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लकड़ी की आँच वाली रोटी, बैलगाड़ी की सवारी, ग्रामीण परिवेश में ‘होम स्टे’: अवध की मेहमाननवाज़ी और खानपान का लुत्फ़ उठाएँगे पर्यटक, योगी सरकार की ‘रामोत्सव 2024’

देश-दुनिया के पर्यटकों को अवधी ग्रामीण परिवेश लुभा रहा है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की योजना पारंपरिक ठाठ का रुतबा बढ़ा रही है। हेरिटेज विलेज की थीम पर आधारित होम स्टे योजना के जरिए अवध की प्रसिद्ध मेहमाननवाजी, रहन-सहन व खानपान से रूबरू होने का मौका मिलने वाला है। ये योजना लकड़ी की आँच पर पकी रोटी और बैलगाड़ी की सवारी समेत ग्रामीण परिवेश और सुविधा संपन्न रिहायशी अवस्थापना का मिला-जुला ताना बाना है।

ये तो हमें पता ही है कि योगी सरकार का विजन अयोध्या को अध्यात्म के साथ पर्यटन के बड़े केंद्र के रूप में वैश्विक मानचित्र नई पहचान दे रहा है। शहरों की भीड़भाड़ से दूर पक्षी विहार के समीप प्राकृतिक नजारों की छाँव में सुकून खोजने वालों के लिए बनेगा अयोध्या अब फेवरिट डेस्टिनेशन अयोध्या बनने वाला है। ये कमाल इसी योजना के माध्यम से होगा। न सिर्फ अध्यात्म, संस्कृति और इतिहास के क्षेत्र में, बल्कि पर्यटन के क्षेत्र में भी अयोध्या देश-दुनिया के मानचित्र पर अंकित हो रहा है।

त्रेतायुग की अयोध्या कैसी थी, हमने नहीं देखी पर सीएम योगी आदित्यनाथ ने कलियुग में अयोध्या को अलग ही पहचान दिलाने का मार्ग प्रशस्त किया है। 500 वर्षों के उपरांत 22 जनवरी को श्रीराम अपने भव्य मंदिर में विराजमान होंगे तो यहाँ आने वाले पर्यटकों की संख्या में और वृद्धि होगी। इसे देखते हुए योगी सरकार के विजन के अनुरूप अयोध्या को अध्यात्म के साथ पर्यटन के बड़े केंद्र के तौर पर भी वैश्विक मानचित्र पर नई पहचान मिल रही है।

सीएम योगी ने अयोध्या को सुंदरतम नगरी बनाने की परिकल्पना को हकीकत की शक्ल देना शुरू कर दिया है। वहीं, इस नगरी को निहारने दुनियाभर से आने वाले पर्यटकों व श्रद्धालुओं की हर सुख-सुविधा को ध्यान में रखकर संसाधनों के सतत विकास की प्रक्रिया जारी है। योगी सरकार की हेरिटेज विलेज थीम्ड होम स्टे योजना के जरिए देश-दुनिया के मेहमान ग्रामीण परिवेश में अवधी ठाठ से रूबरू होंगे तो वहीं यहाँ की प्रसिद्ध मेहमाननवाज़ी, रहन-सहन व खानपान का भी लुत्फ उठाने का उन्हें अवसर मिलेगा।

यह योजना लकड़ी, कोयले की धीमी आँच पर सेंकी गई रोटी और बैलगाड़ी की सवारी समेत ग्रामीण परिवेश और सुविधा संपन्न रिहायशी अवस्थापना का मिला-जुला ताना बाना है, जो वर्तमान सुख-सुविधायुक्त जीवनशैली के संसाधनों के साथ ही सुकूनमय पारंपरिक जीवनशैली की अनुभूति का मार्ग भी प्रशस्त करती है। लकड़ी व कोयले की धीमी आँच पर सेंकी हुई रोटी का मिलेगा जायका अमूमन शहरी क्षेत्रों में रहने वाले बच्चे अपनी विरासत का दीदार नहीं कर पा रहे हैं, लेकिन ग्रामीण परिवेश से रूबरू होने का आकर्षण उनमें रहता है।

इसी बात को ध्यान में रखकर योगी सरकार द्वारा हेरिटेज विलेज थीम्ड होम स्टे योजना की परिकल्पना की गई है। यह योजना काफी कारगर हो रही है क्योंकि यहाँ लकड़ी व कोयले की धीमी आँच पर सेंकी गई रोटी मिलती है जो आधुनिक परिवेश में पले-बढ़े बच्चों के लिए किसी अचंभे से कम नहीं है। यह रोटी जहाँ उन्हें पौष्टिकता प्रदान करेगी, वहीं बैलगाड़ी की सवारी उनके कौतूहल को शांत करते हुए अतीत से वर्तमान का दीदार भी कराएगी।

यहाँ ग्रामीण पर्यटन को बढ़ावा देते हुए स्थानीय भोजन के साथ प्राकृतिक वातावरण को संरक्षित किया गया है। यहां मिट्टी के घरों के साथ गांव की संस्कृति से वर्तमान पीढ़ी को अवगत होने का मौका मिलेगा। वहीं खाने में यहां मॉडर्न इन डिमांड रेसिपीज के साथ स्थानीय जायकों का स्वाद भी परोसा जाएगा। दौलतपुर की ‘दौलत’ बनेगी अयोध्या को नई पहचान दिलाने का माध्यम उत्तर प्रदेश पर्यटन विभाग की इस योजना को अयोध्या विकास प्राधिकरण द्वारा विकसित किया जा रहा है।

अयोध्या से 12-15 किलोमीटर दूर सोहावल तहसील के कोला मोइया कपूरपुर के पास रायबरेली रोड स्थित दौलतपुर में समदा पक्षी विहार के पास इसे काफी तेज़ी से विकसित किया जा रहा है। यहाँ मिट्टी के घरों में गाँव की संस्कृति से रूबरू कराया जाएगा। ग्रामीण परिवेश के बीच मिट्टी की सोंधी खुशबू रूपी दौलत अयोध्या आने वाले पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित करेगी। पर्यटकों के हिसाब से यहाँ के घरों का पुनरुद्धार कराया जा रहा है।

