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शोभा यात्रा पर पथराव, हिंदुओं की गाड़ियों पर लाठी-डंडे से हमला: प्राण-प्रतिष्ठा से पूर्व गुजरात-मुंबई में हिंसा की खबर; राम मंदिर को उड़ाने की धमकी भी

राम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा से पहले कुछ जगहों से हिंसा की खबरें हैं। कहीं बताया जा रहा है कि मुस्लिम भीड़ ने छतों से पत्थरबाजी की है तो कहीं पर चलती सड़क पर हिंदुओं को निशाना बनाया है। एक जगह तो तिलमिलाहट में इस्लामी कट्टरपंथी ने अयोध्या के राम मंदिर को ही उड़ा डालने की धमकी दी है।

गुजरात में पत्थरबाजी

पहली खबर गुजरात के मेहसाना की है। वहाँ राम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा से पहले भगवान राम की निकाली गई शोभा यात्रा पर छतों से पत्थरबाजी हुई। हिंदुओं पर ये हमले इतनी तेजी से हो रहे थे कि पुलिस को स्थिति काबू करने के लिए आँसू गैस के छोड़ने पड़े। इलाके में पुलिस बल तैनात है और पत्थरबाजों पर कार्रवाई करते हुए 15 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। इनमें महिलाएँ भी शामिल हैं।

पुलिस कार्रवाई की जानकारी देते हुए रेंज आईजी ने कहा, ”आज इलाके में जुलूस के दौरान पथराव हुआ। पुलिस ने तत्काल कार्रवाई करते हुए स्थिति को नियंत्रण में कर लिया, जिससे कोई बड़ी घटना नहीं घटी। फिलहाल इलाके में शांति है और पुलिस गश्त कर रही है। फिलहाल 15 लोगों को राउंडअप किया गया है। जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।”

मुंबई में सनातन यात्रा पर भीड़ का हमला

इसी तरह मुंबई के मीरा रोड से भी खबर आ रही हैं कि सनातन यात्रा पर भीड़ ने हमला किया है। ये भीड़ इस्लामी कट्टरपंथियों की थी। कुछ वीडियोज सोशल मीडिया पर तेजी से शेयर हो रही हैं। वीडियो में दिख रहा है कि चलती सड़क पर भीड़ उन गाड़ियों को निशाना बना रही है जिनके ऊपर भगवान राम और हनुमान जी की तस्वीर के साथ भगवा पताके लगे हैं।

अराजक तत्वों को गाड़ी के शीशे तोड़ते, हिंदुओं पर हमला करते, गंदी-गंदी गाली बकते वीडियोज में साफ देखा जा सकता है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, हिंसा का शिकार लोगों का कहना है कि वे शांति पूर्वक धर्म ध्वजा लेकर यात्रा निकाल रहे थे लेकिन तभी उनके सामने ये भीड़ आई जिसने उनके ऊपर अचानक हमला कर दिया। आरोप ये भी हैं कि हमले के दौरान भीड़ अल्लाह-हू-अकबर और नारा-ए-तकबीर के नारे लगा रही थी। ये वीडियोज विचलित करने वाली हैं। प्राण-प्रतिष्ठा से पहले हिंदुओं को निशाना बनाया गया है। फोटो में महिला के माथे से खून निकलता भी दिखा।

टाइम्स नाऊ में प्रकाशित खबर में अल्लाह-हू-अकबर और नारा-ए-तकबीर नारों का जिक्र

टाइम्स नाऊ की रिपोर्ट के अनुसार, इस मामले में नया नगर थाने में प्राथमिकी दर्ज हुई है। केस को आईपीसी की धारा 307 और 153 ए के साथ अज्ञातों के विरुद्ध दर्ज किया गया है। पुलिस आरोपितों को ढूँढने का प्रयास कर रही है। सीसीटीवी खंगाले जा रहे हैं। पुलिस का कहना है कि स्थिति कंट्रोल में है इसलिए अफवाहों पर ध्यान न दें और शांति बनाए रखें। कुछ रिपोर्ट्स में इस मामले को सामान्य हाथापाई का विवाद भी कहा जा रहा है।

बिहार में ‘दाऊद इब्राहिम का आतंकी’ गिरफ्तार

मुंबई गुजरात के अलावा बिहार में भी एक कट्टरपंथी युवक मुं इंतखाब के खिलाफ कार्रवाई हुई है। इसने कॉल करके राम मंदिर को उड़ाने की धमकी दी थी। बिहार पुलिस ने कार्रवाई करते हुए इसे अररिया जिले के पलासी थाना क्षेत्र से गिरफ्तार किया है। आरोपित बलुआ कलियागंज का रहने वाला है। इसने 112 नंबर पर कॉल करके धमकी दी थी। आरोपित खुद को छोटा शकील बता रहा था। साथ ही यह भी कि वह दाऊद इब्राहिम का आतंकी है। पुलिस ने मामले की संवेदनशीलता देखते हुए आरोपित को गिरफ्तार कर लिया।

‘सौभाग्य से मिला राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा देखने का मौका’: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने PM मोदी को लिखी चिट्ठी, कहा – राम-कथा के आदर्शों से राष्ट्र-निर्माताओं को मिली प्रेरणा

अयोध्या में रामलला के मंदिर में प्राण प्रतिष्ठा समारोह से एक शाम पहले राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखा है। उन्होंने पत्र में लिखा है कि ये सौभाग्य ही है कि उन्हें राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा देखने का मौका मिल रहा है। राष्ट्रपति ने अपनी चिट्ठी में लिखा है कि ‘राम कथा के आदर्शों से राष्ट्र निर्माताओं को प्रेरणा मिली है।’ अपने पत्र में उन्होंने पीएम मोदी को अयोध्या में होने वाले राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठान के लिए धन्यवाद कहा है।

