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गर्भगृह में नई मूर्ति, तो पुराने रामलला का क्या होगा? ज्योतिर्मठ शंकराचार्य ने किया ऐसा सवाल, जिसका जवाब ट्रस्ट पहले ही दे चुका

राम मंदिर में नई मूर्ति की प्राण-प्रतिष्ठा और पुरानी मूर्ति को लेकर ज्योतिर्मठ शंकराचार्य स्वामी श्री अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने कुछ सवाल उठाए हैं। हालाँकि, उन्होंने जो प्रश्न पूछे हैं उस पर चूँकि श्री रामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र पहले ही सब स्पष्ट कर चुका है इसलिए शंकराचार्य की बातें लोगों को पसंद नहीं आ रहीं।

अपने पत्र में उन्होंने चिंता जताई कि हर जगह नई मूर्ति की प्रतिष्ठा की बात है जबकि गर्भगृह में तो पहले ही रामलला की मूर्ति विराजमान है, जिन्होंने इतने वर्ष का संघर्ष देखा। उन्होंने पत्र में कहा है रामलला की नई मूर्ति आने से ऐसा न हो कि पुरानी वाली की उपेक्षा हो जाए। उनके मुताबिक वेदी पर पुराने रामलला ही विराजमान होने अनिवार्य हैं। नई मूर्ति हुई तो बहुत बड़ा अन्याय होगा।

श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने बताया पुरानी मूर्ति का क्या होगा

उनके इस पत्र के बाद फिर सवाल उठ रहे हैं कि नई मूर्ति आ गई है तो उस मूर्ति का क्या होगा जिसे इतने वर्षों से पूजा जा रहा था। तो बता दें, कि इन सवालों पर श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने हाल में जवाब देते हुए कहा था कि नए राम मंदिर के गर्भगृह में रामलला की वर्तमान मूर्ति भी रखी जाएगी।

इसके अलावा ऑपइंडिया ने भी अपनी रिपोर्ट में आपको इस संबंध में एक साल पहले ही जवाब दिया था। नई प्रतिमा के बारे में जब खबर आई थी तो हमने इस संबंध में कामेश्वर चौपाल से बातचीत की थी, जो ‘श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट’ के सदस्य हैं। उन्होंने पिछले साल ही यह जानकारी दी थी कि गर्भगृह में दोनों मूर्तियों को रखा जाएगा।

उन्होंने कहा था कि अधिकतर मंदिरों में 2 प्रतिमाएँ होती हैं। इनमें से एक को ‘उत्सव मूर्ति’ के रूप में जाना जाता है तो दूसरी ‘प्राण प्रतिष्ठित मूर्ति’ कहलाती है। प्राण प्रतिष्ठित मूर्ति को कहीं खिसकाया नहीं जा सकता, वो वहीं पर विराजमान रहती हैं जहाँ उन्हें स्थापित किया जाता है। वहीं झाँकी या शोभा यात्रा जैसे आयोजनों में ‘उत्सव मूर्ति’ को निकाला जाता है।

क्यों होगीं मंदिर में 2 मूर्तियाँ

‘श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट’ के सदस्य कामेश्वर चौपाल ने इसकी पुष्टि की थी कि अयोध्या में बन रहे भव्य एवं दिव्य राम मंदिर में भी एक मूर्ति प्राण प्रतिष्ठित होगी और एक उत्सव के लिए।

अब ये तो साफ है कि जो बड़ी मूर्ति है उसकी गर्भगृह में प्राण-प्रतिष्ठा होगी जबकि जो दूसरी मूर्ति होगी उसे उत्सव मूर्ति के रूप में गर्भगृह में रखा जाएगा। इसके अलावा ये जो सवाल उठ रहे हैं कि राजनीति के कारण पहले राम मंदिर प्राण-प्रतिष्ठा पहले हो रही है। इस पर भी कामेश्वर चौपाल बता चुके थे कि कितना भी बड़ा घर बन कर तैयार हो जाए, पंडित द्वारा शुभ मुहूर्त बताने जाने के पश्चात ही घरवास का कार्यक्रम होता है।

बता दें कि श्रीराम की नई मूर्ति की गर्भगृह में ही प्राण-प्रतिष्ठा होगी। यहाँ पुराने श्री रामलला विराजमान होंगे अपने भाई लक्ष्मण, भरत, और शत्रुघ्न के साथ। उनके पास हनुमान जी की भी एक छोटी मूर्ति होगी।

इस शुभ अवसर पर जब हर कोई प्राण-प्रतिष्ठा को लेकर उत्साहित है तो शंकराचार्य द्वारा इस कार्यक्रम पर सवाल खड़ा करना किसी को नहीं भा रहा। लोग उन्हें सलाह दे रहे हैं कि वो अपने काम से काम रखे। इस विषय पर न बोलें। कुछ ज्योतिशों ने विश्वास दिया है कि राम मंदिर प्राण-प्रतिष्ठा का कार्यक्रम शास्त्रसम्मत हो रहा है। कुछ ने चुनौती भी दी है कि फिर भी कोई संदेह है तो उनके साथ इस विषय पर शास्त्रार्थ कर लिया जाए।

निकले थे ‘न्याय यात्रा’ पर, तोड़ डाला कानून… पुलिस वालों पर भी किया हमला: कॉन्ग्रेसियों पर असम में FIR दर्ज