यहाँ फिलहाल अभिनव श्रीवास्तव की प्रॉपर्टी को मड हाउस को प्रमोट कर प्राकृतिक चीजों को डिस्प्ले कर दिया है। यहाँ आम के पेड़ों की छाँव के बीच भोजन का भी आनंद अलग ही अनुभूति करा रहा है। यहाँ का एक दिन का किराया 9500 रुपए है। इसमें दो रूम, लॉन, खेलकूद के साथ ही बच्चों के लिए ट्यूबवेल में नहाने की भी व्यवस्था होगी। 18 अन्य संपत्तियों को एडीए ने किया चिह्नित अयोध्या विकास प्राधिकरण के सलाहकार राकेश सिंह ने बताया कि दौलतपुर में एक प्रॉपर्टी पर यह सुविधाएँ शुरू हो गई हैं।

अयोध्या आने वाले पर्यटकों की संख्या काफी तेज़ी से बढ़ी है। राम मंदिर, हनुमानगढ़ी समेत कई मंदिरों के दर्शन के साथ ही देश-दुनिया के आगंतुक अपने बच्चों को ग्रामीण परिवेश से अवगत कराने के लिए भी यहाँ लाना चाहते हैं। ऐसे में, इस सुविधा में विस्तार के लिए 18 अन्य संपत्तियों को भी चिह्नित किया गया है, जहाँ ग्रामीण पर्यटन को बढ़ावा देने वाले क्रियाकलापों को विकसित करने के लिए जिला प्रशासन द्वारा हर प्रकार का सहयोग प्रदान किया जा रहा है।

बाबरी ढाँचा गिराने के लिए पढ़ा मारुति स्त्रोत… वानर आया और ढहा गया दीवार: मिलें 96 वर्ष की कारसेवक शालिनी दबीर से, जिन्हें छूकर निकली थी पुलिस की गोली

रामलला के अयोध्या में विराजने का शुभ मुहूर्त 22 जनवरी, 2024 का निकला है। प्रभु श्री राम को उनके जन्म स्थान में उनकी सही जगह पर देखने के लिए अनगिनत लोगों ने संघर्ष किया। ऐसी ही 96 साल की कारसेवक हैं- शालिनी रामकृष्ण दबीर, जिन्हें अयोध्या से भेजे अक्षत सहित रामलला की प्राण-प्रतिष्ठा का न्योता मिला है।

रामलला अयोध्या में विराज सकें, इसके लिए जहाँ साधु संतों ने कई कठिन संकल्प लिए तो आम लोगों ने भी कारसेवक बन प्रभु का मंदिर बनवाने में कोई कसर नहीं छोड़ी। इसके लिए साल 1990 में लाल कृष्ण अडवाणी की अगुवाई में गुजरात के सोमनाथ से रामरथ यात्रा हो शुरू हुई थी जो महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश से होते हुए अयोध्या पहुँची थी।

यात्रा और कारसेवकों का ये सिलसिला 6 दिसंबर, 1992 के बाबरी ढाँचा के विध्वंस तक चलता रहा। इस दौरान कारसेवा का हिस्सा रहीं बुजुर्ग शालिनी बताती हैं कि साल 1990 में जब मुंबई से बाबरी के लिए निकली थीं तो हर जगह लोगों ने उनके साथ बहुत अच्छा बर्ताव किया, लेकिन सरकार और पुलिस ने उनको बहुत सताया।

वो आगे कहती हैं, “बहुत मारा, सबकुछ किया। लेकिन हम बिल्कुल डरे नहीं, हम बोले हम तो अयोध्या जाएँगे ही जाएँगे फिर चाहे आप कुछ भी करो। हमें इलाहबाद के जेल में रखा, लेकिन हम दीवार फाँद के बाहर निकल आए। हम दीवार पर ऊपर थे इसलिए पुलिस हमें नहीं पकड़ पाई थी।”

वो इस उम्र में भी उस वाकए को याद कर जोश से भर उठती हैं और कहतीं है, “मेरे साथ उस वक्त एक साथी शालीन भी थी, जो अब जीवित नहीं है। जेल फाँद के भागने के बाद वो लोग पैदल चलते गए और एकदम अयोध्या पहुँच गए। इस दौरान पुलिस ने बहुत सताया पीछे लगकर, रास्ते से जाने को नहीं देते थे।”

वो कहती हैं- “हम खेतों के बीच से इधर-उधर के रास्तों से गए, लेकिन अयोध्या तो गए।”

बताते चलें कि उम्रदराज शालिनी दबीर 30 अक्टूबर 1990 को अयोध्या पहुँची थीं और बाबरी ढाँचे पर भगवा झंडा फहराने के पल की साक्षी बनीं थीं। तब उत्तर प्रदेश पुलिस ने दादर के महिला कारसेवकों के एक समूह को गिरफ्तार कर उन्हें स्कूल में बंदी बना लिया था। इनमें से कुछ स्थानीय लोगों की मदद से वहाँ से निकल भाग निकले थे। इन कारसेवकों ने करीबन 50 किलोमीटर पैदल चल 31 अक्टूबर 1990 को कारसेवा में हिस्सा लिया था।

उस वक्त कारसेवक शालिनी दबीर ने भी लाठीचार्ज, आँसू गैस और गोलियों के वार झेले थे, लेकिन उनका हौसला नहीं टूटा। वो बताती हैं, उनके करीब से एक गोली उन्हें छूकर निकली थी, लेकिन हनुमान जी ने कारसेवकों को बचा लिया।

शालिनी के मुताबिक उस समय वो 63 साल की थीं, लेकिन राम लला से जो स्थान छीना गया था वो उन्हें बर्दाश्त नहीं था और इसीलिए वो भी अयोध्या के लिए निकल पड़ीं थीं। वो बताती हैं कि उनकी कारसेवा के दौरान गोलियाँ, लाठियाँ चलती रहीं, लेकिन कारसेवक मिलकर भजन गाते रहे थे। 

