मालदीव के राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जू ने एक बीमार बच्चे की मेडिकल इमरजेंसी के दौरान भारत के प्लेन में ले जाने की मंजूरी ना देकर इंसानियत को शर्मसार करने का काम किया है। मुइज्जू के इस निर्णय के कारण 14 साल के बच्चे को वक्त पर इलाज नहीं मिला पाया और शनिवार (20 जनवरी 2024) को उसकी मौत हो गई।
दरअसल, मोहम्मद मुइज्जू को भारत विरोधी माना जाता है। वे जब से मालदीव राष्ट्रपति बने हैं, तभी से भारत द्वारा दिए गए हेलीकॉप्टरों और प्लेनों का इस्तेमाल इमरजेंसी निकासी (Emergency Evacuation) के लिए नहीं किया जाता है। इनका इस्तेमाल केवल राष्ट्रपति से सीधे मंजूरी मिलने पर ही किया जा सकता है।
चीन की कठपुतली राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जू ने इस बीमार बच्चे को एयरलिफ्ट करके एक द्वीप से मुख्य द्वीप पर भारत के डोर्नियर प्लेन से ले जाने की इजाजत देने से इनकार कर दिया था। बच्चे के लिए मालदीव के रक्षामंत्री ने मुइज्जू से इसके लिए अनुमति माँगी थी। मुइज्जू के इस निर्णय के भारत ही नहीं, बल्कि मालदीव में भी आलोचना हो रही है।
ब्रेन ट्यूमर और फिर स्ट्रोक से पीड़ित इस बच्चे के परिवार ने मालदीव के एविएशन अधिकारियों पर तुरंत चिकित्सा निकासी मुहैया न कराने का आरोप लगाया है। मालदीव की समाचार एजेंसी अधाधु ने बच्चे के पिता के हवाले से लिखा है कि आइलैंड एविएशन ने परिवार की कॉल का तुरंत जवाब नहीं दिया।
People shouldn’t have to pay with their lives to satisfy the President’s animosity towards India. https://t.co/PPOOKVXN7v
उन्होंने कहा, “स्ट्रोक के तुरंत बाद बेटे को माले ले जाने के लिए हमने आइलैंड एविएशन को फोन किया था, लेकिन उसके कर्मचारियों ने हमारी कॉल का जवाब नहीं दिया। उन्होंने गुरुवार सुबह 8:30 बजे फोन का जवाब दिया। ऐसे मामलों के लिए समाधान केवल एक एयर एम्बुलेंस ही है।”
मालदीव के सांसद मीकैल नसीम ने मिहारू न्यूज की रिपोर्ट को अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर रीट्वीट कर लिखा है, “भारत के लिए राष्ट्रपति की दुश्मनी को संतुष्ट करने के लिए लोगों को अपनी जान की कीमत नहीं चुकानी चाहिए।”
बताते चलें कि परिवार के आपातकालीन निकासी का आग्रह करने के 16 घंटे बाद बीमार बच्चे को माले ले जाया गया। निकासी आग्रह लेने वाली आसंधा कंपनी लिमिटेड ने दावा किया कि विमान में तकनीकी दिक्कत की वजह से देरी हुई।
Medical evacuation operations ge SOP gai Raeesul Jumooriyya ah inform kurumeh, hudhdha dhevvumeh noavey. Eyee ekama gulhey idhaaraathakun coordinate kurevigen hinga kameh. 2021 in feshigen stats ah balaa iru medical evacuation ge 93% koffai vanee @MaldivianAero medhuverikoh.
इस पर रक्षा मंत्री मोहम्मद घासन ने सफाई में कहा है कि 93 फीसदी निकासी अभी भी मालदीव एयरलाइंस ही करती है। उन्होंने कहा, “मेडिकल ऑपरेशन के एसओपी (मानक संचालन प्रक्रियाओं) में राष्ट्रपति को सूचित करने या उनसे इजाजत लेने की जरूरत नहीं है। यह संबंधित संस्थानों के समन्वय के जरिए किया गया काम है।”
बताते चलें कि जनवरी 2024 की शुरुआत में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लक्षद्वीप दौरे के बाद से ही भारत और मालदीव के बीच तनाव का माहौल है। वहाँ की सरकार के तीन मंत्रियों ने पीएम मोदी को लेकर अभद्र टिप्पणियाँ की थी। इसके बाद इन्हें निलंबित कर दिया गया था, लेकिन दोनों के बीच राजनयिक टकराव अभी चल ही रहा है।
मुइज्जू की पार्टी ने बीते साल 2023 में इंडिया आउट आंदोलन के आधार पर चुनाव जीता था। इसके तहत मालदीव में तैनात लगभग 100 भारतीय सैनिकों को देश से हटाना था। राष्ट्रपति बनने के बाद मुइज्जू ने भारतीय सशस्त्र बलों को मार्च 2024 तक मालदीव छोड़ने का अल्टीमेटम दिया है। मुइज्जू ने हाल ही में अपनी पहली आधिकारिक यात्रा चीन से शुरू की थी और वहाँ कई समझौतेे किए।
अयोध्या में 22 जनवरी 2024 को होने वाले राम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा को लेकर पूरे देश में उल्लास का माहौल है। इसको देखते हुए लिए केंद्र सरकार और कई राज्य सरकारों ने अपने संस्थानों में आधे दिन की छुट्टी देने का निर्णय लिया है। AIIMS और अन्य अस्पतालों ने आधे दिन तक OPD बंद रखने का निर्णय लिया था। हालाँकि, इस निर्णय को अब वापस ले लिया गया है।
हालाँकि, मीडिया रिपोर्ट्स में कहा जा रहा है कि AIIMS ने अब इस निर्णय वापस ले लिया है। AIIMS ने रोगियों को कोई परेशानी ना हो, इसलिए आधे दिन छुट्टी रखने के निर्णय को वापस ले लिया है। नोटिस में कहा गया है कि जिन्होंने पहले से ही समय ले रखा है, वे 22 जनवरी 2024 को अस्पताल जाकर परामर्श ले सकते हैं।
इससे पहले AIIMS ने 20 जनवरी 2024 को एक नोटिस देकर सूचित किया था कि 22 जनवरी को दोपहर ढाई बजे तक संस्थान बंद रहेगा। इस दौरान सामान्य कामकाज नहीं होगा। इसके पीछे केंद्र सरकार द्वारा रामलला की प्राण प्रतिष्ठा को लेकर दी गई आधे दिन की छुट्टी का हवाला दिया गया था। हालाँकि, नोटिस में स्पष्ट रूप से लिखा था कि इस दौरान इमरजेंसी सुविधाएँ चालू रहेंगी।
AIIMS के आधे दिन की छुट्टी करने पर कुछ नेताओं ने राजनीति चमकाने की कोशिश की थी। उन्होंने यह बात फ़ैलाने की कोशिश की थी कि 22 जनवरी 2024 को AIIMS में आपातकालीन सुविधाओं को भी बंद रखा जाएगा। हालाँकि, AIIMS द्वारा जारी नोटिस में स्पष्ट रूप से लिखा था कि इस दौरान केवल सामान्य सुविधाएँ बंद होंगी और आपातकालीन सुविधाएँ चालू रहेंगी। अब AIIMS ने यह निर्णय लिया है कि वह इस दिन सामान्य सुविधाएँ भी चालू रखेगा।
