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‘माँ मैं जा रहा, शायद अब न लौट पाऊँ’: यही बोल कर निकले अयोध्या, बूढ़े माँ-बाप को नहीं मिली लाश, धर्म प्रचार के लिए जिन्होंने शादी तक को ठुकराया

अयोध्या में निर्माणाधीन रामजन्मभूमि पर मूर्ति की प्राण प्रतिष्ठा 22 जनवरी 2024 को प्रस्तावित है। मूर्ति की स्थापना प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा किया जाना तय हुआ है, जिसमें देश और विदेश के कई नामचीन लोग मौजूद होंगे। कई सदियों बाद आए इस अवसर पर हिन्दू समाज उन बलिदानियों को याद कर रहा है, जिन्होंने मुगल से मुलायम काल तक रामजन्मभूमि मुक्ति आंदोलन में अपने प्राण न्योछावर कर दिए। उन्हीं तमाम ज्ञात-अज्ञात बलिदानियों में से एक थे उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ निवासी भगवान सिंह जाट। ऑपइंडिया ने भगवान सिंह के परिवार में सम्पर्क करके वर्तमान हालातों की जानकारी ली।

2 नवंबर 1990 को जब तत्कालीन मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव ने ‘अयोध्या में परिंदा भी पर नहीं मार सकेगा’ का एलान किया था, तब भगवान सिंह रामजन्मभूमि के पास पहुँच गए थे। यहाँ पर वो तत्कालीन सरकार के आदेश पर जवानों द्वारा चलाई गोली का शिकार हो गए। भगवान सिंह मूलतः अलीगढ़ जिले के नगला बलराम गाँव के निवासी थे। फ़िलहाल अब उनका परिवार अलीगढ़ के ही अतुर्रा गाँव में रहता है। पारम्परिक तौर पर परिवार की आजीविका का मूल साधन खेती-किसानी है। भगवान सिंह कुल 3 भाई थे। अन्य 2 भाइयों के नाम विजय पाल सिंह और नेपाल सिंह हैं। 4 साल पहले विजयपाल सिंह भी स्वर्ग सिधार गए हैं। उनके 2 बेटे हैं, जिसमें एक किसान हैं और दूसरा योगी सरकार में निकाली गई पुलिस भर्ती की तैयारी कर रहा है।

धर्म प्रचार के लिए टाल रहे थे शादी

ऑपइंडिया ने दिवंगत भगवान सिंह जाट के भतीजे हरिओम सिंह से बात की। उन्होंने बताया कि वीरगति पाने के दौरान उनके चाचा की उम्र महज 24 वर्ष थी। वो बचपन से ही संघ (RSS) की शाखाओं में जाते थे। शुरुआती पढ़ाई अलीगढ़ में करने के बाद उच्च शिक्षा हासिल करने के लिए भगवान सिंह मथुरा चले गए थे। यहाँ भी उन्होंने हिंदुत्व का प्रचार-प्रसार जारी रखा। भगवान सिंह ने विवाह भी नहीं किया था। परिवार वालों द्वारा रूचि दिखाने पर अपने विवाह की बात को टाल देते थे।

बचपन से ही संघ की शाखाओं में जाते थे भगवान सिंह

जा रहा हूँ माँ, शायद फिर न लौट पाऊँ

हरिओम सिंह ने हमें आगे बताया कि जब उनके चाचा भगवान सिंह ने सुना कि अयोध्या में कारसेवा के लिए रामभक्तों का जमावड़ा शुरू हो रहा है तो वो खुद को नहीं रोक सके। अयोध्या कूच करने से पहले भगवान सिंह मथुरा से अपने घर अलीगढ़ आए। यहाँ उन्होंने अपनी माँ के चरण छुए और कहा, “माँ मैं जा रहा हूँ। शायद अब न लौट पाऊँ।” हरिओम सिंह कहते हैं कि तब उनकी दादी शीशकौर देवी ये नहीं समझ पाईं कि उनका बेटा अयोध्या जाने की बात कर रहा है। उन्हें लगा कि भगवान सिंह मथुरा या कहीं आसपास जा रहे हैं।

हरिओम सिंह ने आगे बताया कि 28 अक्टूबर 1990 को उनके चाचा घर से निकले थे। तब चारों तरफ पुलिस का पहरा था। अलीगढ़ से अयोध्या की दूरी लगभग 500 किलोमीटर है। तब रेल और बस मार्ग के अलावा ग्रामीण इलाकों की पगडंडियों पर भी मुलायम सिंह के आदेश पर पुलिस ने पहरा बिठा रखा था। अयोध्या जाने या राम का भजन करने वालों को ही हिरासत में लेकर टॉर्चर के बाद जेल भेज दिया जा रहा था। बकौल हरिओम सिंह बावजूद इसके उनके चाचा भगवान सिंह मुलायम सरकार की तमाम नाकेबंदी को धता बता कर अयोध्या पहुँच गए थे।

हरिओम सिंह आगे बताते हैं कि 2 नवंबर 1990 में अयोध्या में कारसेवकों के हुए नरसंहार में उनके चाचा भी मृतकों में एक थे। बताया जा रहा है कि गोली भगवान सिंह के सीने पर लगी थी। उनके प्राण रामजन्मभूमि के ही कहीं आसपास निकले थे। भगवान सिंह के घर वालों को 2 नवंबर के बाद उनके बलिदान होने की जानकारी जत्थे में शामिल अन्य कारसेवकों के जरिए हुई थी।

कई दिन भटके बुजुर्ग माता-पिता लेकिन नहीं मिली लाश

हमसे बात करते हुए हरिओम सिंह भावुक हो गए। थोड़ी देर चुप होकर उन्होंने कहा कि बेटे की मौत की जानकारी मिलते ही उनके बुजुर्ग दादा-दादी अयोध्या निकल पड़े। पाबन्दी की वजह से पहले तो उन्हें अयोध्या पहुँचने में ही दिक्कत आई लेकिन जैसे-तैसे वो पहुँच गए तो बेटे का शव तलाशना भूसे के ढेर में सुई खोजने जैसा था। हरिओम के दादा जवाहर सिंह जाट ने कई दिनों तक अपनी बूढ़ी पत्नी के साथ अपने बेटे के शव की तलाश की लेकिन अंत में नाकाम रहे। अयोध्या की गली-गली और नदी के किनारे तक भटकने के दौरान शासन और प्रशासन से जुड़े लोगों ने भी उनकी कोई मदद नहीं की। आखिरकार दोनों खाली हाथ भारी मन से अलीगढ़ लौटे थे।

