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नीतीश की वजह से INDI गठबंधन, उनकी अनदेखी हुई तो सारे दल छोड़ जाएँगे: JDU सांसद ने खोला मोर्चा, कहा- सीरियस नहीं है कॉन्ग्रेस

जनता दल (युनाइटेड) के सांसद सुनील सिंह पिंटू ने कॉन्ग्रेस पार्टी और राहुल गाँधी को निशाने पर लिया है। उन्होंने कहा है कि JDU प्रमुख एवं बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की मेहनत एवं कोशिशों से इंडी गठबंधन (I.N.D.I. Alliance) बना है। उन्होंने कहा कि नीतीश कुमार प्रधानमंत्री की रेस में नहीं हैं और ना ही वो किसी से नाराज हैं।

सुनील सिंह ने कहा कि 19 दिसंबर 2023 को हुई इंडी गठबंधन की बैठक में सिर्फ चाय और बिस्किट ही परोसी गई। पहले बैठक में चाय-समोसे दिए जाते थे और अब यह चाय बिस्किट तक सिमट गई। उन्होंने कॉन्ग्रेस पर तंज कसते हुए कहा कि कॉन्ग्रेस ने खुद ही कहा है कि अभी उसके पास फंड की कमी है। जदयू सांसद ने कहा कि चंदे का पैसा अभी कॉन्ग्रेस पार्टी के पास नहीं आया है!

कॉन्ग्रेस के अडियल रवैये की वजह से बैठक फ्लॉप

मीडिया से बातचीत में सुनील सिंह ने कहा, “हमने (जेडीयू) इस गठबंधन के सभी दलों को एक प्लेटफॉर्म पर ला दिया। ये सारा प्रयास नीतीश कुमार का है। नीतीश कुमार ने कहा था कि आज वाली बैठक (19 दिसंबर) हो रही है, उस दिन नेता का चुनाव या फिर कम से कम शीट सीट शेयरिंग तो होगी। दोनों पर कुछ नहीं हो पाया।”

उन्होंने आगे कहा, “मामला टाँय-टाँय फिस्स होकर रह गया। इसके कारण हमारे नेता प्रेस कॉन्फ्रेंस में ही नहीं गए कि भाई… जब कुछ हुआ ही नहीं तो प्रेस को और जनता को क्या बोला जाए? कॉन्ग्रेस के अड़ियल रवैये के कारण ये बैठक पूरी तरह टाँय-टाँय फिस्स होकर रह गई।”

ये पूछने पर कि क्या नीतीश कुमार को तवज्जो कम दी जा रही है, इस पर जदयू सांसद ने कहा, “देखिए, नेता को तवज्जो दे या न दे, उन्हीं की बदौलत तो सारे लोग एक जगह जमा हुए हैं। जिस दिन कॉन्ग्रेस हमारे नेता को तवज्जो देना छोड़ देगी, पता चलेगा कि पूरे इंडी गठबंधन के घटक दल अपने आप बिखर जाएँगे।”

आजतक की रिपोर्ट के मुताबिक, सुनील कुमार पिंटू ने कहा, “गठबंधन को लेकर कॉन्ग्रेस का अड़ियल रवैया है। कॉन्ग्रेस सीरियस नहीं है। ना कॉन्ग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और ना उनके पीएम वेटिंग राहुल गाँधी इसको लेकर सीरियस हैं।”

बिना किसी सीरियस मुद्दे के चाय-बिस्कुट तक सिमटी बैठक

एएनआई से बातचीत में उन्होंने बुधवार (20 दिसंबर) को कहा, “कल (19 दिसंबर 2023) की जो बैठक थी, सारे विपक्ष के नेता आए थे, मुख्यमंत्री गण आए थे। ये उम्मीद थी कि सीटों का बँटवारा हो जाएगा, परंतु उस पर कोई चर्चा नहीं हो पाई। कल की बैठक रह गई चाय-बिस्कुट तक सिमट कर। चूँकि कॉन्ग्रेस के पास फंड की कमी है और डोनेशन अभी आने में देर है, इसलिए बिना किसी सीरियस मुद्दे पर चर्चा के बैठक चाय बिस्कुट तक सिमट कर रह गई।”

बता दें कि इंडी गठबंधन ने दिल्ली में मंगलवार (19 दिसंबर 2023) को चौथी बैठक की थी। इस बैठक में न तो सीट शेयरिंग पर बात हो पाई और न ही नेता का नाम तय हो पाया। ये जरूर हुआ कि ममता बनर्जी की तृणमूल कॉन्ग्रेस (TMC) ने मल्लिकार्जुन खड़गे का नाम गठबंधन के नेता और प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार के तौर पर उछाल दिया।

इसके अलावा, तृणमूल कॉन्ग्रेस ने प्रियंका गाँधी वाड्रा को उत्तर प्रदेश के वाराणसी से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ चुनाव लड़ने की सलाह भी दे डाली। इस पूरी बैठक में सभी नेता एक-दूसरे दल और नेता का पत्ता काटने में लगे रहे। बैठक में किसी भी महत्वपूर्ण मुद्दे पर चर्चा नहीं हो पाई।

CEC-EC की नियुक्ति वाला बिल लोकसभा से भी पास, जानिए अब कैसे चुने जाएँगे चुनाव आयुक्त

लोकसभा ने 21 दिसम्बर, 2023 को देश के चुनाव आयोग में आयुक्तों की नियुक्ति के प्रावधानों को नियमित करने वाले कानून को पास कर दिया है। यह बिल पहले ही राज्यसभा से पास हो चुका है। इसे राज्यसभा ने इसी सत्र में 12 दिसम्बर, 2023 को पास किया था। यह बिल अब राष्ट्रपति की मंजूरी के लिए भेजा जाएगा। बिल को राष्ट्रपति की मंजूरी मिलने के बाद यह कानून बन जाएगा। अब इसी के तहत भारत के चुनाव आयोग में दो चुनाव आयुक्तों और एक प्रमुख चुनाव आयुक्त की नियुक्ति की जाएगी। भारत के चुनाव आयोग में तीन आयुक्त होते हैं।

भारत में आजादी के बाद पहली बार चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति को लेकर स्पष्ट क़ानून बना है। इससे पहले तक इनकी नियुक्ति के विषय में कोई स्पष्ट नियम कायदे नहीं थे। इसी कारण से मोदी सरकार को यह कानून संसद में लाना पड़ा है। हालाँकि, पहले ही संसद की सुरक्षा पर हंगामा करने के कारण अधिकाँश विपक्ष इस चर्चा से नदारद रहा।

क्या कहता है कानून?