उनके अनुसार, वह दूसरी बार जब 1992 में कारसेवा में गईं तो बहुत अच्छे तरह से पहुँचीं। उस वक्त उन्हें कोई तकलीफ नहीं हुई। उन्होंने वो पल भी याद किया जब ढाँचे की दीवार नहीं गिर रही थी। उन्होंने कहा, “वो पल याद आता है जब वो एक दीवार टूटती ही नहीं थी। हम सुबह से मारुति स्त्रोत बोलते थे, लेकिन कुछ हो नहीं रहा था।”

शालिनी आगे बताती हैं, “क्या करें क्या न करें की स्थिति थी क्योंकि 5 बजे सूर्यास्त हो जाता तो हम कुछ नहीं कर पाते, फिर वहाँ पास के पेड़ से एक वानर आया वो दीवार पर बैठा। हम सब देखने लगे कि क्या बात है ये। वानर ने इधर-उधर सिर घुमाकर देखा और वहाँ से चला गया और फिर धड़ से दीवार गिरी।”

वो आगे कहती है, “इसके बाद दो घंटे तक धूल के गुबार से हमें वहाँ कुछ दिखाई नहीं दिया था। वहाँ के लोगों ने शाम 5 बजे हमसे कहा था आपको कुछ करने की जरूरत नहीं। हम आपको खाना देंगे। हमने उस दिन रात 10 बजे राम, लक्ष्मण, सीता और मारुति की पूजा आरती की थी।”

उन्होंने बताया कि उस दिन रात को पूरी अयोध्या में दिए जलाए गए थे। वो आगे बताती हैं, “एक मुस्लिम आदमी था उम्रदराज था। उसने मेरे मुँह में पेड़ा डाला था। मैं बोली क्यों, तो वो बोला आपका था, आपको मिला। इसमें हमको आनंद हैं। ऐसे भी लोग थे। अच्छे-बुरे दोनों तरह के थे।”

वो कहती हैं, “अयोध्या जाने से पहले ही हम मन बना के गए थे कि इससे ज्यादा क्या होगा हम उधर ही खत्म हो जाएँगे, मैं पूरा परिवार छोड़ के आई थी। तब भी हमें उस माहौल में भी कोई डर नहीं लगा।”

शालिनी खुशी जाहिर कर कहती हैं, “अयोध्या में राममंदिर बन रहा है मुझे इतना आनंद है कि आपको क्या बताऊँ। चलो मोदी के राज में सब अच्छा हो गया। राम जी की प्रतिष्ठा हो गई बहुत अच्छा है। हमको बहुत आनंद है। मंदिर जाऊँगीं, लेकिन पाँव चलते नहीं हैं, लेकिन बाद में जाऊँगी जरूर। ये (अपने बेटे विकास की तरफ इशारा करते हुए) ले जाएगा।”

उस वक्त के दौर को याद कर उनके बेटे विकास कहते हैं, “घर में तब भी हमारे डर का माहौल नहीं था। बस थोड़ी चिंता रहती थी कि क्या होगा। हम लोग राह देखते थे माँ की। सोचते थे जब आएगी तभी समझेगा। नहीं आएगी तो क्या करेंगे। ये तो होना ही है एक दिन।”

दिलीप गोदांबे भी कारसेवा में शालिनी दबीर के साथ रहे। वो कहते हैं कि जो वहाँ अस्पताल बनाने की बात करते हैं उन्हें उस मिट्टी का मूल्य नहीं पता। उन्हें सनातन की महानता का पता नहीं है।

अवैध बालिका गृह चला रहे थे मिशनरी, 26 लड़कियों का कोई अता-पता नहीं: NCPCR अध्यक्ष ने कराई FIR, कहा – हिन्दू बच्चियों को दे रहे थे ईसाइयत की ट्रेनिंग

भोपाल में क्रिश्चियन मिशनरी की ओर से अवैध तरीके से प्राइवेट गर्ल्स हॉस्टल का संचालन किया जा रहा है। यहाँ 68 बच्चियों का नामांकन हुआ है, लेकिन उनमें से 26 बच्चियाँ गायब है। इस हॉस्टल को चलाने वाले संचालक अनिल मैथ्यू को इन लड़कियों के बारे में पता तक नहीं है कि वो आखिर गईं तो गईं कहाँ? इस हॉस्टल में 6 से 18 साल की लड़कियाँ रहती हैं, जिसमें से अधिकांश हिंदू हैं।

ये हॉस्टल भोपाल के बाहरी इलाके में स्थित परवलिया थाना इलाके में चलाया जा रहा है। इस हॉस्टल में चल रही अनियमितताओं की सूचना जब राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग के अध्यक्ष प्रियंक कानूनगो को मिली, तो उन्होंने गुरुवार (04 जनवरी 2024) को पूरे स्टाफ के साथ छापेमारी की और मौके पर जाकर हॉस्टल को देखा। इस हॉस्टल में तमाम अनियमितताएँ मिली। उन्होंने खुद इसकी सूचना एक्स के माध्यम से सार्वजनिक की।

प्रियंक कानूनगो ने एक्स पर लिखा, “04 जनवरी 2024 को मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल के तारासेवनिया में राज्य बाल आयोग अध्यक्ष व सदस्यों के साथ संयुक्त रूप से एक मिशनरी द्वारा संचालित अवैध बाल गृह का निरीक्षण किया। यहाँ की संचालक एनजीओ हाल तक सरकारी एजेन्सी की तरह चाइल्ड लाइन पार्ट्नर के रूप में कार्यरत रही है, एवं इसने सरकारी प्रतिनिधि के रूप में कार्य करते हुए जो बच्चे सड़कों से रेस्क्यू किए, उनको बग़ैर सरकार को सूचना दिए बिना लाइसेंस चलाए जा रहे स्वयं के इस बाल गृह में गुपचुप ढंग से रख कर उनसे ईसाई धार्मिक प्रैक्टिस करवाई।”