जीवित माँ के आज भी बहते हैं आँसू

हरिओम सिंह को आशंका है कि उनके चाचा की लाश तब अयोध्या में तैनात पुलिसकर्मियों ने सरयू नदी में फेंक दी थी। भगवान सिंह के बलिदान होने के बाद उनके पिता जवाहर सिंह काफी दुखी रहने लगे। इसी दुःख में थोड़े समय बाद आख़िरकार जवाहर सिंह ने प्राण त्याग दिए। भगवान सिंह की 92 वर्षीया माँ शीशकौर देवी आज भी जीवित हैं। हरिओम सिंह बताते हैं कि बलिदानी बेटे को अंतिम बार न देख पाने के चलते आज भी उनकी दादी के आँसू निकलते हैं। हालाँकि अयोध्या में भगवान राम का मंदिर बनने पर हरिओम सिंह का पूरा परिवार खुश है। यह परिवार इस मौके को भगवान सिंह का बलिदान सार्थक होना बता रहा है।

हमें चाचा के बलिदान पर गर्व, जरूरत पड़ी तो हम भी तैयार

भगवान सिंह के बलिदान की याद दिलाने के लिए अलीगढ़ में आज भी उनका एक स्मृति चिन्ह मौजूद है। यह स्मृति चिन्ह एक छोटी सी मूर्ति के रूप में उनके पैतृक गाँव नगला बलराम में बनी हुई है। मूर्ति भगवान सिंह की ही जमीन में उनके परिवार वालों ने बनवाई है। हरिओम सिंह ने उम्मीद जताई कि उनके चाचा की एक स्मृति भगवान राम के नवनिर्मित मंदिर में भी होगी। बकौल हरिओम सिंह यह स्मृति अनगिनत लोगों को धर्म के लिए लड़ने की प्रेरणा देगी। हरिओम सिंह ने यह भी कहा कि उन्हें अपने चाचा के बलिदान पर गर्व है और जरूरत पड़ी तो राम के नाम पर वो खुद भी वीरगति पाने को तैयार हैं।

परिजनों द्वारा गाँव में बनवाया गया भगवान सिंह का स्मारक

हरिओम सिंह 3 भाई हैं। उनके पिता नेपाल सिंह खेती-बाड़ी करते हैं। नेपाल सिंह का बड़ा बेटा उत्तर प्रदेश पुलिस में है और फिलहाल गाजियाबाद में तैनात है। वहीं हरिओम सिंह ने कई डिग्रियाँ ले रखीं हैं। वो अपने छोटे व तीसरे नंबर के भाई के साथ शिक्षक भर्ती की तैयारी में जुटे हैं। हरिओम सिंह यह भी चाहते हैं कि वर्तमान सरकार उनके साथ रामजन्मभूमि आंदोलन में बलिदान हुए अन्य बलिदानियों के परिजनों पर ध्यान दे। साथ ही हरिओम की इच्छा है कि बलिदानियों के परिवारों को रामजन्मभूमि दर्शन में सहूलियत दी जाए।

नमाज पढ़ती पुजारी की बेटी, बिरयानी का टेस्ट और भगवान राम खाते थे मांस: Netflix की Annapoorani फिल्म, शिकायत दर्ज

फिल्मों के नाम पर हिंदूविरोधी कंटेंट परोसा जाना कोई नई बात नहीं है। हाल में ये काम अन्नपूर्णी फिल्म के जरिए हुआ जो नेटफ्लिक्स पर स्ट्रीम हो रही है। इस फिल्म में दिखाया गया है कि एक हिंदू ब्राह्रण लड़की बिरयानी बनाने के लिए नमाज पढ़ने लगती है। फिल्म का हीरो उसे समझाता है कि श्रीराम भी मांस खाते थे। अब इस फिल्म के खिलाफ और इसे प्रमोट करने वाले नेटफ्लिक्स, zee के खिलाफ मुंबई में शिकायत हुई है।

हिंदू आईटी सेल के संस्थापक रमेश सोलंकी ने अपने एक्स अकॉउंट पर लिखा, “मैंने एंटी हिंदू जी और एंटी हिंदू नेटफ्लिक्स के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई है। ऐसे समय में जब पूरी दुनिया भगवान श्री राम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा की खुशी मना रही है। उस समय यह हिंदू विरोधी फिल्म अन्नपूर्णनी नेटफ्लिक्स पर रिलीज हुई है, जिसे ज़ी स्टूडियोज, नाद स्टूडियोज और ट्राइडेंट आर्ट्स द्वारा निर्मित किया गया है।”

इसमें दिखाया गया है कि हिंदू पूजारी की बेटी बिरयानी पकाने के लिए नमाज पढ़ती है। एक्टर (फरहान) अभिनेत्री को यह कहकर मांस खाने के लिए प्रेरित करता है कि भगवान श्री राम भी वनवास के दौरान मांस खाते थे। इसके अलावा रमेश सोलंकी का आरोप है कि इस फिल्म में लव जिहाद को बढ़ावा दिया गया है।

सोलंकी ने कहा कि ये फिल्म प्राण प्रतिष्ठा के समय इसलिए रिलीज की गई है ताकि हिंदुओं की भावनाएँ आहत हो सकें। अपनी शिकायत में उन्होंने धार्मिक भावना आहत करने के मामले में एक्टर नीलेश कृष्णा, जय,नयनतारा, जतिन सेठी, आर रविंद्रन, पुनीत गोएनका, शरीक पटेल, मोनिका शेरगिल का नाम दिया है।

बता दें कि अन्नपूर्णी फिल्म का विरोध सोशल मीडिया पर पिछले एक हफ्ते से हो रहा है। लोग कह रहे हैं कि आखिर खाने पर बनाई गई फिल्म में मजहब क्यों घुसाया गया। इसमें हिंदू पुजारी लड़की का बॉयफ्रेंड मुस्लिम दिखाया गया है। उसे पूजा की जगह इफ्तारी करते दिखाया गया है।

ऐसे ही फिल्म के शेयर होते सीन में दिखाया गया कि ब्राह्मण लड़की शेफ इंडिया के प्रोग्राम में नमाज पढ़कर बिरयानी बनाती है और जब उससे जज पूछते हैं कि उसने ऐसा क्यों किया तो वो जवाब देती है कि उसे जिसने बिरयानी सिखाई है उनका मानना है नमाज पढ़ने से इसमें स्वाद आता है।

