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पत्नी संग द्वारकाधीश के चरणों में मुख्य न्यायाधीश DY चंद्रचूड़: गुजरात के मंदिर पहुँच किया दर्शन-पूजन और ध्वजारोहण, शोभा यात्रा में शामिल हुए अधिकारी

भारत के मुख्य न्यायाधीश DY चंद्रचूड़ ने गुजरात के द्वारकाधीश मंदिर पहुँच कर भगवान श्रीकृष्ण की पूजा-अर्चना की। वो शनिवार (6 जनवरी, 2024) को द्वारका पहुँचे थे। वीडियो में देखा जा सकता है कि जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ पीले वस्त्रों में अपने पत्नी के साथ द्वारकाधीश मंदिर में दर्शन-पूजन के लिए पहुँचे हैं। उनके साथ उनकी पत्नी भी थीं। इस दौरान मंदिर में सुरक्षा कड़ी रही और उनके साथ पुलिस के कई जवान व सुरक्षाकर्मी भी चल रहे थे।

डिस्ट्रिक्ट कलक्टर अशोक शर्मा और पुलिस अधीक्षक नीतेश पांडेय ने इस दौरान जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ का स्वागत किया। वो सुबह-सुबह दर्शन के लिए पहुँचे। दर्शन-पूजन के बाद सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश ने मंदिर के शिखर पर ध्वजारोहण भी किया। उन्होंने द्वारकाधीश मंदिर में पुजारियों के साथ भगवान श्रीकृष्ण की चरण पादुका की पूजा की। बता दें कि CJI का सोमनाथ मंदिर में भी पूजा-अर्चना का कार्यक्रम था, लेकिन राजकोट से वो वहाँ के लिए निकले पर हेलीकॉप्टर लैंड नहीं हो पाया।

इसीलिए, उनका कार्यक्रम बदला और उन्होंने फिर द्वारकाधीश मंदिर में जाने के लिए प्लान बनाया। इस दौरान जामनगर और देवभूमि द्वारका – दोनों जिलों के अधिकारी मौजूद रहे। दोनों जिलों के कई जज भी वहाँ उपस्थित थे। राजकोट में 110 करोड़ रुपए की लागत से नए कोर्ट का निर्माण हुआ है, जिसका उन्होंने उद्घाटन किया। राजकोट के डीएम प्रभव जोशी और कमिश्नर राजू भार्गव के अलावा इलाके के तमाम बड़े अधिकारी इस उद्घाटन समारोह में मौजूद रहे।

कोर्ट के उद्घाटन से एक दिन पहले आयोजन की तैयारियों को लेकर एक उच्च-स्तरीय बैठक भी हुई थी। CJI डीवाई चंद्रचूड़ ने द्वारकाधीश में ‘ध्वजा जी’ की भी पूजा-अर्चना की और ध्वजारोहण के बाद पुजारियों ने अधिकारियों के साथ ध्वजा की एक यात्रा भी निकाली, जिसमें क्षेत्र के गणमान्य लोग भी मौजूद रहे। साथ ही ‘जय द्वारकाधीश’ के नारे भी लगे। राजकोट में कानून मंदिर ऋषिकेश पटेल ने सीजेआई का स्वागत किया और कलावाद रोड पर स्थित एक रिजॉर्ट में उन्होंने रात गुजारी।

‘हिजाब न पहनने वाली महिलाओं का चरित्र गड़बड़’: आनाकानी के बाद केरल पुलिस ने मौलाना पर दर्ज की FIR, महिला ने सरेआम हटा दिया था स्कार्फ

केरल में टीवी डिबेट के दौरान एक मौलाना ने उन महिलाओं के चरित्र पर सवाल उठाया जो हिजाब नहीं पहनतीं। उनकी इस टिप्पणी को लेकर 4 जनवरी 2024 को उनके खिलाफ केरल के कोझिकोड में एफआईआर दर्ज हुई। इस मामले में शिकायत प्रगतिशील मुस्लिम महिलाओं के मंच NISA की अध्यक्ष वीपी सुहरा ने की थी।

उनकी शिकायत के बाद ही 4 जनवरी को मौलाना के खिलाफ IPC की धारा 295ए (धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुँचाना) और 298 (धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुँचाने वाले शब्द बोलना) के तहत FIR दर्ज की गई। इस एफआईआर के होने के बाद सुहरा ने मौलाना के खिलाफ की गई पुलिस कार्रवाई पर खुशी जाहिर की।

उन्होंने कहा, “हमारे सामने ऐसी कई घटनाएँ हुई हैं। वे मुस्लिम समुदाय और महिलाओं को खराब तरीके से दिखाने चाहते हैं। वे महिलाओं को बुर्का पहनने वाली और न पहनने वाली में बाँटकर समुदाय में तनाव पैदा करना चाहते हैं। फैजी ने उन सभी महिलाओं का अपमान किया है जो हेडस्कार्फ़ नहीं पहनती हैं।”

सुहरा ने पुलिस पर शुरू में उनकी शिकायत पर कार्रवाई न करने का आरोप भी लगाया है। उन्होंने कहा, “जब मैंने 7 अक्टूबर को शिकायत दर्ज की, तो पुलिस ने कहा कि अगर उन्हें अदालत से निर्देश मिलेगा तो वे केस दर्ज करेंगे। बाद में हमें कानूनी राय मिली कि पुलिस शिकायत पर कार्रवाई कर सकती है।”

उन्होंने आगे कहा, “हम संजीदगी और जिद के साथ अपनी शिकायत पर टिके थे ताकि यह पक्का किया जा सके कि मौलवी पर उनकी आपत्तिजनक टिप्पणी के लिए केस दर्ज किया जाए।”

दरअसल, एक टेलीविजन बहस के दौरान एक मौलवी मुक्कम उमर फैजी ने ये कथित टिप्पणी की थी कि जो मुस्लिम महिलाएँ हेडस्कार्फ या हिजाब नहीं पहनती थीं, वे संदिग्ध चरित्र वाली होती हैं।