AIIMS OPD and all govt / municipal hospital OPDs everywhere in Bharat are closed on Sundays and holidays. Emergencies run 24×7. One would expect a sitting member of parliament to know such basic things. https://t.co/IqgFVmLcty
आधे दिन की छुट्टी के दौरान सामान्य सुविधाएँ बंद किए जाने को लेकर विपक्ष द्वारा जारी राजनीति पर यूजर्स भी टिप्पणियाँ कर रहे हैं। सोशल मीडिया यूजर्स का कहना है कि AIIMS में आधे दिन की छुट्टी पहली बार नहीं हो रही है। उनका तर्क है कि रविवार के दिन तो देश के अस्पतालों में छुट्टी ही रहती है। साथ ही साथ उन्होंने अन्य छुट्टियों का भी ब्यौरा सामने रखा।
आखिरकार दिल्ली पुलिस ने ‘एनिमल’ फेम एक्ट्रेस रश्मिका मंदाना का डीपफेक बनाने वाले टेकी को खोज लिया। दिल्ली पुलिस ने आरोपित इंजीनियर इनामी नवीन को शनिवार (20 जनवरी 2024) को आंध्र प्रदेश के गुंटूर से गिरफ्तार कर लिया। आरोपित की गिरफ्तारी के बाद रश्मिका ने दिल्ली पुलिस का दिल से आभार जताया है।
पुलिस के मुताबिक, 24 साल का आरोपित रश्मिका मंदाना का फैन पेज चलाया करता था। उसने इंस्टाग्राम हैंडल पर फॉलोवर्स बढ़ाने के चक्कर में ये वीडियो बनाया था। उसका कहना है कि डेढ़ साल में इस पेज पर सिर्फ 90 हजार फॉलोअर ही थे। इस वीडियो को लगाने के बाद फॉलोअर की संख्या 1,08,000 हो गई। हालाँकि, जैसे ही उसके डीपफेक वीडियो ने पूरे देश का ध्यान खींचा और बड़े पैमाने पर इस पर एतराज जताया गया और आलोचना की गई तो उसने घबराकर इंस्टाग्राम से पोस्ट हटा दिए।
पूछताछ में उसने पुलिस को बताया कि रश्मिका के इस वीडियो की आलोचना हुई तो उसने घबराकर इंस्टाग्राम से पोस्ट हटा लिए। उसने फैन पेज का नाम भी बदल दिया और डेटा डिलीट कर दिया। आरोपित का कहना है कि उसने डीपफेक वीडियो एक्ट्रेस को नुकसान पहुँचाने के लिए नहीं, बल्कि मोनेटाइज कराने के लिए किया था।
दरअसल, आरोपित ने जो डीपफेक वीडियो बनाया था, वह ब्रिटिश-इंडियन इन्फ्लुएंसर ज़ारा पटेल के स्विमसूट पहने वीडियो था। इसमें उसने AI की Deepfake तकनीक के जरिए जारा पटेल के चेहरे की जगह पर रश्मिका मंदाना का चेहरा लगा दिया गया था। ईमानी नवीन ने B.Tech की पढ़ाई की है और वीडियो एडिटिंग का यूट्यूब से सीखा था।
दरअसल दिल्ली पुलिस स्पेशल सेल इंटेलिजेंस फ्यूजन एंड स्ट्रैटेजिक यूनिट (IFSO) ने 10 नवंबर 2023 को इस केस की FIR दर्ज की थी। डीसीडब्ल्यू अध्यक्ष स्वाति मालीवाल की शिकायत पर जालसाजी और किसी व्यक्ति की प्रतिष्ठा को खराब करने के लिए आईपीसी की धारा 465 और 469 के तहत केस दर्ज किया गया था।
इसके अलावा, सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम 2000 की धारा 66सी (पहचान की चोरी) और धारा 66ई (गोपनीयता का उल्लंघन) भी लागू की गई थी। इसके बाद से ही पुलिस आरोपित की तलाश में पुरजोर तरीके से जुट गई थी।
कैसे पकड़ा गया आरोपित
IFSO DCP हेमंत तिवारी के मुताबिक, इस केस में वीडियो की तकनीकी जाँच में बहुत मेहनत की गई। पहली बार ये वीडियो ब्रिटिश इंडियन लड़की ने इंस्टाग्राम पर 9 अक्टूबर 2023 में अपलोड था। डीपफेक के जरिए रश्मिका का चेहरा लगाकर इसे 13 अक्टूबर 2023 को अलग-अलग सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर डाला गया था।
उन्होंने आगे बताया, जाँच के दौरान 500 से अधिक सोशल मीडिया अकाउंट छाने गए, लेकिन पहली लीड जहाँ मिली वो हैंडल डिलीट कर दिया गया था। Meta ने इसमें मदद की और डिलीटेड अकाउंट्स का डेटा रिकवर किया। IFSO की टीम कई राज्यों में गई और अंत में नवीन को आंध्र प्रदेश के गुंटूर के पेडानंडीपाडु गाँव से गिरफ्तार कर लिया। उसने अपना अपराध स्वीकार कर लिया है।
कौन है ईमानी नवीन
ईमानी नवीन ने चेन्नई से 2021 में इलेक्ट्रॉनिक्स और टेलीकम्युनिकेशन में बीटेक किया है। 2019 में आरोपित ने गूगल गैराज से डिजिटल मार्केटिंग का सर्टिफिकेट लिया है। इसके अलावा उसने यूट्यूब से वेबसाइट डेवलपमेंट, फोटोशॉप और वीडियो एडिटिंग का भी कोर्स किया है।
आरोपित मार्च 2023 में घर आकर वर्क फ्रॉम होम (WFH) कर रहा था। वह घर से ही फोटोशॉप, इंस्टाग्राम चैनल प्रमोशन, यूट्यूब वीडियो निर्माण और संपादन और सर्च इंजन ऑप्टिमाइजेशन जैसी सर्विस देनी शुरू कर दी।
फोटो साभार: रश्मिका मंदाना इंस्टाग्राम
रश्मिका ने कहा आभारी हूँ
आरोपित के दिल्ली पुलिस की गिरफ्तारी के बाद रश्मिका ने उन्हें शुक्रिया कहा है। रश्मिका ने कहा कि वह उन लोगों के लिए वास्तव में आभारी महसूस करती हैं जिन्होंने आंध्र प्रदेश में पकड़े गए डीपफेक वीडियो के मास्टरमाइंड ईमानी नवीन केस में उनका समर्थन किया।
मंदाना ने इंस्टाग्राम पर पोस्ट किया, “मैं दिल्ली पुलिस को डीपफेक बनाने वाले को पकड़ने के लिए के लिए शुक्रिया कहती हूँ और अपनी हार्दिक कृतज्ञता व्यक्त करती हूँ। मुझे प्यार, समर्थन और मेरी ढाल बनने वाले लोगों के लिए वास्तव में मैं आभारी हूँ।”
उन्होंने आगे कहा, “लड़कियों और लड़कों अगर आपकी मंजूरी के बगैर कहीं भी आपकी तस्वीर का इस्तेमाल किया जाता है या उससे छेड़छाड़ की जाती है तो यह गलत है! मुझे उम्मीद है कि यह एक रिमाइंडर है कि आप ऐसे लोगों से घिरे हुए हैं जो आपका समर्थन करेंगे और कार्रवाई की जाएगी!”