इस फिल्म के एक और सीन में हीरो लड़की को मांस खिलाने के लिए प्रेरित करता है वो भी भगवान श्रीराम को बदनाम करके। वो वाल्मिकी रामायण का उदाहरण देकर कहता है कि वनवास के समय श्रीराम, लक्ष्मण, सीता ने जानवर को मारकर खाया था। सीन की क्लिप वायरल होने के बाद हिंदू विरोधी लोग इसे सनातन को बदनाम करने के लिए सोर्स की तरह इस्तेमाल कर रहे हैं जबकि हिंदू लोग सवाल कर रहे है कि आखिर ऐसी बातें कहाँ पर कही गई हैं।

गैंगरेप के आरोपित 70 वर्षीय मेवाराम को कॉन्ग्रेस ने पार्टी से निलंबित किया, सोशल मीडिया पर वायरल है अश्लील वीडियो

नाबालिग बच्चियों से गैंगरेप के आरोपित कॉन्ग्रेस के पूर्व विधायक मेवाराम जैन को पार्टी से निलंबित कर दिया है। 70 साल के मेवाराम राजस्थान के बाड़मेर से तीन बार विधायक रह चुके हैं। मामला सामने आने के बाद कॉन्ग्रेस ने मौन धारण कर लिया था, लेकिन जब मेवाराम के कई अश्लील वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने लगे तो पार्टी को यह कदम उठाना पड़ा।

निलंबन के आदेश में कॉन्ग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने लिखा, “मेवाराम के अनैतिक कार्य से स्पष्ट होता है कि उन्होंने कॉन्ग्रेस के संविधान के खिलाफ आचरण किया है।” बताते चलें कि अश्लील वीडियो वायरल होने से पहले मेवाराम के खिलाफ एक पीड़िता ने 20 दिसंबर 2023 को जोधपुर में गैंगरेप का मामला दर्ज कराया था।  

पीड़िता ने मेवाराम सहित 9 लोगों के खिलाफ जोधपुर के राजीव गाँधी नगर थाने में ST-SC Act, POCSO, गैंगरेप सहित 18 धाराओं में मामला दर्ज करवाया था। पीड़िता ने कहा था कि जब मेवाराम विधायक थे तो अपने रसूख के दम पर अपने खिलाफ कार्रवाई नहीं होने दी। इतना ही नहीं, मेवाराम ने मामला दर्ज कराकर पीड़िता को सेक्सटॉर्शन में गिरफ्तार करवा दिया था।

साल 2022 में मेवाराम के रेप से जुड़े वीडियो के तीन स्क्रीनशॉट वायरल हुए थे। तब मेवाराम ने बाड़मेर कोतवाली थाने में सेक्सटॉर्शन का केस कराया था। इस मामले में 2 महिलाओं, एक वकील और एक अन्य व्यक्ति की गिरफ्तारी हुई थी। उन पर आरोप लगाए गए थे कि अश्लील वीडियो दिखाकर ये लोग मेवाराम के साथी रामस्वरूप आचार्य से 5 करोड़ रुपए माँगे। मामला 50 लाख में तय हुआ, लेकिन फिर उनसे 1 करोड़ रुपए माँगने लगे।

पिछले साल दिसंबर में पीड़िता ने थाने में रिपोर्ट दर्ज करवाते समय कहा कि मेवाराम और उनके साथी रामस्वरूप आचार्य ने न केवल उसका, बल्कि उसकी सहेली का भी रेप किया गया। इतना ही नहीं, मेवाराम ने उसकी नाबालिग बेटी का भी यौन शोषण किया। पीड़िता ने कहा था कि जब मेवाराम और रामस्वरूप उनका रेप कर करके थक गए तो उन्होंने पीड़िता से 15-16 साल की लड़कियों को लाने को कहा।

पुलिस ने इस मामले में पूछताछ पीड़िता की सहेली से की तो कहानी और भयावह निकली। सहेली ने बताया कि उसे तो प्राइवेट पार्ट में डंडा डालकर प्रताड़ित किया गया था। महिला के आरोपों के बाद मेडिकल करवाया गया था और बयान भी दर्ज हुए थे। वहीं मेवाराम ने कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था जिसके बाद 25 जनवरी तक उसकी गिरफ्तारी पर रोक लगा दी गई थी।

बताते चलें कि 20 नवंबर 2023 को प्रवर्तन निदेशालय की जयपुर इकाई ने मेवाराम के खिलाफ धनशोधन कानून के तहत मामला दर्ज किया था। कोतवाली थाने के सेक्सटॉर्शन केस में 50 लाख रुपए की लेन-देन को आधार बनाते हुए 5 करोड़ रुपए की अवैध लेनदेन का आरोप लगाया गया। इसके बाद 25 नवंबर 2023 को मेवाराम को पूछताछ के लिए ईडी ने नोटिस दिया।

उधर, मेवाराम जैन ने राजस्थान हाईकोर्ट में इसको लेकर अपील दायर की। अपनी अपील में मेवाराम ने कहा कि अभी वे विधानसभा चुनाव लड़ रह रहे हैं। इसे ध्यान में रखते हुए उन्हें राहत दी जाए। इसके बाद हाईकोर्ट ने उन्हें 25 जनवरी 2024 तक राहत दे दी। हालाँकि, बाड़मेर से तीन बार विधायक रहे मेवाराम को इस चुनाव में भाजपा की बागी निर्दलीय उम्मीदवार प्रियंका चौधरी ने हरा दिया।

बाइकों से आए ‘अज्ञात’, मौलाना को दिनदहाड़े गोलियों से छलनी कर निकल लिए: हिन्दुओं के खिलाफ उगलता था ज़हर, पाकिस्तान में ‘सुन्नी उलेमा काउंसिल’ का था उपाध्यक्ष

मौलाना मसूद उर रहमान उस्मानी… सुन्नी उलेमा काउंसिल का उपाध्यक्ष। कट्टरपंथी तकरीरों के लिए मशहूर। शियाओं का दुश्मन नंबर -1… वो अब नहीं रहा। पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में रहने वाला मौलाना मसूद-उर-रहमान उस्मानी शियाओं के प्रति कट्टरता के लिए जाना जाता रहा है। वो हिंदुओं के खिलाफ भी जहर उगलता था, लेकिन आजकल ईरान को लेकर काफी तल्ख रवैया रखता था। उसकी हत्या का सीसीटीवी फुटेज सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है, जिसमें बिजली की गति से आए हमलावरों के समूह ने उसे दिनदहाड़े बीच सड़क पर गोलियों से छलनी कर दिया।

