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कॉन्ग्रेस पर सुप्रीम कोर्ट के ‘न्याय’ का हथौड़ा: 40 साल पहले किया था सरकारी संसाधन का FREE उपयोग, अब देना होगा 1 करोड़ रुपया

सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार (19 जनवरी 2024) को एक महत्वपूर्ण फैसले में कॉन्ग्रेस को 1 करोड़ रुपए जमा कराने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने कहा कि पार्टी ने 1981 से 1989 तक राज्य की सत्ता में रहने के दौरान राजनीतिक रैलियों उत्तर प्रदेश राज्य पथ परिवहन निगम की बसों का इस्तेमाल किया गया था, जिसका भुगतान नहीं किया गया था।

सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस केवी विश्वनाथन की पीठ ने उत्तर प्रदेश कॉन्ग्रेस कमेटी (UPCC) की याचिका पर राज्य सरकार और उत्तर प्रदेश राज्य पथ परिवहन निगम (UPSRTC) को नोटिस जारी किए। कोर्ट ने कॉन्ग्रेस पार्टी को चार सप्ताह के भीतर एक करोड़ रुपए जमा करने का निर्देश दिया है।

वहीं, कॉन्ग्रेस की ओर से पेश वरिष्ठ वकील सलमान खुर्शीद ने कहा कि यह तय होना चाहिए कि इस मामले में किस हद तक सरकार की जिम्मेदारी बनेगी और किस हद तक राजनैतिक दल की। अगर राजनैतिक दल ने कॉन्ट्रैक्ट किया है तो उसे उस करार के आधार पर भुगतान करना चाहिए। उन्होंने तर्क दिया कि कुल 2.68 करोड़ रुपए की राशि विवादित है।

इस पर जस्टिस सूर्यकांत ने कहा, “राशि का विरोध करने के लिए यदि आप दीवानी मुकदमा दायर करते हैं तो निर्णय आने में 20-30 साल लगेंगे। उसके बाद पहली अपील, दूसरी अपील और अन्य कार्यवाही होगी। इसके बजाय, हम याचिकाकर्ता की वास्तविक देनदारी निर्धारित करने के लिए एक मध्यस्थ नियुक्त करने के बारे में सोच रहे हैं।”

पीठ ने कहा कि प्रामाणिकता स्थापित करने के लिए वह प्रदेश कॉन्ग्रेस को कुल बकाया की एक निश्चित राशि जमा करने का निर्देश देगी। पीठ ने कहा, “शुरुआत में हम आधी राशि जमा करने का आदेश देने के बारे में सोच रहे थे, लेकिन फिर हमने सोचा कि एक करोड़ रुपए प्रामाणिकता स्थापित करने के लिए पर्याप्त होंगे।”

दरअसल, उत्तर प्रदेश कॉन्ग्रेस ने साल 1998 में दायर एक रिट याचिका के सिलसिले में इलाहाबाद हाई कोर्ट द्वारा 5 अक्टूबर 2023 को दिए गए आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी। इसमें प्रदेश कॉन्ग्रेस ने लखनऊ सदर के तहसीलदार द्वारा जारी वसूली नोटिस को चुनौती दी थी।

यह कार्यवाही उत्तर प्रदेश राज्य पथ परिवहन निगम (UPSRTC) के प्रबंध निदेशक के कहने पर शुरू की गई थी। इसमें दावा किया गया था कि प्रदेश कॉन्ग्रेस पर 2.68 करोड़ रुपए (2,68,29,879.78 रुपए) की राशि बकाया है और वह इसे वसूलने का हकदार है।

हाईकोर्ट ने इसमें विभिन्न बिलों तथा UPSRTC के 2 अप्रैल 1981 के एक पत्र का संज्ञान लिया है। इस पत्र में कहा गया है कि 16 फरवरी 1981 को उत्तर प्रदेश कॉन्ग्रेस ने किसान रैली आयोजित की थी, जिसके लिए उसके बसों का इस्तेमाल किया गया था। इन बसों का किराया 6.21 लाख रुपए से अधिक का बकाया है।

इसी तरह 16 दिसंबर 1984 के एक अन्य पत्र में कहा गया था कि 19 नवंबर 1984 को दिवंगत प्रधानमंत्री इंदिरा गाँधी की अस्थियों को श्रद्धांजलि देने के लिए आने-जाने लोगों को वाहन उपलब्ध कराया गया था, जिसका किराया 8.69 लाख रुपए बाकी है। इस तरह इलाहाबाद हाई कोर्ट ने तीन महीने के भीतर 2.66 करोड़ रुपए भुगतान का निर्देश दिया था।

हाई कोर्ट ने उत्तर प्रदेश को निर्देश दिया था कि वह UPSRTC को देय तिथि से 5 प्रतिशत ब्याज के साथ तीन महीने की अवधि के भीतर 2.66 करोड़ रुपए का पूरा भुगतान करे। इलाहाबाद हाईकोर्ट के जज जस्टिस मनीष कुमार और जस्टिस विवेक चौधरी की पीठ ने फैसला सुनाते हुए कहा था कि कॉन्ग्रेस ने अपने राजनीतिक उद्देश्यों के लिए सरकारी बसों का इस्तेमाल किया था।

इस पर कॉन्ग्रेस ने अपनी याचिका में कहा था कि यह रकम राजनीतिक प्रतिशोध के तौर पर और याचिकाकर्ता को राजनीतिक दबाव में लाने के इरादे से वसूली जा रही है। इस पर अदालत ने कहा था कि परिवहन निगम ने उन्हें बिल दिए थे, लेकिन 25-30 सालों से भुगतान लंबित रखा गया। अदालत ने फटकार लगाते हुए कहा था कि यह कहते हुए बिल का भुगतान करने से नहीं बचा जा सकता है कि ये राजनीतिक बदला है।

‘मैं जाऊँगा अयोध्या, जिसको जो ऐक्शन लेना है ले…’: AAP सांसद हरभजन सिंह, प्राण प्रतिष्ठा का विरोध करने से दुखी कॉन्ग्रेस विधायक ने दिया इस्तीफा

