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गले में कैंची, सर पर हथौड़ा, प्राइवेट पार्ट में पेचकस… बीवी ने नहीं दिए ₹30 हजार तो इमरान ने मार डाला, हैदराबाद की कोर्ट ने सुनाई मौत की सजा

हैदराबाद की एक अदालत ने 38 साल के इमरान उल हक को मौत की सजा सुनाई है। उसने जनवरी 2019 में बेरहमी से अपनी बीवी की हत्या कर दी थी। अदालत ने इसे ‘रेयरेस्ट ऑफ रेयर’ केस मानते हुए कहा कि इस मामले में क्रूरता की सारी हदें पार की गई।

अतिरिक्त मेट्रोपॉलिटन सत्र न्यायाधीश सीवीएस साई भूपति ने 18 जनवरी 2024 को यह फैसला सुनाया। उन्होंने इमरान पर 10 हजार रुपए का जुर्माना भी लगाया। पेशे से कार चालक ने 30 हजार रुपए नहीं देने पर बीवी नसीमा अख्तर की हत्या की थी।

हैदराबाद के पुलिस उपायुक्त (दक्षिण क्षेत्र) पी साई चैतन्य ने बताया कि यह जघन्य हत्या का मामला है। इमरान उल हक अपनी बीवी नसीमा को छोटी-छोटी बातों पर प्रताड़ित करता था। वह दहेज की माँग करता था। वह कार खरीदने के लिए बीवी से 30 हजार रुपए की माँग कर रहा था।

6 जनवरी 2019 को हक ने अपनी बीवी के गले पर कैंची से वार किया। फिर उसके सिर पर हथौड़ा मारा। मौके से भागने से पहले उसने बीवी के प्राइवेट पार्ट्स में स्क्रू डाइवर डाल दिया था। इस घटना के बाद पुलिस ने इमरान के खिलाफ हक भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 302 (हत्या) और 498 ए के तहत केस दर्ज किया था।

इमरान उल हक हैदराबाद में तालाब कट्टा के पास अमन नगर-बी भवानी नगर का रहने वाला है। वह बीवी नसीमा अख्तर को शारीरिक और मानसिक रूप से प्रताड़ित करता था। हक के ससुराल वालों उसकी दूसरी निकाह का भी विरोध कर रहे थे। दूसरी निकाह के बाद नसीमा के परिजनों ने उसे आर्थिक मदद देना बंद कर दिया था। इससे उसे पैसे की किल्लत होने लगी थी।

6 जनवरी 2019 की इमरान के बच्चे अपने ननिहाल गए थे। उसने बीवी नसीमा से कहा कि उसे भूख लगी है वो उसके लिए रोटी बना दे। नसीमा ने उससे कहा कि उसे उसकी अम्मी बुला रही है वो वापस आकर खाना बना देगी। इससे इमरान नाराज हो गया। लौटकर जब नसीम रोटी बनाने लगी। इस बीच हक ने उसे मारने के लिए कैंची, हथौड़ा और एक स्क्रू ड्राइवर बेडरूम में रख लिया।

नसीमा जब खाना देने आई तो हक उससे जिस्मानी रिश्ते बनाने लगा। इसी दौरान उसने कैंची उसके गले में घोंप दी। उसकी आँखों पर वार किया। उसके सिर पर हथौड़े से वार किया। आखिर में उसके प्राइवेट पार्ट में पेचकस डालकर फरार हो गया। दूसरी बीवी के घर जाकर उसने खून से सने अपने कपड़े बदले थे।

जस्टिस गोगोई, चंद्रचूड़, बोबडे, अब्दुल नजीर, भूषण… सुप्रीम कोर्ट से सुनाया था राम मंदिर वाला फैसला, अब रामलला का साक्षी बनने का मिला न्योता

राम जन्मभूमि केस में ऐतिहासिक फैसला सुनाने वाली सुप्रीम कोर्ट की संवैधानिक पीठ के पाँचों जजों को प्राण प्रतिष्ठा समारोह का आमंत्रण दिया गया है। उस समय चीफ जस्टिस रहे रंजन गोगोई ने इस बेंच की अगुवाई की थी। बाकी के अन्य जजों में जस्टिस अशोक भूषण, जस्टिस एस ए बोबले, जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ (मौजूदा CJI) और जस्टिस सैय्यद अब्दुल नजीर के नाम शामिल हैं।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, उत्तर प्रदेश सरकार ने सुप्रीम कोर्ट की संवैधानिक पीठ के सदस्य रहे इन जजों को राजकीय अतिथि के तौर पर आमंत्रित किया है। इस बीच, 55 पन्नों की एक लिस्ट सामने आई है, जिसमें आमंत्रित माननीयों के नाम लिखे गए हैं। इस लिस्ट के मुताबिक, जस्टिस रंजन गोगोई, जस्टिस अशोक भूषण, जस्टिस एसए बोबले, जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ और जस्टिस सैय्यद अब्दुल नजीर को वीआईपी मेहमानों में रखा गया है। इसके अलावा पूर्व मुख्य न्यायाधीशों, न्यायाधीशों और शीर्ष वकीलों सहित 50 से ज्यादा न्यायविदों को भी निमंत्रण भेजा गया है।

अतिथियों में जस्टिस UU ललित, जस्टिस जी एस खेहर, जस्टिस डी के जैन, जस्टिस ज्ञान सुधा मिश्रा, जस्टिस हेमंत गुप्ता, जस्टिस चेलमेश्वर, जस्टिस रामा सुब्रमण्यम, जस्टिस के जी बालकृष्णन, जस्टिस अनिल दवे, जस्टिस कृष्ण मुरारी, जस्टिस एम के शर्मा, जस्टिस आदर्श गोयल, जस्टिस वी एन खरे शामिल का है। आमंत्रित अतिथियों में अयोध्या केस की सुनवाई से जुड़े वकील के परासरन, हरिशंकर जैन, विष्णु शंकर जैन, सीएस वैद्यनाथन के अलावा महेश जेठमलानी, सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता, पूर्व अटॉर्नी जनरल के के वेणुगोपाल, मुकुल रोहतगी के नाम भी शामिल हैं।

बता दें कि 9 नवंबर, 2019 को सुप्रीम कोर्ट की संवैधानिक पीठ में शामिल पाँच जजों ने राम जन्मभूमि भूमि को हिंदू पक्षों को सौंपकर श्री राम के जन्मस्थान पर राम मंदिर बनाने का मार्ग प्रशस्त करके सदियों से चले आ रहे विवाद का अंत कर दिया था। सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा था कि जो 2.77 एकड़ की विवादित जमीन है, वह रामलला की जन्मभूमि है। कोर्ट ने इस जमीन को उस ट्रस्ट को सौंपने का फैसला सुनाया था जिसे भारत सरकार ने बाद में बनाया। कोर्ट ने सरकार से यह भी कहा था कि वह एक अलग 5 एकड़ जमीन उत्तर प्रदेश सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड को दे ताकि बोर्ड एक मस्जिद बना सके।