उन्होंने आगे लिखा, “6 साल से 18 साल तक की 40 से ज़्यादा लड़कियों में अधिकांश हिंदू हैं। काफ़ी कठिनाई के बाद पुलिस ने एफआईआर दर्ज की है। दुर्भाग्य से मध्य प्रदेश के महिला बाल विकास विभाग के अधिकारी ऐसी ही एनजीओ से चाइल्ड हेल्पलाइन ठेके पर चलवाना चाहते हैं। मुख्य सचिव को पृथक से नोटिस जारी किया है।”

इस मामले में मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने भी हस्तक्षेप किया है। उन्होंने प्रशासन से तुरंत कठोर कदम उठाने का आग्रह किया। शिवराज सिंह चौहान ने लिखा, “भोपाल के परवलिया थाना क्षेत्र में बिना अनुमति संचालित बालगृह से 26 बालिकाओं के गायब होने का मामला मेरे संज्ञान में आया है। मामले की गंभीरता तथा संवेदनशीलता को देखते हुए सरकार से संज्ञान लेने एवं त्वरित कार्रवाई करने का आग्रह करता हूँ।”

प्रियंक कानूनगो ने कहा कि इस हॉस्टल में उन लड़कियों को रखा जाता था, तो सड़क और रेलवे स्टेशन से रेस्क्यू करके लाई गई थी। इनमें कई बच्चियाँ अनाथ थीं। उन्होंने बताया कि जो NGO सरकारी एजेन्सी चाइल्ड लाइन के रूप में बच्चों को रेस्क्यू कर रही थी, उसी ने बच्चों को गुपचुप ढंग से अवैध बाल गृह में रखा था। ऐसी संस्थाओं को चाइल्डलाइन का काम सौंपा जाना ख़तरनाक है। चुनाव के पहले कुछ अकर्मण्य अधिकारियों ने इन्हीं संस्थाओं के हाथ में बच्चों के संरक्षण हेतु चाइल्ड लाइन संचालित करने का काम देने का आदेश कैबिनेट से स्वीकृत करवा लिया था। प्रियंक कानूनगो ने शिवराज सिंह चौहान के एक्स हैंडल पर जवाब देते हुए लिखा, “मुझे विश्वास है कि आप उसको भी वापिस लेने के लिए सरकार को आग्रह करेंगे।”

बता दें कि इस मिशनरी हॉस्टल का उद्घाटन 2020 में हुआ था। ये हॉस्टल विदेशी दानदाताओं की मदद से बना था। हालाँकि ये पता नहीं चल सका है कि इस एनजीओ को विदेशी सहायदा मिलती है या नहीं, लेकिन हॉस्टल के उद्घाटन के समय लगी शिलापट तो साफ-साफ कह रही है कि इसके निर्माण में विदेशी मदद हासिल हुई थी।

मंजिल तक पहुँच गया ‘आदित्य L1’, ISRO का पहला सूर्य मिशन सफल: PM मोदी बोले – ये हमारे वैज्ञानिकों के अथक समर्पण का परिणाम

सूर्य के अध्ययन के लिए ISRO (भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान परिषद) द्वारा लॉन्च किया गया पहला मिशन ‘आदित्य L1’ ने अंतरिक्ष में अपने अंतिम लक्ष्य तक का सफर तय कर लिया है। शनिवार (6 जनवरी, 2024) को ‘आदित्य L1’ सूर्य के लैंग्रेज पॉइंट 1 तक पहुँच गया। L1 पॉइंट ‘हेलो ऑर्बिट’ में स्थित है और ये भी पृथ्वी द्वारा सूर्य की लगातार की जा रही परिक्रमा के कारण चलायमान रहता है। इसरो द्वारा बेजा गया ‘आदित्य L1’ इसी लैंगरेज पॉइंट 1 के इर्दगिर्द चक्कर काटेगा।

यहीं से वो सूर्य का अध्ययन करेगा और महत्वपूर्ण डेटा धरती पर भेजेगा, जिसका ISRO के वैज्ञानिक अध्ययन करेंगे। L1 पॉइंट धरती से 15 लाख किलोमीटर की दूरी पर स्थित है और पृथ्वी व सूर्य के बीच की दूरी का 1% है। ‘आदित्य L1’ को सूर्य के कोरोना और (सूर्य के वातावरण का सबसे बाहरी हिस्सा जो सूर्य के सतह के प्रकाश के कारण छिपा रहता है) और इसकी अत्यधिक गर्मी के अध्ययन के लिए भेजा गया है। सौर ऊर्जा में सूर्य द्वारा बड़ी मात्रा में ऊर्जा छोड़ी जाती है।

इसरो ने अपने बयान में बताया है कि कैसे सूर्य पर जो विस्फोट होते रहते हैं अगर वो पृथ्वी की तरफ निर्देशित हो जाएँ तो हमारे वातावरण में बड़ी गड़बड़ी पैदा कर सकते हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी ISRO की ताज़ा उपलब्धि की प्रशंसा की है और कहा कि भारत ने एक और मील के पत्थर को हासिल किया है, सूर्य के अध्ययन के लिए भारत का पहला मिशन ‘आदित्य L1’ अपने गंतव्य तक पहुँच गया है। पीएम मोदी ने कहा कि ये सफलता जटिल अंतरिक्ष अभियानों को सफल बनाने वाले हमारे वैज्ञानिकों के अथक समर्पण का परिणाम है।