इस कानून के तहत अब चुनाव आयोग में आयुक्तों की नियुक्ति देश के प्रधानमंत्री, लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष और प्रधानमंत्री द्वारा एक नामित केन्द्रीय मंत्री की सदस्यता वाली समिति के सिफारिश आधार पर राष्ट्रपति के माध्यम से होगी। इन समिति को चुनाव आयोग के आयुक्तों के लिए उपयुक्त नाम केन्द्रीय कानून मंत्री की अध्यक्षता वाली एक समिति देगी। चुनाव आयोग में आयुक्त बनने वाले आयुक्त भारत सरकार में सचिव स्तर के अधिकारी होंगे। इस कानून में अन्य कई महत्वपूर्ण नियम बनाए गए हैं।

अब तक कैसे होती थी चुनाव आयोग में नियुक्ति?

इससे पहले देश के संविधान में चुनाव आयोग और इसमें आयुक्तों की संख्या को लेकर तो बात की गई थी लेकिन उनकी नियुक्ति के लिए नियम कायदे नहीं बनाए गए थे। अभी तक चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति पूरी तरह से केंद्र सरकार के हाथ में थी। केंद्र सरकार ही इनके लिए नामों की सिफारिश राष्ट्रपति को भेजती थी। इस प्रक्रिया में यह कमी थी कि इसमें विपक्ष का कोई रोल नहीं था। अब लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष को चुनाव आयुक्त के नाम की सिफारिश करने वाली समिति में हिस्सा दिया गया है।

सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग को लेकर क्या कहा था?

इस सम्बन्ध में मार्च 2023 में सुप्रीम कोर्ट ने एक निर्णय दिया था। सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि जब तक देश की संसद चुनाव आयुक्तों को नियुक्त करने के लिए कोई स्पष्ट क़ानून नहीं लेकर आती तब तक प्रधानमंत्री, लोकसभा के नेता प्रतिपक्ष और देश के मुख्य न्यायाधीश की सदस्यता वाली एक समिति करेगी। हालाँकि, यह एक अस्थायी प्रोविजन था और संसद के नया कानून बनाए जाने तक ही यह तरीका चलता। अब कानून आ जाने से चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति में न्यायपालिका का कोई रोल नहीं रह जाएगा।

विदेशी मीडिया ने मुस्लिमों पर पूछा सवाल, PM मोदी का जवाब- अल्पसंख्यकों के लिए भारत जन्नत, उनके साथ कोई भेदभाव नहीं

ब्रिटिश समाचार संस्था फाइनेंशियल टाइम्स (FT) के साथ एक साक्षात्कार में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भारत की एकता और अलग-अलग अल्पसंख्यक समूहों के प्रति किसी भी प्रकार के पक्षपात ना होने और osM देश में सहिष्णुता की बात की है। जब प्रधानमंत्री मोदी से भारत में मुस्लिमों के भविष्य के विषय में पूछा गया तो उन्होंने पारसी समुदाय की सफलताएँ गिनाईं। उन्होंने पारसियों को भारत में धार्मिक अल्पसंख्यकों में भी अल्पसंख्यक बताया।

प्रधानमंत्री ने 20 दिसम्बर 2023 को फाइनेंशियल टाइम्स से कहा, “विश्व में सब जगह अत्याचार झेलने के बाद उन लोगों ने भारत में शरण पाई और शांति से रहते हुए समृद्ध हुए हैं। यह दिखाता है कि भारतीय समाज किसी भी धार्मिक अल्पसंख्यक समूह के प्रति पक्षपात की भावना नहीं रखता है।” हालाँकि, फाइनेंशियल टाइम्स का कहना है कि पीएम के जवाब में भारत के 20 करोड़ मुस्लिमों की बात नहीं है।

दरअसल, पीएम मोदी द्वारा अल्पसंख्यकों में भी अल्पसंख्यक पारसी समुदाय के बारे में बात करना दर्शाता है कि भारतीय किसी भी धार्मिक समूह के साथ नफरत या भेदभाव नहीं करते। ईरान से आए पारसी हों या इजरायल से आए यहूदी, भारत दुनिया भर में प्रताड़ित किए गए समुदायों के लिए सुरक्षित शरणस्थली रही है। यह हिंदू समाज के ‘वसुधैव कुटुम्बकम’ की परंपरा और लोगों को खुद में समाहित करने के गुणों को दर्शाता है।

रही बात मुस्लिमों की तो यह समुदाय देश में हिंदुओं के बाद दूसरा सबसे बड़ा समुदाय है। साल 2011 की जनगणना के अनुसार, देश में मुस्लिमों की कुल आबादी 14.2 प्रतिशत है। साल 2001 से 2011 के बीच देश में मुस्लिमों की जनसंख्या 24% बढ़ी है, जबकि इसी दौरान हिन्दुओं कि जनसंख्या मात्र 16% बढ़ी। ऐसे में मुस्लिमों के भविष्य को लेकर प्रश्न पूछने वालों को यह आँकड़े देखने चाहिए।