इस्लामाबाद में मौलाना मसूद उर रहमान उस्मानी की हत्या में दो से तीन बाइकों का इस्तेमाल किया गया है। CCTV फुटेज में भी हत्यारे दिख रहे हैं, वो मास्क लगाए हुए हैं। वो व्यस्त सड़क पर ही उस्मानी को ठोक देते हैं और फरार हो जाते हैं। इस हत्याकांड के मामले में अभी तक कोई भी हत्यारा सुरक्षाबलों के हत्थे नहीं चढ़ा है। इस हत्याकांड के साथ ही एक बार फिर से पाकिस्तान में ‘अज्ञात हमलावरों’ की दहशत कायम हो गई है।

सीसीटीवी फुटेज में साफ देखा जा सकता है कि किस तरह कई गाड़ियों पर सवार होकर हत्यारे बेखौफ होकर मौलाना को मौत के घाट उतार देते हैं और आराम से फरार हो जाते हैं।

भारत के खिलाफ भी उगलता था आग, लेकिन इस बार ईरान था नाराज

मौलाना उस्मानी भारत के खिलाफ भी आग उगलता रहा है। वो भड़काऊ भाषण देने के लिए बदनाम था। उसने भारत में कई बार जिहाद का ऐलान किया था। हालाँकि, भारत में किसी आतंकी हमले में उसका हाथ कभी नहीं आया था। वहीं, दूसरी ओर ईरान इस समय पाकिस्तान के सुन्नी मौलानाओं से बेहद नाराज है। हाल ही में ईरान के सिस्तान-बलूचिस्तान इलाके में सुरक्षा बलों पर हमला हुआ था, जिसमें कई सुरक्षाकर्मियों की जान चली गई थी।

ईरान ने इन हमलों का आरोप पाकिस्तानी आतंकियों और कट्टरपंथियों पर लगाया था। ऐसे में शक जताया जा रहा है कि इस बार ‘अज्ञात हमलावरों’ का लिंक ईरान से जुड़ रहा है। वैसे भी, उस्मानी की अंतिम यात्रा में ईरान विरोधी नारे लगाए गए हैं, जो इस बात की तरफ इशारा है कि ईरान के खिलाफ किस तरह से पाकिस्तानी मौलानाओं में गुस्सा भरा है।

‘सनातन दुनिया भर में सर्वोपरि, हिन्दू धर्म में सबको मिलता है सम्मान’: घर-वापसी कर शहजाद बने ‘करण चौधरी’, बताया – अब्बा ने मेरी माँ-बहन को छोड़ कर लिया दूसरा निकाह

सहारनपुर के शहजाद ने घर-वापसी कर हिन्दू धर्म अपना लिया है। वो अब ‘करण चौधरी’ के नाम से जाने जाएँगे। राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम से पहले शारदा नगर के शहजाद ने ये कदम उठाया है। स्थानीय हरि मंदिर में उनके शुद्धिकरण और घर-वापसी की प्रक्रिया को पूरा कराया गया, जहाँ पुजारी और हिन्दू कार्यकर्ता मौजूद रहे। अब उन्होंने सुरक्षा की माँग की है और अपनी जान को खतरा बताया है। शहजाद के पिता का नाम यूनुस है और उनकी उम्र 25 वर्ष है।

शहजाद ने माँग की थी कि वो इस्लाम मजहब को छोड़ना चाहते हैं और हिन्दू धर्म में शामिल होना चाहते हैं। इसके बाद हिन्दू संगठन ‘बजरंग दल’ के कार्यकर्ता उन्हें लेकर आवास-विकास स्थित हरि मंदिर में गए। वहाँ पूरे विधि-विधान के साथ सारी प्रक्रिया पूरी की गई। वैदिक मंत्रोच्चार के साथ उनकी घर-वापसी संपन्न हुई और ‘करण चौधरी’ नाम दिया गया। शहजाद ने अपना नाम बदले जाने का एक शपथ-पत्र भी जारी किया है। उन्होंने कहा कि उनके पूर्वज हिन्दू ही थे।

अब ‘करण चौधरी’ बन चुके शहजाद ने बताया कि काफी पहले उनके पूर्वजों ने हिन्दू धर्म छोड़ कर इस्लाम मजहब अपना लिया था और मुस्लिम बन गए थे। उन्होंने ये भी बताया कि उनके अब्बा यूनुस ने अब दूसरा निकाह कर लिया है। इतना ही नहीं, उसने अपनी पहली पत्नी और बेटी को भी खुद से अलग कर दिया है। माँ और बहन के साथ हुए अत्याचार को देख कर शहजाद से रहा नहीं गया। उन्होंने इस्लाम को इन कुरीतियों के कारण छोड़ने का मन बना लिया।

उन्होंने बताया है कि जल्द ही उनकी माँ और बहन भी घर-वापसी करेंगी। शहजाद पहले बिजली विभाग में संविदा पर काम करते थे। हालाँकि, उन्होंने कुछ दिनों पहले ही ये नौकरी छोड़ दी है और अब वो एक दुकान खोलने की योजना बना रहे हैं। उन्होंने जूतों की दुकान खोल कर जीवन-यापन का फैसला लिया है। हवन-यज्ञ में हिस्सा लेने और भगवा टीका लगाए जाने के बाद उन्होंने कहा कि सनातन दुनिया भर में सर्वोपरि है और यहाँ सबको सम्मान मिलता है। इस दौरान विहिप के प्रान्त प्रवर्तन प्रमुख कपिल मोहड़ा भी मौजूद रहे।

‘श्रीराम हम सबके पूर्वज, धर्म बदलने से पुरखे नहीं बदलते’: ‘रामज्योति’ के लिए भगवा पहन अयोध्या निकलीं मुस्लिम महिलाएँ, सरयू का पवित्र जल भी लाएँगी

काशी का हर घर ‘रामज्योति’ से रोशन होगा, क्योंकि नाजनीन और नजमा अंसारी के नेतृत्व में मुस्लिम महिलाओं का एक समूह अयोध्या के लिए रवाना हो चुका है, जो वहाँ ‘रामज्योति’ लाया जाएगा। उसी से पूरी काशी को जगमग किया जाएगा। नाजनीन अंसारी का कहना है कि धर्म परिवर्तन कर लेने से पुरखे नहीं बदल जाया करते। भगवान श्रीराम ही हम सबके पूर्वज हैं। हिंदुस्तान में रहने वाले सभी मुस्लिमों के पूर्वज भगवान राम हैं।

