Home Blog Page 1264

‘सनातन दुनिया भर में सर्वोपरि, हिन्दू धर्म में सबको मिलता है सम्मान’: घर-वापसी कर शहजाद बने ‘करण चौधरी’, बताया – अब्बा ने मेरी माँ-बहन को छोड़ कर लिया दूसरा निकाह

सहारनपुर के शहजाद ने घर-वापसी कर हिन्दू धर्म अपना लिया है। वो अब ‘करण चौधरी’ के नाम से जाने जाएँगे। राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम से पहले शारदा नगर के शहजाद ने ये कदम उठाया है। स्थानीय हरि मंदिर में उनके शुद्धिकरण और घर-वापसी की प्रक्रिया को पूरा कराया गया, जहाँ पुजारी और हिन्दू कार्यकर्ता मौजूद रहे। अब उन्होंने सुरक्षा की माँग की है और अपनी जान को खतरा बताया है। शहजाद के पिता का नाम यूनुस है और उनकी उम्र 25 वर्ष है।

शहजाद ने माँग की थी कि वो इस्लाम मजहब को छोड़ना चाहते हैं और हिन्दू धर्म में शामिल होना चाहते हैं। इसके बाद हिन्दू संगठन ‘बजरंग दल’ के कार्यकर्ता उन्हें लेकर आवास-विकास स्थित हरि मंदिर में गए। वहाँ पूरे विधि-विधान के साथ सारी प्रक्रिया पूरी की गई। वैदिक मंत्रोच्चार के साथ उनकी घर-वापसी संपन्न हुई और ‘करण चौधरी’ नाम दिया गया। शहजाद ने अपना नाम बदले जाने का एक शपथ-पत्र भी जारी किया है। उन्होंने कहा कि उनके पूर्वज हिन्दू ही थे।

अब ‘करण चौधरी’ बन चुके शहजाद ने बताया कि काफी पहले उनके पूर्वजों ने हिन्दू धर्म छोड़ कर इस्लाम मजहब अपना लिया था और मुस्लिम बन गए थे। उन्होंने ये भी बताया कि उनके अब्बा यूनुस ने अब दूसरा निकाह कर लिया है। इतना ही नहीं, उसने अपनी पहली पत्नी और बेटी को भी खुद से अलग कर दिया है। माँ और बहन के साथ हुए अत्याचार को देख कर शहजाद से रहा नहीं गया। उन्होंने इस्लाम को इन कुरीतियों के कारण छोड़ने का मन बना लिया।

उन्होंने बताया है कि जल्द ही उनकी माँ और बहन भी घर-वापसी करेंगी। शहजाद पहले बिजली विभाग में संविदा पर काम करते थे। हालाँकि, उन्होंने कुछ दिनों पहले ही ये नौकरी छोड़ दी है और अब वो एक दुकान खोलने की योजना बना रहे हैं। उन्होंने जूतों की दुकान खोल कर जीवन-यापन का फैसला लिया है। हवन-यज्ञ में हिस्सा लेने और भगवा टीका लगाए जाने के बाद उन्होंने कहा कि सनातन दुनिया भर में सर्वोपरि है और यहाँ सबको सम्मान मिलता है। इस दौरान विहिप के प्रान्त प्रवर्तन प्रमुख कपिल मोहड़ा भी मौजूद रहे।

‘श्रीराम हम सबके पूर्वज, धर्म बदलने से पुरखे नहीं बदलते’: ‘रामज्योति’ के लिए भगवा पहन अयोध्या निकलीं मुस्लिम महिलाएँ, सरयू का पवित्र जल भी लाएँगी

काशी का हर घर ‘रामज्योति’ से रोशन होगा, क्योंकि नाजनीन और नजमा अंसारी के नेतृत्व में मुस्लिम महिलाओं का एक समूह अयोध्या के लिए रवाना हो चुका है, जो वहाँ ‘रामज्योति’ लाया जाएगा। उसी से पूरी काशी को जगमग किया जाएगा। नाजनीन अंसारी का कहना है कि धर्म परिवर्तन कर लेने से पुरखे नहीं बदल जाया करते। भगवान श्रीराम ही हम सबके पूर्वज हैं। हिंदुस्तान में रहने वाले सभी मुस्लिमों के पूर्वज भगवान राम हैं।

काशी से नाजनीन अंसारी और नजमा अंसारी के नेतृत्व में मुस्लिम महिलाओं का जत्था भगवा वस्त्र पहनकर अयोध्या के लिए रवाना हो चुका है। काशी के डोमराजा ओम चौधरी और पातालपुरी मठ के महंत बाबा बालक दास ने उनकी यात्रा को रवाना किया। मुस्लिम महिलाओं के इस समूह को अयोध्या में महंत शंभू देवाचार्य ज्योति सौंपेंगे। ये महिलाएँ उसके बाद वापस काशी के लिए रवाना हो जाएँगी।

इस दौरान नाजनीन अंसारी ने मीडिया से बातचीत में कहा कि सभी भारतीय श्रीराम के ही वंशज हैं। किसी भी भारतीय का डीएनए अलग नहीं है। नाजनीन अंसारी ने कहा कि वो मुस्लिम इलाकों में लोगों से ‘रामज्योति’ जलाने की अपील करेंगी। नाजनीन ने कहा कि पहले भी राम नवमी और दीवाली का त्यौहार मनाती रही हैं। इस बार 21 जनवरी से पूरे काशी में ‘रामज्योति’ बाँटी जाएगी। ये पूरा ग्रुप अपने साथ अयोध्या से पवित्र मिट्टी और सरयू नदी से जल भी लाएगा।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, नाजनीन अंसारी मुस्लिम महिला फाउंडेशन की अध्यक्ष हैं। नाजनीन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अपील के बाद 22 जनवरी को उत्सव मनाने का संकल्प लिया है। वहीं, नजमा अंसारी विशाल भारत संस्थान से जुड़ी हैं। दोनों महिलाओं ने बीएचयू से ही पीएचडी की डिग्री ली है और सालों से हिंदू-मुस्लिम संवाद बढ़ाने के अभियान में जुटी हुई हैं। दोनों महिलाओं ने ही तीन तलाक के मुद्दे पर काफी लड़ाई लड़ी और मुस्लिम महिलाओं का सहयोग भी किया है। वहीं, नाजनीन ने रामचरितमानस के साथ ही हनुमान चालीसा का उर्दू में अनुवाद भी किया है।

भूकंप से काँपा मालदीव! PM मोदी के लक्षद्वीप दौरे के बाद चर्चा में हिन्द महासागर में स्थित देश, 2023 में अकेले भारत से पहुँचे थे 2.09 लाख पर्यटक

