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बंगाल में जिन ED अधिकारियों पर हमला, उन्हीं के खिलाफ ‘महिला का शीलभंग’ की FIR: भगोड़े शाहजहाँ शेख ने कहा – ‘ममता बनर्जी हमारे लिए काम कर रही’

पश्चिम बंगाल के उत्तरी 24 परगना में प्रवर्तन निदेशालय के अधिकारियों के खिलाफ FIR दर्ज की गई है। यह FIR ED की टीम पर संदेशखाली में हुए हमले के एक दिन बाद दर्ज की गई। इस हमले में ED के कई अधिकारी घायल हुए थे। यह हमला TMC नेता शाहजहाँ शेख के घर तलाशी लेने पहुँची ED की टीम पर हुआ था।

जानकारी के अनुसार, ED के अधिकारियों के खिलाफ यह FIR तृणमूल कॉन्ग्रेस के भगोड़े नेता शाहजहाँ शेख के घर की देखभाल करने वाले एक व्यक्ति करवाई है। FIR एक महिला का शीलभंग करने की कोशिश और घर में जबरदस्ती घुसने को लेकर करवाई गई है।

गौरतलब है कि 5 जनवरी, 2024 को पश्चिम बंगाल के उत्तरी 24 परगना जिले के संदेशखाली में राशन घोटाले में संलिप्त TMC नेता और जिला परिषद सदस्य शाहजहाँ शेख के घर तलाशी लेने गई थी। यहाँ पर ED की टीम और उनके साथ गए CRPF के सुरक्षाकर्मियों पर शाहजहाँ शेख के गुंडों ने हमला कर दिया।

इस हमले में कुछ ED अधिकारियों को गंभीर चोटें आईं। ED के अधिकारियों की गाड़ियाँ भी तोड़ दी गईं और उनके फ़ोन, पर्स और लैपटॉप आदि भी छीन लिए गए। ED का कहना है कि यह हमला शाहजहाँ शेख के भड़कावे पर हुआ था। इस हमले के बाद राज्य के विपक्ष ने बंगाल में राष्ट्रपति शासन लगाने की माँग की थी। ED पर हमले के बाद उसी के अधिकारियों के खिलाफ FIR भी करवा दी गई। राज्य में बीते दिनों में केन्द्रीय एजेंसियों का काम करना काफी मुश्किल हो रहा है।

ED पर बंगाल में हुए हमले के बाद तीन FIR दर्ज हुई हैं। एक FIR ईडी के खिलाफ जबकि बाकी दो हमला करने वालों के खिलाफ दर्ज हुई हैं। ED पर हमला करवाने वाला शाहजहाँ शेख अभी भी फरार है। शक है कि वह बांग्लादेश भाग सकता है। उसका एक कथित ऑडियो टेप भी सामने आया है। इसमें उसने कहा है कि ED और CBI से डरना नहीं है। उसका कहना है कि ममता बनर्जी ने उन सबके लिए संदेशखाली में काम किया है।

शाहजहाँ शेख द्वारा करवाए गए हमले में घायल ED के दो अधिकारियों को अस्पताल से छुट्टी मिल गई है जबकि एक अभी स्थिर हालत में अस्पताल में भर्ती हैं। इस हमले के एक दिन बाद शनिवार को भी ED पर बंगाल में राशन घोटाले की जाँच के दौरान हमला हुआ। TMC नेता शंकर आद्या की गिरफ्तारी के दौरान भी ED की टीम को निशाना बनाया गया।

कुछ दिन पहले ही ईडी ने पश्चिम बंगाल में राशन घोटाले का खुलासा किया था। इसके तहत सार्वजनिक वितरण प्रणाली का लगभग 30% राशन खुले बाज़ार में बेचा गया था। राशन की इस कथित चोरी से हुए फायदे को मालिकों और PDS वितरकों ने मिलकर आपस में बाँट लिया था।

शादी का वादा करके सेक्स करना रेप नहीं अगर प्रेमी-प्रेमिका शादी कर ले: सुप्रीम कोर्ट का फैसला, बलात्कार आरोपित को राहत

शादी का वादा करके रेप करने के आरोपों वाले बढ़ते मामलों के बीच सुप्रीम कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसला दिया है। एक मामले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि शादी का वादा करके शारीरिक बनाना झूठा है, क्योंकि बाद में दोनों ने शादी कर ली थी। इसके बाद शीर्ष न्यायालय ने आरोपित के खिलाफ दर्ज रेप की एफआईआर को रद्द करने का आदेश दे दिया।

कोर्ट ने माना कि मामला सहमति वाले संबंध का है और आखिरकार दोनों की शादी भी हो गई। इसलिए झूठे वादे का आरोप में आधार नहीं है। न्यायमूर्ति अभय एस. ओका और न्यायमूर्ति पंकज मिथल की खंडपीठ ने कहा, “आरोप है कि झूठे वादे के कारण शारीरिक संबंध बने। ये आरोप निराधार है क्योंकि उनका रिश्ता बाद में विवाह में बदल गया।”

अदालत ने यह भी कहा, “यह ऐसा मामला है, जहाँ एफआईआर में लगाए गए आरोप ऐसे हैं कि बयानों के आधार पर कोई भी विवेकशील व्यक्ति कभी भी इस निष्कर्ष पर नहीं पहुँच सकता है कि अपीलकर्ता के खिलाफ आगे बढ़ने के लिए पर्याप्त आधार है।”

