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ज्ञानवापी ढाँचे में घुसी 26 लोगों की टीम, जहाँ मिला शिवलिंग वहाँ शुरू हुई साफ़-सफाई: हिन्दू पक्ष के आवेदन पर सुप्रीम कोर्ट ने दिया था आदेश, मुस्लिम बताते हैं ‘वजूखाना’

वाराणसी स्थित ज्ञानवापी ढाँचे के भीतर स्थित जगह, जिसे मुस्लिम वजूखाना बताते हैं, उसकी सफाई शनिवार (20 जनवरी, 2024) को शुरू हो गई है। ये वही जगह है जहाँ पर ASI के सर्वे के दौरान शिवलिंग होने का खुलासा हुआ है। वहाँ नमाजी अक्सर अपने हाथ-पाँव धोते थे। वर्षों से शिवलिंग को अपमानित किया जा रहा है। ज्ञानवापी का मामला अदालत में चल रहा है। अब कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच आला अधिकारियों की उपस्थिति में उस स्थल की साफ़-सफाई की जा रही है।

असल में इसके लिए हिन्दू महिलाएँ सुप्रीम कोर्ट पहुँची थीं, जिसमें जिस जगह पर शिवलिंग मिली वहाँ स्वच्छता बनाए रखने की माँग की गई थी। सुप्रीम कोर्ट ने इस आवेदन को स्वीकार कर लिया था। हिन्दू पक्ष के वकील सुधीर त्रिपाठी ने बताया कि कथित वजूखाना काफी गंदा हो गया था, जिस कारण ये माँग की गई। ज्ञानवापी ढाँचा, जिसे मुस्लिम मस्जिद कहते हैं, उसमें घुसने से पहले सफाई कर्मचारियों की पहचान की भी जाँच की गई। 16 जनवरी को ही सुप्रीम कोर्ट ने इसकी साफ़-सफाई का आदेश दे दिया था।

इस दौरान न सिर्फ मंदिर और मस्जिद दोनों पक्षों के लोग मौजूद रहे, बल्कि पूरा काम खुद जिलाधिकारी अपनी निगरानी में करा रहे हैं। इससे पहले दोनों पक्षों ने आपस में बैठक की। ‘ज्ञानवापी मस्जिद प्रबंधन समिति’ का कहना है कि वो पानी टंकी की सफाई का भी समर्थन करती है, जो सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद से पिछले 2 वर्षों से सील है। कई मछलियों के मरने के कारण भी टंकी से दुर्गन्ध आ रहा है। सुप्रीम कोर्ट को दिए गए आवेदन में इसकी जानकारी दी गई थी।

इसमें कहा गया था कि पवित्र शिवलिंग को गंदगी और मृत जानवरों से दूर रखा जाना चाहिए, ऐसे में उसका मरी हुई मछलियों के बीच होना ठीक नहीं है। DM के साथ 26 लोगों की टीम अंदर साफ़-सफाई के लिए गई। सुबह 10 बजे ही टैंक की सफाई शुरू हो गई, जो दोपहर तक चली। टैंक से पानी निकालने के लिए फायर ब्रिगेड की गाड़ियाँ भी बुलाई गई हैं। पूरी प्रक्रिया की वीडियोग्राफ़ी भी हो रही है। पानी निकालने के लिए 3 मोटर का इस्तेमाल किया गया।

आरोपित मौलाना, वकील मुस्लिम, केस अवैध धर्म परिवर्तन का… बीच कोर्ट से चले गए नमाज पढ़ने क्योंकि दिन था शुक्रवार

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ की स्थानीय अदालत ने कुछ मुस्लिम वकीलों के रवैये पर चिंता जताई है। अदालत का कहना है कि कार्यवाही बीच में छोड़ ये लोग जुमे की नमाज के लिए चले जाते हैं। मुस्लिम वकीलों के ऐसे रवैये के बाद अवैध धर्म परिवर्तन से संबंधित एक केस को लेकर 19 जनवरी 2023 को इसके आरोपितों को एमिकस क्यूरी देने का निर्देश दिया। लखनऊ स्थित NIA/ATS कोर्ट के स्पेशल जज विवेकानंद शरण त्रिपाठी ने नसीहत देते हुए कहा कि इन वकीलों को यह ध्यान रखना चाहिए कि कर्म ही पूजा है और उन्हें अपने न्यायिक कर्तव्यों की इज्जत करनी चाहिए।

स्पेशल जज त्रिपाठी ने एमिकस क्यूरी (अदालती दोस्त/न्याय मित्र मतलब न्यायालय की मदद करने वाला) देने का निर्देश देते हुए कहा, “यदि मुस्लिम वकील नमाज पढ़ने के लिए अदालती कार्यवाही से खुद को दूर रखते हैं तो अवैध धर्म परिवर्तन केस के आरोपितों को एमिकस क्यूरी (Amicus Curiae) दिया जाए। ये मुकदमे की कार्यवाही जारी रख सकते हैं ताकि अदालती कार्यवाही बाधित न हो।”

स्पेशल जज त्रिपाठी ने अवैध धर्म परिवर्तन केस के आरोपित मौलाना कलीमुद्दीन और अन्य के खिलाफ आपराधिक मुकदमे की सुनवाई के दौरान ये आदेश दिया। यही नहीं, अदालत ने एक आरोपित की पैरवी कर रहे कुछ वकीलों के द्वारा निश्चित दस्तावेजों की माँग वाली याचिका को भी खारिज कर दिया।

