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अयोध्या के नवनिर्मित मंदिर में भगवान रामलला का अधिवास: वैदिक मंत्रोच्चार के साथ सरयू नदी के जल से स्नान, 1008 हवन कुंडों में चल रहा महायज्ञ

अयोध्या में रामलला के मंदिर में प्राण प्रतिष्ठा का अनुष्ठान जारी है। 16 जनवरी 2024 से शुरु हुए प्राण प्रतिष्ठा अनुष्ठान में शनिवार (20 जनवरी 2024) को रामलला को तीन अधिवास कराए गए। रामलला का शर्कराधिवास और फलाधिवास कराने के बाद पुष्पाधिवास कराया गया। इसमें रामलला को पुष्प, फल और शक्कर चढ़ाया गया और उनका आह्वान वैदिक मंत्रोच्चार के साथ किया गया। इसके बाद 21 जनवरी (रविवार) को रामलला का मध्याधिवास कराया जाएगा, फिर शाम के समय शय्याधिवास कराया जाएगा।

शर्कराधिवास के तहत तहत सरयू नदी के पवित्र जल से गर्भगृह को धोया गया। इसके बाद वास्तु शांति और अन्नाधिवास अनुष्ठान हुआ। इस अनुष्ठान के तहत विग्रह को गेहूँ और धान आदि अन्न के भंडार में ढ़ँककर मंत्रोचारण किया गया। वहीं, अनुष्ठान के तहत अयोध्या में 1008 हवन कुंडों में लगातार यज्ञ चल रहा है। इसमें 1008 पुरोहित और 5000 से ज्यादा यजमान प्राण प्रतिष्ठा से पहले हवन और पूजन कर रहे हैं। यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी 1008 कुंडीय महाय़ज्ञ में शुक्रवार को शामिल हुए थे।

अयोध्या के भव्य मंदिर में राम लला को प्राण प्रतिष्ठित करने वाले सभी अनुष्ठान लगातार जारी हैं। सप्ताह भर के कार्यक्रमों में पहले दिन 16 जनवरी 2024 को पहले दिन प्रायश्चित और कर्मकूटि पूजन अनुष्ठान किए गए थे। इसके अगले दिन 17 जनवरी 2024 को रामलला का परिसर प्रवेश कराया गया था। वहीं, 18 जनवरी को रामलला का तीर्थ पूजन, जल यात्रा, जलाधिवास और गंधाधिवास कराया गया था।

इसके बाद 19 जनवरी की सुबह रामलला का औषधाधिवास, केसराधिवास और घृताधिवास कराया गया था, जबकि सायं काल धान्याधिवास कराया गया। 20 जनवरी 2024 को शर्कराधिवास, फलाधिवास और पुष्पाधिवास कराया गया। राम मंदिर में प्राण प्रतिष्ठा से एक दिन पहले यानी 21 जनवरी को मध्यधिवास और शय्याधिवास कराया जाएगा।

रविवार 21 जनवरी के अनुष्ठान में रामलला के विग्रह में नख से शिखा तक शक्ति का संचार करने के लिए मंत्रोचारण किया जाएगा। इसके बाद श्री विग्रह का महाभिषेक किया जाएगा और 22 जनवरी 2024 (सोमवार) को भव्य मंदिर में रामलला की प्राण प्रतिष्ठा की जाएगी। ये अनुष्ठान दोपहर 12 बजकर 20 मिनट पर शुरू होगा, जिसमें सोने की सिलासा से भगवान के नयन खोले जाएँगे।

इससे पहले, शनिवार (19 जनवरी 2024) को रामलला की मूर्ति की पहली झलक मिली थी। वहीं, रामलला की नई मूर्ति के गर्भग्रह में स्थापित होने से पहले पहले भगवान की एक छोटी मूर्ति को पालकी में विराजित करके मंदिर परिसर का भ्रमण कराया गया। शुरू में प्लान किया गया था कि इस मूर्ति को नगर भ्रमण करवाया जाएगा मगर फिर सुरक्षा व्यवस्था के चलते उस कार्यक्रम को रद्द किया गया और रामलला को मंदिर में घुमाकर उनके दर्शन हुए।

श्रीराम जन्मभूमि पथ पर लगभग 5 फीट की अगरबत्तियाँ लगाई गई हैं। ये अगरबत्तियाँ 11 घंटे तक वातावरण को सुगंधित रखती हैं। इन्हें हर 11 घंटे पर ITC द्वारा बदल दिया जाता है। अगरबत्तियों पर राम जन्मभूमि ट्रस्ट का लोगो भी लगा है। आईटीसी ने इसे सुगंध कॉरिडोर का भी नाम दिया है।

जमीन पर शयन और ब्रह्म मुहूर्त में 1 घंटा 11 मिनट का विशेष जाप: राम मंदिर में प्राण प्रतिष्ठा के लिए ऐसे व्रत कर रहे हैं पीएम मोदी, पी रहे हैं सिर्फ नारियल पानी

अयोध्या के नवनिर्मित भव्य मंदिर में रामलला की प्राण प्रतिष्ठा हो रही है। इसके लिए 16 जनवरी से ही अनुष्ठान जारी है। अनुष्ठान के अंतिम दिन 22 जनवरी 2024 को रामलला अपने जन्मभूमि स्थान पर विराजमान हो जाएँगे। इस दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, संघ के प्रमुख मोहन भागवत एवं अन्य गणमान्य लोग भी उपस्थित रहेंगे।