पर्यटन से अपनी रोजी-रोटी चलाने वाले मालदीव में भूकंप आया है। रिक्टर स्केल पर इसकी तीव्रता 5.4 मापी गई है। दक्षिण एशिया में हिन्द महासागर में सहित ये देश कई कारणों से आजकल चर्चा में है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने केंद्र शासित प्रदेश लक्षद्वीप का दौरा कर के वहाँ की सुंदरता के बारे में दुनिया को बताया, जिसके बाद मालदीव के कट्टरपंथी भड़क गए और उन्होंने लक्षद्वीप को भला-बुरा कहना शुरू कर दिया। बता दें कि लक्षद्वीप कई मायनों में मालदीव से भी आकर्षक माना जाता है।

मालदीव एक द्वीपीय समूह है, जहाँ कई सेलेब्रिटी पर्यटन के लिए पहुँचते हैं। कोरोना काल में बॉलीवुड के कई सेलेब्स यहाँ का दौरा करते हुए दिखे थे। साफ़-सुथरे समुद्री पानी और रिजॉर्ट-कॉलेज के दम पर मालदीव ने वर्षों से पर्यटकों को लुभाया है। अब शनिवार (6 जनवरी, 2024) को 5:16::34 बजे मालदीव को भूकंप का सामना करना पड़ा है। भूकंप की गहराई 10 किलोमीटर मापी गई है। इसका लोकेशन 3.06 लैटीट्यूड और 65.51 लॉन्गीट्यूड पर पाया गया।

इस भूकंप का केंद्र मालदीव की राजधानी माले से 896 किलोमीटर पश्चिम की तरफ था। पिछले साल 29 दिसंबर को भी मालदीव भूकंप से काँपा था। तब हिन्द महासागर में एक साथ 4 भूकंप के झटका महसूस किए गए थे। US जियोलॉजिकल सर्वे में बताया था कि इन झटकों की तीव्रता रिक्टर स्केल पर क्रमशः 4.8, 5.2, 5.8 और 5.0 मापी गई थी। साथ ही इनकी गहराई 7.7 किलोमीटर से लेकर 10 किलोमीटर तक मापी गई थी।

हालाँकि, भूकंप के ताज़ा झटके में किसी के हताहत होने की खबर नहीं है। बता दें कि 2023 में 18.78 लाख पर्यटक मालदीव पहुँचे, जो कि 2022 के 16 लाख के आँकड़े से ज़्यादा है। इनमें से 2.09 लाख पर्यटक अकेले भारत से पहुँचे थे। इतनी ही संख्या रूस से मालदीव जाने वाले पर्यटकों की थी। इसके बाद चीन, यूके, जर्मनी और इटली का नंबर आता है। अब पीएम मोदी के लक्षद्वीप दौरे के बाद गूगल सर्च में भी ये केंद्र शासित प्रदेश टॉप पर आ गया है। मालदीव की सरकार चीन समर्थक मानी जाती है।

ED की चार्जशीट में भूपेश बघेल का नाम, इलेक्ट्रॉनिक एविडेंस भी मिले: सट्टेबाजी एप घोटाले में नई गिरफ़्तारी, पूर्व CM से जल्द होगी पूछताछ

छत्तीसगढ़ के साथ पूरे देश को हिला देने वाले महादेव सट्टा एप मामले में ED ने अपनी दूसरी चार्जशीट दाखिल कर दी है, जिसमें छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल का भी नाम है। चार्जशीट में 5 आरोपितों शुभम सोनी, अमित कुमार अग्रवाल, रोहित गुलाटी, भीम सिंह और असीम दास के नाम हैं। इस चार्जशीट में भूपेश बघेल को पैसे देने की बात कही गई है। यही नहीं, ईडी ने बताया है कि भूपेश बघेल के खिलाफ उसे इलेक्ट्रॉनिक एविडेंस भी मिले हैं।

ऐसे में माना जा रहा है कि ईडी जल्द ही उनसे पूछताछ कर सकती है। इस बीच, भूपेश बघेल ने अपनी सफाई में कहा है कि राजनीतिक वजहों से उनका नाम इस मामले में घसीटा जा रहा है।

ईडी की चार्जशीट में क्या कुछ है?

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईडी ने 1700-1800 पन्नों की नई चार्जशीट में असीम दास को महादेव सट्टा एप के प्रोमोटरों का कूरियर कहा है। उसी के ठिकाने से रेड मारकर ईडी ने 5.39 करोड़ रुपए बरामद किए थे। इसके साथ ही उसे गिरफ्तार कर लिया गया था। ईडी ने चार्जशीट में कहा है कि असीम दास ने ये बात स्वीकार किया है कि उसके पास से बरामद पैसे भूपेश बघेल के लिए भेजे गए थे। उसने पहले भी ये बात स्वीकारी है कि महादेव सट्टा एप के संचालकों ने भूपेश बघेल को कुल 508 करोड़ रुपए दिए थे।

भूपेश बघेल ने दी ये सफाई

मीडिया से बातचीत के दौरान भूपेश बघेल ने इस मामले में अपनी सफाई दी है। उन्होंने कहा है कि ईडी ने राजनीतिक आकाओं के इशारे पर मेरा नाम शामिल किया है। उन्होंने कहा कि वो दबाव डालकर उनका और उनके सहयोगियों के खिलाफ बयान दर्ज करवा रही है। बघेल ने कहा, “मुझ पर जिन पैसों के लेन देन का आरोप लगा है, वो आधारहीन है।” भूपेश बघेल ने आगे कहा कि जिस असीम दास के पास से रुपए बरामद हुए, उसने बताया है कि उससे ज़बरदस्ती बयान लिए गए थे।

महादेव ऐप मामले में नई गिरफ्तारी

इस बीच, महादेव सट्टा एप केस में मुंबई क्राइम ब्रांच की एसआईटी ने शुक्रवार (5 जनवरी, 2024) को दीक्षित कोठारी नाम के युवक को गिरफ्तार किया है। वो इस मामले के मुख्य आरोपितों में से एक है। उसी के ईमेल पते पर महादेव एप से जुड़ी वेबसाइट चलाई जा रही थी। वो ही दो साल से हर साल 20 लाख रुपए वेबसाइट की मेंटेनेंस पर खर्च कर रहा था। इस मामले में 6 लोग पहले ही गिरफ्तार किए जा चुके हैं। वहीं, मुख्य आरोपितों में से एक सौरभ चंद्राकर को दुबई में नजरबंद रखा गया है, उसे भारत लाने की कोशिशें चल रही हैं।

