन 16 जनवरी 2024 को पहले दिन प्रायश्चित और कर्मकूटि पूजन अनुष्ठान किए गए थे। इसके अगले दिन 17 जनवरी 2024 को रामलला का परिसर प्रवेश कराया गया था। वहीं, 18 जनवरी को रामलला का तीर्थ पूजन, जल यात्रा, जलाधिवास और गंधाधिवास कराया गया था।

इसके बाद 19 जनवरी की सुबह रामलला का औषधाधिवास, केसराधिवास और घृताधिवास कराया गया था, जबकि सायं काल धान्याधिवास कराया गया। 20 जनवरी 2024 को शर्कराधिवास, फलाधिवास और पुष्पाधिवास कराया गया। राम मंदिर में प्राण प्रतिष्ठा से एक दिन पहले यानी 21 जनवरी को मध्यधिवास और शय्याधिवास कराया जाएगा।

रविवार 21 जनवरी के अनुष्ठान में रामलला के विग्रह में नख से शिखा तक शक्ति का संचार करने के लिए मंत्रोचारण किया जाएगा। इसके बाद श्री विग्रह का महाभिषेक किया जाएगा और 22 जनवरी 2024 (सोमवार) को भव्य मंदिर में रामलला की प्राण प्रतिष्ठा की जाएगी। ये अनुष्ठान दोपहर 12 बजकर 20 मिनट पर शुरू होगा, जिसमें सोने की सिलासा से भगवान के नयन खोले जाएँगे।

इससे पहले, शनिवार (19 जनवरी 2024) को रामलला की मूर्ति की पहली झलक मिली थी। वहीं, रामलला की नई मूर्ति के गर्भग्रह में स्थापित होने से पहले पहले भगवान की एक छोटी मूर्ति को पालकी में विराजित करके मंदिर परिसर का भ्रमण कराया गया। शुरू में प्लान किया गया था कि इस मूर्ति को नगर भ्रमण करवाया जाएगा मगर फिर सुरक्षा व्यवस्था के चलते उस कार्यक्रम को रद्द किया गया और रामलला को मंदिर में घुमाकर उनके दर्शन हुए।

श्रीराम जन्मभूमि पथ पर लगभग 5 फीट की अगरबत्तियाँ लगाई गई हैं। ये अगरबत्तियाँ 11 घंटे तक वातावरण को सुगंधित रखती हैं। इन्हें हर 11 घंटे पर ITC द्वारा बदल दिया जाता है। अगरबत्तियों पर राम जन्मभूमि ट्रस्ट का लोगो भी लगा है। आईटीसी ने इसे सुगंध कॉरिडोर का भी नाम दिया है।

जमीन पर शयन और ब्रह्म मुहूर्त में 1 घंटा 11 मिनट का विशेष जाप: राम मंदिर में प्राण प्रतिष्ठा के लिए ऐसे व्रत कर रहे हैं पीएम मोदी, पी रहे हैं सिर्फ नारियल पानी

अयोध्या के नवनिर्मित भव्य मंदिर में रामलला की प्राण प्रतिष्ठा हो रही है। इसके लिए 16 जनवरी से ही अनुष्ठान जारी है। अनुष्ठान के अंतिम दिन 22 जनवरी 2024 को रामलला अपने जन्मभूमि स्थान पर विराजमान हो जाएँगे। इस दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, संघ के प्रमुख मोहन भागवत एवं अन्य गणमान्य लोग भी उपस्थित रहेंगे।