दरअसल, यह पूरा मामला तीसरे पक्ष यानी लड़की के पिता द्वारा दायर शिकायत पर आधारित है। दरअसल, लड़की के पिता ने आरोप लगाया कि आरोपित दिल्ली में आईआईटी कोचिंग क्लासेस चला रहा है। उसकी बेटी और आरोपित मिले और एक-दूसरे से प्रेम करने लगे। इसके बाद आरोपित ने पीड़िता को शादी का आश्वासन दिया और बाद में आर्य समाज मंदिर से विवाह का प्रमाण पत्र तैयार करा लिया।

लड़की के पिता ने अपने आरोप में आगे कहा कि आरोपित लड़के ने धोखाधड़ी करके उसकी पीड़िता बेटी के साथ शारीरिक संबंध बनाकर रखा। इसके बाद आरोपित ने पीड़िता को उसके पिता के घर पर छोड़ दिया। इसके बाद आरोपित के खिलाफ शिकायत दर्ज की गई। इसको लेकर आरोपित लड़के ने हाईकोर्ट में एफआईआर रद्द करने की अर्जी दी, लेकिन हाईकोर्ट ने इससे इनकार कर दिया।

हाईकोर्ट में याचिका खारिज होने के बाद आरोपित ने सुप्रीम कोर्ट में अपील दायर की। सुप्रीम कोर्ट में जिरह के दौरान अपीलकर्ता के वकील ने 25 साल की पीड़िता द्वारा जारी की गई एक नोटिस का हवाला दिया। इस नोटिस में पीड़िता ने स्वीकार किया है कि उसके और अपीलकर्ता आरोपित के बीच विवाह संपन्न हुआ था।

अदालत ने कहा कि नोटिस के अनुसार, पीड़िता को अपीलकर्ता की पत्नी बताया गया है। नोटिस में यह भी स्वीकार किया गया कि अपीलकर्ता और पीड़िता के बीच विवाह संपन्न हुआ था। नोटिस में ये आरोप लगाया गया कि अपीलकर्ता ने पीड़िता को अपने घर से इस आधार पर भगा दिया कि उसके पिता ने 50 लाख रुपए चाहते थी। इस प्रकार, उस नोटिस द्वारा पीड़िता ने अपीलकर्ता से ‘तलाक’ की व्यवस्था करने के लिए कहा था।

छत्रपति शिवाजी महाराज के किले में बना लिया था अवैध मदरसा, कर दिया गया समतल: ऑपइंडिया की खबर का असर

5 जनवरी 2024 को महाराष्ट्र के कोल्हापुर के पावनगड़ में स्थित एक अवैध मदरसा राज्य सरकार ने जमींदोज कर दिया। मौके पर पुलिस प्रशासन की भारी मौजूदगी रही। मदरसे को गिराए जाने के वक्त किसी को भी उसके आसपास जाने की इजाजत नहीं दी गई। इस मदरसे पर ऑपइंडिया ने जुलाई 2023 में एक ग्राउंड रिपोर्ट प्रकाशित की थी और यहाँ अवैध कब्जे के बारे में बताया था।

हिन्दू संगठनों ने भी इस मामले में प्रशासन से शिकायत की थी, जिसके बाद यह मदरसा गिराया गया। मदरसे को चुपचाप 5-6 जनवरी 2024 को गिरा दिया गया। मदरसा गिराने की कार्रवाई रात 2 बजे चालू हुई और सुबह 9 बजे तक चलती रही। इस अवैध कब्जे को खाली करवाने के लिए कोल्हापुर के एसपी समेत अन्य बड़े अधिकारी पावनगड़ किले में एक दिन पहले से ही रुके हुए थे। यह इलाका राजस्व विभाग के अंतर्गत आता है।

पावनगड़ के जिस किले में यह मदरसा बनाया गया है, उसे छत्रपति शिवाजी महाराज ने वर्ष 1673 में बनाया था, यहाँ अब काफी बड़ी मुस्लिम आबादी रहती है। इस मदरसे को 1979 में मुस्लिम आबादी के सहारे इस्मा सैयद ने बनवाया था। वर्तमान में यहाँ बिहार और पश्चिम बंगाल के 45 बच्चे दीनी तालीम ले रहे थे। इन्हें शिरोली में स्थित एक मदरसे में 5 जनवरी की शाम को भेज दिया गया।

इस इलाके की सुरक्षा के लिए 400 पुलिसकर्मियों को तैनात किया गया था। इस मदरसे को गिराने को लेकर प्रशासन ने चुपचाप काम किया। मदरसे को 6 जनवरी 2024 की दोपहर तक पूरी तरह जमींदोज कर दिया गया। इस दौरान इलाके के तहसीलदार समेत अन्य अधिकारी मौजूद रहे।

स्थानीय हिन्दू समुदाय इस मदरसे के बारे लगातार शिकायतें कर रहा था। उनका कहना था कि ‘मदरसा जामिया अरबिया जीनतुल कुरान’ यहाँ सरकारी जमीन पर बनाया गया था और इसमें पढ़ने वाले सभी छात्र दिल्ली, बंगाल और बिहार जैसे राज्यों से आते हैं।

बजरंग दल ने भी इस मामले में आवाज उठाई थी। उसने अपने पत्र में लिखा था, “पावनगढ़ के ऐतिहासिक किले पर बना मदरसा अवैध है और यहाँ पढ़ने वाले छात्र महाराष्ट्र के नहीं हैं। इस तरह के अवैध अतिक्रमण से किले का ऐतिहासिक महत्व प्रभावित हो रहा है। किले पर मुस्लिमों ने भी घर बना लिए हैं। हम अवैध कब्जे के खिलाफ सख्त कार्रवाई की माँग करते हैं और किले की पवित्रता बनाए रखने के लिए इस कब्जे को हटाने की भी माँग करते हैं।”