गौरतलब है कि महादेव सट्टा घोटाले में आरोपित असीम के घर पर 2 नवम्बर, 2023 को ईडी ने छापा मारा था। इसके पश्चात न्यायालय में पेश करके उसे जेल भेज दिया था। वह तबसे ही जेल में बंद है। ईडी का कहना था कि असीम दास ही नेताओं को इस घोटाले के पैसे पहुँचाता था। महादेव बुक घोटाला में छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल का नाम भी आया था। यह कहा गया था कि इस घोटाले के सम्बन्ध में उन्हें ₹508 करोड़ की धनराशि दी गई।

‘ED अधिकारियों की हत्या की थी साजिश, TMC नेताओं के इशारे पर हमला’: बंगाल की घटना पर जाँच एजेंसी का खुलासा, 16 घंटे में 2 बार बनाया गया निशाना

प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने अपनी टीम पर पश्चिम बंगाल के उत्तर 24 परगना जिले के संदेशखाली में हुए हमले को हत्या की साजिश करार दिया है। इसे लेकर केंद्रीय एजेंसी ने बकायदा शनिवार (6 जनवरी, 2024) को प्रेस नोट जारी किया है।

इसमें ईडी ने आरोप लगाया है कि ये हमला तृणमूल कॉन्ग्रेस नेता के उकसावे पर हुआ। केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने भी इस हमले की कड़ी निंदा की। उन्होंने कहा कि जिन लोगों में कानून के लिए कोई सम्मान नहीं है और जो अपने कुकर्मों के लिए जेल जाने से डरते हैं, वे जाँच एजेंसियों पर ऐसे हमले करते हैं।

बताते चलें कि शुक्रवार (5 जनवरी, 2024) सुबह राशन घोटाला केस में टीएमसी नेता शाहजहाँ शेख के घर रेड मारने गई ED की टीम और CRPF के जवानों पर 250-300 लोगों की भीड़ ने जानलेवा हमला किया था। इस दौरान पत्रकारों पर भी हमला हुआ और कई गाड़ियों में तोड़फोड़ की गई। इस हमले को लेकर ईडी ने डीजीपी और एसपी को हमले के फुटेज के साथ ईमेल से शिकायत दर्ज कराई है। पुलिस ने संदेशखाली हमला केस में 3 FIR दर्ज की हैं। वहीं अब तक 16 लोगों की गिरफ्तारी की गई है।

सीएम ममता बनर्जी के राज में पश्चिम बंगाल में ईडी अधिकारियों पर 16 घंटे के अंदर दो बार हमला किया गया। शाहजहाँ शेख के घर के बाहर रेड मारने के दौरान हुए हमले के बाद भी ईडी टीम पर हमला किया गया था। ईडी पर ये हमला भी राशन घोटाले की जाँच के दौरान किया गया। शुक्रवार (5 जनवरी, 2024) देर रात इस घोटाले को लेकर ईडी TMC नेता शंकर आद्या को गिरफ्तार कर ले जा रही थी। इस दौरान उनके समर्थकों ने ईडी अधिकारियों पर हमला बोला दिया।

यहाँ महिलाओं की आड़ लेकर आद्या के समर्थकों ने केंद्रीय एजेंसी की गाड़ियों पर पथराव और तोड़फोड़ की। आद्या बोंगाँव नगर पालिका के पूर्व अध्यक्ष भी हैं। राशन वितरण केस में ईडी की यह तीसरी गिरफ्तारी है।

इससे ईडी ने इस केस में कोलकाता कारोबारी बकीबुर रहमान की पहली गिरफ्तारी की थी। दूसरी गिरफ्तारी पश्चिम बंगाल के मौजूदा वन मंत्री और पूर्व राज्य खाद्य आपूर्ति मंत्री ज्योतिप्रिय मल्लिक की थी। रहमान की तरह आद्या भी लंबे वक्त से मल्लिक के करीबी माने जाते हैं।

कुछ दिन पहले ही ईडी ने पश्चिम बंगाल में राशन घोटाले का खुलासा किया था। इसके तहत सार्वजनिक वितरण प्रणाली का लगभग 30% राशन खुले बाज़ार में बेचा गया था। राशन की इस कथित चोरी से हुए फायदे को मालिकों और PDS वितरकों ने मिलकर आपस में बाँट लिया था।

ईडी के इस हमले को लेकर केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने कहा, “लोकतांत्रिक तंत्र में, सरकारी एजेंसियाँ अपने आदेश के मुताबिक काम करती हैं। उन्हें बगैर किसी बाधा के काम करने की मंज़ूरी दी जानी चाहिए। बदकिस्मती से, कुछ क्षेत्रों में जहाँ लोग भ्रष्टाचार में गहराई से डूबे हुए हैं और उनके मन में कानून के लिए कोई इज्जत नहीं है। ये जेल जाने से डरते हैं। वे जाँच एजेंसियों के खिलाफ बोलते हैं। उन पर हमले करते हैं। मैं उनकी कड़ी निंदा करता हूँ।”

देखने आइए, लेकिन अपने रिस्क पर… खँडहर स्टेडियम में मैच, मुंबई से खेलने के लिए पहुँच गई बिहार की 2 रणजी टीमें: पूर्व सचिव ने OSD का सिर फोड़ा

बिहार में टॉप क्रिकेट लौट आया है। राज्य में सालों बाद एलीट ग्रुप का मुकाबला खेला जा रहा है, क्योंकि इस बार बिहार को एलीट ग्रुप में शामिल किया गया है। ये मुकाबला 41 बार की रणजी चैंपियन मुंबई और बिहार के बीच पटना के मोइन-उल-हक स्टेडियम में खेला जा रहा है, जो खुद खहंडर बन चुका है। बिहार में ऐसा एक भी स्टेडियम नहीं है, जिसका मैनेजमेंट BCCI से जुड़े BCA (बिहार क्रिकेट संघ) के पास हो। हाँ, बाकी सारा बवाल बीसीए में खूब है।

शुक्रवार (5 जनवरी, 2024) को जब मुंबई की क्रिकेट टीम मोइन-उल-हक स्टेडियम में पहुँची, तो उसका सामना करने के लिए बिहार की दो टीमें वहाँ मौजूद थी। इसके बाद एक टीम को मैदान में घुसने ही नहीं दिया गया, तो दूसरी ओर आधिकारिक रूप से महज 12 साल के खिलाड़ी को फर्स्ट क्लास क्रिकेट में एंट्री करा दी गई। कुछ ही समय बाद खबर आती है कि बीसीए से जुड़े लोगों में सिर-फुटौव्वल हुआ है और एक अधिकारी घायल भी हो गया है। इस बीच, बहुत कम दर्शकों के सामने मैच जारी रहा।