प्राण प्रतिष्ठा समारोह में पीएम मोदी बतौर यजमान पूजा-पाठ करेंगे। पीएम मोदी पूजा-पाठ में शामिल होने के लिए खुद को तैयार कर रहे हैं और इसके लिए कड़ी व्रत-तपस्या भी कर रहे हैं। यहीं नहीं, पीएम खास तरह का जाप भी कर रहे हैं, जो उन्हें सिद्ध महात्मा द्वारा बताया गया है। पीएम मोदी संन्यासी की तरह फर्श पर सो रहे हैं और सिर्फ और सिर्फ नारियल पानी पी रहे हैं।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम को देखते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी प्रतिदिन ब्रह्म मुहूर्त में जाग जाते हैं और हर दिन एक घंटा 11 मिनट तक खास मंत्र का जाप करते हैं। इस मंत्र का 11 दिनों तक का जाप अनिवार्य बताया गया है। वे विशेष धार्मिक परंपरा के मुताबिक ही फर्श पर सो रहे हैं। फर्श पर वो सिर्फ कंबल बिछाते हैं।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इन तमाम व्रत एवं जाप के अलावा, अपने आवास पर ही गाय की पूजा भी कर रहे हैं। वे दिन गायों को चारा भी खिलाते हैं। इसकी कई तस्वीरें भी पिछले दिनों सोशल मीडिया पर वायरल हुई थीं। इसके अलावा, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शास्त्रों के मुताबिक अन्नदान और वस्त्रदान भी कर रहे हैं।

बता दें कि शास्त्रों में देव प्रतिमा की प्राण प्रतिष्ठा के लिए एक लंबी प्रक्रिया बताई गई है। इसके लिए कई सारे नियमों का पालन करना होता है। पीएम मोदी एक रामभक्त के रूप में आध्यात्मिक साधना कर रहे हैं। आमतौर पर पीएम मोदी दैनिक दिनचर्या में ब्रह्ममुहूर्त जागरण, साधना और सात्विक आहार जैसे नियमों का पालन तो करते ही हैं, लेकिन इस बार वो यम-नियम के तहत सभी अनुष्ठान कर रहे हैं।

गौरतलब है कि अयोध्या में रामलला की प्राण प्रतिष्ठा हो रही है। 16 जनवरी से शुरू हुए धार्मिक अनुष्ठान 22 जनवरी तक चलेंगे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगुवाई में 22 जनवरी को रामलला अपने स्थान पर विराजमान होंगे। पूरे देश में लोग अपने घरों में दिवाली मनाएँगे। हर तरफ मंगल गीत गाए जा रहे हैं।

सोशल मीडिया भी भगवान राम की भक्ति में डूबा हुआ है। प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम के लिए खास मेहमानों को न्यौता भेजा जा रहा है। इसके अलावा, अयोध्या रामलला जन्मस्थान केस में फैसले देने वाले सुप्रीम कोर्ट की संवैधानिक पीठ के सभी 5 जजों को भी न्यौता भेजा गया है। इनमें से कुछ जज रिटायर भी हो चुके हैं।

एक्शन में राजस्थान के सीएम भजनलाल: आधी रात को थाने पहुँचकर लिया जायजा, जयपुर रेलवे स्टेशन पर गरीबों के बीच बाँटा कंबल

राजस्थान की राजधानी जयपुर के सदर थाने में शुक्रवार (19 जनवरी 2024) की रात 12 बजे अचानक प्रदेश के मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा पहुँच गए। उन्हें देखकर पुलिस वाले हक्के-बक्के रह गए। रेलवे स्टेशन के नजदीक स्थित इस थाने में पहुँचकर सीएम ने वहाँ के एक-एक रजिस्टर को देखा और गश्त से लेकर एफआईआर की जानकारी ली।

दिलचस्प बात तो ये हैं कि सीएम के इस औचक निरीक्षण की जानकारी किसी को कानों कान नहीं लगी। न तो पुलिस कंट्रोल और न ही उनके निजी स्टाफ को सीएम के इस मूवमेंट की जानकारी थी। और तो और सीएम की सुरक्षा में लगी टीम को भी इसकी जानकारी आखिरी पल में हुई।

थाने का औचक निरीक्षण करने के बाद सीएम ने नजदीकी रेलवे स्टेशन का जायजा भी लिया। भजनलाल ने प्लेटफॉर्म पर सो रहे लोगों और यात्रियों को कंबल बाँटा और उनका हाल-चाल लिया। इसके बाद सीएम भजनलाल शर्मा सरकार के चलाए जा रहे रैन बसेरों में भी पहुँचे।