अयोध्या में नवनिर्मित राम मंदिर में भगवान रामलला के विग्रह को स्थापित कर दिया है। विग्रह की प्राण प्रतिष्ठा 22 जनवरी 2024 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की उपस्थिति में होना है। इसको लेकर पूरे देश में उत्साह का माहौल है और पूरा देश राममय हो गया है। हालाँकि, विपक्षी दल भगवान को लेकर भी राजनीति करने से बाज नहीं आ रहे हैं। इसके परिणाम भी देखने को मिल रहे हैं।

आम आदमी पार्टी से राज्यसभा सांसद हरभजन सिंह ने राममंदिर को लेकर राजनीति ना करने की सलाह दी है। उन्होंने कहा कि ये सौभाग्य की बात है कि वर्तमान पीढ़ी के दौर में राम मंदिर में बन रहा है और इस मंदिर में सबको आशीर्वाद लेने के लिए जाना चाहिए। वहीं, गुजरात के कॉन्ग्रेस विधायक सीजे चावड़ा ने प्राण प्रतिष्ठा का न्यौता ठुकराने से दुखी होकर विधायकी से इस्तीफा दे दिया है।

पूर्व क्रिकेटर हरभजन सिंह ने कहा, “कौन क्या कहता है, ये अलग बात है। सही बात ये है कि ये जो मंदिर… धाम… बनने जा रहा है, ये हम सबका सौभाग्य है कि हमारे दौर में ये सब चीजें हो रही हैं। हमें वहाँ जाना चाहिए और आशीर्वाद लेना चाहिए। मैं तो यही कहूँगा कि कोई जाए या ना जाए, मेरी जो भगवान में आस्था है और मेरा जो यकीन है, मैं तो जरूर जाऊँगा।”

हरभजन सिंह ने आगे कहा, “कोई पार्टी जाए या ना जाए, मेरा अपना ये स्टैंड है कि मैं भगवान में विश्वास करता हूँ और वहाँ जरूर जाऊँगा। कॉन्ग्रेस को जाना है जाए, नहीं जाना है नहीं जाए… जो करना है करे। मेरे जाने से अगर किसी को कोई दिक्कत है तो उन्हें जो करना है करे। मेरा मानना है कि मैं जीवन में जो कुछ भी हूँ, ये उसकी (भगवान की) कृपा है और आशीर्वाद लेने जरूर पहुँचूँगा।”

ये सिर्फ आम आदमी पार्टी के सांसद का विचार नहीं है, बल्कि कॉन्ग्रेस पार्टी में ऐसे कई लोग हैं जो पार्टी की लाइन से हटकर अयोध्या जा रहे हैं और प्राण प्रतिष्ठा समारोह में भाग ले रहे हैं। इनमें प्रमुख नाम हिमाचल प्रदेश की कॉन्ग्रेस अध्यक्ष प्रतिभा सिंह और उनके मंत्री बेटे विक्रमादित्य सिंह भी प्रमुख हैं। वहीं, गुजरात के वरिष्ठ कॉन्ग्रेस नेता सीजे चावड़ा ने पार्टी के निर्णय के विरोध में विधानसभा की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया है।

गुजरात के विजापुर निर्वाचन क्षेत्र से तीन बार विधायक चावड़ा ने शुक्रवार (19 जनवरी 2024) को गाँधीनगर में विधानसभा अध्यक्ष शंकर चौधरी को अपना इस्तीफा सौंप दिया। अपने इस्तीफे में चावड़ा ने कहा कि अयोध्या में प्राण प्रतिष्ठा को लेकर पूरे देश में खुशी का माहौल है, लेकिन कॉन्ग्रेस इसका बहिष्कार कर रही है। इससे वे परेशान हैं।

सीजे चावड़ा ने कहा, “मैंने कॉन्ग्रेस से इस्तीफा दे रहा हूँ। मैंने 25 साल तक कॉन्ग्रेस में काम किया है। इसका कारण यह है कि जब पूरे देश के लोग राम मंदिर में प्राण प्रतिष्ठा को लेकर खुश हैं। हर तरफ खुशी की लहर है। उस खुशी की लहर का हिस्सा बनने के बजाय इस पार्टी (कॉन्ग्रेस) ने जो रुख अपनाया है, वही परेशान होने का कारण है।”

पीएम मोदी और गृह मंत्री अमित शाह की तारीफ करते हुए चावड़ा ने आगे कहा, “हमें गुजरात के दो बड़े नेताओं पीएम मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के कार्यों और नीतियों का समर्थन करना चाहिए, लेकिन कॉन्ग्रेस में रहते हुए मैं ऐसा नहीं कर पाता। इसलिए मैंने इस्तीफा दे दिया है।” चावड़ा के इस्तीफे के बाद 182 सदस्यीय गुजरात विधानसभा में कॉन्ग्रेस के विधायकों की संख्या अब सिर्फ 15 रह गई है।

चावड़ा ने जिस तरह का संकेत दिया है, उससे माना जा रहा है कि वे भाजपा में शामिल हो सकते हैं। हालाँकि, अभी तक इसकी पुष्टि नहीं हुई है। इससे पहले आणंद जिले के खंभात से कॉन्ग्रेस विधायक चिराग पटेल ने भी विधानसभा से इस्तीफा दे दिया था। बता दें कि लोकसभा चुनावों को लेकर दिल्ली में आम आदमी पार्टी और कॉन्ग्रेस के बीच सीटों के बँटवारे पर सहमति बन जाने की खबर आ रही है।

कोचिंग कल्चर कैंसल: 12वीं पास, 16+ की उम्र के बच्चों का ही एडमिशन, सक्सेस के फर्जी दावे पर लाइसेंस रद्द, जानें सरकार की नई गाइडलाइन्स