राहुल गाँधी की ‘भारत जोड़ो न्याय यात्रा’ असम में कानूनी पचड़े में फँस गई है। जोरहाट जिला पुलिस ने स्वतः संज्ञान लेते हुए गुरुवार (18 जनवरी 2024) को इस यात्रा और इसके मुख्य आयोजक केबी बायजू (KB Byju) पर FIR दर्ज की है।

असम पुलिस ने ये FIR यात्रा के लिए चयनित रास्तों पर सरकारी दिशा-निर्देशों का उल्लंघन करने पर दर्ज की। पुलिस के मुताबिक, जोरहाट से गुजरते वक्त कॉन्ग्रेस नेता राहुल गाँधी के नेतृत्व में इस यात्रा ने पुलिस-प्रशासन के नियमों का उल्लंघन करते हुए निर्धारित रास्तों से हटकर दूसरा रास्ता पकड़ लिया।

पुलिस के अनुसार रैली के रास्ते में अचानक बदलाव की वजह से बाधा पैदा हुई। इस कारण से भीड़ अनियंत्रित हो गई। यातायात नियंत्रण के लिए लगे बैरिकेड तोड़ने लगी। ‘भारत जोड़ो न्याय यात्रा’ में शामिल कॉन्ग्रेसियों ने ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मियों पर हमला भी कर दिया।

इस FIR में यह भी कहा गया है कि रैली की वजह से क्षेत्र में भगदड़ और दंगा जैसे हालात पैदा हो गए थे। पुलिस ने रैली आयोजक केबी बायजू के नेतृत्व वाली रैली पर आपराधिक साजिश के तहत भीड़ को उकसाने का भी आरोप लगाया है।

असम पुलिस के एक अधिकारी ने बताया कि यात्रा को केबी रोड की ओर से जाने की इजाजत नहीं थी। इस रोड पर यात्रा के पहुँचने के कारण हालात काबू से बाहर हो गए। अचानक भारी भीड़ की वजह से कुछ लोग गिर गए और भगदड़ जैसे हालात पैदा हो गए।

एक्शन मोड में सीएम हिमंत बिस्वा सरमा

असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने 18 जनवरी 2024 को कहा कि अगर राहुल गाँधी की भारत जोड़ो न्याय यात्रा राज्य सरकार के दिशा-निर्देशों का उल्लंघन करती है तो उस पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।

सीएम बिस्वा ने मीडिया से कहा, “असम में भारत जोड़ो न्याय यात्रा की योजना बनाने वाली टीम में दो लोगों ने जानबूझकर दिशा-निर्देशों का उल्लंघन किया। वे रैली को गुवाहाटी से गुजारने की योजना बना रहे हैं। यहाँ तक ​​कि बीजेपी भी राजधानी शहर से होकर अपनी रैलियाँ नहीं करती है, क्योंकि इससे परेशानी पैदा होगी। अगर कॉन्ग्रेस गुवाहाटी के रास्ते रैली निकालने के लिए मजबूर करेगी तो हम उन्हें नहीं रोकेंगे; इसके बजाय, हम केस दर्ज करेंगे।”

सीएम बिस्वा ने ये भी कहा कि असम के लोग भारत जोड़ो न्याय यात्रा में शामिल नहीं होंगे। उन्होंने कहा, “केवल एक खास समुदाय (मियाँ या बाँग्लादेशियों की तरफ इशारा) इस यात्रा में दिलचस्पी रखता है।”

विवादों में ‘न्याय यात्रा’

बताते चलें कि 14 जनवरी को मणिपुर से शुरू हुई राहुल गाँधी की ‘भारत जोड़ो न्याय यात्रा’ नागालैंड से होते हुए 18 जनवरी को असम में प्रवेश किया। असम में आते ही कॉन्ग्रेस को पहला झटका इसी पार्टी में रही नेता की ओर से लगी। असम यूथ कॉन्ग्रेस की अध्यक्ष रहीं अंगकिता दत्ता ने सवाल किया कि उन्हें कब न्याय मिलेगा। ये वही अंगकिता हैं, जिन्हें यूथ कॉन्ग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष बीवी श्रीनिवास के उत्पीड़न और प्रताड़ना के खिलाफ आवाज उठाने पर पार्टी ने निष्कासित कर दिया था।

अपनी ही पार्टी की निष्कासित महिला नेता को न्याय दिलाने के बजाय राहुल गाँधी असम पहुँच कर राजनीति करने लगे। उन्होंने असम सरकार को ‘नफ़रत की खाद’ से उपजी ‘भ्रष्टाचार की फसल’ बताया। उन्होंने कहा कि असम के मुख्यमंत्री हिंदुस्तान के सबसे भ्रष्ट मुख्यमंत्री हैं, जिनका काम है नफ़रत की आड़ में जनता का पैसा लूटना।

कारोबारी से पैसे लेकर जिस बँगले को चमकाया, अब वहीं से बँध गया महुआ मोइत्रा का बोरिया-बिस्तर: अधिकारी पहुँचे तो चुपचाप चलती बनीं TMC की पूर्व सांसद

संसद में सवाल पूछने के लिए घूसखोरी की दोषी पाई गईं TMC की पूर्व लोकसभा सांसद महुआ मोइत्रा को झटके पर झटके लग रहे हैं। कुछ समय पहले तक ‘शेरनी’ बनकर घूम रही महुआ मोइत्रा की बोलती बंद है। संसद में सवाल पूछने के बदले घूस लेकर उन्होंने जिस सरकारी बँगले को सजाया-सँवारा था, उससे भी महुआ को हाथ धोना पड़ा है। वैसे, तो महुआ मोइत्रा इस बंगले को खाली करने के लिए कई नोटिस मिल चुके थे, इसके बावजूद वो बँगला खाली नहीं कर रही थी।