काशी से नाजनीन अंसारी और नजमा अंसारी के नेतृत्व में मुस्लिम महिलाओं का जत्था भगवा वस्त्र पहनकर अयोध्या के लिए रवाना हो चुका है। काशी के डोमराजा ओम चौधरी और पातालपुरी मठ के महंत बाबा बालक दास ने उनकी यात्रा को रवाना किया। मुस्लिम महिलाओं के इस समूह को अयोध्या में महंत शंभू देवाचार्य ज्योति सौंपेंगे। ये महिलाएँ उसके बाद वापस काशी के लिए रवाना हो जाएँगी।

इस दौरान नाजनीन अंसारी ने मीडिया से बातचीत में कहा कि सभी भारतीय श्रीराम के ही वंशज हैं। किसी भी भारतीय का डीएनए अलग नहीं है। नाजनीन अंसारी ने कहा कि वो मुस्लिम इलाकों में लोगों से ‘रामज्योति’ जलाने की अपील करेंगी। नाजनीन ने कहा कि पहले भी राम नवमी और दीवाली का त्यौहार मनाती रही हैं। इस बार 21 जनवरी से पूरे काशी में ‘रामज्योति’ बाँटी जाएगी। ये पूरा ग्रुप अपने साथ अयोध्या से पवित्र मिट्टी और सरयू नदी से जल भी लाएगा।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, नाजनीन अंसारी मुस्लिम महिला फाउंडेशन की अध्यक्ष हैं। नाजनीन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अपील के बाद 22 जनवरी को उत्सव मनाने का संकल्प लिया है। वहीं, नजमा अंसारी विशाल भारत संस्थान से जुड़ी हैं। दोनों महिलाओं ने बीएचयू से ही पीएचडी की डिग्री ली है और सालों से हिंदू-मुस्लिम संवाद बढ़ाने के अभियान में जुटी हुई हैं। दोनों महिलाओं ने ही तीन तलाक के मुद्दे पर काफी लड़ाई लड़ी और मुस्लिम महिलाओं का सहयोग भी किया है। वहीं, नाजनीन ने रामचरितमानस के साथ ही हनुमान चालीसा का उर्दू में अनुवाद भी किया है।

भूकंप से काँपा मालदीव! PM मोदी के लक्षद्वीप दौरे के बाद चर्चा में हिन्द महासागर में स्थित देश, 2023 में अकेले भारत से पहुँचे थे 2.09 लाख पर्यटक

पर्यटन से अपनी रोजी-रोटी चलाने वाले मालदीव में भूकंप आया है। रिक्टर स्केल पर इसकी तीव्रता 5.4 मापी गई है। दक्षिण एशिया में हिन्द महासागर में सहित ये देश कई कारणों से आजकल चर्चा में है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने केंद्र शासित प्रदेश लक्षद्वीप का दौरा कर के वहाँ की सुंदरता के बारे में दुनिया को बताया, जिसके बाद मालदीव के कट्टरपंथी भड़क गए और उन्होंने लक्षद्वीप को भला-बुरा कहना शुरू कर दिया। बता दें कि लक्षद्वीप कई मायनों में मालदीव से भी आकर्षक माना जाता है।

मालदीव एक द्वीपीय समूह है, जहाँ कई सेलेब्रिटी पर्यटन के लिए पहुँचते हैं। कोरोना काल में बॉलीवुड के कई सेलेब्स यहाँ का दौरा करते हुए दिखे थे। साफ़-सुथरे समुद्री पानी और रिजॉर्ट-कॉलेज के दम पर मालदीव ने वर्षों से पर्यटकों को लुभाया है। अब शनिवार (6 जनवरी, 2024) को 5:16::34 बजे मालदीव को भूकंप का सामना करना पड़ा है। भूकंप की गहराई 10 किलोमीटर मापी गई है। इसका लोकेशन 3.06 लैटीट्यूड और 65.51 लॉन्गीट्यूड पर पाया गया।

इस भूकंप का केंद्र मालदीव की राजधानी माले से 896 किलोमीटर पश्चिम की तरफ था। पिछले साल 29 दिसंबर को भी मालदीव भूकंप से काँपा था। तब हिन्द महासागर में एक साथ 4 भूकंप के झटका महसूस किए गए थे। US जियोलॉजिकल सर्वे में बताया था कि इन झटकों की तीव्रता रिक्टर स्केल पर क्रमशः 4.8, 5.2, 5.8 और 5.0 मापी गई थी। साथ ही इनकी गहराई 7.7 किलोमीटर से लेकर 10 किलोमीटर तक मापी गई थी।

हालाँकि, भूकंप के ताज़ा झटके में किसी के हताहत होने की खबर नहीं है। बता दें कि 2023 में 18.78 लाख पर्यटक मालदीव पहुँचे, जो कि 2022 के 16 लाख के आँकड़े से ज़्यादा है। इनमें से 2.09 लाख पर्यटक अकेले भारत से पहुँचे थे। इतनी ही संख्या रूस से मालदीव जाने वाले पर्यटकों की थी। इसके बाद चीन, यूके, जर्मनी और इटली का नंबर आता है। अब पीएम मोदी के लक्षद्वीप दौरे के बाद गूगल सर्च में भी ये केंद्र शासित प्रदेश टॉप पर आ गया है। मालदीव की सरकार चीन समर्थक मानी जाती है।

ED की चार्जशीट में भूपेश बघेल का नाम, इलेक्ट्रॉनिक एविडेंस भी मिले: सट्टेबाजी एप घोटाले में नई गिरफ़्तारी, पूर्व CM से जल्द होगी पूछताछ

छत्तीसगढ़ के साथ पूरे देश को हिला देने वाले महादेव सट्टा एप मामले में ED ने अपनी दूसरी चार्जशीट दाखिल कर दी है, जिसमें छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल का भी नाम है। चार्जशीट में 5 आरोपितों शुभम सोनी, अमित कुमार अग्रवाल, रोहित गुलाटी, भीम सिंह और असीम दास के नाम हैं। इस चार्जशीट में भूपेश बघेल को पैसे देने की बात कही गई है। यही नहीं, ईडी ने बताया है कि भूपेश बघेल के खिलाफ उसे इलेक्ट्रॉनिक एविडेंस भी मिले हैं।

ऐसे में माना जा रहा है कि ईडी जल्द ही उनसे पूछताछ कर सकती है। इस बीच, भूपेश बघेल ने अपनी सफाई में कहा है कि राजनीतिक वजहों से उनका नाम इस मामले में घसीटा जा रहा है।

ईडी की चार्जशीट में क्या कुछ है?