भारत सरकार ने कोचिंग संस्थानों पर नकेल कसने की तैयारी कर ली है। कोचिंग सेंटर्स से जुड़े हादसों, सफलता की उम्मीद तले दबे छात्र-छात्राओं द्वारा आत्मघाती कदम उठाने जैसी घटनाओं की बाढ़ आने के बाद केंद्र सरकार ने नई गाइडलाइन्स जारी की है। इन गाइडलाइन्स के मुताबिक, कोचिंग संस्थानों में अब 16 साल से कम उम्र के विद्यार्थियों (छात्र और छात्राएँ) को एंट्री नहीं दी जा सकेगी। यही नहीं, 12वीं पास करने के बाद ही किसी विद्यार्थी को प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी के लिए कोचिंग इंस्टीट्यूट में एंट्री दी जा सकेगी। इसके साथ ही केंद्र सरकार ने कई अन्य नियम भी लागू किए हैं, जिनके बारे में हम विस्तार से बता रहे हैं।

भारत सरकार द्वारा जारी गाइडलाइन्स के मुताबिक, अब से केवल 16 वर्ष से अधिक आयु के विद्यार्थी या कक्षा 12 की बोर्ड परीक्षा उत्तीर्ण किए हुए विद्यार्थी ही कोचिंग सेंटरों में एंट्री ले सकेंगे। इससे विद्यार्थियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी।

कई कोचिंग सेंटरों को अपने सिलेबस और फीस को नई गाइडलाइन्स के हिसाब से अपडेट करना होगा। इससे कुछ कोचिंग सेंटरों को नुकसान हो सकता है। हालाँकि, यह विद्यार्थियों के लिए एक सकारात्मक कदम है। इससे विद्यार्थियों की सुरक्षा और कल्याण सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी। इसके अलावा, कोचिंग सेंटरों को प्रतियोगी परीक्षाओं में रैंक या अंकों के बारे में झूठे दावे करने से रोका जाएगा। इससे विद्यार्थियों को धोखा देने से बचाया जा सकेगा।

सरकार ने 11 पन्नों की गाइडलाइन्स में कोचिंग सेंटरों को भी परिभाषित किया है। इसके मुताबिक, इन गाइडलाइन्स के मानकों के अनुसार, ‘कोचिंग सेंटर’ किसी व्यक्ति द्वारा संचालित ऐसी सुविधा है, जो 50 से अधिक विद्यार्थियों को प्रतियोगी परीक्षाओं, कॉलेज के सिलेबस या अन्य परीक्षाओं की तैयारी में मदद करते हैं। ऐसे में सरकार ने अब फीस से लेकर पढ़ाई के घंटों तक को ध्यान में रखते हुए ये गाइडलाइन बनाई है, ताकि विद्यार्थियों पर बेवजह का दबाव न पड़ सके।

सरकार की गाइलाइन्स के मुताबिक, अब कोचिंग सेंटरों का रजिस्ट्रेशन अनिवार्य हो गया है। उन्हें फॉर्म, फीस इत्यादि की सही जानकारी देनी होगी। अगर कोचिंग सेंटर की कई शाखाएँ हैं, तो हर एक शाखा का रजिस्ट्रेशन कराना पड़ेगा। यही नहीं, शिक्षकों की पढ़ाई कम से कम स्नातक स्तर की होनी चाहिए। इसके साथ ही कोचिंग छोड़ने की स्थिति में फीस वापसी जैसे प्रावधान की भी जानकारी दी गई है।

अब कोचिंग सेंटरों को शिकायत दर्ज करने की भी व्यवस्था बनानी पड़ेगी। इसमें विद्यार्थी, उनके अभिभावक, कोचिंग सेंटर के शिक्षक भी अपनी शिकायत दर्ज करा सकेंगे। वहीं, कोचिंग सेंटर भी विद्यार्थियों या अभिभावकों के खिलाफ शिकायत दर्ज करा सकेंगे। इसकी जाँच सक्षम अधिकारी को 30 दिनों के भीतर पूरी करनी होगी।

गाइडलाइन्स के मुताबिक, अगर कोई विद्यार्थी कोचिंग सेंटर छोड़ता है, तो उसे 10 दिनों के भीतर कोचिंग सेंटर को फीस लौटानी पड़ेगी। विद्यार्थी अगर हॉस्टल में रहता है, तो उसके भी पैसे लौटाने पड़ेंगे। यही नहीं, अब विद्यार्थियों के लिए कोचिंग सेंटरों में प्रति विद्यार्थी जगह की भी व्यवस्था करनी पड़ेगी। आग से बचाव और बिल्डिंग की सिक्योरिटी की भी व्यवस्था करनी पड़ेगी। इन सेंटरों में फर्स्ट एड किट बॉक्स भी जरूरी है। सीसीटीवी कैमरों की मौजूदगी भी जरूरी कर दी गई है।

कोचिंग सेंटरों में छात्रों की रेगुलर पढ़ाई (कॉलेज-क्लास) के घंटे के दौरान कोचिंग की पढ़ाई का समय ओवरलैप नहीं करना चाहिए। इसके साथ ही सप्ताह में एक दिन की छुट्टी भी रखनी पड़ेगी।

सरकार की गाइलाइन्स के मुताबिक, अगर कोई कोचिंग संस्थान इन नियमों को तोड़ता है, तो उस पर जुर्माना भी लगाया जाएगा। पहली बार में ये जुर्माना 25 हजार रुपए का होगा, तो दूसरी बार में 1 लाख रुपए का जुर्माना लगाया जाएगा। यही नहीं, अगर ज्यादा बार नियम टूटे, तो कोचिंग सेंटर का रजिस्ट्रेशन ही रद्द कर दिया जाएगा।

बता दें कि हाल के समय में कई ऐसे मामले सामने आ चुके हैं, जिसमें प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे छात्रों ने दबाव के चलते आत्मघाती कदम उठाए हैं। वहीं, कई जगहों पर कोचिंग सेंटरों में आग लगने जैसी घटनाएँ भी सामने आई हैं। इसके अलावा छात्रों को झूठे सब्जबाग दिखाकर ठगने के भी कई मामले सामने आ चुके हैं। इन सब घटनाओं को देखते हुए केंद्र सरकार ने ये नई गाइड लाइन्स जारी की हैं।