इसके साथ ही अदालत ने इन वकीलों को अदालती कार्यवाही में निर्धारित वक्त के अंदर ही कोई भी आवेदन दायर करने की चेतावनी भी दी। दरअसल इस केस में मुकदमे की कार्यवाही के दौरान शुक्रवार को गवाहों की जिरह का वक्त तय किया गया था। लेकिन वकील मोहम्मद अमीर नकवी और वकील जिया-उल-जिलानी ने जिरह जारी रखने से इनकार किया। दोनों वकीलों ने दोपहर करीब 12.30 बजे अदालत को जानकारी दी कि शुक्रवार होने के कारण वो जिरह जारी नहीं रख पाएँगे, उन्हें नमाज पढ़ने जाना है।

आरोपित मौलाना ने भी अदालत से जुमे की नमाज के लिए उसे जिरह से छोड़ देने की मंजूरी माँगी थी। जज ने उससे कहा कि ऐसे काम के लिए उसे कोर्ट छोड़ने की इजाजत देना सही नहीं होगा। हालाँकि, बाद में अदालत को हालात से मजबूर होकर मुकदमे की कार्यवाही रोकनी पड़ी।

अदालत ने कुछ आरोपितों के मुस्लिम वकीलों को चेतावनी देते हुए कोर्ट के कर्मचारी को आरोपितों के लिए न्याय मित्र नियुक्त करने का निर्देश दिया। कोर्ट ने कहा कि अगर मुस्लिम वकील नमाज पढ़ने के लिए कोर्ट रूम से बाहर जाते रहे तो सुनवाई पूरी नहीं होगी।

‘श्रीमती सीमा हैदर जी ने गाया राम आएँगे तो अंगना सजाऊँगी…’: अयोध्या में प्राण प्रतिष्ठा के बीच भजन गाने का वीडियो वायरल

अयोध्या में नवनिर्मित राम मंदिर में भगवान रामलला के विग्रह की प्राण प्रतिष्ठा को लेकर अनुष्ठान जारी है। पीए मोदी और सीएम योगी आदित्यनाथ की उपस्थिति में 22 जनवरी 2024 को प्राण प्रतिष्ठा किया जाएगा। इसको लेकर पूरा देश राममय है। लगभग 500 सालों के बाद भगवान राम की वापसी को लेकर हर तरफ उत्साह और उमंग है। पाकिस्तान से आईं सीमा हैदर भी रामभक्ति में डूबी हुई हैं।

प्यार में डूबकर अपने बच्चों सहित भारत आने वाली पाकिस्तान की मुस्लिम सीमा हैदर राम भक्ति में इस कदर डूबी हुई हैं कि अपने घर में ना सिर्फ उन्होंने राम दरबार स्थापित किया है, बल्कि भगवान के भजन-कीर्तन में भी डूबी हुई हैं। सीमा हैदर के एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं, जिनमें वो रामभक्ति करती हुई दिख रही हैं।

एक ताजा वायरल वीडियो में सीमा हैदर राम का भजन गाती हुई दिख रही हैं। इसमें वो अपने सिर पर पल्लू डाले हुए हाथ जोड़कर प्रसिद्ध भजन गा रही हैं। उनके पीछे भारत का तिरंगा लगा हुआ है। साथ ही भगवान गणेश जी की प्रतिमा भी दिख रही है। इसके अलावा, यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ की भी एक तस्वीर रखी हुई है।

जिस भजन को सीमा हैदर गा रही हैं, उसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने X (पूर्व में ट्विटर) हैंडल पर भी शेयर किया था। जी हाँ, वह भजन है- मेरी झोपड़ी के भाग्य आज खुल जाएँगे, राम आएँगे। राम आएँगे तो अंगना सजाऊँगी, दीप जलाके दिवाली मैं मनाऊँगी…।” बता दें कि इस गाने को बिहार के छपरा की रहने वाली स्वाति मिश्रा ने गाया था। इसे पीएम ने भी ट्विटर पर साझा किया था।

सीमा हैदर के वीडियो को पत्रकार राजेश साहू ने अपने X पोस्ट में शेयर किया है। इसके साथ ही उन्होंने मजाकिया अंदाज में लिखा है, “श्रीमती सीमा हैदर जी ने आज भजन गाने का काम किया है। हम अखण्ड भारत बनाने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहे हैं।”

बता दें कि सीमा हैदर और नोएडा के रहने वाले सचिन मीणा की प्रेम कहानी साल 2020 में मोबाइल पर पबजी गेम खेलने से शुरू हुई थी। दोनों में दूर से ही इतनी नजदीकियाँ बढ़ीं कि सीमा पाकिस्तान में अपना घर-बार छोड़कर अपने बच्चों संग अवैध तरीके से नेपाल होते हुए यूपी के सचिन के पास चली आईं। उन्होंने हिंदू धर्म के सभी रीति-रिवाजों को भी अपना लिया है और अपने चारों बच्चों के नाम भी हिंदू रख दिए हैं।

सीमा के भारत आने के बाद से ही यह प्रेमी युगल पाकिस्तानियों के निशाने पर है। पाकिस्तानी इनको लेकर अक्सर उल्टा-सीधा बोलते रहते हैं। हालाँकि, सीमा हैदर उनको करारा जवाब भी देती रहती हैं। ऐसे ही एक पाकिस्तानी को जवाब देते हुए सीमा ने पिछले दिनों कहा था, “इज्जत करो यार, तुम्हारे जीजा लगते हैं हमारे पति। दामाद हैं तुम लोगों के।”