महाराष्ट्र सरकार ने स्पष्ट किया है कि मदरसा सरकारी जमीन पर ही बना है और इस मामले में जाँच जारी है। जो भी दोषी होगा, उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

‘मुस्लिम नहीं देगा हर बार कुर्बानी’ : राम मंदिर प्राण-प्रतिष्ठा से पहले ‘सेकुलर’ नेता लगा रहे कट्टरपंथ की आग, 22 जनवरी को लेकर फैला रहे डर

अयोध्या में होने वाले राम मंदिर प्राण-प्रतिष्ठा को लेकर जहाँ देश भर में खुशी का माहौल है। हर समुदाय उल्लास में डूबा है। मुस्लिम महिलाएँ तक भगवा वस्त्र पहन पहनकर अयोध्या के लिए रवाना हो रही हैं। ऐसे समय में खुद को सेकुलर बताने वाले कट्टरपंथी नेताओं ने भड़काऊ बयानबाजी की है। किसी ने मुस्लिमों को बाबरी के नाम पर भड़काया है तो किसी ने उन्हें राम मंदिर के नाम पर डराया है।

इत्तेहाद-ए-मिल्लत काउंसिल के प्रमुख मौलाना तौकीर रजा ने राम मंदिर पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर सवाल उठाते हुए कहा कि हर बार मुसलमान कुर्बानी नहीं देगा। उन्होंने कहा, “हमसे हमारी मस्जिद छीनी जा रही है। इस बात को हम बर्दाश्त नहीं कर सकते। ये बात किसी से छिपी नहीं है कि भाजपा को हमारी अजान से भी दिक्कत है।”

उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर सवाल उठाते हुए कहा, “सुप्रीम कोर्ट का फैसला पहले से तय था, जिसने ये निर्णय दिया उसे राज्यसभा भेज दिया गया।”

इसी तरह असम के बारपेटा के ऑल इंडिया यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट अध्यक्ष बदरुद्दीन अजमल ने भी मुस्लिम युवाओं में डर फैलाते हुए कहा कि 20 से 25 जनवरी तक सारे मुसलमानों को अपने घर में रहना होगा।

उन्होंने कहा, “हमें सतर्क रहना होगा। मुसलमानों को 20 से 25 जनवरी तक यात्रा करने से बचना चाहिए। पूरी दुनिया राम जन्मभूमि में रामलला की मूर्ति स्थापित होते देखेगी। लाखों लोग बसों, ट्रेनों, हवाई जहाज आदि से यात्रा करेंगे। शांति बनाए रखनी होगी।” अजमल ने कहा, “इस दौरान हमें यात्रा करने से बचना होगा और घर ही रहना होगा। भाजपा मुसलमानों की सबसे बड़ी दुश्मन है। यह हमारे जीवन, आस्था, मस्जिदों, इस्लामी कानूनों और अजान की दुश्मन है।”

गौरतलब है कि जहाँ ये नेता राम मंदिर प्राण-प्रतिष्ठा पर माहौल बिगाड़ने के प्रयास में लगे हैं। वहीं काशी की मुस्लिम महिलाएँ अयोध्या पहुँच रही हैं। कल ही खबर आई थी कि नाजनीन अंसारी नाम की महिला ने कहा कि धर्म परिवर्तन कर लेने से पुरखे नहीं बदल जाते। भगवान श्रीराम ही मुस्लिमों के पूर्वज हैं। नाजनीन ने कहा है कि वो मुस्लिमों से अपील करेंगी कि वो लोग भी राम ज्योति प्रजवलित करें।

भारत के खिलाफ उगला जहर तो मालदीव के राष्ट्रपति, विदेश मंत्रालय की वेबसाइट हुई डाउन, PM मोदी के ट्वीट के बाद बिलबिलाए चीन के चमचे

मालदीव के राष्ट्रपति और विदेश मंत्रालय समेत तमाम सरकारी विभागों की वेबसाइट 6 जनवरी, 2024 की रात को चलना बंद हो गईं। इनके एकाएक रुकने के पीछे हैकिंग का शक जताया गया। गौरतलब है कि इससे पहले मालदीव के कई अकाउंट्स ने प्रधानमंत्री मोदी के लक्षद्वीप दौरे और भारत को लेकर अपमानजनक ट्वीट किए थे।

6 जनवरी की रात को इन सभी वेबसाइट ने काम करना बंद कर दिया। हालाँकि, मालदीव की सरकार ने इसके पीछे तकनीकी खराबी का कारण दिया। बड़ी संख्या पर सोशल मीडिया में इसे मालदीव के लोगों द्वारा किए गए अपमानजनक ट्वीट का बदला कहा गया। जानकारी के अनुसार, अब यह सभी वेबसाइट दोबारा चालू हो चुकी हैं।

गौरतलब है कि हाल ही में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने लक्षद्वीप का दौरा किया था और विदेशों में जाने से पहले यहाँ लोगों को घूमने की सलाह दी थी। मालदीव का हाल के दिनों में भारत के प्रति रवैया भी काफी बदला है और इसके नए राष्ट्रपति मुहम्मद मुइज़्ज़ू चीन के पिछलग्गू माने जाते हैं।

भारतीय सोशल मीडिया यूजर्स के लक्षद्वीप को बढ़ावा देने पर मालदीव के कई बड़े नामवर अकाउंट्स चिढ़ गए और भारत, प्रधानमंत्री मोदी समेत भारतीय संस्कृति पर कई अपमानजनक बातें कहीं। यह सब कहने वालों में मुइज़्ज़ू की सरकार में शामिल कुछ मंत्री भी थे।