गाड़ी पर लगा रखा था भगवान राम का झंडा, अयोध्या की कर रहे थे रेकी: ATS ने जिन 3 को पकड़ा उन्होंने खोल दिए खालिस्तानी साजिश के तार

यूपी ATS ने अयोध्या से 3 ऐसे लोगों को गिरफ्तार किया है, जो कनाडा में बैठे खालिस्तानी आतंकी के निर्देश पर अयोध्या की रेकी कर रहे थे। इसमें से एक आरोपित राजस्थान का चर्चित गैंगस्टर है, जिस पर कई केस दर्ज हैं। जिन्हें दबोचा गया है, उनके नाम प्रदीप पुनिया, अजीत कुमार शर्मा और शंकर लाल दुसाद है। इसमें से शंकर लाल दुसाद राजस्थान का गैंगस्टर है।

‘आज तक’ की रिपोर्ट के मुताबिक, तीनों बदमाश अयोध्या का चक्कर लगा रहे थे। उन्होंने अपनी स्कॉर्पियो गाड़ी पर भगवान राम का झंडा लगा रखा था, ताकि उन्हें पुलिस न रोके। तीनों में से एक गैंगरेस्टर शंकर लाल ने बताया कि उसने ऐसा कनाडा में बैठे खालिस्तानी आतंकी के निर्देश पर किया। यूपी एटीएस ने गुरुवार (18 जनवरी, 2024) को उन्हें अयोध्या में गिरफ्तार किया था।

पता चला है कि शंकर लाल कनाडा में छिपे बैठे खालिस्तानी हरमिंदर उर्फ लांडा से संपर्क में था। लांडा ने शंकर से कहा था कि खालिस्तानी आतंकी गुरपतवंत सिंह पन्नू से उसे निर्देश मिले हैं कि अयोध्या की जानकारी हासिल कर नक्शा बनाकर भेजा जाए। लांडा के कहने पर ही तीनों अयोध्या पहुँचे थे।

जाँच में पता चला है कि तीनों को अयोध्या में ही रुकना था और अपने आकाओं के निर्देश पर किसी बड़ी वारदात को अंजाम देना था। इनके पास से हरियाणा के नंबर प्लेट वाली फॉर्च्यूनर कार भी बरामद हुई है। वहीं, इन तीनों के पकड़े जाने के बाद ‘सिख फॉर जस्टिस’ (SFJ) नाम के प्रतिबंधित खालिस्तानी आतंकी संगठन के सरगना गुरपतवंत सिंह पन्नू ने एक ऑडियो जारी किया और तीनों बदमाशों का समर्थन किया। अब यूपी एटीएस इन बदमाशों के ‘सिख फॉर जस्टिस’ के कनेक्शन भी खंगाल रही है।

‘अमर उजाला’ की रिपोर्ट के मुताबिक, तीनों राजस्थान के सीकर के रहने वाले हैं। अब एटीएस के साथ ही आईबी भी इनसे पूछताछ कर रही है। यही नहीं, सीकर में इनके ठिकानों के बारे में राजस्थान पुलिस से भी मदद ली जा रही है। यूपी पुलिस के DG (कानून व्यवस्था) प्रशांत कुमार ने तीनों के पकड़े जाने की पुष्टि की है, साथ ही कहा है कि उनसे मिली जानकारियों की पुष्टि की जा रही है।

दलित लड़की को नग्न कर पीटा, जलाया… DMK विधायक के बेटे-बहू के घर काम करती थी नाबालिग, NEET क्लियर कर बनना चाहती है डॉक्टर

तमिलनाडु में DMK नेता और विधायक I करुणानिधि के बेटे एंटो मथिवानन और उनकी पत्नी पर गंभीर आरोप लगे हैं। दोनों पर अपनी घरेलू सहायिका पर अत्याचार करने, प्रताड़ित करने, मारने, जलाने जैसे आरोप लगे हैं, साथ ही उसके कोई मेडिकल हेल्प न देने का भी आरोप है। ये आरोप 18 साल की लड़की ने लगाए है, जो उनके घर पर 16 हजार रुपए प्रति माह पर घरेलू सहायिका का काम करती थी। लड़की अनुसूचित जाति से आती है और 12वीं की पढ़ाई के बाद नीट की कोचिंग का खर्च उठा सके, इसलिए घरेलू सहायिका के तौर पर काम कर रही थी।

ये मामला चेन्नई का है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, कल्लाकुरिची जिले के थिरुंगुंद्रम गाँव की रहने वाली 18 साल की लड़की ने ये आरोप लगाए हैं। उसने कहा है कि अप्रैल 2023 में उसे एजेंसी के माध्यम से एंटो मथिवानन के घर पर काम के लिए रखा गया था। ये लोग बात-बात पर विधायक का बेटा-बहू होने का धौंस दिखाते थे और काम में छोटी सी भी गलती होने पर उसकी पिटाई करते हैं।

लड़की का आरोप है कि विधायक करुणानिधि की बहू मर्लिना एन ने उसकी पिटाई के बाद उसका फोन भी छीन लिया। लड़की ने कहा कि उसे काम छोड़ना है, तो उन्होंने इनकार कर दिया। लड़की पढ़ाई-लिखाई में अच्छी है और 12वीं की परीक्षा में 70 प्रतिशत से ज्यादा अंक ला चुकी है। उसकी इच्छा है कि वो NEET पास करके MBBS की पढ़ाई करे और डॉक्टर बने।

‘इंडियन एक्सप्रेस’ की रिपोर्ट के मुताबिक, डीजीपी को दिए गए शिकायत में लड़की ने बताया है कि मर्लिना ने उसे निर्वस्त्र किया, उसे पीटा और पानी में मिर्ची डालकर पिलाया। यही नहीं, एंटो मथिवानन ने भी उसे पीटा। उसे काम के पैसे भी नहीं दिए गए और किसी को बताने पर विधायक के बेटे-बहू होने की धौंस दी गई। वो ये सब सहती रही। लेकिन 15 जनवरी को जब पोंगल के मौके पर घर पहुँची, तब जाकर उसकी चोट के बारे में घरवालों को पता चला। इसके बाद 16 जनवरी को सरकारी अस्पताल से डॉक्टर ने पुलिस को सूचना दी और शिकायत दर्ज कराई।