बताते चलें कि ये टेलीविजन बहस बीते साल अक्टूबर 2023 में समान नागरिक संहिता पर एक सेमिनार के दौरान सीपीआई (एम) नेता अनिल कुमार के बयान को लेकर हुई थी। कुमार ने कहा था,”कम्युनिस्ट पार्टी के असर की वजह मलप्पुरम में मुस्लिम लड़कियों ने हिजाब छोड़ दिया और इससे मुस्लिम समुदाय अधिक प्रगतिशील हुआ है।”

इस बयान के बाद वो सीपीआई (एम) के लोकसभा सांसद ए एम आरिफ और पार्टी के कई अन्य मुस्लिम नेताओं के निशाने पर आ गए थे। सीपीआई (एम) के राज्य सचिव और पोलित ब्यूरो सदस्य एम वी गोविंदन ने कहा था कि पार्टी कुमार के रुख से राजी नहीं है। वहीं मौलाना ने भी टीवी प्रोग्राम में इस पर अपनी राय दी थी, जिसे सुनकर सुहारा काफी नाराज हो गईं थीं। उन्होंने अक्टूबर में एक सार्वजनिक मंच पर अपने सिर से स्कॉर्फ को हटा दिया था।

न्यूज 18 की रिपोर्ट के मुताबिक, उन्होंने शहर के नल्लालम में कुदुम्बश्री के थिरिके स्कूलिल (बैक टू स्कूल) अभियान के उद्घाटन सत्र के दौरान फैजी की टिप्पणी पर निशाना साधाते हुए कहा था कि सिर ढंकना या नहीं ढंकना महिला की पसंद है ये स्कॉर्फ हटाते हुए कहा था- “मैं सिर पर स्कार्फ पहनकर बड़ी हुई हूँ। यह मेरी आदत का हिस्सा है इसलिए नहीं कि मैं मुस्लिम हूँ।” उनके हेडस्कॉर्फ हटाने का विरोध भी हुआ था जिसके बाद पुलिस के पास शिकायत भी पहुँची थी।

भारतीय नौसेना के पराक्रम के बाद ‘भारत माता की जय’ के नारे: समुद्री लुटेरों से मालवाहक जहाज को छुड़ाया, 7500 टन के INS को देख कर ही भाग खड़े हुए डकैत

सोमालिया के तट पर समुद्री लुटेरों ने मालवाहक जहाज एमवी लीला नॉरफॉक (MV Lila Norfolk) को इसके 21 क्रू मेंबर्स सहित बंधक बना लिया था। इस जहाज के चालक दल में 15 भारतीय भी थे। सूचना मिलते ही भारतीय नौसेना ने तुरंत जवाबी कार्रवाई की और सभी को सकुशल बचा लिया। रेस्क्यू के बाद चालक दल के सदस्य उत्साहित हो गए और उन्होंने भारतीय नौसेना को धन्यवाद देते हुए ‘भारत माता की जय’ के नारे भी लगाए।

भारतीय नौसेना का ये ऑपरेशन शुक्रवार (5 जनवरी, 2024) रात पूरा हुआ। इस तरह से अदन की खाड़ी से होने वाली समुद्री डकैती का भारतीय नौसेना ने मुँहतोड़ जवाब दिया। उसके युद्धपोत INS चेन्नई और उसके समुद्री कमांडो मॉर्कोस ने लाइबेरिया के झंडे वाले मालवाहक जहाज को अगवा करने की कोशिश को नाकाम कर डाला।

बताते चलें कि गुरुवार (4 जनवरी, 2024) की शाम 5 से 6 हथियारबंद समुद्री डाकुओं ने मालवाहक एमवी लीला नॉरफॉक को कब्जे में लिया था। ये लुटेरे सोमालिया में ईल से लगभग 460 समुद्री मील पूर्व में इस जहाज में सवार हुए थे। भारतीय नौसेना के मुताबिक, 5 जनवरी को इस जहाज ने ब्रिटेन के मैरीटाइम ट्रेड ऑपरेशन्स (UKMTO) पोर्टल पर संदेश भेजा था।

UKMTO एक रॉयल नेवी चैनल है जो रणनीतिक जलमार्गों में सैन्य जहाजों और व्यापारिक जहाजों के बीच संपर्क के तौर पर काम करता है। इससे संदेश पाते ही भारतीय नौसेना ने तुरंत जंगी जहाज INS चेन्नई और मैरिटाइम पैट्रोलिंग एयरक्राफ्ट P8I को रवाना किया गया था।

एक पी-8आई एयरक्राफ्ट ने शुक्रवार तड़के जहाज के ऊपर से उड़ान भरी और चालक दल के सदस्यों के साथ संपर्क किया। ये लोग किस्मत से जहाज में ऐसे मौकों के लिए बनाए गए सुरक्षित घर में शरण लेने में कामयाब हो गए थे। हाईजैकर्स से जहाज को छुड़ाने के लिए P8I गश्ती एयरक्रॉफ्ट ने सख्त चेतावनी जारी की थी। इस जबरदस्त चेतावनी के बाद शुक्रवार रात नौसेना के मार्कोस कमांडो ने रात 8 बजे के करीब ऑपरेशन शुरू किया। कमांडो जहाज में घुसे तो वहाँ तलाशी के दौरान समुद्री लुटेरे जहाज पर नहीं मिले।

माना जा रहा है कि भारतीय नौसेना की सख्त चेतावनी से खौफ में आकर ये लुटेरे जहाज छोड़कर फरार हो गए। दरअसल, लुटेरे जंगी जहाज विध्वंसक INS चेन्नई की 7500 टन की ‘INS चेन्नई’ के खौफ के सामने टिक नहीं पाए।

