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‘आत्मसम्मान से बढ़ कर कुछ नहीं’: सचिन-रैना से लेकर अक्षय-सलमान और श्रद्धा-कंगना तक, PM मोदी को मिला सेलेब्स का साथ, मालदीव ने अपने मंत्री के बयान से काटी कन्नी

पीएम मोदी के लक्षद्वीप दौरे की तस्वीरें देखने के बाद मालदीव की मंत्री ने जो अभद्र टिप्पणी की थी, उस पर मालदीव सरकार का बयान आया है। भारत ने यह मामला राजनयिक तरीके से उठाया था, अब मालदीव की सरकार ने इस पर बयान जारी किया है। वहीं प्रधानमंत्री की तस्वीरों को देख कर फ़िल्मी सितारे भी लक्षद्वीप जाने और इसके प्रमोशन की बात कर रहे हैं। भारतीय सितारों ने भी प्रधानमंत्री के अपमान की बात को उठाया है।

प्रधानमंत्री मोदी पर मालदीव की मुइज़्ज़ू सरकार में युवा मामलों की उप मंत्री मरियम शिनुआ ने एक्स (पहले ट्विटर) पर अभद्र टिप्पणी की थी। इसको लेकर मालदीव सरकार ने एक बयान जारी करके सफाई पेश की है।

मालदीव की सरकार ने कहा है, “मालदीव की सरकार सोशल मीडिया पर विदेशी नेताओं और बड़े पदों पर बैठे लोगों पर दिए गए अपमानजनक बयानों से वाकिफ है। यह निजी विचार हैं और मालदीव की सरकार का प्रतिनिधित्व नहीं करते।”

मालदीव की सरकार ने आगे कहा, “मालदीव की सरकार मानती है कि लोगों को अपने विचार रखने की आजादी होनी चाहिए लेकिन ऐसे नहीं जो कि घृणा और हिंसा फैलाएँ और मालदीव के अंतरराष्ट्रीय सहयोगियों के साथ रिश्तों को बिगाड़ें। सरकार के विभाग उन लोगों के खिलाफ एक्शन लेने में बिलकुल नहीं हिचकेंगे जिन्होंने यह अपमानजनक बयान दिया है।”

जहाँ मालदीव की सरकार एक ओर अपने मंत्री के बयान पर एक्शन लेने की बात कर रही है। वहीं भारतीय स्टार्स भी प्रधानमंत्री के समर्थन में उतर आए हैं। प्रधानमंत्री मोदी के लक्षद्वीप दौरे के बाद भारतीय टूरिस्ट द्वीपों को बढ़ावा देने की मांग को बॉलीवुड से समर्थन मिला है। बॉलीवुड स्टार सलमान खान, श्रद्धा कपूर, जॉन अब्राहम और क्रिकेटर सचिन तेंदुलकर समेत अन्य सितारों ने भारतीय बीचों को बढ़ावा देने को लेकर ट्वीट किए हैं।

बॉलीवुड स्टार अक्षय कुमार ने एक्स (पहले ट्विटर) पर लिखा, “मैंने मालदीव के बड़े लोगों को भारतीयों के खिलाफ घृणा वाले कमेन्ट करते हुए देखा। वह यह कमेन्ट ऐसे लोगों पर कर रहे हैं जो उन्हें सबसे ज्यादा टूरिस्ट भेजते हैं। हम अच्छे पड़ोसी हैं लेकिन हम ऐसी बिना बात की हिंसा क्यों सहें? मैंने कई बार मालदीव की यात्रा की है और हमेशा तारीफ की है लेकिन आत्मसम्मान पहले आता है। हमें अपने द्वीपों को प्रमोट करना चाहिए।”

बॉलीवुड स्टार जॉन अब्राहम ने एक्स (ट्विटर) पर लिखा, “सबसे बढ़िया भारतीय मेहमाननवाजी, अतिथि देवो भव: के भाव और विशाल समुद्र वाली लाइफस्टाइल के साथ। लक्षद्वीप जाने लायक जगह है।”

श्रृद्धा कपूर ने लिखा, “इन सब फोटो और मीम्स के कारण मुझे तो पीछे छूटने का डर हो रहा है। लक्षद्वीप में इतना सुंदर तट, समुद्री रेखा और ऐसा स्थानीय कल्चर, मैं तो लक्षद्वीप के लिए छुट्टी बुक करने वाली हूँ। इस साल क्यों नहीं भारतीय बीचों पर जाया जाए।

सलमान खान ने लिखा, “लक्षद्वीप के सुंदर, साफ़ और स्टनिंग समुद्र बीच पर हमारे माननीय प्रधान मंत्री नरेंद्रभाई मोदी को देखना बहुत अच्छा है, और सबसे अच्छी बात यह है कि ये हमारे भारत में हैं।”

क्रिकेटर सचिन तेंदुलकर भी भारतीय पर्यटन को बढ़ावा देने की मुहिम को आगे बढ़ाने में जुट गए। उन्होंने सिंधुदुर्ग की तस्वीरें डाली। उन्होंने बताया कि इस शहर में उन्होंने सब कुछ पाया है। उन्होंने भारतीय बीचों की सुन्दरता की भी बात की।

भारतीय अभिनेत्री कंगना रनौत ने भी मालदीव के राष्ट्रपति की पार्टी के एक नेता जाहिद रमीज की ‘भारतीयों के पास से आने वाली दुर्गन्ध’ को लेकर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा है कि यह मुस्लिम घृणा है। लक्षद्वीप में 98% मुस्लिम हैं और उनके खिलाफ ऐसी बात की जा रही है। उन्होंने कहा है कि यह नस्लभेदी और बेवकूफी वाली बात है।