लेकिन जब संपदा निदेशालय के अधिकारी बँगला खाली करवाने पहुँच ही गए, तो उन्हें बेमन से ऐसा करना ही पड़ा। हालाँकि, एक दिन पहले वो दिल्ली हाईकोर्ट तक में लड़ाई लड़ रही थी, लेकिन उच्च न्यायालय ने उन्हें कोई राहत देने से इनकार कर दिया था।

लोकसभा से निष्कासित सांसद महुआ मोइत्रा को 2 दिन पहले आखिरी बार नोटिस दिया गया था कि वो अपना बँगला खाली कर दें, वर्ना एजेंसियाँ अपने तरीके से जबरन बंगला खाली करवाएँगी। इसके बाद महुआ मोइत्रा ने हाईकोर्ट का रुख किया था, लेकिन हाईकोर्ट ने उनकी दलीलों को मानने से इनकार कर दिया था, जिसके बाद उनके पास कोई रास्ता नहीं बचा था। हालाँकि, इसके बावजूद वो बँगला नहीं खाली करने की जिद पर अड़ी थी, लेकिन जब अधिकारी मौके पर पहुँच गए, तो महुआ मोइत्रा बँगला खाली कर चुपचाप चलती बनीं। संपदा निदेशालय के अधिकारियों ने उनके बंगले पर ताला लगा दिया है।

दरअसल, महुआ मोइत्रा ने हाईकोर्ट में तर्क दिया था कि वो फिर से चुनावी मैदान में हैं, इसलिए उन्हें बंगले में रहने की अनुमति दी जानी चाहिए। चूँकि अभी चुनावों की घोषणा नहीं हुई है, ऐसे में हाईकोर्ट ने उनकी दलील को खारिज कर दिया।

दिल्ली हाईकोर्ट ने महुआ की याचिका को ख़ारिज करते हुए कहा था कि, “याचिकाकर्ता को सरकारी बँगला इसलिए मिला था क्योंकि वह सांसद थीं। उनके संसद से निकाले जाने के बाद उनका यह पद चला गया है। कोर्ट के पास ऐसा कोई नियम नहीं है, जो किसी सांसद के संसद से निकाले जाने के बाद उसके सरकारी घर में रहने सम्बन्धी मसलों से निपटता हो।”

दिल्ली हाई कोर्ट ने कहा कि उनके संसद से निकाले जाने पर सुप्रीम कोर्ट ने अभी रोक नहीं लगाई है, इसलिए बँगले से उनको बाहर किए जाने के मामले में उन्हें वह कोई भी राहत संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत नहीं दे सकता। उनकी सुप्रीम कोर्ट में लगाई गई याचिका की सुनवाई 24 जनवरी, 2024 को होगी।

बताते चलें कि उन्हें 8 दिसंबर, 2023 को लोकसभा से निष्कासित कर दिया गया था। इसके बाद संसद की हाउसिंग कमिटी ने महुआ को एक महीने के अंदर 7 जनवरी, 2024 तक बंगला खाली करने को कहा था। बाकायदा महुआ को 11 दिसंबर, 2023 को केंद्रीय आवास एवं शहरी विकास मंत्रालय ने पत्र भेजकर इस आदेश से अवगत कराया था। इसके बाद 12 दिसंबर को उन्हें तीसरा नोटिस दिया गया, लेकिन इस आदेश को चुनौती देने के लिए वो 18 दिसंबर 2023 को दिल्ली हाई कोर्ट जा पहुँची थीं। हालाँकि अब वो बँगला खाली कर चुकी हैं।

‘वहाँ (अयोध्या) तक पहुँच नहीं पाओगे… राम भक्तों को बम से उड़ा देंगे’ – गुजरात से साइकल चला अयोध्या जा रहे युवकों को असगर खान ने धमकाया, हुआ गिरफ्तार

दो युवक साइकल के सहारे गुजरात से अयोध्या यात्रा पर निकले हैं। इन दोनों युवकों को मुस्लिम पिता-पुत्र ने बम से उड़ाने की धमकी दी है। इस मामले में दोनों युवकों ने बताया कि वो मध्य प्रदेश के राजगढ़ जिले के सारंगपुर के आसपास पहुँचे थे, तभी कई लोगों ने पूछा कि वो कहाँ जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि वो अयोध्या जा रहे हैं। इस बीच, असगर खान नाम के अधेड़ व्यक्ति ने उन्हें धमकाया कि वो अयोध्या नहीं पहुँच पाएँगे, क्योंकि वो बम से उड़ा दिए जाएँगे।

भास्कर की रिपोर्ट के मुताबिक, गुजरात से चले दोनों युवक सारंगपुर से गुजर रहे थे, जब ये घटना हुई। इस दौरान एक युवक ने धमकी देने वाले असगर खान का वीडियो बना लिया। असगर के साथ ही उसके बेटे ने भी दोनों के साथ गाली-गलौच की।

धमकी मिलने के बाद दोनों युवकों ने इसकी शिकायत वहाँ से थोड़ी दूर पर उनके स्वागत के लिए खड़े हिंदू संगठन के कार्यकर्ताओं से की। इसके बाद पुलिस तक ये मामला पहुँचाया गया। इस मामले में सारंगपुर पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर दोनों आरोपितों को गिरफ्तार कर लिया है।