नौसेना प्रवक्ता कमांडर विवेक मधवाल ने कहा, “21 चालक दल के सदस्यों (फिलीपींस के छह सहित) को मार्कोस ने जहाज से सुरक्षित निकाल लिया गया। जहाज को रोकने से लेकर क्रू को निकालने के पूरे ऑपरेशन में लगभग दो घंटे लग गए।”

उन्होंने आगे कहा, “भारत अक्टूबर 2008 से ही अदन की खाड़ी में समुद्री डकैती रोधी गश्त पर नियमित तौर से युद्धपोत तैनात कर रहा है। अब तक लगभग 110 भारतीय युद्धपोत ऐसी गश्त के लिए तैनात किए गए हैं। इससे पूर्वी अरब सागर में समुद्री डकैती पर काबू पाया गया था।”

बताते चलें कि इससे पहले भी लाइबेरिया के झंडे वाले जहाज़ एमवी केम प्लूटो पर हमला हुआ था। इसमें 21 भारतीय नागरिक थे। अरब सागर में भारत आ रहे जहाज़ों पर हमले ऐसे समय में हो रहे हैं, जब लाल सागर में यमन के हूती विद्रोही इजरायल और उसके सहयोगी देशों से जुड़े जहाज़ों को निशाना बना रहे हैं।

देश के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने इन हमलों को लेकर कहा था, “भारत की बढ़ती आर्थिक और सामरिक ताक़त ने कुछ ताक़तों को जलन से भर दिया है। अरब सागर में हाल में हुए एमवी केम प्लूटो पर ड्रोन हमले और कुछ दिन पहले लाल सागर में एमवी साई बाबा पर हमले को भारत सरकार ने बेहद संजीदगी से लिया है। जिसने भी इस हमले को अंजाम दिया है, उन्हें समुद्र की गहराई से भी ढूँढ कर सज़ा दी जाएगी।”

ट्रक ड्राइवर से बना सीमाई इलाके का ‘बेताज बादशाह’ : जानें कौन है TMC नेता शाहजहाँ, जिसकी भीड़ ने ED पर किया हमला

पश्चिम बंगाल में राशन घोटाला मामले में कल (5 जनवरी 2024) ईडी की छापेमारी के दौरान टीएमसी नेता शंकर आद्या को गिरफ्तार कर लिया गया। 17 घंटे छापेमारी के बाद 12:30 बजे उन्हें अरेस्ट किया गया। वहीं दूसरी ओर संदेशखली में टीएमसी नेता शेख शाहजहाँ के घर रेड मारने गए अधिकारियों, सुरक्षाकर्मियों पर भीड़ ने जानलेवा हमला किया गया। इस दौरान कुछ लोग बुरी तरह घायल भी हुए तो वहीं दूसरी ओर गाड़ियों में भी तोड़फोड़ की गई।

शुक्रवार को ईडी की एक टीम टीएमसी नेता शेख शाहजहाँ के संदेशखली के सरबेरिया स्थित घर पर रेड मारने गई थी। ये जगह बांग्लादेश की सीमा से सटी है। अधिकारियों ने देखा उसके घर ताला लगा है। जब उन्होंने लॉक तोड़ने की कोशिश की तो टीएमसी समर्थकों की भीड़ ने उनपर हमला किया।

मौजूद जानकारी के अनुसार, संदेशखली इलाके में 53 वर्षीय टीएमसी नेता शेख शाहजहाँ का रसूख है उसे लोग संदेशखली का बेताज बादशाह बताते हैं। शेख का कोई राजनीतिक बैकग्राउंड नहीं है लेकिन फिर भी वह राजनीति में बड़ी तेजी से आगे बढ़ा। वह जन्मा गरीब घर में ही था, जिसके कारण शुरुआत में उसने ट्रक ड्राइवर का काम किया, तो कभी कंडक्टर का। कभी सब्जी बेची तो कभी कुछ और किया। लेकिन इन सबके साथ वो संदेशखली में बड़े नेताओं से संपर्क भी बनाता रहा।

धीरे-धीरे समय आया कि वो खुद एक रसूखदार आदमी बन गया। 2006 में वामपंथी सरकार के वक्त उसने मोस्लेम शेख के सबसे करीबी सहयोगी के रूप में पैसे उगाही जैसे काम करने की शुरूआत की। धीरे-धीरे वो रियल स्टेट में घुसा और फिर मछली पालन जैसे कामों में लग गया।

सत्ता परिवर्तन के साथ उसका पाला भी बदल गया। 2011 में वामपंथी सरकार गई तो 2013 में वो टीएमसी में आ गया। यहाँ वह खाद्य मंत्री ज्योतिप्रियो मल्लिक का खास बन गया। भाजपा के साथ टीएमसी की झड़पों में भी शेख का नाम आता रहा। 2020 में उसके ऊपर दो भाजपा नेताओं की हत्या का इल्जाम लगा, लेकिन वह उससे भी बच गया। उसकी नीति यही रही कि वो हमेशा से बड़े लोगों के ग्रुप में उठता-बैठता, जिससे जब उस पर कोई दोष लगे तो वह बच सके। यही वजह है कि उसपर कार्रवाई नहीं हुई। उसपर अपने चुनाव क्षेत्र में चुनाव के दौरान धांधली करने का आरोप भी लगता रहा है।

उसकी टीएमसी में कितनी पैठ है इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि प्रदेश सीएम के खास लोगों ने शाहजहाँ शेख को सपोर्ट किया था। वहीं 1 जनवरी 2024 को तो शाहजहाँ ने खुले में धमकी ही दी थी। ये जानकारी भाजपा नेता अमित मालवीय के ट्वीट से मिली। इसमें शाहजहाँ ने कहा था कि सीबीआई और ईडी उसके बाल तक नहीं छू सकतीं। उसने सबसे ये दुआ करने को भी कहा था कि सब दुआ करें उसे गुस्सा न आए वरना वो भाजपा कार्यकर्ताओं और नेताओं के दाँत तोड़ देगा और उनकी खाल उतार देगा।