फाइनेंशियल टाइम्स ने पीएम मोदी से उनकी सरकार द्वारा उठने वाले विरोध के स्वरों को दबाने के दावों को लेकर भी प्रश्न पूछा। इस पर प्रधानमंत्री मोदी हँसे और कहा कि उनके आलोचक अपने अधिकारों का उपयोग मीडिया के तमाम माध्यमों के जरिए करते हैं। उन्होंने ऐसे आरोपों के जवाब में तथ्यों को रखने की स्वतंत्रता की बात भी की।

पीएम ने कहा, “देश में पूरा एक इकोसिस्टम है, जो देश में उपलब्ध आजादी का उपयोग सम्पादकीय, सोशल मीडिया, टीवी चैनल, वीडियो और ट्वीट्स के माध्यम से हम पर रोज इस तरह के नए आरोप लगाने के लिए करता है। उनका यह अधिकार है, लेकिन बाकी लोगों को भी इसका जवाब तथ्यों के साथ देने का अधिकार है।”

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस दौरान भारतीय लोगों की आकांक्षाओं के बारे में भी बात की। उन्होंने कहा, “उनको (देशवासियों को) मालूम है कि देश नई उड़ान भरने को तैयार है।” प्रधानमंत्री मोदी ने यह भी कहा कि एक दशक में भारतीयों की आशाएँ भी बदल गई हैं। इस दौरान पीएम ने बोलने की आजादी की आड़ में विदेशी ताकतों द्वारा भारत में कट्टरपंथ को बढ़ावा देने पर भी चिंता जताई।

पीएम मोदी ने कहा, “भारत विदेश में बैठे कट्टरपंथी समूहों को लेकर चिंतित है। यह तत्व, बोलने की आजादी के नाम पर घृणा फैलाते हैं और हिंसा को बढ़ावा देते हैं।” पीएम की यह टिप्पणी आतंकी गुरवतपन्त सिंह पन्नू को मारने की कोशिशों में भारत के कनेक्शन के अमेरिकी दावों को लेकर आई है। प्रधानमंत्री ने कहा कि वह कनाडा और अमेरिका द्वारा लगाए गए आरोपों दिए गए सबूतों पर गौर करेंगे।

UP में भाई को दी किडनी, शौहर ने सऊदी अरब से फोन पर दे दिया तीन तलाक, कहा- बदले में ₹40 लाख माँगो, इनकार करने पर भड़का

उत्तर प्रदेश की तरन्नुम को उसके शौहर मोहम्मद रशीद ने फोन पर सऊदी अरब से तीन तलाक दे दिया। वजह- तरन्नुम ने अपने बीमार भाई को अपनी एक किडनी दे दी। इसकी जानकारी होने पर रशीद ने बदले में 40 लाख रुपए माँगने को कहा। इनकार किए जाने पर तीन तलाक दे दिया।

उत्तर प्रदेश के गोंडा के बैरियाही की रहने वाली तरन्नुम ने इसको लेकर पुलिस से शिकायत की है। पुलिस ने केस दर्ज कर महिला को कानूनी कार्रवाई का आश्वासन दिया है। पुलिस अधीक्षक राधेश्याम राय के मुताबिक मामले में जरूरी कार्रवाई की जा रही है।

रिपोर्टों के अनुसार धानेपुर थाना क्षेत्र के बौरियाही गाँव की रहने वाली तरन्नुम का निकाह 20 साल पहले पड़ोसी गाँव जैतापुर के रहने वाले मोहम्मद रशीद से हुआ था। रशीद सऊदी अरब में काम करता है। तरन्नुम को बच्चा नहीं होने पर वह दूसरा निकाह भी कर चुका है।

तरन्नुम के बड़े भाई मोहम्मद शाकिर की किडनी में खराबी थी। बीते दिनों शाकिर की तबियत बहुत बिगड़ गई। तरन्नुम ने भाई की जान बचाने के लिए उसे किडनी देने के बार में शौहर को बताया। शौहर की रजामंदी और सभी तरह की कानूनी तथा मेडिकल प्रक्रिया पूरी कर उसने पाँच महीने पहले अपने भाई को एक किडनी दे दी।

अस्पताल से डिस्चार्ज होकर जब तरन्नुम ससुराल लौटी तो शौहर ने उसे किडनी के बदले भाई से 40 लाख रुपए माँगने को कहा। इनकार किए जाने पर वह नाराज हो गया। उसने व्हाट्सऐप पर ही तरन्नुम को 30 अगस्त 2023 को ट्रिपल तलाक दे दिया।

इसके बाद भी तरन्नुम ससुराल में ही रही। लेकिन कुछ दिन बाद उसे ससुराल से भगा दिया गया। इसके बाद वह अपने मायके आई और धानेपुर थाने में केस दर्ज करवाया। गौरतलब है कि 2019 में केंद्र सरकार ने कानून बनाकर तीन तलाक को गैर कानूनी घोषित किया था। इसके अनुसार किसी भी तरीके से मुस्लिम व्यक्ति अपनी बीवी एक बार में तीन तलाक नहीं दे सकता है। ऐसे मामलों में बिना वारंट गिरफ्तारी का अधिकार पुलिस को है।

यूपी ATS ने टेरर फंडिंग केस में दिल्ली से मोहम्मद अब्दुल को दबोचा: 500 बैंक अकाउंट की होगी पड़ताल, घुसपैठियों के लिए आई विदेशी फंडिंग

उत्तर प्रदेश एंटी टेररिस्ट स्क्वाड (यूपी एटीएस) को मंगलवार (20 दिसंबर,2023) को टेरर फंडिंग केस में एक शख्स को धरने में कामयाबी हाथ लगी है। ATS ने इसे नई दिल्ली के निज़ामुद्दीन रेलवे स्टेशन से गिरफ्तार किया। इसकी पहचान 37 साल के मोहम्मद अब्दुल अव्वल के रूप में हुई है।