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने अपने पत्र में लिखा है, “आदरणीय श्री नरेंद्र भाई मोदी जी, अयोध्या धाम में नए मंदिर में प्रभु श्री राम की जन्म-स्थली पर स्थापित मूर्ति की प्राण प्रतिष्ठा के लिए आप विधिवत तपश्चर्या कर रहे हैं। इस अवसर पर, मेरा ध्यान इस महत्वपूर्ण तथ्य पर है कि उस पावन परिसर में, आपके द्वारा सम्पन्न की जाने वाली अर्चना से हमारी अद्वितीय सभ्यतागत यात्रा का एक ऐतिहासिक चरण पूरा होगा। आपके द्वारा किया गया 11 दिवसीय कठिन अनुष्ठान, पवित्र धार्मिक पद्धतियों का अनुसरण मात्र नहीं है बल्कि त्याग की भावना से प्रेरित सर्वोच्च आध्यात्मिक कृत्य है और प्रभु श्री राम के प्रति सम्पूर्ण समर्पण का आदर्श है।

सौभाग्य से मिला राम मंदिर प्रतिष्ठान देखने का मौका

राष्ट्रपति ने आगे लिखा, “आपकी अयोध्या धाम की यात्रा के इस पावन अवसर पर मैं आपको अपनी हार्दिक शुभकामनाएँ प्रेषित करती हूँ। अयोध्या धाम में प्रभु श्री राम के भव्य मंदिर के उद्घाटन से जुड़े देशव्यापी उत्सवों के वातावरण में, भारत की चिरंतन आत्मा की उन्मुक्त अभिव्यक्ति दिखाई देती है। यह हम सभी का सौभाग्य है कि हम सब अपने राष्ट्र के पुनरुत्थान के एक नए काल-चक्र के शुभारम्भ के साक्षी बन रहे हैं।”

राम-कथा के आदर्शों से राष्ट्र-निर्माताओं को मिली प्रेरणा

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने पत्र में आगे लिखा- प्रभु श्री राम द्वारा साहस, करुणा और अटूट कर्तव्यनिष्ठा जैसे जिन सार्वभौमिक मूल्यों की प्रतिष्ठा की गई थी उन्हें इस भव्य मंदिर के माध्यम से जन-जन तक पहुँचाया जा सकेगा। प्रभु श्री राम हमारी सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत के सर्वोत्तम आयामों के प्रतीक हैं। वे बुराई के विरुद्ध निरंतर युद्धरत अच्छाई का आदर्श प्रस्तुत करते हैं। हमारे राष्ट्रीय इतिहास के अनेक अध्याय, प्रभु श्री राम के जीवन चरित और सिद्धांतों से प्रभावित रहे हैं और राम-कथा के आदर्शों से राष्ट्र-निर्माताओं को प्रेरणा मिली है।

पत्र में आगे लिखा है, “गाँधीजी ने बचपन से ही रामनाम का आश्रय लिया और उनकी अंतिम सांस तक रामनाम उनकी जिह्वा पर रहा। गाँधी जी ने कहा था ‘यद्यपि मेरी बुद्धि और हृदय ने, बहुत पहले ही, ईश्वर के सर्वोच्च गुण और नाम को, सत्य के रूप में अनुभव कर लिया था, मैं सत्य को राम के नाम से ही पहचानता हूँ। मेरी अग्नि परीक्षा के सबसे कठिन दौर में राम का नाम ही मेरा रक्षक रहा है और अब भी वह नाम ही मेरी रक्षा कर रहा है। लोगों की सामाजिक पृष्ठभूमि से प्रभावित हुए बिना, भेदभाव से मुक्त रहकर, हर किसी के साथ, प्रेम और सम्मान का व्यवहार करने के प्रभु श्री राम के आदर्शों का हमारे पथ- प्रदर्शक विचारकों की बौद्धिक चेतना पर भी गहरा प्रभाव पड़ा है।”

मानवता के सर्वोत्कृष्ट पक्षों के प्रतीक हैं भगवान राम

न्याय और जन-कल्याण पर केन्द्रित प्रभु श्री राम की रीति का प्रभाव, हमारे देश के शासन संबंधी वर्तमान दृष्टिकोण पर भी दिखाई देता है। इसका उदाहरण, हाल ही में, आपके द्वारा, अति पिछड़े जनजातीय समुदायों के कल्याण हेतु ‘पीएम- जन मन’ पहल के तहत, अनेक लाभकारी सहायताओं की पहली किस्त जारी करने में स्पष्ट दिखाई दिया। आपके द्वारा अपने संबोधन में माता शबरी का उल्लेख करने से एक हृदयस्पर्शी अनुभूति हुई। निश्चय ही, प्रभु श्री राम के मंदिर के साथ-साथ, जन-कल्याण कार्यों को देखकर माता शबरी को दोहरा संतोष प्राप्त होगा। प्रभु श्री राम, हमारी भारत-भूमि के सर्वोत्तम आयामों का प्रतीक हैं। वस्तुत: वे पूरी मानवता के सर्वोत्कृष्ट पक्षों के प्रतीक हैं। मेरी प्रार्थना है कि प्रभु श्री राम विश्व-समुदाय को सही मार्ग पर ले जाएँ; वे सभी के जीवन में सुख और शांति का संचार करें। सियावर रामचन्द्र की जय !

गौरतलब है कि 22 जनवरी 2024 को अयोध्या में भगवान राम अपने जन्मस्थान पर विराजमान हो जाएँगे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी उस समय गर्भगृह में मौजूद रहेंगे। सारी दुनिया की नजरें अयोध्या पर टिकी हैं।

2.5 लाख करोड़ तक पहुँचेगा टैक्स कलेक्शन, सिर्फ पर्यटन से ₹25000 करोड़ की एक्स्ट्रा कमाई: राम मंदिर भर देगा यूपी की झोली, SBI की रिपोर्ट आ गई