प्राण प्रतिष्ठा समारोह में पीएम मोदी बतौर यजमान पूजा-पाठ करेंगे। पीएम मोदी पूजा-पाठ में शामिल होने के लिए खुद को तैयार कर रहे हैं और इसके लिए कड़ी व्रत-तपस्या भी कर रहे हैं। यहीं नहीं, पीएम खास तरह का जाप भी कर रहे हैं, जो उन्हें सिद्ध महात्मा द्वारा बताया गया है। पीएम मोदी संन्यासी की तरह फर्श पर सो रहे हैं और सिर्फ और सिर्फ नारियल पानी पी रहे हैं।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम को देखते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी प्रतिदिन ब्रह्म मुहूर्त में जाग जाते हैं और हर दिन एक घंटा 11 मिनट तक खास मंत्र का जाप करते हैं। इस मंत्र का 11 दिनों तक का जाप अनिवार्य बताया गया है। वे विशेष धार्मिक परंपरा के मुताबिक ही फर्श पर सो रहे हैं। फर्श पर वो सिर्फ कंबल बिछाते हैं।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इन तमाम व्रत एवं जाप के अलावा, अपने आवास पर ही गाय की पूजा भी कर रहे हैं। वे दिन गायों को चारा भी खिलाते हैं। इसकी कई तस्वीरें भी पिछले दिनों सोशल मीडिया पर वायरल हुई थीं। इसके अलावा, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शास्त्रों के मुताबिक अन्नदान और वस्त्रदान भी कर रहे हैं।

बता दें कि शास्त्रों में देव प्रतिमा की प्राण प्रतिष्ठा के लिए एक लंबी प्रक्रिया बताई गई है। इसके लिए कई सारे नियमों का पालन करना होता है। पीएम मोदी एक रामभक्त के रूप में आध्यात्मिक साधना कर रहे हैं। आमतौर पर पीएम मोदी दैनिक दिनचर्या में ब्रह्ममुहूर्त जागरण, साधना और सात्विक आहार जैसे नियमों का पालन तो करते ही हैं, लेकिन इस बार वो यम-नियम के तहत सभी अनुष्ठान कर रहे हैं।

गौरतलब है कि अयोध्या में रामलला की प्राण प्रतिष्ठा हो रही है। 16 जनवरी से शुरू हुए धार्मिक अनुष्ठान 22 जनवरी तक चलेंगे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगुवाई में 22 जनवरी को रामलला अपने स्थान पर विराजमान होंगे। पूरे देश में लोग अपने घरों में दिवाली मनाएँगे। हर तरफ मंगल गीत गाए जा रहे हैं।

सोशल मीडिया भी भगवान राम की भक्ति में डूबा हुआ है। प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम के लिए खास मेहमानों को न्यौता भेजा जा रहा है। इसके अलावा, अयोध्या रामलला जन्मस्थान केस में फैसले देने वाले सुप्रीम कोर्ट की संवैधानिक पीठ के सभी 5 जजों को भी न्यौता भेजा गया है। इनमें से कुछ जज रिटायर भी हो चुके हैं।

एक्शन में राजस्थान के सीएम भजनलाल: आधी रात को थाने पहुँचकर लिया जायजा, जयपुर रेलवे स्टेशन पर गरीबों के बीच बाँटा कंबल

राजस्थान की राजधानी जयपुर के सदर थाने में शुक्रवार (19 जनवरी 2024) की रात 12 बजे अचानक प्रदेश के मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा पहुँच गए। उन्हें देखकर पुलिस वाले हक्के-बक्के रह गए। रेलवे स्टेशन के नजदीक स्थित इस थाने में पहुँचकर सीएम ने वहाँ के एक-एक रजिस्टर को देखा और गश्त से लेकर एफआईआर की जानकारी ली।

दिलचस्प बात तो ये हैं कि सीएम के इस औचक निरीक्षण की जानकारी किसी को कानों कान नहीं लगी। न तो पुलिस कंट्रोल और न ही उनके निजी स्टाफ को सीएम के इस मूवमेंट की जानकारी थी। और तो और सीएम की सुरक्षा में लगी टीम को भी इसकी जानकारी आखिरी पल में हुई।

थाने का औचक निरीक्षण करने के बाद सीएम ने नजदीकी रेलवे स्टेशन का जायजा भी लिया। भजनलाल ने प्लेटफॉर्म पर सो रहे लोगों और यात्रियों को कंबल बाँटा और उनका हाल-चाल लिया। इसके बाद सीएम भजनलाल शर्मा सरकार के चलाए जा रहे रैन बसेरों में भी पहुँचे।

सीएम को आधी रात में देखकर रैन बसेरे में सो रहे लोग चौंक उठें। सीएम ने वहाँ सो रहे लोगों का हाल-चाल जाना। बसेरों की व्यवस्था के बारे में भी पता किया और अधिकारियों को कुछ दिशा-निर्देश भी दिए। इसे लेकर सीएम भजनलाल ने अपने एक्स (पूर्व में ट्विटर) हैंडल पर एक पोस्ट शेयर की है।