ये मामला बुधवार (17 जनवरी 2024) का है। दोनों युवकों के नाम नील पटेल और देव पटेल हैं। वो अयोध्या में रामलला मंदिर में प्राण प्रतिष्ठा देखने के लिए गुजरात से साइकल के माध्यम से अयोध्या की यात्रा पर निकले हैं। उनके साथ जब ये घटना घटी, तो देव पटेल ने असगर खान का वीडियो बना लिया।

युवकों का आरोप है कि असगर ही बार-बार पूछ रहा था कि वो कहाँ जा रहे हैं। उनके बताने पर असगर ने कहा, “जाओ, तुमको बताते हैं। वहाँ तक पहुँच नहीं पाओगे। राम भक्तों को बम से उड़ा देंगे।” इस घटना को स्थानीय मीडिया ने भी कवर किया है।

इस घटना के समय हिंदू जागरण मंच के जिला सह-संयोजक मुकेश दुबे हाईवे पर दोनों युवकों के आने का इंतजार कर रहे थे। ताकि वो रास्ते में होने वाली परेशानियों को ध्यान में रख उनकी मदद कर सकें। जब दोनों युवकों ने रास्ते में हुई घटना की बात बताई, तो सभी लोग थाने पर गए और एफआईआर दर्ज कराई। बहरहाल, आरोपितों को गिरफ्तार कर लिया गया है।

‘हमारे आराध्य के टेंट में दर्शन की दशकों पुरानी पीड़ा दूर होगी’: महाराष्ट्र में PM मोदी ने देश की सबसे बड़ी हाउसिंग सोसाइटी का किया उद्घाटन, 90000 परिवारों को घर

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शुक्रवार (19 जनवरी, 2024) को महाराष्ट्र के सोलापुर पहुँचे, जहाँ उन्होंने 90,000 से भी अधिक वंचितों को उन्हें अपना घर दिया। साथ ही उन्होंने ‘अमृत 2.0’ योजना की शुरुआत भी की, जिसके तहत शहरों-कस्बों का कायाकल्प किया जा रहा है। ‘अटल मिशन’ भी इसी का हिस्सा है। उन्होंने 2000 करोड़ रुपए से भी अधिक की परियोजनाओं की आधारशिला रखी, उद्घाटन किया। सोलापुर में ‘रायनगर हाउसिंग सोसाइटी’ में 15,000 लोगों को घर सौंपा गया।

ये देश की सबसे बड़ी हाउसिंग सोसाइटी है। इस दौरान प्रधानमंत्री ने कहा कि ये समय हम सभी के लिए भक्ति-भाव से भरा हुआ है। उन्होंने कहा कि 22 जनवरी को वो ऐतिहासिक क्षण आने वाला है, जब हमारे भगवान राम अपने भव्य मंदिर में विराजने जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि हमारे आराध्य के दर्शन टेंट में करने की दशकों पुरानी पीड़ा अब दूर होने जा रही है। पीएम ने कहा कि रामलला की प्राण प्रतिष्ठा से पहले कुछ संतों के मार्ग दर्शन में वो अपने यम नियमों में व्यस्त हैं और वो उसका कठोरता से पालन भी कर रहा हैं।

बकौल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, ये भी संयोग है कि उनके अनुष्ठान की शुरुआत महाराष्ट्र के नासिक से पंचवटी की भूमि से हुई। पीएम मोदी ने इस पर ख़ुशी जताई कि कि सोलापुर के हजारों गरीबों और मजदूर साथियों के लिए उनकी सरकार ने जो संकल्प लिया था, वह आज पूरा हो रहा है। पीएम आवास योजना के तहत बनी देश की सबसे बड़ी सोसाइटी का लोकार्पण पर उन्होंने कहा, “मैं आज देखकर आया और मैंने सोचा काश… मुझे भी बचपन में ऐसे घर में रहने का मौका मिला होता।”

पीएम मोदी ने कहा कि हमारी सरकार पहले दिन से प्रयास कर रही है कि श्रीराम के आदर्शों पर चलते हुए देश में सुशासन हो, देश में ईमानदारी का राज हो। ये रामराज्य ही है जिसने सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास की प्रेरणा दी है। 2014 में सरकार बनते ही मैंने कहा था – मेरी सरकार गरीबों के लिए समर्पित सरकार है। इसीलिए, हमने एक के बाद एक ऐसी योजनाएँ लागू कीं, जिनसे गरीबों की मुश्किलें कम हों और उनका जीवन आसान बने।”

उन्होंने इस दौरान लोगों को समझाया कि 2 प्रकार के विचार रहते हैं – एक राजनीतिक उल्लू सीधा करने के लिए लोगों को भड़काते रहो। उन्होंने आगे बताया कि उनका मार्ग है – Dignity of labour, अर्थात आत्मनिर्भर श्रमिक और गरीबों का कल्याण। प्रधानमंत्री ने याद किया कि हमारे देश में लंबे समय तक ‘गरीबी हटाओ’ के नारे लगते रहे लेकिन गरीबी नहीं हटी। उन्होंने याद किया कि गरीबों के नाम पर योजनाएँ तो बनाई जाती थीं, लेकिन उनका लाभ गरीबों को नहीं मिलता था। उनके हक का पैसा बिचौलिये लूट जाते थे। पहले की सरकारों की नीति, नीयत और निष्ठा कठघरे में थी।