प्रधानमंत्री ने इसे असाधारण उपलब्धि बताते हुए कहा कि पूरे राष्ट्र के साथ वो वैज्ञानिकों की प्रशंसा में खुद को शामिल करते हैं। साथ ही उन्होंने स्पष्ट किया कि मानवता की भलाई के लिए भारत विज्ञान की नई सीमाओं को पार करना जारी रखेगा। ‘आदित्य L1’ स्पेसक्राफ्ट को PSLV-C57 लॉन्च व्हीकल का इस्तेमाल कर के 2 सितंबर, 2023 को श्रीहरिकोटा से लॉन्च किया गया था। इसी साल भारत चन्द्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर उतरने वाला पहला देश भी बना, जब ‘चंद्रयान 3’ ने ये सफलता प्राप्त की। उस बिंदु को ‘शिवशक्ति पॉइंट’ नाम दिया गया।

‘हमारा मुख्य उद्देश्य हिन्दू धर्म का प्रचार-प्रसार’: रामलला की प्राण-प्रतिष्ठा पर तिरुपति मंदिर से जाएँगे 1 लाख लड्डू, TTD ने कहा – ये सनातन के लिए ऐतिहासिक क्षण

अयोध्या के निर्माणाधीन राम मंदिर के गर्भगृह में रामलला की प्राण-प्रतिष्ठा का कार्यक्रम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और RSS के सरसंघचालक मोहन भागवत की मौजूदगी में 22 जनवरी, 2024 को होने वाला है। इसके लिए तैयारियाँ जोरों पर हैं। देश भर से नेताओं, फ़िल्मी हस्तियों और धर्माचार्यों को इसमें आमंत्रित किया गया है। अब ‘तिरुमला तिरुपति देवस्थानम (TTD)’ बोर्ड ने इस समारोह के लिए 1 लाख लड्डू भेजने का फैसला लिया है। तिरुपति बालाजी मंदिर में प्रसाद के रूप में इन लड्डुओं का भोग लगाया जाता है।

TTD ही भगवान वेंकटेश्वर के तिरुपति मंदिर के प्रबंधन का कामकाज देखता है। इसके एग्जीक्यूटिव ऑफिसर AV धर्मा रेड्डी ने शुक्रवार (5 जनवरी, 2024) को कहा कि श्रीराम और वेंकटेश्वर – दोनों ही भगवान विष्णु के महत्वपूर्ण अवतारों में से एक हैं। इसीलिए, अयोध्या में प्राण-प्रतिष्ठा समारोह में आने वाले VVIPs एवं श्रद्धालुओं के लिए TTD ने 25 ग्राम के 1 लाख लड्डू दान करने का फैसला लिया है। हालाँकि, सामान्य तौर पर तिरुपति के एक लड्डू का वजन 170-175 ग्राम होता है। उन्होंने राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा को सनातन धर्म के लिए भी एक ऐतिहासिक क्षण करार दिया।

TTD के एग्जीक्यूटिव अधिकारी AV धर्मा रेड्डी ने कहा कि संस्था का प्राथमिक उद्देश्य हिन्दू धर्म एवं इसकी संस्कृति व मूल्यों का प्रचार-प्रसार करना ही है, ऐसे में वो राम जन्मभूमि पूजा का हिस्सा बन कर सौभाग्यशाली महसूस कर रहे हैं। बता दें कि तिरुमला में 3-5 फरवरी को TTD के ‘हिन्दू धर्म प्रचार परिषद’ द्वारा ‘धर्म सदस्सू (धार्मिक कॉन्फ्रेंस)’ का आयोजन किया गया है, जिसमें चर्चा के लिए देश भर से साधु-संतों को आमंत्रित किया गया है।

इस धर्म सभा में सनातन को आगे बढ़ाने और इस दिशा में आने वाली चुनौतियों पर चर्चा होगी। 15 जनवरी को तिरुपति में गोड़ा कल्याणम का आयोजन भी होना है। मकर संक्रांति पर परेड ग्राउंड में होने वाले इस आयोजन के अगले ही दिन ‘श्रीवरी परुवेता उत्सवम’ भी होना है। दिसंबर 2023 में तिरुपति को 19 लाख श्रद्धालुओं द्वारा 116.73 करोड़ रुपए का दान मिला है। 1.46 करोड़ लड्डू प्रसाद वितरित किए गए और 40 लाख श्रद्धालुओं को निःशुल्क भोजन कराया गया। प्रार्थना पूरी होने के बाद 6.87 लाख भक्तों ने अपने बाल अर्पित किए।

तिरुपति तिरुमला से राम मंदिर के लिए ये लड्डू सड़क मार्ग से जाएँगे और प्राण-प्रतिष्ठा कार्यक्रम से 1 दिन पहले वहाँ उपलब्ध करा दिए जाएँगे। इन्हें 5 दिनों तक उपयोग में लाया जा सकेगा। तिरुपति प्रतिदिन 175 ग्राम के 4 लाख लड्डू और 75,000 छोटे लड्डू बनाता है जो 25 ग्राम के होते हैं। इन छोटे लड्डुओं को श्रद्धालुओं में निःशुल्क वितरित किया जाता है। अयोध्या में भी भगवान वेंकटेश्वर का मंदिर बनना है, जिसके लिए TTD योगी सरकार की अनुमति के इंतज़ार में है। जम्मू, नई दिल्ली, कुरुक्षेत्र, महाराष्ट्र, ओडिशा, तेलंगाना, तमिलनाडु और कर्नाटक में वेंकटेश्वर मंदिर का निर्माण TTD करवा चुका है।

कनाडाई PM ट्रूडो का प्लेन फिर दूसरे देश में हुआ खराब, इस बार जमैका में अटके: G-20 के वक्त भारत में हुई थी फजीहत

कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो को उनके सरकारी प्लेन ने एक बार फिर से धोखा दे दिया। इस बार वो जमैका में फँस गए। वो जमैका में अपने परिवार के साथ छुट्टियाँ मनाने गए थे। यहाँ उन्होंने नए साल का स्वागत किया। इससे पहले कि वो छुट्टियाँ मनाकर कनाडा लौट पाते, उनके प्लेन ने ही धोखा दे दिया। इसके बाद उनके लिए कनाडा से दो स्पेशल प्लेन आए और उनमें इंजीनियर आए। उन्होंने ट्रूडो के प्लेन को ठीक किया और तब जाकर जस्टिन ट्रूडो कनाडा लौट सके।