बताते चलें की रश्मिका ही नहीं, बल्कि अमिताभ बच्चन सहित कई हस्तियों ने डीपफेक पर एतराज जताया था। कई हस्तियों के डीपफेक वायरल हुए थे। नतीजन मोदी सरकार इस पर कानून लाने की तैयारी में है। केंद्रीय मंत्री राजीव चंद्रशेखर ने हाल ही में कहा था कि इसके लिए कठोर कानून लाए जाएँगे।
अयोध्या के नवनिर्मित राम मंदिर में लगी रामलला की प्रतिमा के लिए पत्थर देने वाले दलित किसान ने अपनी जमीन का एक हिस्सा मंदिर बनाने के लिए दे दिया है। मूर्तिकार अरुण योगीराज ने रामलला की प्रतिमा कर्नाटक के दलित किसान रामदास की खेत से लाए गए पत्थर से ही बनाई है।
रामलला की श्यामल प्रतिमा कर्नाटक के मैसुरु के गुज्जेगौदानपुरा से लाए गए पत्थर से बनाई गई है। यह पत्थर यहाँ के दलित किसान रामदास की जमीन से ले जाया गया था। उनकी खेत से प्रतिमा का पत्थर जाने से रामदास काफी प्रसन्न हैं। उन्होंने गाँव वालों की माँग पर अपनी जमीन का एक हिस्सा मंदिर बनाने के लिए दिया है।
द न्यू इंडियन एक्सप्रेस से बात करते हुए रामदास ने बताया, “मैं अपनी 2.14 एकड़ जमीन पर से पत्थर हटाना चाहता था, ताकि इस पर खेती की जा सके। यहाँ से निकाले गए पत्थर श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की जरूरतों को पूरा करता था और मूर्तिकार अरुण योगीराज ने इसे चुन लिया।”
उन्होंने आगे बताया, “मेरे गाँव के अधिकांश लोग उस जगह पर प्रभु राम का मंदिर बनाना चाहते हैं, जहाँ से प्रतिमा के लिए पत्थर निकला था और अयोध्या के लिए ले जाया गया था। इसलिए मैंने अपनी जमीन का एक हिस्सा मंदिर बनाने के लिए देने का निर्णय किया है।”
रामदास ने कहा कि वह गाँव वालों के साथ मिलकर 22 जनवरी को 2024 को ही अपनी जमीन के उस हिस्से पर मंदिर निर्माण का शिलान्यास कराएँगे। यह कार्यक्रम 22 जनवरी को सुबह किया जाएगा। यहाँ लगने वाली प्रतिमा बनाने के लिए भी गाँव वाले अरुण योगीराज से सम्पर्क करेंगे।
रामदास के खेत से पत्थर निकालने वाले ठेकेदार श्रीनिवास ने बताया कि रामलला की प्रतिमा बनाने के काम से जुड़े लोगों ने उनसे सम्पर्क करके पत्थर के विषय में जानकारी ली थी। इसके बाद उन्होंने रामदास के खेत से निकले एक पत्थर को अयोध्या भेजा था। इसके बाद लोगों ने बताया था कि पत्थर उपयुक्त है।
रामदास के खेत से निकले पत्थर से ही लक्ष्मण, भरत और शत्रुघ्न की भी प्रतिमाएँ बनाई गई हैं। हाल ही में अयोध्या के राम मंदिर में लगने वाली रामलला की प्रतिमा की तस्वीरें भी बाहर आई थीं। रामलला की यह प्रतिमा 51 इंच लम्बी है और इसे उनके 5 वर्ष के क्षत्रिय युवराज वाले स्वरूप में बनाया गया है। इस पर भगवान विष्णु के दशावतार को भी उकेरा गया है।
श्रीनिवास ने कहा है कि रामदास को 22 जनवरी 2024 को राम मंदिर में होने वाली प्राण प्रतिष्ठा के लिए आमन्त्रण नहीं मिला है। उन्हें यहाँ आमंत्रित किया जाना था। उन्होंने स्थानीय विधायक से अपील की है कि वह रामदास के अयोध्या जाने को लेकर कुछ प्रबंध करें।
अयोध्या में नवनिर्मित राम मंदिर में प्राण प्रतिष्ठा समारोह की तैयारियाँ चल रही हैं। प्राण प्रतिष्ठा का मुख्य समारोह 22 जनवरी 2024 को होगा। इस समारोह में गुजरात के गोधरा कांड में जान गँवाने वाले 59 ‘कारसेवकों’ से 19 के परिवारवाले भी शामिल होंगे। साल 2002 में गोधरा में कारसेवकों से भरे एक रेलवे डब्बे को जला दिया गया था। इसके बाद गुजरात में दंगे भड़क उठे थे।
गुजरात विश्व हिंदू परिषद (VHP) के महासचिव अशोक रावल ने शनिवार (20 जनवरी 2024) को इसकी जानकारी दी। उन्होंने बताया, “आमंत्रित लोगों में उन कारसेवकों के परिजन भी शामिल हैं, जो अयोध्या से अहमदाबाद लौट रहे थे और गोधरा रेलवे स्टेशन के पास उपद्रवियों द्वारा साबरमती एक्सप्रेस ट्रेन के दो डिब्बों में आग लगा दिए जाने से मारे गए थे।”
उन्होंने आगे कहा कि विश्व हिंदू परिषद के पास 39 कारसेवकों के नाम और संपर्क थे। इन लोगों के यहाँ संपर्क करने की कोशिश की गई, लेकिन सिर्फ 20 परिवारों से ही संपर्क साधा जा सका। अशोक रावल ने कहा कि इनमें से 19 परिवारों (कुछ रिपोर्ट में 18 परिवार) 22 जनवरी को अयोध्या में होने जा रहे समारोह में शामिल होने की बात कही है।
गोधरा के जिन लोगों को अयोध्या में होने वाले प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम के लिए आमंत्रित किया गया है, उनमें एक ऑटोरिक्शा चालक हरीशभाई डाभी भी शामिल हैं। उन्होंने गोधरा कांड में अपनी माँ को खो दिया था। डाभी अयोध्या के कारसेवकपुरम में रह रहे हैं। वह अहमदाबाद की एक दलित बस्ती से हैं।
विश्व हिंदू परिषद के अधिकारी रावल का कहना है कि गोधरा कांड के पीड़ित परिवारों के अलावा, गुजरात से 320 संत और समाज के 105 प्रमुख सदस्यों को भी समारोह में शामिल होने का न्योता दिया गया है। ये संत एवं प्रबुद्ध लोग प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम के दौरान अयोध्या में उपस्थित रहेंगे।
अशोक रावल ने कहा कि VHP ने राम मंदिर निर्माण के लिए 225 करोड़ रुपए इकट्ठे कर इस पुनित काम में अपना योगदान दिया है। बताते चलें कि 6 दिसंबर 1992 को अयोध्या में विवादित ढाँचे के विध्वंस के बाद 27 फरवरी 2002 को गुजरात के गोधरा में ट्रेन अग्निकांड भी देश के इतिहास में सदा के लिए दर्ज हो गया।