इस मामले में नीलांगराई की महिला पुलिस ने अस्पताल पहुँचकर बच्ची से पूछताछ की, तब जाकर ये मामला सामने आया। इस मामले में लड़की का एक वीडियो भी सामने आया है, जिसमें वो अपने ऊपर हुए अत्याचारों को बता रही है। अब इस मामले में एविडेंस नाम के एनजीओ ने भी हस्तक्षेप किया है और डीजीपी के पास शिकायत भेजी है। बताया गया है कि लड़की की आँखों के ऊपर, माथे पर चोट के निशान पाए गए हैं। साथ ही उसके दोनों हाथ भी जले हुए हैं।

शंख, चक्र, गदा, सूर्य, स्वस्तिक और ॐ से लेकर दशावतार तक: कमल पर विराजमान हैं धर्नुधारी भगवान राम, चरणों में विराजमान हैं गरुड़ और हनुमान

अयोध्या में सोमवार (22 जनवरी, 2024) को निर्माणाधीन भव्य राम मंदिर के गर्भगृह में रामलला की प्राण प्रतिष्ठा होनी है। उससे पहले उस प्रतिमा की तस्वीर भी सामने आ गई है, जिसे कर्नाटक के मूर्तिकार अरुण योगीराज ने गढ़ा है। ये प्रतिमा न सिर्फ मनमोहक है, बल्कि इसे बनाने में शास्त्रों का भी पूरा ध्यान रखा गया है। प्रतिमा में दिख रहे रामलला 5 वर्ष के है, अतः ये भगवान श्रीराम के बाल स्वरूप की मूर्ति है। उनके चारों तरफ आभामंडल को भी प्रतीकात्मक रूप से दर्शाया गया है।

इसे बनाने के लिए एक ही कृष्णशिला पत्थर का उपयोग किया गया है। 22 जनवरी को जब प्राण प्रतिष्ठा होगी, तब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी वैदिक रीति-रिवाजों के साथ आँखों से पट्टी हटाएँगे और सोने की सलाई से काजल भी लगाएँगे। इसके बाद रामलला को शीशा दिखाया जाएगा। इस मूर्ति की लंबाई 4.24 फ़ीट ऊँची है। उनके मस्तक के ऊपर स्वस्तिक, ॐ, चक्र, गदा और भगवान सूर्य सुशोभित हैं। मूर्ति की दाईं हाथ की तरफ मत्स्य, कूर्म, वराह, नृसिंह और वामन अवतार को दर्शाया गया है।

वहीं बाईं तरफ परशुराम, राम, कृष्ण, बुद्ध और कल्कि को दिखाया गया है। इस तरह भगवान विष्णु के दशावतार पूरे होते हैं। प्रभु के चरण के नीचे कमल का फूल है। वहीं नीचे दाईं तरफ बजरंग बली हैं। बाईं तरफ नीचे पक्षीराज गरुड़ हैं, जिन्हें श्रीहरि का वाहन माना जाता है। उक्त प्रतिमा का वजन 200 किलोग्राम है। इसकी चौड़ाई 3 फ़ीट है। प्रतिमा को क्रेन से उठा कर गर्भगृह में स्थापित किया गया था। भगवान के बाएँ हाथ में धनुष-बाण है। उन्हें सोने का मुकुट पहनाया जाएगा।

मैसूर राजघराने के कलाकार परिवारों से आने वाले 37 वर्षीय अरुण योगीराज 2008 में मैसूर विश्वविद्यालय से MBA किया और एक निजी कंपनी में काम करने के बाद वो वापस अपने परिवारिक पेशे में लौटे, क्योंकि बचपन से उनका यही शौक था। केदारनाथ में स्थापित जगद्गुरु शंकराचार्य की प्रतिमा और दिल्ली के इंडिया गेट पर बनी नेताजी सुभाष चंद्र बोस की प्रतिमा उन्होंने ही बनाई थी। रामलला की प्रतिमा को देख कर हर हिन्दू भाव-विह्वल है। 500 वर्षों के संघर्ष एवं बलिदानों के बाद ये मौका आया है।

गले में कैंची, सर पर हथौड़ा, प्राइवेट पार्ट में पेचकस… बीवी ने नहीं दिए ₹30 हजार तो इमरान ने मार डाला, हैदराबाद की कोर्ट ने सुनाई मौत की सजा

हैदराबाद की एक अदालत ने 38 साल के इमरान उल हक को मौत की सजा सुनाई है। उसने जनवरी 2019 में बेरहमी से अपनी बीवी की हत्या कर दी थी। अदालत ने इसे ‘रेयरेस्ट ऑफ रेयर’ केस मानते हुए कहा कि इस मामले में क्रूरता की सारी हदें पार की गई।

अतिरिक्त मेट्रोपॉलिटन सत्र न्यायाधीश सीवीएस साई भूपति ने 18 जनवरी 2024 को यह फैसला सुनाया। उन्होंने इमरान पर 10 हजार रुपए का जुर्माना भी लगाया। पेशे से कार चालक ने 30 हजार रुपए नहीं देने पर बीवी नसीमा अख्तर की हत्या की थी।

हैदराबाद के पुलिस उपायुक्त (दक्षिण क्षेत्र) पी साई चैतन्य ने बताया कि यह जघन्य हत्या का मामला है। इमरान उल हक अपनी बीवी नसीमा को छोटी-छोटी बातों पर प्रताड़ित करता था। वह दहेज की माँग करता था। वह कार खरीदने के लिए बीवी से 30 हजार रुपए की माँग कर रहा था।

6 जनवरी 2019 को हक ने अपनी बीवी के गले पर कैंची से वार किया। फिर उसके सिर पर हथौड़ा मारा। मौके से भागने से पहले उसने बीवी के प्राइवेट पार्ट्स में स्क्रू डाइवर डाल दिया था। इस घटना के बाद पुलिस ने इमरान के खिलाफ हक भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 302 (हत्या) और 498 ए के तहत केस दर्ज किया था।