सुरेश रैना ने भी मालदीव मंत्री के कमेंट पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उन्होंने बहुत बार मालदीव की खूबसूरती की तारीफ की है। लेकिन अब आत्मसम्मान से जरूरी कुछ भी नहीं है। अपने ट्वीट में उन्होंने भी भारतीय द्वीपों को एक्सप्लोर करने की गुजारिश की।

गौरतलब है कि प्रधानमंत्री के लक्षद्वीप की तस्वीरों को डालने के बाद मालदीव के कई अकाउंट ने भारतीयों को लेकर घृणा वाली टिप्पणियाँ की थीं। इसमें मालदीव की बड़ी हस्तियाँ भी शामिल थीं। अब मालदीव की विपक्ष की पार्टियों ने भी सरकार को याद दिलाया है कि वह भारत के साथ तमीज से पेश आएँ।

सेक्स पार्टी वाले द्वीप पर इमरान खान, यौन तस्कर जेफरी एपस्टीन की लिस्ट में जुड़ा नाम… सुनाई थी महिला मित्र और प्राइवेट जेट वाली कहानी, अब भड़क गए वसीम अकरम

बच्चों के कुख्यात यौन तस्कर ‘जेफरी एपस्टीन की लिस्ट’ (Jeffrey Epstein List) इस वक्त पूरी दुनिया में सोशल मीडिया पर सुर्खियाँ बटोर रही है। इसी अमेरिकी फाइनेंसर और यौन अपराधी एप्सटीन के आईलैंड से पूर्व पाकिस्तानी पीएम और क्रिकेटर रहे इमरान खान का नाम जोड़े जाने से पूर्व कप्तान वसीम अकरम भड़क उठे हैं।

इसके लिए उन्होंने एक आलोचक को आड़े हाथों ले लिया है और उसे सोशल मीडिया पर ब्लॉक तक कर डाला है। दरअसल, अली शाहबाज चौधरी नाम के एक्स हैंडल यूजर ने पूर्व पाकिस्तानी कप्तान इमरान खान को एपस्टीन सूची से जोड़ने की कोशिश की।

इस वजह से क्रिकेटर वसीम अकरम अपना आपा खो बैठे। बताते चलें कि बीते कुछ दिनों पहले लीक हुई एपस्टीन लिस्ट में कई नाम सामने आए हैं जबकि कई अन्य को गलत तरीके से जोड़ा गया है।

एक्स यूजर शाहबाज चौधरी ने पोस्ट किया, “पीटीआई चीफ इमरान खान भी एप्सटीन की लिस्ट में हैं। क्रिकेट लीजेंड वसीम अकरम ने भी एक कहानी सुनाई है, जिसमें इमरान खान और युवाओं को घिसलीन मैक्सवेल के प्राइवेट प्लेन से एक सुनसान द्वीप (एपस्टीन द्वीप) पर ले जाया गया था।”

इस एक्स यूजर के इस अनोखे दावे पर गुस्साए अकरम ने ट्रोलर की आलोचना करते हुए कहा, “झूठ फैलाना बंद करो। तुम मूर्ख हो।” बताते चलें कि बीते साल वसीम अकरम ने पूर्व कप्तान इमरान खान को प्राइवेट प्लेन से एक सुनसान द्वीप पर ले जाने वाली एक दिलचस्प कहानी का खुलासा किया था।

अकरम ने ‘द ग्रेड क्रिकेटर‘ पर कहा था, “हम उनकी (इमरान की) दोस्त के साथ एयरपोर्ट पर गए। उनके पास एक प्राइवेट जेट था। वहाँ से एक द्वीप के लिए 45 मिनट की उड़ान ली, वहाँ पहुँचे और फिर वे बातचीत के लिए घर में चले गए। हम वहाँ एक द्वीप के बीच में खड़े रह गए थे। हम होटल भी वापस नहीं जा सके थे।”

बताते चलें कि यौन अपराधी जेफरी एपस्टीन से जुड़े अदालती दस्तावेजों में मिले 100 से अधिक हाई-प्रोफाइल लोगों में पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप, बिल क्लिंटन, अमेरिका की पूर्व प्रथम महिला हिलेरी क्लिंटन, स्टीफन हॉकिंग, हॉलीवुड स्टार लियोनार्डो डिकैप्रियो का नाम भी शामिल हैं।

जेफरी एपस्टीन की इस लिस्ट में करीब 150 लोगों सहित उसके सहयोगियों के भी नाम शामिल थे। ये लिस्ट 2015 में एपस्टीन की पूर्व प्रेमिका और सोशलाइट रही घिसलीन मैक्सवेल के खिलाफ किए गए मुकदमे के दौरान सामने आई थी।

घिसलीन को लड़कियों के साथ दुर्व्यवहार करने में मदद करने के साथ ही लड़कियों की सप्लाई के लिए जेल भेजा गया। इस केस के तहतको एपस्टीन से संबंधित कई सीलबंद अदालती दस्तावेजों को सार्वजनिक कर दिया गया। न्यूयॉर्क में जज के आदेश पर 3 जनवरी, 2024 को सार्वजनिक किए इन्हीं दस्तावेजों में कई बड़े मशहूर लोगों का नाम सामने आया है। बताते चलें कि साल 2019 में जेफरी एपस्टीन ने खुदकुशी कर ली थी।