सीएम को आधी रात में देखकर रैन बसेरे में सो रहे लोग चौंक उठें। सीएम ने वहाँ सो रहे लोगों का हाल-चाल जाना। बसेरों की व्यवस्था के बारे में भी पता किया और अधिकारियों को कुछ दिशा-निर्देश भी दिए। इसे लेकर सीएम भजनलाल ने अपने एक्स (पूर्व में ट्विटर) हैंडल पर एक पोस्ट शेयर की है।

अपने पोस्ट में सीएम ने लिखा, “राजस्थान में रामराज्य की स्थापना हमारा संकल्प, अंत्योदय हमारा लक्ष्य! कल देर रात्रि जयपुर सदर पुलिस स्टेशन व जयपुर रेलवे स्टेशन स्थित रैन बसेरों का औचक निरीक्षण किया। रैन बसेरों में आश्रय लिए हुए सम्मानित जनों का कुशलक्षेम जाना व शीत ऋतु में सर्दी से बचाव हेतु कंबल वितरित किए। सुशासन को समर्पित हमारी सरकार राजस्थान के प्रत्येक परिवारजन की सुरक्षा व उत्थान हेतु संकल्पबद्ध है। आपणो अग्रणी राजस्थान।”

बताते चलें कि बीते कुछ वक्त से सीएम ने राजस्थान के कई जगहों का औचक निरीक्षण किया है। इससे पहले वो अचानक सवाई मानसिंह अस्पताल भी पहुँचे थे। इससे कुछ दिन पहले सीएम मानसरोवर सिटी पार्क भी पहुँचे थे। इस दौरान उन्होंने वहाँ सैर पर निकले लोगों का हाल-चाल लिया था और उनके साथ चाय पी थी।

अयोध्या का अपमान, शेख जैनुद्दीन मखदूम का गुणगान: केरल की वामपंथी सरकार खोल रही ‘अरेबियन लैंग्वेज और कल्चरल सेंटर’

केरल की वामपंथी सरकार ने फैसला किया है कि वो भगवान राम वाली भारतीय संस्कृति के साथ नहीं, बल्कि अरबी संस्कृति के साथ है। 22 जनवरी 2024 को होने जा रहे अयोध्या के राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम का न्यौता ठुकराने वाली केरल सरकार ने मलप्पुरम जिले में स्थित ‘केरल का मक्का’ पोन्नानी में अरबी भाषा एवं सांस्कृतिक अध्ययन केंद्र खोलने का निर्णय लिया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, केरल सरकार की उच्च शिक्षा मंत्री आर बिंदू ने केरल विश्वविद्यालय के सीवी रमन हाल में आयोजित एक कार्यक्रम में कहा कि संघ परिवार और उससे जुड़े संगठनों के साथ ही केंद्र सरकार अरबी भाषा के प्रति नकारात्मक भाव रखते हैं। उन्होंने कहा कि अरबी भाषा ने ज्ञान और विज्ञान के विकास की दिशा में मध्यकालीन युग में बेहतरीन योगदान दिया।

अपने फेसबुक पोस्ट में भी बिंदु ने कहा है कि राज्य सरकार ने शेख जैनुद्दीन मखदूम द्वितीय के प्रति सम्मान प्रकट करने के लिए यह फैसला किया गया है। बिंदु ने कहा कि मखदूम ने केरल का प्रामाणिक इतिहास लिखा है। इसके अलावा उन्होंने विदेशी आक्रमणकारी शक्तियों के विरुद्ध भी काफी कुछ लिखा है। बता दें कि ‘तुफतुल मुजाहिदीन’ नाम से शेख ने मालाबार का इतिहास लिखा है, जिसमें पुर्तगालियों के मुस्लिम विरोधी रूख के बारे में बताया है।

बिंदु ने अपने फेसबुक पेज पर मलयालम में लिखा, जिसका हिंदू अनुवाद कुछ इस तरह से है, “उच्च शिक्षा विभाग पोन्नानी स्थित शेख जैनुद्दीन मखदूम के नाम से अरबी भाषा एवं सांस्कृतिक अध्ययन केंद्र शुरू करने की तैयारी कर रहा है। केरल सरकार का यह निर्णय शेख जैनुद्दीन मखदूम को सम्मान देने के लिए है, जिन्होंने केरल के बारे में आधिकारिक इतिहास लेखक की शुरुआत की और कई आक्रमणकारी-विरोधी कार्यों को लिखा था।”