इमरान उल हक हैदराबाद में तालाब कट्टा के पास अमन नगर-बी भवानी नगर का रहने वाला है। वह बीवी नसीमा अख्तर को शारीरिक और मानसिक रूप से प्रताड़ित करता था। हक के ससुराल वालों उसकी दूसरी निकाह का भी विरोध कर रहे थे। दूसरी निकाह के बाद नसीमा के परिजनों ने उसे आर्थिक मदद देना बंद कर दिया था। इससे उसे पैसे की किल्लत होने लगी थी।

6 जनवरी 2019 की इमरान के बच्चे अपने ननिहाल गए थे। उसने बीवी नसीमा से कहा कि उसे भूख लगी है वो उसके लिए रोटी बना दे। नसीमा ने उससे कहा कि उसे उसकी अम्मी बुला रही है वो वापस आकर खाना बना देगी। इससे इमरान नाराज हो गया। लौटकर जब नसीम रोटी बनाने लगी। इस बीच हक ने उसे मारने के लिए कैंची, हथौड़ा और एक स्क्रू ड्राइवर बेडरूम में रख लिया।

नसीमा जब खाना देने आई तो हक उससे जिस्मानी रिश्ते बनाने लगा। इसी दौरान उसने कैंची उसके गले में घोंप दी। उसकी आँखों पर वार किया। उसके सिर पर हथौड़े से वार किया। आखिर में उसके प्राइवेट पार्ट में पेचकस डालकर फरार हो गया। दूसरी बीवी के घर जाकर उसने खून से सने अपने कपड़े बदले थे।

जस्टिस गोगोई, चंद्रचूड़, बोबडे, अब्दुल नजीर, भूषण… सुप्रीम कोर्ट से सुनाया था राम मंदिर वाला फैसला, अब रामलला का साक्षी बनने का मिला न्योता

राम जन्मभूमि केस में ऐतिहासिक फैसला सुनाने वाली सुप्रीम कोर्ट की संवैधानिक पीठ के पाँचों जजों को प्राण प्रतिष्ठा समारोह का आमंत्रण दिया गया है। उस समय चीफ जस्टिस रहे रंजन गोगोई ने इस बेंच की अगुवाई की थी। बाकी के अन्य जजों में जस्टिस अशोक भूषण, जस्टिस एस ए बोबले, जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ (मौजूदा CJI) और जस्टिस सैय्यद अब्दुल नजीर के नाम शामिल हैं।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, उत्तर प्रदेश सरकार ने सुप्रीम कोर्ट की संवैधानिक पीठ के सदस्य रहे इन जजों को राजकीय अतिथि के तौर पर आमंत्रित किया है। इस बीच, 55 पन्नों की एक लिस्ट सामने आई है, जिसमें आमंत्रित माननीयों के नाम लिखे गए हैं। इस लिस्ट के मुताबिक, जस्टिस रंजन गोगोई, जस्टिस अशोक भूषण, जस्टिस एसए बोबले, जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ और जस्टिस सैय्यद अब्दुल नजीर को वीआईपी मेहमानों में रखा गया है। इसके अलावा पूर्व मुख्य न्यायाधीशों, न्यायाधीशों और शीर्ष वकीलों सहित 50 से ज्यादा न्यायविदों को भी निमंत्रण भेजा गया है।

अतिथियों में जस्टिस UU ललित, जस्टिस जी एस खेहर, जस्टिस डी के जैन, जस्टिस ज्ञान सुधा मिश्रा, जस्टिस हेमंत गुप्ता, जस्टिस चेलमेश्वर, जस्टिस रामा सुब्रमण्यम, जस्टिस के जी बालकृष्णन, जस्टिस अनिल दवे, जस्टिस कृष्ण मुरारी, जस्टिस एम के शर्मा, जस्टिस आदर्श गोयल, जस्टिस वी एन खरे शामिल का है। आमंत्रित अतिथियों में अयोध्या केस की सुनवाई से जुड़े वकील के परासरन, हरिशंकर जैन, विष्णु शंकर जैन, सीएस वैद्यनाथन के अलावा महेश जेठमलानी, सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता, पूर्व अटॉर्नी जनरल के के वेणुगोपाल, मुकुल रोहतगी के नाम भी शामिल हैं।

बता दें कि 9 नवंबर, 2019 को सुप्रीम कोर्ट की संवैधानिक पीठ में शामिल पाँच जजों ने राम जन्मभूमि भूमि को हिंदू पक्षों को सौंपकर श्री राम के जन्मस्थान पर राम मंदिर बनाने का मार्ग प्रशस्त करके सदियों से चले आ रहे विवाद का अंत कर दिया था। सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा था कि जो 2.77 एकड़ की विवादित जमीन है, वह रामलला की जन्मभूमि है। कोर्ट ने इस जमीन को उस ट्रस्ट को सौंपने का फैसला सुनाया था जिसे भारत सरकार ने बाद में बनाया। कोर्ट ने सरकार से यह भी कहा था कि वह एक अलग 5 एकड़ जमीन उत्तर प्रदेश सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड को दे ताकि बोर्ड एक मस्जिद बना सके।

गौरतलब है कि अयोध्या में रामलला की प्राण प्रतिष्ठा हो रही है। 16 जनवरी से शुरू हुए धार्मिक अनुष्ठान 22 जनवरी तक चलेंगे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगुवाई में 22 जनवरी को रामलला अपने स्थान पर विराजमान होंगे। पूरे देश में लोग अपने घरों में दिवाली मनाएंगे। हर तरफ मंगलगीत अभी से गाए जा रहे हैं। सोशल मीडिया भी भगवान राम की भक्ति में मशगूल है। 

छू न सके मुस्लिम भीड़, इसलिए बिजली की तार लेकर खड़ीं थीं हिंदू महिलाएँ… कश्मीर की जो कहानी अनसुनी वह महिला पत्रकार ने सुनाई, बताई अपने परिवार की बीती