इसके बाद भारतीय सोशल मीडिया यूजर्स ने मालदीव को करारा जवाब दिया और याद दिलाया कि वर्ष 1988 में मात्र 100 लड़ाकों ने मालदीव पर कब्जा कर लिया था। इसके बाद भारतीय सेना ने ऑपरेशन कैक्टस चला कर उनकी जान बचाई थी और उनके देश पर कब्ज़ा नहीं होने दिया था।

मालदीव की मुईज़्ज़ू सरकार में युवा मामलों की राज्य मंत्री मरियम शिउना ने प्रधानमंत्री के लक्षद्वीप की तस्वीरें डालने पर उन्हें इजरायल की कठपुतली और अन्य अपमानजनक शब्द कहे। इसके बाद उसने ट्वीट डिलीट कर दिया।

इसके अलावा मुइज़्ज़ू की पार्टी के एक सदस्य जाहिद रमीज ने भारतीयों पर टूरिज्म में मालदीव से प्रतिस्पर्धा ना कर पाने का दावा करते हुए नस्लीय टिप्पणी की। बाद में सामने आया कि यही जाहिद पहले भारत की नागरिकता माँग चुका है। भारतीयों के खिलाफ मालदीव में इस समय चीन की सहायता से घृणा अभियान चलाया जा रहा है।

रामकाज के लिए छोड़ी SBI की सरकारी नौकरी, कारसेवा में पहुँचे अयोध्या: राँची के वीरेंद्र विमल की कहानी, जब ट्रेन रोककर लोगों ने किया था स्वागत

अयोध्या में राममंदिर देखने की प्रतीक्षा करते हुए हिंदुओँ की कितनी ही पीढ़ियाँ निकल गईं, लेकिन देर से ही सही यह स्वप्न अब पूरा होेने जा रहा है। हिंदुओं की मोक्षदायिनी सप्तपुरियों में से एक अयोध्या पुरी के नवनिर्मित राम मंदिर में 22 जनवरी 2024 को भगवान राम बाल रूप में पधारेंगे। इसको लेकर पूरा देश जोश एवं उमंग से भरा हुआ है। हालाँकि, इस दिन को देखने के लिए कई लोगों ने कई तरह के बलिदान दिए।

ऐसे ही एक व्यक्ति हैं, जिनका नाम है वीरेंद्र विमल। विमल को रामकाज की ऐसी लगन लगी कि उन्होंने भारतीय स्टेट बैंक की सरकारी नौकरी छोड़ दी। बैंक में वरीय सहायक की नौकरी करने वाले विमल ने शुरुआत में झारखंड की राजधानी राँची (उस समय बिहार का हिस्सा था झारखंड) बाहर की पोस्टिंग नहीं लगी। उन्हें लगा कि वे राँची से बाहर जाएँगे तो उनका काज प्रभावित होगा। हालाँकि, जब नौकरी बाधा बनने लगी तो उसे छोड़ दी।

अब वे विश्व हिंदू परिषद (VHP) के पूर्णकालिक सदस्य हैं। उन पर क्षेत्र मंत्री का दायित्व है। वर्तमान समय में वीरेंद्र विमल झारखंड और बिहार का प्रवास करते हैं। 22 जनवरी को अयोध्या में रामलला की प्राण प्रतिष्ठा होने वाली है, इसको लेकर वे पूजित अक्षत को घर-घर बाँटने में लगे हुए हैं। इसके बाद अयोध्या में व्यवस्था को सँभालने के लिए 15 जनवरी के बाद वहाँ जाने को तैयार बैठे हैं।

दैनिक जागरण की रिपोर्ट के मुताबिक, वीरेंद्र विमल की साल 1980 में स्टेट बैंक में नौकरी लगी थी। हालाँकि, भगवान राम के प्रति अपने जीवन को समर्पित करने वाले विमल अगले ही साल, यानी 1981 में वीएचपी से जुड़ गए। 1987 से इसके सक्रिय कार्यकर्ता बन गए। सरकारी नौकरी में रहते हुए उन्होंने वीएचपी में कई दायित्वों का निर्वहन किया। इसके लिए वे राँची से बाहर पोस्टिंग नहीं लेते थे।

नियमानुसार पोस्टिंग नहीं लेने के कारण वीरेंद्र विमल को प्रोन्नति नहीं मिली। हालाँकि, उन्हें प्रोन्नति की कोई चिंता नहीं हुई। हालाँकि, आगे चलकर साल 2001 में उन्होंने नौकरी से इस्तीफा दे दिया। इस बीच साल 1991 और 1992 में जब मंदिर आंदोलन तेज हुआ तो वे नौकरी में रहते हुए अयोध्या कारसेवा के लिए पहुँचे। इस दौरान उन्होंने कई लोगों का नेतृत्व भी किया।

विमल कहते हैं, “6 दिसंबर 1992 का वो दिन याद है जब कारसेवकों ने विवादित ढाँचे को तीन-चार घंटे में गिरा दिया था। उस कारसेवा में राँची के 100 लोगों की टोली का मुझे प्रमुख बनाया गया था। हम लोग राँची से ट्रेन में गोमो गए। वहाँ से आसपास के स्टेशनों का टिकट लिया, क्योंकि अयोध्या जी का टिकट लिए पैसेंजरों को बिहार के स्टेशनों पर उतार लिया जा रहा था।”

6 दिसंबर को याद करते हुए विमल आगे कहते हैं, “विवादित ढाँचे के चारों तरफ लगाए गए लोहे की पाइप के घेरों को कारसेवकों ने उखाड़ दिया। पाइप से दीवार को लोग गिराने लगे। तीन-चार घंटे में ही वह विवादित ढाँचा ध्वस्त हो गया। फिर उसी रात से वहाँ मंदिर का निर्माण शुरू कर दिया गया। 7 दिसंबर 1992 की सुबह तक अस्थाई मंदिर बनकर तैयार हो गया।”