उसी के मालिकाना हक वाले 72 एकड़ के कैरेबियाई द्वीप को ‘पीडोफाइल आइलैंड’ के तौर पर भी जाना जाता है। ये यौन अपराधी यहाँ कथित तौर पर सेक्स पार्टियों किया करता था।

गला रेत अंकित सक्सेना की हत्या, 6 साल बाद कोर्ट में अकबर, सलीम और शहनाज दोषी करार: कसाई अब्बा को पसंद नहीं था बेटी के साथ प्रेम संबंध

दिल्ली के बहुचर्चित अंकित सक्सेना हत्याकांड में कोर्ट ने 3 आरोपितों को दोषी माना है, जबकि एक नाबालिग का बाल सुधार गृह में है। कोर्ट तीनों दोषियों को 15 जनवरी को सजा सुनाएगी। बता दें कि फरवरी 2018 के समय पश्चिमी दिल्ली के रघुवीर नगर में अंकित सक्सेना की बीच राह 4 लोगों ने गला रेतकर हत्या कर दी थी। हत्यारे मुस्लिम थे और अपनी बेटी के प्रेम संबंधों का विरोध कर रहे थे। लड़की का अब्बा कसाई का काम करता था और उसका हथियार भी बरामद हो गया था।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, दिल्ली की तीस हजारी कोर्ट ने फोटोग्राफर अंकित सक्सेना हत्याकांड में प्रेमिका शहजादी के पिता अकबर अली, मामा सलीम और शहनाज को हत्या का दोषी माना है। इसमें उसका नाबालिग भाई भी गिरफ्तार हुआ था और बाल सुधार गृह में मामला चल रहा है। कोर्ट ने अकबर अली, मामा सलीम और शहजादी की माँ को 15 जनवरी को सजा सुनाने का ऐलान किया है।

खुद शहजादी ने कोर्ट में गवाही दी थी कि अंकित की हत्या उसके घरवालों ने की थी, जो उनके प्रेम-संबंधों के खिलाफ थे। इस हत्याकांड को बीच सड़क पर अंजाम दिया गया था। अंकित की उम्र उस समय 23 साल थी। इस हत्याकांड की जानकारी बाहर आने के बाद लोगों को होश उड़ गए थे।

दिल्ली की कोर्ट ने पुलिस की उस दलील को स्वीकार कर लिया, जिसमें दिल्ली पुलिस ने घटनाओं को सिलसिलेवार तरीके से सामने रखा और हत्या की प्लानिंग की पूरी जानकारी कोर्ट के सामने रखी। दिल्ली पुलिस ने इस मामले में दायर चार्जशीट में यह स्पष्ट किया कि हत्या पूर्व नियोजित थी। इस बात का भी पता चला कि लड़की का परिवार हिंदू लड़के से प्रेम करने के कारण उसके साथ सख़्ती से पेश आ रहा था। ग्राउंड रिपोर्ट में भी लड़की के परिवार की मजहबी कट्टरता को उजागर किया गया है, जिसमें लड़की की अम्मी एक कट्टर मुस्लिम महिला है, जो अंतर-धार्मिक संबंध के ख़िलाफ़ थी।

यह मामला भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 303 (हत्या), 323 (स्वेच्छा से चोट पहुँचाने) और 34 (आम इरादे) के तहत अंकित की प्रेमिका के पिता अकबर अली, छोटे भाई, मामा मोहम्मद सलीम और अकबर अली की पत्नी शहनाज़ के ख़िलाफ़ यह मामला दर्ज किया गया था।

इस घटना ने देश को झकझोर दिया था। अंकित और उसके परिवार के लिए देश के विभिन्न हिस्सों से संवेदनाएँ भेजी गई थीं। दिल्ली में एक शोक समारोह आयोजित की गई थी, जिसमें एक प्रार्थना सभा भी शामिल थी। इसमें दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने भाग लिया था। हालाँकि, जब परिवार ने अपने घर के एकमात्र कमाऊ इंसान को खो देने की भरपाई करने के लिए उनसे मुआवज़े की माँग की, तो केजरीवाल प्रार्थना सभा को बीच में ही छोड़ कर चल दिए थे।

PM मोदी को लेकर मालदीव में आपस में ही रार: महिला मंत्री ने की भद्दी टिप्पणी तो पूर्व राष्ट्रपति ने ही लताड़ दिया, लक्षद्वीप के प्रचार से आग-बबूला हैं कट्टरपंथी

मालदीव के पूर्व राष्ट्रपति मोहम्मद नशीद ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का अपमान करने वाली मोहम्मद मुइज़्ज़ू सरकार में मंत्री की आलोचना की है। उन्होंने एक्स (पहले ट्विटर) पर ट्वीट करके मंत्री मरियम शिनुआ द्वारा प्रधानमंत्री मोदी को लेकर की गई टिप्पणी को भद्दा बताया है। इसके साथ ही उन्होंने मुइज्जू सरकार को सलाह दी कि वे अपनी मंत्री के बयानों से सरकार को अलग करें।

उन्होंने एक्स पर लिखा, “मालदीव की सरकार की एक मंत्री ने एक प्रमुख सहयोगी देश, जो कि हमारी सुरक्षा और समृद्धि के लिए जरूरी है, के प्रमुख के लिए किस तरह की भद्दी भाषा का इस्तेमाल किया है। मोहम्मद मुइज़्ज़ू की सरकार को इस बयान से अपने आप को अलग कर लेना चाहिए और भारत को यह बताना चाहिए कि यह हमारी सरकारी नीति नहीं है।” मोहम्मद नशीद भारत के प्रति झुकाव वाले नेता माने जाते रहे हैं। वह 2008 में मालदीव के राष्ट्रपति बने थे।