बिहार के उप-मुख्यमंत्री तेजस्वी यादव के बारे में कहा जाता है कि वो क्रिकेट के इतने ‘बड़े’ खिलाड़ी रहे हैं कि उन्होंने क्रिकेट के लिए पढ़ाई को छोड़ दिया। वो दूसरी बार उप-मुख्यमंत्री हैं। क्रिकेट से लगाव इतना कि पूरे राज्य में ढंग का कोई क्रिकेट स्टेडियम ही नहीं है। और जिस स्टेडियम में मुंबई-बिहार के बीच मैच खेला जा रहा है, उसकी हालत बेहद खराब है। कभी क्रिकेट विश्वकप के मैच की मेजबानी कर चुके इस मोइन-उल-हक स्टेडियम को खतरनाक बताया जा रहा है।

लोगों से कहा गया है कि वो मैच देखने आएँ, उनकी कोई मनाही नहीं है, लेकिन अपने रिस्क पर आएँ। क्योंकि मैदान में दर्शकों के बैठने की जगह अव्यवस्था है। गैलरी बंद है। स्कोरबोर्ड सालों से खराब है। हर तरफ बेतरतीब घास उगी हुई है। वरिष्ठ पत्रकार अनुरंजन झा ने एक्स पर इसकी दुर्दशा बयाँ की है और बिहार के रहनुमाओं से सवाल पूछा है। उन्होंने लिखा, “इस स्टेडियम में बिहार-मुंबई के बीच रणजी ट्रॉफ़ी का मैच खेला जा रहा है। ये हाल उस क्रिकेट स्टेडियम का है, जिस राज्य का नवीं फेल उप-मुख्यमंत्री इसलिए आगे नहीं पढ़ पाया क्योंकि वो ‘क्रिकेट’ खेलता था, इसी से समझिए क्रिकेट भी वो क्या ही खेला होगा। कीजिए बस #हूंबोहूंबो।”

अब इस स्टेडियम की दुर्दशा इंटरनेशनल लेवल तक पहुँचने लगी है, तो माना जा रहा है कि देर-सबेर बीसीसीआई इसकी हालत को सुधारने के लिए कोई कदम उठाएगी। हालाँकि, उसे बिहार में क्रिकेट की पॉलिटिक्स से निपटने में सफलता मिल जाए तब। क्योंकि जिस राज्य में रणजी मैच के लिए दो-दो क्रिकेट टीमों की घोषणा एक ही टीम से मुकाबले के लिए कर दिया जाए, उसकी हालत समझने में मुश्किल नहीं होनी चाहिए।

जुलाई 2023 में ही मिल गई थी मेजबानी, फिर भी ऐसी तैयारी?

ऐसा भी नहीं है कि इस स्टेडियम को संभालने का मौका प्रशासन के पास नहीं था। इस साल बिहार को 4 रणजी मैचों की मेजबानी मिली है। इसकी घोषणा जुलाई 2023 में ही कर दी गई थी। महीनों बाद भी अगर स्टेडियम का ये हाल है, तो समझ सकते हैं कि बिहार का क्रिकेट बोर्ड कितनी गंभीरता से काम कर रहा है।

पत्रकार अभिषेक आनंद लिखते हैं, “स्टेडियम को मेंटेन करने के लिए मेहनत, जज़्बा और पैसा लगता है। वो संसद में ‘ठाकुर का कुआँ’ और ‘अंदर के ठाकुर को मारो’ कह देने से ठीक नहीं होगा। वो राम मंदिर पर सवाल खड़े करने से भी ठीक नहीं होगा। उसके लिए काम करना पड़ेगा, जो ज़मीन पर करना है। उसके लिए ना तो ठाकुर को मारने की ज़रूरत है, ना मंदिर पर सवाल उठने की। ख़ैर बिहार का दुर्भाग्य है, बाक़ी जो है सो हइए है।”

प्रयाग नाम के एक्स यूजर बिहार पर ही चुटकी ले रहे हैं। वो मुंबई का सामना करने के लिए मैदान पर आई दो टीमों के मुद्दे पर चुटकी लेते हुए लिखते हैं, “बिहार कभी निराश नहीं करता।”

चर्चित पत्रकार प्रदीप भंडारी लिखते हैं, “यह बिहार में होने वाले रणजी ट्रॉफी मैच का मैदान है। नीतीश और लालू ने बिहार को पिछले 3-4 दशक में यही दिया है।”

अनुराग सिन्हा नाम के एक्स यूजर मोइन-उल-हक मैदान पर मौजूद हैं। उन्होंने जो वीडियो पोस्ट किया है, उसमें भारी भीड़ उमड़ती दिख रही है। अब व्यवस्थाओं का अंदाजा आप खुद ही लगा सकते हैं।

ध्रुव तिवारी बिहार की मौजूदा सरकार पर तंज कसते हुए लिखते हैं, “तेजस्वी यादव ने कहा था बिहार इन्फ्रास्ट्रक्चर के मामले में नंबर 1 है। ये पटना का क्रिकेट स्टेडियम है, आज रणजी ट्रॉफी का मैच हो रहा है। ऐसी घटिया जगह में बिहार और मुंबई का मैच हो रहा है। ये आज तक एक स्टेडियम बिहार को नहीं दे पाए और बाते विकास की करते हैं।”

इस बीच, बीसीए अधिकारी पर हमला हुआ है। बीसीए ने इस हमले का आरोप अपने निलंबित पूर्व सचिव अमित कुमार पर मढ़ा है। दरअसल, पूर्व सचिव ने मैदान पर उतरने के लिए अपनी ख़ुद की एक टीम नामित कर दी थी। मैच के पहले दिन सुबह इसी वजह से दो अलग-अलग गुटों के बीच अराजकता फैल गई और माना जा रहा है कि गुस्से में अमित कुमार ने कथित तौर पर एक अधिकारी पर हमला किया था। बताया जा रहा है कि अमित कुमार की टीम को मैदान पर एंट्री नहीं मिली, इस वजह से ये मारपीट हुई है।

बिहार ने बनाया एक और रिकॉर्ड

इस मैच में बिहार की आधिकारिक टीम में 12 साल के वैभव सूर्यवंशी का भी नाम है। बाएँ हाथ के बल्लेबाज सूर्यवंशी भारतीय अंडर-19 टीम के लिए भी दौड़ में थे, उन्होंने बिहार के लिए वीनू मांकड़ ट्रॉफी में पाँच पारियों में 93 रन बनाए थे। वैभव को अंडर-19 क्रिकेट विश्वकप के लिए भी चुना गया है, जो इस माह के आखिर में दक्षिण अफ्रीका में खेला जाएगा। वैभव की तस्वीरों को साझा करके लोग उनकी उम्र पर सवाल उठा रहे हैं। वो कई दशकों में सबसे कम उम्र के खिलाड़ी बने हैं, जिन्होंने फर्स्ट क्लास क्रिकेट में डेब्यू किया है।

बिहार की तरफ से महज 12 साल के बताए जा रहे खिलाड़ी वैभव सूर्यवंशी को डेब्यू का मौका मिला (फोटो साभार : ESPNCricinfo)