उत्तर प्रदेश की अयोध्या में नगरी में भगवान राम अपने जन्मस्थान पर विराजमान हो रहे हैं। ये शुभ घड़ी न सिर्फ भक्ति और अध्यात्म के लिहाज से बेहद अच्छी है, बल्कि ये उत्तर प्रदेश के विकास को नई ऊँचाईयों पर पहुँचाने की भी एक नई शुरूआत होगी। जी हाँ, स्टेट बैंक ऑफ इंडिया की एक रिपोर्ट जारी हुई है, जिसमें बताया गया है कि आने वाले समय में अयोध्या का भव्य राम मंदिर उत्तर प्रदेश के सरकार के लिए बेहद फायदेमंद रहेगा। अयोध्या से जुड़े पूरे धार्मिक-आर्थिक तंत्र की वजह से यूपी सरकार को हर साल कम से कम 20 से 25 हजार करोड़ रुपए का फायदा होगा।

SBI की एक रिपोर्ट में यह दावा किया गया है कि अयोध्या में राम मंदिर के पूरे होने और यूपी सरकार द्वारा पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए किए गए कामों की वजह से वित्त वर्ष 2025 में 20 से 25 हजार करोड़ रुपए की ज्यादा कमाई हो सकती है। साल 2022 में उत्तर प्रदेश में आए घरेलू पर्यटकों की ओर से जो खर्च किया गया था, वह 2.2 लाख करोड़ रुपए था। वहीं, विदेशी पर्यटकों की ओर से 10 हजार करोड़ रुपए खर्च किए गए थे। इस बार देखें तो यूपी सरकार के बजट में टैक्स कलेक्शन 2.5 लाख करोड़ रुपए तक पहुँच सकता है।

इस साल टूट जाएँगे सारे रिकॉर्ड

बता दें कि यूपी ने पर्यटन के क्षेत्र में साल 2023 में सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए थे। जहाँ साल 2021 की तुलना में साल 2022 में 200 प्रतिशत ज्यादा पर्यटक आए थे, जिनकी संख्या 32 करोड़ से ज्यादा थी, तो विदेशी पर्यटकों की संख्या भी 2.21 करोड़ को पार गई। चूँकि अब अयोध्या में रामलला की प्राण प्रतिष्ठा के बाद आम भक्तों का आना शुरू हो जाएगा, तो ये आँकड़ा बेहद तेजी से बढ़ेगा।

एसबीआई की रिपोर्ट को माने तो साल 2028 तक भारत की अर्थव्यवस्था 5 ट्रिलियन की हो जाएगी। अकेले यूपी की जीडीपी 50 बिलियन डॉलर को पार कर सकेगी। ये पूरे देश के किसी भी राज्य की तुलना दूसरे नंबर की रहेगी। वहीं, उत्तर प्रदेश राज्य को केंद्र की तीर्थयात्रा कायाकल्प और आध्यात्मिक विरासत संवर्धन अभियान (PRASHAD) योजना से बड़ा लाभ मिलता हुआ दिखाई दे रहा है। इसमें कहा गया है कि अयोध्या के राम मंदिर और राज्य सरकार की अन्य पर्यटन योजनाओं के चलते यूपी सरकार को मोटी कमाई होगी।

अयोध्या पहले से ही आस्था का बड़ा केंद्र है और यहां बड़ी संख्या में पर्यटक पहुँचते हैं। अब जबकि, राम मंदिर का उद्घाटन होने जा रहा है, तो इसके बाद पर्यटकों की संख्या में और बढ़ोतरी होने की उम्मीद जताई जा रही है।

‘जब अयोध्या में हो रही होगी रामलला की प्राण प्रतिष्ठा, केजरीवाल सरकार काटेगी दिल्ली की बिजली’: BJP नेता ने नोटिस का स्क्रीनशॉट शेयर कर किया दावा

दावा किया जा रहा है कि अरविंद केजरीवाल की सरकार दिल्ली में उस समय बिजली काट रही है, जब अयोध्या में रामलला की प्राण प्रतिष्ठा हो रही होगी। दिल्ली बीजेपी नेता कपिल मिश्रा ने दिल्ली में बिजली कंपनी द्वारा भेजे गए एक मैसेज का स्क्रीनशॉट शेयर करके ये दावा किया है। इस मैसेज में ये जानकारी दी गई है कि प्लान्ड शटडाउन के तहत 22 जनवरी, 2024 को सुबह 10.01 बजे से दोपहर 13.01 बजे तक बिजली की सप्लाई नहीं रहेगी। ये मैसेज बीएसईएसवाईपीएल की तरफ से भेजा गया है।

बीजेपी नेता कपिल मिश्रा ने ये स्क्रीनशॉट शेयर करके लिखा है, “दिल्ली में बिजली कंपनियों के द्वारा कल (22 जनवरी, 2024 को) सुबह 10 से 1 बजे तक बिजली सप्लाई नहीं होने के मेसेज भेजे जा रहे हैं। राम मंदिर के उत्सव में भागीदारी से दिल्ली की जनता को रोकने की ऐसी साज़िश शर्मनाक है। बिजली कंपनियों को कल (22 जनवरी, 2024 को) सुचारू बिजली सप्लाई सुनिश्चित करनी ही पड़ेगी। केजरीवाल गैंग की किसी भी नीच हरकत को स्वीकार नहीं किया जाएगा।”

अमात्य राक्षस नाम के एक्स यूजर ने लिखा, “कट्टर रोहिंग्या हृदय सम्राट आदरणीय लोकनायक ने दिल्ली में कल सुबह 10 बजे से दोपहर 1 बजे तक बिजली सप्लाई बंद करने का आदेश दिया है, यह कोई संयोग नहीं अपितु प्रयोग है, ये नहीं चाहते कि दिल्ली वाले भगवान श्री राम की प्राण प्रतिष्ठा का सीधा प्रसारण देखें।”

शिवम त्यागी लिखते हैं, “नफ़रती चिंटू रामविरोधी केजरीवाल दिल्ली को श्रीराम मंदिर की प्राण-प्रतिष्ठा नहीं देखना चाहता इस तरह के मैसेज आ रहे हैं के दिल्ली में सुबह 10 बजे से 1 बजे तक इलेक्ट्रिसिटी ‘बिजली’ नहीं रहेगी। ये कालनेमि हैं सारे के सारे।”