कश्मीरी हिंदुओं के साथ 90 के दशक में हुई बर्बरता भुला पाना नामुमकिन है। हर साल 19 जनवरी की तारीख आते ही वो जख्म बिलकुल ताजा हो जाते हैं जो इस्लामी कट्टरपंथियों ने कश्मीर के हिंदू परिवारों को 34 साल पहले दिए। कई लोगों ने उस पीड़ा को साझा किया। इसी क्रम में एक्स पर मौजूद इंडियन एक्सप्रेस की पत्रकार आँचल मैग्जीन ने एक थ्रेड में 90 के समय का वाकया बताया।

आँचल ने अपने थ्रेड के जरिए समझाया कि आखिर 19-20 जनवरी 1990 को कश्मीर में क्या हालात थे और कैसे हिंदुओं को टारगेट किया जा रहा था। उन्होंने अपने थ्रेड में बताया कि जब उनकी मासी 1990 में कश्मीर से भागीं, तो उनके कश्मीरी पंडित पड़ोसी ने अपनी 12 वर्षीय बेटी को उन्हें सौंप दिया कि वह कैसे भी करके पहले सुरक्षित स्थान पर पहुँच जाएँ, भले ही वह कश्मीर में ही हो।

बच्ची को लेकर वह 200 किमी दूर जम्मू निकलीं। इस दौरान बच्ची ने एक घूँट पानी तक नहीं पिया। वो परेशान थी कि उसके माता पिता को उससे दूर किया गया है। लेकिन परिवार करता भी तो क्या जैसे हालात थे उनकी चिंता यही थी कि महिलाओं और लड़कियों को बचाया जाए।

आँचल ने अपने थ्रेड में बताया कि उस रात जब महिलाओं को लेकर इस्लामी कट्टरपंथी ओछे नारे लगा रहे थे। तब उनके घर की महिलाएँ बिजली की तारें लेकर खड़ी थीं। उन्हें डर था कि अगर इस्लामी कट्टरपंथी घुस आए तो वो उनके हाथ आने के बजाय मौत को चुन लेंगी।

आँचल कहती हैं कि कश्मीरी पंडितों को जिस वजह ने भागने को मजबूर किया गया वो उनकी महिलाएँ और उनकी सुरक्षा थी। उस समय कश्मीर में आजादी और क्रांति के नारे नहीं, बल्कि नारे थे- “असि गछि काशीर, बटव रोअस त बटनेव सान (कश्मीर चाहिए, बिना कश्मीरी पंडित आदमियों के और कश्मीरी पंडित औरतों के साथ); रालिव, गलिव या चलिव का नारा था” जिसका मतलब था (इस्लाम कबूलों या फिर भाग जाओ।)

आँचल मैग्जीन द्वारा शेयर किए थ्रेड (तस्वीर साभार: @AanchalMagazine)

पत्रकार ने बताया कि कश्मीरी महिलाओं के साथ जो हुआ है 34 साल बाद भी उसका आंतरिक आघात, तनाव, ट्रॉमा उनमें हैं। बड़ी मुश्किल से इस पर बात हो पाती है। वह कहती हैं कि पिछले कुछ सालों से वह जब इसपर लिखती हैं तो उन्हें नफरत भरे संदेश आते हैं। एक ने तो ये तक कहा था उन्हें तुम्हें जन्म देने के लिए तुम्हारी माँ को शर्मिंदा होना चाहिए। एक ने कहा था- “तुम्हारे घर में मर्दों को स्कर्ट पहनना चाहिए”

आँचल मैग्जीन द्वारा शेयर किए थ्रेड (तस्वीर साभार: @AanchalMagazine)

अपने थ्रेड में आँचल पूछती हैं कि 47 के समय जब विभाजन हुआ था तो भी लोगों ने पलायन किया था क्या इसे ये कहेंगे कि वो कमजोर थे। वो पूछती हैं कि कैसे कश्मीरी पंडितों का रेप करने वाले, महिलाओं को टारगेट करने वाले ताकतवर माने जाते हैं और कैसे उनकी रक्षा करने वाले लोग कमजोर समझे जाते हैं।

आँचल पूछती हैं, “शर्म हम लोग क्यों करें। ये शर्म उन्हें आनी चाहिए जिन्होंने हमें जाने के लिए मजबूर किया और उन्हें आए जो उस दर्द को हमारी कमजोरी कहते हैं।”

आँचल अपनी परवरिश पर गौरवान्वित महसूस करती हैं। कहती है- “मुझे इस बात पर बहुत गर्व है कि कैसे मेरे परिवार ने अंजान क्षेत्र में, घर छिन जाने के बाद, यातना से गुजरते हुए नए जीवन की शुरुआत कर मेरा पालन-पोषण किया। मेरे नाना (नाना), जो पलायन के बाद सिर्फ छह साल जीवित रहे, ने मुझे कभी हिंसा, बदला लेना नहीं सिखाया। उन्होंने मुझे विद्या दी। सिखाया कि किताबों को कभी मत छोड़ो। मैं आज भी इस पर अमल कर रहा हूँ लेकिन न्याय और पुनर्वास की आशा कहीं से नहीं दिख रही।”

आँचल उम्मीद करती हैं कि जिस तरह से लोग कश्मीरी पंडितों के दर्द असंवेदनशील हो जाते हैं ये पीढ़ी वैसी न हो। वो वह आघात कश्मीरी पंडितों को न दें। वह कहती हैं कि आज भी ऐसे लोग हैं समाज में जो मानते ही नहीं 90 में कश्मीरी हिंदुओं संग कुछ गलत हुआ था।

राम अनादि अखंड अनंता: वातावरण में प्रभु श्री राम हैं व्याप्त, सनातन संस्कृति का पुनर्जागरण काल