गौरतलब है कि अयोध्या में रामलला की प्राण प्रतिष्ठा हो रही है। 16 जनवरी से शुरू हुए धार्मिक अनुष्ठान 22 जनवरी तक चलेंगे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगुवाई में 22 जनवरी को रामलला अपने स्थान पर विराजमान होंगे। पूरे देश में लोग अपने घरों में दिवाली मनाएंगे। हर तरफ मंगलगीत अभी से गाए जा रहे हैं। सोशल मीडिया भी भगवान राम की भक्ति में मशगूल है। 

छू न सके मुस्लिम भीड़, इसलिए बिजली की तार लेकर खड़ीं थीं हिंदू महिलाएँ… कश्मीर की जो कहानी अनसुनी वह महिला पत्रकार ने सुनाई, बताई अपने परिवार की बीती

कश्मीरी हिंदुओं के साथ 90 के दशक में हुई बर्बरता भुला पाना नामुमकिन है। हर साल 19 जनवरी की तारीख आते ही वो जख्म बिलकुल ताजा हो जाते हैं जो इस्लामी कट्टरपंथियों ने कश्मीर के हिंदू परिवारों को 34 साल पहले दिए। कई लोगों ने उस पीड़ा को साझा किया। इसी क्रम में एक्स पर मौजूद इंडियन एक्सप्रेस की पत्रकार आँचल मैग्जीन ने एक थ्रेड में 90 के समय का वाकया बताया।

आँचल ने अपने थ्रेड के जरिए समझाया कि आखिर 19-20 जनवरी 1990 को कश्मीर में क्या हालात थे और कैसे हिंदुओं को टारगेट किया जा रहा था। उन्होंने अपने थ्रेड में बताया कि जब उनकी मासी 1990 में कश्मीर से भागीं, तो उनके कश्मीरी पंडित पड़ोसी ने अपनी 12 वर्षीय बेटी को उन्हें सौंप दिया कि वह कैसे भी करके पहले सुरक्षित स्थान पर पहुँच जाएँ, भले ही वह कश्मीर में ही हो।

बच्ची को लेकर वह 200 किमी दूर जम्मू निकलीं। इस दौरान बच्ची ने एक घूँट पानी तक नहीं पिया। वो परेशान थी कि उसके माता पिता को उससे दूर किया गया है। लेकिन परिवार करता भी तो क्या जैसे हालात थे उनकी चिंता यही थी कि महिलाओं और लड़कियों को बचाया जाए।

आँचल ने अपने थ्रेड में बताया कि उस रात जब महिलाओं को लेकर इस्लामी कट्टरपंथी ओछे नारे लगा रहे थे। तब उनके घर की महिलाएँ बिजली की तारें लेकर खड़ी थीं। उन्हें डर था कि अगर इस्लामी कट्टरपंथी घुस आए तो वो उनके हाथ आने के बजाय मौत को चुन लेंगी।

आँचल कहती हैं कि कश्मीरी पंडितों को जिस वजह ने भागने को मजबूर किया गया वो उनकी महिलाएँ और उनकी सुरक्षा थी। उस समय कश्मीर में आजादी और क्रांति के नारे नहीं, बल्कि नारे थे- “असि गछि काशीर, बटव रोअस त बटनेव सान (कश्मीर चाहिए, बिना कश्मीरी पंडित आदमियों के और कश्मीरी पंडित औरतों के साथ); रालिव, गलिव या चलिव का नारा था” जिसका मतलब था (इस्लाम कबूलों या फिर भाग जाओ।)

आँचल मैग्जीन द्वारा शेयर किए थ्रेड (तस्वीर साभार: @AanchalMagazine)

पत्रकार ने बताया कि कश्मीरी महिलाओं के साथ जो हुआ है 34 साल बाद भी उसका आंतरिक आघात, तनाव, ट्रॉमा उनमें हैं। बड़ी मुश्किल से इस पर बात हो पाती है। वह कहती हैं कि पिछले कुछ सालों से वह जब इसपर लिखती हैं तो उन्हें नफरत भरे संदेश आते हैं। एक ने तो ये तक कहा था उन्हें तुम्हें जन्म देने के लिए तुम्हारी माँ को शर्मिंदा होना चाहिए। एक ने कहा था- “तुम्हारे घर में मर्दों को स्कर्ट पहनना चाहिए”

आँचल मैग्जीन द्वारा शेयर किए थ्रेड (तस्वीर साभार: @AanchalMagazine)

अपने थ्रेड में आँचल पूछती हैं कि 47 के समय जब विभाजन हुआ था तो भी लोगों ने पलायन किया था क्या इसे ये कहेंगे कि वो कमजोर थे। वो पूछती हैं कि कैसे कश्मीरी पंडितों का रेप करने वाले, महिलाओं को टारगेट करने वाले ताकतवर माने जाते हैं और कैसे उनकी रक्षा करने वाले लोग कमजोर समझे जाते हैं।

आँचल पूछती हैं, “शर्म हम लोग क्यों करें। ये शर्म उन्हें आनी चाहिए जिन्होंने हमें जाने के लिए मजबूर किया और उन्हें आए जो उस दर्द को हमारी कमजोरी कहते हैं।”

आँचल अपनी परवरिश पर गौरवान्वित महसूस करती हैं। कहती है- “मुझे इस बात पर बहुत गर्व है कि कैसे मेरे परिवार ने अंजान क्षेत्र में, घर छिन जाने के बाद, यातना से गुजरते हुए नए जीवन की शुरुआत कर मेरा पालन-पोषण किया। मेरे नाना (नाना), जो पलायन के बाद सिर्फ छह साल जीवित रहे, ने मुझे कभी हिंसा, बदला लेना नहीं सिखाया। उन्होंने मुझे विद्या दी। सिखाया कि किताबों को कभी मत छोड़ो। मैं आज भी इस पर अमल कर रहा हूँ लेकिन न्याय और पुनर्वास की आशा कहीं से नहीं दिख रही।”

आँचल उम्मीद करती हैं कि जिस तरह से लोग कश्मीरी पंडितों के दर्द असंवेदनशील हो जाते हैं ये पीढ़ी वैसी न हो। वो वह आघात कश्मीरी पंडितों को न दें। वह कहती हैं कि आज भी ऐसे लोग हैं समाज में जो मानते ही नहीं 90 में कश्मीरी हिंदुओं संग कुछ गलत हुआ था।

राम अनादि अखंड अनंता: वातावरण में प्रभु श्री राम हैं व्याप्त, सनातन संस्कृति का पुनर्जागरण काल