गौरतलब है कि हाल ही में प्रधानमंत्री मोदी लक्षद्वीप के दौरे पर थे, जहाँ से उन्होंने लक्षद्वीप की प्राकृतिक सुन्दरता को दिखाते हुए कुछ फोटो और वीडियो डाली थीं। इस पर भारतीय सोशल मीडिया यूजर्स ने कहा था कि मालदीव के जैसा सुंदर लक्षद्वीप है, इसलिए भारतीयों को मालदीव के बजाय लक्षद्वीप जाना चाहिए।

इसी पर मालदीव के कई फेमस सोशल मीडिया अकाउंट भारतीयों के खिलाफ नस्लभेदी टिप्पणी करने लगे। कुछ ने भारतीयों को नीचा दिखाने की भी कोशिश की। इसी क्रम में मोहम्मद मुइज़्ज़ू की सरकार में युवा मामलों की उपमंत्री मरियम शिनुआ ने प्रधानमंत्री मोदी को लेकर काफी अपमानजनक टिप्पणियाँ कीं।

मरियम ने प्रधानमंत्री मोदी की फोटो के नीचे उन्हें एक मसखरा और इजरायल की कठपुतली बताया। इसको लेकर भारतीय सोशल मीडिया यूजर्स भड़क गए। उन्होंने मालदीव की मंत्री के इस व्यवहार की आलोचना की, जिसके बाद मरियम ने यह ट्वीट डिलीट कर दिया।

हालाँकि, भारत को लेकर उल्टी सीधी टिप्पणी करने वालों में अन्य मालदीव के कई अकाउंट भी शामिल थे। अब मालदीव के पूर्व राष्ट्रपति मोहम्मद नशीद ने मंत्री के इस व्यवहार की आलोचना की। मालदीव के राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज़्ज़ु की सत्ताधारी पार्टी के ही एक सदस्य जाहिद रमीज ने भी भारत को लेकर काफी अपमानजनक टिप्पणियाँ की।

जाहिद रमीज को भी भारतीय सोशल मीडिया यूजर्स ने काफी करारा जवाब दिया था। इस पूरे विवाद के बीच 6 जनवरी 2024 की रात मालदीव के राष्ट्रपति और विदेश मंत्रालय की वेबसाइट डाउन हो गई, इसको लेकर हैकिंग का शक जताया गया है।

बांग्लादेश में 150 साल पुराने बौद्ध मठ को फूँक दिया: सत्ताधारी दल ने खालिदा जिया की पार्टी पर मढ़ा दोष, दीवार फाँद कर आया था नकाबपोश

बांग्लादेश में शुक्रवार (5 जनवरी, 2024) की रात 150 साल पुराने बौद्ध मठ को एक नकाबपोश ने आग के हवाले कर दिया है। कॉक्स बाजार जिले के रामू उपजिला के चेरनघाटा क्षेत्र में इस मठ के प्रवेश द्वार को आग से खासा नुकसान हुआ है। यह घटना इस इस्लामिक देश में आम चुनाव से दो दिन पहले हुई।

रामू पुलिस स्टेशन के इंचार्ज अबू ताहेर दीवान के मुताबिक, ये घटना सुबह 2 बजे उस वक्त हुई मठ के पुजारी सो रहे थे। दीवान ने कहा कि पुजारियों द्वारा मदद के लिए चिल्लाने के बाद स्थानीय लोग बचाव के लिए आए और आग पर काबू पाया।

उन्होंने आगे बताया कि इस हादसे की सूचना मिलने के बाद रामू फायर सर्विस तुरंत मौके पर पहुँची और आग पर काबू पाया। आग की घटना में बौद्ध मठ परिसर के अंदर एक लकड़ी की सीढ़ी जलकर खाक हो गई।

रामू पुलिस स्टेशन के इंचार्ज ने आगे कहा, “हालाँकि, कोई अन्य बड़ा नुकसान नहीं हुआ क्योंकि आग तुरंत बुझ गई, लेकिन 150 साल पुराने मठ में लगी आग से इसकी सीढ़ियाँ पूरी तरह जलकर खाक हो गईं।”

बताते चलें कि यह मठ चेरनघाटा के रखाइन समुदाय के लिए पवित्र है। घटना के बाद इलाके में बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया है। पुलिस ने इस मामले की जाँच के तहत इलाके में सीसीटीवी फुटेज खंगाल कर ये पता लगाने की कोशिश की कि ये हादसा था जानबूझ कर ये आग लगाई गई थी।

इस दौरान सीसीटीवी फुटेज में यह सामने आया कि एक ‘नकाबपोश आदमी’ मठ की दीवार फाँद कर आया था। उसने मठ की सीढ़ियों पर मिट्टी का तेल डाला और आग लगा दी। रैपिड एक्शन बटालियन-5 के प्रवक्ता जमीलुल हक ने इसकी पुष्टि की।

वही इस मामले को लेकर रामू पुलिस स्टेशन इंचार्ज दीवान ने कहा, “जब हम सीसीटीवी फुटेज में युवक और फायर सर्विस को कॉल करने वाले शख्स की पहचान कर लेंगे तो सब कुछ स्पष्ट हो जाएगा।”

वहीं शेख हसीना के नेतृत्व वाली अवामी लीग पार्टी ने ट्वीट कर विपक्षी बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) कैडरों पर आगजनी हमले को अंजाम देने का आरोप लगाया। उसने स्थानीय लोगों के हवाले से ये आरोप लगाया है।