27 फरवरी 2002 में 59 ‘कारसेवकों’ को ट्रेन में जिंदा जला दिया गया था। इनमें औरतें और बच्चे भी शामिल थे। इसके बाद गुजरात के इतिहास में सबसे भयानक सांप्रदायिक दंगे भड़के थे। वीएचपी ने 22 जनवरी को अयोध्या में रामलला की प्राण प्रतिष्ठा के मौके पर गोधरा में जान गँवाने वालों के परिवालों को भी याद रखा है।
बताते चलें कि श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने कहा था कि मंदिर आंदोलन में बलिदान हुए लोगों के परिवारों को प्राण प्रतिष्ठा समारोह में आमंत्रित किया जाएगा। हालाँकि, ट्रस्ट का ये भी कहना है कि समाज के हर तबके के लोगों को समारोह में आमंत्रित किया गया है। उनका कहना है कि ‘राम सबके हैं और सभी राम के हैं’।
मध्य प्रदेश के शहडोल जिले के एक स्कूल में एक बच्चे द्वारा जय श्रीराम कहने पर शिक्षक अब्दुल वाहिद भड़क गया। सातवीं कक्षा में पढ़ने वाले इस छात्र की अब्दुल वाहिद ने पिटाई की और उसे सार्वजनिक तौर पर अपमानित किया। शिक्षक पर मामला दर्ज कर उसे गिरफ्तार कर लिया गया है।
जानकारी के अनुसार, शहडोल के बुढार थाना क्षेत्र में पड़ने वाले ग्रीन बेल्स स्कूल में यह घटना शनिवार (20 दिसम्बर 2024) को हुई। स्कूल में सातवीं कक्षा के बच्चे ने जय श्रीराम के नारे लगाए। इस दौरान कक्षा में पढ़ाई हो रही थी। यह बात अब्दुल वाहिद को पसंद नहीं आई।
उसने अन्य बच्चों से पूछकर उसने पहले एक 12 वर्षीय छात्र को खड़ा किया और फिर उसको अपमानित करते हुए उसकी पिटाई कर दी। पिटाई के बाद जब छात्र घर पहुँचा तो उसने पूरी बात परिजनों को बताई। बताया जा रहा है छात्र को पीटने वाला अब्दुल वाहिद स्कूल में अंग्रेजी पढ़ाता है। स्कूल का संचालक समीर नियाजी है।
घटना की जानकारी मिलते ही छात्र के घरवाले और स्थानीय हिन्दू संगठन जय श्रीराम के नारे लगाने पर पीटे जाने को लेकर भड़क गए और उन्होंने थाने को घेर कर कार्रवाई की माँग की। उन्होंने यहाँ जय श्रीराम के नारे लगाए और शिक्षक अब्दुल वाहिद और स्कूल प्रबन्धन पर कार्रवाई की माँग की।
बुढार पुलिस ने मामले की जानकारी लेकर शिक्षक अब्दुल वाहिद और स्कूल के संचालक समर नियाजी के खिलाफ धारा 153, 323, 500 और 34 के तहत मामला दर्ज कर लिया है। इनके खिलाफ किशोर न्याय अधिनियम की धाराएँ भी लगाई गईं है। बताया जा रहा है कि शिक्षक अब्दुल वाहिद को गिरफ्तार कर लिया गया है।
स्कूल प्रशासन पर भी इस मामले में लापरवाही बरतने का आरोप लगाया जा रहा है। जिस स्कूल में यह घटना हुई वह CBSE के अंतर्गत चलता है। इस स्कूल को नियाजी एजुकेशनल सोसायटी नाम की एक संस्था चलाती है। इससे पहले भी जय श्रीराम कहने पर पिटाई की घटनाएँ विदिशा और कठुआ से सामने आ चुकी हैं।
राजस्थान के डीडवाना जिले में दो महिलाओं के शव मिले हैं। वो सगी बहनें थी। उनके साथ ही दो बच्चों के भी शव मिले हैं, इसमें से एक लड़की और एक लड़का है। इसमें एक का नाम नाजिया था और दूसरी का साजिया। दोनों बहनों का निकाह अजहरुद्दीन और अशराफ नाम के दो सगे भाइयों के साथ हुआ था। दोनों भाई सऊदी अरब में काम करते हैं। उन्होंने दोनों बहनों को फोन पर ही तीन तलाक दे दिया था, लेकिन जब दोनों बहनों ने उसे मानने से इनकार कर दिया, तो उनकी हत्या करवा दी गई। साजिया और नाजिया के परिजनों ने आरोप लगाए हैं कि अजरुद्दीन और अशराफ ने ही चारों की हत्या कराई है।
जानकारी के मुताबिक, मौलासर थाना क्षेत्र के नुवा गाँव में नाजिया (32 वर्ष) और साजिया (30 वर्ष) अपने शौहर के घर के बगल में ही किराए पर कमरे लेकर रह रही थी। शनिवार सुबह (20 जनवरी, 2023) को दोनों बहनों और दो बच्चों कनिष्का (7 वर्ष) और आमिर (4 वर्ष) के शव मिले थे। सभी के शव रस्सियों से लटके पड़े थे। चारों के शव मिलने पर सनसनी फैल गई, जिसके बाद मौके पर पुलिस पहुँची। तब तक लोगों ने फंदे और रस्सियाँ काट दी थीं। इसके बाद साजिया और नाजिया के परिजनों को सूचित किया गया।
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, स्थानीय लोगों की सूचना पर मौलासर पुलिस और उच्च अधिकारी मौके पर पहुँचे। डिप्टी एसपी धर्मपाल पूनिया ने बताया कि दोनों मृतकाओं के पति अजरुद्दीन और अशफाक सगे भाई हैं, जो सऊदी अरब में रह कर काम कर रहे हैं। पुलिस ने घटनास्थल की वीडियोग्राफी कराई और शवों को डीडवाना के बांगड़ अस्पताल में पहुँचाया।
पुलिस से मिली सूचना के बाद मौके पर पहुँचे मायके पक्ष ने उनकी हत्या के आरोप लगाए हैं। परिजनों ने आरोप लगाए कि सभी की हत्या ससुराली जनों ने की है। परिजनों ने बताया कि नाजिया और साजिया का निकाह अजहरुद्दीन और अशफाक से की गई थी। दोनों सगे भाई थे। दोनों ने फोन पर ही तीन तलाक दे दिया था, लेकिन लड़कियों ने ये मानने से इनकार कर दिया था। इसके बाद दोनों ससुराल वालों से अलग एक मकान ले लिया था।
उन्होंने ससुराल पक्ष के 11 लोगों के खिलाफ नामजद मामला दर्ज कराया गया है, जिसमें दोनों के शौहरों के नाम भी शामिल हैं। इस मामले में पुलिस ने 7 नामजद लोगों को हिरासत में ले लिया है और पूछताछ कर रही है।