अयोध्या में दिव्य, भव्य मंदिर का होने वाला लोकार्पण सुखद क्षण है, जो हर भारतीय के मन को आल्हाद से गुदगुदाने वाला है। आज भारत ही नहीं अपितु वैश्विक फलक पर वातायन में राम नाम की गूंज हो रही है। वास्तव में भारत के लिए यह अमृत काल है। 500 वर्षों की लम्बी और विकट साधना सिद्धि तक पहुँच रही है। पूरे वातावरण में ‘श्री राम’ का नाम व्याप्त है। श्री राम का गुणानुवाद, श्री राम के मर्यादा पुरुषोत्तम रूप की चर्चा गुंजायमान हो रही है। वातावरण में प्रभु श्री राम व्याप्त हैं। यही तो अखिल ब्रह्माण्ड नायक का अनन्त में व्याप्त स्वरूप है, जो समूचा जगत आज प्रभु श्री राम के नाम का गुणानुवाद कर रहा है।

संत जन कहते हैं, “राम वे अधिक राम कर नामा।” नाम और गुण का चहुं ओर व्याप्त राम का वैचारिक रूप में अवतरण ही कहा जाएगा, जो प्रभु श्री राम के भक्तों और सनातन संस्कृति के ध्वज वाहकों ने अखण्ड साधना कर अपने प्राणों की आहुति तक दी तथा राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की दृढ़ संकल्पना, जिसको लेकर संघ के स्वयं सेवक जन-जन में अलख जगाने से अयोध्या में दिव्य भव्य श्री राम लला के मंदिर निर्माण के रूप में साकार हो रहा है। सनातन संस्कृति की यह ऐतिहासिक साधना है, जो 500 वर्षों की सतत संघर्ष के बाद साकार हो रही है।

आज भारत ही नहीं अपितु पूरी दुनिया में प्रभु श्रीराम की चर्चा उनके भक्तों और सनातन संस्कृति को मानने वालों में जहाँ हर्ष और उत्साह के रूप में व्याप्त है, वहीं मीडिया जगत से लेकर समाज के विभिन्न हिस्सों में राजनैतिक क्षेत्र तथा विभिन्न धर्म पंथ सम्प्रदाय को मानने वाले सभी में राम की चर्चा है। आस्था के रूप में या अनास्था के रूप में लेकिन चर्चा प्रभु श्रीराम की ही है। एक तरह से यही राम की व्यापकता है, यही अखंड अनादि रूप है, जो सब में व्याप्त है।

राम अखिल ब्रह्माण्ड की नायक सत्ता हैं, राम जीवन शैली हैं, राम आर्दश व्यवस्था हैं, राम आर्दश राजा, राम आस्था प्रेम और भक्ति हैं। राम सहजता, सरलता हैं। राम समरस, भेदभाव रहित, न्यायपूर्ण, पक्षपात रहित समाज की रचना हैं। राम अन्याय और अराजकता के लिए वीरों के उज और तेज भी है। राम का गुणगान आदि और अनंत है।

भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में तथा श्री रामतीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के अहर्निश परिश्रम से आज दिव्य, भव्य, नव्य अयोध्या साकार हो रही है। इसके दर्शन और स्पर्श करने के लिए पूरी दुनिया से लोग पधार रहे हैं।

महर्षि वाल्मीकि के नाम से अयोध्या को हवाई अड्डा, सवरी के नाम से भोजनालय का निर्माण तथा ऋषियों-मुनियों और निषाद राज का नाम दिव्य, नव्य अयोध्या के अमिट हस्ताक्षर बन गए। भक्तिपथ, रामपथ, धर्मपथ और सूर्यस्तम्भों की कतार रामकालीन अयोध्या को जहाँ साकार करती दिख रही है, वहीं यह सब के लिए एक बड़ा संदेश भी दे रही है।

श्रीराम तीर्थ क्षेत्र के नवनिर्माण ने प्रभु श्रीराम की जीवन शैली का सन्देश जन-जन तक पहुँचाने का बड़ा कार्य किया है। जो लोग समाज में जाति-पाति, ऊँच-नीच के भेदभाव को रखते हैं, उनके लिए यह बड़ा सन्देश है कि यदि राम में भक्ति है, राम में आस्था है, तो उनकी जीवन शैली ही हमारे लिए प्रेरक है। हम यदि जाति-पाति, ऊँच-नीच को मानते हैं तो हमारी प्रभु श्रीराम जी की भक्ति अधूरी है। हमारी साधना अधूरी है। हमारी आस्था खंडित है।

इसलिए पूज्य संत तुलसीदास गोस्वामी जी ने प्रभु राम के लिए कहा है, “सिया राम मय सब जग जानी।” सबमें राम ही हैं, राम अलग कोई नहीं, फिर ऊँच-नीच, जाति-पाति का विभेद कैसा? गोस्वामी जी ने रामायण में यह भी कहा, “यहि सर आवत अति कठिनाई राम कृपा बिनु आई न जाई।” राम की कृपा प्राप्ति के लिए राम की भक्ति और साधना की पूर्णता के लिए हमें उन्हीं की जीवन शैली का अनुकरण करना होगा।

सामाजिक जीवन में परिवार से लेकर, समाज, राज्य व्यवस्था और अन्यान्य क्षेत्रों में जिसमें जो कार्य कर रहा है, उसे उस क्षेत्र में राम की प्रेरणा ही पूर्णता में ला सकती है। राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ अपने स्थापना काल से ही भेदभाव रहित समाज की रचना के लिए कार्य कर रहा है। सभी पूजित संत महात्मा जन तथा हमारे राष्ट्र नायक भारत भूमि पर जिस आदर्श रामराज्य की स्थापना को साकार करने के लिए जाति-पाति की अहमन्यता से मुक्त समाज की रचना के लिए काम कर रहे थे, उस भेदभाव रहित समाज को भी साकार होने का अमृत काल आ गया है, ऐसा प्रतीत होता है।

वातायन में व्याप्त प्रभु श्री राम के जीवन से हम व्यवहार रूप में अवश्य प्रेरणा लेंगे और जाति-पाति की अहमन्यता से मुक्त ‘सिया राम मैं सब जग जानी’ की मूलभावना को धारण कर सनातन संस्कृति के इस पुनर्जागरण काल में प्रभु श्री राम जी को हृदय में धारण कर विश्व पटल पर सनातन संस्कृति की पताका सबसे ऊँचे फहराएँगे।

महिला न्यायाधीश को कहा ‘साली’, पूछा – ‘ये अदालत में क्या चु$# चल रहा है?’: दिल्ली हाईकोर्ट ने शुरू किया अवमानना का केस, महिला को थमाया नोटिस

ऑस्ट्रेलिया में रहने वाली एक भारतीय महिला को वीडियो क्रॉन्फ्रेसिंग (VC) के दौरान जज और कोर्ट के खिलाफ अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल करना भारी पड़ गया। आनन-फानन में दिल्ली हाई कोर्ट ने स्वत: संज्ञान लेते हुए अदालत की आपराधिक अवमानना का केस शुरू कर दिया है।