अवैध घुसपैठ और मानव तस्करी करने वाले सिंडिकेट का सदस्य अव्वल लखनऊ के नदवतुल उलमा का एक पूर्व छात्र था। हालाँकि मूल रूप से ये असम के गोलपारा के रहने वाला है। साल 2018 से ये दिल्ली को अपना ठिकाना बनाया हुए था। ATS के मुताबिक, बीते पाँच साल से मोहम्मद अब्दुल दिल्ली में जामिया नगर ओखला, श्रम विहार में रह रहा है।

मदरसे की तालीम से 12 वीं करके अब्दुल किराए की दुकान में गैरकानूनी तरीके से बैंक खाते खोलने और मनी ट्राँसफर का काम कर रहा था। इसके लिए उसने फीनो बैंक की मर्चेंट आईडी ले रखी थी।

यूपी ATS को मिला था टेरर फंडिंग पर इनपुट

यूपी एटीएस के एक अधिकारी के 19 दिसंबर, 2023 को दिए बयान के मुताबिक यूपी एटीएस एनसीआर और दिल्ली में रजिस्टर्ड 500 से अधिक ‘संदिग्ध’ बैंक खातों की जाँच कर रही है। इन खातों में दिल्ली की एनजीओ का पैसा पहुँचता है। ये एनजीओ समाज की भलाई के कामों के लिए दान के तौर पर विदेशी योगदान विनियमन अधिनियम ( एफसीआरए) के तहत विदेशी फंडिंग पा रहा है।

यूपी एटीएस को बीते दिनों इनपुट मिला था कि कुछ लोगों ने एक सिंडिकेट तैयार करवाया है। इसके जरिए वो अवैध घुसपैठियों की पहचान छिपाते थे और फर्जी दस्तावेजों के आधार पर उन्हें भारत में ठहराते थे। इस तरह से ऐसे लोगों की आर्थिक मदद कर वो राष्ट्र विरोधी गतिविधियों को बढ़ावा दे रहे थे। इस इनपुट के आधार पर एटीएस की टीम ने 5 आरोपितों को पहले ही गिरफ्तार कर लिया था।

इन आरोपितों में तीन बांग्लादेशी अदिलुर रहमान असरफी, तानिया मंडल, इब्राहिम खान और दो पश्चिम बंगाल के अबु हुरैरा गाजी, शेख नजीबुल हक थे। इसी कड़ी में पकड़ा गया अब्दुल अव्वल छठवाँ आरोपित है।

आरोपित अब्दुल अव्वल दिल्ली के ऊपर बताए गए एनजीओ के बैंक खातों से पैसा लेता था। वो इस पैसे को देश में अवैध रूप रहने वाले बांग्लादेश और म्यांमार के नागरिकों के नाम से एक निजी बैंक में खोले गए खातों में पहुँचाने का काम करता था।

यूपी एटीएस को इस बात पर संदेह है कि इन फंड्स का इस्तेमाल राष्ट्र-विरोधी गतिविधियों और आतंकी फंडिंग के लिए किया गया था, क्योंकि पिछले चार साल में इसी तरह के खातों में लगभग 20 करोड़ रुपए ट्राँसफर किए गए थे।

10 संदिग्ध आतंकियों के खिलाफ FIR है दर्ज

टेरर फंडिंग मामले में यूपी एटीएस ने 11 अक्टूबर 2023 को 10 संदिग्ध आतंकवादियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की थी। इन आरोपितों पर भारत में मस्जिद बनाने के लिए विदेशों से अवैध रूप से धन माँगने, रोहिंग्या और बांग्लादेशी नागरिकों को भारत में बसाने और राष्ट्र विरोधी गतिविधियों को अंजाम देने के आरोप में केस दर्ज किया गया था।

इसमें आदिल उर रहमान अशरफी, अबू हुरैरा गाजी, शेख नाजीबुल हक, मोहम्मद राशिद, कफिलुद्दीन, अजीम, अबू सालेह, अब्दुल गफ्फार, अब्दुल्ला गाजी और अब- का नाम शामिल हैं। अब्दुल अव्वल को गिरफ्तार करने के बाद 6 आतंकी गिरफ्तार कर लिए गए हैं। इनमें से अधिकतर साजिशकर्ताओं का रिश्ता देवबंद के दारुल उलूम से हैं।

कैसे होती थी टेरर फंडिग

विदेशों से देश के कई अन्य हिस्सों में लाया गया पैसा हवाला के जरिए पश्चिम बंगाल के 24 परगना के रहने वाले नजीबुल शेख तक पहुँचाया जाता था। शेख की सहारनपुर में दारुल उलूम देवबंद के पास टोपी और इत्र की दुकान है।

एटीएस को आरोपित मोहम्मद अब्दुल से पूछताछ के दौरान पता चला कि दिल्ली में उसकी मुलाकात 2020 में कोविड महामारी के दौरान अब्दुल गफ्फार से हुई थी। उस दौरान बैंक खाते खोलने के नियमों में ढील दी गई थी। ये गफ्फार और उसके साथी ही थे जिन्होंने आरोपित को बांग्लादेशी नागरिकों और रोहिंग्याओं के नाम पर एक निजी बैंक फीनो में खाते खोलने के लिए राजी किया।

ATS के मुताबिक मुलाकात के दौरान गफ्फार व उसके साथियों ने मोहम्मद अब्दुल से कहा कि अगर वो ऐसा करता है तो वो अपने NGO ‘सन शाइन हेल्थ एंड सोशल वेलफेयर ट्रस्ट’ के एफसीआरए ( FCRA) के खाते में आने वाले विदेशी धन को इन खातों में ट्रांसफर कर देगा।