राम मंदिर पर सवाल उठाते ही मिला एक और जख्म, गिर गया पूरा मंच: पूर्व सांसद अली अनवर अंसारी आए थे दाएँ पैर में बेल्ट बाँध कर, अब बायाँ पैर भी घायल

बिहार के गया में मुस्लिम समुदाय की एक सभा में JDU के पूर्व सांसद अली अनवर अंसारी को राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा की आलोचना करना भारी पड़ गया। जैसे ही उन्होंने रामलला के भव्य मंदिर और प्रभु की प्राण प्रतिष्ठा पर सवाल उठाया, मंच भरभरा कर गिर गया। इसके कारण मंच पर मौजूद जेडीयू नेता सहित कई और लोग घायल हो गए।

ये सभा अतरी प्रखंड के डिहुरी गाँव में हो रही थी। यहाँ मुस्लिम समुदाय की तरफ से फ्रीडम फाइटर और पूर्व मंत्री अब्दुल कयूम अंसारी की 51वीं पुण्यतिथि मनाई जा रही थी। कार्यक्रम में पूर्व सांसद अली अनवर अंसारी मुख्य वक्ता थे।

पूर्व सांसद अली अनवर अंसारी ने कहा, “22 जनवरी को श्रीरामचंद्र जी की प्राण प्रतिष्ठा है। वोट के लिए यह कार्यक्रम किया जा रहा है। जिस दिन भगवान राम का जन्मदिन है, उस दिन प्राण प्रतिष्ठा का आयोजन क्यों नहीं किया गया?” इसके बाद क्या हुआ, वीडियो में देख सकते हैं।

JDU नेता अली अनवर अंसारी के इतना कहते ही अचानक से मंच भरभरा कर गिर गया और मंच पर मौजूद सभी नेता जमीन पर आ गए। जिस दौरान मंच गिरा, वहाँ गिनती के 10-12 लोग ही बैठे थे, लेकिन किसी को संभलने तक का मौका नहीं मिला और पल भर में ही पूरा मंच जमीन पर आ गया।

मंच के गिरते ही ‘खिसयानी बिल्ली खंभा नोचे’ की तरह पूर्व सांसद अली अनवर अंसारी ने कहा, “दाहिने पैर में हम बेल्ट बाँधकर आए थे। आज बायाँ पैर भी चोटिल हो गया, लेकिन कोई बात नहीं है। नेताओं को इसी तरह से फँसाया जाता है। फिरोज साहब ने कहा कि 10 से 12 गाँव हैं। नेता तो लोभी होता ही है। हमें लगा कि मजमा लगेगा, इसलिए आ गए। जितने लोग आए सभी को आभार व्यक्त करते हैं।”

मंच के गिरने से पूर्व सांसद अली अनवर अंसारी के बाएँ पैर में चोट आ गई। बताते चलें कि मंच गिरने से पहले ये कार्यक्रम सुचारू रूप से जारी था। कार्यक्रम दोपहर बाद शुरू हुआ था। मंच से भाषणबाजी जारी थी। अब्दुल कयूम अंसारी के कामों के कसीदे पढ़े जा रहे थे।

इसी दौरान मुख्य वक़्ता अंसारी की जुबान ने जैसे ही आराध्य में भगवान राम के समारोह पर सियासी बयानबाजी जारी की, रामलला पर सवाल उठाए, वैसे ही सब जमीन पर आ गिरे।

कॉन्ग्रेस पर सुप्रीम कोर्ट के ‘न्याय’ का हथौड़ा: 40 साल पहले किया था सरकारी संसाधन का FREE उपयोग, अब देना होगा 1 करोड़ रुपया

सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार (19 जनवरी 2024) को एक महत्वपूर्ण फैसले में कॉन्ग्रेस को 1 करोड़ रुपए जमा कराने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने कहा कि पार्टी ने 1981 से 1989 तक राज्य की सत्ता में रहने के दौरान राजनीतिक रैलियों उत्तर प्रदेश राज्य पथ परिवहन निगम की बसों का इस्तेमाल किया गया था, जिसका भुगतान नहीं किया गया था।

सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस केवी विश्वनाथन की पीठ ने उत्तर प्रदेश कॉन्ग्रेस कमेटी (UPCC) की याचिका पर राज्य सरकार और उत्तर प्रदेश राज्य पथ परिवहन निगम (UPSRTC) को नोटिस जारी किए। कोर्ट ने कॉन्ग्रेस पार्टी को चार सप्ताह के भीतर एक करोड़ रुपए जमा करने का निर्देश दिया है।

वहीं, कॉन्ग्रेस की ओर से पेश वरिष्ठ वकील सलमान खुर्शीद ने कहा कि यह तय होना चाहिए कि इस मामले में किस हद तक सरकार की जिम्मेदारी बनेगी और किस हद तक राजनैतिक दल की। अगर राजनैतिक दल ने कॉन्ट्रैक्ट किया है तो उसे उस करार के आधार पर भुगतान करना चाहिए। उन्होंने तर्क दिया कि कुल 2.68 करोड़ रुपए की राशि विवादित है।