उन्होंने बताया कि जब वे अयोध्या से राँची पहुँचने वाले थे तो आरा गेट पर राजदेव यादव नामक व्यक्ति ने ट्रेन का सिग्नल डाउन करके उन्हें ट्रेन से उतरने को कहा। यादव ने कहा कि वे लोग उन लोगों का स्वागत करना चाहते हैं। दरअसल, स्वागत की तैयारी राँची स्टेशन पर की गई थी, लेकिन पता चला कि वहाँ पुलिस उन्हें गिरफ्तार करने की तैयारी कर रही है। इसके बाद लोगों ने राँची स्टेशन से पहले ही कारसेवकों को उतारकर स्वागत कर दिया।

‘माँ मैं जा रहा, शायद अब न लौट पाऊँ’: यही बोल कर निकले अयोध्या, बूढ़े माँ-बाप को नहीं मिली लाश, धर्म प्रचार के लिए जिन्होंने शादी तक को ठुकराया

अयोध्या में निर्माणाधीन रामजन्मभूमि पर मूर्ति की प्राण प्रतिष्ठा 22 जनवरी 2024 को प्रस्तावित है। मूर्ति की स्थापना प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा किया जाना तय हुआ है, जिसमें देश और विदेश के कई नामचीन लोग मौजूद होंगे। कई सदियों बाद आए इस अवसर पर हिन्दू समाज उन बलिदानियों को याद कर रहा है, जिन्होंने मुगल से मुलायम काल तक रामजन्मभूमि मुक्ति आंदोलन में अपने प्राण न्योछावर कर दिए। उन्हीं तमाम ज्ञात-अज्ञात बलिदानियों में से एक थे उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ निवासी भगवान सिंह जाट। ऑपइंडिया ने भगवान सिंह के परिवार में सम्पर्क करके वर्तमान हालातों की जानकारी ली।

2 नवंबर 1990 को जब तत्कालीन मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव ने ‘अयोध्या में परिंदा भी पर नहीं मार सकेगा’ का एलान किया था, तब भगवान सिंह रामजन्मभूमि के पास पहुँच गए थे। यहाँ पर वो तत्कालीन सरकार के आदेश पर जवानों द्वारा चलाई गोली का शिकार हो गए। भगवान सिंह मूलतः अलीगढ़ जिले के नगला बलराम गाँव के निवासी थे। फ़िलहाल अब उनका परिवार अलीगढ़ के ही अतुर्रा गाँव में रहता है। पारम्परिक तौर पर परिवार की आजीविका का मूल साधन खेती-किसानी है। भगवान सिंह कुल 3 भाई थे। अन्य 2 भाइयों के नाम विजय पाल सिंह और नेपाल सिंह हैं। 4 साल पहले विजयपाल सिंह भी स्वर्ग सिधार गए हैं। उनके 2 बेटे हैं, जिसमें एक किसान हैं और दूसरा योगी सरकार में निकाली गई पुलिस भर्ती की तैयारी कर रहा है।

धर्म प्रचार के लिए टाल रहे थे शादी

ऑपइंडिया ने दिवंगत भगवान सिंह जाट के भतीजे हरिओम सिंह से बात की। उन्होंने बताया कि वीरगति पाने के दौरान उनके चाचा की उम्र महज 24 वर्ष थी। वो बचपन से ही संघ (RSS) की शाखाओं में जाते थे। शुरुआती पढ़ाई अलीगढ़ में करने के बाद उच्च शिक्षा हासिल करने के लिए भगवान सिंह मथुरा चले गए थे। यहाँ भी उन्होंने हिंदुत्व का प्रचार-प्रसार जारी रखा। भगवान सिंह ने विवाह भी नहीं किया था। परिवार वालों द्वारा रूचि दिखाने पर अपने विवाह की बात को टाल देते थे।

बचपन से ही संघ की शाखाओं में जाते थे भगवान सिंह

जा रहा हूँ माँ, शायद फिर न लौट पाऊँ

हरिओम सिंह ने हमें आगे बताया कि जब उनके चाचा भगवान सिंह ने सुना कि अयोध्या में कारसेवा के लिए रामभक्तों का जमावड़ा शुरू हो रहा है तो वो खुद को नहीं रोक सके। अयोध्या कूच करने से पहले भगवान सिंह मथुरा से अपने घर अलीगढ़ आए। यहाँ उन्होंने अपनी माँ के चरण छुए और कहा, “माँ मैं जा रहा हूँ। शायद अब न लौट पाऊँ।” हरिओम सिंह कहते हैं कि तब उनकी दादी शीशकौर देवी ये नहीं समझ पाईं कि उनका बेटा अयोध्या जाने की बात कर रहा है। उन्हें लगा कि भगवान सिंह मथुरा या कहीं आसपास जा रहे हैं।

हरिओम सिंह ने आगे बताया कि 28 अक्टूबर 1990 को उनके चाचा घर से निकले थे। तब चारों तरफ पुलिस का पहरा था। अलीगढ़ से अयोध्या की दूरी लगभग 500 किलोमीटर है। तब रेल और बस मार्ग के अलावा ग्रामीण इलाकों की पगडंडियों पर भी मुलायम सिंह के आदेश पर पुलिस ने पहरा बिठा रखा था। अयोध्या जाने या राम का भजन करने वालों को ही हिरासत में लेकर टॉर्चर के बाद जेल भेज दिया जा रहा था। बकौल हरिओम सिंह बावजूद इसके उनके चाचा भगवान सिंह मुलायम सरकार की तमाम नाकेबंदी को धता बता कर अयोध्या पहुँच गए थे।