अवामी लीग ने दावा किया है कि बीएनपी जमात कैडर और उसके कुछ समर्थक तड़के मठ में घुस गए और उसके कुछ हिस्से में आग लगा दी। इस मठ पर साल 2012 में भी हमला हुआ था।

अवामी लीग का ये भी आरोप है कि मतदाताओं को वोट डालने से रोकने के तहत BNP और एक साथ हिंसक अभियान छेड़ रखा है। बताते चलें कि इस इस्लामिक मुल्क में 7 जनवरी 2024 को हो रहे आम चुनावों से पहले ही BNP ने इनका बहिष्कार किया है। ऐसे में देश की मौजूदा पीएम शेख़ हसीना की जीत लगभग तय मानी जा रही है।

न पीने का पानी, न टॉयलेट की व्यवस्था: केजरीवाल सरकार से नाराज होकर कर्मचारियों ने ₹23 करोड़ के स्मॉग टावर पर जड़ा ताला, वेतन न देने का आरोप

दिल्ली में स्मॉग टॉवर बंद कर दिया गया है। समय से वेतन न मिलने की वजह से परेशान कर्मचारियों ने स्मॉग टॉवर को ऑफ करके गेट पर ताला जड़ दिया है। इस स्मॉग टॉवर की कीमत 23 करोड़ रुपए है, जो साल 2021 में बड़े जोर शोर से अरविंद केजरीवाल की सरकार ने लगवाए थे। दावा था कि इससे प्रदूषण से निपटने में मदद मिलेगी, लेकिन अब खबर है कि जो लोग इसे चलाने के लिए काम कर रहे हैं उन्हें ही अरविंद केजरीवाल की सरकार समय से वेतन जारी नहीं कर रही है। इससे परेशान होकर कर्मचारियों ने स्मॉग टॉवर फैसिलिटी को ही बंद कर दिया है।

इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक, एक तरफ तो दिल्ली में धुँध और ठंड से लोग ठिठुर रहे हैं, तो दूसरी तरफ प्रदूषण की वजह से लोगों का सांस लेना दूभर हो रहा है। वहीं, प्रदूषण से मुक्ति दिलाने के नाम पर दिल्ली में कई जगहों पर लगाए स्मॉग टॉवर बंद हो रहे हैं। इनमें से प्रमुख स्मॉग टॉवर दिल्ली के बीचो-बीच कनॉट प्लेस में लगाया गया था, अब वही बंद हो गया है। इसे यहाँ पर तैनात कर्मचारियों ने बंद कर दिया, क्योंकि सरकार उन्हें समय पर वेतन नहीं दे पा रही।

कनॉट प्लेस में तैनात कर्मचारियों का कहना है कि उन्हें दिसंबर 2023 से ही वेतन नहीं मिला है। आगे भी नौकरी की कोई गारंटी दिल्ली सरकार दे नहीं रही है।

बता दें कि कनॉट प्लेस में लगाए गए इस स्मॉग टॉवर के देखरेख और संचालन का जिम्मा विबग्योर कंसल्टिंग फर्म के पास है, जिसने 13 कर्मचारियों की तैनाती यहाँ पर की है। महिपाल बिष्ट उन्हीं कर्मचारियों में से एक हैं।

वह मीडिया से बातचीत में कहते हैं, “ये टॉवर दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (डीपीसीसी) के साथ ही एनबीसीसी और विबग्योर कंपनी चलाती है। अप्रैल 2023 में ही इसके ऑपरेशन बंद हो गए थे। लेकिन सप्रीम कोर्ट ने दिल्ली सरकार को फटकार लगाई तो नवंबर 2023 से इसे फिर से चलाया गया। हमें डीपीसीसी ने बुलाया और 8 नवंबर 2023 से इसे फिर से चलाया गया। लेकिन हमारा वेतन समय से नहीं दिया जाता। दिसंबर का वेतन अभी आया नहीं है। हमारी कंपनी ने दिल्ली सरकार की ओर से भी काम जारी रखने का कोई निर्देश नहीं दिया है। ऐसे में हमारे पास यही रास्ता है कि हम यहाँ पर ताला लगा दें।”

यहाँ तैनात कर्मचारियों ने स्मॉग टॉवर की बदहाली का रोना भी रोया। उन्होंने कहा कि यहाँ पीने का पानी और टॉयलेट तक नहीं है। ये छोड़िए, यहाँ तो पेचकस तक नहीं है। यहाँ के कर्मचारियों ने तो यहाँ तक कहा कि ये स्मॉग टॉवर पूरी क्षमता से काम नहीं कर रहा है। इसमें 5000 फिल्टर लगाए गए हैं, लेकिन उसमें से अधिकतम पुराने हो चुके हैं और उन्हें बदलने की भी जरूरत है।

डेटिंग ऐप पर मिले, 4 दिन तक बार-बार बनाए यौन संबंध… लड़की भेजती थी ‘डर्टी’ मैसेज: रेप आरोपित को दिल्ली HC ने दी जमानत

दिल्ली हाईकोर्ट ने डेटिंग ऐप के जरिए दोस्ती और फिर महिला-पुरुष के बीच बने शारीरिक संबंधों को लेकर एक महत्वपूर्ण फैसला दिया है। कोर्ट ने झाँसी का देकर महिला से रेप करने के आरोपित को जमानत देते हुए महत्वपूर्ण टिप्पणी की है। कोर्ट ने कहा कि दोनों वैवाहिक ऐप पर नहीं, बल्कि डेटिंग ऐप पर मिले थे।