केरल विश्वविद्यालय के अरबी विभाग द्वारा आयोजित कार्यक्रम में दिए गए अपने बयान को उद्धृत करते हुए आगे लिखा, “संघ परिवार और उसके संगठनों और केंद्र सरकार द्वारा मध्यकाल में ज्ञान और विज्ञान के विकास में योगदान देने वाले अरबी भाषा को नकारा जाता है। ऐसे में उनके नकारात्मक दृष्टिकोण वाले अन्याय का भी पर्दाफाश हुआ। सऊदी अरब, ओमान, लीबिया, ट्यूनीशिया, अल्जीरिया, केन्या, मिस्र और इराक के देशों में विश्वविद्यालयों का प्रतिनिधित्व करने वाले शिक्षकों, लेखकों और भाषाविदों ने विभिन्न सत्रों में आयोजित संगोष्ठी में भाग लिया।”

बता दें कि जिस शेख जैनुद्दीन मखदूम की बात हो रही है, वो 16वीं शताब्दी में पोन्नानी में रहा करते थे। वो मुगल आक्रांता अकबर के समकालीन थे। ज़ैनुद्दीन मखदूम द्वितीय शेख ज़ैनुद्दीन मखदूम प्रथम के पोते भी थे। मखदूम प्रथम का परिवार यमन से आया था। उनके दादा ने पोन्नानी जुमा मस्जिद का निर्माण लगभग 600 साल पहले कराया था।

जैनुद्दीन ने मालाबार मुस्लिम जमींदारों के खिलाफ पुर्तगालियों के हमले काफी कुछ लिखा है और उन्हें मुस्लिम विरोधी बताया था। पुर्तगालियों के खिलाफ उन्होंने स्थानीय मुस्लिमों को एकजुट करने का काम किया था।

सात्विक आहार, हादसे के बाद आँख की सर्जरी, 6 महीने परिवार से नहीं मिले… अरुण योगीराज ने यूँ ही नहीं गढ़ दी रामलला की दिव्य प्रतिमा, रोज सुनते थे रामकथा

अयोध्या में निर्माणाधीन राम मंदिर वैसे तो सोमवार (22 जनवरी, 2024) को प्राण प्रतिष्ठा का कार्यक्रम होना है, लेकिन उससे पहले ही रामलला की प्रतिमा की तस्वीर सोशल मीडिया पर सामने आ गई। इसके बाद भक्त भाव-विह्वल हो गए और 500 वर्षों के संघर्ष एवं बलिदान के बाद आए इस पल पर अपनी ख़ुशी रोक नहीं पाए। इस प्रतिमा को कृष्णशिला से गढ़ने वाले कर्नाटक के मूर्तिकार अरुण योगीराज की भी भूरि-भूरि प्रशंसा हो रही है।

अरुण योगीराज मैसूर के रहने वाले हैं। उत्तराखंड स्थित केदारनाथ धाम में जगद्गुरु शंकराचार्य की जिस प्रतिमा का प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अनावरण किया था, उसे उन्होंने ही बनाया था। इतना ही नहीं, दिल्ली के इंडिया गेट पर पीएम मोदी ने ही नेताजी सुभाष चंद्र बोस की जिस प्रतिमा का अनावरण किया था, उसे भी अरुण योगीराज ने ही गढ़ा था। अब उनकी बनाई रामलला की प्रतिमा राम मंदिर के गर्भगृह में स्थापित हुई है। इस प्रतिमा को बनाने के दौरान वो सात्विक आहार पर थे, और उनकी आँख में जख्म भी आया।

अयोध्या के लिए वो सबसे उत्तम प्रतिमा बनाना चाहते थे। इस दौरान वो 6 महीने तक अपने परिवार वालों तक से नहीं मिले। अयोध्या में वो अपने कुलदेव की पूजा के साथ दिन की शुरुआत करते थे। इसके बाद वहाँ के पंडितों द्वारा की जाने वाली पूजा-अर्चना में हिस्सा लेते थे। रामकथा के विद्वानों ने उनकी मदद की, उन्हें बताया कि श्रीराम कैसे दिखते थे, उनमें आमजन क्या देखते हैं। मूर्ति बनाने के दौरान एक हादसा भी हो गया और उनकी आँख में एक पत्थर का नुकीला टुकड़ा घुस गया था।