हरिओम सिंह आगे बताते हैं कि 2 नवंबर 1990 में अयोध्या में कारसेवकों के हुए नरसंहार में उनके चाचा भी मृतकों में एक थे। बताया जा रहा है कि गोली भगवान सिंह के सीने पर लगी थी। उनके प्राण रामजन्मभूमि के ही कहीं आसपास निकले थे। भगवान सिंह के घर वालों को 2 नवंबर के बाद उनके बलिदान होने की जानकारी जत्थे में शामिल अन्य कारसेवकों के जरिए हुई थी।

कई दिन भटके बुजुर्ग माता-पिता लेकिन नहीं मिली लाश

हमसे बात करते हुए हरिओम सिंह भावुक हो गए। थोड़ी देर चुप होकर उन्होंने कहा कि बेटे की मौत की जानकारी मिलते ही उनके बुजुर्ग दादा-दादी अयोध्या निकल पड़े। पाबन्दी की वजह से पहले तो उन्हें अयोध्या पहुँचने में ही दिक्कत आई लेकिन जैसे-तैसे वो पहुँच गए तो बेटे का शव तलाशना भूसे के ढेर में सुई खोजने जैसा था। हरिओम के दादा जवाहर सिंह जाट ने कई दिनों तक अपनी बूढ़ी पत्नी के साथ अपने बेटे के शव की तलाश की लेकिन अंत में नाकाम रहे। अयोध्या की गली-गली और नदी के किनारे तक भटकने के दौरान शासन और प्रशासन से जुड़े लोगों ने भी उनकी कोई मदद नहीं की। आखिरकार दोनों खाली हाथ भारी मन से अलीगढ़ लौटे थे।

जीवित माँ के आज भी बहते हैं आँसू

हरिओम सिंह को आशंका है कि उनके चाचा की लाश तब अयोध्या में तैनात पुलिसकर्मियों ने सरयू नदी में फेंक दी थी। भगवान सिंह के बलिदान होने के बाद उनके पिता जवाहर सिंह काफी दुखी रहने लगे। इसी दुःख में थोड़े समय बाद आख़िरकार जवाहर सिंह ने प्राण त्याग दिए। भगवान सिंह की 92 वर्षीया माँ शीशकौर देवी आज भी जीवित हैं। हरिओम सिंह बताते हैं कि बलिदानी बेटे को अंतिम बार न देख पाने के चलते आज भी उनकी दादी के आँसू निकलते हैं। हालाँकि अयोध्या में भगवान राम का मंदिर बनने पर हरिओम सिंह का पूरा परिवार खुश है। यह परिवार इस मौके को भगवान सिंह का बलिदान सार्थक होना बता रहा है।

हमें चाचा के बलिदान पर गर्व, जरूरत पड़ी तो हम भी तैयार

भगवान सिंह के बलिदान की याद दिलाने के लिए अलीगढ़ में आज भी उनका एक स्मृति चिन्ह मौजूद है। यह स्मृति चिन्ह एक छोटी सी मूर्ति के रूप में उनके पैतृक गाँव नगला बलराम में बनी हुई है। मूर्ति भगवान सिंह की ही जमीन में उनके परिवार वालों ने बनवाई है। हरिओम सिंह ने उम्मीद जताई कि उनके चाचा की एक स्मृति भगवान राम के नवनिर्मित मंदिर में भी होगी। बकौल हरिओम सिंह यह स्मृति अनगिनत लोगों को धर्म के लिए लड़ने की प्रेरणा देगी। हरिओम सिंह ने यह भी कहा कि उन्हें अपने चाचा के बलिदान पर गर्व है और जरूरत पड़ी तो राम के नाम पर वो खुद भी वीरगति पाने को तैयार हैं।

परिजनों द्वारा गाँव में बनवाया गया भगवान सिंह का स्मारक

हरिओम सिंह 3 भाई हैं। उनके पिता नेपाल सिंह खेती-बाड़ी करते हैं। नेपाल सिंह का बड़ा बेटा उत्तर प्रदेश पुलिस में है और फिलहाल गाजियाबाद में तैनात है। वहीं हरिओम सिंह ने कई डिग्रियाँ ले रखीं हैं। वो अपने छोटे व तीसरे नंबर के भाई के साथ शिक्षक भर्ती की तैयारी में जुटे हैं। हरिओम सिंह यह भी चाहते हैं कि वर्तमान सरकार उनके साथ रामजन्मभूमि आंदोलन में बलिदान हुए अन्य बलिदानियों के परिजनों पर ध्यान दे। साथ ही हरिओम की इच्छा है कि बलिदानियों के परिवारों को रामजन्मभूमि दर्शन में सहूलियत दी जाए।

नमाज पढ़ती पुजारी की बेटी, बिरयानी का टेस्ट और भगवान राम खाते थे मांस: Netflix की Annapoorani फिल्म, शिकायत दर्ज

फिल्मों के नाम पर हिंदूविरोधी कंटेंट परोसा जाना कोई नई बात नहीं है। हाल में ये काम अन्नपूर्णी फिल्म के जरिए हुआ जो नेटफ्लिक्स पर स्ट्रीम हो रही है। इस फिल्म में दिखाया गया है कि एक हिंदू ब्राह्रण लड़की बिरयानी बनाने के लिए नमाज पढ़ने लगती है। फिल्म का हीरो उसे समझाता है कि श्रीराम भी मांस खाते थे। अब इस फिल्म के खिलाफ और इसे प्रमोट करने वाले नेटफ्लिक्स, zee के खिलाफ मुंबई में शिकायत हुई है।