ऐसा कोई सगा नहीं, जिसे महुआ ने ठगा नहीं: कभी राहुल की सिपाही थीं, ‘मेरा भारत जवान’ के बाद ममता से होते हुए अनंत तक पहुँचीं मोइत्रा

महुआ मोइत्रा पिछले काफी समय से चर्चा में हैं। कभी अपने बड़बोलेपन के लिए, तो कभी पासवर्ड शेयरिंग के लिए। फिर संसद से सदस्यता गँवाने की वजह से और इस बीच अपने प्रेम संबंधों के लिए। कभी वकील, तो कभी बिजनेसमैन। कभी राजनेता तो कभी कोई और। ऐसा हाल फिलहाल का मामला नहीं है। जी हाँ, जय अनंत देहद्राई हो या सुहान मुखर्जी, वो अपने ही खास लोगों पर नजर रखने के लिए जानी जाती हैं। वैसे, महुआ मोइत्रा आज भले ही ममता बनर्जी के साथ हैं, लेकिन कभी वो राहुल गाँधी की बेहद करीबी हुआ करती थीं। जी हाँ, साल 2010 तक महुआ मोइत्रा कॉन्ग्रेस पार्टी में थी और बेहद अहम काम संभाल रही थी। फिर कुछ ऐसा हुआ कि महुआ मोइत्रा ने राहुल गाँधी को धोखा दे दिया और ममता बनर्जी का साथ पकड़ लिया।

राहुल गाँधी की टीम से महुआ मोइत्रा का करीबी जुड़ाव

महुआ मोइत्रा ने साल 2008 में नौकरी छोड़ी थी और सीधे यूथ कॉन्ग्रेस ज्वॉइन कर लिया था। उन्होंने राहुल गाँधी और कॉन्ग्रेस की विचारधारा से खुद को जुड़ा पाया था। महुआ मोइत्रा ने कहा था कि देश में दो ही राजनीतिक पार्टियाँ हैं, चूँकि कॉन्ग्रेस पार्टी उस समय केंद्र में सत्ता में थी, ऐसे में उन्होंने कॉन्ग्रेस का ही चुनाव किया था। कॉन्ग्रेस उस समय पश्चिम बंगाल में विपक्ष में थी।

महुआ मोइत्रा पर ‘आम आदमी के सिपाही’ कार्यक्रम की कमान थी। उन्हें नादिया जिले के 9 ब्लॉकों का जिम्मा दिया गया था। महुआ मोइत्रा पर एक स्टोरी इंडिया टुडे ने की थी, जिसमें महुआ मोइत्रा ने बताया था कि वो कॉन्ग्रेस से क्यों जुड़ी और क्यों उन्होंने जेपी मोर्गन जैसे संस्थान में काम छोड़कर पॉलिटिक्स में कदम रखा था। वो राुल गाँधी जैसे युवा नेता से बेहद प्रभावित थीं। तब वो राहुल गाँधी के सिपाही कार्यक्रम से प्रभावित थीं, ‘मेरा भारत जवान’ के सपने देखती थीं।

…फिर साल 2010 में बदल ली निष्ठा

महुआ मोइत्रा हमेशा अपने फायदे को ऊपर रखने में विश्वास रखती हैं। उन्होंने दो सालों में देख लिया कि पश्चिम बंगाल में कॉन्ग्रेस कभी ऊपर नहीं जा सकती। उन्होंने ममता बनर्जी की मौजूदगी में कोलकाता में टीएमसी पार्टी को ज्वॉइन कर लिया। ममता ने उनके पार्टी में जुड़ने के समय एक लाइन ही कहा था, “हमारी युवा महुआ मोइत्रा तृणमूल कॉन्ग्रेस से जुड़ रही हैं।” उस समय महुआ मोइत्रा ने कहा था कि पश्चिम बंगाल के लिए ऐसा करना जरूरी है।

टाइम्स ऑफ इंडिया ने अपनी रिपोर्ट में बताया था कि ममता बनर्जी महुआ मोइत्रा जैसे चेहरों की ‘पहचान’ का फायदा उठाने और पूँजीपतियों के साथ संपर्क स्थापित करने के लिए टीम में चुना है, इसीलिए शुरुआत में उन्हें कोई पद नहीं दिया जा रहा।

और 2023 में बताया टीएमसी को बीजेपी का विकल्प, कॉन्ग्रेस-राहुल गाँधी पर बोला हमला

महुआ मोइत्रा संसद से अब सस्पेंड हुई हैं। लेकिन वो दिल्ली में कॉन्ग्रेस पार्टी के साथ टीएमसी का कोर्डिनेशन भी देखती थीं। लेकिन फरवरी के आखिरी दिनों में जब मेघालय विधानसभा चुनाव के दौरान राहुल गाँधी ने टीएमसी को बीजेपी का बी टीम कहते हुए आरोप लगाया था कि मेघालय में टीएमसी सिर्फ वोट काटकर बीजेपी को फायदा पहुँचाने के लिए चुनाव लड़ रही हैं, तो महुआ मोइत्रा राहुल गाँधी पर बरस पड़ी थीं।

टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, महुआ मोइत्रा ने टीएमसी को बीजेपी का एकमात्र विकल्प बताया था। उन्होंने कहा था, “कॉन्ग्रेस पार्टी में बीजेपी को हराने का दम होता, तो टीएमसी यहाँ चुनाव ही नहीं लड़ रही होती। लेकिन कॉन्ग्रेस खत्म हो चुकी है। वो बीजेपी को टक्कर देने की स्थिति में नहीं है। ऐसे में टीएमसी ही बीजेपी को हराने का दम रखती है और हम मजबूती से बीजेपी के सामने खड़े भी हैं। क्या हम घर पर बैठकर कॉन्ग्रेस की एक राज्य से दूसरे राज्य में होती हार को देखते रहें या बीजेपी को हराने के मैदान में उतरें।”