अपने पोस्ट में सीएम ने लिखा, “राजस्थान में रामराज्य की स्थापना हमारा संकल्प, अंत्योदय हमारा लक्ष्य! कल देर रात्रि जयपुर सदर पुलिस स्टेशन व जयपुर रेलवे स्टेशन स्थित रैन बसेरों का औचक निरीक्षण किया। रैन बसेरों में आश्रय लिए हुए सम्मानित जनों का कुशलक्षेम जाना व शीत ऋतु में सर्दी से बचाव हेतु कंबल वितरित किए। सुशासन को समर्पित हमारी सरकार राजस्थान के प्रत्येक परिवारजन की सुरक्षा व उत्थान हेतु संकल्पबद्ध है। आपणो अग्रणी राजस्थान।”

बताते चलें कि बीते कुछ वक्त से सीएम ने राजस्थान के कई जगहों का औचक निरीक्षण किया है। इससे पहले वो अचानक सवाई मानसिंह अस्पताल भी पहुँचे थे। इससे कुछ दिन पहले सीएम मानसरोवर सिटी पार्क भी पहुँचे थे। इस दौरान उन्होंने वहाँ सैर पर निकले लोगों का हाल-चाल लिया था और उनके साथ चाय पी थी।

अयोध्या का अपमान, शेख जैनुद्दीन मखदूम का गुणगान: केरल की वामपंथी सरकार खोल रही ‘अरेबियन लैंग्वेज और कल्चरल सेंटर’

केरल की वामपंथी सरकार ने फैसला किया है कि वो भगवान राम वाली भारतीय संस्कृति के साथ नहीं, बल्कि अरबी संस्कृति के साथ है। 22 जनवरी 2024 को होने जा रहे अयोध्या के राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम का न्यौता ठुकराने वाली केरल सरकार ने मलप्पुरम जिले में स्थित ‘केरल का मक्का’ पोन्नानी में अरबी भाषा एवं सांस्कृतिक अध्ययन केंद्र खोलने का निर्णय लिया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, केरल सरकार की उच्च शिक्षा मंत्री आर बिंदू ने केरल विश्वविद्यालय के सीवी रमन हाल में आयोजित एक कार्यक्रम में कहा कि संघ परिवार और उससे जुड़े संगठनों के साथ ही केंद्र सरकार अरबी भाषा के प्रति नकारात्मक भाव रखते हैं। उन्होंने कहा कि अरबी भाषा ने ज्ञान और विज्ञान के विकास की दिशा में मध्यकालीन युग में बेहतरीन योगदान दिया।

अपने फेसबुक पोस्ट में भी बिंदु ने कहा है कि राज्य सरकार ने शेख जैनुद्दीन मखदूम द्वितीय के प्रति सम्मान प्रकट करने के लिए यह फैसला किया गया है। बिंदु ने कहा कि मखदूम ने केरल का प्रामाणिक इतिहास लिखा है। इसके अलावा उन्होंने विदेशी आक्रमणकारी शक्तियों के विरुद्ध भी काफी कुछ लिखा है। बता दें कि ‘तुफतुल मुजाहिदीन’ नाम से शेख ने मालाबार का इतिहास लिखा है, जिसमें पुर्तगालियों के मुस्लिम विरोधी रूख के बारे में बताया है।

बिंदु ने अपने फेसबुक पेज पर मलयालम में लिखा, जिसका हिंदू अनुवाद कुछ इस तरह से है, “उच्च शिक्षा विभाग पोन्नानी स्थित शेख जैनुद्दीन मखदूम के नाम से अरबी भाषा एवं सांस्कृतिक अध्ययन केंद्र शुरू करने की तैयारी कर रहा है। केरल सरकार का यह निर्णय शेख जैनुद्दीन मखदूम को सम्मान देने के लिए है, जिन्होंने केरल के बारे में आधिकारिक इतिहास लेखक की शुरुआत की और कई आक्रमणकारी-विरोधी कार्यों को लिखा था।”

केरल विश्वविद्यालय के अरबी विभाग द्वारा आयोजित कार्यक्रम में दिए गए अपने बयान को उद्धृत करते हुए आगे लिखा, “संघ परिवार और उसके संगठनों और केंद्र सरकार द्वारा मध्यकाल में ज्ञान और विज्ञान के विकास में योगदान देने वाले अरबी भाषा को नकारा जाता है। ऐसे में उनके नकारात्मक दृष्टिकोण वाले अन्याय का भी पर्दाफाश हुआ। सऊदी अरब, ओमान, लीबिया, ट्यूनीशिया, अल्जीरिया, केन्या, मिस्र और इराक के देशों में विश्वविद्यालयों का प्रतिनिधित्व करने वाले शिक्षकों, लेखकों और भाषाविदों ने विभिन्न सत्रों में आयोजित संगोष्ठी में भाग लिया।”

बता दें कि जिस शेख जैनुद्दीन मखदूम की बात हो रही है, वो 16वीं शताब्दी में पोन्नानी में रहा करते थे। वो मुगल आक्रांता अकबर के समकालीन थे। ज़ैनुद्दीन मखदूम द्वितीय शेख ज़ैनुद्दीन मखदूम प्रथम के पोते भी थे। मखदूम प्रथम का परिवार यमन से आया था। उनके दादा ने पोन्नानी जुमा मस्जिद का निर्माण लगभग 600 साल पहले कराया था।