पीएम मोदी ने कहा कि विश्वकर्मा साथियों का जीवन बदलने के लिए उनकी सरकार ने ‘पीएम विश्वकर्मा योजना’ बनाई है। इस योजना के तहत इन साथियों को ट्रेनिंग दी जा रही है, आधुनिक उपकरण दिए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि विकसित भारत के निर्माण के लिए आत्मनिर्भर भारत बनाना जरूरी है, और आत्मनिर्भर भारत बनाने में हमारे छोटे, लघु और कुटीर उद्योगों की बहुत बड़ी भागीदारी है। उन्होंने समझाया कि इसी कारण केंद्र सरकार MSMEs को और छोटे उद्योगों को लगातार बढ़ावा दे रही है।

पीएम मोदी ने कहा, “केंद्र में हमारी सरकार के तीसरे कार्यकाल में भारत, दुनिया की टॉप तीन अर्थव्यवस्था में शामिल होने वाला है। मैंने देशवासियों को गारंटी दी है कि आने वाले मेरे टर्म में, मैं भारत को दुनिया के पहले तीन देशों में लाकर खड़ा करूँगा। जिन्हें कभी किसी ने पूछा नहीं, उन्हे मोदी ने पूजा है! जिन्हें कभी किसी ने पूछा नहीं, उन्हें मोदी ने पूछा है!” पीएम मोदी सोलापुर के बाद कर्नाटक और तमिलनाडु के लिए निकल गए। 3 राज्यों में आज ुका धुआँधार कार्यक्रम है।

OYO में मोईन खान ने नाबालिग लड़की का किया रेप, फिर इस्लाम कबूलने का दबाव बनाया: MP में लव जिहाद, आरोपित गिरफ्तार

मध्य प्रदेश के इंदौर में 17 साल की नाबालिग लड़की से रेप करने वाले मोईन खान को पुलिस ने गिरफ्तार करके जेल भेज दिया है। आरोप है कि मोईन खान ने पहले तो नाबालिग से रेप किया, फिर उसका वीडियो बनाया और बाद में ब्लैकमेल करके लड़की पर इस्लाम कबूलने का दबाव बनाने लगा। मोईन ने पीड़िता के मन में इतना खौफ भर दिया था कि वो अपने घर से निकलने से भी डरती थी

पूरा मामला के इंदौर के परदेशीपुरा थाने का है। लड़की के पिता ने इस संबंध में लाल गली निवासी मोईन खान के खिलाफ शिकायत दी थी। इसके बाद पुलिस ने केस को रेप, पॉक्सो एक्ट और लवजिहाद की धाराओं में दर्ज किया। फिर नाबालिग लड़की से बंद कमरे में महिला पुलिस अधिकारियों ने बयान लिए। छानबीन के बाद आरोपित को हिरासत में लिया गया और 14 जनवरी, 2024 को कोर्ट में पेश करने के बाद उसे जेल भेज दिया गया।

जानकारी के अनुसार, लड़की के पिता ने पुलिस में दर्ज अपनी शिकायत में बताया था कि उनकी 12 वीं में पढ़ने वाली लड़की घर में लंबे वक्त से गुमसुम रहती थी। पूछने पर पता चला कि मोईन खान उसे परेशान कर रहा है। पिता का ये भी आरोप था कि उनकी नाबालिग बेटी को आरोपित ने अपने प्रेम जाल में फँसाया था। 17 सितंबर, 2023 को मोईन उनकी बेटी को उसके बर्थडे के दो महीने बाद परदेशीपुरा के बिचौली मर्दाना इलाके के ओयो होटल में लेकर गया था। वहाँ उसने उनकी नाबालिग बेटी से जबरन शारीरिक संबंध बनाए।

जब बेटी ने विरोध किया तो जान से मारने की धमकी दी और संबंध बनाने का वीडियो बनाया। मोईन खान पर उन्होंने ये भी आरोप लगाया कि उसने उनकी बेटी के इस वीडियो को सोशल मीडिया में वायरल करने की धमकी भी दी थी और घर छोड़ते वक्त उसे दोबारा मिलने का दबाव बनाया था। साथ ही इस्लाम कबूलने को कहा था।

लड़की के पिता के अनुसार, जब वो इस संबंध में शिकायत करने गए तो काफी देर उनकी सुनवाई नहीं हुई। बाद में हिंदू समूहों के विरोध के बाद पीड़ित नाबालिग लड़की के परिवारवालों की बात पुलिस ने सुनी गई। हिंदू कार्यकर्ताओं ने दावा किया है कि मोईन खान ने लड़की के पिता के खाते से 25,000 रुपए उड़ा लिए थे। इसके बाद भी उसने लड़की को बदनाम करने के लिए वीडियो बनाया।

उन्होंने आगे आरोप लगाया कि लड़की के पिता से मोईन खान ने और 5 लाख रुपए की माँग की थी। इसके साथ ही आरोपित ने उनकी नाबालिग बेटी पर इस्लाम कबूल करने के लिए मजबूर कर लव जिहाद को अंजाम दिया था।

पाकिस्तानियों के कहने पर नेहरू हटवा रहे थे रामलला को, जिस ऑफिसर ने कॉन्ग्रेसी PM-CM दोनों को दिखाया ठेंगा… उन्हें रात में निकाल दिया सरकारी आवास से

आज रामलला के आगमन से पहले केंद्र सरकार और प्रदेश सरकार में जो उत्साह दिख रहा है वैसा पहले कभी किसी सरकार का नहीं था। एक समय था जब केंद्र की नेहरू सरकार ने उत्तर प्रदेश की सरकार को कहा था कैसे भी करके रामलला की मूर्ति हटवाई जाए। 1949 के इस वाकये का जिक्र 2024 में किया है पूर्व केंद्रीय संस्कृति सचिव राघवेंद्र सिंह ने