महुआ मोइत्रा ने नॉर्थ शिलॉन्ग में प्रचार करते हुए कॉन्ग्रेस पर जमकर निशाना साधा था। उस चुनाव में बीजेपी को 2 सीटें मिली थी, तो कॉन्ग्रेस और तृणमूल कॉन्ग्रेस दोनों ने ही पाँच-पाँच सीटों पर जीत हासिल की थी। ये अलग बात है कि जिस सीट पर महुआ मोइत्रा ने चुनाव प्रचार किया था, वो सीट न तो कॉन्ग्रेस ही जीत पाई और न ही तृणमूल कॉन्ग्रेस। उस सीट पर नई पार्टी वीपीपी ने जीत दर्ज की और बीजेपी दूसरे नंबर पर रही थी।

महुआ मोइत्रा का राजनीतिक सफर

  • साल 2008 में कॉन्ग्रेस से जुड़ी, पश्चिम बंगाल में तैनाती
  • नादिया जिले में कॉन्ग्रेस के ‘आम आदमी का सिपाही’ कार्यक्रम को किया लीड
  • साल 2010 में टीएमसी से जुड़ीं महुआ मोइत्रा
  • साल 2011 में टीएमसी ने जीता पश्चिम बंगाल में चुनाव
  • ममता की पहली सरकार के दौरान पार्टी की प्रवक्ता
  • साल 2016 में विधानसभा चुनाव लड़ा, करीमपुर विधानसभा सीट से विधायक बनी
  • साल 2019 में कृष्णा नगर लोकसभा सीट से चुनाव जीतकर सांसद बनी
  • साल 2023 में संसद की सदस्यता गँवाई

महुआ ने अपने फायदे के लिए सभी को दिया दगा

महुआ मोइत्रा जब राजनीति में आई थीं, तो उनका कोई गॉडफादर नहीं था। कॉन्ग्रेस ने उन्हें सहारा दिया और राजनीतिक पहचान दी। इसके बाद उन्होंने ममता बनर्जी का दामन थामा और लगातार आगे बढ़ती गईं। महुआ आजकल अपने एक्स बॉयफ्रेंड की वजह से मुश्किलों में हैं, जिसका उन्होंने नींद-चैन तो चुराया ही था, कुत्ता तक चुरा लिया था। उन पर पैसे लेकर संसद में सवाल पूछने के आरोप लगे। उनका संसद का लॉगिन आईडी एक बिजनेसमैन इस्तेमाल करता था। अब वो संसद की सदस्यता खो चुकी हैं। इस साल लोकसभा चुनाव में पार्टी उन्हें टिकट दे या न दें, अपने 15 साल के राजनीतिक करियर में महुआ मोइत्रा ने दिखा दिया है कि वो कितनी चतुर नेता हैं। तभी तो, जब फायदे का मामला लगा तो राहुल गाँधी से भी जुड़ीं, कभी अभिषेक बनर्जी के साथ होकर ममता से जुड़ीं और कभी हीरानंदानी से जुड़कर अडाणी के पीछे पड़ीं। वाह रे महुआ, तेरे क्या कहने…

कॉन्ग्रेस नेता मेवाराम की 2 गंदी वीडियो (7:11 और 18:45 मिनट) वायरल: रेप पीड़िता ने कहा – ‘प्राइवेट पार्ट में डाला डंडा, माँगता था बच्चियाँ’

राजस्थान के बाड़मेर के कॉन्ग्रेस नेता व तीन बार के पूर्व विधायक मेवाराम जैन की अश्लील वीडियो सामने आई है। इस वीडियो में वह महिला के साथ गंदी हरकत करते दिख रहे हैं। वीडियो खुद महिला ने बनाई है।

वीडियो में देख सकते हैं कि मेवाराम जैन के कमरे में घुसते ही एक महिला अलमारी की रैक में अपना मोबाइल कैमरा चालू करके रख देती है। इसके बाद पूर्व विधायक कमरे में आते हैं, थोड़ी बात करते हैं, पानी पीते हैं और फिर महिला के साथ अश्लील हरकतें करना शुरू कर देते हैं

मेवाराम की दो वीडियोज सोशल मीडिया पर वायरल है। एक 7 मिनट 11 सेकेंड की है और दूसरी 18 मिनट 45 सेकेंड की। उनकी वीडियो के स्क्रीनशॉट के साथ उनका नाम ट्रेंड कर रहा है।

अभी पिछले महीने ही मेवाराम सहित 9 के खिलाफ पॉक्सो एक्ट में केस दर्ज हुआ था। पीड़िता ने शिकायत दी थी कि न केवल उनका बल्कि उनकी सहेली का भी रेप हुआ और उनकी नाबालिग बेटी का भी यौन शोषण किया गया।

पीड़िता ने अपनी शिकायत में कहा था कि जब मेवाराम और उसका साथी रामस्वरूप उनका रेप कर करके थक गए तो उन्होंने पीड़िता से 15-16 साल की लड़कियों को लाने को कहा। पुलिस ने इस मामले में पूछताछ पीड़िता की सहेली से की तो कहानी और भयावह निकली। सहेली ने बताया कि उसे तो प्राइवेट पार्ट में डंडा डालकर प्रताड़ित किया गया था।

महिला के आरोपों के बाद मेडिकल करवाया गया था और बयान भी दर्ज हुए थे। वहीं मेवाराम ने कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था जिसके बाद 25 जनवरी तक उसकी गिरफ्तारी पर रोक लगा दी गई थी। हालाँकि आगे कोर्ट में कोई और सुनवाई होती मेवाराम की यह वीडियोज वायरल हो गईं जिससे समाज में उनकी थू-थू हो रही है।