पहले दो दिन का खेल खत्म, बैकफुट पर बिहार की टीम

बिहार और मुंबई के बीच खेले गए मैच का टॉस बिहार ने जीता और मुंबई को पहले बल्लेबाजी के आमंत्रित किया। मुंबई ने पहले दिन के खेल की समाप्ति पर 9 विकेट के नुकसान पर 235 रन बनाए थे। पहले दिन सिर्फ 67 ओवरों का खेल हो पाया था। वहीं, दूसरे दिन मुंबई की पारी 251 रनों पर समाप्त हुई। इसके जवाब में बिहार की टीम ने महज 37 ओवरों में 6 विकेट गवाँ दिए हैं, और महज 89 रन बनाए हैं। दूसरे दिन बामुश्किल आधे दिन का खेल हो पाया। बिहार की टीम पहली पारी में अभी 162 रनों से पीछे है, जबकि उसके सिर्फ 4 विकेट बचे हैं।

चलिए अब जान लीजिए की बिहार के लिए कौन सी दो टीमों की घोषणा हुई और प्लेइंग 11 में कौन से खिलाड़ी हैं

बीसीए अध्यध द्वारा घोषित टीम: आशुतोष अमन (कप्तान), साकिबुल गनी (उपकप्तान), बिपिन सौरभ (विकेटकीपर), बाबुल कुमार, नवाज खान, विपुल कृष्णा, आकाश राज, बलजीत सिंह बिहारी, सरमन निगरोध, वीर प्रताप सिंह, हिमांशु सिंह, रवि शंकर, रिषभ राज, सचिन कुमार सिंह और वैभव सूर्यवंशी।

बीसीए के बर्खास्त सचिव अमित कुमार द्वारा घोषित टीम: इंद्रजीत कुमार (कप्तान), अपूर्व आनंद (उपकप्तान), विकाश रंजन (विकेटकीपर), शशीम राठौड़, शशि आनंद, लाखन राजा, यशस्वी ऋषभ, प्रतीक कुमार, विक्रांत सिंह, कमलेश कुमार सिंह, विश्वजीत गोपाला, प्रशांत श्रीवास्तव, दीपक राजा, हिमांशु हरि, शशि शेखर, वेदांत यादव, अभिनव कुमार, समर कुदारी, कुमार मृदुल, कुमार रजनीश।

बिहार की प्लेइंग 11 : आशुतोष अमन (कप्तान), बिपिन सौरभ (विकेटकीपर), वैभव सूर्यवंशी, बाबुल कुमार, सकीबुल गनी, आकाश राज, सचिन कुमार, हिमांशु सिंह, नवाज खान, वीर प्रताप सिंह और सरमन निगरोध।

लकड़ी की आँच वाली रोटी, बैलगाड़ी की सवारी, ग्रामीण परिवेश में ‘होम स्टे’: अवध की मेहमाननवाज़ी और खानपान का लुत्फ़ उठाएँगे पर्यटक, योगी सरकार की ‘रामोत्सव 2024’

देश-दुनिया के पर्यटकों को अवधी ग्रामीण परिवेश लुभा रहा है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की योजना पारंपरिक ठाठ का रुतबा बढ़ा रही है। हेरिटेज विलेज की थीम पर आधारित होम स्टे योजना के जरिए अवध की प्रसिद्ध मेहमाननवाजी, रहन-सहन व खानपान से रूबरू होने का मौका मिलने वाला है। ये योजना लकड़ी की आँच पर पकी रोटी और बैलगाड़ी की सवारी समेत ग्रामीण परिवेश और सुविधा संपन्न रिहायशी अवस्थापना का मिला-जुला ताना बाना है।

ये तो हमें पता ही है कि योगी सरकार का विजन अयोध्या को अध्यात्म के साथ पर्यटन के बड़े केंद्र के रूप में वैश्विक मानचित्र नई पहचान दे रहा है। शहरों की भीड़भाड़ से दूर पक्षी विहार के समीप प्राकृतिक नजारों की छाँव में सुकून खोजने वालों के लिए बनेगा अयोध्या अब फेवरिट डेस्टिनेशन अयोध्या बनने वाला है। ये कमाल इसी योजना के माध्यम से होगा। न सिर्फ अध्यात्म, संस्कृति और इतिहास के क्षेत्र में, बल्कि पर्यटन के क्षेत्र में भी अयोध्या देश-दुनिया के मानचित्र पर अंकित हो रहा है।

त्रेतायुग की अयोध्या कैसी थी, हमने नहीं देखी पर सीएम योगी आदित्यनाथ ने कलियुग में अयोध्या को अलग ही पहचान दिलाने का मार्ग प्रशस्त किया है। 500 वर्षों के उपरांत 22 जनवरी को श्रीराम अपने भव्य मंदिर में विराजमान होंगे तो यहाँ आने वाले पर्यटकों की संख्या में और वृद्धि होगी। इसे देखते हुए योगी सरकार के विजन के अनुरूप अयोध्या को अध्यात्म के साथ पर्यटन के बड़े केंद्र के तौर पर भी वैश्विक मानचित्र पर नई पहचान मिल रही है।

सीएम योगी ने अयोध्या को सुंदरतम नगरी बनाने की परिकल्पना को हकीकत की शक्ल देना शुरू कर दिया है। वहीं, इस नगरी को निहारने दुनियाभर से आने वाले पर्यटकों व श्रद्धालुओं की हर सुख-सुविधा को ध्यान में रखकर संसाधनों के सतत विकास की प्रक्रिया जारी है। योगी सरकार की हेरिटेज विलेज थीम्ड होम स्टे योजना के जरिए देश-दुनिया के मेहमान ग्रामीण परिवेश में अवधी ठाठ से रूबरू होंगे तो वहीं यहाँ की प्रसिद्ध मेहमाननवाज़ी, रहन-सहन व खानपान का भी लुत्फ उठाने का उन्हें अवसर मिलेगा।

यह योजना लकड़ी, कोयले की धीमी आँच पर सेंकी गई रोटी और बैलगाड़ी की सवारी समेत ग्रामीण परिवेश और सुविधा संपन्न रिहायशी अवस्थापना का मिला-जुला ताना बाना है, जो वर्तमान सुख-सुविधायुक्त जीवनशैली के संसाधनों के साथ ही सुकूनमय पारंपरिक जीवनशैली की अनुभूति का मार्ग भी प्रशस्त करती है। लकड़ी व कोयले की धीमी आँच पर सेंकी हुई रोटी का मिलेगा जायका अमूमन शहरी क्षेत्रों में रहने वाले बच्चे अपनी विरासत का दीदार नहीं कर पा रहे हैं, लेकिन ग्रामीण परिवेश से रूबरू होने का आकर्षण उनमें रहता है।