जैनुद्दीन ने मालाबार मुस्लिम जमींदारों के खिलाफ पुर्तगालियों के हमले काफी कुछ लिखा है और उन्हें मुस्लिम विरोधी बताया था। पुर्तगालियों के खिलाफ उन्होंने स्थानीय मुस्लिमों को एकजुट करने का काम किया था।

सात्विक आहार, हादसे के बाद आँख की सर्जरी, 6 महीने परिवार से नहीं मिले… अरुण योगीराज ने यूँ ही नहीं गढ़ दी रामलला की दिव्य प्रतिमा, रोज सुनते थे रामकथा

अयोध्या में निर्माणाधीन राम मंदिर वैसे तो सोमवार (22 जनवरी, 2024) को प्राण प्रतिष्ठा का कार्यक्रम होना है, लेकिन उससे पहले ही रामलला की प्रतिमा की तस्वीर सोशल मीडिया पर सामने आ गई। इसके बाद भक्त भाव-विह्वल हो गए और 500 वर्षों के संघर्ष एवं बलिदान के बाद आए इस पल पर अपनी ख़ुशी रोक नहीं पाए। इस प्रतिमा को कृष्णशिला से गढ़ने वाले कर्नाटक के मूर्तिकार अरुण योगीराज की भी भूरि-भूरि प्रशंसा हो रही है।

अरुण योगीराज मैसूर के रहने वाले हैं। उत्तराखंड स्थित केदारनाथ धाम में जगद्गुरु शंकराचार्य की जिस प्रतिमा का प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अनावरण किया था, उसे उन्होंने ही बनाया था। इतना ही नहीं, दिल्ली के इंडिया गेट पर पीएम मोदी ने ही नेताजी सुभाष चंद्र बोस की जिस प्रतिमा का अनावरण किया था, उसे भी अरुण योगीराज ने ही गढ़ा था। अब उनकी बनाई रामलला की प्रतिमा राम मंदिर के गर्भगृह में स्थापित हुई है। इस प्रतिमा को बनाने के दौरान वो सात्विक आहार पर थे, और उनकी आँख में जख्म भी आया।

अयोध्या के लिए वो सबसे उत्तम प्रतिमा बनाना चाहते थे। इस दौरान वो 6 महीने तक अपने परिवार वालों तक से नहीं मिले। अयोध्या में वो अपने कुलदेव की पूजा के साथ दिन की शुरुआत करते थे। इसके बाद वहाँ के पंडितों द्वारा की जाने वाली पूजा-अर्चना में हिस्सा लेते थे। रामकथा के विद्वानों ने उनकी मदद की, उन्हें बताया कि श्रीराम कैसे दिखते थे, उनमें आमजन क्या देखते हैं। मूर्ति बनाने के दौरान एक हादसा भी हो गया और उनकी आँख में एक पत्थर का नुकीला टुकड़ा घुस गया था।

इसके बाद उनकी सर्जरी हुई। कई दिनों तक उन्हें एंटीबायोटिक और पेनकिलर्स पर रखा गया। हालाँकि, रामलला की भव्य प्रतिमा गढ़ने से उन्हें कुछ भी नहीं रोक सका। उनकी पत्नी विजेता ने ‘न्यू इंडियन एक्सप्रेस’ को ये जानकारी दी है। अरुण योगीराज 2008 में मैसूर यूनिवर्सिटी से MBA कर चुके हैं, लेकिन निजी कंपनी में नौकरी छोड़ कर उन्होंने अपने पारिवारिक पेशे को चुना। मैसूर के गुज्जे गौदाना पुरा स्थित एक जगह से पत्थर लाया गया, जिससे रामलला की प्रतिमा गढ़ी गई है। ये दक्षिण भारत के सबसे प्राचीन पत्थरों में से एक है।

अरुण योगीराज ने पहले ही कहा था कि ये भगवान राम के बाल स्वरूप की प्रतिमा है, लेकिन ये दिव्य भी होनी चाहिए क्योंकि लोग उनमें ईश्वर को देख कर दर्शन करेंगे। अरुण योगीराज के दादाजी ने ही उनके मूर्तिकार बनने की भविष्यवाणी कर दी थी। वो बसवन्ना शिल्पी के 17 पोते-पोतियों में से एक हैं। उनके पिता का नाम योगीराज है। उनके दादा ने गायत्री मंदिर और भुवनेश्वरी मंदिर की प्रतिमाओं को गढ़ा। बसवन्ना शिल्पी मैसूर राजघराने के शिल्पश्री सिद्धलिंगा स्वामी के प्रिय शिष्यों में से एक थे।

बवासीर के कारण शराब घोटाले के आरोपित को जमानत, AAP का कम्युनिकेशन इंचार्ज था विजय नायर: कोर्ट में कहा- मुंबई में कराऊँगा सर्जरी

बवासीर जेल से राहत दिला सकती है। आम आदमी पार्टी (AAP) नेता विजय नायर के मामले में यही हुआ है। दिल्ली की एक अदालत ने शराब घोटाले के आरोपितों में से एक और AAP के पूर्व कम्युनिकेशन इंचार्ज नायर को मेडिकल ग्राउंड पर दो हफ्ते की अंतरिम जमानत दी है। कोर्ट ने अंतरिम जमानत देते हुए 2 लाख रुपए के निजी मुचलके और इतनी ही जमानत राशि जमा करने के लिए कहा है।