इस पर जस्टिस सूर्यकांत ने कहा, “राशि का विरोध करने के लिए यदि आप दीवानी मुकदमा दायर करते हैं तो निर्णय आने में 20-30 साल लगेंगे। उसके बाद पहली अपील, दूसरी अपील और अन्य कार्यवाही होगी। इसके बजाय, हम याचिकाकर्ता की वास्तविक देनदारी निर्धारित करने के लिए एक मध्यस्थ नियुक्त करने के बारे में सोच रहे हैं।”

पीठ ने कहा कि प्रामाणिकता स्थापित करने के लिए वह प्रदेश कॉन्ग्रेस को कुल बकाया की एक निश्चित राशि जमा करने का निर्देश देगी। पीठ ने कहा, “शुरुआत में हम आधी राशि जमा करने का आदेश देने के बारे में सोच रहे थे, लेकिन फिर हमने सोचा कि एक करोड़ रुपए प्रामाणिकता स्थापित करने के लिए पर्याप्त होंगे।”

दरअसल, उत्तर प्रदेश कॉन्ग्रेस ने साल 1998 में दायर एक रिट याचिका के सिलसिले में इलाहाबाद हाई कोर्ट द्वारा 5 अक्टूबर 2023 को दिए गए आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी। इसमें प्रदेश कॉन्ग्रेस ने लखनऊ सदर के तहसीलदार द्वारा जारी वसूली नोटिस को चुनौती दी थी।

यह कार्यवाही उत्तर प्रदेश राज्य पथ परिवहन निगम (UPSRTC) के प्रबंध निदेशक के कहने पर शुरू की गई थी। इसमें दावा किया गया था कि प्रदेश कॉन्ग्रेस पर 2.68 करोड़ रुपए (2,68,29,879.78 रुपए) की राशि बकाया है और वह इसे वसूलने का हकदार है।

हाईकोर्ट ने इसमें विभिन्न बिलों तथा UPSRTC के 2 अप्रैल 1981 के एक पत्र का संज्ञान लिया है। इस पत्र में कहा गया है कि 16 फरवरी 1981 को उत्तर प्रदेश कॉन्ग्रेस ने किसान रैली आयोजित की थी, जिसके लिए उसके बसों का इस्तेमाल किया गया था। इन बसों का किराया 6.21 लाख रुपए से अधिक का बकाया है।

इसी तरह 16 दिसंबर 1984 के एक अन्य पत्र में कहा गया था कि 19 नवंबर 1984 को दिवंगत प्रधानमंत्री इंदिरा गाँधी की अस्थियों को श्रद्धांजलि देने के लिए आने-जाने लोगों को वाहन उपलब्ध कराया गया था, जिसका किराया 8.69 लाख रुपए बाकी है। इस तरह इलाहाबाद हाई कोर्ट ने तीन महीने के भीतर 2.66 करोड़ रुपए भुगतान का निर्देश दिया था।

हाई कोर्ट ने उत्तर प्रदेश को निर्देश दिया था कि वह UPSRTC को देय तिथि से 5 प्रतिशत ब्याज के साथ तीन महीने की अवधि के भीतर 2.66 करोड़ रुपए का पूरा भुगतान करे। इलाहाबाद हाईकोर्ट के जज जस्टिस मनीष कुमार और जस्टिस विवेक चौधरी की पीठ ने फैसला सुनाते हुए कहा था कि कॉन्ग्रेस ने अपने राजनीतिक उद्देश्यों के लिए सरकारी बसों का इस्तेमाल किया था।

इस पर कॉन्ग्रेस ने अपनी याचिका में कहा था कि यह रकम राजनीतिक प्रतिशोध के तौर पर और याचिकाकर्ता को राजनीतिक दबाव में लाने के इरादे से वसूली जा रही है। इस पर अदालत ने कहा था कि परिवहन निगम ने उन्हें बिल दिए थे, लेकिन 25-30 सालों से भुगतान लंबित रखा गया। अदालत ने फटकार लगाते हुए कहा था कि यह कहते हुए बिल का भुगतान करने से नहीं बचा जा सकता है कि ये राजनीतिक बदला है।

‘मैं जाऊँगा अयोध्या, जिसको जो ऐक्शन लेना है ले…’: AAP सांसद हरभजन सिंह, प्राण प्रतिष्ठा का विरोध करने से दुखी कॉन्ग्रेस विधायक ने दिया इस्तीफा

अयोध्या में नवनिर्मित राम मंदिर में भगवान रामलला के विग्रह को स्थापित कर दिया है। विग्रह की प्राण प्रतिष्ठा 22 जनवरी 2024 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की उपस्थिति में होना है। इसको लेकर पूरे देश में उत्साह का माहौल है और पूरा देश राममय हो गया है। हालाँकि, विपक्षी दल भगवान को लेकर भी राजनीति करने से बाज नहीं आ रहे हैं। इसके परिणाम भी देखने को मिल रहे हैं।

आम आदमी पार्टी से राज्यसभा सांसद हरभजन सिंह ने राममंदिर को लेकर राजनीति ना करने की सलाह दी है। उन्होंने कहा कि ये सौभाग्य की बात है कि वर्तमान पीढ़ी के दौर में राम मंदिर में बन रहा है और इस मंदिर में सबको आशीर्वाद लेने के लिए जाना चाहिए। वहीं, गुजरात के कॉन्ग्रेस विधायक सीजे चावड़ा ने प्राण प्रतिष्ठा का न्यौता ठुकराने से दुखी होकर विधायकी से इस्तीफा दे दिया है।