इसी बात को ध्यान में रखकर योगी सरकार द्वारा हेरिटेज विलेज थीम्ड होम स्टे योजना की परिकल्पना की गई है। यह योजना काफी कारगर हो रही है क्योंकि यहाँ लकड़ी व कोयले की धीमी आँच पर सेंकी गई रोटी मिलती है जो आधुनिक परिवेश में पले-बढ़े बच्चों के लिए किसी अचंभे से कम नहीं है। यह रोटी जहाँ उन्हें पौष्टिकता प्रदान करेगी, वहीं बैलगाड़ी की सवारी उनके कौतूहल को शांत करते हुए अतीत से वर्तमान का दीदार भी कराएगी।

यहाँ ग्रामीण पर्यटन को बढ़ावा देते हुए स्थानीय भोजन के साथ प्राकृतिक वातावरण को संरक्षित किया गया है। यहां मिट्टी के घरों के साथ गांव की संस्कृति से वर्तमान पीढ़ी को अवगत होने का मौका मिलेगा। वहीं खाने में यहां मॉडर्न इन डिमांड रेसिपीज के साथ स्थानीय जायकों का स्वाद भी परोसा जाएगा। दौलतपुर की ‘दौलत’ बनेगी अयोध्या को नई पहचान दिलाने का माध्यम उत्तर प्रदेश पर्यटन विभाग की इस योजना को अयोध्या विकास प्राधिकरण द्वारा विकसित किया जा रहा है।

अयोध्या से 12-15 किलोमीटर दूर सोहावल तहसील के कोला मोइया कपूरपुर के पास रायबरेली रोड स्थित दौलतपुर में समदा पक्षी विहार के पास इसे काफी तेज़ी से विकसित किया जा रहा है। यहाँ मिट्टी के घरों में गाँव की संस्कृति से रूबरू कराया जाएगा। ग्रामीण परिवेश के बीच मिट्टी की सोंधी खुशबू रूपी दौलत अयोध्या आने वाले पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित करेगी। पर्यटकों के हिसाब से यहाँ के घरों का पुनरुद्धार कराया जा रहा है।

यहाँ फिलहाल अभिनव श्रीवास्तव की प्रॉपर्टी को मड हाउस को प्रमोट कर प्राकृतिक चीजों को डिस्प्ले कर दिया है। यहाँ आम के पेड़ों की छाँव के बीच भोजन का भी आनंद अलग ही अनुभूति करा रहा है। यहाँ का एक दिन का किराया 9500 रुपए है। इसमें दो रूम, लॉन, खेलकूद के साथ ही बच्चों के लिए ट्यूबवेल में नहाने की भी व्यवस्था होगी। 18 अन्य संपत्तियों को एडीए ने किया चिह्नित अयोध्या विकास प्राधिकरण के सलाहकार राकेश सिंह ने बताया कि दौलतपुर में एक प्रॉपर्टी पर यह सुविधाएँ शुरू हो गई हैं।

अयोध्या आने वाले पर्यटकों की संख्या काफी तेज़ी से बढ़ी है। राम मंदिर, हनुमानगढ़ी समेत कई मंदिरों के दर्शन के साथ ही देश-दुनिया के आगंतुक अपने बच्चों को ग्रामीण परिवेश से अवगत कराने के लिए भी यहाँ लाना चाहते हैं। ऐसे में, इस सुविधा में विस्तार के लिए 18 अन्य संपत्तियों को भी चिह्नित किया गया है, जहाँ ग्रामीण पर्यटन को बढ़ावा देने वाले क्रियाकलापों को विकसित करने के लिए जिला प्रशासन द्वारा हर प्रकार का सहयोग प्रदान किया जा रहा है।

बाबरी ढाँचा गिराने के लिए पढ़ा मारुति स्त्रोत… वानर आया और ढहा गया दीवार: मिलें 96 वर्ष की कारसेवक शालिनी दबीर से, जिन्हें छूकर निकली थी पुलिस की गोली

रामलला के अयोध्या में विराजने का शुभ मुहूर्त 22 जनवरी, 2024 का निकला है। प्रभु श्री राम को उनके जन्म स्थान में उनकी सही जगह पर देखने के लिए अनगिनत लोगों ने संघर्ष किया। ऐसी ही 96 साल की कारसेवक हैं- शालिनी रामकृष्ण दबीर, जिन्हें अयोध्या से भेजे अक्षत सहित रामलला की प्राण-प्रतिष्ठा का न्योता मिला है।

रामलला अयोध्या में विराज सकें, इसके लिए जहाँ साधु संतों ने कई कठिन संकल्प लिए तो आम लोगों ने भी कारसेवक बन प्रभु का मंदिर बनवाने में कोई कसर नहीं छोड़ी। इसके लिए साल 1990 में लाल कृष्ण अडवाणी की अगुवाई में गुजरात के सोमनाथ से रामरथ यात्रा हो शुरू हुई थी जो महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश से होते हुए अयोध्या पहुँची थी।

यात्रा और कारसेवकों का ये सिलसिला 6 दिसंबर, 1992 के बाबरी ढाँचा के विध्वंस तक चलता रहा। इस दौरान कारसेवा का हिस्सा रहीं बुजुर्ग शालिनी बताती हैं कि साल 1990 में जब मुंबई से बाबरी के लिए निकली थीं तो हर जगह लोगों ने उनके साथ बहुत अच्छा बर्ताव किया, लेकिन सरकार और पुलिस ने उनको बहुत सताया।

वो आगे कहती हैं, “बहुत मारा, सबकुछ किया। लेकिन हम बिल्कुल डरे नहीं, हम बोले हम तो अयोध्या जाएँगे ही जाएँगे फिर चाहे आप कुछ भी करो। हमें इलाहबाद के जेल में रखा, लेकिन हम दीवार फाँद के बाहर निकल आए। हम दीवार पर ऊपर थे इसलिए पुलिस हमें नहीं पकड़ पाई थी।”

वो इस उम्र में भी उस वाकए को याद कर जोश से भर उठती हैं और कहतीं है, “मेरे साथ उस वक्त एक साथी शालीन भी थी, जो अब जीवित नहीं है। जेल फाँद के भागने के बाद वो लोग पैदल चलते गए और एकदम अयोध्या पहुँच गए। इस दौरान पुलिस ने बहुत सताया पीछे लगकर, रास्ते से जाने को नहीं देते थे।”

वो कहती हैं- “हम खेतों के बीच से इधर-उधर के रास्तों से गए, लेकिन अयोध्या तो गए।”