दिल्ली हाईकोर्ट के न्यायाधीश विकास महाजन ने यह भी कहा कि रेप का आरोप लगाने वाली महिला और आरोपित पुरुष के बीच आदान-प्रदान किए गए टेक्स्ट मैसेज से पता नहीं चलता है कि आरोपित ने शादी का कोई प्रस्ताव दिया था। इतना ही नहीं, महिला ने भी शादी का कोई प्रस्ताव नहीं रखा। पीड़िता ने यह माना कि दोनों के बीच शारीरिक संबंध सहमति से बने थे।

अदालत ने कहा, “इसमें कोई विवाद नहीं है कि शिकायतकर्ता (महिला) और याचिकाकर्ता (आरोपित पुरुष) एक डेटिंग ऐप Hinge पर मिले थे, न कि किसी वैवाहिक ऐप पर। उनके बीच कई व्हाट्सएप मैसेजेज का आदान-प्रदान हुआ है। किसी भी मैसेज में याचिकाकर्ता द्वारा शादी का कोई वादा प्रस्ताव नहीं रखा गया है।”

अदालत ने कहा कि शिकायतकर्ता महिला ने जिरह के दौरान कहा कि याचिकाकर्ता आरोपित ने अपनी शैक्षणिक योग्यता के बारे में झूठ बोला। इसके बावजूद चार दिनों तक उसने उसके साथ बार-बार यौन संबंध बनाए। इतना ही नहीं, याचिकाकर्ता के मोबाइल फोन में मिलीं पीड़िता की अश्लील तस्वीरों और वीडियो के संबंध में पीड़िता ने स्वयं स्वीकार किया है कि यह उसकी सहमति से ली गई थी।

महिला ने यह भी कहा था कि आरोपित ने उससे अपनी उच्च शिक्षा को लेकर झूठ बोला था। इसको लेकर कोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ता आरोपित ने अपनी शैक्षणिक योग्यता के बारे में झूठ बोला था, तब भी शिकायतकर्ता महिला चार दिनों तक एयरबीएनबी में उसके साथ रही और बार-बार उसके साथ यौन संबंध बनाए।

कोर्ट ने कहा कि दोनों बार-बार मिले और शारीरिक संबंध बने। इसमें शादी का झूठा वादा कहाँ से आ गया। वहीं, झूठी डिग्री को लेकर कोर्ट ने कहा कि शारीरिक संबंध बनाते समय उच्च शिक्षित होने का रूतबा मायने नहीं रखती है। कोर्ट ने कहा कि दोनों के बीच जब ह्वाट्सऐप चैट हो रहा था, तब शिकायतकर्ता महिला शिकायतकर्ता को कामुक कहानियाँ और बातें भेजा करती थी।

दरअसल, अदालत एक व्यक्ति द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें उसने जमानत माँगी थी। इस व्यक्ति के खिलाफ भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 376 (रेप) और 420 (धोखाधड़ी) के तहत मामला दर्ज किया गया था। इस मामले में याचिकाकर्ता आरोपित और शिकायतकर्ता महिला हिंज ऐप पर मिले थे और फिर प्यार में पड़ गए।

महिला का आरोप है कि उस दौरान आरोपित ने कहा था कि उसने आईआईटी खड़गपुर से इंजीनियरिंग, यूके एवं न्यूजीलैंड से डबल मास्टर्स और लंदन के किंग्स कॉलेज से पीएचडी किया है। बाद में पता चला कि लड़के ने सिर्फ बीएससी किया है। शिकायतकर्ता महिला ने यह भी दावा किया कि उसने आरोपित को उसके इलाज के लिए लगभग 1.20 करोड़ रुपए दिए थे।

हालाँकि, बेंच ने माना कि पीड़िता ने ये पैसे आरोपित से प्यार और लगाव की वजह से दिए थे। इस आधार पर कोर्ट ने आरोपित को 25 हजार रुपए के निजी मुचलके पर आरोपित को नियमित जमानत दे दी। आरोपित 13 मई 2022 से ही जेल में बंद है।

नेहरू वाला अनाथालय, बच्चियों के साथ राहुल गाँधी की तस्वीर! लड़कियों के लिए बाथरूम में दरवाजे तक नहीं, कॉन्ग्रेस के प्रोपेगंडा की NCPCR अध्यक्ष ने खोल दी पोल

राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (NCPCR) के अध्यक्ष प्रियंक कानूनगो ने कॉन्ग्रेस के राज्यसभा सांसद विवेक तन्खा द्वारा फैलाए जा रहे प्रोपेगंडा का तगड़ा जवाब दिया है। विवेक तन्खा ने सोशल मीडिया प्लेटफार्म ‘X’ (पूर्व में ट्विटर) का इस्तेमाल करते हुए लिखा कि अगर भारत को वैश्विक शक्ति और 5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनना है तो केंद्र सरकार को एक्शन में आना होगा NCPCR जैसे संगठनों को नियंत्रित करना होगा। उन्होंने NCPCR पर सासनीख़ेज होने का आरोप लगाते हुए कहा कि ये भारत की छवि को खराब कर रहा है।

बता दें कि NCPCR आजकल मिशनरियों द्वारा चलाए जा रहे अवैध छात्रावासों और मदरसों में बच्चों के साथ होने वाले दुर्व्यवहार को लेकर सक्रिय रहता है। साथ ही हिन्दू छात्र-छात्राओं को ईसाई मिशनरियों और इस्लामी मौलवियों द्वारा अपने मजहब के तौर-तरीके सिखाए जाने के खिलाफ भी बाल आयोग एक्शन में है। इससे मिशनरी-मौलवी गिरोह को खासी मिर्ची लगी हुई है। प्रियंक कानूनगो ने विवेक तन्खा को जवाब देते हुए कॉन्ग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गाँधी का एक ट्वीट शेयर किया।