पूर्व क्रिकेटर हरभजन सिंह ने कहा, “कौन क्या कहता है, ये अलग बात है। सही बात ये है कि ये जो मंदिर… धाम… बनने जा रहा है, ये हम सबका सौभाग्य है कि हमारे दौर में ये सब चीजें हो रही हैं। हमें वहाँ जाना चाहिए और आशीर्वाद लेना चाहिए। मैं तो यही कहूँगा कि कोई जाए या ना जाए, मेरी जो भगवान में आस्था है और मेरा जो यकीन है, मैं तो जरूर जाऊँगा।”

हरभजन सिंह ने आगे कहा, “कोई पार्टी जाए या ना जाए, मेरा अपना ये स्टैंड है कि मैं भगवान में विश्वास करता हूँ और वहाँ जरूर जाऊँगा। कॉन्ग्रेस को जाना है जाए, नहीं जाना है नहीं जाए… जो करना है करे। मेरे जाने से अगर किसी को कोई दिक्कत है तो उन्हें जो करना है करे। मेरा मानना है कि मैं जीवन में जो कुछ भी हूँ, ये उसकी (भगवान की) कृपा है और आशीर्वाद लेने जरूर पहुँचूँगा।”

ये सिर्फ आम आदमी पार्टी के सांसद का विचार नहीं है, बल्कि कॉन्ग्रेस पार्टी में ऐसे कई लोग हैं जो पार्टी की लाइन से हटकर अयोध्या जा रहे हैं और प्राण प्रतिष्ठा समारोह में भाग ले रहे हैं। इनमें प्रमुख नाम हिमाचल प्रदेश की कॉन्ग्रेस अध्यक्ष प्रतिभा सिंह और उनके मंत्री बेटे विक्रमादित्य सिंह भी प्रमुख हैं। वहीं, गुजरात के वरिष्ठ कॉन्ग्रेस नेता सीजे चावड़ा ने पार्टी के निर्णय के विरोध में विधानसभा की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया है।

गुजरात के विजापुर निर्वाचन क्षेत्र से तीन बार विधायक चावड़ा ने शुक्रवार (19 जनवरी 2024) को गाँधीनगर में विधानसभा अध्यक्ष शंकर चौधरी को अपना इस्तीफा सौंप दिया। अपने इस्तीफे में चावड़ा ने कहा कि अयोध्या में प्राण प्रतिष्ठा को लेकर पूरे देश में खुशी का माहौल है, लेकिन कॉन्ग्रेस इसका बहिष्कार कर रही है। इससे वे परेशान हैं।

सीजे चावड़ा ने कहा, “मैंने कॉन्ग्रेस से इस्तीफा दे रहा हूँ। मैंने 25 साल तक कॉन्ग्रेस में काम किया है। इसका कारण यह है कि जब पूरे देश के लोग राम मंदिर में प्राण प्रतिष्ठा को लेकर खुश हैं। हर तरफ खुशी की लहर है। उस खुशी की लहर का हिस्सा बनने के बजाय इस पार्टी (कॉन्ग्रेस) ने जो रुख अपनाया है, वही परेशान होने का कारण है।”

पीएम मोदी और गृह मंत्री अमित शाह की तारीफ करते हुए चावड़ा ने आगे कहा, “हमें गुजरात के दो बड़े नेताओं पीएम मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के कार्यों और नीतियों का समर्थन करना चाहिए, लेकिन कॉन्ग्रेस में रहते हुए मैं ऐसा नहीं कर पाता। इसलिए मैंने इस्तीफा दे दिया है।” चावड़ा के इस्तीफे के बाद 182 सदस्यीय गुजरात विधानसभा में कॉन्ग्रेस के विधायकों की संख्या अब सिर्फ 15 रह गई है।

चावड़ा ने जिस तरह का संकेत दिया है, उससे माना जा रहा है कि वे भाजपा में शामिल हो सकते हैं। हालाँकि, अभी तक इसकी पुष्टि नहीं हुई है। इससे पहले आणंद जिले के खंभात से कॉन्ग्रेस विधायक चिराग पटेल ने भी विधानसभा से इस्तीफा दे दिया था। बता दें कि लोकसभा चुनावों को लेकर दिल्ली में आम आदमी पार्टी और कॉन्ग्रेस के बीच सीटों के बँटवारे पर सहमति बन जाने की खबर आ रही है।

कोचिंग कल्चर कैंसल: 12वीं पास, 16+ की उम्र के बच्चों का ही एडमिशन, सक्सेस के फर्जी दावे पर लाइसेंस रद्द, जानें सरकार की नई गाइडलाइन्स

भारत सरकार ने कोचिंग संस्थानों पर नकेल कसने की तैयारी कर ली है। कोचिंग सेंटर्स से जुड़े हादसों, सफलता की उम्मीद तले दबे छात्र-छात्राओं द्वारा आत्मघाती कदम उठाने जैसी घटनाओं की बाढ़ आने के बाद केंद्र सरकार ने नई गाइडलाइन्स जारी की है। इन गाइडलाइन्स के मुताबिक, कोचिंग संस्थानों में अब 16 साल से कम उम्र के विद्यार्थियों (छात्र और छात्राएँ) को एंट्री नहीं दी जा सकेगी। यही नहीं, 12वीं पास करने के बाद ही किसी विद्यार्थी को प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी के लिए कोचिंग इंस्टीट्यूट में एंट्री दी जा सकेगी। इसके साथ ही केंद्र सरकार ने कई अन्य नियम भी लागू किए हैं, जिनके बारे में हम विस्तार से बता रहे हैं।