गौरतलब है कि दिल्ली में इस समय सर्दियों के बढ़ने की वजह से बिजली की डिमांड काफी बढ़ चुकी है। दिल्ली में 5798 मेगावॉट तक की बिजली डिमाँड पहुँच चुकी है। ये आँकड़ा 19 जनवरी का है, जोकि एक रिकॉर्ड है। दिल्ली में पिछली सर्दियों का रिकॉर्ड 5726 मेगावाट (17 जनवरी 2023) और 5701 मेगावाट (12 जनवरी, 2023) था। 

रामलला की प्राण प्रतिष्ठा के दिन छुट्टी घोषित करने के खिलाफ बॉम्बे हाईकोर्ट पहुँच गए कानून के 4 छात्र, जज ने फटकार कर खारिज कर दी याचिका

बॉम्बे हाई कोर्ट ने लॉ की पढ़ाई कर रहे 4 छात्रों की याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें महाराष्ट्र सरकार के फैसले को चुनौती दी गई थी कि सोमवार (22 जनवरी, 2024) को अयोध्या में राम मंदिर के उद्घाटन के दिन राज्य में छुट्टी रहेगी। याचिकाकर्ताओं का तर्क था कि यह छुट्टी संविधान के अनुच्छेद 14, 15 और 25 का उल्लंघन करती है, जो धर्म की स्वतंत्रता और सभी नागरिकों के लिए समानता की गारंटी देता है। उन्होंने यह भी तर्क दिया कि यह छुट्टी धार्मिक भेदभाव को बढ़ावा देगी।

शिवांगी अग्रवाल और अन्य बनाम भारत संघ और अन्य मामले की सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति जी.एस. कुलकर्णी और न्यायमूर्ति नीला गोखले की पीठ ने याचिका खारिज कर दी। कोर्ट ने कहा कि छुट्टी एक नीतिगत निर्णय है और इसे चुनौती देने का कोई कानूनी आधार नहीं है। कोर्ट ने यह भी कहा कि याचिकाकर्ताओं ने यह नहीं दिखाया कि छुट्टी से किसी व्यक्ति के अधिकारों का उल्लंघन हुआ है।

‘बार एंड बेंच’ की रिपोर्ट के मुताबिक, हाईकोर्ट ने कहा कि ये निर्णय कार्यकारी निर्णय है। ये निर्णय धर्मनिरपेक्षता के सिद्धांतों के अनुरूप नहीं है और ये शक्ति के प्रयोग का मनमाना मामला भी नहीं है। हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ताओं की ओर से 2019 में सुप्रीम कोर्ट द्वारा अयोध्या जन्मभूमि फैसले पर सवाल उठाने पर फटकार भी लगाई। हाई कोर्ट ने कहा, ‘याचिकाकर्ताओं ने सुप्रीम कोर्ट की बुद्धिमत्ता पर सवाल उठाए हैं, जो कि खास मकसद से किया गया है। ऐसे आरोप कोई भी बुद्धिशील इंसान नहीं लगा सकता।’ हाई कोर्ट ने कहा कि ऐसा लगता है कि ये याचिका राजनीति से प्रेरित है और इसे प्रचार की चाहत रखने वालों की तरफ से दायर की गई है।

हाई कोर्ट ने पीआईएल के पीठ के सामने आने से पहले ही मीडिया में आ जाने को लेकर भी कड़ी टिप्पणी की। कोर्ट ने पूछा कि ये लीक कैसे हो गई। हालाँकि याचिकाकर्ताओं ने कहा कि ये पीआईएल सुबह से इस फाइल से उस फाइल की तरफ जा रही है, ऐसे में ये कैसे लीक हुई, इस बारे में उन्हें जानकारी नहीं है। इस मामले में हाई कोर्ट ने याचिका खारिज कर दी, साथ ही हिदायत भी दी कि कानून का छात्र होने के नाते याचिककर्ताओं को अपने विवेक का अच्छे से इस्तेमाल करना चाहिए।

हाई कोर्ट ने ये भी कहा कि याचिकाकर्ताओं ने केंद्र सरकार की 1968 की अधिसूचना को भी चुनौती दी है, लेकिन उस अधिसूचना को ही याचिका के साथ संलग्न नहीं किया है। ये याचिका महाराष्ट्र नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी (एमएनएलयू), गवर्नमेंट लॉ कॉलेज (जीएलसी), मुंबई और एनआईआरएमए लॉ यूनिवर्सिटी, गुजरात से एलएलबी कर रहे चार कानून छात्रों, शिवांगी अग्रवाल, सत्यजीत साल्वे, वेदांत अग्रवाल, खुशी बंगिया द्वारा दायर की गई थी। इस मामले में गनीमत ये रही कि हाई कोर्ट ने लॉ कर रहे छात्रों पर कोई जुर्माना नहीं लगाया। लेकिन हाई कोर्ट ने ऐसे मामलों में व्यक्तिगत रूप से पेश होने को लेकर भी सावधानी बरतने की सलाह दी।

मंच से ज्ञान बाँचते नीतीश कुमार, नीचे गूँजते रहे ‘तेजस्वी यादव ज़िंदाबाद’ के नारे: बिहार के सत्ताधारी गठबंधन में फिर से दिखी दरार, मुस्कुराते रहे RJD नेता

बीजेपी को 2024 आम चुनावों में हराने की जुगत भिड़ा रहे और I.N.D.I. गठबंधन के सर्वेसर्वा बने ‘सुशासन बाबू’ के राज में सबकुछ सही नहीं चल रहा है। इसका एक नमूना समस्तीपुर में श्रीराम जानकी मेडिकल कॉलेज और अस्पताल के उदघाटन समारोह में रविवार (21 जनवरी, 2024) देखने को मिला है।

कार्यक्रम में इसमें सीएम नीतीश कुमार और डिप्टी सीएम तेजस्वी यादव दोनों मौजूद थे, लेकिन जनता दल यूनाईटेड (JDU) और राष्ट्रीय जनता दल (RJD) की रार सामने आने में पल भर नहीं लगा। इस बीच सुशासन बाबू की तरफ से ऐसे इशारे भी हैं कि वो NDA का दामन फिर से थाम सकते हैं।