बताते चलें कि उम्रदराज शालिनी दबीर 30 अक्टूबर 1990 को अयोध्या पहुँची थीं और बाबरी ढाँचे पर भगवा झंडा फहराने के पल की साक्षी बनीं थीं। तब उत्तर प्रदेश पुलिस ने दादर के महिला कारसेवकों के एक समूह को गिरफ्तार कर उन्हें स्कूल में बंदी बना लिया था। इनमें से कुछ स्थानीय लोगों की मदद से वहाँ से निकल भाग निकले थे। इन कारसेवकों ने करीबन 50 किलोमीटर पैदल चल 31 अक्टूबर 1990 को कारसेवा में हिस्सा लिया था।

उस वक्त कारसेवक शालिनी दबीर ने भी लाठीचार्ज, आँसू गैस और गोलियों के वार झेले थे, लेकिन उनका हौसला नहीं टूटा। वो बताती हैं, उनके करीब से एक गोली उन्हें छूकर निकली थी, लेकिन हनुमान जी ने कारसेवकों को बचा लिया।

शालिनी के मुताबिक उस समय वो 63 साल की थीं, लेकिन राम लला से जो स्थान छीना गया था वो उन्हें बर्दाश्त नहीं था और इसीलिए वो भी अयोध्या के लिए निकल पड़ीं थीं। वो बताती हैं कि उनकी कारसेवा के दौरान गोलियाँ, लाठियाँ चलती रहीं, लेकिन कारसेवक मिलकर भजन गाते रहे थे। 

उनके अनुसार, वह दूसरी बार जब 1992 में कारसेवा में गईं तो बहुत अच्छे तरह से पहुँचीं। उस वक्त उन्हें कोई तकलीफ नहीं हुई। उन्होंने वो पल भी याद किया जब ढाँचे की दीवार नहीं गिर रही थी। उन्होंने कहा, “वो पल याद आता है जब वो एक दीवार टूटती ही नहीं थी। हम सुबह से मारुति स्त्रोत बोलते थे, लेकिन कुछ हो नहीं रहा था।”

शालिनी आगे बताती हैं, “क्या करें क्या न करें की स्थिति थी क्योंकि 5 बजे सूर्यास्त हो जाता तो हम कुछ नहीं कर पाते, फिर वहाँ पास के पेड़ से एक वानर आया वो दीवार पर बैठा। हम सब देखने लगे कि क्या बात है ये। वानर ने इधर-उधर सिर घुमाकर देखा और वहाँ से चला गया और फिर धड़ से दीवार गिरी।”

वो आगे कहती है, “इसके बाद दो घंटे तक धूल के गुबार से हमें वहाँ कुछ दिखाई नहीं दिया था। वहाँ के लोगों ने शाम 5 बजे हमसे कहा था आपको कुछ करने की जरूरत नहीं। हम आपको खाना देंगे। हमने उस दिन रात 10 बजे राम, लक्ष्मण, सीता और मारुति की पूजा आरती की थी।”

उन्होंने बताया कि उस दिन रात को पूरी अयोध्या में दिए जलाए गए थे। वो आगे बताती हैं, “एक मुस्लिम आदमी था उम्रदराज था। उसने मेरे मुँह में पेड़ा डाला था। मैं बोली क्यों, तो वो बोला आपका था, आपको मिला। इसमें हमको आनंद हैं। ऐसे भी लोग थे। अच्छे-बुरे दोनों तरह के थे।”

वो कहती हैं, “अयोध्या जाने से पहले ही हम मन बना के गए थे कि इससे ज्यादा क्या होगा हम उधर ही खत्म हो जाएँगे, मैं पूरा परिवार छोड़ के आई थी। तब भी हमें उस माहौल में भी कोई डर नहीं लगा।”

शालिनी खुशी जाहिर कर कहती हैं, “अयोध्या में राममंदिर बन रहा है मुझे इतना आनंद है कि आपको क्या बताऊँ। चलो मोदी के राज में सब अच्छा हो गया। राम जी की प्रतिष्ठा हो गई बहुत अच्छा है। हमको बहुत आनंद है। मंदिर जाऊँगीं, लेकिन पाँव चलते नहीं हैं, लेकिन बाद में जाऊँगी जरूर। ये (अपने बेटे विकास की तरफ इशारा करते हुए) ले जाएगा।”

उस वक्त के दौर को याद कर उनके बेटे विकास कहते हैं, “घर में तब भी हमारे डर का माहौल नहीं था। बस थोड़ी चिंता रहती थी कि क्या होगा। हम लोग राह देखते थे माँ की। सोचते थे जब आएगी तभी समझेगा। नहीं आएगी तो क्या करेंगे। ये तो होना ही है एक दिन।”

दिलीप गोदांबे भी कारसेवा में शालिनी दबीर के साथ रहे। वो कहते हैं कि जो वहाँ अस्पताल बनाने की बात करते हैं उन्हें उस मिट्टी का मूल्य नहीं पता। उन्हें सनातन की महानता का पता नहीं है।

अवैध बालिका गृह चला रहे थे मिशनरी, 26 लड़कियों का कोई अता-पता नहीं: NCPCR अध्यक्ष ने कराई FIR, कहा – हिन्दू बच्चियों को दे रहे थे ईसाइयत की ट्रेनिंग

भोपाल में क्रिश्चियन मिशनरी की ओर से अवैध तरीके से प्राइवेट गर्ल्स हॉस्टल का संचालन किया जा रहा है। यहाँ 68 बच्चियों का नामांकन हुआ है, लेकिन उनमें से 26 बच्चियाँ गायब है। इस हॉस्टल को चलाने वाले संचालक अनिल मैथ्यू को इन लड़कियों के बारे में पता तक नहीं है कि वो आखिर गईं तो गईं कहाँ? इस हॉस्टल में 6 से 18 साल की लड़कियाँ रहती हैं, जिसमें से अधिकांश हिंदू हैं।

ये हॉस्टल भोपाल के बाहरी इलाके में स्थित परवलिया थाना इलाके में चलाया जा रहा है। इस हॉस्टल में चल रही अनियमितताओं की सूचना जब राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग के अध्यक्ष प्रियंक कानूनगो को मिली, तो उन्होंने गुरुवार (04 जनवरी 2024) को पूरे स्टाफ के साथ छापेमारी की और मौके पर जाकर हॉस्टल को देखा। इस हॉस्टल में तमाम अनियमितताएँ मिली। उन्होंने खुद इसकी सूचना एक्स के माध्यम से सार्वजनिक की।