भारत सरकार द्वारा जारी गाइडलाइन्स के मुताबिक, अब से केवल 16 वर्ष से अधिक आयु के विद्यार्थी या कक्षा 12 की बोर्ड परीक्षा उत्तीर्ण किए हुए विद्यार्थी ही कोचिंग सेंटरों में एंट्री ले सकेंगे। इससे विद्यार्थियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी।

कई कोचिंग सेंटरों को अपने सिलेबस और फीस को नई गाइडलाइन्स के हिसाब से अपडेट करना होगा। इससे कुछ कोचिंग सेंटरों को नुकसान हो सकता है। हालाँकि, यह विद्यार्थियों के लिए एक सकारात्मक कदम है। इससे विद्यार्थियों की सुरक्षा और कल्याण सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी। इसके अलावा, कोचिंग सेंटरों को प्रतियोगी परीक्षाओं में रैंक या अंकों के बारे में झूठे दावे करने से रोका जाएगा। इससे विद्यार्थियों को धोखा देने से बचाया जा सकेगा।

सरकार ने 11 पन्नों की गाइडलाइन्स में कोचिंग सेंटरों को भी परिभाषित किया है। इसके मुताबिक, इन गाइडलाइन्स के मानकों के अनुसार, ‘कोचिंग सेंटर’ किसी व्यक्ति द्वारा संचालित ऐसी सुविधा है, जो 50 से अधिक विद्यार्थियों को प्रतियोगी परीक्षाओं, कॉलेज के सिलेबस या अन्य परीक्षाओं की तैयारी में मदद करते हैं। ऐसे में सरकार ने अब फीस से लेकर पढ़ाई के घंटों तक को ध्यान में रखते हुए ये गाइडलाइन बनाई है, ताकि विद्यार्थियों पर बेवजह का दबाव न पड़ सके।

सरकार की गाइलाइन्स के मुताबिक, अब कोचिंग सेंटरों का रजिस्ट्रेशन अनिवार्य हो गया है। उन्हें फॉर्म, फीस इत्यादि की सही जानकारी देनी होगी। अगर कोचिंग सेंटर की कई शाखाएँ हैं, तो हर एक शाखा का रजिस्ट्रेशन कराना पड़ेगा। यही नहीं, शिक्षकों की पढ़ाई कम से कम स्नातक स्तर की होनी चाहिए। इसके साथ ही कोचिंग छोड़ने की स्थिति में फीस वापसी जैसे प्रावधान की भी जानकारी दी गई है।

अब कोचिंग सेंटरों को शिकायत दर्ज करने की भी व्यवस्था बनानी पड़ेगी। इसमें विद्यार्थी, उनके अभिभावक, कोचिंग सेंटर के शिक्षक भी अपनी शिकायत दर्ज करा सकेंगे। वहीं, कोचिंग सेंटर भी विद्यार्थियों या अभिभावकों के खिलाफ शिकायत दर्ज करा सकेंगे। इसकी जाँच सक्षम अधिकारी को 30 दिनों के भीतर पूरी करनी होगी।

गाइडलाइन्स के मुताबिक, अगर कोई विद्यार्थी कोचिंग सेंटर छोड़ता है, तो उसे 10 दिनों के भीतर कोचिंग सेंटर को फीस लौटानी पड़ेगी। विद्यार्थी अगर हॉस्टल में रहता है, तो उसके भी पैसे लौटाने पड़ेंगे। यही नहीं, अब विद्यार्थियों के लिए कोचिंग सेंटरों में प्रति विद्यार्थी जगह की भी व्यवस्था करनी पड़ेगी। आग से बचाव और बिल्डिंग की सिक्योरिटी की भी व्यवस्था करनी पड़ेगी। इन सेंटरों में फर्स्ट एड किट बॉक्स भी जरूरी है। सीसीटीवी कैमरों की मौजूदगी भी जरूरी कर दी गई है।

कोचिंग सेंटरों में छात्रों की रेगुलर पढ़ाई (कॉलेज-क्लास) के घंटे के दौरान कोचिंग की पढ़ाई का समय ओवरलैप नहीं करना चाहिए। इसके साथ ही सप्ताह में एक दिन की छुट्टी भी रखनी पड़ेगी।

सरकार की गाइलाइन्स के मुताबिक, अगर कोई कोचिंग संस्थान इन नियमों को तोड़ता है, तो उस पर जुर्माना भी लगाया जाएगा। पहली बार में ये जुर्माना 25 हजार रुपए का होगा, तो दूसरी बार में 1 लाख रुपए का जुर्माना लगाया जाएगा। यही नहीं, अगर ज्यादा बार नियम टूटे, तो कोचिंग सेंटर का रजिस्ट्रेशन ही रद्द कर दिया जाएगा।