दरअसल हुआ ये कि प्रोटोकॉल के हिसाब से उप-मुख्यमंत्री यानी तेजस्वी यादव को पहले भाषण देना था, लेकिन सीएम नीतीश का पहले भाषण करवाया गया। बिहार सरकार के मंत्री विजय कुमार चौधरी ने मंच से ऐलान किया कि वक्त कम है, इसलिए सीएम नीतीश उनको दो मिनट उनको संबोधित करेंगे।

यहाँ पहले डिप्टी सीएम के तौर पर तेजस्वी यादव को बोलने नहीं दिया गया। अब जैसे ही सीएम ने मंच से भाषण शुरू किया समारोह स्थल पर तेजस्वी यादव जिंदाबाद के नारे गूँजने लगे। सीएम नीतीश ने लगभग एक मिनट भाषण दिया। इस दौरान कार्यकर्ता तेजस्वी के पक्ष में नारे लगाते रहे।

इस दौरान मंच पर मौजूद डिप्टी सीएम तेजस्वी यादव सहित अन्य लोग मंद-मंद मुस्कुराते दिखे। ये देखकर सीएम कुमार ने तेजस्वी यादव को बोलने के लिए कहा और फिर डिप्टी सीए तेजस्वी यादव ने भाषण दिया। हालाँकि इस दौरान उनके बगल में सीएम नीतीश कुमार खड़े रहे।

बताते चलें कि बिहार के सीएम और डिप्टी सीएम के समारोह स्थल पर पहुँचते ही उनके बीच की दूरियाँ वहाँ मौजूद लोगों को भी साफ नजर आ रही थी। जब सीएम नीतीश श्रीराम जानकी मेडिकल कॉलेज और अस्पताल के उद्घाटन शिलापट्ट का फीता काटने पहुँचे उस वक्त भी डिप्टी सीएम उनसे दूर ही खड़े रहे।

उनकी जगह सीएम के बगल में मंत्री विजय कुमार चौधरी थे। इसके बाद डिप्टी सीएम यादव एक कोने में जाकर खड़े हो गए। इसके बाद जब सीएम नीतीश मंच पर मौजूद लोगों का अभिवादन करने के लिए गए तो वहाँ आने में भी तेजस्वी यादव ने देर लगाई।

बताते चलें कि एक दिन पहले ही 20 जनवरी,2024 को सीएम नीतीश कैबिनेट में तीन मंत्रियों की जिम्मेदारी बदली है और ये तीनों ही मंत्री लालू यादव की आरजेडी कोटे से हैं। शिक्षा मंत्रालय संभाल रहे आरजेडी के चंद्रशेखर यादव को गन्ना विकास विभाग की जिम्मेदारी दी गई।

अब शिक्षा विभाग की जिम्मेदारी आलोक मेहता दी गई है। मंत्री ललित यादव को भूमि राजस्व विभाग का अतिरिक्त प्रभार दिया गया। ललित यादव के पास पहले से लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण विभाग है।

चंद्रशेखर यादव वहीं मंत्री हैं जो गाहे-बगाहे हिंदू-देवी देवताओं के खिलाफ विष वमन करते रहते हैं। जनवरी 2023 में उन्होंने दावा किया था कि हिंदू महाकाव्य रामचरितमानस, मनु स्मृति और साथ ही ‘बंच ऑफ थॉट’ किताब समाज में नफरत फैलाती हैं।

बीते साल ही 7 सितंबर को उन्होंने नालंदा में एक और विवादास्पद बयान देते हुए दावा किया कि पैगंबर मोहम्मद ‘मर्यादा पुरोषोत्तम’ थे और भगवान ने उन्हें बुराई को मिटाने के लिए धरती पर भेजा था।

साफ है कि पूर्व शिक्षा मंत्री के इन आपत्तिजनक बयानों से सीएम नीतीश की गठबंधन सरकारी की खासी किरकिरी हुई थी। अब जब सीएम नीतीश के लिए बीजेपी के दरवाजे बंद हो चुके हैं कहने वाले गृहमंत्री अमित शाह उनके लिए नरम पड़े हैं। ऐसे में उनके और आरजेडी में दूरी होना स्वाभाविक है।

गृहमंत्री शाह ने एक सवाल के जवाब में हाल ही में कहा है कि NDA को छोड़कर गए नेता अगर वापस आना चाहते हैं और अगर इस संबंध में कोई प्रस्ताव आएगा तो उस पर विचार किया जाएगा। वहीं 30 जनवरी, 2024 को जेपी नड्डा बिहार के कटिहार में एक जनसभा करने जा रहे हैं।

नीतीश की फितरत रही है कि वो कभी भी करवट बदल सकते हैं। उनके और आरजेडी के गठबंधन को लेकर अमित शाह पहले ही चेता चुके हैं कि ये तेल और पानी का गठबंधन है जो कभी एक नहीं हो सकता है और अब आसार ऐसे ही नजर आ रहे हैं।

I.N.D.I गठबंधन को खड़ा करने वाले नीतीश कुमार उससे ही कटते नजर आ रहे है। दरअसल इसकी फिक्र आरजेडी अध्यक्ष लालू यादव को पहले ही सताने लगी थी। यही वजह रही कि उन्होंने कॉन्ग्रेस के गाँधी परिवार के पास नीतीश को इंडी गठबंधन का संयोजक बनाने की बात कही थीं।

लेकिन पलटीमार नीतीश कुमार इससे भी पलटी मार गए उन्होंने ये पद लेने से मना कर दिया। थक हार कर गठबंधन को कॉन्ग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे को I.N.D.I. गठबंधन का अध्यक्ष बनानना पड़ा।

इससे लालू का तेजस्वी यादव को बिहार के सीएम बनाने का ख्वाब टूटता नजर आ रहा है। वैसे ही I.N.D.I. गठबंधन के दलों में एक जुटता नजर नहीं आ रही है। जहाँ टीएमसी सुप्रीमो ममता बनर्जी और बीएसपी सुप्रीमो मायावती ने लोकसभा चुनाव 2024 में अपने दम पर उतरने का ऐलान किया है।