उन्होंने बताया कि कैसे 1949 में रामलला की मूर्ति हटाने के लिए केंद्र ने यूपी सरकार को आदेश दिए थे, जिसकी वजह से उनके दादाजी, गुरु दत्त सिंह जो कि तत्कालीन फैजाबाद (अब अयोध्या), सिटी मजिस्ट्रेट और एडिशनल डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट थे, उन्हें बहुत दबाव झेलना पड़ा था।

वह बताते हैं कि उस समय यूपी के मुख्मंत्री गोविंद वल्लभ पंत थे। बाबरी ढाँचे में रामलला की मूर्ति प्रकट होने से हर जगह इसकी बात थी। इसी बीच पाकिस्तान ने अपने रेडियो पर खबर चलाई कि विभाजन के बाद समुदाय विशेष की जो जगहें खाली थीं उसपर हिंदू कब्जा कर रहे हैं। इस खबर से नेहरू सरकार को काफी फर्क पड़ा। उन्होंने वल्लभ सरकार से रामलला की मूर्ति हटाने को सुनिश्चित करने को कहा था।

इसके बाद तत्कालीन फैजाबाद (अब अयोध्या), सिटी मजिस्ट्रेट गुरुदत्त ने इस मामले पर संज्ञान तो लिया लेकिन जैसा कि सरकार चाहती थी कि 22-23 दिसंबर 1949 को प्रकट हुई मूर्ति को तुरंत हटाया जाए, वैसा नहीं हो सका। राघवेंद्र बताते हैं कि ये सब सिर्फ इसलिए था क्योंकि पाकिस्तान ने अपने रेडियो से इस मामले पर खबर चला दी थी।

बाद में उनकी ये खबर आग की तरह फैली और दिल्ली तक पहुँची। राघवेंद्र बताते हैं कि केंद्र के निर्देश थे इसलिए राज्य सरकार रामलला की मूर्ति को कैसे भी हटवाना चाहती थी। वह कहते हैं,

“जब मेरे दादा ने इस पर अपने तरीके से रिपोर्ट किया तो यह उनके (सरकार के) खिलाफ गया। जब इस बारे में केंद्र सरकार को पता चला तो वहाँ से कुछ स्पष्ट निर्देश आए। केंद्र से मिले निर्देश के आधार पर तत्कालीन यूपी के सीएम गोविंद बल्लभ पंत ने तत्काल जिला मुख्यालय फैजाबाद को संदेशा भिजवाया।”

इसके बाद जब पंत फैजाबाद (अब अयोध्या) आए। उन्हें लेने गुरुदत्त पहुँचे और रास्ते में ही उन्हें मिलकर ये समझाया कि रामभक्त केंद्र और यूपी सरकार की मंशा जान चुके हैं। ऐसे में मूर्ति को नहीं हटाया जा सकता। अगर हुआ तो कानून व्यवस्था बिगड़ेगी।

उन्होंने पंत को सारी संभव स्थिति समझाई और ये भी कहा कि फैजाबाद में उनका रुकना ठीक नहीं हो सकता। उनकी बात पर बहस गर्म हो गई। पंत को लगा कि न तो गुरु दत्त उनकी सुरक्षा की जिम्मेदारी ले रहे हैं और न ही रामलला की मूर्ति हटा रहे हैं।

गुरुदत्त समझ गए थे सही बात कहने के बदले उन्हें गंभीर परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं। मगर फिर भी उन्होंने सीएम को उस जगह जाने की इजाजत नहीं दी। बाद में उन्होंने अपने आप इस्तीफा दे दिया।

इन फैसलों के बाद उन्होंने इस्तीफा दिया। उनके इस्तीफा देते ही बाद में उनका सामान देर रात उनके सरकारी आवास से निकालकर रोड पर रख दिया। उन्होंने सारी रात रोड पर बिताई। इसके बाद वो अपने दोस्त भगवती बाबू के के फ्लैट पर रहे। पूर्व सचिव कहते हैं कि उनके दादा ने अपने निर्णय की यह कीमत चुकाई थी। लेकिन आज वो पीछे मुड़कर देखते हैं और सोचते हैं तो लगता है कि ये कितना बहादुरी से भरा और जरूरी निर्णय था।

सीन1: भगवान राम मांसाहारी | सीन2: ‘जय श्री राम’ लिख कर माफी – बुरके में नमाज पढ़ बिरयानी बनाने वाली ब्राह्मण लड़की ‘नयनतारा’ ने माँगी माफी

फिल्म ‘अन्नपूर्णी (Annapoorani)’ की अभिनेत्री नयनतारा ने ‘जय श्री राम’ लिख कर माफी माँगी है। उनकी इस फिल्म पर धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुँचाने के आरोप लगे थे। यह फिल्म भगवान राम को मांसाहारी बताने के साथ ही कुकिंग शो में बिरयानी बनाने से पहले नमाज पढ़ती ब्राह्मण लड़की जैसे सीन की वजह से विवादों में घिर गई थी।

‘जवान’ फिल्म में शाहरुख खान के साथ नजर आ चुकी नयनतारा ने अपने इंस्टा अकाउंट पर लिखा है कि उनका इरादा किसी को भी ठेस पहुँचाने का नहीं था।