अयोध्या में राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा की तिथि समीप आ चुकी है। 22 जनवरी को रामलला अपनी जन्मभूमि पर बन रहे मंदिर के गर्भगृह में विराजमान होंगे। इस मौके पर पूरा देश उन तमाम बलिदानी रामभक्तों को याद कर रहा है जिन्होंने मुगल काल से मुलायम सरकार के बीच अपने-आप को न्योछावर कर दिया। इन बलिदानियों को जिस निर्ममता से बाबर के समय में मारा गया था उस से कहीं अधिक बेरहमी साल 1990 में मुलायम सरकार में दिखाई गई।
राम का नाम लेते निहत्थे कारसेवकों पर गोलियाँ बरसाने और उनकी लाशों तक से निर्दयता दिखाने वालों की ऑपइंडिया ने जमीनी पड़ताल की। इस पूरे मामले में भुल्लर और उस्मान नाम के 2 पैरामिलिट्री अधिकारियों के नाम सबसे अधिक चर्चा में हैं। लेकिन इस पूरे नरसंहार में जो सबसे चौंकाने वाला पहलू सामने आया वो है मुन्नन खाँ का नाम। 4 साल पहले ‘द वायर’ इसी मुन्नन खाँ का बचाव कर चुका है। द वायर ने विक्टिम कार्ड फेंकते हुए अपनी इसी रिपोर्ट में कई और भी झूठी और तथ्यों से परे जानकारियाँ डाली हैं।
प्राइवेट गैंग ले कर किया था नरसंहार
ऑपइंडिया ने सबसे पहले साल 1990 में अयोध्या में तैनात रहे एक पुलिस अधिकारी के हवाले से बताया था कि कहीं न कहीं मुन्नन खाँ की संलिप्तता तब हुए रामभक्तों के नरसंहार में थी। इस खुलासे के बाद अब कई जीवित कारसेवकों और बलिदानी रामभक्तों के परिजनों ने स्वीकार किया है कि उन्होंने 1990 में सुना था कि मुन्नन खाँ नाम का नेता नरसंहार में शामिल था। सुल्तानपुर जिले के बलिदानी रामभक्त राम बहादुर वर्मा के पुत्र काली सहाय का आरोप है कि मुन्नन खाँ को गोलियाँ बरसाने के लिए हेलीकॉप्टर तक दे दिया गया था।
बकौल काली सहाय तब 1990 में आम जनता भी यह जानती थी कि मुन्नन खाँ ने रामभक्तों की हत्या अपनी ‘प्राइवेट गैंग’ से करवाई है। काली सहाय ने रामभक्तों को लगे गोलियों के बोर के भी गैर सरकारी होने की आशंका जताई।
असली पुलिस मारी या नकली, हमें नहीं पता
ऑपइंडिया ने साल 1990 की कारसेवा में शामिल रहे रामभक्त रघुवीर सिंह से बात की। रघुवीर सिंह का सिर लाठीचार्ज में फट गया था। उन्होंने बताया कि तब कारसेवा के दौरान उन्होंने गोंडा के मुन्नन खाँ का नाम सुना था। उन्होंने आगे कहा, “यही सुना था कि वहाँ मुन्नन खाँ पुलिस की वर्दी में गोली चलाने के लिए 2-3 गाड़ियाँ गुंडों को भेजा है। रघुवीर को ये नहीं कन्फर्म है कि उन पर हमला नकली पुलिस ने किया था या असली ने क्योंकि तब अपनी जान बचाना उनके लिए प्राथमिकता थी। बकौल रघुवीर, उस आपाधापी में वो किसी का बिल्ला या नेमप्लेट नहीं पढ़ आए थे।
‘अयोध्या क्यों नहीं चल रहे, वहाँ फल मिलेगा’
साल 1990 में अयोध्या कारसेवा में शामिल रहे रामभक्त राजेश कुमार साहू ने भी ऑपइंडिया से बातचीत में मुन्नन खाँ का नाम लिया। उन्होंने बताया कि जब वो अयोध्या से लौट कर आए तब उन्हें आसपास के लोगों ने बताया कि सामने वाली सड़क से मुन्नन खाँ अपने आदमियों को पुलिस की वर्दी पहना कर ले गया है। आरोप है कि तब मुन्नन सरकारी रोडवेज बस में साथियों सहित उन इलाकों में घूम रहा था जहाँ से कारसेवकों का आना-जाना पूरी तरह से प्रतिबंधित था। राजेश साहू के पड़ोसियों ने उन्हें बताया कि मुन्नन खाँ कारसेवकों से बोल रहा था, “चलो अयोध्या। वहाँ फल मिलेगा।” राजेश के मुताबिक मुन्नन खाँ के पास हथियार भी देखे गए थे।
नकली PAC की पूरी बटालियन शामिल थी कत्लेआम में
1990 में अयोधा कारसेवा में शामिल रहे मुरारी लाल गुप्ता ने भी ऑपइंडिया से बातचीत में मुन्नन खाँ का जिक्र किया। उन्होंने आरोप लगाया कि तब उन्हें पता चला था कि मुन्नन खाँ ने रामभक्तों की हत्या के लिए नकली PAC की पूरी बटालियन ही तैयार कर ली थी। मुरारी लाल गुप्ता ने यह भी बताया कि वो जिस मुन्नन खाँ की बात कर रहे हैं वो गोंडा का सांसद रह चुका है। बकौल मुरारी लाल, इन्ही नकली PAC वालों ने ही बाद में रामभक्तों पर हनुमानगढ़ी के पास मौजूद मंदिरों की छतों पर चढ़ कर गोलियाँ बरसाईं थीं। इस गोलीबारी में कई कारसेवक बलिदान हो गए थे।
मुन्नन ही पिता का कातिल
2 नवंबर, 1990 को अयोध्या में गोलियों से भून दिए गए कारसेवक राम अचल गुप्ता के बेटे संजय ने ऑपइंडिया से बात की। संजय ने भी दावा किया कि बचपन में उन्होंने मुन्नन खाँ के बारे में सुना था कि वो रामभक्तों का नरसंहार पुलिस की वर्दी पहन के कर रहा था। संजय का दावा है कि उनके पिता भी मुन्नन खाँ द्वारा चलाई गई गोली के शिकार हुए थे।
तब दीवालों पर लिखा गया था मुन्नन का नाम
30 अक्टूबर, 1990 में बलिदान हुए रामभक्त वासुदेव गुप्ता की बेटी सीमा ने ऑपइंडिया से बात की। सीमा ने दावा किया कि पिता को गोली लगने के समय वो काफी छोटी थीं लेकिन उनको अच्छे से याद है कि तब पैरामिलिट्री के स्टाफ जे एस भुल्लर और मोहम्मद उस्मान के अलावा किसी नेता मुन्नन खाँ का नाम कारसेवकों को मारने को ले कर खूब चर्चा में आया था। सीमा गुप्ता ने बताया कि उस समय मुन्नन खाँ का नाम कई जगह दीवालों पर लिखा देखा जाता था।
मुख्यमंत्री कराएँ मुन्नन के कुकृत्य की जाँच