इसके बाद उनकी सर्जरी हुई। कई दिनों तक उन्हें एंटीबायोटिक और पेनकिलर्स पर रखा गया। हालाँकि, रामलला की भव्य प्रतिमा गढ़ने से उन्हें कुछ भी नहीं रोक सका। उनकी पत्नी विजेता ने ‘न्यू इंडियन एक्सप्रेस’ को ये जानकारी दी है। अरुण योगीराज 2008 में मैसूर यूनिवर्सिटी से MBA कर चुके हैं, लेकिन निजी कंपनी में नौकरी छोड़ कर उन्होंने अपने पारिवारिक पेशे को चुना। मैसूर के गुज्जे गौदाना पुरा स्थित एक जगह से पत्थर लाया गया, जिससे रामलला की प्रतिमा गढ़ी गई है। ये दक्षिण भारत के सबसे प्राचीन पत्थरों में से एक है।

अरुण योगीराज ने पहले ही कहा था कि ये भगवान राम के बाल स्वरूप की प्रतिमा है, लेकिन ये दिव्य भी होनी चाहिए क्योंकि लोग उनमें ईश्वर को देख कर दर्शन करेंगे। अरुण योगीराज के दादाजी ने ही उनके मूर्तिकार बनने की भविष्यवाणी कर दी थी। वो बसवन्ना शिल्पी के 17 पोते-पोतियों में से एक हैं। उनके पिता का नाम योगीराज है। उनके दादा ने गायत्री मंदिर और भुवनेश्वरी मंदिर की प्रतिमाओं को गढ़ा। बसवन्ना शिल्पी मैसूर राजघराने के शिल्पश्री सिद्धलिंगा स्वामी के प्रिय शिष्यों में से एक थे।

बवासीर के कारण शराब घोटाले के आरोपित को जमानत, AAP का कम्युनिकेशन इंचार्ज था विजय नायर: कोर्ट में कहा- मुंबई में कराऊँगा सर्जरी

बवासीर जेल से राहत दिला सकती है। आम आदमी पार्टी (AAP) नेता विजय नायर के मामले में यही हुआ है। दिल्ली की एक अदालत ने शराब घोटाले के आरोपितों में से एक और AAP के पूर्व कम्युनिकेशन इंचार्ज नायर को मेडिकल ग्राउंड पर दो हफ्ते की अंतरिम जमानत दी है। कोर्ट ने अंतरिम जमानत देते हुए 2 लाख रुपए के निजी मुचलके और इतनी ही जमानत राशि जमा करने के लिए कहा है।

दिल्ली के कथित शराब घोटाले में आरोपित विजय नायर पिछले 14 महीनों से जेल में हैं। उन्हें जमानत देते हुए राऊज कोर्ट के स्पेशल जज एमके नागपाल ने कहा, “याचिकाकर्ता विजय नायर को इस केस में दो हफ्ते की अंतरिम जमानत दी जाती है। जमानत की ये अवधि बाहर निकलने के दिन से दो हफ्ते के लिए ही होगी।”

हालाँकि, उन्होंने बवासीर की बीमारी का हवाला देते हुए 8 हफ्ते यानी दो महीने की अंतरिम जमानत की माँग करते हुए कोर्ट में याचिका दी थी। उन्होंने दलील दी थी कि वो ग्रेड-III के बवासीर के मरीज हैं और डॉक्टरों ने उन्हें सर्जरी की सलाह दी है। हालाँकि, अदालत ने विजय नायर की दलील नहीं मानी और सिर्फ दो सप्ताह की अंतरिम जमानत दी।