हिंदू आईटी सेल के संस्थापक रमेश सोलंकी ने अपने एक्स अकॉउंट पर लिखा, “मैंने एंटी हिंदू जी और एंटी हिंदू नेटफ्लिक्स के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई है। ऐसे समय में जब पूरी दुनिया भगवान श्री राम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा की खुशी मना रही है। उस समय यह हिंदू विरोधी फिल्म अन्नपूर्णनी नेटफ्लिक्स पर रिलीज हुई है, जिसे ज़ी स्टूडियोज, नाद स्टूडियोज और ट्राइडेंट आर्ट्स द्वारा निर्मित किया गया है।”

इसमें दिखाया गया है कि हिंदू पूजारी की बेटी बिरयानी पकाने के लिए नमाज पढ़ती है। एक्टर (फरहान) अभिनेत्री को यह कहकर मांस खाने के लिए प्रेरित करता है कि भगवान श्री राम भी वनवास के दौरान मांस खाते थे। इसके अलावा रमेश सोलंकी का आरोप है कि इस फिल्म में लव जिहाद को बढ़ावा दिया गया है।

सोलंकी ने कहा कि ये फिल्म प्राण प्रतिष्ठा के समय इसलिए रिलीज की गई है ताकि हिंदुओं की भावनाएँ आहत हो सकें। अपनी शिकायत में उन्होंने धार्मिक भावना आहत करने के मामले में एक्टर नीलेश कृष्णा, जय,नयनतारा, जतिन सेठी, आर रविंद्रन, पुनीत गोएनका, शरीक पटेल, मोनिका शेरगिल का नाम दिया है।

बता दें कि अन्नपूर्णी फिल्म का विरोध सोशल मीडिया पर पिछले एक हफ्ते से हो रहा है। लोग कह रहे हैं कि आखिर खाने पर बनाई गई फिल्म में मजहब क्यों घुसाया गया। इसमें हिंदू पुजारी लड़की का बॉयफ्रेंड मुस्लिम दिखाया गया है। उसे पूजा की जगह इफ्तारी करते दिखाया गया है।

ऐसे ही फिल्म के शेयर होते सीन में दिखाया गया कि ब्राह्मण लड़की शेफ इंडिया के प्रोग्राम में नमाज पढ़कर बिरयानी बनाती है और जब उससे जज पूछते हैं कि उसने ऐसा क्यों किया तो वो जवाब देती है कि उसे जिसने बिरयानी सिखाई है उनका मानना है नमाज पढ़ने से इसमें स्वाद आता है।

इस फिल्म के एक और सीन में हीरो लड़की को मांस खिलाने के लिए प्रेरित करता है वो भी भगवान श्रीराम को बदनाम करके। वो वाल्मिकी रामायण का उदाहरण देकर कहता है कि वनवास के समय श्रीराम, लक्ष्मण, सीता ने जानवर को मारकर खाया था। सीन की क्लिप वायरल होने के बाद हिंदू विरोधी लोग इसे सनातन को बदनाम करने के लिए सोर्स की तरह इस्तेमाल कर रहे हैं जबकि हिंदू लोग सवाल कर रहे है कि आखिर ऐसी बातें कहाँ पर कही गई हैं।

गैंगरेप के आरोपित 70 वर्षीय मेवाराम को कॉन्ग्रेस ने पार्टी से निलंबित किया, सोशल मीडिया पर वायरल है अश्लील वीडियो

नाबालिग बच्चियों से गैंगरेप के आरोपित कॉन्ग्रेस के पूर्व विधायक मेवाराम जैन को पार्टी से निलंबित कर दिया है। 70 साल के मेवाराम राजस्थान के बाड़मेर से तीन बार विधायक रह चुके हैं। मामला सामने आने के बाद कॉन्ग्रेस ने मौन धारण कर लिया था, लेकिन जब मेवाराम के कई अश्लील वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने लगे तो पार्टी को यह कदम उठाना पड़ा।

निलंबन के आदेश में कॉन्ग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने लिखा, “मेवाराम के अनैतिक कार्य से स्पष्ट होता है कि उन्होंने कॉन्ग्रेस के संविधान के खिलाफ आचरण किया है।” बताते चलें कि अश्लील वीडियो वायरल होने से पहले मेवाराम के खिलाफ एक पीड़िता ने 20 दिसंबर 2023 को जोधपुर में गैंगरेप का मामला दर्ज कराया था।  

पीड़िता ने मेवाराम सहित 9 लोगों के खिलाफ जोधपुर के राजीव गाँधी नगर थाने में ST-SC Act, POCSO, गैंगरेप सहित 18 धाराओं में मामला दर्ज करवाया था। पीड़िता ने कहा था कि जब मेवाराम विधायक थे तो अपने रसूख के दम पर अपने खिलाफ कार्रवाई नहीं होने दी। इतना ही नहीं, मेवाराम ने मामला दर्ज कराकर पीड़िता को सेक्सटॉर्शन में गिरफ्तार करवा दिया था।

साल 2022 में मेवाराम के रेप से जुड़े वीडियो के तीन स्क्रीनशॉट वायरल हुए थे। तब मेवाराम ने बाड़मेर कोतवाली थाने में सेक्सटॉर्शन का केस कराया था। इस मामले में 2 महिलाओं, एक वकील और एक अन्य व्यक्ति की गिरफ्तारी हुई थी। उन पर आरोप लगाए गए थे कि अश्लील वीडियो दिखाकर ये लोग मेवाराम के साथी रामस्वरूप आचार्य से 5 करोड़ रुपए माँगे। मामला 50 लाख में तय हुआ, लेकिन फिर उनसे 1 करोड़ रुपए माँगने लगे।