दिल्ली के कथित शराब घोटाले में आरोपित विजय नायर पिछले 14 महीनों से जेल में हैं। उन्हें जमानत देते हुए राऊज कोर्ट के स्पेशल जज एमके नागपाल ने कहा, “याचिकाकर्ता विजय नायर को इस केस में दो हफ्ते की अंतरिम जमानत दी जाती है। जमानत की ये अवधि बाहर निकलने के दिन से दो हफ्ते के लिए ही होगी।”

हालाँकि, उन्होंने बवासीर की बीमारी का हवाला देते हुए 8 हफ्ते यानी दो महीने की अंतरिम जमानत की माँग करते हुए कोर्ट में याचिका दी थी। उन्होंने दलील दी थी कि वो ग्रेड-III के बवासीर के मरीज हैं और डॉक्टरों ने उन्हें सर्जरी की सलाह दी है। हालाँकि, अदालत ने विजय नायर की दलील नहीं मानी और सिर्फ दो सप्ताह की अंतरिम जमानत दी।

कोर्ट ने कहा कि जमानत अवधि के दौरान नायर न तो किसी सुबूत से छेड़छाड़ करेंगे और न ही किसी गवाह को प्रभावित करेंगे। वे किसी तरह की आपराधिक गतिविधियों में शामिल नहीं होंगे। कोर्ट ने नायर को हिदायत दी है कि वो शराब घोटाला केस से जुड़े किसी सह आरोपित, संदिग्ध या गवाह से बातचीत या मुलाकात नहीं करेंगे। जमानत की किसी शर्त का उल्लंघन नहीं करने को लेकर चेतावनी दी है।

विजय नायर की ओर से रेबेका ने कोर्ट में दलील दी कि ट्रायल से पहले लंबे वक्त तक हिरासत में रहने की वजह से उनके मुवक्किल की सेहत पर गंभीर असर पड़ा है और उन्हें कई सेहत संबंधी दिक्कतों का सामना करना पड़ा है। रेबेका ने कहा कि उनके मुवक्किल को सर्जरी की जरूरत है, जो हिरासत में नहीं हो सकती है। वह मुंबई के स्थायी निवासी होने की वजह से वो वहाँ ही सर्जरी कराना चाहते हैं।

हालाँकि, ईडी ने AAP नेता नायर की जमानत याचिका का विरोध किया। ईडी का कहना था कि आरोपित की सर्जरी खतरे वाली नहीं है। ये सर्जरी न्यायिक हिरासत में रहते हुए भी किसी रेफरल अस्पताल में की जा सकती है। ईडी ने कहा कि जेल में नायर का अच्छे से ध्यान रखकर इलाज मुहैया कराया जा रहा है। हालाँकि, नायर ने कहा कि उन्हें जल्द सेहतमंद होने के लिए परिवार के सदस्यों के जरूरत है।

बताते चलें कि शराब घोटाला केस में नायर को नवंबर 2022 में हिरासत में लिया गया था। ईडी की गिरफ्तारी के 26 महीने से अधिक वक्त में यह पहली बार है कि नायर को जमानत दी गई है। दिल्ली की इसी अदालत ने जुलाई 2023 में नायर की जमानत याचिका खारिज कर दी थी। बताते चलें कि सितंबर 2022 में सीबीआई ने नायर को गिरफ्तार कर लिया था।

इससे पहले शराब घोटाले के एक अन्य आरोपित समीर महेंद्रू को भी कोर्ट ने अंतरिम जमानत दे दी थी। इस जमानत को 22 जनवरी 2024 तक बढ़ा दिया है। इंडोस्पिरिट के प्रबंध निदेशक समीर महेंद्रू को उनकी पत्नी की सर्जरी के कारण अंतरिम जमानत दी गई है। इससे पहले दिसंबर 2023 के शुरुआत में शराब घोटाले के एक अन्य आरोपित बिनॉय बाबू को सुप्रीम कोर्ट को जमानत दे दी थी।

इससे पहले मई 2023 में दिल्ली आबकारी नीति घोटाले (Delhi Excise Policy Scam) से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में आरोपित राजेश जोशी और गौतम मल्होत्रा को को भी राउज एवेन्यू कोर्ट ने जमानत दे दी थी। कोर्ट ने दोनों आरोपितों को दो-दो लाख रुपए के निजी मुचलके पर जमानत दी थी।

बताते चलें कि शराब घोटाले में दिल्ली के पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया और राज्यसभा सांसद संजय सिंह सहित कुछ अन्य आरोपितों को भी गिरफ्तार करके जेल में डाला गया है। इन दोनों को कोर्ट ने जमानत देने से इनकार कर दिया था। वहीं, मनीष सिसोदिया को अपनी बीमार पत्नी से मिलने के लिए कोर्ट ने नवंबर 2023 में 6 घंटे की अनुमति दी थी।