बता दें कि साल 2022 में भी इसी वीडियो से जुड़े तीन स्क्रीनशॉट वायरल हुए थे। जिसके बाद बाड़मेर कोतवाली थाने में सेक्सटॉर्शन का केस दर्ज हुआ था और 2 महिलाओं सहित वकील और अन्य की गिरफ्तारी हुई थी। इनके ऊपर आरोप लगाए गए थे कि ये अश्लील वीडियो दिखाकर मेवाराम के साथी रामस्वरूप से 5 करोड़ रुपए माँगे गए। मामला 50 लाख में तय हुआ लेकिन फिर उनसे 1 करोड़ रुपए माँगे जाने लगे। इसके बाद पुलिस में शिकायत देकर 2 महिलाओं सहित 5 आरोपितों को गिरफ्तार किया गया।

अजय श्रीवास्तव ने महाराष्ट्र में खरीदी दाऊद इब्राहिम की प्रॉपर्टी, खोलेंगे सनातन स्कूल: 15000 रुपए के प्लॉट के लिए चुकाए 2 करोड़ रुपए

दाऊद इब्राहिम की सारी डॉनगिरी हवा हो चुकी है। लोगों के जेहन से उसका डर पूरी तरह से मिट चुका है। इसकी बानगी तब दिखी, जब महाराष्ट्र के रत्नागिरी में स्थित उसकी प्रॉपर्टी की नीलामी हुई। इस दौरान उसका एक प्लॉट 2 करोड़ रुपए की कीमत में बिका। नीलामी में इस प्लॉट की न्यूनतम बोली सिर्फ 15 हजार रुपया रखी रखी गई थी।

दाऊद के इस प्लॉट को जिस व्यक्ति ने खरीदा, उनका नाम है अजय श्रीवास्तव। अजय श्रीवास्तव एक वकील हैं। वे अब इस प्रॉपर्टी पर एक सनातन स्कूल खोलेंगे, जिसमें हिंदू धर्म से संबंधित विषयों की भी शिक्षा दी जाएगी। संजय श्रीवास्तव ने पहले भी दाऊद की तीन प्रॉपर्टी खरीदी थी, जिसमें उन्होंने सनातन धर्म पाठशाला खोला है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, दाऊद इब्राहिम की चार जमीनों की नीलामी शुक्रवार (5 जनवरी 2024) को की गई। दाऊद के इस पैतृक कृषि भूमि की कीमत 19 लाख रुपए रखी गई थी। इनमें से 170 गज के प्लॉट का बेस प्राइज महज 15 हजार रुपए रखा गया था, लेकिन इसके लिए कई लोगों ने बोली लगाई। आखिरकार, इसके लिए 2 करोड़ रुपए तक बोली लग गई। वहीं, एक अन्य प्लॉट भी लिया है।

वकील अजय श्रीवास्तव को इन दोनों प्लॉट्स का मालिकाना हक मिल गया। वहीं, दो अन्य प्रॉपर्टी के लिए कोई खरीदार नहीं मिला। अजय श्रीवास्तव ने मीडिया से बातचीत में कहा कि ये प्लॉट उम्मीद से ज्यादा महँगे पड़ गए, लेकिन उनके ज्योतिषी ने कहा था कि इस प्लॉट का नंबर उनके लिए भाग्यशाली रहेगा। इसलिए उन्होंने इसे खरीदने में पूरा जोर लगा दिया।

दाऊद इब्राहिम की ये दोनों ही प्रॉपर्टी रत्नागिरी जिले में स्थित हैं। ये दाऊद इब्राहिम की पैतृक संपत्तियाँ हैं। यहीं पर दाऊद के बचपन का भी घर हुआ करता था, जो मुंबाके गाँव में स्थित है। दाऊद का घर भी अजय श्रीवास्तव ने ही खरीदा था। अजय श्रीवास्तव ने दाऊद के घर के पते पर सनातन धर्म पाठशाला ट्रस्ट का रजिस्ट्रेशन कराया है। संजय श्रीवास्तव शिवसेना के नेता रह चुके हैं।

2 मिनट का गूगल मीट, 200 लोगों की नौकरी से छुट्टी: जो FrontDesk दूसरों को देती थी बसेरा, उसने अपने सभी कर्मचारियों की छीनी रोजी-रोटी

एक अमेरिकी कंपनी ने दो मिनट के गूगल मीट कॉल में पूरे स्टाफ की छंटनी कर दी है। फ्रंटडेस्क नाम की इस कंपनी ने 200 से अधिक कर्मचारियों को एक झटके में बाहर का रास्ता दिखा दिया। फ्रंटडेस्क के सीईओ ने कंपनी के कामकाज के लिए अमेरिकी सरकार से मदद माँगी है, ताकी कंपनी को दिवालिया होने से बचाया जा सके।

फ्रंटडेस्क के सीईओ जेसी डीपिंटो ने गूगल मीट कॉल के दौरान अपने कर्मचारियों को बताया कि कंपनी स्टेट रिसीवरशिप के लिए आवेदन कर रही है। दरअसल अमेरिका में यह प्रक्रिया दिवालियापन की वैकल्पिक व्यवस्था है। फ्रंटडेस्क एक स्टार्टअप है, जो अपार्टमेंट को किराए पर देने का काम करती है। कंपनी 30 से ज्यादा मार्केट में ऑपरेट करती है।

टेक क्रंच की रिपोर्ट के मुताबिक, फ्रंटडेस्क कंपनी ने जिन कर्मचारियों को निकाला है, उनमें फुलटाइम, पार्टटाइम और कॉन्ट्रैक्टर्स शामिल हैं। कंपनी की शुरुआत साल 2017 में हुई थी और यह कंपनी अमेरिका में 1200 से ज्यादा फर्निश्ड अपार्टमेंट मैनेज करती है। बीते कुछ समय से कंपनी बढ़ती लागत और डिमांड में भारी उतार-चढ़ाव के चलते चुनौतियों का सामना कर रही है।