विवाद के बाद इस फिल्म को ओटीटी प्लेटफॉर्म नेटफ्लिक्स से हटा लिया गया था। इस फिल्म पर FIR तक दर्ज की गई है। सोशल मीडिया पर भी इस फिल्म को काफी विरोध झेलना पड़ा था। नयनतारा ने अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर माफीनामा लिखने से पहले सबसे ऊपर जय श्री राम लिखा है।

इसके आगे उन्होंने लिखा, “मैं इस नोट को बहुत भारी मन से और सच्ची इच्छा के साथ हमारी फिल्म ‘अन्नपूर्णी’ को लेकर पैदा हुए हालात को लेकर लिख रही हूँ। मैं सभी देशवासियों से कहना चाहूँगी कि मेरा और मेरी टीम का इरादा किसी की भी भावनाओं को ठेस पहुँचाने का नहीं था।”

उन्होंने आगे लिखा, “हम इस मुद्दे की गंभीरता से अच्छी तरह से वाकिफ हैं। एक ऐसी इंसान होने के नाते, जो पूरी तरह से भगवान में विश्वास करती है और देश भर के मंदिरों में अक्सर जाती है, मैं जानबूझ कर ऐसा कभी नहीं करूँगी।”

नयनतारा ने आगे लिखा, “मेरी वजह से जिस किसी की भी भावनाओं को ठेस पहुँची हो, मैं उन सभी से दिल से पूरी संजीदगी से माफी माँगती हूँ। बीते दो दशकों में मेरे फिल्म इंडस्ट्री के सफर में मेरा एक ही इरादा रहा है, सकारात्मकता फैलाने का और एक-दूसरे से सीखने का।”

अन्नपूर्णी (Annapoorani) में आपत्तिजनक क्या-क्या?

1 दिसंबर 2023 को सिनेमाघरों में और 29 दिसंबर 2023 को नेटफ्लिक्स पर रिलीज़ हुई थी यह फिल्म। इस फिल्म की कहानी में हिंदुओं की धार्मिक भावनाओं को आहत किया गया था। इसको लेकर सोशल मीडिया पर लोग आलोचना कर रहे थे।

इस फिल्म में नयनतारा (Nayanthara) एक ऐसी महिला का किरदार निभाती है, जो एक मंदिर में पुजारी की बेटी होती है। फिल्म के कुछ सीन में नयनतारा को मंदिर के कपड़ों में दिखाया गया है। लेकिन बिरयानी बनाने से पहले इसी ब्राह्मण लड़की को बुरका पहन कर नमाज पढ़ते भी दिखाया है। साथ ही भगवान राम को मांसाहारी बताया गया है।

इस फिल्म के खिलाफ शिकायत करने वाले लोगों ने इसे हिंदू धर्म के परंपराओं का अपमान बताया था। इस फिल्म के खिलाफ पुलिस में भी शिकायत दर्ज की गई थी। फिल्म निर्माताओं ने आलोचनाओं के बाद माफी माँगी थी और कहा था कि वो इसे एडिट कर फिर से रिलीज करेंगे।

जब सांसद ही नहीं रहीं तो बंगला किस बात के लिए मिले, हाई कोर्ट ने ठुकराई महुआ की याचिका, खाली करना होगा बंगला

संसद से निष्कासित तृणमूल कॉन्ग्रेस की पूर्व सांसद महुआ मोइत्रा को दिल्ली हाई कोर्ट से बड़ा झटका लगा है। दिल्ली हाई कोर्ट ने महुआ को दिल्ली का सरकारी बंगला खाली करने के मामले में कोई भी राहत देने से इंकार कर दिया है। इससे पहले 16 जनवरी, 2024 को महुआ को घर खाली करने का नोटिस मिला था।

दिल्ली हाई कोर्ट ने महुआ की याचिका को ख़ारिज करते हुए कहा, “याचिकाकर्ता को सरकारी बंगला इसलिए मिला था क्योंकि वह सांसद थीं। उनके संसद से निकाले जाने के बाद उनका यह पद चला गया है। कोर्ट के पास ऐसा कोई नियम नहीं है, जो किसी सांसद के संसद से निकाले जाने के बाद उसके सरकारी घर में रहने सम्बन्धी मसलों से निपटता हो।”

दिल्ली हाई कोर्ट ने कहा कि उनके संसद से निकाले जाने पर सुप्रीम कोर्ट ने अभी रोक नहीं लगाई है, इसलिए बंगले से उनको बाहर किए जाने के मामले में उन्हें वह कोई भी राहत संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत नहीं दे सकता। उनकी सुप्रीम कोर्ट में लगाई गई याचिका की सुनवाई 24 जनवरी, 2024 को होगी।

संपदा निदेशालय (डायरेक्टरेट ऑफ एस्टेट्स) ने मंगलवार (16 जनवरी 2024) को उन्हें सरकारी बंगले से बेदखल करने का नोटिस जारी किया था। केंद्रीय आवास और शहरी मामलों के मंत्रालय से मिली जानकारी के मुताबिक, पूर्व टीएमसी एमपी महुआ मोइत्रा से सांसद के तौर पर उन्हें आवंटित हुए सरकारी बंगले को तुरंत खाली करने को कहा गया था।

बताते चलें कि उन्हें 8 दिसंबर, 2023 को लोकसभा से निष्कासित कर दिया गया था। इसके बाद संसद की हाउसिंग कमिटी ने महुआ को एक महीने के अंदर 7 जनवरी 2024 तक बंगला खाली करने को कहा था। बकायदा महुआ को 11 दिसंबर 2023 को केंद्रीय आवास एवं शहरी विकास मंत्रालय ने पत्र भेजकर इस आदेश से अवगत कराया था। इसके बाद 12 दिसंबर को उन्हें तीसरा नोटिस दिया गया, लेकिन इस आदेश को चुनौती देने के लिए वो 18 दिसंबर 2023 को दिल्ली हाई कोर्ट जा पहुँची थीं।