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईडी ने 1700-1800 पन्नों की नई चार्जशीट में असीम दास को महादेव सट्टा एप के प्रोमोटरों का कूरियर कहा है। उसी के ठिकाने से रेड मारकर ईडी ने 5.39 करोड़ रुपए बरामद किए थे। इसके साथ ही उसे गिरफ्तार कर लिया गया था। ईडी ने चार्जशीट में कहा है कि असीम दास ने ये बात स्वीकार किया है कि उसके पास से बरामद पैसे भूपेश बघेल के लिए भेजे गए थे। उसने पहले भी ये बात स्वीकारी है कि महादेव सट्टा एप के संचालकों ने भूपेश बघेल को कुल 508 करोड़ रुपए दिए थे।

भूपेश बघेल ने दी ये सफाई

मीडिया से बातचीत के दौरान भूपेश बघेल ने इस मामले में अपनी सफाई दी है। उन्होंने कहा है कि ईडी ने राजनीतिक आकाओं के इशारे पर मेरा नाम शामिल किया है। उन्होंने कहा कि वो दबाव डालकर उनका और उनके सहयोगियों के खिलाफ बयान दर्ज करवा रही है। बघेल ने कहा, “मुझ पर जिन पैसों के लेन देन का आरोप लगा है, वो आधारहीन है।” भूपेश बघेल ने आगे कहा कि जिस असीम दास के पास से रुपए बरामद हुए, उसने बताया है कि उससे ज़बरदस्ती बयान लिए गए थे।

महादेव ऐप मामले में नई गिरफ्तारी

इस बीच, महादेव सट्टा एप केस में मुंबई क्राइम ब्रांच की एसआईटी ने शुक्रवार (5 जनवरी, 2024) को दीक्षित कोठारी नाम के युवक को गिरफ्तार किया है। वो इस मामले के मुख्य आरोपितों में से एक है। उसी के ईमेल पते पर महादेव एप से जुड़ी वेबसाइट चलाई जा रही थी। वो ही दो साल से हर साल 20 लाख रुपए वेबसाइट की मेंटेनेंस पर खर्च कर रहा था। इस मामले में 6 लोग पहले ही गिरफ्तार किए जा चुके हैं। वहीं, मुख्य आरोपितों में से एक सौरभ चंद्राकर को दुबई में नजरबंद रखा गया है, उसे भारत लाने की कोशिशें चल रही हैं।

गौरतलब है कि महादेव सट्टा घोटाले में आरोपित असीम के घर पर 2 नवम्बर, 2023 को ईडी ने छापा मारा था। इसके पश्चात न्यायालय में पेश करके उसे जेल भेज दिया था। वह तबसे ही जेल में बंद है। ईडी का कहना था कि असीम दास ही नेताओं को इस घोटाले के पैसे पहुँचाता था। महादेव बुक घोटाला में छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल का नाम भी आया था। यह कहा गया था कि इस घोटाले के सम्बन्ध में उन्हें ₹508 करोड़ की धनराशि दी गई।

‘ED अधिकारियों की हत्या की थी साजिश, TMC नेताओं के इशारे पर हमला’: बंगाल की घटना पर जाँच एजेंसी का खुलासा, 16 घंटे में 2 बार बनाया गया निशाना

प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने अपनी टीम पर पश्चिम बंगाल के उत्तर 24 परगना जिले के संदेशखाली में हुए हमले को हत्या की साजिश करार दिया है। इसे लेकर केंद्रीय एजेंसी ने बकायदा शनिवार (6 जनवरी, 2024) को प्रेस नोट जारी किया है।

इसमें ईडी ने आरोप लगाया है कि ये हमला तृणमूल कॉन्ग्रेस नेता के उकसावे पर हुआ। केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने भी इस हमले की कड़ी निंदा की। उन्होंने कहा कि जिन लोगों में कानून के लिए कोई सम्मान नहीं है और जो अपने कुकर्मों के लिए जेल जाने से डरते हैं, वे जाँच एजेंसियों पर ऐसे हमले करते हैं।

बताते चलें कि शुक्रवार (5 जनवरी, 2024) सुबह राशन घोटाला केस में टीएमसी नेता शाहजहाँ शेख के घर रेड मारने गई ED की टीम और CRPF के जवानों पर 250-300 लोगों की भीड़ ने जानलेवा हमला किया था। इस दौरान पत्रकारों पर भी हमला हुआ और कई गाड़ियों में तोड़फोड़ की गई। इस हमले को लेकर ईडी ने डीजीपी और एसपी को हमले के फुटेज के साथ ईमेल से शिकायत दर्ज कराई है। पुलिस ने संदेशखाली हमला केस में 3 FIR दर्ज की हैं। वहीं अब तक 16 लोगों की गिरफ्तारी की गई है।

सीएम ममता बनर्जी के राज में पश्चिम बंगाल में ईडी अधिकारियों पर 16 घंटे के अंदर दो बार हमला किया गया। शाहजहाँ शेख के घर के बाहर रेड मारने के दौरान हुए हमले के बाद भी ईडी टीम पर हमला किया गया था। ईडी पर ये हमला भी राशन घोटाले की जाँच के दौरान किया गया। शुक्रवार (5 जनवरी, 2024) देर रात इस घोटाले को लेकर ईडी TMC नेता शंकर आद्या को गिरफ्तार कर ले जा रही थी। इस दौरान उनके समर्थकों ने ईडी अधिकारियों पर हमला बोला दिया।

यहाँ महिलाओं की आड़ लेकर आद्या के समर्थकों ने केंद्रीय एजेंसी की गाड़ियों पर पथराव और तोड़फोड़ की। आद्या बोंगाँव नगर पालिका के पूर्व अध्यक्ष भी हैं। राशन वितरण केस में ईडी की यह तीसरी गिरफ्तारी है।

इससे ईडी ने इस केस में कोलकाता कारोबारी बकीबुर रहमान की पहली गिरफ्तारी की थी। दूसरी गिरफ्तारी पश्चिम बंगाल के मौजूदा वन मंत्री और पूर्व राज्य खाद्य आपूर्ति मंत्री ज्योतिप्रिय मल्लिक की थी। रहमान की तरह आद्या भी लंबे वक्त से मल्लिक के करीबी माने जाते हैं।