कनाडा की सीटीवी न्यूज ने इस बारे में रिपोर्ट प्रकाशित की है, जिसमें बताया गया है कि जस्टिन ट्रूडो एक बार फिर से दूसरे देश में फँस गए हैं, क्योंकि उनके प्लेन में कुछ खराबी आ गई थी। वो 26 दिसंबर 2023 को जमैका पहुँचे थे। उन्हें 4 जनवरी 2023 को हर हाल में कनाडा आ जाना था। लेकिन वो जिस सरकारी प्लेन सी-144 से जमैका में पहुँचे थे। उसी प्लेन ने उन्हें धोखा दे दिया। इसके बाद कनाडा की एयरफोर्स ने 2 प्लेन्स जमैका के लिए रवाना किए थे।

फर्स्ट पोस्ट ने बताया है कि कनाडा से गए इंजीनियरों ने उनके प्लेन को सही किया और वो उसी सरकारी प्लेन से वापस आए, जिससे वो जमैका गए हुए थे। वैसे, ये पहली बार नहीं है जब जस्टिन ट्रूडो को सरकारी प्लेन ने धोखा दिया हो। वो जब जी-20 की बैठक के लिए भारत की राजधानी दिल्ली में पहुँचे थे, तो उन्हें दो दिन ज्यादा रुकना पड़ा था।

वैसे, इस बार जो प्लेन खराब हुआ है, उसका मॉडल नंबर सी-144 है। वहीं, भारत में जो प्लेन खराब हुआ था, वो इससे काफी बड़ा था और वो सी-150 मॉडल का था। हैरानी की बात है कि कनाडा जैसे विकसित देश के प्रधानमंत्री को ऐसी समस्याओं का बार-बार सामना कर शर्मिंदा होना पड़ रहा है।

गौरतलब है कि बीते वर्ष सितंबर माह में जस्टिन ट्रूडो नई दिल्ली में थे। वो जी-20 के शिखर सम्मेलन में भाग लेने के लिए पहुँचे थे। ट्रूडो के वापस लौटने के समय उनका प्लेन खराब हो गया था, इसके बाद कनाडा की एयरफोर्स ने दूसरा प्लेन भेजा था। लेकिन, वो दूसरा प्लेन कभी भारत पहुँचा ही नहीं, उसे रास्ते से लौटा दिया गया। वहीं, दो दिन फँसे रहने के बाद जब ट्रूडो का प्लेन बनकर तैयार हो गया, तब वो वापस अपने देश लौट सके थे।

रामचरितमानस जलाने वालों पर से नहीं हटेगा NSA: हाईकोर्ट ने ठुकराई याचिका, कहा – खुलेआम हुआ भगवान राम के ग्रन्थ का अपमान, हिन्दुओं का आक्रोश स्वाभाविक

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने रामचरितमानस जलाने वाले 2 हिन्दू विरोधियों पर लगे NSA (रासुका) हटाने से इनकार कर दिया है। इन दोनों ने रामचरितमानस की प्रतियाँ खुलेआम जलाई थीं। गोस्वामी तुलसीदास कृत रामचरितमानस का उत्तर भारत में विशेष महत्व है। उन्होंने रामायण को सरलीकृत लोकसभा में आम जनों तक पहुँचाया था। लेकिन, सपा नेता स्वामी प्रसाद मौर्य और राजद नेता व बिहार के शिक्षा मंत्री चंद्रशेखर यादव जैसे नेताओं ने लगातार बयान देकर 2023 में रामचरितमानस को बदनाम करने की कोशिश की।

वहीं उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में रामचरितमानस की प्रतियाँ खुलेआम जलाई गईं। जिलाधीश के आदेश पर 2 आरोपितों के खिलाफ रासुका के तहत मामला दर्ज किया गया था। इन दोनों ने इलाहाबाद उच्च न्यायालय में आदेश को चुनौती दी। अब हाईकोर्ट ने इस याचिका को ख़ारिज कर दिया है। जस्टिस संगीता चंद्रा और जस्टिस नरेंद्र कुमार जौहरी की खंडपीठ ने शुक्रवार (5 जनवरी, 2024) को देवेंद्र प्रताप यादव एवं सुरेश सिंह यादव की याचिकाओं को रद्द कर दिया।

सतनाम सिंह नवी नामक हिन्दू कार्यकर्ता ने 29 जनवरी, 2023 को इस संबंध में स्थानीय PGI थाने में मामला दर्ज कराया था। वृन्दावन कॉलोनी में रामचरितमानस पुस्तक के न सिर्फ पन्ने फाड़े गए थे, बल्कि जला भी दिया गया था। इससे आम लोग आक्रोशित हो गए और इलाके में तनाव बढ़ गया था। इन दोनों ने स्वामी प्रसाद मौर्य के समर्थन में इस कृत्य को अंजाम दिया था। हाईकोर्ट ने स्पष्ट कहा कि आरोपितों ने अपने सहयोगियों के साथ मिल कर दिन-दहाड़े सार्वजनिक स्थल पर भगवान राम के जीवन के घटनाक्रम से संबंधित ग्रन्थ का जिस तरह से अपमान किया, उससे सामाजिक आक्रोश स्वाभाविक है।

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने साथ ही रामचरितमानस को हिन्दुओं की धार्मिक मान्यताओं और आस्था से भी जोड़ा। जजों ने नोट किया कि मोबाइल, इंटरनेट और सोशल मीडिया के वर्तमान युग में हर व्यक्ति इनसे जुड़ा हुआ है और ऐसे में ऐसी घटनाओं से समाज में धार्मिक उन्माद और तनाव फैल सकता है। साथ ही इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने माना कि प्रशासन द्वारा NSA लगाने का निर्णय लेना उचित है और सही है। अदालत ने कहा कि जिस तरह का व्यवहार किया गया, हिन्दुओं का आक्रोशित होना स्वाभाविक था।