फ्रंटडेस्क कंपनी ने निवेशकों से करीब 26 मिलियन डॉलर (लगभग 216 करोड़ रुपए) का निवेश हासिल किया था। इस कंपनी के निवेशकों में कई बड़े निवेशक भी शामिल हैं। यह कंपनी निवेशकों से और पैसे जुटाने की कोशिश कर रही थी, लेकिन उसमें सफल नहीं हो पाई। ऐसे में कंपनी ने अपने स्टाफ की छंटनी का फैसला किया।

बता दें कि दो साल पहले भारतीय मूल के एक सीईओ ने जूम कॉल पर 900 कर्मचारियों का कॉन्फ्रेंस किया था। Better नाम की इस कंपनी के सीईओ विशाल गर्ग ने कॉन्फ्रेंस कॉल में शामिल सभी 900 कर्मचारियों को निकाल दिया था। उस समय वो कंपनी काफी चर्चा में रही थी। अब ऐसा ही कदम फ्रंटडेस्क कंपनी के सीईओ ने उठाया है।

अयोध्या में कारसेवकों पर फेंका बम, हवा में कैच कर बचाई सैकड़ों जिंदगी… कहानी राम मंदिर के लिए 19 साल की उम्र में बलिदान होने वाले अविनाश की

भगवान श्री रामलला का मंदिर बन रहा है। जिस काम के लिए मेरे बेटे ने बलिदान दिया था, वह काम अब पूरा हो रहा है। मेरे बेटे का बलिदान सार्थक हुआ।

यह कहना है ​72 साल की अक्षय माहेश्वरी का। वे और उनके 76 वर्षीय पति मानकचंद माहेश्वरी राजस्थान के अजमेर में रहते हैं। इन दिनों 22 जनवरी 2024 को अयोध्या में रामलला की प्राण-प्रतिष्ठा का साक्षी बनने की तैयारियाँ कर रहे हैं। यह बुजुर्ग दंपती राम मंदिर के लिए 19 साल की उम्र में बलिदान देने वाले अविनाश माहेश्वरी के माता-पिता हैं।

जिस रामजन्मभूमि पर इस्लामी आक्रांता बाबर के नाम पर एक गुंबद चढ़ा दिया गया था, उस पवित्र जगह को वापस पाने के लिए हिंदुओं के संघर्ष की कहानी करीब 500 वर्षों की है। इस दौरान देश के अलग-अलग हिस्सों के कारसेवकों को अयोध्या में बलिदान तक देना पड़ा। अविनाश माहेश्वरी उसी 6 दिसंबर 1992 को अयोध्या में बलिदान हुए थे जिस दिन विवादित ढाँचा ढाह दिया गया था।

अयोध्या के टेढ़ा सर्कल पर इस दिन कारसेवकों पर बम फेंका गया था। अविनाश ने उस बम को हवा में ही कैच कर दूर फेंक दिया। लेकिन विस्फोट होने से छर्रे उनके चेहरे पर लग गए। उन्हें गंभीर हालत में अस्पताल ले जाया, पर उनकी जान नहीं बची। सैकड़ों रामभक्त की जिंदगी बचाकर वे खुद बलिदान हो गए।

एनडीटीवी को अविनाश के पिता मानक चंद माहेश्वरी ने बताया, “ढाँचा विध्वंस के दौरान एक कार सेवक जख्मी हो गया था। अविनाश अपने साथियों के साथ उन्हें अस्पताल ले जा रहे थे। इसी दौरान एक अन्य मजदूर के घायल होने की सूचना मिली। अविनाश अयोध्या के टेढ़ा सर्कल पर उतर गए। इसी समय राहत कार्य में लगे कारसेवकों पर बम फेंका गया। अविनाश ने इसे बम को कैच कर दूर फेंक दिया पर बम फटने से छर्रे उनके चहरे पर आकर लग गए।”

मानकचंद माहेश्वरी का राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़ाव रहा है। इस कारण 12 साल की उम्र में ही अविनाश भी संघ से जुड़ गए। वह नियमित रूप से शाखा जाने लगे। अक्षय माहेश्वरी बताती हैं कि 26 नवंबर 1992 को अविनाश उनसे अयोध्या जाने की जिद्द करने लगा। उन्होंने उसे मना किया तो वह रोते-रोते सो गया। 28 नवंबर की सुबह वह अपने दोस्त के साथ अयोध्या के लिए निकल गया।

अविनाश माहेश्वरी की तस्वीर के साथ उनके माता पिता (फोटो साभार: एनडीटीवी)

मानकचंद माहेश्वरी के अनुसार अयोध्या रवाना होने से पहले उनका बेटा उनकी डिस्पेंसरी पर मिलने आया था। उन्होंने अविनाश से कहा था, “जो भी तुम्हें काम दे, वह सब अच्छे से कर लेना।” माहेश्वरी के अनुसार उस समय अजमेर से अयोध्या के लिए 28 लोगों की एक टोली निकली थी।

नारे लग रहे थे अविनाश अमर रहे और बरस रहे थे डंडे

मानकचंद माहेश्वरी ने दैनिक भास्कर को बताया कि बेटे के बलिदान होने की जानकारी उन्हें आएसएस से संपर्क होने के कारण 6 दिसंबर 1992 को ही मिल गई थी। 7 दिसंबर को पूरे देश में कर्फ्यू लग दिया गया था। पत्नी को इसके बारे में उन्होंने 8 दिसंबर को तब बताया जब बेटे के शव की शिनाख्त के लिए बुलाया गया। 9 दिसंबर को संघ की तरफ से उन्हें अविनाश की अंतिम यात्रा जुलूस के रूप में निकालने का प्रस्ताव दिया गया। लेकिन कर्फ्यू के कारण उन्होंने मना कर दिया। बावजूद अंतिम दर्शन करने को भीड़ उमड़ पड़ी। इस दौरान एक तरफ ‘अविनाश अमर रहे’ के नारे लग रहे थे, दूसरी तरफ प्रशासन भीड़ पर डंडे बरसा रहा था। इस दौरान कई लोगों को चोटें भी आई थी।