उसने आरोपित मोहम्मद अब्दुल को लालच दिया था कि बाद में वो सारा नगदी निकाल कर इसे अपने फायदे के लिए इस्तेमाल करने के साथ ही अवैध घुसपैठियों की मदद के लिए कर सकते हैं।

आरोपित मोहम्मद अब्दुल को लालच आया और उनसे फीनो बैंक में खाते खुलवा डाले। फिर गफ्फार के एनजीओ में यूरोपीय देशों से आई रकम को इन बैंक खातों में जमा किया गया। इसके बाद आरोपित मोहम्मद अब्दुल ने इस सारी रकम को गफ्फार के साथ मिलीभगत कर खाते से वापस निकाल बराबर बाँटा। इस नगद पैसे को सहारनपुर के आरोपित को भी पहुँचाया गया। इस आरोपित की पहले ही गिरफ्तारी हो चुकी है।

आरोपित के मुताबिक, गफ्फार ने अपने नेटवर्क के लोगों के खोले गए कई अन्य बैंक खातों के साथ भी इसी तरह के काम को अंजाम दिया। हालाँकि गफ्फार को अभी गिरफ्तार नहीं किया गया है, उसे पकड़ने की कोशिशें जारी हैं।

एटीएस के एक अधिकारी के मुताबिक, इस तरह से पैसा लाने के तौर-तरीकों से साफ पता चलता है कि एफसीआरए नियमों को तोड़कर साँठगाँठ कर देश में लाए गए इस पैसे का इस्तेमाल राष्ट्र-विरोधी गतिविधियों में किया जा रहा था। एटीएस के अधिकारी इन सभी बैंक खातों के विवरण को सावधानीपूर्वक स्कैन कर रहे हैं और आगे की जाँच चल रही है।

भ्रष्टाचार में तमिलनाडु के मंत्री को 3 साल की सजा, पत्नी पर भी ₹50 लाख जुर्माना: DMK के इसी नेता ने कहा था हिंदी वाले पानीपूरी बेचते हैं

तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन की अगुवाई वाली द्रमुक मुनेत्र कषगम (DMK) सरकार में उच्च शिक्षा मंत्री के. पोनमुडी को मद्रास हाईकोर्ट ने आय से अधिक सम्पत्ति के मामले में 3 वर्ष की सजा सुनाई है। इसके साथ ही उन पर ₹50 लाख का जुर्माना भी लगाया गया है। उनकी पत्नी पर भी ₹50 लाख का कोर्ट ने जुर्माना लगाया है। मद्रास हाईकोर्ट ने पोनमुडी को 19 दिसंबर को दोषी ठहराया था और 21 दिसम्बर 2023 को सजा सुनाई। अब उनका मंत्री पद और विधानसभा सदस्यता, दोनों जा सकती है।

कौन हैं के पोनमुडी?

72 वर्षीय के पोनमुडी तमिलनाडु के कल्लाकुरुची जिले में तिरुक्कोल्यालुर सीट से विधायक हैं। वह DMK के प्रभावी नेताओं में से एक हैं। पोनमुडी साल 2006 से 2011 तक की करूणानिधि सरकार में भी उच्च शिक्षा मंत्री थे। इससे पहले वे राज्य में ट्रांसपोर्ट और स्वास्थ्य जैसे महत्वपूर्ण मंत्रालय सँभाल चुके हैं। वह 2016 से एमके स्टालिन सरकार में उच्च शिक्षा मंत्री हैं।

पोनमुडी का परिवार सूर्या कॉलेज समूह का मालिक है। इसके अंतर्गत वह इंजीनियरिंग, विज्ञान और पॉलिटेक्निक के कॉलेज चलाते हैं। उन्होंने अपनी राजनीतिक पारी साल 1989 में शुरू की थी। इसके बाद वे 6 बार विधायक बने। पोनमुडी के एक बेटे गौतम सिगामणि सांसद हैं, जबकि दूसरे बेटे तमिलनाडु क्रिकेट एसोसिएशन के अध्यक्ष हैं।

द्रमुक नेता पनमुडी ने मई 2022 में हिंदी भाषियों पर विवादित बयान दिया था। उन्होंने कहा था कि जो लोग हिंदी बोलते हैं, वे तमिलनाडु एवं अन्य राज्यों में पानीपूरी बेचते हैं। अंग्रेजी को अंतरराष्ट्रीय भाषा बताते हुए पोनमुडी ने कहा था, “बहुत से लोग कहते हैं कि अगर आप हिंदी पढ़ते हैं तो आपको नौकरी मिलेगी। क्या ऐसा है? आप कोयंबटूर या कहीं जाकर देख सकते हैं कि जो पानीपुरी बेच रहा है वे सभी हिंदी बोलते हैं?”

क्या है के पोनमुडी पर आरोप?

पोनमुडी पर आरोप है कि साल 2006 से 2010 के दौरान उनकी और उनकी पत्नी की सम्पत्ति में ₹1.7 करोड़ की वृद्धि हुई। यह आय उनके बताए गए स्रोतों से मेल नहीं खाती है। तमिलनाडु के विजिलेंस और भ्रष्टाचार निरोधी विभाग (DVAC) ने बताया कि उनकी और उनकी पत्नी की सम्पत्ति 2006 की शुरुआत में ₹2.71 करोड़ थी, जो 2011 में बढ़कर ₹6.27 करोड़ हो गई।

इस बढ़ी हुई आय में से ₹1.7 करोड़ का कोई हिसाब नहीं मिला। इसी आधार पर उनके खिलाफ मामला चलाया गया। सबसे पहले उनके खिलाफ विल्लुपुरम जिला अदालत में मामला दर्ज किया गया, लेकिन 2016 में जिला अदालत ने यह कहकर उन्हें और उनकी पत्नी को छोड़ दिया कि उनके खिलाफ पेश किए गए सबूत पूरे नहीं हैं और उनकी पत्नी को कृषि जैसे स्रोतों से आय हो रही थी।

हाईकोर्ट ने क्या कहा?