वहीं सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव के तेवर भी कम नहीं है। ऐसे में नीतीश को अपनी कुर्सी बचाने के लिए बीजेपी की नाव का ही सहारा है। एक तरफ सीएम नीतीश कुमार को बिहार में अपनी पार्टी की साख बचाने की फिक्र है तो दूसरी तरफ अपनी सीएम की कुर्सी बचाने की। इसके लिए उन्होंने धीरे-धीरे ही सही लेकिन पक्की कोशिशें शुरू कर दी हैं।

PM मोदी के कार्यक्रम में लगे थे जो सफाईकर्मी, DMK के नगर निगम ने उनके लिए कूड़े की गाड़ी में भेजा खाना: श्रीरंगम मंदिर में पहुँचे थे प्रधानमंत्री

तमिलनाडु के तिरुचिरापल्ली से सफाईकर्मियों के अपमान का एक बड़ा मामला सामने आया है। यहाँ प्रधानमंत्री मोदी के दौरे से पहले साफ-सफाई के काम में लगे सफाई कर्मचारियों को कूड़े की गाड़ी में खाना भेजा गया। यह कारनामा तिरुचिरापल्ली नगर निगम ने किया।

20 जनवरी, 2024 को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का तिरुचिरापल्ली नगर निगम के अंतर्गत आने वाले श्रीरंगम का दौरा था। इस दौरे में वह रंगनाथस्वामी मंदिर जाने वाले थे। इससे पहले यहाँ पर शहर की साफ सफाई करने के लिए लगभग 200 लोगों को ड्यूटी पर लगाया गया था।

इनको शुक्रवार (19 जनवरी, 2024) को जब खाना भेजा गया तो यह एक कूड़े की गाड़ी में भेजा गया। इस गाड़ी में इनके खाने के बर्तन रखे गए। गाड़ी में पहले से प्लास्टिक का कूड़ा भरा हुआ था। इसकी तस्वीरें लोगों ने खींच कर वायरल कर दीं। लोगों ने तिरुचिरापल्ली नगर निगम पर प्रश्न खड़े किए।

आनन फानन में इसके बाद यह खाना वापस किया गया। तिरुचिरापल्ली नगर निगम इस पूरे विवाद से बचता भी नजर आया और उसके अधिकारियों ने बताया कि खाना ऑटो से भेजा गया था लेकिन इसे बाद में कूड़े वाली गाड़ी पर रख दिया गया। इसे अम्मा कैंटीन में बनाया गया था। बताया जा रहा है लोगों के कहने के बाद यह खाना वापस कैंटीन भेजा गया।

कूड़े की गाड़ी में खाना देखने वाले लोगों ने शिकायत की कि अगर वह यह नहीं देखते तो यही खाना कर्मचारियों में वितरित कर दिया जाता। हालाँकि इस मामले में बैकफुट पर आने के बाद तिरुचिरापल्ली नगर निगम ने तीन कर्मचारियों को निलंबित भी कर दिया। गौरतलब है कि त्रिची नगर निगम पर तमिलनाडु की सत्ताधारी पार्टी डीएमके ही काबिज है।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी यहाँ श्रीरंगम में मंदिर में दर्शन और पूजन अर्चन करने पहुँचे थे। यह राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा से पहले की उनकी उपासना का हिस्सा है। वह आज (21 जनवरी, 2023) को तमिलनाडु के रामेश्वरम पहुँचे हैं और उस जगह पर साधना की जहाँ से रामसेतु चालू होता है।

‘रामायण-महाभारत को क्यों कहें माइथोलॉजी? क्यों नहीं है अपने कल्चर में विश्वास?’ तेलुगु स्टार बोले – ये हमारा इतिहास

तेलुगु फिल्मों के स्टार विष्णु मंचू ने रामायण और महाभारत को ‘माइथोलॉजी’ बताने पर नाराजगी जताई है। उन्होंने इसे इतिहास बताया है। मंचू ने कहा कि भारतीय संस्कृति के सबूत हर तरफ हैं। भगवान राम द्वारा बनाए गए सेतु से लेकर द्वारका नगरी तक। नासा तक हिंदू संस्कृति से जुड़े प्रतीकों की स्थिति स्पष्ट कर चुका है। मंचू ने भारतीय संस्कृति पर सवाल उठाने वालों को आड़े हाथों लिया।

तेलुगु सिनेमा के स्टार और मशहूर फिल्मी खानदान से तालुक्क रखने वाले विष्णु मंचू ‘कन्नप्पा’ नाम की फिल्म बना रहे हैं। इस फिल्म का स्क्रीनप्ले भी उन्होंने ही लिखा है और इसकी कहानी पर भी काम किया है। विष्णु मंचू ने कहा कि लोगों को रामायण और महाभारत को ‘माइथोलॉजी’ कहने की जगह इतिहास के तौर पर समझना चाहिए। इससे जुड़े सबूत सामने हैं तो इसे असलियत के तौर पर देखना चाहिए।

विष्णु मंचू ने इंस्टाग्राम पर शेयर एक वीडियो में ये कहते दिखे कि कन्नप्पा फिल्म पर काम करते हुए वे ये सोचने पर मजबूर हुए कि क्या ये सब सिर्फ माइथोलॉजी है? ये सही नहीं है। उन्होंने कहा, “जब हम रामायण पढ़ते हैं और तथ्यों के साथ उसका मिलान करते हैं तो हमें पता चलता है कि यह सत्य को जानने का माध्यम है। राम सेतु एक पुल है जिसके अवशेष रामेश्वरम और श्रीलंका के बीच पाए गए हैं। इसी तरह महाभारत में भी द्वारका साक्षात विद्यमान है।”

विष्णु मंचू ने कहा कि उनका मानना है कि इतिहास जानना पर्याप्त नहीं है, बल्कि व्यक्ति को इतिहास को अपनाना भी चाहिए। कन्नप्पा ऐसा ही करने का एक प्रयास है। मंचू ने कहा कि यह फिल्म उनकी आस्था का एक हिस्सा है, जो भगवान शिव के सबसे महान भक्त की कहानी बताता है।