ऑस्ट्रेलिया से अनिता कुमारी गुप्ता ने 10 जनवरी को VC के जरिए कोर्ट की सुनवाई के लिए लॉगइन किया था। जब जस्टिस नीना बंसल कृष्णा अनिता के केस के लिए अगली तारीख देते हुए सुनवाई के लिए अगला केस उठाया तो उसने कोर्ट जस्टिस कृष्णा के खिलाफ अभद्र भाषा का इस्तेमाल किया।

जस्टिस नीना के कोर्ट के आदेश को लेकर अनीता तुरंत बोली, “आइटम नंबर 11 को आइटम नंबर 10 से पहले कैसे लिया जा सकता है ये साली क्या कर रही है? कोर्ट में ये क्या चु$# चल रहा है।”

इस पर जस्टिस कृष्णा की कोर्ट ने अनीता गुप्ता को ‘कारण बताओ नोटिस‘ जारी कर दिया। अदालत ने यह कहते हुए ये आदेश दिया है कि वादी अनीता ने ये अभद्र टिप्पणी तब की थी, जब दोनों पक्षों का प्रतिनिधित्व करने वाले वकील अंतिम बहस के लिए दी गई तारीख पर राजी हो गए थे।

फोटो साभार: बार एंड बेंच

कोर्ट ने अपने आदेश में कहा, “न्यायालय की गरिमा को कम करने वाली ऐसी अपमानजनक टिप्पणियों को ध्यान में रखते हुए स्वत: संज्ञान लेते हुए अवमानना का केस किया गया है। तदनुसार वर्तमान में ऑस्ट्रेलिया के सिडनी में रहने वाली वादी/अनीता कुमारी गुप्ता को ‘कारण बताओ नोटिस’ जारी किया जाता है कि क्यों न उन्हें अदालत की अवमानना अधिनियम, 1971 के तहत दंडित किया जाए।”

इसके साथ ही अनीता को 16 अप्रैल, 2024 को अदालत के सामने खुद खुद उपस्थित होने का आदेश दे डाला। इसके साथ ही कोर्ट ने विदेशी क्षेत्रीय पंजीकरण कार्यालय (FRRO) को ये आदेश भी दिया कि अगर गुप्ता सुनवाई के लिए तय तारीख से पहले भारत आती हैं तो उनके पहुँचते ही उनका पासपोर्ट/वीजा जब्त कर लिया जाए। कोर्ट ने आगे कहा कि गुप्ता को इस कोर्ट के निर्देश के बगैर देश छोड़ने की इजाजत नहीं दी जानी चाहिए।

कोर्ट ने ऑस्ट्रेलिया के कैनबरा में भारतीय उच्चायोग को भारत के महावाणिज्य दूतावास, सिडनी, ऑस्ट्रेलिया के जरिए अपने आदेश के बारे में वर्तमान में ऑस्ट्रेलिया के सिडनी में रह रही है अनीता कुमारी गुप्ता को सूचित करने का भी निर्देश दिया। अनीता गुप्ता की तरफ से वकील सुनील मेहता और इशान रॉय चौधरी पेश हुए। कोर्ट उत्तरदाताओं का प्रतिनिधित्व अधिवक्ता संजीव महाजन ने किया था।

देखत रूप चराचर मोहा… नयनाभिराम, बाल मुख पर दिव्य मुस्कानः प्राण-प्रतिष्ठा से पहले रामलला ने दिया पहला दर्शन, कृष्णशिला से गढ़े गए हैं श्रीराम

अयोध्या में भगवान राम के भव्य मंदिर में रामलला की जिस मूर्ति की प्राण प्रतिष्ठा की जा रही है, उनकी पहली तस्वीर सामने आ चुकी है। रामलला की इस भव्य, मनमोहक और सुंदर छवि का आप भी दर्शन कीजिए। रामलला की प्राण प्रतिष्ठा को लेकर अनुष्ठान 16 जनवरी से शुरू हो चुका है और 22 जनवरी को रामलला की मूर्ति की प्राण-प्रतिष्ठा की जाएगी।

प्राण प्रतिष्ठा के मुख्य कार्यक्रम से पहले रामलला की पहली भव्य तस्वीर सामने आ गई है। तस्वीर में श्रीराम के चेहरे पर मधुर मुस्कान है और माथे पर तिलक है। मौजूदा समय की बात करें तो अभी रामलला की मूर्ति गर्भगृह में है और आचार्यों के मार्गदर्शन में तमाम अनुष्ठान चल रहे हैं। रामलला की ये तस्वीर किसी भी कार्यक्रम के शुरू होने से मूल रूप में है। अब सबको इंतजार है 22 जनवरी है, जब ये प्रतिमा प्राण-प्रतिष्ठित होगी।

बता दें कि रामलला की मूर्ति का निर्माण मूर्तिकार अरुण योगीराज ने किया है। कृष्णशिला पर बनाई गई इस मूर्ति का वजन करीब 150 से 200 किलो है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मौजूदगी में 22 जनवरी को रामलला की प्राण प्रतिष्ठा हो जाएगी, अगले दिन 23 जनवरी से सभी भक्त रामलला के दर्शन कर सकेंगे।

अयोध्या में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ

अयोध्या में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा, “राम मंदिर के प्राण प्रतिष्ठा समारोह को लेकर अयोध्या धाम, उत्तर प्रदेश और पूरे देश में जश्न का माहौल है। मैं यहाँ तैयारियों का निरीक्षण करने आया हूँ।” सीएम योगी ने कहा कि 22 जनवरी के ऐतिहासिक कार्यक्रम के लिए अधिकारियों और राज्य सरकार के मंत्रियों ने अपनी योजना पहले ही पूरी कर ली है।

इससे पहले, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ अयोध्या पहुँचे। उन्होंने हनुमानगढ़ी में पूजा अर्चना की, इसके बाद वो प्राण प्रतिष्ठा समारोह स्थल पर भी गए। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अयोध्या में प्राण प्रतिष्ठा समारोह की अन्य तैयारियों का जायजा लिया। इस दौरान उन्होंने भगवान राम के भव्य मंदिर के सामने तस्वीर खिंचवाई और उसे सोशल मीडिया पर पोस्ट भी किया है।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ अयोध्या में सुबह 11.10 बजे राम कथा पार्क पहुँचे। यहाँ से वो सीधे हनुमानगढ़ी गए और दर्शन-पूजन के उपरांत जन्मभूमि परिसर गए। वो 12 बजे रामलला की आरती में शामिल हुए, फिर हनुमान गुफा पर टेंट सिटी का अवलोकन किया। इसके बाद सीएम योगी ने साकेत पेट्रोल पंप के पास नगर निगम द्वारा बनाए गए टेंट सिटी का भी निरीक्षण किया। फिर वो सरयू तट पहुँचे, जहाँ उन्होंने सोलर बोट का शुभारंभ किया। अयोध्या में अपनी 5 घंटे की मौजूदगी में सीएम योगी ने संतों से भी मुलाकात की और प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम को लेकर समीक्षा बैठक भी की।

‘जय श्री राम’ का उद्घोष भी अपराध, महिलाओं के गहने तक लूट लेती थी पुलिस: जन्मभूमि से 26 km दूर जो गाँव, वहाँ के लोगों ने पूछा – हमारे परिजनों का नरसंहार क्यों?