इसके बाद यह मामला मद्रास हाईकोर्ट में गई। मद्रास हाईकोर्ट में इस मामले की सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति जी जयचंद्रन ने निचली अदालत के निर्णय को रद्द कर दिया। कोर्ट ने कहा कि निचली अदालत ने पोनमुडी और उनकी पत्नी पी. विशालाक्षी को अलग-अलग मानकर भूल की है।

हाईकोर्ट ने कहा कि निचली अदालत ने अपने निर्णय में कहा था कि पोनमुडी की पत्नी उनके द्वारा अज्ञात स्रोतों से कमाई गई धनराशि को समायोजित नहीं कर रही थीं। हाईकोर्ट ने कहा कि निचली अदालत ने इसके पीछे उनकी कृषि आय को आधार बनाया है, लेकिन यह साफ़ है कि जिस आय का स्रोत नहीं पता है वह कृषि से नहीं आई।

हाईकोर्ट ने इस मामले में आज (21 दिसम्बर 2023) को सुनवाई करते हुए 72 वर्षीय के. पोनमुडी के खिलाफ सबूतों को सही पाया और दोषी ठहराते हुए 3 वर्षों की सजा सुना दी। उनके और उनकी पत्नी पर अलग-अलग ₹50 लाख का जुर्माना भी लगाया गया। जुर्माना ना भरने की दशा में 6 महीने की और जेल होगी।

सजा मुक़र्रर होने के बाद उनकी विधानसभा सदस्यता और मंत्री पद अपने आप चला जाएगा। जनप्रतिनिधित्व कानून के तहत यदि किसी भी विधायक/सांसद को 2 वर्षों से अधिक की सजा होती है तो उसका पद चला जाता है। हालाँकि, इस मामले में वे हाईकोर्ट के निर्णय के विरुद्ध सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटा सकते हैं। इसके लिए उन्हें 30 दिन का समय दिया गया है।

CBI ने कोर्ट के सामने उजागर किया रिया चक्रवर्ती का ‘झूठ’, नेटिजन्स बोले- गिरफ्तार करो: खुद को ‘ब्रांड एंबेसडर’ बताकर जाना चाहती थी विदेश

बॉलीवुड अभिनेता सुशांत सिंह की मौत मामले को 3 साल से भी ज्यादा हो गए हैं, लेकिन अभी तक ये सामने नहीं आ सका है कि आखिर उस दिन हुआ क्या था। शुरू में रिया चक्रवर्ती समेत कई लोगों को बुला बुलाकर पूछताछ हुई, फिर बाद में उन्हें भी जमानत मिल गई। हालाँकि अब एक बार फिर इस मामले को सोशल मीडिया पर उठाया गया है और रिया चक्रवर्ती की गिरफ्तारी की माँग हो रही है। ट्विटर पर #ArrestRheaChakraborty ट्रेंड कर रहा है। सीबीआई जाँच पर सवाल उठाए जा रहे हैं। इस दौरान पता चला है कि केस की आरोपित रिया चक्रवर्ती ने बॉम्बे हाई कोर्ट में विदेश जाने की माँग करते हुए सीबीआई के लुकआउट नोटिस को चुनौती दी थी। जिसका केंद्रीय जाँच ब्यूरो ने बॉम्बे हाईकोर्ट में विरोध किया।

केंद्रीय जाँच ब्यूरो ने बॉम्बे हाईकोर्ट में जस्टिस ए एस गडकरी समक्ष रिया की याचिका का विरोध करते हुए कहा कि जिस कंपनी (Drools Pets Pvt. Ltd.) की ओर से रिया ने बाहर जाने के काम को जरूरी बताया है, वो अब उसकी ब्रांड एंबेसडर है ही नहीं। उसकी एंबेस्डर तो कियारा आडवाणी हैं। इसके अलावा जाँच एजेंसी ने कोर्ट से इस मामले की पूरी जाँच और पुष्टि के लिए समय माँगा है।

बता दें कि रिया चक्रवर्ती ने कोर्ट के लुकआउट नोटिस को कुछ दिन के लिए सस्पेंड करने की माँग करते हुए कहा था कि उन्हें काम के सिलसिले में 27 नवंबर से 2 जनवरी तक दुबई की यात्रा करनी है। इसी पर सीबीआई ने विरोध किया और कोर्ट से कहा कि जब तक वो जाँच न कर लें कि रिया का उस कंपनी से अब क्या संबंध है और वो क्यों बाहर जाना चाहती हैं, तब तक उन्हें विदेश न जाने दिया जाए।

सीबीआई की दलील सुन रिया चक्रवर्ती द्वारा डाली गई याचिका पर कोर्ट ने गौर नहीं किया और सुनवाई की अगली तारीख 26 दिसंबर दे दी। कोर्ट ने कहा कि वह कार्यवाही में जल्दबाजी नहीं करेंगे। उन्होंने सीबीआई को समय दिया है ताकि वो हर तथ्य की जाँच कर सकें।

गौरतलब है कि सुशांत सिंह राजपूत केस की जाँच के दौरान रिया चक्रवर्ती और उनके भाई शौविक के खिलाफ 2020 में लुकआउट नोटिस जारी हुआ था। इस साल की शुरुआत में शोविक के खिलाफ जारी सर्कुलर अस्थायी रूप से निलंबित किया गया तो उन्हें विदेश यात्रा की अनुमति मिल गई। अब इसी सर्कुलर को हटवाने में रिया चक्रवर्ती जुटी हुई हैं।

हाजिरी पंजाब के विपश्यना शिविर में, जवाब ED को: दिल्ली के CM ने शराब घोटाले में समन को ‘अवैध’ करार दिया, खुद को बताया ‘ईमानदार’