‘मुस्लिमों को चाहिए एक और मुल्क, यूनाइटेड पाकिस्तान-बांग्लादेश ज़िंदाबाद’: बिहार के प्रोफेसर खुरशीद आलम ने विरोध के बावजूद डिलीट नहीं किया पोस्ट

बिहार के सिवान जिले से माँग उठी है कि अब हिंदुस्तानी मुस्लिमों के लिए पाकिस्तान-बांग्लादेश से इतर एक नया मुल्क दिया जाए, जो दोनों के बीच हो। ये बातें प्रोफेसर खुरशीद आलम लगातार सोशल मीडिया पर लिख रहा है। हैरानी की बात ये है कि नीतीश कुमार और तेजस्वी यादव की सरकार उसके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं कर रही, जबकि छात्र उसके खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं।

ये मामला सिवान के गोरियाकोठी इलाके का है। जहाँ जेपी यूनिवर्सिटी से जुड़े नारायण कॉलेज में असिस्टेंट प्रोफेसर के पद पर तैनात खुरशीद आलम उर्फ लाल बाबू लगातार देश में विभाजन के पक्ष में जहर उगल रहा है। खुरशीद आलम कई माह से भारतीय मुस्लिमों के लिए अलग देश की माँग कर रहा है। वो पाकिस्तान और बांग्लादेश के राष्ट्रगीतों को शेयर करता है और दोनों ही देशों के जिंदाबाद के नारे भी सोशल मीडिया पर लिखता है।

खुर्शीद आलम के फेसबुक प्रोफाइल के कुछ स्क्रीनशॉट्स देखिए, जिसमें वो 19 दिसंबर को मुस्लिमों से अलग मुल्क की डिमांड रखने की बात कह रहा है। 29 दिसंबर को वो खुलेआम लिखता है कि भारत-पाकिस्तान का बंटवारा अभी पूरा नहीं हुआ। 02 जनवरी 2024 को वो फेसबुक पर यूनाइटेड पाकिस्तान और बांग्लादेश जिंदाबाद लिखता है, तो 3 दिन पहले वो भारतीय मुस्लिमों के लिए अलग होमलैंड की माँग करता है।

खुरशीद आलम के फेसबुक पोस्ट के स्क्रीनशॉट, ये सभी पोस्ट आज (06 जनवरी 2024) भी मौजूद हैं।

खास बात ये है कि यही खुरशीद आलम कुछ दिन पहले यहूदियों और मुस्लिमों को मिलकर रहने की सीख दे रहा था। वो इजरायल और हमास के बीच युद्धविराम की बात कर रहा था और ऐसी तस्वीर भी शेयर की थी, जिसमें वो इजरायल और फिलिस्तीन के बीच सहअस्तित्व को मानता है। लेकिन उसे हिंदुस्तान की बात आने पर यहाँ के मुस्लिमों के लिए अलग देश चाहिए।

खुरशीद आलम का इजरायल-फिलिस्तीन पर स्टैंड भी जान लीजिए

खुरशीद आलम की अलग मुस्लिम देश की माँग को लेकर सोशल मीडिया पर हाल में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के कार्यकर्ताओं ने प्रदर्शन किया। एबीवीपी के कार्यकर्ताओं ने जेपी विश्वविद्यालय के कुल सचिव रणजीत कुमार को पत्र सौंपा, जिसमें उन्होंने नारायण महाविद्यालय, गोरियाकोठी के असिस्टेंट प्रोफेसर खुरशीद आलम को तुरंत बर्खास्त करने की माँग की है।

अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के कार्यकर्ताओं ने खुरशीद आलम के खिलाफ देशद्रोह के मामले में मुकदमा दर्ज किए जाने की माँग की है और अपना शिकायत पत्र भी सौंपा है। हालाँकि इतना सबकुछ होने के बावजूद खुरशीद आलम ने न ही सोशल मीडिया से वो पोस्ट डिलीट किए हैं, और न ही माफी माँगी है।

ये पूरा मामला कई सवाल खड़े करता है। खासकर बिहार में हो रही सनातन और राष्ट्र विरोधी कामों को लेकर। सत्ताधारी आरजेडी के नेता सनातन को गालियाँ देते हैं। वो मंदिर को लेकर उल्टी सीधी बातें लिखते हैं। वो पोस्टर लगाकर राजनीति करते हैं। ऐसे में जब आरजेडी अपने विधायकों और मंत्रियों तक को नहीं रोक रही है, तो अपने खास कोर वोट बैंक से जुड़े लोगों पर क्या ही कार्रवाई करेगी? बहरहाल, ये मामला बेहद गंभीर है। ऐसे मामलों में चुप्पी साधने का परिणाम बेहद भयावह हो सकता है।

राजनीति की पिच पर 10 दिन भी नहीं टिक पाए अम्बाती रायडू: छोड़ दी जगन रेड्डी की पार्टी, कहा – समय आने पर बताऊँगा आगे का प्लान

भारतीय टीम की तरफ से 55 ODI और 6 अंतरराष्ट्रीय T20 मैच खेल चुके अम्बाती रायडू राजनीति की पिच पर ज़रा सा भी नहीं टिक पाए। जगन मोहन रेड्डी की YSRCP में शामिल होने के मात्र 9 दिन बाद ही उन्होंने पार्टी छोड़ दी है। साथ ही उन्होंने राजनीति से ब्रेक लेने का भी ऐलान कर दिया है। उन्होंने सोशल मीडिया के जरिए बताया कि उन्होंने कुछ समय के लिए राजनीति से दूर रहने का निर्णय लिया है। उन्होंने बताया कि आगे वो क्या करने वाले हैं इस संबंध में वो खुद ही बता देंगे।