कुछ दिन पहले ही ईडी ने पश्चिम बंगाल में राशन घोटाले का खुलासा किया था। इसके तहत सार्वजनिक वितरण प्रणाली का लगभग 30% राशन खुले बाज़ार में बेचा गया था। राशन की इस कथित चोरी से हुए फायदे को मालिकों और PDS वितरकों ने मिलकर आपस में बाँट लिया था।

ईडी के इस हमले को लेकर केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने कहा, “लोकतांत्रिक तंत्र में, सरकारी एजेंसियाँ अपने आदेश के मुताबिक काम करती हैं। उन्हें बगैर किसी बाधा के काम करने की मंज़ूरी दी जानी चाहिए। बदकिस्मती से, कुछ क्षेत्रों में जहाँ लोग भ्रष्टाचार में गहराई से डूबे हुए हैं और उनके मन में कानून के लिए कोई इज्जत नहीं है। ये जेल जाने से डरते हैं। वे जाँच एजेंसियों के खिलाफ बोलते हैं। उन पर हमले करते हैं। मैं उनकी कड़ी निंदा करता हूँ।”

देखने आइए, लेकिन अपने रिस्क पर… खँडहर स्टेडियम में मैच, मुंबई से खेलने के लिए पहुँच गई बिहार की 2 रणजी टीमें: पूर्व सचिव ने OSD का सिर फोड़ा

बिहार में टॉप क्रिकेट लौट आया है। राज्य में सालों बाद एलीट ग्रुप का मुकाबला खेला जा रहा है, क्योंकि इस बार बिहार को एलीट ग्रुप में शामिल किया गया है। ये मुकाबला 41 बार की रणजी चैंपियन मुंबई और बिहार के बीच पटना के मोइन-उल-हक स्टेडियम में खेला जा रहा है, जो खुद खहंडर बन चुका है। बिहार में ऐसा एक भी स्टेडियम नहीं है, जिसका मैनेजमेंट BCCI से जुड़े BCA (बिहार क्रिकेट संघ) के पास हो। हाँ, बाकी सारा बवाल बीसीए में खूब है।

शुक्रवार (5 जनवरी, 2024) को जब मुंबई की क्रिकेट टीम मोइन-उल-हक स्टेडियम में पहुँची, तो उसका सामना करने के लिए बिहार की दो टीमें वहाँ मौजूद थी। इसके बाद एक टीम को मैदान में घुसने ही नहीं दिया गया, तो दूसरी ओर आधिकारिक रूप से महज 12 साल के खिलाड़ी को फर्स्ट क्लास क्रिकेट में एंट्री करा दी गई। कुछ ही समय बाद खबर आती है कि बीसीए से जुड़े लोगों में सिर-फुटौव्वल हुआ है और एक अधिकारी घायल भी हो गया है। इस बीच, बहुत कम दर्शकों के सामने मैच जारी रहा।

बिहार के उप-मुख्यमंत्री तेजस्वी यादव के बारे में कहा जाता है कि वो क्रिकेट के इतने ‘बड़े’ खिलाड़ी रहे हैं कि उन्होंने क्रिकेट के लिए पढ़ाई को छोड़ दिया। वो दूसरी बार उप-मुख्यमंत्री हैं। क्रिकेट से लगाव इतना कि पूरे राज्य में ढंग का कोई क्रिकेट स्टेडियम ही नहीं है। और जिस स्टेडियम में मुंबई-बिहार के बीच मैच खेला जा रहा है, उसकी हालत बेहद खराब है। कभी क्रिकेट विश्वकप के मैच की मेजबानी कर चुके इस मोइन-उल-हक स्टेडियम को खतरनाक बताया जा रहा है।

लोगों से कहा गया है कि वो मैच देखने आएँ, उनकी कोई मनाही नहीं है, लेकिन अपने रिस्क पर आएँ। क्योंकि मैदान में दर्शकों के बैठने की जगह अव्यवस्था है। गैलरी बंद है। स्कोरबोर्ड सालों से खराब है। हर तरफ बेतरतीब घास उगी हुई है। वरिष्ठ पत्रकार अनुरंजन झा ने एक्स पर इसकी दुर्दशा बयाँ की है और बिहार के रहनुमाओं से सवाल पूछा है। उन्होंने लिखा, “इस स्टेडियम में बिहार-मुंबई के बीच रणजी ट्रॉफ़ी का मैच खेला जा रहा है। ये हाल उस क्रिकेट स्टेडियम का है, जिस राज्य का नवीं फेल उप-मुख्यमंत्री इसलिए आगे नहीं पढ़ पाया क्योंकि वो ‘क्रिकेट’ खेलता था, इसी से समझिए क्रिकेट भी वो क्या ही खेला होगा। कीजिए बस #हूंबोहूंबो।”

अब इस स्टेडियम की दुर्दशा इंटरनेशनल लेवल तक पहुँचने लगी है, तो माना जा रहा है कि देर-सबेर बीसीसीआई इसकी हालत को सुधारने के लिए कोई कदम उठाएगी। हालाँकि, उसे बिहार में क्रिकेट की पॉलिटिक्स से निपटने में सफलता मिल जाए तब। क्योंकि जिस राज्य में रणजी मैच के लिए दो-दो क्रिकेट टीमों की घोषणा एक ही टीम से मुकाबले के लिए कर दिया जाए, उसकी हालत समझने में मुश्किल नहीं होनी चाहिए।

जुलाई 2023 में ही मिल गई थी मेजबानी, फिर भी ऐसी तैयारी?