दिल्ली के मुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी (AAP) के मुखिया अरविंद केजरीवाल को 21 दिसंबर 2023 को प्रवर्तन निदेशालय (ED) के सामने पेश होना था। लेकिन उससे पहले ही वे विपश्यना के लिए पंजाब के होशियारपुर चले गए। उन्होंने ईडी को भेजे जवाब में समन को ‘अवैध’ और खुद को ‘ईमानदार’ बताया है। मामला दिल्ली के शराब घोटाले से जुड़ा है।

20 दिसंबर को ईडी को भेजे जवाब में केजरीवाल ने कहा है, “यह समन भी एजेंसी द्वारा जारी किए गए पिछले समन की तरह ही गैर कानूनी है। ईडी को यह समन वापस लेना चाहिए, क्योंकि यह राजनीति से प्रेरित है। मैंने अपना जीवन ईमानदारी और पारदर्शिता के साथ जिया है। मेरे पास छिपाने के लिए कुछ भी नहीं है।”

आप मुखिया ने कहा है कि विपश्यना ध्यान के लिए उनकी यात्रा के बारे में सारी दुनिया और मीडिया को पता है। इसके बावजूद 18 दिसंबर को समन भेजकर 21 दिसंबर को पूछताछ के लिए पेश होने को कहा गया। इससे उनका यह भरोसा और मजबूत हुआ है कि यह प्रोपेगेंडा से प्रेरित है। इसका मकसद लोकसभा चुनाव से पहले सनसनीखेज खबरें फैलाना है। उन्होंने समन को अस्पष्ट बताते हुए कहा कि यह समझ ही नहीं आ रहा है कि उन्हें किस हैसियत से बुलाया गया है, गवाह की हैसियत से या फिर संदिग्ध की हैसियत से।

जागरण की रिपोर्ट के मुताबिक अरविंद केजरीवाल चार्टर्ड विमान में सवार होकर 20 दिसंबर को जालंधर के आदमपुर एयरपोर्ट पहुँचे। यहाँ उनकी अगवानी पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने की। फिर दोनों नेता मेडिटेशन सेंटर के पास स्थित चौहाल के लिए हेलीकॉप्टर पकड़कर निकले। दोपहर के समय केजरीवाल विपश्यना सेंटर पहुँच गए, वहीं भगवंत मान चौहाल में ही रात भर रुके।

अरविंद केजरीवाल हर साल 10 दिनों के लिए विपश्यना के लिए जाते रहे हैं। वो कभी बेंगलुरु, तो कभी जयपुर में विपश्यना करते रहे हैं। इस बार उन्होंने पंजाब के होशियारपुर जिले के आनंदपुर स्थित विपश्यना सेंटर को इसके लिए चुना है। पहले केजरीवाल 19 दिसंबर को ही विपश्यना के लिए जाने वाले थे। लेकिन INDI गठबंधन की बैठक की वजह से वो एक दिन बाद बुधवार (20 दिसंबर 2023) को रवाना हुए।

गौरतलब है कि दिल्ली शराब नीति से घोटाले से जुड़े केस में मनीष सिसोदिया और संजय सिंह जैसे आप नेता पहले से जेल में हैं। इस मामले में कई अन्य आरोपित भी जेल में हैं। अब केजरीवाल से ईडी पूछताछ करना चाहती है। इससे पहले ईडी ने 30 अक्टूबर 2023 को दिल्ली के सीएम को समन जारी कर 2 नवंबर को पूछताछ के लिए बुलाया था। लेकिन तब विधानसभा चुनावों में व्यस्तता का हवाला देकर वे पूछताछ के लिए हाजिर नहीं हुए थे।

घर में हुआ बुरा हाल तो खालिस्तानी आतंकी पर बदले जस्टिन ट्रूडो के सुर, कनाडाई PM ने कहा- निज्जर की हत्या पर भारत से पंगा नहीं चाहता

खालिस्तानी आतंकी हरदीप सिंह निज्जर की हत्या पर भारत से रार ठानने वाले कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो के सुर अब बदल गए हैं। उनका कहना है कि वे निज्जर की हत्या को लेकर भारत के साथ किसी झगड़े की स्थिति में नहीं पड़ना चाहते हैं। साथ ही व्यापार समझौते पर काम करने की इच्छा जताई है।

आतंकी हरदीप सिंह निज्जर की 18 जून 2023 को कनाडा में एक सिख सामुदायिक केंद्र के पास गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। सितंबर 2023 में जस्टिन ट्रूडो ने कहा कि इस हत्या के पीछे भारतीय खुफिया एजेंटों का हाथ हो सकता है। कनाडा की सरकार ने एक शीर्ष भारतीय राजनयिक को निष्कासित भी कर दिया था। इसके बाद दोनों देशों के संबंधों में बेहद तल्खी आ गई थी। भारत ने बिना सबूत आरोप मढ़ने पर ट्रूडो को लताड़ भी लगाई थी।

अब ट्रूडो ने कहा है कि वे इस मुद्दे पर भारत के साथ लड़ाई की स्थिति में नहीं पड़ना चाहते। वे व्यापार समझौते पर काम करना चाहते हैं। उन्होंने इंडो-पैसिफिक रणनीति को आगे बढ़ाने में भारत के साथ सहयोग की इच्छा जाहिर की है।

कनाडाई ब्रॉडकास्टिंग कॉर्पोरेशन को दिए इंटरव्यू में ट्रूडो ने कहा कि कनाडा के लिए लोगों के अधिकारों, उनकी सुरक्षा और कानून के शासन के लिए खड़ा होना जरूरी है। हम यही करने जा रहे हैं।

खालिस्तानी आतंकी गुरपतवंत सिंह पन्नू की हत्या की साजिशों को लेकर अमेरिकी दावे का जिक्र करते हुए कनाडा के प्रधानमंत्री ने कहा, “मुझे लगता है कि एक समझ की शुरुआत हुई है। वे (भारत) अपना रास्ता नहीं बदल सकते हैं। सहयोग करने के लिए अब ज्यादा रास्ते खुले हैं, जो पहले कम थे।”