बलिदान होने के बाद बहन को मिली चिट्ठी

अविनाश माहेश्वरी 6 दिसंबर को अयोध्या में बलिदान हो गए। 28 नवंबर को माता-पिता ने उन्हें आखिरी बार जीवित देखा था। 30 नवंबर को उनकी बड़ी बहन सुमन काबरा का जन्मदिन था। उन्होंने बहन को एक चिट्ठी लिखी थी, जो उनके बलिदान के तीन दिन बाद यानी 9 दिसंबर को सुमन को मिली। इसमें लिखा था;

मैं अयोध्या पहुँच गया हूँ। यहाँ सब अच्छा है। कोई टेंशन की बात नहीं है। जन्मदिन की शुभकामनाएँ। जल्द अगला लेटर लिखूँगा। अजमेर में माँ -पापा भी ठीक होंगे, उन्हें भी लेटर लिखूँगा। फूलों का तारों का सबका कहना है, एक हजारों में मेरी बहना है।

मानकचंद माहेश्वरी के अनुसार अविनाश के बलिदान के करीब एक महीने बाद विश्व हिंदू परिषद ने उन्हें 2 लाख रुपए का चेक देना चाहा था। लेकिन उन्होंने इसे लेने से इनकार कर दिया। इसके बाद उनके बेटे की स्मृति में अजमेर के भजनगंज में एक स्कूल खोला गया। 28 बच्चों से शुरू हुए इस स्कूल में आज 650 बच्चे पढ़ते हैं। अपना दर्द छिपाते हुए अक्षय और मानकचंद माहेश्वरी कहते हैं;

जिस काम के लिए हमारा बेटा वहाँ गया और अपना बलिदान दिया, वह काम अब पूरा हो रहा है। हमारे बेटे का बलिदान सार्थक हुआ। उसके बलिदान को कभी भुलाया नहीं जा सकता।

‘बहुत रामभक्त बनती है ना……’: घर में राम दरबार लगाने पर मुस्लिम महिला को कट्टरपंथियों की धमकी, पहले भी हो चुकी है फायरिंग, बेटी को लगी थी गोली

अलीगढ़ में राम भक्त एक मुस्लिम महिला को जान से मारने की धमकी मिली है। कट्टरपंथियों ने हिंदी में एक पत्र लिखकर महिला को धमकाया है और 72 घंटों के भीतर उसे पूरे परिवार सहित मारने की बात कही है। उस महिला का नाम रूबी आसिफ खान है और वह बीजेपी की कार्यकर्ता हैं। वर्तमान में वह अलीगढ़ जिले के जयगंज मंडल की उपाध्यक्ष हैं।

मामला अलीगढ़ के शाहजमाल के माबूद नगर का है। यहीं पर रूबी आसिफ खान अपने परिवार के साथ रहती हैं। गुरुवार (4 जनवरी 2024) की रात को किसी व्यक्ति उनके घर पर एक चिट्ठी फेंक दिया। जब उन्होंने इस चिट्ठी को देखा तो इसे देखकर वह हतप्रभ रह गईं। चिट्ठी में उन्हें परिवार सहित जान से मारने की धमकी दी गई है।

इस पत्र में लिखा है, “रूबी आसिफ खान तू बहुत बड़ी राम भक्त बनती है न, 72 घंटे में तुझे परिवार सहित जान से मार देंगे।” इसके बाद उन्होंने नजदीकी थाने रोरावर में जाकर इसकी शिकायत दर्ज कराई है। इसके बाद पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज शुरू कर दिया। एक फुटेज में एक कट्टरपंथी ये पत्र फेंकता हुआ देखा गया है। पुलिस उसकी तलाश कर रही है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, रूबी आसिफ खान पर पहले भी हमले हो चुके हैं। उनकी बेटी को मारी गई जा चुकी है। इसलिए इस बार वो धमकियों को लेकर बेहद गंभीर हैं। रूबी ने कहा कि उनकी पूजा में पहले भी विघ्न डाले जा चुके हैं। उनके खिलाफ कट्टरपंथी मौलाना फतवा भी जारी कर चुके हैं। इसके बावजूद वह अपने निश्चय पर अटल रही हैं।

बता दें कि रूबी आसिफ खान ने 27 दिसंबर 2023 को उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र लिखकर सूचना दी थी कि वो 1 जनवरी 2024 से 22 जनवरी 2024 तक अपने आवास पर भगवान राम का दरबार स्थापित कर पूजा अर्चना करेंगी। उन्होंने घर में राम दरबार सजाकर पूजा शुरू कर दी है। रूबी पहले भी भगवान गणेश और माता दुर्गा की प्रतिमा अपने घर में स्थापित कर चुकी हैं।

सीएम योगी को लिखे पत्र में रूबी ने कहा था, “कुछ जेहादी टाइप मुल्ला मेरी पूजा में कई बार विघ्न डाल चुके हैं। मेरे ऊपर गोली भी चला चुके हैं। एक बार मेरी बेटी के पेट में गोली लगी थी। मेरे खिलाफ फतवा भी जारी हो चुके हैं। मेरे मोहल्ले में पोस्टर तक लगा दिए थे कि यह हिंदू बन गई है। इसे पूरे परिवार सहित जिंदा जला दो।” उन्होंने आशंका जाहिर की है कि इस बार भी ऐसी घटना हो सकती है।

सनातन के प्रति उनकी अगाध आस्था को देखकर कट्टरपंथियों भड़क उठे। वो उनके निशाने पर आ गई हैं। कट्टरपंथी अक्सर उन्हें धमकी देते रहते हैं। उनके खिलाफ कई मौलवियों ने फतवा भी जारी किया था और कहा था कि वह सच्चा मुस्लिम नहीं हैं। कट्टरपंथियों ने एक मुस्लिम द्वारा मूर्ति पूजा को शिर्क बताकर रूबी की आलोचना की थी।