साथ ही उन्होंने अपने फैंस को धन्यवाद भी दिया। IPL में 203 मैच खेल चुके अम्बाती रायडू ‘मुंबई इंडियंस (MI)’ और उसके बाद ‘चेन्नई सुपर किंग्स (CSK)’ जैसी बड़ी टीमों का अहम हिस्सा रहे हैं। भारत की तरफ से उन्होंने वनडे मैचों में 3 शतक भी लगाए हैं। IPL में उनके 22 अर्धशतक रहे हैं। हालाँकि, अंतरराष्ट्रीय टी20 मैचों में वो सफल नहीं रहे और उन्हें अधिक मौका भी नहीं मिला। 38 वर्षीय अम्बाती रायडू ने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट और आईपीएल से भी 2023 में संन्यास ले लिया है।

उन्होंने मुख्यमंत्री जगन मोहन रेड्डी से मुलाकात के बाद ‘युवजन श्रमिका रायथू कॉन्ग्रेस पार्टी’ ज्वाइन की थी। कयास लगाए जा रहे थे कि 2024 में उन्हें पार्टी के टिकट पर चुनाव लड़ाया जा सकता है। वो अपने गृह क्षेत्र में सक्रिय भी हो गए थे। आंध्र प्रदेश में लोकसभा चुनाव के साथ ही विधानसभा के चुनाव भी होने हैं। अम्बाती रायडू को जब पार्टी में शामिल किया गया, उस कार्यक्रम में आंध्र प्रदेश के उप-मुख्यमंत्री K नारायण स्वामी और राजमपेटा से लोकसभा सांसद P मिथुन रेड्डी भी मौजूद थे

अम्बाती रायडू आंध्र प्रदेश के गुंटूर जिले में सक्रिय थे। जून 2023 में वत्तिचेरुकुरु मंडल के मुटलूरु गाँव में उन्होंने कहा था कि वो आमजनों की नसों को पढ़ने का प्रयास कर रहे हैं। उन्होंने कहा था कि वो लोगों की ज़रूरतों को समझ रहे हैं, ताकि उन्हें पूरा कर सकें। उन्होंने अमीनाबाद के मुलंकारेश्वरी मंदिर और फिरंगीपुरम के साईं बाबा मंदिर व येशु चर्च का दौरा किया था और लोगों से मिले थे। उन्होंने स्कूली बच्चों के साथ भोजन भी किया था। CSK ने 2023 में आईपीएल जीता था, जिसके बाद वो टीम मैनेजमेंट के साथ भी जगन रेड्डी से मिले थे।

6300 फीट ऊँचाई पर टूटा प्लेन का दरवाजा, सीट उड़ी हवा में, बच्चों की शर्ट फटी: 174 यात्रियों ने पास से देखी मौत

अलास्का एयरलाइंस के हवा में उड़ते एक प्लेन के दरवाजे टूटने का वीडियो खासा वायरल हो रहा है। इस वजह से इस प्लेन की शुक्रवार (5 जनवरी,2024) को संयुक्त राज्य अमेरिका के पोर्टलैंड, ओरेगॉन में इमरजेंसी लैंडिग करानी पड़ी। इसमें 174 यात्रियों और चालक दल के छह सदस्य सवार थे।

हालाँकि ये पता नहीं चल पाया है कि इस प्लेन का एग्जिट डोर कैसे टूटा और इसका एक हिस्सा हवा में कैसे उड़ गया। यह भी जानकारी नहीं मिल पाई है कि इस दौरान कोई घायल हुआ या नहीं। सोशल मीडिया पर शेयर किए जा रहे इस वाकये में प्लेन के पीछे के बीच के केबिन एग्जिट डोर की दीवार गायब दिखाई दे रही है।

अमूमन एरोप्लेन में ये दरवाज़ा किसी भी इमरजेंसी हालात में प्लेन से बाहर निकलने के मकसद से बनाया जाता है। लेकिन अलास्का एयरलाइंस के प्लेन में इसे एक्टिव मोड में नहीं रखा गया था और इसे स्थाई तौर से फिक्स कर दिया गया था।

शुक्रवार की रात अलास्का एयरलाइंस की फ्लाइट संख्या 1282 पोर्टलैंड इंटरनेशनल एयरपोर्ट से पोर्टलैंड से कैलिफ़ोर्निया के ओन्टारियो के लिए रवाना हुई थी। उड़ान भरने के कुछ वक्त बाद ही इस बोइंग 737-900/-9MAX प्लेन की खिड़की का एक बड़ा हिस्सा और खाली सीट बीच हवा में बाहर आ गया। इस वजह से प्लेन में सवार एक बच्चे की शर्ट फट गई।

जब प्लेन का डोर टूटा तो प्लेन 6,300 फीट की अधिकतम ऊंचाई तक पहुँच गया था। इस घटना के बाद इसे वापस पोर्टलैंड इंटरनेशनल एयरपोर्ट सुरक्षित तरीके से इमरजेंसी लैंडिंग करवाया गया। वहाँ के फेडरेल उड्डयन प्रशासन ने एक अलग बयान में कहा कि प्लेन चालक दल ने लैंडिंग से पहले प्लेन में मिड एयर प्रेशर की परेशानी की सूचना दी थी।

हालाँकि ये साफ नहीं हो पाया कि इसकी वजह से प्लेन में सवार कोई यात्री घायल हुआ हो। प्लेन के यात्रियों ने इस घटना को बुरा सपना बताया। न्यूयॉर्क टाइम्स ने इस प्लेन में सवार पोर्टलैंड की एक 22 साल की यात्री वी गुयेन के हवाले से लिखा कि वह उड़ान के दौरान तेज आवाज सुनकर जाग गई। तभी उन्होंने प्लेन के साइड में एक बड़ा छेद देखा।

वी गुयेन ने आगे कहा, “मैंने अपनी आँखें खोलते ही सबसे पहली चीज जो देखी वो मेरे ठीक सामने ऑक्सीजन मास्क था। मैंने अपने बाईं ओर देखा तो प्लेन के किनारे की दीवार गायब हो गई थी। पहली चीज़ जो मैंने सोची वह थी, मैं मरने जा रही हूँ।” उनकी दोस्त 20 साल की एलिजाबेथ का भी कुछ ऐसा ही अनुभव रहा।