दिल्ली HC में डाली गई याचिका में महुआ ने कहा था, ”उन्हें (महुआ को) सरकारी घर खाली करने का आदेश वक्त से पहले दिया गया है, क्योंकि याचिकाकर्ता के निष्कासन की वैधता अभी देश के सुप्रीम कोर्ट के सामने लंबित है।”

दिल्ली हाई कोर्ट को दी गई याचिका में महुआ ने डायरेक्टरेट ऑफ एस्टेट्स के 11 दिसंबर के आदेश को रद्द करने का अनुरोध किया था। उन्होंने कहा कि अगर ऐसा नहीं हो सकता तो कम से कम उन्हें उनके सरकारी आवास में वैकल्पिक तौर पर 2024 लोकसभा चुनाव के नतीजे आने तक रहने की मंजूरी दी जाए।

हाई कोर्ट को दी गई याचिका में टीएमसी नेता महुआ ने ये तक कह डाला था, “मुझे 2019 के आम चुनावों में पश्चिम बंगाल के कृष्णानगर निर्वाचन क्षेत्र से चुनकर पहली बार लोकसभा भेजा गया था। टीएमसी ने उन्हें 2024 के लोकसभा चुनावों के लिए भी वहाँ से अपना उम्मीदवार बनाया है।”

हाई कोर्ट ने उन्हें 4 जनवरी 2024 को सुनवाई का वक्त दिया था। महुआ की अर्जी पर सुनवाई के बाद जज ने बताया कि केंद्र सरकार की संपत्ति के लिए निदेशालय में आवेदन किया जाना चाहिए, कोर्ट इसमें कुछ नहीं कर सकता।

भए प्रगट कृपाला दीनदयाला… रामलला का प्रथम दरश पाकर भाव-विभोर हुए रामभक्त, गर्भगृह में विराजमान हुए प्रभु

अयोध्या में राम मंदिर में प्राण-प्रतिष्ठा से पहले एक सुखद तस्वीर रामभक्तों के लिए सामने आई है। ये तस्वीर है रामलला की मूर्ति के प्रथम दर्शन की। बताया जा रहा है कि भगवान राम को गर्भगृह में विराजमान कर दिया गया है। इस पूरी प्रक्रिया में पूरे चार घंटे लगे।

पहले मूर्ति को अनाज, फल और सुगंधित जल में काफी देर रखा गया था। उसके बाद रीति-रिवाज के साथ इसे गर्भग्रह में विराजमान करवाया गया। जब प्रभु अपने स्थान पहुँच गए तब उनकी पहली झलक सामने आई है।

प्रभु की मूर्ति को वस्त्र से भी ढका गया है। प्राण-प्रतिष्ठा वाले दिन सबको देखने को मिलेगी। हालाँकि रामभक्त इस तस्वीर को देखकर भी बेहद भावुक हैं। हर कोई अपने तरह से इस मूर्ति को देख भावनाएँ व्यक्त कर रहा है।

लोग लिख रहे हैं

भए प्रगट कृपाला दीनदयाला,
कौसल्या हितकारी ।
हरषित महतारी, मुनि मन हारी,
अद्भुत रूप बिचारी।

इसी के साथ मालूम हो कि राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र के कोषाध्यक्ष गोविंद गिरी जी महाराज ने ये भी बताया है कि रामलला की पुरानी मूर्ति को भी 20 जनवरी को ही गर्भ ग्रह में स्थापित किया जाएगा क्योंकि वह भगवान की चल प्रतिमा है। इस तरह दोनों मूर्तियों से गर्भग्रह सुशोभित होगी।

बता दें कि रामलला की नई मूर्ति को बनाने वाले कर्नाटक अरुण योगीराज हैं। देश के लिए उन्होंने जो काम किया है उससे उनकी कला पर किसी को संदेह नहीं है। लेकिन, बस सब प्रभु को देखने के लिए लालायित हैं।

देश भर में दीवाली वाला माहौल है। 22 जनवरी को केंद्र ने इस कार्यक्रम के उपलक्ष्य में हर जगह हाफ डे की छुट्टी दे दी है। आदेश में कहा गया है कि दोपहर 2:30 बजे तक देश भर के सरकारी ऑफिस बंद रहेंगे। ये छुट्टी प्राण-प्रतिष्ठा कार्यक्रम को देखकर दी गई है।

इसके अलावा यूपी में तो इस दिन हर जगह छुट्टी ऐलान है। साथ ही शराब बेचने पर भी रोक है। कई जगह मीट माँस की दुकान खोलने से भी मना किया गया। यूपी के अलावा छत्तीसगढ़ और हरियाणा में भी प्राण प्रतिष्ठा वाले दिन स्कूल-कॉलेज बंद करने की बात है।

गौरतलब है कि रामलला की नई मूर्ति के गर्भग्रह में स्थापित होने से पहले पहले भगवान की एक छोटी मूर्ति को पालकी में विराजित करके मंदिर परिसर का भ्रमण कराया गया। शुरू में प्लान किया गया था कि इस मूर्ति को नगर भ्रमण करवाया जाएगा मगर फिर सुरक्षा व्यवस्था के चलते उस कार्यक्रम को रद्द किया गया और रामलला को मंदिर में घुमाकर उनके दर्शन हुए।