प्रियंक कानूनगो ने एक्स पर लिखा, “04 जनवरी 2024 को मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल के तारासेवनिया में राज्य बाल आयोग अध्यक्ष व सदस्यों के साथ संयुक्त रूप से एक मिशनरी द्वारा संचालित अवैध बाल गृह का निरीक्षण किया। यहाँ की संचालक एनजीओ हाल तक सरकारी एजेन्सी की तरह चाइल्ड लाइन पार्ट्नर के रूप में कार्यरत रही है, एवं इसने सरकारी प्रतिनिधि के रूप में कार्य करते हुए जो बच्चे सड़कों से रेस्क्यू किए, उनको बग़ैर सरकार को सूचना दिए बिना लाइसेंस चलाए जा रहे स्वयं के इस बाल गृह में गुपचुप ढंग से रख कर उनसे ईसाई धार्मिक प्रैक्टिस करवाई।”

उन्होंने आगे लिखा, “6 साल से 18 साल तक की 40 से ज़्यादा लड़कियों में अधिकांश हिंदू हैं। काफ़ी कठिनाई के बाद पुलिस ने एफआईआर दर्ज की है। दुर्भाग्य से मध्य प्रदेश के महिला बाल विकास विभाग के अधिकारी ऐसी ही एनजीओ से चाइल्ड हेल्पलाइन ठेके पर चलवाना चाहते हैं। मुख्य सचिव को पृथक से नोटिस जारी किया है।”

इस मामले में मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने भी हस्तक्षेप किया है। उन्होंने प्रशासन से तुरंत कठोर कदम उठाने का आग्रह किया। शिवराज सिंह चौहान ने लिखा, “भोपाल के परवलिया थाना क्षेत्र में बिना अनुमति संचालित बालगृह से 26 बालिकाओं के गायब होने का मामला मेरे संज्ञान में आया है। मामले की गंभीरता तथा संवेदनशीलता को देखते हुए सरकार से संज्ञान लेने एवं त्वरित कार्रवाई करने का आग्रह करता हूँ।”

प्रियंक कानूनगो ने कहा कि इस हॉस्टल में उन लड़कियों को रखा जाता था, तो सड़क और रेलवे स्टेशन से रेस्क्यू करके लाई गई थी। इनमें कई बच्चियाँ अनाथ थीं। उन्होंने बताया कि जो NGO सरकारी एजेन्सी चाइल्ड लाइन के रूप में बच्चों को रेस्क्यू कर रही थी, उसी ने बच्चों को गुपचुप ढंग से अवैध बाल गृह में रखा था। ऐसी संस्थाओं को चाइल्डलाइन का काम सौंपा जाना ख़तरनाक है। चुनाव के पहले कुछ अकर्मण्य अधिकारियों ने इन्हीं संस्थाओं के हाथ में बच्चों के संरक्षण हेतु चाइल्ड लाइन संचालित करने का काम देने का आदेश कैबिनेट से स्वीकृत करवा लिया था। प्रियंक कानूनगो ने शिवराज सिंह चौहान के एक्स हैंडल पर जवाब देते हुए लिखा, “मुझे विश्वास है कि आप उसको भी वापिस लेने के लिए सरकार को आग्रह करेंगे।”

बता दें कि इस मिशनरी हॉस्टल का उद्घाटन 2020 में हुआ था। ये हॉस्टल विदेशी दानदाताओं की मदद से बना था। हालाँकि ये पता नहीं चल सका है कि इस एनजीओ को विदेशी सहायदा मिलती है या नहीं, लेकिन हॉस्टल के उद्घाटन के समय लगी शिलापट तो साफ-साफ कह रही है कि इसके निर्माण में विदेशी मदद हासिल हुई थी।

मंजिल तक पहुँच गया ‘आदित्य L1’, ISRO का पहला सूर्य मिशन सफल: PM मोदी बोले – ये हमारे वैज्ञानिकों के अथक समर्पण का परिणाम

सूर्य के अध्ययन के लिए ISRO (भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान परिषद) द्वारा लॉन्च किया गया पहला मिशन ‘आदित्य L1’ ने अंतरिक्ष में अपने अंतिम लक्ष्य तक का सफर तय कर लिया है। शनिवार (6 जनवरी, 2024) को ‘आदित्य L1’ सूर्य के लैंग्रेज पॉइंट 1 तक पहुँच गया। L1 पॉइंट ‘हेलो ऑर्बिट’ में स्थित है और ये भी पृथ्वी द्वारा सूर्य की लगातार की जा रही परिक्रमा के कारण चलायमान रहता है। इसरो द्वारा बेजा गया ‘आदित्य L1’ इसी लैंगरेज पॉइंट 1 के इर्दगिर्द चक्कर काटेगा।

यहीं से वो सूर्य का अध्ययन करेगा और महत्वपूर्ण डेटा धरती पर भेजेगा, जिसका ISRO के वैज्ञानिक अध्ययन करेंगे। L1 पॉइंट धरती से 15 लाख किलोमीटर की दूरी पर स्थित है और पृथ्वी व सूर्य के बीच की दूरी का 1% है। ‘आदित्य L1’ को सूर्य के कोरोना और (सूर्य के वातावरण का सबसे बाहरी हिस्सा जो सूर्य के सतह के प्रकाश के कारण छिपा रहता है) और इसकी अत्यधिक गर्मी के अध्ययन के लिए भेजा गया है। सौर ऊर्जा में सूर्य द्वारा बड़ी मात्रा में ऊर्जा छोड़ी जाती है।

इसरो ने अपने बयान में बताया है कि कैसे सूर्य पर जो विस्फोट होते रहते हैं अगर वो पृथ्वी की तरफ निर्देशित हो जाएँ तो हमारे वातावरण में बड़ी गड़बड़ी पैदा कर सकते हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी ISRO की ताज़ा उपलब्धि की प्रशंसा की है और कहा कि भारत ने एक और मील के पत्थर को हासिल किया है, सूर्य के अध्ययन के लिए भारत का पहला मिशन ‘आदित्य L1’ अपने गंतव्य तक पहुँच गया है। पीएम मोदी ने कहा कि ये सफलता जटिल अंतरिक्ष अभियानों को सफल बनाने वाले हमारे वैज्ञानिकों के अथक समर्पण का परिणाम है।

प्रधानमंत्री ने इसे असाधारण उपलब्धि बताते हुए कहा कि पूरे राष्ट्र के साथ वो वैज्ञानिकों की प्रशंसा में खुद को शामिल करते हैं। साथ ही उन्होंने स्पष्ट किया कि मानवता की भलाई के लिए भारत विज्ञान की नई सीमाओं को पार करना जारी रखेगा। ‘आदित्य L1’ स्पेसक्राफ्ट को PSLV-C57 लॉन्च व्हीकल का इस्तेमाल कर के 2 सितंबर, 2023 को श्रीहरिकोटा से लॉन्च किया गया था। इसी साल भारत चन्द्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर उतरने वाला पहला देश भी बना, जब ‘चंद्रयान 3’ ने ये सफलता प्राप्त की। उस बिंदु को ‘शिवशक्ति पॉइंट’ नाम दिया गया।