कोर्ट ने कहा कि जमानत अवधि के दौरान नायर न तो किसी सुबूत से छेड़छाड़ करेंगे और न ही किसी गवाह को प्रभावित करेंगे। वे किसी तरह की आपराधिक गतिविधियों में शामिल नहीं होंगे। कोर्ट ने नायर को हिदायत दी है कि वो शराब घोटाला केस से जुड़े किसी सह आरोपित, संदिग्ध या गवाह से बातचीत या मुलाकात नहीं करेंगे। जमानत की किसी शर्त का उल्लंघन नहीं करने को लेकर चेतावनी दी है।

विजय नायर की ओर से रेबेका ने कोर्ट में दलील दी कि ट्रायल से पहले लंबे वक्त तक हिरासत में रहने की वजह से उनके मुवक्किल की सेहत पर गंभीर असर पड़ा है और उन्हें कई सेहत संबंधी दिक्कतों का सामना करना पड़ा है। रेबेका ने कहा कि उनके मुवक्किल को सर्जरी की जरूरत है, जो हिरासत में नहीं हो सकती है। वह मुंबई के स्थायी निवासी होने की वजह से वो वहाँ ही सर्जरी कराना चाहते हैं।

हालाँकि, ईडी ने AAP नेता नायर की जमानत याचिका का विरोध किया। ईडी का कहना था कि आरोपित की सर्जरी खतरे वाली नहीं है। ये सर्जरी न्यायिक हिरासत में रहते हुए भी किसी रेफरल अस्पताल में की जा सकती है। ईडी ने कहा कि जेल में नायर का अच्छे से ध्यान रखकर इलाज मुहैया कराया जा रहा है। हालाँकि, नायर ने कहा कि उन्हें जल्द सेहतमंद होने के लिए परिवार के सदस्यों के जरूरत है।

बताते चलें कि शराब घोटाला केस में नायर को नवंबर 2022 में हिरासत में लिया गया था। ईडी की गिरफ्तारी के 26 महीने से अधिक वक्त में यह पहली बार है कि नायर को जमानत दी गई है। दिल्ली की इसी अदालत ने जुलाई 2023 में नायर की जमानत याचिका खारिज कर दी थी। बताते चलें कि सितंबर 2022 में सीबीआई ने नायर को गिरफ्तार कर लिया था।

इससे पहले शराब घोटाले के एक अन्य आरोपित समीर महेंद्रू को भी कोर्ट ने अंतरिम जमानत दे दी थी। इस जमानत को 22 जनवरी 2024 तक बढ़ा दिया है। इंडोस्पिरिट के प्रबंध निदेशक समीर महेंद्रू को उनकी पत्नी की सर्जरी के कारण अंतरिम जमानत दी गई है। इससे पहले दिसंबर 2023 के शुरुआत में शराब घोटाले के एक अन्य आरोपित बिनॉय बाबू को सुप्रीम कोर्ट को जमानत दे दी थी।

इससे पहले मई 2023 में दिल्ली आबकारी नीति घोटाले (Delhi Excise Policy Scam) से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में आरोपित राजेश जोशी और गौतम मल्होत्रा को को भी राउज एवेन्यू कोर्ट ने जमानत दे दी थी। कोर्ट ने दोनों आरोपितों को दो-दो लाख रुपए के निजी मुचलके पर जमानत दी थी।

बताते चलें कि शराब घोटाले में दिल्ली के पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया और राज्यसभा सांसद संजय सिंह सहित कुछ अन्य आरोपितों को भी गिरफ्तार करके जेल में डाला गया है। इन दोनों को कोर्ट ने जमानत देने से इनकार कर दिया था। वहीं, मनीष सिसोदिया को अपनी बीमार पत्नी से मिलने के लिए कोर्ट ने नवंबर 2023 में 6 घंटे की अनुमति दी थी।

मनीष सिसोदिया की पत्नी सीमा सिसोदिया खतरनाक एवं लाइलाज बीमार से पीड़ित हैं। उन्हें मल्टीपल स्केलेरोसिस (Multiple sclerosis) है। इस बीमारी में इंसान के दिमाग और रीढ़ की हड्डी को अक्षम हो जाती है। यह शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली पर हमला करती है, जिसके कारण पीड़ित को अपने शरीर पर नियंत्रण नहीं रहता है।