अयोध्या में दिव्य, भव्य मंदिर का होने वाला लोकार्पण सुखद क्षण है, जो हर भारतीय के मन को आल्हाद से गुदगुदाने वाला है। आज भारत ही नहीं अपितु वैश्विक फलक पर वातायन में राम नाम की गूंज हो रही है। वास्तव में भारत के लिए यह अमृत काल है। 500 वर्षों की लम्बी और विकट साधना सिद्धि तक पहुँच रही है। पूरे वातावरण में ‘श्री राम’ का नाम व्याप्त है। श्री राम का गुणानुवाद, श्री राम के मर्यादा पुरुषोत्तम रूप की चर्चा गुंजायमान हो रही है। वातावरण में प्रभु श्री राम व्याप्त हैं। यही तो अखिल ब्रह्माण्ड नायक का अनन्त में व्याप्त स्वरूप है, जो समूचा जगत आज प्रभु श्री राम के नाम का गुणानुवाद कर रहा है।

संत जन कहते हैं, “राम वे अधिक राम कर नामा।” नाम और गुण का चहुं ओर व्याप्त राम का वैचारिक रूप में अवतरण ही कहा जाएगा, जो प्रभु श्री राम के भक्तों और सनातन संस्कृति के ध्वज वाहकों ने अखण्ड साधना कर अपने प्राणों की आहुति तक दी तथा राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की दृढ़ संकल्पना, जिसको लेकर संघ के स्वयं सेवक जन-जन में अलख जगाने से अयोध्या में दिव्य भव्य श्री राम लला के मंदिर निर्माण के रूप में साकार हो रहा है। सनातन संस्कृति की यह ऐतिहासिक साधना है, जो 500 वर्षों की सतत संघर्ष के बाद साकार हो रही है।

आज भारत ही नहीं अपितु पूरी दुनिया में प्रभु श्रीराम की चर्चा उनके भक्तों और सनातन संस्कृति को मानने वालों में जहाँ हर्ष और उत्साह के रूप में व्याप्त है, वहीं मीडिया जगत से लेकर समाज के विभिन्न हिस्सों में राजनैतिक क्षेत्र तथा विभिन्न धर्म पंथ सम्प्रदाय को मानने वाले सभी में राम की चर्चा है। आस्था के रूप में या अनास्था के रूप में लेकिन चर्चा प्रभु श्रीराम की ही है। एक तरह से यही राम की व्यापकता है, यही अखंड अनादि रूप है, जो सब में व्याप्त है।

राम अखिल ब्रह्माण्ड की नायक सत्ता हैं, राम जीवन शैली हैं, राम आर्दश व्यवस्था हैं, राम आर्दश राजा, राम आस्था प्रेम और भक्ति हैं। राम सहजता, सरलता हैं। राम समरस, भेदभाव रहित, न्यायपूर्ण, पक्षपात रहित समाज की रचना हैं। राम अन्याय और अराजकता के लिए वीरों के उज और तेज भी है। राम का गुणगान आदि और अनंत है।

भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में तथा श्री रामतीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के अहर्निश परिश्रम से आज दिव्य, भव्य, नव्य अयोध्या साकार हो रही है। इसके दर्शन और स्पर्श करने के लिए पूरी दुनिया से लोग पधार रहे हैं।

महर्षि वाल्मीकि के नाम से अयोध्या को हवाई अड्डा, सवरी के नाम से भोजनालय का निर्माण तथा ऋषियों-मुनियों और निषाद राज का नाम दिव्य, नव्य अयोध्या के अमिट हस्ताक्षर बन गए। भक्तिपथ, रामपथ, धर्मपथ और सूर्यस्तम्भों की कतार रामकालीन अयोध्या को जहाँ साकार करती दिख रही है, वहीं यह सब के लिए एक बड़ा संदेश भी दे रही है।

श्रीराम तीर्थ क्षेत्र के नवनिर्माण ने प्रभु श्रीराम की जीवन शैली का सन्देश जन-जन तक पहुँचाने का बड़ा कार्य किया है। जो लोग समाज में जाति-पाति, ऊँच-नीच के भेदभाव को रखते हैं, उनके लिए यह बड़ा सन्देश है कि यदि राम में भक्ति है, राम में आस्था है, तो उनकी जीवन शैली ही हमारे लिए प्रेरक है। हम यदि जाति-पाति, ऊँच-नीच को मानते हैं तो हमारी प्रभु श्रीराम जी की भक्ति अधूरी है। हमारी साधना अधूरी है। हमारी आस्था खंडित है।

इसलिए पूज्य संत तुलसीदास गोस्वामी जी ने प्रभु राम के लिए कहा है, “सिया राम मय सब जग जानी।” सबमें राम ही हैं, राम अलग कोई नहीं, फिर ऊँच-नीच, जाति-पाति का विभेद कैसा? गोस्वामी जी ने रामायण में यह भी कहा, “यहि सर आवत अति कठिनाई राम कृपा बिनु आई न जाई।” राम की कृपा प्राप्ति के लिए राम की भक्ति और साधना की पूर्णता के लिए हमें उन्हीं की जीवन शैली का अनुकरण करना होगा।

सामाजिक जीवन में परिवार से लेकर, समाज, राज्य व्यवस्था और अन्यान्य क्षेत्रों में जिसमें जो कार्य कर रहा है, उसे उस क्षेत्र में राम की प्रेरणा ही पूर्णता में ला सकती है। राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ अपने स्थापना काल से ही भेदभाव रहित समाज की रचना के लिए कार्य कर रहा है। सभी पूजित संत महात्मा जन तथा हमारे राष्ट्र नायक भारत भूमि पर जिस आदर्श रामराज्य की स्थापना को साकार करने के लिए जाति-पाति की अहमन्यता से मुक्त समाज की रचना के लिए काम कर रहे थे, उस भेदभाव रहित समाज को भी साकार होने का अमृत काल आ गया है, ऐसा प्रतीत होता है।

वातायन में व्याप्त प्रभु श्री राम के जीवन से हम व्यवहार रूप में अवश्य प्रेरणा लेंगे और जाति-पाति की अहमन्यता से मुक्त ‘सिया राम मैं सब जग जानी’ की मूलभावना को धारण कर सनातन संस्कृति के इस पुनर्जागरण काल में प्रभु श्री राम जी को हृदय में धारण कर विश्व पटल पर सनातन संस्कृति की पताका सबसे ऊँचे फहराएँगे।