एक तरफ पूरी दुनिया के हिन्दू सोमवार (22 जनवरी, 2024) को धर्मनगरी अयोध्या में रामजन्मभूमि पर होने वाली प्राण प्रतिष्ठा का बेसब्री से इंतजार कर रही है। दूसरी तरफ I.N.D.I. गठबंधन के दल आए दिन ऐसी हरकतें और बयानबाजी कर रहे हैं जिससे रामभक्तों की आस्था को चोट पहुँच रही है। ताजा बयान समाजवादी पार्टी के नेता शिवपाल यादव का है जिन्होंने 30 अक्टूबर व 2 नवंबर, 1990 में अपनी सरकार के दौरान अयोध्या में हुए कारसेवकों के नरसंहार को सही ठहराया है।

उस दौरान शिवपाल यादव के बड़े भाई मुलायम सिंह यादव उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री थे। सफाई के तौर पर शिवपाल यादव ने ‘विवादित ढाँचे की रक्षा’ का बहाना बनाया है। हालाँकि, शिवपाल यादव या किसी अन्य समाजवादी पार्टी के नेता की रामजन्मभूमि से लगभग 26 किलोमीटर दूर बस्ती जिले में आने वाले गाँव सांडपुर में पुलिस द्वारा किए गए कत्लेआम पर अभी तक कोई सफाई नहीं आई।

तब गाँव सांडपुर में 30 अक्टूबर से लगभग हफ्ते भर पहले रामभक्तों की तलाश में घुसी पुलिस ने 4 ग्रामीणों को गोली मार दी थी। इसमें से राम चन्दर यादव व सत्यवान सिंह ने मौके पर ही और जयराज यादव ने बाद में प्राण त्याग दिए थे। घायल महेंद्र सिंह के हाथों में आज भी गोली के घाव दिखते हैं। गोलियाँ बरसाने के बाद सामान्य, SC/ST व OBC वर्ग की महिलाओं, बुजुर्गों और बच्चों को निर्ममता से पीटा गया था। घरों में लूटपाट हुई थी।

इतने में भी मन नहीं भरा तो 40 ग्रामीणों पर गंभीर धाराओं में FIR दर्ज कर के उन्हें जेल में ठूस दिया गया था। इनमें वो ग्रामीण भी शामिल थे जिन्हें पुलिस की गोली से बलिदान हुए अपने परिजनों का अंतिम संस्कार करना था। तब लाशों को भी गाँव नहीं आने दिया गया था।

न्याय के लिए हर चौखट पर गुहार, लेकिन कहीं नहीं हुई सुनवाई

आज दुर्दांत गैंगस्टरों और आतंकियों की मौत पर भी मानवाधिकार की दुहाई देते हुए पुलिस पर कार्रवाई की माँग की जाती है। खास बात ये है कि तब संविधान के तथाकथित रक्षकों की चौखट पर ग्रामीणों ने महीनों तक न्याय की गुहार लगाई पर उनके शिकायत पत्र भी नहीं रिसीव किए गए थे। सांडपुर गाँव के वो तमाम पीड़ित आज शिवपाल यादव से सवाल कर रहे हैं कि न तो वहाँ विवादित ढाँचा था और न ही किसी कोर्ट का स्टे। फिर उनके परिजनों की पुलिस ने हत्या क्यों की? ऑपइंडिया ने 23 अक्टूबर, 1990 को दर्ज वो FIR खोज निकाली है। आइए नजर डालते हैं नरसंहार के एक दिन बाद दर्ज उस FIR पर।

पुलिस थी शिकायतकर्ता, सभी वर्गों के 40 आरोपित

इस FIR में दुबौलिया के तत्कालीन थाना प्रभारी राम चन्दर राय शिकायतकर्ता हैं। 22 अक्टूबर, 1990 को दी गई तहरीर में उन्होंने सांडपुर, हेंगापुर, टेढ़वा आदि गाँवों के 40 ग्रामीणों को नामजद किया है। इन सभी पर FIR संख्या- 132/1990 में IPC की धारा 147, 149, 307, 332, 333, 353, 224, 225 और 336 के अलावा 7 क्रिमिनल एक्ट के तहत कार्रवाई की गई थी। यह मुकदमा सरकार बनाम राजकरन सिंह के नाम से आज भी बस्ती की जिला अदालत अदालत में विचाराधीन है।

23 अक्टूबर 1990 में दर्ज FIR

इन नामजदों में रामकरन सिंह, राघवेंद्र प्रताप सिंह, सत्य प्रकाश सिंह, राज बहादुर सिंह, अर्जुन सिंह, श्रवण कुमार सिंह, सुरेंद्र कुमार सिंह, सुभाष सिंह, माता प्रसाद सिंह, तीरथ सिंह, राम नरेश सिंह, गंगाराम, दोढी, भुक्कुर, चंद्रभान सिंह, राम शंकर श्रीवास्तव, भुनाई, गिजू, राधेश्याम यादव, राजित, नंदू, कृष्ण चन्दर सिंह, काशीनाथ तिवारी, हरिवंश सिंह, हरिभान, सूरत सिंह, राम सँवारे, राम सूरत सिंह, कोले सिंह, शत्रुघ्न सिंह और जयराज यादव आदि हैं। इनमे से गंगाराज, दोढी, भुक्कुर, भुनाई, गिजू, राजित, नंदू और राम सँवारे अनुसूचित जाति (SC) समुदाय से हैं।

‘राम मंदिर बन कर रहेगा’ सुन कर भड़क गया था थानेदार

जो FIR थाना प्रभारी राम चन्दर राय ने दर्ज करवाई थी, उसमें सारा दोष ग्रामीणों पर ही मढ़ दिया गया है। इस FIR में थानाध्यक्ष ने बताया कि उन्हें मुखबिर से सूचना मिली थी कि सांडपुर गाँव में ‘विश्व हिन्दू परिषद’ (VHP) के कार्यकर्ता रामकरन सिंह के घर पर कुछ लोग जमा हैं। रामकरन सिंह पर नदी के किनारे लगी नावों को ज़बरदस्ती छीन पर कारसेवकों को अयोध्या में पहुँचाने का भी आरोप लगाया गया है। इसी सूचना पर पुलिस ने गाँव में सुबह 5 बजे दबिश दी। बकौल थाना प्रभारी, रामकरन सिंह ने कहा, “सबको इकठ्ठा कर लो। ऐसा ही उत्साह हर गाँव के हिन्दुओं में रहेगा तो राम मंदिर बन कर रहेगा।”