मनीष सिसोदिया की पत्नी सीमा सिसोदिया खतरनाक एवं लाइलाज बीमार से पीड़ित हैं। उन्हें मल्टीपल स्केलेरोसिस (Multiple sclerosis) है। इस बीमारी में इंसान के दिमाग और रीढ़ की हड्डी को अक्षम हो जाती है। यह शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली पर हमला करती है, जिसके कारण पीड़ित को अपने शरीर पर नियंत्रण नहीं रहता है।

मनीष सिसोदिया के घर में उनकी पत्नी के अलावा और कोई नहीं है। उनका एक बेटा है, जो अपनी पढ़ाई के लिए विदेश में रहता है। मनीष सिसोदिया ने कहा था कि वे अपनी पत्नी का ख्याल रखने वाले अकेले व्यक्ति हैं। इसके आधार पर उन्होंने कोर्ट से कई बार जमानत की अपील की थी। अप्रैल में भी उनकी पत्नी की तबीयत बिगड़ने पर अपोलो में भर्ती कराया गया था।

शोएब मलिक का तीसरा निकाह: सानिया मिर्जा को तलाक दिए बिना तलाकशुदा हीरोइन के साथ ‘अलहमदुलिल्लाह’, मेकअप आर्टिस्ट्स को करती है टॉर्चर

पाकिस्तानी क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान शोएब मलिक ने अभिनेत्री सना जावेद से निकाह रचा लिया है। लगभग 2 दशकों तक पाकिस्तान के लिए बतौर ऑलराउंडर अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट खेल चुके शोएब मलिक ने दूसरी शादी भारत की स्टार्ट टेनिस खिलाड़ी रहीं सानिया मिर्जा के साथ की थी। अब शोएब मलिक ने सना जावेद के साथ निकाह की तस्वीरें इंस्टाग्राम पर पोस्ट की हैं। उर्दू मनोरंजन इंडस्ट्री की अदाकारा सना जावेद भी तलाकशुदा हैं। 2020 में उन्होंने उमैर जसवाल से शादी की थी।

शादी के कुछ ही दिनों बाद दोनों के बीच सब ठीक न होने की चर्चाएँ चलने लगीं। दोनों ने अपने-अपने सोशल मीडिया हैंडल्स से एक-दूसरे के साथ तस्वीरें भी डिलीट कर दी थीं। इसके बाद उनका तलाक हो गया। इधर शोएब मलिक और सानिया मिर्जा के भी अलग होने की चर्चाएँ गर्म रहीं। ‘ऐ मुश्ताक ऐ ख़ाक’ और ‘डंक’ सहित कई टीवी शो में नज़र आ चुकीं सना जावेद म्यूजिक वीडियोज में भी दिखती हैं। 2010 में जब शोएब मलिक ने सानिया मिर्जा से हैदराबाद में शादी की थी, तब भी उन्होंने पहली पत्नी से तलाक नहीं लिया था।

उसके बाद आयशा सिद्दीकी ने सबके सामने आकर बताया था कि वो शोएब मलिक की पहली पत्नी हैं और उनसे तलाक लिए बिना वो दूसरी शादी नहीं कर सकते। पहले तो शोएब मलिक ने इनकार किया, लेकिन फिर उन्हें आयशा सिद्दीकी से तलाक लेना पड़ा था। हाल ही में सैन्य मिर्जा ने भी एक इंस्टाग्राम पोस्ट डाल कर लिखा था कि शादी कठिन है, तलाक कठिन है, अपना कठिन चुनें। उन्होंने लिखा था कि ज़िन्दगी कभी आसान नहीं रहती। उन्होंने भी शोएब मलिक के साथ तस्वीरें डिलीट की थीं।

पिछले साल जब शोएब मलिक ने सना जावेद को जन्मदिन विश किया था, तभी से उनके एक-दूसरे को डेट करने की चर्चाएँ थीं। ‘प्यारेलाल अफजल’ सीरियल में काम करने वाली सना जावेद पर जूनियरों और मेकअप आर्टिस्ट्स के साथ सेट पर दुर्व्यवहार करने के आरोप लग चुके हैं, तब शोएब मलिक ने उनका समर्थन किया था। शोएब मलिक ने ट्विटर पर शादी की तस्वीर डाल कर ‘अलहमदुलिल्लाह’ भी लिखा। शोएब मलिक और सानिया मिर्जा का इझान नाम का एक बेटा भी है, जिसका जन्म 2018 में हुआ था।

टाइल्स कारोबारी के 3 पालतू कुत्तों ने स्कूली बच्चों को दौड़ाया, ट्रेन से कटकर भाई-बहन की मौत: राजस्थान में हादसे के बाद पुलिस ने दर्ज की FIR

राजस्थान से एक दर्दनाक घटना सामने आई है। यहाँ एक पालतू कुत्ते से बचने के चक्कर में दो मौसेरे भाई-बहन एक मालगाड़ी के नीचे आ गए। इससे उनकी दर्दनाक मौत हो गई। दोनों भाई-बहन स्कूल से लौट रहे थे। उसी दौरान ओम प्रकाश राठी नाम के व्यक्ति के तीन कुत्ते बच्चों को दौड़ा लिए। जिसके कारण वे भागने लगे और रेलवे ट्रैक पर जा पहुँचे। वहीं, इस घटना में तीन अन्य बच्चे बाल-बाल बच गए इस घटना को लेकर इलाके में तनाव है।