इस ट्वीट में राहुल गाँधी ने 2 तस्वीरें डाली हैं, जिनमें वो बच्चों के साथ दिख रहे हैं। राहुल गाँधी इस दौरान ‘स्वराज भवन’ के ‘चिल्ड्रेन्स नेशनल इंस्टिट्यूट’ पहुँचे हुए थे। साथ ही उन्होंने कैप्शन में लिखा कि उनके चुनावी प्रचार अभियान की शानदार शुरुआत हुई है, कई मुस्कुराहटों और काफी मात्रा में ऊर्जा के साथ दिन की शुरुआत हुई है। प्रियंक कानूनगो ने इस ट्वीट का स्क्रीनशॉट शेयर करते समय नाबालिग बच्चों के चेहरों को ढँक दिया। साथ ही उन्होंने ‘पत्रिका’ की एक खबर शेयर की।

उन्होंने जवाब दिया, “प्रयागराज में आनंद भवन परिसर में जहाँ आपके नेता राहुल गाँधी प्रयागराज प्रवास के दौरान रेस्ट करते थे और चुनाव अभियान के दौरान ऊर्जा ग्रहण करते थे, वहीं गाँधी परिवार द्वारा चलाए जा रहे बग़ैर लायसेंस के अनाथ आश्रम में किशोर वय अनाथ लड़कियों के बाथरूम में दरवाज़े नहीं लगाए गए थे, अनाथ बच्चियों को परिवारों में गोद नहीं दिया जाता था, विदेशी फ़ंडिंग भी आती थी। यह सब मेरे द्वारा किए गए NCPCR के निरीक्षण में उजागर हुआ।”

साथ ही उन्होंने बताया कि कैसे निरीक्षण के बाद FIR दर्ज की गई। प्रियंक कानूनगो ने कहा कि इस से देश की बदनामी नहीं हुई बल्कि विवेक तन्खा की पार्टी और गाँधी ख़ानदान का सच उजागर हुआ। उन्होंने राज्यसभा सांसद को जवाब देते हुए लिखा, “आप सम्मानित सांसद हैं कृपया गांधी परिवार को ‘देश’ मानना बंद करिए, भारत बहुत महान देश है।” बता दें कि इसी ‘स्वराज भवन’ में चल रहे अनाथालय में भारी अनियमितताएँ सामने आई थीं।

‘चिल्ड्रेन्स नेशनल इंस्टिट्यूट’ का गठन भारत के प्रथम प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने भारत के खंडित होने के बाद किया था। वहाँ अनाथ बच्चियों को रखा जाता था। 17 से 29 साल तक की लड़कियाँ यहाँ रखी गई थीं। प्रियंक कानूनगो ने अपने निरीक्षण के बाद आदेश दिया था कि बाथरूम में दरवाजे लगाए जाएँ। वहाँ रह रहीं बच्चियों की असुरक्षा का मामला भी सामने आया था। डीएम के सामने भी ये मामला आया था। फिर लड़कियों को दूसरे सुरक्षित स्थान पर शिफ्ट किया गया था।

बच्चे/बच्चियों का रेप करने वालों को मिले मानसिक उपचार… समाज में शामिल हो सकें: केरल HC, नाबालिग छोटी बहन का रेप करने वाले को दी जमानत

केरल हाई कोर्ट ने एक मामले की सुनवाई करते हुए कहा है कि POCSO (बच्चों के साथ यौन अपराध) मामलों में बंद अपराधियों के लिए मनोरोग के उपचार वाली व्यवस्थाएँ की जाए। यह बात कोर्ट ने एक नाबालिग के बलात्कार के मामले को सुनते हुए कही। कोर्ट ने नाबालिग के बलात्कारी, जो कि उसका बड़ा भाई है, उसे जमानत भी दे दी।

केरल हाई कोर्ट ने कहा कि राज्य की जेलों और बाल सुधार गृहों में बंद POCSO जैसे मामलों के आरोपितों/दोषियों को मनोरोग उपचार या मनोचिकित्सा देने के लिए एक स्कीम बनाई जानी चाहिए। इसके लिए केरल हाई कोर्ट ने केरल के स्वास्थ्य विभाग और केरल राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण को मिलकर ऐसी स्कीम लाने के लिए कहा है। ताकि POCSO के अपराधी वापस समाज में सामान्य जीवन जी पाएँ और समाज की मुख्यधारा में शामिल हो सकें। केरल हाई कोर्ट ने इसके अंतर्गत अलग-अलग उपायों की बात की है।

केरल हाई कोर्ट ने साथ ही में राज्य के शिक्षा विभाग को कहा है कि वह उनके स्कूलों में ऐसी व्यवस्था करें ताकि यौन हिंसा की पीड़िताओं की विशेष देखभाल की जाए और उनके प्रति संवेदनशीलता दर्शाएँ। कोर्ट ने कहा है कि राज्य के शिक्षा संस्थानों में पढ़ने वाली यौन पीड़िताओं को किसी भी प्रकार से अलग पहचान नहीं दी जानी चाहिए।