ऐसा भी नहीं है कि इस स्टेडियम को संभालने का मौका प्रशासन के पास नहीं था। इस साल बिहार को 4 रणजी मैचों की मेजबानी मिली है। इसकी घोषणा जुलाई 2023 में ही कर दी गई थी। महीनों बाद भी अगर स्टेडियम का ये हाल है, तो समझ सकते हैं कि बिहार का क्रिकेट बोर्ड कितनी गंभीरता से काम कर रहा है।

पत्रकार अभिषेक आनंद लिखते हैं, “स्टेडियम को मेंटेन करने के लिए मेहनत, जज़्बा और पैसा लगता है। वो संसद में ‘ठाकुर का कुआँ’ और ‘अंदर के ठाकुर को मारो’ कह देने से ठीक नहीं होगा। वो राम मंदिर पर सवाल खड़े करने से भी ठीक नहीं होगा। उसके लिए काम करना पड़ेगा, जो ज़मीन पर करना है। उसके लिए ना तो ठाकुर को मारने की ज़रूरत है, ना मंदिर पर सवाल उठने की। ख़ैर बिहार का दुर्भाग्य है, बाक़ी जो है सो हइए है।”

प्रयाग नाम के एक्स यूजर बिहार पर ही चुटकी ले रहे हैं। वो मुंबई का सामना करने के लिए मैदान पर आई दो टीमों के मुद्दे पर चुटकी लेते हुए लिखते हैं, “बिहार कभी निराश नहीं करता।”

चर्चित पत्रकार प्रदीप भंडारी लिखते हैं, “यह बिहार में होने वाले रणजी ट्रॉफी मैच का मैदान है। नीतीश और लालू ने बिहार को पिछले 3-4 दशक में यही दिया है।”

अनुराग सिन्हा नाम के एक्स यूजर मोइन-उल-हक मैदान पर मौजूद हैं। उन्होंने जो वीडियो पोस्ट किया है, उसमें भारी भीड़ उमड़ती दिख रही है। अब व्यवस्थाओं का अंदाजा आप खुद ही लगा सकते हैं।

ध्रुव तिवारी बिहार की मौजूदा सरकार पर तंज कसते हुए लिखते हैं, “तेजस्वी यादव ने कहा था बिहार इन्फ्रास्ट्रक्चर के मामले में नंबर 1 है। ये पटना का क्रिकेट स्टेडियम है, आज रणजी ट्रॉफी का मैच हो रहा है। ऐसी घटिया जगह में बिहार और मुंबई का मैच हो रहा है। ये आज तक एक स्टेडियम बिहार को नहीं दे पाए और बाते विकास की करते हैं।”

इस बीच, बीसीए अधिकारी पर हमला हुआ है। बीसीए ने इस हमले का आरोप अपने निलंबित पूर्व सचिव अमित कुमार पर मढ़ा है। दरअसल, पूर्व सचिव ने मैदान पर उतरने के लिए अपनी ख़ुद की एक टीम नामित कर दी थी। मैच के पहले दिन सुबह इसी वजह से दो अलग-अलग गुटों के बीच अराजकता फैल गई और माना जा रहा है कि गुस्से में अमित कुमार ने कथित तौर पर एक अधिकारी पर हमला किया था। बताया जा रहा है कि अमित कुमार की टीम को मैदान पर एंट्री नहीं मिली, इस वजह से ये मारपीट हुई है।

बिहार ने बनाया एक और रिकॉर्ड

इस मैच में बिहार की आधिकारिक टीम में 12 साल के वैभव सूर्यवंशी का भी नाम है। बाएँ हाथ के बल्लेबाज सूर्यवंशी भारतीय अंडर-19 टीम के लिए भी दौड़ में थे, उन्होंने बिहार के लिए वीनू मांकड़ ट्रॉफी में पाँच पारियों में 93 रन बनाए थे। वैभव को अंडर-19 क्रिकेट विश्वकप के लिए भी चुना गया है, जो इस माह के आखिर में दक्षिण अफ्रीका में खेला जाएगा। वैभव की तस्वीरों को साझा करके लोग उनकी उम्र पर सवाल उठा रहे हैं। वो कई दशकों में सबसे कम उम्र के खिलाड़ी बने हैं, जिन्होंने फर्स्ट क्लास क्रिकेट में डेब्यू किया है।

बिहार की तरफ से महज 12 साल के बताए जा रहे खिलाड़ी वैभव सूर्यवंशी को डेब्यू का मौका मिला (फोटो साभार : ESPNCricinfo)

पहले दो दिन का खेल खत्म, बैकफुट पर बिहार की टीम

बिहार और मुंबई के बीच खेले गए मैच का टॉस बिहार ने जीता और मुंबई को पहले बल्लेबाजी के आमंत्रित किया। मुंबई ने पहले दिन के खेल की समाप्ति पर 9 विकेट के नुकसान पर 235 रन बनाए थे। पहले दिन सिर्फ 67 ओवरों का खेल हो पाया था। वहीं, दूसरे दिन मुंबई की पारी 251 रनों पर समाप्त हुई। इसके जवाब में बिहार की टीम ने महज 37 ओवरों में 6 विकेट गवाँ दिए हैं, और महज 89 रन बनाए हैं। दूसरे दिन बामुश्किल आधे दिन का खेल हो पाया। बिहार की टीम पहली पारी में अभी 162 रनों से पीछे है, जबकि उसके सिर्फ 4 विकेट बचे हैं।

चलिए अब जान लीजिए की बिहार के लिए कौन सी दो टीमों की घोषणा हुई और प्लेइंग 11 में कौन से खिलाड़ी हैं

बीसीए अध्यध द्वारा घोषित टीम: आशुतोष अमन (कप्तान), साकिबुल गनी (उपकप्तान), बिपिन सौरभ (विकेटकीपर), बाबुल कुमार, नवाज खान, विपुल कृष्णा, आकाश राज, बलजीत सिंह बिहारी, सरमन निगरोध, वीर प्रताप सिंह, हिमांशु सिंह, रवि शंकर, रिषभ राज, सचिन कुमार सिंह और वैभव सूर्यवंशी।

बीसीए के बर्खास्त सचिव अमित कुमार द्वारा घोषित टीम: इंद्रजीत कुमार (कप्तान), अपूर्व आनंद (उपकप्तान), विकाश रंजन (विकेटकीपर), शशीम राठौड़, शशि आनंद, लाखन राजा, यशस्वी ऋषभ, प्रतीक कुमार, विक्रांत सिंह, कमलेश कुमार सिंह, विश्वजीत गोपाला, प्रशांत श्रीवास्तव, दीपक राजा, हिमांशु हरि, शशि शेखर, वेदांत यादव, अभिनव कुमार, समर कुदारी, कुमार मृदुल, कुमार रजनीश।

बिहार की प्लेइंग 11 : आशुतोष अमन (कप्तान), बिपिन सौरभ (विकेटकीपर), वैभव सूर्यवंशी, बाबुल कुमार, सकीबुल गनी, आकाश राज, सचिन कुमार, हिमांशु सिंह, नवाज खान, वीर प्रताप सिंह और सरमन निगरोध।