थानेदार की तहरीर

FIR में पुलिस ने दावा किया है कि नाव से ग्रामीणों के अयोध्या जाने की तैयारी थी। जब उन्हें रोका गया तब रामकरन सिंह ने सबका नेतृत्व करते हुए कहा कि वो हर हाल में अयोध्या जाएँगे चाहे जो हो जाए। पुलिस ने इस स्थिति को शांतिभंग की आशंका करार दिया है। पुलिस ने स्वीकार किया है कि उन्होंने तब रामकरन सिंह सहित उनके कुछ अन्य साथियों को 151/107/116 धारा के तहत गिरफ्तार कर लिया गया। इनकी तलाशी में एक रजिस्टर मिला जिस पर रामजन्मभूमि की मुहर लगी हुई थी। पुलिस ने उस रजिस्टर को भी जब्त कर लिया।

थानेदार की तहरीर 2

पुलिस का दावा है कि जब वो गिरफ्तार हुए आरोपितों को पकड़ कर ले जा रहे थे तभी कुछ लोग पकड़ से फरार हो गए। आरोप है कि गाँव से ले जाते हुए रामकरन सिंह ने ललकारते हुए कहा, “गाँव वालों को बुलाओ। रामजन्मभूमि पर बलिदान होने का समय आ गया है।” पुलिस का दावा है कि इतना सुन कर गाँव के लगभग 2 हजार लोग हाथों में हथियार ले कर जमा हो गए थे। शिकायत में आगे थाना प्रभारी राम चन्दर राय ने ग्रामीणों पर लाठी-डंडों और पत्थरों से पुलिस पर हमला करने और अपने हथियार छीनने की कोशिश का आरोप लगाया है।

थानेदार की तहरीर 3

थाना प्रभारी राम चंदर राय ने आगे बताया कि इस आपाधापी के बीच अतिरिक्त फ़ोर्स पहुंची। इसके बाद पुलिस ने ग्रामीणों पर गोलियाँ चला दीं। गोली लगने से सत्यवान सिंह और राम चन्दर यादव नाम के 2 ग्रामीणों की मौत मौके पर ही हो गई। जयराज यादव को घायल अवस्था में ही गिरफ्तार किए जाने का भी जिक्र FIR में है। पुलिस ने यह भी दावा किया है कि मृतक सत्यवान सिंह के पास से उन्होंने कट्टा और कारतूस बरामद किया था। थानेदार ने ग्रामीणों के हमले में अपने 3 सिपाहियों को भी गंभीर चोटें लगने का आरोप लगाया है।

पुलिस ने अपने बचाव में लगाए फर्जी आरोप

23 अक्टूबर, 2018 को मुख्य आरोपित रामकरन सिंह ने उत्तर प्रदेश सरकार के तत्कालीन कानून मंत्री से इस केस को वापस लेने की माँग की थी। तब उन्होंने अपने पत्र में यह केस पुलिस द्वारा कारसेवकों के नरसंहार के बाद अपने बचाव में दर्ज करवाने का आरोप लगाया था। इसी पत्र में रामकरन सिंह ने बताया था कि सभी आरोपितों में महज 23 लोग जीवित बचे हैं। शेष की अलग-अलग दिनों में मृत्यु हो चुकी है। तब कानून मंत्री से यह भी बताया गया था कि जीवित बचे आरोपित न सिर्फ आर्थिक रूप से टूट चुके हैं बल्कि वो चलने-फिरने में भी अक्षम हैं। आरोपितों ने खुद को गलत फँसाए जाने की दलील देते हुए इस केस को राजनैतिक द्वेष भावना से दर्ज बताया है।

ग्रामीणों की कानून मंत्री से गुहार

भाजपा सांसद द्वारा केस वापस लेने की माँग

भारतीय जनता पार्टी के बस्ती से सांसद हरीश द्विवेदी ने भी इस मुकदमे को पूरी तरह से राजनैतिक द्वेष भावना से प्रेरित बताया है। 23 अक्टूबर, 2018 को सांसद हरीश द्विवेदी उत्तर प्रदेश सरकार के कानून मंत्री को पत्र लिख कर इस मुकदमे को वापस लेने की माँग कर चुके हैं। उन्होंने केस में नामजद आरोपितों को भाजपा का सक्रिय कार्यकर्ता बताया है और कानून मंत्री से मुकदमा वापस लेने की अपील की है। पत्र के विषय में सांसद ने लिखा, “निहत्थे कारसेवकों के ऊपर पुलिस द्वारा रामजन्मभूमि आंदोलन के तहत दिनांक 22/10/1990 को गोलीबारी के तहत 2 लोगों की मृत्यु हो गई थी। इसके बाद भी सरकार द्वारा कारसेवकों पर दर्ज फर्जी मुकदमे को वापस लेने के संदर्भ में।”

भाजपा सांसद द्वारा शासन से केस वापसी की अपील

गोलियाँ बरसाने वालों पर कोई एक्शन नहीं

22 अक्टूबर, 1990 को हुई इस पुलिसिया बर्बरता की शिकायत तत्कालीन सेना के एक मेजर ने बस्ती के तत्कालीन पुलिस अधीक्षक IPS सुभाष चंद्र गुप्ता से की थी। मुसाफिर सिंह नाम के सैन्य अधिकारी ने खुद को गाँव सांडपुर का निवासी बताया था। उन्होंने आरोपित पुलिस वालों पर हत्या की धाराओं में केस दर्ज करने की माँग की थी। हालाँकि, बकौल रामकरन सिंह, इस माँग पर कोई भी कार्रवाई आरोपित पुलिस वालों पर नहीं हुई। मृतकों की तरफ से भी SP बस्ती से कई बार गुहार लगाई गई। हालाँकि, यह गुहार बेअसर रही। मृतकों के परिजनों के पास आज भी अपनी उन गुहार के सबूत मौजूद हैं।

1990 में आरोपित पुलिसकर्मियों के खिलाफ सेना मेजर द्वारा लिखा गया शिकायती पत्र

SP से ले कर सिपाही तक पर एक्शन की माँग

जिन पुलिसकर्मियों के खिलाफ हत्या का केस दर्ज करवाने की माँग उठी थी उनकी लिस्ट आज भी गाँव वालों के पास है। इनके नाम राम चंदर राय (तत्कालीन थाना प्रभारी दुबौलिया), दयाशंकर सिंह (तत्कालीन थाना प्रभारी छावनी), सब इंस्पेक्टर श्रीराम अरुण उर्फ़ सियाराम अरुण, सब इंस्पेक्टर सुरेंदर राय, सिपाही राधेश्याम, सिपाही रामनाथ ओझा, सिपाही मुरलीधर दुबे, सिपाही ओम प्रकाश गौड़, सिपाही रामनयन यादव, सिपाही बृजनंदन सिंह, सिपाही अशोक कुमार, सिपाही हरिश्चंद्र और 12 अन्य सिपाही अज्ञात जिनके हाथों में रायफलें मौजूद बताई गईं।