बलिदानी रामभक्त आम अचल गुप्ता के बेटे संजय गुप्ता ने 11 जनवरी 2024 को उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को एक पत्र प्रेषित किया है। इस पत्र में संजय ने इस बात की पुख्ता जानकारी होने का दावा किया है कि साल 1990 में हुए कारसेवकों के नरसंहार में मुन्नन खाँ भी शामिल था। संजय गुप्ता ने पत्र में लिखा है कि यदि 1987 में मेरठ के हाशिमपुरा काण्ड की जाँच हो सकती है तो 1990 में कारसेवक नरसंहार की क्यों नहीं।
हाशिमपुरा कांड में 40 साल बाद उन पुलिसकर्मियों को अदालत से सजा दी गई है जिन पर 1987 में मेरठ के मुस्लिम समुदाय के लोगों को गोली मारने का आरोप था। इसमें से कई तत्कालीन पुलिसकर्मियों का देहांत हो चुका था और कई काफी बुजुर्ग हो गए थे।
संजय गुप्ता द्वारा DM अयोध्या, मुख्यमंत्री और UP पुलिस को प्रेषित पत्र
मुन्नन के रुतबे के आगे सब थे नतमस्तक
ऑपइंडिया ने एक ऐसे पुलिसकर्मी को खोज निकाला जो साल 1990 में अयोध्या में तैनात रहा था। पुलिसकर्मी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि प्रादेशिक पुलिस बल ने रामभक्तों पर अधिकतम लाठीचार्ज किया था जिस से वो भाग जाएँ और गोली खाने से बच जाएँ। पुलिसकर्मी ने बताया कि सरयू नदी के पास मुन्नन खाँ द्वारा साथियों सहित रामभक्तों पर हमले की चर्चा उस समय आम थी। इस हमले की वजह से कई रामभक्त उफनती सरयू नदी में कूद गए थे जिनका शव भी नहीं मिल पाया।
अयोध्या में तैनात रहे पुलिस स्टाफ का यह भी दावा है कि तब शासन और प्रशासन तक बहुत लोगों को मुन्नन खाँ की करतूत की जानकारी थी लेकिन उसका राजनैतिक रुतबा इतना ज्यादा था कि उस पर कोई कार्रवाई नहीं हो पाई।
कौन था मुन्नन खाँ
मुन्नन खाँ का पूरा नाम फसी उर रहमान था। 7 जनवरी, 1945 में उसका जन्म उत्तर प्रदेश के गोंडा जिले में हुआ था। गोंडा अयोध्या की सीमा से सटा हुआ जिला है। तब बलरामपुर जिला भी गोंडा का हिस्सा हुआ करता था। गोंडा के कई बुजुर्ग बताते मुन्नन खाँ ने 70 के दशक के आसपास ही अपराध का रास्ता चुन लिया था। कुछ ही दिनों में उसका नेटवर्क नेपाल तक फैल गया था। इस बीच साल 1985 में उसने गोंडा जिले के कटरा विधानसभा क्षेत्र से लोकदल के टिकट पर चुनाव लड़ा। इस चुनाव में उसे जीत मिली। साल 1989 में 5 साल का कार्यकाल पूरा करने के बाद इसी साल मुन्नन ने बलरामपुर संसदीय सीट से निर्दलीय चुनाव लड़ा। इस चुनाव में मुन्नन खाँ को जीत मिली।
जनप्रतिनिधि होने के बावजूद मुन्नन के आपराधिक कारनामें बदस्तूर जारी रहे। जमीन कब्ज़ाने और दंगे करवाने जैसे आरोप उस पर समय-समय पर लगते रहे। बावजूद उसके राजनैतिक संरक्षण के चलते उसके नाम पर न सिर्फ गोंडा जिले में चौराहे बल्कि गाँव तक के नाम रख दिए गए। मुन्नन खाँ 5 बेटे और 2 बेटियों का अब्बा भी था। उसका बेटा कासिम भी हिस्ट्रीशीटर अपराधी है। मुन्नन और उसके परिवार के आपराधिक और काले कारनामों की चर्चा हम जल्द ही एक अलग रिपोर्ट प्रकाशित करेंगे।
मुन्नन खाँ की ढाल बना था ‘द वायर’
वामपंथी न्यूज़ पोर्टल ‘द वायर’ ने इसी मुन्नन खाँ को क्लीन चिट देते हुए 2019 में उसकी शान में कसीदे गढ़े थे। तब ‘द वायर’ के पत्रकार कृष्ण प्रताप सिंह ने मुन्नन खाँ के नाम को महज कुछ पत्रकारों के मन की उपज करार दिया था। साल 1990 में मुन्नन खाँ की करतूत उजागर करने वाले तात्कालिक मीडियाकर्मियों को द वायर ने 9 नवंबर 2019 को प्रकाशित लेख में ‘हिन्दू पत्रकार’ बताया है। इसी रिपोर्ट में द वायर ने मुन्नन खाँ को मुलायम का करीबी ‘दबंग समाजवादी नेता’ को माना है लेकिन उसे हर तरह के अपराध से क्लीन चिट दे डाली है।
अपनी पूरी मनगढ़ंत रिपोर्ट में द वायर ने कभी भी किसी जीवित कारसेवक या बलिदान हुए रामभक्त के परिजन से जमीन पर उतर बात करने की जहमत नहीं उठाई।
वामपंथी ‘द वायर’ की तथ्यहीन रिपोर्ट
मुस्लिम-हिन्दू के नाम पर ‘द वायर’ का एक और झूठ
‘द वायर’ के वामपंथी लेखक कृष्ण प्रताप ने बड़ी चालाकी से फायरिंग, मुन्नन और तत्कालीन सरकार से सभी आरोप ट्रांसफर कर के तत्कालीन पत्रकारों के सिर पर मढ़ दिए हैं। इसी रिपोर्ट में उन्होंने बताया है कि 1990 में हुई फायरिंग के दौरान अयोध्या में कोई भी मुस्लिम अधिकारी तैनात नहीं था। द वायर की खबर प्रकशित होने के लगभग सवा महीने बाद TV 9 भारतवर्ष के पत्रकार हेमंत शर्मा ने अपनी एक रिपोर्ट में बताया है कि कारसेवकों पर गोलियाँ बरसाने वालों में CRPF का उप कमांडेंट उस्मान भी शामिल था।
दबी सच्चाई के खिलाफ ‘द वायर’ की एडवांस तैयारी
द वायर ने एक दावा और किया है कि मुन्नन खाँ अपनी दबंग छवि के चलते विश्व हिन्दू परिषद की आँखों में खटक रहा था। हालाँकि द वायर ये नहीं बता पाया कि दूर गोंडा जिले के निवासी मुन्नन खाँ के ही समय में तत्कालीन फैज़ाबाद (अब अयोध्या) जिले के ही अजीमुल हक उर्फ़ पहलवान और नजदीकी जिले सुल्तानपुर में ज़ुल्फ़िक़ारूल्लाह जैसे मुस्लिम नेताओं का भी अच्छा प्रभाव था। विश्व हिन्दू परिषद या किसी राष्ट्रवादी पत्रकार को अयोध्या या उस से नजदीकी जिले के बजाय दूर किसी जनपद के मुस्लिम नेता का नाम लेने की जरूरत क्यों पड़ेगी?