‘कन्नप्पा’ के बारे में बताते हुए विष्णु मंचू ने कहा, “कन्नप्पा एक सत्य कहानी है। श्री कालहस्ती मंदिर इसकी गवाही देने के लिए खड़ा है। हम भगवान शिव और माँ पार्वती को अपने माता-पिता की तरह मानते हैं। ये मंदिर और वायुलिंगम हजारों सालों से हैं। ये माइथोलॉजी नहीं है, ये एक सच्ची कहानी है। कन्नप्पा भगवान शिव के सबसे बड़े भक्त की सच्ची कहानी है।”

गौरतलब है कि अभिनेता-निर्देशक विष्णु मंचू न्यूजीलैंड में अपनी अपकमिंग फिल्म ‘कन्नप्पा’ का पहला शेड्यूल पूरा कर चुके हैं। मुकेश कुमार सिंह द्वारा निर्देशित यह फिल्म भगवान शिव के भक्त ‘कन्नप्पा’ की अद्भुत स्टोरी पर प्रकाश डालती है। इस फिल्म में प्रभास भगवान शिव की भूमिका निभा सकते हैं, जो मेहमान के तौर पर फिल्म में नजर आने वाले हैं। कुछ समय पहले मंचु इस फिल्म की शूटिंग के दौरान घायल हो गए थे।

BJP नेता के घर में घुसे, परिवार के सामने हथौड़े से सिर पर वार कर मार डाला: केरल की कोर्ट ने असलम, ज़ाकिर समेत 15 इस्लामी कट्टरपंथियों को पाया दोषी

केरल की एक स्थानीय अदालत ने दिसम्बर 2021 में एक बड़े भाजपा नेता की हत्या के मामले में 15 आरोपितों को दोषी ठहराया है। प्रतिबंधित इस्लामी संगठन PFI से जुड़े इन दोषियों को भाजपा के ओबीसी मोर्चा के प्रदेश सचिव रंजीत श्रीनिवास की हत्या के मामले में 22 जनवरी 2024 दिन सोमवार को सजा सुनाई जाएगी।

रंजीत श्रीनिवास को 19 दिसम्बर 2021 को उनके घर में घुसकर परिजनों के सामने कर दी गई थी। इस मामले में केरल के अलप्पुझा जिले की मवेलीकारा कोर्ट ने नईसम, मोहम्मद असलम, अनूप, अजमल, अब्दुल कलाम उर्फ़ सलाम, अब्दुल कलाम, सफरुद्दीन, मनषद, जसीब राजा, नवास, समीर, नज़ीर, जाकिर हुसैन, शाजी और शेरनस अशरफ को हत्या का दोषी पाया है।

ये सभी अलप्पुझा के ही रहने वाले हैं और प्रतिबंधित इस्लामिक संगठन PFI और इसकी राजनीतिक शाखा SDPI से जुड़े हुए हैं। इन दोषियों में शुरुआती 8 को रंजीत की हत्या में सीधे तौर पर दोषी माना गया है। इन पर कोर्ट ने धारा 302 समेत चार और धाराएँ लगाई हैं।

दोषी नम्बर 9 से 12 को लेकर यह तथ्य सामने आया है कि बाकी जब 8 आरोपित रंजीत की हत्या कर रहे थे, तब ये दोषी उनके घर के बाहर खतरनाक हथियारों के साथ पहरा दे रहे थे। इसके अलावा 13वें, 14वें और 15वें दोषी को इस हत्या की साजिश रचने और हत्या के मामले में दोषी करार दिया गया है।

कोर्ट के सामने इस मामले में पुलिस ने आरोपित अनूप के फ़ोन से बरामद एक हिटलिस्ट रखी थी। इस केस में यह बहुत बड़ा सबूत बना। इस हिटलिस्ट में रंजीत श्रीनिवास समेत 150 से अधिक लोगों के नाम थे। इनमें भाजपा और हिंदू संगठनों के कई नेताओं के नाम भी शामिल थे। कोर्ट के इस फैसले पर भाजपा ने खुशी जताई है।

रंजीत को हथौड़े से मारा, पैर अलग कर दिए, चेहरा बिगाड़ा कर की हत्या

भाजपा नेता के भाई अभिजीत ने बताया था, “भाई को कोच्चि में ओबीसी मोर्चा की समिति की पहली बैठक में शामिल होना था। हमारे परिवार के लिए यह दिन पवित्र था। दोनों भाई रविवार सुबह बेटी भाग्या को ट्यूशन छोड़कर घर लौटे, तब तक सब ठीक था। रंजीत के पास कोई वजह नहीं थी कि वो तंग हों। मगर SDPI नेता शान की कथित हत्या के बाद गैंग ने बदला लेने के लिए नेता की तलाश शुरू की।” 

अभिजीत ने बताया था कि उनके भाई के सिर में हथौड़े से वार हुआ और बीवी, माँ और छोटी बेटी के सामने उनका चेहरा कूच दिया गया। छोटी बेटी जब भागकर बचाने आगे आई तो गैंग ने उसके सामने तलवार निकाल ली। माँ को जमीन में गिराकर उन्हें कुर्सी से दबा दिया गया। उन्होंने बताया कि गुंडों ने उनके भाई रंजीत के पहले पैर काट दिए, ताकि वो भाग न सकें। इसके बाद उनकी बाइक तोड़ी गई। उनसे उनकी धोती ले ली गई।

TOI की रिपोर्ट के मुताबिक, घटना के कुछ देर पहले ही रंजीत की 71 वर्षीय माँ विनोदिनी अपने बेटे के लिए पूजा करके मंदिर से घर लौटी थीं। विनोदिनी ने बताया था, “घर की सीढ़ियाँ चढ़ते समय मुझे कुछ आवाज सुनाई दी। मुझे लगा कि कोई जबरदस्ती घर का दरवाजा खोलकर अंदर आ रहा है। उनके पास तलवारें थीं, हथौड़े थे। उन्होंने धक्का देकर दरवाजा खोला और घर में रखे टेबल का शीशा हथौड़े से तोड़ दिया। रंजीत आवाज सुनकर जैसे ही बाहर आया। उन्होंने उसके सिर पर हथौड़ा मार दिया।”