मनीष सिसोदिया के घर में उनकी पत्नी के अलावा और कोई नहीं है। उनका एक बेटा है, जो अपनी पढ़ाई के लिए विदेश में रहता है। मनीष सिसोदिया ने कहा था कि वे अपनी पत्नी का ख्याल रखने वाले अकेले व्यक्ति हैं। इसके आधार पर उन्होंने कोर्ट से कई बार जमानत की अपील की थी। अप्रैल में भी उनकी पत्नी की तबीयत बिगड़ने पर अपोलो में भर्ती कराया गया था।

शोएब मलिक का तीसरा निकाह: सानिया मिर्जा को तलाक दिए बिना तलाकशुदा हीरोइन के साथ ‘अलहमदुलिल्लाह’, मेकअप आर्टिस्ट्स को करती है टॉर्चर

पाकिस्तानी क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान शोएब मलिक ने अभिनेत्री सना जावेद से निकाह रचा लिया है। लगभग 2 दशकों तक पाकिस्तान के लिए बतौर ऑलराउंडर अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट खेल चुके शोएब मलिक ने दूसरी शादी भारत की स्टार्ट टेनिस खिलाड़ी रहीं सानिया मिर्जा के साथ की थी। अब शोएब मलिक ने सना जावेद के साथ निकाह की तस्वीरें इंस्टाग्राम पर पोस्ट की हैं। उर्दू मनोरंजन इंडस्ट्री की अदाकारा सना जावेद भी तलाकशुदा हैं। 2020 में उन्होंने उमैर जसवाल से शादी की थी।

शादी के कुछ ही दिनों बाद दोनों के बीच सब ठीक न होने की चर्चाएँ चलने लगीं। दोनों ने अपने-अपने सोशल मीडिया हैंडल्स से एक-दूसरे के साथ तस्वीरें भी डिलीट कर दी थीं। इसके बाद उनका तलाक हो गया। इधर शोएब मलिक और सानिया मिर्जा के भी अलग होने की चर्चाएँ गर्म रहीं। ‘ऐ मुश्ताक ऐ ख़ाक’ और ‘डंक’ सहित कई टीवी शो में नज़र आ चुकीं सना जावेद म्यूजिक वीडियोज में भी दिखती हैं। 2010 में जब शोएब मलिक ने सानिया मिर्जा से हैदराबाद में शादी की थी, तब भी उन्होंने पहली पत्नी से तलाक नहीं लिया था।

उसके बाद आयशा सिद्दीकी ने सबके सामने आकर बताया था कि वो शोएब मलिक की पहली पत्नी हैं और उनसे तलाक लिए बिना वो दूसरी शादी नहीं कर सकते। पहले तो शोएब मलिक ने इनकार किया, लेकिन फिर उन्हें आयशा सिद्दीकी से तलाक लेना पड़ा था। हाल ही में सैन्य मिर्जा ने भी एक इंस्टाग्राम पोस्ट डाल कर लिखा था कि शादी कठिन है, तलाक कठिन है, अपना कठिन चुनें। उन्होंने लिखा था कि ज़िन्दगी कभी आसान नहीं रहती। उन्होंने भी शोएब मलिक के साथ तस्वीरें डिलीट की थीं

पिछले साल जब शोएब मलिक ने सना जावेद को जन्मदिन विश किया था, तभी से उनके एक-दूसरे को डेट करने की चर्चाएँ थीं। ‘प्यारेलाल अफजल’ सीरियल में काम करने वाली सना जावेद पर जूनियरों और मेकअप आर्टिस्ट्स के साथ सेट पर दुर्व्यवहार करने के आरोप लग चुके हैं, तब शोएब मलिक ने उनका समर्थन किया था। शोएब मलिक ने ट्विटर पर शादी की तस्वीर डाल कर ‘अलहमदुलिल्लाह’ भी लिखा। शोएब मलिक और सानिया मिर्जा का इझान नाम का एक बेटा भी है, जिसका जन्म 2018 में हुआ था।

टाइल्स कारोबारी के 3 पालतू कुत्तों ने स्कूली बच्चों को दौड़ाया, ट्रेन से कटकर भाई-बहन की मौत: राजस्थान में हादसे के बाद पुलिस ने दर्ज की FIR