हादसा जोधपुर के ‘माता का थान’ इलाके में शुक्रवार (19 जनवरी 2024) को दोपहर में हुआ। दरअसल, बनाड़ के गणेशपुरा के रहने वाले 14 साल के युवराज सिंह 12 साल की अपनी बहन अनन्या कँवर एवं अन्य साथियों के साथ स्कूल से लौट रहे थे। दोनों भाई-बहन आर्मी पब्लिक स्कूल में 7वीं और 5वीं क्लास में पढ़ते थे। दोनों अपने तीन साथियों के साथ शुक्रवार की दोपहर स्कूल से लौट रहे थे।

इस दौरान रास्ते में 3 पालतू कुत्ते उन्हें देखकर भौंकने लगे और उनके पीछे पड़ गए। इससे डरकर बच्चे भागने लगे। भागते-भागते तीन बच्चे रेलवे ट्रैक पर पहुँच गए। इसी दौरान वहाँ से गुजर रही एक मालगाड़ी से दोनों कट गए। वहीं, दो बच्चे इस घटना में बाल-बाल बच गए। हादसे के बाद पुलिस ने दोनों को पोस्टमार्टम कराने के बाद उन्हें परिजनों को सौंप दिया।

जिस जगह पर यह हादसा हुआ, वह जोधपुर बनाड़ कैंट स्टेशन से 50 मीटर दूर है। हादसे की जानकारी पर डीपीसी अमृता दुहन, एडीसीपी नाजिम अली, मंडोर के एसीपी पीयूष कविया सहित कई अधिकारी भी मौके पर पहुँचे। पुलिस ने राठी पर गैर-इरादतन हत्या का मामला दर्ज कर लिया है। वहीं, जोधपुर नगर निगम ने उसके चारों कुत्तों को उठा लिया है।

हादसे की जानकारी मिलने पर बच्ची के पिता आर्मी से रिटायर प्रेम सिंह अपने अन्य परिजनों के साथ घटनास्थल पर पहुँचे। वहीं, युवराज के पिता मदन सिंह कर्नाटक में है। प्रेम सिंह ने आरोप लगाया है कि रेलवे ट्रैक के पास ओमप्रकाश राठी का घर है। उसने चार कुत्ते पाल रखे हैं। उन कुत्तों को बच्चों के पीछे दौड़ाया गया, जिसके कारण बच्चों की जान चली गई।

जिस जगह हादसा हुआ, वहाँ मुख्य सड़क और कॉलोनी के बीच रेलवे ट्रैक है। इस पर 2 किलोमीटर तक कोई क्रॉसिंग नहीं है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि राठी इन कुत्तों को खुला छोड़कर रखता है, जिसके कारण यह हादसा हुआ है। पुलिस ने ओमप्रकाश राठी के पूरे परिवार को थाने ले जाया गया, जहाँ पूछताछ की जा रही है।

बताया जा रहा है कि इन कुत्तों को वहीं का रहने वाला ओम प्रकाश राठी ने पाल रखे हैं। इनमें दो डॉग जर्मन शेफर्ड और एक पॉमेलियन ब्रीड का था। भास्कर की रिपोर्ट के मुताबिक, राठी टाइल्स का कारोबार करता है। उसने टाइस्ल अवैध रूप से सामने की प्लॉट और अपने घर के बाहर रखी है। टाइस्ल चोरी ना हो, इसलिए वह कुत्तों को खुला छोड़कर रखता है।

ज्ञानवापी ढाँचे में घुसी 26 लोगों की टीम, जहाँ मिला शिवलिंग वहाँ शुरू हुई साफ़-सफाई: हिन्दू पक्ष के आवेदन पर सुप्रीम कोर्ट ने दिया था आदेश, मुस्लिम बताते हैं ‘वजूखाना’

वाराणसी स्थित ज्ञानवापी ढाँचे के भीतर स्थित जगह, जिसे मुस्लिम वजूखाना बताते हैं, उसकी सफाई शनिवार (20 जनवरी, 2024) को शुरू हो गई है। ये वही जगह है जहाँ पर ASI के सर्वे के दौरान शिवलिंग होने का खुलासा हुआ है। वहाँ नमाजी अक्सर अपने हाथ-पाँव धोते थे। वर्षों से शिवलिंग को अपमानित किया जा रहा है। ज्ञानवापी का मामला अदालत में चल रहा है। अब कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच आला अधिकारियों की उपस्थिति में उस स्थल की साफ़-सफाई की जा रही है।

असल में इसके लिए हिन्दू महिलाएँ सुप्रीम कोर्ट पहुँची थीं, जिसमें जिस जगह पर शिवलिंग मिली वहाँ स्वच्छता बनाए रखने की माँग की गई थी। सुप्रीम कोर्ट ने इस आवेदन को स्वीकार कर लिया था। हिन्दू पक्ष के वकील सुधीर त्रिपाठी ने बताया कि कथित वजूखाना काफी गंदा हो गया था, जिस कारण ये माँग की गई। ज्ञानवापी ढाँचा, जिसे मुस्लिम मस्जिद कहते हैं, उसमें घुसने से पहले सफाई कर्मचारियों की पहचान की भी जाँच की गई। 16 जनवरी को ही सुप्रीम कोर्ट ने इसकी साफ़-सफाई का आदेश दे दिया था।