हालाँकि, माना जा रहा है कि 2019 के आसपास सुप्रीम कोर्ट में राम मंदिर केस अपने चरम और निर्णायक मोड़ पर था। ऐसे में दफन किए जा चुके सच और तथ्य बाहर आने की संभावना देख कर ‘द वायर’ जैसे संस्थानों ने अपने चहेतों के लिए एडवांस तैयारी कर ली थी।
‘द वायर’ का मनगढ़ंत प्रोपोगेंडा
फिलहाल द वायर के चेहते मुन्नन खाँ से जुड़े अभी कई दबे मामले सामने आने बाकी है। बलिदान हुए रामभक्तों के परिजनों की भी इच्छा है कि नेता मुन्नन खाँ ही नहीं उस्मान जैसे अधिकारियों की 1990 नरसंहार मामले में भूमिका की निष्पक्षता और गहनता से जाँच की जाए। मुन्नन खाँ का नाम लेने वाले तमाम भुक्तभोगी कारसेवक अभी जीवित हैं। तत्कालीन समय के कई पत्रकार भी अभी मौजूद हैं। ये सभी इस जाँच में पूरा सहयोग करने की भी बात कह रहे हैं। जनमानस की भी अपेक्षा है कि 3 दशक से भी पुराना वो सच अब बाहर आना चाहिए जिस दौरान सरयू नदी के पानी के लाल हो जाने का दावा किया जाता है।
पाकिस्तान के पूर्व इंटरनेशनल क्रिकेटर शोएब मलिक ने पाकिस्तानी एक्ट्रेस, मॉडल सना जावेद के साथ निकाह किया है। ये उनकी तीसरी शादी है। उन्होंने सानिया मिर्जा से अलगाव के बाद ये निकाह किया है। शोएब मलिक और सानिया मिर्जा के बीच तलाक की अफवाहें काफी लंबे समय से चल रही थी, लेकिन अब सानिया मिर्जा के पिता इमरान मिर्जा ने साफ कर दिया है कि दोनों के बीच अलगाव तलाक के जरिए नहीं हुआ है, बल्कि ये अलगाव ‘खुला’ के जरिए हुआ है।
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, सानिया मिर्जा के पिता इमरान मिर्जा ने दोनों के अलगाव पर पूछे गए सवाल के जवाब में कहा कि ये तलाक नहीं, बल्कि ‘खुला’ था। ऐसे में सवाल खड़ा होता है कि ये ‘खुला’ आखिर है क्या? क्योंकि लोग तलाक के बारे में तो जानते हैं, लेकिन ‘खुला’ के बारे में चर्चा नहीं होती। दरअसल, अगर अलगाव पुरुष द्वारा शुरू किया जाता है, तो ये तलाक कहलाता है, जबकि महिला अपने शौहर से अलगाव चाहे, तो उसे ‘खुला’ कहते हैं।
पुरुषों द्वारा महिलाओं को तलाक देने की कई प्रक्रियाएँ होती हैं, तो महिलाएँ भी अपने शौहर को छोड़ने के लिए तलाक जैसा कदम उठा सकती हैं। इस लेख में हम बता रहे मुस्लिम महिलाएँ तलाक के लिए क्या प्रक्रियाएँ अपना सकती हैं। इसमें औपचारिक तरीका है तलाक-ए-तहवीज का, तो खुला और मुबारत अनौपचारिक तरीका है।
तलाक-ए-तफवीज: इस तरह का समझौता निकाह के समय ही हो जाता है। अगर इस समझौते की शर्तें पूरी नहीं की जाती, तो महिला तलाक माँग सकती है। इसमें पति इस समझौते को मानता है कि अगर वो महिला द्वारा या आपस में रखी गई शर्तों का पालन नहीं कर पाया, तो उसे महिला तलाक दे सकती है। ये एकमात्र तरीका है, जिसमें कोई महिला एकतरफा तरीके से निकाह को खत्म कर सकती है।
खुला: मुस्लिम महिलाएँ आपसी सहमति से तलाक की प्रक्रिया खुला के जरिए पूरी कर सकती हैं। इसके मुताबिक, शौहर और बीवी में लेन-देन भी होता है। कई बार महिला को अपने शौहर से पीछा छुड़ाने के लिए उसे अपनी संपत्ति का हिस्सा भी देना पड़ता है। इसे मेहर की रकम के तौर पर भी देखा जाता है, जिसमें शौहर को भुगतान करना पड़ता है। हालाँकि ये मियाँ-बीवी के बीच बिना लेनदेन के भी हो सकता है, अगर निकाह के दौरान मेहर की रकम न तय हो या मियाँ-बीवी इस बात पर सहमत हों कि वो अब साथ नहीं रहना चाहते और बिना किसी विवाद के अपना निकाह खत्म करना चाहते हैं। इस दौरान इद्दत का पालन करना होगा है।
मुबारत: शौहर से मुक्ति के लिए महिला ये कदम भी उठा सकती है। हालाँकि इसमें दोनों पक्ष आपस में बैठते हैं, इसमें एक पक्ष दूसरे को अलगाव का ऑफर देता है। अगर इस पर दूसरा पक्ष सहमत होता है, तो फिर तलाक की प्रक्रिया शुरू हो जाती है। हालाँकि इसमें भी इद्दत का पालन करना अनिवार्य होता है।
क्या है इद्दत?