तत्कालीन विधायक राणा कृष्ण किंकर सिंह (अब दिवंगत) ने भी एक गवाह के तौर पर इन पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई की माँग उठाई थी।

इन पुलिसकर्मियों के खिलाफ मांगी गई है कार्रवाई

हालाँकि, इन माँगों का कोई असर किसी भी स्तर पर नहीं हुआ। ऑपइंडिया से बात करते हुए राजकरन सिंह ने बताया कि यह नरसंहार तत्कालीन पुलिस अधीक्षक बस्ती IPS सुभाष चंद्र गुप्ता के आदेश पर हुआ था। ग्रामीणों को उम्मीद है कि योगी सरकार में उन सभी पुलिसकर्मियों को किए की सजा मिलेगी जिन्होंने निरपराध लोगों की हत्या कर के उन्हें ही मुल्जिम भी बना दिया है। आज नहीं तो कल न्याय की उम्मीद में सत्यप्रकाश सिंह ने अपने भाई सत्यवान सिंह की पोस्टमार्टम रिपोर्ट तक सुरक्षित रखी है।

हालाँकि, राम चन्दर यादव के परिजन पुलिस की बर्बरता के चलते अंतिम बार मृतक का चेहरा भी नहीं देख पाए। इसी वजह से आज राम चंदर यादव की कोई तस्वीर मौजूद नहीं है।

न्याय की धुंधली आस में आज भी सहेज कर रखी हुई है सत्यवान की पोस्टमार्टम रिपोर्ट

जब्त लाइसेंसी अस्त्र आज तक नहीं लौटाए गए

राजकरन सिंह का कहना है कि 22 अक्टूबर की घटना के बाद पुलिस उनके गाँव में कई बार आई। इस दौरान पुलिस ने न सिर्फ महिलाओं के गहने और पैसे लूटे थे बल्कि उन ग्रामीणों के लाइसेंसी अस्त्र भी जब्त कर लिए जिनका कोई भी दोष नहीं था। 9 नवंबर, 1990 को गाँव सांडपुर के 69 वर्षीय बुजुर्ग जगदीश सिंह का प्रार्थना पत्र आज भी ग्रामीणों के पास मौजूद है जिसमें वो बस्ती जिले के तत्कालीन जिलाधिकारी से पुलिस द्वारा ले जाए गए अपना लाइसेंसी हथियार वापस देने की गुहार लगा रहे हैं।

1990 में गुहार लगाने के दौरान खुद को बेहद बीमार बताने वाले जगदीश सिंह अब दुनिया में नहीं हैं। उनका लाइसेंसी हथियार उन्हें वापस नहीं दिया गया था। वो अस्त्र अब कहाँ है ये किसी को भी नहीं पता।

गुहार लगाते हुए चल बसे जगदीश पर वापस नहीं मिला हथियार

घर, खेत और जेवर बेच कर आज भी लड़ रहे हैं मुकदमा

बताते चलें कि FIR संख्या – 132/90 पर दर्ज मुकदमा ग्रामीणों की तमाम मिन्नतों, पूर्व विधायक राणा कृष्ण किंकर और वर्तमान सांसद हरीश द्विवेदी की वापसी की अपील के बावजूद आज भी अदालत में चल रहा है। 33 साल से चल रहे इसी मुकदमे को लड़ते हुए जयराज यादव दवाओं तक के मोहताज हो गए और आखिरकार उनके प्राण निकल गए। रामकरन सिंह का यह भी दावा है कि आज भी लगभग 23 से अधिक आरोपित लगातार अदालतों पर जा रहे हैं। उनमें से कई लोग बीमार हैं और आर्थिक हालत खराब होने के चलते कईयों के खेत और गहने तक बिक गए।

बस्ती की जिला अदालत में आज भी चल रहा मुकदमा

ग्रामीणों को आशा है कि वर्तमान सरकार न सिर्फ उन्हें 33 साल से चल रहे अन्याय से मुक्ति दिलाएगी बल्कि 22 अक्टूबर, 1990 की घटना में प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से शामिल पुलिस अधीक्षक से ले कर सिपाही पर कठोर कार्रवाई करेगी। मुकदमे में नामजद आरोपितों को यह भी उम्मीद है कि राम के नाम पर अगर उन्हें दंडित किया गया था तो यह भी इतिहास निर्माणाधीन रामजन्मभूमि के किसी कोने में दर्ज होगा।

वाटर पार्क ले जाने के नाम पर स्कूल ने लिए ₹750, झील में लेकर गएः नाव डूबने से 12 बच्चों की मौत, जाँच के लिए SIT

गुजरात के वडोदरा के हरनी झील में 18 जनवरी 2024 को नाव डूबने से 14 लोगों की मौत हो गई। इनमें 12 स्कूली बच्चे और दो शिक्षक हैं। इस घटना की जाँच के लिए गुजरात पुलिस ने एसआईटी का गठन किया है। रिपोर्ट के अनुसार बच्चों को पिकनिक मनाने के लिए वाटर पार्क ले जाने के नाम पर स्कूल ने 750 रुपए लिए थे, लेकिन उनको झील में ले जाया गया था।

इस मामले में प्रशासन ने 18 लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है। इनमें नौका सुविधा देने वाली कंपनी के कर्मचारी और नाव चलाने वाले व्यक्ति का भी नाम शामिल है। वडोदरा नगर निगम (वीएमसी) के कार्यकारी अभियंता ने हरनी पुलिस स्टेशन में एफआईआर दर्ज कराई है। इसमें कहा गया है कि बच्चे ‘बिना लाइफ जैकेट के थे’ और ‘सामने से पानी रिसने’ के बाद नाव पलट गई। आरोपितों ने ‘उतावलेपन और लापरवाही से काम किया’, जिससे पिकनिक पर आए 12 बच्चों और दो शिक्षकों की मौत हो गई।

जानकारी के मुताबिक, “आरोपित ने नाव में सवार यात्रियों को जीवन जैकेट प्रदान करने की सुरक्षा सावधानियों का पालन नहीं किया। साथ ही नाव ओवरलोड थी। नाव की हालत भी खराब थी। यही नहीं इस नाव से बँधी रहने वाली रस्सियाँ भी नदारद थीं और सुरक्षा का कोई इंतजाम नहीं किया गया था।”

जानकारी के मुताबिक, वडोदरा नगर निगम ने हरनी झील में नौकायन वाले इलाके को लेन जोन का नाम दिया है। इस पूरे इलाके को कोटिया प्रोजेक्ट नाम की कंपनी मैनेज करती है। वडोदरा नगर निगम के अधिकारी राजेश चौहान ने बताया कि कोटिया प्रोजेक्ट्स नाम की कंपनी के पास साल 2017 से लेन जोन को संचालित करने का अनुबंध है।