राजस्थान से एक दर्दनाक घटना सामने आई है। यहाँ एक पालतू कुत्ते से बचने के चक्कर में दो मौसेरे भाई-बहन एक मालगाड़ी के नीचे आ गए। इससे उनकी दर्दनाक मौत हो गई। दोनों भाई-बहन स्कूल से लौट रहे थे। उसी दौरान ओम प्रकाश राठी नाम के व्यक्ति के तीन कुत्ते बच्चों को दौड़ा लिए। जिसके कारण वे भागने लगे और रेलवे ट्रैक पर जा पहुँचे। वहीं, इस घटना में तीन अन्य बच्चे बाल-बाल बच गए इस घटना को लेकर इलाके में तनाव है।

हादसा जोधपुर के ‘माता का थान’ इलाके में शुक्रवार (19 जनवरी 2024) को दोपहर में हुआ। दरअसल, बनाड़ के गणेशपुरा के रहने वाले 14 साल के युवराज सिंह 12 साल की अपनी बहन अनन्या कँवर एवं अन्य साथियों के साथ स्कूल से लौट रहे थे। दोनों भाई-बहन आर्मी पब्लिक स्कूल में 7वीं और 5वीं क्लास में पढ़ते थे। दोनों अपने तीन साथियों के साथ शुक्रवार की दोपहर स्कूल से लौट रहे थे।

इस दौरान रास्ते में 3 पालतू कुत्ते उन्हें देखकर भौंकने लगे और उनके पीछे पड़ गए। इससे डरकर बच्चे भागने लगे। भागते-भागते तीन बच्चे रेलवे ट्रैक पर पहुँच गए। इसी दौरान वहाँ से गुजर रही एक मालगाड़ी से दोनों कट गए। वहीं, दो बच्चे इस घटना में बाल-बाल बच गए। हादसे के बाद पुलिस ने दोनों को पोस्टमार्टम कराने के बाद उन्हें परिजनों को सौंप दिया।

जिस जगह पर यह हादसा हुआ, वह जोधपुर बनाड़ कैंट स्टेशन से 50 मीटर दूर है। हादसे की जानकारी पर डीपीसी अमृता दुहन, एडीसीपी नाजिम अली, मंडोर के एसीपी पीयूष कविया सहित कई अधिकारी भी मौके पर पहुँचे। पुलिस ने राठी पर गैर-इरादतन हत्या का मामला दर्ज कर लिया है। वहीं, जोधपुर नगर निगम ने उसके चारों कुत्तों को उठा लिया है।

हादसे की जानकारी मिलने पर बच्ची के पिता आर्मी से रिटायर प्रेम सिंह अपने अन्य परिजनों के साथ घटनास्थल पर पहुँचे। वहीं, युवराज के पिता मदन सिंह कर्नाटक में है। प्रेम सिंह ने आरोप लगाया है कि रेलवे ट्रैक के पास ओमप्रकाश राठी का घर है। उसने चार कुत्ते पाल रखे हैं। उन कुत्तों को बच्चों के पीछे दौड़ाया गया, जिसके कारण बच्चों की जान चली गई।

जिस जगह हादसा हुआ, वहाँ मुख्य सड़क और कॉलोनी के बीच रेलवे ट्रैक है। इस पर 2 किलोमीटर तक कोई क्रॉसिंग नहीं है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि राठी इन कुत्तों को खुला छोड़कर रखता है, जिसके कारण यह हादसा हुआ है। पुलिस ने ओमप्रकाश राठी के पूरे परिवार को थाने ले जाया गया, जहाँ पूछताछ की जा रही है।

बताया जा रहा है कि इन कुत्तों को वहीं का रहने वाला ओम प्रकाश राठी ने पाल रखे हैं। इनमें दो डॉग जर्मन शेफर्ड और एक पॉमेलियन ब्रीड का था। भास्कर की रिपोर्ट के मुताबिक, राठी टाइल्स का कारोबार करता है। उसने टाइस्ल अवैध रूप से सामने की प्लॉट और अपने घर के बाहर रखी है। टाइस्ल चोरी ना हो, इसलिए वह कुत्तों को खुला छोड़कर रखता है।