कोर्ट ने यह सारी बातें एक ऐसे मामले को सुनते हुए कहीं, जिसमें केरल के मलप्पुरम जिले में एक 19 वर्षीय युवक ने अपनी 13 वर्षीय नाबालिग बहन का बलात्कार किया था। केस के अनुसार आरोपित ने ऐसा ड्रग्स के नशे में किया था। पीड़िता का इस मामले में कहना है कि उसके द्वारा इसकी शिकायत करने के कारण उसका परिवार बिखर गया है, इसलिए वह दुखी है। हालाँकि, पीड़िता अपने आरोपों पर डटी हुई है। पीड़िता और उसकी माँ ने बताया है कि इससे पहले भी आरोपित हिंसक प्रवृत्ति दिखाता था।

अपनी बहन के आरोपों से उलट आरोपित ने अपनी याचिका में कहा था कि वह निर्दोष है, उसे जमानत दी जानी चाहिए। हालाँकि, सरकारी वकील ने इस युवक को जमानत दिए जाने का विरोध किया। कोर्ट ने ऐसे मामलों में विशेषज्ञता रखने वाले एक संगठन VRC की मदद भी ली थी। VRC से जुड़ी वकील मेनन ने पीड़िता और आरोपित दोनों से बात की।

वकील मेनन ने कहा है कि आरोपित नशा जरूर करता था लेकिन आदतन नशेड़ी नहीं है। हालाँकि, उसके साथ गुस्से सम्बन्धी समस्याएँ जरूर हैं। वकील मेनन ने कहा कि परिवार का एकीकरण अभी नहीं होना चाहिए क्योंकि अपराधी और पीड़िता भाई बहन हैं। वकील मेनन की ही सलाह पर पीड़िता के लिए निर्देश जारी किए गए।

वहीं कोर्ट ने कहा कि आरोपित युवक को मई में हिरासत में लिया गया था, अब उसे और अधिक दिन हिरासत में रखने की आवश्यकता नहीं है, इसलिए जमानत दी जानी चाहिए। कोर्ट ने आरोपित को जमानत देते हुए उसके गृह जिले में ना जाने का आदेश दिया है।

कुछ दिन पहले एक अन्य मामले में केरल हाई कोर्ट ने 12 वर्षीय एक नाबालिग लड़की को गर्भपात की इजाजत देने से मना कर दिया था। वह अपने ही नाबालिग भाई से सम्बन्ध बनाने के कारण गर्भवती हो गई थी।

ISRO में नहीं होता लैंगिक भेदभाव, सीनियर्स ने हमेशा सपोर्ट किया : Aditya L-1 मिशन को जिस महिला ने किया कामयाब, जानें उनकी कहानी

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने आदित्य एल-1 (Aditya L-1) मिशन को पृथ्वी से लगभग 15 लाख किलोमीटर दूर ‘लैग्रेंज प्वाइंट 1’ पर सफलतापूर्वक पहुँचाकर नया इतिहास रचा। इस अभियान के कामयाब होते ही एक बार फिर एक महिला साइंटिस्ट चर्चा में आ गईं।

इस बार इसरो को गौरवान्वित करने वाली महिला का नाम है- निगार शाजी। उन्होंने ही इस पूरे प्रोजेक्ट को लीड किया और 8 साल तक इस पर काम करके इसकी सफलता सुनिश्चित की। अब उनके मुस्कुराते चेहरे से इस कामयाबी की खुशी का अंदाजा लगाया जा सकता है।

आइए आज इन्हीं निगार शाजी के बारे में जानें

तमिलनाडु के तेनकासी जिले के सेनगोट्टई में निगार का जन्म हुआ था। स्कूली शिक्षा उन्होंने सेनगोट्टई से ली। बाद में मदुरै कामराज विश्वविद्यालय के तहत तिरुनेलवेली के सरकारी इंजीनियरिंग कॉलेज में एडमिशन लिया। यहाँ से उन्होंने इलेक्ट्रॉनिक्स और कम्युनिकेशन में इंजीनियरिंग की डिग्री ली। और फिर, बिरला इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी, मेसरा से इलेक्ट्रॉनिक्स में मास्टर डिग्री हासिल की।

आज उनकी उम्र करीबन 59 वर्ष है। साल 1987 में उन्होंने इसरो ज्वाइन किया था। शुरू में वह आंध्र प्रदेश के पास श्रीहरिकोटा अंतरिक्ष बंदरगाह पर काम कर रही थीं। बाद में उन्हें बेंगलुरु के यू आर राव सैटेलाइट सेंटर भेजा गया। इसरो में रहते हुए वह कई महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट्स से जुड़ीं। जानकारी के मुताबिक आदित्य एल-1 से पहले वह रिसोर्ससैट-2 ए के सहयोगी परियोजना निदेशक थीं। इसके अलावा निचली कक्षा और ग्रहीय मिशनों के कार्यक्रम की निदेशक भी हैं।

पारिवारिक बैकग्राउंड की बात करें तो शाजी एक किसान परिवार से आती हैं। उनके पिता शेख मीरान भी किसान हैं। हाल में उन्होंने कहा था- “मेरे माता-पिता दोनों ने मेरे पूरे बचपन में मेरा बहुत सहयोग किया। उनके निरंतर समर्थन के कारण ही मैं इतनी ऊँचाई तक पहुँचीं।”

उन्होंने इसरो में होने वाले किसी भी प्रकार के लैंगिक भेदभाव को नकारा और कहा कि इतने सालों में उन्हें कभी भेदभाव नहीं झेलना पड़ा। उलटा वो तो अपने सीनियर्स को उनकी कामयाबी का श्रेय देती हैं। उन्होंने हाल में कहा था, “टीम लीडर होने के नाते मेरे अंडर में कई लोग काम करते हैं। मैं भी उन्हें उसी तरह से तैयार करती हूँ जैसे मेरे वरिष्ठों ने मुझे तैयार किया था।”