रंजीत की माँ के ऊपर भी हमला हुआ। उन्होंने बताया, “उपद्रवियों ने उसकी धोती उतारकर उसे मारा और जब मैं उनके पास रोते-रोते गई तो उन्होंने मुझे भी धक्का देकर नीचे गिरा दिया। उसकी बीवी लीशा आई तो उसे भी नीचे गिरा दिया। जब हृदया (रंजीत की छोटी बेटी) रोते आई तो उन लोगों ने तलवार निकाल ली। उन लोगों ने मेरी गर्दन पर भी तलवार रखकर मुझे डराया। इतनी सी देर में इन लोगों ने मेरे बेटे को बहुत बर्बरता से मार दिया।”

दरअसल, केरल में भाजपा नेता की हत्या से पूर्व अलाप्पुझा जिले में सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी ऑफ इंडिया के प्रदेश सचिव केएस शान की मृत्यु हो गई थी। बताया गया था कि 18 दिसंबर 2021 की शाम सात बजे के करीब शान बाइक से अपने घर जा रहा था, तभी मन्नानचेरी के पास एक तेज रफ्तार कार ने उसे टक्कर मार दी थी। इससे शान गंभीर रूप से घायल हो गया था और बाद में अस्पताल में दम तोड़ दिया था।

‘ये इसका सबूत है कि लोग क्या कर सकते हैं’: न्यूजीलैंड के मंत्रियों ने राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा को लेकर PM मोदी को दी बधाई, कहा – दुनिया भर में उनका सम्मान

अयोध्या में 22 जनवरी को होने जा रहे राम मंदिर में प्राण प्रतिष्ठा समारोह में देश में ही नहीं बल्कि विदेशों में भी उत्साह है। न्यूजीलैंड के मंत्री भी खासे उत्साहित हैं उन्होंने पीएम मोदी को बधाई देने के साथ ही उनकी तारीफ करते हुए कहा कि उनके नेतृत्व में राम मंदिर हकीकत बन पाया है।

न्यूजीलैंड के रेग्यूलेशन मंत्री डेविड सिमॉर राम मंदिर समारोह को लेकर खासे उत्साहित हैं। उन्होंने पीएम मोदी को बधाई देते हुए कहा, “पूरे भारत को जय श्री राम! इस शानदार स्मारक के उत्सव की खासकर पीएम मोदी सहित भारत के सभी लोगों को बधाई। पीएम के नेतृत्व में 500 वर्षों के बाद इस राम मंदिर निर्माण को संभव हो पाया है और ये हजारों साल तक रहेगा। ये इस बात का सुबूत है कि वास्तव में लोग क्या कर सकते हैं।”

उन्होंने आगे कहा, “मैं पीएम मोदी के साहस, ज्ञान और हिम्मत की सराहना करता हूँ, क्योंकि वो आज भारत के एक अरब से अधिक लोगों को दुनिया की चुनौतियों से निपटने में मदद करते हैं। मुझे उम्मीद है कि उनकी ये ताकत और विश्वास बना रहेगा। मेरी राम मंदिर आने की इच्छा हैं। मैं बेहद खुश हूँ कि मुझे भारत के इस महान उत्सव पर बात करने का मौका मिला।”

वहीं राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा समारोह पर न्यूजीलैंड की एथनिक कम्यूनिटीज मंत्री मेलिसा ली का कहना है, “मैं दुनिया भर के भारतीय प्रवासियों को अयोध्या में राम मंदिर समारोह के लिए शुभकामनाएँ देती हूँ, खासकर न्यूजीलैंड के भारतीयों को। 500 साल बाद बनने वाले राम मंदिर के लिए पीएम मोदी सहित में पूरे भारत को इस अद्भुत मंदिर के लिए बधाई देती हूँ।”

ली ने आगे कहा, “मैं यकीन करती हूँ कि मोदी जी इस मंदिर के निर्माण के हिमायती रहे हैं और मैं सोचती हूँ कि ये समारोह मोदी जी के काम और मंदिर को पुनर्जीवित करने की उनकी वकालत का नतीजा है। यही वजह है कि उन्हें कई बार प्रधानमंत्री के रूप में चुना गया है। यह भारत को आगे ले जाने और अर्थव्यवस्था को बढ़ाने की उनकी इच्छा को दर्शाता है। पीएम मोदी का दुनिया भर में सम्मान किया जाता है और वह भारत के लोगों के लिए बहुत अच्छा काम करते हैं।”

बताते चलें कि जैसे-जैसे जैसे-जैसे अयोध्या में राम मंदिर का भव्य ‘प्राण प्रतिष्ठा’ समारोह नजदीक आ रहा है। भारत से दूर विदेशों में बसे भारतीय में उत्साह हिलोरें मार रहा है। दुनिया भर में भारतवासी इस उत्सव को अपने-अपने तरीके जश्न से मना रहे हैं।

सिडनी में भारतीय प्रवासियों शनिवार (20 जनवरी, 2024) को एक कार रैली आयोजित कर राम मंदिर समारोह का जश्न मनाया। वहीं 22 जनवरी, 2024 को अयोध्या में रामजन्मभूमि मंदिर के प्राण प्रतिष्ठा का कार्यक्रम अमेरिका के सबसे बड़े शहर न्यूयॉर्क के मशहूर टाइम्स स्क्वायर पर लाइव टेलीकास्ट किया जाएगा।

इससे पहले अमेरिका न्यू जर्सी में राम मंदिर समारोह से पहले भारतीयों ने कार रैली का आयोजन किया। रैली में भारतीय 350 से अधिक कारों सहित भारतीय ‘राम सिया राम जय राम’ गाते हुए सड़कों पर निकले।