बता दें कि हाल के समय में कई ऐसे मामले सामने आ चुके हैं, जिसमें प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे छात्रों ने दबाव के चलते आत्मघाती कदम उठाए हैं। वहीं, कई जगहों पर कोचिंग सेंटरों में आग लगने जैसी घटनाएँ भी सामने आई हैं। इसके अलावा छात्रों को झूठे सब्जबाग दिखाकर ठगने के भी कई मामले सामने आ चुके हैं। इन सब घटनाओं को देखते हुए केंद्र सरकार ने ये नई गाइड लाइन्स जारी की हैं।

गाड़ी पर लगा रखा था भगवान राम का झंडा, अयोध्या की कर रहे थे रेकी: ATS ने जिन 3 को पकड़ा उन्होंने खोल दिए खालिस्तानी साजिश के तार

यूपी ATS ने अयोध्या से 3 ऐसे लोगों को गिरफ्तार किया है, जो कनाडा में बैठे खालिस्तानी आतंकी के निर्देश पर अयोध्या की रेकी कर रहे थे। इसमें से एक आरोपित राजस्थान का चर्चित गैंगस्टर है, जिस पर कई केस दर्ज हैं। जिन्हें दबोचा गया है, उनके नाम प्रदीप पुनिया, अजीत कुमार शर्मा और शंकर लाल दुसाद है। इसमें से शंकर लाल दुसाद राजस्थान का गैंगस्टर है।

‘आज तक’ की रिपोर्ट के मुताबिक, तीनों बदमाश अयोध्या का चक्कर लगा रहे थे। उन्होंने अपनी स्कॉर्पियो गाड़ी पर भगवान राम का झंडा लगा रखा था, ताकि उन्हें पुलिस न रोके। तीनों में से एक गैंगरेस्टर शंकर लाल ने बताया कि उसने ऐसा कनाडा में बैठे खालिस्तानी आतंकी के निर्देश पर किया। यूपी एटीएस ने गुरुवार (18 जनवरी, 2024) को उन्हें अयोध्या में गिरफ्तार किया था।

पता चला है कि शंकर लाल कनाडा में छिपे बैठे खालिस्तानी हरमिंदर उर्फ लांडा से संपर्क में था। लांडा ने शंकर से कहा था कि खालिस्तानी आतंकी गुरपतवंत सिंह पन्नू से उसे निर्देश मिले हैं कि अयोध्या की जानकारी हासिल कर नक्शा बनाकर भेजा जाए। लांडा के कहने पर ही तीनों अयोध्या पहुँचे थे।

जाँच में पता चला है कि तीनों को अयोध्या में ही रुकना था और अपने आकाओं के निर्देश पर किसी बड़ी वारदात को अंजाम देना था। इनके पास से हरियाणा के नंबर प्लेट वाली फॉर्च्यूनर कार भी बरामद हुई है। वहीं, इन तीनों के पकड़े जाने के बाद ‘सिख फॉर जस्टिस’ (SFJ) नाम के प्रतिबंधित खालिस्तानी आतंकी संगठन के सरगना गुरपतवंत सिंह पन्नू ने एक ऑडियो जारी किया और तीनों बदमाशों का समर्थन किया। अब यूपी एटीएस इन बदमाशों के ‘सिख फॉर जस्टिस’ के कनेक्शन भी खंगाल रही है।

‘अमर उजाला’ की रिपोर्ट के मुताबिक, तीनों राजस्थान के सीकर के रहने वाले हैं। अब एटीएस के साथ ही आईबी भी इनसे पूछताछ कर रही है। यही नहीं, सीकर में इनके ठिकानों के बारे में राजस्थान पुलिस से भी मदद ली जा रही है। यूपी पुलिस के DG (कानून व्यवस्था) प्रशांत कुमार ने तीनों के पकड़े जाने की पुष्टि की है, साथ ही कहा है कि उनसे मिली जानकारियों की पुष्टि की जा रही है।

दलित लड़की को नग्न कर पीटा, जलाया… DMK विधायक के बेटे-बहू के घर काम करती थी नाबालिग, NEET क्लियर कर बनना चाहती है डॉक्टर

तमिलनाडु में DMK नेता और विधायक I करुणानिधि के बेटे एंटो मथिवानन और उनकी पत्नी पर गंभीर आरोप लगे हैं। दोनों पर अपनी घरेलू सहायिका पर अत्याचार करने, प्रताड़ित करने, मारने, जलाने जैसे आरोप लगे हैं, साथ ही उसके कोई मेडिकल हेल्प न देने का भी आरोप है। ये आरोप 18 साल की लड़की ने लगाए है, जो उनके घर पर 16 हजार रुपए प्रति माह पर घरेलू सहायिका का काम करती थी। लड़की अनुसूचित जाति से आती है और 12वीं की पढ़ाई के बाद नीट की कोचिंग का खर्च उठा सके, इसलिए घरेलू सहायिका के तौर पर काम कर रही थी।

ये मामला चेन्नई का है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, कल्लाकुरिची जिले के थिरुंगुंद्रम गाँव की रहने वाली 18 साल की लड़की ने ये आरोप लगाए हैं। उसने कहा है कि अप्रैल 2023 में उसे एजेंसी के माध्यम से एंटो मथिवानन के घर पर काम के लिए रखा गया था। ये लोग बात-बात पर विधायक का बेटा-बहू होने का धौंस दिखाते थे और काम में छोटी सी भी गलती होने पर उसकी पिटाई करते हैं।