इस्लाम में इद्दत या इद्दाह वह अवधि है, जिसका पालन करना किसी महिला के लिए अनिवार्य है। यह अवधि तब होती है जब किसी मुस्लिम महिला के पति की मृत्यु हो जाती है या उसे तलाक मिल जाता है। इस अवधि के दौरान महिला किसी अन्य पुरुष से निकाह नहीं कर सकती।
इद्दत की अवधि
पति की मृत्यु के बाद 4 महीने और 10 दिन
तलाक के बाद तीन महीने
अगर इद्दत की अवधि के दौरान महिला गर्भवती है, तो प्रसव की तारीख तक
इद्दत के बारे में कुछ और बातें:
इद्दत का मकसद यह है कि अगर महिला गर्भवती है, तो इसका पता चल सके।
इद्दत के दौरान महिला किसी गैर मर्द के सामने नहीं आती।
इद्दत की अवधि के दौरान महिला का पति अपना मन बदल सकता है और तलाक़ वापस ले सकता है। इसके बाद दोनों ही फिर से शादीशुदा जीवन एक साथ शुरू कर सकते हैं।
चूँकि इस मामले में शोएब मलिक और सानिया मिर्जा के बीच ‘खुला’ के जरिए तलाक हुआ है। ऐसे में दोनों का अलगाव किन शर्तों पर हुआ है, ये बात अभी बाहर नहीं आ पाई है। ये तलाक कब हुआ, इस बात की भी जानकारी नहीं है। चूँकि ये प्रक्रिया पाकिस्तान या यूएई में अपनाई गई है, ऐसे में ये तलाक पूरा माना जा सकता है। वहीं, अगर ये प्रक्रिया भारत में अपनाई जाती और पति ‘खुला’ को नकार देता है, तो अलगाव को पूरा नहीं माना जा सकता।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तमिलनाडु के दौरे पर हैं। पीएम सुबह करीब 11 बजे तमिलनाडु के तिरुचिरापल्ली में श्री रंगनाथस्वामी मंदिर पहुँचे। यहाँ उन्होंने एक कार्यक्रम में हिस्सा लेते हुए विद्वानों से कम्ब रामायणम के पाठ सुने। पीएम मोदी ने श्री रंगनाथस्वामी के दर्शन कर आशीर्वाद लिए। इसके बाद वो रामेश्वरम पहुँचे, जहाँ उन्होंने रोड शो भी किया। इस दौरान प्रधानमंत्री मोदी की एक झलक पाने के लिए लोग बेताब दिखे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी रामेश्नवम में श्री अरुलमिगु रामनाथस्वामी मंदिर पहुँचे और भगवान के दर्शन किए।
तमिलनाडु दौरे पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार (20 जनवरी 2024) को तमिलनाडु के रामेश्वरम में श्री अरुलमिगु रामनाथस्वामी मंदिर में पूजा-अर्चना की। प्रधानमंत्री ने यहाँ समुद्र में पवित्र डुबकी भी लगाई। यहाँ प्रधानमंत्री को कई तीर्थों के पूजित जल से स्नान कराया गया। इसके बाद प्रधानमंत्री ने मंदिर में विशेष पूजा-अर्चना भी की। इसके साथ ही पीएम मोदी ‘श्री रामायण पारायण’ कार्यक्रम में भाग लिया। इस कार्यक्रम में आठ अलग-अलग पारंपरिक मंडलियां संस्कृत, अवधी, कश्मीरी, गुरुमुखी, असमिया, बांग्ला, मैथिली और गुजराती में रामकथा (श्री राम की अयोध्या वापसी के प्रसंग का वर्णन) का पाठ किया गया। पीएम मोदी श्री अरुलमिगु रामनाथस्वामी मंदिर रामेश्वरम में भजन संध्या में भी शामिल हुए।
#WATCH | Prime Minister Narendra Modi offers prayers at Sri Arulmigu Ramanathaswamy Temple in Rameswaram
The main deity worshipped in this temple is Sri Ramanathaswamy, which is a form of Bhagwan Shiva. It is a widely held belief that the main lingam in this temple was… pic.twitter.com/EF7YBMV87P
इससे पहले, पीएम नरेन्द्र मोदी ने यहाँ श्रीरंगम में रामायण से जुड़े प्राचीन मंदिर श्री रंगनाथस्वामी मंदिर में पूजा-अर्चना की और विद्वानों से ‘कम्ब रामायण’ का पाठ सुना। तमिलनाडु के इस प्राचीन मंदिर में आनेवाले वह देश के पहले प्रधानमंत्री हैं। उन्होंने इस दौरान पारंपरिक परिधान वेष्टि यानी धोती और अंगवस्त्रम यानी शॉल पहना था और भगवान विष्णु के मंदिर में पूजा-अर्चना की।
पीएम मोदी ने इस दौरान श्री रंगनाथस्वामी के दर्शन किए। उन्हें मंदिर के पुजारियों ने ‘सदरी’ प्रदान की। प्रधानमंत्री ने वैष्णव संत-गुरु श्री रामानुजाचार्य और श्री चक्रथाझवार को समर्पित कई ‘सन्नाधि’ (देवताओं के लिए अलग-अलग पूजास्थल) में प्रार्थना की। उन्होंने मंदिर में हाथी को भोजन देकर उसका आशीर्वाद भी प्राप्त किया। मंदिर के इष्टदेव को तमिल में ‘रंगनाथर’ के नाम से जाना जाता है।
Tamil Nadu: Prime Minister Narendra Modi offered prayers at Sri Ranganathaswamy Temple in Tiruchirappalli, earlier today. pic.twitter.com/2qJfnJ25ft
इस मंदिर में ही प्रधानमंत्री ने ‘कंब’ रामायण के छंद सुने जो रामायण के प्राचीन संस्करणों में से एक है। ‘कम्ब’ रामायण की रचना महान तमिल कवि कंबर ने 12वीं शताब्दी में की थी। प्रधानमंत्री ने जिस मंदिर में दर्शन किए हैं उसका ‘कंब’ रामायण से गहरा संबंध है। आईए, जिन मंदिरों में प्रधानमंत्री जा रहे हैं, उनके बारे में आपको बताते हैं।
त्रिची में श्री रंगनाथस्वामी मंदिर
त्रिची के श्रीरंगम में स्थित यह मंदिर देश के सबसे प्राचीन मंदिर परिसरों में से एक है। इसका उल्लेख पुराणों और संगम युग के ग्रंथों सहित विभिन्न प्राचीन ग्रंथों में मिलता है। यह अपनी स्थापत्य भव्यता और अपने असंख्य प्रतिष्ठित गोपुरमों के लिए प्रसिद्ध है। इस मंदिर में पूजे जाने वाले मुख्य देवता श्री रंगनाथ स्वामी हैं, जो भगवान विष्णु के शयन रूप में हैं। वैष्णव धर्मग्रंथों में इस मंदिर में पूजी जाने वाली मूर्ति और अयोध्या के बीच संबंध का उल्लेख है। ऐसा माना जाता है कि भगवान विष्णु की जिस मूर्ति की पूजा श्री राम और उनके पूर्वज करते थे, उसे उन्होंने लंका ले जाने के लिए विभीषण को दे दी थी। रास्ते में यह मूर्ति श्रीरंगम में स्थापित कर दी गई।
महान दार्शनिक और संत रामानुजाचार्य भी इस मंदिर के इतिहास से गहराई से जुड़े हुए हैं। इसके अलावा, इस मंदिर में कई महत्वपूर्ण स्थान हैं – उदाहरण के लिए, प्रसिद्ध कम्ब रामायणम को पहली बार तमिल कवि कंबन ने इसी मंदिर परिसर में सार्वजनिक रूप से प्रस्तुत किया था।
रामेश्वरम में श्री अरुलमिगु रामनाथस्वामी मंदिर
इस मंदिर में पूजे जाने वाले मुख्य देवता श्री रामनाथस्वामी हैं, जो भगवान शिव का एक रूप हैं। ऐसी मान्यता है कि इस मंदिर में मुख्य लिंगम की स्थापना और पूजा भगवान राम और माता सीता ने की थी। यह मंदिर सबसे लम्बे गलियारे और अपनी सुंदर वास्तुकला के लिए भी प्रसिद्ध है। यह चार धामों बद्रीनाथ, द्वारका, पुरी और रामेश्वरम में से एक है। यह 12 ज्योतिर्लिंगों में से भी एक है।
धनुषकोडी में श्री कोठंडारामस्वामी मंदिर
अपने दौरे के दूसरे दिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी धनुषकोड़ी के कोठंडारामस्वामी मंदिर में जाएँगे। यह मंदिर कोठंडाराम स्वामी को समर्पित है। कोठंडाराम नाम का अर्थ धनुषधारी राम है। यह धनुषकोडी नामक स्थान पर स्थित है। ऐसा कहा जाता है कि यहीं पर विभीषण पहली बार भगवान राम से मिले थे और उनसे शरण माँगी थी। इसके बारे में ऐसा भी कहा जाता है कि यही वह स्थान है जहाँ भगवान राम ने विभीषण का राज्याभिषेक किया था।