हाल ही में भारत के विदेश मंत्री जयशंकर ने कहा था, “कनाडा और अमेरिका के मामले अलग-अलग हैं। अमेरिका ने हमें सुबूत मुहैया कराए हैं। भारत एक ऐसा देश है, जहाँ हम बहुत जिम्मेदार हैं। हम जो करते हैं उसमें विवेक रखते हैं।”

गौरतलब है कि ट्रूडो के सुर में यह बदलाव उस सर्वे के बाद देखा गया है, जिसमें उनके कनाडा में उनकी राजनीतिक साखा काफी गिरने की बात सामने आई थी। इस सर्वे के मुताबिक दो-तिहाई से अधिक कनाडाई लोग चाहते हैं कि 2024 चुनाव से पहले जस्टिन ट्रूडो को प्रधानमंत्री पद की कुर्सी छोड़ देनी चाहिए। अगर वो नहीं छोड़ते हैं, तो फिर वो दूसरा विकल्प खोंजेंगे।

ग्लोबल न्यूज के इस सर्वे के अनुसार 69 प्रतिशत कनाडाई नागरिकों का मानना ​​है कि प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो को इस्तीफा दे देना चाहिए। अधिकांश कनाडियाई चाहते हैं कि लिबरल पार्टी को अपने सहयोगियों को बदलना चाहिए।

बता दें कि कनाडा की राजनीति में बहुदलीय व्यवस्था है। इस समय कनाडा में लिबरल पार्टी सत्ता में है। लिबरल पार्टी के नेता के तौर पर जस्टिन ट्रूडो साल 2015 से देश की कमान संभाल रहे हैं। उनकी अगुवाई में पार्टी दो चुनाव पार्टी जीत चुकी है।

राहुल गाँधी पर ममता बनर्जी ने फोड़ा उपराष्ट्रपति के अपमान का ठीकरा, कहा- वे वीडियो नहीं बनाते तो कुछ नहीं होता

तृणमूल कॉन्ग्रेस के सांसद कल्याण बनर्जी द्वारा उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ की नक़ल उतार कर मजाक उड़ाने के मामले में तृणमूल सुप्रीमो और बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने पूरी जिम्मेदारी कॉन्ग्रेस नेता और सांसद राहुल गाँधी पर डाल दी है। वहीं राहुल ने अपना बचाव किया है।

ममता बनर्जी का कहना है कि राहुल अगर कल्याण बनर्जी की अभद्र हरकतों को रिकॉर्ड नहीं करते तो इतना ज्यादा यह मुद्दा नहीं उठता। इस मुद्दे के बारे में किसी को पता ही नहीं चलता। उन्होंने अपनी पार्टी के सांसद कल्याण बनर्जी का भी बचाव किया है।

दिल्ली में ममता बनर्जी ने कहा, “हम सबका सम्मान करते हैं। यह (कल्याण बनर्जी का कृत्य) किसी की बेईज्जती करने के बारे में नहीं था। इसे राजनीतिक तौर पर हलके फुल्के तरीके से लिया जाना चाहिए। आपको इस बारे में कभी पता नहीं चलता अगर राहुल जी इसे रिकॉर्ड नहीं करते।”

गौरतलब है कि 19 दिसम्बर, 2023 को राज्यसभा की कार्रवाई में व्यवधान डाल रहे 49 विपक्षी सांसदों को निलम्बित किया गया था। इसके बाद यह सांसद, नई संसद के मकर द्वार पर धरना देने लगे थे। इसी दौरान लोकसभा में TMC के सांसद कल्याण बनर्जी ने उपराष्ट्रपति और राज्यसभा के सभापति जगदीप धनखड़ का अपमान किया।

कल्याण बनर्जी ने उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ की नक़ल उतारी। इस दौरान वहाँ मौजूद अन्य सांसद हँसते रहे। राहुल गाँधी इस मौके पर मौजूद थे, उन्होंने अपने फ़ोन इस घटना का वीडियो रिकॉर्ड कर लिया। इसके कुछ ही देर बाद यह कल्याण की इन हरकतों का वीडियो वायरल हो गया।

हालाँकि राहुल गाँधी ने इस मामले में अपना बचाव किया है। राहुल गाँधी का कहना है, “मैंने कल्याण बनर्जी का वीडियो शूट जरूर किया था लेकिन वह अभी मेरे फ़ोन में ही है और मैंने उसे साझा नहीं किया।”

ममता बनर्जी ने यह बयान 20 दिसम्बर, 2023 को संसद में दिया जहाँ वह प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से मिलने आईं थी। इससे एक दिन पहले वह INDI गठबंधन की बैठक में भी शामिल हुईं। वह जब प्रधानमंत्री से मिलें पहुँची तो अपने साथ उपराष्ट्रपति का अपमान करने वाले सांसद कल्याण बनर्जी को नहीं ले गईं जबकि उनका नाम इस सूची में था।

कल्याण बनर्जी ने इस मामले पर अभी तक माफ़ी नहीं माँगी है। वहीं इस मामले पर जाट समुदाय ख़ासा आक्रोशित है और उसने कल्याण बनर्जी से माफ़ी माँगने को कहा है। जाट समुदाय के एक नेता ने कहा कि यदि कल्याण बनर्जी माफ़ी नहीं माँगते तो तृणमूल सांसदों के घरों का घेराव होगा।

उपराष्ट्रपति के इस अपमान पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने दुख जताया था और कल्याण बनर्जी की इस हरकत पर रोष प्रकट किया था। उपराष्ट्रपति धनखड़ ने इसे उनकी किसान पृष्ठभूमि और जाट समुदाय का अपमान बताया था।