इस दौरान न सिर्फ मंदिर और मस्जिद दोनों पक्षों के लोग मौजूद रहे, बल्कि पूरा काम खुद जिलाधिकारी अपनी निगरानी में करा रहे हैं। इससे पहले दोनों पक्षों ने आपस में बैठक की। ‘ज्ञानवापी मस्जिद प्रबंधन समिति’ का कहना है कि वो पानी टंकी की सफाई का भी समर्थन करती है, जो सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद से पिछले 2 वर्षों से सील है। कई मछलियों के मरने के कारण भी टंकी से दुर्गन्ध आ रहा है। सुप्रीम कोर्ट को दिए गए आवेदन में इसकी जानकारी दी गई थी।

इसमें कहा गया था कि पवित्र शिवलिंग को गंदगी और मृत जानवरों से दूर रखा जाना चाहिए, ऐसे में उसका मरी हुई मछलियों के बीच होना ठीक नहीं है। DM के साथ 26 लोगों की टीम अंदर साफ़-सफाई के लिए गई। सुबह 10 बजे ही टैंक की सफाई शुरू हो गई, जो दोपहर तक चली। टैंक से पानी निकालने के लिए फायर ब्रिगेड की गाड़ियाँ भी बुलाई गई हैं। पूरी प्रक्रिया की वीडियोग्राफ़ी भी हो रही है। पानी निकालने के लिए 3 मोटर का इस्तेमाल किया गया।

आरोपित मौलाना, वकील मुस्लिम, केस अवैध धर्म परिवर्तन का… बीच कोर्ट से चले गए नमाज पढ़ने क्योंकि दिन था शुक्रवार

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ की स्थानीय अदालत ने कुछ मुस्लिम वकीलों के रवैये पर चिंता जताई है। अदालत का कहना है कि कार्यवाही बीच में छोड़ ये लोग जुमे की नमाज के लिए चले जाते हैं। मुस्लिम वकीलों के ऐसे रवैये के बाद अवैध धर्म परिवर्तन से संबंधित एक केस को लेकर 19 जनवरी 2023 को इसके आरोपितों को एमिकस क्यूरी देने का निर्देश दिया। लखनऊ स्थित NIA/ATS कोर्ट के स्पेशल जज विवेकानंद शरण त्रिपाठी ने नसीहत देते हुए कहा कि इन वकीलों को यह ध्यान रखना चाहिए कि कर्म ही पूजा है और उन्हें अपने न्यायिक कर्तव्यों की इज्जत करनी चाहिए।

स्पेशल जज त्रिपाठी ने एमिकस क्यूरी (अदालती दोस्त/न्याय मित्र मतलब न्यायालय की मदद करने वाला) देने का निर्देश देते हुए कहा, “यदि मुस्लिम वकील नमाज पढ़ने के लिए अदालती कार्यवाही से खुद को दूर रखते हैं तो अवैध धर्म परिवर्तन केस के आरोपितों को एमिकस क्यूरी (Amicus Curiae) दिया जाए। ये मुकदमे की कार्यवाही जारी रख सकते हैं ताकि अदालती कार्यवाही बाधित न हो।”

स्पेशल जज त्रिपाठी ने अवैध धर्म परिवर्तन केस के आरोपित मौलाना कलीमुद्दीन और अन्य के खिलाफ आपराधिक मुकदमे की सुनवाई के दौरान ये आदेश दिया। यही नहीं, अदालत ने एक आरोपित की पैरवी कर रहे कुछ वकीलों के द्वारा निश्चित दस्तावेजों की माँग वाली याचिका को भी खारिज कर दिया।

इसके साथ ही अदालत ने इन वकीलों को अदालती कार्यवाही में निर्धारित वक्त के अंदर ही कोई भी आवेदन दायर करने की चेतावनी भी दी। दरअसल इस केस में मुकदमे की कार्यवाही के दौरान शुक्रवार को गवाहों की जिरह का वक्त तय किया गया था। लेकिन वकील मोहम्मद अमीर नकवी और वकील जिया-उल-जिलानी ने जिरह जारी रखने से इनकार किया। दोनों वकीलों ने दोपहर करीब 12.30 बजे अदालत को जानकारी दी कि शुक्रवार होने के कारण वो जिरह जारी नहीं रख पाएँगे, उन्हें नमाज पढ़ने जाना है।

आरोपित मौलाना ने भी अदालत से जुमे की नमाज के लिए उसे जिरह से छोड़ देने की मंजूरी माँगी थी। जज ने उससे कहा कि ऐसे काम के लिए उसे कोर्ट छोड़ने की इजाजत देना सही नहीं होगा। हालाँकि, बाद में अदालत को हालात से मजबूर होकर मुकदमे की कार्यवाही रोकनी पड़ी।

अदालत ने कुछ आरोपितों के मुस्लिम वकीलों को चेतावनी देते हुए कोर्ट के कर्मचारी को आरोपितों के लिए न्याय मित्र नियुक्त करने का निर्देश दिया। कोर्ट ने कहा कि अगर मुस्लिम वकील नमाज पढ़ने के लिए कोर्ट रूम से बाहर जाते रहे तो सुनवाई पूरी नहीं होगी।