पिछले साल दिसंबर में पीड़िता ने थाने में रिपोर्ट दर्ज करवाते समय कहा कि मेवाराम और उनके साथी रामस्वरूप आचार्य ने न केवल उसका, बल्कि उसकी सहेली का भी रेप किया गया। इतना ही नहीं, मेवाराम ने उसकी नाबालिग बेटी का भी यौन शोषण किया। पीड़िता ने कहा था कि जब मेवाराम और रामस्वरूप उनका रेप कर करके थक गए तो उन्होंने पीड़िता से 15-16 साल की लड़कियों को लाने को कहा।

पुलिस ने इस मामले में पूछताछ पीड़िता की सहेली से की तो कहानी और भयावह निकली। सहेली ने बताया कि उसे तो प्राइवेट पार्ट में डंडा डालकर प्रताड़ित किया गया था। महिला के आरोपों के बाद मेडिकल करवाया गया था और बयान भी दर्ज हुए थे। वहीं मेवाराम ने कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था जिसके बाद 25 जनवरी तक उसकी गिरफ्तारी पर रोक लगा दी गई थी।

बताते चलें कि 20 नवंबर 2023 को प्रवर्तन निदेशालय की जयपुर इकाई ने मेवाराम के खिलाफ धनशोधन कानून के तहत मामला दर्ज किया था। कोतवाली थाने के सेक्सटॉर्शन केस में 50 लाख रुपए की लेन-देन को आधार बनाते हुए 5 करोड़ रुपए की अवैध लेनदेन का आरोप लगाया गया। इसके बाद 25 नवंबर 2023 को मेवाराम को पूछताछ के लिए ईडी ने नोटिस दिया।

उधर, मेवाराम जैन ने राजस्थान हाईकोर्ट में इसको लेकर अपील दायर की। अपनी अपील में मेवाराम ने कहा कि अभी वे विधानसभा चुनाव लड़ रह रहे हैं। इसे ध्यान में रखते हुए उन्हें राहत दी जाए। इसके बाद हाईकोर्ट ने उन्हें 25 जनवरी 2024 तक राहत दे दी। हालाँकि, बाड़मेर से तीन बार विधायक रहे मेवाराम को इस चुनाव में भाजपा की बागी निर्दलीय उम्मीदवार प्रियंका चौधरी ने हरा दिया।

बाइकों से आए ‘अज्ञात’, मौलाना को दिनदहाड़े गोलियों से छलनी कर निकल लिए: हिन्दुओं के खिलाफ उगलता था ज़हर, पाकिस्तान में ‘सुन्नी उलेमा काउंसिल’ का था उपाध्यक्ष

मौलाना मसूद उर रहमान उस्मानी… सुन्नी उलेमा काउंसिल का उपाध्यक्ष। कट्टरपंथी तकरीरों के लिए मशहूर। शियाओं का दुश्मन नंबर -1… वो अब नहीं रहा। पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में रहने वाला मौलाना मसूद-उर-रहमान उस्मानी शियाओं के प्रति कट्टरता के लिए जाना जाता रहा है। वो हिंदुओं के खिलाफ भी जहर उगलता था, लेकिन आजकल ईरान को लेकर काफी तल्ख रवैया रखता था। उसकी हत्या का सीसीटीवी फुटेज सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है, जिसमें बिजली की गति से आए हमलावरों के समूह ने उसे दिनदहाड़े बीच सड़क पर गोलियों से छलनी कर दिया।

इस्लामाबाद में मौलाना मसूद उर रहमान उस्मानी की हत्या में दो से तीन बाइकों का इस्तेमाल किया गया है। CCTV फुटेज में भी हत्यारे दिख रहे हैं, वो मास्क लगाए हुए हैं। वो व्यस्त सड़क पर ही उस्मानी को ठोक देते हैं और फरार हो जाते हैं। इस हत्याकांड के मामले में अभी तक कोई भी हत्यारा सुरक्षाबलों के हत्थे नहीं चढ़ा है। इस हत्याकांड के साथ ही एक बार फिर से पाकिस्तान में ‘अज्ञात हमलावरों’ की दहशत कायम हो गई है।

सीसीटीवी फुटेज में साफ देखा जा सकता है कि किस तरह कई गाड़ियों पर सवार होकर हत्यारे बेखौफ होकर मौलाना को मौत के घाट उतार देते हैं और आराम से फरार हो जाते हैं।

भारत के खिलाफ भी उगलता था आग, लेकिन इस बार ईरान था नाराज

मौलाना उस्मानी भारत के खिलाफ भी आग उगलता रहा है। वो भड़काऊ भाषण देने के लिए बदनाम था। उसने भारत में कई बार जिहाद का ऐलान किया था। हालाँकि, भारत में किसी आतंकी हमले में उसका हाथ कभी नहीं आया था। वहीं, दूसरी ओर ईरान इस समय पाकिस्तान के सुन्नी मौलानाओं से बेहद नाराज है। हाल ही में ईरान के सिस्तान-बलूचिस्तान इलाके में सुरक्षा बलों पर हमला हुआ था, जिसमें कई सुरक्षाकर्मियों की जान चली गई थी।

ईरान ने इन हमलों का आरोप पाकिस्तानी आतंकियों और कट्टरपंथियों पर लगाया था। ऐसे में शक जताया जा रहा है कि इस बार ‘अज्ञात हमलावरों’ का लिंक ईरान से जुड़ रहा है। वैसे भी, उस्मानी की अंतिम यात्रा में ईरान विरोधी नारे लगाए गए हैं, जो इस बात की तरफ इशारा है कि ईरान के खिलाफ किस तरह से पाकिस्तानी मौलानाओं में गुस्सा भरा है।