गौरतलब है कि वडोदरा के हरनी झील में गुरुवार शाम करीब 4.30 बजे यह दुर्घटना हुई थी। दुर्घटना के समय नाव पर करीब 30 लोग सवार थे। किसी को भी सुरक्षा के लिए जरूरी लाइफ जैकेट नहीं पहनाए गए थे। दुर्घटना में पीड़ित सभी बच्चे और शिक्षक वडोदरा के न्यू सनराइज स्कूल के हैं। इस मामले में मृतकों के परिजनों को 2 लाख और घायलों को 50 हजार रुपए देने की घोषणा सरकार ने की है।

टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट में बताया गया है कि न्यू सनराइज स्कूल के करीब 80 छात्र-शिक्षक पिकनिक के लिए गए थे। इनमें से 27 छात्र नाव पर सवाल थे। अन्य बच्चे दूसरी मनोरंजक गतिविधियों में लगे हुए थे। हादसे में जान गँवाने वाले एक छात्र की बहन नौशिन गाँधी ने हादसे के लिए स्कूल प्रबंधन को जिम्मेदार ठहराया है। उन्होंने बताया है कि स्कूल ने पिकनिक के नाम पर 750 रुपए लिए थे। कहा था कि बच्चों को वाटर पार्क ले जाया जाएगा। लेकिन इसकी जगह उन्हें झील पर ले जाया गया।

केक खिलाया, पोर्न दिखाया…फिर किया 13 साल के नाबालिग का यौन उत्पीड़न: केरल में चर्च का पादरी गिरफ्तार

केरल के तिरुवनंतपुरम में एक पादरी ने नाबालिग बच्चे का यौन शोषण कर इंसानियत को शर्मसार कर दिया। केरल पुलिस ने शुक्रवार (19 जनवरी,2024) को कट्टक्कडा के पेंटेकोस्टल चर्च के इस पादरी को कोर्ट में पेश किया। यहाँ से आरोपित को न्यायायिक हिरासत में भेज दिया।

इस पादरी के खिलाफ POCSO (यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण) अधिनियम के तहत केस दर्ज किया गया है। पुलिस के मुताबिक, 59 साल के इस पादरी की पहचान रविन्द्रनाथ के तौर पर की गई। रविन्द्रनाथ ने 13 साल के बच्चे को पहले अपनी बातों से फुसलाया। इसके बाद उसका यौन शोषण किया।

ये घटना आरोपित को हिरासत में लेने से दो दिन पहले 17 जनवरी 2024 की है। बताते चलें कि इस लड़के को इसकी माँ छोड़ कर चली गई है। वो अपनी अपनी दादी के साथ रहता है।

घटना के दिन बच्चे की दादी अस्पताल गई थीं। इसी का फायदा उठाकर पादरी ने बच्चे को बहकाया- फुसलाया और अपने घर ले गया। घर ले जाकर पादरी ने उसे केक खिलाया। उसने कथित तौर पर उसे टैबलेट पर अश्लील फोटो दिखाईं और फिर उसका यौन उत्पीड़न किया।

मालूम हो कि दक्षिण भारत में पादरियों के बच्चों और औरतों के यौन शोषण करने का ये पहला मामला नहीं है। इससे पहले बीते साल तमिलनाडु के तिरुनेलवेली में एक महिला ने नींद की 40 गोलियाँ निगल आत्महत्या की कोशिश की थी। महिला ने पादरी के यौन शोषण से तंग थी।

आरोपित पादरी 39 साल जगन था। उसका महिला से पहचाना चर्च में प्रार्थना के लिए आने-जाने के दौरान हुआ था। इससे पहले मार्च 2023 में तमिलनाडु के कन्याकुमारी में एक पादरी नर्सिंग छात्रा के यौन शोषण के आरोप में गिरफ्तार किया गया था।

लाइटर के सामने छोड़ी गैस, जल गया पिछवाड़ा: वीडियो में चले थे प्रैंकस्टर बनने, अब ठीक से बैठना भी मुश्किल

किसी व्यक्ति के पिछवाड़े से निकली गैस सारी दुनिया जला सकती है, लेकिन इसके लिए उसे इकट्ठा करना पड़ेगा। ठीक वैसे ही, जैसे गोबर-गैस से गैस बनती है और उसका इस्तेमाल खाना बनाने में किया जाता है। लेकिन क्या हो? अगर सब लोग एक साथ गैस छोड़ें (पादें), और कोई माचिस की तिल्ली लगा दे? तो भैया, ऐसा करने की बिल्कुल भी मत सोचना। एक प्रैंकस्टर ने ऐसा करने की हिमाकत की है, अब वो सामान्य तौर पर बैठ नहीं पा रहा है, क्योंकि अपनी गैस (पाद) जलाकर लोगों को हँसाने के चक्कर में उसका पिछवाड़ा जल चुका है। जो पूरी दुनिया में उसके जले पिछवाड़े की दुहाई दे रहा है।

NY पोस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक, ये मामला चीन के जिलिन प्रान्त का है। यहाँ के बिन तोऊजी नामक युवक ने एक प्रैंक वीडियो बनाने के चक्कर में अपना पिछवाड़ा जला लिया। दरअसल, युवक ने जैसे ही गैस छोड़ी, उसी समय लाइटर जलाते ही उसमें आग लग गई। तुरंत ही युवक छटपटाने लगा और किसी तरह से आग पर काबू पाया। इसके बाद वो दर्द से कराहने लगा।

भले ही ये मामला को हँसी-मजाक का लग रहा हो, लेकिन ये मामला है बेहद गंभीर। दरअसल, हम जो गैस छोड़ते हैं, उसमें हाइड्रोजन, मीथेन और कार्बन डाई ऑक्साइड गैस की बहुलता होती है। ये सारे गैस कुल मिलाकर 75 प्रतिशत हिस्सा होती है। इन गैसों के संपर्क में ऑक्सीजन के आते ही ये जलने लायक हो जाती है।

हालाँकि, इसमें एक बात ये भी है कि इंसान जो गैस छोड़ता है, उसमें भी इन गैसों की भिन्न-भिन्न मात्रा होती है, जो आपके भोजन पर निर्भर करती है। अगर इसमें अकेले 65 प्रतिशत मात्रा हाइड्रोजन की है, तो ये बेहद ज्वलनशील हो सकता है।

ये अकेला मामला नहीं है, जिसमें इंसान से निकले गैस की वजह से आग लगी हो। साल 2016 में एक ऐसा ही मामला सामने आया था, जिसमें एक अस्पताल में ऑपरेशन के समय मरीज ने गैस छोड़ दिया, तो ऑपरेशन में इस्तेमाल किए जा रहे लेजर ने आग पकड़ लिया था। उस घटना में मरीज को गंभीर रूप से नुकसान पहुँचा था।