लड़की का आरोप है कि विधायक करुणानिधि की बहू मर्लिना एन ने उसकी पिटाई के बाद उसका फोन भी छीन लिया। लड़की ने कहा कि उसे काम छोड़ना है, तो उन्होंने इनकार कर दिया। लड़की पढ़ाई-लिखाई में अच्छी है और 12वीं की परीक्षा में 70 प्रतिशत से ज्यादा अंक ला चुकी है। उसकी इच्छा है कि वो NEET पास करके MBBS की पढ़ाई करे और डॉक्टर बने।

‘इंडियन एक्सप्रेस’ की रिपोर्ट के मुताबिक, डीजीपी को दिए गए शिकायत में लड़की ने बताया है कि मर्लिना ने उसे निर्वस्त्र किया, उसे पीटा और पानी में मिर्ची डालकर पिलाया। यही नहीं, एंटो मथिवानन ने भी उसे पीटा। उसे काम के पैसे भी नहीं दिए गए और किसी को बताने पर विधायक के बेटे-बहू होने की धौंस दी गई। वो ये सब सहती रही। लेकिन 15 जनवरी को जब पोंगल के मौके पर घर पहुँची, तब जाकर उसकी चोट के बारे में घरवालों को पता चला। इसके बाद 16 जनवरी को सरकारी अस्पताल से डॉक्टर ने पुलिस को सूचना दी और शिकायत दर्ज कराई।

इस मामले में नीलांगराई की महिला पुलिस ने अस्पताल पहुँचकर बच्ची से पूछताछ की, तब जाकर ये मामला सामने आया। इस मामले में लड़की का एक वीडियो भी सामने आया है, जिसमें वो अपने ऊपर हुए अत्याचारों को बता रही है। अब इस मामले में एविडेंस नाम के एनजीओ ने भी हस्तक्षेप किया है और डीजीपी के पास शिकायत भेजी है। बताया गया है कि लड़की की आँखों के ऊपर, माथे पर चोट के निशान पाए गए हैं। साथ ही उसके दोनों हाथ भी जले हुए हैं।

शंख, चक्र, गदा, सूर्य, स्वस्तिक और ॐ से लेकर दशावतार तक: कमल पर विराजमान हैं धर्नुधारी भगवान राम, चरणों में विराजमान हैं गरुड़ और हनुमान

अयोध्या में सोमवार (22 जनवरी, 2024) को निर्माणाधीन भव्य राम मंदिर के गर्भगृह में रामलला की प्राण प्रतिष्ठा होनी है। उससे पहले उस प्रतिमा की तस्वीर भी सामने आ गई है, जिसे कर्नाटक के मूर्तिकार अरुण योगीराज ने गढ़ा है। ये प्रतिमा न सिर्फ मनमोहक है, बल्कि इसे बनाने में शास्त्रों का भी पूरा ध्यान रखा गया है। प्रतिमा में दिख रहे रामलला 5 वर्ष के है, अतः ये भगवान श्रीराम के बाल स्वरूप की मूर्ति है। उनके चारों तरफ आभामंडल को भी प्रतीकात्मक रूप से दर्शाया गया है।

इसे बनाने के लिए एक ही कृष्णशिला पत्थर का उपयोग किया गया है। 22 जनवरी को जब प्राण प्रतिष्ठा होगी, तब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी वैदिक रीति-रिवाजों के साथ आँखों से पट्टी हटाएँगे और सोने की सलाई से काजल भी लगाएँगे। इसके बाद रामलला को शीशा दिखाया जाएगा। इस मूर्ति की लंबाई 4.24 फ़ीट ऊँची है। उनके मस्तक के ऊपर स्वस्तिक, ॐ, चक्र, गदा और भगवान सूर्य सुशोभित हैं। मूर्ति की दाईं हाथ की तरफ मत्स्य, कूर्म, वराह, नृसिंह और वामन अवतार को दर्शाया गया है।

वहीं बाईं तरफ परशुराम, राम, कृष्ण, बुद्ध और कल्कि को दिखाया गया है। इस तरह भगवान विष्णु के दशावतार पूरे होते हैं। प्रभु के चरण के नीचे कमल का फूल है। वहीं नीचे दाईं तरफ बजरंग बली हैं। बाईं तरफ नीचे पक्षीराज गरुड़ हैं, जिन्हें श्रीहरि का वाहन माना जाता है। उक्त प्रतिमा का वजन 200 किलोग्राम है। इसकी चौड़ाई 3 फ़ीट है। प्रतिमा को क्रेन से उठा कर गर्भगृह में स्थापित किया गया था। भगवान के बाएँ हाथ में धनुष-बाण है। उन्हें सोने का मुकुट पहनाया जाएगा।

मैसूर राजघराने के कलाकार परिवारों से आने वाले 37 वर्षीय अरुण योगीराज 2008 में मैसूर विश्वविद्यालय से MBA किया और एक निजी कंपनी में काम करने के बाद वो वापस अपने परिवारिक पेशे में लौटे, क्योंकि बचपन से उनका यही शौक था। केदारनाथ में स्थापित जगद्गुरु शंकराचार्य की प्रतिमा और दिल्ली के इंडिया गेट पर बनी नेताजी सुभाष चंद्र बोस की प्रतिमा उन्होंने ही बनाई थी। रामलला की प्रतिमा को देख कर हर हिन्दू भाव-विह्वल है। 500 वर्षों के संघर्ष एवं बलिदानों के बाद ये मौका आया है।